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Erotica नेहा और उसका शैतान दिमाग

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नेहा ये देखकर खुश हो गई। उसका भाई अपना ही वीर्य चाट रहा था। नेहा समर की मालेकिन बन गई थी। उसको एक्सट्रीम पावर का एहसास हुआ। उसे एहसास हुआ की उसका शरीर एक ऐसा हथियार है, जिससे वो किसी पर भी काबू कर सकती है। उसका शैतान दिमाग जाग रहा था।

समर ने जब पहली बार अपना वीर्य चखा तो उसे इतना पता नहीं लगा। पहले तो उसे बस यही सोचकर मजा आया की वो अपनी सेक्सी दीदी की उंगलियां चूस रहा है। धीरे-धीरे उसे अपने मुँह में वीर्य का स्वाद आने लगा। और उसे एहसास हुआ की उसका स्वाद इतना बुरा भी नहीं है जितना उसने सोचा था। वो मजे से, चूस-चूस के नेहा की उंगलियां खाने लगा।

...

नेहा को भी बहुत आनंद आ रहा था। उसका भाई जोर से, कामुकता से उसकी उंगलियां चूस रहा था- “उम्म्म्म हाँ समर चूस मेरी उंगलियां, खा अपना वीर्य। उम्म्म्म..." नेहा कामुकता से बोल रही थी।

समर भी आँखें बंद करे, पूरे ध्यान से नेहा की एक-एक उंगली चूस रहा था। उसका मुँह अपने खुद के वीर्य से भरा हुआ था, और उसे बहुत अच्छा लग रहा था। जब उसने अपनी बहन की उंगलियों से एक-एक करके अच्छे से चाट दी, तो नेहा ने फिर थोड़ा सा वीर्य उठाया अपनी शार्टस से और फिर अपना हाथ समर के मुँह में डाल दिया। समर एक भूखे जानवर की तरह फिर से चाटने लगा। दोनों भाई बहन मजे ले रहे थे। नेहा ने अपने दूसरे हाथ से अपना चूचे दबाना शुरू कर दिया।

ये देखकर तो समर और भी पागल हो गया, और भी ज्यादा गति से अपनी दीदी का हाथ चाटने लगा। उसकी जीभ नेहा के पूरे हाथ पर नाच रही थी।

कम से कम 10 मिनट अपना हाथ चटवाने के बाद नेहा ने समर को रुकने को कहा- “तो भाई, कैसा लगा अपना वीर्य?" नेहा ने पूछा।

समर- “जितना सोचा था उससे काफी अच्छा दीदी..” समर ने बोला। वो अब भी अपने मुँह को से अपनी बहन की स्किन और अपने वीर्य को चख पा रहा था।

नेहा- “मैं खुश हूँ... तूने एक अच्छे बच्चे की तरह मेरी बात मानी..” नेहा ने अपनी टाँगें और ज्यादा फैलाते हुए कहा- “देख समर, तेरे वीर्य ने मेरी पूरी शार्टस खराब कर दी...” उसने अपनी चूत की तरफ इशारा किया, जहाँ वीर्य लगा हुआ था- “तूने भी इतना वीर्य खाया, मैंने भी। फिर भी ये साफ नहीं हुई। अब साफ तो करना पड़ेगा

ना.."
 
समर तो बस अपनी दीदी की टांगों के बीच में देख रहा था। उसकी शार्टस समर के क्रीम और उसकी चूत के पानी से एकदम सनी हुई थी।

नेहा- "तू साफ करेगा ना मेरी शार्टस को समर?" नेहा ने अपने शरारती अंदाज में कहा।

समर ने हाँ में सिर हिलाया।

नेहा- “तो चल, चाटना शुरू कर मेरी शार्टस को..." नेहा बोली।

क्या? मैंने सही सुना... दीदी मुझे अपनी चूत के ऊपर शार्टस को चाटने को कह रही है? समर का लण्ड फिर से झड़ने वाला हो गया। उसके शरीर में जो आग लग रही थी, वो सेक्स की आग सारी हदें तोड़ चुकी थी। हवस और हैरानी का मेल हो रहा था।

नेहा की चूत के होंठ उत्तेजना में फूल गये थे। उसका क्लिटोरिस एक छोटे से लण्ड के बराबर बड़ा हो गया था। उसकी फुद्दी एक नल की तरह रस लीक कर रही थी। निपल पत्थर की तरह सख्त हो गये थे। क्या मैं आज कुछ ज्यादा आगे तो नहीं बढ़ रही? क्या मुझे ये करना चाहिये? हम वैसे ही आज बहुत कुछ कर चुके हैं। और अब मैं समर को आलमोस्ट अपनी चूत चाटने को कह रही हूँ। अगर ये हुआ, तो मेरी चूत और उसके मुँह के बीच में बस दो पतले कपड़ों का फासला होगा। नेहा के मन में ये सवाल उठ रहे थे। मन: जिंदा थी।

मगर उसके दिमाग में तो एक सेक्स की भूखी लड़की ही बच गई थी। जो अपने सेक्सी हश्न के जादू से अपने भाई पर काबू करना चाहती थी, और साथ-साथ अपनी खुद की प्यास भी बुझाना चाहती थी। आखीरकार दिमाग जीत ही गया।

नेहा- “हाँ... समर, तूने सही सुना...” नेहा ने अपनी टाँगें और ज्यादा खोलते हुए कहा- “झुका अपना सर, और चाटना शुरू कर मेरी शार्टस को, तूने ही गंदी करी है। तू ही साफ कर..."

समर का सपना सच हो गया। वो कुछ ही पलों में अपनी बहन की चूत की जगह पर अपना मुँह लगाने वाला था। उसने देखा अपनी बहन की तरफ, एक संदर, हद से ज्यादा सुंदर लड़की, जिसके प्यारे से मुंह से वीर्य लटक रहा है, अपनी टाँगें पूरी खोले बैठी है। लंबी गोरी नंगी टाँगें जिनमें एक भी बाल नहीं है, फैली हुई है। बीच में एक छोटी सी पिंक शार्टस है, जो बस उसकी चूत और गाण्ड छुपा रही है। चूत की जगह पर सब गीला हो रखा है, वीर्य लगा हुआ है, और यही मुझे साफ करना है।

अपनी उछलती, दौड़ती धड़कनों को काबू करते हए वो नीचे झुका। उसका लण्ड लाल हो गया था। दर्द से, हवस की दर्द से। उसने अपने मुँह से अपनी जीभ बाहर निकाली और अपना मुँह एकदम नेहा की शार्टस के करीब रोक दिया। भाई बहन ने एक आखिरी बार अपनी नजरें मिलाई। दोनों की आँखों में बराबर नशा, हवस थी। दोनों की सांसें बहत तेजी से चल रही थी। समर ने अपनी आँखें बंद की, और अपनी जीभ को सीधा नेहा की चूत की जगह पर रख दिया।

नेहा- “ऊओह्ह... आआहह...” नेहा के मुँह से एक पैनी, लस्टी चीख निकली। अपनी चूत पे अपने भाई का मुँह पाकर उसके शरीर में 1200 वोल्ट का करेंट दौड़ गया- “एम्म्म... अयाया.."

समर ने अपनी जीभ को नेहा की शार्टस पर फेरना शुरू किया। क्या फीलिंग थी वो समर के लिए। नेहा की चूत का रस उसके मुँह में आ रहा था। इतनी स्वादिष्ट चीज उसने आज तक नहीं चखी थी। एकदम गीली शार्टस पे जब उसने चाटना शुरू किया, तो उसे अपनी बहन की चूत की शेप का एहसास अपने मुँह में होने लगा। उसको नेहा की चूत की खुशबू आने लगी। उसकी फूली हुई फुद्दी दिखने लगी। ये उसकी लाइफ का सबसे हसीन पल था। अपनी बहन की टांगों के बीच मुँह घुसाए एक भाई, इस रिश्ते को नया नाम दे रहा था।

नेहा- “एम्म्म... आआआ... ऊवू.." नेहा धीरे से चिल्ला रही थी।

हालांकी समर उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसकी चूत चाट रहा था, मगर उसके साथ इतना किसी ने नहीं किया था। उसको ऐसा लग रहा था जैसे उसका पूरा शरीर जल रहा हो। मगर उसे इस जलन में मजा आ रहा था। अत्यंत मजा।

नेहा- “हाँ... समर बस ऐसे... बस ऐसे ही अच्छे से चाट... एम्म्म... अयाया...” उसने अपने मम्मे दबाना शुरू किया, आँखें बंद करे, अपने सिर को पीछे झुकाए वो इस सेक्सी पल का मजा ले रही थी, कहा- “साफ कर मेरी शार्टस समर, साफ कर अच्छे से..." नेहा को अपना आर्गेज्म आता हुआ महसूस हो रहा था।
 
समर की भी यही हालत थी। वो अपनी बहन की शार्टस को ऐसे चाट रहा था मानो उनमें छुपी उसकी चूत को नाप रहा हो। ऊपर से नीचे, लेफ्ट से राइट। वो एक भी कोना छोड़ना नहीं चाहता था। अपने वीर्य में मिला नेहा की चूत का रस उसे बहुत ज्यादा टेस्टी लग रहा था। शार्टस में कैद उसकी चूत की वो पूरी महसूस ले रहा था। उसका लण्ड फिर से झड़ने के लिए तैयार हो गया था।

नेहा- “उम्म्म्म

... यू अरे डूइंग ग्रेट समर। कीप लिकिंग माई शार्टस। आह्ह..” नेहा तो एकदम नशे में खो गई थी।

अब समर ने मुँह खोलकर उसकी चूत पे स्मूच करना शुरू कर दिया। जैसा कुछ पल पहले वो उसके मुँह पे कर रहा था, अब उसी तरह वो उसकी चूत चूम रहा था। नेहा की चूत और ज्यादा मस्ती में आ गई।

नेहा- “ओहह... हाँ आआ... एम्म्म... हाँ..." वो बेचैनों की तरह बेड पे तड़पने लगी। उसने अपनी गाण्ड को हवा में उठाया, और अपनी चूत को समर के मुँह पे धकेलने लगी- “ले। अच्छे से चाट, अच्छे से चूम, रुक मत... रुक मत... आआआ..” वो बोली।

समर कुत्ते के जैसे उसे चाट और चूम रहा था। मुँह खोल-खोलकर उसकी चूत को चूम रहा था। वो मगन हो गया था। अपनी दीदी की चूत की खुशबू में, की तभी उसे नेहा की चूत धड़कती हुई प्रतीत हुई। उसे वो सख्त सी। लगने लगी। नेहा का पूरा शरीर टाइट हो गया। और फिर...

“आआआरर्ररगगघह.." नेहा के मुँह से संतुष्टि, हवस और रिलीफ से भरी एक गहरी चीख निकली। उसका पूरा शरीर काँपने लग गया। नेहा को उत्तेजना और मजे की हद का एहसास हुआ। उसकी चूत फड़क-फड़क के रस बहा रही थी। उसने अपनी जिंदगी का सबसे हसीन आगज्म पा लिया था।

पूरे एक मिनट तक नेहा ऐसी ही तड़पती रही और फिर धड़ाम से बेड पे गिरकर लेट गई। उसकी सांसें बहुत तेजी से चल रही थी। होंठों पे एक संतुष्ट औरत की मुश्कान थी। ऐसा नशा उसे कभी नहीं चढ़ा था।

समर ने ऐसा दृश्य कई बार पोर्न में देख था। जब एक लड़की अपना आगज्म पा लेती है। मगर अपनी दीदी को उस नशे के सागर में डूबते हुए देखकर उसकी आँखें फट गई। क्या सीन था... वो चूत से उठा और जोर-जोर से अपना लण्ड हिलाने लगा। वो भी झड़ने ही वाला था, और- “आहह... दीदी.” उसके मुँह से अपने आप आवाज निकल गई।

नेहा को अपने नशे से होश आया। उसने देखा की समर पागलों की तरह लण्ड हिला रहा है। वो समझ गई की वो झड़ने वाला है। एक पल नेहा उठकर समर के लण्ड के सामने बैठ गई, और कहा- “एक बूंद भी मेरे मुँह से बाहर नहीं गिरनी चाहिये..." नेहा बोली और अपना मुँह खोलकर बैठ गई।

बस यही काफी था। एक के बाद समर के लण्ड से वीर्य की धारें निकालकर नेहा के मुँह में गिरने लगी। नेहा अपने भाई के लण्ड से निकलते इस तूफान को देखकर हैरान हो गई। कम से कम 7-8 शाट्स सीधे नेहा के मुँह में जाकर गिरे, और उसने हँसते-हँसते सब कुबूल कर लिया।

जब आखीरकार समर के टट्टे खाली हो गए तो उसने अपनी आँखें खोली, तो उसने एक बहुत प्यारा सीन देखा। उसकी दीदी मुँह खोले उसके लण्ड के सामने बैठी थी और उसका मुँह सफेद वीर्य से भरा हुआ था। नेहा की आँखों में सेक्स का समंदर दिख रहा था। उसने उठते हुए समर के लण्ड को सहलाया। अब वो दोनों आमने सामने खड़े थे। एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। दोनों की आँखों में कुछ-कुछ सेम एमोशन्स थे। गिल्ट, डर, उत्तेजना, खुशी, डाउट और हवस।

मगर सबसे ज्यादा एक चीज दिख रही थी- एक दूजे के लिए प्यार।

बिना कुछ कह उन्होंने एक दूसरे को जकड़ा और एक पल में एक दूसरे को चूमने लगे। ये प्यार भरा चुंबन था। नेहा के मुँह में समर का वीर्य और समर के मुँह में नेहा की चूत का रस, आपस में मिल रहे थे, और आने वाले समय में कहीं अजीब और कल्पना से परे घटनाओं की ओर इशारा कर रहे थे।

***** *****
 
मगर सबसे ज्यादा एक चीज दिख रही थी- एक दूजे के लिए प्यार।

बिना कुछ कह उन्होंने एक दूसरे को जकड़ा और एक पल में एक दूसरे को चूमने लगे। ये प्यार भरा चुंबन था। नेहा के मुँह में समर का वीर्य और समर के मुँह में नेहा की चूत का रस, आपस में मिल रहे थे, और आने वाले समय में कहीं अजीब और कल्पना से परे घटनाओं की ओर इशारा कर रहे थे।

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मम्मी पापा भी तो सेक्स करते हैं रात के एक बज गये थे। नेहा अपने कमरे में लेटी हुई थी। दिन में हुई घटनाओ को याद कर रही थी। इतना कुछ कर लिया समर और उसने आज। वो उत्साहित भी थी और परेशान भी। जब वो दोनों दिन में एक दूसरे को चम रहे थे. समर के मह में अपना रस और अपने मुँह में समर के लण्ड का रस लिए. उनका आदान प्रदान कर रहे थे। जब दोनों होश में आए तो उनको एहसास हुआ की वो क्या कर रहे हैं? नेहा ने फिर उसको अपने कमरे में भेज दिया था। दिन से रात तक, सब नार्मल रहा।

मगर अब नेहा उन पलों के बारे में सोच रही थी। अपने भाई के लण्ड के बारे में। उसने समर को चूमा था, अपनी ढकी हुई चूत पे मुँह लगवाया था। वो अभी भी अपनी चूत मसल रही थी। उसकी गुलाबी साफ चूत साफ्ट हो रखी थी। नेहा को डर था की कहीं वो खुद पर से कंट्रोल खो ना दे। हाँ... उसपे अब सेक्स का भूत सवार हो गया था। मगर क्या खुद के भाई से सेक्स करना ठीक होगा? अब तो समर को इतने वादे भी कर लिए है। और मेरा भी मन कर रहा है आगे बढ़ने का। नेहा कसमकश में थी, और उसकी फुद्दी भी।

समर भी आज नींद से दूर था। क्या-क्या किया आज उसने, इतना कुछ। उसकी लाइफ का सबसे सेक्सी दिन था ये। ये सिर्फ उसकी दीदी का उपकार था। ऐसी दीदी सबको मिले। उसका दिल खशी से उछल रहा था। इंटरनेट पे आज पहली बार वो इन्सेस्ट कहानियां पढ़ रहा था। भाई बहन की चुदाई की कहानियां। क्या हम भी ऐसा कुछ करेंगे? उसका लण्ड तो यही चाहता था, प्री-कम निकल रहा था। मूठ मारते-मारते समर ने एक नई कहानी पढ़ना शुरू किया।

2:00 बज चुके थे। नेहा को अब तक नींद नहीं आ रही थी। उसे प्यास लग रही थी। अपने बेड स्टैंड पे पड़ी बोतल को उठाया उसने, मगर वो खाली थी। उसे गुस्सा आया, क्योंकी अब उसे नीचे किचेन में जाना पड़ेगा। अपना पस्सी-प्ले सेशन रोकना पड़ेगा। चिढ़ते हए वो उठी। एक स्लीवलेश टी-शर्ट और पिंक पाजामे में बहत प्यारी लग रही थी वो। वो नीचे गई, और किचेन में फ्रिज़ से एक बोतल उठाई।

नीचे ही उसके पेरेंट्स, यतीन और प्रीति का मास्टर बेडरूम था। नेहा ने देखा की उनके रूम की लाइट्स ओन थी। उसको याद आया की उसके पापा आजकल लेट आते हैं। वो ऊपर जाने ही लगी थी की एक तेज आवाज आई।

यतीन- “क्या है प्रीति?" यतीन जोर से चिल्लाया था।

नेहा चौंक गई। वो अपने पेरेंट्स के दरवाजे की तरफ बढ़ी। उसे डर था की कहीं कुछ प्राबलम तो नहीं है। वो उनके दरवाजे पे दस्तक देने ही वाली थी की उसने फिर कुछ सुना, जिससे उसके पैर अपनी जगह पे ही जमे रह गये।

यतीन- “जब देखो सेक्स, सेक्स, सेक्स...” यतीन बोला- “तुझे कुछ और नहीं सूझता?"

हैरानी से नेहा का मुँह खुला का खुला रह गया। ये उसके पापा क्या कह रहे थे? उनके मुँह से सेक्स शब्द सुनकर तो नेहा भौचक्की रह गई।
 
प्रीति- “तो मैं क्या करूँ? हफ्ते हो गये हैं। तुमने हाथ तक नहीं लगाया मुझे। तुम समझते क्यों नहीं हो की मेरी भी कुछ जरूरतें हैं?” प्रीति बोली।

नेहा दरवाजे पे कान लगाये सुन रही थी। ऐसी बातें जो किसी की संतान को अपने पेरेंट्स के मुँह से नहीं सुननी चाहिये। मेरी माँ सेक्स के लिए पापा से लड़ रही है। वाउ... नेहा के मन में अजीब सी उत्तेजना जगी।

यतीन- “तो, तुझसे कहा तो था की सनडे को तेरी सारी डिमांड पूरी कर दूंगा। कल सनडे है। एक दिन रुक जा। आज थका हुआ हूँ...” यतीन की आवाज आई।

नेहा बहुत इंटेरस्ट से सुन रही थी ये वार्तालाप।

प्रीति- “कल तक मैं इंतेजार नहीं कर सकती। मुझे तुम्हारा लण्ड चाहिये, अपने मुँह में। चूसने दो ना मुझे। तुम लेटे रहो..”

नेहा ने जब अपनी माँ की ये बात सुनी तो उसकी 20 साल पुरानी इमेज अपनी माँ की, एक पल में नष्ट हो गई। और पता नहीं क्यों. उसकी चत मचलने लगी। मेरी माँ पापा के लण्ड के लिए भीख माँग रही है।

यतीन तो अभी-अभी अपनी सेक्रेटरी को चोदकर आया था। उसे पता था की अपनी पत्नी के लिए उसका लण्ड शायद अभी खड़ा नहीं होगा। तभी वो अपना लण्ड बाहर निकालने से बच रहा था।

यतीन- “अरें प्रीति, मैंने प्रामिस किया है ना तुझसे। कल जो करना है कर लियो। कल रात बच्चों के सो जाने के बाद, तुझे पूरी रात जगा के रखूगा..” यतीन ने कहा।

नेहा को बुरा लगा। क्योंकी उसका दिमाग चाहता था की उसकी माँ, पापा का लण्ड चूसे, और वो ये सुने। अपने ख्यालों पर नेहा को शर्म आ रही थी।

प्रीति- “ठीक है... कल का इंतेजार करती हूँ मैं। मगर अगर अपना वादा तोड़ा तो देखना मैं क्या करती हूँ?” प्रीति की आवाज आई और उनके कमरे की लाइट आफ हो गई।

नेहा समझ गई की वो अब सो रहे हैं। वो भी ऊपर अपने कमरे की ओर बढ़ गई। उसके दिमाग में जैसे हंगामा हो रहा था। जो उसने सुना था, वो बहुत ज्यादा इंटिमेट डीटेल थी। उसको एहसास हुआ की उसके पेरेंट्स की सेक्स लाइफ ठीक नहीं चल रही है। मगर ये सारी बातों ने उसकी चूत में तो आग लगा दी थी। मेरी माँ, पापा का लण्ड चूसने के लिए ऐसे मर रही थी, जैसे कोई भिखारी पैसों के लिए मरता है। कैसा होगा पापा का लण्ड? समर के लण्ड से तो बड़ा ही होगा।

कल वो दोनों सेक्स करेंगे- “तुझे पूरी रात जगा के रखूगा...” पापा की ये बात बेटी के दिमाग से नहीं हट रही थी। उसके बदन में एक ठंडी लहर दौड़ गई। वो अपने दरवाजे के पास पहँच गई। मगर उसका मन अब सोने का नहीं कर रहा था। वो कुछ और करना चाहती थी।
 
समर अपने कंप्यूटर पे बैठे मूठ मार रहा था। भाई बहन की चुदाई वाली कहानियां हद से ज्यादा हाट लग रही थी। दिन की बातों को याद करके तो वो कहानियां और भी ज्यादा सेक्सी हो गई थी। वो मगन हो गया था की तभी 'खट-खट' उसके दरवाजे को किसी ने खटखटाया।

समर ने दरवाजा खोला तो अपनी दीदी को पाया। रात के ढाई बजे वो अपने छोटे भाई के दरवाजे पे खड़ी थी। समर की धड़कनें बढ़ने लगी, क्योंकी उसे दिन का टाइम याद आने लगा।

समर- “दीदी आप... इस वक्त?” समर ने पूछा।

नेहा- “हाँ.." नेहा ने अंदर आते हुए कहा- “नींद नहीं आ रही थी..” और वो सीधा समर के बेड पे आकर बैठ गई "और शायद तुझे भी नहीं आ रही नींद."

नींद तो समर की भी उड़ी हुई थी वैसे। उसने अपना सिर खुजाया, और कुछ बोलने की कोशिश की।

तभी नेहा ही बोल उठी- “क्या समर... मुझे तो लगा था की तू मुझे देखकर खुश होगा?" नेहा बोली। उसकी आँखों में एक बचपना था।

समर- “क्या? खुश हूँ मैं दीदी। मैं तो वो... ...” समर को शब्द ढूँढने में थोड़ी परेशानी आ रही थी।

नेहा- “हाहाहाहा...” अपने छोटे भाई की हालत देख नेहा हँसने लगी। इतनी मधुर और सुरीली हँसी थी नेहा की। कानों से सीधा दिल में पहुँचने वाली- “जानती हूँ। खुश है तू। आज जो हमने किया उसके बाद तो तू मुझे देखकर हमेशा खुश ही होगा। उम्मीद में.."

समर को तो पूरा यकीन था की यही होगा। वो तो अब भी यही सोच रहा था की काश दीदी दिन जैसा कुछ करें,

और उसका लण्ड भी यही उम्मीद कर रहा था। फिर भी उसने पूछा- “आपको कुछ काम था क्या दीदी?"

नेहा बोली- “हाँ.. तुझसे ही काम था। बोर हो रही थी। सोचा समर थोड़ा एंटरटेनमेंट कर देगा। क्यों?"

समर समझ गया था अपनी बहन का इशारा। उसके मन में उफान उठने लगा। उत्तेजना और नर्वसनेस के बीच की स्टेज थी- “कैसे दीदी?" वो बोला।

“हम्म... एक ही चीज कर सकता है यार तू। पाजमा नीचे कर दे अपना और अंडरवेर भी..." नेहा बोली। उसे खुद यकीन नहीं हो रहा था की कितना खुलकर ऐसे बोल रही थी वो समर को।

समर को शायद पहले ही पता था की नेहा ऐसा ही कुछ बोलेगी। इसलिए वो तैयार था। बिना कुछ बोले, एक स्विफ्ट मोशन में समर ने अपने लण्ड को कपड़ों से मुक्त कर दिया। उसका आधा खड़ा लण्ड ऊपर-नीचे बाउन्स करने लगा। अपनी बहन को ऐसे अपना लण्ड दिखाना, समर को बहुत उत्तेजित करता था। उसे अपने लण्ड पे गर्व था। और नेहा की आँखों में उसका लण्ड देखने पर जो चमक आती थी वो उसे और प्राउड महसूस करवाती थी।
 
चमक सिर्फ नेहा की आँखों में ही नहीं, उसकी चूत में भी आ गई थी, उसके पानी से। वो पहले ही अपने माँ बाप की बातों से उत्तेजित थी और अब तो उसके सामने एक उठता हआ लण्ड आ गया था। उसके मुँह में भी पानी आ गया।

नेहा ने मुश्कुराते हुए कहा- “ये तो बिना कुछ करे ही खड़ा हो रहा है... सच में समर, आई लव युवर काक..."

समर को अच्छा लगा सुनकर। नेहा ने उसे पास आने का इशारा किया। वो बेड पे बैठी थी। समर पास आया तो उसका लण्ड सीधा नेहा के मुँह के आगे था। मजबूत लग रहा था। नेहा ने हाथ आगे बढ़ाया और लण्ड को पकड़ा। थोड़ा हिलाने के बाद नेहा ने अपना मुँह एकदम समर के लिंग से पास रोक लिया। समर की आँखें बड़ी होने लगी- “ओहह... माई गोड... दीदी मेरे लण्ड को मुँह में लेने वाली है। ओहह... शिट..” समर सोच रहा था। नेहा ने अपना मुँह खोला। उसकी आँखें समर का रिएक्सन देख रही थीं। बेचारा कितना उत्साहित था।

नेहा ने मुंह बंद किया और लण्ड पर एक बहुत छोटा सा किस किया- “अभी तेरी किश्मत इतनी अच्छी नहीं है..." नेहा बोली, और फिर हँसने लगी।

मगर समर को बुरा नहीं लगा। लण्ड पर अपनी बहन का चुम्मा पाकर वो तो बहुत खुश था।

नेहा- “वैसे मैं कभी सोचती हूँ, कैसा लगता होगा, एक लण्ड को मुँह में लेकर..." नेहा बोली और फिर समर के लण्ड से खेलने लगी।

समर सोच रहा था- “एक बार मुँह में लेकर देख लो दीदी, पता लग जायगा..” और उसका लण्ड अपनी बहन के हाथों में झटके मार रहा था।

नेहा- "ट्राई तो करना पड़ेगा..." नेहा बोली- “औरतों को बहुत पसंद होता है लण्ड चूसना... समर का लण्ड मेरे मुँह में... कैसा स्वाद होगा? कितना मजा आयेगा? कैसा लगेगा? अफफ्फ.." पानी बह रहा था चूत में।

नेहा फिर बोली- "तुझे पता है लण्ड चूसना किसे सबसे ज्यादा पसन्द है?” मगर असल में ये उसका शैतानी दिमाग बुलवा रहा था उससे- “मम्मी को। हमरी माँ को लण्ड मुँह में लेना बहुत पसंद है..."

समर को ये बात थोड़ी चुभी। पहले तो वो समझा उसने गलत सुना है। दीदी मम्मी के बारे में इतनी गलत बात नहीं बोल सकती। मगर नहीं, वो उनकी माँ के बारे में ही बात कर रही थी।

नेहा- “मम्मी, पापा के लण्ड को मुँह में लेना बहुत पसंद करती है...” नेहा ने फिर बोला। उसे पता नहीं था, की समर का रिएक्सन क्या होगा। मगर उसने फिर भी चान्स लिया। दिमाग में तो सिर्फ सेक्स चढ़ा था, और एक शैतान।

समर को सच में बुरा लगा था ये सुनकर। गुस्सा भी आया था नेहा पे। मम्मी के बारे में ऐसी बात सुनना उसे बिल्कुल भी गवारा नहीं था, कहा- “दीदी प्लीज... मम्मी के बारे में ऐसा मत बोलो। आप ऐसा कह भी कैसे सकती हैं?" समर के चेहरा पर एक डिसगस्ट का एक्सप्रेशन था। वो मुड़कर खड़ा हो गया और अपना पाजमा ऊपर कर लिया।

नेहा- “मुझे खुद यकीन नहीं हो रहा समर। मगर सच्चाई है। मैंने अपने कानों से सुना..” नेहा बोली। उसे समर की आँखों में गुस्सा दिखा था। क्या उसने कुछ गलत कर दिया?

समर- “प्लीज दीदी... डोन्ट...” समर बोला और अपने कमरे की खिड़की पे हाथ रखकर खड़ा हो गया। उसे समझ में नहीं आ रहा था की उसकी दीदी में क्या घुस गया है?
 
नेहा- “मुझे खुद यकीन नहीं हो रहा समर। मगर सच्चाई है। मैंने अपने कानों से सुना..” नेहा बोली। उसे समर की आँखों में गुस्सा दिखा था। क्या उसने कुछ गलत कर दिया?

समर- “प्लीज दीदी... डोन्ट...” समर बोला और अपने कमरे की खिड़की पे हाथ रखकर खड़ा हो गया। उसे समझ में नहीं आ रहा था की उसकी दीदी में क्या घुस गया है?

नेहा बेड से उठी और समर की तरफ बढ़ी। उसने एक हाथ उसके कंधे पर रखा, अपने होंठ उसके कानों तक लाते हुए बोली- “नाराज मत हो समर। ये सच्चाई है। क्या हुआ? माँ भी तो एक औरत है, और लण्ड तो हर औरत को पसंद होता है..” ये बोलकर नेहा ने समर के कान को अपने दांतों के बीच ले लिया और उसे प्यार से काटा।

समर के सिर से पैर तक एक लहर दौड़ गई।

नेहा पीछे हटी और बोली- “बाइ द वे, तुझे पाजामा ऊपर करने के लिए किसने कहा? भूल गया... जो मैं कहूं वो तुझे करना है...”

समर को याद आई ये बात और दिन की बातें भी। वो धीरे से फिर से अपने कपड़े नीचे करने लगा। ये करते करते उसे लग रहा था की वो तो अपनी बड़ी बहन का दास बनता जा रहा है। मगर ना जाने क्यों उसे बुरा नहीं अच्छा लग रहा है। समर का लण्ड फिर से बाहर था। नेहा के चेहरे पे एक मश्कान आई। उसे अपनी ताकत का एहसास हो रहा था।

नेहा- “वेरी गुड समर..” नेहा बोली और जाकर बेड पे लेट गई- “अब जरा मूठ मार मेरे नाम की..."

समर को पता था की ये ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। आखीरकार, वो कुछ दिनों से बस नेहा के नाम का ही तो मूठ मार रहा था। उसने अपने लण्ड को अपनी मुट्ठी में लिया और धीरे-धीरे उसे सहलाना शुरू किया। आँखों के सामने उसकी अप्सरा जैसी दीदी बैठी शो का आनंद ले रही थी।

नेहा- “क्या सोच रहा है समर? क्या सोचकर मूठ मार रहा है?" नेहा बोली। वो भी मूड में आ रही थी।

समर के दिमाग में तो एक ही चीज थी। नेहा... उसका बदन, उसकी सेक्सीनेस। मगर क्या वो बता सकता था ये नेहा को?

नेहा- “बता ना समर... क्या सोच रहा है?" नेहा बोली। उसने एक सेक्सी गहरी साँस ली और अपनी पहाड़ जैसी चूचियां हवा में उठाई। उसका छोटा सा स्लीवलेश टाप फटने को हो गया।

समर ये देखकर पागल हो गया। थोड़ा तेजी से मूठ मारने लगा।

नेहा- "बता ना समर?"

समर- “दिन की बातें सोच रहा हूँ दीदी..” समर बोला- “आपके बारे में सोच रहा हूँ..” समर ने बोल ही दिया।

नेहा ये सुनकर खुश हो गई। वो बिस्तर से उठी और समर के पास आई, कहा- “तू क्या सोच रहा है?" नेहा ने समर का लण्ड पकड़ लिया- “ये सोच रहा है..” फिर उसने अपने होंठों को समर के मुँह पे रखा और उसे एक गीला गरम फ्रेंच किस दिया- “या ये सोच रहा है...”

वाह... ये किस पाकर तो समर मस्त हो गया।
 
फिर नेहा पीछे हटी और अपना हाथ अपनी पैंटी के अंदर डाल दिया। समर ये देखकर हैरान रह गया। उसने अपना हाथ बाहर निकाला। उसकी उंगलियां गीली थी। दीदी की चूत का पानी। नेहा ने वो उंगलियां समर के मुँह की तरफ बढ़ाना शुरू किया ही था, की समर ने खुद ही आगे बढ़कर उन उंगलियों को अपने मुँह में ले लिया।

नेहा ये देख बहुत खुश हुई- “या, ये सोच रहा था..." नेहा बोली।

समर तो कुत्ते की तरह नेहा की उंगलियां चूस रहा था। अपनी बहन की चूत से टेस्टी चीज नहीं चखी थी उसने। नेहा भी गरम हो रही थी। उसे बहुत हाट लगता था जब समर ऐसे उसकी उंगलियां चूसता था। जब पूरी उंगलियों में से रस खतम हो गया तो नेहा ने अपना हाथ पीछे ले लिया। समर के मुँह में मस्त चूत का स्वाद आ गया था, वो और चाहता था।

मगर नेहा के मन में कुछ और था- “आँखें बंद कर समर...” उसने कामुकता से कहा।

समर ने बिना कुछ बोले अपनी बहन का कहा मान लिया। आँखें बंद हो गई। मगर दिमाग तो अब भी चल रहा था। क्या करना चाहती है दीदी?

समर का हाथ नेहा ने पकड़ा, और कुछ ही पलों में वो हाथ एक बहुत ही कोमल और गुदगुदी चीज पे आकर ठहर गया। नेहा ने समर के हाथ को उस कोमल चीज पर कसा। समर का हाथ अब उस चीज को दबा रहा था। उसे बहुत अच्छा लग रहा था।

नेहा- “आँखें खोल समर...” नेहा ने बोला।

समर ने आँखें खोली और देखा उसके हाथ में क्या था? उसका माथा ठनका, क्योंकी वो दीदी की गाण्ड थी... समर ने अपने हाथ को नेहा की गाण्ड के ऊपर पाया। उसको सिर से पाँव तक एकदम झटका लग गया। नेहा की मोटी कोमल गाण्ड समर के हाथों में थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था की ये क्या हो रहा है? नेहा ने पाजमा पहना हुआ था, मगर उसके ऊपर से भी उसकी गाण्ड एकदम नरम और पहाड़ जैसी लग रही थी।

नेहा- “हाँ.. समर, वो मेरी गाण्ड ही है.." नेहा बोली।

समर के हाथ कांप रहे थे। पशीना छूट रहा था। धड़कनें भाग रही थी।
 
समर ने आँखें खोली और देखा उसके हाथ में क्या था? उसका माथा ठनका, क्योंकी वो दीदी की गाण्ड थी... समर ने अपने हाथ को नेहा की गाण्ड के ऊपर पाया। उसको सिर से पाँव तक एकदम झटका लग गया। नेहा की मोटी कोमल गाण्ड समर के हाथों में थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था की ये क्या हो रहा है? नेहा ने पाजमा पहना हुआ था, मगर उसके ऊपर से भी उसकी गाण्ड एकदम नरम और पहाड़ जैसी लग रही थी।

नेहा- “हाँ.. समर, वो मेरी गाण्ड ही है.." नेहा बोली।

समर के हाथ कांप रहे थे। पशीना छूट रहा था। धड़कनें भाग रही थी।

नेहा- “फिर मेरी गाण्ड पे हाथ.." नेहा बोल रही थी। पहली बार उसकी गाण्ड को किसी ने ऐसे छुआ। बड़ा मजा आ रहा था उसे।

लेकिन मजा तो समर से दूर था। वो तो चिंता और कनफयूजन में था। उसका हाथ जम गया था नेहा की गाण्ड पर।

नेहा ने ये देखा- “उफफो... फटतू समर..” वो बोली और फिर से समर का हाथ पकड़ लिया। अब वो पकड़कर समर के हाथ को अपने चूतड़ों पे घुमा रही थी।

समर को बहुत आनंद आने लगा।

नेहा- “ऐसे घुमा अपने हाथों को, इतनी प्यारी गाण्ड है मेरी, उसके मजे ले.." नेहा ने बोला। फिर उसने समर का हाथ छोड़ दिया और आगे की ओर झुक गई।

झक के नेहा ने अपनी गाण्ड को और बाहर निकाला, और समर को उससे खेलने का फिर निमंत्रण दिया। मगर समर फिर वहीं जमा रह गया। उसकी अभी भी हिम्मत नहीं हुई कुछ करने की।

नेहा- "तुझे अगर नहीं करना तो बोल दे, मेरे पास पूरी रात नहीं है यहां अपनी गाण्ड निकालकर खड़ी होने के लिए, मैं जा रही हूँ.."

नेहा बोल ही रही थी की तभी उसकी गाण्ड को बहुत जोर से दबाया गया। नेहा की चूत पे करेंट लगा। समर को एहसास हो चुका था की ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा। उसके काँपते हुए हाथों में जान आ गई, और वो पूरी जान से नेहा की गाण्ड को दबाने लगे।

नेहा- “उफफ्फ़... आsss समर..." नेहा चिल्लाई।

मगर ये चीख में दर्द कम, हवस ज्यादा थी। नेहा को बहुत अच्छा लग रहा था। अपने छोटे भाई को अपनी गाण्ड से खेलते हुए उसे मस्त लग रहा था, और उसकी फुद्दी को भी।

समर ने दूसरा हाथ भी गाण्ड पे रख दिया। उसकी गाण्ड इतनी बड़ी और सेक्सी थी की, उसके दोनों चूतड़ों के लिए दो हाथ कम पड़ रहे थे। समर ने फिर भी कोशिश की। वो अब नेहा की गाण्ड मसल रहा था, अपनी दीदी की गाण्ड... दिल और दिमाग दोनों ही असमंजस में थे, मगर हाथ रुक नहीं रहे थे।

नेहा की गाण्ड पर दो हाथ ऐसे झपट रहे थे, जैसे शेर अपने शिकार पर। उसकी गाण्ड से खिलवाड़ हो रहा था,

और ये खिलवाड़ उसकी चूत में से पानी निकाल रहा था।

समर अपनी बहन की गाण्ड पर ऊपर-नीचे, आगे-पीछे, दायें बायें हाथ फेर रहा था।

नेहा- “हाँ... समर, ऐसे ही खेल मेरी गाण्ड से। फेर हाथ, दबा उसे, दबोच उसे..." नेहा बोल रही थी। उसके मुँह से “ऊवू, अया, एम्म्म...” जैसे शब्द निकल रहे थे।

समर ये सुनकर और उत्तेजित हो गया। उसने अपने दायां हाथ में अपनी बहन के दायें चूतड़ को दबोच लिया।

"ऊऊओहह.." नेहा ने हल्के से चीखा। उसके रोम-रोम में नशा फैल गया।

समर ने फिर अपनी पकड़ हल्की करी और फिर से उसे दबोचा। समर को तो जन्नत मिल गई थी। इतनी कोमल गाण्ड, कामुक गाण्ड उसके हाथों में थी। दिमाग घूम रहा था उसका उत्तेजना में। उसने ऐसे ही नेहा की लेफ्ट चूतड़ पे भी किया। दोनों हाथों से वो भारी सुडौल गाण्ड को रगड़ रहा था। गाण्ड के हर कोने को छू रहा था। उसके लण्ड से प्री-कम पानी की तरह बह रहा था।

नेहा की चूत का भी यही हाल था। समर का हाथ घूमते-घूमते गाण्ड की लकीर पे जाकर रुक गया। नेहा की सांसें भी रुक गई। समर लकीर पे ऊपर-नीचे अपनी उंगली चला रहा था। नेहा को पता था की वो उंगली क्या ढूँढ़ रही थी। कुछ ही पलों में वो मिल भी गया। नेहा की गाण्ड का छेद।
 

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