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Erotica प्यासी दुल्हन

मैं चुद चुकी थी, मेरी चूत शांत हो चुकी थी, मैंने अमित को मना किया लेकिन अमित अब एक मर्द था उसको मेरा और मर्दन करना था। उसने मेरा पेटीकोट खींच कर उतार दिया। अब मैं पूरी नंगी थी, आज मेरी चूत में दूसरा लंड घुस चुका था।

मेरी चूचियाँ मसलते हुए बोला- ज्यादा शरीफ बनने की कोशिश न करो, लंड अब पूरे हफ्ते तुम्हारी चूत में घुसेगा, हर रात नया मज़ा दूँगा। चलो उठो, घोड़ी बनो, पीछे से घुसाने का मज़ा लो। घर पर पता नहीं दुबारा भाभी के पास सो जाओ।

अमित ने मुझे अपना बल दिखाते हुए घोड़ी बना दिया। तख्त पर मेरे दोनों हाथ रखे थे, मैं घोड़ी बनी हुई थी। नीचे मेरी टांगें चौड़ी करके अमित लौड़ा लगाने की कोशिश करने लगा लौड़ा घुस नहीं पा रहा था। अमित बोला- भाभी जान, अपना एक पैर चौड़ा करके तख्त पर रख लो।

उसने मेरा एक पैर चौड़ा करवा के तख्त पर रखवा दिया और मेरा सर तख्त पर झुका दिया। मेरी चूत में उंगली करते हुए बोला- वाह भाभी, क्या मस्त चूत चमक रही है।

उसने मेरी चूत के दाने को मसलते हुए पूछा- भाभी यहाँ सब लोग रंडियां लेकर आते हैं, आप गुस्सा तो नहीं हो इस गंदे हाल में आकर?

मुझे इस समय बहुत आनन्द आ रहा था, बोली- गुस्सा क्यों होऊँगी? यहाँ मुझे कौन जानता है, सब लोग यही समझ रहे हैं कि मैं रंडी हूँ ! यह सोचकर गुदगुदी और हो रही है। अब तुम भी जल्दी से अपनी भाभी रांड को चोद दो और हाल में कोई पूछे तो रंडी ही बताना। अब चोदो, देर न करो !

अमित ने मेरी एक जांघ पर पीछे से हाथ रखकर टांग को फ़ैलाया और लोड़ा चूत में पेल दिया। एक चीख मेरी निकल गई, अगले ही पल मेरी चूत में लंड दनदनाते हुए घुस गया था। अमित ने मेरी कमर पर दोनों हाथ टिकाए और दनादन कुत्ते की तरह पेलना शुरू कर दिया था। शुरू के 1 मिनट मैं मैं जोर से चिल्ला रही थी, बड़ा जबरदस्त मज़ा था, थोड़ी देर बाद उसने झुककर मेरी चूचियाँ पकड़ ली और उन्हें दबाते हुए धीरे धीरे आहें भरने लगा।

मैं भी अब आनंदित हो रही थी, धीरे धक्कों के कारण मेरा दर्द कम हो गया था। कुछ देर बाद अमित ने फिर मुझे कमर से पकड़ कर जोर से ठोंकना शुरू कर दिया था। तभी दरवाज़ा खोल कर आंटी अंदर आ गईं थीं, अमित से बोलीं- जल्दी इस रंडी को बजा, पिक्चर 10 मिनट में ख़त्म हो जाएगी।

अमित का चोदना जारी था, मैं चिल्ला रही थी- अमित छोड़ो न !

लेकिन अमित मुझे चोदे जा रहा था, गली की कुतिया की तरह मैं चुद रही थी, आंटी बीड़ी पीते हुए मेरी चुदाई का आनन्द ले रहीं थीं, उनके साथ एक बुड्ढा आदमी भी मेरी चुदाई देख रहा था। अब मैं एक सड़क पर चुद रही कुतिया बनी हुई थी। अमित ने मुझे 5 मिनट तक चोदा इसके बाद अमित ने अपना लोड़ा बाहर निकल के सारा वीर्य मेरी गांड के मुँह पर छोड़ दिया। इसके बाद हम दोनों अलग हो गए।

आंटी मेरी और देखकर बोलीं- कुतिया, जल्दी से कपड़े पहन और निकल ले ! इधर शो ख़त्म हो चुका है।

मैं और अमित अपने कपडे पहनने लगे।

कपड़े पहन कर हम लोग बाहर आ गए। अमित की बाइक पर मैं अमित से चिपक कर बैठ गई। अमित मुझसे बोला- भाभी, मैं जब चोदता हूँ तो मुझे सिर्फ चूत और गांड दिखती है। आज चुदाई की मेरी गोल्डन जुबली है, आप 50वीं औरत हो जिसकी मैंने चूत चोदी है।

अमित बोले जा रहा था, अमित बोला- अब तक मैं 10 लोंडियों की गांड मार चुका हूँ और 4 की सील तोड़ चुका हूँ। मैंने नीचे वाली भाभी और उनकी बहन की चूत भी मार रखी है। थोड़ी देर बाद हम घर पर अमित के कमरे में थे। आज मुझे अमित के साथ सोना था।

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और पलंग पर लेट गई, अमित भी नंगा होकर मेरे पास सो गया। हम दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भर लिया, अमित मुझे चूमते हुए बोला- भाभी इन सात दिनों में आपको चूत को एसा मज़ा दूँगा कि आप कभी भूल नहीं पाएँगी। रोज़ नई तरह का मज़ा।

अमित बोला- सुबह आराम से उठना, भाभी को मैसेज कर दिया है कि सुबह 11 बजे से पहले न जगाए। अब सोते हैं, सुबह आपकी चूत में लंड भी तो डालना है।

अमित और मैं एक दूसरे की बाँहों में सो गए।

 
सुबह 5 बजे अमित ने मुझे अपनी बाँहों में खींच लिया, उसका लंड खड़ा हो रहा था, उसने लंड मेरी चूत में घुसा दिया, हम लोग चिपक कर एक दूसरे से लिपट कर अर्धनिंद्रा में पड़े हुए थे, मेरी चूत में अमित का लोड़ा घुस कर मोटा हो रहा था, बड़ा अच्छा लग रहा था। आधा घंटा इसी तरह निकल गया। इसके बाद अमित मेरे ऊपर चढ़ गया और अपने लोड़े के वारों से मुझे मस्त मस्त चोद दिया।

हम लोग दुबारा सो गए। 9 बजे मैं उठ कर बाथरूम में चली गई और नहा धोकर बाहर आई। आज अंदर से बड़ा अच्छा लग रहा था।

समय 11 से ऊपर हो गया था, अमित अभी भी नंगा पड़ा हुआ था, उसका लोड़ा सुकड़ा सा ठंडा पड़ा था, मैंने उसका लोड़ा पकड़ कर हिलाया और बोली- लोड़े के खिलाडी साहब, अब उठ जाइए।

अमित हँसते हुए उठा और मुझे बाँहों में भरकर मेरे होंठों पर एक गहरा चुम्बन लिया और बाथरूम चला गया। मेरी चूत इस समय पूरी शांत थी। मैं सजधज कर नीचे भाभी के पास आ गई।

‘आ गई?’ भाभी मुझे देखकर मुस्कराईं और बोली- कल, लग रहा है सुहागरात-2 मन गई?

मैं शरमाते हुए बोली- भाभी, अमित तो बहुत बड़ा चोदू है, पूरी फाड़कर रख दी।

भाभी हँसते हुए बोली- मज़ा तो फड़वाने में ही है। अब आराम से रोज़ रात मरवा। बच्चे 3-4 दिन के लिए मामा के यहाँ जा रहे हैं। मैं भी तेरे साथ कुत्ते का डलवाऊँगी। साले का लंड ऐसा है कि एक बार डलवा लो तो बार बार डलवाने का मन करता है।

मैंने चाय बना ली और अमित को चाय पीने के लिए आवाज़ दी। अमित तैयार होकर नीचे आ गया। भाभी हँसते हुए बोलीं- अमित, अर्चना बता रही है कि कल रात दर्द और मज़ा दोनों का इसने आनंद उठाया।

अमित ने भाभी के चूतड़ों को दबाते हुए कहा- जलन हो रही है?

भाभी बोलीं- आज रात अर्चना से पहले मैं मज़ा लूँगी, बच्चों को लेने उनके मामा आ रहे हैं, अब मैं अकेली हूँ।

अमित ने कहा- सच?

और भाभी को अपनी बाँहों में भरकर मेरे सामने उनके होटों पर चूम लिया।

उसके बाद अमित, भाभी और मैंने प्रोग्राम बनाया कि हम आज रात 9 बजे भाभी की कार से लखनऊ जायेंगे और रात को भाभी के खाली पड़े फ्लैट में रुकेंगे।

भाभी बोलीं- रास्ते में कार में चुदना बड़ा मज़ा आएगा। दिन में तू पेपर देना, शाम को हम दोनों मज़े करेंगे।

अमित नाश्ता करके दफ़्तर चला गया, जाते समय मुझे 2-3 नग्न फ़िल्मों की सीडी दे गया और बोला- बोर हो तो देख लेना।

दो लंड खाने के बाद औरत की शर्म चली जाती है और उसके लंड खाने की भूख बढ़ जाती है, मेरे साथ भी कुछ ऐसा हो रहा था। मेरी चूत की आग तो शांत हो गई थी लेकिन लंड से खेलने की इच्छा बढ़ गई थी।

मैं ऊपर कमरे में आ गई और वीडियो लगा दी। अच्छी चुदाई वाली भारतीय फ़िल्म थी, 20-22 साल की 4-5 लड़कियों की चुदाई 50-55 साल के 4-5 अंकलों के साथ दिखाई जा रही थी।

मेरा मन भी अब लंडों से खेलने का कर रहा था, 5 बजे भाभी ने नीचे बुला लिया बच्चे मामा के साथ जा चुके थे।भाभी को जब मैंने बताया कि फ़िल्म देखकर तो मेरा मन और लंडों से खेलने को कर रहा है तो भाभी बोलीं- चिंता न कर ! हम दोनों की यह यात्रा चुदाई यात्रा होगी। दोनों मस्त होकर चुदवाएंगी, तू जितने लंडों से खेलना चाहेगी उतने से खिलवाऊँगी तुझे।

अमित 8 बजे रात को आया। 9 बजे हम लोग भाभी की कार से लखनऊ के लिए चल दिए। मेरी

"चुदाई यात्रा"

शुरू हो गई थी।

 
प्यासी दुल्हन

का अगला भाग चुदाई यात्रा पाठकों के लिए

हम लोग कार से लखनऊ के लिए रात में चल दिए। अगले दिन मेरी परीक्षा थी। मैंने सलवार कुरता और भाभी ने साड़ी ब्लाउज पहना था।

अमित बोला- तुम दोनों मुझे गाड़ी नहीं चलाने दोगी इसलिए चुपचाप पीछे बैठो।

अमित नेकर और टी शर्ट में था। हम दोनों मुँह बनाते हुए पीछे बैठ गए। भाभी ने बताया कि उन्होंने अपना फ्लैट सेट करवा दिया है और हम लोग रात को बारह बजे लखनऊ पहुँच जाएँगे।

भाभी रास्ते में अमित से बोली- अमित, तुम एक बार बता रहे थे कि तुम्हारे एक दोस्त का लंड 10 इंच लम्बा और ४ इंच मोटा है?

अमित बोला- सच बोल रहा था। उसका घर रास्ते में पड़ता है, अगर विश्वास नहीं होता तो दर्शन करा देता हूँ।

भाभी बोलीं- अगर छोटा निकला तो?

अमित बोला- पाँच हज़ार की शर्त रख लो।

दोनों मैं शर्त लग गई मेरी चूत उनकी बातें सुनकर मचलने लगी थी, मैंने भी आज तक 10 इंच लम्बा लंड नहीं देखा था। अमित ने अपने दोस्त को फ़ोन कर दिया। थोड़ी देर बाद रास्ते में वो मिल गया। गाडी मैं बैठकर हम उसके इंटों के भट्टे पर पहुँच गए।

भट्टे में एक कमरा बड़ी अच्छी तरह सजा हुआ था। अमित के दोस्त का नाम बबलू था। हम लोग अंदर बैठ गए।

थोड़ी देर बाद अमित बोला- बबलू, रजनी भाभी को अपना लंड दिखा दे। मेरी शर्त लगी है कि अगर 10 इंच से कम निकला तो 5000 रुपए भाभी को दूँगा।

बबलू बोला- मैंने आज तक कभी मुठ नहीं मारी ! जब से मेरा खड़ा होना शुरू हुआ है तब से सिर्फ चूत में ही डाला है। पहले दो साल तक तो अपनी चाची की चोदता था, उसके बाद तो गाँव की लड़कियों, रंडियों, भाभियों और भट्टे पर काम करने वाली औरतों की चोदता आ रहा हूँ। एक बार खड़ा हो जाता है तो फिर बिना चूत में डाले लंड को नहीं बैठाता। अब यह बता दो कि तुम दोनों डलवाओगी या किसी एक को चोदूँगा। गांड मैं मारता नहीं, और आधे घंटे से कम चोदता नहीं हूँ।

अमित बोला- भाभी डलवा लो, मज़ा आएगा।

रजनी बोली- मैं तो डलवा लूँगी लेकिन अर्चना को भी घुसवाना पड़ेगा। कुतुबमीनार देखने का मन तो इसका भी कर रहा है।

मैं झेंप गई, मैं बोल गई- नहीं नहीं मुझे तो बस देखना है मैं नहीं घुसवाऊँगी।

बबलू इतना सुनकर मेरे पीछे आ गया और मेरी कुरती में हाथ डालकर मेरे दोनों संतरे मसलते हुए बोला- दिखा देंगे, तुझे भी दिखा देंगे, तेरा माल तो देख लें पहले !

और उसने कुरता ऊपर उठा कर मेरे संतरे मसलने शुरू कर दिए। सामने भाभी मुस्कराते हुए मेरी चूचियों की मसलाई देख रही थीं।

बबलू ने हाथ हटा कर मेरी पजामी का नाड़ा खोला और पीछे से कुरते की चैन खोल दी। पज़ामी नीचे सरक गई, बबलू बहुत ताकतवर था, मेरी कुरती भी उसने उतार दी और मुझे गोद में उठाकर अमित की गोदी में बैठा दिया। मेरे बदन पर अब सिर्फ पेंटी थी। मेरे नंगे संतरे कमरे की शोभा बढ़ा रहे थे।

अमित मेरी पेंटी में हाथ डालते हुए बोला- मज़े कर लो भाभी ! ऐसा मज़ा दुबारा नहीं मिलेगा।

बबलू भाभी की तरफ बढ़ा और बोला- अब तेरी चूचियों को देखता हूँ ! बहुत बड़ी बड़ी लग रही हैं।

ब्लाउज उसने आगे से खींच कर फाड़ दिया, भाभी के मोटे मोटे गोल गोल स्तन आजाद हो गए।

बबलू चिहुंका- वाह, क्या सुंदर पहाड़ हैं रानी !

बबलू ने उन्हें मुँह में ले लिया और चूसने लगा और बाद में पीछे जाकर बबलू भाभी के स्तनों को भोपूं की तरह बजाने लगा।अब मुस्कराने की बारी मेरी थी। उसने इस बीच भाभी का पेटीकोट और साड़ी भी उतार दी। भाभी पूरी नंगी हो चुकी थीं, उनकी चूत के दाने को बबलू रगड़ रहा था। भाभी को नंगी देखकर मेरी शर्म कम हो गई थी।

भाभी अमित से बोलीं- अर्चना की पेंटी उतार दो न ! मुझे नंगी देखकर यह रंडी खुश हो रही है।

अमित ने मेरी पेंटी उतार दी। उसके बाद बबलू ने गोदी में उठाकर भाभी को मेरी बगल में बैठा दिया और बारी बारी से मेरी और भाभी की पप्पी लेता हुआ बोला- बदतमीज़ी के लिए माफ़ करना ! नंगी बहुत सुंदर लग रही हो।

इसके बाद अमित और बबलू ने अपने कपड़े उतार दिए। मेरी और भाभी की नज़र बबलू की चड्डी पर थी, उसका लंड चड्डी में से मोटा और बड़ा होने का अहसास करा रहा था।

अमित और बबलू ने अपनी अपनी चड्डियाँ उतार दी। दोनों के तने लंड बाहर निकल आए।

बाप रे बाप ! बबलू का क्या मोटा और लम्बा लंड था बबलू के सामने अमित का 8 इंची लंड छोटा और पतला लग रहा था।

बबलू ने भाभी को उठाकर अपनी जांघों पर बैठा लिया और लंड हाथ में देता हुआ बोला- रानी देख लो ! थोड़ी देर में यह तुम्हारी सुरंग में दौड़ेगा।

भाभी बोली- अर्चना, वाह ! क्या लम्बा है ! बाप रे बाप ! यह तो आज चूत फाड़ कर चूत की भोंसड़ी बना देगा ! जरा स्केल तो निकाल अपने बैग से, आज तो लग रहा है कि शर्त हार गई।

मैंने अपने बैग से 12 इंची स्केल निकाल लिया। भाभी ने लंड नापा तो १० से थोड़ा कम था।

 
भाभी हार गईं थी, अमित उन्हें देखकर मुस्करा रहा था।

बबलू ने भाभी के गले में हाथ डाल कर उनकी गेंदें हिलाईं और बोला- रजनी डार्लिंग ! आराम से खोलकर मरवाओगी या मैं अपने अंदर के राक्षस को जगाकर तुम्हारी मारूँ?

भाभी लौड़ा सहलाते हुए बोलीं- प्यार से मरवाने में ही भलाई है कुत्ते ! लेकिन थोड़ा प्यार से मारना, इस जैसा लम्बा-मोटा लंड तो देखने को भी नहीं मिलता है।

“हैं? ऐसी बात है? तो चुपचाप नीचे गद्दे पर लेट जा !”

भाभी बबलू के इशारे पर उठकर नीचे पड़े गद्दे पर लेट गईं। बबलू ने मेरी तरफ देखा और बोला- तू अमित से अपनी फुद्दी थोड़ी चौड़ी करवा ले ! जब तेरी फुद्दी में घुसेगा तो दर्द कम होगा। नई नवेली दुल्हन का माल तो बड़ा नमकीन होता है। तेरी चूत चोदने मैं तो मज़ा आ जाएगा।

मुझे उठाकर उसने अमित की जाँघों पर बैठा दिया और मेरी दोनों चूचियाँ कस कर दबा दीं। इसके बाद उसने नीचे झुककर भाभी की टांगें उठाईं और उनकी चूत में अपना दस इंची लंड घुसा दिया।

भाभी चीख उठीं- ऊ ऊई मर गई ! मर गई !

लेकिन अब वो बबलू के लंड की गुलाम थीं !

बबलू ने भाभी को चोदना शुरू कर दिया, उनकी अच्छी चुदाई हो रही थी, भाभी की आँखों से पानी आ रहा था, बबलू बीच बीच में तेज़ धक्कों से उन्हें चोद देता था।

ऊह्ह ऊई आः आहा आह मर गई मर गई जैसी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

अमित ने भी मुझे अपने खड़े हुए लंड पर बैठा लिया अमित का लंड मेरी चूत में अंदर तक घुसा हुआ था। मैं भी धीरे धीरे चुदते हुए भाभी की चूत फाड़ चुदाई का मज़ा लेने लगी।

15 मिनट तक भाभी की लगातार चुदाई बबलू ने करी इसके बाद बबलू ने लंड निकाल लिया और भाभी को बाँहों में भरकर अपने से चिपका लिया।

भाभी बोलीं- चूत में दर्द तो हो रहा है लेकिन बबलू, मज़ा आ गया ! तीन बार मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।

बबलू सीधा लेट गया और भाभी को अपना लौड़ा पकड़ा दिया जो पूरा दस इंची हवा में खड़ा हुआ था। अमित भी मेरी चोद चुका था, अमित ने वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया था। अमित बोला- मैं बाहर होकर आता हूँ !

अमित बाहर निकल गया, मैं खाट पर बैठी चोर नज़रों से बबलू का लंड देख रही थी।

बबलू बोला- शर्म छोड़ दे ! मज़े से खेल ! ऐसे चोरी चोरी से क्या देख रही है?

उसने मुझे अपने पास खींच लिया और लंड मेरे हाथ में पकड़ा दिया। बबलू अब दो नंगी औरतों को अपने से चिपका कर उनका शवाब पी रहा था।

मैं धीरे धीरे उसका लंड सहलाने लगी, भाभी बोलीं- अर्चना, एक बार इस सांड का लंड अंदर घुसवा ले, बड़ा मज़ा आएगा। साला क्या चोदता है।

बबलू मेरे चूतड़ दबाते हुए बोला- अर्चना जी, डाल दूँ? तुम्हारी जवानी तो मुझे पागल कर रही है।

उसने मेरी चूत में अपनी दो उंगलिया डाल दीं थीं, चूत अमित से चुदी हुई थी, पूरी वीर्य से नहा रही थी, उँगलियाँ आराम से घुस गईं।

चूत मसलते हुए बबलू बोला- गाड़ी तो तुम्हारी पूरी तैयार है, बस इंजन लगाने की देर है। चलो घोड़ी बन जाओ पीछे से धीरे धीरे प्यार से अपनी बीवी की तरह चोदूँगा और चुदते हुए नखरे करे तो रंडी की तरह बजा कर चूत की भोंसड़ी बना दूँगा। चुदने के बाद अगर मज़ा नहीं आए तो जो चाहे सजा दे लेना।भाभी उठीं और बोलीं- चल अब घोड़ी बन जा ! इतने प्यार से कह रहा है तो पूरे मज़े भी देगा।

मैं जमीन पर कोहनी के बल घोड़ी बन गई, बबलू ने अपना लंड पीछे से आकर मेरी चूत पर कई बार फिराया। मेरी सांसें तेज़ हो गईं, मैं लंड अंदर घुसने का इंतजार करने लगी। बड़े प्यार से चूत पर सुपाड़े को अपने हाथ से दबाते हुए बबलू ने अपना लंड मेरी चूत में प्रवेश कराया और मेरी चूचियों और चुचूकों को मसला।

बबलू अपने लंड को मेरी चूत में चलाना शुरू कर दिया, मेरी चुदाई शुरू हो गई थी। बबलू धीरे धीरे प्यार से चोद रहा था, लंड उसने पूरा नहीं घुसा रखा था लेकिन उसकी मोटाई ने मेरी चूत पूरी फाड़ के रख दी थी, मैं एक बकरी की तरह ऊह आह आह आह कर रही थी लेकिन इंजन अच्छा हो तो सफ़र भी मस्त होता है।

थोड़ी देर में मेरी चुदाई मुझे बड़ा आनन्द देने लगी, अब मैं चुदते हुए आह ऊह आहा आहा आहा और चोद ! और चोद ! चिल्लाने लगी।

बबलू ने मेरी गेंदें पकड़ी और उन्हें मसलते हुए अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी। लंड अब पूरा अंदर घुस कर मेरी गर्भाशय की दीवारों से टकरा रहा था और आगे पीछे हो रहा था।

5 मिनट में बबलू ने मेरी फाड़ कर रख दी थी, मैंने 2 बार पानी छोड़ दिया था। इसके बाद वो हट गया। मेरी चूत फट गई थी और दर्द कर रही थी, मैं सीधी टांगें फ़ैला कर लेट गई। भाभी अपनी चूत चौड़ी करके जमीन पर पड़ी हुई थीं, बबलू ने कुछ धक्के उनकी चूत में मारे और उसके बाद दोबारा मेरी चूत में लंड पेल दिया, बोला- अपना वीर्य तो तुम्हारी चूत में ही डालूँगा।

मेरी चूत में 2-3 धक्कों बाद बबलू का पूरा वीर्य मेरी चूत में भर गया। मेरे पूरे गर्भ में वीर्य की बाढ़ आ गई। अगर मैंने गोली नहीं खाई होती तो पक्का गर्भ से हो गई होती।

इसके बाद हम दोनों उससे चिपक गए और 15 मिनट तक चिपके रहे। लंड बबलू का बड़ा और मोटा था लेकिन उसने मुझे आनन्द बहुत दिया। उसने मुझे वास्तव मैं प्यार से चोदा था।

 
5 मिनट में बबलू ने मेरी फाड़ कर रख दी थी, मैंने 2 बार पानी छोड़ दिया था। इसके बाद वो हट गया। मेरी चूत फट गई थी और दर्द कर रही थी, मैं सीधी टांगें फ़ैला कर लेट गई। भाभी अपनी चूत चौड़ी करके जमीन पर पड़ी हुई थीं, बबलू ने कुछ धक्के उनकी चूत में मारे और उसके बाद दोबारा मेरी चूत में लंड पेल दिया, बोला- अपना वीर्य तो तुम्हारी चूत में ही डालूँगा।

मेरी चूत में 2-3 धक्कों बाद बबलू का पूरा वीर्य मेरी चूत में भर गया। मेरे पूरे गर्भ में वीर्य की बाढ़ आ गई। अगर मैंने गोली नहीं खाई होती तो पक्का गर्भ से हो गई होती।

इसके बाद हम दोनों उससे चिपक गए और 15 मिनट तक चिपके रहे। लंड बबलू का बड़ा और मोटा था लेकिन उसने मुझे आनन्द बहुत दिया। उसने मुझे वास्तव मैं प्यार से चोदा था।

कुछ देर बाद अमित बाहर से खाना लेकर आ गया हम लोगों ने खाना खाया। रात का एक बज रहा था। हम लोग लखनऊ के लिए चल दिए।

दो बजे हम भाभी के फ्लैट मैं थे, जाते ही सब लोग सो गए मैं और भाभी साथ साथ सोई।

सुबह 6 बजे अलार्म से सब लोग उठे।

मैं बोली- भाभी अब पेपर देने का मन नहीं कर रहा, अब तो बस लंडों से खेलने का मन कर रहा है, सुबह से ही चुल उठ रही है, बबलू की याद आ रही है, रात चुदने में मज़ा आ गया।

भाभी बोली- तुझे और लंड मस्ती चाहिए तो कुछ और करें?

मैंने कहा- कुछ और क्या?

भाभी ने धीरे से कहा- मेरे पति के यार सतीश लखनऊ में हैं, मस्त चोदते हैं, मेरी उनसे अच्छी यारी है, मैं पहले भी 3-4 बार उनसे चूत और गांड मरवा चुकी हूँ। तू हाँ करे तो रात को तुझे उनके लंड का का मज़ा और दिला दूँ। अमित और उनके लंड साथ साथ मुँह चूत, और गांड में डलवाना, दो-दो लंडों से खेलने में बड़ा मज़ा आएगा।

मैंने कहा- अमित ऐसा करेगा?

भाभी हँसते हुए बोलीं- अमित बहुत हरामी है, उसको मैंने कई लड़कियों की चूत दिलाई है, बहुत बड़ा चोदू है। एक बार तो उसने अपने दो दोस्तों के साथ मेरी चोदी थी, तीन तीन लंड एक साथ मेरे मुँह, चूत और गांड में घुस गए थे। और तू कौन सी उसकी सगी भाभी है। उसकी सगी चाची, जब चाचा के साथ शादी के बाद आई थीं तो चाची की चोदने को उतावला हो रहा था, मैंने चाचा के रहते उसे चाची की चूत छुपकर चालाकी से दिलवा दी थी, बात चूत चुदाई की हुई थी लेकिन कुत्ते ने गांड मारे बिना चाची को नहीं छोड़ा। बस तुझे हाँ करनी है, तेरी हाँ के बिना मैं तुझे दूसरे आदमी से नहीं चुदवाऊँगी।

तभी अमित आ गया, भाभी बोलीं- अभी 7 बज रहे हैं, जाने से पहले सोच कर बता देना।

भाभी की बातों से मेरे मन में एक तूफ़ान सा आ गया था, दो-दो लंड एक साथ घुसने की सोच कर ही चूत फड़कने लगी लेकिन एक डर भी लग रहा था। आखिर जीत भाभी की हुई। जाने से पहले मैंने उनको हाँ बोल दिया। अमित मुझे परीक्षा भवन में छोड़ आया।

वहाँ मैं पूरे समय यही सोचती रही कि दो दो लंडों से चुदूँगी तो कैसा लगेगा। सोच सोच कर चूत गीली हो रही थी। वाकई यह तो मेरी हसीन चुदाई यात्रा थी, रोज़ नई नई तरह के सेक्स का आनन्द मिल रहा था। परीक्षा भवन में 45 साल के मास्टरजी ड्यूटी दे रहे थे, मेरा मन कर रहा था कि मास्टर जी से भी चुदवा लूँ। रंडी प्रवृति मेरे ऊपर हावी थी !

किसी तरह पेपर खत्म हुआ, अमित मुझे लेने आ गया। कार मैं बैठकर उसने मेरी चूचियाँ मसलीं और बोला- भाभी ने मुझे सब बता दिया है, आज रात तुम मस्त हो जाओगी। सतीश और मैं दो बार पहले भाभी और सतीश की चचेरी बहन को एक साथ चोद चुके हैं, मस्त मज़ा आता है। तुम्हारे साथ तो मज़ा आ जायेगा।

मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि तुम्हारी गांड नगरी में भी एंट्री मिलेगी। सेक्सी बातें करते हुए अमित मुझे साथ लेकर भाभी के फ्लैट पर आ गया।

शाम को 6 बजे सतीश आ गया, भाभी ने सतीश से मुझको मिलवाया। सतीश ने मुझे बाँहों में भरा और धीरे से मेरे होंठ चूसते हुए बोला- आप बहुत सुंदर हैं।

हम सब लोग आधे घंटे बातें करते रहे, मैं सतीश के पास बैठी थी। नॉन-वेज बातें शुरु हो गई थीं।

भाभी बोलीं- सतीश को घोड़ी की सवारी बहुत पसंद है।

अमित बोला- सतीश संतरियों का रस पीकर घोड़ी बहुत अच्छी दौड़ाता है।

भाभी हँसते हुए बोलीं- अर्चना के पास दो संतरियाँ रखी हुई है, सतीश जी उनका जूस निकाल लो।

सतीश ने मेरे स्तनों को ऊपर से दबाते हुए कहा- आपकी संतरियाँ तो बहुत रसीली लग रही हैं।

मुझसे रहा नहीं गया, मैं बोली- पहले भाभी की पाव रोटी खा लो, पूरी मक्खन से गीली कर रखी हुई है।

बातें करते करते हम सब गरम हो रहे थे, अमित ने भाभी के पेटीकोट में हाथ डाल दिया और बोला- रजनी भाभी की पाव रोटी तो मैं खाऊँगा।

सतीश मेरी चूत ऊपर से सहलाते हुए बोला- आपकी पाव रोटी पर मक्खन हम लगा देंगे।

भाभी बोलीं- अब तू जाकर नहा ले और अपनी पाव रोटी गर्म कर, उसके बाद मक्खन सतीश से लगवा लेना, यह अच्छा लगाता है।

 
सतीश मेरी पजामी के ऊपर से मेरी चूत सहला रहा था, मुझसे बोला- आओ नहाते हैं।

भाभी बोलीं- तू सतीश के साथ नहा ले, तब तक मैं और अमित बाहर घूम कर आते हैं।

भाभी और अमित के जाने के बाद सतीश ने मुझे बाँहों मैं भर कर एक बड़ा लम्बा चुम्बन मेरे होंटों पर लिया और बोला- आप बहुत अच्छी लग रही हैं।

मैं थोड़ा संकुचा रही थी, सतीश बोला- आप और हम साथ नहाते हैं, इससे हमारे आपके बीच की दूरी मिट जाएगी।

मैं राज़ी हो गई अमित ने अपने कपड़े उतार दिए थे, अब वो सिर्फ एक चड्डी में था। उसने मेरी कमर में हाथ डाला और मेरा कुरता पजामा उतरवा दिया।

अब मैं उसके सामने एक पारदर्शी ब्रा और पैंटी मैं थी। उसने मेरी ब्रा के ऊपर से चूचियों पर हाथ फिराते हुए कहा- आपके कबूतर बहुत सुंदर हैं, आपकी आज्ञा हो तो इन्हें आजाद कर दूँ?

और उसने मेरी ब्रा का हूक खोल कर मेरे दोनों कबूतरों को आजाद कर दिया, फड़फड़ा कर दोनों कबूतर बाहर निकल आए।

सतीश ने दोनों कबूतरों की चोचें मुँह में लेकर उनको एक एक बार चूसा। मेरी चूत लसलसी होने लगी थी। हम दोनों बाथरूम में आ गए, सतीश ने शावर चला दिया और मुझे बाँहों में भर लिया, हम दोनों शावर में नहा रहे थे, हमारे बीच का अजनबीपन दूर होता जा रहा था। मेरे स्तन सतीश के सीने को छू रहे थे, वो नीचे झुका और मेरी नाभी चूसते हुए मेरी पैंटी पर आ गया। उसने अपने हाथों से मेरी पैंटी नीचे कर दी और बोला- अमृत का स्वाद तो ले लेने दो रानी !

और वो मेरी गीली चूत को चाटने लगा। मैं गर्म हो रही थी, ऊपर से ठंडे पानी ने मुझे गर्म कर दिया था, मुझे भाभी की बात सही लग रही थी। हर मर्द का मज़ा अलग होता है। मैं काम रस में नहाने लगी थी, मैंने अपने को हिला कर पैरों मैं पड़ी पैंटी अलग कर दी थी।

सतीश अब सीधा हो गया। उसने अपना अंडरवीयर उतार दिया। मेरी आँखों के सामने एक पतला लम्बा लंड खड़ा था। मेरी पीठ से चिपक कर मेरी संतरियों का मसल मसल कर रस निकाल रहा था। उसका नंगा लंड मेरी गांड से सटा हुआ था मेरी आह ऊह की आवाजें धीरे धीरे निकल रही थीं। सतीश ने मेरे चुचूक नोचते हुए पूछा- आगे से प्यार करवाना है या ऐसे ही अच्छा लग रहा है?

मैं बोली- अब लंड डालो, बड़ी प्यास लग रही है।

मुझे सतीश ने सीधा किया, बाँहों में भर लिया और कस कर भींच लिया। अब उसका लंड मेरी चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। मैं भी उससे कस कर चिपक गई थी।

उसने मुझे अपने पैरों पर खड़ा कर लिया था और मुझे ऊपर की तरफ उठा कर धीरे धीरे हिल कर लंड मेरी चूत के होंटों में घुमा रहा था, सच में नया मज़ा था।

सतीश अब मेरा यार था। उसने मेरे होंटों पर पप्पी ली और बोला- अंदर डाल दूं मेरी जान?

मैंने मुस्करा कर आँखें बंद कर लीं।

सतीश ने मुझे चूतड़ों से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाया और एक मंझे हुए खिलाडी की तरह खड़े खड़े ही अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

गहरी आह की आवाज़ से मैंने उसका स्वागत किया। मैं सतीश के पैर के ऊपर आराम से चिपके हुए खड़ी थे और उसका लंड मेरी चूत में घुसा हुआ था। अमित के लंड से बिल्कुल अलग एक मज़ा था। पतला लंड था लेकिन जिस तरह मेरी चूत में घुसा हुआ था वो अमित के लंड से कम मज़ा नहीं दे रहा था, साथ ही साथ मुझे सतीश के साथ आज रात मिलने वाले आनन्द का अहसास करा रहा था। मुझे पता चल गया था कि औरतें एक से जयादा लंड खाने के बाद लंड की शौकीन क्यों हो जाती हैं।

सतीश ने 2-3 मिनट बाद लंड निकाल कर मुझे गोद में उठा लिया और नहाने वाले स्टूल पर बैठ कर दुबारा अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। सतीश ने मेरी टांगें अपने पीठ पर बांध लीं और नीचे से मेरी चूत को लंड से पेलने लगा। उसमें अच्छी ताकत थी, बैठे बैठे ही वो मुझे अच्छी तरह चोद रहा था। उसने मुझे मस्त कर दिया था। मेरे होटों पर होंठ रखे और पूछा- रानी, मज़ा आ रहा है? दर्द तो नहीं हो रहा?

मैंने उसे भींच लिया और बोली- आपने तो मस्त कर दिया ! आह, बहुत अच्छा लग रहा है, और चोदो ! आहहा बड़ा मज़ा आ रहा है।

उसने मेरे होटों पर होंठ रख दिये। 5 मिनट की चुदाई के बाद उसने मुझे सीधा किया और पीछे दीवार से टिककर मेरे को दुबारा लोड़े पर बैठा लिया मेरी गेंदें अब उसके हाथों में थीं, सामने शीशे में अपनी गेंदों की मसलाई और चुदाई देख रही थी। लौड़ा मेरी चूत चोद रहा था।

सतीश को शीशे में देखकर मैं मुस्कुराई, उसने अपना लौड़ा बाहर निकाला और बोला- शीशे में देखो लौड़ा कैसे अंदर घुसता है !

उसने दुबारा मेरी जांघें चौड़ी करके लौड़ा धीरे धीरे से मेरी चूत में घुसा दिया। शीशे में मेरी फ़ैली हुई टांगों के बीच लौड़ा घुसते देख मैं उत्तेजित हो गई थी। लौड़ा घुसने के बाद सतीश ने तेज धक्कों से मेरी चूत फाड़नी शुरू कर दी थी। मैं ऊह आह ऊह का हल्ला मचाती हुई चुदवाने लगी।

5 मिनट बाद मेरी चूत वीर्य से नहा गई। इसके बाद हम लोग 5 मिनट तक चिपक कर नहाए। नहाने के बाद मैंने सिर्फ छोटी स्कर्ट बिना पैंटी के और अमित ने नेकर पहन ली।

हम लोग कमरे में आ गए।

 
बिस्तर पर लेट कर मैं और सतीश बातें करने लगे। सतीश मुझे इस समय एक अच्छा आदमी लग रहा था उसने मुझे अपना बना लिया था। मेरी शर्म पूरी दूर हो गई थी रात के 10 बज रहे थे, भाभी का फ़ोन आया कि वो लोग आ रहे हैं। भाभी और अमित साढ़े दस बजे आए।

मैंने और भाभी ने एक-एक जाम व्हिस्की का अमित और सतीश के लिए बनाया। मैं सतीश की जाँघों में और भाभी अमित की जाँघों पर नंगी होकर बैठ गईं। दोनों ने हमारी चूचियां और जांघें मसलते हुए हमें प्यार से रगड़ा और अपने जाम ख़त्म किये। हम सब लोगों ने उसके बाद खाना खाया। इसके बाद यह तय हुआ आज भाभी अमित के साथ और मैं सतीश के साथ सोऊँगी।

12 बजे मैं सतीश के कमरे में आ गई। सतीश से चिपक कर मैं लेट गई सतीश का नेकर मैंने उतार दिया और उसका लंड अपने हाथों में पकड़ लिया।

सतीश का लंड सहलाने में बड़ा आनन्द आ रहा था। सतीश मेरे बाल सहला रहा था, मैं चाह रही थी कि वो मेरी चुदाई करे लेकिन सतीश शांत लेटा हुआ था। उसका लंड पूरा कड़क हो रहा था।

मुझसे रहा नहीं गया, मैं बोली- सतीश चोदो ना मुझे ! मसल दो मुझे।

सतीश मुस्कराया और मेरे को सीधा करके बोला- अर्चना, मेरी एक बात मानोगी?

मैंने पूछा- क्या?

“एक मिनट रुको, मैं बताता हूँ !”

सतीश बाहर गया और एक पतला सा अपने लंड जितना लम्बा और लंड से थोड़ा मोटा बैंगन लेकर आया, बोला- प्लीज़ इसे अपनी चूत में डाल कर दिखाओ न। छोटेपन में एक बार मैंने अपनी मामी को चूत में बैंगन करते देखा था तबसे मुझे अपनी आँखों के सामने औरतों को बैंगन चूत में डलवाते हुए देखने में बड़ा मज़ा आता है। प्लीज़ करके दिखाओ न।

उसने मेरे हाथ मैं बैंगन पकड़ा दिया और मेरे गले में बाहें डालकर मेरे होंटों को चूसने लगा।

होंट चूसने के बाद सतीश बोला- रानी, मेरी इच्छा पूरी कर दो न?

मैंने कहा- ठीक है ! लेकिन किसी को बताना नहीं !

उसने हाँ में मुंडी हिलाई।

मैंने अपनी जांघें चौड़ी की और चूत में बैंगन घुसा लिया। पतला 7 इंची बैंगन बड़े आराम से अंदर तक घुस गया।

मैं अपनी टांगें फ़ैला कर चूत में बैंगन करने लगी, सतीश मुझे बैंगन करते हुए देख कर अपनी मुठ मारने लगा, उसे देखकर मैं मुस्करा रही थी, मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

5 मिनट बाद सतीश ने उठकर बैंगन निकाल कर एक तरफ़ रख दिया और मेरे गालों पर पप्पियों की बारिश कर दी। मैंने उसे चूत मारने का इशारा किया उसने मुझे तिरछा लेटा कर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया और प्यार से मेरे गालों और चूचियों को सहलाते हुए मुझे चोदने लगा।

मेरी चुदाई यात्रा की गाड़ी अपने अगले पड़ाव की तरफ दौड़ने लगी।

थोड़ी देर बाद पलंग पर सीधा लेटा कर सतीश मुझे चोदने लगा। सतीश अमित से बड़ा चूत का खिलाड़ी था। एक कुशल खिलाड़ी की तरह वो चोदते हुए मेरे सारे अंगों से खेल रहा था। मेरी गेंदों की शामत आई हुई थी, सतीश एक हैवान की तरह मेरे स्तनों की मसलाई, चुसाई कर रहा था, मेरी चूत पानी छोड़ रही थी और उसका लंड मेरे चूत रस से नहा रहा था, लौड़ा पूरे जोश के साथ मेरी सुरंग चौड़ी करते हुए उसकी खुदाई चोद-चोद कर कर रहा था।

कुछ देर बाद सतीश लेट गया और मुझे उसने अपने ऊपर लिटा लिया। मैं उसके ऊपर लेटी हुई थी, मोटा लंड मेरी चूत में अब आराम कर रहा था, शायद अगले हमले की तैयारी में था। उसका हाथ मेरे चूतड़ों पर घूम रहा था। उसने मेरी गांड में अपनी दो उँगलियाँ घुसा कर गांड चौड़ी की और साइड में पड़ा हुआ बैंगन मेरी गांड में डाल दिया।

मुझे तेज दर्द सा हुआ।

सतीश ने मुझे एक हाथ से कसकर दबा रखा था, थोड़ी देर में सात इंची पतला बैंगन मेरी गांड में घुस चुका था, मेरी आँखों में पानी आ रहा था। मैं सतीश पर चिल्ला रही थी- कुत्ते ! बाहर निकाल ! दर्द हो रहा है।

लेकिन सतीश ने मुस्कराते हुए मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और तिरछा कर दिया। बैंगन गांड में, लंड चूत में था। अमित ने लंड बाहर निकाल लिया और 3-4 बार मेरी गांड में बैंगन आगे पीछे किया, इसके बाद उसे बाहर निकाल लिया और मुझे प्यार करने लगा।

उसका लंड तना हुआ था। उसने 10 मिनट बाद लंड फिर चूत में डाल दिया और मुझे चोदना शुरू कर दिया, थोड़ी देर में उसने वीर्य मेरी चूत में उड़ेल दिया था, पूरी चूत वीर्य से नहा गई सतीश का वीर्य मेरी चौड़ी और खुल चुकी चूत से बाहर बह रहा था। मैं आनन्द से नहा गई, इतने आनन्द की तो मैंने कल्पना भी नहीं की थी। मैं सतीश से चिपक गई।

उसने दुबारा मेरी गांड में बैंगन आगे पीछे करना शुरू कर दिया। मुझे दर्द हो रहा था लेकिन उसने मुझे अपनी बाँहों में दबा रखा था। दस मिनट के बाद उसने मेरा गाण्ड से बैंगन निकाला तो मुझे बड़ी राहत मिली।

 
सतीश बोला- आओ अब एक एक छोटा पेग व्हिस्की का लेते हैं।

हम दोनों ने एक एक छोटा पेग व्हिस्की का लिया। कुछ देर बाद मैं नशे में थी।

सतीश बोला- एक एक राउंड और हो जाए? तुम मेरा लोड़ा चूस कर खड़ा करो, एक बार और तुम्हें चोदना है।

सतीश की मर्दानगी में कुछ बात थी, मैं मना नहीं कर पाई और नशे मैं उसका लौड़ा चूस कर मैंने खड़ा कर दिया। उसने खड़े होकर लौड़े पर तेल लगाया और मुझे उल्टा कर दिया मुझे लगा पीछे से वो मेरी चूत मारेगा।

सतीश ने मेरे पेट के नीचे दो तकिए रखे और मेरी टाँगें चौड़ी कर मेरी चूत में अपना लंड घुसा कर 3-4 धक्के मारे। इसके बाद उसने लंड का सुपारा मेरी गांड के मुँह पर रख दिया। मेरी गांड में उसका लंड छू रहा था, उसने अपने हाथों से मेरी गांड में अपना सुपारा घुसा दिया। मैं उई करते हुए उछल पड़ी, उसका लंड फिसल गया। हम दोनों नशे में थे। उसने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और मुझे दबा कर अपना लंड मेरी गांड पर मारा तो लंड का सुपारा गांड में प्रवेश पा गया।

सतीश औरतों की मारने में खिलाड़ी था। इस बार उसने मुझे उचकने का मौका नहीं दिया और मेरी पीठ पर अपने हाथों का जोर डाल दिया और चिल्लाते हुए बोला- रंडी, साली ! मज़े भी करने हैं और रो भी रही है? प्यार से ठोक रहा हूँ तो नखरे कर रही है? आज तक जिस पर भी चढ़ा हूँ, गांड फाड़े बिना नहीं छोड़ा है उसे !

और वो पूरी ताकत से अपना लंड मेरी गांड में ठूंसने लगा।

मैं जोर से चिल्ला रही थी- उई मर गई ! मर गई, छोड़ो सतीश, छोड़ो !

लेकिन औरतों की चूत से खेलने वाले खिलाडियों को पता होता है कब मारनी है और कब प्यार करना है इस समय मेरी मारी जा रही थी, सतीश लंड पेलता जा रहा था और बोलता जा रहा था- रंडी, साली ! रो क्यों रही है? मज़े कर एक बार गांड का मज़ा ले लोगी फिर चूत मराने का मन नहीं करा करेगा।

सतीश ने अपना लंड पूरा ठोक कर मेरी गांड में घुसा दिया मेरी आँखों में आँसू आ गए थे। उसने अब अपने हाथ मेरी पीठ से हटा लिए थे लेकिन अब मेरी गांड उसके लंड के कब्जे में थी, मैं छुतने की कोशिश कर रही थी लेकिन अब कोई फायदा नहीं था। उसने मेरे बालों को सहलाया और बोला- अब एक अच्छी औरत की तरह गांड ढीले छोड़ो, जब गांड चुदेगी तो वैसा ही मज़ा आएगा जैसे कि चलती गाड़ी में हवा लगती है।

मरती क्या नहीं करती ! मैंने अपनी गांड ढीली छोड़ दी।

सतीश ने मेरी कमर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर गांड में गाड़ी दौड़ानी शुरू कर दी थी। मेरी चीखें निकल रही थीं, मेरी गांड मारी जा रही थी। कुछ धक्कों के बाद मुझे मज़ा आ रहा था लेकिन दर्द बहुत हो रहा था। बीच में सतीश ने मेरे चूचे पकड़ लिए थे और अब वो धीरे धीरे चोद रहा था। मेरी गांड फट गई थी !

5 मिनट के बाद सतीश ने अपना वीर्य गांड में छोड़ दिया। मेरी गांड की सुहागरात पूरी हो गई थी। सुबह के 2 बज रहे थे सतीश ने बाँहों में भरा और बोला- तकलीफ हुई उसके लिए माफ़ी। सुबह उठोगी तो बहुत अच्छा लगेगा।

मैं लेट कर सो गई।

अगले दिन दोपहर एक बजे नींद खुली मेरी गांड बहुत दुःख रही थी। उठकर भाभी के कमरे में झांक कर देखा तो भाभी और अमित नंगे सो रहे थे।

मैंने भाभी को उठाया, आँख मलते हुए भाभी उठीं, भाभी लंगड़ा रही थीं, बोली- 4 बजे सो पाई हूँ, अमित ने कल गांड की माँ चोद दी, दो बार चढ़ा साला ! बड़ा दर्द हो रहा है !

मुझे भी लंगड़ाते हुए देख कर बोलीं- वाह, तेरी गांड की भी सुहागरात मन गई। सतीश ने तो आज तक जो भी लोंडिया मिली है बिना गांड मारे नहीं छोड़ा है।

हम लोग बातें करते हुए बाथरूम में आ गई, साथ नहाते हुए हम दोनों ने एक दूसरे की गांड पर दवाई लगाई।

भाभी बोली- चल अच्छा है, तेरी गांड खुल गई। अब किसी मोटे लंड वाले से गांड चुदेगी तो दर्द ज्यादा नहीं होगा। यह अमित भी बड़ा हरामी है, तेरी गांड मारे बिना तुझे दिल्ली नहीं जाने देगा। साले का लंड भी मोटा है। एक बार अपनी कामवाली की कुंवारी गांड में डाल दिया था, बेचारी बेहोश हो गई थी, बड़ी मुश्किल से बीस हजार में मामला निपटा था। अब तेरी गांड खुल चुकी है, अमित का लंड तो घुस जाएगा लेकिन मज़े वाला दर्द भी बहुत होगा। साले को ठीक से गांड मारनी आती भी नहीं, लेकिन मज़ा अच्छा देता है।

हम दोनों नहाने के बाद अपने कुत्तों के लिए नाश्ता बनाने लगे।

3 बजे नाश्ता खाकर हम लोग बाज़ार घूमने चले गए। बाज़ार से खाना खा पीकर 9 बजे हम लोग लौटे।

पता नहीं अमित और सतीश ने आपस में क्या बात चीत की, कहने लगे कि हम दोनों को दो दिन के लिए बनारस जाना है। दोनों रात को बनारस चले गए, मैं और भाभी रात में गहरी नींद सोए, सुबह हम दोनों तरो ताज़ा थी, हम दोनों को बड़ा अकेला अकेला सा लग रहा था।

मैंने अपनी गांड की सुहागरात की पूरी कहानी भाभी को सुनाई। अगली रात को चूत कुनमुना रही थी, गांड में भी खुजली हो रही थी, दोनों सहेलियाँ लंड मांग रही थीं। भाभी और मैं नंगी होकर ब्लू फिल्म देखते एक दूसरे की चूत और चूचियों से रात 12 बजे तक खेलती रहीं। भाभी ने मुझे 2X2 खेल के लिए तैयार कर लिया था।

अगले दिन मुझे सतीश और अमित की याद आ रही थी। शाम को दोनों लोगों को वापस आना था और आज रात हम चारों को एक साथ सेक्स का खेल खेलना था, एक डर सा लग रहा था लेकिन यह सोचकर कि जब इतनी रंडीबाजी कर ली है तो यह भी सही ! दोबारा मौका मिले या नहीं ! घर जाकर तो गाज़र-मूली ही चूत में डालनी पड़ेगी।

 
अगले दिन रात को आठ बजे सतीश और अमित वापस आ गए और आते ही नहाने चले गए।

भाभी और मैं कॉफी बनाकर ले आई। सतीश और अमित ने तौलिया बाँध लिया था, भाभी ने साड़ी और मैंने सलवार सूट पहन रखा था।

कॉफी पीकर हम लोग बातें करने लगे, सतीश मेरा हाथ सहला रहा था।

सतीश को देखती हुई भाभी बोली- नया माल देखकर हमें तो भूल ही गए?

सतीश बोला- जलन हो रही है? चिंता न करो, आज रात पहले तुम्हें ही बजा देता हूँ।

सतीश उठा और भाभी को गोद में उठा लिया और पलंग पर लिटा दिया और उनकी साड़ी-पेटीकोट ऊपर तक उठा दी। भाभी की चूत दिखने लगी थी। सतीश का तौलिया नीचे गिर चुका था उअर उसका तना हुआ लंड हवा में लहरा रहा था।

भाभी उसे धक्का देते हुए बोली- हरामी, कपड़े तो उतार लेने दे, साड़ी ख़राब हो जाएगी !

लेकिन सतीश ने भागने की कोशिश कर रही भाभी को पीछे कमर से पकड़ लिया और बोला- प्यार में कपड़े उतारने की क्या जरूरत?

उसने पलंग पर भाभी को गिरा कर पीछे से भाभी का पेटीकोट और साड़ी ऊपर कमर तक उठा कर पीछे से झांकती भाभी की चूत में एक झटके में लंड फिट कर दिया। सतीश अमित से बड़ा लौड़े का खिलाड़ी था, चूत दिखते ही पल भर में लौड़ा अंदर घुसा देता था। भाभी की चूत अब चुद रही थी।

8-10 धक्कों के बाद सतीश ने भाभी को छोड़ दिया और बोला- अब कपड़े उतार लो ! यह तो ट्रेलर था।

मैं मुस्करा रही थी, भाभी बोलीं- ट्रेलर इस अर्चना को भी दिखाया करो।

अमित ने मुझे गोद में उठा लिया और बोला- भाभी को मैं ट्रेलर दिखा देता हूँ।

और उसने मुझे पीठ के बल पलंग पर लेटा दिया और मेरे बालों से एक चिमटी निकाल कर मेरी पजामी में छेद कर दिया और पजामी चूत के पास से फाड़ दी, तौलिया नीचे गिरा कर अपना लंड मेरी चूत पर लगा दिया। मुझे जब तक कुछ समझ में आता, मेरी चूत में लंड घुस चुका था।

अमित ने मेरी चूत में 10-12 शोट पेल दिए।

भाभी ताली बजाते हुई बोली- यह हुई न बात।

मेरी पजामी फट गई थी। इसके बाद अमित हट गया, भाभी और मैंने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए अपने कपड़े उतार दिए। हम दोनों पूरी नंगी हो गईं। भाभी बोलीं- तुम दोनों ने हमें पूरी रंडी बना दिया है। कपड़ों की चुदवाएं इससे अच्छा है चूत की ही चुदाई करा लें। जितना बजाना है बजा लो, आज रात, कल तो वापस जाना है।

इसके बाद हम लोगों ने नंगे ही खाना-पीना किया और 9 बजे एक ब्लू फिल्म लगा दी जिसमें एक लड़की की चुदाई तीन आदमी कर रहे थे।

हम लोगों ने जमीन पर गद्दे बिछा दिए, अमित और सतीश गद्दों पर बैठकर ब्लू फिल्म देखने लगे। लड़की की चूत, गांड और मुँह में तीन आदमी अलग अलग आसनों से लंड पेल रहे थे। भाभी और मैं दूसरे कमरे में गए, भाभी ने मेरी चूत और गांड जेली क्रीम से भर दी और बोली- इससे दर्द कम होगा।

वापस कमरे में आकर हम कुर्सी पर बैठ गए, ब्लू फिल्म देखते देखते अमित और सतीश के लंड कड़े होते जा रहे थे, वो हमें हलाल करने वाली नज़रों से देख रहे थे।

भाभी बोली- डाल दो ! ऐसे क्या घूर रहे हो?

अमित अपना लौड़ा सहलाते हुए बोला- सोच रहे हैं कि पहले किसे हलाल करें, पिक्चर देख कर तो एक साथ चढ़ने का मन कर रहा है।

भाभी कुर्सी से उठीं और बोलीं- पहले तुम दोनों मेरी चोद लो। फिर मैं आराम से अर्चना की चुदाई देखूंगी।

भाभी की बात सुनने के बाद अमित ने भाभी को अपनी गोद में लेटा लिया और बोला- यह हुई न अच्छी बात।

सतीश उठकर भाभी की टांगों के बीच बैठकर उनकी चूत चूसने लगा। अमित ने भाभी का सर घुमाकर अपना लंड उनके मुँह में डाल दिया। भाभी चूत चुसवाते हुए अमित का लंड चूसने लगीं।

ये सब देखकर मेरा हाथ चूत खुजलाने लगा था। इसके बाद अमित ने भाभी को घोड़ी बनाया और उनके चूतड़ों को चौड़ी करवाकर चूत में लंड लगा दिया। सतीश ने अब आगे से उनके मुँह में लंड डाल दिया। चुदते हुए भाभी चूसने का मज़ा लेने लगीं, भाभी २-२ लंडों से खेल रही थीं।

मेरी चूत उछाल मार रही थी। मैंने अपनी चूत सहलाते हुए अमित को अपनी चूत मारने का इशारा किया तो अमित ने भाभी को चोदना छोड़ दिया।

 
अब सतीश भाभी की चूत में घुसकर उनकी जवानी के मज़े लेने लगा, अमित मेरे पास आ गया और मुझे कुर्सी से उठा कर अपनी जांघें फ़ैला दीं और मुझे अपने लौड़े पर बैठा लिया, खड़ा लौड़ा मेरी चूत के दरवाजे से सीधा अंदर तक पहुँच गया।

आह ! मुझे बहुत मज़ा आया। लौड़ा चूत में लगवाए हुए मैं भाभी की चुदाई देखने लगी, चुदते हुए चुदाई देखने का मज़ा अलग ही था। हम दोनों की ऊह आह ऊह की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। सतीश भाभी की चूत मार रहा था। कुछ देर चूत मारने के बाद सतीश ने लौड़ा निकाला और भाभी की गांड में घुसा दिया। सेकंडों में लौड़ा भाभी की गांड के अंदर था। भाभी लौड़ा घुसते समय ‘ऊई मर गई मर गई; चिल्ला उठीं लेकिन 5-6 शोटों के बाद भाभी ‘ऊह आह आह आहा ! मज़ा आ गया ! और चोद चोद थोड़ा तेज पेल ! पेल, बड़ा मज़ा आ रहा है !’ चिल्लाने लगीं, भाभी गांड के पूरे मज़े ले रही थीं। थोड़ी देर बाद भाभी और सतीश हट गए। सतीश ने भाभी को अपने ऊपर लेटा लिया और नीचे से उनकी चूत में लंड घुसा कर अमित को इशारा किया। अमित ने मेरी चूत से लंड निकाला और भाभी की फटी हुई चमकती गांड में घुसा दिया। अमित का लंड सतीश से ज्यादा मोटा था, भाभी जोर से चीखीं- उई उई मर गई !

अमित को 2-3 मिनट के करीब अपना पूरा लंड भाभी की गांड में ठोंकने में लगे। भाभी जोर से चीखी जा रहीं थीं, उसने पूरा लंड अंदर तक पेल दिया और भाभी को ठोकने लगा।

भाभी की दर्द वाली चीखें अब आह में बदल गई थीं। भाभी अमित और सतीश के बीच सैंडविच बनी हुई थीं। दो दो लंडों ने भाभी को ठोंकना शुरू कर दिया, भाभी एक रांड की तरह ऊई आह करते हुए मज़े से दो दो लंडों से ठुकाई का मज़ा ले रही थीं। मैं मन ही मन सोच रही थी कि मैं दो दो लंड नहीं घुसवाऊँगी।

भाभी इस समय मुझे चूत लंड के खेल की मजी हुई रंडी लग रही थीं। दस मिनट के बाद दोनों ने अपने लंड भाभी की चूत और गांड में खाली कर दिए। भाभी ने मुझे बुला लिया और हम चारों एक दूसरे से चिपक कर नंगे बिस्तर पर लेट गए। रात के बारह बजे थे, अभी मेरी जवानी का रस और दोनों को चूसना था लेकिन आधे घंटे में तीनों लोग सो गए।

मुझे लगा कि मैं बच गई और मैं भी चुपचाप सो गई।

सुबह आठ बजे के करीब भाभी मेरी चूत चूस रही थीं। मैं जाग गई, अमित और सतीश सिगरेट पी रहे थे। भाभी ने चूत से मुँह हटाया और बोलीं- तेरी चुदाई का मुजरा देखे बिना मैं यहाँ से नहीं जाऊँगी, अब तेरी चुदने की बारी है।

दुबारा वो मेरी चूत का दाना चूसने लगीं। थोड़ी देर बाद सिगरेट खत्म होने के बाद सतीश ने भाभी को अलग कर दिया और मेरी चूत में अपनी जीभ घुसा कर फिराने लगा, अमित मेरे कूल्हे पकड़ कर दबाने लगा। लौड़े के दोनों खिलाड़ियों ने मेरी चूत की भट्टी सुबह सुबह गर्म्म कर दी थी। मेरी चूत पूरी गर्म होकर रस छोड़ने लगी।

भाभी बोली- रंडीरानी, अब जरा पलटी मार लो।

मैं उलट गई। अमित ने मेरा मुँह अपनी गोद में रख लिया उसका लंड मेरे मुँह पर था, उसने बाल सहलाते हुए अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया और लंड चुसवाने लगा।

सतीश ने पीछे से आकर मेरे चूतड़ उठाए और मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया इस बीच भाभी ने मेरे पेट के नीचे दो मोटे तकिये रख दिए अब मैं आराम घोड़ी बनी हुई थी। पहली बार दो दो लंड मेरी सेवा कर रहे थे। दोनों लंड मेरे मुँह और चूत में दौड़ रहे थे। मैं भी कामाग्नि में नहाती हुई लपालप लंड चूस रही थी और दोनों कुत्तों के लौड़ों का मज़ा ले रही थी।

मुझे इस खेल में एक नया मज़ा आ रहा था। अमित मेरे बाल सहलाते हुए बोला- भाभी मुझसे भी गांड मरवा लो न ! थोड़ा दर्द होगा लेकिन मज़ा पूरा आएगा।

तभी रजनी भाभी बोलीं- इसने रात को मेरी गांड तुम दोनों से चुदते हुए बड़े मज़े से देखी है, इसकी गांड तो तुम्हें अब मारनी ही पड़ेगी, नहीं तो मुझे दूसरा कोई मोटे लंड वाला कुत्ता बुलाना पड़ेगा। आज ये भाभी नहीं, अर्चना रंडी है।

मैं लौड़ा मुँह से निकालते हुए बोल पड़ी- न बाबा न ! अब किसी नए आदमी से नहीं मरवाऊँगी, मुझे कोई परमानेंट रंडी नहीं बनना। सतीश-अमित तुम्हें जो करना है, कर लो, जितनी फाड़नी है, फाड़ लो लेकिन प्यार से मारना।

 
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