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Erotica मुझे लगी लगन लंड की

मैंने भी प्रत्युत्तर दिया- सर, परेशान न हों, मेरी चूत के अलावा भी और चूतें हैं आपके लंड के लिये!

मैं बस इतना ही कह पाई थी कि सुहाना, नमिता और मीना भी मेरे बगल में बैठ गई और बॉस के उंगली करने लगी। दीपाली के नंगे बदन पर उसके चोदूओं ने स्थान बदल लिए थे, अब टोनी दीपाली की चूत चोद रहा था, अश्वनी दीपाली के मुंह में लंड डाले हुए था।

इधर रितेश ने नमिता को लिया और उसको झुकाकर उसकी चूत में अपना लंड पेल दिया।

अमित ने सुहाना को उठाया, उसको झुकाकर उसकी गांड में लंड डाल कर चोदने लगा। मैं और मीना बॉस के पास थी, मैं बॉस के ऊपर से उतरी और उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी ताकि मीना को यह पता ना चल जाये कि बॉस झड़ चुका है। हालांकि बाद में सभी को पता चलने वाला था, फिर भी उस समय के लिये मैंने यही किया। कुछ देर बाद मीना ने मुझे हटाया और उसने बॉस के लंड को अपने मुंह में ले लिया। बाकी की अपेक्षा बॉस का लंड थोड़ा कमजोर था, फिर भी मीना बिना कुछ बोले उसके लंड को चूसने लगी। मैं अपनी गीली चूत बॉस के मुंह के पास ले गई और बाकी का काम बॉस ने करना शुरू कर दिया। मीना और मेरे कामुक अंग एक बार फिर बॉस को जोश दिलाने लगे, वो मेरी चूत में अपने दांत गड़ाने लगा। मेरे लिये यह अनोखा दर्द था। आज से पहले बॉस केवल दो मिनट मेरी चूत चाटता और फिर अगले एक मिनट में मेरी चूत में अपना लंड डाल कर हिलाता था और फिर मेरे अन्दर ही झड़ जाता था। उस समय मुझे गुस्सा बहुत आता पर उनकी कमजोरी को कभी जाहिर नहीं किया, भले ही मुझे बाद में खीरे या फिर दूसरे लंड का इंतजाम करना पड़ता रहा हो अपनी चूत की आग को शांत करने का। लेकिन आज उनमें भी एक अलग सा जोश दिख रहा था, उनका लंड तन चुका था। हम दोनों को हटाते हुए वो एक बार फिर दीपाली के पास पहुंच गये। इस समय टोनी और अश्वनी दोनों ही बारी बारी से दीपाली की चूत चुदाई कर रहे थे।

दीपाली के पास पहुँचने के बाद बॉस ने अश्वनी को हटाया जो कि उस समय दीपाली को चोदने में मस्त था, उसके बाद दीपाली को उल्टा लेटाया, फिर उसकी जांघों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा। इस तरह से दीपाली की कमर थोड़ी सी हवा में हो गई, उसका सीना और मुंह पलंग से सटे हुए थे। बॉस एक बार फिर घुटने के बल बैठ गये और उसके कूल्हे को थोड़ा फैलाते हुए उसकी गांड में अपनी जीभ चलाने लगे, अपने थूक से दीपाली की गांड को थोड़ा सा गीला करने के बाद अपनी एक उंगली दीपाली की गांड के अन्दर डालने का प्रयास करने लगे। इधर सभी लोग काफी देर तक चुदाई करने के कारण झड़ने के करीब आ चुके थे। दीपाली की चूत देख कर लग रहा था कि वो दो-तीन बार झड़ चुकी होगी। रितेश नमिता को चोद रहा था, नमिता को चोदना छोड़ रितेश दीपाली के पास गया और अपना लंड उसके मुंह में डाल कर पेलने लगा और फिर अपने लावा को दीपाली के मुंह के अन्दर छोड़ने लगा। टोनी ने मुझे पकड़ लिया, सोफे पर बैठ कर उसने मुझे अपने ऊपर बैठा लिया और मेरी चूत चोदना चालू कर दिया। कुछ इसी तरह का नजारा मीना और अश्वनी में था, अश्वनी भी सोफे पर बैठा हुआ था और मीना उसके लंड की सवारी कर रही थी।

इधर जब रितेश ने अपना पूरा माल जब दीपाली के मुंह में डाल कर फ्री हुआ तो अमित सुहाना को छोड़कर दीपाली के पास गया और उसने रितेश की जगह ले ली और उसके मुंह में लंड डाल कर चोदने लगा। दीपाली भी उसका साथ दे रही थी, ऐसा लग रहा था कि आज दीपाली को एक अलग तरह का अनुभव हो रहा था। बॉस भी अपने काम में लगे थे और दीपाली भी बॉस के काम को आसान करने में मदद कर रही थी। उसने एक हाथ से अपने कूल्हे को फैला लिया था ताकि बॉस उसकी गांड में आराम से उंगली अन्दर बाहर कर सके। इधर मैं और मीना, टोनी और अश्वनी के लंड पर उछल रही थी। बॉस दीपाली की गांड में अपनी दो उंगली डाल चुके थे। फिर वो खड़े हुए और रसोई के अन्दर चले गये। दीपाली अभी भी अमित के लंड को चाट-चाट कर साफ कर रही थी। तब तक बॉस रसोई से मूली ले लाये और एक बार फिर वो दीपाली की गांड को चाटने लगे।

इधर मैं भी झड़ चुकी थी और इस बात का पता टोनी को भी लग चुका था, मैं समझ चुकी थी कि टोनी भी दीपाली के मुंह में ही झड़ना चाहता था, मैं उसके ऊपर से हट गई, टोनी दीपाली के पास गया और उसके मुंह के पास ही अपना लंड हिलाने लगा। दीपाली अपने मुंह को खोल कर उसके वीर्य का अपने जीभ में गिरने का इंतजार कर रही थी, बॉस उसकी गांड चाटने के बाद उसकी गांड में मूली डालने लगा। इधर अश्वनी ने भी मीना को छोड़ दिया और दीपाली के मुंह में जाकर झड़ने लगा। बॉस ने आधे से ज्यादा मूली दीपाली की गांड में अब तक घुसेड़ दी थी। इधर जब सभी लोगों से दीपाली फ्री हो गई तो अब वो अपने खाली पड़ी चूत को सहलाने लगी और 'ऐसे ही करो... आज बहुत मजा आ रहा है मेरी जान... ऐसे ही... हाँ-हाँ ऐसे ही!' वो बॉस का हौसला बढ़ाने में लगी हुई थी। मूली को अन्दर बाहर करने से दीपाली की गांड काफी खुल गई। फिर बॉस ने पूरी तरह से खुली गांड के अन्दर थूका और फिर अपने लंड को उसके अन्दर डाल दिया।

इस समय सभी मर्दों के लंड दो राउन्ड पूरा करने के कारण मुरझाकर सुस्त पड़े हुए थे इसलिये सभी सोफे पर बैठे हुए बॉस और दीपाली के खेल को देखकर केवल अपने लंड सहला रहे थे। बॉस का लंड दीपाली की गांड में पूरी तरह चला गया था और बॉस उसकी गांड चोद रहे थे। बीच-बीच में वो मूली भी दीपाली की गांड में डालकर पेलते। इस बार बॉस करीब पंद्रह मिनट तक अपने खेल को खेल सके और और दीपाली की ही गांड में झड़ गये। उसके बाद बॉस अपने मुरझाये हुए लंड लेकर दीपाली के पास गये। दीपाली ने भी उसी प्यार के साथ बॉस के लंड को चाट कर साफ किया उसके बाद बॉस और दीपाली उस मूली को मिलकर खाने लगे जो थोड़ी देर पहले तक दीपाली की गांड की सैर करके आई थी। इस समय दोनों ही बड़े खुश नजर आ रहे थे।

सबसे पहला प्रश्न करने का मेरा अधिकार था तो मैंने सीधे ही अपने बॉस से पूछा- उन्हे कहाँ एक चूत कायदे से नसीब नहीं होती थी और अब एक साथ पांच पांच की चूत मिली, इनमें से आप कौन सी चूत को दुबारा सबसे पहले चोदना चाहोगे?

मेरा प्रश्न सुनकर मेरे बॉस की गांड फटी रह गई, क्या बोलें, वो समझ नहीं पा रहे थे।

उनकी बीवी यानि दिपाली ने उनको पीछे से कस कर पकड़ लिया और बोली- बताओ ना जान... तुम्हारे सामने पांच चूत हैं, तुम्हें सबसे ज्यादा चूत किसकी पसंद है।

बॉस- 'सच बोलूँ तो मुझे तुम्हारी ही चूत सबसे ज्यादा पसंद है!' मेरी तरफ इशारा करते हुए बॉस बोले।

'क्यों?' यह सवाल था दीपाली का- मेरी चूत तुम्हें क्यों नहीं पसंद है?

बॉस बड़े ही प्यार से दीपाली के हाथ को सहलाते हुए बोले- जान, आकांक्षा की चूत को मालूम है कि मेरे लंड को कैसे सही रखना है।
 
बॉस के इस जवाब से दीपाली थोड़ा गुस्सा आया तो, लेकिन फिर भी संभल कर बोली- ठीक है जानू, आज के बाद तुम्हें मेरी चूत से भी कोई शिकायत नहीं मिलेगी।

उसके बाद सुहाना दीपाली से बोली- आज तुम्हारी चूत लम्बे समय के बाद चुदी है। ऐसा क्या था जो इतने दिन तक का गैप हो गया? अब झिझकने की बारी दीपाली की थी, उसकी झिझक मिटाते हुए,

मेरे बॉस बोले- मेरे में ही कमी थी। मैं ज्यादा सन्तुष्ट नहीं कर पाता था और फिर इसी कारण हम दोनों के बीच दूरियाँ बढ़ती गई।

मीना बोली- तो अभय, आप ये बताओ कि फिर आकांक्षा आपसे कैसे सन्तुष्ट होती थी?

बॉस- 'ये आकांक्षा जाने... मैं आकांक्षा को भी सन्तुष्ट नहीं कर पाता था।'

रितेश मुझसे बोला- तो जान तुम्हारा तो पानी भी नहीं निकलता होगा?

मैं- 'नहीं मेरी जान... मैं इनके पास जब भी जाती थी तो पहले से ही मैं इतनी एक्साईटेड रहती थी कि जब तक ये झड़ते, मैं भी झड़ जाती थी और दोनों का काम हो जाता था।'

रितेश ने मेरे उत्तर को सुनकर मुझे अपनी बांहो में भर लिया।

तभी नमिता दीपाली से बोल बैठी- तो तुम भी चाहती तो किसी मर्द से चुद सकती थी, क्यों नहीं चुदी?

दीपाली- 'आज तो चुद गई हूँ ना... और वो भी अपने पति के सामने!'

इसके बाद हम सभी की बातें खत्म हो गई।रात के तीन बज रहे थे तो सभी सोने की तैयारी करने लगे।

सभी को सोये हुए ज्यादा समय नहीं हुआ होगा कि पेशाब आने के कारण मेरी नींद खुल गई और मैं उठ कर बाथरूम गई तो देखा बाथरूम में पहले से ही रितेश और दीपाली मूत रहे थे। मैं भी दीपाली के बगल में बैठकर मूतने लगी, मेरी और दीपाली की नजर रितेश के तने हुए लंड पर थी। पेशाब करके हम फ्री हुए तो वहीं पॉट पर रितेश को बैठा कर मैं और दीपाली बारी बारी से उसके लंड की प्यास अपनी चूत से बुझाने लगी, काफी देर तक हम दोनों लंड की सवारी करती रही। मैं और दीपाली दोनों ही खलास हो गये। फिर रितेश ही दीपाली को झड़ने तक चोदता रहा और उसने अपना माल दीपाली की चूत में निकाल दिया। उसके बाद हम तीनों सो गये।

मेरी नींद सुबह करीब आठ बजे खुली तो देखा कि बॉस मेरी चूत में अपने अंगूठा डालकर मुझे जगा रहे हैं और सभी मर्द इसी तरह सभी औरतों को जगाने की कोशिश कर रहे थे। उठने के बाद हम औरतों ने मर्दों के लंड को प्यार करने का पहला काम किया, उसके बाद सभी मर्द भी हम सभी की चूतों को चूमने लगे। उसके बाद टोनी ने अनाउन्स किया कि सभी लोग अपने पार्टनर को एक बार फिर चुन लें क्योंकि इस समय सभी टट्टी करने और नहाने जायेंगे। तो एक पेयर वाशरूम में जायेगा और फाइनल होकर निकलेगा। दीपाली को थोड़ा इससे ऐतराज था लेकिन समझाने पर वो भी मान गई।

तो हम औरतों ने यह मौका भी मर्दों को दे दिया कि वो अपनी पसंद की औरत चुन ले। सबसे पहले टोनी ही मेरे बगल में आ गया और मेरी गांड सहलाते हुए बोला कि मैं और आकांक्षा। उसके बाद अमित ने दीपाली को पकड़ लिया। रितेश ने मीना को, अश्वनी ने नमिता को पकड़ लिया और बॉस को सुहाना मिली। मुझे टट्टी बहुत जोर से लगी थी, मैं टोनी को लेकर बाथरूम में चली गई। मैं पॉट पर हगने के लिये बैठी ही थी कि अपने खड़े लंड को टोनी मेरे सामने कर दिया और मेरे मुंह को पकड़ कर अपना लंड मेरे मुंह के अन्दर पेल दिया और खुद ब्रश करने लगा। दिन की शुरूआत हो चुकी थी और यह तय था कि दिनभर चुदाई के अलावा कोई और काम नहीं होना था। इधर मेरी गांड से 'पड़पड़...' की आवाज आ रही थी और उधर टोनी का लंड मेरे मुंह के अन्दर था। जब मैं हग चुकी तो टोनी ने मेरी गांड धुलवाई। उसके बाद टोनी हगने बैठा तो उसके खड़े लंड पर मैं बैठ गई। वो हगता रहा और मैं उसके धधकते लंड की ज्वाला को शांत करने के लिये उसके लंड पर उछलती रही। करीब दस मिनट तक मैं उसके लंड पर उछलती रही, फिर मुझे महसूस हुआ कि मेरे अन्दर उसके लावे की फुहार पड़ रही है। टोनी के रस की एक एक बूंद मेरी चूत के अन्दर थी और उसका लंड ढीला होकर खुद ब खुद बाहर आ गया। फिर मैंने भी उसकी गांड और लंड को अच्छे से धोया, फिर हम दोनों ने एक दूसरे को खूब रगड़ रगड़ कर नहलाया। मैं और टोनी बाहर आ गये और फिर सभी बारी बारी से अन्दर गये और आते गये।

चूंकि मैं और टोनी सबसे पहले नहा धोकर फ्री हुये थे तो मैं रसोई में चाय और नाश्ता बनाने के लिये आ गई। दीपाली के कहने पर नहाने के बाद हम सभी को कपड़े पहनने थे तो मैंने और टोनी ने कपड़े पहन लिये, मैंने गाउन ही पहन लिया, जबकि टोनी ने कैपरी, बनियान पहन लिया और मेरे पीछे-पीछे रसोई में आ गया। मैं चाय के लिये पानी चढ़ा ही रही थी कि टोनी ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और चाय बनाने के लिये मना किया, बोलने लगा कि जब जोरू और दारू दोनों है तो चाय की क्या जरूरत है।

वो मुझसे सेक्सी बातें करते हुए मेरे चूतड़ सहलाता रहा और मेरी चूचियों से खेलता रहा, चाय बनने तक अपने लंड से मेरी गुदा (गांड) को सहलाता रहा। मैं साथ ही और भी नाश्ते की तैयारी कर रही थी और टोनी मेरे से छेड़खानी करने के साथ-साथ मेरी हेल्प भी कर रहा था। उसके बाद उसकी बीवी यानि की मीना भी रितेश के साथ साथ रसोई में आ गए। मीना के आने के बाद रितेश और टोनी को बाहर जाने के लिये बोला,

टोनी बोला- यार यह मेरा जो लंड है चूत और गांड के अन्दर जाने के लिये मरा जा रहा है।

मीना बोल पड़ी- तुम मर्द बाहर जाकर एक दूसरे की गांड मारो और लड़कियों को रसोई में भेजो ताकि नाश्ता और खाना बना कर रख लिया जाये।

मीना की बात सुनकर मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, लेकिन मैं चुपचाप नाश्ते और खाने की तैयारी करती रही और जो जैसे जैसे फ्री होता गया वो रसोई में आकर अपना काम करता रहा। जब हम लोग रसोई का काम निपटा कर बाहर आये तो देखा तो कोई अखबार पढ़ने में मस्त है तो कोई योगा कर रहा है तो कोई टीवी देख रहा है पर टोनी कम्प्यूटर में कुछ डाउनलोड कर रहा था। जो टोनी ने डाउनलोड किया था, उसे उसने पेन ड्राईव में लेकर पेन ड्राईव को एल॰ई॰डी॰ से अटैच कर दिया और सभी जब नाश्ता करने बैठे तो टोनी ने वो डाउनलोडेड मूवी चालू कर दी। यह तो पक्का था कि टोनी ने मूवी डाउनलोड की है तो वो मूवी क्या होगी? खैर हम लोग नाश्ता करने लगे।

अब मूवी में एक लड़की घर के बाहर घूम रही होती है। घूमते घूमते वो सड़क के किनारे खड़े होकर सड़क पर दोनों तरफ देखते हुए पहले अपनी पैन्टी उतारती है और फिर अपने एक हाथ से अपनी एक टांग को पकड़ लेती है और मूतने लगती है। वो सीन खत्म होता है

तो दूसरे सीन में दो लड़कियाँ किसी पार्क में बैठी होती है और फिर उनको मूतास लगने लगती है, वो एक दूसरे के सामने पार्क में ही बैठकर मूतना शुरू कर देती हैं। लोग उन लोगों को देखते हुए कमेन्ट भी कर रहे थे।

तीसरा सीन एक कमरे का है जहाँ पर एक गंजा आदमी कई नंगी लड़कियों से घिरा होता है, आदमी सोफे के सहारे जमीन पर बैठ जाता है और अपना सर सोफे पर उल्टी दिशा में टिका कर अपना मुंह खोल देता है। उसके बाद एक एक करके लड़कियाँ आती है और उसके मुंह में मूतने लगती हैं। जितना मूत वो एक सांस में पी सकता है उतना मूत वो पीता है और फिर सांस लेने से बाकी की धार गिर कर उसके जिस्म को नहालने लगती है। बीच बीच में लड़कियाँ तो उसके सिर को ठीक अपनी चूत के नीचे लगा कर उसके सिर पर ही मूतने लगती है। इस तरह से 20 के करीब लड़कियाँ उसके या तो मुंह के अन्दर मूतती है या फिर उसे अपनी मूत से नहलाती हैं।

इस सीन को देखकर सुहाना देख कर बोली- कल रात तो इस सीन को हम लोगों ने भी किया था।

टोनी बोला- 'पर हमारे बीच अब दो नये लोग हैं इसलिये उनको दिखा रहा हूँ कि हमारे साथ सेक्स में ये सब भी करना पड़ेगा।'

टोनी की बात सुनकर सभी ने हाँ में हाँ मिलाई। दीपाली तैयार हो गई और कहने लगी कि कल रात से मैंने अपना मन बना लिया कि मैं भी जिंदगी को ऐन्जॉय करूँगी और मेरे अभय को भी करने दूंगी। हम लोगों के पास इतना सब कुछ है लेकिन उसका एन्जॉय नहीं कर पा रहे हैं। एक बार फिर दारू का दौर चला, सभी मर्द और औरतें हर पल का मजा ले रही थी और किसी को कुछ भी दिक्कत नहीं हो रही थी। दारू का दौर, सिगरेट के धुएं से बनते हुए छल्ले और उसके बाद हम औरतें जो हर समय अपनी चूत की प्यास बुझाने के साथ-साथ मर्दो के लंड को भी शांत कर रही थी। दारू के साथ साथ हम सभी ने खाना खाया और फिर थोड़ी देर के लिये टहलने के लिये चल दिये। अभी तो काफी लंबा प्रोग्राम था इसलिये थोड़ी ही देर में हम सभी लोग वापस आ गये।

एक बार फिर राउन्ड शुरू हो चुका था और टोनी ने बोतल घुमानी शुरू की और बोतल रूकी दीपाली की तरफ!

दीपाली मुस्कुराकर मेरी तरफ देखने लगी, हम दोनों ने आपस में ही एक दूसरे को आँखों ही आँखो में इशारा किया, दीपाली मुस्कुराती हुई खड़ी हुई और,

दीपाली बोली- मेरे प्यारे पति देव लोग!

इस पर सभी हँसने लगे तो वो सबको चुप कराते हुए बोली- इसमें हँसने जैसी कोई बात नहीं है। तुम लोग हम औरतों के पति ही तो हो और हम औरतें तुम लोगों की पत्नियाँ!

फिर दीपाली अभय की तरफ गई और उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर बोली- अभय यह मेरे लिये भी मुश्किल है और तुम्हारे लिये भी और इसमें दर्द भी ज्यादा है। लेकिन अब मेरी बारी है कि मैं अपनी मन की ख्वाहिश को तुमसे पूरी कराऊँ।

अभय सर भी उत्साह में आते हुए बोले- हाँ हाँ, क्यों नहीं, जब तुमने मेरी बात पूरी की है तो मैं भी तुम्हारी हर बात पूरी करूँगा।

अभय सर का इतना बोलना था कि दीपाली ने टोनी और अमित के हाथ को पकड़ के अभय सर के बगल में खड़ा किया और खुद अभय सर के पीछे खड़ी होकर उसके निप्पल के मसलते हुए बोली- मेरी जान, इस खेल में टोनी और अमित ये दोनों भी शामिल है। और ये जो तुम्हारे साथ करेंगे उसमें तुम्हें थोड़ा दर्द होगा, लेकिन अगर तुम्हें दर्द मासूस हो तो तुम खुल कर चिल्ला सकते हो।

अभय सर तुरन्त ही बोल पड़े- मेरी जान, तुम तो ऐसा कह रही हो कि ये दोनों मेरी गांड मारेंगे?

दीपाली बोली- 'बिल्कुल सही पकड़ा है तुमने!' जोर से हँसते हुए दीपाली अभय सर के सामने आ गई।

अभय सर गिड़गिड़ाते हुए बोले- दीपाली, मेरी जान कुछ और करवा लो, लेकिन मेरी गांड मत मरवाओ!

दीपाली बोली- देखो अभय, यह पहले ही तय हो चुका है कि कोई पार्टनर अगर अपने पति या पत्नी से कुछ भी करने को कहेगा तो वो न नहीं करेगा, बल्कि सब उसके उस टॉस्क को पूरा करवाने में हेल्प भी करेंगे। अब तुम चुपचाप अपनी गांड इनसे मरवा लो नहीं तो मैं इनको बोल कर तुम्हारा दैहिक शोषण करवा दूंगी और फिर मैंने भी तो तुम्हारे टॉस्क को पूरा करवाने में तुम्हारी हेल्प की थी।

अभय सर के पास कोई जवाब नहीं था।

तभी दीपाली अमित और टोनी से बोली- तुम दोनों जैसे हमारी चूत और गांड मारने से पहले करते हो, वैसा ही अभय के साथ करोगे और अभय तुम दोनों के लंड को चूसेगा।
 
सभी लोग तैयार हो गये। अमित और टोनी ने अभय सर के सारे कपड़े उतारे और उसके निप्पल को चूसने लगे।

इसी बीच नमिता बोली- मैं चाहती हूँ कि सभी मर्द एक दूसरे की गांड मारे।

मैं- यह बात तो मेरे मन की थी, चलो अच्छा हुआ कि नमिता ने बोल दिया।

तभी टोनी नमिता को चुप कराते हुए बोला- तुम्हारा गेम ओवर हो चुका है।

इससे पहले टोनी और कुछ बोलता,

मीना बोल उठी- हाँ मैं भी चाहती हूँ कि सभी मर्द एक दूसरे की गांड मारें। जब हम सब तुम्हारे मन की बात मान सकते है तो तुम लोगों को भी हमारे मन की बात माननी होगी।

फिर हम सभी औरतें मीना की हां में हां मिलाने लगी।

तभी रितेश, जो मेरे मन की हर बात करता है, बोल उठा- दोस्तो, मैं भी औरतो से सहमत हूँ। जब ये सब वो सब कुछ कर रही हैं जो हम चाह रहे हैं तो हमें भी उनकी बात माननी चाहिये।

टोनी रितेश के कन्धे पर हाथ रखते हुए बोला- तुझे बड़ी जल्दी है गांड मरवाने की?

रितेश भी बड़ा बेशर्म- बोला हां यार, चल इसका भी मजा लेते हैं।

कहते हुए रितेश टोनी के पीछे आया और उसकी चड्डी को झटके से उतार फेंक दिया और टोनी के कूल्हे को सहलाते हुए बोला- दोस्तो, टोनी की गांड भी बड़ी चिकनी है।

उसके बाद सभी मर्द अपने कपड़े उतार कर नंगे हो गये और एक दूसरे को सहलाते हुए चूमने चाटने लगे। कभी कोई किसी को चूमता तो कभी कोई किसी को सहलाता। तो कोई किसी के लंड को अपने मुंह ले कर चूसता तो कभी कोई। इस तरह पांचों मर्द एक दूसरे के लंड को अपने-अपने मुंह में लेकर उसी तरह से चूस रहे थे जैसे हम औरतें उनके लंड को चूसती हैं।

हम सभी औरतें वहीं आस-पास बैठ कर उन सभी के इस खेल को देखने का आनन्द ले रही थी, बहुत ही मजा आ रहा था।

थोड़ी देर तक लंड चुसाई चलती रही, उसके बाद सभी ने पहले रितेश को पकड़ा और झुका दिया। अभी तक तो सभी को बड़ा मजा आ रहा था पर जैसे ही रितेश को झुकाया गया, वैसे ही,

रितेश बोल उठा- यार, मेरी गांड मिली है सबसे पहले चोदने के लिये?

बाकी सभी एक साथ बोल उठे -हां, तू ही तो तरफदारी कर रहा था तो तेरी गांड का सबसे पहले उद्घाटन होगा।

रितेश सबको झटके देकर खड़ा हो गया और बोला- तुम सभी मेरी गांड चोदो इसकी परवाह नहीं करता, पर अभय से शुरूआत होगी। उसकी गांड चुदाई का सबसे पहले प्रोपोजल आया था, उसके बाद सभी औरतें हम सबकी गांड चुदते हुए देखना चाहती थी।

रितेश का इतना बोलना था कि टोनी और अमित ने अभय सर को पकड़ लिया और उसको झुका दिया।

दीपाली ने मर्दों के एक काम को हल्का कर दिया, वो जाकर एक क्रीम का ट्यूब ला कर टोनी को पकड़ा कर बोली- यह ट्यूब तुम लोगों के गांड के लिये काफी है।

टोनी ने ट्यूब से क्रीम निकाली और अभय सर की गांड में लगा दी और फिर धीरे धीरे उंगली से क्रीम को अभय सर की गांड के अन्दर लगाने लगा। पहले उसकी एक उंगली अभय सर की गांड के अन्दर जा रही थी फिर धीरे से टोनी ने अपनी दो उंगली को उनकी गांड के अन्दर डालने लगा। अभय सर के मुंह में बाकी चारों बारी बारी से अपने लंड को डाल रहे थे। टोनी काफी देर तक उंगली उनकी गांड में करता रहा, फिर अपने लंड को उनकी गांड में डालने की कोशिश करने लगा। जैसे ही टोनी अभय सर की गांड के छेद में अपने लंड को ट्च करता तो वैसे ही उनका छेद लंड को अपने अन्दर लेने के लिये लप से खुल जाता और जैसे टोनी अपने लंड को वहां से हटा देता, तो छेद बंद हो जाता।

हम सभी औरतें इस सीन को देखकर कमेंट कर रही थी।

टोनी ने अभय सर से पूछा- अभय, यह बताओ यार कैसा लग रहा है?

अभय सर बोले- यार, बड़ी गजब की खुजली हो रही है और जब तुम्हारा लंड मेरी गांड में टच करता है तो ऐसा लगता है कि अचानक से चाय का गर्म प्याला जिस्म के किसी हिस्से से छू गया है। अब जल्दी से लंड गांड के अन्दर डाल, बहुत खुजली हो रही है।

टोनी लंड को गांड में सेट करता और फिर डालने की कोशिश करता, लेकिन लंड फिसल कर बाहर आ जाता। टोनी ने इशारे से अमित को बुलाया और अभय सर के कूल्हे को फैलाने के लिये बोला। अमित ने टोनी के कहने के अनुसार किया और इस बार टोनी ने लंड को हाथ में पकड़ कर गांड की छेद में सेट किया और एक झटके से लंड को गांड के अन्दर डाल दिया। लगभग आधे से ज्यादा लंड गांड में घुस चुका था, इधर झटके के साथ लंड ने अभय सर की गांड में हमला बोला, उधर अभय सर जो बड़े ही इत्मीनान से अश्वनी के लंड को चूस रहे थे, का मुंह खुल गया और,

अभय सर चिल्लाते हुए बोले- मादरचोद ने मेरी गांड मार दी।

उनके इस तरह चिल्लाने और बोलने से हम औरतों की हंसी रूकने का नाम ही नहीं ले रही थी।

अभय सर दर्द के मारे बिलबिला उठे और चिल्लाने लगे- अबे टोनी के बच्चे, निकाल अपना लंड... भोसड़ी वाले ने मेरी गांड मार दी। निकाल ले मादरचोद, निकाल... उम्म्ह... अहह... हय... याह...
 
पर टोनी कहाँ रूकने वाला था, उसने लंड को फिर झटके से खींच कर निकाला और फिर एक झटके से लंड को गांड में घुसेड दिया। एक बार फिर वही गाली, लेकिन इस बार आह्ह्ह्ह की एक लम्बी आवाज भी थी।

अभय सर बोले- अबे भोसड़ी वाले, कुछ तो रहम कर मेरी गांड पर!

पर टोनी था और टोनी का मतलब एक बार उसके लंड ने हमला किया तो फिर चाहे वो जिसकी भी चूत या गांड हो, उसकी अच्छे से बजा कर बाहर निकलता है और टोनी कर भी यही रहा था। वो अभय सर के किसी भी बात का कोई जवाब नहीं दे रहा था, हां, अपने लंड की ताकत का अहसास वो जरूर अभय सर को करा रहा था। बड़ी देर तक अभय सर की गांड मारने के बाद टोनी ने उनके गांड में ही झड़ गया। जैसे ही टोनी ने अपने लंड को उनकी गांड से निकाला, अमित तुरन्त ही पीछे पहुंच गया और अभय सर की गांड को चोदने लगा, टोनी के बाद अश्वनी, अश्वनी के बाद रितेश सभी ने उनके गांड का बाजा खूब बजाया। बेचारे अभय सर को चलना तो छोड़ो, सीधा खड़े होने में भी दिक्कत हो रही थी। किसी तरह से वो बेचारे अपनी चड्डी से अपनी गांड को साफ करते हुए पास पड़ी हुई कुर्सी पर बैठ गये।

उनकी नजर जैसे ही दीपाली पर पड़ी,

बुरा सा मुंह बनाते हुए बोले- मादरचोद, सब तेरे कारण ही हुआ है, देखो मेरी गांड कितनी बुरी तरह से मारी है मिलकर इन साले कमीनों ने!

दीपाली उन्हें और चिढ़ाती हुई बोली- तो क्या हुआ मेरे गांडू पति, लंड का मजा तो ले लिया!

अभय सर की गांड की जिस तरीके से चुदाई हुई, उससे सभी मर्दों में एक डर सा पैदा हो गया और कोई नहीं चाह रहा था कि उनकी गांड मारी जाये और हम लोगों की सुनने के लिये भी कोई तैयार नहीं था।

तभी नमिता ने फरमान जारी किया- हमें भी सभी मर्दों की गांड चुदाई देखनी है। और अगर तुम लोग मना करते हो तो हमारी चूत और गांड भी भूल जाओ और गेम यहीं बन्द कर दो। इसके अलावा मैं किसी बाहरी मर्द से चुदने को राजी हूँ, पर तुममें से किसी को भी अपनी चूत और गांड नहीं दूंगी।

हम सभी ने नमिता की बातों का समर्थन किया, सुहाना हां में हां मिलाती हुई बोली- जो मर्द आसानी से अपनी गांड मरवायेंगे उनको और मजा मिलेगा और जो मर्द गांड नहीं मरवायेंगे उनकी गांड जबरदस्ती मारी जायेगी।

बाकी तीन तो तैयार हो गये पर टोनी नहीं मान रहा था तो हम सभी का इशारा पाते ही सभी टोनी पर झपट पड़े, टोनी सभी की गिरफ्त में आ चुका था, वो कोशिश बहुत कर रहा था अपने को छुड़ाने की पर सभी प्रयास उसके असफल हो गये। डायनिंग टेबिल पर उसके सर को टिका दिया और अश्वनी को उसके ऊपर बैठने के लिये बोला गया, पहले अश्वनी ने मना किया फिर सभी के दबाव में आकर वो टोनी के पीठ पर बैठ गया। टोनी अपनी जगह से हिल नहीं पा रहा था,

टोनी अब चिल्लाने लगा- भोसड़ी वालो, मत मारो मेरी गांड, मैं गांडू नहीं हूँ।

सभी एक साथ बोल पड़े- अबे लौड़े के... हम भी गांडू नहीं है, पर मजा लेना है।

अभय सर बोले- अबे गांडू, जब मेरी गांड मार रहा था तो बड़े मजे ले रहा था।

अभय सर की बात सुनकर सब कुछ न कुछ बोलते जा रहे थे और टोनी की गांड में कोई चपत लगाता तो कोई उसकी गांड में उंगली करता तो कोई टोनी के अंडे को पकड़ कर दबा देता।

रितेश ने ट्यूब से क्रीम निकाली और उसकी गांड में लगाते हुए बोला- चल गुरू, हम भी लोग गांड मरवायेंगे।

कहकर उसकी गांड को क्रीम से भर दिया, फिर अपने लंड में अच्छे से क्रीम लगाई और टोनी की गांड को अपने सुपाड़े से सहलाने लगा और सहलाते-सहलाते एक झटके से गांड के अन्दर लंड को पेल दिया।

टोनी की एक तेज चीख- उम्म्ह... अहह... हय... याह... मार डाला मादरचोदों ने! मेरी गांड के अन्दर लंड नहीं लोहे की राड डाल दिया है। इस राड को निकाल लो। रितेश मेरे भाई तुम मेरे पुराने दोस्त हो, यार अपना लंड निकाल लो, मेरी गांड बक्श दो।

लेकिन रितेश कहां मानने वाला था, उसने एक बार फिर लंड को झटके से निकाला और फिर दूसरे ही पल और तेजी के साथ पेल दिया। सभी मर्द और सभी औरते टोनी के इर्द गिर्द खड़े होकर तमाशा देख रहे थे। इस बार रितेश का पूरा लंड टोनी के गांड के अन्दर था, और टोनी केवल चिल्ला ही पा रहा था। रितेश अब टोनी की गांड को चोदे जा रहा था और जब रितेश कन्फर्म हो गया तो उसने अश्वनी को आने का इशारा किया। अश्वनी टोनी के ऊपर चढ़ गया। अब टोनी भी मजे ले ले कर अपनी गांड मरवा रहा था। फिर बारी-बारी से सभी ने टोनी की गांड को जम कर चोदा। टोनी की भी हालत अभय सर की ही तरह हो गई थी, टोनी ही क्यूं, जिसकी भी गांड चुदी उन सभी की गांड अभय सर की गांड की तरह सूज चुकी थी। मर्दो की गांड चुदाई देखते देखते रात को ग्यारह बज गये थे। किसी मर्द में इतनी ताकत नहीं बची थी कि वो हम लोगों को चोद सकें।

हालांकि हम लोगों को भी किसी लंड की जरूरत नहीं थी क्योंकि उन सभी की चुदाई को देखकर उंगली करते करते हम सभी की चूत का पानी बाहर आ चुका था, तो सभी ने निर्णय लिया कि अब प्रोग्राम को रोक दिया जाये।

सभी खाना-खाकर अपनी-अपनी बीवी को लेकर सोने लगे। रात को कोई खास बात नहीं हुई, बस आधी रात को नीद में मुझे एहसास हुआ कि मेरी चूत के अन्दर कुछ हलचल हो रही थी। देखा तो रितेश के एक टांग मेरे ऊपर थी, उसकी उंगली मेरे चूत के अन्दर टहल रही थी और मेरे निप्पल उसके मुंह को आनन्द दे रहे थे। मेरी नींद उचट चुकी थी, मैंने अपने चारों ओर देखा तो सिवाय मेरे और रितेश के अलावा सभी गहरी नींद में सो रहे थे। मैं रितेश के सर को सहलाने लगी, रितेश तुरन्त उठा और मेरी छाती पर हौले से बैठ गया और अपने लंड को मेरे मुंह में पेल दिया। फिर थोड़ी देर बाद खुद ही 69 की अवस्था में हो गया, उसका लंड मेरे मुंह में था और मेरी चूत पर उसकी जीभ चल रही थी। उसकी गांड हल्की सी लाल और सूजी हुई थी जो यह बता रही थी कि चार-चार लंड को उसकी गांड ने झेला है। मैं उसके लंड को चुसते हुए जैसे ही उसकी गांड को सहलाने की कोशिश करने लगी, उसके मुंह से हल्की सी चीत्कार निकली। मेरे लिये रितेश ने अपनी गांड चुदवा ली। मैंने बहुत ही प्यार से अपनी जीभ उसके गांड में ट्च की। जिस तरह रितेश ने अपनी गांड हिलाई, मुझे लगा कि मेरी जीभ का अहसास उसे अपनी गांड में अच्छा लग रहा है तो मैं उसके लंड को चूसना छोड़कर उसकी गांड को चाटने लगी और रितेश को भी बड़ा आराम मिल रहा था। थोड़ी देर तक वो मेरी चूत चाटता रहा और मैं उसकी गांड को चाटती रही। मैं पानी छोड़ चुकी थी, रितेश ने मेरे रस को भी चाटकर साफ कर दिया, फिर वो मेरे ऊपर से हटकर मेरी बगल में लेट गया और मुझे इशारे से उसके लंड की सवारी करने के लिये बोला। मैं उठी, उसके लंड पर बैठ गई और बिना कोई आवाज किये हुए उसके लंड पर उछलने लगी। मेरी चूची भी इधर उधर उछल रही थी और जिसको रितेश पकड़ रहा था और छोड़ रहा था। फिर कुछ देर में मुझे अहसास हुआ की रितेश का जिस्म अकड़ रहा है और उसका वीर्य मेरी चूत को नहला रहा है। फिर रितेश ढीला हो गया और कुछ देर बाद उसका लंड भी मुरझा कर मेरी चूत से बाहर आ चुका था। फिर हम दोनों चिपक कर सो गये।
 
दूसरे दिन की सुबह अन्तिम सुबह थी क्योंकि रविवार का दिन शुरू हो चुका था। हम सभी एक बार फिर तैयार हो चुके थे, हम सभी के बीच यह तय हुआ कि शाम छः बजे तक बारी-बारी से एक दूसरे से अदला बदली की जाये।

आज सभी मर्द एक बार फिर हम औरतों के कहने पर अपनी गांड मरवाने को तैयार हो गये थे।

शुरूआत मेरे से ही हुई, अश्वनी मेरे पास आया और मेरे हाथ को पकड़ कर चूमा और मेरी तरफ एक गुलाम की तरह उसने अपना सर झुका लिया और फिर मेरी दोनों टांगों को फैला कर मेरी चूत में अपनी जीभ लगा दी। जैसे ही अश्वनी ने मेरी चूत पर अपनी जीभ लगाई मेरे दोनों टांगे खुद-ब-खुद उसके गर्दन के इर्द-गिर्द लिपट गई, अश्वनी ने भी मुझे थोड़ा सा अपनी ओर खींच लिया। अब वो मेरी जांघ पर अपनी जीभ फिराता तो कभी मेरी चूत के ऊपर चाटता तो कभी मुझे उसकी जीभ मेरी चूत के अन्दर महसूस होती। अश्वनी का एक हाथ मेरी चूची को जोर-जोर से भींच रहा था, मेरी आँखें बन्द थी और मैं केवल अश्वनी को ही महसूस कर रही थी, मुझे पता नहीं चल रहा था कि बाकी सभी लोग क्या कर रहे हैं, बस हा हो हा हो की आवाज मेरे कानों में सुनाई पड़ रही थी। तभी मुझे अहसास हुआ कि किसी का लंड मेरे होंठों को पुचकार रहा है, मैंने बन्द आँखों से ही उसके लंड को पकड़ा और महसूस करने की कोशिश करने लगी कि यह लंड किसका हो सकता है। लंड का आकार जैसे ही मुझे समझ में आया, हल्की सी मुस्कुराहट के साथ मेरे होंठ खुले और मेरी जीभ बाहर निकली और लंड के अग्र भाग को टच कर गई। लंड के रस की एक बूंद मेरी जीभ से टकराई और फिर मैंने आँखें खोल कर अभय सर को देखा।

मुझे देखते ही अभय सर बोले- अब मुझे तुमसे कोई दूर नहीं कर सकता। मेरा लंड तुम्हारी जीभ की तलाश में इधर आ गया। मैंने बिना कुछ कहे अपनी आँखे बन्द की, अभय सर ने मेरे सिर पर अपना हाथ रखा और अपने लंड को मेरे मुंह की सैर कराने लगे। नीचे अश्वनी मेरी चूत को सुख पहुंचा रहा था और ऊपर मैं अभय सर के लंड को सुख पहुंचा रही थी। अभय सर थोड़ी ही देर में खलास हो गये और अपना पूरा माल मेरे मुंह के अन्दर छोड़ दिया। फिर अभय सर मेरे होंठ को चूमने के लिये झुके तो मैंने तुरन्त ही उनके मुंह के अन्दर उनके वीर्य को वापस कर दिया। अश्वनी ने भी मेरी चूत चाटना बन्द कर दिया और मुझे घोड़ी बनने के लिये कहा।

मैं खड़ी हुई और घोड़ी की पोजिशन में खड़ी हो गई, उसके बाद अश्वनी पीछे से ही मेरी चूत के साथ-साथ मेरी गांड को भी चोदना शुरू कर दिया। अश्वनी का लंड मेरी चूत और गांड में बदल बदल कर चल रहा था जबकि उसके हाथ मेरे चूचों को मस्त कर रहे थे। मेरी चुदाई खूब मस्त चल रही थी, मैं आँखें बन्द करके अपनी चुदाई के अहसास का मजा ले रही थी, मैं अपनी चूत के अन्दर झन्नाटेदार झटके को महसूस कर रही थी। अश्वनी का हर शॉट मुझे एक अलग मजा दे रहा था, आह-ओह की आवाज के साथ अश्वनी मेरी चुदाई कर रहा था।

फिर वो कुर्सी पर बैठ गया और मुझे उसने अपने लंड के ऊपर बैठा लिया। मैं झड़ चुकी थी, लेकिन मैं चाह रही थी कि उसका लंड मेरी चूत के अन्दर ही पड़ा रहे। अश्वनी बारी-बारी मेरी चूचियों को चूसने लगा, वो बड़े ही कस कर मेरी चूची को चूस रहा था और मेरी पीठ में अपनी हथेली को गड़ा रहा था। मैं भी अपने जिस्म को हरकत देते हुए उसके लंड को अपने अन्दर हिलाने डुलाने लगी। करीब पांच मिनट बाद अश्वनी ने मुझे जल्दी से अपने ऊपर से उतारा, मैं समझ गई कि अश्वनी के झड़ने का टाईम आ गया, मैंने अपना मुंह उसके लंड के सामने खोल दिया। कुछ सेकेन्ड अश्वनी ने अपने लंड को फेंटा और फिर एक सफेद लहराती हुई धार मेरे मुंह के अन्दर गिरने लगी।

जब उसका पूरा रस मेरे मुंह के अन्दर आ गया तो उसकी बची हुई बूंद को लेने के लिये मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और अश्वनी ने अपने लंड को मेरी जीभ से टच कर दिया।

मैंने उस रस की आखरी बूंद को भी चाट कर साफ कर दिया। जब मैं अश्वनी से फ्री हुई तो देखा कि सब अपने अन्तिम पड़ाव में हैं और सभी औरतें लंड से निकलने वाले रस चाटने का मजा ले रही हैं। केवल अभय सर अकेले बैठे हुए थे, मैं उनके पास गई, वो कुछ सोच रहे थे, उनकी नुन्नी बिल्कुल नुन्नी हो चुकी थी। मुझे देख कर वे मुस्कुराये और हल्का सा सरक गये, मैं उनके बगल में बैठ गई और उनकी जांघों में हाथ फेरने लगी। दीपाली भी बगल में आकर बैठ गई और अभय सर की नुन्नी से खेलने लगी। फिर धीरे धीरे मेरा और दीपाली मैम का खेल अभय सर के साथ शुरू हो गया, वो उनके सुपारे को अपने अंगूठे से रगड़ रही थी और मैं उनके निप्पल के दानो को अपने दाँतों के बीच लेकर चूस रही थी। फिर हम दोनों ही थोड़ा सा नीचे आई और उनके लंड को अपनी जीभ से बारी-बारी चाटने लगी। मेरा ध्यान केवल अपने, अभय सर और दीपाली की हरकतों पर ही था, और बाकी लोग क्या कर रहे थे, मैं नहीं ध्यान नहीं दे रही थी। हम दोनों उनके लंड को चाटे जा रही थी जबकि अभय सर हम दोनों के चूचियों से खेल रहे थे। कभी हमारे गोलों को पम्प करते तो कभी निप्पल को चिकोटी काटते। कुछ देर तो ऐसा ही चलता रहा, फिर हम दोनों घोड़ी के पोजिशन में हो गई और अपनी गांड और चूत का मुंह अभय सर की तरफ कर दी। अभय सर हम दोनों की गांड और चूत को बारी बारी से चाटकर गीला करने लगे। दीपाली मेरी चूची को दबा रही थी और मैं दीपाली की चूची दबा रही थी।

घोड़ी वाले पोजिशन में आने के बाद जब मेरी नजर बाकी सभी पर पड़ी तो देखा कि नमिता और सुहाना अमित के साथ वही क्रिया कर रही है जो मैं और दीपाली अभय सर के साथ कर रही थी। मीना रितेश के साथ लगी हुई थी। जबकि अश्वनी और टोनी एक सौफे पर बैठ कर एक दूसरे का लंड को फेंट रहे थे। तभी मेरी गांड में लंड का प्रवेश हुआ और फिर धक्का लगने लगा। फिर लंड बाहर था और उंगली अन्दर... 2 मिनट बाद ही मेरी गांड गीली हो गई। मतलब साफ था कि अभय सर फ्री हो गये थे और सोफे पर बैठ कर हांफ रहे थे।
 
दीपाली ने मेरी तरफ देखा और फिर बुरा सा मुंह बनाते हुए बोली- बस इसके साथ यहीं तक का साथ होता है, खुद जल्दी झड़ जाता है और फिर मेरी चूत में आग लगी रहती है।

मैंने दीपाली को इशारे से चुप कराया और अश्वनी और टोनी जो एक दूसरे के लंड को मसल रहे थे हम दोनों जाकर सीधा उन दोनों की गोद में बैठ गई, मैं टोनी की गोद में थी और दीपाली अश्वनी की गोद में बैठ गई, दोनों के हाथ सीधे हमारी चूचियों को मसलने लगे।

अचानक मेरी नजर घड़ी पर पड़ी तो छः बजने वाले थे। कल ही शाम की गाड़ी से मुझे ऑफिस के काम से अपने ससुर के साथ कोलाकाता जाना था। खैर मैं अभी मजे लेने के विचार में थी, मैं टोनी की गोद से उतरी और उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया। दीपाली ने भी वही किया, वो भी अश्वनी के लंड को अपने मुंह में लिये हुई थी। मैं टोनी को इस अन्तिम चुदाई के खेल का मजा देना चाहती थी। मेरे कहने पर टोनी सोफे से थोड़ा बाहर आया और अपने दोनों पैरों को सोफे पर रख लिया। अब मेरे लिये उसके गांड का छेद, गोले और लंड तीनों के साथ खेलना आसान हो गया। जब मेरा एक हाथ उसके लंड को सहला रहे होते तो मैं उसके लंड को चूसती और दूसरे हाथ की उंगली उसके छेद को सुरसुराहट दे रही होती।

टोनी के मुंह से- उम्म्ह... अहह... हय... याह... बस ऐसे ही करो बड़ा मजा आ रहा है,

ऐसे शब्द सुनकर मेरे भी हौंसले और बढ़ रहे थे, कभी मैं उसकी गांड को अपनी जीभ का मजा देती तो कभी अपनी उंगली का मजा देती। इसी तरह कभी उसका लंड मेरे मुंह में होता तो कभी मेरा अंगूठा उसके सुपारेसे खेल रहा होता। फिर मेरी जीभ टोनी के पूरे जिस्म में अपना खेल दिखाने लगी, उसके लंड और जांघ को चाटते हुए मेरी जीभ उसकी नाभि में हलचल पैदा करने लगी। जैसे जैसे मैं उसके जिस्म को अपने जिस्म से रगड़ते हुए ऊपर उसकी छाती की तरफ बढ़ रही थी, वैसे वैसे ही टोनी का जिस्म सोफे से नीचे की तरफ आ रहा था। अब मेरी जीभ उसके निप्पल को मजा दे रही थी और,

टोनी की आवाज- आह-आह ओह-ओह मिसरी की तरह मेरे कान में घुल रही थी।

मेरी जीभ तो टोनी के निप्पल के ऊपर तो चल ही रही थी, पर मेरी चूत में उठ रही खुजली को शांत भी करना जरूरी था तो मेरी एक हथेली मेरी चूत की सेवा करने में लगी हुई थी। शायद यह बात टोनी को समझ में आ गई, उसने मुझे सोफे पर पटक दिया और मेरे चूत पर अपने मुंह को लगा दिया। मेरी हथेली जो चूत पर थी, उसको हटा कर फांकों को फैलाते हुए अपनी जीभ को अन्दर पेल दिया और अन्दर ही अपनी जीभ को घुमाने लगा, जहां तक उसकी जीभ अन्दर जा सकती थी उसने अन्दर डाल दी, फिर मेरी क्लिट को अपने दांतों के बीच लेकर उसे चबाने लगा और चूसने लगा। कुछ देर ऐसा करने के बाद वो हाफ पोजिशन में खड़ा होकर मेरी चूत में अपने लंड को डाल कर सीधा खड़ा हो गया। इससे मेरे कमर का हिस्सा हवा में झूल रहा था और बाकी सोफे से टिक गया था। टोनी मुझे बड़ी ताकत से चोद रहा था। टोनी लगातार ताकत के साथ मेरी चूत चोदे जा रहा था और उसके लंड का अहसास मुझे अन्दर तक हो रहा था। थोड़ी देर तक चूत चोदने के बाद टोनी ने मुझे उल्टा किया और मेरी गांड में अपनी जीभ चलाने लगा और अंगूठे से छेद के ऊपर रगड़ रहा था। फिर उसके बाद एक ही झटके से मेरी गांड में अपना लंड पेल दिया। मुझे वो बहुत ही स्पीड से चोद रहा था, कभी मेरी गांड की चुदाई करता और कभी चूत के अन्दर लंड डाल कर मेरी चूत का भोसड़ा बनाने में लगा था। खैर जितनी स्पीड से चोद रहा था, उतनी ही तेज वो चिल्ला रहा था। साथ में मेरी चूत का भोसड़ा बनाने की बात कहे जा रहा था, मेरे दोनों छेद की चुदाई अच्छे से कर रहा था। मैं एक बार और झड़ गई थी।

इधर दिपाली की भी हालत खराब थी, क्योंकि अश्वनी भी दीपाली की चूत और गांड का बाजा बजा रहा था। फिर टोनी ने लंड को मेरे मुंह में पेल दिया और धक्के लगाने लगा। उसके हर धक्के के साथ उसका माल मेरे गले के नीचे उतर रहा था। मेरा दम घुट रहा था पर टोनी जब तक पूरा मेरे मुंह में झड़ नहीं गया तब तक उसने अपने लंड को मेरे मुंह से बाहर नहीं निकाला। अश्वनी ने दो चार बूंद दीपाली के मुंह के अन्दर गिराई और बाकी उसके चेहरे पर और फिर अपने हाथ से ही अपने माल को दीपाली के चेहरे पर मलने लगा, ऐसा लग रहा था कि वो दीपाली के चेहरे को क्रीम लगा रहा था। जो लोग निपटते जा रहे थे वे हमारे पास आकर हमारी चुदाई देख रहे थे। जब हम चारों भी निपट गये तो हम सभी एक दूसरे के गले मिलने लगे। फिर सभी एक दूसरे को इस प्रोग्राम के लिये थैंक्स बोलने लगे।

रितेश ने पूछने पर सभी ने इस एक्सपीरिएन्स को बहुत ही अच्छा बताया और फिर मौका पड़ने पर मिलने का वादा किया।अमित और रितेश ने टोनी और मीना को स्टेशन छोड़ा, जबकि बॉस और दीपाली ने अश्वनी और सुहाना को स्टेशन छोड़ दिया।

अन्त में मैं, रितेश, नमिता और अमित भी बॉस से विदा होकर चलने लगे तो बॉस ने एक बार मुझे गले लगाया और मेरे गाल को चूमते हुए मुझे थैक्स कहा और कल शाम कलकत्ता जाने की बाद भी याद दिलाई। हम लोग घर पहुंचे, सास के हाथ का बना बढ़िया बढ़िया खाना खाया और थके होने के कारण जल्दी से सो गये।

सुबह उठ कर सब काम निपटाने के बाद मैं ऑफिस के लिये निकलने वाली ही थी कि डोर बेल बजी। दरवाजे खोलने पर सामने अभय सर खड़े थे, अन्दर बुलाकर उनका सबसे इन्ट्रोड्क्शन कराया। फिर अभय सर ने मुझे दो पैकेट दिया और सबसे दुआ सलाम करने के बाद यह कहते हुए चले गये कि शाम के जाने की तैयारी करो। आज ऑफिस से छुट्टी है।

मैं उनके जाते ही जैसे पैकेट खोलने वाली थी कि मोबाईल की रिंग बजी। अभय सर की कॉल ही थी, जैसे ही मैंने कॉल पिक की, अभय सर बोले एक पैकेट में 25000/- रू॰ और टिकट था, 25000/- रू॰ वो थे जो कलकत्ते में होने वाले खर्चे के लिये थे और दूसरा पैकेट तुम्हारा पर्सनल है, सबके सामने मत खोल देना। इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया। मैंने पैसे वाला पैकेट ससुर जी को पूरी बात बता कर पकड़ा दिया और दूसरा पैकेट लेकर अपने कमरे में आ गई। चूंकि पैकिंग हो चुकी थी, मैं अब इत्मीनान से थी कि मुझे कोई एक्सट्रा काम नहीं करना है।

रितेश अभी भी ऑफिस जाने के लिये तैयार हो रहा था, पैकेट देखकर पूछने लगा, मैंने उसे पूरी बात बताई, वो भी मेरे बगल में बैठ गया। हम दोनों ने उस पैकेट को खोला, पैकेट में पैन्टी और ब्रा के अलावा कुछ नहीं था, 5 सेट पैन्टी और ब्रा के थे और पांचों डिजाईनर थे। एक नेट की था, एक ट्रांसपेरेन्ट थी, एक तो केवल दो पत्तों से मिला कर बनाई गई थी और उसको इलास्टिक से जोड़ दिया गया था, वो केवल चूत को ढक सकती थी और पीछे वाली पत्ती तो मेरे गांड के छेद में छुप गई थी, रितेश के कहने पर मैं उसको पहन-पहन कर दिखा रही थी। जब सभी पैन्टी और ब्रा की ट्रॉयल हो गया तो,
 
रितेश बोला- यार, अगर मैं तुम्हारे साथ जा रहा होता तो इस पैन्टी का कुछ यूज भी होता। पापा साथ जा रहे हैं तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाता।

मैंने उसकी नाक को कस कर पकड़ा और बोली- तुम जाते तो इसको पहनने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिलता। पापा के साथ जाने से कम से कम में इसको पहन सकती हूँ।

मेरी इच्छा थी कि रितेश आज ऑफिस से छुट्टी ले ले और मेरे साथ रहे क्योंकि मेरा जिस्म बहुत दर्द कर रहा था, मैं चाहती थी कि रितेश मेरी मालिश भी कर दे।

पर रितेश बोला- यार, तुम्हारा बॉस तुम्हें चूत के बदले छुट्टी दे सकता है, पर मेरा बॉस भी मर्द है और मेरे पास लंड ही है। इसलिये मुझे छुट्टी नहीं मिल सकती।

कहकर वो अपने ऑफिस को चल दिया।

अब मैं लेटी-लेटी करवट बदलने लगी कि तभी सूरज आ गया। मैं लेटी हुई थी,

मेरा देवर मेरे बगल में बैठते हुए बोला- क्या हुआ भाभी, लेटी हुई क्यों हो?

मैं- 'कुछ नहीं, थोड़ी थकान जग रही है।'

वह बोला- भाभी, कहो तो तुम्हारे बदन की मसाज कर दूँ?

मैं- 'यार, मैं चाहती भी यही थी।'

मेरा इतना कहना ही था,

सूरज बोला- भाभी, तुम कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ, मैं तेल लेकर आता हूँ!

कहकर वो ड्रेसिंग टेबिल से तेल की शीशी निकाल लाया, मैं भी जब तक कपड़े उतार कर नंगी होकर पेट के बल लेट गई। सूरज मेरी नंगी पीठ पर तेल की एक एक बूंद धीरे-धीरे से टपकाने लगा, फिर उसने अपने हाथ का कमाल मेरी पीठ पर दिखाने लगा, पीठ की मालिश करते हुए वो फिर मेरे चूतड़ों और जांघों की मालिश करने लगा, बीच-बीच में मेरे चूतड़ को चूची समझ कर बहुत तेज भींच देता था और चूतड़ों के बीच छेद में तेल की दो बूंद टपकाने के बाद अपनी एक उंगली उसके अंदर डाल कर मालिश करता। मेरे जिस्म को थोड़ा आराम मिल रहा था और सूरज जिस तरह से मेरी मालिश कर रहा था, वो भी आनन्द दे रहा था। जब सूरज ने मेरे जिस्म के पीछे की हिस्से की मालिश कर ली तो उसके कहने पर पलट गई।

एक बार फिर बड़ी मस्ती के साथ सूरज मेरी मालिश कर रहा था, वो मेरे चूची को अच्छे से दबाता, चूत और उसके आस पास की जगह भी वो बहुत ही बढ़िया मालिश कर रहा था। जब उसने अच्छे से मेरी मालिश कर दी तो,

सूरज बोला- भाभी, तुम्हारी झांटें बड़ी हो गई हैं, झांट तो बना लेती!

मैंने अलसाते हुए सूरज को बताया कि आज शाम को उसके पापा यानि मेरे ससुर के साथ कोलकाता जा रही हूँ और थोड़ा झूठ बोलते हुए कहा कि काम के वजह से झांट बनाने का मौका नहीं मिला।

सूरज मेरी बात को सुनने के बाद बोला- कोई बात नहीं भाभी, तुम नहा कर आ जाओ, मैं तुम्हारी चूत को अच्छे से चिकनी कर दूंगा।

सूरज के कहने पर मैं नहा ली और जब वापस कमरे में पहुंची तो सूरज वीट की क्रीम, कुछ कॉटन, एक मग में पानी और तौलिया लेकर मेरा इंतजार कर रहा था। सबसे मजे की बात तो यह थी कि सूरज ने जमीन पर एक चादर भी बिछा रखी थी, ताकि मैं आराम से लेट सकूं। मैं सीधी लेट गई, सूरज ने तुरन्त ही मेरी चूत पर और उसके आस पास जहां भी उसकी नजर में बाल के हल्के फुल्के रोंयें थे, वहां उसने क्रीम लगा दी और फिर मेरे पास आकर मेरे निप्पल से खेलने लगा। मैं आँखें बन्द करके उसकी हरकतों का मजा ले रही थी। सूरज कभी मेरे निप्पल को दबाता तो कभी चूचियों को मसलता। उसके ऐसा करते रहने के कारण मेरी बीच बीच में हल्की सी सीत्कार सी भी निकल जाती। करीब दस मिनट बीतने के बाद सूरज ने कॉटन लिया और मेरी चूत पर लगे क्रीम को साफ करने लगा। फिर थोड़ा और कॉटन को गीला करके और अच्छे से मेरी चूत साफ कर दी, आखिर में उसने तौलिये से मेरी चूत साफ की और,

फिर बोला- लो भाभी, तुम्हारी चूत फिर पहले जैसी चिकनी हो गई है।
 
मैंने हाथ लगा कर देखा तो वास्तव में चूत काफी चिकनी हो चुकी थी। मैंने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ सूरज को अपना ईनाम लेने का ऑफर किया। पहले तो उसने मना किया, फिर बोला- आप आज ट्रेवल करोगी, इसलिये आज जाने दो। जब वापस आओगी तो अच्छे से लूंगा।

लेकिन मैं उसकी बात काटते हुए बोली- देखो, तुमने अभी मेरे साथ बहुत मेहनत की है और तुम अब अपनी मेहनत का फल ले लो।

मेरे बहुत कहने पर सूरज ने पलंग से दो तकिये उठाए और मेरी कमर के नीचे लगा दिया। हालांकि मेरी भी बहुत ज्यादा इच्छा नहीं थी और चाहती थी कि जिस पोजिशन में मैं लेटी हूँ, उसी पोजिशन में सूरज मुझे चोदे और सूरज ने मेरी कमर के नीचे दो तकिया लगा कर मेरे मन की बात कर दी थी। उसके बाद उसने अपने लंड को मेरी चूत में पेल दिया और धक्के लगाने लगा, थोड़ी देर तक वो मुझे उसी तरह चोदता रहा, उसके बाद वो मेरे ऊपर लेट गया, मेरे निप्पल को अपने मुंह में लेकर बारी बारी से चूसने लगा। वो इसी तरह कुछ देर तो चूत को चोदता और फिर थोड़ा रूककर मेरे निप्पल को चूसता। करीब पंद्रह-बीस मिनट तक तो इसी तरह से चोदता रहा, मैं झड़ चुकी थी, मेरे झड़ने के एक मिनट बाद ही सूरज भी झड़ गया और मेरे ऊपर निढाल होकर लेट गया। थोड़ी देर तक वो उसी तरह मेरे ऊपर लेटा रहा, फिर मेरे से अलग हुआ,

तो मैं उससे बोली- मैं तो सोच रही थी कि तुम अपनी मलाई मुझे चटाओगे लेकिन तुम तो मेरे अन्दर ही झड़ गये?

वो पास पड़े तौलिये को उठाकर मेरी चूत को साफ करते हुए बोला- आज मेरा मन अन्दर ही झड़ने का हो रहा था, इसलिये मैं तुम्हारे अन्दर झड़ गया।

मेरी चूत को तौलिये से साफ करने के बाद अपने लंड को भी साफ किया और फिर मेरे माथे को चूम कर चला गया। मैंने भी दरवाजे को बन्द किया और नंगी ही सो गई। मुझे हल्की सी हरारत लग रही थी, सोचा थोड़ी देर में दवा ले लूंगी, तभी रितेश भी ऑफिस से हाफ डे की छुट्टी ले कर आगया।

लेकिन रितेश के आने के बाद और फिर ट्रेवल की तैयारी करने में पता ही नहीं चला कि मैंने दवा खाई नहीं है और स्टेशन चलने का वक्त भी आ गया था। इसी आपाथापी में हरारत का अहसास ही नहीं हुआ। मैं तैयार होकर नीचे आई तो देखा कि पापाजी जींस और सफेद टी-शर्ट पहने हुए थे और क्या डेशिंग लग रहे थे, क्लीन शेव्ड, छोटे-छोटे बाल, काला चश्मा लगा कर वो तो अपने तीनों लड़कों से यंग लग रहे थे। आज से पहले मैंने कभी पापाजी को इतने ध्यान से नहीं देखा था लेकिन आज देखने पर लग रहा था कि छः फ़ीट लम्बे मेरे ससुर जी तो जींस और सफेट टी-शर्ट में तो कयामत लग रहे थे।

खैर मुझे क्या! लेकिन दोस्तो, ऐसी कहानी मैं कभी नहीं चाहती थी जो मेरे साथ होने वाली थी और वो सिर्फ मेरी लापरवाही का नतीजा ही था जिससे इस कहानी का जन्म हुआ। हम लोग स्टेशन पहुंचे, थोड़ी देर में ही गाड़ी भी आ गई और मेरे बॉस अभय सर ने जिस बोगी में रिजर्वेशन कराया था, वो केबिन थी। उस केबिन में मुझे और मेरे ससुर को ही सफर करना था।

केबिन देखकर रितेश मुझसे बोला- मैं चूक गया, काश इस केबिन में पापा न होते, मैं होता तो कोलकाता तक का सफर बड़े मजे से कटता।
 
ट्रेन चलने तक मेरे और रितेश के बीच बातचीत होती रही लेकिन जब ट्रेन चली तो मैं सोचने लगी कि जब बॉस को मालूम था कि मेरे साथ मेरे ससुर जायेंगे तो फिर उन्होंने केबिन वाले कोच का रिजर्वेशन क्यों कराया। मैं इसी सोच विचार में थी और गाड़ी अपनी स्पीड पकड़ चुकी थी। ससुर जी ने शायद दो तीन बार आवाज दी होगी, लेकिन मैं सोच में डूबी हुई थी कि उनकी आवाज सुन ना सकी तो उन्होंने मुझे झकझोरते हुए पूछा कि मैं क्या सोच रही हूँ।

मैं बोली- कुछ नहीं।

फिर ससुर जी बोले- आकांक्षा, मैं बाहर जा रहा हूँ, तुम चाहो तो चेंज कर लो और फ्री हो जाओ।

मैं- 'कोई बात नहीं पापा जी, मैं ऐसे ही ठीक हूँ। हाँ मैं बाहर जाती हूँ, अगर आप चेंज करना चाहो तो कर लो।'

कहकर मैंने अपना मोबाईल उठाया और केबिन के बाहर आकर मैंने बॉस को कॉल मिलाई और,

मैंने उनसे पूछा- जब आपको मालूम था कि मेरे साथ मेरे ससुर जी भी जा रहे हैं तो आपने केबिन क्यों बुक कराया?

बॉस ने बताया कि मैंने राकेश को ऑप्शन दिया था कि जिसमें सीट खाली मिले, उसे बुक करा ले और उसने केबिन का रिजर्वेशन करा दिया।

मैं- 'राकेश॰॰॰ हम्म... अच्छा

और होटल के बारे में पूछने पर बताया कि लिफाफे में ही होटल का ऐड्रेस है, यह एक महीने पहले से ही बुक है। सुईट रूम है। इसलिये इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता था।

इतना सुनना था कि मेरे मुंह से निकला- लौड़े के... जब होटल में सुईट रूम एक महीने पहले से बुक कराया था तो मुझे क्यों नहीं बताया?

बॉस को खरी-खोटी सुनाकर मैं केबिन में आ गई।

पापा जी कैपरी और वेस्ट में थे, मेरी कानी नजर उन पर पड़ी, क्या शरीर था उनका... किसी पहलवान से कम नहीं थे, क्या बड़े-बड़े बल्ले थे, चौड़ा सीना और सीने में घने-घने बाल! वो सामने वाली सीट पर लेटे हुए थे, मैं भी अपने को समेटते हुए लेट गई और बॉस ने जिस बन्दे (राकेश),का नाम लिया उसके बारे में सोचने लगी।

बड़ा ही हरामखोर था, साले का वजन भी 40 किलो से ज्यादा न था लेकिन हरामीपन में वो सभी को मात करता था। एक दिन उस हरामी ने मुझे अभय सर के साथ देख लिया, बस मेरे पीछे ही पड़ गया। जहां कभी भी मौका देखता, मेरे पिछवाड़े आकर अपना हाथ सेक लेता। हालांकि वो मेरा कुछ कर नहीं सकता था, लेकिन मैं उसे एवाईड कर देती थी। राकेश मेरे पिछवाड़े हाथ लगाने के अलावा कभी आगे नहीं बढ़ा। और ऑफ़िस में चूत चुदवाई की घटना याद आ गई, चूंकि वो हमारे ऑफिस का कम्प्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर देखता था और अकसर उससे काम पड़ जाता था। इसी में एक दिन उसे मौका लग गया।

हुआ यूं कि मुझे अपने हेड ऑफिस एक रिपोर्ट मेल करनी थी, रिपोर्ट मैं तैयार कर चुकी थी और बस मेल करने जा ही रही थी कि सिस्टम अपने आप ही ऑफ हो गया।
 
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