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Fantasy अनदेखे जीवन का सफ़र

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तीनों इस बात के लिए बहुत खुश होते हैं, और बधाईयां करते हैं। सब पार्टी एंजाय करते-करते वहीं सोफा पर लेटकर सो जाते हैं। आज अलीजा बहुत खुश थी। आखीर कार, उसे उसका प्यार मिल गया था।

इनकी बोट समुंदर के बीचोबीच पहुंच चुकी थी। और इधर यह आराम से सो रहे थे की अचानक इनकी बोट से कोई टकराता है, जिसमें सबकी आँख खुल जाती है। सभी बाहर की तरफ भागते हैं तो देखते है की एक सुनहली मछली जो बहुत बड़ी श्री सामने खड़ी थी। दिखने में बहुत बड़ी लग रही थी।

मछली के अंदर से आवाज आती है- "तुम्हें लास्ट चाँस देता है। अगर अपनी जान प्यारी हैं तो यहां से वापिस चले जाओ....

वीर- अगर नहीं गया तो?

मछली- "जैसी तुम्हारी मजी.." इतना बोल मछली अपने मुँह से आग का गोला वीर की बोट में फेंकती है।

इससे पहले की बा गोला बोट को लगता, वीर पूरी बोट को शील्ड से कवर कर देता है। आग का गोला बोट को लगने की बजाए शील्ड से टकराता है, और ब्लास्ट हो जाता है।

वीर- तुम्हें भी एक मौका देता है। हमारे रास्ते से हट जाओ, वरना जान में जाओगे।

मछली- "तुम मुझे मरोगे? हाहाहाहा... देखते हैं.." तभी मछली तेजी से दोबारा बोट से टकराती है। जिससे बोट पलट जाती है और सब पानी में गिर जाते हैं। लेकिन सभी वहां पानी में खड़े हो जाते हैं।

वीर- मैं इसे देखता है।

वीर पहले तेजी से ऊपर की तरफ उड़ जाता है, और उससे भी तेजी से नीचे की तरफ आता है और मछली को पकड़कर नीचे समुह में ले जाता है। वीर मछली को समुंदर के नीचे ले जाकर जोर से पटकता है। जिससे मछली तेजी से नीचे जाती है और निचली सतह से जा टकराती है।

इससे पहले की वीर कुछ करता वो मछली अपने अंदर से कुछ आवाज निकालती है और देखते ही देखते उसके जैसी ही 10 के करीब और मछलियां वहां आ जाती हैं, और सब मिलकर वीर पे हमला कर देती हैं।

जिससे वीर जखमी हो जाता है। वीर की गुस्से से आँखें लाल हो जाती हैं. वो और खड़ा होकर तलवार निकालकर सब पे हमला कर देता है। पर जैसे ही तलवार मछली को लगती है, तो तलवार आर-पार हो जाती है। वीर अपनी आँख बंद करता है, और देखते ही देखते वीर की बाड़ी से एक रोशनी निकलकर वीर के हाथ में आ जाती है और एक बड़े से गाले में बदल जाती है। वीर उस गाले को उन सब मछलीया के ऊपर दे मारता है। जिससे उन मछलियों के चीथड़े उड़ जाते हैं। पर उनमें से वो पहले वाली सुनहली मछली बच जाती है। पर उसकी हालत भी बहुत खराब थी।

वीर आगे बढ़कर उसपे वार करने ही वाला था की मछली बोली- "रुक जाओ। तुम जीत गये.. और इतना बोलकर वो मछली एक जिन्न के रूप में आ जाती है, और जिन्न कहता है- "महाराज की जय हो। महाराज आप आगे जा सकते हैं... फिर वो जिन्न वीर को आगे जाने का रास्ता बताता है।

वीर वहां से गायब होकर ऊपर आ जाता है। सब वीर को सही साल मत देखकर खुश होते हैं।

वीर- चलो दोस्तों, आशीष एक नई शिप लाओ।

तभी आशीष वहां एक और शिप ले आता है। जिसमें बैठकर सब आगे के सफर के लिए निकलते हैं।

वीर- बस अब हमें थोड़ी दूर हो जाना है। उसके बाद हम सबको समुंदर के अंदर जाना होगा। समुंदर के अंदर एक गुफा बनी हुई है. वहां रखी है वो मणि।

***** *****

 
एक घंटा सफर के बाद वीर शिप को एक जगह रुकवा देता है, और कहता है- "दोस्तों, अब हमें नीचे जाना है.."

फिर सब एक-एक करके पानी में कूद पड़ते हैं। वीर नीचे जाने से पहले सबको शील्ड से कवर कर देता है। काफी नीचे जाने के बाद सब समुह की निचली सतह तक पहुँच जाते हैं। वीर सबको धरती के नीचे जाने को कहता है और खुद भी सबके साथ नीचे चला जाता है। सब नीचे जाकर क्या देखते हैं की वहां हर तरफ बहुत सारी गुफायें बनी हुई थीं।

अलीजा- वीर, यहां तो हर तरफ गुफा ही गुफा है।

वीर- अलीजा ध्यान से देखो एक-एक गुफा को। इनमें से सिर्फ एक गुफा असली गुफा है, बाकी सब मायाजाल है।

अलीजा अपनी आँख बंद करती है। थोड़ी देर आँख बंद रखने के बाद जब वो आँख खोलती है तो उसकी बाड़ी से रोशनी निकलती है, और देखते ही देखते अलीजा की हमशकल लड़कियां तैयार हो जाती हैं। अलीजा उन सबको गुफा की तरफ इशारा करती है।

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सबकी सब लड़कियां अलग-अलग गुफा की तरफ चल जाती हैं। जैसे ही वो सब लड़कियां गुफा के पास पहुँचती हैं, उनमें से काई आग के हवाले हो जाती है तो कोई टुकड़ों में बंट जाती है। सिर्फ एक बचती है। इससे सबको पता चल जाता है की पहीं वो गुफा है जिसके अंदर जाना है। वो लड़की राशनी बजकर अलीजा के अंदर समा जाती है।

वीर- थैक्स अलीजा।

जस्सी- चलो दोस्तों, अंदर चलते हैं।

सभी गुफा के अंदर कदम रखते हैं। अभी सबने अंदर कदम रखा ही था की कोई चीज इन्हें जोर से बाहर धकेल देती है, जिससे सब उड़ते हुए दूर जा गिरते हैं।

वीर- "दोस्तो ध्यान से, कोई है जो नहीं चाहता की हम गुफा के अंदर जाएं.."

फिर वीर अकेला दोबारा गुफा के अंदर जाता है, और इस बार भी वहीं हुआ जो पहले हुआ था।

वीर- छुप कर बार क्यों करते हो? हिम्मत है तो सामने आओ।

तभी एक रोशनी चमकती है, और एक भयानक सा दरिंदा उनके सामने आ जाता है।

दरिंदा- "हे बच्चे... अभी भी तेरे पास एक मौका है। चुपचाप चला जा यहां से, वरना अच्छा नहीं होगा तेरे लिए.."

मोहित- अबे ओहह... गुछ क्यों अपने बाप को ललकार रहा है। अबे साले में तो कहता हूँ हमारा रास्ता छोड़ दें बरना तेरा वो हाल होगा की तू सोच भी नहीं सकता। हमेशा यही दुआ करेंगा उपर वाले से की हे मालिक दोबारा मझें इन बचों के सामने मत लाना।

मोहित की बात पर सब हँस देते हैं। सबको हँसता देखकर वो दरिदा मोहित को एक पंच जड़ देता है। मोहित हवा में उड़ता हवा सामने बने एक पत्थर की दीवार से टकराता है, और दीवार टूटकर बिखर जाती है की तभी एक दहाड़ सुनाई देती है।

सब उस दीवार की तरफ देखते हैं की वहां मोहित अपने असली रूप में खड़ा था, उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं। मोहित उस दरिंदे के ऊपर जंप मारता है, और उसकी पूरी बाडी पर अपने नाखून गड़ा देता है।

 
मोहित की बात पर सब हँस देते हैं। सबको हँसता देखकर वो दरिदा मोहित को एक पंच जड़ देता है। मोहित हवा में उड़ता हवा सामने बने एक पत्थर की दीवार से टकराता है, और दीवार टूटकर बिखर जाती है की तभी एक दहाड़ सुनाई देती है।

सब उस दीवार की तरफ देखते हैं की वहां मोहित अपने असली रूप में खड़ा था, उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं। मोहित उस दरिंदे के ऊपर जंप मारता है, और उसकी पूरी बाडी पर अपने नाखून गड़ा देता है।

दरिंदे को आए घाब देखते ही देखते भर जाते हैं। दरिदा अपने हाथ से रोशनी निकालकर एक तरफ फेंकता है, और उस रोशनी के अंदर से बहुत सारे अजीब से दरिदे बाहर निकलकर इन सब पर हमला कर देते हैं।

वीर आगे बढ़कर अपने हाथ में तलवार लिए उन दरिंदों को गाजर मूली की तरह काटने लगता है। वीर जाकर दरिदे के आगे खड़ा हो जाता है। दोनों में बहुत देर तक युद्ध चलता है, जिसमें दोनों को चोट आती है।

उधर अलीजा, आशीष, जस्सी, प्रीत, और माहित उन दरिंदों को खतम कर देते हैं।

वीर हवा में खड़ा हो जाता है, और सबको साइड हो जाने को कहता है। सब वीर और उस दरिंदे से दूर हो जाते हैं। वीर अपने हाथ में एक बहुत बड़ा गोला तैयार करता है, और उसे उस दरिदे पर दे मारता है। गोला दारदे को लगते ही दरिद के चीथड़े उड़ जाते हैं। वीर और बाकी सब उस गुफा के अंदर चले जाते हैं। गुफा की लंबाई बहुत थी। गुफा में आगे बहुत बड़ा हाल बना हुआ था और एक पत्थर पर मणि रखी हुई थी। जिसकी चमक से पूरा हाल चमक रहा था।

वीर आगे बढ़कर उस मणि को उठा लेता है। जैसे ही वीर मणि को उठाता है तो उसे अपने अंदर असीम शक्ति महसूस होती है। मणि एक रोशनी में बदलकर वीर के दिल के ऊपर एक टैटू में बदल जाती है। वीर को अपने अंदर बहुत शक्ति महसूस होती है। वीर की बाड़ी पहले से और भी आकर्षिक और मजबूत हो जाती है। आँखों का रंग और भी ब्लू हो जाता है।

फिर सब मिलकर वहां से गायब होकर ऊपर बोट में आ जाते हैं।

अलीजा- दो मणि हासिल कर लिया है। अब आगे क्या?

वीर- "अब हम कुछ दिन घर पर ही रहेंगे... तभी वीर के माइंड में उसकी माँ की आवाज गूजती है।

उधर माम सबको साथ लेकर जिन्न-लोक पहुँच जाती हैं, और वीर की मदद से वीर की सारी फैमिली जिन्न में हो तब्दील हो जाती हैं, सबके सब। वीर के चाचा, चाची, वीर की कजिन, बहन सबके सब।

वीर और पार्टी जिन्न-लोक पहुँचते हैं। वहां जिन्न-लोक में अपने राजा का स्वागत किया जाता है। सब अपना सिर झुकाए खड़े होकर वीर का स्वागत करते हैं।

वीर- आज मैं बहुत खुश हैं। आज मेरी सारी परिवार जिन्न जिज्नी में तबदील हो चुकी है। बस मैं सिर्फ इतना कहूंगा की अपनी ताकत को अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल मत करना। इस ताकत को लोगों की और अपनी परिवार प्रजा के लिए ही इस्तेमाल करना।

चाचाजी- आप ठीक कह रहे हैं महाराज। हम सब अपनी तरफ से आपको कभी भी शमिंदा नहीं होने देंगे।

गुरुजी- महाराज अब आपको आज से 40 दिन बाद अगले सफर पर निकलना है। जो मणि आपको वहां मिलेंगी वो अभी उस बैंगन के अंदर है, जो ज्वालामुखी का गाई है, वो अभी सो रहा है। जब तक वो जाग नहीं जाता, तब तक आप वो मणि हासिल नहीं कर सकते।

वीर- ठीक है गुरुजी, जैसे आपको ठीक लगे।

सभी मिलकर वहां रात का डिनर करते हैं और अपने-अपने रूम में चले जाते हैं सोनें।

 
अगले दिन सवेरे सब तैयार होकर निकलते हैं मुंबई की और। और कुछ ही क्षणों में सब मुंबई पहुँच जाते हैं। घर पहुँचकर सब हाल में बैठ जाते हैं

माम- बेटू कैसा रहा तुम सबका सफर?

वीर- बहुत अच्छा मोमा दो मणि हाथ लगते ही ऐसा लग रहा है जैसे ताकत का एक विशाल समुंदर अंदर प्रवेश कर गया हो।

मोम- अभी तो और बाकी है मेरे बच्चे।

प्रीत. वीर चलो आज कालेज चलते हैं। बहुत दिन हो गये कालेज गये हुए।

वीर- "हाँ चलो.." फिर सब निकलते हैं कालेज की ओर।

*#*#* *****

 
कड़ी 56

जैसे ही हम कालेज पहुँचे सब स्टूडेंट की नजर हम पर टिक गई एक से बढ़कर एक गाड़ी कालेज में एंटर हो रही थी। गाड़ी से उतरकर हम सब कैंटीन की तरफ चल दिए। कैंटीन में बैठ जाते हैं।

लड़कियां तो वीर को देखकर आहें भरने लगती हैं।

प्रीत- वीर तुम पहले से भी ज्यादा हँडसम हो गये हो और तुम्हारी आँखों का कलर भी और बलू हो गया है।

जस्सी- "ही भाई भाभी सही कह रही है। मुझे तो टेन्शन हो रही है। तेरे साथ रहते हमें कोई लड़की घास नहीं डालेंगी..' जस्सी की बात पे सब हँसने लगते हैं।

वीर- तू चिंता ना कर तेरी वाली बहुत जल्द ही तुझे मिलने वाली है।

तभी बिस्वा वीर के कान में कुछ कहता है जिसे सुनकर वीर गुस्से में उठ जाता है, और बिल्डिंग की लास्ट फ्लोर की तरफ चल देता है। वीर के पीछे-पीछे सब चल देते हैं। वीर जब लास्ट फ्लोर पर पहुँचता है तो क्या देखता है की वहां बनें एक रूम के आगे दो लड़के सिगरेट पी रहे थे।

जब वो लड़के वीर को देखते हैं तो उनमें से एक लड़का- "ओ हीरा यहां क्या करने आया है? चल जा यहां से.."

वो अभी इतना ही बोला था की वीर उसे एक थप्पड़ जड़ देता है और वो बेहोश हो जाता है। दूसरा लड़का कुछ बोलने ही वाला था की जस्सी आगे आकर उसे भी एक थप्पड़ जड़ देता है। वीर दरवाजे के पास पहुँचकर दरवाजे पे लात मारता है। दरवाजा किसी कागज के टुकड़े की तरह टूटकर बिखर जाता है।

अंदर तीन लड़के एक लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे थे। लड़की के गाल थप्पड़ा की वजह से सूज गये थे, कपड़े फट चुके थे।

यह देख कर वीर का गुस्सा कंट्रोल से बाहर हो जाता है। इससे पहले की वो कुछ करता तभी जस्सी तेजी से उन लड़कों की तरफ जाता है, और उन्हें पागलों की तरह मारने लगता है। जिससे उन लड़कों की हालत बुरी हो जाती है। अलीजा और संज आगे बढ़कर उस लड़की को सहारा देते हैं। अलीजा जादू से अपने बैग से उस लड़की के लिए कपड़े निकालती है और उसे साइड में लेजाकर कपड़े चेंज करती है।

इधर जस्सी मार-मार के उनका कचूमर निकल देता है। आशीष आगे बढ़कर जस्सी को रोकता है। तब तक वहां प्रिन्सिपल के साथ कुछ टीचर्स और स्टूडेंट भी आ जाते हैं।

प्रिंसिपल- क्या हो रहा है यहां?

बिस्वा प्रिन्सिपल को सब बता देता है।

निसिपल- पर ये यहां के स्टूडेंट नहीं लग रहे हैं।

वीर- यह सिस्टम है आपके कालेज का की कोई भी गुन्डा मुँह उठाकर कालेज में एंटर हो जाए। मोहित पोलिस को बुला।

पालिस का नाम सुनकर प्रिंसिपल डर जाता है।

प्रिसिपल- प्लीज... वीर बेटा, पोलिस को मत बुलाओ। वरना कालेज की बहुत बदनामी होगी।

वीर- ठीक है। पर इन लड़का को तो सजा मिलेगी। बिस्वा आशीष इन पाँचों को उठाकर बिल्डिंग के पीछे से नीचे फेंक दो।

 
वीर- यह सिस्टम है आपके कालेज का की कोई भी गुन्डा मुँह उठाकर कालेज में एंटर हो जाए। मोहित पोलिस को बुला।

पालिस का नाम सुनकर प्रिंसिपल डर जाता है।

प्रिसिपल- प्लीज... वीर बेटा, पोलिस को मत बुलाओ। वरना कालेज की बहुत बदनामी होगी।

वीर- ठीक है। पर इन लड़का को तो सजा मिलेगी। बिस्वा आशीष इन पाँचों को उठाकर बिल्डिंग के पीछे से नीचे फेंक दो।

वीर की बात सुनकर प्रिंसिपल और टीचर चकित हो जाते हैं। इससे पहले की प्रिसिपल कुछ बोलता वीर उन्हें चुप रहने का इशारा करता है। बिस्वा और आशीष उन पौंचों लड़कों को नीचे फेंक देते हैं। वहां खड़े सब स्टूडेंट डर जाते हैं।

वीर- "तुम सब भी कान खोलकर सुन लो, किसी ने भी अगर लड़कियों के साथ बदतमीजी की या उनका रेप करने की कोशिश की तो उसका भी यही हाल होगा..' इतना बोल कर वीर वहां से निकल पड़ता है, साथ में बाकी सब भी।

सारे कैंटीन में पहुँच कर नाश्ता आईर करते हैं।

वीर- बिस्वा कुछ गाईस को कालेज में तैनात करो ताकी यहां दोबारा कोई कांड ना हो।

वो लड़की भी इनके साथ ही बैठी थी, जो अब तक काफी हद तक संभाल चुकी थी।

जस्सी- क्या नाम है आपका?

लड़की- जी निशु।

जस्सी- बहुत प्यारा नाम है। अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है। यह मेरा नम्बर है। कभी भी कोई जरूरत पड़े बेझिझक काल मी।

लड़की जस्सी का नम्बर ले लेती है। जस्मी ता एकटक निशु को ही देखे जा रहा था और निशु अपनी नजरें नीचे कर लेती है। यह देखकर बाकी सब मन ही मन हसे जा रहे थे।

संज- "ओहह ... लैला मजनू हम भी बैठे हैं यहां.."

संजू की आवाज से दोनों हड़बड़ा जाते हैं। जिससे सभी की हसी छूट जाती है।

वीर- निशु कहां रहती हो और तुम्हारे माम डैड क्या करते हैं?

निश- "मेरे डैड पोलिस में ए.सी.पी. हैं और मोम हाउसवाइफ हैं। कुछ दिन पहले ही डैड ने इन गुन्डों को जेल में कैद किया था। लेकिन यह बच गयें, और उसी के चलते इन्होंने मुझे किडनैप कर लिया और यहां ले आए। यह गुन्डे यहां के बचा यादव के आदमी थे। वो बहुत खतरनाक है। मैं आप सबका तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हैं। अगर आज आप लोग ना आए होते तो शायद में कही की नहीं रहती. इतना बोलकर निशु रोने लगती हैं।

जस्सी उसे चुप कराता है, और पानी देता है पीने को।

वीर- चिंता मत करो निशु, आज के बाद तुम्हें या तुम्हारे परिवार को कोई नुकसान नहीं पहुँचाएगा।

निशु- थैक्स। क्या मुझे आपके ग्रुप में जगह मिलेगी?

वीर- हाँ हौं क्यों नहीं?

फिर सब मिलकर क्लास लेने चले जाते हैं। कालेज खतम होने पर सब पाकिंग में आते हैं, और सब निकलते हैं घर की और। जस्सी निशु को छोड़ने जाता है।

घर पहुँचकर वीर और बाकी सब फ्रेश होनें चला जाते हैं। फ्रेश होकर सब ड्राइंगरगम में बैठ जाते हैं। तभी कोई वीर के गाल पे किस करता है। पर आस-पास कोई नहीं था। वीर के चेहरे पे स्माइल आ जाती है। जो कोई भी किस कर रहा था वो गायब होकर कर रहा था। जैसे ही वो दोबारा किस करने नजदीक आता है तो वीर उसे झट से पकड़ लेता है।

***** *****

 
वीर उस किस करने वाले को पकड़ लेता है। यह कोई और नहीं रिया थी। जब से यह जिन्नी बनी थी तबसे यह सबको अपनी नटखट हरकतों से तंग कर रही है। वीर उसे पकड़कर गोद में बैठा लेता है।

रिया- "हाहाहाहा... भइया आपको कैसे पता चला मैं हूँ?"

वीर- मुझे मेरी गुड़िया का पता चल जाता है।

मोम- बयों क्या किया इसने?

वीर- ये गायब होकर मेरे गाल पर किस करके भाग जाती है।

वीर की बात सुन सब हँस देते हैं।

ईड- यह जटखट बहुत शैतान होती जा रही हैं।

वीर- करने दो इसे मस्ती, यही उमर है इसकी मस्ती करने की।

हाँ सही कहा आपने। एक पही उमर है यहां कोई टेन्शन नहीं होती।

तभी घर की बेल बजती है। गाई दरवाजा खोलता है और एक पोलिस वाला अंदर आता है।

वीर- जी कहिए किससे मिलना है?

आदमी- जी मैं ए.सी.पी. सिद्धार्थ हैं। मैं वीर से मिलने आया था।

वीर- आइये आइए सर। मैं ही वीर हूँ, और आप शायद निशु के डैड है।

ए.सी.पी. ने जैसे ही सुना, बो वीर के आगे हाथ जोड़कर खड़ा हो गया, और कहा- "मुझे समझ में नहीं आता की मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करं? आपने और आपके दोस्तों में जो किया मैं कभी नहीं भूल सकता..."

तभी जस्सी और निशु अंदर आती हैं। वो तो घर को ही देखे जा रही थी।

वीर- सर प्लीज़... मुझे शर्मिंदा मत कीजिए। पह तो हमारा फर्ज था। इसकी जगह कोई और होता तो भी हम वहीं करते। आइए बैंठिये।

संजू डिक्स के लिये बोल देता है।

वीर- सर यह हैं मेरे डैड और चाचाजी।

ए.सी.पी.- भाई साहब आपका बेटा होरा है। आज जो इसने और इसके दोस्तों ने मेरे बेटी के लिए किया मैं हमेशा इनका अभारी रहूंगा।

डॅड. यह हम सबका फर्ज बनता है की हम दूसरों की मदद करें। लीजिए पहले ड्रिक लीजिए।

नौकर सबके लिए ड्रिंक्स सर्व करता है।

ए.सी.पी.- जबसं आप यहां आए हैं, सब आप ही के बारे में बात कर रहे हैं।

वीर- ए.सी.पी. सर, यह बच्चा यादव का क्या सीन है?

ए.सी.पी.- सर यह यहां का एक गुन्डा है, जो अब जेल में है। कुछ दिन पहले ही इसने एक नाबलिग लड़की का रेप किया था। किश्मत से लड़की बच गई और लड़की और उसकी माँ ने थाने में रिपोर्ट लिखवा दी। मुझे पता था की वो इन माँ बेटियों को छोड़ेगा नहीं। इसलिए मैंने उन दोनों को अपने घर पर ही रख लिया काम पर। कोर्ट में उस लड़की ने बच्चा यादव खिलाफ गवाही दे दी, जिसके चलते उसे सजा सुनाई गई। उसके लड़के हमें धमकी देते रहते थे, और आज तो उन्होंने हद ही कर दी। मुझे मेरी बेटी ने बताया की कैसे आपने उन्हें नीचे फिकवा दिया।

वीर- ए.सी.पी. सर, ऐसे लोगों के साथ मैं तो यही करता हैं। और हाँ आज के बाद वो गन्हें आपको तंग नहीं करेंगे। मैं आपसे एक और बात कहना चाहता हूँ की मैं इन गुन्डा के साथ जो भी कगा, आपकी पोलिस मेरे काम में दखल नहीं देंगी। आप निशु के पापा हो इसलिए आपका कह रहा हैं। बस आप गुन्डों को जेल में रखने के लिए तैयार रहिए।

 
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