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Guest
तीनों इस बात के लिए बहुत खुश होते हैं, और बधाईयां करते हैं। सब पार्टी एंजाय करते-करते वहीं सोफा पर लेटकर सो जाते हैं। आज अलीजा बहुत खुश थी। आखीर कार, उसे उसका प्यार मिल गया था।
इनकी बोट समुंदर के बीचोबीच पहुंच चुकी थी। और इधर यह आराम से सो रहे थे की अचानक इनकी बोट से कोई टकराता है, जिसमें सबकी आँख खुल जाती है। सभी बाहर की तरफ भागते हैं तो देखते है की एक सुनहली मछली जो बहुत बड़ी श्री सामने खड़ी थी। दिखने में बहुत बड़ी लग रही थी।
मछली के अंदर से आवाज आती है- "तुम्हें लास्ट चाँस देता है। अगर अपनी जान प्यारी हैं तो यहां से वापिस चले जाओ....
वीर- अगर नहीं गया तो?
मछली- "जैसी तुम्हारी मजी.." इतना बोल मछली अपने मुँह से आग का गोला वीर की बोट में फेंकती है।
इससे पहले की बा गोला बोट को लगता, वीर पूरी बोट को शील्ड से कवर कर देता है। आग का गोला बोट को लगने की बजाए शील्ड से टकराता है, और ब्लास्ट हो जाता है।
वीर- तुम्हें भी एक मौका देता है। हमारे रास्ते से हट जाओ, वरना जान में जाओगे।
मछली- "तुम मुझे मरोगे? हाहाहाहा... देखते हैं.." तभी मछली तेजी से दोबारा बोट से टकराती है। जिससे बोट पलट जाती है और सब पानी में गिर जाते हैं। लेकिन सभी वहां पानी में खड़े हो जाते हैं।
वीर- मैं इसे देखता है।
वीर पहले तेजी से ऊपर की तरफ उड़ जाता है, और उससे भी तेजी से नीचे की तरफ आता है और मछली को पकड़कर नीचे समुह में ले जाता है। वीर मछली को समुंदर के नीचे ले जाकर जोर से पटकता है। जिससे मछली तेजी से नीचे जाती है और निचली सतह से जा टकराती है।
इससे पहले की वीर कुछ करता वो मछली अपने अंदर से कुछ आवाज निकालती है और देखते ही देखते उसके जैसी ही 10 के करीब और मछलियां वहां आ जाती हैं, और सब मिलकर वीर पे हमला कर देती हैं।
जिससे वीर जखमी हो जाता है। वीर की गुस्से से आँखें लाल हो जाती हैं. वो और खड़ा होकर तलवार निकालकर सब पे हमला कर देता है। पर जैसे ही तलवार मछली को लगती है, तो तलवार आर-पार हो जाती है। वीर अपनी आँख बंद करता है, और देखते ही देखते वीर की बाड़ी से एक रोशनी निकलकर वीर के हाथ में आ जाती है और एक बड़े से गाले में बदल जाती है। वीर उस गाले को उन सब मछलीया के ऊपर दे मारता है। जिससे उन मछलियों के चीथड़े उड़ जाते हैं। पर उनमें से वो पहले वाली सुनहली मछली बच जाती है। पर उसकी हालत भी बहुत खराब थी।
वीर आगे बढ़कर उसपे वार करने ही वाला था की मछली बोली- "रुक जाओ। तुम जीत गये.. और इतना बोलकर वो मछली एक जिन्न के रूप में आ जाती है, और जिन्न कहता है- "महाराज की जय हो। महाराज आप आगे जा सकते हैं... फिर वो जिन्न वीर को आगे जाने का रास्ता बताता है।
वीर वहां से गायब होकर ऊपर आ जाता है। सब वीर को सही साल मत देखकर खुश होते हैं।
वीर- चलो दोस्तों, आशीष एक नई शिप लाओ।
तभी आशीष वहां एक और शिप ले आता है। जिसमें बैठकर सब आगे के सफर के लिए निकलते हैं।
वीर- बस अब हमें थोड़ी दूर हो जाना है। उसके बाद हम सबको समुंदर के अंदर जाना होगा। समुंदर के अंदर एक गुफा बनी हुई है. वहां रखी है वो मणि।
***** *****
इनकी बोट समुंदर के बीचोबीच पहुंच चुकी थी। और इधर यह आराम से सो रहे थे की अचानक इनकी बोट से कोई टकराता है, जिसमें सबकी आँख खुल जाती है। सभी बाहर की तरफ भागते हैं तो देखते है की एक सुनहली मछली जो बहुत बड़ी श्री सामने खड़ी थी। दिखने में बहुत बड़ी लग रही थी।
मछली के अंदर से आवाज आती है- "तुम्हें लास्ट चाँस देता है। अगर अपनी जान प्यारी हैं तो यहां से वापिस चले जाओ....
वीर- अगर नहीं गया तो?
मछली- "जैसी तुम्हारी मजी.." इतना बोल मछली अपने मुँह से आग का गोला वीर की बोट में फेंकती है।
इससे पहले की बा गोला बोट को लगता, वीर पूरी बोट को शील्ड से कवर कर देता है। आग का गोला बोट को लगने की बजाए शील्ड से टकराता है, और ब्लास्ट हो जाता है।
वीर- तुम्हें भी एक मौका देता है। हमारे रास्ते से हट जाओ, वरना जान में जाओगे।
मछली- "तुम मुझे मरोगे? हाहाहाहा... देखते हैं.." तभी मछली तेजी से दोबारा बोट से टकराती है। जिससे बोट पलट जाती है और सब पानी में गिर जाते हैं। लेकिन सभी वहां पानी में खड़े हो जाते हैं।
वीर- मैं इसे देखता है।
वीर पहले तेजी से ऊपर की तरफ उड़ जाता है, और उससे भी तेजी से नीचे की तरफ आता है और मछली को पकड़कर नीचे समुह में ले जाता है। वीर मछली को समुंदर के नीचे ले जाकर जोर से पटकता है। जिससे मछली तेजी से नीचे जाती है और निचली सतह से जा टकराती है।
इससे पहले की वीर कुछ करता वो मछली अपने अंदर से कुछ आवाज निकालती है और देखते ही देखते उसके जैसी ही 10 के करीब और मछलियां वहां आ जाती हैं, और सब मिलकर वीर पे हमला कर देती हैं।
जिससे वीर जखमी हो जाता है। वीर की गुस्से से आँखें लाल हो जाती हैं. वो और खड़ा होकर तलवार निकालकर सब पे हमला कर देता है। पर जैसे ही तलवार मछली को लगती है, तो तलवार आर-पार हो जाती है। वीर अपनी आँख बंद करता है, और देखते ही देखते वीर की बाड़ी से एक रोशनी निकलकर वीर के हाथ में आ जाती है और एक बड़े से गाले में बदल जाती है। वीर उस गाले को उन सब मछलीया के ऊपर दे मारता है। जिससे उन मछलियों के चीथड़े उड़ जाते हैं। पर उनमें से वो पहले वाली सुनहली मछली बच जाती है। पर उसकी हालत भी बहुत खराब थी।
वीर आगे बढ़कर उसपे वार करने ही वाला था की मछली बोली- "रुक जाओ। तुम जीत गये.. और इतना बोलकर वो मछली एक जिन्न के रूप में आ जाती है, और जिन्न कहता है- "महाराज की जय हो। महाराज आप आगे जा सकते हैं... फिर वो जिन्न वीर को आगे जाने का रास्ता बताता है।
वीर वहां से गायब होकर ऊपर आ जाता है। सब वीर को सही साल मत देखकर खुश होते हैं।
वीर- चलो दोस्तों, आशीष एक नई शिप लाओ।
तभी आशीष वहां एक और शिप ले आता है। जिसमें बैठकर सब आगे के सफर के लिए निकलते हैं।
वीर- बस अब हमें थोड़ी दूर हो जाना है। उसके बाद हम सबको समुंदर के अंदर जाना होगा। समुंदर के अंदर एक गुफा बनी हुई है. वहां रखी है वो मणि।
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