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उधर जूलिया के मन में भी वीर के लिए प्यार पनप रहा था। उसे वीर में वो सब गुण नजर आते हैं जो एक जीवनसाथी में होने चाहिए। जूलिया मन में- “कितना प्यारा है। पर जब गुस्सा आता है तो बाप रे बाप... सबका बाप बन जाता है। एक बार सब सही हो जाए तब खुद प्रपोज करूंगी... जूलिया ऐसे ही वीर की यादों में खोकर सो जाती है।
उधर जब प्रीत घर होते हैं।
अजय- मेरी बहन कैसी है तू? हेलो एवरीवन।
सब- हेलो।
प्रीत के डैड भी आकर सबसे मिलते हैं। प्रीत के डैड कहते हैं- “कैसी है मेरी बच्ची। तू तो दिन-ब-दिन और सुंदर होती जा रही है।
फिर सब ऐसे ही ड्राइंगरूम में बैठ जाते हैं।
प्रीत- डैड, मैं आप दोनों को अपने साथ ले जाने आई हूँ। अब आप यहां नहीं रहेंगे। कुछ सवाल हैं जिसका जवाब
आपको वहीं मिलेगा। अजय तुम समझ रहे हो ना?
अजय- हाँ दीदी। हम चलेंगे आपके साथ। चिंता मत करो।
प्रीत के डैड- पर यहां का बिज़नेस... वो कौन संभालेगा?
प्रीत- डैड आपकी बेटी के पास अब इतना पैसा है की वो एक नहीं, 10 कोम्पनी और खोल दे। आप यहां के बिज़नेस की टेन्शन छोड़ो।
प्रीत के डैड- ठीक है बेटी, जैसे तुझे ठीक लगे। वैसे भी मुझे भी अपने दामाद से मिलना है। बहुत टाइम हो गया मिले हुए।
इधर अगले दिन सवेरे सब तैयार होकर नाश्ता कर रहे थे, और उधर अवनी की आँख खुल जाती है। अवनी को अपने अंदर बहत बदलाव महसूस होता है। उसकी आँखें ब्लैक, रंग दूध से भी गोरा, आँखों में एक अलग सी चमक थी।
अवनी तैयार होकर बाहर आती है, और जाकर वीर के गले लग जाती है।
अवनी- “बैंक्स वीर.” और बाद में निशु के गले लगती है- “बैंक्स निशु मुझे यह लाइफ देने के लिए."
वीर- मार खाएगी अगर दोबारा बैंक्स बोला तो। आफिस फोन कर दे की तुम तीन दिन के लिए बाहर जा रही हो। हम यू.एस.ए. जा रहे हैं कुछ काम से।
अवनी- ठीक है। ‘
मोम- चल आ जा नाश्ता कर ले। देख कैसे पतली होती जा रही है।
अवनी- हाहाहाहा... पहले माँ नहीं थी ना... अब आप हो तो अपने हाथ से खिला दो।
मोम- आ जा मेरी बच्ची।
जस्सी- भाई एक बात कहनी थी। क्या आप हमारी हेल्प कर सकते हो?
वीर- बोल जस्सी क्या हवा?
जस्सी- भाई कभी-कभी हमें खून पीने की तलब लगती है। वो तो आपकी दी हुई पावर्स है, उससे कंट्रोल हो जाता है। वरना पता नहीं क्या होता?
वीर- "इसमें कौन सी बड़ी बात है..." और वीर अपनी आँखें बंद करके एक कमरे की तरफ इशारा करता है- “जाओ तुम्हारा नाश्ता उस रूम में है। वो कोई आम खून नहीं है। उससे तुम्हें और शक्ति मिलेगी.."
जस्सी- “भाई मैं खून पीना नहीं चाहता प्लीज्ज... कुछ और करो। भाई हम पंजाबी हैं। सरदार नहीं हुए तो क्या हुआ। हूँ तो गुरु गोबिंद जी का सिख ही ना..”
वीर- वाह... जस्सी आज तूने यह साबित कर दिया की तू वाकई में पंजाबी है। चल यारा आँख बंद कर।
निश और जस्सी अपनी आँखें बंद करते हैं, और वीर अपने हाथ से एक रोशनी निकालकर उनकी तरफ फेंकता है। और ऐसा ही अवनी, मोहित, और नीलम के साथ भी करता है।
वीर- "अब तुम लोगों को किसी भी खून या कुछ और की तलब नहीं लगेगी.."
वीर वहां से सीधा प्रिंसिपल आफिस जाता है।
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उधर जब प्रीत घर होते हैं।
अजय- मेरी बहन कैसी है तू? हेलो एवरीवन।
सब- हेलो।
प्रीत के डैड भी आकर सबसे मिलते हैं। प्रीत के डैड कहते हैं- “कैसी है मेरी बच्ची। तू तो दिन-ब-दिन और सुंदर होती जा रही है।
फिर सब ऐसे ही ड्राइंगरूम में बैठ जाते हैं।
प्रीत- डैड, मैं आप दोनों को अपने साथ ले जाने आई हूँ। अब आप यहां नहीं रहेंगे। कुछ सवाल हैं जिसका जवाब
आपको वहीं मिलेगा। अजय तुम समझ रहे हो ना?
अजय- हाँ दीदी। हम चलेंगे आपके साथ। चिंता मत करो।
प्रीत के डैड- पर यहां का बिज़नेस... वो कौन संभालेगा?
प्रीत- डैड आपकी बेटी के पास अब इतना पैसा है की वो एक नहीं, 10 कोम्पनी और खोल दे। आप यहां के बिज़नेस की टेन्शन छोड़ो।
प्रीत के डैड- ठीक है बेटी, जैसे तुझे ठीक लगे। वैसे भी मुझे भी अपने दामाद से मिलना है। बहुत टाइम हो गया मिले हुए।
इधर अगले दिन सवेरे सब तैयार होकर नाश्ता कर रहे थे, और उधर अवनी की आँख खुल जाती है। अवनी को अपने अंदर बहत बदलाव महसूस होता है। उसकी आँखें ब्लैक, रंग दूध से भी गोरा, आँखों में एक अलग सी चमक थी।
अवनी तैयार होकर बाहर आती है, और जाकर वीर के गले लग जाती है।
अवनी- “बैंक्स वीर.” और बाद में निशु के गले लगती है- “बैंक्स निशु मुझे यह लाइफ देने के लिए."
वीर- मार खाएगी अगर दोबारा बैंक्स बोला तो। आफिस फोन कर दे की तुम तीन दिन के लिए बाहर जा रही हो। हम यू.एस.ए. जा रहे हैं कुछ काम से।
अवनी- ठीक है। ‘
मोम- चल आ जा नाश्ता कर ले। देख कैसे पतली होती जा रही है।
अवनी- हाहाहाहा... पहले माँ नहीं थी ना... अब आप हो तो अपने हाथ से खिला दो।
मोम- आ जा मेरी बच्ची।
जस्सी- भाई एक बात कहनी थी। क्या आप हमारी हेल्प कर सकते हो?
वीर- बोल जस्सी क्या हवा?
जस्सी- भाई कभी-कभी हमें खून पीने की तलब लगती है। वो तो आपकी दी हुई पावर्स है, उससे कंट्रोल हो जाता है। वरना पता नहीं क्या होता?
वीर- "इसमें कौन सी बड़ी बात है..." और वीर अपनी आँखें बंद करके एक कमरे की तरफ इशारा करता है- “जाओ तुम्हारा नाश्ता उस रूम में है। वो कोई आम खून नहीं है। उससे तुम्हें और शक्ति मिलेगी.."
जस्सी- “भाई मैं खून पीना नहीं चाहता प्लीज्ज... कुछ और करो। भाई हम पंजाबी हैं। सरदार नहीं हुए तो क्या हुआ। हूँ तो गुरु गोबिंद जी का सिख ही ना..”
वीर- वाह... जस्सी आज तूने यह साबित कर दिया की तू वाकई में पंजाबी है। चल यारा आँख बंद कर।
निश और जस्सी अपनी आँखें बंद करते हैं, और वीर अपने हाथ से एक रोशनी निकालकर उनकी तरफ फेंकता है। और ऐसा ही अवनी, मोहित, और नीलम के साथ भी करता है।
वीर- "अब तुम लोगों को किसी भी खून या कुछ और की तलब नहीं लगेगी.."
वीर वहां से सीधा प्रिंसिपल आफिस जाता है।
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