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Fantasy अनदेखे जीवन का सफ़र

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वीर सबको गायब करके अपने साथ घर आ जाता है। वीर ड्रैगन्स को जादू से छोटा कर देता है, और वो ड्रैगन्स

और उनके बच्चे सिर्फ वीर की परिवार को ही दिखेंगे।

सब घर पहुँच चुके थे, और डैड, रिया और चाचाजी से मिलते हैं। रिया और लीना की छोटी बहनें मिलकर ड्रैगन्स के बच्चों से खेलने लगती हैं। ड्रैगन्स के छोटे बच्चे भी बहत नटखट थे। सारे बंगले में इधर से उधर भागते फिर रहे थे। सब उन्हें देखकर बहुत खुश हो रहे थे।

वीर- लीना क्या नाम है तुम्हारी छोटी बहन का।

लीना- इसका नाम है लारा।

वीर- हाँ बहत प्यारा नाम है। देखो कैसे रिया और लारा ड्रैगन्स के बच्चों के साथ खेल रही हैं। यह भी अच्छा है, इससे दोनों का मन लगा रहेगा।

वीर- जस्सी मोहित चलो मेरे साथ। तुम दोनों की सेना को देखकर आएं की कैसे हैं सब?

नीलम और निशु- "हम भी चलते हैं..."

यह लोग पहले वैम्पायर के बने महल में जाते हैं। जस्सी और निशु उन सबका हाल-चाल पूछते हैं। और उन सब में से जो ज्यादा अकलमंद और सीनियर वैम्पायर थे उनको लीडर बनाया जाता है।

फिर वीर और टीम वहां से भेड़ियों के महल जाती है, और उनके साथ भी सेम। फिर वहां से वापिस ऊपर आ जाते हैं।

वीर- लीना जाओ अपनी बहनों को बुला लाओ। जूलिया चलो जिन्न-लोक जाकर आएं। वहां के सेना की ट्रेनिंग भी चेक कर लेता हूँ। जिससे आगे जाकर कोई मुश्किल ना हो।

लीना अपनी बहनों को बुला लाती है। फिर वहां से जिन्न-लोक चले जाते हैं। लीना और उसकी बहनें जिन्न-लोक देखकर मंत्रमुग्ध हो जाती हैं।

लीना- “ओह माई गोड.. क्या कोई जगह इतनी भी सुंदर हो सकती है। बैंक्स वीर मुझे ऐसी जगह दिखाने के लिए..."

लारा- “सच में आज तो मजा आ गया यह सब देखकर। थैक्स वीर जी...” और जाकर वीर के गाल पे किस कर देती है। जिसे देखकर सब हँसते हैं।

वीर सबको गुरुजी के पास ले जाता है।

गुरुजी- आओ बच्चों, तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था।

वीर- “प्रणाम गुरुजी..."

फिर सब गुरुजी को प्रणाम करते हैं।

वीर- गुरुजी यह हैं वो सात लड़कियां हैं, जिनकी मदद से मैंने लाल रत्न हासिल किया है। और उस रत्न ने इन्हें भी आशीर्वाद दिया है। और मैं चाहता हूँ की इन सात लड़कियों को आप ज्ञान दें की कैसे पावर्स को इश्तेमाल करना है।

गुरुजी- ठीक है वीर, जैसा तुम कहो। फिर राजगुरुजी उन सात लड़कियों को अपने साथ ले जाते हैं।

वीर ..और तुम्हारी बीवी आज से यहीं रहेंगी, और अपनी जान से बढ़कर इस लोक की रक्षा करोगे।

ड्रैगन- मालिक, आज मैं धन्य हो गया। आपने हमें हमारे घर ला दिया। हम अपनी जान से भी बढ़कर इस लोक की रक्षा करेंगे।

वीर- और हाँ, तुम्हारे बच्चे मेरे साथ रहेंगे। और मैं वादा करता हूँ की मेरे होते उन्हें कुछ नहीं होगा।

ड्रैगन की बीवी- “मालिक आज से वो आपके हैं। और एक बात जब भी उन्हें लगेगा की आप पर खतरा मंडरा रहा है। तब वो अपने विशाल रूप में आ जाएंगे। वो तीनों बच्चे हम दोनों से भी ज्यादा ताकतवर हैं। मालिक उनका जनम सिर्फ आपकी रक्षा के लिए हवा है। उन बच्चों में भी रत्न की शक्ति है। बस आप एक चीज का ख्याल रखिएगा की जब भी कोई आप पर हमला करेगा तब वो तीनों गुस्से से पागल हो जाएंगे, और हमला करने वाले को नहीं छोड़ेंगे। उसके बाद आपको ही उनका गुस्सा शांत करना है।

वीर- आप निश्चिंत रहिए। जूलिया जाओ तुम ट्रेनिंग दो। मैं थोड़ी देर में आता हूँ।

वीर अलीजा से- “अलीजा अपनी परिवार से नहीं मिलवाओगी?"

अलीजा- क्या आप सच में मेरी परिवार से मिलोगे?

वीर- अलीजा।

अलीजा- "हाँ हाँ चलो..."

फिर अलीजा वीर को अपने जिन्न-लोक में ही बने परी-लोक में ले जाती है। परी-लोक जिन्न-लोक से भी ज्यादा खूबसूरत था। अलीजा वीर को अपने माँ पिता और अपनी दो बहनों से मिलवाती है। राजा को अपने लोक आया देखकर सब तैयारियों में लग जाते हैं।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_78

वीर को परी-लोक के राजमहल में ले जाया जाता है।

परी-लोक की रानी अलीजा है, और राज दरबार में सिंहासन पर यहां पहले अलीजा बैठती थी, आज वहां वीर की बैठाया गया।

वीर- आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया। मुझे इतना मान सम्मान देने के लिए।

फिर वीर अलीजा की माँ से- “माँजी, मैं अलीजा से शादी करना चाहता हूँ। क्या आप अपनी बेटी का हाथ मेरे हाथ में देंगी?"

वीर की बात सुनकर पूरे दरबार में बात-चीत शुरू हो गई।

अलीजा की माँ- “महाराज हम तो धन्य हो गये। आप जैसा दामाद पाकर कौन खुश नहीं होगा। मैं खुशी-खुशी यह रिश्ता कबूल करती हूँ.” और सब खुशी से एक दूसरे के गले मिले।

वीर- “तो ठीक है माँजी, अब हमें चलना चाहिये..."

फिर वीर वहां से उठता है। और सभी उसके आगे सिर झुकाए खड़े हो जाते हैं। वहां पे वीर को भोजन करवाया जाता है। वीर इतना लजीज भोजन करके बहुत खुश होता है।

वीर- “अच्छा माँ, अब मैं चलता हूँ। आज्ञा दें। जल्दी बारात लेकर आऊँगा..."

माँ- सदा खुश रहो मेरे बच्चों। मेरी बेटी का ख्याल रखना।

वीर- "अपनी जान से भी ज्यादा..."

फिर वीर और अलीजा वहां से जिन्न-लोक आ जाते हैं। दो घंटे वहां रहने के बाद वीर और बाकी सब वापिस

धरती-लोक आ जाते हैं।

घर पहुँचकर वीर क्या देखता है की वहां प्रीत के डैड और भाई आए हुए थे। वीर जाकर ससुरजी के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है।

प्रीत के डैड- “कैसे हो बेटा? तुम तो हमें भूल ही गये..."

वीर- “कैसी बात कर रहे हैं डैड। यह हो सकता है की मैं आपको भूल जाऊँ? और कैसे हो अजय?"

अजय- ठीक हूँ जीजाजी। आप बताइए कैसे हैं?

वीर- मैं भी ठीक हूँ। प्रीत इन्हें अब सब सच बता दो। अजय को तो पता ही है। अब डैड को भी बता दो।

प्रीत के डैड- किस बारे में बात कर रहे हो बेटा, क्या बताना है?

प्रीत- “डैड बात यह है की.....” फिर प्रीत अपने डैड को सब बता देती है शुरू से लेकर आखीर तक। जैसे-जैस डैड सुन रहे थे, उनकी आँखें बड़ी-बड़ी हो रही थीं।

प्रीत के डैड- बेटा आज मैं सच में बहुत खुश हूँ तुम जैसा दामाद पाकर।

वीर- डैड, मैं आपको और अजय को कुछ देना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ की आप भी जिन्न बन जाइये और हमारे परिवार में शामिल हो जाइए। क्या आपको मंजूर है? इससे आप लंबे समय तक हमारे साथ रह सकते हैं।

प्रीत के डैड- बेटा जैसा तुम्हें ठीक लगे करो। मैं तुम्हारे साथ हूँ।

वीर- जस्सी और मोहित, इन्हें जिन्न-लोक ले जाओ गुरुजी के पास।
 
जस्सी- “ठीक है भाई...” फिर जस्सी और मोहित दोनों को अपने साथ लेकर जिन्न-लोक चले जाते हैं।

वीर- चलो भाई कालेज चलें। कल से गेम्स शरू हो रही हैं। उनकी भी तैयारी करनी है।

बिस्वा- भाई मैं कुछ कहना चाहता हूँ। क्यों ना आज रात नरभक्षियों को खतम कर दें। मुझे पता चला है की वो दोबारा हमले की तैयारी कर रहे हैं, और उधर वो तांत्रिक भी वापिस आने वाला है।

वीर- “ठीक है बिस्वा, जैसा तुम्हें ठीक लगे। चलो अब चलें। लीना जाओ अपनी बहनों को भी ले आओ। मैं उनका भी आडमिशन यहीं करवा देता हूँ.." फिर सब वहां से कालेज चले जाते हैं। कालेज पहुँचकर वीर चला जाता है रमण सर से मिलने।

रमण सर- "आओ वीर बैठो, कहां थे इतने दिन?"

वीर- कुछ नहीं सर, वो कुछ काम से यू.एस.ए. गया था। और बताइये कैसी चल रही है तैयारी? कल किस गेम्स के मैच हैं?

रमण- कल तुम्हारा मैच है बाक्सिंग का, और निशा की रेस है। उसके बाद शाम को 5:00 बजे बैडमिंटन का मैच

वीर- “ठीक है सर, हम सब तैयार हैं..." फिर वीर लीना का और उसकी बहन लारा को छोड़कर बाकी बहनों का आडमिशन करवा देता है।

हर बार नई लड़कियां आती हैं वीर के साथ, और इस बार तो 6 लड़कियां।

सब कँटीन में बैठकर गप्पे मारने लगते हैं।

लीना- वीर कालेज बहुत शानदार है।

वीर- हाँ, यह मुंबई का बेस्ट कालेज है। टीचर भी बहुत अच्छे हैं। हाँ नीलम और निशु अपनी-अपनी सेना को तैयार रखना। आज रात को हम नरभक्षियों पर हमला करेंगे।

नीलम- लेकिन वीर, यह सेना अभी उतनी ताकतवर नहीं है, जो नरभक्षियों का सामना कर सके। यह नार्मल वैम्पायर और भेड़िया हैं। और आपको तो पता है की नरभक्षी अपने पास खास पावर्स भी रखते हैं।

वीर- हाँ मुझे पता है। पर तुम्हें यह नहीं पता की मैंने वैम्पायर के पीने वाले खून में अपनी ताकत का कुछ हिस्सा डाला है। जिससे उन्हें भी जादुई ताकत मिल चुकी है, और भेड़ियों को भी। अब तक तो उन्हें भी पता चल गया होगा।

निश- ओहह... तो यह बात है। ठीक है। हम जाकर उनसे मिल आते हैं।

ऐसे ही सभी थोड़ी देर में क्लास चले जाते हैं। आज क्लास में भी बाकी स्टूडेंट एक तरफ बैठे थे और वीर और पार्टी एक तरफ।

उधर घर बनाने का काम बहुत तेजी से बढ़ रहा था। दिन रात काम चल रहा था। शिफ्ट के हिसाब से काम चल रहा था।

क्लास खतम करके सब ग्राउंड चले जाते हैं। यहां सभी जो गेम्स में थे हल्की-फुल्की दिखाने के लिए प्रैक्टिस करते हैं। वहां से फ्री होकर सब घर आ जाते हैं।

तब तक अजय और उसके डैड भी जिन्न में बदले जा चुके थे, और घर आ चुके थे।

अजय- जीजाजी, बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। देखने और समझने का नजरिया ही बदल गया है।

वीर- अजय, कभी भी इन ताकतों का गलत इश्तेमाल मत करना।

अजय- चिंता मत करो जीजाजी। यह लाइफ सभी की हेल्प के लिए ही गुजारूंगा। मेरी तरफ से आपको कभी भी शिकायत नहीं आएगी।

प्रीत के डैड- सच में बेटा, मझे जो भी प्राब्लम थी वो भी दूर हो गई हैं। अब ऐसा लग रहा है जैसे मैं दोबारा यंग हो गया हूँ। थॅंक्स बेटा।

वीर- "बेटा भी बोल रहे हो और थैक्स भी..." फिर सब ऐसे ही हँसी खुशी बातें करते हैं।

बिस्वा- "भाई सब तैयारी हो गई। आप क्या कहते हो भेड़िया और वैम्पायर को इतनी जल्दी शामिल करें क्या?"

वीर- बिस्वा बात यह है की आज वैम्पायर और भेड़िया की शक्ति का भी पता चल जाएगा। जब यह फाइट करेंगे तभी इन्हें अपनी शक्ति का पता चलेगा, जो मैंने दी है इन्हें।

और हाँ, यह मेरा वादा है की भेड़िया में से और वैम्पायर में से कोई भी नहीं मरेगा।

वीर अजय से- "अजय, तुम ऐसा करो की जिन्न-लोक चले जाओ। वहां गुरुजी से मिल लेना, और बोलना की मैंने भेजा है। उनसे ज्ञान सीख आओ। जिसमें तुम्हें जादू को कैसे इश्तेमाल करना है, एट्सेटरा... और रही बात डैड की तो, उन्हें चाचाजी और डैड सिखा देंगे..."

अजय- ठीक है।

*****

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****

अजय वहां से गायब होकर जिन्न-लोक पहुँच जाता है।

इधर नीलम और निशु वीर के पास आती हैं।

नीलम- वीर हम दोनों ने भेड़िया और वैम्पायर में से सबसे ताकतवर सेना को एक तरफ किया है लड़ने के लिए। दोनों को मिलाकर एक लाख सैनिक होंगे, और खुशी की बात है की वो सब बहुत खुश हैं।

वीर- खुश क्यों नहीं होंगे? नीलम तुम दोनों रानियां हो उनकी, जो तुम बोलोगी वो मानेंगे।

अवनी- वीर मैं आफिस जा रही हूँ। वहां का महौल भी देख आऊँ। मुझे भी आपके साथ जाना है शाम को। मुझे साथ लेकर जाइएगा।

वीर- जा बेटू देख आ, चिंता मत करो तू भी साथ जाएगी।

मोम- बिल्कुल नहीं। मेरी फूल जैसी बच्ची को अभी जंग से दूर रखो।

अवनी- लेकिन माँ, मैं भी फाइट करना चाहती हूँ।

मोम- बोला ना नहीं। पहले थोड़ी और बड़ी हो जा। फिर जिससे लड़ना है लड़ लेना। अपनी माँ की बात नहीं मानेगी।

अवनी- ठीक है माँ, जैसा आप ठीक समझें।

वीर चेयर पर बैठा था की तभी उसकी गोद में एक ड्रैगन का बच्चा कूदकर बैठ जाता है। वीर उसे अपने गले से लगा लेता है- “कैसा है मेरा बच्चा यहां दिल तो लग रहा है ना.” वीर उससे माइंड टु माइंड बात कर रहा था

ड्रैगन बच्चा- जी महाराज, मैं यहां बहुत खुश हूँ। बस आप हमें ऐसे ही अपने दिल से लगाए रखियेगा।

तभी बाकी दोनों बच्चे भी वीर की गोद में चढ़ जाते हैं। वीर तीनों के साथ बात करता साथ में उनके साथ खेलने लगता।

रिया- देखो कैसे भइया बच्चे बन गये? हाहाहाहा... छोड़ो इन्हें यह हमारे हैं।

वीर- जो हुकुम महारानी।

फिर वीर ड्रैगन्स बेबी से- “बच्चों खुद का और इन दोनों का हमेशा ख्याल रखना.."

ड्रैगन्स बेबी- "निश्चिंत रहें महाराज, हम हमेशा इनका ख्याल रखेंगे। खुद से भी ज्यादा..."

वीर- "भाई मैं तो चला सोने। शाम को उठा देना मझे..

बोलकर वीर सोने चला जाता है, जहां प्रीत और संजू पहले ही एक दूसरे को हग करके सो रही थी। अलीजा भी वहीं सो रही रही थी जूलिया को हग करके। वीर भी जाकर उनके बीच लेट जाता है और सो जाता है। शाम को चारों लड़कियों की आँख खुलती है, तो चारों अपने बीच वीर को सोया हवा पाते हैं। सबके चेहरे पे स्माइल आ जाती है।

प्रीत आगे बढ़कर वीर के माथे पे किस करती है फिर संजू और अलीजा भी। तीनों फ्रेश होने चली जाती हैं। रह

गई जूलिया।

जूलिया अपने मन में- “देखो सोता हवा कितना प्यारा लग रहा है। जब गुस्से में होता है तो कहर ढा देता है। काश यह मेरे दिल का हाल भी समझ पाते?" पर इसे नहीं पता था की वीर जाग चुका है, और जो जूलिया मन में सोच रही थी वो सब सुन चुका था।

जूलिया डरती-डरती आगे बढ़कर वीर के होंठों पे हल्का सा एक किस कर देती है एकमात्र किस से ही जूलिया का शरीर काँप उठता है। जूलिया जल्दी से वहां से भाग जाती है। वीर भी स्माइल करके फिर सो जाता है।

थोड़ी देर में रूम में विशु वीर को उठाने आती है और वीर को हग करके लेट जाती है- “उठो जानू शाम हो गई है..” इतना बोलकर विशु वीर के होंठों पे काट लेती है।

विशु का यूँ काटना भी वीर को मीठा एहसास लग रहा था। वीर विशु को अपनी बाहों में भर लेता है, और उसे किस करने लगता है। विशु भी वीर का पूरा साथ दे रही थी। थोड़ी देर में दोनों अलग होते हैं, और विशु वीर को

जल्दी नीचे आने को कहती है।

वीर फ्रेश होकर नीचे आता है। सबके सब वीर का ही इंतजार कर रहे थे।
 
वीर फ्रेश होकर नीचे आता है। सबके सब वीर का ही इंतजार कर रहे थे।

जस्सी- भाई क्या प्लान है?

वीर- बस रात में वो जंगल से ही हमला करेंगे पहले की तरह। इनके यह से पहले ही इनपे हमला कर देंगे।

जस्सी- यही ठीक रहेगा। आज उसका किस्सा खतम ही करेंगे। फिर बाद में जार्डन को भी खतम करना है।

वीर- आशीष एक काम करो। जिन्न-लोक की कुछ सेना को बुलाओ। आज देखते हैं की उनकी ट्रेनिंग में सुधार हुआ या नहीं?

जूलिया- ठीक है।

आशीष वहां से चला जाता है। फिर सब बैठकर ऐसे ही बातें करने लगते हैं। रात को आशीष के साथ अजय भी आ जाता है। आशीष सेना को ले आया था।

वीर- सब लोग तैयार हो जाओ।

सब एक साथ- "हम तैयार हैं..."

तभी वहां एक ड्रैगन बेबी आता है, जिसे जूलिया अपने हाथ में उठा लेती है।

ड्रैगन बेबी- महाराज मैं भी आपके साथ जाऊँगा। मैं आपको अकेले नहीं छोड़ सकता प्लीज़्ज़... मुझे साथ ले चलें।

वीर- मेरे बच्चे तुम अभी छोटे हो। पहले थोड़ा बड़े हो जाओ। मेरा वादा है तुमसे की तुम्हें हमेशा अपने साथ रखूगा।

ड्रैगन बेबी- महाराज आप मेरे इस नन्हें रूप पे मत जाइए। यह तो बस एक दिखावा है। बस अ चलें। महाराज मैंने लाल रक्त रत्न को वचन दिया है आपको अकेला नहीं छोड़ने का।

वीर- ठीक है चलो। बिस्वा, मोहित, आशीष, जस्सी, नीला, निशु, जूलिया, संजू, प्रीत, अजय, अलीजा, बस हम ही जाएंगे।

लीना- पर मुझे भी जाना है।

मोम- अभी नहीं मेरी बच्ची। पहले तुम बहनों को जिन्न-लोक में ट्रेनिंग लेनी है, उसके बाद ही।

लीना- ठीक है माँ, जैसा आप ठीक समझें।

फिर ये सब गायब होकर जंगल में पहुँच जाते हैं। वीर संजू, प्रीत, अलीजा, जूलिया और ड्रैगन बेबी के साथ एक तरफ के पेड़ पर बैठ जाता है। एक तरफ जस्सी और निश खड़ी थी। जिनके पीछे वैम्पायर की सेना और एक तरफ नीला और मोहित और उनके पीछे भी भेड़ियों की सेना। ऐसे ही बिस्वा और आशीष उनके पीछे जिन्न-लोक की सेना। यह तीनों अलग-अलग दिशा में खड़े हो जाते हैं।

जस्सी- वीर जब तक जरूरत ना पड़े आप नहीं आएंगे।

वीर स्माइल के साथ हाँ करता है।

तभी दूसरे छोर से आवाज आने लगती है। ऐसा लग रहा था जैसे बहुत बड़ी सेना आ रही हो उस तरफ से। हल्की-हल्की कंपन भी हो रही थी धरती में।

जस्सी अपने सेना से- "दोस्तों आज आपको अपने महाराज को दिखाना है की तुम लोग किसी से कम नहीं हो। पहले खुद के लिए जीते थे, आज सच्चाई के लिए जीना है। किसी को मत बख्शना..."

मोहित- "दोस्तों आप सबने सुना जस्सी ने क्या कहा? खदेड़ के रख दो उन नरभक्षियों को। कोई भी बचना नहीं चाहिए। आज दिखा दो उन सबको..."

सब ऊंची आवाज में हामी भरते हैं। तीनों सेनाओं के शोर से धरती भी कांप जाती है। यह शोर सुनकर नरभक्षी तेजी से इनकी तरफ भागते हैं। थोड़ी देर में इनको नरभक्षी दिखने लगते हैं, जो बड़ी तेजी से इनकी तरफ आ रहे थे।

उससे पहले ही एक शील्ड नरभक्षियों को रोक देती है। शील्ड से टकराते ही उनका

अभी वो इनके पार जिश्म जलने लगता है।

यह देखकर जस्सी- "भाई आहह... गलत आहह... मैं कहा सी तुसी बिच नहीं आऊँगा, फिर क्यों?"

वीर- भाई मेरी परिवार की सुरक्षा ज्यादा जरूरी है। तू डर ना तेनू पूरा मौका मिलेगा।

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उधर नरभक्षियों को पता चल जाता है की अगर शील्ड से टकराए तो राख हो जाएंगे। यह सोचकर पहले की तरह सब एक होने लगते हैं। थोड़ी देर में वहां एक विशालकाय दानव खड़ा हो जाता है, और आगे बढ़कर उस शील्ड को लात मारकर तोड़ देता है। शील्ड के टूटते ही वो दानव दोबारा नरभक्षियों में बदल जाता है, और टूट पड़ते हैं वीर की सेना पर।
 
इधर पहले वैम्पायर की सेना हमला करती है। जो भी उनके सामने आता, वैम्पायर उनका सिर धड़ से अलग किए जा रहे थे। जस्सी और मोहित अपने हाथ में एक-एक तलवार लिए उन्हें काट रहे थे। तभी मोहित और नीलम की सेना हमला कर देती है। सबके सब विशाल भेड़िये उन नरभक्षियों की चीर फाड़ करने लगते हैं। मोहित और नीलम अभी इंसानी रूप में ही थे।

*****

*****

तभी उधर से एक अजीब सा जानवर आता है, जिसके दो सिंगें भी लगे हुए थे। वो भागता हवा आता है और नीलम को उठाकर दूर फेंक देता है। यह सीन देखकर मोहित गुस्से से पागल हो जाता है। मोहित तेजी से अपना रूप बदलकर उस अजीब से जानवर से भिड़ जाता है। मोहित जाकर उसकी गर्दन पकड़ लेता है, और अपने पंजे को कसने लगता है। दूसरे हाथ को मोहित उसके पेट में गुसेड़ देता है। मोहित के नाखून उसकी गर्दन के अंदर धंसने लगते हैं। जिससे वो जानवर छटपटाने लगता है। देखते ही देखते मोहित उसकी गर्दन को जड़ से उखाड़ देता है।

उधर जिन्न-लोक की सेना तो कहर बनी जूलिया की ट्रेनिंग से जिन्न-लोक की सेना और भी ताकतवर हो गई थी। देखते ही देखते वहां जंगल में नरभक्षियों की सेना की लाशों का ढेर लग जाता है।

जस्सी- भाई मैं क्या कहता हूँ की आज इनके राजा को भी खतम कर ही दें।

वीर- "जैसा तुम कहो, चलो.." फिर सभी तेजी से आगे बढ़कर जाते हैं। सामने इन्हें मशालें जलती हई दिखाई देती हैं। थोड़ी दूर ही गये थे की इन्हें दिल दहला देनी वाली चीज दिखाई देती है।

सामने दो दरिंदे नवजात बच्चो को मारकर टांग रहे थे। यह देखकर सबका गुस्सा बढ़ जाता है। वीर अपने हाथ से एक रोशनी निकालकर उनकी तरफ फेंक देता है। रोशनी का गोला लगते ही वहां ब्लास्ट हो जाता है, और सब कुछ गायब हो जाता है।

वीर और पार्टी आगे बढ़ती है, तो सामने नरभक्षियों का राजा अपनी सेना के साथ खड़ा था। यह सेना नरभक्षी नहीं थी। यह तो उस नरभक्षी बास की अपने काले जादू से बनाई हुई सेना थी।

सारे वैम्पायर चमगादड़ बनकर उन सैनिकों पर टूट पड़ते हैं। एक साथ इतने चमगादड़ों का हमला वो सैनिक झेल नहीं पाते और इधर-उधर भागने लगते हैं।

बास- “ओहह... तो तू है वो वीर? आज पता चलेगा तू कितना वीर है?" इतना बोलकर वो बास अपने हाथ में पकड़ी तलवार को वीर की तरफ करता है। तभी उस तलवार से एक रोशनी निकलकर वीर की तरफ जाती है। जैसे ही वो रोशनी वीर की सीमा में लगती है, वो रोशनी अपना दम तोड़ देती है।

वीर- “अब मेरी बारी...”

इतना बोलकर वीर अपना हाथ आगे करता है, और ऊपर उठाता है। जिससे वो बास भी हवा में ऊपर उठ जाता है। वीर उसे घुमाकर पीछे की तरफ धकेलता है। जिससे वो उड़ता हुआ दूर जा गिरता है। वीर तेजी से उसके पास जाकर खड़ा हो जाता है।

वीर- मुझे नहीं लगता की तू मेरा मुकाबला कर पाएगा। भलाई इसी में है की यह सब छोड़ और एक अच्छा नरभक्षी बन जा।

बास- “हाहाहाहा... अभी तुमने मेरी पावर्स देखी कहां है?" इतना बोलकर वो कुछ मंत्र पढ़ने लगता है। जिससे वहां अंधेरा हो जाता है, और अचानक एक रोशनी आकर वीर को लगती है, जिससे वीर थोड़ा पीछे हो जाता है।

यह देखकर वो नन्हा ड्रैगन आगे आने को होता है, लेकिन वीर उसे रोक देता है। उधर वो सैनिक एक दूसरे में जुड़ने लगते हैं, और एक अजीब सा बन जाते है। वो एक जुट होकर हमला करते हैं।

यह देखकर जूलिया आगे आती है, और अपने हाथ में एक गन निकालती है, और उन सैनिकों पर फायर कर देती है। लेजर उन्हें लगते ही उन सैनिकों के चीथड़े उड़ जाते हैं।

जिन्न-लोक के सारे सैनिक जूलिया की तरफ गन बनाकर फायर करने लगते हैं, और जल्द ही सारे काले जादू से बने सैनिक राख हो जाते हैं।
 
जिन्न-लोक के सारे सैनिक जूलिया की तरफ गन बनाकर फायर करने लगते हैं, और जल्द ही सारे काले जादू से बने सैनिक राख हो जाते हैं।

उधर वीर उसकी धुनाई किए जा रहा था, और बोल रहा था- "तुझे एक मौका दिया था, तूने नहीं लिया। अब बस बहुत हुआ..” इतना बोलकर वीर आगे बढ़कर उस बास के सीने के अंदर अपना हाथ गुसेड़ देता है, और अपने । हाथ से रोशनी निकालकर उसकी बाडी में छोड़ देता है। उस सफेद रोशनी से काला जादू खतम हो जाता है, और वो बास सूख जाता है। कुछ रहता है तो बस अस्थिपंजर। वहां हर तरफ अस्थिपंजर ही अस्थिपंजर पड़े थे।

वीर- “दोस्तों बहुत अच्छा काम किया आप सबने। आई आम प्राउड आफ यू.” ऐसे ही एक दूसरे का साथ देते रहें। अब बस हमारे दो दुश्मन रह गये हैं। एक तांत्रिक और दूसरा जार्डन।

फिर सब वहां से वापिस हो जाते हैं। जाते-जाते वीर वहां एक रोशनी फेंक देता है। जिससे वहां का कचरा सब नष्ट हो जाता है। सिर्फ रहती है तो हरियाली।

अब वापिस घर आ जाते हैं। घर आकर सब ड्राइंगरूम हाल में बैठ जाते हैं।

मोम- कैसा रहा बेटू?

वीर- गुड मोम। एक और दुश्मन खतम। बस अब सिर्फ दो बाकी हैं। उसके बाद यह दुनियां सुरक्षित हो जाएगी। बस ऊपर वाला साथ दे।

दादाजी- अच्छाई के रास्ते चलने वालों का ऊपर वाला हमेशा साथ देता है।

उधर जार्डन की सेना अपनी ताकत बढ़ाने में लगी हई थी। वो यह बात भलीभांति जानते थे की या तो हम रहेंगे

या वो जिनसे इनकी फाइट होनी है।

वहीं जेल के एक रूम में जूलिया के मोम डैड बैठे बात कर रहे थे।

जूलिया के डैड- देखा उस वीर की शक्ति, उसने खुद जार्डन को ललकारा है। और तो और उसके बेटे को भी खतम कर दिया।

जूलिया की मोम- क्या, आपको किसने बताया?

जूलिया के डैड- इतनी तो ताकत है मुझमें की क्या हो रहा है पता कर सकू। अब देखना इस जार्डन की मौत निश्चित है। बहुत जुल्म कर लिया इसने लोगों पर। अब और नहीं। आ रहा है अच्छाई का रखवाला।

इधर सब अपने-अपने रूम में जा सो जाते हैं।

अगले दिन सवेरे वीर जल्दी उठकर फ्रेश होता है। अपनी योगसाधना करके तैयार होकर डाइनिंग टेबल पर बैठ जाता है। थोड़ी देर में सब आ जाते हैं।

वीर- लीना और उसकी बहनें आ गई क्या?

मोम- “नहीं बेटू। गुरुजी ने उनको वहीं रख लिया था। शायद थोड़ी देर में आ जाएं.."

तभी वहां लीना और उसकी बहनें आ जाती हैं।

सब नाश्ता करके निकलते हैं कालेज की तरफ। कालेज पहुँचकर क्या देखते हैं की पूरा कालेज स्टूडेंट से भरा हुआ था। बहुत से कालेज के स्टूडेंट आए हुए थे। वो सब नये स्टूडेंट कालेज में एंटर करती एक के बाद एक शानदार गाड़ियों को ही देखे जा रहे थे।
 
वीर बाहर निकलता है। एकदम स्टाइलिश लग रहा था। वीर गाड़ी से निकलकर बाहर खड़ा हो जाता है। तभी बाकी गाड़ियों के दरवाजे खुलते हैं और सबके सब बाहर आकर वीर के पास खड़े हो जाते हैं। वहां खड़े सारे स्टूडेंट बस इन्हें ही देखे जा रहे थे। यहां लड़कियां वीर को देखकर आहें भर रही थी। वहीं लड़के लड़कियों को देखकर लार टपका रहे थे। सभी वहां से चलते हए बाक्सिंग रिंग की तरफ जाने लगते हैं। आज वीर का बाक्सिंग का मैच था।

रमण- वीर तुम तैयार हो? जाओ कपड़े चेंज कर लो।

वीर- इट्स ओके सर, मैं ऐसे ही ठीक हूँ।

जस्सी- सर जी रहने दो, अगर इसने शर्ट उतारी तो बहुत सी लड़कियां बेहोश हो जायेंगी। यह ऐसा ही ठीक है।

रमण- “हाहाहाहा... हम भी तो देखें की बाडी कैसी है?"

सब बात कर रिंग के पास आ जाते हैं। जिसके साथ मैच था वो पिछले तीन साल से जीतता आ रहा है।

और तो और पिछले दो साल से फ्री स्टाइल फाइट भी लड़ रहा है, जो अंडरग्राउंड होती है। तभी वो वीर के पास आता है।

लड़का- ओहह... तो तू है वो वीर सिंह कोम्पनी का मालिक? अगर हिम्मत है तो फ्री स्टाइल फाइट हो जाए।

रमण- यहां फाइट नहीं बाक्सिंग का मैच है।

वीर- सर, ऐसा हो सकता है?

रमण- वीर हो तो सकता है। लेकिन इसमें चोट लग सकती है। तुमने तो प्रैक्टिस भी नहीं की।

यह बात वो लड़का सुन लेता है। बस फिर वो लड़का बोलता है- “सच में हिम्मत है तो आ जा। अगर तू हारा तो तेरी यह चिकनी गर्लफ्रेंड मुझे किस करेगी..” उसका इशारा प्रीत की तरफ था।

इतना सुनकर सभी लड़कियां आगे आ जाती है। पर वीर उन्हें रोक देता है।

वीर- ठीक है सर, आप घोषणा करवा दें फ्री स्टाइल फाइट ही होगी। अगर प्रिंसिपल मना करें तो बोल देना यह वीर का डिसिशन है।

रमण जाकर प्रिंसिपल और बाकी के स्टाफ से बात करता है। पहले तो वो मना करते हैं। जब रमण बोलता है की दोनों की सहमति है, तो सब चुप हो जाते हैं।

यहां वो लड़का जाने माने विधायक का बेटा था। वहीं वीर को तो सब जानते ही हैं। फिर घोषणा होती है फ्री स्टाइल फाइट मैच की। जिसे सुनकर बाहर खड़े सब स्टूडेंट अंदर की तरफ दौड़ते हैं।

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