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कड़ी_81
वीर अपनी जैकेट उतारकर रिंग में चला जाता है।
प्रीत- मुझे नहीं पता कैसे करोगे? मुझे यह कोमा में चाहिए।
वीर- ओके बेबी। तभी वो भी रिंग में आ जाता है।
लड़का- “ऐ चिकनी तैयार रहना किस के लिए। हाए तेरे रसीले होंठ... ..” बेचारा अभी इतना ही बोला था की प्रीत आगे बढ़कर उसे धक्का दे देती है। जिससे वो बेचारा पीछे जा गिरता है।
यह देखकर वहां सभी स्टूडेंट शोर मचाने लगते हैं। वो उठकर आगे आता है। पर उससे पहले ही वीर उसके आगे खड़ा हो जाता है।
वीर- गलती से भी उसे छने की गलती मत करना। चल फाइट शुरू करते हैं।
लड़का- तुझे तो मैं बाद में देखूगा।
तभी रिंग में रेफरी आ जाता है, और इन दोनों की गेम शुरू करवा देता है। वो लड़का आगे आकर वीर को पंच मारने को होता है, पर वीर बड़ी आसानी से साइड हो जाता है। ऐसे ही वो कई पंच बनाकर मारता है। पर वीर को उसका कोई भी पंच छू तक नहीं पाता है।
वीर- चल तेरे को एक मौका देता हूँ। तेरे पास एक मिनट है। जितना तुझे मारना है मार ले। एक मिनट खतम
और खेल खतम।
वीर की बात सुनकर वो लड़का वीर को मारने लगता है। कई किक मारी, कई पंचेस मारे। पर वीर उससे हिला तक नहीं। वीर जहां था वहीं का वहीं खड़ा था। 10 सेकेंड रह गये थे। अपनी बेइज्जती महसूस होता देखकर वो अपने साथी से लोहे की रोड माँगता है। और उस रोड को वीर के सिर पर दे मारता है। जिस यह की रोड मुड़ गई, पर वीर को कुछ नहीं हुआ। 10 सेकेंड भी पूरे हो चुके थे।
वहां बैठे सबके सब चकित थे की वीर को कुछ हवा क्यों नहीं? वो लड़का कभी वीर के सिर की तरफ देखता तो कभी रोड की तरफ।
प्रीत- जान, खतम करो खेल।
वीर प्रीत की तरफ देखता है, और एक स्माइल करता है।
इतने में वो लड़का पीछे से वीर की शर्ट पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचता है। पर वीर टस से मस नहीं हुआ। लेकिन उसकी शर्ट फटकर उसके हाथ में आ जाती है। वीर की गोरी फौलादी बाडी देखकर वहां बैठी बहुत सी लड़कियों का तो पानी निकल जाता है। वहां बैठा हर शख्स वीर की बाडी को ही देखे जा रहा था, ऊपर से बाडी पे बने टैट्र को देख रहे थे जो की वीर की बाडी को चार चाँद लगा रहे थे।
नंगी बाडी सामने आते ही संजू एक सीटी बजा देती है।
वीर- “बहुत खेल लिया खतम करें फाइट?"
वो लड़का वीर की बात से गुस्से में आ जाता है, और वीर की तरफ भागता है। पर वीर तेजी से उसके सीने पे एक पंच जड़ देता है। पंच लगते ही वो उड़ता हवा रिंग से बाहर जाकर गिरता है और बेहोश हो जाता है। अभी तो वीर ने पंच बहत हल्के से मारा था। एक बार तो वहां बैठे सबके सब शांत हो जाते हैं। जैसे सबको साँप सूंघ गया हो।
पर फिर वीर के कालेज के स्टूडेंट खड़े होकर शोर मचाने लगते हैं।
रमण जाकर उस लड़के को चेक करता है। लड़का बेहोश हो चुका था। रमण बोला- “यह तो बेहोश हो चुका है.."
प्रीत- बेहोश नहीं कोमा में जा चुका है।
प्रीत की बात पे सब फिर से शांत हो जाते हैं।
प्रिंसिपल- यह क्या किया बेटा, इसका बाप छोड़ेगा नहीं इस कालेज को?
वीर- "इसके बाप को मेरा बारे में बता देना...” इतना बोलकर वीर रिंग से बाहर आ जाता है।
प्रीत आगे बढ़कर वीर को जैकेट पहना देती है, और सब बाहर आ जाते हैं।
थोड़ी देर में निशु की रेस होनी थी। इसलिए सब पहले कँटीन में चले जाते हैं। थोड़ी देर में निशु की रेस शुरू होती है, जिसे निशु बड़ी आसानी से जीत जाती है।
तभी कालेज में गाड़ियां आती है साथ में पोलिस भी थी। गाड़ियों में से उस लड़के का बाप उतरता है और साथ में होम मिनिस्टर भी था। वो चलकर सीधा प्रिंसिपल के पास जाते हैं।
विधायक- ऐ प्रिंसिपल, चल कालेज बंद कर और बुला उस लड़के को। जिसने मेरे बेटे को मारा है। तुझे पता था
ना की वो मेरा बेटा है।
प्रिंसिपल- “आप धमकी किसे दे रहे हो? फाइट आपके बेटे की मर्जी से शुरू हुई थी। हमने तो रोका भी था पर
आपके बेटे में घमंड ही इतना था की हम क्या करते? और एक बात, जिसने उसे मारा है। अगर आप उसे जानते तो इतना कुछ जो अभी आपने बोला वो नहीं बोलते। होम मिनिस्टर साहब तो उस लड़के को अच्छी तरह से जानते हैं।
होम मिनिस्टर- किसकी बात कर रहे हो आप?
प्रिंसिपल- “मैं बात कर रहा हूँ वीर की.."
वीर का नाम सुनते ही होम मिनिस्टर कुर्सी से खड़ा हो जाता है, उसे पशीने आने लगते हैं।
विधायक- कौन वीर? वहीं सिह कोम्पनी का मालिक। बुलाओ उसे मैं देखता हूँ कौन है वो?
होम मिनिस्टर- शंकर बात सुन चल यहां से। अगर उसके सामने कुछ ऐसी वैसी बात करी ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे। वो दिखने में बच्चा लगता है, लेकिन है सबका बाप।
विधायक- "डर गया? मैंने पालिटिक्स ऐसे ही जोइन नहीं की। ऐसे ना जाने कितने वीर गये और आए। बलाओ उसे...”
प्रिंसिपल- “जैसी आपकी मर्जी..."
थोड़ी देर में वहां जस्सी और बिस्वा आते हैं।
जस्सी- कौन है जो वीर को यहां बुलाना चाहता है।
विधायक- ऐ छोरे, चल जा वीर को भेज।
जस्सी इतना सुनते ही चपाक्क से एक थप्पड़ उस विधायक को जड़ देता है। और कहता है- “साले वो तेरा नौकर है, जो तेरे कहने पे यहां आए?"
विधायक- “तुमने मुझे मारा... देख मैं तेरा क्या हाल करता हूँ?” इतना बोलकर वो विधायक किसी को फोन करता है, और कुछ देर बात करके फोन रख देता है- “रुको तुम सब, अभी पता चल जाएगा तुम लोगों को मेरी पावर का..."
जस्सी उसका कलर पकड़कर उसे खींचते हये बाहर ग्राउंड में ले आता है। साथ में पीछे-पीछे प्रिंसिपल और होम मिनिस्टर भी आ जाते हैं।
वीर- क्या हवा जस्सी कौन है यह?
जस्सी- भाई यह उस लड़के का बाप है जिससे आपकी फाइट हुई थी। और यह यहां आकर अपने प्रिंसिपल को धमकी दे रहा है।
वीर- क्यों भाई होम मिनिस्टर, आपने इसे समझाया नहीं मेरे बारे में?
होम मिनिस्टर- "सर, मैंने इसे रोका था पर यह तो... ..."
विशु- “यह आज यहां से मार खाकर ही जाएगा। स्टूडेंट्स, आप सब देख रहे हैं ना। जो पोलिटीसियन हमारी सेवा करने के लिए होते हैं। वो आज यहां हमारे प्रिंसिपल को धमकाने आया है... और तो और आपके स्टूडेंट वीर को भी। आप क्या चाहते हैं की हम इसकी धमकी सहते रहें?"
वहां खड़े सारे स्टूडेंट- नहीं नहीं।
जस्सी- तो दोस्तों यह आपके हवाले। अब आप ही सोचो इसका क्या करना है?
स्टूडेंट- "भाई हमारे वीर की तरफ जो आँख उठाकर देखेगा, उसे हम नहीं छोड़ेंगे...” इतना बोलकर वो लड़का आगे आकर उस विधायक को थप्पड़ जड़ देता है। बस फिर क्या था सभी स्टूडेंट उस विधायक पर अपना हाथ साफ कर देते हैं।
वीर अपनी जैकेट उतारकर रिंग में चला जाता है।
प्रीत- मुझे नहीं पता कैसे करोगे? मुझे यह कोमा में चाहिए।
वीर- ओके बेबी। तभी वो भी रिंग में आ जाता है।
लड़का- “ऐ चिकनी तैयार रहना किस के लिए। हाए तेरे रसीले होंठ... ..” बेचारा अभी इतना ही बोला था की प्रीत आगे बढ़कर उसे धक्का दे देती है। जिससे वो बेचारा पीछे जा गिरता है।
यह देखकर वहां सभी स्टूडेंट शोर मचाने लगते हैं। वो उठकर आगे आता है। पर उससे पहले ही वीर उसके आगे खड़ा हो जाता है।
वीर- गलती से भी उसे छने की गलती मत करना। चल फाइट शुरू करते हैं।
लड़का- तुझे तो मैं बाद में देखूगा।
तभी रिंग में रेफरी आ जाता है, और इन दोनों की गेम शुरू करवा देता है। वो लड़का आगे आकर वीर को पंच मारने को होता है, पर वीर बड़ी आसानी से साइड हो जाता है। ऐसे ही वो कई पंच बनाकर मारता है। पर वीर को उसका कोई भी पंच छू तक नहीं पाता है।
वीर- चल तेरे को एक मौका देता हूँ। तेरे पास एक मिनट है। जितना तुझे मारना है मार ले। एक मिनट खतम
और खेल खतम।
वीर की बात सुनकर वो लड़का वीर को मारने लगता है। कई किक मारी, कई पंचेस मारे। पर वीर उससे हिला तक नहीं। वीर जहां था वहीं का वहीं खड़ा था। 10 सेकेंड रह गये थे। अपनी बेइज्जती महसूस होता देखकर वो अपने साथी से लोहे की रोड माँगता है। और उस रोड को वीर के सिर पर दे मारता है। जिस यह की रोड मुड़ गई, पर वीर को कुछ नहीं हुआ। 10 सेकेंड भी पूरे हो चुके थे।
वहां बैठे सबके सब चकित थे की वीर को कुछ हवा क्यों नहीं? वो लड़का कभी वीर के सिर की तरफ देखता तो कभी रोड की तरफ।
प्रीत- जान, खतम करो खेल।
वीर प्रीत की तरफ देखता है, और एक स्माइल करता है।
इतने में वो लड़का पीछे से वीर की शर्ट पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचता है। पर वीर टस से मस नहीं हुआ। लेकिन उसकी शर्ट फटकर उसके हाथ में आ जाती है। वीर की गोरी फौलादी बाडी देखकर वहां बैठी बहुत सी लड़कियों का तो पानी निकल जाता है। वहां बैठा हर शख्स वीर की बाडी को ही देखे जा रहा था, ऊपर से बाडी पे बने टैट्र को देख रहे थे जो की वीर की बाडी को चार चाँद लगा रहे थे।
नंगी बाडी सामने आते ही संजू एक सीटी बजा देती है।
वीर- “बहुत खेल लिया खतम करें फाइट?"
वो लड़का वीर की बात से गुस्से में आ जाता है, और वीर की तरफ भागता है। पर वीर तेजी से उसके सीने पे एक पंच जड़ देता है। पंच लगते ही वो उड़ता हवा रिंग से बाहर जाकर गिरता है और बेहोश हो जाता है। अभी तो वीर ने पंच बहत हल्के से मारा था। एक बार तो वहां बैठे सबके सब शांत हो जाते हैं। जैसे सबको साँप सूंघ गया हो।
पर फिर वीर के कालेज के स्टूडेंट खड़े होकर शोर मचाने लगते हैं।
रमण जाकर उस लड़के को चेक करता है। लड़का बेहोश हो चुका था। रमण बोला- “यह तो बेहोश हो चुका है.."
प्रीत- बेहोश नहीं कोमा में जा चुका है।
प्रीत की बात पे सब फिर से शांत हो जाते हैं।
प्रिंसिपल- यह क्या किया बेटा, इसका बाप छोड़ेगा नहीं इस कालेज को?
वीर- "इसके बाप को मेरा बारे में बता देना...” इतना बोलकर वीर रिंग से बाहर आ जाता है।
प्रीत आगे बढ़कर वीर को जैकेट पहना देती है, और सब बाहर आ जाते हैं।
थोड़ी देर में निशु की रेस होनी थी। इसलिए सब पहले कँटीन में चले जाते हैं। थोड़ी देर में निशु की रेस शुरू होती है, जिसे निशु बड़ी आसानी से जीत जाती है।
तभी कालेज में गाड़ियां आती है साथ में पोलिस भी थी। गाड़ियों में से उस लड़के का बाप उतरता है और साथ में होम मिनिस्टर भी था। वो चलकर सीधा प्रिंसिपल के पास जाते हैं।
विधायक- ऐ प्रिंसिपल, चल कालेज बंद कर और बुला उस लड़के को। जिसने मेरे बेटे को मारा है। तुझे पता था
ना की वो मेरा बेटा है।
प्रिंसिपल- “आप धमकी किसे दे रहे हो? फाइट आपके बेटे की मर्जी से शुरू हुई थी। हमने तो रोका भी था पर
आपके बेटे में घमंड ही इतना था की हम क्या करते? और एक बात, जिसने उसे मारा है। अगर आप उसे जानते तो इतना कुछ जो अभी आपने बोला वो नहीं बोलते। होम मिनिस्टर साहब तो उस लड़के को अच्छी तरह से जानते हैं।
होम मिनिस्टर- किसकी बात कर रहे हो आप?
प्रिंसिपल- “मैं बात कर रहा हूँ वीर की.."
वीर का नाम सुनते ही होम मिनिस्टर कुर्सी से खड़ा हो जाता है, उसे पशीने आने लगते हैं।
विधायक- कौन वीर? वहीं सिह कोम्पनी का मालिक। बुलाओ उसे मैं देखता हूँ कौन है वो?
होम मिनिस्टर- शंकर बात सुन चल यहां से। अगर उसके सामने कुछ ऐसी वैसी बात करी ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे। वो दिखने में बच्चा लगता है, लेकिन है सबका बाप।
विधायक- "डर गया? मैंने पालिटिक्स ऐसे ही जोइन नहीं की। ऐसे ना जाने कितने वीर गये और आए। बलाओ उसे...”
प्रिंसिपल- “जैसी आपकी मर्जी..."
थोड़ी देर में वहां जस्सी और बिस्वा आते हैं।
जस्सी- कौन है जो वीर को यहां बुलाना चाहता है।
विधायक- ऐ छोरे, चल जा वीर को भेज।
जस्सी इतना सुनते ही चपाक्क से एक थप्पड़ उस विधायक को जड़ देता है। और कहता है- “साले वो तेरा नौकर है, जो तेरे कहने पे यहां आए?"
विधायक- “तुमने मुझे मारा... देख मैं तेरा क्या हाल करता हूँ?” इतना बोलकर वो विधायक किसी को फोन करता है, और कुछ देर बात करके फोन रख देता है- “रुको तुम सब, अभी पता चल जाएगा तुम लोगों को मेरी पावर का..."
जस्सी उसका कलर पकड़कर उसे खींचते हये बाहर ग्राउंड में ले आता है। साथ में पीछे-पीछे प्रिंसिपल और होम मिनिस्टर भी आ जाते हैं।
वीर- क्या हवा जस्सी कौन है यह?
जस्सी- भाई यह उस लड़के का बाप है जिससे आपकी फाइट हुई थी। और यह यहां आकर अपने प्रिंसिपल को धमकी दे रहा है।
वीर- क्यों भाई होम मिनिस्टर, आपने इसे समझाया नहीं मेरे बारे में?
होम मिनिस्टर- "सर, मैंने इसे रोका था पर यह तो... ..."
विशु- “यह आज यहां से मार खाकर ही जाएगा। स्टूडेंट्स, आप सब देख रहे हैं ना। जो पोलिटीसियन हमारी सेवा करने के लिए होते हैं। वो आज यहां हमारे प्रिंसिपल को धमकाने आया है... और तो और आपके स्टूडेंट वीर को भी। आप क्या चाहते हैं की हम इसकी धमकी सहते रहें?"
वहां खड़े सारे स्टूडेंट- नहीं नहीं।
जस्सी- तो दोस्तों यह आपके हवाले। अब आप ही सोचो इसका क्या करना है?
स्टूडेंट- "भाई हमारे वीर की तरफ जो आँख उठाकर देखेगा, उसे हम नहीं छोड़ेंगे...” इतना बोलकर वो लड़का आगे आकर उस विधायक को थप्पड़ जड़ देता है। बस फिर क्या था सभी स्टूडेंट उस विधायक पर अपना हाथ साफ कर देते हैं।