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Fantasy अनदेखे जीवन का सफ़र

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कड़ी_81

वीर अपनी जैकेट उतारकर रिंग में चला जाता है।

प्रीत- मुझे नहीं पता कैसे करोगे? मुझे यह कोमा में चाहिए।

वीर- ओके बेबी। तभी वो भी रिंग में आ जाता है।

लड़का- “ऐ चिकनी तैयार रहना किस के लिए। हाए तेरे रसीले होंठ... ..” बेचारा अभी इतना ही बोला था की प्रीत आगे बढ़कर उसे धक्का दे देती है। जिससे वो बेचारा पीछे जा गिरता है।

यह देखकर वहां सभी स्टूडेंट शोर मचाने लगते हैं। वो उठकर आगे आता है। पर उससे पहले ही वीर उसके आगे खड़ा हो जाता है।

वीर- गलती से भी उसे छने की गलती मत करना। चल फाइट शुरू करते हैं।

लड़का- तुझे तो मैं बाद में देखूगा।

तभी रिंग में रेफरी आ जाता है, और इन दोनों की गेम शुरू करवा देता है। वो लड़का आगे आकर वीर को पंच मारने को होता है, पर वीर बड़ी आसानी से साइड हो जाता है। ऐसे ही वो कई पंच बनाकर मारता है। पर वीर को उसका कोई भी पंच छू तक नहीं पाता है।

वीर- चल तेरे को एक मौका देता हूँ। तेरे पास एक मिनट है। जितना तुझे मारना है मार ले। एक मिनट खतम

और खेल खतम।

वीर की बात सुनकर वो लड़का वीर को मारने लगता है। कई किक मारी, कई पंचेस मारे। पर वीर उससे हिला तक नहीं। वीर जहां था वहीं का वहीं खड़ा था। 10 सेकेंड रह गये थे। अपनी बेइज्जती महसूस होता देखकर वो अपने साथी से लोहे की रोड माँगता है। और उस रोड को वीर के सिर पर दे मारता है। जिस यह की रोड मुड़ गई, पर वीर को कुछ नहीं हुआ। 10 सेकेंड भी पूरे हो चुके थे।

वहां बैठे सबके सब चकित थे की वीर को कुछ हवा क्यों नहीं? वो लड़का कभी वीर के सिर की तरफ देखता तो कभी रोड की तरफ।

प्रीत- जान, खतम करो खेल।

वीर प्रीत की तरफ देखता है, और एक स्माइल करता है।

इतने में वो लड़का पीछे से वीर की शर्ट पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचता है। पर वीर टस से मस नहीं हुआ। लेकिन उसकी शर्ट फटकर उसके हाथ में आ जाती है। वीर की गोरी फौलादी बाडी देखकर वहां बैठी बहुत सी लड़कियों का तो पानी निकल जाता है। वहां बैठा हर शख्स वीर की बाडी को ही देखे जा रहा था, ऊपर से बाडी पे बने टैट्र को देख रहे थे जो की वीर की बाडी को चार चाँद लगा रहे थे।

नंगी बाडी सामने आते ही संजू एक सीटी बजा देती है।

वीर- “बहुत खेल लिया खतम करें फाइट?"

वो लड़का वीर की बात से गुस्से में आ जाता है, और वीर की तरफ भागता है। पर वीर तेजी से उसके सीने पे एक पंच जड़ देता है। पंच लगते ही वो उड़ता हवा रिंग से बाहर जाकर गिरता है और बेहोश हो जाता है। अभी तो वीर ने पंच बहत हल्के से मारा था। एक बार तो वहां बैठे सबके सब शांत हो जाते हैं। जैसे सबको साँप सूंघ गया हो।

पर फिर वीर के कालेज के स्टूडेंट खड़े होकर शोर मचाने लगते हैं।

रमण जाकर उस लड़के को चेक करता है। लड़का बेहोश हो चुका था। रमण बोला- “यह तो बेहोश हो चुका है.."

प्रीत- बेहोश नहीं कोमा में जा चुका है।

प्रीत की बात पे सब फिर से शांत हो जाते हैं।

प्रिंसिपल- यह क्या किया बेटा, इसका बाप छोड़ेगा नहीं इस कालेज को?

वीर- "इसके बाप को मेरा बारे में बता देना...” इतना बोलकर वीर रिंग से बाहर आ जाता है।

प्रीत आगे बढ़कर वीर को जैकेट पहना देती है, और सब बाहर आ जाते हैं।

थोड़ी देर में निशु की रेस होनी थी। इसलिए सब पहले कँटीन में चले जाते हैं। थोड़ी देर में निशु की रेस शुरू होती है, जिसे निशु बड़ी आसानी से जीत जाती है।

तभी कालेज में गाड़ियां आती है साथ में पोलिस भी थी। गाड़ियों में से उस लड़के का बाप उतरता है और साथ में होम मिनिस्टर भी था। वो चलकर सीधा प्रिंसिपल के पास जाते हैं।

विधायक- ऐ प्रिंसिपल, चल कालेज बंद कर और बुला उस लड़के को। जिसने मेरे बेटे को मारा है। तुझे पता था

ना की वो मेरा बेटा है।

प्रिंसिपल- “आप धमकी किसे दे रहे हो? फाइट आपके बेटे की मर्जी से शुरू हुई थी। हमने तो रोका भी था पर

आपके बेटे में घमंड ही इतना था की हम क्या करते? और एक बात, जिसने उसे मारा है। अगर आप उसे जानते तो इतना कुछ जो अभी आपने बोला वो नहीं बोलते। होम मिनिस्टर साहब तो उस लड़के को अच्छी तरह से जानते हैं।

होम मिनिस्टर- किसकी बात कर रहे हो आप?

प्रिंसिपल- “मैं बात कर रहा हूँ वीर की.."

वीर का नाम सुनते ही होम मिनिस्टर कुर्सी से खड़ा हो जाता है, उसे पशीने आने लगते हैं।

विधायक- कौन वीर? वहीं सिह कोम्पनी का मालिक। बुलाओ उसे मैं देखता हूँ कौन है वो?

होम मिनिस्टर- शंकर बात सुन चल यहां से। अगर उसके सामने कुछ ऐसी वैसी बात करी ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे। वो दिखने में बच्चा लगता है, लेकिन है सबका बाप।

विधायक- "डर गया? मैंने पालिटिक्स ऐसे ही जोइन नहीं की। ऐसे ना जाने कितने वीर गये और आए। बलाओ उसे...”

प्रिंसिपल- “जैसी आपकी मर्जी..."

थोड़ी देर में वहां जस्सी और बिस्वा आते हैं।

जस्सी- कौन है जो वीर को यहां बुलाना चाहता है।

विधायक- ऐ छोरे, चल जा वीर को भेज।

जस्सी इतना सुनते ही चपाक्क से एक थप्पड़ उस विधायक को जड़ देता है। और कहता है- “साले वो तेरा नौकर है, जो तेरे कहने पे यहां आए?"

विधायक- “तुमने मुझे मारा... देख मैं तेरा क्या हाल करता हूँ?” इतना बोलकर वो विधायक किसी को फोन करता है, और कुछ देर बात करके फोन रख देता है- “रुको तुम सब, अभी पता चल जाएगा तुम लोगों को मेरी पावर का..."

जस्सी उसका कलर पकड़कर उसे खींचते हये बाहर ग्राउंड में ले आता है। साथ में पीछे-पीछे प्रिंसिपल और होम मिनिस्टर भी आ जाते हैं।

वीर- क्या हवा जस्सी कौन है यह?

जस्सी- भाई यह उस लड़के का बाप है जिससे आपकी फाइट हुई थी। और यह यहां आकर अपने प्रिंसिपल को धमकी दे रहा है।

वीर- क्यों भाई होम मिनिस्टर, आपने इसे समझाया नहीं मेरे बारे में?

होम मिनिस्टर- "सर, मैंने इसे रोका था पर यह तो... ..."

विशु- “यह आज यहां से मार खाकर ही जाएगा। स्टूडेंट्स, आप सब देख रहे हैं ना। जो पोलिटीसियन हमारी सेवा करने के लिए होते हैं। वो आज यहां हमारे प्रिंसिपल को धमकाने आया है... और तो और आपके स्टूडेंट वीर को भी। आप क्या चाहते हैं की हम इसकी धमकी सहते रहें?"

वहां खड़े सारे स्टूडेंट- नहीं नहीं।

जस्सी- तो दोस्तों यह आपके हवाले। अब आप ही सोचो इसका क्या करना है?

स्टूडेंट- "भाई हमारे वीर की तरफ जो आँख उठाकर देखेगा, उसे हम नहीं छोड़ेंगे...” इतना बोलकर वो लड़का आगे आकर उस विधायक को थप्पड़ जड़ देता है। बस फिर क्या था सभी स्टूडेंट उस विधायक पर अपना हाथ साफ कर देते हैं।
 
तभी कालेज में 10-12 गाड़ियां एंटर करती है। और उनमें से गुन्डे बाहर निकलकर हाथ में बेसबाल, तलवारें लिए इनकी तरफ भागते हैं। जिसे देखकर सभी स्टूडेंट डर जाते हैं। लेकिन वो स्टूडेंट तक पहुँचते की वीर और पार्टी सभी स्टूडेंट के आगे आकर खड़ी हो जाती है। और फिर होती है फाइट शुरू। दो मिनट के अंदर 50-60 के करीब गुन्डे जमीन पर बेहोश पड़े थे। सारे दूसरे कालेज के स्टूडेंट लड़कियों को फाइट करता देखकर चकित थे।

वीर- "होम मिनिस्टर, आज के बाद इस कालेज में कोई भी पोलिटिकल आदमी एंटर नहीं होना चाहिए। वरना उसका हाल इससे भी बुरा होगा... और यह कचरा साफ करवा दो...” इतना बोलकर वीर और पार्टी वहां से कँटीन में चली जाती है।

होम मिनिस्टर किसी को फोन करता है, और कुछ देर बाद कुछ लोग आकर कचरा उठाकर चले जाते हैं। फिर होम मिनिस्टर वीर के पास जाता है, और कहता है- “वीर बेटा, कभी हमारे भी गरीबखाने में आओ। हो सके तो

आज रात का डिनर हमारे साथ ही कर लो..."

वीर- क्यों नहीं अंकल मैं जरूर अऊँगा। और हाँ अंकल हम सब आएंगे।

होम मिनिस्टर- बैंक यू सो मच बेटा। मुझे बहुत खुशी हुई। मैं चलता हूँ। डिनर की तैयारी भी करवानी है।

ऐसे ही शाम तक बहुत से मैच होते हैं। जिनमें से वीर का कालेज ही जीतता है।

वीर प्रिंसिपल के पास जाता है, और कहता है- “सर, आपसे एक बात कहना चाहूंगा। मैं इस कालेज को खरीदना

। ताकी आगे जाकर कोई भी घटिया आदमी इस कालेज की तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखे...”

प्रिंसिपल- ठीक है वीर। मैं सब शेयर होल्डर से बात कर लेता हूँ।

फिर वीर वहां से अपने परिवार के साथ घर आ जाता है।

***

**

उधर तांत्रिक शैतान की पूजा में लीन हुआ पड़ा था। इस पूजा से उसे बहुत शक्ति मिलने वाली थी शैतान से।

तांत्रिक- “बस एक बार सही से पूजा पूरी हो जाये उसके बाद इस पूरे ब्रह्मांड का मैं ही राजा होऊँगा हाहाहाहा..."

इधर सब घर पहुँच जाते हैं।

मोम- क्या बेटू, तुझे पता है ना वो नार्मल इंसान है फिर क्यों मैच खेला उसके साथ?

वीर- मोम मैंने उसके साथ मैच बिल्कुल नरम होकर ही खेला, अपनी शक्तियां दूर रखकर। मोम मैं डेली योग साधना में लीन होता है। जिससे मेरी अंदरूनी शक्तियां जागृत हो चुकी हैं। मैं नार्मल इन्सान बनकर भी किसी से लडूं तो 10-15 को तो आसानी से हरा दूं।

दादाजी- “चलो छोड़ो जो हवा। आओ खाना खाओ..." फिर सब मिलकर खाना खाते हैं।

नीलम- क्यों ना कहीं घूमने जाएं सारी परिवार। कहीं दूर?

मोम- गुड आइडिया। मेरा भी बहुत मन है घूमने का।

वीर- "तो सोचो कहां जाना है। तब तक मैं तो चला सोने..." और वीर वहां से उठकर अपने रूम में जाता है और जाते ही सो जाता है।

मोम- इसे क्या हुआ, बहुत सोने लगा है आजकल यह?

जूलिया- मोम बात यह है की अब इसके .

कत है। इसकी बाडी को थोड़ा आराम भी चाहिए।

डैड- हाँ यह बात तो है। अब तो बस एक रत्न बाकी है। जब वो भी मिल गया, तो यह पूर्ण रूप से महाजिन्न बन जाएगा।

जूलिया- "महाजिन्न... मैं समझी नहीं डैड?"

डैड- बेटा बात यह है की आज से लाखों वर्ष पहले जिन्न-लोक का एक महाजिन्न हुआ करता था। यह सब मुझे गुरुजी ने बताया है, जो मैं आपको बता रहा हूँ।
 
वो जिन्न इन सब जिन्न का रखवाला था, जैसे अपना वीर है। तब जिन्न-लोक में सब एक साथ मिलकर प्यार से नहीं रहते थे। वहीं कुछ जिन्न ऐसे भी थे जो महाजिन्न से जलते थे। उनको यह था की वो भी हुकुम चलाएं, राज करें। उन्होंने विरोध करने का फैसला लिया, और सभा में आ गये।।

जिन्न- हम सबको आपसे कछ बात करनी है।

महाजिन्न- बोलो क्या बात है?

जिन्न- हम सब चाहते हैं की हममें से भी कोई महाजिन्न बने। हर वक्त आप ही महाजिन्न नहीं रह सकते। हमने भी बहुत गुलामी की है। अब हम सब भी राज करना चाहते हैं।

महाजिन्न- “अच्छा तो यह बात है? ठीक है। अगर ऐसी बात है तो मैं अपने चारों रत्नों को अलग-अलग दिशा में छुपा देता है। इन रत्नों की रक्षा होगी। और आप में से जो भी उन रत्नों को हासिल करेगा वो ही महाजिन्न बन पाएगा। मैं अपनी मर्जी से महाजिन्न नहीं बना था। उस ऊपर वाले की ही मर्जी थी। जिन्होंने मुझे आशीर्वाद के जरिए यह रत्न दिए थे।

जिन्न- ठीक है। आप अपना पद त्याग दें। हम ढूँढ लेंगे।

महागुरुजी- यह आज के गुरु के कई पीढ़ियों पुराने गुरु हैं।

महागुरू- “यह क्या फैसला ले लिया महाराज आपने? आपको पता है की अगर आपने रत्नों को अपने से अलग कर दिया तो आप जीवित नहीं रहेंगे..."

महाजिन्न- “गुरुजी मेरा समय आ गया है, और मुझे पता है की इनमें से कोई भी रत्न हासिल नहीं कर पाएगा। आज से लाखों वर्ष बाद एक इंसान बनेगा इस देश का राजा, और वहीं बनेगा महाजिन्न। तब आपको पता है क्या करना है। आपको आने वाले हर गुरु को सब समझा देना है..."

फिर महाजिन्न गुरुजी के माइंड में।

महाजिन्न1- “आने वाले उस समय में जिन्न-लोक की सारी शक्ति एक मणि में जमा करोगे, और वो इंसान इस मणि को छते ही हमारा राजा बनेगा। बस इस बारे में सिर्फ आपको और आने वाले गरु को पता होना चाहिए। जब वो समय आएगा, मैं आपको उसका संकेत जरूर दूंगा... गुरुजी रक्षा करना मेरे लोगों की..." इतना बोलकर महाजिन्न आँख बंद कर लेते हैं।

और तभी उनकी बाडी से चार रोशनियां निकलती हैं। वो चारों रोशनियां अलग-अलग दिशा में चली जाती हैं, और गायब हो जाती हैं। और उसके थोड़ी देर बाद ही महाजिन्न की बाडी राख में बदल जाती है। और उनकी आत्मा आसमान में उड़ जाती है।

जूलिया- उसके बाद क्या हुआ डैड?

डैड- गुरुजी ने बताया की उसके बाद जिन जिन ने विरोध किया था वो उन रत्नों को ढूँढ़ने गये थे। उन्होंने ढूंढ भी लिए थे रत्न, पर उन रत्नों की रक्षा करने वालों के हाथों वो जिन्न मारे गए। उसके बाद गुरुजी ने अपने ज्ञान से सबको मिल-जुल कर रहने की प्रेरणा देते रहे। जिससे सभी जिन्न प्यार से एक दूसरे के साथ रह रहे हैं।

नीलम- वाह... अब बस एक रत्न बाकी है। उसके बाद हमारा वीर महाजिन्न बन जाएगा।

मोम- चलो बच्चो अब सोचो कहां जाना है घूमने?

उधर वीर सो रहा था। तभी उसके सपने में एक आवाज आती है।

आवाज- कैसे हो मेरे बच्चे?

वीर- कौन हैं आप?

आवाज- मुझे नहीं पहचाना? मैं लाखों वर्ष पहले महाजिन्न था।

वीर- माफ करना महाराज, आपको पहचान नहीं पाया। प्रणाम महाजिन्न।

महाजिन्न- सदा खुश रहो मेरे बच्चे। मैं तुम्हारे सपने में इसलिए आया हूँ की अब जल्दी से तुम्हें वो आखिरी रत्न भी हासिल करना होगा, और मुझे मुक्त करना होगा। मेरी आत्मा भटक रही है। वो 4 रत्न मुझे देव ने आशीर्वाद में दिए थे। जिसकी शक्ति के आगे कोई शक्ति नहीं टिक सकती। जब तक कोई और उसे हासिल नहीं कर लेता, मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी। तुम तीन रत्न हासिल कर चुके हो। अब देर ना करो और वो चौथा रत्न भी हासिल करो।
 
वीर-जी जैसा आप कहें। मैं आज से ही निकलता है।

महाजिन्न- सदा खुश रहो और सबको खुश रखो। मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।

तभी वीर की आँख खुल जाती है। वीर फ्रेश हो बाहर आता है, और कहता है- “सब तैयार हो जाओ। आज ही हमें निकलना है, आखिरी रत्न को हासिल करने के लिये..."

डैड- क्या हुआ बेटा, इतनी जल्दी?

फिर वीर उन्हें सब बता देता है। जो अभी उसने सपने में सुना।

मोम- चलो बच्चों सब तैयार हो जाओ। जाना कहां है बेटू?

वीर- हिमालय। पर उससे पहले मुझे होम-मिनिस्टर के घर जाना है डिनर के लिए।

*** * * * * * * *
 
कड़ी_83

फिर सब शाम तक ऐसे ही बात करते रहते हैं। शाम को वीर लीना और उसकी बहनों से बात करता है- "लीना तुम बहनों का यहां मन तो लग रहा है ना?"

लीना- हाँ वीर, हम यहां बहुत खुश हैं। यहां हमें इतने प्यारे मोम डैड मिले हैं, दादाजी मिले हैं। इतनी और बहनें मिल गई। सच कहूँ तो मैं बहुत खुश हूँ और मेरी बहनें भी बहुत खुश हैं।

वीर- तो सब पैकिंग कर लो। उसके बाद हमें निकलना है डिनर में।

उधर होम मिनिस्टर के घर। होम मिनिस्टर- सब काम पर्फेक्ट होना चाहिए। मुझे किसी भी चीज की कंप्लेंट नहीं चाहिए। बहुत खास मेहमान आने वाले हैं।

अज्जू- डैड, यह सब क्या हो रहा है?

होम मिनिस्टर- आज वीर और उसके दोस्तों को डिनर पर इन्वाइट किया है। और एक बात ध्यान से सुन ले। अगर कुछ गड़बड़ की तो इस घर के दरवाजे तेरे लिए हमेशा-हमेशा के लिए बंद।

अज्जू अपने डैड की बात सुनकर अंदर ही अंदर जल जाता है। वो सीधा अपने रूम में जाता है, और बेड पर लेट जाता है। आज उसके डैड ने वीर के लिए उसे भी घर से बाहर करने को कह दिया था। थोड़ी देर में उसके चेहरा पे स्माइल आ जाती है। और वो अपना फोन निकालकर किसी को काल करता है, और कुछ बात करता है। बात करके अज्जू फिर से लेट जाता है। और सोचने लगता है की ना डैड रहेंगे और ना है वीर और उसके साथी। डैड के मरने के बाद यह सब प्रापर्टी मेरी होगी।

तकरीबन 30 मिनट बाद उसके फोन की रिंग बजती है। वो फोन उठाकर बात करता है, और बाहर चला जाता है। बाहर एक आदमी खड़ा था। अज्जू उससे समान लेकर किचेन में चला जाता है, और चुपके से सारे खाने में जहर मिला देता है। खाने में जहर मिलाकर अपने चेहरा पे कातिल स्माइल लाकर अपने रूम में चला जाता है।

इधर वीर- “ओके मोम, हम जाते हैं आप तैयार रहना। हमारे आते ही सफर शुरू करेंगे...” फिर वीर और दोस्त सब निकलते है होम मिनिस्टर के यहां।

वी.आई.पी. के साथ भी इतनी गाड़ियां नहीं होंगी जितनी वीर के साथ हैं। सारा शहर बस जाती |ड़ियां को ही देखे जा रहा था। थोड़ी देर में वीर और परिवार होम-मिनिस्टर के आलीशान बंगले के सामने खड़े थे। तभी होम मिनिस्टर और उसकी वाइफ बाहर आते हैं, वीर का स्वागत करने के लिए।

होम मिनिस्टर- स्वागत मिस्टर वीर और दोस्त, आपका बहुत-बहुत स्वागत है।

वीर- शुक्रिया होम मिनिस्टर सर।

होम मिनिस्टर- वीर जी आप तो हमें नाम से बला सकते हैं- आदित्य कपूर।

वीर- नहीं सर, आप मुझसे बहुत बड़े हैं। मैं आपका नाम कैसे ले सकता हूँ।

होम मिनिस्टर- चल कोई बात नहीं बेटा। अंकल तो कह ही सकते हो। अब घर में मैं होम मिनिस्टर नहीं हैं।

वीर- ठीक है अंकलजी।

होम मिनिस्टर- हाँ यह हुई ना बात... चलो अपनी परिवार से मिलवाता हूँ।

फिर सब अंदर चले जाते हैं, और जाकर ड्राइंगरूम में बैठ जाते हैं।

होम मिनिस्टर- वीर इनसे मिलो यह हैं मेरी वाइफ रुक्मनी, और रुक्मनी यही है वो वीर।

रुक्मनी- कैसे हो बेटा? यह हर वक्त बस तुम्हारे बारे में ही बात करते रहते हैं। अगर बेटा हो तो वीर जैसा।

वीर- यह तो इनका प्यार है, और वैसे भी आपका बेटा भी किसी से कम नहीं है। बस थोड़ा बिगड़ गया है। और उसके बिगड़ने में भी अंकल आपका हाथ है। अगर शुरू में ही आपने उसे सही राह दिखाया होता तो आज वो इतना बिगड़ता नहीं।

रुक्मनी- नहीं बेटा। बस कुछ ऐसी बात हो गई जिसके बाद यह ऐसा हो गया है।

वीर- "चलो कोई बात नहीं। वैसे आपने अपनी बेटी से नहीं मिलवाया..” वीर की बात सुनकर होम मिनिस्टर और उसकी वाइफ चकित हो जाते हैं।

होम मिनिस्टर- आपको कैसे पता मेरी बेटी के बारे में?

वीर- मुझे सब पता है। और यह भी पता है की उसका आक्सिडेंट हुआ है, और वो अब एक जिंदा लाश बनी हुई

वीर की बात पे होम मिनिस्टर और उसकी वाइफ की आँखों में आँसू आ जाते हैं, और दूर खड़े अज्जू के भी।

वीर- "चलिए आज आपको एक खसखबरी देते हैं..." और वीर दोनों का हाथ पकड़कर उनकी बेटी के रूम में ले जाता है।

यहां अज्जू अपनी बहन के पास बैठा रोए जा रहा था।

वीर- अज्जू।

अज्जू- “वीर मैं बहुत बुरा भाई हूँ ना। जिन लड़कों ने मेरी बहन का आक्सिडेंट करवाया, वो आज भी खुले घूम रहे हैं, और मैं अपनी फूल जैसी बहन की रक्षा भी नहीं कर पाया। देखो ना वीर कैसे गुमसुम सी पड़ी है कुछ बात नहीं करती..."

वीर- “चुप हो जा अज्जू। अगर तू ही रोएगा तो तेरे मोम डैड को कौन संभालेगा?” और वीर आगे बढ़कर उस लड़की के सिर पर हाथ रखता है और अपनी आँखें बंद करता है।

होम मिनिस्टर, उसकी वाइफ और अज्जू सब देख रहे थे।
 
तभी वीर के हाथ से रोशनी निकलकर उस लड़की के अंदर चली जाती है जिससे उसकी बाडी को एक झटका लगता है। यह सब देखकर तीनों आँखें फाड़े वीर को देखे जा रहे थे। थोड़ी देर में उस लड़की को होश आ जाता है, और वो उठकर बैठ जाती है।

यह देखकर होम मिनिस्टर, उसकी बीवी और अज्जू को इतनी खुशी होती है की तीनों भागकर उस लड़की के गले लग जाते हैं।

लड़की- माँ मैं ठीक हो गई।

रुक्मनी- हाँ बेटा तुझे ठीक देखकर हमें जो खुशी हो रही है, हम बता नहीं सकते।

तभी अज्जू खड़ा होकर आगे आकर वीर के पैर पकड़कर रोने लगता है- "मुझे माफ कर दीजिए। आप भगवान हैं। मुझे क्षमा करें। मैंने आपको नीचा दिखाने के लिए क्या कुछ नहीं किया? आज तो मैंने आपको खाने में जहर तक मिला दिया था। मुझे माफ करें..."

होम मिनिस्टर- आप क्या हैं? इतना पता लग चुका है की आप आम इंसान नहीं है।

जस्सी- नहीं, यह आम इंसान नहीं है। बल्कि हममें से कोई भी आम इंसान नहीं है। यह हैं जिन्न-लोक के राजा वीर सिंह।

फिर जस्सी सबके बारे में सब बता देता है। जिसे सुनकर तीनों आँखें फाड़े इन्हें देख रहे थे। होम मिनिस्टर और उसकी बीवी भी वीर के आगे झुक कर पैर छूने लगते हैं।

वीर- यह आप क्या कर रहे हैं? माना की मैं जिन्न-लोक का राजा हूँ। पर वो मैं सिर्फ जिन्न-लोक में हूँ। यहां मुझे इंसान ही रहने दीजिए।

अज्जू- भाई प्लीज़्ज... मुझे माफ कर दीजिए।

वीर- “अज्जू तुझे तो माफ मैंने बहुत टाइम पहले ही कर दिया था। मुझे पहले ही पता चल गया था तुम्हारी बहन के बारे में। उसके जिंदा लाश बनने के बाद ही तुम ऐसा हो गये हो। और जिसने इसका आक्सिडेंट करवाया

था वो अभी भी आजाद घूम रहा है.."

अज्जू- प्लीज़्ज़... भाई एक बार बता दो कौन है वो? जिंदा नहीं छोड़ेगा उसे।

वीर- नहीं अज्जू तुम नहीं। उसे सबक तुम्हारी बहन सिखाएगी।

अज्जू- भाई यह क्या कह रहे हो। रूही कैसे उन लड़कों का मुकाबला कर पाएगी?

वीर- “अभी दिखाता हूँ..” इतना बोलकर वीर अपने हाथ में एक लोहे की रोड लेता है।

जिसे देखकर चारों चौंक जाते हैं।

वीर- यह लो रूही इसे अपने दोनों हाथों में पकड़कर मोड़ो।

रूही- मैं कैसे कर सकती हूँ। यह कोई कागज नहीं है।

वीर- "रूही एक बार करके तो देखो.."

वीर की बात सुनकर रूही उस रोड को अपने हाथों में पकड़कर मोड़ने लगती है, और देखते ही देखते रोड मड़ जाती है। यह देखकर रूही, उसका भाई उसके मोम डैड सब चकित हो जाते हैं।

रूही- यह... यह कैसे?

वीर- यह इसलिए क्योंकि तुझमें मेरी शक्ति है। तुममें इतनी उर्जा है की तुम 100 के करीब आम इंसानों को मौत के घाट उतार सकती हो।

वीर की बात सुनकर चारों फिर से चकित हो जाते हैं।

अज्जू- इसका मतलब मेरी बहन अब आम इंसान नहीं रही।

की जो आज आपने देखा वो

वीर- नहीं अज्जू, अब यह हममें से एक है। मैं आप सबसे एक बात कहना आप तक ही सीमित रहे।

होम मिनिस्टर- आप निश्चिंत रहें वीर जी। यह बात आगे नहीं जाएगी।

संजू- चलो खाना खाने बहुत भूख लगी है।

अज्जू- माफ करना, पर वो खाने में तो जहर है।

वीर- चिंता मत करो अज्जू, खाना बदल दिया है।

अज्जू- मैं बहुत शर्मिंदा हूँ।

संजू- कोई बात नहीं अज्जू। इंसान गुस्से और घमंड में बहुत कुछ कर जाता है। चलो।

फिर सब बाहर टेबल पर आ जाते हैं, और सब मिलकर खाना शुरू करते हैं।

*****

*****
 
प्रीत- रूही अब बताओ उस दिन हवा क्या था, और वो लड़का कौन था? जिसने तुम्हारे साथ ऐसा किया?

वीर- मैं बताता हूँ। जिस लड़के ने रूही की यह हालत की है, वो कोई और नहीं उसी विधायक का बड़ा बेटा है। जिसके छोटे बेटे को मैंने कोमा में भेजा है।

होम मिनिस्टर- क्या? यह क्या कह रहे हो?

रूही- डैड वीर सच कह रहा है। उसी के बड़े बेटे ने ऐसा किया।

वीर- जिस कालेज में रूही पढ़ती थी, वो भी उसी कालेज का जाना-माना गुन्डा कहलाता था। ऐसे ही उसे रूही पसंद आ गई। बार रूही को छेड़ता था, और उसके साथ बदतमीजी करता था। जब रूही से बर्दाश्त नहीं हवा तो एक दिन रूही ने उसे थप्पड़ मार दिया। वो अपनी बेइज्जती बर्दाश्त ना कर सका, और दूसरे दिन ही उसने रूही को उठा लिया। और इसे एक फार्महाउस में एक रूम में बंद कर दिया। गनीमत थी के उस रूम में एक खिड़की भी थी, जिससे बाहर निकलकर यह भाग गई। पर भागते हुए रूही को देख लिया और वो भी गाड़ी में बैठकर इसके पीछे चल पड़ा। उसने शराब पी रखी थी। थोड़ी ही देर में उसे रूही दिख गई। रूही तब तक भीड़ भाड़ वाले इलाके की तरफ जा रही थी। उसे लगा की यह अपने डैड को बता देगी। इससे अच्छा इसे खतम कर दिया जाए। तो उसने इसपे गाड़ी चढ़ा दी।

वीर फिर बोला- “उसका डैड भी कोई दूध का धुला हवा नहीं है। ना जाने अपने बेटे के साथ मिलकर उसने कितनी लड़कियों का रेप किया है। रूही अब समय आ गया है उसे और उसके बाप को खतम करने का। मैं तुम्हारे साथ अपने कुछ सैनिक छोड़ कर जा रहा हूँ, जो तुम्हें प्रोटेक्ट भी करेंगे और तुम्हारी हेल्प भी। मेरे आने तक इस शहर के क्राइम का सफाया हो जाना चाहिए। और मैं खुद एक मिशन पर जा रहा हूँ..."

रूही- आप कहां जा रहे हैं?

वीर- मुझे एक रत्न हासिल करना है। इसलिए मुझे निकलना है। सारी परिवार जा रही है। ट्रिप भी हो जाएगी,

और मेरा मिशन भी।

होम मिनिस्टर- महाराज क्या मेरी बच्ची उन सबका मुकाबला कर सकेगी?

वीर- आपने जो नमूना देखा वो तो बस ट्रेलर था। आपकी बेटी क्या-क्या नहीं कर सकती, आप सोच भी नहीं सकते। अलीजा, रूही के अंदर ज्ञान भर दो। इसे पता होना चाहिए की यह क्या-क्या कर सकती है?

तभी अलीजा आगे बढ़कर रूही के सिर को अपने दोनों हाथों में पकड़कर अपनी आँखें बंद करती है, और थोड़ी देर में अलीजा के हाथों से रोशनी निकलकर रूही के जिश्म में चली जाती है।

अलीजा- “वीर, अब यह हरेक चीज में संपूर्ण है.."

होम मिनिस्टर- वैसे महाराज आपने अपने दोस्तों का परिचय नहीं करवाया।

वीर- “जी अभी लीजिए। यह हैं मेरी पत्नियां संज, प्रीत और अलीजा..."

रुक्मनी- क्या आपकी तीन पत्नियां हैं?

जस्सी- जी आंटीजी। और आगे पता नहीं कितनी होंगी। बड़ी मुश्किल से मेरी और मोहित की गर्लफ्रेंड बनी है। नहीं तो जो भी आती थी, वीर की ही हो जाती थी।

वीर- “हाहाहाहा... बदमाश... और यह है जूलिया, यह मार्गन प्लैनेट की है। जो यहां से लाखों करोड़ों किलोमीटर दूर है...”

अज्जू- "क्या किसी और प्लैनेट की है? वाह.."

फिर वीर सबका परिचय करवाता है- "बस यह है मेरी परिवार। रूही तुम्हें पता चल गया होगा की तुम्हें कैसे सैनिकों को बुलाना है?"

रूही- जी वीर पता चल गया है। वीर जी क्या अज्जू को पावर्स नहीं मिल सकती?

वीर- मिल सकती है। तम खद दे सकती हो। लेकिन अभी सिर्फ अज्जू को ही। वापिस आकर मैं तम्हारे मोम डैड को भी जिन्न, जिन्नी बना दूँगा। अच्छा अब हमें जाने की इजाजत दे। हमें लेट हो रहा है।

होम मिनिस्टर- ठीक है महाराज, हमेशा खुश रहिए। आते रहिएगा।

फिर वीर और परिवार वहां से घर आ जाते हैं। सब तैयार बैठे थे।

वीर- बिस्वा जाने की तैयारी करो। हम पहले ही लेट हो चुके हैं।

बिस्वा- भाई किसपे जाना है?

जूलिया- क्यों ना हम मेरे बनाए यान पे चलें?

वीर- हाँ क्यों नहीं। हम भी तो देखें कैसा है तुम्हारा यान?

जूलिया- “आप पहले बाहर से मैदान को कवर करें, ताकी बाहर कोई देख ना ले।

वीर- "ठीक है चलो..." और सभी बाहर आ जाते हैं। वीर उस जगह को कवर कर देता है।
 
तभी जूलिया के हाथ से रोशनी निकलकर ग्राउंड पर पड़ती है, और वहां एक उड़न तश्तरी आ जाती है। दिखने में गोल आकार की थी।

वीर- चलो सब अंदर। जूलिया बहुत शानदार है।

फिर सब उसके अंदर चले जाते हैं। बाहर से देखने में बहुत छोटा लग रहा था था। पर अंदर से बहुत बड़ा था। अंदर रूम बने हुए थे। हर एक चीज की सुविधा थी उसके अंदर। सब अंदर आकर बैठ जाते हैं। जूलिया आगे बढ़कर एक बड़ी सी स्क्रीन के आगे बैठ जाती है।

जूलिया- “वीर हमें कहा जाना है? उस जगह का अड्रेस भर दो। मैंने इंडिया का मैप डाउनलोड कर दिया है इसमें

वीर जूलिया के पास जाकर जिस जगह जाना है वहां का अड्रेस भर देता है।

जूलिया- "और वीर टाइम क्या? कितने टाइम वहां पहुँचा देगा..."

वीर- “नहीं जूलिया, इसमें कल सुबह ही पहुँचने का टाइम सेट करो। थोड़ी मस्ती भी तो करनी है। बहुत दिन हो गये.” इतना बोलकर वीर जूलिया को आँख मार देता है। जिससे जूलिया सब समझ जाती है।

जूलिया अपने मन में- “काश तुम मेरा प्यार भी समझ पाते?" पर उसे नहीं पता था वीर इसकी बात सुन चुका था।

वीर आगे बढ़कर हल्का सा किस जूलिया के होंठों पे कर देता है। जूलिया तो मानो चकित होकर खड़ी हो जाती है। उसके मन में खुशी के ढोल बजने लगते हैं।

मोम आगे आकर जूलिया को हिलाती हैं, और उसके कान में कहती हैं- "इतने में ही ढेर हो गई। अभी तो सिर्फ हल्का किस किया है...” इतना बोलकर मोम हँसने लगती हैं, और वहां से चली जाती हैं।

जूलिया मन में- “इसका मतलब इन्हें मेरा प्यार दिखता है, और यह भी मुझे प्यार करते हैं। ओह माई गोड...

जूलिया टाइम सेट करके स्टार्ट करती है आगे का सफर।

जस्सी- जूलिया जी क्या इस शिप में गाना बज सकता है?

जूलिया- हाँ क्यों नहीं। वो सामने कंप्यूटर पड़ा है, उसमें प्ले कर लो।

फिर जस्सी वहां से कंप्यूटर के पास जाता है, और एक गाना प्ले करता है- "बेबी को बेस पसंद है..."

गाना स्टार्ट होते ही जस्सी निशु को साथ लेकर डान्स करने लगता है। इन दोनों को देखकर बाकी सब भी नाचने लगते हैं। बिस्वा अपनी परी के साथ, आशीष नेहा के साथ, प्रिया और नैना एक दूसरे के साथ डान्स कर रही थी। तभी विशु वीर को खींच लेती है और उसके साथ डान्स करने लगती है। सब ऐसे ही हँसी खुशी टाइम बिताने लगते हैं।

वीर एक रूम में जाता है, और बेड पे लेट जाता है। थोड़ी देर बाद उसके रूम में मोम आती हैं, और जाकर वीर

को लिपटकर सो जाती हैं।

मोम- “माना की मेरे से भी हाट-हाट लड़कियां अब इस परिवार में आ चुकी हैं, पर तू तो अब मेरी तरफ देखता भी नहीं...”

पुराने रूप में आ जाइए, आज उसी रूप में

वीर- क्या मोम ऐसा हो सकता है की मैं आपको ना देखें? आपको प्यार करूंगा।

मोम- अच्छा... पर जान मुझे शर्म आयेगी उस रूप में। तुम जानते हो ना रूप बदलने के साथ सोच भी बदल जाती है।

वीर- “उसी में तो मजा आएगा...” कहकर वीर हाथ आगे करता है और मोम का रूप बदल जाता है, और साथ में ही मोम की सोच भी।

वीर आगे बढ़कर मोम को किस करने लगता है, और साथ ही मोम का शरीर भी हल्का-हल्का काँपने लगता है। कछ ही पलो में वीर की मोम गर्म हो जाती हैं. और साथ देने लगती हैं। दोनों वाइल्ड किसिंग करने लगते हैं। तभी वीर चुटकी बजाता है, और रूम में प्रीत और संजू भी आ जाती हैं। दोनों आगे बढ़कर दोनों के साथ मिल जाते हैं, और चारों प्यार के रस में डूब जाते हैं।

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कड़ी_85

उधर वीर और दोस्तों के जाने के बाद।

होम मिनिस्टर- सच में वीर भगवान बनकर आए थे, और आशीर्वाद देकर चले गये।

रूही- “हाँ डैड। ज्ञान की प्राप्ति के बाद मुझे उनके बारे में सब पता चल गया है। उन्होंने बचपन में बहुत दुख देखे हैं। बचपन में ही वो अपनी परिवार से बिछुड़ गये थे." फिर रूही अपने परिवार को वीर के बारे में सब बता देती है, जो-जो वीर के साथ हवा।

अज्जू- सच में बहुत महान हैं वीर भाई। गुड़िया मैं तेरे साथ हूँ। भाई ने जो काम तुझे दिया है, उसे पूरा करना

रुक्मनी- बेटा संभाल कर। मुझे डर लग रहा है।

रूही- डरो नहीं मोम। मैं अकेली नहीं हूँ, मेरे साथ जिन्न-लोक के सैनिक भी हैं।

फिर होम मिनिस्टर और उसकी वाइफ अपनी बेटी का माथा चूमकर चले जाते हैं।

अज्जू- "गुड़िया तेरे बिना मैं बहुत सूना हो गया था..” इतना बोलकर अज्जू की आँखों में आँसू आ जाते हैं।

रूही आगे बढ़कर अज्जू के गले लग जाती है, और उसके होंठों पे हल्का सा किस कर देती है। जिससे अज्जू चकित हो जाता है।

रूही- मुझे पता लग गया है भाई की आप मुझे बहुत चाहते हैं। वीर जी की शक्ति से मैं सबका माइंड पढ़ सकती

अज्जू- तो क्या तू भी मुझसे प्यार करती है?

रूही- हाँ भाई। मेरा प्यार तो बचपन से आपके लिए है। बस कभी कह नहीं पाई।

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उधर सुबह 5:00 बजे सब हिमालय पहुँच जाते हैं। यह जगह थी लद्दाख। जूलिया शिप को सूनसान इलाके में उतारती है। सब शिप से उतर जाते हैं। जूलिया शिप को छिपा देती है।

वीर- यहीं कुछ ही दूरी पर एक छोटा सा बाजार है, वहीं हमें रूम मिलेंगे। आशीष एक बस लाओ।

आशीष वहां एक बस लाता है, जो की बहुत खूबसूरत थी। सब बस में बैठकर होटेल की तरफ निकल पड़ते हैं। होटेल पहँचकर सब रूम बुक करवाकर अपने-अपने रूम में चले जाते हैं, और सुबह 8:00 बजे सब तैयार होकर नाश्ते के लिए मिलते हैं। वीर ने ड्रैगन बेबी को रूम में ही रहने को कहा और उनका खाना वहीं भेज दिया जस्सी के हाथों।

वीर- हाँ भाई अब बोलो अब क्या प्लान है?

मोम- हमें क्या पता, तू बता?

वीर- “देखो डार्लिंग....."

तभी डैड- "बेशर्म तेरी माँ है वो..."

वीर- “क्यों डैड जलन हो रही है?" वीर की बात पे सब हँस देते हैं।

मोम- क्यों जी आपको क्या परेशानी है? मेरा जानू मुझे कुछ भी बुलाए।

डैड- जो हुकुम महारानी जी। बोल बेटा क्या प्लान है?

वीर- डैड आप लोग एंजाय करो मैं चला मेरा आखिरी रत्न हासिल करने।

जूलिया- नहीं आप अकेले नहीं जाएंगे। मैं भी आपके साथ जाऊँगी।

संजू और प्रीत- और हम भी।
 
जस्सी- हाँ भाई, हम तुझे अकेले को नहीं जाने देंगे समझा? अब तू दस दिना तेनू मैं।

वीर- ओह्ह... चंगा भाई। तू जीते मैं हारा, खुश। मोम आप बाकी सब लड़कियों को साथ लेजाकर घूमो। तब तक हम जरा रत्न हासिल करने जा रहे हैं।

लीना की बहन जिसका नाम हेलिना था और वो अपनी बहनों से बड़ी थी।

हेलिना- “वीर आपको भी हमें साथ ले जाना होगा। हमें जो रत्न से शक्ति मिली है, उसके बगैर आप आखिरी रत्न को हासिल नहीं कर पाएंगे। हम सात बहनों के साथ ही आप उसे हासिल कर पाएंगे..."

वीर- ठीक है हेलिना। तैयार हो जाओ।

डैड- अपना ख्याल और इन बच्चों का ख्याल रखना।

वीर- चंगा बापू।

डैड- “वाह... ओये पुत्तर माँ नू डालिंग और पेयो नू बापू। ठहर जा दस दा तेनू.” और डैड वीर के पीछे भागने लगते हैं। यह देखकर सब हँस-हँस के लोट-पोट हो जाते हैं।

डैड, मोम, चाचा, चाची, बाकी बच्चो को साथ ले जाते है, घूमने। और इधर वीर और पार्टी निकल पड़ते हैं रत्न की खोज में।

जूलिया- वीर कहां जाना है?

वीर- जहां हम उतरे थे, उसके बिल्कुल बाईं तरफ में खाई है। उसके नीचे जहां अब बर्फ पड़ी है। बर्फ के नीचे बड़े-बड़े पत्थर हैं। उसी के नीचे जाना है हमें। पर अंदर इतनी ठंड है की सब जम जाएंगे। इसलिए अपनी-अपनी उर्जा को बढ़ा लो ताकी बाडी गर्म रहे। जस्सी और निश् को तो कुछ नहीं होगा, क्योंकी वो तो बर्फीले हैं।

अलीजा- वीर एक काम करो। तुम सबको शील्ड दे दो ताकी बर्फ इनका कुछ ना बिगाड़ पाए।

वीर को अलीजा की बात सही लगती है, और वो सबको शील्ड दे देता है। फिर सब उस तरफ चल देते हैं। आस पास कोई नहीं था। सब खाईं के प जाते हैं, और एक के बाद एक जंप लगाकर कूद जाते हैं खाई में। वीर लारा को पकड़कर जंप करता है। ऐसा नहीं था की वो कम शक्तिशाली थी। पर थी तो अभी भी बच्ची ही। सब नीचे पहुँच जाते हैं।

अभी सबने बर्फ पर पैर रखा ही था की तभी जमीन हिलने लगती है, और एकदम से जमीन में बड़े-बड़े छेद हो जाते हैं, और सबके सब जमीन के नीचे चले जाते हैं।

ड्रैगन्स बेबी- मालिक हम भी आपके साथ हैं।

वीर- मुझे पता है बच्चों। इसलिए तुम्हें भी शील्ड दी है। पर तुम्हें इसकी जरूरत नहीं है। तुम्हारे अंदर बहुत आग

है।

जस्सी- वाह... क्या जगह है। चलो स्केटिंग करते हैं।

मोहित- स्केटिंग बाद में करना, पहले वो देखो, हमारी स्केटिंग देखने के लिए दर्शक भी आ गये।

सब उस तरफ देखते हैं। यहां 4 सफेद गोरिल्ले खड़े थे और वे स्से में लग रहे थे।

जस्सी- हेलो दोस्तों, आप भी स्केटिंग करोगे?

जस्सी ने अभी इतना ही बोला था की तभी उनमें से एक गोरिल्ला तेजी से जस्सी की तरफ बढ़ता है। वो अभी जस्सी के पास पहँचकर जस्सी पे झपट्टा मारता है। पर जस्सी अपनी स्पीड से साइड हट जाता है।

"

जस्सी- “भाई गुस्सा क्यों होते हो, मत करो स्केटिंग.."

जस्सी अभी इतना ही बोला था की तभी वो गोरिल्ला वहां से गायब होकर सीधा जस्सी के प और उसे एक पंच जड़ देता है।

जिससे जस्सी उड़ता हवा दूर जा गिरता है। जितनी तेजी से जस्सी उड़ता हवा दूर गिरा, उतनी ही तेजी से जस्सी वापिस गोरिल्ला के पास आया और उड़ता हवा उसके चेहरा पे पंच जड़ देता है। जिससे गोरिल्ला पीछे जा गिरता है। उसके गिरते ही बाकी के गोरिल्ले भी मैदान में कूद पड़ते हैं।

एक को मोहित संभाल लेता है। और तीसरे को बिस्वा और आशीष। लेकिन एक वहीं खड़ा था जो सबसे बड़ा लग रहा था, और वो वीर की तरफ ही देख रहा था।

वीर बाकी सभी लड़कियों को वहां से साइड करके उनपे शील्ड दे देता है। ताकी कोई गोरिल्ला इन्हें नुकसान ना पहँच पाए।

वीर- तुम सब बगल ही रहना, जब तक मैं ना कहूँ कोई नजदीक नहीं आएगा।

जूलिया- पर वीर हम आपकी हेल्प कर सकते हैं।

वीर- तुम्हें लगता है मुझे हेल्प की जरूरत है? जब होगी बुला लूँगा तब तक एंजाय करो फाइट का।

अंदर मोहित अपने भेड़िया रूप में आ जाता है। और उस गोरिल्ले को अपने नाखूनों से करेदने लगता है। गोरिल्ला मोहित को अपने से दूर करता है, और उसे लात मारता है। इससे मोहित को गुस्सा आने लगता है। भेड़िया जो ठहरा। मोहित एक छलाँग के साथ उसके ऊपर आ जाता है, और अपने हाथ के बड़े-बड़े सख्त तीखे नाखूनों को उसके सीने पे दे मारता है। जिससे उस गोरिल्ले का खून बहने लगता है, और वो चीख मारता है।

जस्सी तो अपनी चुस्ती और तेजी से उसपे वार पे वार किए जा रहा था गोरिल्ले को समझ में ही नहीं आ रहा था क्या करे क्या नहीं? उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

उधर बिस्वा और आशीष दोनों मिलकर गोरिल्ले को अच्छा सबक सिखा रहे थे। दोनों बस उस गोरिल्ले के साथ मस्ती कर रहे थे। कभी उसके पैरों में टायर वाले जूते पहना देते, जिससे से वो बेचारा इधर-उधर फिसलने लगता। गोरिल्ले भी कैसे अजीब से थे चारों जिनकी 4-4 बाहें थी। और चेहरा बड़ा डरावना।
 
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