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Fantasy अनदेखे जीवन का सफ़र

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जूलिया के डैड- “बेटी तू आ गई। यह बाहर क्या हो रहा है? इतना शोर..."

जूलिया- डैड वीर ने हमला कर दिया है जोर्डन पर। यह सब उसी बात का शोर है।

जूलिया की मोम- “ओह्ह... मेरी बच्ची। तुझे देखे आँखें तरस गई थी। कैसी है मेरी बच्ची?"

जूलिया- मैं ठीक हूँ माँ। माँ इनसे मिलो, यह हैं अलीजा परिस्तान की रानी।

दोनों अलीजा से मिलते हैं।

जूलिया- “चलो मोम डैड, हमें यहां से निकलना होगा..."

चारों अभी बाहर निकले ही थे की तभी उनके सामने कुछ सैनिक आकर खड़े हो जाते हैं। जिसे अलीजा उन्हें वहीं खतम कर देती है। अलीजा ने कहा- “एक दूसरे का हाथ पकड़ लो...”

चारों एक दूसरे का हाथ पकड़ लेते हैं, और वहां से गायब हो जाते हैं, और सीधा जाकर अफा में प्रगट होते हैं। जूलिया कहती है- “मोम आप यहीं रहो...” तभी वहां ड्रैगन बेबी आती है।

ड्रैगन बेबी- आप जाइए मैं हूँ, यहां इनकी रक्षा के लिए।

जूलिया के डैड- यह कैसा जानवर है बेटी?

जूलिया- “डैड, यह ड्रैगन है। वीर के ड्रैगन..” अच्छा हम चलते हैं। आप आराम कीजिये.." और दोनों उनसे मिलकर वहां से गायब होकर वीर के ….

वीर- काम हो गया?

जूलिया- “जी हो गया..."

वहीं बिस्वा और आशीष- रामबा के सभी हमशक्लों को मार चुके थे। सिर्फ रामबा बचा था। वीर की सेना लगातार जोर्डन की सेना पर भारी पड़ती हुई नजर आ रही थी। उधर जस्सी मोहित नीलम और निशु, खाली प्लैनेट पर पहुँच जाते हैं। और उनके सामने बहुत से जानवर इधर-उधर हुंकार भरते हुए फिर रहे थे। सबकी बाडी से जैसे आग निकल रही थी। उन जानवरों की नजर इनपे पड़ती है, तो एक जानवर इनकी तरफ खड़ा होकर अपने दूसरे जानवरों को हमला करने भेज देता है।

जैसे ही वो जानवर इनके नजदीक आता है, तभी मोहित अपने असली रूप में आ जाता है और अपने नुकीले नाखून उस जानवर के पेट में घुसा देता है। यह इतनी जल्दी हवा की जानवर को कुछ समझ में नहीं पाया। मोहित का हाथ उसके पेट में घुस जाता है, और मोहित उसे ऊपर उठाकर दूर फेंक देता है।

यह सीन देखकर जस्सी- “वाह यार... ओहह... छा गया गुरुजी...”

तभी उधर से सभी जानवर इनकी तरफ दौड़ पड़ते हैं। यह देखकर नीलम भी अपने असली रूप में आ जाती है। नीलम और मोहित का साइज काफी बढ़ गया था। उनके पास खड़े जस्सी और निशु तो जैसे बच्चे लग रहे थे।

जस्सी निशु को देखकर स्माइल करता है, और निशु भी। तभी जस्सी अपने असली रूप में आ जाता है। उसके बड़े से पंख निकल आते हैं। और वो पँखो से चमगादड़ निकलने लगते हैं।।

इधर नीलम आगे बढ़कर दूसरे जानवर का सिर अपने हाथ से पकड़ लेती है, और अपने तेज दांतों को उसके गले में घुसा देती है। जानवर छटपटाने लगता है। नीलम जानवर की गर्दन धड़ से अलग कर देती है। की तभी पीछे से एक जानवर अपना पंजा नीलम की पीठ पे दे मारता है। नीलम पीछे घूमकर देखती है, तो उसकी आँखें गुस्से से लाल हो चुकी थी। वो वहीं खड़ी-खड़ी अपना हाथ घुमाकर उस जानवर को पंच जड़ देती है। वो जानवर भी कहा पीछे हटने वाला था। वो दोबारा नीलम से भिड़ जाता है

उधर जस्सी एक जानवर को उठाकर आसमान में ले जाता है। और सारे चमगादड़ उसके मांस को खा जाते हैं। अगर कुछ बचता है तो बस सिर्फ उसका अस्थिपंजर और वहीं निशु अपने असली रूप में आ चुकी थी। तभी उसकी तरफ जानवर आता है। इससे पहले की वो हमला करता की तभी निशु हाथ हिलाती है, और उसके पीछे से बहुत सारे चमगादड़ निकलकर उस जानवर से लिपट जाते हैं।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी 92

अब बस अगर कुछ सुनाई दे रहा था तो बस सिर्फ उस जानवर की चीखें। देखते ही देखते वहां जनवरों का नामो निशान मिट जाता है, जैसे वहाँ कभी कुछ था ही नहीं, सारे चमगादड़ भी गायब हो जाते हैं। उनकी जैसे अच्छी दावत हुई हो।

उधर दूसरी तरफ बिस्वा और आशीष, रामबा और उसके साथियों से भिड़े हुए थे।

बिस्वा- "अब खेल खतम हआ रामबा तेरा.." बोलकर अपने दोनों हाथों में तलवार निकालकर उस रामबा की तरफ दौड़ लगाता है और हवा से तेज भागते हए रामबा का सिर उसके धड़ से अलग कर देता है।

रामबा का सिर जमीन पर पड़ा हुआ था और उसकी आँखें पूरी खुली हुई थीं, जिसमें डर दिखाई दे रहा था और वहीं उसका धड़ अलग पड़ा हुआ था। जो कुछ देर में शांत पड़ गया। फिर उसकी बाडी में आग लग जाती है और वो फट जाती है।

जोर्डन जब अपने सबसे खतरनाक साथी की मौत होते हुए देखता है तो वो गुस्से में आ जाता है, और अपनी

आँखें बंद करके हाथ आगे करता है की तभी उसके हाथ के ऊपर बने एक टैटू से रोशनी निकलती है, और आसमान में चली जाती है। वो टैटू कोई आम नहीं था उसमें कुछ शैतानी दरिंदे जैसे जानवर की तरह दिखने वाले का टैटू था, जो की रोशनी के रूप में निकलकर आसमान में पहुँच गई। और वहां 6-7 दरिंदे सामने आ गए। जिनके हाथ में हथियार थे भाले के जैसे। बड़े-बड़े पंख थे जिससे वो चमगादड़ की तरह उड़ते हुए जोर्डन के सिर के ऊपर उड़ने लगे। और अजीब सी आवाज कर रहे थे। जिससे वहाँ के माहौल में जैसे दहशत आ गई हो।

जोर्डन उन दानवी चमगादड़ों की तरह दिखने वाले दानवों को हुकुम देते हुए- “जाओ और खतम कर दो सबको जो भी दिखे...”

जोर्डन का आदेश मिलते ही वो जीव सबसे पहले बिस्वा की तरफ आते हैं।

बिस्वा का ध्यान उन जीवों पर पड़ता और वो कुछ करता उससे पहले वो जीव अपने पँखों को बिस्वा की तरफ

जोर से हिलाते हैं। जिससे हवा का तूफान जैसा बन जाता है और वो बिस्वा को उड़ाता हुआ दूर तक ले जाता है। बिस्वा काफी दूर उड़ता हुआ गिरता है।

तभी वीर का ध्यान बिस्वा की तरफ जाता है और वो आकाश को बिस्वा की मदद के लिए भेजता है- “जाओ

आकाश अब तुम्हारी बारी है..”

वीर का बोलना ही था की आकाश भागकर आसमान की तरफ उछलता है। जिससे जमीन पर गड्ढा सा बन जाता है और वो आसमान में काफी ऊंचा उड़ता हुआ पहुँच जाता हैं। आकाश वहीं अपने असली रूप ड्रैगन में बदल जाता है। जो की बहुत बड़ा दिख रहा था, उंचाई पर होने के बावजूद भी।

आकाश अपने ड्रैगन रूप में एक दहाड़ मारता है और आग की लपटें छोड़ता है। जिससे लग रहा था जैसे आसमान में आग का बदल बन गया हो। आकाश की दहाड़ और आगे की लपटें देखकर वहाँ मौजूद का दिल काँप जाता है। और तो और पूरा मार्गन प्लैनेट जैसे काँप जाता है।

जोर्डन तो आकाश के इस रूप को आँखें फाड़े देख रहा था। उसका तो दिमाग इस विशालकाय और खतरनाक ड्रैगन को देखकर ही दहल चुका था। और अब शायद वो उस वक्त के बारे में सोच रहा था, जब उसे वीर लोगों से पंगा लेने का खयाल भी आया था। जिसका दोस्त ऐसा है तो खुद वीर कितना ताकतवर होगा? वो ये जोड़ घटाना भी नहीं कर पा रहा था।

वहीं आसमान में आकाश के ड्रैगन रूप के सामने जोर्डन के गलाम जीव तो जैसे बौने छोटे कीड़े मकोड़े जैसे थे।

सब तो आकाश की दहाड सनकर ही काँप गए थे। लेकिन जोर्डन के जो खास थे तो वो अब पीछे भी नहीं हट सकते थे। वो सब एक साथ आकाश पर हमला करने का सोच ही रहे थे की आकाश आगे बढ़ता है और उनमें से एक को अपने पंजे में पकड़ लेता है। और अपने पंजे में पकड़पर उस जीव को कीड़े की तरह मसल डालता है।
 
ये सीन देखकर उन जीवों का लीडर सोच में पड़ जाता है। फिर वो सबको कुछ बोलता है और फिर देखते ही देखते सारे जीव एक-एक करके काले धुर्वे में बदल जाते हैं और एक-एक करके सब अपने लीडर के शरीर में सामने आने लगते हैं। कुछ ही पलों में वहाँ काले धुर्वे का काफी बड़ा बादल सा बन जाता है और फिर जैसे उस

धुर्वे से ही एक जीव एक जान फाड़ आवाज निकालता हुआ सामने आता है।

ये वो लीडर ही था जिसके अंदर उसके सारे साथी समाए थे। अब सबकी शैतानी शक्ति एक साथ हो गई थी और अब वो आकाश के ड्रैगन के रूप के जितना बड़ा भी हो गया था लेकिन फिर भी थोड़ा सा छोटा था। वो जीव अब अपने त्रिशूल से आकाश के ऊपर हमला करता है। जिससे देखकर आकाश आग की जोरदार लपटें निकालता है जिससे वो हथियार रास्ते में ही जलकर रख हो जाता है।

तरंगें सी बन जाती हैं और वो जैसे ही उस शैतानी आकाश फिर से एक जोरदार दहाड़ मारता है जिससे जीव से टकराती हैं तो वो पीछे हो जाता है।

यह देखकर जीव अपने हाथ से आग के गोले ड्रैगन पर फेंकता है। तभी आकाश दोबारा से अपना मुँह खोलता है। और आग उगलने लगता है। उस जीव के आग के गोले ड्रैगन की आग के अंदर ही खतम हो जाते हैं। पर एक जोरदार बिस्फोट भी होता है। जिससे आसपास काफी तबाही सी होने लगती हैं। इधर-उधर आग की जैसे बारिश हो रही थी आसमान से।

वीर आकाश के माइंड में- “आकाश इसे लेकर तुम दूसरे ग्रह पर जाओ, जो निर्जीव हो और कोई जीवन ना हो। यहां तुम दोनों के युद्ध से भारी तबाही हो सकती है, और आम लोगों को भी नुकसान पहुँच सकता है। मैं एक पोर्टल बनता हूँ। तुम इस दानव को लेकर जाओ.."

आकाश- “जी भाई अपने सही कहा। ये दानव कुछ ज्यादा ही ताकतवर है। लेकिन मेरे से ज्यादा नहीं। आप पोर्टल खोलो। मैं इसको अभी लेकर जाता हूँ..."

वीर तुरंत एक पोर्टल खोल देता है जिसे देखकर आकाश अपनी पूरी स्पीड में उड़ता हुआ अपने पंजों से उस जीव को पकड़ लेता है, और पोर्टल के श्रू दूसरे प्लैनेट पर पहुँच जाता है, और वहाँ जाकर उस जीव को वहां की जमीन पर फेंक देता है।

वीर तेज आवाज में- “जार्डन अब मैदान में आ भी जा, क्या वहीं दूर खड़े-खड़े अपनी सेना को मरते हए देखने का इरादा है?"

जोर्डन जोर से चिल्लाता हआ- "वीर मैं तम सबको जलाकर राख कर दंगा। बहत देख लिया तम सबका तमाशा, अब कोई नहीं बचेगा। मैं सर्व शक्तिमान हूँ। मेरे आगे कोई नहीं टिक सकता। सूरज की शक्ति है मेरे अंदर। तुम मेरा बाल भी बांका नहीं कर पाओगे। सब कुछ जलाकर रखकर दूँगा मैं। तुम्हारे साथ-साथ अब ये पूरा मार्गन प्लैनेट भी जलेगा साथ में..."

वीर मुश्कुराते हुए- “वो तो टाइम ही बताएगा की कौन किसे मारता है? आ जा.."

लिया और अलीजा को वहां से दूसरे प्लैनेट में जाने को बोलकर एक पोर्टल बना देता है, जिससे दोनों वहाँ से चली जाती हैं।

उधर जार्डन भी अब मैदान में आ गया था और वो तेजी से भागता हआ वीर की तरफ बढ़ता है, और एक जोरदार लात वीर के सीने पर मारता है लेकिन वीर अपनी जगह से बस थोड़ा सा पीछे होता। जार्डन का हमला जोरदार था लेकिन वीर की शक्ति।

वीर अपने कपड़े झाड़ता हुआ- “क्या जार्डन डार्लिंग, बस इतना ही दम है तेरे अंदर? देख कितनी चोट लगी है मुझे.." और वीर मुश्कुराने लगता है।

जिसे देखकर जार्डन का दिमाग खराब हो जाता है।

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जार्डन- “तू क्या समझता है की आज तू बच जाएगा। आज तुझे तेरा भगवान भी नहीं बचा पाएगा...” इतना बोलकर जोर्डन वीर को पंच मारता है।

पर वीर उसका हाथ बीच में ही रोक देता है। वीर उसके हाथ को जोर से पकड़कर अपने ऊपर माकर दूर फेंक देता है। जैसे कोई बोल पकड़ी हो और उसे उठाकर फेंक दिया। वीर ताजी से उसके पास पहुँचकर उसके पेट पे लात मारता है। जिससे जार्डन जमीन में धंस जाता है।

जोर्डन भी बड़ी फुर्ती से उठता है, और वीर को लात मारता है वीर थोड़ा पीछे हो जाता है।

वीर- बेटा थोड़ा जोर दिखा ऐसे मजा नहीं आ रहा।

जोर्डन को वीर की बातों से गुस्सा आने लगता है। जोर्डन की आँखें लाल हो जाती हैं। उसके बाडी बदलने लगती है। देखते ही देखते जार्डन एक दानव जैसा रूप धारण कर लेता है। उसके दो सींग निकल आते हैं। बाडी पे भी जगह-जगह छोटे-छोटे सींग निकले हुए थे। बाडी बहुत मजबूत थी।

जोर्डन- “अब तू नहीं बचेगा...” बोलकर वीर को एक पंच मारता है। पंच लगते ही वीर दूर जा गिरता है।

वीर- वाह... अब आएगा लड़ने में मजा। अब होगी बाडी गर्म। चल आ जा।

उधर आकाश उस दूसरे प्लैनेट पर लेजाकर जमीन पर पटक देता है। वहां पहले से ही खड़े जस्सी, मोहित, नीलम, निशु यह सीन देखकर चकित हो जाते हैं।

जस्सी- यह तो आकाश है, और वो जीव क्या है?

नीलम- "दोस्तों, हमारा आकाश भी क्या ताकतवर है। कितना विशाल ड्रैगन है?"

मोहित- हाँ चलो, उसकी मदद करते हैं।

तभी आकाश की आवाज गूंजती है- “नहीं दोस्तों, आप बस शो का मजा लो। पहली बार मेरे मालिक ने मुझे काम दिया है। इसे तो मैं आराम से खतम कर दूंगा। यह क्या जाने सच्चाई की ताकत क्या होती है?"

इतना बोलकर आकाश जोर से दहाड़ता है। जिससे वो जीव की बाडी को एक झटका लगता है और वो पीछे जा गिरता है। आकाश आगे बढ़कर अपने दाँत उस जीव के गले में घुसा देता है। वो जीव की चीखें निकलने लगती हैं। जीव अपने हाथ में एक रोशनी का गोला बनाकर आकाश को मारता है। जिससे आकाश पीछे जा गिरता है।

आकाश- “साले मुझे करेंट देता है। अब देख?"

इतना बोलकर आकाश अपनी पूंछ को झटका देता है, और उसकी पूंछ से रोशनी निकलने लगती है। आकाश तेजी से घूमकर उस जीव को अपनी पूंछ से मारता है। पूंछ लगते ही उस जीव की बाडी में करेंट का स्पार्क निकलने लगता है, और वो जमीन पर गिरकर तड़पने लगता है, और जीव का आकार छोटा हो जाता है, पहले जितना।

जस्सी- वाह आकाश... क्या मुँह तोड़ जवाब दिया। भाई खतम कर इसे। वीर आता ही होगा।

जस्सी की बात सुनकर आकाश एक रोशनी में बदल जाता है, और उस जीव के अंदर समा जाता है।

आकाश अ र- "आअहह... बदबू। साले क्या खाते हो?" इतना बोलकर आकाश अंदर अपना ड्रैगन रूप ले लेता है और हल्के-हल्के बड़ा होने लगता है।

बाहर उस जीव की आँखें बड़ी हो जाती हैं, और देखते ही देखते वो तड़पने लगता है। उसकी चीखें पूरे प्लैनेट में गूंजने लगती हैं। तभी एक रोशनी फैलती है, और उस जीव के चिथड़े उड़ जाते हैं। और आकाश अपने पंख फैलाकर दहाड़ मारता है, जिससे वहां की एक-एक चीज हिल जाती है।

आकाश- “लो जी यह खतम और कोई है क्या?" इतना बोलकर आकाश इंसानी रूप में आ जाता है।

यह सीन जूलिया और अलीजा भी देख रही थीं। सभी भागकर आकाश के पास आते हैं, और उसे गले लगाकर बधाईयां देते है उसकी पहली जीत के लिए।

उधर वीर और जार्डन आपस में भीड़ जाते हैं। जार्डन एक बार फिर एक पंच वीर को मारता है। पर वीर एक दो कदम पीछे हट जाता है। फिर जार्डन एक बार फिर वीर को पंच मारने वाला होता है, तो वीर नीचे बैठकर एक हाथ पीछे लगाकर जार्डन के पेट में एक किक मारता है।
 
किक पड़ते ही जार्डन काफी दूर जाकर गिरता है। पर वीर ने जार्डन को दूसरी ओर किक मारी थी। दूसरी ओर यानी की मैदान वाली साइड। जार्डन फुर्ती से खड़ा हुआ, और उसने अपनी आँखें बंद की। उसके बाडी से 3-4 सींगें निकलकर वीर की ओर जाने लगीं।

वीर ने भी तीन-चार एनर्जी बाल उन सींगों की ओर फेंक दी, तो वो सींगें रास्ते में नष्ट हो गईं। फिर वीर ने जादू से एक ब्लैक-होल बना दिया जार्डन के पीछे, और पूरी फुर्ती से उसकी ओर दौड़ लगा दी, और जार्डन को पकड़कर उस ब्लैक-होल में कूद गया।

कुछ ही देर में दोनों आकाश और बाकी की पार्टी के पास दूसरे प्लैनेट पे जा गिरे। गिरते वक्त वीर ने जार्डन की गर्दन पकड़ी हुई थी, और उसके सीने पे बैठा हुआ था, और जार्डन उसके नीचे धरती पे पड़ा था। उस जगह पर एक गड्ढा हो गया था। एक बार तो पूरा प्लैनेट हिल गया।

जस्सी और पार्टी भी अपनी जगह से हिल गये।

जार्डन ने नीचे लेटे हुए ही अपने घुटने का वार वीर की पीठ पे किया। जिससे वीर लुढ़क गया। फिर वीर और जार्डन फुर्ती से खड़े हुए, और दोनों ने दौड़कर एक-एक किक एक दूसरे को लगा दी।

वीर को तो कोई ज्यादा फरक नहीं पड़ा। पर जार्डन काफी दूर गिरा। इस बार जार्डन के गुस्से की इंतेहा हो गई। उसने खड़े होकर अपनी आँखें बंद की। कुछ देर उसके चारों ओर रोशनी का एक घेरा बन गया। कुछ देर बाद वो रोशनी हटी, तो वहाँ जार्डन एक नये रूप में खड़ा था।

लाल रंग का जाईन। उसके गालों और कंधों पे सूरज का निशान। छाती पे एक बड़ा सा सींग। जार्डन वहाँ से गायब होकर एकदम वीर के पीछे आ गया, और उसे पीछे से जकड़ लिया। जिससे उसकी सींग वीर की पीठ में घुस गई।

वीर की एक चीख पूरे वातावरण में गूंज गई। सभी दोस्त उसकी मदद करने के लिए आगे बढ़े। पर वीर ने उनको रोक दिया। कुछ देर के लिए वीर ने आँखें बंद की, और जब खोली तो वो बिल्कुल लाल थी। वीर ने एक पोर्टल खोला।

वीर- तुम सभी लोग इसके प्लैनेट पे जाओ। और अफा में चले जाना। मैं वहीं आता हूँ।

लेकिन कोई अपनी जगह से नहीं हिला।

वीर- मैंने कहा जाओ।

फिर वो सभी चले गये।

अब रह गये तो सिर्फ जार्डन और वीर। वीर ने पूरी ताकत से अपना सिर जार्डन के सिर पे मारा। जिससे जार्डन पीछे हो गया। फिर वीर ने अपना रूप बदलना शुरू कर दिया। और कुछ ही पलों में वो महाजिन्न के रूप में खड़ा था। उसके इस रूप में आने से पूरा प्लैनेट हिलने लगा। क्योंकी वीर ने अपनी पूरी ताकत जागृत कर ली थी। जमीन में दरारें पड़ने लगी थी। जगह-जगह आग की लपटें जमीन से निकलने लगी थीं। यह प्लैनेट इतनी उर्जा संभाल नहीं पा रहा था।

एक बार तो जार्डन भी डर गया। पर उसने फिर लड़ने की तैयारी की। उसके हाथ में एक विजली का हंटर आ गया। और उसने वीर पे हंटर मारा। वीर ने हंटर पकड़ लिया। वीर भी अपने हाथ में त्रिशूल जैसी चीज ले आया, और उसने हंटर खींच लिया। साथ में जार्डन भी उड़कर वीर की ओर आ गया। जब जार्डन पास आया तो वीर के हाथ में उसकी आधी सींग, और सीने में दिल की जगह त्रिशूल घोंप दिया।

जिससे जार्डन एक चीख के साथ संसार को अलविदा कह गया।

फिर वीर ने रूप बदला। फिर से वो इंसानी रूप में आ गया। फिर वीर ने पोर्टल खोला और उस त्रिशूल को लेकर कद गया, और वापिस जार्डन के प्लैनेट पे आ उस त्रिशुल को प्लैनेट के शहर के बीचोबीच गाड़ दिया। जिसपे जोर्डन टंगा हुआ था।

वीर- “दोस्तों बाहर आ जाओ आपका दुश्मन मारा जा चुका है..” कहकर अपने साथियों को भी बुला लेता है। फिर कहता है- “जस्सी, बिस्वा सबको बाहर ले आओ और जो कैदी हैं उन्हें छोड़ दो..."

बिस्वा- जी भाई।

वीर- यहां जितने भी जोर्डन के साथी हैं। चप चाप हथियार फेंक कर सामने आ जाओ, वरना उनका भी यही हाल होगा।

*****

*****
 
धीरे-धीरे सब बाहर आने लगते हैं। थोड़ी ही देर में जोर्डन के सब साथी और सेना हथियार डाल देते हैं, और वीर के आगे सिर झुका के खड़े हो जाते हैं।

जूलिया डैड- कैसे शुक्रिया अदा करूं तुम्हें? बेटा आज तुमने इस प्लैनेट को उस दुष्ट से आजाद करवा दिया है।

वीर- नहीं नहीं शुक्रिया की कोई जरूरत नहीं। अगर ऐसी बात है तो मुझे जूलिया दे दीजिए, मैं उससे शादी करना चाहता हूँ।

वीर की बात सुनकर जहां जूलिया खुशी से झूम उठती है, वहीं उसके मोम डैड भी खुश हो जाते हैं।

जूलिया के डैड- “हाँ हाँ क्यों नहीं? और वैसे भी एक-दो दिन में तुम राजा बनने वाले हो इस प्लैनेट के। इसके तो बनोगे ही। साथ ही हमारे साथी प्लैनेट के भी तम ही राजा बनागे। जो प्लैनेट की शक्ति तम्हारे अंदर है, उसे वही ग्रहण कर सकता है, जो राजा बनने के काबिल हो, जिसमें पहले से ही ताकत हो।

जूलिया की मोम- हाँ बेटा, हम बहुत खुश है अपनी बेटी के लिए। जिसने इतना होनहार लड़का चुना, जो लाखों में एक है।

जस्सी- नहीं नहीं यह आप गलत कह रही हैं। लाखो में नहीं करोड़ो अरबों में बोलिए।

जस्सी की बात पे सब हँस पड़ते हैं।

तभी जोर्डन की बाडी हिलने लगती है, और उसकी बाडी से एक पत्थर निकलता है, और सीधा आकर वीर के जिश्म में प्रवेश कर जाता है। वो पत्थर वीर के जिश्म में जाते ही वीर को जबरदस्त झटका लगता है, और वो वहीं बेहोश हो जाता है।

जस्सी, अलीजा भागकर वीर को पकड़ लेते हैं और उस उठाकर अंदर की तरफ दौड़ते हैं। वीर को बेड पे लेटाया जाता है।

जूलिया के डैड- "बच्चों घबराने की जरूरत नहीं है। यह जो पत्थर इसके अंदर गया है, यह कोई मामूली पत्थर नहीं है। यह एक दिव्य पत्थर है, जो हजारों सालो में एक बार पेड़ पर उगता है। इस दृष्ट ने इसे धोखे से पा लिया था। पर अब इसे इसके असली मालिक का साथ मिल चुका है। वीर की बाडी इतनी शक्ति झेल नहीं पाई इसलिए वीर बेहोश हो गया। बस थोड़ी देर में इन्हें होश आ जाएगा तब तक आप भी आराम कर लो। और वीर को इनके शाही रूम में ले चलो, जो राजा का रूम है..."

फिर वीर को उसके रूम में ले जाया जाता है। यहां आकर सब फ्रेश होकर आराम करने लगते हैं।

शाम को सब फ्रेश होकर वीर के रूम में जाते हैं। यहां वीर को भी होश आ चुका था। उसे भी अपने अंदर अशीम शक्ति का आभास होता है। वो उठकर फ्रेश होता है। तब तक सभी उसके रूम में आ जाते हैं।

जूलिया- अब कैसे हो वीर?

वीर- ठीक हूँ जूलिया।

जस्सी- क्या यार, तूने तो डरा ही दिया था। चल भाई बहुत भूख लगी है।

फिर सब खाने के लिए चले जाते हैं।

जूलिया के डैड- “बेटा कल तुम्हारा राज्याभिषेक होगा। हमारे प्लैनेट से जुड़े कुल 12 प्लैनेट हैं। उन सभी के तुम राजा बनोगे..."

वीर- ठीक है पिताजी- “मोहित, जस्सी, एक काम करो। धरती से सभी को बुला लाओ..."

बिस्वा- मैं जाता हूँ।
 
वीर- हाँ ठीक है जाओ।

फिर सब ऐसे ही घूमने लगते हैं। वीर जहां भी जाता, वहां के लोग अपना सिर झुका के वीर के आगे खड़े हो जाते थे।

वीर- अलीजा मैंने बिस्वा को तुम्हारे मोम डैड को लाने को कहा है। मैं यहां तुमसे भी शादी करूंगा।

अलीजा- सच जान।

वीर- हाँ।

फिर सब ऐसे ही घूमते रहते हैं। रात तक वीर की बाकी परिवार और अलीजा की परिवार भी आ जाती है।

मोम- “मेरा बच्चा...” इतना बोलकर वीर के गले लग जाती है- “कैसा है तू?"

वीर- मैं ठीक हूँ माँ, आप कैसे हो?

मोम- तेरे बिना कैसी हो सकती हैं। फिर वीर सबसे मिलता है। रूही अज्जू और उसकी परिवार भी आई थी। वो सब तो यह देखकर चकित थे।

ऐसे है रात को सब मिलकर डिनर करते हैं, और सो जाते हैं। वीर अपनी मोम, संजू और प्रीत को साथ लेकर रूम में सोने जाता है। जहां इनकी रासलीला चलती है।

अगले दिन सवेरे वीर उठता है तो पास में अपनी मोम, संजू, और प्रीत को सोया पाता है। तीनों नंगी ही सो रही थी। वीर तीनों को किस करके फ्रेश होता है। तब तक बाकी सब भी फ्रेश हो जाते हैं।

आज वीर को राजा घोषित किया जाना था। थोड़ी देर में वीर के रूम में जूलिया उसके डैड और मोम आते हैं।

जूलिया के डैड- वीर बेटा, यह हमारा शाही जोड़ा है जो खास तुम्हारे लिए बनवाया है। इन्हें पहन लीजिये।

वीर- बैंक यू डैड। आप चलिए मैं बस अभी थोड़ी देर में आता हूँ तैयार होकर।

जूलिया की मोम-बेटा हम कहीं नहीं जा रहे। आज हम मियां बीवी तुम्हें तैयार करेंगे। यह यहां का नियम है। पहला राजा ही नये राजा को तैयार करता है।

वीर- "जी ठीक है जैसा आपको ठीक लगे...” कहकर वीर अपने कपड़े उतार देता है।

वीर की बाडी देखकर वहां खड़ी जूलिया की मोम भी आकर्षित हो जाती हैं। फिर दोनों मिलकर वीर को तैयार करते हैं। वीर तैयार होकर बहत संदर लग रहा था। जूलिया की मोम आगे बढ़कर काला टीका वीर को लगाती है।

जूलिया के डैड- "बेटा जी, बस थोड़ी देर में सभी राज्य के लोग यहां आ जाएंगे। फिर आपका राजतिलक होगा। महागुरु आते ही होंगे..."

फिर सब मिल नाश्ता करते हैं। नाश्ते के दौरान फ्रेंडली प्लैनेट से भी पुराने राजा रानियां आ चुकी थी। वीर को

दरबार में लाया जाता है।

जूलिया के डैड- “वीर बेटा, यह हैं महागुरु रियो.."

वीर आगे बढ़कर इनका आशीर्वाद लेता है।

महागुरू- बेटा, मुझे पहले है पता था की तुम आओगे। बस इतना कहूंगा की हमेशा सच्चाई के रास्ते ही चलना।

फिर महागुरू वीर का राजतिलक करते हैं। और सब पुराने राजा की अनुमति और सहमति से वीर को राजा घोषित किया जाता है। सब राजा रानी अपने-अपने हाथ आगे करते हैं। उनके हाथ से रोशनी निकलती है जो सीधा वीर पर पड़ती है। जिससे से वीर की बाडी में टैटू जैसे कुछ निशान बन जाते हैं। सब वीर के आगे सिर झुका के खड़े हो जाते हैं।

वीर- मैं क्या कहूं, कुछ समझ में नहीं आ रहा। मैं पहले ही एक जिन्न-लोक का राजा हूँ। और अब तो अनेक प्लैनेट का राजा बना दिया गया हूँ। मैं बस इतना कहंगा की मेरे रहते आप किसी को भी तकलीफ नहीं होगी। मैं हमेशा आप सबके साथ रहूंगा।

जूलिया के डैड- “चलिए महाराज...”

फिर वीर वहां से बाहर की तरफ निकल पड़ता है। वीर पूरे प्लैनेट का दौरा करता है। सबसे मिलता है। जिसे जो

परेशानी थी वो हल करता है।

*****

*****
 
वीर- डैड मैं क्या कहता हूँ। कल ही मैं अलीजा और जूलिया से शादी कर लेता हूँ और हम सबको जल्द से जल्द धरती-लोक पहुँचना है। एक बड़ा खतरा जिन्न-लोक पर आने वाला है।

डैड- ठीक है पत्र। चलो मैं शादी की तैयारी करता हूँ।

फिर सब शादी की तैयारी करते हैं। सब भागम भाग में लगे हुए थे। आकाश भी पहली बार ऐसा कछ देख रहा था और उसे यह सब देखकर बड़ा मजा आ रहा था। ड्रैगन जो ठहरा। अगले दिन वीर अलीजा और जूलिया के साथ शादी करता है। सब वापिस जाने की तैयारी करते हैं।

वीर अपनी जिन्न-लोक की लाई हुई सेना को वहीं छोड़ देता है सबकी रक्षा के लिए। कुल 13 प्लैनेट थे इसे साथ मिलाकर। सब प्लैनेट में अपने सैनिक छोड़ देता है। साथ में लाए हुए भंडिया और वैम्पायर्स को भी। जो पहले

राजा थे उन्हें ही सब संभालने को कहता है।

वीर- अच्छा पिताजी अब हमें जाने की आज्ञा दें।

जूलिया के डैड- महाराज आपको भेजने का दिल तो नहीं करता, पर आपके और भी बहुत कर्तव्य हैं जिन्हें आपको पूरा करना है। बस हमें आकर मिलते रहना।

वीर- ठीक है पिताजी।

फिर सब एक दूसरे से मिलते हैं। सब वहां से कुछ ना कुछ शापिंग करते हैं, और धरती-लोक रवाना होते हैं।

सब जिन्न-लोक चले जाते हैं।

गुरुजी- आओ बच्चों, वीर समय बहुत नजदीक है किसी भी वक्त हमला हो सकता है। सूत्रों से पता चला है की तांत्रिक हमले के लिए पाताल लोक से निकल चुका है। दो दिन में यहां होगा।

वीर- कोई बात नहीं गुरुजी हम सब तैयार हैं। उसे जिन्न-लोक में पैर भी नहीं रखने दूंगा।

फिर सब ऐसे ही कुछ देर वहां रहते हैं। वहीं अज्जू के मोम डैड को भी जिन्न बना दिया जाता है।

वीर-अंकलजी आज आपको नई जिंदगी मिली है। इसका गलत इश्तेमाल मत करना। मैं आपको पी.एम. बने देखना चाहता हूँ। लोगों की दिल खोलकर सेवा करो। उन्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। जिस दिन मुझे लगा आप गलत रास्ते पे हो, वो दिन आपका आखिरी दिन होगा।

होम मिनिस्टर- नहीं महाराज ऐसा कुछ नहीं होगा। आज जो जीवन मुझे मिला, वो सिर्फ आपकी वजह से। लोगों

की सेवा करने में अपनी जी जान लगा दूँगा।

फिर सब वहां से वापिस धरती-लोक आ जाते हैं। रात हो गई थी। संजू और प्रीत मिलकर वीर का रूम सजा देते हैं। अलीजा और जूलिया को साथ लेकर दोनों तैयार करती हैं, और बेड पर बिठा देती हैं। किंग साइज बेड तैयार किया गया था।

संजू- जी सुनिए... जाइए आपकी परियां आपका इंतजार कर रही हैं।

वीर भी फ्रेश होकर रूम में चला जाता है। दोनों लड़कियां गूंघट ओढ़े बैठी थी। रूम में बड़ी अच्छी खुश्बू आ रही थी। वीर चलकर बेड के पास जाता है। बारी-बारी दोनों के चूँघट उठाता है। क्या बताऊँ दोनों जान निकाल रही थी। जूलिया लँहगे में धांसू लग रही थी।

दोनों दो ग्लास दूध का वीर को देती हैं। वीर दोनों ग्लास को एक कर देता है, और उसमें से आधा पी जाता है।

और कहता है- “बाकी तुम दोनों के लिए...” दोनों बाकी का दूध पी लेती हैं।

वीर- आज मैं तुम्हें वो तोहफा दूंगा। जिससे तुम बहुत खुश होगी, और सारी जिंदगी मुझे ऐसे ही प्यार करती रहोगी।

वीर हाथ से एक रोशनी निकलता है, जो दोनों में समा जाती है।

वीर- “यह एक ऐसी ताकत दी है तुम्हें, जिससे तुम दोनों कभी भी बूढी नहीं होगी, और तुम दोनों एक दूसरे में समा सकती हो। एक रूप ले सकती हो..."

दोनों बहुत खुश होती हैं।

वीर आगे बढ़कर जूलिया के करीब होता है। जूलिया का दिल तेजी से धड़कने लगता है। उसकी बाड़ी में हल्की हल्की कंपकंपी छूट जाती है। तीनों सारी रात अपने प्यार में लगे रहते हैं।

उधर तांत्रिक जिन्न-लोक की तरफ बढ़ रहा था- “हाहाहाहा... वीर आ रहा हूँ मैं। कोई नहीं बचेगा मुझसे। अब मेरे पास विशाल सेना है..."

इधर अगले दिन सवेरे सब डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। नाश्ता कर रहे थे।

वीर- मोम मिनिस्टर साहब आप आज से हमारे साथ ही रहेंगे। अपना जो भी जरूरी सामान है ले आओ। कपड़े वहीं रहने देना। यहां आपको आपके रूम में सब मिल जाएगा।

होम मिनिस्टर- जी महराज, जैसा आपको ठीक लगे।

वीर- अंकल, महाराज मैं जिन्न-लोक या मार्गन में हूँ, यहां नहीं। यहां मुझे आप वीर या बेटा ही बुला सकते हैं।

अज्जू- भाई हम दोनों को ट्रेनिंग की जरूरत है।
 
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