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परिधि—इस जगह एक बड़ी विचित्र गोल मटोल पहाड़ी है जिसे लोग लुटिया पहाड़ी के नाम से जानते हैं….और जिसके पास मे एक मंदिर बना हुआ है.
साधु—तुमने सही पहचाना….मगर क्या तुम्हे ये भी मालूम है कि यह खंडहर राज महल के अंदर एक बहुत ही सदियो पुराना तिलिस्म भी है
जिसके अंदर अकूत खजाना रखा हुआ है साथ ही और भी बहुत कुछ है वहाँ पर.
राज—किंतु मुझे तो वहाँ कोई तिलिस्म नज़र नही आया….?
साधु—क्यों कि तुम उसके अंदर बने तहख़ाने मे नही गये…और वैसे भी वहाँ उस तहख़ाने तक पहुचने का रास्ता यहाँ से है वहाँ से नही है….
राज—ये तो मैं जानता हूँ कि वहाँ कोई बहुत बड़ा खजाना है लेकिन तिलिस्म के होने के विषय मे मुझे कोई जानकारी नही है.
साधु—ठीक है..मैं तुम्हे ये भी बता दूं कि वो तिलिस्म केवल तुम्हारे हाथ से ही टूट सकता है और किसी से नही…ये लो उस तहख़ाने के खजाने की चाबी….मगर इसमे जोखिम बहुत है….किसी की जान भी जा सकती है….अगर कामयाब नही हुए तो यहाँ से कभी नही निकल सकते और यही भटकते हुए सब के सब मारे जाओगे.
उन्होने अपने झोले मे हाथ डालकर एक चमकती हुई चाबी निकाल कर मेरे सामने रख दी….जो एक सुनहरे डिब्बे मे रखी हुई थी…
साधु—कितने ही जमाने से ये चीज़ मेरे पास एक पवित्र धरोहर के रूप मे रखी हुई थी मगर आज इसे उन हाथो मे जाने सा समय आ गया जिसके लिए वास्तव मे ये बनी थी….वहाँ तुम्हे एक किताब भी मिलेगी जिसके अंदर तुम्हारी मंज़िल है…पर ध्यान रहे ये बेहद ख़तरनाक
तिलिस्म है….सदियो से बहुत लोगो ने कोशिश की इसको तोड़ने की मगर मिली उन्हे तो सिर्फ़ मौत…सिर्फ़ मौत….इसको लेकर तुम शीघ्र ही रवाना हो जाओ.
मैं अभी साधु बाबा से कुछ कहने ही वाला था कि अचानक उस मकान के पीछे की तरफ से किसी औरत के ज़ोर से चीखने की आवाज़ आई…जिसे सुनते ही साधु महाराज घबरा गये और अपनी जगह से तुरंत उठा कर खड़े हो गये.
साधु—क्या हुआ मेरी बेटी को….? कंगना चिल्लाई क्यो…? तुम लोग ज़रा ठहरो, मैं अभी आया.
साधु बाबा वहाँ से उठ कर उस कमरे मे घुस गये जहाँ से वो लड़की उनका झोला निकल कर लाई थी….कुछ देर तक हम चुप चाप बैठे रहे.
नानी—अब हमे क्या करना चाहिए….?
राज—मैने भी सुना है कि वाहा खजाना गढ़ा हुआ है लेकिन बिना सोचे समझे वहाँ जाना बेवक़ूफी हो सकती है.
पायल—लेकिन वो पागल साधु तो कहता है कि.......
पायल दीदी की बात पूरी होती कि अचानक उसी कमरे के अंदर से किसी भयंकर जानवर के चिंघाड़ने की बेहद खौफनाक जोरदार आवाज़ आने लगी....
इसके साथ ही उस कमरे से एक बहुत बड़ा भेड़िया उस कमरे से बाहर निकल कर चिंघाड़ मारता हुआ हमारी तरफ बढ़ने लगा.
सभी उसको देख कर बुरी तरह से डर गये और मेरे पीछे चिपक गये...मैं भी किसी भी ख़तरे से निपटने के लिए तैयार हो कर खड़ा हो गया.
पायल—राज..ये तो वही भेड़िया है जिसे तुमने ज़ख्मी किया था.
मैं अपनी मुट्ठी को कस के खड़ा हो गया....वो ख़ूँख़ार जानवर अपनी लाल लाल आँखो से कुछ देर तक हमे घूरता रहा फिर झपटते हुए पीछे
की तरफ जिधर वो लड़की गयी थी उधर ही तेज़ी से भागा.
हम सभी हैरान थे कि तभी एक बार फिर से उस लड़की के चीखने की आवाज़ सुनाई देने लगी....इसके साथ ही उसके ‘’
बचाओ…….बचऊूओ’’ की आवाज़ भी सुनाई पड़ी.
‘’राज....जल्दी आओ..मेरी बेटी को इस दुष्ट के जालिम पंजो से बचाओ’’ किसी के भारी गले से निकलती हुई आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी.
राज—उस लड़की पर ज़रूर कोई मुसीबत आई है....उसको पहले बचाना होगा मुझे.
पायल—क्या तुमने ध्यान नही दिया कि ये आवाज़ उस कमरे से आती हुई लग रही है...पहले हमे उस कमरे मे देख लेना चाहिए.
राज—ठीक है...जल्दी चलो.
हम सभी उस कमरे की तरफ बढ़ चले…वैसे भी मैं यहाँ किसी को अकेले नही छोड़ सकता था….लेकिन कमरे तक पहुचते ही हमे ठिठक कर रुक जाना पड़ा.
कमरे के अंदर एक ऐसी डरावनी चीज़ दिखाई पड़ी कि सब के कदम जहाँ के तहाँ रुक गये….सभी के गले से आश्चर्य, डर, ख़ौफ़ और घबराहट की आवाज़ निकल पड़ी.
मैने ध्यान से देखा कि वो कमरा जो काफ़ी लंबा चौड़ा था उसकी सामने की दीवार मे कयि खिड़किया बनी हुई हैं और उन्ही मे से एक
खिड़की के आगे कोई खड़ा उस खिड़की से बाहर की तरफ देख रहा है.
पर वो जो उस खिड़की के सामने खड़ा था कोई आदमी, औरत या लड़का नही था बल्कि हड्डियो का एक भयानक ढाँचा था ऐसा मालूम पड़ता
था जैसे कि कोई नर कंकाल उस जगह खड़ा हो जिसके बदन मे लहू, माँस या चॅम्डी कुछ भी ना होकर केवल हड्डिया ही हड्डिया हो.
इस भयानक दृश्य को देख कर सभी बुरी तरह से डर गये और घबराने लगे….मगर हमारी आहट पाते ही उस लाश ने या जो कुछ भी वह हो, घूम कर हमारी तरफ देखने लगा.
बिना चॅम्डी और बिना माँस का उसका खौफनाक चेहरा जिसके खुले हुए मूह मे केवल दांतो की दो लकीरे ही भयानक हसी हँसती हुई दिखाई पड़ रही थी.
क्षण भर के लिए वो हमारे सामने हुआ और साथ ही उस बिना जीभ के मूह के अंदर से एक भयानक डरावनी आवाज़ निकली…इसके बाद आग की भयानक लपट दिखाई देने लगी.
सबने डर के मारे अपनी आँखे बंद कर के मुझ से लिपट गयी….उनका जिस्म थरथरा रहा था….मैने भी उसका भयानक चेहरा देख कर अपना मूह घुमा लिया.
लेकिन जब कुछ देर तक कोई प्रति क्रिया नही हुई तो सब ने अपने आँखे खोल कर देखा तो वहाँ कोई नही था……वह भूत, प्रेत, पिशाच या फिर जो कोई भी हो अचानक गायब हो चुका था.
पायल—राज, तुमने देखा….? क्या था ये….?
नानी—ज़रूर कोई भूत था….?
सभी अपनी डरी सहमी निगाहे कमरे के चारो तरफ डालने लगी कि कहीं वो छुपा तो नही है….? मगर अब उसका वहाँ कोई नामो निशान तक नही था और कमरा पूरी तरह से खाली नज़र आ रहा था…जिससे उन्हे कुछ हिम्मत हुई.
नेहा—अंदर चल कर देखो कि उस खिड़की के दूसरी तरफ क्या है…..?
इस इरादे को उस चीख ने पक्का कर दिया जो फिर से उस खिड़की के दूसरी तरफ से आ रही थी….हम सभी जल्दी से कमरे के अंदर घुस कर खिड़की के ज़रिए बाहर की तरफ देखने लगे.
लेकिन खिड़की से जो कुछ सबने देखा वो सब के दिलो मे डर और घबराहट को और भी गहरा कर दिया….एक बहुत ही भयानक शकल का आदमी अपनी बाहों मे ज़बरदस्ती उस लड़की (कंगना) को दबोचे हुए था.
और एक खौफनाक भेड़िया उसके उपर अपने पंजो से ज़ोर ज़ोर से वार किए जा रहा था किंतु जैसे उस पर उसके पंजो के वार का कोई असर ही नही हो रहा था.
वो भयानक आदमी लगातार उस भेड़िया को अपने से दूर धक्का देकर गिरा देता था…कंगना चिल्लाए जा रही थी.. पर अचरज मुझे इस बात
का हो रहा था कि उस आदमी के एक हाथ मे तलवार थी लेकिन वो उस तलवार का वार उस भेड़िया के उपर नही कर रहा था.
नानी—चल कर उस बेचारी लड़की को बचाना चाहिए.
राज—हुउऊ…लेकिन यहाँ से उधर जाने का कोई रास्ता नही है…हमे बाहर से घूम कर ही जाना पड़ेगा….जहाँ से वो भेड़िया और वो लड़की गयी थी पीछे तरफ.
पायल—ठीक है चलो.
हम सभी बाहर जाने के लिए घूमे ही थे कि एक बार फिर से चौंक गये…..अब वहाँ कमरे के अंदर बाहर निकलने का कोई भी दरवाजा नही
था……जिस दरवाजे से हम सब अंदर आए थे वो अब गायब हो चुका था उसकी जगह वहाँ दीवार आ गयी थी.
नेहा—अरे…ये दरवाजा कहाँ गया….? अभी तो हम उस दरवाजे से अंदर आए थे…पल भर मे गायब हो गया…?
नानी—अब हम बाहर कैसे निकलेंगे बिना दरवाजे के……?
राज—कोई बात नही…मैं खिड़की को तोड़ने की कोई जुगाड़ लगाता हूँ.
परिधि—राज्ज्जज्ज….वो खिड़की…….
हमने घूम कर देखा तो एक बार फिर से झटका खा गये….. वो खिड़की भी गायब हो चुकी थी…..अब चारो तरफ सिर्फ़ दीवार थी….अंदर हवा तक आने के लिए कोई सुराख भी नही बचा था.
पायल (ज़ोर से)—राज…हमारे साथ धोखा हुआ है.
राज—आप सही कह रही हो दीदी….हमे धोखे से फसाया गया है.
अभी हम इसी उधेड़ बुन मे परेशान थे कि अब बाहर कैसे निकले कि तभी हमारे कानो मे किसी की भयानक हँसी की आवाज़ गूंजने लगी.
"हाहहहहहहाहा……..फस गये सब के सब….हाहहहाहा’’
साधु—तुमने सही पहचाना….मगर क्या तुम्हे ये भी मालूम है कि यह खंडहर राज महल के अंदर एक बहुत ही सदियो पुराना तिलिस्म भी है
जिसके अंदर अकूत खजाना रखा हुआ है साथ ही और भी बहुत कुछ है वहाँ पर.
राज—किंतु मुझे तो वहाँ कोई तिलिस्म नज़र नही आया….?
साधु—क्यों कि तुम उसके अंदर बने तहख़ाने मे नही गये…और वैसे भी वहाँ उस तहख़ाने तक पहुचने का रास्ता यहाँ से है वहाँ से नही है….
राज—ये तो मैं जानता हूँ कि वहाँ कोई बहुत बड़ा खजाना है लेकिन तिलिस्म के होने के विषय मे मुझे कोई जानकारी नही है.
साधु—ठीक है..मैं तुम्हे ये भी बता दूं कि वो तिलिस्म केवल तुम्हारे हाथ से ही टूट सकता है और किसी से नही…ये लो उस तहख़ाने के खजाने की चाबी….मगर इसमे जोखिम बहुत है….किसी की जान भी जा सकती है….अगर कामयाब नही हुए तो यहाँ से कभी नही निकल सकते और यही भटकते हुए सब के सब मारे जाओगे.
उन्होने अपने झोले मे हाथ डालकर एक चमकती हुई चाबी निकाल कर मेरे सामने रख दी….जो एक सुनहरे डिब्बे मे रखी हुई थी…
साधु—कितने ही जमाने से ये चीज़ मेरे पास एक पवित्र धरोहर के रूप मे रखी हुई थी मगर आज इसे उन हाथो मे जाने सा समय आ गया जिसके लिए वास्तव मे ये बनी थी….वहाँ तुम्हे एक किताब भी मिलेगी जिसके अंदर तुम्हारी मंज़िल है…पर ध्यान रहे ये बेहद ख़तरनाक
तिलिस्म है….सदियो से बहुत लोगो ने कोशिश की इसको तोड़ने की मगर मिली उन्हे तो सिर्फ़ मौत…सिर्फ़ मौत….इसको लेकर तुम शीघ्र ही रवाना हो जाओ.
मैं अभी साधु बाबा से कुछ कहने ही वाला था कि अचानक उस मकान के पीछे की तरफ से किसी औरत के ज़ोर से चीखने की आवाज़ आई…जिसे सुनते ही साधु महाराज घबरा गये और अपनी जगह से तुरंत उठा कर खड़े हो गये.
साधु—क्या हुआ मेरी बेटी को….? कंगना चिल्लाई क्यो…? तुम लोग ज़रा ठहरो, मैं अभी आया.
साधु बाबा वहाँ से उठ कर उस कमरे मे घुस गये जहाँ से वो लड़की उनका झोला निकल कर लाई थी….कुछ देर तक हम चुप चाप बैठे रहे.
नानी—अब हमे क्या करना चाहिए….?
राज—मैने भी सुना है कि वाहा खजाना गढ़ा हुआ है लेकिन बिना सोचे समझे वहाँ जाना बेवक़ूफी हो सकती है.
पायल—लेकिन वो पागल साधु तो कहता है कि.......
पायल दीदी की बात पूरी होती कि अचानक उसी कमरे के अंदर से किसी भयंकर जानवर के चिंघाड़ने की बेहद खौफनाक जोरदार आवाज़ आने लगी....
इसके साथ ही उस कमरे से एक बहुत बड़ा भेड़िया उस कमरे से बाहर निकल कर चिंघाड़ मारता हुआ हमारी तरफ बढ़ने लगा.
सभी उसको देख कर बुरी तरह से डर गये और मेरे पीछे चिपक गये...मैं भी किसी भी ख़तरे से निपटने के लिए तैयार हो कर खड़ा हो गया.
पायल—राज..ये तो वही भेड़िया है जिसे तुमने ज़ख्मी किया था.
मैं अपनी मुट्ठी को कस के खड़ा हो गया....वो ख़ूँख़ार जानवर अपनी लाल लाल आँखो से कुछ देर तक हमे घूरता रहा फिर झपटते हुए पीछे
की तरफ जिधर वो लड़की गयी थी उधर ही तेज़ी से भागा.
हम सभी हैरान थे कि तभी एक बार फिर से उस लड़की के चीखने की आवाज़ सुनाई देने लगी....इसके साथ ही उसके ‘’
बचाओ…….बचऊूओ’’ की आवाज़ भी सुनाई पड़ी.
‘’राज....जल्दी आओ..मेरी बेटी को इस दुष्ट के जालिम पंजो से बचाओ’’ किसी के भारी गले से निकलती हुई आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी.
राज—उस लड़की पर ज़रूर कोई मुसीबत आई है....उसको पहले बचाना होगा मुझे.
पायल—क्या तुमने ध्यान नही दिया कि ये आवाज़ उस कमरे से आती हुई लग रही है...पहले हमे उस कमरे मे देख लेना चाहिए.
राज—ठीक है...जल्दी चलो.
हम सभी उस कमरे की तरफ बढ़ चले…वैसे भी मैं यहाँ किसी को अकेले नही छोड़ सकता था….लेकिन कमरे तक पहुचते ही हमे ठिठक कर रुक जाना पड़ा.
कमरे के अंदर एक ऐसी डरावनी चीज़ दिखाई पड़ी कि सब के कदम जहाँ के तहाँ रुक गये….सभी के गले से आश्चर्य, डर, ख़ौफ़ और घबराहट की आवाज़ निकल पड़ी.
मैने ध्यान से देखा कि वो कमरा जो काफ़ी लंबा चौड़ा था उसकी सामने की दीवार मे कयि खिड़किया बनी हुई हैं और उन्ही मे से एक
खिड़की के आगे कोई खड़ा उस खिड़की से बाहर की तरफ देख रहा है.
पर वो जो उस खिड़की के सामने खड़ा था कोई आदमी, औरत या लड़का नही था बल्कि हड्डियो का एक भयानक ढाँचा था ऐसा मालूम पड़ता
था जैसे कि कोई नर कंकाल उस जगह खड़ा हो जिसके बदन मे लहू, माँस या चॅम्डी कुछ भी ना होकर केवल हड्डिया ही हड्डिया हो.
इस भयानक दृश्य को देख कर सभी बुरी तरह से डर गये और घबराने लगे….मगर हमारी आहट पाते ही उस लाश ने या जो कुछ भी वह हो, घूम कर हमारी तरफ देखने लगा.
बिना चॅम्डी और बिना माँस का उसका खौफनाक चेहरा जिसके खुले हुए मूह मे केवल दांतो की दो लकीरे ही भयानक हसी हँसती हुई दिखाई पड़ रही थी.
क्षण भर के लिए वो हमारे सामने हुआ और साथ ही उस बिना जीभ के मूह के अंदर से एक भयानक डरावनी आवाज़ निकली…इसके बाद आग की भयानक लपट दिखाई देने लगी.
सबने डर के मारे अपनी आँखे बंद कर के मुझ से लिपट गयी….उनका जिस्म थरथरा रहा था….मैने भी उसका भयानक चेहरा देख कर अपना मूह घुमा लिया.
लेकिन जब कुछ देर तक कोई प्रति क्रिया नही हुई तो सब ने अपने आँखे खोल कर देखा तो वहाँ कोई नही था……वह भूत, प्रेत, पिशाच या फिर जो कोई भी हो अचानक गायब हो चुका था.
पायल—राज, तुमने देखा….? क्या था ये….?
नानी—ज़रूर कोई भूत था….?
सभी अपनी डरी सहमी निगाहे कमरे के चारो तरफ डालने लगी कि कहीं वो छुपा तो नही है….? मगर अब उसका वहाँ कोई नामो निशान तक नही था और कमरा पूरी तरह से खाली नज़र आ रहा था…जिससे उन्हे कुछ हिम्मत हुई.
नेहा—अंदर चल कर देखो कि उस खिड़की के दूसरी तरफ क्या है…..?
इस इरादे को उस चीख ने पक्का कर दिया जो फिर से उस खिड़की के दूसरी तरफ से आ रही थी….हम सभी जल्दी से कमरे के अंदर घुस कर खिड़की के ज़रिए बाहर की तरफ देखने लगे.
लेकिन खिड़की से जो कुछ सबने देखा वो सब के दिलो मे डर और घबराहट को और भी गहरा कर दिया….एक बहुत ही भयानक शकल का आदमी अपनी बाहों मे ज़बरदस्ती उस लड़की (कंगना) को दबोचे हुए था.
और एक खौफनाक भेड़िया उसके उपर अपने पंजो से ज़ोर ज़ोर से वार किए जा रहा था किंतु जैसे उस पर उसके पंजो के वार का कोई असर ही नही हो रहा था.
वो भयानक आदमी लगातार उस भेड़िया को अपने से दूर धक्का देकर गिरा देता था…कंगना चिल्लाए जा रही थी.. पर अचरज मुझे इस बात
का हो रहा था कि उस आदमी के एक हाथ मे तलवार थी लेकिन वो उस तलवार का वार उस भेड़िया के उपर नही कर रहा था.
नानी—चल कर उस बेचारी लड़की को बचाना चाहिए.
राज—हुउऊ…लेकिन यहाँ से उधर जाने का कोई रास्ता नही है…हमे बाहर से घूम कर ही जाना पड़ेगा….जहाँ से वो भेड़िया और वो लड़की गयी थी पीछे तरफ.
पायल—ठीक है चलो.
हम सभी बाहर जाने के लिए घूमे ही थे कि एक बार फिर से चौंक गये…..अब वहाँ कमरे के अंदर बाहर निकलने का कोई भी दरवाजा नही
था……जिस दरवाजे से हम सब अंदर आए थे वो अब गायब हो चुका था उसकी जगह वहाँ दीवार आ गयी थी.
नेहा—अरे…ये दरवाजा कहाँ गया….? अभी तो हम उस दरवाजे से अंदर आए थे…पल भर मे गायब हो गया…?
नानी—अब हम बाहर कैसे निकलेंगे बिना दरवाजे के……?
राज—कोई बात नही…मैं खिड़की को तोड़ने की कोई जुगाड़ लगाता हूँ.
परिधि—राज्ज्जज्ज….वो खिड़की…….
हमने घूम कर देखा तो एक बार फिर से झटका खा गये….. वो खिड़की भी गायब हो चुकी थी…..अब चारो तरफ सिर्फ़ दीवार थी….अंदर हवा तक आने के लिए कोई सुराख भी नही बचा था.
पायल (ज़ोर से)—राज…हमारे साथ धोखा हुआ है.
राज—आप सही कह रही हो दीदी….हमे धोखे से फसाया गया है.
अभी हम इसी उधेड़ बुन मे परेशान थे कि अब बाहर कैसे निकले कि तभी हमारे कानो मे किसी की भयानक हँसी की आवाज़ गूंजने लगी.
"हाहहहहहहाहा……..फस गये सब के सब….हाहहहाहा’’