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Faridi aur Leonard ibne safi

जैक्सन ने लोगों को इशारा किया। दो-तीन लोग फ़रीदी पर टूट पड़े और थोड़ी देर बाद उसे बेबस कर दिया और फिर उसे एक कुर्सी में बाँध दिया गया।

फ़रीदी को जितनी भी ज़बानें आती थीं, वह उनमें एक के बाद एक बेतहाशा गालियाँ बक रहा था।

‘‘कुछ यह भी बता सकते हो कि उन्होंने नाश्ते में क्या खाया था।’’ जैक्सन ने कुछ सोचते हुए हमीद से कहा।

‘‘मैंने इसके बारे में नौकरों से पूछा था।’’ हमीद बोला। ‘‘टोस्ट, अण्डे, जलेबी, मक्खन और कुछ सूखे मेवे.... और हाँ बंगाली रसगुल्ले जो चीफ़ इन्स्पेक्टर साहब ने भिजवाये थे।’’

‘‘मैंने....!’’ चीफ़ इन्स्पेक्टर ने हैरत से कहा। ‘‘मैंने तो नहीं भिजवाये थे।’’

‘‘जी....!’’ हमीद ने चौंक कर कहा।

‘‘हाँ भई, मैंने नहीं भिजवाये थे।’’

‘‘अच्छा, तो यह बात है.... यह सब उन्हीं रसगुल्लों की करामात है। यह ज़रूर उनके किसी दुश्मन की हरकत है।’’ हमीद ने कुछ सोचते हुए कहा।

‘‘क्या उन रसगुल्लों में से कुछ बचा भी है।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘मेरे ख़याल से तो नहीं।’’

‘‘इन्हें फ़ौरन हस्पताल ले चलना चाहिए।’’ जैक्सन ने कहा।

इस दौरान फ़रीदी बेहोश हो चुका था।

लोगों ने उसे कुर्सी से खोला और स्ट्रेचर पर डाल कर हस्पताल की तरफ़ ले चले। चूँकि हस्पताल क़रीब ही था, इसलिए उन लोगों ने पैदल ही जाना मुनासिब समझा। अभी थोड़ी ही दूर गये होंगे कि फ़रीदी स्टे्रचर से कूद कर भागा.... लोगों ने उसका पीछा करना चाहा, लेकिन उसने उन्हें पेच-दर-पेच गलियों में ऐसे-ऐसे चक्कर दिये कि उन्हें थक-हार कर लौट ही जाना पड़ा।

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फ़रीदी दिन भर इधर-उधर छिपता फिरा। अँधेरा होते ही वह उसी शराबख़ाने में फिर जा पहुँचा। उसने बहुत कोशिश की कि किसी तरह प्रिंस अदनान से ग़ज़ाला का पता मालूम हो जाय, लेकिन वह इसमें कामयाब न हो सका। थक-हार कर उसने अपने कमरे का रुख़ किया। वहाँ उसने प्रिंस अदनान का भेस बदला और उसके मकान की तरफ़ रवाना हो गया। आज उसने शराबियों की नक़ल नहीं की। फ़ाटक ही पर उसे वही दोनों आदमी दिखायी दिये, जो उसे पिछली रात उठा कर ले गये थे।

‘‘सरदार....!’’ उनमें से एक आगे बढ़ कर बोला। ‘‘उस लड़की ने तो नाक में दम कर रखा है। सुबह से कुछ नहीं खाया और शाम को दीवार से अपना सिर टकरा कर ज़ख़्मी हो गयी।’’

लड़की का ज़िक्र सुन कर फ़रीदी के कान खड़े हो गये।

‘‘अच्छा चलो....! चल कर देखता हूँ।’’ फ़रीदी ने घर के अन्दर दाख़िल होते हुए कहा।

वह थोड़ी दूर चलता रहा फिर अचानक चीख़ मार कर गिर पड़ा। दोनों उसकी तरफ़ लपके।

‘‘क्या हुआ सरदार....!’’

‘‘चलते वक़्त पैर मुड़ गया है।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘ज़रा पैर खींचो.... शायद कोई नस चढ़ गयी है।’’

एक ने उसका पैर पकड़ कर दो-तीन झटके दिये.... फ़रीदी मुश्किल से खड़ा हुआ और लँगड़ा-लँगड़ा कर चलने लगा।

‘‘अरे, आगे चलो.... भई, तुम कब तक मेरे पीछे रेंगते रहोगे।’’ फ़रीदी ने झल्ला कर कहा।

‘‘मेरे ख़याल से तो इस वक़्त आराम कीजिए, सुबह देखा जायेगा।’’ एक ने झल्ला कर कहा।

‘‘फ़ालतू मत बको।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘चलो, चल कर उसे देखें, कहीं वह ख़ुदकुशी न कर बैठे कि बना-बनाया खेल बिगड़ जाये।’’

वे दोनों आगे-आगे चल रहे थे और फ़रीदी उनके पीछे लँगाता जा रहा था।

एक कमरे में पहुँच कर दोनों ने फ़र्श पर बिछे हुए कालीन को हटाया और उस जगह पर जुड़े हुए तख़्ते को उठाने लगे। तख़्ता हटते ही एक तहख़ाने का रास्ता ऩजर आया.... दोनों सीढ़ियों से नीचे उतरने लगे। फ़रीदी भी धीरे-धीरे कराहता हुआ उनका साथ दे रहा था। उतरने के बाद वह एक बहुत बड़े कमरे में पहुँचे जहाँ चारों तरफ़ बहुत-से छोटे-छोटे कमरे बने हुए थे। दोनों में एक ने बढ़ कर एक कमरे का दरवाज़ा खोला। कमरे में बल्ब जल रहा था। दोनों गेट के दोनों तरफ़ खड़े हो गये और प्रिंस अदनान लँगड़ाता हुआ कमरे में दाख़िल हुआ। एक औरत सिर झुकाये बैठी थी। उसने आहट सुन कर भी अपना सिर नहीं उठाया। फ़रीदी फिर गेट की तरफ़ वापस लौटा और उन दोनों को चले जाने का इशारा करके फिर वापस आ गया। उसने धीरे से औरत के सिर पर हाथ रखा और वह उछल कर खड़ी हो गयी। यह ग़ज़ाला थी।

‘‘ख़बरदार, मुझे हाथ मत लगाना।’’ वह बिफर कर बोली। उसके माथे के जख़्म पर ख़ून जम गया था। बाल उलझे हुए.... चेहरा वीरान था, आँखें किसी डरी हिरनी की आँखों की तरह मालूम हो रही थीं।

‘‘यह तुमने अपना सिर क्यों फोड़ लिया?’’ फ़रीदी ने धीरे से पूछा।

‘‘तुझसे मतलब....!’’ वह गरज कर बोली।

‘‘खाना क्यों नहीं खाया?’’

‘‘मेरी ख़ुशी....!’’

‘‘आख़िर इस तरह बिगड़ क्यों रही हो?’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘जाओ, जा कर अपना काम करो.... मैं बेकार बातें नहीं करना चाहती।’’

‘‘उफ़! क्या तुम नहीं जानतीं कि मैं तुमसे कितनी मुहब्बत करता हूँ।’’

‘‘अच्छा, यह कब से?’’ ग़ज़ाला तेवर में बोली।

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‘‘जिस दिन से तुम्हें देखा है।’’

‘‘अच्छा, तो कान खोल कर सुन लो.... अगर अब तुमने इस क़िस्म की बात की तो मैं ख़ुदकुशी कर लूँगी या तुम्हारा गला घोंट दूँगी।’’

‘‘हुस्न ग़ुस्से में बड़ा भला मालूम होता है।’’

‘‘दूर हो जाओ यहाँ से कमीने कुत्ते कहीं के।’’ वह गरज कर बोली।

‘‘देखो.... मेरा कहना मान लो.... मैं तुम्हें आज़ाद कर दूँगा।’’

‘‘ऐसी आज़ादी पर मैं मौत को अच्छा समझती हूँ।’’

‘‘तुम्हारे इस ख़याल से मुझे ख़ुशी हुई।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘घबराओ नहीं.... तुम बहुत जल्द रिहा हो जाओगी।’’

ग़ज़ाला हैरत से उसका मुँह देखने लगी। यह चीज़ उसकी समझ से बाहर थी कि प्रिंस अदनान अचानक कैसे बदल गया।

‘‘मैं अदनान नहीं, फ़रीदी हूँ।’’ फ़रीदी ने धीरे से कहा। ‘‘अदनान मेरी क़ैद में है।’’

‘‘ओह! तो अब तुम यह दूसरी चाल चल रहे हो।’’ ग़ज़ाला कुढ़ कर बोली। ‘‘लेकिन इतना याद रखो कि तुम मुझ पर किसी तरह कामयाब नहीं हो सकते।’’

फ़रीदी हँसने लगा। उसने उसे सारी कहानी सुना दी। वह हैरत से मुँह खोले सुन रही थी।

‘‘यह तो बहुत बुरा हुआ कि उन कमबख़्तों ने वालिद साहब को भी इसकी ख़बर दे दी....!’’ ग़ज़ाला बोली।

‘‘लेकिन तुम इत्मीनान रखो.... मैंने उन्हें तुम्हारी बेगुनाही का यक़ीन अच्छी तरह दिला दिया है।’’

‘‘मगर मैं किस तरह यक़ीन कर लूँ कि आप प्रिंस अदनान नहीं हैं?’’ ग़ज़ाला अविश्वास से बोली।

‘‘यह लो, वे तस्वीरें जो मैंने प्रिंस अदनान से हासिल की हैं।’’ फ़रीदी ने जेब से एक लिफ़ाफ़ा निकाल कर ग़ज़ाला की तरफ़ बढ़ा दिया।

वह लिफ़ाफ़े से तस्वीरें निकाल कर देखने लगी।

‘‘अब लाओ.... मैं इन्हें जला दूँ।’’ फ़रीदी ने उसके हाथ से तस्वीरें ले कर जला दीं।

‘‘कहो, अब यक़ीन आया।’’

ग़ज़ाला ने सिर हिलाया।

‘‘तो फिर मुझे यहाँ से छुटकारा कब मिलेगा?’’ वह बोली।

‘‘बहुत जल्द.... ज़रा वह शख़्स क़ब्ज़े में आ जाये, जो इस सारे गोरख-धन्धे का सरग़ना है।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘हाँ, यह तो बताओ कि तुम उस दिन होटल से अचानक ग़ायब किस तरह हो गयी थीं।’’
 
‘‘यह भी एक अजीबो-ग़रीब दास्तान है। जैसे ही बाथरूम से निकली, मुझे वालिद साहब दिखायी दिये, मैं परेशान हो गयी। मैं दरअसल उनसे यह कह कर आयी थी कि मैं ख़ाला के यहाँ देहली जा रही हूँ। उन्होंने वहाँ मेरी मौजूदगी का सबब पूछा जिसका मैं कोई सही जवाब न दे सकी। उन्होंने मुझसे वापस चलने के लिए कहा और मैं उनके साथ हो ली। बाहर टैक्सी खड़ी थी। हम दोनों उस पर बैठ कर चल दिये। उन्होंने मुझसे कहा कि वह मुझे अपने एक दोस्त के यहाँ लिये जा रहे हैं और फिर मुझे कुछ अच्छी तरह याद नहीं कि मैं इस क़ैदख़ाने में किस तरह पहुँची।’’

ग़ज़ाला ख़ामोश हो गयी।

‘‘और यही वजह है कि अब जल्दी से किसी बात पर यक़ीन कर लेने को दिल नहीं चाहता।’’ ग़ज़ाला बोली।

‘‘लेकिन मेरी बातों पर यक़ीन न करने की भी कोई वजह नहीं हो सकती।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘मैं अपना मेक-अप बिगाड़ना नहीं चाहता, वरना अभी अपनी असली सूरत भी दिखा देता।’’

ग़ज़ाला ख़ामोश रही।

‘‘आओ, मैं तुम्हारा जख़्म धो कर पट्टी बाँध दूँ।’’ फ़रीदी ने कहा।

ग़ज़ाला कुछ नहीं बोली। फ़रीदी ने स्टूल पर रखा हुआ पानी का जग उठाया और अपना रूमाल तर करके ज़ख़्म धोने लगा। ग़ज़ाला आँखें बन्द किये बैठी रही। दो मोटे-मोटे आँसू उसकी आँखों से निकल कर चेहरे पर बह चले।

‘‘अरे.... तो तुम रोती क्यों हो।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘घबराओ नहीं.... तुम्हें यहाँ सिर्फ़ दो एक-दिन और रहना पड़ेगा।’’

ग़ज़ाला फिर भी कुछ न बोली।

‘‘ठहरो....मैं पट्टियाँ और बैंड एड ले आऊँ।’’ फ़रीदी ने कहा और कमरे से निकल आया। अभी वह कुछ क़दम चला था कि तभी उसे ऐसा मालूम हुआ जैसे कोई अंग्रेज़ी में कुछ कह रहा हो। वह पलट पड़ा.... जिस कमरे से आवाज़ आ रही थी उसके शीशों से झाँक कर उसने देखा एक शख़्स उसकी तरफ़ पीठ किये बैठा कुछ पढ़ रहा था। फ़रीदी ने दरवाज़ा खोलना चाहा, मगर बाहर से ताला बन्द था। फ़रीदी ने इतना अन्दाज़ा ज़रूर लगा लिया कि वह कोई अंग्रेज़ है।

फ़रीदी तहख़ाने से निकल कर उन दोनों आदमियों को तलाश करने लगा। दोनों एक कमरे में बैठे हुए शराब पी रहे थे।

फ़रीदी को देखते ही दोनों घबरा कर खड़े हो गये। उनके अन्दाज़ से ऐसा मालूम हो रहा था जैसे फ़रीदी अचानक कमरे में पहुँच गया हो।

‘‘आज जी भर कर पियो मेरे शेरू.... आज मैं बहुत ख़ुश हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘लेकिन पहले ज़रा एक काम कर दो।’’

‘‘कहिए....!’’ एक बोला।

‘‘फ़र्स्ट एड बक्स लाओ,’’ फ़रीदी ने कहा, ‘‘और नम्बर बारह की चाभी।’’

उनमें से एक बाहर चला गया और दूसरे ने एक चाभी निकाल कर फ़रीदी को दे दी। फ़रीदी एक कुर्सी पर बैठ कर गये हुए आदमी का इन्तज़ार करने लगा।

कुछ मिनट बाद वह वापस आया। उसके हाथ में मरहमपट्टी का सामान रखने वाला एक बक्स था। फ़रीदी बक्स ले कर तहख़ाने की तरफ़ चला गया और दोनों फिर बैठ कर शराब पीने लगे।

फ़रीदी ने ग़ज़ाला की मरहम-पट्टी की और दूसरे कमरे की तरफ़ चला गया।

जैसे ही वह दरवाज़ा खोल कर अन्दर गया, उसके मुँह से हैरत की चीख़ निकल गयी और उसका चेहरा ख़ुशी से झूमने लगा।

अन्दर बैठा अंग्रेज़ जैक्सन था। वह देखने में बहुत दुबला और कमज़ोर लग रहा था।

फ़रीदी को देख कर उसने नफ़रत से मुँह सिकोड़ लिया।

‘‘तो मेरा शक सही निकला....!’’ फ़रीदी धीरे से बड़बड़ाया। ‘‘कहिए मिस्टर जैक्सन, कैसे मिज़ाज हैं?’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘ठीक हूँ।’’ जैक्सन ने लापरवाही से कहा।

जैक्सन उसकी तरफ़ देखने लगा।

‘‘आप यहाँ किस तरह आये?’’ फ़रीदी ने पूछा। वह यह भी भूल गया था कि वह इस वक़्त प्रिंस अदनान के भेस में था।

‘‘क्या मतलब....!’’ जैक्सन ने बुरी आवाज़ में कहा। ‘‘क्यों मेरा मज़ाक़ उड़ाने की कोशिश कर रहे हो।’’

‘‘मैं फ़रीदी हूँ।’’ फ़रीदी ने झुक कर धीरे से कहा।

‘‘अरे....!’’ जैक्सन उछल कर खड़ा हो गया।

‘‘जी हाँ।’’

‘‘मगर तुम....मगर तुम....!’’

‘‘जी हाँ.... मैं प्रिंस अदनान के भेस में हूँ और वह मेरी क़ैद में है।’’

ज़ैक्सन फ़रीदी से लिपट गया।

‘‘मैं सच कहता हूँ मिस्टर फ़रीदी कि ख़ुदा के बाद मुझे सिर्फ़ तुम्हारी ज़ात से इसकी उम्मीद थी।’’ जैक्सन मुहब्बत से बोला।

‘‘लेकिन आप यहाँ किस तरह।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘हस्पताल से छुट्टी होने में कुछ ही दिन बाक़ी थे कि अचानक एक दिन मैंने ख़ुद को यहाँ इस कोठरी में पाया और उसके अलावा मैं कुछ और नहीं जानता।’’

‘‘आप कुछ बता सकते हैं कि आप किसकी क़ैद में हैं?’’

‘‘नहीं.... बिलकुल नहीं।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘आप लियोनार्ड की क़ैद में हैं।’’

‘‘लियोनार्ड....!’’ जैक्सन उछल कर बोला। ‘‘वह यहाँ कहाँ?’’

‘‘वह यहाँ के नवाबों और राजाओं को ब्लैक-मेल करने के लिए आया हुआ है और आजकल आपका रोल अंजाम दे रहा है।’’

‘‘क्या मतलब....!’’

‘‘वह आपके भेस में जासूसी विभाग के सुप्रिन्टेंडेण्ट का फ़र्ज़ निभा रहा है।’’

जैक्सन हैरत से फ़रीदी का मुँह देखने लगा।

‘‘मिस्टर फ़रीदी, अगर तुमने उसे गिरफ़्तार कर लिया तो तुम न सिर्फ़ हिन्दुस्तान, बल्कि पूरी ब्रिटिश एम्पायर के बहुत बड़े आदमी होगे।’’ जैक्सन ने फ़रीदी का हाथ दबाते हुए कहा।

‘‘अच्छा, अब थोड़ी देर ठहरिए।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘मैं इसी वक़्त आपको ले चलूँगा.... और आज ही रात को लियोनार्ड को गिरफ़्तार करने की कोशिश करूँगा, वरना मालूम नहीं कल क्या हो। वह बहुत चालाक आदमी है।’’
 
फ़रीदी तहख़ाने से निकल कर सीधा प्रिंस अदनान के सोने वाले कमरे में गया और ट्रांसमीटर खोल कर उसके सामने बैठ गया।

‘‘कहो, क्या बात है?’’ ट्रांसमीटर से आवाज़ आयी।

‘‘सब ठीक है।’’ फ़रीदी बोला। ‘‘लड़की की दूसरी तस्वीरें ले ली गयी हैं.... आज वह दीवार से सिर टकरा कर काफ़ी ज़ख़्मी हो गयी है।’’

‘‘इन सब बातों की परवाह न करो....’’ ट्रांसमीटर से आवाज़ आयी। ‘‘यह बताओ, किसी और ने भी संपर्क किया या नहीं?’’

‘‘अभी तक नहीं।’’ फ़रीदी बोला।

‘‘अच्छा, कल मैं तुम्हें एक बात बताऊँगा....’’ ट्रांसमीटर से आवाज़ आयी। ‘‘और हाँ, एक नयी ख़ुशख़बरी सुनो.... फ़रीदी पागल हो गया।’’

‘‘वाक़ई....!’’ फ़रीदी चहक कर बोला।

‘‘हाँ.... मेरी स्कीम कामयाब हो गयी.... अब यहाँ तुम्हें किसी से डरना नहीं चाहिए।’’

‘‘यह बहुत अच्छा हुआ।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘कल रात को ठीक नौ बजे अपने कमरे में मौजूद रहना।’’ ट्रांसमीटर से आवाज़ आयी और फिर बन्द हो गयी। फ़रीदी ट्रांसमीटर बन्द करके उस कमरे आया जहाँ दोनों शराब पी रहे थे। वह दोनों ज़मीन पर औंधे पड़े थे और क़रीब ही तीन-चार ख़ाली बोतलें पड़ी हुई थीं।

फ़रीदी जैक्सन और ग़ज़ाला को ले कर सीधा कलक्टर के बँगले पर पहुँचा। रात के लगभग ग्यारह बज गये थे। कलक्टर सो चुका था, लेकिन फ़रीदी के कहने पर नौकरों ने उसे जगा दिया।

फ़रीदी और जैक्सन की दास्तान सुन कर कलक्टर उछल पड़ा।

उसी वक़्त एक घण्टे के अन्दर-अन्दर मिस्टर जैक्सन के बँगले पर छापा मारने का इन्तज़ाम किया गया। लियोनार्ड पर अचानक उस वक़्त पुलिस टूट पड़ी जब वह जैक्सन के भेस में उसके सोने वाले कमरे में पड़ा ख़र्राटे ले रहा था। उसी वक़्त फ़रीदी ने प्रिंस अदनान को भी शराबख़ाने से लाये जाने का इन्तज़ाम किया। फिर दोनों हवालात में बन्द कर दिये गये।

फ़रीदी ने उसी रात को नवाब रशीदुज़्ज़माँ को तार दिलवाया। दूसरे दिन सुबह वे भी पहुँच गये। ग़ज़ाला शर्मिन्दगी की वजह से सिर नहीं उठा रही थी। रशीदुज़्ज़माँ उससे लिपट कर फूट-फूट कर रोने लगे।

‘‘मगर जनाब।’’ हमीद फ़रीदी से बोला। ‘‘अगर उस दिन कहीं मैं आपके पिस्तौल का निशाना बन गया होता तो इस वक़्त आपकी कामयाबी पर तालियाँ कौन बजाता?’’

‘‘अच्छा, तो क्या आप मुझे इतना अनाड़ी निशानेबाज़ समझते हैं।’’ फ़रीदी बोला।

‘‘लेकिन मैं आपसे सच कहता हूँ, मैंने पागलपन का इतना अच्छा रोल आज तक नहीं देखा।’’ हमीद ने कहा।

‘‘अरे, तुमने अभी देखा ही क्या है।’’

‘‘ज़रा कान इधर लाइए।’’ हमीद ने धीरे से कहा।

फ़रीदी सिर झुका कर सुनने लगा।

‘‘ग़ज़ाला के बारे में क्या ख़याल है?’’ हमीद ने धीरे से उसके कान में कहा और फ़रीदी ने उसकी पीठ पर एक घूँसा जड़ दिया।

end
 
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