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जैक्सन ने लोगों को इशारा किया। दो-तीन लोग फ़रीदी पर टूट पड़े और थोड़ी देर बाद उसे बेबस कर दिया और फिर उसे एक कुर्सी में बाँध दिया गया।
फ़रीदी को जितनी भी ज़बानें आती थीं, वह उनमें एक के बाद एक बेतहाशा गालियाँ बक रहा था।
‘‘कुछ यह भी बता सकते हो कि उन्होंने नाश्ते में क्या खाया था।’’ जैक्सन ने कुछ सोचते हुए हमीद से कहा।
‘‘मैंने इसके बारे में नौकरों से पूछा था।’’ हमीद बोला। ‘‘टोस्ट, अण्डे, जलेबी, मक्खन और कुछ सूखे मेवे.... और हाँ बंगाली रसगुल्ले जो चीफ़ इन्स्पेक्टर साहब ने भिजवाये थे।’’
‘‘मैंने....!’’ चीफ़ इन्स्पेक्टर ने हैरत से कहा। ‘‘मैंने तो नहीं भिजवाये थे।’’
‘‘जी....!’’ हमीद ने चौंक कर कहा।
‘‘हाँ भई, मैंने नहीं भिजवाये थे।’’
‘‘अच्छा, तो यह बात है.... यह सब उन्हीं रसगुल्लों की करामात है। यह ज़रूर उनके किसी दुश्मन की हरकत है।’’ हमीद ने कुछ सोचते हुए कहा।
‘‘क्या उन रसगुल्लों में से कुछ बचा भी है।’’ जैक्सन ने कहा।
‘‘मेरे ख़याल से तो नहीं।’’
‘‘इन्हें फ़ौरन हस्पताल ले चलना चाहिए।’’ जैक्सन ने कहा।
इस दौरान फ़रीदी बेहोश हो चुका था।
लोगों ने उसे कुर्सी से खोला और स्ट्रेचर पर डाल कर हस्पताल की तरफ़ ले चले। चूँकि हस्पताल क़रीब ही था, इसलिए उन लोगों ने पैदल ही जाना मुनासिब समझा। अभी थोड़ी ही दूर गये होंगे कि फ़रीदी स्टे्रचर से कूद कर भागा.... लोगों ने उसका पीछा करना चाहा, लेकिन उसने उन्हें पेच-दर-पेच गलियों में ऐसे-ऐसे चक्कर दिये कि उन्हें थक-हार कर लौट ही जाना पड़ा।
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फ़रीदी को जितनी भी ज़बानें आती थीं, वह उनमें एक के बाद एक बेतहाशा गालियाँ बक रहा था।
‘‘कुछ यह भी बता सकते हो कि उन्होंने नाश्ते में क्या खाया था।’’ जैक्सन ने कुछ सोचते हुए हमीद से कहा।
‘‘मैंने इसके बारे में नौकरों से पूछा था।’’ हमीद बोला। ‘‘टोस्ट, अण्डे, जलेबी, मक्खन और कुछ सूखे मेवे.... और हाँ बंगाली रसगुल्ले जो चीफ़ इन्स्पेक्टर साहब ने भिजवाये थे।’’
‘‘मैंने....!’’ चीफ़ इन्स्पेक्टर ने हैरत से कहा। ‘‘मैंने तो नहीं भिजवाये थे।’’
‘‘जी....!’’ हमीद ने चौंक कर कहा।
‘‘हाँ भई, मैंने नहीं भिजवाये थे।’’
‘‘अच्छा, तो यह बात है.... यह सब उन्हीं रसगुल्लों की करामात है। यह ज़रूर उनके किसी दुश्मन की हरकत है।’’ हमीद ने कुछ सोचते हुए कहा।
‘‘क्या उन रसगुल्लों में से कुछ बचा भी है।’’ जैक्सन ने कहा।
‘‘मेरे ख़याल से तो नहीं।’’
‘‘इन्हें फ़ौरन हस्पताल ले चलना चाहिए।’’ जैक्सन ने कहा।
इस दौरान फ़रीदी बेहोश हो चुका था।
लोगों ने उसे कुर्सी से खोला और स्ट्रेचर पर डाल कर हस्पताल की तरफ़ ले चले। चूँकि हस्पताल क़रीब ही था, इसलिए उन लोगों ने पैदल ही जाना मुनासिब समझा। अभी थोड़ी ही दूर गये होंगे कि फ़रीदी स्टे्रचर से कूद कर भागा.... लोगों ने उसका पीछा करना चाहा, लेकिन उसने उन्हें पेच-दर-पेच गलियों में ऐसे-ऐसे चक्कर दिये कि उन्हें थक-हार कर लौट ही जाना पड़ा।
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