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Faridi aur Leonard ibne safi

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फ़रीदी और लियोनार्ड

एक दिलचस्प ख़बर

डिपार्टमेंट ऑफ़ इनवेस्टिगेशन की इमारत सुबह की धुन्ध में डूबी कुछ अजीब-सी लग रही थी। हिन्दुस्तान के उत्तरी इलाक़े में यूँ ही कड़ाके की ठण्ड पड़ती है। लेकिन बर्फ़बारी हो जाने की वजह से भी आज कई दिनों से ठण्ड बहुत ही ज़्यादा हो गयी है। डिपार्टमेंट ऑफ़ इनवेस्टिगेशन की इमारत बड़े-बड़े चौकोर पत्थरों को जोड़ कर बनायी गयी है। ऐसा मालूम हो रहा है जैसे वह ग़ुरूर में कोहरे की गहरी चादर पर हँसी-हँसती हुई कह रही हो कि हमें क्या परवाह, चाहे जितनी ठण्ड पड़े, हमारे ऊपर उसका कोई असर नहीं होने वाला। हमारे अन्दर ऐसे-ऐसे राज़ दफ़्न हैं, जिनकी हवा भी दुनिया को नहीं लगी। दुनिया के सैकड़ों राज़ हमारे सीने में दफ़्न होने के लिए आते हैं और हमारे ही हो कर रह जाते हैं।

इसी इमारत के कम्पाउण्ड में कई शानदार बँगले बने हुए हैं। इन्हीं बँगलों में से एक के बरामदे में एक ख़ूबसूरत अंग्रेज़ औरत शायद किसी का इन्तज़ार कर रही थी। उसने सोने वाले कपड़ों के ऊपर ऊनी कपड़ा पहन रखा था। उसकी निगाहें बार-बार बरामदे में लगे हुए गुलाब के पेड़ की तरफ़ उठ जाती थीं।

थोड़ी देर के बाद एक कार कम्पाउण्ड में दाख़िल हुई। अंग्रेज़ औरत बेताबी के साथ बरामदे से उतर कर आगे बढ़ी।

एक अधेड़ उम्र का तन्दुरुस्त अंग्रेज़ कार से उतरा। उसने आगे बढ़ कर औरत की कमर में हाथ डाल दिया।

‘‘ओह जैक्सन डार्लिंग,’’ वह औरत अंग्रेज़ी में बोली। ‘‘ख़ुदा का शुक्र है कि मैं तुम्हें फिर तन्दुरुस्त देख रही हूँ।’’

अंग्रेज़ ने झुक कर औरत का माथा चूम लिया। फिर दोनों बँगले में दाख़िल हो गये। यह पी०एल० जैक्सन ख़ुफ़िया पुलिस का सुप्रिन्टेंडेण्ट था। लगभग दो महीने से बहुत बीमार था। उसकी ज़बान के नीचे एक फोड़ा निकल आया था, जिसकी वजह से वह लगभग गूँगा हो कर रह गया था। खाने-पीने में भी परेशानी होती थी, जब तक उसके दिल में विल पावर रही, वह बीमारी की तरफ़ से लापरवाही करता रहा, लेकिन जब तकलीफ़ ज़्यादा हो गयी तो उसे हस्पताल में दाख़िल होना पड़ा, जहाँ उसके फोड़े का ऑपरेशन कर दिया गया।

आज दो महीने के बाद वह पूरी तरह सेहतमन्द हो कर घर वापस आ गया। जो औरत उसका इन्तज़ार कर रही थी वह उसकी बीवी थी।

उसी दिन दोपहर की बात है दफ़्तर में हमीद फ़रीदी के कमरे में हँसता हुआ दाख़िल हुआ।

फ़रीदी अख़बार देखने में मशग़ूल था। उसने चौंक कर हमीद की तरफ़ सवालिया अन्दाज़ से देखा।

‘‘शायद ऑपरेशन के सिलसिले में मिस्टर जैक्सन के दिमाग़ की भी कोई रग कट गयी है।’’ हमीद ने कहा।

‘‘क्या मतलब......’’

‘‘चपरासियों से ले कर डिप्टी सुप्रिन्टेंडेण्ट तक को एक-एक करके अपने कमरे में बुला चुके हैं। स्टाफ़ की हाज़िरी का रजिस्टर सामने खोल रखा है।’’

‘‘क्यों....?’’

‘‘पता नहीं।’’ हमीद ने मुस्कुरा कर कहा। ‘‘आप को सलाम कहा है।’’

‘‘हूँ....!’’ फ़रीदी ने उठ कर सिगार का जला हुआ टुकड़ा ऐश ट्रे में डालते हुए कहा। अख़बार मोड़ कर उसने जेब में रखा और पंजों के बल चलता हुआ कमरे से निकल गया। यह उसकी अजीबो-ग़रीब आदत थी कि वह दफ़्तर में आम तौर पर पंजों के बल चला करता था। शायद उसका मक़सद यह था कि जूतों की आवाज़ से किसी के काम में ख़लल न पड़े। वह पर्दा उठा कर मिस्टर जैक्सन के कमरे में दाख़िल हो गया।

‘‘हेलो मिस्टर फ़रीदी.... आप अच्छे तो हैं!’’ सुप्रिन्टेंडेण्ट ने पूछा।

‘‘मेहरबानी।’’ फ़रीदी ने मुस्कुरा कर कहा। ‘‘मैं आपको आपकी सेहतयाबी की मुबारकबाद देता हूँ।’’

‘‘शुक्रिया....।’’ जैक्सन ने कहा ‘‘बैठिए।’’

फ़रीदी बैठ गया।

‘‘मैं क्या बताऊँ कि मुझे अपने स्टाफ़ से कितनी मुहब्बत है।’’ जैक्सन मुस्कुरा कर बोला। ‘‘मैंने दफ़्तर आ कर सबसे पहला काम यही किया है कि एक-एक करके सबको बुला कर मुलाक़ात की।’’

‘‘हम सब आपकी मुहब्बत की क़द्र करते हैं।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘इस दौरान मैंने कितनी तकलीफ़ उठायी है।’’ जैक्सन बोला।

‘‘तकलीफ़ की चीज़ ही थी।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘आपकी आवाज़ बदली-बदली-सी महसूस कर रहा हूँ।’’

‘‘हाँ भाई.... यह ऑपरेशन है ही ऐसी चीज़। गले और ज़बान का ऑपरेशन हुआ था। ऐसी सूरत में आवाज़ क़ायम रह गयी है, इसी को ग़नीमत समझता हूँ।’’
 
‘‘वाक़ई ख़ुदा ने बड़ा रहम किया।’’ फ़रीदी ने यह जुमला यूँ ही रस्मी तौर पर कहा। उसे रस्मी बातचीत से बहुत नफ़रत थी। वह एक मुँहफट और बेधड़क हक़ीक़त का इज़हार कर देने वाला आदमी था।

‘‘इस वक़्त मैंने ख़ास तौर पर एक ज़रूरी मामले में राय करने के लिए बुलाया है।’’

‘‘कहिए।’’

‘‘कल रात हस्पताल में मुझे इन्स्पेक्टर जनरल की तरफ़ से एक ख़बर मिली है, जो हम सब के लिए बहुत ही दिलचस्प है। तुमने यूरोप के मशहूर ब्लैक-मेलर लियोनार्ड का नाम ज़रूर सुना होगा। वह अपने कुछ साथियों के साथ हिन्दुस्तान आया है और उसने अपना हेडक्वार्टर हमारे ही शहर में बनाया है।’’

‘‘ख़बर तो बहुत दिलचस्प है।’’ फ़रीदी ने दिलचस्पी ज़ाहिर करते हुए कहा।

‘‘मुझे तुमसे यही उम्मीद थी कि तुम इस में ज़रूर दिलचस्पी लोगे।’’ जैक्सन ने हँस कर कहा। ‘‘तुम तो ऐसे मौक़ों की तलाश ही में रहा करते हो। अब मुझे हण्ड्रेड परसेंट यक़ीन हो गया है कि तुम सचमुच एक माहिर अफ़सर हो।’’

‘‘हाँ.... वह लियोनार्ड....!’’ फ़रीदी ने जैक्सन की बात काटते हुए कहा।

‘‘हाँ, तो लियोनार्ड ख़तरनाक आदमी है। जिसने सारे यूरोप को हिला रखा है। हद तो यह है कि स्कॉटलैण्ड के मशहूर जासूस भी उसे नहीं पकड़ सके।’’

‘‘जी हाँ.... मैं जानता हूँ कि वह एक इण्टरनैशनल ब्लैकमेलर है। यूरोप के बड़े-बड़े घराने उसके नाम से काँपते हैं। उसने एक बार स्कॉटलैण्ड यार्ड के मशहूर जासूस पीटरसन की अच्छी-ख़ासी दुर्गत बनायी थी।’’

‘‘तुम ठीक समझे। मैं उसी लियोनार्ड की बात कर रहा हूँ।’’ जैक्सन ने कहा। ‘‘मगर एक बात समझ में नहीं आयी कि आख़िर वह हिन्दुस्तान क्यों आया है?’’

‘‘यहाँ के राजाओं और नवाबों को ब्लैकमेल करने के लिए।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘तुम्हें यह कैसे मालूम हुआ....क्या तुम उसकी मौजूदगी के बारे में पहले ही से जानते हो?’’

‘‘जी हाँ।’’

‘‘वह किस तरह....?’’ जैक्सन ने पूछा।

फ़रीदी ने जेब से अख़बार निकाल कर सुप्रिन्टेंडेण्ट के सामने मेज़ पर फैला दिया और एक विज्ञापन की तरफ़ इशारा किया।

सुप्रिन्टेंडेण्ट पढ़ने लगा।

‘‘यहाँ का वह नवाब एलर्ट हो, जो आज से तीन साल पहले सिर्फ़ अय्याशी की वजह से एक मामूली पर्यटक के भेस में इंग्लैंड गया था। वहाँ उसने एक किसान की ख़ूबसूरत लड़की पर डोरे डाले थे, लेकिन कामयाब न होने पर उसने शादी कर ली थी। फिर कुछ दिन उसके साथ रह कर वह चुपके से हिन्दुस्तान वापस चला आया था। उस नवाब को मालूम होना चाहिए कि अब उसकी रियासत का एक जायज़ वारिस और पैदा हो गया है। मेरे पास शादी के सर्टिफ़िकेट के साथ सारे सुबूत मौजूद हैं, जिनकी क़ीमत पचहत्तर करोड़ रुपये है। अगर नवाब उन सारी चीज़ों को हासिल करना चाहे तो इस अख़बार के ज़रिये अपनी ऱजामन्दी ज़ाहिर कर सकता है, वरना ये सारे सुबूत उसके नये वारिस के हक़ में इस्तमाल किये जायेंगे।’’

‘‘देखा आपने ....!’’ फ़रीदी ने कहा।

जैक्सन ने कुछ सोचते हुए सिर हिलाया।

‘‘मगर यह कैसे कहा जा सकता है कि यह लियोनार्ड की हरकत है।’’

‘‘मैं क़रीब एक माह से इस तरह के विज्ञापनों की कटिंग इकटठा कर रहा हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा ‘‘और ये सब यूरोप ही के हालात से मिलते हैं और इनमें से मुझे कोई भी विज्ञापन ऐसा ऩजर नहीं आया, जो किसी मोटे आसामी से न जुड़ा हो।’’

‘‘मिस्टर फ़रीदी।’’ जैक्सन बोला। ‘‘मैं इसीलिए तुम्हारी क़द्र करता हूँ कि तुम्हारी ऩजरें बहुत तेज़ हैं। मैंने अभी लगभग सारे अफ़सरों से इस मामले के बारे में बातचीत की है, लेकिन किसी ने भी इन इश्तहारों का हवाला नहीं दिया।’’

‘‘अरे, इसमें कौन-सी ख़ास बात है।’’ फ़रीदी बोला। ‘‘यह तो ऐसी चीज़ है, जिसने मामूली-से-मामूली दिमाग़ वाले आदमी को अपनी तरफ़ आकर्षित कर लिया होगा।’’

‘‘तुमने अभी इस क़िस्म के और विज्ञापनों का ज़िक्र किया था।’’ जैक्सन ने कहा। ‘‘क्या उनके कटिंग तुम्हारे पास हैं?’’

‘‘जी हाँ.... दो-तीन यहीं दफ़्तर में मौजूद हैं।’’ फ़रीदी ने उठते हुए कहा। ‘‘ठहरिए! मैं अभी आपको दिखाता हूँ।’’

फ़रीदी अंग्रेज़ी अख़बार की कुछ कतरनें उठा लाया और बारी-बारी उन्हें पढ़ने लगा।

‘‘वो महारानी साहिबा ध्यान दें, जो अय्याशी के लिए हर साल पेरिस जाती हैं। उनके वो ख़त मेरे पास मौजूद हैं जो उन्होंने अपने आशिक़ को लिखे थे। उन ख़तों की क़ीमत सोलह करोड़ रुपये है। अदायगी न होने की सूरत में ये ख़त छपवा दिये जायेंगे। सौदा इसी अख़बार के ज़रिये तय किया जा सकता है।

‘‘दूसरा इश्तहार यह है।

‘‘वो हसीन-ओ-जमील नवाबज़ादी ध्यान दें, जो पिछले साल अपने एक आशिक़ को साथ ले कर स्विट्ज़रलैंड गयी थीं। वह देखने में उनका प्राइवेट सेक्रेटरी था। मेरे पास उन दोनों की कुछ तस्वीरें हैं, जिन्हें छपवा देना बहुत ही दिलचस्प साबित हो सकता है। उन तस्वीरों की क़ीमत बीस करोड़ रुपये है। इस सिलसिले में उसी क़ीमत के ज़ेवरात क़बूल किये जा सकते हैं। अदायगी न होने की सूरत में ये तस्वीरें छपवा कर बाँट दी जायेंगी। इस अख़बार द्वारा ऱजामन्दी ज़ाहिर की जा सकती है।

‘‘इसी तरह के और भी इश्तहार हैं, लीजिए ख़ुद आप ही पढ़ लीजिए।’’ फ़रीदी ने सारी कतरनें जैक्सन की तरफ़ बढ़ा दीं।
 
‘‘हैरत है कि पुलिस ने अभी तक इस तरफ़ ध्यान नहीं दिया।’’ जैक्सन ने कहा। ‘‘यह तो खुला जुर्म है। लगता है यह अख़बार ब्लैक-मेलिंग का हौसला बढ़ा रहा है, उसे तो फ़ौरन ज़ब्त करके उस पर मुक़दमा चलाना चाहिए।’’

फ़रीदी हँसने लगा।

‘‘लियोनॉर्ड या उसके साथ रहने वाले मामूली आदमी नहीं हैं। वे इतनी आसानी से पकड़ में नहीं आ सकते।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘मैं तुम्हारा मतलब नहीं समझा।’’

‘‘ज़रा आज के अख़बार के एडिटोरियल का यह हिस्सा देखिए।’’ फ़रीदी ने अख़बार जैक्सन की तरफ़ बढ़ाते हुए कहा।

जैक्सन पढ़ने लगा।

‘‘हमने अपने पाठकों की दिलचस्पी के लिए ऐसे विज्ञापनों के नमूने छापने का सिलसिला शुरू किया है, जो यूरोप में ब्लैक-मेलिंग के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। आज के अख़बार में भी आपको ऐसा ही विज्ञापन मिलेगा। हम आगे भी आपकी दिलचस्पी के लिए उनका सिलसिला जारी रखेंगे।’’

जैक्सन पढ़ चुकने के बाद फ़रीदी की तरफ़ हैरत से देखने लगा।

‘‘मगर यह तो बताओ कि तुमने आज तक किसी का जवाब भी अख़बार में देखा या नहीं।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘ऐसी सूरत में जबकि ख़ुद अख़बार वाले मिले हुए हों, जवाब छापने की ज़रूरत ही क्या रह जाती है।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘लेकिन यह कैसे कहा जा सकता है कि अख़बार वाले मिले हुए हैं।

‘‘उन ख़तों के बारे में एडिटोरियल नोट पढ़ कर कहा जा सकता है।’’

‘‘बात दरअसल यह है कि मिस्टर फ़रीदी कि तुम बातों को बहुत ही घुमा-फिरा कर सोचने के आदी हो।’’

जैक्सन ने कहा। ‘‘हो सकता है कि इस क़िस्म के ख़त दिलचस्पी ही के लिए छापे जाते हों।’’

‘‘लेकिन मुझे तो इसमें कोई भी दिलचस्पी की बात ऩजर नहीं आती।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘और अगर दिलचस्पी ही के लिए इनका सिलसिला शुरू किया गया होता तो दो-एक इश्तहार काफ़ी थे या फिर हर इश्तहार में कोई नयी बात होनी चाहिए थी। अब तक लगभग पन्द्रह इश्तहार छप चुके हैं, लेकिन सब एक जैसे, हर एक में एक नये ढंग से रुपयों की माँग की गयी है।’’

‘‘ख़ैर! भई, यही होगा।’’ जैक्सन ने उकता कर कहा। ‘‘मुझे दरअसल तुम्हें यह इन्फ़ॉर्मेशन देनी थी कि लियोनार्ड का पता लगाने के लिए छै जासूसों की एक कमेटी बनायी गयी है, जिसमें तुम्हारा भी नाम है।’’

‘‘तो क्या सबको काम के एक ही तरीक़े पर अमल करना पड़ेगा।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘बिलकुल....!’’ जैक्सन ने मेज़ पर झुकते हुए कहा। ‘‘यह ज़रूरी है।’’

‘‘लेकिन मैं इसका आदी नहीं।’’

‘‘मजबूरी है। यह तो करना ही पड़ेगा। तुम्हें रोज़ाना रिपोर्ट देनी पड़ेगी।’’

‘‘आप जानते हैं कि मैं इस पर अमल नहीं कर सकता।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘इस बार तो तुम्हें इस पर अमल करना पड़ेगा, क्योंकि सारे ऑर्डर ऊपर से आये हैं।’’ जैक्सन बोला।

‘‘और अगर मैं इनकार कर दूँ।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘क्यों बच्चों जैसी बातें कर रहे हो?’’ जैक्सन ने ज़ोर देते हुए कहा। ‘‘यहाँ रह कर तुम्हें ऑर्डर का पाबन्द होना पड़ेगा।’’

‘‘और अगर मैं इस्तीफ़़ा दे दूँ तो।’’

‘‘मैं तुम्हें इसकी राय न दूँगा।’’ जैक्सन बोला।

‘‘लेकिन मैं अपने उसूल के ख़िलाफ़ एक क़दम भी आगे नहीं बढ़ सकता।’’

‘‘आख़िर इसमें तुम्हारा नुक़सान ही क्या है।’’ जैक्सन झुँझला कर बोला। तुम्हारे जैसा आदमी तो मेरी ऩजरों से गुज़रा ही नहीं। मुझे डर है कि तुम कहीं अपनी जान जोखिम में न डाल लो। हमें तुम्हारी स्कीमों की ख़बर न होगी तो हम तुम्हारी हिफ़ाज़त कैसे करेंगे।’’
 
‘‘आपका फ़रमान सही है।’’ फ़रीदी ने धीरे से कहा। ‘‘और आप यह भी जानते हैं कि मैं इस डिपार्टमेंट में रोटियों के लिए नहीं आया। मेरी तबियत ने इस मनपसन्द पेशे में आने पर मजबूर किया है। मेरा उस काम में दिल ही नहीं लगता, जिसमें क़दम-क़दम पर मौत का ख़तरा न मँडरा रहा हो।’’

‘‘निजी तौर पर यह चीज़ तुम्हारे लिए ठीक हो सकती है लेकिन डिपार्टमेंट के हक़ में ठीक नहीं है।’’

‘‘लेकिन इससे पहले तो मुझे इस बात पर कभी मजबूर नहीं किया गया।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘भई, पहले की बात और है। पहले तुम्हारा ताल्लुक़ सिर्फ़ मुझसे था, लेकिन इस बार सीधे इन्स्पेक्टर जनरल का मामला है।’’

‘‘ख़ैर, देखा जायेगा।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘मैं कोशिश करूँगा कि उनकी हिदायतों पर अमल करूँ।’’

‘‘आज शाम तक बाक़ी पाँच जासूस भी यहाँ पहुँच जायेंगे। मैं कल उनसे तुम्हारा इण्ट्रोडक्शन करा दूँगा। ये सब अलग-अलग स्टेट के बेहतरीन दिमाग़ हैं।’’

थोड़ी देर बाद फ़रीदी वहाँ से उठ कर अपने कमरे में चला आया।

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रहस्यमय आदमी

मशहूर अख़बार ‘न्यू स्टार’ के दफ़्तर की इमारत रोशनी से जगमगा रही थी। रात के लगभग दस बजे होंगे। ज़्यादा सर्दी होने की वजह से सड़कों पर कम ही लोग ऩजर आ रहे थे। रात के सन्नाटे में अख़बार छापने वाली मशीनों की घड़घड़ाहट दूर तक सुनायी दे रही थी। उसके साथ ही कभी-कभी कुत्तों के भौंकने की आवाज़ें भी फ़िज़ा में गूँज उठती थीं।

‘न्यू स्टार’ के दफ़्तर और छापेख़ाने में लोग तेज़ी से काम अंजाम दे रहे थे। तभी एडिटर के कमरे में शोर होने लगा। क़रीब के लोग अपना काम-काज छोड़ कर कमरे के दरवाज़े पर इकट्ठा हो गये।

एडिटर अपने कमरे के दरवाज़े पर खड़े लोगों से कह रहा था, ‘‘जाओ.... तुम लोग यहाँ क्यों इकट्ठा हो गये? जाओ.... अपना काम करो।’’

लोग धीरे-धीरे अपने कामों में लग गये। एडिटर कमरे में लौट आया। यहाँ एक आदमी आराम-कुर्सी पर बेहोश पड़ा था। सब-एडिटर उसके कपड़ों के बटन खोल रहा था।

‘‘दौड़ो.... जल्दी करो.... डॉक्टर को बुलाओ....!’’ एडिटर ने सब-एडिटर से कहा।

सब-एडिटर बेहोश आदमी को उसी हालत में छोड़ कर बाहर चला गया।

एडिटर ने बैठ कर एक सिगरेट सुलगाया और मुस्कुराते हुए बेहोश आदमी की तरफ़ देखने लगा। बेहोश आदमी ने आराम-कुर्सी पर बदस्तूर लेटे-ही-लेटे अधखुली आँखों से कमरे का जायज़ा लिया और एक हाथ अलस्टर की अन्दर जेब में डाल कर नोटों का एक बण्डल निकाला और फ़र्श पर गिरा दिया। एडिटर ने झुक कर बण्डल उठाया और अपनी जेब में रख लिया। उसके बाद बेहोश आदमी की कुर्सी से एक तह किया हुआ काग़ज़ गिरा। एडिटर ने उसे भी उठा कर मेज़ के दराज़ में रख लिया। फिर वह उठ कर कमरे के दरवाज़े पर आया और चिक उठा कर इधर-उधर देखने लगा। आस-पास कोई मौजूद नहीं था। वह बाहर निकल कर बरामदे में खड़ा हो गया।

थोड़ी देर बाद सब-एडिटर डॉक्टर को ले कर आ गया। उन दोनों के पीछे एक आदमी और था। उसने उनके क़रीब पहुँच कर अपना हैट उतारा और अपना विज़िटिंग कार्ड घबराये हुए एडिटर की तरफ़ बढ़ा दिया। एडिटर डॉक्टर से कह रहा था। ‘‘डॉक्टर साहब....! ज़रा देख लीजिए। मैं तो सख़्त परेशान हूँ। मालूम नहीं बेचारा किस काम के लिए आया था। कमरे में दाख़िल होते ही बेहोश हो कर गिर पड़ा।’’

‘‘अच्छा, मैं देखता हूँ।’’ यह कह कर डॉक्टर सब-एडिटर के साथ कमरे में चला आया। डॉक्टर वहीं खड़ा आने वाले के विज़िटिंग कार्ड को ग़ौर से देख रहा था।

‘‘फ़रीदी साहब।’’ एडिटर ने आने वाले को घूरते हुए कहा। ‘‘फ़रमाइए, कैसे आना हुआ।’’

‘‘कोई ख़ास बात नहीं।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘पहले आप अपने मरीज़ को देखिए, फिर बाद में बातें होती रहेंगी।’’

एडिटर कमरे की तरफ़ बढ़ा....उसके पीछे फ़रीदी भी।

‘‘कहिए डॉक्टर साहब, क्या बात है।’’ एडिटर ने कहा।

‘‘कोई ख़ास बात नहीं.... मुझे यह बेहोशी बहुत ज़्यादा थकान का नतीजा मालूम होती है।’’ डॉक्टर ने कहा। ‘‘ये जल्द ही होश में आ जायेंगे।’’

फ़रीदी ने बेहोश आदमी की तरफ़ देखा और चौंक पड़ा।

‘‘तशरीफ़ रखिए।’’ एडिटर ने फ़रीदी से कहा। उसकी आवाज़

में कँपकँपी थी जिसे डर का नतीजा कहा जा सकता है।

फ़रीदी ख़ामोशी से एक कुर्सी पर बैठ गया।

‘‘कमज़ोर दिल वाले लोगों पर अक्सर सर्दियों में इस तरह

के दौरे पड़ जाते हैं।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘आपका ख़याल दुरुस्त है।’’ डॉक्टर बोला।

‘‘ये हैं कौन साहब?’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘मालूम नहीं।’’ एडिटर ने कहा। ‘‘इन्होंने चपरासी से अपना विज़िटिंग कार्ड भिजवाया था.... उसके बाद ख़ुद अन्दर आये और बेहोश हो कर गिर पड़े। मैं और मेरा असिस्टेंट, दोनों यहाँ मौजूद थे.... हमने इन्हें उठा कर कुर्सी पर डाल दिया और असिस्टेंट डॉक्टर को लेने चला गया।’’

फ़रीदी ने मेज़ पर से अजनबी का विज़िटिंग कार्ड उठा कर देखा जिस पर लिखा हुआ था।

‘‘प्रिंस ऑफ़ इराक़ अदनान....!’’

फ़रीदी ने सिर हिलाते हुए कहा, ‘‘मैं सूरत देख कर ही समझ गया था कि कोई बड़ा आदमी है।’’

‘‘जी हाँ.... मेरी परेशानी की वजह दरअसल यही चीज़ थी।’’ एडिटर सिगरेट सुलगाता हुआ बोला। ‘‘लीजिए, शौक़ फ़रमाइए।’’ उसने सिगरेट केस फ़रीदी की तरफ़ बढ़ाया।

‘‘जी शुक्रिया.... मैं सिर्फ़ सिगार पीता हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘अजीब मुसीबत है।’’ एडिटर ने बेहोश आदमी की तरफ़ देखते हुए कहा। ‘‘अगर इस तरह का ख़तरनाक म़र्ज है तो ऐसे लोग वक़्त-बेवक़्त घर ही से क्यों निकलते हैं।’’

थोड़ी देर बाद अजनबी को होश आ गया। वह सीधा हो कर बैठ गया। उसने चुँधियायी हुई आँखों से चारों तरफ़ देखा और मुस्कुराहट के साथ अंग्रेज़ी में बोला। ‘‘मुझे अफ़सोस है कि मेरी वजह से आप लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।’’

‘‘कोई बात नहीं....’’ एडिटर ने मुस्कुरा कर कहा। ‘‘फ़रमाइए, कैसे तशरीफ़ लाये थे।’’

‘‘मुझे पाँच मिनट की मोहलत दीजिए।’’ अजनबी बोला। ‘‘मुझे सोचना पड़ेगा कि मैं क्यों आया था। इस तरह के दौरों के बाद अक्सर मैं थोड़ी देर के लिए अपनी याददाश्त खो बैठता हूँ।’’

‘‘बड़ी अजीब बात है।’’ फ़रीदी मुस्कुराते हुए बोला।

‘‘जी हाँ.... यूरोप के लगभग हर मुल्क में मैंने अपने इस म़र्ज का इलाज कराना चाहा, लेकिन बेकार....!’’

अजनबी ने कहा और कुछ सोचने लगा।
 
‘‘मेरा ख़याल है कि हिन्दुस्तान में आपके इस म़र्ज का ठीक से इलाज हो जायेगा।’’ फ़रीदी ने कहा।

अजनबी उसके जुमले पर चौंक पड़ा।

और बोला, ‘‘जी हाँ....! मैं दरअसल आपके अख़बार में एक इश्तहार देने के लिए आया था।’’

‘‘हाँ, हाँ.... शौक़ से।’’ एडिटर ने कहा।

‘‘मुझे एक ड्राइवर की ज़रूरत है।’’

‘‘अगर यह बात है तो अंग्रेज़ी अख़बार आप के लिए बेकार साबित होगा।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘क्योंकि हिन्दुस्तान में शायद ही कोई अंग्रेज़ी पढ़ा हुआ पेशेवर ड्राइवर मिल सके।’’

‘‘लेकिन मुझे तो अंग्रेज़ी ही जानने वाला चाहिए, क्योंकि मैं हिन्दुस्तानी ज़बान नहीं समझ पाता।’’ अजनबी ने कहा।

‘‘ख़ैर, कोशिश कीजिए। शायद कोई मिल ही जाय।’’ फ़रीदी बोला।

‘‘आप अपना पता मुझे दे दीजिए.... मैं इश्तहार छपवा दूँगा।’’ एडिटर ने अजनबी से कहा।

थोड़ी देर तक इधर-उधर की बात करने के बाद अजनबी खड़ा हो गया। उसने वहाँ से बैठे हुए सब आदमियों से हाथ मिलाया और कमरे से बाहर निकल गया।

‘‘हाँ, तो फ़रमाइए.... मैं आपकी क्या ख़िदमत कर सकता हूँ।’’ एडिटर ने फ़रीदी की तरफ़ देख कर कहा।

‘‘जनाब, पहले यह बताइए कि आपके कमरे में इतना सफ़ोकेशन क्यों है।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘क्यों....? क्या बात है?’’ एडिटर ने कहा।

‘‘मुझे कुछ ऐसा महसूस होता है जैसे मैं भी थोड़ी देर बाद बेहोश हो जाऊँगा।’’ फ़रीदी ने घुटी हुई आवाज़ में कहा।

‘‘अरे....!’’ एडिटर हैरत से आँखें फाड़ता हुआ बोला।

‘‘जी हाँ.... ज़रा जल्दी से.... डॉक्टर शायद अभी थोड़ी दूर ही गया होगा।’’ फ़रीदी यह कहते-कहते कुर्सी पर एक तरफ़ लटक गया। उसका बायाँ हाथ ज़मीन पर झूल रहा था।

एडिटर घबरा कर खड़ा हो गया। वह उसे आवाज़ें दे रहा था, लेकिन बेकार। फ़रीदी बेहोश हो चुका था। बजाय इसके कि वह घण्टी बजा कर किसी को बुलाता, एडिटर ख़ुद बाहर की तरफ़ भागा। शायद वह डॉक्टर को बुलाने जा रहा था। उसने उसे इमारत के गेट पर ही जा लिया।

‘‘डॉक्टर.... डॉक्टर.... फ़ौरन वापस चलो.... दूसरे साहब भी बेहोश हो गये।’’

दूसरे दिन फ़रीदी और हमीद में बात हो रही थी। उस दिन के ‘न्यू स्टार’ का एडिशन मेज़ पर खुला हुआ पड़ा था।

‘‘देखो, आज उन दिलचस्प इश्तहारों का सिलसिला नहीं छपा।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘एडिटर ने माफ़ी भी माँगी है।’’ हमीद बोला। ‘‘यह देखिए, लिखता है, हमें अफ़सोस है कि अचानक काग़ज़ खो जाने की वजह से आज के अंक में ब्लैकमेलिंग का दिलचस्प इश्तहार प्रकाशित न हो सका।’’

‘‘यह बात तो उसने बिलकुल सच लिखी है।’’ फ़रीदी बोला। ‘‘काग़ज़ सचमुच खो गये हैं और शायद तुम यह भी जानते हो कि आजकल शहर में खोयी हुई चीज़ें मेरी जेब से बरामद होती हैं।’’

‘‘क्या मतलब....?’’ हमीद ने उसे ग़ौर से देखते हुए कहा।

‘‘यानी यह कि वह काग़ज़ इस वक़्त मेरी जेब में मौजूद है।’’ फ़रीदी ने जेब से एक तह किया हुआ काग़ज़ निकालते हुए कहा, ‘‘पढ़ो।’’

हमीद पढ़ने लगा।

‘‘लन्दन की हसीन रात कौन भूल सकता है, जब प्रिंस.... ने अपनी कुँवारी चचेरी बहन को एक रात के लिए अपनी बीवी बनाया था। लन्दन के जेंफ़र्ज होटल का कमरा नम्बर ११५ सुहाग रात की रंगीनियों से भरा हुआ था। प्रिंस की चचेरी बहन दूसरे ही दिन हिन्दुस्तान के लिए रवाना हो गयी। वापसी पर तीन दिन के अन्दर ही उसने एक जागीरदार से शादी कर ली। मेरे पास इसके काफ़ी सबूत मौजूद है कि वह जिस बच्चे की माँ बनने वाली है, वह जागीरदार का नहीं है। मैं उस प्रिंस और उसकी चचेरी बहन से १५ करोड़ रुपये का सौदा करता हूँ, अदायगी न होने की सूरत में यह राज़ उस जागीरदार को सबूत के साथ बताया जायेगा। लेन-देन इसी अख़बार के ज़रिये होगा।’’

‘‘लेकिन यह आपको मिला कैसे?’’ हमीद ने पूछा।

फ़रीदी ने उस रात के सारे हालात बताते हुए कहा, ‘‘मेरे बेहोश होते ही एडिटर घबरा कर डॉक्टर को बुलाने के लिए कमरे से बाहर निकल गया और मैंने जल्दी-जल्दी उस कमरे की तलाशी लेना शुरू कर दी। सबसे पहले मैंने मेज़ के दराज़ों को खोला। इत्तफ़ाक़ से यह काग़ज़ ऊपर ही रखा हुआ मिल गया। इतना काफ़ी था। मैंने जल्दी से इसे जेब में डाला और फिर बेहोश बन कर लेट गया। इस काग़ज़ पर दो आदमियों की उँगलियों के निशान मिले हैं और दूसरे निशान के बारे में अभी कुछ कह नहीं सकता। लेकिन मुझे जिस पर शक है, उसके पीछे तुम्हें लगाना चाहता हूँ। तुम आसानी से उसकी उँगलियों के निशान ले सकोगे।’’

‘‘वह कौन है?’’ हमीद ने बेताबी से पूछा।

‘‘वही शख़्स जो रात एडिटर के कमरे में बेहोश हो गया था।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘इसके लिए तुम्हें उसका ड्राइवर बनना पड़ेगा।’’

‘‘मैं समझ गया.... हाँ, आइडिया तो अच्छा है।’’ हमीद बोला। ‘‘लेकिन यह तो बताइए कि आपने होश में आने के बाद एडिटर को क्या बताया था कि आप उससे क्यों मिलने गये थे।’’

‘‘अरे, यह भी कोई ख़ास बात है।’’ फ़रीदी मुस्कुरा कर बोला। ‘‘मैंने कल के एक लेख के बारे में उससे बातचीत शुरू कर दी थी जो कुछ सरकार के ख़िलाफ़ था। मैंने उससे कहा कि ‘न्यू स्टार’ मुझे बहुत पसन्द है। मैं नहीं चाहता कि सरकार उस पर किसी क़िस्म की पाबन्दी लगा दे। लिहाज़ा इस क़िस्म के लेख न छापे जायें।’’

‘‘बहुत ख़ूब....!’’ हमीद ने कहा। ‘‘और उस शख़्स की अचानक बेहोशी के बारे में आपकी क्या राय है।’’
 
‘‘मेरा ख़याल है कि वह शख़्स यह विज्ञापन एडिटर को देने के लिए आया होगा और मौक़ा न देख कर उसने यह चाल चली। उसे बेहोश होते देख कर एडिटर ने अपने असिस्टेंट को डॉक्टर के लिए दौड़ाया। इस दौरान उसने वह विज्ञापन एडिटर को दिया होगा। जब वह होश में आया, उस वक़्त मैं वहाँ मौजूद था। मेरे अलावा डॉक्टर भी था। हम लोगों की मौजूदगी में उसने यही ज़ाहिर करना मुनासिब समझा कि वह एक मोटर ड्राइवर के लिए अख़बार में इश्तहार देना चाहता है।’’

हमीद ने कुछ समझते हुए सिर हिलाया।

‘‘इस अख़बार में प्रिंस अदनान की तरफ़ से एक ड्राइवर के लिए इश्तहार छपा हुआ है। लेकिन अब उसे धोखा देना मुश्किल हो जायेगा।’’ हमीद ने कहा।

‘‘तुम ठीक समझे! एडिटर ने उसे रात ही में ख़बरदार कर दिया होगा कि इश्तहार का काग़ज़ गुम हो गया है और वह भी समझ गया होगा कि यह काम मेरा ही है। इसमें शक नहीं कि अब प्रिंस अदनान काफ़ी एहतियात से काम लेगा।’’

‘‘आप ये सब बातें कैसे कह रहे हैं, जैसे आपको पूरा यक़ीन हो कि प्रिंस अदनान ही असली मुजरिम है।’’ हमीद ने कहा।

‘‘असली मुजरिम वह नहीं, बल्कि लियोनार्ड है। वह तो उसका एक एजेंट मालूम होता है।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘चलिए, एक न सही दो सही।’’ हमीद ने कहा। ‘‘मैं तो प्रिंस अदनान ही को लियोनार्ड समझ रहा था।’’

‘‘तुम ग़लत समझ रहे थे।’’ फ़रीदी मुस्कुरा कर बोला। ‘‘लियोनार्ड अंग्रेज़ है और प्रिंस अदनान हिन्दुस्तानी।’’

‘‘हिन्दुस्तानी या इराक़ी....?’’ हमीद ने कहा।

‘‘सौ फ़ीसदी हिन्दुस्तानी।’’

‘‘वह कैसे?’’

‘‘पहले तुम उसे एक बार देख आओ.... फिर बताऊँगा।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘तो मैं किस तरह जाऊँ।’’ हमीद ने कहा।

‘‘पैदल....!’’

‘‘ओ हाँ! मेरा यह मतलब नहीं।’’ हमीद ने झुँझला कर कहा। ‘‘मैं उससे किस हैसियत से मिलूँ।’’

‘‘नौकरी के लिए एक ड्राइवर की हैसियत से।’’

‘‘मगर वह अब काफ़ी होशियार हो गया होगा।’’

‘‘तब तो मुझे और भी ज़्यादा आसानी हो जायेगी।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘हमेशा याद रखो कि मुजरिम उस वक़्त बहुत आसानी से पकड़ में आ जाता है जब वह हद से ज़्यादा होशियार हो जाये। मैं तो यह चाहता ही हूँ कि तुम्हारे जाने पर उसे किसी तरह शक हो जाये कि यहाँ के जासूस उसके पीछे लग गये हैं।’’

हमीद ने ‘हाँ’ के अन्दाज़ में सिर हिलाया।

‘‘लेकिन एक बात का ख़ास ख़याल रखना।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘उस पर यह न ज़ाहिर होने पाये कि तुम बहुत अंग्रेज़ी जानते हो। बात टूटी-फूटी अंग्रेज़ी में ही करना और इस बात की कोशिश करना कि उसे शक न होने पाये। अगर शक हो भी गया तो उसकी फ़िक्र नहीं, क्योंकि इस सूरत में भी कोई-न-कोई रास्ता निकाल ही लूँगा।

‘‘मैं अच्छी तरह समझ गया।’’ हमीद ने कहा। ‘‘अच्छा तो मैं किस तरह जाऊँ.... क्या भेस बदलने की भी ज़रूरत होगी।’’

‘‘बिलकुल.... बग़ैर भेस बदले उसके सामने जाना भी मत। वरना सारा खेल बिगड़ जायेगा। आज तीन बजे तुम उसके यहाँ पहुँच जाना.... और हाँ, मैं अभी तुम्हें एक तजरुबेकार मिलिट्री ड्राइवर का सर्टिफ़िकेट भी दे दूँगा।’’

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नोक-झोंक

ख़ुफ़िया पुलिस के दफ़्तर में मिस्टर जैक्सन के कमरे में मुल्क के छै आला जासूसों की मीटिंग हो रही थी। फ़रीदी के अलावा हर एक अपनी रिपोर्ट मिस्टर जैक्सन के सामने पेश कर चुका था।

‘‘क्यों मिस्टर फ़रीदी, आप क्या सोच रहे हैं।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘मैं यह सोच रहा था कि एक ऐसे शख़्स का पता लगाना कितना मुश्किल है जिसे आज तक किसी ने न देखा हो, जिसकी तस्वीर डिपार्टमेंट ऑफ़ इनवेस्टिगेशन के दफ़्तर में मौजूद न हो। स्कॉटलैंड यार्ड वाले सिर्फ़ इसी बिना पर उसे पकड़ न सके कि उनके पास न तो तस्वीर थी और न दूसरे ऐसे निशान जिनसे वह पकड़ा जा सके।’’

‘‘तो इसका मतलब यह हुआ कि हमें नाउम्मीद हो जाना चाहिए।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘मैं यह भी नहीं कह सकता।’’ फ़रीदी ने कुछ सोचते हुए कहा। ‘‘हो सकता है कि वह हमारी पकड़ में आ ही जाये, लेकिन ऐसे लोगों का पकड़ा जाना सिर्फ़ इत्तिफ़ाक़ होता है। काम के किसी ख़ास तरीक़े पर अमल करके ऐसों को गिरफ़्तार कर लेना बिलकुल नामुमकिन है।’’

‘‘बहरहाल, इस बहस से कोई फ़ायदा नहीं।’’ जैक्सन ने कहा। ‘‘यह बताओ कि तुमने अब तक क्या किया।’’

‘‘मैंने आपसे अपने जिस शक का इज़हार किया था, उसके तहत मैं अख़बार के दफ़्तर में गया था, लेकिन वहाँ तहक़ीक़ात करने पर पता चला कि मैं ग़लती पर था। एडिटर ने मुझे बताया कि वह लोगों की दिलचस्पी के लिए इसी क़िस्म के दूसरे सिलसिले भी शुरू करने वाला है।’’

‘‘वह तो मैं पहले ही कह रहा था।’’ मिस्टर जैक्सन ने मुस्कुरा कर कहा।

‘‘अरे, फिर कहाँ आप और कहाँ मैं। आप बहरहाल हम सब के उस्ताद हैं।’’

जैक्सन हँसने लगा।

‘‘तो फिर अब तुम्हारा क्या इरादा है?’’ जैक्सन बोला।

‘‘मैं किसी ख़ास लाइन पर काम नहीं कर रहा हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘तो फिर इन जासूसों के बनाये हुए प्लान में उनके काम में शामिल हो जाओ।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘मैं इसे वक़्त बर्बाद करने के अलावा और कुछ नहीं समझता।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘यह आप किस तरह कह सकते हैं।’’ एक जासूस तेज़ आवाज़ में बोला। बाक़ी जासूसों के चेहरों से भी यही ज़ाहिर हो रहा था कि उन्होंने फ़रीदी के इस जुमले का बुरा माना है।

‘‘देखिए, जनाब यह शेर का शिकार तो है नहीं कि आपने हाँका लगा दिया और इसका इन्तज़ार करने लगे कि अभी शेर ख़ुद-ब-ख़ुद सामने आ जायेगा।’’ फ़रीदी ने मुस्कुरा कर कहा। ‘‘यह एक ऐसे आदमी का मामला है जिसे आज तक किसी ने देखा ही नहीं और फिर उसने यहाँ कोई वारदात भी नहीं की कि उसके सहारे किसी ख़ास नतीजे पर पहुँचा जा सके।’’

‘‘तो इसका मतलब यह है कि उसे गिरफ़्तार किया ही नहीं जा सकता।’’ दूसरा जासूस बोला।

‘‘अगर उसका कुछ पता-निशान न मिले तो मैं ऐसा ही समझता हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘मेरा तो ख़याल यह है कि जब तक वह ख़ुद हमरे सामने आ कर यह न कह दे कि वही लियोनार्ड है, उसका पकड़ा जाना मुश्किल है।’’ एक जासूस ने तेवर में कहा।

‘‘बेशक हालात तो ऐसे ही हैं।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘और फिर न घोड़ा दूर न मैदान, हर एक के जौहर खुल जायेंगे।’’

‘‘भई, आख़िर इस नोक-झोंक से क्या फ़ायदा।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘बहरहाल साहब, हम लोगों ने जो प्लान तैयार किया है उसी के मुताबिक़ काम करेंगे।’’ एक जासूस बोला। ‘‘आपको अख़्तियार है, चाहे आप हमारा साथ दें या न दें।’’

‘‘आपका ख़याल बिलकुल ठीक है।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘और यह ज़रूरी नहीं है कि हर मामले में मेरी राय ठीक ही हो। हो सकता है कि आपका बनाया हुआ प्लान ही ठीक हो। बहरहाल, मुझसे आप जिस वक़्त जो काम लेना चाहें, ले सकते हैं।’’

‘‘आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।’’ एक बूढ़े जासूस ने ग़ुस्से में कहा।

‘‘मैं यह चाहता हूँ कि आप लोग यह काम मिल-जुल कर करें।’’ जैक्सन ने कहा। ‘‘क्योंकि मुक़ाबला बहुत ही होशियार आदमी से है।’’

‘‘क़रीब-क़रीब हम सब भी यही चाहते हैं।’’ फ़रीदी ने हँस कर कहा।

थोड़ी देर के बाद वे सब मिस्टर जैक्सन के कमरे से उठ कर चले गये। फ़रीदी अपने कमरे में आ कर बैठ गया। उसने उँगलियों के वे निशान निकाले जो उसने अख़बार के दफ़्तर से चुराये हुए काग़ज़ पर से हासिल किये थे। थोड़ी देर तक उन्हें ग़ौर से देखता रहा फिर उठ कर रिकॉर्ड-रूम में चला गया। वहाँ उसने दो-तीन फाइलें निकालीं और उन्हें उलटता-पलटता रहा। तभी वह चौंक पड़ा....एक फ़ाइल में एक जगह किसी आदमी की उँगलियों के निशान थे। वह अपने हासिल किये हुए निशान से उनका मिलान करने लगा और फिर एक तस्वीर पर उसकी ऩजर पड़ी। अचानक उसकी ऊँघती हुई आँखों में अजीब क़िस्म की चमक पैदा हो गयी। वह देर तक उस फ़ाइल के काग़ज़ात को उलटता-पलटता रहा। इतने में घड़ी ने चार बजाये और उसने फ़ाइलें अलमारी में रख दीं और अपने कमरे में आ कर घर जाने की तैयारी करने लगा।
 
लगभग आठ बजे रात को हमीद लौट आया और आते ही एक सोफ़े पर ढेर हो गया।

‘‘ख़ैरियत....!’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘मैंने यह लफ़्ज़ आज तक नहीं सुना।’’

फ़रीदी समझ गया कि ज़रूर कोई ख़ास बात हुई है।

‘‘क्यों भई....!’’ आख़िर इतनी बदहवासी क्यों।

‘‘थका-थका कर मार डाला हराम़जादे ने।’’ हमीद ने कहा।

‘‘और आख़िर बाद में कह दिया तुम उस कार की हिफ़ाज़त न कर सकोगे, क्योंकि तुम हमेशा मिलिट्री लॉरियाँ चलाते रहे हो।’’

‘‘बहुत ख़ूब....!’’ फ़रीदी ने मुस्कुरा कर कहा। ‘‘तो उसने तुम्हारे सर्टिफ़िकेट देखे थे?’’

‘‘जी हाँ.... काफ़ी देर तक।’’ हमीद बोला। ‘‘और फिर उसने मुझसे कहा कि मैं तुम्हारा ट्रायल लेना चाहता हूँ.... यह कह कर जो उसने मुझे अपनी कार में जोता है तो अब फ़ुर्सत मिली है। काफ़ी घूम-फिर लेने के बाद उसने मुझे पाँच का नोट टिकाया और ठण्डे-ठण्डे विदा कर दिया।

‘‘ख़ैर, कोई परवाह नहीं.... मेरा मक़सद इतने ही में हल हो गया।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘लाओ, वे सर्टिफ़िकेट वापस कर दो।’’

‘‘कैसे सर्टिफ़िकेट....‘‘ हमीद ने संजीदगी से कहा। ‘‘वे तो उसी के पास रह गये।’’

‘‘क्या कहा....! उसके पास रह गये। उसके पास क्यों रह गये?’’

‘‘तो क्या मुझे वापस ले लेने चाहिए थे।’’ हमीद ने भोलेपन से कहा।

‘‘अजीब गधे आदमी हो।’’ फ़रीदी ने झुँझला कर कहा।

‘‘यह बिलकुल नामुमकिन है।’’ हमीद ने कहा। ‘‘मैं या तो गधा हो सकता हूँ या आदमी। एक ही वक़्त में गधा और आदमी होना मेरे बस की बात नहीं। चाहे फिर नौकरी रहे या जाये।’’

‘‘सीधी तरह निकालते हो सर्टिफ़िकेट या दूँ एक घूँसा।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘शौक़ से दीजिए मैं उसे बहुत ही हिफ़ाज़त से अपने बक्स में रख दूँगा।’’

‘‘क्या बकवास है।’’

‘‘हुज़ूर, यह बकवास नहीं, फ़लसफ़ा है।’’

‘‘जहन्नुम में जाओ तुम और तुम्हारा फ़लसफ़ा दोनों।’’ फ़रीदी ने झुँझला कर कहा। ‘‘लाओ.... लाओ, सर्टिफ़िकेट लाओ।’’

‘‘लीजिए जनाब.... आख़िर इस क़दर नाराज़ क्यों होते हैं।’’ हमीद ने जेब से सर्टिफ़िकेट निकाल कर फ़रीदी को दे दिया और मुँह फुलाये हुए कमरे से बाहर चला गया।

‘‘अजीब गधा है.... न मौक़ा देखता है और न वक़्त।’’ फ़रीदी बड़बड़ाता हुआ अजायब-घर वाले कमरे में घुस गया।

दिलचस्प धमकी

‘‘क्यों भई, तुम्हारा मुँह सीधा हुआ या नहीं।’’ फ़रीदी ने हमीद से कहा जो एक सोफ़े पर लेटा कोई किताब देख रहा था।

‘‘तो मेरा मुँह टेढ़ा कब था।’’ हमीद ने किताब पर से ऩजर हटाये बग़ैर कहा।

‘‘किताब बन्द करो।’’

‘‘लीजिए....!’’ हमीद ने किताब बन्द करके एक तरफ़ रखते हुए कहा।

‘‘उठ कर बैठ जाओ।’’

‘‘अगर मैं लेटे-लेटे ही बैठा रहूँ तो क्या बुराई है।’’

‘‘अगर तुम दो मिनट के अन्दर सीरियस न हुए तो मैं तुम्हारे दोनों कान उखाड़ लूँगा।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘अरे हुज़ूर! आप मेरी नाक भी उखाड़ सकते हैं।’’ हमीद ने कहा। ‘‘आपका मातहत जो ठहरा।’’

‘‘अच्छा बकवास बन्द....!’’

‘‘लीजिए.... बिलकुल बन्द।’’

‘‘जानते हो मैंने सर्टिफ़िकेट में क्या पाया।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘जी हाँ, जानता हूँ।’’

‘‘क्या....’’

‘‘सिनेमा के टिकट....!’’ हमीद ने मुस्कुरा कर कहा।

‘‘फिर वही हरकत।’’

‘‘कौन-सी।’’

‘‘तुम्हारा दिमाग़ ख़राब हो गया है।’’

‘‘तो फिर इसी बात पर मुझे तीन-चार महीने की छुट्टी दिलवा दीजिए।’’

‘‘अच्छा....!’’ फ़रीदी ने ग़ुस्से में कहा और फिर कमरे से जाने लगा।

हमीद ने उठ कर उसे पकड़ लिया।

‘‘आख़िर आजकल आप इतने चिड़चिड़े क्यों हो गये हैं।’’ हमीद ने कहा।

‘‘इस वक़्त हट जाओ.... मैं अब थोड़ी देर बाद ही तुमसे बात करने के क़ाबिल हूँगा।’’

‘‘और अगर आप थोड़ी देर बाद भी इस क़ाबिल न हुए तो?’’ हमीद ने मासूमियत से पूछा।

‘‘ओ फ़रीदी के बाप! मैंने उस सर्टिफ़िकेट में अपनी तस्वीर एक बूढ़ी औरत को चूमते हुए पायी है।’’ फ़रीदी ज़ोर से चीख़ा।

‘‘क्या मतलब....!’’ हमीद ने उसे घूरते हुए कहा।

फ़रीदी ने तह किये हुए सर्टिफ़िकेटों के बीच में से एक तस्वीर निकाल कर हमीद की तरफ़ बढ़ा दी।

हमीद देख कर बेतहाशा हँसने लगा।

‘‘मैं आप को इतना बदमज़ाक़ नहीं समझता था।’’ हमीद ने हँसी रोकते हुए कहा। ‘‘यह तो वही मिस्ल हुई....तौबा टूटी भी तो टूटे हुए पैमाने से?’’

‘‘फिर वही बकवास।’’ फ़रीदी ने चीख़ कर कहा। ‘‘मैं तुम्हें इतना बदतमीज़ नहीं समझता था।’’ फ़रीदी को सचमुच ग़ुस्सा आ गया था।

‘‘मैंने क्या बदतमीज़ी की।’’ हमीद ने सहम कर कहा।

‘‘यह तस्वीर कहाँ से आयी।’’
 
‘‘मैंने क्या बदतमीज़ी की।’’ हमीद ने सहम कर कहा।

‘‘यह तस्वीर कहाँ से आयी।’’

‘‘ख़ुदा की कसम, मैं नहीं जानता।’’ हमीद ने संजीदगी से कहा। ‘‘मुझे जिस हालत में उसने सर्टिफ़िकेट दिये मैंने जेब में डाल लिये थे और बिलकुल वैसे ही आपको वापस कर दिये थे।’’

फ़रीदी कुछ सोचने लगा।

‘‘समझा....!’’ उसने थोड़ी देर बाद समझने के अन्दाज़ में सिर हिला कर कहा।

‘‘क्या....!’’

‘‘जानते हो, यह औरत कौन है?’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘नहीं....!’’

‘‘ज़िलाधिकारी मिस्टर रॉबर्ट की बीवी।’’

‘‘तो क्या वाक़ई आप....!’’

‘‘क्या फ़िज़ूल बकते हो।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘फिर आख़िर....!’’

‘‘यह लियोनार्ड की तरफ़ से मेरे लिए एक ख़ामोश धमकी है।’’

‘‘मगर यह तस्वीर हाथ की बनायी हुई है नहीं।’’ हमीद ने कहा।

‘‘तुम्हें इतनी ही अक़्ल होती तो फिर रोना किस बात का था।’’

‘‘कुछ बताइए भी तो....!’’

‘‘अरे मियाँ, अलग फ़िल्मों पर दो तस्वीरें ले कर उन्हें मिला देना कोई मुश्किल काम नहीं।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘ओह.... भई, मान गया। वाक़ई लियोनार्ड को जैसा सुना था, वैसा ही पाया।’’ हमीद ने कहा।

‘‘मैंने तुम्हें यह सर्टिफ़िकेट सिर्फ़ इसलिए दिये थे कि उनके ज़रिये मैं प्रिंस अदनान की उँगलियों के निशान हासिल कर सकूँगा। मगर बेकार, जो शख़्स इतना लम्पटबाज़ हो ऐसी ग़लती नहीं कर सकता।’’

‘‘ओह.... ठीक, याद आया।’’ हमीद ने कुछ सोचते हुए कहा। ‘‘उसने सर्टिफ़िकेट लेते वक़्त दस्ताने पहन लिये थे।’’

फ़रीदी फिर कुछ सोचने लगा।

‘‘उसने मुझे धमकी दी है कि अगर मैंने उसका पीछा किया तो वह इस क़िस्म की दूसरी तस्वीर ज़िलाधिकारी तक पहुँचा देगा।’’

‘‘यह तो बहुत बुरा हुआ।’’ हमीद ने कहा। ‘‘क्या ज़िलाधिकारी की बीवी से आपकी जान-पहचान है।’’

‘‘बिलकुल नहीं....!’’

‘‘वाक़ई, बहुत बुरे फँसे।’’ हमीद ने कहा।

‘‘ओह.... देखा जायेगा।’’ फ़रीदी ने भवें सिकोड़ कर कहा। ‘‘अब सबसे पहले प्रिंस अदनान को ठिकाने लगाना चाहिए।’’

‘‘वह किस तरह।’’

‘‘अभी मैं उसके बारे में कोई सही स्कीम नहीं बना सका, लेकिन यह तय कर लिया है कि उसे किसी तरह जकड़ लूँ।’’

‘‘मगर यह चीज़ ख़तरनाक होगी।’’

‘‘क्यों....!’’

‘‘इसलिए कि अगर आपके कहने के मुताबिक़ वह ख़ुद लियोनार्ड नहीं है तो आप ख़तरे में पड़ जायेंगे। लियोनार्ड इस तस्वीर को ज़िलाधिकारी के हवाले कर देगा।’’

फ़रीदी फिर कुछ सोचने लगा।

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