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Faridi aur Leonard ibne safi

अजनबी हसीना

रात बहुत ज़्यादा ठण्डी थी, आसमान में काले बादल मँडरा रहे थे। हवा तेज़ थी, कभी-कभी दिल दहला देने वाली गरज और चमक से बड़ी-बड़ी इमारतों में एक अजीब क़िस्म की झंकार-सी पैदा हो जाती थी। एक बज चुके थे, लेकिन फ़रीदी अभी तक अपने सोने वाले कमरे में टहल-टहल कर, सिगार-पर-सिगार फूँक रहा था। थोड़ी देर बाद बारिश होने लगी। फ़रीदी ने खिड़कियाँ बन्द कर दीं।

अभी वह लेटने के इरादे से पलँग पर बैठा ही था कि कुत्तों के भौंकने की आवाज़ सुनायी दी और ऐसा मालूम हुआ जैसे कोई बरामदे में गिर पड़ा हो। वह तेज़ी से बरामदे की तरफ़ लपका। पोर्टिको में उसके कुत्ते खड़े भौंक रहे थे। फ़रीदी ने उन्हें डाँटते हुए बरामदे का बल्ब जलाया।

‘‘अरे....!’’ वह चौंक कर एक क़दम पीछे हट गया।

बरामदे में एक औरत औंधी पड़ी हुई थी। उसकी क़ीमती साड़ी पिण्डलियों तक सरक आयी थी। उसने गरम और उम्दा लिबास और ऊपर से लबादा पहन रखा था, पहने कपड़े क़रीब-क़रीब बिलकुल भीग चुके थे।

फ़रीदी उसके क़रीब जा कर बैठ गया। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। हिम्मत करके उसने उसे सीधा किया। औरत नौजवान थी। उसकी पलकें घनी थीं जिनकी गोद में झील की तरह दो आँखें सो रही थीं। लाल और गोरा चेहरा कुछ और ख़ूबसूरती पैदा कर रहा था। वह गहरी-गहरी साँस ले रही थी। उसके ख़ूबसूरत जिस्म में हाथ लगाते वक़्त फ़रीदी जैसा सूखा आदमी भी एक बार सिर से पैर तक काँप उठा था।

आख़िर वह हिम्मत करके इस बेहोश लड़की को हाथों पर उठा कर अपने कमरे में ले आया और पलँग पर लिटा दिया।

अब वह एक दूसरी उलझन में पड़ गया था। उसके भीगे हुए कपड़े किस तरह बदले। यह मसला कुछ पेचीदा था। आख़िर उसने उसे ज्यों-का-त्यों रहने दिया। सिर्फ़ इतना किया कि उसे कम्बलों से चारों तरफ़ से ढँक दिया और रूम हीटर से कमरा गरम करने का इन्तज़ाम करने लगा। उसने सोचा कि हमीद को भी जगा दे, लेकिन उसकी बदमज़ाक़ी का ख़याल आते ही ठहर गया। उसने लड़की के जूते उतार दिये थे और अब उसके नाज़ुक पैरों को देख रहा था।

थोड़ी देर बाद उसकी घनी पलकों के नीचे आँखें हिलीं। फ़रीदी उस पर झुक गया। वह धीरे-धीरे होश में आ रही थी। आँखें ज़रा-सी खुलीं और फिर बन्द हो गयीं। फिर उसने आँखें फाड़-फाड़ कर चारों तरफ़ देखना शुरू कर दिया। अचानक वह झटके के साथ उठ बैठी।

‘‘आप इत्मीनान रखिए। आप बिलकुल महफ़ूज़ हैं।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘लेकिन मैं कहाँ हूँ।’’ लड़की बोली।

‘‘घबराइए नहीं.... आप बुरे लोगों में नहीं।’’ फ़रीदी ने कहा।

लड़की सिर झुकाये सोचने लगी।

‘‘आप अभी लेटी ही रहिए तो बेहतर है।’’ फ़रीदी बोला।

लड़की उसे ख़ौफ़जदा हो कर देखने लगी।

‘‘आप बेकार में परेशान हो रही हैं। इत्मीनान रखिए, आप बिलकुल महफ़ूज़ हैं।’’

फ़रीदी ने उसे फिर दिलासा दिया। लड़की फिर लेट गयी।

‘‘आपके कपड़े भीगे हुए हैं।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘मुझे अफ़सोस है कि मैं आपके लिए ज़नाना कपड़ों का इन्तज़ाम न कर सकूँगा। अगर आप कुछ ख़याल न करें तो कुछ वक़्त के लिए मर्दाना कपड़े ही पहन लें। जब तक कि आपके कपड़े सूख न जायें।’’

लड़की ने कोई जवाब न दिया।

‘‘भीगे कपड़े आपको नुक़सान पहुँचा सकते हैं.... मेरे ख़याल से आपको इसमें कोई ऐतराज़ न होना चाहिए।’’

लड़की बदस्तूर ख़ामोश रही।

जब वह वापस आया तो उसके हाथों में उसके सोने वाले कपड़े थे।

‘‘लीजिए, कपड़े बदल डालिए।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘मैं तब तक चाय का इन्तज़ाम करता हूँ।’’

‘‘नहीं.... आपको बहुत तकलीफ़ हो रही है।’’ लड़की जल्दी से बोली।

‘‘नहीं, तकलीफ़ की कोई बात नहीं, इस वक़्त चाय आपके लिए ज़रूरी है।’’ फ़रीदी ने कहा और कमरे में चला गया।

लड़की ने उठ कर अपने भीगे हुए कपड़े उतारे और फ़रीदी के कपड़े पहन लिये। उन ढीले-ढाले कपड़ों में वह सर्कस के जोकर जैसी मालूम होने लगी थी। कपड़े बदलने के बाद उसने रूम हीटर का प्लग निकाल दिया। फिर पलँग पर अच्छी तरह कम्बल ओढ़ कर बैठ गयी।

थोड़ी देर बाद फ़रीदी ट्रे में चाय ले कर आ गया। उसने इतनी रात को नौकरों को जगाना ठीक न समझा। इसलिए उसने चाय ख़ुद ही बना ली थी।

‘‘मुझे सख़्त शर्मिन्दगी है।’’ लड़की बोली।

‘‘शर्मिन्दगी किस बात की।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘बेकार ही में आपको तकलीफ़ हो रही है।’’ लड़की बोली।

‘‘भई, इसमें तकलीफ़ की क्या बात है।’’ फ़रीदी ने उसकी तरफ़ चाय की प्याली बढ़ाते हुए कहा।

‘‘शुक्रिया....!’’ लड़की ने कहा। चाय लेते वक़्त उसका हाथ काँप रहा था।

फ़रीदी आराम-कुर्सी पर अधलेटा हो कर सिगार सुलगाने लगा।

‘‘सिगार के धुएँ से आपको तकलीफ़ तो न होगी।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘जी नहीं.... बिलकुल नहीं।’’ लड़की मुस्कुरा कर बोली।

‘‘मेरे ख़याल से आप एक कप और पीजिए।’’

‘‘जी नहीं, बस.... शुक्रिया।’’
 
‘‘आप तकल्लुफ़ कर रही हैं।’’ फ़रीदी ने हँस कर कहा और उसके कप में चाय उँडेलने लगा।

‘‘तो आप भी पीजिए....!’’ लड़की ने कहा।

‘‘मेरे लिए बिलकुल नाकाफ़ी हो जायेगी।’’ फ़रीदी ने कहा।

लड़की चाय पी चुकी थी। उसके चेहरे से ऐसा मालूम हो रहा था जैसे वह कुछ कहना चाहती हो।

फ़रीदी आँखें बन्द किये ख़ामोशी से सिगार पी रहा था।

‘‘मगर.... मगर....’’ लड़की ने कहा। ‘‘मुझे हैरत है कि आपने अभी तक मेरे बारे में कुछ नहीं पूछा।’’

फ़रीदी आँखें खोल कर मुस्कुराया।

‘‘अगर आप ज़रूरी समझेंगी तो ख़ुद-ब-ख़ुद बता देंगी।’’ फ़रीदी ने कहा।

लड़की उसे हैरत से देखने लगी।

‘‘क्या यह फ़रीदी साहब का मकान नहीं है?’’ लड़की ने पूछा।

‘‘सौ फ़ीसदी उन्हीं का है।’’ फ़रीदी ने कहा और सिगार के हल्के-हल्के कश लेने लगा।

‘‘क्या फ़रीदी साहब इस वक़्त मौजूद हैं?’’ लड़की ने पूछा।

‘‘जी हाँ।’’

‘‘शायद सो रहे होंगे...’’ लड़की ने कहा। ‘‘अगर उन्हें इस वक़्त जगाया जाये तो वह बुरा तो न मानेंगे।’’

‘‘बिलकुल नहीं....!’’ फ़रीदी ने मुस्कुरा कर कहा। ‘‘उन्होंने बिलकुल बुरा नहीं माना।’’

‘‘तो क्या आपने उन्हें मेरे बारे में बता दिया है।’’ लड़की बोली।

‘‘बताना कैसा.... वह देर से आपको देख रहे हैं।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘ओह.... तो क्या वह क़रीब ही के कमरे में हैं।’’ लड़की बेताबी से बोली। ‘‘ख़ुदा के लिए उनके पास ले चलिए।’’

‘‘आख़िर क्यों....?’’

‘‘यह मैं उन्हीं से बताऊँगी।’’ लड़की ने कहा। ‘‘माफ़ कीजिएगा.... बात ही कुछ ऐसी है।’’

‘‘तो बयान करना शुरू कर दीजिए।’’

‘‘मैंने कहा न, कि मैं यह बात सिर्फ़ उन्हीं को बता सकती हूँ।’’ लड़की ने थोड़ा दबी आवाज़ में कहा।

‘‘बुरा मानने की बात नहीं।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘मैं आपसे कब कहता हूँ कि आप किसी दूसरे को बतायें।’’

‘‘तो क्या.... तो क्या.... आप ही फ़रीदी साहब हैं।’’

‘‘जी....!’’

‘‘ओह.... तब माफ़ कीजिएगा। मुझे ग़लत-फ़हमी हुई थी। मैं आपको बूढ़ा समझती थी।’’

‘‘आप अब भी मुझे बूढ़ा ही समझिए।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘फ़रमाइए, मैं आपकी क्या ख़िदमत कर सकता हूँ।’’

लड़की कुछ सोचने लगी। उसका चेहरा बार-बार शर्म से लाल हो जाता था। फ़रीदी उसके चेहरे की तब्दीलियों को ग़ौर से देख रहा था।

‘‘मैं दरअसल इसलिए आयी....!’’ लड़की उससे ज़्यादा न कह सकी। शर्म से उसके चेहरे पर पसीना आ गया था।

‘‘कहिए, कहिए.... मेरा सीना राज़ों का मक़बरा है। आप इत्मीनान रखिए।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘मेरी समझ में नहीं आता कि कैसे कहूँ।’’ लड़की ने कहा।

‘‘यह तो ज़रा मुश्किल चीज़ है.... भला मैं कैसे बता सकता हूँ कि आप कैसे कहें।’’
 
लड़की फिर सोचने लगी।

‘‘आप मेरे ऊपर पूरा-पूरा भरोसा कर सकती हैं।’’ फ़रीदी ने कहा।

लड़की उसकी तरफ़ ग़ौर से देखने लगी।

‘‘आप.... रोज़नामा न्यू स्टार पढ़ते हैं।’’ लड़की अचानक बोली।

फ़रीदी चौंक पड़ा, लेकिन उसने फ़ौरन ही अपनी हालत पर क़ाबू पाते हुए कुछ ऐसा अन्दाज़ अपनाया जैसे उसने कोई ख़ास बात न पूछी हो। उसके दिल में शक जाग गया कहीं यह लड़की लियोनार्ड के गिरोह से तो ताल्लुक़ नहीं रखती। कहीं वह उसे बदनाम करने के लिए कोई दूसरी चाल तो नहीं चल रहा है।

‘‘पढ़ता हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘हमारे शहर में उसके अलावा दूसरा अख़बार ही कौन-सा है जो पढ़े जाने के क़ाबिल हो।’’

‘‘आपने उसमें वो इश्तहार जैसी धमकियाँ भी पढ़ी होंगी, जो आये दिन चन्द जानी-मानी हस्तियों के बारे में छपा करती हैं।’’

‘‘इश्तहार जैसी धमकियाँ।’’ फ़रीदी ने ताज्जुब से कहा। ‘‘मैं आपका मतलब नहीं समझा।’’

‘‘अरे, वही ब्लैक-मेलिंग के इश्तहारों के नमूने।’’ लड़की बोली।

‘‘अच्छा वो....!’’ फ़रीदी ने लापरवाही से कहा। ‘‘हाँ, पढ़े तो हैं।’’

‘‘उनके बारे में आपका क्या ख़याल है।’’

‘‘ख़याल.... हाँ, दिलचस्पी के लिए अच्छा है।’’

‘‘दिलचस्पी।’’ लड़की जोश में बोली। ‘‘मगर मैं साबित कर सकती हूँ कि उनके ज़रिये सौ फ़ीसदी ब्लैक-मेलिंग हो रही है।’’

‘‘अच्छा....’’ फ़रीदी ने हैरत से कहा।

‘‘जी हाँ।’’

‘‘लेकिन कैसे....?’’

‘‘उसी अख़बार की यह कटिंग देखिए।’’ लड़की ने उसकी तरफ़ काग़ज़ का एक टुकड़ा बढ़ाते हुए कहा।

फ़रीदी उसे पढ़ कर उसकी तरफ़ ग़ौर से देखने लगा।

‘‘वह बदनसीब नवाबज़ादी मैं ही हूँ।’’ लड़की रुँधी हुई आवाज़ में बोली।

‘‘अच्छा....!’’ फ़रीदी ने हैरत से कहा। ‘‘लेकिन यह आप कैसे कह सकती हैं।’’

‘‘इसलिए कि बिलकुल इसी क़िस्म का ख़त मुझे स्विट्ज़रलैंड में भी मिला था और इसी के साथ एक तस्वीर भी थी।’’

‘‘तो क्या यह प्राइवेट सेक्रेटरी वाला मामला सच है।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘मगर.... नहीं, मैं क्यों यह पूछ रहा हूँ। माफ़ कीजिएगा।’’

‘‘आप बिलकुल पूछ सकते हैं, बल्कि मैं आपको वह तस्वीर भी दिखा सकती हूँ।’’ लड़की जोश में बोली। ‘‘जब कर नहीं तो डर नहीं। मेरा ज़मीर इस पर मेरी मलामत नहीं करता।’’ लड़की ने एक तस्वीर फ़रीदी की तरफ़ बढ़ा दी।

इस तस्वीर में एक नौजवान आदमी उसे गोद में उठाये खड़ा था।

‘‘क्या कहा आपने,’’ फ़रीदी ने ताज्जुब और तंज़-भरे लहजे में कहा, ‘‘कि आपका ज़मीर आपकी मलामत नहीं करता है?’’

‘‘जी हाँ!’’ लड़की तेज़ आवाज़ में बोली। ‘‘स्विट्ज़रलैंड के एक पार्क में सिर में चोट लगने की वजह से मैं बेहोश हो गयी थी। मेरा प्राइवेट सेक्रेटरी भी मेरे साथ था.... वह मुझे उठा कर हस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी की तरफ़ ले जा रहा था कि उसी दौरान किसी ने मेरा फ़ोटो खींच लिया.... और बस।’’

‘‘ओह समझा....!’’ फ़रीदी ने मानीख़ेज़ अन्दाज़ में सिर हिला कर कहा। ‘‘फिर आप मुझसे क्या चाहती हैं।’’

‘‘मैं बीस करोड़ कहाँ से लाऊँगी।’’ लड़की ने कहा।

‘‘तो फिर मैं इस सिलसिले में आपकी क्या मदद कर सकता हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा।
 
‘‘किसी तरह मुझे इस मुसीबत से बचाइए।’’ लड़की ने बेबसी से कहा। ‘‘अगर वाक़ई यह तस्वीर छप गयी तो मैं किसी को मुँह दिखाने के क़ाबिल न रह जाऊँगी। ऐसी सूरत में मेरे ज़मीर की सफ़ाई भी मेरी मदद न कर सकेगी। दुनिया की ज़बान को कौन रोक सकता है। तो फिर अब्बा जान तो मुझे ज़िन्दा ही दफ़्न कर देंगे।’’

‘‘अच्छा.... आपने इस अख़बार के दफ़्तर वालों से इस सिलसिले में कोई ख़तो-किताबत भी की?’’ फ़रीदी ने पूछा।

‘‘अभी नहीं।’’ लड़की ने कहा। ‘‘सबसे पहले मैंने यही मुनासिब समझा कि आपसे मिलूँ। एक दिन राजरूप नगर के नवाज वजाहत मिर्ज़ा अब्बा जान से आपकी बहुत तारीफ़ कर रहे थे। मैंने बातों-ही-बातों में उनसे आपका पता पूछा और यहाँ चली आयी।’’

‘‘यह आपने बहुत अच्छा किया। अगर आपने इससे पहले कुछ ख़तो-किताबत की होती तो इतनी आज़ादी से यहाँ तक नहीं पहुँच सकती थीं।’’

‘‘क्यों....?’’

‘‘आपके पीछे आदमी लग गये होते।’’

‘‘अच्छा....!’’

‘‘जी हाँ।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘आप यहाँ कहाँ रहती हैं?’’

‘‘फ़िलहाल न मैं आपको अपना नाम बताऊँगी और न घर का पता।’’

‘‘मैं इसके लिए आपको मजबूर नहीं करूँगा।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘लेकिन मैं किस तरह यक़ीन कर लूँ कि आप वही नवाबज़ादी हैं। हो सकता है कि आप उसी गिरोह से ताल्लुक़ रखती हों, जिसके ख़िलाफ़ आप शिकायत ले कर आयी हैं।’’

‘‘आपका ऐतराज़ दुरुस्त है।’’ लड़की ने कहा। ‘‘वाक़ई ऐसी सूरत में इसका सबूत मैं आपको नहीं दे सकती।’’

फ़रीदी कुछ सोचने लगा। लड़की की सादगी का अन्दाज़ा उसे इस बात पर मजबूर कर रहा था कि उसके बयान को सही मान ले। उसकी ख़ूबसूरत आँखों में उसे ज़र्रा बराबर मक्कारी की झलक न दिखायी दी।

‘‘देखिए.... मुझे मायूस न कीजिएगा।’’ लड़की भर्रायी हुई आवाज़ में बोली।

‘‘आख़िर आपको अपने बारे में साफ़ तौर पर बताने में क्या नुक़सान है।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘मैं अपने ख़ानदान की बदनामी नहीं चाहती....’’ लड़की बोली। ‘‘इससे बेहतर तो यही होगा कि मैं ख़ुदकुशी कर लूँ।’’

‘‘आप इत्मीनान रखिए कि यह चीज़ मुझ तक ही महदूद रहेगी।’’ फ़रीदी ने कहा।

लड़की सोच में पड़ गयी।

‘‘आपने नवाब रशीदुज़्ज़माँ का नाम सुना है।’’ लड़की धीरे से बोली।

‘‘ओह.... तो कहिए आप ग़ज़ाला ख़ानम हैं।’’ फ़रीदी मुस्कुरा कर बोला।

‘‘आपको कैसे मालूम हुआ?’’ लड़की अचानक चौंक कर बोली।

‘‘मैंने आपके बारे में नवाब वजाहत मिर्ज़ा के लड़के डॉक्टर शौकत से सुना था।’’

‘‘तो क्या आप उन लोगों को जानते हैं?’’

‘‘अच्छी तरह।’’

‘‘ख़ैर, छोड़िए इन बातों को।’’ लड़की बोली। ‘‘अब बताइए आप मेरे लिए कुछ करेंगे या नहीं?’’

‘‘ आख़िर आप क्या चाहती हैं?’’

‘‘मैं चाहती हूँ कि किसी तरह वह तस्वीर निगेटिव समेत मुझे मिल जाये।’’

‘‘मैं कोशिश करूँगा। लेकिन आपको उस वक़्त तक ठहरना पड़ेगा जब तक कि आपको तस्वीर वापस न मिल जाये।’’

‘‘मैं तैयार हूँ।’’

‘‘दूसरी बात यह कि कल ही आप उस नामालूम आदमी को उसी अख़बार के ज़रिये ख़त लिखिए और उससे पूछिए कि उसे रक़म कैसे पहुँचायी जाय। आप इतना कर लीजिए, बाक़ी मैं देख लूँगा। ख़त का जवाब आये तो उसे मेरे पास भिजवा दीजिएगा। मेरा आदमी आपसे ‘होटल गुलिस्ताँ’ में मिलता रहेगा। अब आप यहाँ न आइएगा और न किसी पर यह ज़ाहिर होने दीजिएगा कि आप मुझसे मिल चुकी हैं।’’

‘‘मैं इस सिलसिले में बिलकुल किसी को कुछ नहीं बताऊँगी।’’ लड़की ख़ुश होते हुए बोली। ‘‘मैं आपका यह एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूलूँगी।’’

‘‘ख़ैर, ये सब बाद की बातें हैं।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘चलिए, मैं आपको ‘होटल गुलिस्ताँ’ तक छोड़ आऊँ।’’

‘‘इस तकलीफ़ का बहुत-बहुत शुक्रिया।’’ लड़की उठती हुई बोली।

‘‘अभी आपके कपड़े नहीं सूखे।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘मेरे ख़याल से आप इन्हीं कपड़ों पर मेरा ओवरकोट पहन लीजिए। हालाँकि आप मज़ाक़िया ज़रूर लगेंगी, मगर क्या किया जाये।’’

‘‘मुझे इसकी परवाह नहीं।’’ लड़की बोली। ‘‘ख़ुद को दिखाने से ज़्यादा मुझे अपने आराम और तकलीफ़ का ख़याल रहता है।’’

‘‘यही होना चाहिए।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘अच्छा, आप इस कोट को पहनिए, मैं जा कर गैरेज से गाड़ी निकालता हूँ।’’

रास्ते में लड़की ने महसूस किया कि फ़रीदी की जगह कोई और ड्राइव कर रहा है। वह ठिठकी ही थी कि आवाज़ आयी।

‘‘घबराइए नहीं.... मैंने अपनी असली शक़्लो-सूरत में आपके साथ जाना ठीक न समझा।’’

लड़की ख़ामोशी से सीट पर टेक लगा कर बैठ गयी।

आसमान पर अभी तक काले-काले बादल मँडरा रहे थे। बारिश कुछ कम हो गयी थी।

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धोखा

रात देर तक जागते रहने की वजह से फ़रीदी दिन चढ़े तक सोता रहा। अगर हमीद आ कर जगा न देता तो शायद वह और देर तक सोता रहता। फ़रीदी ने लेटे-लेटे एक बड़ी अँगड़ाई ली और हमीद को मेज़ पर से सिगार का डिब्बा उठाने के लिए कहा।

‘‘मैं उस तरफ़ नहीं जा सकता।’’ हमीद ने बेसाख़्ता कहा।

‘‘क्यों?’’

‘‘उधर किसी औरत के कपड़े रखे हैं.... मुझे शर्म आती है।’’ हमीद ज़नाना अन्दाज़ में नाक पर उँगली रखते हुए बोला।

फ़रीदी मुस्कुराने लगा।

‘‘उठाते हो या उठ कर मरम्मत कर दूँ तुम्हारी।’’

‘‘माफ़ कीजिएगा.... अफ़सरी और मातहती दुनिया ही तक है।’’ हमीद ने संजीदगी से कहा। ‘‘जहन्नुम की आग आपके ग़ुस्से से ज़्यादा भयानक न होगी।’’

‘‘अच्छा, मौलाना-ए-मोहतरम, दफ़ा हो जाओ यहाँ से, वरना....!’’ फ़रीदी ने उठते हुए कहा।

‘‘तो इसमें नाराज़ होने की क्या बात है.... लीजिए न सिगार।’’ हमीद ने सिगार का डिब्बा उसकी तरफ़ बढ़ाते हुए कहा।

‘‘देखो, अगर वह साड़ी सूख गयी हो तो उसे तह करके रख दो।’’ फ़रीदी बोला।

‘‘जी....!’’ हमीद ज़ोर से चीख़ा। ‘‘क़सम है उस ख़ुदा की जिसने मुझे मर्द और आपको औरत बनाया.... अरे, लाहौल विला कूवत.... दोनों को मर्द बनाया.... मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता।’’

‘‘क्या बकते हो!’’

‘‘अब मैं यहाँ नहीं रह सकता।’’ हमीद ने कहा।

‘‘क्यों....?’’ फ़रीदी मुस्कुरा कर बोला।

‘‘इसलिए कि अब यहाँ अय्याशी होने लगी है।’’ हमीद ने संजीदगी से कहा। ‘‘अगर वालिद साहब को ख़बर हो गयी तो वे मुझे क़त्ल कर देंगे।’’

‘‘क्या फ़िज़ूल बकबक लगा रखी है?’’

‘‘सब फ़िज़ूल तो है ही.... रात वाली तस्वीर लियोनार्ड की धमकी थी।’’ हमीद ने मुँह बना कर कहा। ‘‘और यह साड़ी.... यह ब्लाउज़.... यह लेडीज़ कोट.... यह सब भी शायद धमकी है हाय....तौबा-तौबा.... अरे अल्लाह मियाँ, आख़िर क़यामत कब आयेगी।’’

फ़रीदी हँसने लगा।

‘‘अरे भई, तो क्या मैं आदमी नहीं हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘आप आदमी कब से हो गये।’’ हमीद बोला। ‘‘आप तो कहा करते थे कि मैं जासूस हूँ।’’

‘‘गधे जासूस नहीं हुआ करते।’’

‘‘यह बात आज ही समझ में आयी है।’’

फ़रीदी ख़ामोश हो गया। वह सोच रहा था कि हमीद को रात का वाक़या बताये या न बताये। आख़िर उसने यही फ़ैसला किया कि हमीद को भी उससे आगाह कर दे, क्योंकि फ़रीदी उससे बहुत ही अहम काम लेने थे।

हमीद सारी दास्तान सुन चुकने के बाद कुर्सी से ब्लाउज़ उठा कर सूँघने लगा।

‘‘यह क्या हरकत है।’’ फ़रीदी ने संजीदगी से कहा।

‘‘सूँघ रहा हूँ कि उसकी उम्र क्या हो सकती है।’’ हमीद ने कहा। ‘‘रात वाली तस्वीर देखने के बाद से मैं आपकी तरफ़ से थोड़ा–सा बेइत्मीनान हो गया हूँ।’’

‘‘अबे गधे, किसी वक़्त तो संजीदा हो जाया कर।’’ फ़रीदी ने कड़क आवाज़ में कहा।

‘‘अगर मैं गधा हूँ तो मेरी संजीदगी में आपको शक न होना चाहिए।’’

‘‘अच्छा, अब बकवास बन्द करते हो या तुम्हारा गला दबा दूँ।’’ फ़रीदी ने उठते हुए कहा।

‘‘बस, ख़ुदा की क़सम, एक झलक मुझे भी दिखा दीजिए।’’ हमीद ने हँस कर कहा।

‘‘क्यों? आप क्या करेंगे देख कर?’’

‘‘तौबा करूँगा.... कान पकड़ूँगा। उसके नहीं, बल्कि अपने।’’ हमीद ने कहा। ‘‘तौबा इसलिए करूँगा कि अभी तक मैं आपको बिलकुल ग़लत समझता रहा हूँ।’’

‘‘तुम्हारा दिमाग़ बिलकुल ख़राब होने वाला है।’’

‘‘खरी बात कहने वाले हमेशा पागल समझे जाते हैं।’’

‘‘अच्छा बरख़ुरदार.... मेरा पीछा छोड़ो.... तुम तो नाश्ता कर चुके होगे। यहाँ भूख के मारे बुरा हाल हो रहा है।’’

‘‘लेकिन मैंने सुना है कि आशिक़ों को भूख लगती ही नहीं।’’ हमीद ने कहा।

‘‘अच्छा, अब बकवास बन्द करो.... वरना....!’’

‘‘आज ही शादी कर लूँगा....!’’ हमीद ने फ़रीदी का जुमला पूरा कर दिया।

फ़रीदी बड़बड़ाता हुआ कमरे से चला गया।

हमीद साड़ी, ब्लाउज़, ओवरकोट को बड़ी देर तक उलटपलट कर देखता रहा। तभी उसकी आँखों में एक चमक पैदा हो गयी। वह हँसता हुआ बरामदे में निकल आया। फ़रीदी बरामदे में बैठा शेव कर रहा था।

‘‘किसी ने ठीक ही कहा है।’’ हमीद ने बुलन्द आवाज़ में कहा।

‘‘क्या है भई.... क्यों बेकार में गला फाड़ रहे हो।’’ फ़रीदी ने तेज़ आवाज़ में कहा।

‘‘किसी ने ठीक ही कहा है कि डाकू और जासूस हमेशा औरतों ही के चक्कर में पड़ कर मारे जाते हैं।’’

‘‘क्या बकवास लगा रखी है।’’

‘‘बकवास नहीं सरकार! आख़िर आप भी औरत ही के चक्कर में पड़ कर बर्बाद हुए।’’

फ़रीदी ने बुरा-सा मुँह बनाया और कोई जवाब दिये बग़ैर शेव करता रहा।
 
‘‘आप शायद मज़ाक़ समझ रहे हैं।’’ हमीद ने कहा।

‘‘आप शायद हवा से बातें कर रहे हैं।’’ फ़रीदी बोला।

‘‘मैं कोई हातिमताई का घोड़ा हूँ.... जो हवा से बातें करूँगा।’’

‘‘नहीं, तुम वॉल्टर स्कॉट के गधे हो।’’

‘‘आप मज़ाक़ में टाल रहे हैं, बख़ुदा मैं इस वक़्त सौ फ़ीसदी संजीदा हूँ।’’

‘‘अच्छा, कहो, क्या कहना है।’’

‘‘ग़ज़ाला आपको बेवकूफ़ बना गयी।’’

‘‘क्या मतलब....?’’ फ़रीदी ने चौंक कर कहा।

‘‘देखिए।’’ हमीद ने उसकी तरफ़ काग़ज़ का एक टुकड़ा बढ़ाते हुए कहा। ‘‘आपकी ग़ज़ाला की अन्दर की जेब से बरामद हुआ है।’’

फ़रीदी काग़ज़ को पढ़ने लगा।

‘‘आज रात को फ़रीदी के घर जा कर सारी बातें पता करो....ल।’’

फ़रीदी के चेहरे का रंग उड़ गया। लेकिन उसने जल्द ही अपनी हालत पर क़ाबू पा लिया।

‘‘इस ‘ल’ का मतलब शायद लियोनार्ड होगा।’’ हमीद ने कहा।

‘‘लेकिन एक बात तो सोचो कि अगर वाक़ई वह मुझे धोखा देने आयी थी तो फिर उसने इतनी लापरवाही से क्यों काम लिया?’’ फ़रीदी ने कुछ सोचते हुए कहा। ‘‘अगर उसकी नीयत में ख़राबी होती तो वह इस काग़ज़ को जेब में हरगिज़ न छोड़ जाती।’’

‘‘क्या वह लड़की बहुत ख़ूबसूरत थी?’’ हमीद ने कहा।

‘‘हाँ.... ऐसी लड़कियाँ कम देखने में आती हैं।’’ फ़रीदी ने जवाब दिया।

‘‘तभी आप उसे बेगुनाह समझने की कोशिश कर रहे हैं।’’ हमीद ने मुस्कुरा कर कहा।

‘‘अच्छा, ज़रा जल्दी से कार निकालो।’’ फ़रीदी ने तौलिये से चेहरा साफ़ करते हुए कहा। ‘‘लड़की ख़तरे में मालूम होती है।’’

‘‘क्या मतलब....!’’

‘‘चलो, चलो। जल्दी करो।’’

‘‘आख़िर बात क्या है।’’

‘‘यह पुर्ज़ा उसके जाने के बाद रात में किसी वक़्त कोट की जेब में रखा गया।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘नामुमकिन।’’ हमीद ने कहा। ‘‘रात में यहाँ कौन आने की हिम्मत कर सकता है। हमारे कुत्ते किसी को ज़िन्दा बच कर नहीं जाने देते।’’

‘‘यही तो ग़लती की थी कि ग़ज़ाला के आने के बाद मैंने सारे कुत्तों को बन्द कर दिया था.... और फिर उसके बाद उन्हें खोलना भूल गया था।’’

‘‘ओह.... तब तो फिर आप ही का कहना दुरुस्त होगा।’’ हमीद ने बरामदे से उतर कर गैरेज की तरफ़ जाते हुए कहा।

कुछ देर के बाद फ़रीदी की कार तेज़ी से ‘गुलिस्ताँ होटल’ की तरफ़ भागी चली जा रही थी। वहाँ पहुँच कर फ़रीदी को एक बैरे की ज़बानी मालूम हुआ कि ग़ज़ाला अपने कमरे में मौजूद है और अभी-अभी सो कर उठी है। फ़रीदी सीधा उसके कमरे में चला गया। वह उसे देख कर उठ बैठी। उसकी आँखें देर तक सोते रहने की वजह से अभी तक बन्द हो रही थीं और जिनमें पड़े हुए लाल डोरों ने उसके हुस्न इज़ाफ़ा कर दिया था। ज़ुल्फ़े बेतरतीबी से माथे पर बिखरी हुई थीं। चेहरे के लाली-मिले गोरे रंग में कुछ-कुछ सलोनापन आ गया था।

‘‘आप....?’’ वह हैरान हो कर बोली। ‘‘आपने तो कहा था कि अब हम लोग एक-दूसरे से न मिलेंगे।’’

‘‘ख़याल तो यही था.... लेकिन अब मैंने अपनी स्कीम बदल दी है।’’ फ़रीदी ने उसे ग़ौर से देखते हुए कहा और कुर्सी पर बैठ गया।

ग़ज़ाला उसे अपनी तरफ़ इस तरह घूरते देख कर शर्मा गयी और सिर झुका कर अपनी साड़ी का आँचल ठीक करने लगी।

फ़रीदी कशमकश में पड़ गया कि उसे क्या कहे। वह सोच रहा था कि अगर वाक़ई वह उसे धोखा ही देने की ग़रज़ से गयी थी तो उसे ग़ायब हो जाना चाहिए था और अगर लियोनार्ड ने उसकी तरफ़ से उसके मन में शक पैदा करने की कोशिश की थी तो उसके शक को और मज़बूत करने के लिए ख़ुद उसे ही ग़ज़ाला को ग़ायब कर देना चाहिए था। मगर नहीं.... शायद वह ग़ज़ाला को इसी तरह सज़ा देना चाहता था कि पुलिस वाले उस पर शक करके उसे गिरफ़्तार कर लें। बहरहाल, यह तो फ़रीदी पर अच्छी तरह साफ़ हो गया था कि लियोनार्ड उसके मंसूबों से अच्छी तरह आगाह हो गया है।

‘‘तो फिर फ़रमाइए, कैसे तकलीफ़ की?’’ ग़ज़ाला ने पूछा।

‘‘आपसे इस बात का पूरा सबूत लेने के लिए हाज़िर हुआ हूँ कि आप नवाब रशीदुज़्ज़माँ की साहबजादी हैं।’’

ग़ज़ाला चौंक पड़ी। वह उसे हैरत से देख रही थी।

‘‘लेकिन रात तो आप मुतमईन हो गये थे।’’

‘‘मैंने धोखा खाया था।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘समझ में नहीं आता कि आपको किस तरह यक़ीन दिलाऊँ।’’ ग़ज़ाला ने कुछ परेशान हो कर कहा।

‘‘आख़िर...अचानक आपके दिल में यह ख़याल कैसे पैदा हुआ कि मैं आपको धोखा देने की कोशिश कर रही हूँ।’’

‘‘बात ही ऐसी हो गयी है। अगर आप यह न साबित कर सकीं तो मजबूरन मुझे आपको हिरासत में लेना पड़ेगा।’’
 
हिरासत का नाम सुन कर ग़ज़ाला के माथे पर बल पड़ गये। आँखें ग़ुस्से से लाल हो गयीं। होंट काँपने लगे।

‘‘क्या कहा हिरासत....!’’ वह गरज कर बोली। ‘‘आपकी औक़ात ही क्या है। एक मामूली इन्स्पेक्टर.... बदतमीज़ कहीं के।’’

फ़रीदी मुस्कुराने लगा।

‘‘शहज़ादी साहिबा.... मेरी औक़ात तो उस वक़्त मालूम होगी जब आप हवालात की सलाख़ों के पीछे ऩजर आयेंगी।’’ फ़रीदी ने बुरे अन्दाज़ में कहा। ‘‘ज़रा यह काग़ज़ देखिए।’’

‘‘इसका क्या मतलब?’’ ग़ज़ाला काग़ज़ के टुकड़े को पढ़ कर बोली।

‘‘यह टुकड़ा शहज़ादी साहिबा के कोट से बरामद हुआ है।’’ फ़रीदी ने कहा। अचानक ग़ज़ाला के चेहरे का रंग उड़ गया।

‘‘लेकिन लेकिन....!’’ वह हकलाने लगी....‘‘खख.... ख़ुदा की क़सम.... मम.... मैं नहीं जानती कि यह काग़ज़ कैसा है।’’

‘‘आप नहीं जानतीं?’’ फ़रीदी मुस्कुरा कर बोला। ‘‘यह और भी अजीब बात है।’’

‘‘मैं आपको किस तरह यक़ीन दिलाऊँ।’’ ग़ज़ाला बेबसी से बोली।

‘‘मेरी औक़ात ही क्या है कि आप मुझे यक़ीन दिलाने की कोशिश कर रही हैं।’’ फ़रीदी ने बुरे अन्दाज़ में कहा।

ग़ज़ाला ख़ामोश हो गयी। उसके चेहरे से अचानक ऐसा ज़ाहिर होने लगा था जैसे वह बरसों की बीमार है।

‘‘अब आप मुझे सिर्फ़ एक ही तरह इत्मीनान दिला सकती हैं।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘वह कैसे....!’’ ग़ज़ाला जल्दी से बोली।

‘‘अभी और इसी वक़्त मेरे साथ राजरूप नगर चलिए.... अगर वहाँ नवाब वजाहत मिर्ज़ा या उनके लड़के शौकत ने आपको पहचान लिया तो क्या कहने, वरना फिर मैं जो मुनासिब समझूँगा वह करूँगा।’’

‘‘मंज़ूर....!’’ ग़ज़ाला ख़ुशी से चीख़ी।

‘‘अच्छा, तो जल्दी से तैयार हो जाइए।’’

‘‘लेकिन एक शर्त पर.... वह यह कि आप उन पर यह बात न ज़ाहिर होने दीजिएगा कि आपका मक़सद क्या है।’’

‘‘इसके बारे में बाद में देखा जायेगा।’’ फ़रीदी ने सिगार सुलगाते हुए कहा।

ग़ज़ाला ने कपड़े बदले और दोनों कार में बैठ कर राजरूप नगर की तरफ़ रवाना हो गये।

‘‘मैंने अभी नाश्ता नहीं किया।’’ ग़ज़ाला बोली।

‘‘यही हाल मेरा भी है। जैसे ही यह काग़ज़ मुझे मिला, मैं सीधा आप ही के पास चला आया।

‘‘अगर आप वहीं बता देते तो हम लोग नाश्ता करके रवाना होते।’’ ग़ज़ाला ने कहा।

‘‘ख़ैर.... कोई बात नहीं। पीटर रोड पर एक अच्छा होटल है, हम लोग वहीं नाश्ता कर लेंगे।’’

‘‘मैं भी अजीब मुसीबत में पड़ गयी।’’ ग़ज़ाला बोली। ‘‘गयी थी आपसे मदद लेने, उल्टा ख़ुद ही मुजरिम बन बैठी।’’

‘‘घबराइए नहीं.... अगर आप सच्ची हैं तो आपको बचाने के लिए मैं अपनी जान तक दे देने का वादा करता हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘ख़ैर, वे सब बाद की बातें हैं। अभी तो मैं परेशानियों में जूझ रही हूँ।

‘‘लेकिन इसके अलावा कोई और चारा भी न था।’’

दोनों ख़ामोश हो गये।

पीटर रोड पर पहुँच कर फ़रीदी ने कार की रफ़्तार कम कर दी। ‘कृष्णा होटल’ की शानदार इमारत के सामने पहुँच कर दोनों कार से उतर गये।

फ़रीदी ने नाश्ते का ऑर्डर दिया। नाश्ता करने के बाद फ़रीदी ने सिगार सुलगाया और कुर्सी पर टेक लगा कर लम्बे-लम्बे कश लेने लगा।

‘‘ऐ बैरा....!’’ ग़ज़ाला ने क़रीब से गुज़रते हुए एक बैरे को आवाज़ दी।

‘‘जी मेम साहब....!’’

‘‘बाथरूम किधर है?’’

‘‘ऊपर, मेम साहब.... सीढ़ी पर दाहिने हाथ।’’ बैरे ने कहा और आगे बढ़ गया।

‘‘मैं अभी आयी।’’ ग़ज़ाला ने फ़रीदी से कहा और उठ कर चली गयी।
 
फ़रीदी बदस्तूर अधखुली आँखों से छत की तरफ़ देखता हुआ सिगार के कश ले रहा था। पाँच मिनट गुज़रे.... दस मिनट गुज़रे....पन्द्रह...बीस और फ़रीदी अचानक उछल पड़ा। बाथरूम.... और इतनी देर.... वह बेतहाशा सीढ़ी की तरफ़ भागा। बाथरूम ख़ाली था। उसने होटल के सारे बाथरूम देख डाले, लेकिन ग़ज़ाला का कहीं पता न था। उसने उसे ढूँढ निकालने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन कामयाबी न हुई। आख़िर थक-हार कर वह वापस आ गया। ‘गुलिस्ताँ होटल’ में उसने ग़ज़ाला के कमरे की तलाशी ली, लेकिन कोई सन्दिग्ध चीज़ हाथ न लगी।

घर पर हमीद उसका इन्तज़ार कर रहा था। फ़रीदी ने वापसी पर उसे सारा हाल बताया।

‘‘देखिए, मेरा ख़याल कभी ग़लत साबित नहीं होता।’’ हमीद चहक कर बोला।

‘‘क्या कहने हैं आपके....!’’ फ़रीदी ने जल कर कहा।

‘‘डाकू या जासूस हमेशा औरत ही के चक्कर में पड़ कर मारा जाता है।’’

‘‘तुम्हें बातें बनाने के सिवा और भी कुछ आता है।’’ फ़रीदी ने बुरा-सा मुँह बना कर कहा।

‘‘फ़रमाइए.... मेरे लायक़ कोई ख़िदमत।’’ हमीद ने कहा।

‘‘आपके लायक़ सबसे बड़ी ख़िदमत यही है कि आप ऐसे मौक़े पर ख़ामोश रह कर मुझे सोचने दिया कीजिए।’’

‘‘ठीक है....!’’ हमीद ने संजीदगी से कहा। ‘‘अगर किसी जगह पर आप सोचते-सोचते ठहर जायें तो मुझे याद कर लीजिएगा।’’

‘‘बहुत अच्छा.... अब आप तशरीफ़ ले जाइए।’’

हमीद मुस्कुराता हुआ चला गया। फ़रीदी उसे घूर रहा था।

थोड़ी देर के बाद वह गहरी सोच में डूब गया। उसने तय कर लिया था कि अब वह अपने मंसूबों से किसी को भी आगाह न करेगा। उसे सख़्त हैरत थी कि आख़िर उसकी बनायी हुई स्कीमों से लियोनार्ड किस तरह वाक़िफ़ हो जाता है।

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नयी स्कीम

हमीद फ़रीदी की आदत से अच्छी तरह वाक़िफ़ था। उसे गहरी सोच में डूबा हुआ देख कर उसने और ज़्यादा छेड़ना मुनासिब न समझा। वह यह भी जानता था कि फ़रीदी पर इस क़िस्म की सोच के दौरे कभी-कभी पड़ा करते थे और उसके बाद वह ऐसे-ऐसे भयानक काम कर डालता था कि जिनके ख़याल ही से अच्छे-अच्छों को हैरानी हो जाती थी।

खाने के दौरान भी उन दोनों में कोई बात न हुई। खाना खाने के बाद थोड़ी देर आराम करके दोनों दफ़्तर रवाना हो गये।

अभी फ़रीदी अच्छी तरह बैठने भी न पाया था कि जैक्सन के यहाँ से बुलावा आया।

‘‘क्यों भई, ख़ैरियत तो है, आज तुम्हारा चेहरा बहुत उतरा हुआ है।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘क्या बताऊँ.... आज बड़ी गहरी चोट हो गयी।’’ फ़रीदी ने नर्म आवाज़ में कहा। उसके बाद उसने सारी कहानी जैक्सन को बता दी।

‘‘तुमने बहुत बड़ी ग़लती की।’’ जैक्सन ने हाथ मलते हुए कहा। ‘‘तुम्हें उस लड़की को फ़ौरन हिरासत में ले लेना चाहिए था। अफ़सोस, बहुत अच्छा शिकार हाथ से निकल गया। अगर वह गिरफ़्तार हो जाती तो शायद लियोनार्ड भी न बच सकता।’’

‘‘मैं आपसे एक बार फिर कहूँगा कि लियोनार्ड को गिरफ़्तार कर लेना हँसी-ठट्ठा नहीं।’’

‘‘ख़ैर, मैं दुनिया में किसी बात को भी नामुमकिन नहीं समझता।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘लेकिन साहब, मुझे तो उसकी गिरफ़्तारी नामुमकिन ही ऩजर आ रही है।’’ फ़रीदी मायूसी से बोला।

‘‘मुझे हैरत है।’’ जैक्सन ने ताज्जुब से कहा। ‘‘मैंने कभी तुम्हारे मुँह से इस तरह के मायूस जुमले नहीं सुने।’’

‘‘पहले कभी इतने भयानक आदमी से मुक़ाबला भी नहीं हुआ।’’

‘‘कुछ भी सही।’’ जैक्सन ने सिगरेट सुलगाते हुए कहा। ‘‘लेकिन कम-से-कम तुम्हारे मुँह से इस क़िस्म के जुमले कुछ अच्छे मालूम नहीं होते।’’

‘‘यह आपकी मुहब्बत है कि आप मुझे इस क़ाबिल समझते हैं।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘लेकिन मैं इसी में अपनी भलाई समझता हूँ कि ख़ामोशी से बैठ जाऊँ।’’

‘‘क्या मतलब....!’’ जैक्सन ने चौंक कर कहा। ‘‘क्या तुम इस केस से हाथ उठाना चाहते हो।’’

‘‘जी हाँ।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘अगर इस पर मेरे अफ़सर राज़ी न हुए तो मजबूरन मुझे इस्तीफ़ा देना पड़ेगा।’’

‘‘भई, आज मैं तुम्हारे मुँह से बड़ी अजीब-अजीब बातें सुन रहा हूँ।’’ जैक्सन ने उसे आँखें फाड़-फाड़ कर देखते हुए कहा। ‘‘आख़िर तुम्हें डर किस बात का है।’’

‘‘ज़रा यह तस्वीर देखिए।’’ फ़रीदी ने उसकी तरफ़ एक तस्वीर बढ़ा दी।

जैक्सन तस्वीर देखते ही उछल पड़ा। कभी वह फ़रीदी की तरफ़ देखता था और कभी तस्वीर की तरफ़।

‘‘यह तो डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट की बीवी है.... तो क्या तुम....!’’

‘‘जी हाँ, मुझे पागल कुत्ते ने काटा है कि इस बूढ़ी औरत के साथ...।’’

‘‘तो फिर इसका मतलब क्या है।’’ जैक्सन ने हैरत से कहा।

‘‘इसका यह मतलब है कि अगर मैंने इस केस से हाथ न उठाया तो लियोनार्ड इस तस्वीर की एक कापी डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट के पास भिजवा देगा।’’

‘‘यह तुम्हें मिली कैसे!’’ जैक्सन ने पूछा।

फ़रीदी ने सारा वाक़या सुना दिया।

‘‘तो इसका यह मतलब है कि प्रिंस अदनान को शक की बिना पर हिरासत में ले लेना चाहिए।’’

‘‘यह काम आसान नहीं.... हमारे पास उसके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं और फिर सबसे बड़ी बात यह है कि वह इराक़ के शाही ख़ानदान से ताल्लुक़ रखता है।’’

‘‘कहीं वही लियोनार्ड न हो।’’ जैक्सन जल्दी से बोला।

‘‘ख़ुदा बेहतर जानता है।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।’’

‘‘अच्छा, क्यों न उन अख़बार वालों को पकड़ा जाये।’’ जैक्सन बोला।

‘‘उनके ख़िलाफ़ भी हमारे पास कोई ठोस सबूत नहीं।’’

‘‘वाक़ई यह मामला बहुत ही पेचीदा है।’’

‘‘और इसीलिए मैं माफ़ी चाहता हूँ।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘तुम अजीब आदमी हो।’’ जैक्सन ने कहा। ‘‘बस, इस एक तस्वीर से डर गये। अरे मियाँ, ऐसे चमत्कार तो हर अच्छा फ़ोटोग्राफ़र दिखा सकता है।’’

‘‘लेकिन कोई शौहर उसे मानने के लिए तैयार न होगा।’’ फ़रीदी ने कहा।
 
‘‘ख़ैर, अंग्रेज़ शौहर इतने सख़्त नहीं होते।’’ जैक्सन ने गर्व से कहा।

‘‘न होते हों, लेकिन अगर इसी तरह किसी हिन्दुस्तानी शौहर से वास्ता पड़ गया तो फिर मैं कहीं का न रहूँगा।’’

‘‘आख़िर तुम डरते क्यों हो।’’ जैक्सन बोला। ‘‘मैं तो मौजूद हूँ।’’

‘‘नहीं साहब.... बात दरअसल यह है कि अब मैं अपनी नौकरी से कुछ तंग आ गया हूँ।’’

‘‘यह और बात है।’’ जैक्सन ने कहा। ‘‘लेकिन मैं तुम्हें किसी तरह इसकी राय नहीं दूँगा कि तुम इस मामले को अधूरा छोड़ कर अलग हो जाओ। इससे तुम्हारे पिछले कारनामों पर भी ख़ाक पड़ जायेगी।’’

‘‘साहब, कुछ समझ में नहीं आता कि क्या करूँ।’’ फ़रीदी ने कुढ़ कर कहा।

‘‘अपनी छानबीन जारी रखो। अगर तुमने यह काम अंजाम दे दिया तो सारी दुनिया में तुम्हारा नाम हो जायेगा।’’

‘‘यह लालच मेरे लिए कम नहीं।’’ फ़रीदी ने कहा। ‘‘ख़ैर, मैं कोशिश करूँगा। वैसे मुझे कामयाबी की एक फ़ीसदी भी उम्मीद नहीं।’’

‘‘तुम नवाब रशीदुज़्ज़माँ से मिल कर इस चीज़ की तस्दीक़ क्यों नहीं करते कि क्या तुम्हें धोखा देने वाली हक़ीक़त में उसकी लड़की ही थी।’’

‘‘मेरे ख़याल से तो यह बिलकुल बेकार होगा, क्योंकि इस क़िस्म की कोई भी लड़की अपना सही पता-ठिकाना नहीं बता सकती।’’

‘‘तुम्हारा यह ख़याल भी सही मालूम होता है।’’ जैक्सन ने कहा। ‘‘फिर आख़िर अब क्या करोगे।’’

‘‘न्यू स्टार के दफ़्तर की निगरानी।’’ फ़रीदी ने कुछ सोचते हुए कहा। ‘‘यह बात अब मंज़िल को पहुँच गयी है कि लियोनार्ड इसी अख़बार के ज़रिये अपना जाल फैला रहा है।’’

‘‘पहले मैं भी इसे तुम्हारा शक समझता था।’’ जैक्सन बोला। ‘‘लेकिन अब मुझे भी कुछ-कुछ यक़ीन आ गया है।’’

‘‘लेकिन मैं एक बार फिर कहूँगा कि इस तरह भी हम लियोनार्ड को न पा सकेंगे। यह और बात है कि उसके कुछ एजेन्ट गिरफ़्तार हो जायें। वह ख़ुद मालूम नहीं किस तहख़ाने में बैठा अपना काम किया करता है।’’

‘‘बहरहाल, कुछ भी हो, तुम्हें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘सच पूछिए तो मैं आप ही के हिम्मत दिलाने पर अब तक डटा हुआ हूँ, वरना कभी का अलग हो गया होता।’’

‘‘बात यह है कि मैं तुम्हें सारी दुनिया में मशहूर देखना चाहता हूँ।’’ जैक्सन ने कहा।

‘‘शुक्रिया....!’’ फ़रीदी ने उठते हुए कहा। ‘‘मैं एक बात और कहना चाहता हूँ कि अब मैं तीन-चार दिन तक दफ़्तर न आ सकूँगा।’’

‘‘क्यों....!’’ जैक्सन ने चौंक कर कहा।

‘‘मैं न्यू स्टार के दफ़्तर के कोने-कोने से जानकारी हासिल करना चाहता हूँ।’’ फ़रीदी बोला।

‘‘लेकिन तुम वहाँ किस हैसियत से रहोगे।’’ जैक्सन ने कहा। ‘‘यह भी बता दो, ताकि वहाँ तुम्हारी हिफ़ाज़त की जा सके।’’

‘‘मैं वहाँ मामूली मज़दूर के भेस में रहूँगा।’’ फ़रीदी ने कुछ सोचते हुए कहा। ‘‘घनी सफ़ेद दाढ़ी.... फूली हुई नाक और माथे पर गहरे ज़ख़्म के निशान।’’

जैक्सन ने ख़ुशी से सिर हिलाया और फ़रीदी उठ कर चला गया।

उसी दिन.... रात को फ़रीदी घर पर सार्जेंट हमीद को हिदायत दे रहा था।

‘‘मेरे बताये हुए हुलिये के बूढ़े के भेस में तुम्हें न्यू स्टार के दफ़्तर में रहना होगा और उस वक़्त तक तुम वहाँ मौजूद रहोगे जब तक कि तुम्हें वहाँ से हटाया न जाये।’’ फ़रीदी ने कहा।

उसने हमीद को अपनी पूरी स्कीम बता दी।

‘‘लेकिन मैं वहाँ खपूँगा कैसे।’’ हमीद ने कहा। ‘‘अगर इस शक़्ल का वहाँ कोई और हो तो।’’

‘‘अगर वहाँ इस शक़्ल का कोई आदमी न होता तो मैं यह प्रोग्राम ही न बनाता।’’ फ़रीदी ने कहा।

‘‘तो फिर उस आदमी को वहाँ जाने से कैसे रोकेंगे।’’ हमीद ने कहा।

‘‘अरे भई.... वह सब मैं कर लूँगा। अच्छा, तुम फ़ौरन तैयार हो जाओ। मैं तुम्हें उस शख़्स से मिलाना चाहता हूँ, ताकि तुम अच्छी तरह उसकी सूरत ज़ेहन में बिठाल लो।’’
 
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