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Hindi Sex Kahani काला इश्क़!

update 19

ऊपर आ कर जैसे ही मैंने दरवाजा बंद किया की ऋतू ने मुझे पीछे से कस कर अपनी बाहों में भर लिया| "हम्म्म्म....आप के बिना इतना दिन मैं अधूरी हो गई थी|" ऋतू ने मेरी पीठ पर कमीज के ऊपर से kiss करते हुए कहा| मैं उसकी तरफ घुमा और उसे गोद में उठा कर पलंग पर लिटाया और जूते उतार के मैं भी उसकी बगल में पाँव ऊपर कर के लेट गया| उसने मेरे बाएं हाथ को अपना तकिया बनाया और मुझसे मुंबई के बारे में सब पूछने लगी| मैंने पहले तो उसे मेरे कॉर्पोरेट वर्ल्ड का एक्सपीरियंस बताया जिसे सुन कर वो दंग रह गई| मेरे बिज़नेस सूट वाली बात पर वो भी मायूस हुई और कहने लगी की जब उसे पहली सैलरी मिलेगी तो वो मुझे ये सूट दिलाएगी| ये सुन कर मुझे उस पर बहुत प्यार आने लगा| वहाँ खींची तसवीरें देख ऋतू का मन वहाँ जाने का कर रहा था और वो कहने लगी की शादी के बाद जब हमारी लाइफ सेटल हो जाएगी तो वो मुंबई मेरे साथ जर्रूर जाएगी| इसी तरह से हम दोनों बातें करते रहे और फिर मैंने सोचा की उसे सच-सच बता दूँ जो भी कुछ हुआ, क्योंकि मैं उससे कुछ भी नहीं छुपाना चाहता था| तो मैंने उसे शुरू से लेकर आखिर तक सारी बात बता दी और ये सब सुनते ही वो छिटक कर मुझसे दूर कड़ी हो गई|

ऋतू: तो इसलिए गए थे ना आप उस मैडम के साथ? (उसने गुस्से में कहा)

मैं: यार मैंने क्या किया? बॉस ने लास्ट मोमेंट पर बोला की उनकी जगह Mam जाएँगी तो मैं क्या करता?

ऋतू: उसकी हिम्मत कैसे हुई आपको छूने की?

मैं: यार कुछ गलत इंटेंशन नहीं था उनका| वो बस....

ऋतू: (मेरी बात काटते हुए) आपको कैसे पता की इंटेंशन सही थी या गलत? और आपक ने उसे खुद को छूने कैसे दिया? (ऋतू ने चीखते हुए कहा|)

मैं: ऋतू बात को समझने की कोशिश कर! वो दोनों लड़के उन्हें घूर-घूर के देख रहे थे! She was scared! वो मुझे trust करती थीं इसलिए उन्होंने सिर्फ मेरी गोद में सर रखा| मैंने उन्हें जरा भी नहीं छुआ?

ऋतू: ये देखने के लिए मैं तो नहीं थी ना? एक होटल में दोनों पति-पत्नी के नाम से रहे रहे थे! आपने उसे जरा भी नहीं कहा की mam आप ये गलत कर रहे हो?

मैं: रात के तीन बज रहे थे, कहीं भी कमरा नहीं मिल रहा था! हर कोई गलत ही सोच रहा था तो ऐसे में उन्हें मजबूरन झूठ लिखना पड़ा| मेरा विश्वास कर उस रात मैं सोफे पर सोया था और वो पलंग पर! हमारे बीच कुछ भी नहीं हुआ था| एक पल भी मेरे मन में कोई गलत विचार नहीं आया! उन्होंने तो मुझे दारु भी ऑफर की पर मैंने सिर्फ इसलिए मना कर दिया क्योंकि मैंने तुमसे वादा किया था|, इतना प्यार करता हूँ तुम से!

ऋतू: मैं कैसे मान लूँ? एक कमरे में एक आदमी और एक औरत हैं और फिर भी उन दोनों के बीच कुछ नहीं हुआ! ये सतयुग है क्या?

मैं: .....

ऋतू: (मेरे कुछ कहने से पहले ही ऋतू बोल पड़ी|) आपको कैसा लगता अगर ये सब मेरे साथ हुआ होता? क्या आप मेरी बात पर भरोसा करते?

मैं: (उसकी आँखों में देखते हुए) हाँ ... मैं तुम्हारी बात का विश्वास करता क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, तुम पर आँख मूँद कर विश्वास करता हूँ|

ऋतू: Well मैं आप पर विश्वास नहीं कर सकती! उस जैसी बाला की खूबसूरत औरत के साथ आप रहे और फिर भी उसे छुआ तक नहीं|

ये सुन कर मेरा दिल बहुत दुख की वो मुझ पर जरा भी भरोसा नहीं करती| पर मैंने जैसे-तैसे खुद को संभाला|

ऋतू: जब मैंने उसे वीडियो कॉल पर देखा था तभी से मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था! मुझे पता था वो आपको मुझसे छीन लेगी| (ये बोलते हुए रोने लगी| मैंने उसके आँसूँ पोछने चाहे तो उसने मेरा हाथ झिटिक दिया|)

मैं: जान मेरी बात को समझो! प्लीज ... प्लीज मेरा विश्वास करो! (मैंने उसके आगे हाथ जोड़े पर उसका उसक पर कोई असर नहीं पड़ा|)

ऋतू: आप एक बात का जवाब दो, जब आपके बॉस ने कहा की मेरी जगह आप मेरी बीवी के साथ चले जाओ तो आप मना नहीं कर सकते थे?

मैं: यार वो बॉस है मेरा, उसका कहा मानने के पैसे मिलते हैं मुझे|

ऋतू: कल को वो कहेगा की उसकी बीवी के साथ सो जाओ तो आप सो जाओगे?

ये सुन कर मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने ऋतू पर हाथ छोड़ दिया|

मैं: बस! अब बहुत हो गया, इतनी देर से मैं मिन्नतें कर रहा हूँ और तुम्हें उस पर विश्वास ही नहीं हो रहा है| मैं चूतिया था जो मैंने तुम्हें सब कुछ बता दिया, ये विश्वास कर के की तुम्हें सच पता होना चाहिए| पर नहीं तुम्हें तो बेकार का बखेड़ा खड़ा करना है?

ऋतू रोने लगी और रोते हुए बोली; "आपके मन में उस के लिए प्यार है, उसकी इज्जत प्यारी है आपको? मेरी कोई वैल्यू नहीं?" इतना कह कर वो रोती हुई चली गई, मैं भी उसके पीछे-पीछे भागा और उसे आवाज दे कर रोकना चाहा पर वो नहीं रुकी और ऑटो कर के चली गई| मुझे उसकी चिंता हुई तो मैंने जल्दी से ऑटो का नंबर नोट किया और घर वापस आ गया| मैं जमीन पर बैठा सोचता रहा की अभी जो कुछ हुआ उसमें मेरी गलती थी क्या? ऋतू को सच बताना गलती थी? या उस दिन मौके का फायदा नहीं उठाना गलती थी? या फिर मैंने ऋतू पर हाथ उठाया, वो गलत था? पर मैंने हाथ इसलिए उठाया क्योंकि अनु मैडम के चरित्र पर ऊँगली उठा रही थी! दिमाग में जैसे उधेड़-बुन शुरू हो गई थी, दिमाग कहता था की तुझे ऋतू को बताने की जर्रूरत नहीं थी| पर दिल कह रहा था की तूने इसलिए बताया क्योंकि आगे चल कर हमारे रिश्ते में कोई गाँठ ना पड़ जाए| ये ऋतू का बचपना है, कुछ देर में शांत हो जायेगा| पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, मैं उसे कॉल करता रहा पर उसने फ़ोन बंद कर दिया| मैंने उसके कॉलेज के चक्कर लगाना शुरू कर दिया पर अब उसने मुझे वहाँ भी इग्नोर करना शुरू कर दिया| एक दिन मैं उसके हॉस्टल भी गया उससे मिलने पर वहाँ भी उसने मुझसे कोई बात नहीं की, बस हाँ-ना में जवाब देती रही| अब चूँकि वहाँ आंटी जी थीं तो मैं ज्यादा कुछ कह भी नहीं पाया| वो भी उठ कर चली गई ये बहाना कर के उसे असाइनमेंट पूरा करना है| पूरे दो हफ्ते तक ऋतू इसी तरह करती रही, फोन बंद रखती और मैं यहाँ उसे रोज फ़ोन करता इस आस में की शायद अब वो फ़ोन उठा ले! इधर ऑफिस में मैडम अब मुझसे हँसते हुए बात करने लगी थीं, पर सिर्फ तब जब सर नहीं होते थे| मैं उनके सामने बीएस उसी तरह जवाब देता जैसे पहले देता था उससे ज्यादा मैंने कुछ रियेक्ट नहीं किया| जब की मेरे मन का दुःख सिर्फ मैं ही जानता था|

एक दिन मैं ऑफिस मीटिंग में था की तभी कुछ हुआ| ऋतू मेरे ऑफिस आई और उसने जानबूझ कर अनु मैडम से बात शुरू की;

ऋतू: हेल्लो mam!

अनु मैडम: Hi ... सॉरी मैंने आपको पहचाना नहीं!

ऋतू: Actually mam मुझे ये डायरी ट्रैन में मिली| किसी Mr. Manu की डायरी है| इसमें यहाँ का एड्रेस लिखा था तो मैं एड्रेस ढूंढते हुए यहाँ आ गई| (ये एड्रेस उसने खुद ही लिखा था|)

अनु मैडम: ओह! हाँ... ये तो मानु की ही डायरी है| Thank you so much!
ऋतू: Is he your husband?
अनु मैडम: Oh no no no. he works here, he's in a meeting right now.
ऋतू: I'm really sorry. I didn't mean to... sorry!
अनु मैडम: Its okay!
तभी सर ने मैडम को बात करते हुए देख लिए और अंदर बुलाया; "That's my husband! I.I'm sorry I've to go. Why don't you wait here and we can have a cup of coffee."
"Oh no..no.. mam I've to leave. I've to rush back to my hostel."
"Then please gimme your number, I'll call you and then we can have a a cup of coffee, my treat!!" और ऋतू ने उन्हें अपना नंबर दिया और मैडम ने उन्हें अपना फ़ोन नंबर दिया| इधर सर हमें नए AS (Accounting Standard) पर ज्ञान दे (चोद) रहे थे| मैडम अंदर आईं और उन्होंने मेरी तरफ डायरी बढ़ा दी| ये वही डायरी थी जो मैंने ऋतू को दी थी! उसे देखते ही मेरे चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी और मैं बाहर जाने को बेचैन हो गया| "Excuse me sir" इतना कह कर मैं बाहर भागा पर वहाँ कोई भी नहीं था| मैं सोचने लगा की अभी हुआ क्या? ये डायरी मैडम तक कैसे पहुँची? अभी मैं ये सोच ही रहा था की मैडम ने पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रखा और मेरी उधेड़-बुन समझते हुए उन्होंने मुझे सारी बात बताई|

मैडम की बात सुन कर मुझे बहुत गुस्सा आया की ऋतू यहाँ तक आई सिर्फ डायरी वापस करने! अपना गुस्सा मैं काम पर उतारने लगा और देर रात तक ऑफिस में बैठा रहा| कई बार फ़ोन मिलाया पर ऋतू का फ़ोन बंद ही था| तब मुझे लगा की ऋतू ने मेरा नम्बर ब्लॉक तो नहीं कर दिया, इसलिए मैंने ऑफिस के लैंडलाइन से फ़ोन किया तो इस बार घंटी गई| 5-7 घंटी के बाद उसने फ़ोन उठा लिया; "तो मेरा नंबर ब्लॉक कर रखा था ना?" ये सुन कर वो कुछ नहीं बोली| फिर मन नहीं किया की आगे उसे कुछ कहूं, इसलिए मैंने फ़ोन रख दिया और अपना बैग उठा के चल दिया| घर आया और बिना कुछ खाय-पीये ही सो गया|
 
update 20

उस रात मुझे बुखार चढ़ गया पर फिर भी सुबह मैं नाहा-धो के ऑफिस निकल गया| पर दोपहर होने तक हालत बहुत ज्यादा ख़राब हो गई, कमजोरी ने हालत बुरी कर दी| मैंने एक चाय पि पर तब भी कोई आराम नहीं मिला, नजाने कैसे पर मैडम को मेरी ख़राब तबियत दिख गई और वो मेरे पास आईं, मेरे माथे पर हाथ रख उन्हें मेरे जलते हुए शरीर का एहसास हुआ और उन्होंने मुझे डॉक्टर के जाने को बोला| मैं ऑफिस से निकला और बड़ी मुश्किल से घर बाइक चला कर पहुँचा| घर आते ही मैं बिस्तर पर पड़ा और सो गया, रात 8 बजे आँख खुली पर मेरे अंदर की ताक़त खत्म हो चुकी थी| मैंने खाना आर्डर किया ये सोच कर की कुछ खाऊँगा तो ताक़त आएगी पर खाना आने तक मैं फिर सो गया| जब से मैं शहर आ कर पढ़ने लगा था तब से मैं अपना बहुत ध्यान रखता था| जरा सा खाँसी-जुखाम हुआ नहीं की मैं दवाई ले लिया करता था| मैं जानता था की अगर मैं बीमार पड़ गया तो कोई मेरी देखभाल करने वाला नहीं है, पर बीते कुछ दिनों से मैं बहुत मटूस था| ऐसा लगता था जैसे मैं चाहता ही नहीं की मैं ठीक हो जाऊँ| खाना आने के बाद उसे देख कर मन नहीं किया की खाऊँ, दो चम्मच दाल-चावल खाये और फिर बाकी छोड़ दिया और बिस्तर पर पड़ गया| रात दस बजे मैडम का फ़ोन आया और उन्होंने मेरा हाल-चाल पूछा तो मैंने झूठ बोल दिया; "Mam मुझे कुछ दिन की छुट्टी चाहिए ताकि मैं घर चला जाऊँ, यहाँ कोई है नहीं जो मेरी देखभाल करे|" मैडम ने मुझे छुट्टी दे दी और मैं फ़ोन बंद कर के सो गया| वो रात मुझ पर बहुत भारी पड़ी, रात 2 बजे मेरा बुखार 103 पहुँच गया और शरीर जलने लगा| प्यास से गाला सूख रहा था और वहाँ कोई पानी देने वाल भी नहीं था| ऋतू को याद कर के मैं रोने लगा और फिर होश नहीं रहा की मैं कब बेहोश हो गया|

जब चेहरे पर पानी की ठंडी बूंदों का एहसास हुआ तो धीरे-धीरे आँखें खोलीं, इतना आसान काम भी मुझसे नहीं हो रहा था| पलकें अचानक ही बहुत भारी लगने लगी थीं, खिड़की से आ रही रौशनी के कारन मैं ठीक से देख भी नहीं पा रहा था| कुछ लोगों की आवाजें कान में सुनाई दे रही थी जो मेरे आँख खोलने पर खेर मना रहे थे| "उठो ना?" ऋतू ने मुझे हिलाते हुए कहा और तभी उसकी आँख से आँसू का एक कतरा गिरा जो सीधा मेरे हाथ पर पड़ा| अपने प्यार को मैं कैसे रोता हुआ देख सकता था, मैंने उठने की जी तोड़ कोशिश की और बाकी का सहारा ऋतू ने दिया और मुझे दिवार से पीठ लगा कर बिठा दिया| अब जा के मेरी आँखों की रौशनी ठीक हो पाई और मुझे अपने कमरे में 3-4 लोग नजर आये| मेरे मकान मालिक अंकल, उनका लड़का और उनकी बहु और बगल वाले पांडेय जी| मेरे मुँह से बोल नहीं फुट रहे थे क्योंकि गला पूरी तरह से सूख चूका था| ऋतू ने मुझे पीने के लिए पानी दिया और जब गला तर हुआ तो थोड़े शब्द बाहर फूटे; "आप सब यहाँ?"

सुभाष जी (मकान मालिक) बोले; "अरे बेटा तेरी तबियत इतनी ख़राब थी तो तूने हमें बताया क्यों नहीं? ये लड़की भागी-भागी आई और इसने बताया की तू दरवाजा नहीं खोल रहा, पता है हम कितना डर गए थे की कहीं तुझे कुछ हो तो नहीं गया?" अब मुझे सारी बात समझ आ गई, पर हैरानी की बात ये थी की ऋतू यहाँ आई क्यों? पर ऋतू को रोते हुए देख उसपर जो कल तक गुस्सा आ रहा था वो अब भड़कने लगा था| "चलिए डॉक्टर के|" ऋतू ने सुबकते हुए कहा| मैंने ना में सर हिलाया; "इतनी कोई घबराने की बात नहीं है, दवाई खाऊँगा तो ठीक हो जाऊँगा|" "आपका पूरा बदन बुखार से जल रहा है और आप इसे हलके में ले रहे हैं?" ऋतू ने अपने आँसूँ पोछते हुए कहा| पर मैं अपनी जिद्द पर अड़ा रहा और डॉक्टर के नहीं गया| मैं जानता था की मुझे इस तरह देख कर ऋतू को बहुत दर्द हो रहा था और यही सही तरीका था उसे सबक सिखाने का! मुझ पर भरोसा नहीं करने की कुछ तो सजा मिलनी थी उसे! चूँकि मेरा सर दर्द से फट रहा था तो मैंने उसे चाय बनाने को कहा| चाय बना के वो लाई तो सबने चाय पि पर मेरे लिए वो चाय इतनी बेसुआद थी की क्या बताऊँ! मेरी जीभ का सारा स्वाद मर चूका था, इतना बुखार था मुझे| सब ने मुझे कहा की मैं डॉक्टर के चला जाऊँ पर मैंने कहा की आज की रात देखता हूँ! आखिर सब चले गए और ऋतू मुझे दूर किचन काउंटर से देख रही थी| 1 बजा था तो मैंने उसे हॉस्टल लौटने को कहा पर अब वो जिद्द पर अड़ गई| "जब तक आप ठीक नहीं हो जाते मैं कहीं नहीं जा रही!" उसने हक़ जताते हुए कहा|

"हेल्लो मैडम! आप यहाँ किस हक़ से रुके हो?" मैंने गुस्से से कहा| जो गुस्सा भड़का हुआ था वो अब धीरे-धीरे बाहर आने लगा था|

"आपकी जीवन संगनी होने के रिश्ते से रुकी हूँ!" उसने बड़े गर्व से कहा|

" काहे की जीवन संगनी? जिसे अपने पति पर ही भरोसा नहीं वो काहे की जीवन संगनी?" मैंने एक ही जवाब ने उसका सारा गर्व तोड़ कर चकना चूर कर दिया|

"जानू! प्लीज!" उसने रोते हुए कहा|

"तुम्हारे इस रूखे पन से मैं कितना जला हूँ ये तुम्हें पता है? वो तुम्हारे कॉलेज के बाहर रोज आ कर रुकना इस उम्मीद में की तुम आ कर मेरे सीने से लग जाओगी! अरे गले लग्न तो छोडो तुमने तो एक पल के लिए बात तक नहीं की मुझसे! ऐसे इग्नोर कर दिया जैसे मेरा कोई वजूद ही नहीं है! कैसे की मैं तुम्हारे लिए कोई अनजान आदमी हूँ! मैं पूछता हूँ आखिर ऐसा कौन सा पाप कर दिया था मैंने? तुम्हें सब कुछ सच बताया सिर्फ इसलिए की हमारे रिश्ते में कोई गाँठ न पड़े और तुमने तो वो रिश्ता ही तार-तार कर दिया| जानता हूँ एक पराई औरत के साथ था पर मैंने उसे छुआ तक नहीं, उसके बारे में कोई गलत विचार तक नहीं आया मेरे मन में और जानती हो ये सब इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ| पर तुम्हें तो उस प्यार की कोई कदर ही नहीं थी| जब मुंबई गया था तब तुमने एक दिन भी मेरा कॉल उठा कर मुझसे बात नहीं की, सारा टाइम फ़ोन काट देती थी| पिछले दो हफ़्तों से तुम ने मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया!!! किस गलती की सजा दे रही थी मुझे?" मेरे शूल से चुभते शब्दों ने ऋतू के कलेजे को छन्नी कर दिया था और वो बिलख-बिलख कर रोने लगी| "I'm .really ..very very.. sorry! मैंने आपको बहुत गलत समझा| ऋतू ने रोते हुए कहा| फिर उसने अपने आँसूँ पोछे और हिम्मत बटोरते हुए कहा; "उस दिन मैं आपके ऑफिस जान बुझ कर आई थी अनु मैडम से मिलना| मुझे देखना था ... जानना था की आखिर उसमें ऐसा क्या है जो मुझ में नहीं! पर उनसे बात कर के मुझे जरा भी नहीं लगा की उनका या आपका कोई चक्कर है! मैंने उनसे पूछा क्या आप उनके पति हो तो उनके चेहरे पर मुझे कोई शिकन या गिल्ट नहीं दिखा| मुझे वो बड़ी सुलझी और सभ्य लगीं, उस दिन मुझे खुद पर गुस्सा आया की मैंने उनके बारे में ऐसा कुछ सोचा| वो तो आपको सिर्फ अपना दोस्त मानती हैं! मुझे बहुत गिलटी हुई की मेरे इस बचपने की वजह से मैंने आपको इतना तड़पाया इतना दुःख दिया| आप चाहते तो वो सब उनके साथ कर सकते थे और मुझे इसकी जरा भी भनक नहीं होती| पर आपने सब सच बताया और यही सोच-सोच कर मैं शर्म से मरी जा रही थी| मुझे माफ़ कर दीजिये! मैं वादा करती हूँ की मैं आज के बाद कभी आप पर शक नहीं करुँगी|"

मैंने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और बिस्तर से उठ के बाथरूम जाने को उठा तो एहसास हुआ की मुझे बहुत कमजोरी है| ऋतू तेजी से मेरे पास आई और मुझे सहारा दे कर उठाने लगी| बाथरूम से वापस भी उसी ने मुझे पलंग तक छोड़ा| मैं लेटा और लेटते ही सो गया और करीब घंटे भर बाद ऋतू ने मुझे खाना खाने को उठाया| "मैं खा लूँगा, तुम हॉस्टल वापस जाओ|" इतना कह के मैं उठ के बैठ गया, पर मेरी बातों से झलक रहे रूखेपन को ऋतू मेहसूस कर रही थी| वो दरवाजे तक गई और दरवाजे की चिटकनी लगा दी और मेरी तरफ देखते हुए अपनी कमर पर दोनों हाथ रख कर कड़ी हो गई; "मैं कहीं नहीं जाने वाली! जब तक आप तंदुरुस्त नहीं हो जाते मैं यहीं रहूँगी, आपके पास!"

"बकवास मत कर! हॉस्टल में क्या बोलेगी की रात भर कहाँ थी और घर पर ये खबर पहुँच गई ना तो तुझे घर बिठा देंगे, फिर भूल जाना पढ़ाई-लिखाई!" ये कहते-कहते मेरे सर में दर्द होने लगा तो मैं अपने दोनों हाथों से अपना सर पकड़ के बैठ गया| मेरा सर झुका हुआ था तो ऋतू मेरे नजदीक आई और मेरी ठुड्डी पकड़ के ऊपर उठाई और बोली; "मैंने आपके फोन से आंटी जी को फ़ोन कर दिया और उन्हें आपकी तबियत के बारे में सब बता दिया| उन्होंने कहा है की मैं यहाँ रुक सकती हूँ|" ये सुनते ही मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने अपनी गर्दन घुमा ली; "तेरा दिमाग ठिकाने है की नहीं?!" मैंने उसे गुस्से से डाँटा पर उसका उस पर कोई असर नहीं पड़ा, वो बस सर झुकाये वहीँ खड़ी रही| "तू क्यों सब कुछ तबाह करने पर तुली है? तुझे यहाँ आने के लिए किसने कहा था? कॉलेज में भी तेरी दोस्त का हमारे रिश्ते के बारे में तूने सब बता दिया और यहाँ भी सब को हमारे बारे में सब पता चल गया है, अब तू हॉस्टल नहीं जाएगी तो वो सब क्या सोचेंगे?" माने उसे समझाया, जो शायद उसके दिमाग में घुसा या फिर वो मुझे मैनिपुलेट करते हुए बोली; "आज आपकी तबियत बहुत ख़राब है! मुझे बस आज का दिन रुकने दो, कल आपकी तबियत ठीक हो जाएगी तो मैं वापस चली जाऊँगी| प्लीज...." ऋतू ने हाथ जोड़ कर मुझसे मिन्नत करते हुए कहा| अब मैं थोड़ा पिघल गया और उसे रुकने की इजाजत दे दी| वो खुश हो गई और थाली में दाल-चावल परोस के लाई और खुद ही मुझे खिलाने लगी, मैंने मना किया की मैं खा लूँगा पर वो नहीं मानी| पहला कौर खाते ही मुझे एहसास हुआ की खाने में कोई टेस्ट ही नहीं है! बिलकुल बेस्वाद खाना! मेरी शक्ल से ही ऋतू को पता चल गया की खाने में कुछ तो गड़बड़ है तो उसने एक कौर खा के देखा और बोली; "नमक-मिर्च सब तो ठीक है?!" पर मैं समझ गया की बुखार के कारन ही मेरे मुँह से स्वाद चला गया है और इसलिए खाने का मन कतई नहीं हुआ| पर ऋतू ने प्यार से जोर-जबरदस्ती की और मुझे खाना खिला दिया| मैं बस खाने को पानी के साथ लील जाता की कम से कम पेट में चला जाए तो कुछ ताक़त आये|

खाना खा कर ऋतू ने मुझे क्रोसिन दी और मैं फिर से लेट गया और फिर सीधा शाम 5 बजे उठा| बुखार उतरा तो नहीं था बस कम हुआ था, तो मैंने ऋतू से कहा की वो हॉस्टल चली जाए| "आपका बुखार कम हुआ है उतरा नहीं है| रात में फिर से चढ़ गया तो?" उसने चिंता जताते हुए कहा| फिर वो पानी गर्म कर के लाई और उसने मुझे 'स्पंज बाथ' दिया और दूसरे कपडे दिए पहनने को| फिर वही बेस्वाद चाय पि, हम दोनों में अब बातें नहीं हो रही थी| ऋतू बीच-बीच में कुछ बात करती थी पर मैं उसका जवाब हाँ या ना में ही देता था| फिर वो रात का खाना बनाने लगी, पर मेरा मन अब कमरे में कैद होने से उचाट हो रहा था| मैं खिड़की पास खड़ा हो गया और ठंडी हवा का आनंद लेने लगा| ऋतू ने मुझे बैठने को एक कुर्सी दी और कुछ देर बाद वहाँ मोहिनी आ गई|

"अरे मानु जी! क्या हालत बना ली आपने?" उसकी आवाज सुनते ही मैं चौंक कर गया और उसकी तरफ हैरानी से देखने लगा| "दीदी ये तो बेहोश हो गए थे मकान मालिक से डुप्लीकेट चाभी ली और घर खोला तब ...." ऋतू के आगे बोलने से पहले ही मैं बोल पड़ा; "अब पहले से बेहतर हूँ, वैसे अच्छा हुआ तुम आ गई| जाते समय इसे साथ ले जाना|"

"अरे अभी तो आई हूँ? और आप जाने की बात आकर रहे हो? बड़े रूखे हो गए आप तो? कहाँ गए आपकी chivalry???" मोहिनी मुझे छेड़ते हुए बोली|

"chivalry से तौबा कर ली मैंने! खाया-पीया कुछ नहीं गिलास तोडा बारह आना|" मैंने ऋतू को टोंट मारते हुए कहा| ये सुन कर ऋतू ने मोहिनी से नजर बचा कर कान पकडे और दबे होठों से सॉरी बोला|

"ऐसा क्या होगया की हमारे chivalry के राजा ने तौबा कर ली? बैठ इधर ऋतू मैं तुझे एक किस्सा सुनाऊँ| बात तब की है जब हम दोनों कॉलेज में थे, पढ़ाई में मैं जीरो थी हाँ उसके आलावा कल्चरल प्रोग्राम में मैं हमेशा आगे रहती थी| बाकी सारे सब्जेक्ट्स तो मैं जैसे-तैसे संभाल लेती पर एकाउंट्स मेरे सर के ऊपर से जाता था और तुम्हारे चहु ठहरे एकाउंट्स के महारथी| मेरी माँ ने इन्हें मुझे पढ़ाने के लिए बोला वो भी घर आ कर| तो जनाब हमेशा मुझे 2 फुट की दूरी से पढ़ाते थे| ऐसा नहीं था की माँ का डर था बल्कि वो तो ज्यादातर बहार ही होती थीं पर मजाल है की कभी इन्होने वो दो फुट की दूरी बाल भर भी कम की हो! अब मुझे इनके मज़े लेने होते थे तो मैं जानबूझ कर कभी-कभी इनके नजदीक खिसक कर बैठ जाती और ये एक दम से पीछे सरक जाते| इनकी मेरे नजदीक आने से इतनी फटती थी की पूछ मत! पूरे कॉलेज को पता था की जनाब मुझे पढ़ाते हैं और वो सब पता नहीं क्या-क्या बोलते थे इन्हें| कइयों ने इन्हें चढ़ाया की आज तू मोहिनी का हाथ पकड़ ले और बोल दे उसे की तू उससे प्यार करता है, उसे मिनट नहीं लगेगा पिघलने में पर आज तक इन्होने कभी मुझसे कुछ नहीं कहा|"

ऋतू ये सब सुन कर हैरान थी क्योंकि मैंने उसे ये सब कभी नहीं बताया था, पर ये सुनने के बाद उसे बहुत बुरा लग रहा था की क्यों उसने मुझे पर शक किया| खेर चाय पीना और कुछ गप्पें मारने के बाद मोहिनी हँसती हुई बोली; "चलो आपके बीमार पड़ने से एक तो बात अच्छी हुई, की इसी बहाने पता तो चल गया की आप रहते कहाँ हो?! अब तो आना-जाना लगा रहेगा|"

"अगर एक बार पूछ लेते तो मैं वैसे ही बता देता|" मैंने भी हँसते हुए बता दिया|

"अच्छा जी? चलो आगे से ध्यान रखूँगी| चल भई रितिका?"

"दीदी प्लीज मैं आज यहीं रुक जाऊँ? अभी बुखार सिर्फ कम हुआ है उतरा नहीं है, रात को तबियत ख़राब हो गई तो कौन यहाँ देखने वाला?" ऋतू ने मिन्नत करते हुए कहा|

"कोई जर्रूरत नहीं है, मैं ठीक हूँ|" मैंने उसी रूखेपन से जवाब दिया|

"कोई बात नहीं तू रुक जा यहाँ|" मोहिनी ने ऋतू के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा| फिर मेरी तरफ देख कर बोली; "आप ना ज्यादा उड़ो मत! वरना मैं भी यहीं रुक जाऊँगी| वैसे भी अब तो आपने chivalry से तौबा कर ही ली है, तो अब तो कोई दिक्कत नहीं होगी आपको?!" मोहिनी ने मुझे छेड़ते हुए कहा|

"यार आप अब भी नहीं सुधरे!" मैंने हँसते हुए कहा|

"जो सुधर जाए वो मोहिनी थोड़े ही है|" इतना कह कर वो मुस्कुराते हुए चली गई| ये सब सुन कर अब तो जैसे ऋतू के मन में प्यार का सागर उमड़ पड़ा| उसने बड़े प्यार से खाना बनाया पर नाक बंद थी और जो थोड़ी-बहुत खुशबु मैं सूँघ पाया उससे लगा की खाना जबरदस्त बना होगा, पर जब ऋतू ने मुझे पहला कौर खिलाया तो वही बेस्वाद! जैसे -तैसे खाना निगल लिया और फिर ऋतू को खाने के लिए बोला| वो अपना खाना ले कर मेरे सामने बैठ गई और खाने लगी| खाने के बाद उसने मुझे फिर से क्रोसिन दी और हम दोनों लेट गए| रात के 1 बजे मुझे फिर से बुखार चढ़ गया और मैं बुरी तरह कँप-कँपाने लगा| ऋतू शायद जाग रही थी तो उसने मेरी कँप-कँपी सुनी और तुरंत लाइट जलाई और उठ कर मुझे पीठ के बल लिटाया| जैसे ही उसने मेरे माथे को छुआ तो वो चीख पड़ी; "हाय राम! अ...अ....आपका बदन तो भट्टी की तरह जल रहा है!" सबसे पहले उसने मुझे थोड़ा बिठाया और एक क्रोसिन की गोली दी फिर उसने आननफानन में सारी चादरें उठाई और एक-एक कर मुझ पर डाल दी| पर मैं अब भी काँप रहा था, ऋतू की आँखों से आँसूँ बहने लगे और जोर-जोर से मेरे हाथ और पाँव मलने लगी| जब उसे कुछ और नहीं सुझा तो वो उठी और आ कर मेरी बगल में लेट गई और मुझे उसने अपनी तरफ करवट करने को कहा| उसने मेरा मुँह अपनी छाती में दबा दिया और खुद मुझसे इस कदर लिपट गई जैसे की कोई जंगली बेल किसी पेड़ से लिपट जाती है| मैंने भी उसे कस कर जकड लिया और अपने ऊपर भी उसने वो चादरें डाल ली और मेरी पीठ रगड़ने लगी| उसकी सांसें तेज चलने लगी थी, वो घबरा रही थी की कहीं मैं मर गया तो? उसने बुदबुदाते हुए कहा; "मैं आपको कुछ नहीं होने दूँगी| प्लीज.....प्लीज... मुझे छोड़ कर मत जाना| आपके बिना मेरा कौन है? कैसे जीऊँगी मैं?" करीब एक घंटा लगा मेरे जिस्म पर दवाई का असर होने में और मेरी कँप-कँपी थम गई| ऋतू के सारे कपडे मेरे माथे और उसके जिस्म के पसीने से भीग चुके थे! धीरे-धीरे हम दोनों इसी तरह एक दूसरे की बाहों में सो गए| सुबह पाँच बजे मेरी आँख खुली और मैंने खुद को उसकी गिरफ्त से धीरे से छुड़ाया और उसके मस्तक पर चूमा| बुखार अब कम था पर मेरे होठों के एहसास से ऋतू जाग गई और मुझे जागता हुआ पा कर मेरी आँखों में देखते हुए पूछा; "अब आपकी तबियत कैसी है?" माने मुस्कुरा कर हाँ में गर्दन हिलाई और वो समझ गई की मैं ठीक हूँ| उसने मेरा माथा छुआ तो घबरा गई और बोली; "बुखार खत्म नहीं हुआ आपका! आज आपको मेरे साथ डॉक्टर के चलना होगा|" मैंने जवाब में बस हाँ कहा| कल तक मुझे जो गुस्सा ऋतू पर आ रहा था वो अब प्यार में बदल गया था| अब मैं उससे अब अच्छे से बात आकर रहा था और वो भी अब पहले की तरह खुश थी| नाश्ता कर के वो मेरे साथ हॉस्पिटल के लिए निकली पर मेरे जिस्म में ताक़त कम थी तो नीचे आ कर हमने फ़ौरन ऑटो किया और हॉस्पिटल पहुँचा| डॉक्टर ने चेक-अप किया और डेंगू का टेस्ट कराने को कहा| ये सुनते ही ऋतू बहुत घबरा गई, मानो की जैसे डॉक्टर ने कहा हो की मुझे कैंसर है| खेर ब्लड सैंपल देने के टाइम जब नर्स ने सुई लगाईं तो ऋतू से वो भी नहीं देखा गया और मुझे होने वाला उसके चेहरे पर दिखने लगा, उसका बचपना देख नर्स भी हँस पड़ी| खेर हम दवाई ले कर घर लौटे और रिपोर्ट कल सुबह आने वाली थी|
 
update 21

ऋतू बहुत घबराई हुई थी और मुझे उसकी घबराहट दूर करनी थी; "जान!" इतना सुनना था की वो भागती हुई आई और मेरे सीने से लग गई और फफक का करो पड़ी| "कान तरस गए थे आपके मुँह से ये सुनने को|" उसने रोते हुए कहा| "आपको कुछ हो जाता तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं करती| प्लीज मुझे माफ़ कर दो!" मैंने उसके सर को चूमा और उसे कस के अपनी छाती से चिपका लिया, तब जा कर उसका रोना कम हुआ| तभी अनु मैडम का फ़ोन बज उठा और फ़ोन ऋतू के हाथ के पास था और उसी ने मुझे फ़ोन उठा कर दिया| पर इस बार उसके मुँह पर जलन या कोई दुःख नहीं था| मैडम ने मेरा हालचाल पूछा पर मैंने उन्हें ये नहीं बताया की मैं यहीं शहर में हूँ वरना वो घर आती और फिर ऋतू को देख के हजार सवाल पूछती| जब उन्हें पता चला की मुझे डेंगू होने के चांस हैं तो वो भी घबरा गईं पर मैंने उन्हें ये झूठ बोल दिया की यहाँ सब परिवार वाले हैं मेरी देख-रेख करने को! ऋतू ये सब बड़ी गौर से सुन रही थी और जैसे ही मेरी बात खत्म हुई तो उसने पूछा की मैंने झूठ क्यों बोला; "mam यहाँ आ जाती तो तुम कहाँ छुपती?" ये सुन कर ऋतू को समझ आ गया और वो कुछ खाने के लिए बनाने लगी| फिर आस-पडोसी भी आये और मेरा हाल-चाल पूछने लगे| सुभाष जी तो ऋतू की तारीफ करते नहीं थक रहे थे!

भाई ऐसा जीवन साथी तो बड़ी मुश्किल से मिलता है, जो लड़की शादी से पहले इतना ख्याल रखती हो वो भला शादी के बाद कितना ख्याल रखेगी?! ये सुन ऋतू के गाल शर्म से लाल हो गए|

"तुम दोनों जल्दी से शादी कर लो इसी बहाने बिल्डिंग में थोड़ी रौनक बनी रहेगी|" पांडेय जी ने कहा|

"जी अभी पहले ये अपनी पढ़ाई तो पूरी कर ले!" माने मुस्कुरा कर जवाब दिया तो ऋतू ने भाभी के कंधे पर अपना मुँह छुपा लिया, ये देख सब हँस पड़े| चाय पी कर सब गए तो ऋतू ने खाना बनाया और खुद अपने हाथ से मुझे खिलाया और आज तो मैंने भी उसे अपने हाथ से खिलाया| खाना खा कर ऋतू ने मुझे अपना सर उसकी गोद में रख कर लेटने को कहा| थोड़ी देर बाद दोनों की आँख लग गई और फिर जब मैं उठा तो ऋतू चाय बना के लाइ| चाय की चुस्की लेते हुए मैंने अपनी चिंता उस पर जाहिर की;

मैं: ऋतू....चीजें वैसे नहीं हो रही जैसी होनी चाहिए!

ऋतू: क्यों?? क्या हुआ?

मैं: मैं चाहता था की हमारा प्यार एक राज़ रहे तब तक जब तक की तुम अपने फाइनल ईयर के पेपर नहीं दे देती| पर यहाँ तो सबको पता चल चूका है!

ऋतू: कल जब मैं आपसे मिलने आई तो मैं 20 मिनट तक आपका दरवाजा खटखटाती रही, आपको दसियों दफा कॉल किया पर आप ने कोई जवाब ही नहीं दिया| मेरा मन अंदर से कितना घबरा रहा था ये आप सोच भी नहीं सकते! कलेजा मुँह को आ गया था, लगता था की हमारा साथ छूट गया और वो भी सिर्फ मेरी वजह से! मैंने हार कर पड़ोसियों से पूछा तो उन्होंने कहा की मकान मालिक के पास डुप्लीकेट चाभी है| मैंने उनसे ये कहा की मैं आपकी मंगेतर हूँ और आपसे मिलने आई हूँ, तब जा कर उन्हें मेरी बात का भरोसा हुआ| कॉलेज में मेरी सिर्फ और सिर्फ एक दोस्त है काम्या, वो भी आपके बारे में ज्यादा नहीं जानती| मैंने उसे बीएस इतना बताया की आप एक ऑफिस में जॉब करते हो, इससे ज्यादा जब भी वो पूछती है तो मैं बात टाल जाती हूँ| उस दिन सूमो भय भी शायद जान या समझ चुके हों, क्योंकि उनका भाई तो अब हमारे कॉलेज में नहीं पढता| हॉस्टल में मैं किसी से ज्यादा बात नहीं करती, जी लगा कर पढ़ती हूँ तो इसलिए किसी को हमारे रिश्ते के बारे में भनक तक नहीं| हम एक समाज में रहते हैं, अब मिलेंगे तो लोग देखेंगे ही और बिना मिले तो मैं आपसे रह नहीं सकती!

मैं: और तुम्हारी पढ़ाई का क्या?

ऋतू: आपसे किया वादा मुझे याद है!

ये सुन कर मैं थोड़ा निश्चिन्त हुआ पर फिर भी एक डर तो था की अगर बात खुल गई तो ऋतू की पढ़ाई ख़राब हो जाएगी, पर फिर सोचा की जो होगा देखा जायेगा! वो रात बड़े प्यार से बीती, सोने के समय आज भी ऋतू ने मुझे कल की तरह अपने सीने से चिपका लिया और गहरी सांसें लेते हुए सो गई| मैं समझ रहा था की मेरे इतने करीब होने से उसके जिस्म में क्या उथल-पुथल मची हुई है पर मैं अभी इतना स्वस्थ नहीं हुआ था की उसके साथ सेक्स कर सकूँ! आज दो बार दवाई लेने से ये फायदा हुआ था की अब बुखार नहीं था, बॉडी अब भी रिकवर कर रही थी| अगले दिन रिपोर्ट आई और हुआ भी वही जो डॉक्टर ने कहा था| डेंगू! डॉक्टर ने खूब साड़ी दवाइयाँ लिख दी, बुखार रोकने से ले कर मल्टी विटामिन तक! गोलियां भी रिवाल्वर के कारतूस के साइज की! अगले तीन दिन तक ऋतू ने मेरी बहुत देखभाल की और मेरे कई बार उसे हॉस्टल जाने के आग्रह करने के बाद भी उसने मेरी बात नहीं मानी| बुखार अब नहीं था पर कमजोरी बहुत थी मेरा प्लेटलेट काउंट काफी गिर चूका था, ये तो ऋतू 4 टाइम खाना बना कर मुझे खिला रही थी तो ज्यादा घबराने वाली बात नहीं थी| रात में सोने के समय रोज ऋतू मुझे अपने सीने से चिपका कर सोती, रोज रात को मेरी आँखों के सामने उसके स्तनों की घाटी होती और सुबह आँख खुलते ही मुझे फिर वही घाटी दिखती|
मोहिनी भी मुझे से मिलने रोज आई और अपने साथ फ्रूट्स लाती और वही हँसी-मज़ाक चलता रहा| तीसरे दिन तो आंटी जी भी आ गईं और उन्होंने भी ऋतू की बहुत तारीफ की; "भाई भतीजी हो तो ऋतू जैसी की अपने चाचा का इतना ख़याल रखती है|" ये सुन कर ऋतू को उतना अच्छा नहीं लगा जितना सुभाष अंकल की तारीफ करने से हुई थी| अब उन्होंने तो ऋतू को मेरी मंगेतर माना था और आंटी जी ने उसे भतीजी! "माँ सेवा करेगी ही, इसके चाचू ने भी इसका कम ख्याल रखा है? स्कूल से लेकर एक ये ही तो हैं जो इसे पढ़ा रहे हैं|" मोहिनी की बात सुन कर ऋतू खुद को बोलने से नहीं रोक पाई; "आंटी जी घर में सिर्फ और सिर्फ ये ही हैं जिन्होंने मुझे बचपन से लेकर अब तक पढ़ाया है| दसवीं और बारहवीं मैं इन्हीं की वजह से पढ़ पाई वरना घरवाले तो सब पीछे पड़े थे की ब्याह कर ले|"

नोट करने वाली बात ये थी की ऋतू ने मुझे एक बार भी 'चाचू' नहीं बोला था और मैं ये बात समझ चूका था पर डर रहा था की आंटी ये बात पकड़ न लें| शुक्र है की उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया! उनके जाने के बाद मुझे ध्यान आया की घर में मेरी तबियत के बारे में किसी को पता है या नहीं? क्या ऋतू ने किसी को बताया?

"ऋतू, तूने घर में फ़ोन किया था?" मैंने ऋतू से घबराते हुए पूछा|

"नहीं... मुझे याद नहीं रहा|" ऋतू का जवाब सुन कर मैं गंभीर हो गया| मैंने तुरंत फ़ोन घर मिला दिया ये जानने के लिए की कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं है? पर शुक्र है की कोई घबराने की बात नहीं थी| मैं ने राहत की साँस ली और ऋतू को बताया की आगे से ये बात कभी मत भूलना| मुझे जर्रूर याद दिला देना वरना वो लोग अगर हॉस्टल पहुँच गए तो बखेड़ा खड़ा हो जायेगा| उसने हाँ में सर हिलाया उसने भी चैन की साँस ली| आज रात सोने के समय भी उसने ठीक वही किया, मेरा सर अपने सीने से लगा कर वो लेट गई| मैं इतने दिनों से उसके जिस्म की गर्मी को महसूस कर पा रहा था, पर मजबूर था की कुछ कर नहीं सकता था| आज मैंने ठान लिया था की इतने दिनों से ऋतू मेरी तीमारदारी में लगी है तो उसे थोड़ा खुश करना तो बनता है| मैंने ऋतू के स्तनों की घाटी को अपने होठों से चूमा तो उसकी सिसकारी फुट पड़ी; "ससससस...अ..ह...हह" और वो हैरत से मेरी तरफ देखने लगी| मुझे ऐसा लगा जैसे वो मुझसे मिन्नत कर रही हो की मैं उसकी इस आग का कुछ करूँ| मैंने थोड़ा ऊपर आते हुए उसके गुलाबी होठों को चूम लिया, आगे मेरे कुछ करने से पहले ही ऋतू के अंदर की आग प्रगाढ़ रूप धारण कर चुकी थी| उसने गप्प से अपने होठों और जीभ के साथ मेरे होठों पर हमला कर दिया| उसकी जीभ अपने आप ही मेरे मुँह में घुस गई और मेरी जीभ से लड़ने लगी| मैंने भी अपने दोनों हाथों से उसके चेहरे को थामा और अपने होठों से उसके निचले होंठ को मुँह में भर चूसने लगा| ये मेरा सबसे मन पसंद होंठ था और मैं हमेशा उसके नीचले होंठ को ही सबसे ज्यादा चूसता था| दो मिनट तक मैं बीएस उसके निचले होंठ को चुस्त रहा और जब जी भर गया तो अपनी जीभ और निचले होठ की मदद से उसके ऊपर वाले होंठ को मुँह में भर के चूसने लगा| जीभ से मैं उसके ऊपर वाले मसूड़ों को भी छेड़ दिया करता| इधर ऋतू के हाथों ने अपनी हरकतें शुरू कर दी, सबसे पहले तो वो मेरी टी-शर्ट को उतारने की जद्दोजहद करने लगे| पर मैंने अपने हाथों से उसे रोक दिया और वापस उसके चेहरे को थाम लिया और अपनी जीभ और होठों से उसके होठों को बारी-बारी चुस्त रहा| ऋतू को इसमें बहुत मजा आ रहा था पर उसे चाहिए था मेरा लंड, जो मैं उसे दे नहीं सकता था! मैंने उसके होठों को चूसना रोका और उसके चेहरे को थामे हुए ही कहा; "अपना पाजामा निकाल और जो मैं कह रहा हूँ वो करती जा|" मेरी बात सुन उसने लेटे-लेटे अपनी पजामी का नाडा खोल दिया और उसे अपनी गांड से नीचे करते हुए उतार फेंक दिया और बेसब्री से मेरे अगले आदेश का इंतजार करने लगी| मैं सीधा लेट गया, पीठ के बल उसे और मेरे दोनों तरफ टांग कर के मेरे पेट पर बैठने को कहा| ऋतू तुरंत उठ कर वैसे ही बैठ गई, फिर मैंने उसके कूल्हों पर अपना हाथ रखा और उसे धीरे-धीरे सरक कर मेरे सर की तरफ आने को कहा| वो भी धीरे-धीरे कर के ठीक मेरे मुँह के ऊपर आ कर उकडून हो कर बैठ गई| कमरे में अँधेरा था इसलिए न तो मैं और न वो मेरी शक्ल और भावों को देख पा रही थे| जैसे ही मेरी जीभ ने उसकी बुर के कपालों को छुआ तो वो चिंहुँक उठी और ऊपर की ओर हवा में उचक गई|
मैंने उसकी जनघ पर हाथ रख कर उसे मेरे मुँह पर बैठने को कहा और तब जा कर वो नीचे वापस मेरे मुँह पर बैठ गई| मैंने अपने हाथों से उसकी जांघों को पकड़ लिया ताकि वो और न उचक जाए| मैंने फिर से ऋतू के बुर के कपालों को जीभ से छेड़ा पर इस बार वो ऊपर नहीं उचकी| अब मैंने अपने होठों से उन कपालों को पकड़ लिया और नीचे की तरफ खींचने लगा, ऋतू को हो रहे मीठे दर्द के कारन उसके मुँह से 'आह' निकल गई| उसने अपने दोनों हाथों से मेरे सर को थाम लिया और दबाव देकर अपने बुर को मेरे मुँह पर रगड़ना चाहा" पर मैंने उसे ऐसा करने से रोक दिया, अपने दोनों हाथों को मैं उसकी जांघ से हटा कर उसके बुर के इर्द-गिर्द इस कदर सेट किया की मेरे दोनों हाथों के बीच उसकी बुर थी| ऋतू का उतावलापन बढ़ने लगा था और मैं उसे रो रहा था ताकि वो ज्यादा से ज्यादा मजा ले सके| मैंने ऋतू के कपालों को होठ से चूसना शुरू कर दिया था और इधर ऋतू अपनी कमर मटका रही थी ताकि वो अपनी बुर को और अंदर मेरे मुँह में घुसा दे!

मैंने जितना हो सके उतना अपना मुँह खोला, ऋतू की बुर को जितना मुँह में भर सकता था उतना मुँह में भरा और अपनी जीभ उसके बुर में घुसा दी| मेरी जीभ उसके बुर के कपालों के बीच से अपना रास्ता बना कर जितना अंदर जा सकती थी उतना चली गई| "स्स्स्सस्स्स्स...आअह्ह्ह्हह" इस आवाज के साथ ऋतू ने मेरी जीभ का अपनी बुर में स्वागत किया| मैंने अपनी जीभ अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी और इधर ऋतू बेकाबू होने लगी| उसने अपनी कमर इधर-उधर मटकाना शुरू कर दी और अपने हाथों से मेरे सर के बाल पकड़ के खींचने लगी| इधर मेरी जीभ अंदर-बहार हो रही थी और उधर ऋतू ने अपनी कमर को आगे-पीछे हिलाना शुरू कर दिया| हम दोनों एक ऐसे पॉइंट पर पहुँच गए जहाँ मेरी जीभ और ऋतू की कमर लय बद्ध तर्रेके से आगे-पीछे हो रहे थे| 5-7 मिनट और ऋतू की बुर से रस निकल पड़ा जो मेरे मुँह में भरने लगा| ऋतू ने अपनी दोनों टांगें चौड़ी की और अपने बुर को मेरे मुँह पर दबा दिया और सारा रस मेरे मुँह में उतर गया| अपना सारा रस मुझे पिला कर वो नीचे खिसकी और अपनी बुर को ठीक मेरे लंड पर रख कर वो मेरे ऊपर लुढ़क गई| उसकी सांसें तेज हो चुकी थी और पसीनों की बूंदों ने उसके मस्तक पर बहना शुरू कर दिया था| दस मिनट बाद जब उसकी सांसें नार्मल हुई तो वो बोली; "Thank You!!!" मैंने उसके मस्तक को चूम लिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया| उसके बाद तो ऋतू को बड़ी चैन की नींद आई, ऐसी नींद की वो सारी रात मेरी छाती पर सर रख कर ही सोई| सुबह मैंने ही उसे जगाया वो भी उसके सर को चूम कर|
 
update 22

"हाय! क्या शुरुवात हुई है सुबह की!" ऋतू ने मेरी छाती पर लेटे हुए ही अंगड़ाई लेते हुए कहा| फिर वो उठी और उसकी नजर अपनी पजामी पर पड़ी जो फर्श पर पड़ी थी| उसने वो उठा कर पहना और बाथरूम में नहाने चली गई| मोहिनी ने उसके कुछ कपडे ला दिए थे जिन्हें पहन कर ऋतू बाहर आई| आज तो मेरा भी मन नहाने का था पर ठन्डे पानी से नहाने के बजाये आज मुझे गर्म पानी मिला नहाने को| जब मैं नहा कर बाहर निकला तो ऋतू गुम-शूम दिखी, मैंने उसे हमेशा की तरह पीछे से पकड़ लिया और अपने हाथ को उसके पेट पर लॉक कर दिया|

मैं: क्या हुआ मेरी जानेमन को?

ऋतू: मैं बहुत सेल्फिश हूँ!

मैं: क्यों? ऐसा क्या किया तुमने?

ऋतू: कल रात को..... आपने तो मुझे सटिस्फाय कर दिया.... पर मैंने नहीं.... (ऋतू ने शर्माते हुए कहा|)

मैं: अरे तो क्या हुआ? दिन भर मेरा ख्याल रखती हो, तक गई थी इसलिए सो गई| इसमें मायूस होने की क्या बात है?

ऋतू: नहीं... मैं....

मैं: पागल मत बन! अभी मेरी तबियत पूरी तरह ठीक नहीं है, जब ठीक हो जाऊँगा ना तब जितना चाहे उतना सटिस्फाय कर लेना मुझे!

मैंने उसे छेड़ते हुए कहा और ऋतू भी हँस पड़ी|

मैं: तू इतने दिनों से कॉलेज नहीं जा रही है, तेरी पढ़ाई का नुक्सान हो रहा होगा इसलिए कल से कॉलेज जाना शुरू कर|

ऋतू: आप पढ़ाई की चिंता मत करो! मैं सारा कवर-अप कर लूँगी!

मैं: ऋतू... बात को समझा कर! तकरीबन एक हफ्ता होने को आया है, आंटी जी और मोहिनी क्या सोचते होंगे? मेरी बात मान और कल से कॉलेज जाना शुरू कर और मेरी चिंता मत कर मैं घर चला जाता हूँ| वैसे भी पिताजी को मेरी तबियत के बारे में कुछ मालूम नहीं है, ऐसे में कुछ दिन वहाँ रुकूँगा तो बात बिगड़ेगी नहीं|

ऋतू ने बहुत ना-नुकुर की पर मैंने उसे मना ही लिया| शाम को जब मोहिनी आई तो मैंने उसे ऋतू को साथ ले जाने को कहा;

मोहिनी: अरे ऋतू चली गई तो आपका ध्यान कौन रखेगा?

मैं: मैं कल सुबह घर जा रहा हूँ वहाँ सब लोग हैं मेरा ख्याल रखने को| मैं तो संडे ही निकल जाता पर तबियत बहुत ज्यादा ख़राब थी!

खेर ऋतू अपना मन मारकर चली गई और उसने जो खाना बनाया था वही खा कर मैं सो गया| पिताजी को फ़ोन कर दिया था और वो मुझे लेने बस स्टैंड आ रहे थे| 4 घंटों का थकावट भरा सफर क्र मैं गाँव के बस स्टैंड पहुँचा जहाँ पिताजी पहले से ही मौजूद थे| उन्हें नहीं पता था की मेरी तबियत इतनी खराब है की बस स्टैंड से घर तक का रास्ता जो की 15 मिनट का था उसे मैंने 5 बार रुक-रुक कर आधे घंटे में तय किया| घर जाते ही मैं बिस्तर पर जा गिरा|

कमजोरी इतनी थी की बयान करना मुश्किल था, ऋतू ने मुझे शाम को फ़ोन किया पर मैं दपहर को खाना खा कर सो रहा था| मेरे फ़ोन ना उठाने से वो बहुत परेशान हो गई और धड़ाधड़ मैसेज करने लगी, पर डाटा बंद था इसलिए मैसेज भी seen नहीं थे| वो बेचैन होने लगी और दुआ करने लगी की मैं ठीक-ठाक हूँ| रात को आठ बजे मैं उठा तब मैंने फ़ोन देखा और फटाफट ऋतू को फ़ोन किया| "मैंने कहा था न की मैं आपकी देखभाल करुँगी, पर आपने जबरदस्ती मुझे खुद से दूर कर दिया! देखो आपकी तबियत कितनी ख़राब हो गई! आपने फ़ोन नहीं उठाया तो मैंने मजबूरन घर फ़ोन किया और तब मुझे पता चला की आपकी कमजोरी और बढ़ गई है!" ऋतू ने रोते-रोते खुसफुसाते हुए कहा|

"जान! मैं ठीक हूँ! उस टाइम थकावट हो गई थी, पर अब खाना खा कर दवाई ले चूका हूँ| तुम मेरी चिंता मत करो!" मैंने उसे तसल्ली देते हुए कहा|

"आपने जान निकाल दी थी मेरी! जल्दी से ऑनलाइन आओ मुझे आपको देखना है!" इतना कह कर ऋतू ने फ़ोन रख दिया और मैंने अपने हेडफोन्स लगाए और ऑनलाइन आ गया| ऋतू हमेशा की तरह बाथरूम में हेडफोन्स लगाए हुए मुझसे वीडियो कॉल पर बात करने लगी| बहुत सारे kisses मुझे दे कर उसे चैन आया और फिर रात को चाट करने के लिए बोल कर चली गई| रात दस नाज़े से वो मेरे साथ चाट पर लग गई और 12 बजे मैंने ही उसे सोने को कहा ताकि उसकी नींद पूरी हो| इधर मैं फ़ोन रख कर सोने लगा की तभी मूत आ गया| मैंने सोचा बजाये नीचे जाने के क्यों न छत पर ही चला जाऊँ| जब मैं छोटा था तो कभी-कभी रात को छत की मुंडेर पर खड़ा हो जाता और अपने पेशाब की धार नीचे गिराता| यही बचपना मुझे याद आ गया तो मैं भी मुस्कुराते हुए छत पर आ गया और अपना लंड निकाल कर मुंडेर पर चढ़ गया और मूतने लगा| जब मूत लिया तो मैं पीछे घुमा और वहाँ जो खड़ा था उसे देखते ही मेरी सिट्टी-पिट्टी गुल हो गई|

पीछे भाभी खड़ी थी और उनकी नजर मेरा लंड पर टिकी थी| जब मेरी नजरें उनकी नजरों का पीछा करते हुए मेरे ही लंड तक आई तो मैंने फट से लंड पाजामे में डाला और मुंडेर से नीचे आ गया| मैं बुरी तरह से झेंप गया था और वापस अपने कमरे की तरफ जा रहा था| इतने में पीछे से भाभी बोली; "मुझे तो लगा था की तुम आत्महत्या करने जा रहे हो, पर तुम तो मूत रहे थे! बचपना गया नहीं तुम्हारा देवर जी!" ये सुन कर मैं एक पल को रुका पर पलटा नहीं और सीधा आँगन में आ गया, हाथ-मुँह धोया और वापस कमरे में जाने लगा की तभी भाभी ऋतू वाले कमरे के बाहर अपनी कमर पर हाथ रखे मेरा इंतजार कर रही थी| "तन से तो जवान हो गए, पर मन से अब भी बच्चे हो!| उन्होंने हँसते हुए कहा| मैं अब भी शर्मा रहा था तो सर झुका कर अपने कमरे में घुस गया और वो ऋतू वाले कमरे में घुस गईं| लेटते ही मुझे ऋतू की वो बात याद आई जिसमें भाभी मेरे बारे में सोच के नींद में मेरा नाम बड़बड़ा रही थी| आज उन्होंने ने जिस तरह से मुझे 'देवर जी' कहा था वो भी बहुत कामुक था! मैं सचेत हो चूका था और मेरा मन भाभी के जिस्म की प्यास को महसूस करने लगा था, पर ऋतू का प्यार मुझे गलत रास्ते में भटकने नहीं दे रहा था| अगले कुछ दिन तक भाभी मेरे साथ यही आँख में चोली का खेल खेलती रही और सबकी नजरें बचा कर मुझे अपने जिस्म की नुमाइश आकृति रही| जब भी मैं अपने कमरे में अकेला होता तो वो झाड़ू लगाने के बहाने आती और अपने पल्लू को अपने स्तनों पर से हटा के अपनी कमर से लपेट लेती| उसके स्तनों की वो घाटी इतनी गहरी थी जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल था| भाभी की 44D साइज की छातियाँ दूध से भरी लगती थी, 37 की उम्र में भी उसकी छातियों में बहुत कसावट थी| झाड़ू लगाते हुए वो मेरे पलंग के नजदीक आ गई और इतना झुक गई की मुझे उनके निप्पल लग-भग दिख हो गए| मैं उठ के जाने को हुआ तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया; "कहाँ जा रहे हो देवर जी?!" मैंने कोई जवाब नहीं दिया और मुँह फेर लिया| "मेरा तो काम हो गया!" इतना कह कर उन्होंने मेरा हाथ छोड़ दिया और अपनी कातिल हंसी हँसते हुए चली गई| उनकी ये डबल मीनिंग वाली बात मैं समझ चूका था, वो तो बस मुझे अपने स्तन दिखाने आई थीं! कमरा तक ठीक से साफ़ नहीं किया था उन्होंने, पहले तो सोचा की उन्हें टोक दूँ पर फिर चुप रहा और वापस लेट गया| वो पूरा दिन भाभी मुझे देख-देख आकर हँसती रही और मेरे जिस्म में आग पैदा हो इसकी कोशिश करती रही| अगले दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ, मैं आँगन में लेटा हुआ था और वो हैंडपंप के पास उकडून हो कर बैठी कपडे धो रही थी| मैं जहाँ लेटा था वहाँ मेरे बाएं तरफ रसोई और दाएं तरफ गुसलखाना था जहाँ पर हैंडपंप लगा था| मैं पीठ के बल लेटा हुआ था और अपने फ़ोन में कुछ देख रहा था की मैंने 'गलती' से दायीं तरफ करवट ली| करवट लेते ही मेरी नजर अचानक से भाभी पर पड़ी जो मेरी तरफ देख रही थी और उनका निचला होंठ उनके दाँतों तले दबा हुआ था| उनकी दायीं टाँग सीधी थी और उन्होंने उसके ऊपर से अपने पेटीकोट ऊपर चढ़ा रखा था| भाभी मेरी तरफ प्यासी नजरों से देख रही थी और सोच रही थी की मैं उठ कर आऊँगा और उन्हें गोद में उठा कर ले जाऊँगा|

भाभी ने अपना पेटीकोट और ऊपर चढ़ा दिया और उनकी माँसल जाँघ मुझे दिखने लगी| ये देखते ही मुझे झटका लगा और मैंने तुरंत दूसरी तरफ करवट आकर ली और ये देख आकर भाभी खिलखिलाकर हँस पड़ी| रात खाने के बाद मैं छत पर थोड़ा टहल रहा था की तभी ऋतू का फ़ोन आ गया और मैं उससे बात करने लगा| बात करते-करते रात के 11 बज गए, मैंने ऋतू को बाय कहा और फ़ोन पर एक लम्बी सी Kiss दी और फ़ोन रखा| मौसम अच्छा था, ठंडी-ठंडी हवाएँ जिस्म को छू रही थी और मजा बहुत आ रहा था| मैंने सोचा की आज यहीं सो जाता हूँ, पास ही एक चारपाई खड़ी थी तो मैं ने वही बिछाई और मैं दोनों हाथ अपने सर के नीचे रख सो गया| रात के एक बजे मेरे कान में भाभी की मादक आवाज पड़ी; "देवर जी!!!" ये सुनते ही मैं चौंक कर उठ गया और सामने देखा तो भाभी दिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी हैं| पूनम के चाँद की रौशनी में उनका पूरा बदन जगमगा रहा था| 38 इंची की कमर और उनकी 44D की छातियाँ मेरे ऊपर कहर ढा रही थी! मेरी नजरें अपने आप ही उनकी ऊपर-नीचे होती छातियों पर गाड़ी हुई थी| भाभी जानती थी की मैं कहाँ देख रहा हूँ इसलिए वो और जोर से सांसें लेने लगीं| दिमाग में फिर से झटका लगा और मैं ने उनकी मन्त्र-मुग्ध करती छातियों से अपनी नजरें फेर ली| "यहाँ क्या कर रहे हो देवर जी?" भाभी ने फिर से उसी मादक आवाज में कहा|

"वो मौसम अच्छा था इसलिए ...." मैंने उनसे मुँह फेरे हुए ही कहा| "हाय!!!...सच कहा देवर जी! सससस...ठंडी-ठंडी हवा तो मेरे बदन पर जादू कर रही है| मैं भी यहीं सो जाऊँ?" भाभी की सिसकी सुन मैं उठ खड़ा हुआ और नीचे जाने लगा| "आप चले जाओगे तो मैं कहाँ सोऊँगी?" भाभी बोलती रही पर मैं रुका नहीं और अपने कमरे में आ कर दरवाजा बंद कर के लेट गया| भाभी का मुझे रिझाने का काम पूरे 5 दिन और चला और इन्हीं दिनों मैं इतना तंदुरुस्त हो गया की अपना ख्याल रख सकूँ! घर के असली दूध-दही-घी की ताक़त से जिस्म में जान आ गई थी| अब मुझे वहाँ से जल्दी से जल्दी निकलना था वरना भाभी मेरे लंड पर चढ़ ही जाती! एक हफ्ते बाद में वापस शहर पहुँचा तो मेरा प्यार मुझे लेने के लिए बस स्टैंड आया था| ऋतू मुझे देखते ही मेरे गले लग गई और उसकी पकड़ देखते ही देखते कसने लगी| "जानू! पूरे दस दिन आप मुझसे दूर रहे हो! आगे से कभी बीमार पड़े ना तो देख लेना! मैं भी आपके ही बगल में लेट जाऊँगी!" ये सुन कर मैं हँस पड़ा, हम घर पहुँचे और ऋतू के हाथ का खाना खा कर मन प्रसन्न हो गया| मैंने जान कर ऋतू को भाभी द्वारा की गई हरकतों के बारे में कुछ नहीं बताया वरना फिर वही काण्ड होता! इन पंद्रह दिनों में मैं बहुत कमजोर हो गया था इसीलिए उस दिन ऋतू ने मेरे ज्यादा करीब आने की कोशिश नहीं की| अगले दिन मैंने ऑफिस ज्वाइन किया तो मेरी कमजोरी अनु मैडम से छुपी नहीं और वो कहने लगी की मुझे कुछ और दिन आराम करना चाहिए, अब तो राखी ने भी ज्वाइन कर लिया था और भी मैडम की बात को ही दोहराने लगी| सिर्फ एक मेरा बॉस था जो मन ही मन गालियाँ दे रहा था|
 
update 23

उस दिन मैं शाम को ऋतू से मिल नहीं पाया क्योंकि काम बहुत ज्यादा था और राखी मैडम से बैलेंस शीट फाइनल नहीं हो रही थी तो मुझे उसकी मदद करनी पड़ी| शाम को देर हो गई थी इसलिए मैंने ही उसे घर ड्राप किया था| अगले दिन मुझे ऋतू का फ़ोन आया तो वो बहुत घबराई हुई थी!

मैं: क्या हुआ? तू घबराई हुई क्यों है?

ऋतू: I..I.. I think I'm pregnant!!!

मैं: WHAT???!!!! H..How.. this . happened?!

ऋतू: I missed ...my periods!

ये सुन कर दोनों खामोश हो गए, मेरा दिमाग तो जैसे सुन्न हो चूका था|
ऋतू: जानू! हेल्लो???? जानू????

ऋतू की आवाज सुन कर मैं अपनी सोच से बाहर निकला;

मैं: मैं आ रहा हूँ तेरे कॉलेज, मुझे लाल बत्ती पर मिल|

इतना कह कर मैं ऑफिस से भागा, मैडम ने मुझे भागते हुए देखा तो तुरंत मुझे कॉल कर दिया| मैं अभी बाइक के पास ही पहुँचा था| मैंने उन्हें झूठ बोल दिया की परिवार के किसी लड़के को हॉस्पिटल लाये हैं| मैं बाइक भगाता हुआ कॉलेज पहुँचा और ऋतू वहीँ इंतजार कर रही थी| मैं उसे ले कर शहर के दवाखाने नहीं जा सकता था वरना कल को कोई काण्ड अवश्य होता| इसलिए मैं उसे ले कर बाराबंकी आ गया| दो घंटे के रास्ते में हमारी कोई भी बात नहीं हुई, ऋतू मेरे जिस्म से चिपकी बस सुबक रही थी| उसकी आँख के आँसू मेरी कमीज पीछे से भीगा रहे थे| शहर में घुसते ही पहले मैंने ऋतू को एक मंगलसूत्र खरीद कर दिया और साथ ही मैं सिंदूर की एक डिब्बी| ऋतू हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी;

ऋतू: हम शादी कर रहे हैं? (उसने खुश होते हुए कहा|)

मैं: नहीं! ये सिन्दूर लगा ले और मंगलसूत्र पहन ले अगर डॉक्टर पूछे तो कहना की हमारी शादी को 5 महीने ही हुए हैं|

ये सुन कर ऋतू मायूस हो गई, पर मेरा ध्यान अभी सिर्फ इस बात को जानने में था की क्या वो प्रेग्नेंट है? दिमाग तैयारी करने लगा था की अगर वो प्रेग्नेंट है तो मुझे उसके साथ जल्द से जल्द भागना होगा! एक महंगे से हॉस्पिटल के बाहर मैंने बाइक रोकी और फिर हम दोनों अंदर पहुँचे| कार्ड बनवा कर हम बीअत गए, डिटेल में मैंने अपना नंबर डाला और ऋतू का नाम बदल कर प्रिया कर दिया| कुछ देर इंतजार करने के बाद हम डॉक्टर के केबिन में घुसे और डॉक्टर ने हम दोनों का नाम पूछा तो मैंने उन्हें अपना नाम रितेश बताया| ये सुन कर ऋतू थोड़ा हैरान हुई क्योंकि मैं ऋतू को नकली नाम बताना भूल गया था| मैंने ऋतू का हाथ दबा कर उसे समझा दिया|

डॉक्टर: तो बताइये मिस्टर शुभम क्या समस्या है?

मैं: जी mam ... मुझे लगता है की प्रिया प्रेग्नेंट है... और अभी हम दोनों ही जॉब कर रहे हैं तो....I hope you can understand!

डॉक्टर: Yeah ... Yeah .... प्रिया आप चलो मेरे साथ|

ऋतू उठ कर उनके साथ चली गई और करीब 15 मिनट बाद डॉक्टर और ऋतू साथ आये|

डॉक्टर: You should have used precaution!

मैं: Mam ... वो... Sorry! पर ऋतू ने I-pill तो ली थी|

डॉक्टर: 72 घंटों के अंदर ली थी?

मैं: नहीं mam .... थोड़ा लेट हो गई थी!

डॉक्टर: देखो इस समय ऋतू के साथ थोड़ी कम्प्लीकेशन है! She's not physically fit to be a mom! Also, you can't choose the abortion. cause then she won't be able to conceive .ever!
ये सुन कर हम दोनों के दूसरे को देखने लगे और हमारी परेशानियाँ हमारी शक्ल से दिख रही थी|

डॉक्टर: See I'll write some medication which she has to take on a daily basis, this will only delay the pregnancy. If she stopped the medication, then she'll have to conceive the baby. She also needs multi-vitamins to be physically fit in order to . you know. be a mom. One more thing I'd like to ask, how long have you been married?
मैं: 5 months! But why?

डॉक्टर: You didn't tell me anything about your wife's orgasms?

अब ये सुन कर तो मैं दंग रह गया!

मैं: I thought they're natural...I..I had no idea.. its .a disease?!!
डॉक्टर: It's not a disease . yes she reaches orgasm a bit early but don't worry I've taught her a technique to last longer!

ये कहते हुए उन्होंने ऋतू को आँख मारी! खेर हम दवाई ले कर बाहर आये और दोनों भूखे थे तो मैंने ऋतू को एक रेस्टुरेंट में चलने को कहा| वहाँ खाना आर्डर कर ने के बाद हमने बात शुरू की;

मैं; घबराओ मत! सब कुछ ठीक हो जायेगा|

ऋतू: सब मेरी गलती थी, मैं अगर दवाई टाइम पर ले लेती तो ये सब नहीं होता!

मैं: जो हो गया सो हो गया! अब ये दवाई टाइम से खाना और ये बताओ की तुम अंदर से कमजोर कैसे हो? खाना ठीक से नहीं खाती?

ऋतू: नहीं तो... मैं तो ठीक से खाती-पीती हूँ!

मैं: और ये ओर्गास्म???

ऋतू: जब भी हम प्यार कर रहे होते थे तो मैं सबसे पहले..... मतलब वो.... और आप हमेशा देर तक....तो मैं.... (ऋतू को ये कहने में बड़ा संकोच हो रहा था|)

मैं: पगली! छोड़ ये सब और खाना खा| (मैंने उसका ध्यान उन बातों से हटाया और खाने में लगा दिया|)

खाना खा कर निकले तो बॉस का फ़ोन आ गया पर मैं चूँकि उस समय ड्राइव कर रहा था इसलिए फ़ोन नहीं उठा पाया| पहले मैंने ऋतू को हॉस्टल छोड़ा क्योंकि अब शाम के 4 बज रहे थे और मुझे ऑफिस पहुँचते-पहुँचते 5 बज गए| बॉस मुझे देखते ही जोर से चिल्लाया; "कहाँ था सारा दिन?" ये सुन कर मैडम अपने केबिन से बाहर आईं और मेरे बचाव में कूद पड़ी; "मुझे बता कर 'गए थे'! कजिन को एक्सीडेंट हो गया था और वो हॉस्पिटल में एडमिट था|" ये सुन कर बॉस ने मैडम को घूर के देखा और फिर बिना कुछ कहे अंदर केबिन में चला गया| मैं जानता था की आज तो मैडम को ये बहुत सुनाएगा इसलिए मैंने मैडम से दबे शब्दों में कहा; "mam! मेरी वजह से सर आपको बहुत डाटेंगे! आप को...." आगे मेरे कुछ भी कहने से पहले उन्होंने मेरी बात काट दी; "दोस्त को बचाना तो धर्म है!" इतना कह कर मैडम हँस पड़ी और मैं भी मुस्कुरा दिया| पर मन ही मन जानता था की mam को आज बहुत सुनना पड़ेगा|

खेर काम तो करना ही था और मैडम को कम डाँट पड़े इसलिए थोड़ी देर बैठ कर काम निपटाया और घर पहुँच गया| घर आते ही ऋतू को फ़ोन किया और उसे याद दिलाया की उसने गोली खाई या नहीं?! मैंने तो फ़ोन में भी रिमाइंडर डाल लिया ताकि मैं कभी भूलूँ नहीं| अगले दिन जब ऋतू से शाम को मिला तो वो मुझे थोड़ी गुम-सुम लगी, पूछने पर उसने कहा;"क्या मैं ये बेबी कंसीव नहीं कर सकती?" ये सुन कर पहले तो सोचा की उसे झिड़क दूँ पर फिर सोचा की उसे ठीक से समझाता हूँ; "जान! अगर आप ये बेबी कंसीव करते हो तो हमें जल्दी शादी करनी पड़ेगी| जल्दी शादी करने के लिए हमें जल्दी भागना होगा, और भाग तो हम जाएंगे पर भाग कर जाएंगे कहाँ? कहाँ रहनेगे? क्या खाएंगे? सिर्फ प्यार से पेट नहीं भरता ना?" ये सुन कर ऋतू कुछ सोचने लगी और फिर बोली; "मैं भी जॉब करूँ?"

"जान! आप जॉब करोगे तो पढ़ाई कब करोगे? दोनों चीजें आप एक साथ मैनेज नहीं कर सकते और फिर आप जॉब करोगे तो हम रोज मिलेंगे कैसे? पर ऋतू का दिमाग इन सवालों के जवाब पहले ही सोच लिया था| "मैं पार्ट टाइम जॉब करुँगी, वो भी आप ही की कंपनी में|" ये सुन कर मैं हैरान हो गया और हैरानी से ऋतू को देखने लगा| "नहीं!!!" मैंने बस इतना ही जवाब दिया और बात को वहीँ दबा दिया| ऋतू ने भी डर के मारे आगे कुछ नहीं बोला|
कुछ दिन और बीते, हम इसी तरह रोज मिलते पर जॉब के लिए ऋतू ने मुझसे आगे कोई बात नहीं की| संडे आया तो ऋतू ने जिद्द कर के मेरे घर आ गई, और आज तो वो बहुत जयदा ही खुश लग रही थी| आज वो पहली बार स्कर्ट पहन के आई थी और अपनी कुर्ती ऊपर उठा कर ऋतू ने मुझे अपनी नैवेल दिखाई| मेरी नजर उसकी नैवेल पर पड़ी तो मैं टकटकी बांधें उसी को देखता रहा| "क्या बात है आज तो मेरी जान मेरी जान लेने के इरादे से आई है!!!" ये कहते हुए मैंने ऋतू को अपनी छाती से चिपका लिया|
"वो प्रेगनेंसी वाले दिन के बाद मुझे तो लगा था की आप मुझे अब शादी तक छुओगे ही नहीं! आपको सडके करने को ही इतना सज-धज कर आई हूँ! सससस.....आ...आ...ह...नं... सच्ची कितने दिनों से आपके लिए प्यार के लिए तड़प रही थी|" ऋतू ने कसमसाते हुए कहा|

"पागल! तुझे प्यार किये बिना तो मैं भी नहीं रह सकता! उस दिन जब तूने मुझे प्रेगनेंसी की बात बताई तो मैं मन ही मन सोच कर बैठा था की अब जल्दी ही तुझे भगा कर ले जाऊँ|" मैंने ऋतू को बाएं गाल को चूमते हुए कहा|

"सच्ची?" ऋतू ने खिलखिलाते हुए कहा|

"हाँ जी! बहुत प्यार करता हूँ मैं अपनी ऋतू से|" ये कहते हुए मैंने ऋतू के होंठों को चूम लिया|
 
update 24

कुछ दिन और बीते, हम इसी तरह रोज मिलते पर जॉब के लिए ऋतू ने मुझसे आगे कोई बात नहीं की| संडे आया तो ऋतू ने जिद्द कर के मेरे घर आ गई, और आज तो वो बहुत जयदा ही खुश लग रही थी| आज वो पहली बार स्कर्ट पहन के आई थी और अपनी कुर्ती ऊपर उठा कर ऋतू ने मुझे अपनी नैवेल दिखाई| मेरी नजर उसकी नैवेल पर पड़ी तो मैं टकटकी बांधें उसी को देखता रहा| "क्या बात है आज तो मेरी जान मेरी जान लेने के इरादे से आई है!!!" ये कहते हुए मैंने ऋतू को अपनी छाती से चिपका लिया|
"वो प्रेगनेंसी वाले दिन के बाद मुझे तो लगा था की आप मुझे अब शादी तक छुओगे ही नहीं! आपको सडके करने को ही इतना सज-धज कर आई हूँ! सससस.....आ...आ...ह...नं... सच्ची कितने दिनों से आपके लिए प्यार के लिए तड़प रही थी|" ऋतू ने कसमसाते हुए कहा|

"पागल! तुझे प्यार किये बिना तो मैं भी नहीं रह सकता! उस दिन जब तूने मुझे प्रेगनेंसी की बात बताई तो मैं मन ही मन सोच कर बैठा था की अब जल्दी ही तुझे भगा कर ले जाऊँ|" मैंने ऋतू को बाएं गाल को चूमते हुए कहा|

"सच्ची?" ऋतू ने खिलखिलाते हुए कहा|

"हाँ जी! बहुत प्यार करता हूँ मैं अपनी ऋतू से|" ये कहते हुए मैंने ऋतू के होंठों को चूम लिया|



अब आगे ......

मेरे होठों के सम्पर्क में आते ही ऋतू मचलने लगी और उसने अपने दोनों हाथों को मेरी गर्दन के पीछे ले जाके लॉक कर दिया| ऋतू उचक कर मेरे होठों को चूस रही थी और मुझे उसकी इस हरकत पर बहुत प्यार आ रहा था| मैंने उसे गोद में उठा लिया और किचन कॉउंटर पर ला कर बिठा दिया| ऋतू अब बिलकुल मेरे बराबर थी, और उसका मेरे होठों को चूमना जारी था| ऋतू के होंठ तो आज मुझ पर कुछ ज्यादा ही कहर डाल रहे थे, वो अपने होठों से मेरे होठों को बारी-बारी निचोड़ रही थी| इधर मेरे दिलों-दिमाग में उसकी नाभि ही छाई हुई थी| हाथ अपने आप ही उसकी नाभि के ऊपर थिरकने लगे थे| एक अजीब सी खुमारी थी, उस पर ऋतू की जिस्म की महक मुझे बहका रही थी| मैंने फिर से ऋतू को गोद में उठाया और पलंग पर ला कर लिटा दिया और खुद भी उसके ऊपर छा गया| अब मैंने अपने निचले होंठ और जीभ के साथ उसके निचले होंठ को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा| ऋतू की उँगलियाँ मेरे बालों में रास्ते बनाने लगी थी| निचले होंठ कर रस निचोड़ कर मैंने उसके ऊपर वाले होंठ को भी ऐसे ही निचोड़ा| मेरे हाथ अब नीचे आ कर उसके कुर्ते के ऊपर से स्तनों को दबाने लगे और उन्हें धीरे-धीरे मसलने लगे| मैं रुका और अपने घुटनों पर बैठ गया और ऋतू का हाथ पकड़ के उसे बिठाया| मुझे आगे उसे कुछ कहना नहीं पड़ा और उसने खुद ही अपना कुरता निकाल के फेंक दिया| मैं ने भी ताव में आकर अपनी टी-शर्ट निकाल फेंकी और फिर से ऋतू के ऊपर चढ़ गया और उसके होठों को अपने होठों में भींच कर चूसने लगा| ऋतू ने अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थाम लिया और उसने भी अपनी जीभ से हमला कर दिया| मेरे मुँह में दाखिल हुई उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ने लगी| मैं ने अपने दाँतों से उसकी जीभ पकड़ ली और ऋतू थोड़ा छटपटाने लगी! इधर मेरी उँगलियों ने ऋतू की ब्रा के स्ट्राप को नीचे खिसका दिया| मैंने Kiss तोडा और ऋतू के कंधे को चूम लिया, जवाब में ऋतू ने अपनी उँगलियों को मेरे बालों में फँसा दिया| मैंने अपनी उँगलियों से अब उसकी ब्रा को उसके कंधे से होते हुए नीचे लाना शुरू कर दिया, ऋतू ने अपनी पकड़ मेरे बालों पर ढीली की और अगले ही पल उसकी ब्रा उसके सीने से अलग हो कर जमीन पर पड़ी थी| ऋतू मेरी आँखों में प्यास देख रही थी और मैं भी उसकी आँखों में वही प्यास देख रहा था| मैंने झुक कर ऋतू के बाएँ स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा| और ऋतू ने फिर से अपनी उँगलियाँ मेरे बालों में फँसा दीं| "काश...ससस..ससस...आ.आ..ननहहह....मैं आपको अपना दूध पिला सकती|" ये कहते हुए ऋतू सिसकारियां लेने लगी! उसकी टांगें भी हरकत करने लगीं और मेरी टांगों से लिपटने लगीं| ऋतू की बात आज मुझे बहुत उत्तेजक लग रही थी और मुझे ऐसा लगने लगा की वो मुझे जान-बुझ कर उत्तेजित कर रही है| "ससस...आ..आ..ह...ह....न...न... जानू! एक बार काट लो ना!" उसका कहना था और मैंने उसके बाएँ स्तन को काट लिया; "आआह्ह्ह्ह.....हहह...स..ससससस...ननन... न!!!!!" उसकी दर्द भरी कराह सुन मुझे और उत्तेजना हुई और मैंने ऋतू का दायाँ स्तन मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा| "ससस....आ...न.....ह... इसे भी...काटो....ना...प्लीज!" ये सुनते ही मैंने उसके दाएँ चूची को डाँट से काट लिया; "ईईई....माँ....आह....ससस...आ..न..हह...!!!" उसकी कराह निकली और मैं उत्तेजना से भर गया और वापस बाएँ स्तन की चूची को भी काट लिया| "ईईई...माँ......ाआनंनं.....ससस!!!! जानऊउउउउउउउ!!!!" ऋतू ने अपना दबाव मेरे सर पर और बढ़ा दिया|

अगले दस मिनट तक मैं यूँ ही कभी उसके एक स्तन को चूसता तो कभी दूसरे स्तन को! ऋतू ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मेरे सर पर से कम की तो मैं नीचे खिसका और उसकी नैवेल पर रूक गया| अपने होठों से मैंने उसकी नैवेल को चूमा, अगले ही पल मैंने अपनी जीभ उसमें डाल दी" इसके परिणाम स्वरुप ऋतू का पूरा जिस्म ऊपर की तरफ उठ गया| मैंने अपने निचले होंठ को उसकी नैवेल पर ऊपर से नीचे रगड़ना शुरू कर दिया| जीभ से मैं उसकी नैवेल को कुरेदने लगा, ऋतू से अब ये दोहरा हमला बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वो छटपटाने लगी थी| पाँच मिनट तक उसकी नैवेल की चुसाई कर मैं और नीचे खिसका तो वहां तो अभी स्कर्ट का कब्ज़ा था| ऋतू ने तुरंत ही नाडा खोला और स्कर्ट अपनी गांड से नीचे खिसका दी और बाकी का काम मैंने किया| अब तो सिर्फ ऋतू की पैंटी बची थी| पैंटी देख कर मैं उस पर झुका और ऋतू की बुर को चूमना चाहा| पर ऋतू ने मुझे रोक दिया और अपनी पैंटी निकाल कर अपनी दोनों टांगें खोल दी| उसकी ये हरकत देख मेरे मुख पर मुस्कराहट छ गई और मुझे देख ऋतू ने अपने दोनों हाथों से अपने मुँह को ढक लिया| मैं झुक कर ऋतू की बुर को चूमने लगा तो उसने फिर मुझे रोक दिया, वो उठ के बैठी और मुझे अपने ऊपर खींच लिया| "आज मेरे जानू को और इंतजार नहीं करवाऊँगी|" इतना कह कर उसने मुझे अपने ऊपर से धकेल दिया और मुझे नीचे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गई| अपनी चारों उँगलियों को ऋतू ने अपने थूक से चुपड़ा और अपनी बुर की फांकों को गीला करने लगी, अपनी दो उँगलियों से उसने अपनी ही थूक से अपनी बुर को अंदर से गीला कर दिया|

उसने अपने थूक से सने हाथों से मेरा पाजामा बुरी तरह खींचना शुरू कर दिया, वासना उस पर इस कदर हावी थी की वो तो मेरा पाजामा फाड़ने को भी तैयार थी| आखिर पाजाम निकालते ही उसने उसे दोर्र फेंक दिया और मेरे कच्छे को देख कर बोली; "सच्ची आज के बाद मेरे होते हुए आप कभी कच्चा मत पहनना! नहीं तो मैं आपके सारे कच्छे फाड़ दूँगी!" ऋतू का उतावलापन आज साफ़ दिख रहा था| मेरा कच्छा तो उसने नोच कर निकाला और गुस्से से कमरे के दूसरे कोने में फेंक दिया, फिर से उसने अपना गाढ़ा थूक अपनी चारों उँगलियों पर निकाला और पहले मेरे लंड पर चुपड़ने लगी और फिर बाकी का अपनी बुर में घुसेड़ दिया! ऋतू का ये रूप देख कर मैं हैरान था!

ऋतू अब धीरे-धीरे अपनी बुर को मेरे लंड के ठीक ऊपर ले आई और धीरे-धीरे बुर को नीचे मेरे लंड पर दबाने लगी| मेरा सुपाड़ा पूरा अंदर जा चूका था और ऋतू के बुर की गर्मी मुझे अपने लंड पर महसूस होने लगी थी| मैं जानता था की अगर मैंने नीचे से जरा भी झटका मारा तो ऋतू की हालत दर्द के मारे खराब हो जायेगी, इसलिए में बिना हिले-डुले पड़ा रहा|

ऋतू ने बहुत हिम्मत दिखाई और धीरे-धीरे और नीचे आने लगी और मेरा लंड और अंदर जाने लगा| जब आधा लंड अंदर चला गया तो ऋतू रुक गई और मुझे लगा जैसे इसके आगे वो नहीं बढ़ेगी| ऋतू की चेहरे पर दर्द की लकीरें थीं और मुँह से दर्द भरी आह निकल रही थी| "स..आह...हम्म....मम...हह...आअह्ह्ह...अंह..!!!" ऋतू की बुर में उठ रहा दर्द उसकी जुबान से बाहर आ रहा था| जितना लंड अंदर गया था उतना ही अंदर लिए उसने ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया और मैं मन मार कर रह गया की वो मेरा पूरा लंड अंदर न ले सकी| अगले पांच मिनट तक ऋतू मेरे पेट पर अपना हाथ रख कर अपनी गांड ऊपर नीचे करती रही और मेरा बेचारा आधा लंड ही उसकी बुर की गर्मी की सिकाई पा रहा था| ऋतू को मेरे चेहरे से मेरी प्यास दिख रही थी और वो जानती थी की मेरा पूरा लंड उसकी बुर की गर्माहट चाहता है तो उसने ऊपर-नीचे होना रोक दिया और मेरे ऊपर लेट गई| "मुझे लगा की वो स्खलित हो गई है इसलिए आराम कर रही है पर उसने मुझे चौंकाते हुए पुछा; "जानू! आप ऐसे क्यों हो? अपना दर्द मुझसे क्यों छुपाते हो? मैं जानती हूँ की मैं आपको सेक्स में वो सुख नहीं दे पाती जो आप चाहते हो पर आपने कभी मुझसे क्यों कुछ नहीं कहा? आपके छूटने से पहले मैं स्खलित हो जाती हूँ पर आप हैं की.....क्या पराया समझते हो मुझे?"

ये सुन कर मुझे एहसास हुआ की मैं ऋतू से सेक्स में उसका पूरा साथ ना देने से थोड़ा दुखी था पर कभी उससे कहने की हिमायत नहीं जुटा पाया| "जान! ऐसा नहीं है! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, मेरे लिए तुम्हारे दिल का प्यार जर्रूरी है! सेक्स मेरे लिए मायने नहीं रखता! तुम्हें उससे ख़ुशी मिलती है और तुम्हें खुश देख मैं भी खुश हो लेता हूँ| बचपन से ले कर जब तक मैं घर पर था तब तक हम साथ खेले-खाये, बड़े हुए पर मेरे कॉलेज के वजह से मुझे शहर आना पड़ा और तब शायद तुमने खुद का ख़याल रखना बंद कर दिया| या शायद घर पर सब के तानों के दुःख के कारन तुम अच्छे से खाना नहीं खाती थी, इसीलिए तुम्हारा शरीर अंदर से कमजोर है और शायद इसीलिए तुम सेक्स में ज्यादा देर तक नहीं साथ दे पाती! पर उससे मेरा प्यार तुम्हारे लिए कभी कम नहीं हुआ! हाँ कुछ दिन पहले तुम ने मेरे दिल को बहुत ठेस पहुँचाई थी, पर उस किस्से के बाद तो हम और नजदीक ही आये हैं ना? मेरी बात सुन कर ऋतू मेरी आँखों में देखते हुए बोली; "मैं जानती हूँ आप मुझसे कितना प्यार करते हो और मेरे दिल को चोट न पहुंचे इसलिए आप ने मुझे कभी ये नहीं बताया| पर उस दिन जब में उस डॉक्टर के साथ अंदर गई चेक-अप के लिए तब मैंने उन्हें साड़ी बात बताई और उन्होंने मुझे कुछ बातें बताई! मैं वादा करती हूँ की आज के बाद मैं आपका पूरा साथ दूँगी!"

''आपको वादा करने की कोई जर्रूरत नहीं है!" ये सुन कर ऋतू मुस्कुराई और मेरे होठों को चूम लिया| मेरे लंड अभी भी आधा ऋतू की बुर में था और ऋतू ने धीरे-धीरे अपनी कमर को मेरे लंड पर दबाना शुरू किया| धीरे-धीरे ...धीरे-धीरे ...धीरे-धीरे ...धीरे-धीरे और आखिर में पूरा लंड ऋतू की बुर में समां गया| दर्द के मारे ऋतू की आँखें बंद हो चुकी थी और आँसूँ की धरा बह निकली थी| "ससससस.....आअह्ह्ह्ह......मा....म...म.म.म.म....मममम.....ंन्न......ह्ह्ह्हह्ण....!!!" ऋतू का दर्द देख कर मन दुखी होने लगा था और लंड मियाँ अंदर बुर की गर्मी पा कर मचलने लगे थे| "जान! दर्द हो रहा है तो मत करो!" मैंने ऋतू से कहा पर उसने अपनी ऊँगली मेरे होठों पर रख दी| "ससस...आज...मेरे जानू.....को....सब....ससस...आअह्ह्ह..हहह्णणम्म्म....ममम...!!" ऋतू की दर्द भरी सिसकारियाँ अचानक ही मादक सिसकारियाँ बन चुकी थी| दो मिनट तक वो बिना हिले-डुले मेरे लंड को पानी बुर में भरे, आँखें मूंदे हुए बैठी रही| फिर उसने अपने दोनों हाथों को मेरी छाती पर रखा और अपनी कमर धीरे-धीरे ऊपर लाई, लंड का सुपाड़ा भर अंदर रहा गया था और फिर ऋतू धीरे-धीरे अपनी कमर को वापस नीचे लाई! दो मिनट में ही उसकी बुर ने रस छोड़ दिया, और वो गर्म-गर्म रस मेरे लंड को और भी गर्म करने लगा| ऋतू जैसे ही ऊपर उठी उसका रस बहता हुआ बाहर आया पर इस बार ऋतू रुकी नहीं और उसने लय-बद्ध तरीके से अपनी कमर ऊपर-नीचे करनी शुरू कर दी| 5 मिनट और फिर ऋतू उकड़ूँ हो कर बैठ गई और तेजी से उसने अपनी गांड ऊपर नीचे करने शुरू कर दी| अब तो मेरा लंड बड़ी आसानी से फिसलता हुआ उसकी बुर में अंदर-बाहर हो रहा था और ऋतू को भी बहुत जोश चढ़ आया था| अगले दस मिनट तक वो बिना रुके ऐसे ही ऊपर-नीचे करती रही और मेरी और मेरे लंड की हालत खराब कर दी| मेरे जिस्म में एक ऐठन आई और वही ऐठन ऋतू के जिस्म में भी आई और दोनों एक साथ अपना रस बहाने लगे, वो रस ऋतू के बुर में पहले भरा और काफी-कुछ रिस्ता हुआ बहार आने लगा|

ऋतू थक कर पस्त हो गई और मेरे ऊपर ही लुढ़क गई| हम दोनों की सांसें बहुत तेज थी, और लंड मियाँ अब भी ऋतू की बुर के अंदर फँसे पड़े थे| पाँच मिनट के बाद जब दोनों की सांसें सामान हुई तो आज मेरे चेहरे की संतुष्टि देख ऋतू को खुद पर गर्व होने लगा| मैंने करवट ले कर उसे अपने ऊपर से उतारा और अपनी बगल में लिटा दिया, इसी बीच मेरा लंड भी बहार आया| ऋतू की बुर से चम्मच भर गाढ़ा तरल बहंता हुआ बाहर आया जिसे देख कर मुझे बहुत आनंद आया| मैं वापस ऋतू की बगल में लेट गया, ऋतू ने मेरी तरफ करवट की और अपनी बायीँ टांग उठा कर मेरे लंड पर रख दी| वो अब भी उस गाढ़े तरल से अनजान थी!
 
update 25

हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे और दस मिनट बाद मैंने ऋतू से बात शुरू की;

मैं: मेरी जान ने बड़े मन से डॉक्टर की साड़ी टिप्स फॉलो की, ऐसी क्या टिप्स दी थी उन्होंने?

ऋतू: (शर्माते हुए) उन्होंने कहा था की अपने पति को एक्साइट करो! कुछ मर्दों को बातों से एक्साइटमेन्ट होती है तो, किसी को नोचने-काटने से, किसी को चूमने-चूसने से होती है!

मैं: अच्छा?

ऋतू: हाँ जी! मुझे ये भी बताया की जल्दी स्खलित नहीं होना चाहिए बल्कि जितना रोक सको उतना बेहतर है! जब लगे की क्लाइमेक्स होने वाला है, तभी रुक जाओ और अपने पार्टनर को Kiss करते रहे| थोड़ा सब्र से काम लो और जल्दीबाजी मत दिखाओ! और तो और मुझे उन्होंने प्राणायाम भी करने को कहा और हस्तमैथुन नहीं करने को कहा|

मैं: तुम हस्थमैथुन करती थी?

ऋतू: जब आप नहीं होते थे तब करती थी! पर उस दिन के बाद मैंने बंद कर दिया, आपको पता है कितना मुश्किल होता है? आप को तो पता नहीं क्या सिद्धि प्राप्त है की आप खुद को इतना काबू में रखते हो! मुझे तो आपके पास आते ही आपके जिस्म की महक बहकाने लगती है| मन करता है आपके सीने से चिपक जाऊँ!!!!

मैं: जानू! सब तुम्हारे प्यार का असर है, वही मुझे कहीं भटकने नहीं देता|

अब तक ऋतू को बिस्तर पर गीलापन महसूस हो गया था, इसलिए वो उठ बैठी और हम दोनों का गाढ़ा-गाढ़ा रस देख कर बुरी तरह शर्मा गई| वो उठी और थोड़ा बहुत रस उसकी बुर से बहता हुआ उसकी जाँघों तक पहुँच गया था| खेर ऋतू बाथरूम से मुँह-हाथ और बुर धो कर आई और फिर मैंने भी मुँह-हाथ और लंड धोया! जब में बहार आया तो ऋतू चाय बना रही थी और जैसे ही मैंने कच्छा उठाया पहनने को तो ऋतू आँखें बड़ी कर के देखने लगी, मैंने मुस्कुरा कर कच्छा वपस जमीन पर पड़ा रहने दिया| "क्यों कपडे पहन रहे हो? मेरे सामने शर्म आती है?" ऋतू ये कह कर हँसने लगी| मैं उसके पीछे आया और उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड लिया| मेरा सोया हुआ लंड ऋतू की गांड से चिपका और मैं उसके कान में खुसफुसाते हुए बोला; "सॉरी जान!"

"अच्छा आप खिड़की के नीचे बैठो, में चाय ले कर आती हूँ||" मैं वापस खिड़की के नीचे बिना कपडे पहने ही बैठ गया| ऋतू ने मुझे चाय दी और पलंग से चादर उठा कर धोने डाल दी और फिर मेरी गोद में नंगी ही बैठ गई| ऋतू की गांड ठीक मेरे लंड के ऊपर थी;

ऋतू: अच्छा ...मुझे आपसे ...एक बात कहनी थी| (ऋतू ने बहुत सोचते-सोचते हुए कहा|)

मैं: हाँ जी कहिये| (मैंने ऋतू के बालों में ऊँगली फिराते हुए कहा|)

ऋतू: मुझसे अब आपसे दूर रहा नहीं जाता| आपका कहाँ की नई जिंदगी शुरू करने के लिए पैसों की जर्रूरत है वो सच है पर ये तो कहीं नहीं लिखा होता की ये सारा बोझ आप ही उठाएंगे? मैं भी आपका ये बोझ बाँटना चाहती हूँ, मैं भी जॉब करुँगी! ताकि जल्दी पैसे इक्कट्ठा हों और मैं और आप जल्दी से यहाँ से भाग जाएँ|

ऋतू की बात सुन कर मैं हैरान था क्यों की वो बेसब्र हो रही थी और इस समय मेरा उसपर चिल्लाना ठीक नहीं था, तो मैंने उसे समझते हुए कहा;

मैं: जान! मैं बिलकुल मना नहीं करता की आप जॉब मत करो! मैंने तो आपको अपना प्लान बताया था ना? अगले साल से आप भी पार्ट टाइम जॉब शुरू करना! फिलहाल मैं कल ही सर से अपनी सैलरी बढ़ाने की बात करूँगा नहीं तो मैं जॉब स्विच कर लूँगा|

ऋतू: प्लीज जानू!

मैं: जान! समझा करो! आप पढ़ाई और जॉब एक साथ नहीं संभाल पाओगे! कॉलेज की अटेंडेंस भी जर्रूरी है ना? फिर हॉस्टल के टाइमिंग भी तो इशू है|

ऋतू: मैं सब संभाल लूँगी, सैटरडे और संडे करुँगी तो कॉलेज की अटेंडेंस में भी कुछ फर्क नहीं पड़ेगा| हॉस्टल की टाइमिंग के लिए मैं आंटी जी से बात कर लूँगी और उन्हें मना भी लूँगी| प्लीज मुझसे अब ये दूरी बर्दाश्त नहीं होती!

मैं: जॉब करोगी तो सैटरडे-संडे हम दोनों कैसे मिलेंगे? तब कैसे रहोगी मुझसे बिना मिले? और ये मत भूलो की हमें कभी-कभी सैटरडे-संडे घर भी जाना होता है, उसका क्या? रास्ते में अकेले आना-जाना कैसे मैनेज करोगी?

ऋतू: मैं आप ही की कंपनी में जॉब करुँगी तो हम एक साथ और भी टाइम बिता पाएंगे और रही घर जाने की बात तो आपके बस इतना बोलने से की आप ऑफिस के काम में बिजी हो तो कोई कुछ नहीं कहेगा| आप बोल देना की मेरे एग्जाम है...कुछ भी झूठ बोल देना...ज्यादा हुआ तो कभी-कभी चले जायेंगे| एटलीस्ट मुझे एक बार कोशिश तो करने दीजिये, एक बार अनु मैडम से बात तो करने दीजिये!

मैं: अच्छा जी तो सब सोच कर आये हो?! मेरे ऑफिस में जॉब करोगे तो मेरे साथ-आना जाना तो छोडो वहां मुझसे बात भी नहीं कर सकती तुम!

ऋतू: क्यों भला?

मैं: वहाँ किसी ने पूछा तो क्या कहूँ? ये मेरी भतीजी है! या फिर तुम मुझे सब के सामने 'चाचा' कह पाओगी?

ऋतू: तो हम वहाँ बिलकुल अजनबी होंगे?

मैं जी हाँ!

ऋतू: हाय! ये तो बेस्ट हो गया फिर! दुनिया की नजर से छुप-छुप कर मिलना, बातें करना बिलकुल फिल्मों की तरह|

मैं: फिल्मों का कुछ ज्यादा ही भूत नहीं चढ़ गया?

ऋतू: नहीं ...आपके प्यार का भूत है...जो सर से उतरता ही नहीं|

मैं: ऋतू ...देख कल को ये बात खुल गई तो ...सब कुछ खत्म हो जायेगा, प्लीज बात को समझ! (मैंने गंभीर होते हुए ऋतू के सर को चूमा|)

ऋतू: मैंने आज तक आपसे जो माँगा है आपने दिया है, एक आखरी बार मेरी ये जिद्द पूरी कर दो और मैं वादा करती हूँ की आगे से कभी कोई जिद्द नहीं करुँगी|

मैं: ठीक है, पर आपको मुझसे एक और वादा करना होगा|

ऋतू: बोलिये

मैं: कॉलेज खत्म होने से पहले हम शादी नहीं करेंगे| तुम अपनी पढ़ाई को हरगिज़ डाव पर नहीं लगाओगी|

ऋतू: ओफ्फो!!! जानू आप ना सच में बहुत सोचते हो! किस ने कहा की मैं अपनी ग्रेजुएशन कम्पलीट नहीं करुँगी?! मैं शादी के बाद भी तो कॉरेस्पोंडेंस से पढ़ सकती हूँ ना? फिर तो आप कहोगे तो मैं पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर लूँगी| एक्चुअली करना ही पड़ेगा वरना आगे जॉब कहाँ मिलेगी!

ऋतू ने बड़ी सरलता से ये बात कही पर ये बात मेरे गले नहीं उत्तर रही थी|

मैं: तुमने वादा किया था ना की कॉलेज की नेक्स्ट टोपर तुम बनोगी! मेरी तस्वीर के साथ तुम्हारी तस्वीर लगेगी... भूल गई? (ये कह कर मैं उठ खड़ा हुआ और हाथ बाँधे खिड़की से बहार देखने लगा|)

ऋतू: (मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ते हुए|) ठीक है जान! जब तक मेरी ग्रेजुएशन पूरी नहीं होती तब तक हम शादी नहीं करेंगे| पर उससे एक दिन भी जयदा नहीं रुकूंगी मैं!

ये कहते हुए ऋतू ने मेरी नंगी पीठ को चूमा| उसके स्तन मेरी पीठ में गड रहे थे, मैं ऋतू की तरफ घूमा और उसके होठों को चूम लिया| उसका निचला होंठ मैंने अपने होठों और जीभ से चूसना शुरू कर दिया था|

अगले दिन मैंने सर से अपनी सैलरी को ले कर बात की;

मैं: गुड-मॉर्निंग सर!

बॉस: गुड- मॉर्निंग! अमिस ट्रेडर्स के नए इनवॉइस आये हैं, उन्हें चढ़ा देना|

मैं: जी...आपसे कुछ बात करनी थी|

बॉस: हाँ बोलो|

मैं: सर मुझे सैलरी में रेज (raise) चाहिए|

बॉस: क्यों?

मैं: सर मुझे आपके पास काम करते हुए तकरीबन 3 साल हो गए हैं और इन सालों में मेरी सैलरी में एक भी बार रेज नहीं हुआ|

बॉस: पहले तुम रेगुलर तो बनो| आये-दिन छुट्टी मारते हो, शाम को ऑफिस खत्म होने से पहले ही चले जाते हो| ऐसे थोड़े ही चलेगा!

मैं: सर मेरी छुट्टियाँ पहले से कम हो गई हैं, आखरी बार छुट्टी तब ली थी जब मुझे डेंगू हो गया था| वो छुट्टियाँ भी विथाउट पे थी! शाम को जल्दी जाता हूँ तो बाद में वापस आ कर काम भी तो खत्म कर देता हूँ| आज तक आपको किसी भी काम के लिए मुझे दो बार नहीं कहना पड़ा है, इसलिए सर प्लीज सैलरी रेज कर दीजिये|

बॉस: देखते हैं...अभी जा कर अमिस ट्रेडर्स का डाटा चढ़ाओ|

मैं: सॉरी सर, पर अगर आप सैलरी रेज नहीं करना चाहते तो मैं रिजाइन कर देता हूँ|

मैंने सर को अपना रेसिग्नेशन लेटर दे दिया|

में: सर इसमें 1 महीने का नोटिस पीरियड है, अगले महीने से मैं जॉब छोड़ देता हूँ|

इतना कह कर मैं चला गया| बॉस बहुत हैरान था क्योंकि उसे ऐसी जरा भी उम्मीद नहीं थी| तकरीबन 3 साल का एक्सपीरियंस था मेरे पास और कहीं भी जॉब कर सकता था, इसलिए मुझे जरा भी परवाह नहीं थी| इधर बॉस की फटी जर्रूर होगी क्योंकि ऐसा मेहनती 'मजदूर' उसे कहाँ मिलता जो एक आवाज में उसका सारा काम कर देता था| मैंने दोपहर को लंच भी नहीं किया और बिल एंटर करता रहा| लंच के बाद मैडम आईं और जब उन्हें सर से ये पता चला की मैं रिजाइन कर रहा हूँ तो पता नहीं उन्होंने सर को क्या समझाया की सर खुद मुझे बुलाने के लिए आये| मैं उनके केबिन में हाथ बंधे खड़ा हो गया, मैडम और सर मेरे सामने ही बैठे थे;

बॉस: अच्छा ये बताओ की रेज क्यों चाहिए तुम्हें? पार्ट टाइम टूशन तो तुम पढ़ा ही रहे हो और अभी सिंगल हो तो तुम्हारा खर्चा ही क्या है?

मैं: सर 20,000/- की सैलरी में 8,000/- तो रेंट है, घर का खर्चा जिसमें खाना-पीना, बिजली-पानी सब जोड़-जाड कर 6-7 हजार हो जाता है| बाइक का तेल-पानी और मेंटेनेंस 1500/-,तो बचे 3,500/-! तीन साल में मेरी सेविंग कुछ 60-65 हजार ही हुई है| घर तो मैं ने पैसे भेजना बंद कर दिए! अब आप ही बताइये की आगे शादी करूँगा तो घर कैसे चलेगा मेरा?

मेरा जवाब सुन कर मैडम के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई पर सर के पास कोई जवाब नहीं बचा था|

बॉस: ठीक है मैं 2,000/- बढ़ा देता हूँ!

मैं: सॉरी सर! एटलीस्ट मुझे 5,000/- का रेज चाहिए| (अब मैं बार्गेन करने पर उत्तर आया तो मैडम के चेहरे पर और मुस्कराहट चा गई|)

बॉस: क्या? मैं इतना रेज नहीं कर सकता|

मैं: सरमार्किट में 30,000/- का ऑफर मिल रहा है मुझे, मैं तो फिर भी आपसे 25,000/- मांग रहा हूँ, वो भी 3 साल बाद! हर साल अगर 2,000/- भी बढ़ाते तो भी अभी आपको 6,000/- बढ़ाने पड़ते!

बॉस: नहीं! 3,000/- बढ़ा दूँगा इससे ज्यादा नहीं!

मैं: सर आप शुक्ल जी को 35,000/- देते हैं, ना तो वो ऑफिस से बहार का काम करते हैं ना ही ऑफिस के अंदर रह कर कोई काम करते हैं| जब तक आप उन्हें चार बार न कह दें वो फाइल खत्म करते ही नहीं|

बॉस: उनकी फॅमिली है, बच्चे हैं!

मैं: तो सर काबिलियत का कोई मोल नहीं? अगर फॅमिली का ही मोल है तो मैं अपने सारे परिवार को यहीं बुला लेता हूँ! फिर तो मुझे ज्यादा पैसे मिलेंगे ना?

बॉस: क्या करोगे 5,000/- बढ़वा के? तुम्हारे परिवार के पास इतनी जमीन है!

मैं: सर मैं उनके टुकड़ों पर नहीं पलना चाहता, अपना अलग स्टैंड है मेरा| अगर जमीन ही देखनी होती तो मैं यहाँ 20,000/-की नौकरी करता?

बॉस: चलो अगर मैं सैलरी बढ़ा दूँ तो तुम्हें ये शाम को जल्दी जाना बंद करना होगा!

मैं: सर मैं अगर जल्दी जाता हूँ तो वापस आ कर सारा काम खत्म कर देता हूँ और अगले दिन आपको फाइल टेबल पर मिलती है| बाकी ऑफिस में सोमवार से शुक्रवार काम होता है मैं तो फिर भी 6 दिन आता हूँ|

बॉस ने ना में सर हिलाया और मैंने भी आगे कुछ नहीं कहा और वापस अपने डेस्क पर बैठ गया और काम करने लगा| शाम को मैंने इनवॉइस की फाइल सर को कम्पलीट कर के दी और ऋतू से मिलने निकल पड़ा| ऋतू को जब ये सब बताया तो वो ये सुन कर मायूस हो गई| उसने अभी तक अनु मैडम से अपनी जॉब की बात नहीं की थी वरना बॉस मेरी सैलरी कतई रेज नहीं करता, क्योंकि उसे ऋतू का स्टिपेन्ड (stipend) भी देना पड़ता और मेरी सैलरी रेज भी करनी पड़ती| "लगता है आपके साथ ऑफिस में काम करना सपना रह जायेगा|" उसने मायूस होते हुए कहा| मैंने ऋतू की ठुड्डी पकड़ के ऊपर उठाई और उसकी आँखों में ऑंखें डाले कहा; "ये अकेला ऑफिस तो नहीं है ना जहाँ हम दोनों साथ काम कर सकते हैं, ये नहीं तो कोई दूसरा ऑफिस सही|"

पर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था, करीबन एक हफ्ते बाद एक और एम्प्लोयी ने बॉस के काइयाँपन से तंग आ कर रिजाइन कर दिया| उसी दिन सर ने मुझे अपने केबिन में बुलाया और कहा;

बॉस: मानु मैं तुम्हारी सैलरी रेज कर रहा हूँ, लेकिन अगले महीने से!

मैं: ठीक है सर...थैंक यू!

मैं ख़ुशी-ख़ुशी बहार आया और अपना काम करने लगा की तभी मैडम आ गईं; "अरे पार्टी कब दे रहे हो?"

"अगले महीने mam ... सैलरी अगले महीने से बढ़ेगी!"

"ये ना!! सच्ची बहुत कंजूस हैं! चलो कोई बात नहीं अगले महीने पार्टी पक्की! अच्छा सुनो...वो प्रोजेक्ट के डिटेल आ गई हैं मेरे पास तो उस पर डिस्कशन करना है, लंच के बाद| ठीक है?

"जी mam"

मैडम के जाते ही मैंने ऋतू को कॉल किया और उसे खुशखबरी दी और उसे नए प्रोजेक्ट के बारे में भी बताया| "अभी के अभी मैडम को कॉल कर और कॉफ़ी पीने के बहाने कॉलेज के आस-पास बुला और उनसे जॉब की बात छेड़ और जैसे समझाया था वैसे ही बात करना|" ये सुन कर ऋतू बहुत खुश हुई और उसने तुरंत ही मैडम को फ़ोन मिलाया और उसके कुछ देर बाद मैडम भी निकल गईं| आगे जो कुछ हुआ उसके बारे में ऋतू ने मुझे खुद बताया;

ऋतू: Hi mam!

अनु मैडम: Hi!!!

दोनों एक टेबल पर बैठ गए और mam ने दो कॉफ़ी आर्डर की|

ऋतू: I'm sorry to bother you mam!

अनु मैडम: Oh no no no. that's okay! I always look for reason to escape from office! So what do you do? Where do you stay?

ऋतू: I'm a B Com student and I live in the hostel nearby. I actually neede your help. Umm.I'm actually looking for some work. Actually.umm.. I don't want to be a burden on my family.I thought I can . you know earn something.. And learn from the experience. can you help me find a part time job? Like Saturdays and Sundays. Maybe in your company? Here's my 10th and 12th marksheet! (ऋतू ने बहुत सोच-सोच कर और घबराते हुए बोला|)

ये सुन कर मैडम कुछ सोच में पड़ गईं और फिर बोलीं;

अनु मैडम: Ok join me from Saturday! I've a project and I was thinking of someone of your caliber to work with. But, stipend will be 1,000/- only, since you're not joining us for 6 days a week!

ऋतू: No problem mam, that's not an issue. Thank you mam! Thank you!!!!

लंच के बाद जब मैडम आईं तो वो बहुत खुश लग रहीं थीं, उन्होंने मुझे और रेखा को अपने केबिन में बुलाया|

अनु मैडम: एक लड़की और हमें ज्वाइन कर रही है, पर वो सिर्फ सैटरडे और संडे ही आ पायेगी|

रेखा: क्यों mam?

अनु मैडम: यार! काम जयदा है और यहाँ कोई भी नहीं है जो PPTs और EXCEL पर फटाफट काम करता हो| ये लड़की अभी स्टूडेंट है और कुछ काम सीखना चाहती है| मानु जी आप संडे आ पाओगे? क्योंकि मंडे to सैटरडे तो ऑफिस का काम ही चलेगा पार्ट टाइम में आप दोनों काम करो तो मैं आपको कम्पेन्सेट भी करवा दूँगी|

मैं: ठीक है mam ... no problem.

राखी; ठीक है mam ... कोई दिक्कत नहीं|

शाम को जब मैं और ऋतू मिले तो आज मैंने उसे कस कर अपनी बाहों में भर लिया| ऋतू को समझते देर ना लगी की उसकी नौकरी पक्की हो गई है| मैंने उसे कुछ बात बातें की सब के सामने उसे मुझसे मेरा नाम ले कर बात करनी है और किसी को जरा भी शक नहीं होना चाहिए की हम दोनों एक दूसरे को जानते हैं, ये सुन कर ऋतू बहुत एक्साइट हो गई! कुछ दिन और बीते और आखिर सैटरडे आ ही गया, ऋतू ने अपने हॉस्टल में आंटी जी से बात कर ली और उन्हें वही तर्क दिया जो उसने अनु मैडम को दिया था| आंटी जी ने बात कन्फर्म करने के लिए मुझे कॉल भी किया और मैंने उन्हें विश्वास दिला दिया की ऋतू कोई गलत काम नहीं कर रही है, पर उन्हें ये नहीं बताया की वो मेरी ही कंपनी में काम करेगी| सैटरडे सुबह मैं जल्दी से ऑफिस पहुँच गया, ठीक 10 बजे ऋतू की एंट्री हुई| नारंगी रंग के सूट में आज ऋतू क़यामत लग रही थी|
 
update 26



ऋतू को देखते ही ये बोल अपने आप मेरे मुँह से निकलने लगे;

"एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा, जैसे

खिलता गुलाब, जैसे

शायर का ख्वाब, जैसे

उजली किरन, जैसे

बन में हिरन, जैसे

चाँदनी रात, जैसे

नरमी बात, जैसे

मन्दिर में हो एक जलता दिया, हो!"

मेरी बगल में ही राखी खड़ी थी और ये गाना सुनते ही मुझे कोहनी मारते हुए बोली; "क्या बात है मानु जी?!!" अब मुझे कैसे भी बात को संभालना था तो मैंने बात बनाते हुए कहा; "सच में यार ये हूर-परी कौन है?"
"पता नहीं! चलो न चल के इंट्रो लेते हैं इसका|" राखी ने खुश होते हुए कहा|

"ना यार! कहीं बॉस की कोई रिश्तेदार निकली तो सर क्लास लगा देंगे दोनों की|" अभी हम दोनों ये बात कर ही रहे थे की ऋतू के ठीक पीछे से अनु मैडम और सर आ गए| और उन्हें देख कर हम दोनों अपने-अपने डेस्क पर चले गए| मैडम ने बॉस से ऋतू का इंट्रो कराया और बताय की प्रोजेक्ट के लिए ऋतू ने 'as a trainee' ज्वाइन किया है| फिर मैडम ने मुझे और राखी को बुलाया और ऋतू से इंट्रो कराया; "ऋतू ये दोनों आपके टीम मेट्स हैं, राखी और मानु|" ऋतू ने राखी से हाथ मिलाया और मुझे हाथ जोड़ कर नमस्ते कहा| ये देख कर राखी के चेहरे से हँसी छुप नहीं पाई और उसे हँसता देख मैडम ने उससे पूछा भी की वो क्यों हँस रही है पर वो बात को टाल गई| "और मानु ये हैं रितिका, फर्स्ट ईयर कॉलेज स्टूडेंट हैं|" अब मैंने भी अपनी हँसी किसी तरह छुपाई और बस "नमस्ते" कहा| ये देख कर ऋतू के चेहरे पर भी मुस्कराहट आ गई| "अरे हाँ..आपकी डायरी इन्हीं ने लौटाई थी|" मैडम ने मुझे डायरी वाली बात याद दिलाई| "ओह्ह! Really!!! Thank You रितिका जी!!" मैंने मुस्कुरा कर ऋतू को थैंक यू कहा|

मेरा ऋतू को रितिका कहने से उसे थोड़ा अटपटा सा लगा जो उसके चेहरे से साफ़ झलक रहा था|

खेर मैडम ने ऋतू को ब्रीफ करने के लिए हम दोनों तीनों को अपने केबिन में बुलाया और ऋतू को राखी के साथ प्लानिंग और एनालिसिस में लगा दिया और मेरा काम इनकी प्लानिंग और एनालिसिस के हिसाब से PPTs और Excel Sheet तैयार करना था| अभी चूँकि मुझे पहले बॉस का काम करना था तो मैं उसी काम में लगा था| पर मेरी नजरें काम में कम और ऋतू पर ज्यादा थी| ऋतू को वादा करने से पहले मैं कभी-कभी चाय-सुट्टा पीता था, उसी वक़्त राखी भी आ जाया करती थी पर वो सिर्फ चाय ही पीती थी| आज भी वही हुआ, राखी खुद भी आईं और साथ में ऋतू को भी ले आई|

राखी: अरे मुझे क्यों नहीं बोला की आप चाय पीने जा रहे हो?

मैं: आप लोग बिजी थे! (मैंने ऋतू की तरफ देखते हुए कहा और मुझे अपनी तरफ देखता हुआ पा कर ऋतू का सर शर्म से झुक गया|)

राखी: अच्छा?? (मेरे ऋतू को देखते हुए राखी ने जान कर अच्छा शब्द बहुत खींच कर बोला| जिसे सुन ऋतू की हँसी छूट गई|)

मैं: और बाताओ क्या-क्या सीखा रहे हो आप रितिका जी को? (मैंने इस बार राखी की तरफ देखते हुए कहा|)

राखी: घंटा! मैडम तो बोल गई की प्लानिंग करो एनालिसिस करो पर साला करना कैसे है ये कौन बताएगा? (राखी के मुँह से 'घंटा' शब्द सुन ऋतू हैरान हो गई|)

मैं: तो 2 घंटे से दोनों कर क्या रहे थे?

राखी: कुछ नहीं.... कुछ इधर-उधर की बातें| आपकी बातें!!! (राखी ने मुझे छेड़ते हुए कहा|)

मैं: मेरी बातें?

राखी: और क्या? जब मैं पहलीबार ज्वाइन हुई तब मुझसे तो आपने कभी बात नहीं की? और रितिका को देखते ही गाना निकल गया मुँह से?

ये सुन कर मैं जानबूझ कर शर्मा गया और ऋतू हैरानी से आँखें बड़ी करके मुझे देखने लगी|

ऋतू: कौन सा गाना गए रहे थे सर?

राखी: एक लड़की को देखा तो....

मैं कुछ नहीं बोला और एक घूँट में सारी चाय पी कर वापस ऊपर आ गया, और मुझे जाता हुआ देख राखी ठहाके मार के हँसने लगी| आज ऋतू के मुझे 'सर' कहने पर मुझे एक अजीब सी ख़ुशी हुई और वो भी शायद समझ गई थी| लंच के बाद मैं दोनों के साथ रिसर्च, प्लानिंग और एनालिसिस में उनके साथ लग गया| मैंने दोनों को पुराना डाटा दिखाया और उसकी मदद से रेश्यो निकालना बता कर मैं अपने डेस्क पर वापस आ गया| कुछ देर बाद अनु मैडम भी आईं और वो भी मेरे इस बदले हुए बर्ताव से थोड़ा हैरान थीं| उन्होंने मुझे दोनों की मदद करते हुए देख लिया था इसलिए मेरी सराहना करने से वो नहीं चूँकि; "अरे भैया तुम दोनों से ज्यादा होशियार है मानु! कुछ सीखो इनसे, अपना काम तो करते ही हैं साथ-साथ दूसरों की मदद भी करते हैं|" ये बात मैडम ने शुक्ल जी को सुनाते हुए कही|

शाम को जब जाने का नंबर आया तो मैं सोचने लगा की कैसे ऋतू को घर छोड़ूँ? अब मैं सामने से जा कर तो पूछ नहीं सकता था इसलिए मुझे कुछ न कुछ तो सोचना ही था! तभी मैडम ने उसे खुद ही लिफ्ट ऑफर कर दी और मैं बस ऋतू और मैडम को जाता हुआ देखता रहा| राखी पीछे से आई और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए बोली; "आज लिफ्ट मिलेगी?" मैंने बस मुस्कुरा कर हाँ कहा और फिर ऋतू की जगह राखी को अपने पीछे बिठा कर उसके घर छोड़ा| मेरे घर पहुँचने के घंटे भर बाद ऋतू का वीडियो कॉल आया, वो बाथरूम में बैठे हुए खुसफुसाई;

ऋतू: I Love You जानू! uuuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh !!!!!

मैं: क्या बात है बहुत खुश है आज?

ऋतू: जानू! बर्थडे के बाद आज का दिन मेरे लिए सबसे जबरदस्त था! कल के दिन के लिए सब्र नहीं कर सकती मैं|

मैं: अच्छा जी? जब मुझसे नाराज हुई थी और हमने पहली बार 'प्यार' किया था वो दिन जबरदस्त नहीं था? (मैंने ऋतू को छेड़ते हुए कहा|)

ऋतू: वो दिन तो मेरे जीवन का वो स्वर्णिम दिन था जिसका ब्यान मैं कभी कर ही नहीं सकती| उस दिन तो हमने एक दूसरे को समर्पित कर दिया था| हमारा अटूट रिश्ता उसी दिन तो पूरा हुआ था|

मैं: वैसे आज मुझे तुम्हारे 'सर' कहने पर बड़ी अजीब सी फीलिंग हुई! पेट में तितलियाँ उड़ने लगी थी!

ऋतू: आपका नाम ले कर आपको पुकारने का मन नहीं हुआ, इसलिए मैंने आपको 'सर' कहा| एक बात तो बताइये, आपने सच में मुझे देख कर गाना गाय था?

मैं: हाँ, तू लग ही इतनी प्यारी रही थी की गाना अपने आप मेरे मुँह से निकल गया|

ये सुन कर ऋतू मुस्कुराने लगी| फिर इसी तरह हँसी-मजाक करते-करते खाने का समय हो गया और खाना मुझे ही बनाना था पर बुरा ऋतू को लग रहा था| "हमारी शादी जल्दी हुई होती तो मैं आपके लिए खाना बनाती|" ऋतू ने नाराज होते हुए कहा| "जान! शादी के बाद जितना चाहे खाना बना लेना पर तब तक थोड़ा-बहुत एडजस्ट तो करना पड़ता है|" मैंने ऋतू को मनाते हुए कहा|

"वैसे कितना रोमांटिक होगा जब आप और मैं एक साथ एक ही ऑफिस जायेंगे?! स्टाफ के सारे लोग हमें देख कर जल-भून जायेंगे!" ऋतू की बात सुन कर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई|

"लोगों को जलाने में बहुत मजा आता हैं तुम्हें?" मैंने पूछा|

"अब आपके जैसा प्यार करने वाला हो तो जलाने में मजा तो आएगा ही|" ऋतू ये कहते हुए हँसने लगी| तभी बहार से मोहिनी की आवाज आई; "अरे अब क्या बाथरूम में बैठ कर एकाउंट्स के सवाल हल कर रही है?! जल्दी बहार आ, खाना लग गया है|" ऋतू ने हड़बड़ा कर कॉल काटा और मुझे बहुत जोर से हँसी आ गई| बाद में उसका मैसेज आया; "बहुत मजा आता है ना आपको मेरे इस तरह छुप-छुप कर आपसे बात करने में?!" मैंने भी जवाब में हाँ लिखा और फ़ोन रख कर खाना बनाने लगा| खाना खा कर बड़ी मीठी नींद सोया और सुबह जल्दी से तैयार हो गया, सोचा की आज ऋतू को मैं ही ऑफिस ड्राप कर दूँ पर फिर याद आया की किसी ने देख लिया तो? तभी दिमाग में प्लान आया की मैं ऋतू को बस स्टैंड पर छोड़ दूँगा वहाँ से वो पैदल आ जाएगी| पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, ऋतू को मैडम ही लेने आ रही थी| मैं अपना मन मार के ऑफिस पहुँचा, पर वहां कोई नहीं था तो मैं नीचे चाय पीने लगा, तभी वहां राखी आ गई और वो भी मेरे साथ चाय पीने लगी|

अनु मैडम और ऋतू एक साथ गाडी से निकले और हमारे पास ही आ कर खड़े हो गए और चाय पीने लगे| चाय पी कर हम सब एक साथ ऊपर आये और सीधा मैडम के केबिन में बैठ गए| कल के काम पर डिस्कशन के बाद मैडम ने तीनों को अलग-अलग बिठा दिया और राखी को प्लानिंग और ऋतू को एनालिसिस का काम दे दिया| मैं बैठा कुछ PPTs स्टडी कर रहा था, मैडम भी मेरे पास आ गईं और कल जो कुछ थोड़ा बहुत काम हुआ था उसके ग्राफ्स बनाने में मदद करने लगी| मैडम को पमरे साथ बैठा देख ऋतू को अंदर से जलन होने लगी थी, वो बहाने से बार-बार आ रही थी और मैडम से कुछ न कुछ पूछ रही थी| हालाँकि ऋतू बहुत कोशिश कर रही थी की उसकी जलन मुझ पर जाहिर ना हो पर मैं उसकी जलन महसूस कर पा रहा था| आखरी बार जब ऋतू मैडम से कुछ पूछने आई तो मैडम उठ खड़ी हुई; "मानु आप ये PPTs का आर्डर ठीक करो मैं जरा रितिका को एक बार सारा काम समझा दूँ वरना बेचारी सारा टाइम इधर-उधर भटकती रहेगी|"

ऋतू को आधा घंटा समझाने के बाद मैडम ने मुझे उसकी हेल्प करने को कहा और खुद बाहर चली गईं| अब मैंने ऋतू के साथ बैठ कर उसे कुछ फाइल्स वगैरह के बारे में बताया, क्योंकि उसे कंप्यूटर उसे थोड़ा-बहुत ही आता था जो भी उसने अभी तक कॉलेज में सीखा था| आज मैंने उसे माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के बारे में बताय और टाइप करने के लिए कुछ शॉर्टकट बताये| ये सब ऋतू ने अब्दी ध्यान से सुना और अपने राइटिंग पैड में लिख लिया| जब मैं उठ के जाने लगा तो ऋतू ने मेरा हाथ चुपके से पकड़ लिया और मुझे खींच कर बिठा दिया| वो खुसफुसाती हुई बोली; "कहाँ जा रहे हो आप? बैठो ना थोड़ी देर और!" मैं भी बैठ गया पर हम दोनों में कोई बात नहीं हो रही थी, बस एक दूसरे को देख रहे थे| ऋतू ने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया था और उसके हाथों की तपिश मुझे मेरे ठन्डे हाथों पर होने लगी थी| उसके होंठ थर-थरा रहे थे और मेरा मन भी उन्हें चूमने को व्याकुल था! आज अगर ऑफिस नहीं होता तो हम दोनों मेरे घर पर एक दूसरे के पहलु में होते!

"यहाँ कोई एकांत जगह नहीं है जहाँ आप और मैं थोड़ा टाइम....." ऋतू इतना कहते हुए रुक गई| मुझे उसका उतावलापन देख कर हँसी आ रही थी; "जान! ये ऑफिस है मेरा! यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता, किसी ने देख लिया ना तो ???"

ये सुन कर ऋतू का दिल टूट गया, "अच्छा चाय पियोगी?" ये सुन कर ऋतू की आँखों में चमक आ गई| हम दोनों उठ के नीचे आये और मैंने ऋतू को मेरी वाली स्पेशल चाय पिलाई| हम अभी चाय पी ही रहे थे की राखी आ गई; "अच्छा जी! मेरे से चोरी-छुपे चाय पी जा रही है?" उसने हम दोनों को छेड़ते हुए कहा|

"मैंने सोचा की आज रितिका जो को मानु वाली स्पेशल चाय पिलाई जाए|" मैंने बात बनाते हुए कहा|

"वो तो बिना सिगेरट के पूरी नहीं होती!" ये कहते हुए राखी ने चाय के साथ एक सिगरेट ली और काश ले कर मेरी तरफ बढ़ा दी| ये देख कर ऋतू हैरान हो गई, उसे लगा शायद मैंने उससे किया वादा तोड़ दिया है|

"सॉरी! मैंने छोड़ दी|" मेरा जवाब सुन कर राखी हैरान हो गई?

"हैं??? आप ही ने तो इलाइची वाली चाय के साथ ये कॉम्बो बनाया था और अब खुद ही नहीं पी रहे?" राखी की बात सुन कर ऋतू दुबारा हैरान हो गई|

"पर अब छोड़ दी| अब जीने की आदत हो गई है|" ये मैंने ऋतू को देखते हुए कहा| इस बार तो राख ने मेरी चोरी पकड़ ही ली; "अच्छा जी!!! रितिका जी को खुश करने को कह रहे हो!" ये सुन कर हम तीनों ठहाका लगा कर हँसने लगे| बस इसी तरह हँसी-मजाक में वो दिन निकला और मैडम ने ही राखी और ऋतू को घर छोड़ा और मैं अकेला घर वापस आ गया|
 
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दुःख मुझे इस बात का नहीं की उसकी शादी हो रही है, दुःख इस बात का है की पूरी दुनिया में एक माँ 'था' जो उसे इतना प्यार करता था जितना की उसके अपने सेज माँ-बाप और बहन-भाई ने नहीं किया| सिर्फ और सिर्फ मैं था जो दुआ करता था की उसकी शादी हो जाए और मुझि से उसने इतनी बड़ी बात छुपाई! उसके घर-परिवार, ऑफिस तक में ये बात फ़ैल चुकी थी और एक मैं ही था जो इस बात से अनजान था| पिछले कुछ महीनों से उसने मुझसे बात तक करना छोड़ दिया था और इस बात को जान बुझ कर छुपा रही थी|
जब मुझे उससे प्यार हुआ तब मुझे उसके और उसके behavior के बारे में जानने को मिला| उसने आज तक मेरी कोई बात नहीं मानी और मैं जो भी उसके भले के लिए कहता था वो उसका ठीक उल्टा ही करती थी| यही कारन है की मैं मन ही मन ये फैसला कर चूका था की हम दोनों कभी एक नहीं हो सकते और ये बात मैंने उसे उसके मुँह पर बोली थी| वो भी ये बात जानती थी...... इसीलिए मैं चाहता था की उसे मुझसे भी करोड़ गुना प्यार करने वाल मिले जो उसके इस behavior को बर्दाश्त कर सके|
जहाँ तक उसे शुभकामनाएं देने की बात है तो वो मैंने उसे पहले ही दे दी और आने वाले नय मेहमान के लिए भी प्यार दे दिया| उसे साफ़ कह दिया की आज के बाद मेरा कोई फ़ोन तुम्हें नहीं आएगा, तुम अपनी जिंदगी में खुश रहो क्योंकि मैं नहीं चाहता की मेरे कभी उसे फ़ोन करने से उसकी उसके पति से लड़ाई झगड़ा हो|
जिस इंसान को एतना प्यार करते हो की उसे एक काँटा भी चुभ जाए तो आप भगवान् से दुआ करने लगते हो वो इंसान शादी कर रहा हो तो ख़ुशी तो होती है पर दुःख इस बात का होता है की अब आप उससे फिर कभी उस तरह बात नहीं कर सकते जैसे पहले किया करते थे|
खेर आपकी बातों से साफ़ पता चल गया की आप मुझसे उम्र में बहुत बड़े हैं और आपका इन सब हालातों को handle करने का तरीका एक late 20s के लड़के के मुकाबले कई गुना strong है! मुझ में अब भी बहुत सारा बचपना भरा हुआ है और मैं बस इतना जानता हूँ की जब प्यार करो तो शिद्दत से करो ना की जिस्म से! शायद यही कारन है की मैं अकेला रह गया हूँ!

दोस्त, आपको जान कर ख़ुशी होगी की मैं लौट आया हूँ और फिर से उसी जोश से लिखूँगा!
पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी हुआ उससे बुरी तरह जूझने के बाद मुझे मेरे दो अनमोल दोस्तों ने सहारा दिया और कल रात हमने जम कर पार्टी की और खूब दारु भी पी| जितनी भी तड़प और दुःख अंदर भरा था वो सब नाच-नाच के कल बहार निकाल दी और pub में आग लगा दी! (figuratively !!!)
 
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इसी तरह ऋतू और मेरे प्यार भरे दिन बीतने लगे, सोमवार से शुक्रवार उससे शाम को मिलना और फिर शनिवार और इतवार साथ-साथ ऑफिस में पूरा दिन गुजारना| घर से फ़ोन आता तो मैं कह देता की मैं नहीं आ पाउँगा क्योंकि बॉस छुट्टी नहीं दे रहा है| ऋतू के आने के बाद ऑफिस में एक ग्रुप बन आगया था| मैं, अनु मैडम, राखी और ऋतू का एक ग्रुप और बाकी लोगों का एक ग्रुप! मैडम भी ऋतू के काम से बहुत खुश थीं और प्रोजेक्ट भी आधा खत्म भी हो गया था| मैडम तो इतनी खुश थीं की उन्होंने कहा की ऋतू की ग्रेजुएशन के बाद वो हमारा ऑफिस ही ज्वाइन कर ले| पर ये तो मेरा मन जानता था की ऋतू की ग्रेजुएशन के बाद तो हम दोनों ही यहाँ नहीं होंगे!

आज का दिन बहुत अलग था, चूँकि आज शनिवार था तो आज ऋतू भी ऑफिस आई हुई थी| 11 बजे राख ऑफिस में आई और उसके हाथ में मिठाई का डिब्बा था| सबसे पहले बॉस को और फिर मैडम को उसने खुशखबरी दी की उसकी शादी तय हो गई है| ऑफिस में सब का उसने मुंह मीठा कराया और मेरा नंबर आखरी था| ऋतू से प्यार होने से पहले मैं राखी को बहुत पसंद करता था, पर कभी उससे काम के इलावा कोई बात नहीं की| हम दोनों ने जो भी थोड़ा बहुत खुल के बातें की वो सब राख के मुंबई मिलने के बाद था| शायद इसीलिए उसकी शादी की बात सुन कर थोड़ा दुःख हुआ! पर अगले ही पल मुझे ऋतू का हँसता हुआ चेहर दिखा और मुझे होश आया की मेरे पास तो ऋतू का प्यार है! मन में ख़ुशी थी इस बात की, की राखी की शादी हो रही है पर दुःख शायद इस बात का था की पिछले कीच दिनों में हम जो थोड़ा बहुत खुल कर बातें करने लगे थे वो अब कभी नहीं हो पायेगी! मैं अपना ये गम छुपाये हुए था पर शायद ऋतू समझ चुकी थी| लंच में हम दोनों नीचे चाय पीने गए थे की तभी ऋतू ने मुझे एक तरफ अकेले में आने को कहा|

ऋतू: राखी वही लड़की है न जिसे आप बहुत प्यार करते थे?

मैं: पसंद करता था!

ऋतू: समझ सकती हूँ की आपको कैसा लगा होगा आज!

मैं: I'm happy for her!

ऋतू: Tha I know, but what about your inner wound! It must be hurting you from inside?!

मैं: It did hurt, but then I saw your beautiful smiling face and realized I've the most loving person with me.

ये सुन कर ऋतू के गाल शर्म से लाल हो गए| आगे हम कुछ बातें करते उससे पहले ही राखी आ गई और उसकी और ऋतू की बातें शुरू हो गई| दोनों कपड़ों को ले कर कुछ बातें कर रही थीं, मैंने आखरी घूँट चाय का पिया और फिर वहाँ से निकल आया| वो पूरा दिन ऋतू मेरे आस-पास मंडराती रही, किसी न किसी बहाने से मुझसे कुछ भी पूछने आती और मुझे हँसाती बुलाती रहती| उस दिन ऋतू को नजाने क्या सूझी की उसने मैडम से जल्दी जाने की बात बोली, अब मैडम तो उसे घर छोड़ने के लिए निकलना चाहती थीं क्योंकि उनको बॉस के सामने काम करना बिलकुल पसंद नहीं था| बॉस हमेशा उनपर धौंस जमाते और काम करवाते रहते थे| इसलिए मैडम इसी फिराक में रहती की कहीं न कहीं किसी न किसी बहाने से ऑफिस से निकल जाएँ| पर ऋतू ने बड़ी शातिर चाल चली; "mam वो मुझे अमीनाबाद मार्किट जाना है! वहाँ आपकी कार कैसे जाएगी? वहाँ तो पार्किंग भी नहीं मिलती? आप अगर सर (मेरी तरफ इशारे करते हुए) से कह दें तो वो मुझे वहाँ छोड़ देंगे?!" ऋतू ने जब मेरी तरफ इशारा किया तब मैं उसी तरफ देख रहा था पर जैसे मैडम ने मेरी तरफ देखा मैंने तुरंत नजरें फेर लीं| मेरी खुशकिस्मती की मैडम समझ नहीं पाईं और उन्होंने मुझे आवाज लगा कर बुलाया; "मानु जी! जरा हमारी रितिका की मदद कर दो| उसे अमीनाबाद मार्किट जाना है, आप उसे वहाँ छोड़ दो|" ये सुन कर बिलकुल हैरान था; "पर mam वहाँ तो इस वक़्त बहुत भीड़ होती है?"

"हाँ जी तभी तो आपको कह रही हूँ, आप रितिका को वहाँ छोड़ कर घर निकल जाना|" मैडम ने कहा|

"पर mam ...वो सर???" माने थोड़ी चिंता जताई|

"कौन सा आप पहली बार जल्दी निकल रहे हो, मैं कह दूँगी की आज आपकी टूशन क्लास थोड़ा जल्दी थी|" मैडम की बात सुन कर रितिका का मन प्रसन्न हो गया और उसकी ख़ुशी उसके चेहरे से झलकने लगी| मैंने अपना बैग उठाया और हम दोनों नीचे आने को उतरने लगे| पर मैं जानबूझ कर चुप रहा ताकि मैडम को ये ना लगे की ये हमारी मिली-भगत है| नीचे आ कर मैंने ऋतू से कहा; "बहुत दिमाग चलने लगा है आज कल तेरा?" ऋतू बस हँसने लगी और आ कर मेरी बाइक पर पीछे बैठ गई| "अच्छा जान कहाँ है?" मैंने पूछा| "बाज़ार जायेंगे और कहाँ?" ऋतू ने थोड़ा इठलाते हुए जवाब दिया| मैंने बाइक उसी तरफ भगाई, वहाँ पहुँच कर ऋतू ने मुझे एक दूकान के सामने रुकने को कहा| मेरा हाथ पकड़ के मुझे वो अंदर ले गई और मेरे लिए शर्ट पसंद करने लगी| पर बेचारी जल्दी ही मायूस हो गई; "क्या हुआ जान!" मैंने उससे प्यार से पूछा तो उसने बताया की जो स्टिपेन्ड मिला था उससे वो मेरे लिए एक शर्ट लेना चाहती थी पर शर्ट की कीमत 1200/- से शुरू थी| "अरे पगली! ये तो स्टिपेन्ड है सैलरी थोड़े ही?! जब सैलरी मिलेगी तब ले लेना शर्ट, अभी हम तेरे लिए कुछ बालियाँ खरीदते हैं| पर ऋतू का मन नहीं था इसलिए मैंने उसे बहुत मस्का लगाया और उसके लिए मैंने बहुत सुंदर इमीटेशन वाली जेवेलरी खरीदवाई| पैसे ऋतू ने ही दिए और अब वो बहुत खुश थी; "पहली सैलरी जब मिलेगी ना तो आपके लिए मैं बिज़नेस सूट खरीदूँगी!" उसने मुझे चेताया और मैंने भी उसकी बात में हाँ मिला दी| उस दिन उसे मैंने ठीक 6 बजे उसके हॉस्टल छोड़ दिया और घर वापस आ गया| मन अब हल्का था और इसका सारा श्रेय ऋतू का जाता है| अगर वो मेरी जिंदगी में ना होती तो मैं अभी कहीं बैठ कर दारु पी रहा होता| कुछ और दिन बीते और आखिर मेरा जन्मदिन आ गया पर वो आया संडे के दिन! शुक्रवार को ही ऋतू ने मुझे कह दिया था की मैं संडे की छुट्टी ले लूँ पर जब मैंने अनु मैडम से छुट्टी मांगी तो उन्होंने कहा; "मानु जी! संडे को तो वीडियो कॉन्फ्रेंस है और हम सबको वहीँ बैठना है और आप ही तो उन्हें ग्राफ्स और PPTs समझाओगे! ये (बॉस) तो उस दिन यहाँ होंगे नहीं!" अब मैं आगे क्या कहता इसलिए मैंने उनकी बात मान लीं और ऋतू को लंच में फ़ोन कर के बता दिया| ऋतू का तो मुँह बन गया और वो मुझसे 'थोड़ा' नाराज हो गई| अगले दिन जब वो आई तब भी मुझसे कुछ नहीं बोली और मुझे गुस्सा दिखाते हुए मुँह इधर-उधर झटकती रही! उस दिन बॉस ने सारा काम मेरे मत्थे थोप दिया था और खुद शुक्ल जी और बाकियों को ले कर इलाहबाद निकल गए| मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर एहि सोच कर संतोष कर लिया की कम से कम ऋतू तो मेरे सामने है ना| अब उसे मनाने के लिए मैं ही उसकी डेस्क के आस-पास मंडराता रहा|

"जान! मेरा प्यार बच्चा! मुझसे नाराज है?" मैंने सबसे नजर बचाते हुए ऋतू से तुतलाती हुई जुबान में कहा| ये सुन कर ऋतू के चेहरे पर हँसी छा गई| "जानू! प्लीज कल छुट्टी ले लो, आपका बर्थडे अच्छे से सेलिब्रेट करना है!" ऋतू ने बहुत सारा जोर दे कर कहा| "बाबू! मैडम ने कहा है की कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग है और हम तीनों आना है| इसलिए मुझे तो क्या आपको भी छुट्टी नहीं मिलेगी| ऐसा करते हैं की ऑफिस के बाद कहीं बाहर चलते हैं!" मैंने ऋतू को समझाते हुए कहा| "पर हॉस्टल में क्या कहूँगी?" ऋतू ने पूछा| अब इसका तो कोई इलाज नहीं था मेरे पास! "एक आईडिया है! आज जा के आंटी से कह देना की कल तुम्हें गाँव जाना है, मैं तुम्हें ठीक 7 बजे लेने आऊँगा और फिर तुम अपना छोटा सा बैग मेरे घर पर रख देना| उसके बाद ऑफिस और फिर बाद में पार्टी!" ये सुन कर ऋतू इतनी खुश हुई की उसने मुझे गले लगाने को अपने हाथ खोल दिया पर जब उसे एहसास हुआ की वो ऑफिस में है तो उसने ऐसे जताया जैसे वो अंगड़ाई ले रही हो| अगले दिन सारा काम प्लान के हिसाब से हुआ, मैं ऋतू को लेने अपनी बाइक पर हॉस्टल पहुँचा और वो मोहिनी को बाय बोल कर मेरे साथ निकल पड़ी| हमने घर पर ऋतू का बैग (जिसमें ऋतू जब गाँव जाती थी तो कुछ किताबें ले जाय करती थी|) रखा और फिर मैंने कपडे बदले और दोनों ऑफिस आ गए| आज मैंने ऋतू के सामने पहली बार शर्ट और टाई बंधी थी, शर्ट अंदर टक (tuck) थी और टाई लटक रही थी| ऋतू का मन बईमान हो रहा था और वो बार-बार सब की नजरें बचा कर मुझे कभी kiss करने का इशारा (Pout), तो कभी आँख मार देती| जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू हुई तो मैडम ने सबसे पहले अपना ओपनिंग स्टेटमेंट दिया और उसके बाद ऋतू और राखी ने अपने एनालिसिस के बारे में बताया और मैं उन्हीं के साथ खड़ा हो कर ग्राफ्स दिखा रहा था| इसी एनालिसिस और ग्राफ्स के साथ मैंने अनु मैडम के क्लोजिंग स्टेटमेंट की PPT चला दी|

प्रेजेंटेशन के बाद मैडम बहुत खुश थीं और वो राखी और ऋतू के गले लग कर अपनी ख़ुशी प्रकट कर रही थीं| पर मुझसे वो गले नहीं मिलीं बल्कि हैंडशेक किया और बधाई दी! "Guys I'd like to celebrate this day, not only we nailed the presentation but its our beloved Manu's birthday!" मैडम की बातें सुन कर मैं हैरान हो गया और अचरज भरी आँखों से उन्हें देखने लगा| "You thought you can escape without giving us treat?? Hunh??" मैं अब भी हैरान था और इधर राखी आ कर मेरे गले लग गई और 'Happy Birthday Dear' बोली| मैं अब भी हैरान था की मैडम को कैसे पता? "Mam, but how did you ..." मेरी बात मैडम ने पूरी होने ही नहीं दी और बोल पड़ीं; "I'm really sorry! एक ही जगह काम करते हुए हमें 3 साल होगये पर आज तक मैंने कभी आपको बर्थडे विश (wish) नहीं किया, न कभी मैंने आपसे पूछा न कभी इस बारे में सोचा पर उस दिन अचानक से मेरी नजर आपकी फाइल पर पड़ी और आपका resume पढ़ा तब पता चला| सच में हम लोग अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हैं की अपने करीबी लोगों के, अपने colleagues के बर्थडे तक याद नहीं रखते| खेर अब ऐसा नहीं होगा और आज की पार्टी मेरी तरफ से!" मेरा ध्यान अब भी मैडम की बातों पर था और ऋतू मेरी तरफ देख कर हैरान थी| मैडम मेरे पास आईं और मुझे 'Happy Birthday मानु जी!' बोला और गले लग गईं, मैं अब भी कोई react नहीं कर पा रहा था| मेरे मुँह से बीएस 'Thank You Mam' निकला|

अनु मैडम को मेरे गले लगा देख ऋतू को जलन होने लगी और वो मेरे पास आई 'Happy Birthday Sir!!!' बोल कर मेरे गले लग गई| मैंने भी बहुत गर्म जोशी से उसे कस के गले लगा लिया और 'Thank You' बोला| "Let's go to a pub!" मैडम ने बड़ी गर्म जोशी में कहा और राखी तुरंत तैयार हो गई पर मैं और ऋतू अब भी खामोश खड़े थे| "रितिका आप ड्रिंक करते हो?" मैडम ने ऋतू से पूछा| "किया तो नहीं मैडम पर आज जर्रूर करुँगी|" ऋतू ने भी बड़ी गर्म जोशी से जवाब दिया| "और आप मानु जी, आज तो आपको भी पीनी होगी!" मैडम ने मुझे हुक्म देते हुए कहा| मैंने नजर बचाते हुए ऋतू की तरफ देखा तो वो पहले से ही मेरी तरफ देख रही थी और जैसे ही हमारी नजर मिली तो उसने सर हिला कर हाँ कहा| मैंने भी मैडम को जवाब सर हिला कर हाँ कहा| मैडम ने और मैंने अपनी-अपनी गाड़ियाँ ऑफिस के पार्किंग लोट में ही छोड़ दी और मैंने कैब बुलवाई, मैं ड्राइवर के साथ और बाकी तीनों पीछे बैठ गए| पब का चुनाव मैंने ही किया, ये एक brewery थी और यहाँ की बियर बहुत ही मशहूर थी| हम चारों ने दो काउच वाला टेबल पकड़ा, अब मैडम एक काउच पर बैठ गईं और राखी दूसरे काउच पर| बचे मैं और ऋतू, तो ऋतू तो मैडम के बगल में बैठने से रही| आखिर वो राखी की बगल में बैठ गई और मैं मैडम के बगल में, ड्रिंक्स मेनू मैडम और मैंने उठाया; "भई मैं तो 30ml chivas लूँगी आप लोग देख लो क्या लेना है|" इतना कह कर मैडम ने मेनू रख दिया|

"Mam पहले एक-एक Lager Beer लेते हैं, It's their sepeciality and I promise You're gonna love it!" मैडम ने झट से मेरी बात मान ली और मैंने 4 Lager Beer आर्डर की| "क्या बात है मानु जी? बड़ी नॉलेज है आपको बीयर्स की?" राखी ने मुझे छेड़ते हुए पूछा| "कॉलेज के दिनों में कभी-कभी दोस्तों के साथ आता था|" मैंने कहा| जब बियर आई, सबने cheers किया और एक-एक सिप लिया तो मैडम की आँखें हैरानी से फटी रह गई| "मानु जी! You're a geniuos! मानना पड़ेगा की आपकी ड्रिंक्स के मामले में चॉइस बहुत बढ़िया है!"

राखी की तारीफ करने से नहीं चुकी; "सीरियसली मानु जी! ना तो ये कड़वी है ना ही इसकी महक इतनी स्ट्रांग है! मैंने आजतक जितनी भी बियर पि ये वाली उनमें बेस्ट है|"

"अरे रितिका तुम्हें अच्छी नहीं लगी?" मैडम ने रितिका से पूछा| "Mam पहलीबार के लिए ये एक्सपीरियंस बहुत बढ़िया है| मैं सोच रही थी की ये बदबू मारेगी और मुझे कहीं वोमिट ना होजाये पर ये तो बहुत स्मूथ है|" ऋतू ने मेरी तरफ देखते हुए कहा| अब खाने की बारी आई तो ऋतू को छोड़ कर हम तीनों नॉन-वेज निकले| हम सब के लिए तो मैंने चिकन विंग्स मंगाए और ऋतू के लिए हनी चिल्ली पोटैटो, आज पहली बार उसने ये डिश खाई और उसे पसंद भी बहुत आई| बियर का मग खत्म करते ही, सब पर बियर सुरूर चढ़ने लगा| लाउड म्यूजिक का असर राखी और ऋतू पर छाने लगा, अगला राउंड फिर से रिपीट हुआ| इस बार तो बियर खत्म होते ही राखी उठ खड़ी हुई और डी.जे. के सामने खड़ी होकर झूमने लगी और गाने पर थिरकने लगी| दो मिनट बाद

वो ऋतू को भी खींच कर ले गई और बियर का नशा ऋतू पर थोड़ा ज्यादा ही दिखने लगा और दोनों ने झूमना शुरू कर दिया| गाने अभी अंग्रेजी बज रहे थे, मैं और मैडम अकेले बैठे बस गाने को एन्जॉय कर रहे थे|
 
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