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Hindi Sex Kahani काला इश्क़!

update 28

कुछ देर बाद मैडम ने पूछा की क्या मैं हार्ड ड्रिंक लूँगा तो मैंने हाँ कह दिया| मैडम ने दो Chivas 30ml मंगाई! हमने चियर्स किया और पहला सिप लिया| मैंने आज पहलीबार इतनी महंगी दारु पि थी और उसका स्वाद वाक़ई में बहुत अच्छा था| बिलकुल स्मूथ और गले से उतरते हुए बिलकुल नहीं जल रही थी| टेस्ट भी बिलकुल स्मूथ... मैं तो उसके सुरूर में खोने लगा था| इतने दिनों बाद दारु मेरे सिस्टम में गई थी और पूरा सिस्टम ख़ुशी में नाच रहा था! मैडम को अब अच्छा नशा हो गया था और वो उठ कर खड़ी हुईं और वेटर को बुला कर उसके कान में कुछ कहा और फिर मेरा हाथ पकड़ के मुझे खड़ा किया| मैडम मुझे जबरदस्ती डांस फ्लोर पर ले गईं और उन्होंने थिरकना शुरू कर दिया| डी.जे. ने आखिर मैडम का गण बजा दिया; "आजा माहि... आजा माहि...आ सोनिये वे आके ..." ये सुनते ही मैडम ने जो डांस किया की मैं बस देखता ही रह गया, ऋतू और राखी भी मैडम के साथ डांस करने लगे| मैडम मेरी तरफ देखते हुए डांस कर रही थी और लिप सिंक कर के गा रही थीं; "आजा माही... आजा माही... आ सोनेया वे आके अज मेरा गल लग जा तू!" ये सुन कर मुझे बड़ी शर्म लग रही थी, पर ऋतू का ध्यान इस बार नहीं था|

मैंने भी थोड़ा डांस करना शुरू कर दिया था और तीनों के साथ डांस कर रहा था| अगला गाना बजा; "Angel eyes" और फिर तो मैडम और मैंने मिलके साथ डांस किया| मैडम ने आकर मुझे गले लगा लिया और मेरा हाथ उठा कर अपनी कमर पर रख लिया और अपनी बाहें मेरे गले में डाल दि और हम दोनों थिरकने लगे| ऋतू ने जब ये देखा तो उसने कुछ रियेक्ट नहीं किया बस मुझे आँख मार दी और अपना डांस चालु रखा| "my baby's got ooooooooooooooo" मैं और मैडम एक साथ लिप सिंक कर के गा रहे थे| फिर गाने की लाइन आई; "तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया, बैठे ही बैठे मैंने दिल खो दिया!" तो मैडम ने मेरी आँखों में आँखें डालते हुए गाने लगी| मैंने मैडम की इस बात का कोई जवाब नहीं दिया, देता भी क्या? मुझे लग रहा की मैडम तो बस गाना गा रही हैं, सच में मुझसे प्यार का इजहार थोड़े ही कर रहीं हैं! वैसे ये सुनने में रोमांटिक तो लग रहा था पर हम तो पहले ही ऋतू के हो चुके थे!

अगला गाना चेंज हुआ तो मैडम शर्मा गईं और अपना पेग पीने चली गईं और इधर ऋतू मेरे पास आ कर नाचने लगी| अगला गाना ये प्ले हुआ; "गज़ब का है दिन सोचो ज़रा ये दीवानापन देखो ज़रा तुम हो अकेले हम भी अकेले मज़ा आ रहा है कसम से.. कसम से.." बस फिर क्या था मैंने और ऋतू ने किसी की भी परवाह किये बगैर एक दूसरे को कस कर बाहों में भरा और गाने पर थिरकने लगे|

अब मैडम भी अपना पेग खत्म कर के वापस आ चुकी थीं, मैंने भी धीरे-धीरे ऋतू से दूरी बना ली और मैडम को शक नहीं होने दिया| अगला गाना बजा; "थोया-थोया" और अब तक राखी जो लड़कियों वाले ग्रुप में नाच रही थी वो मेरे पास आ गई;

"तूने क्या किया मेरी जान-ए-जा

एक नज़र में ही दिल चुरा लिया

मुझको क्या हुआ कोई जाने न

तुझको देखा तोह होश खो दिया" राखी ने ये लाइन मेरी तरफ ऊँगली करते हुए गाई| अब जब मेरी बारी आई तो मैंने भी गाने की आगे की लाइन गाई;

"तेरी हर नज़र तेरी हर अदा

क्या कहु तुमपे दिल है यह फ़िदा

तुझसे है ज़मीन तुझसे आसमान

तुझसे बढ़कर नहीं कोई नशा" और हम सारे नाचने लगे| अब बारी थी मेरी की मैं भी अपना पेग खत्म कर दूँ तो मैं तीनों को नाचता हुआ छोड़ के अपना पेग पीने लगा| तभी वहां नेक्स्ट गाना लगा; "Shape of you" मैं जल्दी से वपस डांस फ्लोर पर आ गया और चारों जोश से भर के नाचने लगे, "I'm in love with your body.

Oh-I-oh-I-oh-I-oh-I" ये लाइन चारों एक साथ चीखते हुए गा रहे थे| इस गाने के खत्म होने के बाद चारों चूँकि थक चुके थे इसलिए सारे वापस आ कर काउच पर 'फ़ैल' गए! जब सबकी सांसें दुरुस्त हुईं तो राखी ने कहा की उसे एक और बियर चाहिए और ऋतू ने कहाँ मुझे कोई हार्ड ड्रिंक try करना है| मैं हैरानी से ऋतू की तरफ देखने लगा, मैंने सोचा की मुझे उसे समझाना चाहिए तो मैंने बात बदलते हुए कहा; "आप में से किसी को brewery tank देखना है?" ऋतू ने जल्दी से अपना हाथ उठाया पर उसके अलावा किसी ने कोई जोश नहीं दिखाया| मैडम ने भी कहा की बाद में देखेंगे अभी मैं ड्रिंक्स का आर्डर दे दूँ| "रितिका जी, आप आज LIIT try कर के देखो|" मैंने कोशिश की कि ऋतू हार्ड ड्रिंक ना ले वर्ण वो आज क्या रायता फैलाती ये मैं जानता था| "ये हार्ड ड्रिंक है?" ऋतू ने फटक से पूछा| "नहीं... its Long Island Ice Tea"

"पर बियर के बाद चाय कौन पीता है!" ऋतू ने बड़े भोलेपन से पूछा|

ऋतू की बात सुन कर मैं बहुत जोर से हँसा, राखी और यहाँ तक कि मैडम को भी नहीं पता था कि LIIT क्या होती है! "ये कोई चाय नहीं है बल्कि दो-तीन तरह कि हार्ड ड्रिंक्स को मिला कर बनाया जाता है| टेस्ट में ये मीठी होती है पर नशा बियर के मुकाबले थोड़ा ज्यादा होता है|" ये सुन कर तीनों ने try करने की हामी भरी और मैंने तीनों के लिए ये मंगाई और अपने लिए 'ale beer' मंगाई| जब आर्डर सर्व हुआ तो तीनों मेरी तरफ देखने लगे और पूछने लगे की मैंने क्या मंगाया है? "ये 'ale beer' है| ये थोड़ी स्ट्रांग है, टेस्ट में हलकी सी कॉफ़ी की महक आती है|" ये सुनना था की सबसे पहले मैडम ने एक सिप लिया और दूसरा सिप ऋतू ने लिया और लास्ट सिप राखी ने लिया|

"ये तो थोड़ी कड़वी है!" ऋतू ने मुँह बनाते हुए कहा| उसके इस बचकानेपन पर मुझे हँसी आ गई| आधी बियर खत्म कर मैं वाशरूम के लिए उठा और ऋतू भी उठ खड़ी हुई और फिर हम दोनों वाशरूम आ गए| अंदर घुसने से पहले ही मैंने ऋतू का हाथ पकड़ लिया और उसके कान में बोला; "हार्ड ड्रिंक मत लेना!" उसने सवालियां नजरों से पूछा की आखिर क्यों नहीं लेना तो मैंने उसे समझाया; "नशे में अगर तुमने कुछ बक दिया तो काण्ड हो जायेगा!" पर उसने मेरी बात को अनसुना किया और वाशरूम में घुस गई| मैं भी वाशरूम में घुस गया पर मन ही मन तैयारी कर चूका था की बेटा आज तो काण्ड होना तय है! खेर वापस आया तो मैडम ने कहा की सब brewery tank देखना चाहते हैं| मैं उन्हें काउंटर के पीछे ले गया और उन्हें स्टेनलेस स्टील से बने टैंक दिखाए| तीनों वो देख कर खुश हो गए, दरअसल ये तो दारु थी जिसका थोड़ा-थोड़ा नशा सब पर छाने लगा था| हम वापस आ कर बैठे ही थे की डी.जे. ने गाना लगाया 'साइको सैयां'| अब ये सुन के तो तीनों पागल हो गए और मुझे खींच कर डांस फ्लोर पर ले आये और तीनों मेरे से चिपक कर नाचने लगे| मैं भी शराब के सुरूर में तीनों के साथ कदम से कदम मिला कर डांस करना शुरू कर दिया| उसके बाद तो डी.जे ने एक के बाद ऐसे गाने बजाये की हम चारों ने बिना रुके आधा घंटा डांस किया| आखिर कर थक कर हम चारों काउच पर बैठे और मैडम ने लास्ट राउंड खुद आर्डर किया| Chivas के 2 30ml पेग और मेरे और अपने लिए मैडम ने 60ml large पेग मंगाया| मेरा कोटा सबके मुकाबले काफी बड़ा था इसलिए मैं अब भी होश में था| जबकि ऋतू और राखी तो ढेर हो चुके थे, दोनों को बहुत तगड़ा नशा हो चुका था| मैंने मैडम से चलने को कहा तो उन्होंने bill मंगवाया और बिल 8,000/- का आया| अब मैं और मैडम बिल भरने के लिए जिद्द करने लगे पर मैडम ने बात नहीं मानी और खुद ही बिल भरा| जब मैडम उठ कर खड़ी हुईं तो नशा उन पर जोर दिखाने लगा और वो लडख़ड़ाईं, मैंने उन्हें संभालना चाहा तो मेरा हाथ सीधा उनकी कमर पर जा पहुंचा| फिर मैडम ने जैसे-तैसे खुद को संभाला, पर ऋतू और राखी तो काउच पर ऐसे फैले हुए थे जैसे की कोई लाश! मैंने दोनों को उठाया और चलने को कहा तो दोनों से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था| मैडम ये देख कर हँसने लगी, अब मैंने दोनों को जैसे-तैसे सहारा देकर उठाया और दोनों ने अपनी एक-एक बाँह मेरे गले में डाल दी| मैं दोनों के बीच में था और मैंने दोनों को उनकी कमर से संभाला हुआ था| ऋतू और राखी का सर मेरे सीने पर था और मैडम ने इस मौके का फायदा उठा कर अपना फ़ोन निकला और मेरी इस हालत में फोटो खींची और फिर हम चारों की सेल्फी भी ली| जैसे-तैसे मैं दोनों को बहार ले कर आया और मैडम भी लड़खड़ाते हुए बहार आ कर खड़ी हो गई|

"मानु जी ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई !!! कैब बुला..... लो ..... नाआ...." मैडम ने शब्दों को खींच-खींच कर बोलना शुरू कर दिया| पर मैं कैब बुलाऊँ कैसे? ऋतू और राखी दोनों मेरे सीने से चिपकी हुई थी| मैंने दोनों को हिला- डुला कर होश में लाना चाहा, जैसे ही दोनों को थोड़ा होश आया की दोनों ने उलटी करनी शुरू कर दी| दोनों ही मुझसे अलग हो कर अलग-अलग दिशा में जा कर उलटी करने लगी, अब मैंने फटाफट फ़ोन निकाला और कैब बुक कर दी| मैंने पानी की बोतल ला कर ऋतू और राखी को दी और तभी कैब आ गई| अब तो मुझ पर भी दारु का असर चढ़ना शुरू हो गया था पर उतना नहीं था जितना मैडम और ऋतू पर था| मैं आगे बैठा और बाकी तीनों बड़ी मुश्किल से पीछे बैठे| किसी का हाथ किसी पर था तो किसी का मुँह किसी की गोद में! ड्राइवर भी हँस रहा था और कह रहा था साहब कैसे छोड़ोगे सब को? मैंने उसे पहले मैडम को घर छोड़ने के लिए कहा और गाडी उस तरफ चल पड़ी| मैडम का घर आया तो मैंने मैडम को जगाया, उनकी तो आँख भी नहीं खुल रही थी| कुनमुनाते हुए वो उठीं और शायद उनको थोड़ा होश था तो वो बोलीं की आज रात सब उन्हीं के घर सो जाते हैं| मैंने मना किया तो मैडम ने कहा की ऋतू को हॉस्टल इस हालत में कैसे छोड़ोगे? और राखी को उसके घर कैसे छोड़ोगे? उसके घर वाले बवाल करेंगे| आखिर मैडम ने राखी के घर फ़ोन कर के बोल दिया की राखी उन्हीं के घर रुकेगी रात और कल सुबह आ जायेगी घर|

मैं और मैडम पहले गाडी से उतरे पर बाकी दोनों देवियाँ बेसुध पड़ी थीं| मैंने ऋतू को खींच कर बाहर निकला और मैडम ने राखी को, ऋतू को मैंने गोद में उठा लिया और जैसे ही उसे मेरे जिस्म का एहसास हुआ उसने अपने दोनों हाथों को मेरे गले में डाल दिया| मैडम ने मुझे जब इस तरह से ऋतू को उठाये हुए देखा तो वो आँखें चढ़ा कर मुझे छेड़ते हुए बोली; "क्या बात है मानु जीईईईईईईईईई !!!" मैंने बस मुस्कुरा दिया और आगे कहता भी क्या| मैडम ने राखी को अपने शरीर का सहारा दे रखा था और उसका दाएं हाथ मैडम के गले में था| मैडम आगे और मैं पीछे था, दरवाजा खोल कर मैडम अंदर आईं और मुझे एक कमरे की तरफ इशारा किया, मैं वहीँ पर ऋतू को ले कर घुस गया| मैडम भी मेरे पीछे-पीछे राखी को ले कर आईं और राखी तो बेड पर औंधी पड़ गई (कुछ इस तरह)|




पर ऋतू ने अपनी बाहों को मेरे गले में कस रखा था| जब मैं उसे लिटाने लगा तो वो मुझे kiss करने के लिए pout करने लगी| ये मैडम ने देखा तो वो दरवाजे का सहारा ले कर खड़ी हो गईं और देखने लगीं की क्या मैं उसे Kiss करूँगा या नहीं?! चाहता तो मैं भी ऋतू को चूमना था पर मैडम के होते हुए ये नहीं हो सकता था| मैंने मैडम की तरफ मुँह घुमा लिया ताकि ऋतू मुझे Kiss न कर सके| मैडम ये देख कर हँस पड़ी और मैं भी हँस दिया| जैसे-तैसे मैंने ऋतू के हाथों को अपनी गर्दन से छुड़ाया और मुड़ के जाने लगा तो वो बुदबुदाते हुए बोली; "जानू!...उम्म्म... ममम.... प्लीज...!!!" अब मैं क्या कहूं क्या करूँ कुछ समझ नहीं आया पर शुक्र है की मैडम ने इसका कोई गलत मतलब नहीं निकाला और बोली; "आज कुछ ज्यादा ही नशा हो गया रितिका को, ये भी होश नहीं है की वो कहाँ है और किसके साथ है|" मैंने बस जवाब में 'जी' कहा और हम बाहर हॉल में आ गए, अब बात ये थी की मैं सोऊँगा कहाँ? पर मैडम तो आज कुछ ज्यादा ही मूड में थी, उन्होंने 1000 Pipers की बोतल निकाली और दो पेग बना कर ले आईं|

मैं तो आज जैसे सातों जन्म की दारु की प्यास बुझा लेना चाहता था क्योंकि जानता था की कल से ऋतू मुझे पीने नहीं देगी| इसलिए मैंने पेग लिया और खड़ा-खड़ा ही पीने लगा और मैडम के घर को देखने लगा| उनसे नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी इसलिए मैं बस नजरें चुरा रहा था| "मानु जीईईईईईई!!! आप मेरे रूम में सो जाइये मैं यहाँ हॉल में काउच पर सो जाउँगी|" अब भला मैं ये कैसे मान सकता था; "नहीं Mam आप अंदर सो जाइये मैं यहाँ सो जाऊँगा|"

"आज तो आप बर्थडे बॉय हैं, आज तो आपका ज्यादा ख्याल रखना चाहिए|" मैडम ने सिप लेते हुए कहा|

"Mam अब तो 12:30 बज गए, मेरा दिन ख़त्म! अब तो मैं वापस से पहले वाला मानु ही हूँ|" मैंने अपने पेग का आखरी घूँट पीते हुए कहा|

"चलिए ना आपकी न मेरी, हम दोनों ही सो जाते हैं!" मैडम ने थोड़ा दबाव बनाते हुए कहा और मेरा हाथ पकड़ के मुझे कमरे की तरफ ले जाने लगी| पर मैं वहीँ रूक गया और बोला; "Mam अच्छा नहीं लगता! ऋतू...मेरा मतलब रितिका और राखी भी हैं घर पर| वो कल सुबह उठेंगी तो कुछ गलत न सोचें| इसलिए प्लीज Mam आप अंदर सो जाइये मैं बहार सो जाता हूँ|" मैंने मैडम से विनती की तो मैडम मेरी आँखों में देखने लगी; "सच्ची मानु जी! आप ..... कुछ ज्यादा ही .... खय... (ख़याल). सोचते हो|" मैडम ने किसी तरह से बात को संभालते हुए कहा| वो जानती थी की मेरे मन में उनके लिए प्रेमियों वाल प्यार नहीं बल्कि एक अच्छे दोस्त जैसे मान-सम्मान है| इसलिए वो मुस्कुरा दीं और मुझे अंदर से तकिया ला कर दिया और फिर सोने चली गईं| मैं भी काउच पर जूते-मोजे उतार के लेट गया और फ़टक से सो गया| शराब का नशा अब दिमाग पर बहुत चढ़ रहा था, रात के करीब 2 बजे होंगे की मुझे किसी के हाथ का स्पर्श अपने होठों पर हुआ|
 
To lekhak mahoday ji ... ye raha aapki galtiyo ka pitaraa sirf iss update se....

1. Vaapas ki spelling mistake -- तभी वहां नेक्स्ट गाना लगा; "Shape of you" मैं जल्दी से वपस डांस फ्लोर पर आ गया और चारों जोश से भर के नाचने लगे

2. Thak ki spelling mistake -- Oh-I-oh-I-oh-I-oh-I" ये लाइन चारों एक साथ चीखते हुए गा रहे थे| इस गाने के खत्म होने के बाद चारों चूँकि तक चुके थे

3. Darguzar ki jagah Darkinar hona chahiye tha -- "नशे में अगर तुमने कुछ बक दिया तो काण्ड हो जायेगा!" पर उसने मेरी बात को दरगुजर किया और वाशरूम में घुस गई|

4. beta ki spelling mistake मैं भी वाशरूम में घुस गया पर मन ही मन तैयारी कर चूका था की बीटा आज तो काण्ड होना तय है!

5. maan - sammaan ke beech mein dash nahi lagaya -- वो जानती थी की मेरे मन में उनके लिए प्रेमियों वाल प्यार नहीं बल्कि एक अच्छे दोस्त जैसे मान सम्मान है

6. thakk ki spelling mistake -- आखिर कर तक कर हम चारों काउच पर बैठे और मैडम ने लास्ट राउंड खुद आर्डर किया

7. chuka ki spelling mistake(chote oo ki maatra lagegi) -- जबकि ऋतू और राखी तो ढेर हो चुके थे, दोनों को बहुत तगड़ा नशा हो चूका था

8. aaya 2 baar repeat kar diya, so grammatical mistake -- मैंने मैडम से चलने को कहा तो उन्होंने bill मंगवाया और बिल आया 8,000/- का आया

9. sambhala ki spelling mistake -- फिर मैडम ने जैसे-तैसे खुद को सम्प्भाला, पर ऋतू और राखी तो काउच पर ऐसे फैले हुए थे जैसे की कोई लाश

10. minor grammatical rythmic mistake -- मैं दोनों के बीच में था और मैंने दोनों को उनकी कमर से संभाल रखा हुआ था|

11. unhi ki spelling mistake -- कुनमुनाते हुए वो उठीं और शायद उनको थोड़ा होश था तो वो बोलीं की आज रात सब उन्हें के घर सो जाते हैं

12. Rakhi ke naam ki spelling mistake -- मैडम ने राखो को अपने शरीर का सहारा दे रखा था और उसका दाएं हाथ मैडम के गले में था

13. peeche - peeche ke beech mein dash nahi diya -- मैडम भी मेरे पीछे पीछे राखी को ले कर आईं और राखी तो बेड पर औंधी पड़ गई (कुछ इस तरह)|

14. sentence complete nahi ho paya (kaha aur likhna tha) मैंने बस जवाब में 'जी' कहा और हम बाहर हॉल में आ गए, अब बात ये थी की मैं सोऊँगा?

15. khatam ki spelling mistake -- "Mam अब तो 12:30 बज गए, मेरा दिन ख़तम! अब तो मैं वापस से पहले वाला मानु ही हूँ|

16. aayi ki spelling mistake -- मैडम भी मेरे पीछे पीछे राखी को ले कर आईं और राखी तो बेड पर औंधी पड़ गई (कुछ इस तरह)|

agar kuch aur chutt gaya hoto to Aakash, Kamdev, Assasin aur baaki reader bhai log us mistake ko point out kar bata sakte hai.... Namaskaar!!
 
update 29

ये कोई और नहीं बल्कि ऋतू थी जो अभी भी नशे में थी और अपने बिस्तर से उठ कर मेरे सिरहाने खड़ी थी| पर मुझ पर तो दारु का नशा सवार था इसलिए मैं बस उस हसीं पल का लुत्फ़ उठा रहा था, जिसमें ऋतू मेरे होठों को बारी-बारी चूस रही थी| उसके हाथों ने मेरी कमीज के बटन खोलने शुरू कर दिए थे और मैं अब भी होश में नहीं आया था| सारे बटन खोल कर ऋतू मेरी टांगों की तरफ आई और झुक कर मेरी पैंट की ज़िप खोली, फिर बेल्ट खोलने की कोशिश में उसने मुझे थोड़ा हिला दिया जिसके कारन मेरी नींद टूटी और मैं कुनमुनाया; "उम्म्म...ममम" पर ऋतू को जैसे कुछ फर्क ही नहीं पड़ा और वो फिर से मेरी बेल्ट खोलने लगी| पर चूँकि बेल्ट बहुत टाइट थी तो उसे खोलने में ऋतू को कठनाई हो रही थी| उसने हार मानते हुए मुझे ही हिलाना शुरू कर दिया, 3-4 बार हिलाते ही मेरी आँख खुल गई| पर हॉल में कम रौशनी थी जिससे मैं ये नहीं देख पाया की कौन है और खुसफुसाते हुए पूछ बैठा; "कौन है?" जवाब में ऋतू ने मेरे होठों को फिर से अपने मुँह में भर लिया और मेरे ऊपर के होंठ को चूसने लगी| अब मुझे समझते देर न लगी की ये ऋतू है, पर दिमाग नशे से इतना सुन्न था की मैं जल्दी रियेक्ट नहीं कर पाया| पर फिर भी इतनी सुद्ध तो थी की मैं अपने घर नहीं बल्कि मैडम के घर पर हूँ और वहाँ मेरे और ऋतू के अलावा दो लोग और हैं| मैंने बड़ी मुश्किल से ऋतू के होठों से अपने होठों को छुड़वाया और खुसफुसाते हुए बोला; "जान! क्या कर रहे हो? हम mam के घर पर हैं! कोई आ जायेगा...." पर मेरी बात पूरी होने से पहले ही ऋतू मेरे ऊपर लेट गई और फिर से अपने होठों से मेरे होठों को कैद कर लिया| अब तो मुझे भी जोश आ ने लगा था पर खुद को काबू करने लगा| दो मिनट मेरे होंठ चूसने के बाद ऋतू ने खुद ही उन्हें छोड़ दिया और मेरी छाती पर सर रख कर बोली; "जानू! आज बहुत मन कर रहा है! बड़े दिन हुए आपने मुझे प्यार नहीं किया?!"

"जान! हम mam के घर पर हैं, कोई आगया तो?" मैंने ऋतू को समझाते हुए कहा|

"कोई नहीं आएगा जानू! Mam और राखी दोनों गहरी नींद में हैं और मैंने Mam के कमरे का दरवाजा बंद कर दिया है| प्लीज मान जाओ ना!" अब मेरा प्यार मुझसे इतने प्यार से मिन्नत कर रहा है तो मैं भला उसका दिल कैसे तोड़ सकता था| "तो आप नहीं मानने वाले ना?!" मैंने ऋतू के बालों में हाथ फेरा और उसे उठ कर खड़ा होने को कहा| मैंने एक बार खुद इत्मीनान किया की मैडम और राखी सो रहे हैं ना?! फिर दोनों कमरों के दरवाजे को मैंने धीरे से बंद कर दिया, वापस आया तो ऋतू काउच पर लेटी थी और उसने अपने डिवाइडर का नाडा खोल कर नीचे खिसका दिया था| उसकी पैंटी भी घुटनों तक उतरी हुई थी, अब मैंने भी जल्दी से अपनी पैंट खोल दी और कच्छा नीचे किया और लंड पर खूब सारा थूक चुपेड़ा| अपने घुटने मोड़ कर मैं ऋतू के ऊपर छा गया और हाथों से पकड़ के लंड उसकी बुर के द्वार से भीड़ा दिया| मैं जानता था की जैसे ही मैं लंड ऋतू की बुर में पेलुँगा वो दर्द से चिल्लायेगी इसलिए मैंने सबसे पहले उसके होठों को अपने मुँह से ढक दिया| मैंने अपनी जीभ उसके मन में डाल दी और ऋतू उसे चूसने लगी, इसका फायदा उठाते हुए मैंने नीचे से अपने लंड को उसकी बुर में उतार दिया| सिर्फ सुपाड़ा ही अंदर गया था की ऋतू ने मेरी जीभ को दर्द महसूस होने पर काट लिया| अब 'आह' कहने की बारी मेरी थी पर वो आवाज निकल नहीं पाई, जोश आया तो मैंने नीचे से एक और झटका मारा और आधा लंड बुर में पहुँच गया| ऋतू ने मेरी जीभ छोड़ दी और उसकी सीत्कारें मेरे मुँह में ही दफन हो कर रह गई| कुछ "गुं..गुं..गुं..!!!" की आवाजें बाहर आ रहीं थी|

ऋतू का दर्द मुझसे कभी बर्दाश्त नहीं होता था, इसलिए मैं तुरंत रूक गया| मैंने उसके होठों के ऊपर से अपना मुँह हटा लिया, मेरे हटते ही कुछ पल में ऋतू की सांसें सामान्य हुई और वो बोली; "जानू! प्लीज ... रुको मत! पूरा अंदर कर दो!!!!" ऋतू की बात सुन उसका मेरे लिए प्यार मैं समझ गया और वापस उस पर झुक गया| धीरे-धीरे बिना रुके मैंने अपना पूरा लंड उसकी बुर में पहुँचा दिया| अब मैंने धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, ऋतू से ये सुख बिना आवाज किये बयान करना मुश्किल था| उसने अपने दाहिने हाथ की कलाई अपने मुँह पर भर ली और उसे काटने लगी| उसकी सीत्कार उसके मुँह में ही कैद होने लगी और इधर मेरी रफ़्तार तेज होने लगी थी| 10 मिनट तक ही ऋतू टिक पाई और फिर वो झड़ने लगी, पर इससे पहले की मैं झड़ता राखी के कमरे का दरवाजा खुला और वो बाहर आई| उसपर नजर सबसे पहले ऋतू की पड़ी और उसने मुझे एक डीएम से अपने ऊपर से ढकेल दिया| जब मेरी नजर ऋतू की नजर के पीछे-पीछे गई तो राखी मुझे वाशरूम जाती हुई दिखी और मैं भी हड़बड़ा कर उठा और फटाफट अपनी पैंट पहनने लगा| ऋतू ने भी अपने कपडे ठीक किये और अंदर कमरे में भाग गई| ये तो शुक्र था की हॉल में रौशनी कम थी और काउच जिस पर हम दोनों थे वो दरवाजे के साथ वाली दिवार के साथ था| राखी ने हम दोनों को नहीं देखा और वो सीधा ही वाशरूम में घुस गई थी| जब वो बाहर आई तो मैं चुप-चाप ऐसे लेटा था जैसे सो रहा हूँ, उसने आ कर मेरी टाँग हिला कर मुझे उठाया; "रितिका कहाँ है?" ये सुन कर तो मैं अवाक रह गया, मुझे लगा की उसने मुझे और ऋतू को सेक्स करते हुए देख लिया! मैंने फिर भी अनजान बनते हुए, कुनमुनाते हुए कहा; "प....पता नहीं!"

"अंदर तो नहीं है? आप लोग उसे वहीँ तो नहीं छोड़ आये ना?" ये सुन कर मुझे सुकून हुआ की उसने कुछ देखा नहीं! मैं तुरंत उठ के बैठ गया और ऐसे दिखाने लगा की मुझे सच में नहीं पता की वो कहाँ है| मैंने हॉल की लाइट जलाई; "आप ने वाशरूम देखा?" पर तेज लाइट से जैसे ही कमरे में रौशनी हुई हम दोनों की आँखें चौंधिया गईं और राखी ने अपनी आँखों पर हाथ रखा और बोली; "मैं अभी वहीँ से तो आ रही हूँ|" मैं जान बुझ कर उसी कमरे में घुसा और देखा ऋतू वहीँ सो रही है; "अरे ये तो रही!" मैंने फिर से चौंकने का नाटक करते हुए कहा| राखी अंदर आई और एक दम से चौंक गई; "ये यहाँ कैसे आई? मैं जब उठी तब तो यहाँ कोई नहीं था?" उसने जा कर ऋतू को छू कर देखा और फिर उसे जगाने लगी तो ऋतू चौंक कर उठ गई और हैरानी से हम दोनों को देखने लगी| "तू यहाँ तो नहीं थी जब मैं उठी?" राखी ने ऋतू से पूछा|

"मैं किचन में थी पानी पीने, जब वापस आई तो आप यहाँ नहीं थे| क्या हुआ?" ऋतू की बात सुन कर राखी की हँसी छूट गई|

"यार तुमने सच में डरा दिया मुझे! मुझे लगा की कोई भूत-प्रेत है यहाँ!" अब ये सुन कर हम तीनों हँस पड़े|

खेर वो दोनों वापस लेट गए और मैं पहले बाथरूम में घुसा और जा कर लंड हिलाया और पानी निकाल कर सो गया| सुबह सात बजे मैडम ने मुझे उठाया और हमारी Good Morning हुई फिर उन्होंने कॉफ़ी का मग मुझे दिया| "नींद तो आई नहीं होगी आपको?" मैडम ने मुझसे पूछा|

"Mam नींद तो जबरदस्त आई पर राखी ने रात को भूत देख लिया!" मेरी बात सुन कर मैडम एक दम से हैरान हो गईं| फिर मैंने उन्हें सारी बात बताई तो मैडम हँस पड़ी| हमारी हँसी सुन कर ऋतू और राखी दोनों बाहर आ आगये| मैडम ने उन्हें भी कॉफ़ी दी और हमारी कल रात के बारे में बातें शुरू हुईं| जब मैडम ने ऋतू को बताया की वो नशे में मुझे मैडम के सामने Kiss करने वाली थी तो वो बुरी तरह झेंप गई! "आय-हाय! शर्मा गई लड़की! अब तो नाम बता दे की कौन है वो लड़का?" ऋतू की नजरें झुकी हुई थी और उसने बस इतना ही कहा; "है एक...." बस इसके आगे वो कुछ नहीं बोली और कॉफ़ी का कप रख कर वाशरूम चली गई|

राखी: वैसे मानु जी, आपके शराब के ज्ञान को सलाम! (राखी ने मुझे छेड़ते हुए कहा|)

अनु मैडम: सब तरह शराब चखी है आपने| (मैडम ने राखी की बात में अपनी बात जोड़ दी|)

मैं: Mam कॉलेज के दिनों में ...... ये सब try की थी| (मैंने थोड़ा झिझकते हुए जवाब दिया|)

राखी: पर पैसे कहाँ से लाते थे तब?

मैं: पार्ट टाइम में टूशन पढ़ाता था| उससे जो पैसे कमाता था उससे ये शौक़ पूरे होते थे|

अनु मैडम: अरे वाह! तभी से Independent हो आप!

राखी: और भी कोई शौक़ है इसके अलावा?

अब मैं सोच में पड़ गया की कुछ बोलूँ या नहीं पर तभी ऋतू आ गई और उसने जाने की इज्जाजत माँगी|

अनु मैडम: अरे पहले नाश्ता तो करो!

फिर मैडम, राखी और ऋतू सब एक साथ किचन में घुस गए और मैं भी फ्रेश हो कर मैडम की बालकनी में खड़ा हो गया और सुबह की धुप का मजा लेने लगा| नाश्ता कर के हम सब को निकलते-निकलते 9 बज गए| मैडम ने आज मुझे और राखी को छुट्टी दे दी और ये सुनते ही ऋतू की आँखें चमक उठी| मैंने कैब बुक की और सबसे पहले राखी का ड्राप पॉइंट डाला और फिर लास्ट में मेरा और ऋतू का| राखी जब उतरी तो वो मेरे पास आई और मुझे कान पकड़ के सॉरी बोला| मैं भी बड़ा हैरान था की ये मुझे क्यों सॉरी बोल रही है| "कल रात शायद नशे में मैंने आपसे कोई बदसलूकी की हो तो उसके लिए सॉरी|"

"पर आपने कुछ नहीं किया! रिलैक्स!" मैंने उसे आशवस्त किया की कुछ भी नहीं हुआ| फिर जब हम घर पहुँचे तो ऋतू फुल मूड में थी| दरवाजे बंद होते ही ऋतू ने मुझे जोर से खींचा और पलंग के सामने खड़ा कर दिया और फिर जोर से धक्का दे कर मुझे पलंग पर गिरा दिया| मैं अभी सम्भल भी नहीं पाया था की ऋतू मेरे ऊपर कूद पड़ी और मेरे पेट पर बैठ गई| फिर झुक कर उसने मेरे होठों को अपने होठों से मिला दिया फिर अपना मुँह खोला और अपनी जीभ से मेरे ऊपर वाले होंठ को सहलाया| उसे अपने मुँह में भर के चूसने लगी, मेरे हाथों ने उसकी पीठ को सहलाना शुरू कर दिया| अब बारी थी मेरी, मैंने भी थोड़ा जोश दिखाया और उस के Kiss का जवाब देने लगा| मैंने अपने हाथों से उसे कास के अपने से चिपका लिया और पलट कर अपने नीचे ले आया| नीचे आ कर मैंने उसके डिवाइडर को निकाल कर फेंक दिया और उसकी कच्छी उतार के पहले उसे सूँघा, फिर उसे भी फेंक दिया| ऋतू की नंगी बुर मेरे सामने थी और ऐसा नहीं था की मैं वो पहली बार देख रहा था, बल्कि जब भी देखता था तो सम्मोहित हो जाता था|




मेरा मुँह अपने आप ही ऋतू की बुर पर झुकता चला गया और जोश आते ही मैंने अपने मुँह को जितना खोल सकता था उतना खोल कर ऋतू की बुर को अपने मुँह से ढक दिया| जीभ सरसराती हुई अंदर चली गई और ऋतू के बुर में लपलपाने लगी| इतने भर से ही ऋतू की बुर ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और उसने मेरे कमीज के कॉलर को पकड़ के ऊपर खींच लिया| अब मैंने तो अभी भी पैंट पहनी थी पर ऋतू इतनी बेसब्री थी की उसने पैंट की ज़िप खोली और मेरे लंड को टटोलने लगी| लंड पकड़ में आते ही उसने उसे बहार निकाला और अपनी बुर के मुख से भिड़ा दिया| ऋतू के बुर का पानी पहके मेरे लंड के सुपाडे से टच हुआ था मेरे जिस्म में झुरझुरी छूट गई| मैंने पूरी ताक़त से एक झटका मारा और लंड फिसलता हुआ और चीरता हुआ ऋतू के बुर में पहुँच गया| "माँ...आ..आ..आ..आ ..आ..आ...आ..मम...आह....हह..हहा...आय....!!" ऋतू के मुँह से जोरदार चीख निकली और उसने अपने दाँत मेरे कंधे पर गड़ा दिए! तब जा कर मुझे ऋतू के दर्द का एहसास हुआ| ऋतू के दाँत अब भी मेरे कंधे पर गड़े हुए थे और मैं बिना हिले-डुले ही उसपर पड़ा रहा| पॉंच मिनट तक हम दोनों इस तरह बिना हिले-डुले पड़े रहे, फिर धीरे-धीरे ऋतू ने अपने दाँत मेरे कंधे पर से हटाये और नीचे से उसने अपनी बुर को सिकोड़ा| ये मेरे लिए संकेत था, मैंने धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया और अगले दो मिनट में ही मेरी स्पीड बढ गई और ऋतू फिर से झड़ गई! उसके झंडने से मेरे लंड की स्पीड और भी ज्यादा बढ़ गई, पर ऋतू ने मुझे रोकना चाहा और मेरी छाती पर दबाव दे कर मुझे खुद से दूर करने लगी| पर मैं फिर भी लगा रहा, शायद ऋतू से ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था और उसने मुझे बहुत जोर से झटका दे कर खुद से अलग कर दिया| मुझे उसके इस बर्ताव से बड़ी खीज हुई और मैं उसके ऊपर से हट गया और दूर जा कर खड़ा हो गया| मेरी सांसें तेज थी और गुस्से से चेहरा तमतमा रहा था, ऋतू की नजर मुझ पर पड़ी तो वो शं गई और दूसरी तरफ मुँह कर के लेटी रही|

दरअसल ऋतू के जल्दी छूट जाने से और मुझे बीच मजधार में छोड़ देने से मैं बहुत गुस्से में था|
 
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मेरा गुस्सा अब बेकाबू होने लगा था और मुझे कैसे भी शांत करना था| मैंने अपनी कमीज, पैंट सब उतार फेंकी, नंगा बाथरूम में घुस गया और शावर चला कर उसके नीचे खड़ा हो गया| पानी की ठंडी-ठंडी बूँदें सर पर पड़ीं तो गुस्सा थोड़ा कम हुआ और लंड 'बेचारा' सिकुड़ कर बैठ गया| दस मिनट तक मैं शावर के नीचे आँखें मूंदें खड़ा रहा, पर गुस्सा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था| बदन का पानी पोंछ कर जब बहार निकला तो सामने ऋतू सर झुकाये खड़ी थी| मैं उसके बगल से निकल गया और अपने कपडे पहनने लगा| ऋतू पीछे से आई और मुझे अपनी बाहों में भर कर बोली; "सॉरी!" मैंने उसके हाथ अपने जिस्म से अलग किये और बोला; "क्यों मेरे जिस्म में आग लगा रही है, जब उसे बुझा नहीं सकती! मैंने तो नहीं कहा था न की आके मेरे से चिपक जा?" मैंने बड़े रूखे तरीके से उसे दुत्कारा| ऋतू ने सर झुकाये हुए ही अपने कान पकडे और फिर से सॉरी बोला| पर मेरा तो कल रात से दो बार KLPD हो चूका था तो उसका गुस्सा तो था| मैंने आगे कुछ नहीं बोला और ऋतू का बैग उठाया और उसे रेडी होने को कहा पर वो वहाँ से हिली ही नहीं| "सॉरी जानू! आज के बाद कभी ऐसा नहीं करुँगी!" ऋतू ने फिर से कान पकड़ते हुए कहा| अब तक जिस गुस्से को मैंने रोक रखा था वो आखिर फुट ही पड़ा;

"क्या दुबारा नहीं करुँगी? हाँ? बोल??? कल रात को मन किया था न मैंने? बोला था ना की हम mam के घर पर हैं, पर तुझे चैन नहीं था! आखिर मुझे क्या मिला? तू तो जा कर सो गई और मैं बाथरूम में जा कर masturbate कर के सो गया| अभी भी, मैंने तुझे छुआ तक नहीं और तू ही आ कर मुझसे चिपकी थी ना? तेरी तो जिस्म की आग बुझ गई, पर मेरा क्या? अगर मुझे masturbate ही करना था तो सेक्स क्यों? अगर तुझे कोई बिमारी होती तो मैं फिर भी समझता, ये तो तेरा उतावलापन है जिसके कारन प्यासा मैं रह जाता हूँ| उस दिन तो बड़े गर्व से कह रही थी की डॉक्टर ने ये सिखाया है, वो सिखाया है अब क्या हुआ उस सब का? सिर्फ यही नहीं you know shit about sex! Don't even know how to give a proper blowjob! And if I'm licking you down there you never let me do it, always pull me up on you! कितने महीनों से कर रहे हैं हम ये? बोल??? 6 महीने से!!! और इन 6 महिनों में कितनी बार Porn देखा तूने मेरे फ़ोन में? उससे कुछ नहीं सीखा? और तेरी वो दोस्त काम्य जो तुझे अपने सेक्स के किस्से बड़ी डिटेल में बताया करती थी? उससे कभी कुछ नहीं सीखा तूने? You've never ever satisfied me once in these 6 months but still I'm with you, do you know why? Because I fucking love you dammit!!!" ऋतू सर झुकाये सब सुनती रही और फिर आकर मेरे सीने से लग गई| उसकी आँखें छलछला गईं और मेरे अंदर जो गुस्सा था वो अब शांत हो गया| मैंने उसे अब भी नहीं छुआ था और मैं उससे कुछ बोलता उससे पहले ही बॉस का फ़ोन आ गया| मैंने ऋतू को खुद से अलग किया और फ़ोन उठाया|

ऋतू ने अपने कपडे बदले और मेरी फ़ोन पर बात खत्म होने तक वो फिर से सर झुकाये खड़ी हो गई| बात कर के मैंने ऋतू को उसके हॉस्टल छोड़ा और मैं वापस ऑफिस आगया| मुझे ऑफिस में देखते ही मैडम का पारा चढ़ गया और वो बॉस पर बरस पड़ी; "मैंने मानु जी को छुट्टी दी थी फिर क्यों बुलाया उन्हें?" ये सुन कर बॉस एक दम से उनका चेहरा देखने लगा| मैं उस समय बॉस के साइन कराने खड़ा था और मैं भी थोड़ा हैरान था| सर इससे पहले की मैडम पर बरसते मैंने उन्हें अपनी उपस्थिति से अवगत कराते हुए कहा; "Mam वो AMIS Traders की GST की लास्ट डेट थी!" सर चुप हो गए बस मैडम को घूर के देखने लगे| मैंने जल्दी से फ़ोन निकाला और मैडम को कॉल मिला कर फ़ोन वापस जेब में डाल लिया| मैडम का फ़ोन बजा और उन्होंने देख लिया की मेरा ही कॉल है इसलिए बिना कुछ बोले फ़ोन कान से लगा कर बाहर चली गई| कुछ देर बाद मैडम मेरे डेस्क पर आईं और सामने बैठ गईं और बोलीं; "मानु जी आप कहीं और जॉब ढूँढ लो! यहाँ रहोगे तो अपने बॉस की तरह हो जाओगे|" मैडम का मूड बहुत ख़राब था तो मैंने उन्हें हँसाने के लिए कहा; "Mam फिर तो आपका प्रोजेक्ट अधूरा रह जायेगा और फिर हमारी फ्रेंडशिप का क्या?"

"दूसरी जॉब से हमारी फ्रेंडशिप थोड़े ही खत्म होगी? और रही प्रोजेक्ट की तो जाए चूल्हे में!" मैडम ने मुस्कुराते हुए कहा|

"इतनी मेहनत की है आपने Mam की उसे waste करना ठीक नहीं| इस प्रोजेक्ट के बाद मैं कोई और ऑप्शन ढूँढता हूँ|" मैंने मैडम की बात का मान रखते हुए कहा|

"अच्छा एक बात बताओ, अगर मैंने अपनी अलग कंपनी शुरू की तो मुझे ज्वाइन करोगे?" मैडम ने उत्सुकता वश पूछा|

"बिलकुल Mam ये भी कोई कहने की बात है?! कम से कम आप सैलरी तो अच्छी दोगे!" मैंने हँसते हुए कहा और मैडम ये सुन कर हँस दी| शाम को मैं निकलने वाला था की ऋतू का फ़ोन आया; "जानू! अब भी नाराज हो?" ऋतू ने तुतलाते हुए पूछा| मुझे उसके इस बचपने पर हँसी आ गई| "नहीं" बस इतना बोला की मैडम मुझे आती हुई दिखाई दी| मैंने ऋतू को कहा की बाद में बात करता हूँ और फ़ोन काट दिया| "मानु जी! मुझे Market ड्राप कर दोगे?" मैं फिर से हैरान था और मेरी हैरानी भांपते हुए मैडम बोली; "आपके बॉस गाडी ले गए!" अब ये सुन कर मुझे थोड़ा इत्मीनान हुआ और मैडम मेरे पीछे एक तरफ दोनों पैर रख कर बैठ गईं|

अनु मैडम: वैसे मानु जी आप बुरा न मानो तो एक बात कहूँ?

मैं: जी Mam कहिये|

अनु मैडम: आप इतना डरते क्यों हो?

मैं: डरता हूँ? मैं कुछ समझा नहीं mam?

अनु मैडम: अभी मैंने आप से लिफ्ट मांगी तो आप हैरान थे? कल भी जब मैंने आपको बर्थडे विश किया तब भी, डांस करने के समय भी! आपके बॉस से भी जब मैंने कंप्लेंट की कि उन्होंने क्यों आपको आज बुलाया जब कि मैंने आपको छुट्टी दी है तब भी आप बहुत हैरान थे! दोस्ती में तो ये सब चलता है ना?

मैं: Mam आप विश्वास नहीं करेंगे पर पिछले कुछ महीनों से मेरे साथ जो कुछ हो रहा है वो मेरे साथ कभी नहीं हुआ| बचपन से मैं बहुत सीधा-साधा लड़का था....

अनु मैडम: (मेरी बात काटते हुए) वो तो अब भी हो|

मैं: शायद! Anyway मेरे दोस्त सब लड़के ही रहे हैं और लड़कियों से मेरी फ़ट.... I mean डर लगता था| फिर आप मेरे गाँव कि हिस्ट्री तो जानते ही हैं, अब ऐसे में मैंने कभी किसी लड़की से सिवाय किसी काम ...I mean work related बात ही की है| मुझे डर इसलिए लगता है की सर आपकी और मेरी दोस्ती को कभी नहीं समझ सकते| हम रहते ही ऐसे समाज में हैं जहाँ एक लड़का और एक लड़की दोस्त नहीं हो सकते| तो ऐसे में आपका मेरी साइड लेना किसी को सही नहीं लगेगा|

अनु मैडम: तो इसका मतलब हमें सिर्फ वही करना चाहिए जो सब को अच्छा लगे? अपनी ख़ुशी के लिए कुछ भी नहीं?

मैं: मैडम प्लीज मुझे गलत मत समझिये, But I fear for you! I don't want to cause any troubles in your married life.

अनु मैडम: I understand! And that's very sweet of you! But I assure you, you're not the reason ... anyway... ummm.. Let's have some पानी के बताशे!

मैंने बाइक एक चाट वाले के पास रोकी और मैडम और मैंने compete करते हुए पानी के बताशे खाये| विनर मैडम ही निकलीं और हारने की सजा मैडम ने ये रखी की इस संडे को मैं उन्हें 'टुंडे कबाबी' खिलाऊँ| इस तरह हँसते हुए मैं उन्हें बाजार छोड़ कर घर निकल गया| घर पहुँचते ही ऋतू का फ़ोन आया और उसने पूछा; "पानी के बताशे कैसे लगे?"
 
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मैंने बाइक एक चाट वाले के पास रोकी और मैडम और मैंने compete करते हुए पानी के बताशे खाये| विनर मैडम ही निकलीं और हारने की सजा मैडम ने ये रखी की इस संडे को मैं उन्हें 'टुंडे कबाबी' खिलाऊँ| इस तरह हँसते हुए मैं उन्हें बाजार छोड़ कर घर निकल गया| घर पहुँचते ही ऋतू का फ़ोन आया और उसने पूछा; "पानी के बताशे कैसे लगे?"


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ये सुन कर मैं हैरान तू हुआ पर मैंने जवाब ऐसा दिया की ऋतू और चिढ जाए| "लाजवाब थे! इतना स्वाद तो मुझे आज तक कभी आया ही नहीं!" मेरी ये डबल मीनिंग वाली बात ऋतू समझ गई| "जानूउउ उउउउउउउउउउउउ!!! मैं आप पर शक़ नहीं कर रही! मैं आप पर खुद से ज्यादा भरोसा करती हूँ| दरअसल काम्य ने आपको मार्किट में बताशे खाते हुए देखा और मुझे फोन कर के चढाने लगी की तेरा 'बंदा' यहाँ किसी और लड़की के साथ बताशे खा रहा है!" ऋतू के मुँह से 'बंदा' शब्द सुन कर मुझे बहुत जोर से हँसी आ गई| "क्या हुआ? हँस क्यों रहे हो?" ऋतू ने थोड़ा हैरान हो कर पूछा| "मैं तुम्हारा 'बंदा' हूँ?" मैंने ऋतू को छेड़ते हुए पूछा| "वो कॉलेज में बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड को बंदा-बंदी कहते हैं|"

"जानता हूँ! मैं भी उसी कॉलेज में पढ़ा हूँ!" मैंने हँसते हुए कहा|

"हाँ...तो ... वो मुझे चढाने लगी की आप किसी और को घुमा रहे हो! तो ये सुन कर पहले तो मुझे बड़ी हँसी आई फिर मैंने उसे डाँट दिया ये कह कर की मैं अपने प्यार पर पूरा भरोसा करती हूँ| वो मुझे कभी धोका नहीं दे सकते! तू चुप-चाप अपना काम कर! इतना कह कर मैंने फ़ोन रख दिया|"

"अच्छा जी? बहुत भरोसा करते हो मुझ पर?"

"हाँ जी! इतने दिन आपके साथ ऑफिस में काम कर के देख लिया की कैसे आप खुद को सँभालते हो| आजतक आपने कभी राखी या अनु मैडम से कोई गलत तरह की बात नहीं की| हमेशा उनसे अदब से बात करते हो, कल भी पार्टी में आप नशे में थे तब भी आप खुद को संभाले हुए थे| ये आपका मेरे लिए प्यार नहीं तो क्या है? आजतक कभी मुझे राखी ने नहीं कहा की आपने कभी उसे किसी गलत नजर से देखा हो या उस से कोई अभद्र बात कही हो| एक बार आप पर शक़ करने की गलती कर चुकी हूँ पर अब चाहे भगवान् भी आ कर मुझे कह दें की आपने किसी लड़की के साथ कुछ गलत किया है तो भी मैं नहीं मानूँगी|" ऋतू की बात सुन कर मैं समझ गया था की ऋतू राखी के जरिये मेरा बैकग्राउंड चेक करवा रही थी, ठीक है भाई कर लो जितनी चेकिंग करनी हो आपने!

खेर इस तरह वो दिन सिर्फ बात करते हुए निकला| हम मिलते तो रोज थे पर सिर्फ बातें ही होती थीं ना तो ऋतू मुझे छूने की कोशिश लारती और न ही मैं उसे छूता था| मैंने ये सोच कर ही संतोष कर लिया की शादी के बाद ऋतू को सेक्स की अच्छी से 'कोचिंग' दूँगा, उसे सब सिखाऊँगा की कैसे अपने पार्टनर को खुश किया जाता है| दिन गुजरते गए और आखिर वो दिन आ गया जब राखी कि शादी थी| शाम को हम सब को जाने का न्योता था और मैंने ऋतू को लेने और छोड़ने की जिम्मेदारी ली| अब पहले तो उसे लेहंगा-चोली खरीदवाया और अपने लिए मैंने बस एक ब्लैज़र लिया| हॉस्टल वाली आंटी जी ने ऋतू को थोड़ी ज्यादा छूट दे रखी थी, उसका कारन ये था की ऋतू हॉस्टल में सिर्फ और सिर्फ अपने काम से काम रखती थी और पढ़ाई में मन लगाती थी| कुछ उन्हें मेरा भी ख़याल था इसलिए ऋतू ने जब कहा की वो लेट आएगी तो आंटी जी ने मना नहीं किया| उसके हॉस्टल की लड़की ऋतू से बहुत जलती थी की इतने कम समय में वो आंटी जी की चहेती बन गई| ऋतू को पिक करने के लिए मैं थोड़ा जल्दी निकला और उसे चौक पर बुला लिया| मैं पहले से ही वहाँ उसका इंतजार कर रहा था| जैसे ही मेरी नजर ऋतू पर पड़ी मैं उसे बस देखता ही रह गया!




वहाँ पर जो कोई भी खड़ा था वो बस ऋतू को ही ताड़े जा रहा था| "क्या देख रहे हो आप?" ऋतू ने शर्माते हुए पूछा| "हाय! आज तो क़हर ढा रही हो! दुल्हन से ज्यादा तो लोग तुम्हें ही देखेंगे!" मेरी बात सुन कर ऋतू के गाल शर्म से लाल हो गए और वो आ कर पीछे बैठ गई और बोली; "आप तैयार क्यों नहीं हुए? ऐसे ही जाने वाले हो क्या?" मैंने सोचा थोड़ा मजाक कर लेता हूँ तो मैंने कह दिया की; "हाँ मैं ऐसे ही जाऊँगा, सैलरी नहीं बची इसलिए अपने लिए कुछ नहीं खरीदा|"

"पर आपने तो कहा था की आपने ब्लैज़र लिया है?" ऋतू ने चौंकते हुए कहा|

"झूठ बोला था वरना तुम लेहंगा-चोली नहीं लेती|" अब ये सुन कर ऋतू को बहुत गुस्सा आया| "गाडी रोका! मुझे नहीं जाना कहीं! वापस छोड़ दो मुझे हॉस्टल!"

"अरे बाबू शांत हो जाओ, मैं मज़ाक कर रहा था| हम अभी घर जा रहे हैं वहाँ मैं चेंज करूँगा तब निकलेंगे|" मैंने ऋतू को प्यार से समझाया| घर पहुँच कर ऋतू ने अपने लहंगे को थोड़ा नीचे बाँधा जिससे उसका नैवेल दिखने लगा| छरहरा बदन पर उसका अपना ये नैवेल दिखाना आज नजाने कितनो की जान लेने वाला था| अब मैं सबसे पहले नहाने गया, नहा के बहार सिर्फ कच्छे में आया और अलमारी से अपनी शर्ट निकाली| मुझे ऐसे देख कर ऋतू ने अपनी ऊँगली दाँतों तले दबा ली और सिसक कर रह गई| मैंने सोचा की अभी जाने में बहुत समय है तो अभी से क्या कपडे पहनने पर ऋतू जिद्द करने लगी की मुझे अभी पहन के दिखाओ| अब उसकी बात मानते हुए मैंने वाइट शर्ट, पैंट, ब्लैज़र और लोफ़र्स पहन के उसे दिखाया|




मुझे पूरा तैयार देख कर ऋतू की आँखें फ़ैल गईं; "जानू! मानना पड़ेगा की आप की पसंद कपड़ों के मामले में बहुत बढ़िया है| I'm so lucky to have you as my husband!"

"Really??? Well thank you mademoiselle!" मेरी बात सुन कर ऋतू शर्मा गई और आ कर मेरे सीने से लग गई| "एक बात कहूँ जानू?" ऋतू ने मेरे सीने से लगे हुए ही कहा, जवाब में मैंने बस; "हम्म" कहा|

"आज हम दोनों कहीं कैंडल लाइट डिनर करने चलें? उसके बाद शादी में चले जायेंगे|" ऋतू मेरे आँखों में देखते हुए कहा| अब भला मैं अपने प्यार को कैसे मना करता| मैंने फटाफट कैब बुक की और ऋतू को मैं 'Oudhyana- Vivanta By Taj' ले आया| ये लखनऊ का सब से बड़ा 5 स्टार रेस्टुरेंट है, वहाँ की चमक देख कर ऋतू की आँखें जगमगा उठीं| मेरे कॉलेज के दिनों में मैं यहाँ से कई बार गुजरा था और यही सोचता था की शादी होगी तब यहाँ जर्रूर आऊँगा| एक वेटर हमें हमारे टेबल तक ले जाने को आया| मैं और ऋतू किसी प्रेमी जोड़े की तरह बाँहों में बाहें डाले चल रहे थे| टेबल पर पहुँच कर मैंने ऋतू की कुर्सी खींची और फिर उसे बिठाया और फिर मैं उसके ठीक सामने बैठ गया| खुला गर्डन था और वहाँ बहुत सारे टेबल लगे हुए थे, हमारी तरह वहाँ कुछ प्रेमी जोड़े थे और बाकी सब foreigners और कुछ अमीर आदमी आये थे| ऋतू आज पहली बार इतनी महंगी जगह आई थी और उसकी आँखें वहाँ की चकाचौंध में खो गईं और वो सब कुछ देखने लगी| वेटर मेनू ले कर आया पर ऋतू की आँखें तो अब भी वहाँ के नज़ारे देखने में लगी थी| धीमी-धीमी आवाज में वहाँ म्यूजिक गूँज रहा था, मैंने ऋतू का हाथ पकड़ा तो उसकी आँखें भर आईं थी| मैं उठ कर खड़ा हुआ और उसे अपने सीने से लगा लिया|
 
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"t ... thank you !!!!" ऋतू ने रोते-रोते कहा| "But baby why are you crying?" मैंने उससे पूछा तो ऋतू ने अपने आँसूँ पोछे और बोली; "मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की मैं कभी ऐसी जगह आ पाऊँगी| ऐसी जगह जहाँ के Main Gate के अंदर घुसने की भी मेरी औकात नहीं है, वहाँ आप मुझे डिनर के लिए लेके आये हो! Thank You!"

"मेरी जानेमन इससे भी कई ज्यादा कीमती है!"



अगले ही पल मैंने अपनी दायीं टाँग मोड़ी और घुटने को जमीन से टिकाया, बायीं बस मोड़ी और ऋतू का बयां हाथ अपने बाएं हाथ में लेते हुए उससे पूछा; " मैंने तुम पर बहुत बार चीखा हूँ, चिल्लाया हूँ यहाँ तक की तुम पर हाथ भी उठाया है पर ये सच है की मैं प्यार सिर्फ और सिर्फ तुम्हीं से करता हूँ| उस दिन जब मैंने तुम्हें पहलीबार दिल से गले लगाया था उसी दिन मैंने तुम्हें अपना दिल दे दिया था| मैं वादा करता हूँ की तुम्हें जिंदगी भर खुश रखूँगा, तुम्हें कभी कोई तकलीफ नहीं दूँगा, तुम्हें पलकों पर बिठा कर रखूँगा| (एक लम्बी साँस लेते हुए) Will you marry me???" ये सुन कर ऋतू की आँखें छलक आईं और उसने हाँ में गर्दन हिलाई और बैठे-बैठे ही मेरे गले लग गई| वहाँ मौजूद सभी लोगों ने तालियाँ बजाई और तब जा कर हम दोनों को होश आया की हम दोनों बाहर आये हैं| ऋतू ने शर्म के मारे अपना मुँह दोनों हाथों से छुपा लिया| तभी वहाँ एक अंकल आये और मुझसे बोले; "Come on man let's put a ring on her!"
"But I don't have any ring with me! I didn't plan this far!" मैंने उन्हें बताया तो उन्होंने फ़ौरन वेटर को बुलाया और उसके कान में कुछ खुसफुसाये| उसके बाद ऋतू से बोले; "May the love you share today grow stronger as you grow old together." इतने में वही वेटर वापस आ गया और उसने उन्हें एक छोटी सी डिब्बी दी जिसमें एक वाइट सिल्वर की वेडिंग रिंग थी! उन्होंने मुझे वो डिब्बी दे दी और ऋतू को पहनाने को कहा| मैं और ऋतू हैरानी से उन्हें देखने लगे; "A gift for the beautiful couple." उन्होंने कहा|
"Sorry sir, but I can't take this!" मैंने उन्हें मना किया| "Oh comeon dear! Its just a small gift! Take it!" उन्होंने जबरदस्ती करते हुए वो डिब्बी मेरे हाथ में पकड़ा दी| "No..No..Sir. I'll pay you for this!" वो मुस्कुराने लगे और अपनी जेब में से एक कार्ड निकाला और मुझे दे दिया; "ये लो...जब टाइम हो तब आ कर पैसे दे जाना पर अभी तो ये Moment ख़राब मत करो|" मैंने उनके हाथ से कार्ड ले कर रख लिया और वापस प्रोपोज़ करने का पोज़ बनाया और ऋतू से पूछा; "Will you marry me?" ऋतू ने शर्मा कर हाँ कहा और फिर मैंने उसे वो रिंग पहना दी और ऋतू कस कर मेरे सीने से लग गई| मैंने उसके सर को चूमा और पूरा गार्डन तालियों से गूँज उठा| ौंसले ने फिर से हमें आशीर्वाद दिया और वापस अपने टेबल पर अपने दोस्तों के साथ बैठ कर शराब एन्जॉय करने लगे| ऋतू बहुत खुश थी और उसकी ये ख़ुशी देख कर मैं भी बहुत खुश था| हमने खाना खाया और फिर मैं उन अंकल को दुबारा Thank You बोल कर निकल आया| अब बारी थी राखी की शादी अटेंड करने की, कैब बुक की और उसके आने तक ऋतू मुझसे चिपकी खड़ी रही| कैब में जब हम बैठे तो ऋतू मेरे बाएं कंधे पर सर रख कर बैठ गई और उसी रिंग को देखे जा रही थी| "अब इसे उतार दो, वरना सब पूछेंगे की किसने दी?" मेरी बात सुन कर ऋतू जैसे अपनी ख्यालों की दुनिया से बाहर आई| "ना! मैंने नहीं उतारने वाली!" उसने मुँह बनाते हुए कहा| "तो सब से क्या कहोगी?" मैंने पूछा| "कह दूँगी मेरे लवर ने दी है|" ये कह कर वो मुस्कुराने लगी| "और जब उस लड़के का नाम पूछेंगे तब?"

"वो सब मैं देख लूँगी! आप उसकी चिंता मत करो|" इतना कह कर ऋतू फिर से उसी रिंग को देखने लगी| मैंने भी सोचा की अपने आप संभालेगी, मैं तो कुछ कह भी नहीं सकता और रायता फैलना है तो फ़ैल ही जाए! जो होगा देख लूँगा! ये सोच कर मैं भी इत्मीनान से बैठ गया| बैंक्वेट हॉल आने लगा तो मैंने ऋतू से कहा की वो अपना मेक-अप ठीक कर ले, फिर हम दोनों जब कैब से उतरे तो ऋतू ने फिर से मेरी बाहों में बाहें डाल ली| हम दोनों कपल लग रहे थे और ये अभी के लिए थोड़ा ज्यादा था| मैंने ऋतू के कान में खुसफुसाते हुए कहा; "जान! यहाँ बॉस भी आएंगे तो थोड़ा सा डिस्टेंस मेन्टेन करो|" ये सुन कर ऋतू ने नकली गुस्सा दिखाया और मेरा हाथ छोड़ दिया| अभी अंदर घुसे भी नहीं थे की मुझे मेरे ऑफिस के colleagues मिल गए और बेशर्मों की तरह ऋतू को घूरे जा रहे थे| "बॉस और अनु mam आगये?" मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने बताया की वो अंदर हैं इसलिए मैंने ऋतू को अंदर जाने को कहा| पर उसका मन अंदर जाने को कतई नहीं था| मैंने उसे आँखों से इशारा कर के समझाया की ये लोग मुझे छोड़ने वाले नहीं हैं, तब जा कर ऋतू मानी| उसके जाते ही सब मेरे ऊपर टूट पड़े, "साले कैसे फँसा लिया तूने?" मैं उनकी सारी बातें बस टालता रहा ये कह की मैंने ऐसा कुछ नहीं किया बस कैब शेयर की थी हमने| पर कमीने तो कमीने ही होते हैं, मैं किसी तरह से उनसे बच के अंदर आ गया| अंदर आ कर देखा तो एक टेबल पर सर, अनु मैडम और ऋतू बैठे हुए बात कर रहे थे| मुझे देखते ही सर बोल उठे; "तुम दोनों साथ आये हो फिर आगे-पीछे क्यों एंटर हुए? हम क्या बेवक़ूफ़ बैठे हैं यहाँ?"

"सर वो बाहर शुक्ल जी मिल गए थे उन्होंने रोक लिया| वैसे साथ आने में कैसे शर्म?" इतना कह कर मैं वहीँ बैठ गया पर मन ही मन ऋतू को कोसने लगा की उसे कोई और जगह नहीं मिली बैठने को?! इधर सर उठ कर कुछ खाने के लिए गए और अनु मैडम को मेरी तारीफ करने का मौका मिल गया; "मानु जी! आज तो बहुत हैंडसम लग रहे हो!"

"Thank you mam!" मैंने शर्माते हुए कहा| "आपको तो रोज ऐसे ही रेडी हो कर ऑफिस आना चाहिए|" ऋतू ने मज़ाक करते हुए कहा|

"हाय!! फिर हम दोनों (अनु मैडम और ऋतू) काम कैसे करेंगे?" अनु मैडम ने ठंडी आह भरते हुए कहा| ये सुन कर हम तीनों हँस पड़े, इतने में सर कुछ खाने को ले आये और सीधा ऋतू को ऑफर कर दिया| ये देख कर मैं थोड़ा हैरान हुआ पर फिर मैं समझ गया की आज ऋतू लग ही इतनी सुन्दर रही है की हर एक की नजर सिर्फ उसी पर है| मैं अपने लिए कुछ खाने के लिए लेने को उठा तो मेरे पीछे-पीछे अनु मैडम भी उठ गईं| जब मैंने मैडम को ढंग से सजा-सांवरा देखा तो मैंने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा; "वैसे mam you're looking fabulous today! ये सुन कर मैडम भी शर्मा गईं और बोलीं; "उतनी सुंदर तो नहीं जितनी आज रितिका लग रही है| उसका लेहंगा तुम ने ही सेलेक्ट किया था ना?" मैंने बिलकुल अनजान बनते हुए कहा; "नहीं तो mam!" मैडम ने शायद मेरी बात मान ली या फिर उन्होंने जानबूझ कर उस बात को और ज्यादा नहीं कुरेदा|

खेर मैं और मैडम खाने-पीने की सभी चीजों का मुआइना कर रहे थे, की तभी उनकी नजर मसाला डोसे पर गई और वो मुझे खींच कर वहाँ ले गईं| मैं एक्स्ट्रा बटर डलवा कर उनके लिए डोसा बनवाया और अपने लिए मैं आलू-चीज पफ ले आया| जब मैंने उन्हें ऑफर किया तो उन्होंने एक पीस खाया और बोलीं; "मानु जी आपकी पसंद का जवाब नहीं! हर चीज में आपकी पसंद awesome है!" मैंने बस उन्हें Thank You कहा और फिर उनके डोसा खत्म होने के बाद वापस आ कर बैठ गए| चूँकि हमें आने में थोड़ा समय लगा था तो सर पूछने लगे; "कहाँ रूक गए थे तुम दोनों?" मेरे कुछ बोलने से पहले ही मैडम बोल पड़ीं; "डोसा खा रहे थे!" अब ये सुन कर सर चुप हो गए| खेर दूल्हे की बारात आई और तभी खाना खुल गया और सभी लोग लाइन में लग गए| सर सबसे पहले और उनके पीछे अनु मैडम, फिर मैं और मेरे पीछे ऋतू| आज पहली बार ऋतू इतनी बड़ी और महंगी शादी में आई थी और खाने के लिए जो चीजें रखी थीं वो उसके नई थी, उसने वो कभी चखी भी नहीं थी| ऋतू ने कहा की उसे दाल-चावल खाने हैं तो मैंने उसे हँसते हुए समझाया की वो सब यहाँ नहीं मिलता| मैंने उसे पहले दाल महारानी, पनीर लबाबदार और 2 रोटी दिलवाई और मैंने अपने लिए चिकन और नान लिया| हम वापस बैठ कर खा रहे थे, मैडम ने भी चिकन लिया था और सर ने वेज लिया था| "तुम सारे नॉन-वेज यहाँ बैठो मैं और रितिका कहीं और बैठेंगे|" अब ये सुन कर मुझे बुरा लगा क्योंकि मैं नहीं चाहता था की ऋतू कहीं और जाए| इसका जवाब खुद ऋतू ने ही दिया; "पर सर सारे टेबल फुल हैं! " ये सुन कर मैडम के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई पर उन्होंने जैसे-तैसे अपनी हँसी छुपाई| अब मैडम ने मुझे इशारा किया और मैं उनका सिहारा समझ गया| हम दोनों ने एक-एक लेग पीस उठाया और जंगलियों की तरह खाने लगे| हमें ऐसा करते हुए देख सर मुँह बिदकाने लगे और बोले; "ढंग से खाओ! ये क्या जंगलियों की तरह खा रहे हो?" इतना कह कर वो उठ के चले गए और इधर मैं, मैडम और ऋतू हँसने लगे| मैडम की नजर आखिर रिंग पर चली गई और उन्होंने ऋतू से पूछ लिया; "रितिका ये रिंग आपको किसने दी?" अब ये सुनते ही मैंने अपनी आँखें फेर ली और ऐसे दिखाया जैसे मैंने सुना ही ना हो| "वो mam ......" इसके आगे वो कुछ नहीं बोली और शर्माने लगी| "अच्छा जी! उसने तुम्हें प्रोपोज़ कर दिया? और तुमने हाँ भी कर दी?" मैडम ने थोड़ा जोर से बोला ताकि मैं भी उनकी बात सुन लूँ| "प्रोपोज़? किसने किसे किया?" मैंने जान बुझ कर ऐसे जताया जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं| "मानु जी! आपका पत्ता तो कट गया!" मैडम ने मेरे मज़े लेते हुए कहा| मैं जान बुझ कर जोर से हँसा ताकि उन्हें ये इत्मीनान हो जाए की मेरे और ऋतू के बीच में कुछ नहीं चल रहा|

खाने के बाद आखिर दुल्हन का आगमन हुआ, दुल्हन के जोड़े में राखी बहुत ही प्यारी लग रही थी| फिर शुरू हुआ नाच गाने का मौका और डी.जे ने एक के बाद एक गाना बजा कर माहौल में जान डाल डी| मैडम ने सर से नाचने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया| मैं उठ के खड़ा हुआ और ऋतू और मैडम को अपन साथ जबरदस्ती डांस के लिए ले गया और हम तीनों ने बड़े जोर-शोरों से नाचा| सर से हमारी ये ख़ुशी देखि नहीं गई और उन्होंने हमें इशारे से हमें वापस बुलाया और कहा की अब हमें चलना चाहिए| निकलने से पहले हमें शगुन तो देना था इसलिए हम सारे स्टेज के ऊपर चढ़ गए| दूल्हे से मैंने हाथ मिलाया और फिर राखी से मैंने हाथ जोड़ कर नमस्ते की पर वो हमेशा की तरह ही मुझसे गले लग गई| उसके पति को थोड़ा अटपटा सा लगा पर उसने कहा कुछ नहीं| इधर राखी ने खुद ही माहौल को हल्का करने के लिए कहा; "मानु जी इतने हैंडसम लग रहे हो की मैं तो सोच रही हूँ की दूल्हा चेंज कर लूँ|" ये सुन कर सारे हँस दिए और इधर राखी का दूल्हा भी राखी के मज़े लेने लगा और बोला; "सही है! तू अपने मानु जी से शादी कर ले और मैं उनकी गर्लफ्रेंड से!" ये सुन कर मैं और ऋतू दोनों एक दूसरे को देखने लगे और बाकी सब हँसने लगे| मैं और ऋतू ये सोच रहे थे की ये हरामखोर अपनी शादी छोड़ कर हमारे पीछे पड़े हैं!

खेर शगुन दे कर, और फोटो खिचवा के हम जाने लगे तो राखी ने सब को रोक दिया और सर से बोली; "सर अभी तो 12 ही बजे हैं! प्लीज थोड़ी देर और रुक जाइये!" उसका दूल्हा भी बोल पड़ा; "सर अभी तो ड्रिंक्स भी चालु नहीं हुई हैं!" अब फ्री की ड्रिंक्स और मेरे सर उसे छोड़ दें, ऐसा तो हो ही नहीं सकता|
 
update 32

ड्रिंक्स का राउंड शुरू हुआ पर ना तो ऋतू ने पी और न ही मैडम ने| मैं भी नहीं पीना चाहता था पर हमारे ऑफिस के सारे male colleagues आ कर बैठ गए| शुक्ल जी बोले; "अरे भाई मानु ऑफिस में तो तुम्हारा ग्रुप दूसरा सही पर यहाँ तो हमारे साथ शामिल हो जाओ|" अब उनकी बात सुन कर मुझे मजबूरन उनके साथ बैठना पड़ा और इधर सर ने व्हिस्की आर्डर कर दी| वेटर 5 गिलास व्हिस्की के लार्ज वाले ले आया| लार्ज पेग देख कर ऋतू हैरान हो गई और मन ही मन डरने लगी की पता नहीं आज क्या होगा| पर वो लार्ज पेग पीने के बाद मेरा सिस्टम उतना नहीं हिला जितना की आमतौर पर लोगों का हिल जाता था| सिद्धार्थ (मेरा colleague) का तो एक पेग में ही बंटाधार हो गया और उसने साफ़ मना कर दिया|

शुक्ल जी, मैं, अरुण (मेरा colleague) और सर अब भी टिके हुए थे| हम चारों पर ही जैसे असर नहीं हुआ था, शुक्ल जी ने वेटर को बुलाया और उसे देसी लाने को कहा| वेटर ने साफ़ मना कर दिया की उनके पास देसी नहीं है| "बेटा हमें इन महंगी शराबों से नहीं चढ़ती, हमें तो देसी चाहिए| तू ये ले पैसे, एक बोतल ले आ और बाकी पैसे तू रख ले|" शुक्ल जी का ये बर्ताव देख कर मैडम और ऋतू का मुँह बन गया पर सर उनकी तारीफ करने लगे| "सॉरी! शुक्ल जी मैं अब और नहीं पीयूँगा|" मैंने कहा पर शुक्ल जी तो आज फुल मूड में थे| "अरे भाई! क्या तुम एक देसी से घबरा गए? मर्द बनो!" शुक्ल जी की बात सुन कर ऋतू और अनु मैडम मेरे बचाव में एक साथ कूद पड़े| "शराब पीने से कब से मर्दानगी आने लगी?" मैडम ने कहा| "रहने दीजिये न सर फिर घर भी तो जाना है|" ऋतू बोली पर तभी सर बोल पड़े; "अरे भाई! कौन सा रोज-रोज पीते हैं| आज इतना अच्छा दिन है और रही बात घर छोड़ने की तो मैं छोड़ दूँगा|" अब मैं अगर पीने से पीछे हट जाता तो शुक्ल जी और बाकी के सभी लोग मुझे जिंदगी भर मैडम और ऋतू के नाम से छेड़ते रहते इसलिए मैं भी कूद पड़ा; "चलो देखते है शुक्ल जी आपकी देसी कितनी दमदार है|" ये सुन कर तो शुक्ल जी हैरान हो गए, आखिर देसी आई और मैंने जान-बुझ कर लार्ज पेग बनाये| मैं समझ गया था की ये सब शुक्ल जी का ही प्लान है ताकि मैं पी कर लुढक़ जाऊँ और वो मुझे उम्र भर इस बात का ताना देते रहे| पर वो नहीं जानते थे की मानु का कोटा बहुत बड़ा है! देसी के पहले पेग के बाद ही अरुण और सर ने हाथ खड़े कर दिए और अब बस मैं और शुक्ल जी ही बचे थे| बाकी बची आधी बोतल को मैंने बराबर-बराबर दोनों के गिलास में डाल दिया| "ऋतू ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर मुझे रोकना चाहा पर मुझपर तो शराब का सुरूर छाने लगा था| मैंने ऋतू की तरफ देखा और ऐसे दिखाया जैसे मैं अभी भी पूरे होश में हूँ| इधर डी.जे. ने भी हमारा ये कॉम्पिटिशन होते हुए देख लिया और उसने गाना लगा दिया; दारु बदनाम कर दी! अब ये सुनते ही शुक्ल जी फुल जोश में आ गए और खड़े हो गए और बाकी बची पूरी दारु एक साँस में पी गए|

ये देख कर दूल्हा-दुल्हन और बाकी सब वहीँ आ गए की यहाँ कौन सी प्रतियोगिता हो रही है! सारे के सारे हमें घेर कर खड़े हो गए पर ये क्या शुक्ल जी तो 5 मिनट बाद ही ढेर हो गए! अब बचा सिर्फ मैं, मैंने भी जोश में आते हुए पूरी की पूरी दारु एक साँस में गटक ली! सब के सब ये सोचने लगे की मैं अब गिरा..अब गिरा...पर मैं टिका रहा| गाने की आवाज और तेज हो गई और डी.जे. माइक पर जोर से चिल्लाया; "Give a big hand for this gentleman!" सारे तालियाँ बजाने लगे और मैंने भी सर झुका कर सबका अभिवादन स्वीकार किया| उस समय मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे कोई अवार्ड मिल रहा हो! पर ठीक तभी मेरे बॉस ने एक चाल चली, उन्होंने डी.जे. से माइक लिया और मेरे पास ले कर आ गए और बोले; "मानु आज तो इस मौके पर तुम्हारी शायरी बनती है|" शायरी का नाम सुनते ही सब ने शोर मचाना शुरू कर दिया| राखी ने भी बड़े प्यार से रिक्वेस्ट की और सर ने इसी का फायदा उठाते हुए मुझ पर और दबाव डाल दिया; "भाई अब तो दुल्हन ने भी रिक्वेस्ट कर डी| अब तो सुना दो, कम से कम उसका दिल तो मत तोड़ो|" अब मेरी हालत ऐसी थी की शराब दिमाग पर चढ़ चुकी थी, मैं ये तो जानता था की मैं कहाँ हूँ पर क्या शेर बोलना है उस पर मेरा काबू नहीं था| अब दिल और जुबान के तार एक साथ जुड़ गए और मैंने अपनी आँख बंद की और और बोला;

हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में,

ज़रूरी बात कहनी हो कोई वादा निभाना हो,

उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो,

हमेशा देर कर देता हूँ मैं,

मदद करनी हो उस की यार की ढांढस बंधाना हो,

बहुत देरीना रास्तों पर किसी से मिलने जाना हो,

हमेशा देर कर देता हूँ मैं,

बदलते मौसमों की सैर में दिल को लगाना हो,

किसी को याद रखना हो किसी को भूल जाना हो,

हमेशा देर कर देता हूँ मैं,

किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो,

हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो,

हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में.....

ये गजल किस के लिए थी वो सब समझ चुके थे और माहौल को हल्का करते हुए राखी का दूल्हा बोला; "मानु जी! वैसे अभी देर नहीं हुई है!" मैं बस मुस्कुरा दिया और मैं जा कर उसके गले लगा और उसे बोला; 'You're a lucky guy, she's a keeper! Best wishes from me and wish you a very happy married life!" मैंने उसे दिल से बधाई दी और माहौल हल्का हो गया| दूल्हा-दुल्हन के माँ-बाप को ये बाद जर्रूर लगी होगी इसलिए मैंने बस हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी और मैं निकल आया| मेरे पीछे-पीछे ही सर मैडम और ऋतू भी आ गए| मैंने कैब बुला ली थी और सर और मैडम तो अपनी कार से ही जाने वाले थे| मैंने उन्हें good night बोला और हम दोनों चल दिए| कैब में बैठ कर हम दोनों खामोश थे, अब मुझे अपनी सफाई देनी थी पर जब दिमाग और जुबान का कनेक्शन टूट चूका था तो अब सिर्फ सच ही बाहर आना था| "ऋतू...तुझे कुछ कहना नहीं है?" मैंने ऋतू से बात शुरू करते हुए पूछा| "कहना नहीं पूछना है|" ऋतू ने मेरी तरफ मुँह करते हुए कहा और फिर अपने दोनों हाथों से मेरे चेहरे को थाम लिया| नशे के कारन मेरी आँखें थोड़ी बंद होने लगी थी पर ऋतू ने मुझे थोड़ा झिंझोड़ा और मैं कुछ होश में आया| "आप अब भी उससे प्यार करते हो?" ऋतू ने मुझसे पूछा पर आज जो भी जवाब आना था वो दिल से ही आना था| "नहीं! मैं....बस....तुमसे...प्यार करता हूँ|" मैंने जवाब दिया और मेरा जवाब सुन कर ऋतू कस कर मेरे सीने से लग गई| मैंने भी आँखें बंद कर लीं और दिल को इत्मीनान हो गया की ऋतू और मेरे बीच में अब कोई भी गलतफैमी नहीं बची| कुछ देर ऐसे ही मेरे सीने से लगे हुए रहने के बाद ऋतू ने पूछा; "सर को सब पता था ना?" पर मैं तो जैसे सो ने लगा था पर ऋतू ने फिर मुझे नींद से उठाते हुए झिंझोड़ा और तब मेरे मुँह से टूटे-फूटे शब्द निकलने लगे; "मैंने....कभी...उन्हें नहीं....बताया|" पर ऋतू को तो अब सारी बात सुननी थी| ऋतू ने अपने पर्स से एक सेंटर शॉक निकाली और मेरे मुँह में डाल दी| दाँतों तले जैसे ही मैंने उस च्युइंग गम का दबाया की खटास के झटके से मेरी आँख खुल गई| मैंने अजीब सा मुँह बनाते हुए ऋतू को देखा, ठीक वैसा ही मुँह जैसे की आप किसी नन्हे से बच्चे को नीम्बू चटा दो| ऋतू खिलखिला कर हँस दी और फिर बोली; "अब बताओ, सर को पता था की आप राखी से प्यार करते थे?"

मैंने कभी उन्हें इस बारे में नहीं बताया, बल्कि उन्हें क्या किसी को नहीं बताया| जब मैंने ऑफिस ज्वाइन किया था तो मेरे आने से कुछ महीने पहले ही राखी ने ज्वाइन किया था| हम दोनों के बीच में कभी कोई बात नहीं हुई, जो भी बात हुई वो काम से रिलेटेड थी| अब चूँकि मैं नया जोइनी था और थोड़ा नौसिखिया तो सर ने मुझे और राखी को एक साथ एक कंपनी का डाटा दे दिया| लंच ब्रेक में भी हम दोनों साथ ही बैठे होते पर बातें बहुत कम ही होती| चाय पीने के समय मैं अकेला ही जाता और एक दिन राखी ने मुझे सिगरेट पीते हुए देख लिया और तब से हमारी थोड़ी बहुत बात शुरू हुई| बातें बड़ी साधारण ही होती, थोड़ी बहुत कॉलेज की बातें बस! अब ऑफिस के सारे मेल एम्प्लाइज को तो तुम जानती हो उन हरामियों ने हम दोनों के बारे में बातें करना शुरू कर दिया| शायद सर ने सुन लिया और उन्हें ये लगा की हम दोनों का कोई चक्कर चल रहा है| इसीलिए उन्होंने हम दोनों को अलग-अलग डाटा दे कर दूर कर दिया| काम का लोड ज्यादा था तो अब हमारी बातें सिर्फ लंच टाइम में होती या कभी कभार वो मुझे चाय पीते हुए मिल जाती|" ऋतू मेरी बातें बड़े इत्मीनान से सुन रही थी, और जब मैंने बोलना बंद किया तो वो बोली; "ये सब शुक्ल जी और सर ने मिल के किया है! ये उन्हीं का प्लान था की कैसे आपको बदनाम करें! पहले शुक्ल जी ने आपको जबरदस्ती चढ़ा दिया की शराब पीनी है और लास्ट का दांव सर ने चला| छी! कितने गंदे लोग हैं!" ऋतू ने गुस्से से तिलमिलाते हुए कहा|

"Welcome to the corporate culture!!! यहाँ कोई भी किसी को तरक्की करता हुआ देख कर खुश नहीं होता| अब मुझे सैलरी में रेज मिला तो शुक्ल जी की किलस गई!" मैंने कहा| बातों-बातों में ऋतू का हॉस्टल आ गया और मैंने उसे गेट पर छोड़ा और वापस उसी कैब में अपने घर निकल गया| घर आया ही था की दो मैसेज फ़ोन में आये, पहला ऋतू का की वो हॉस्टल पहुँच गई और आंटी जी ने उसे कुछ नहीं कहा और दूसरा अनु मैडम का; "मानु जी! रियली सॉरी! आज जो कुछ हुआ उसके लिए मैं इनकी तरफ से माफ़ी माँगती हूँ| अभी इन्होने मुझे अपना सारा घटिया प्लान बताया!" एक पल को तो मन किया की कल ही जा कर अपना रेसिग्नेशन बॉस के मुँह पर मार आता हूँ पर फिर ये सोच कर चुप हो गया की अभी कुछ महीनों के लिए ऋतू के साथ इस प्रोजेक्ट पर और काम कर लेता हूँ बाद में छोड़ दूँगा| यही सोचते हुए मुझे कब नींद आई पता ही नहीं चला|
 
update 33

सुबह बहुत देर से उठा करीब आठ बजे होंगे, जल्दी-जल्दी तैयार हुआ और ऑफिस पहुँचा| जाहिर है ऑफिस पहुँचने में थोड़ी देर हो गई पर आज बॉस ने मुझे कुछ नहीं कहा| बाकी दिन जब मैं लेट हो जाता तो बॉस कुछ न कुछ सुना देता था पर आज चुप था| जब मैं केबिन में गुड मॉर्निंग करने घुसा तब भी बस गुड मॉर्निंग का जवाब दिया पर कोई भी फाइल उठा कर मुझे नहीं दी| मैं भी वापस आ कर अपनी डेस्क पर बैठ गया और अपना सिस्टम चालु किया, सोचा की मैडम वाले प्रोजेक्ट पर ही थोड़ा काम कर लेता हूँ| तभी मेरी नजर शुक्ल जी पर पड़ी, और दिन तो उनके टेबल पर एक-आधी ही फाइल होती थी पर आज तो ढेर सारी थी! मैं समझ गया की मेरी फाइल्स भी सर ने उन्हें दे दी है तो अब बारी मेरी थी उनके मज़े लेने की! मैं उठा और उनके टेबल पर पहुँच गया;

मैं: अरे सिद्धार्थ भाई, आपने शुक्ल जी को ब्लैक कॉफ़ी नहीं मँगवा के दी? उनका हैंगओवर कैसे उतरेगा?

ये सुनते ही अरुण और सिद्धार्थ हँसने लगे अब शुक्ल जी को भी ढोंग करते हुए झूठी हँसी हसनी पड़ी|

मैं: क्या शुक्ल जी आप मेरे जैसे बच्चे से हार गए? वो भी देसी पीने में? बॉस से हारे होते तो मैं फिर भी मान लेता!

शुक्ल: अरे भाई....वो ....दरअसल ...खाली पेट थे ना?

मैं: खाली पेट? वो भी शादी में? काहे?

अरुण: अरे शुक्ल जी काहे झूठ बोल रहे हो? सबसे ज्यादा खाना तो आप ही दबाये हो! (ये सुनते ही हम सारे हँसने लगे|)

सिद्धार्थ: शुक्ल जी ने पूरे शगुन के पैसे वसूल किये हैं|

मैं: शुक्ल जी महराज धन्य हो आप! मुझे लुढ़काने के चक्कर में खुद लुढ़क गए!

शुक्ल: बिटवा थोड़ा ज्यादा उड़ रहे हो!

उन्होंने मुझे टोंट मारना चाहा पर उनके आगे बोलने से पहले ही मैं बरस पड़ा;

मैं: मैं कहाँ उड़ रहा हूँ जी! मुझे उड़ाने का प्लान तो आप लोग बनाये थे, पर आप जानते नहीं हो मुझे ठीक से! जितनी आपकी उम्र है उतने घाटों का पानी पी चूका हूँ| अगली बार खुंदस निकालनी हो तो थोड़ा ढंग का प्लान बनाना|

मेरी आवाज ऊँची हो चली थी जो बॉस ने भी सुनी पर वो सिर्फ मुझे देख कर ही चुप हो गए| ठीक उसी समय मैडम एंटर हुईं और उन्होंने शायद मेरी बात सुन ली थी इसलिए अपने दाहिने हाथ की छोटी ऊँगली से मेरे हाथ को चलते हुए पकड़ा और मुझे अपने साथ अपने केबिन की तरफ ले आईं और बोलीं; "मानु जी क्यों अपना मुँह गन्दा करते हो? ये छोटे लोग हैं और इनकी सोच भी छोटी है, किसी की तरक्की इनसे देखि नहीं जाती|" मैंने मैडम की बात का जवाब नहीं दिया बल्कि मुड़ के अपने डेस्क की तरफ जा रहा था की उन्हें लगा जैसे मैं उनसे नाराज हूँ| मैडम मेरे टेबल के नजदीक आईं और मुझसे पूछने लगीं; "मुझसे नाराज हो?"

"नहीं तो mam! आपसे भला किस बात की नाराजगी?! मुझे बदनाम करने का पालन आपने थोड़े ही बनाया था|" मैंने तपाक से जवाब दिया|

"वैसे मानु जी! हीरे पर धुल गिराने से उस की चमक कम नहीं होती!" मैं मैडम के बात का मतलब समझ गया इसलिए मैंने आगे उनसे इस बारे में कुछ नहीं कहा| मैडम वापस अपने केबिन में चलीं गईं और मैं प्रोजेक्ट के काम में लग गया| कुछ देर बाद मैडम आईं और बोलीं; "मानु जी आप मुझे हज़रतगंज छोड़ दोगे? वहाँ GST ऑफिस में मुझे कुछ काम है|"

"Mam आप मुझे बोल दीजिये मैं चला जाता हूँ|" मैंने कहा|

"नहीं मैं ही जाऊँगी, यहाँ रहूँगी तो इनकी (बॉस की) शक्ल देखनी पड़ेगी|" मैडम ने मुँह बनाते हुए कहा| पर मुझे दिक्कत ये थी की बॉस का क्या सोचेंगे पर तभी मैडम बोलीं; "क्या सोच रहे हो?"

अब मैं क्या बोलता, मैं था और मैडम को चलने के लिए कहा| मैडम अपने केबिन में कुछ फाइल्स लेने गईं और मैं नीचे उतर आया, पार्किंग से बाइक निकाल के बाहर आया और इतने में मैडम भी नीचे आ गईं| मैडम ने पिट्ठू बैग टाँगा हुआ था, वो आज बाइक पर दोनों तरफ टांगें कर के बैठ गईं और उनके दोनों हाथ मेरे सीने से आ चिपके| आज तो उन्होंने ब्रा भी नहीं पहनी थी और नंगे स्तन बस एक कुर्ते के पीछे से मेरी कमीज में गड़े हुए थे| उनके इस स्पर्श से मेरे जिस्म में करंट दौड़ गया, मेरे लिए ये बहुत अनकम्फर्टेबले हो रहा था पर हिम्मत नहीं हो रही थी की मैडम को बोल सकूँ| मैं जानबूझ कर आगे को झुका ये ड्रामा करने को की मैं बुलेट के इंजन को छू कर कुछ ढूँढ रहा हूँ| इससे मैडम की पकड़ थोड़ी ढीली हो गई और हम दोनों के बीच थोड़ा सा गैप आ गया| मैडम भी समझ गईं की मैं नाटक कर रहा हूँ इसलिए उन्होंने खुद से "सॉरी!!!" बोला| मैं उन्हें ज्यादा ऑक्वर्ड फील नहीं करवाना चाहता था इसलिए मैंने बाइक स्टार्ट की और हम हज़रतगंज के लिए निकले| पूरे रास्ते मैडम ने मुझसे कोई बात नहीं की, आधे घंटे का रास्ता चुप-चाप निकला| GST ऑफिस पहुँच कर मैडम ने कहा की मैं ऑफिस वापस चला जाऊँ| पर वो आज बहुत उदास महसूस कर रहीं थीं, अब उनका दोस्त था तो उन्हें ऐसे अकेला छोड़ना सही नहीं लगा| "Mam आपकी टुंडे कबाब की ट्रीट बाकी है! आज खाएं?" मेरी बात सुनते ही मैडम की चेहरे पर ख़ुशी लौट आई| उन्होंने बताया की उन्हें कम से कम आधे घंटे का काम है और तब तक मैंने भी सोचा की अपना एक काम निपटा लूँ, इसलिए मैंने उनसे इज्जाजत मांगी और निकल आया| जेब से उन अंकल जी का कार्ड निकाला जिन्होंने कल मुझे वो रिंग दी थी| एड्रेस आस-पास का ही था तो मैं उनकी दूकान जा पहुँचा, दूकान क्या वो तो शोरूम था! अब मुझे लगा की बीटा जितनी सेविंग थी सब गई! एंकल जी कॅश काउंटर पर खड़े थे और मुझे देखते ही मेरे पास आये और मेरे कंधे पर हाथ रख कर मुझे काउच पर बिठा दिया और आ के मेरे बगल में ही बैठ गए| मेरे बारे में पूछा की मैं कहाँ का रहने वाला हूँ, यहाँ कब से हूँ, क्या जॉब करता हूँ वगैरह-वगैरह| मैंने भी उन्हें सब बता दिया और फिर बात आई रिंग की कीमत की! "बेटा मैं अब भी कह रहा हूँ की तुम्हें पैसे देने की कोई जर्रूरत नहीं!" अंकल जी ने बड़े प्यार से कहा|

"अंकल जी मैं बड़ा गैरतमंद इंसान हूँ! आपसे इस तरह से इतनी महंगी चीज लेना ठीक नहीं! फिर मैं नहीं चाहता की आपको मेरी वजह से नुक्सान हो!" मैंने भी बड़े प्यार से उन्हें अपनी मजबूरी समझाई|

"ठीक है बेटा! वो रिंग ज्यादा महंगी नहीं थी, वाइट सिल्वर की थी, वो दरसल किसी और क्लाइंट के लिए बनाई थी पर उस रात को तुम-दोनों को देख कर मुझे मेरी जवानी के दिन याद आ गए| अब तुमसे पैसे लेने को दिल नहीं करता पर तुम बहुत गैरतमंद हो इसलिए तुम मुझे बस लगत दे दो: 7,000/-, चाहो तो बाद में दे देना इतनी भी कोई जल्दी नहीं है|"

"अंकल जी मैं कार्ड लाया था तो ....आपके पास मशीन हो तो?!" मैंने थोड़ा डरते हुए पूछा की खाएं वो कुछ गलत न समझें पर वो निहायती शरीफ थे उन्होंने तुरंत मशीन मंगवाई और पेमेंट होने के बाद मुझे बिल भी देने लगे तो मैंने मन कर दिया| उनसे बिल ले कर मैं उनकी बेज्जत्ती नहीं करना चाहता था| "तो बेटा शादी कब कर रहे हो?" अंकल ने पूछा|

"जल्द ही अंकल जी!" इतना कह कर मैंने उनसे विदा ली और वापस GST ऑफिस के बाहर पहुँचा| मैडम को बिठा कर सीधा अमीनाबाद पहुँचा और हमने टुंडे कबाब खाये| पर मैडम को अभी भी भूख लगी थी और वो कहने लगीं की किसी रेस्टुरेंट चलते हैं जहाँ बैठ कर खाना खा सकें| हम दोनों एक रेस्टुरेंट में आये और बैठ गए, मैडम का मुँह अब पहले की तरह खिला-खिला था इसलिए खाना भी उन्हीं ने आर्डर किया|
 
update 34

खाने में मैडम ने बस एक थाली ही आर्डर की थी, दरअसल उन्हें मुझसे कुछ बात करनी थी जो खड़े-खड़े कबाब खाते हुए मुमकिन नहीं थी| आर्डर आने से पहले ही मदमा ने अपनी बात शुरू की;

अनु मैडम: मैं अपनी इस शादी में पिछले २ साल से घुट रहीं हूँ! कॉलेज खत्म होने के बाद मेरा मन शादी करने का कतई नहीं था, बल्कि मैं तो घूमना-फिरना चाहती थी पर मेरे परिवार वालों की सोच बड़ी रूढ़िवादी थी, मेरा घूमना-फिरना उन्हें कतई पसंद नहीं था इसलिए मेरी शादी जबरदस्ती कर दी गई| कुमार (मेरे बॉस का मिडिल नाम) बहुत बोर और लालची इंसान है, उसके दिमाग में हर वक़्त पैसे ही पैसा घूमता है| दहेज़ के लालच में शादी की और इतने सालों में हम ने कभी प्यार के हसीन पल साथ नहीं बिताये! अपना अकेलापन दूर करने को मैंने पीना शुरू कर दिया और खुद उसी मायूसी में घुटती रही| ये घुटन दिन पर दिन बढ़ने लगी थी और मैं सोचने लगी थी की सुसाइड कर लूँ, पर फिर वो मुंबई वाला ट्रिप हुआ और मुझे तुम्हारे रूप में एक अच्छा दोस्त मिल गया|

इतने में वेटर एक थाली ले कर आ गया|

मैं: Mam आपने सर से इस बारे में बात की? I mean if you tell him, he might change himself .. (मैडम मेरी बात काटते हुए बोलीं)

अनु मैडम: I did but he's too damn adamant to accept his behavior and instead blames me for it and expects me to change! This relationship is beyond repairable .and I'm gonna end it soon! I can't live with this asshole anymore!

अब ये सुन कर मुझे बुरा लगने लगा और मैं कुर्सी पर पीठ टिका कर बैठ गया, मैडम ने पूरी का एक कौर खाया और मेरी तरफ देखते हुए बोलीं;

अनु मैडम: Don't blame yourself for it, you're not responsible for any of this! I told you all this cause I wanted to ask you a question?

अब ये सुन कर मेरी फटी पड़ी थी, मुझे लग रहा था की मैडम मुझे कहीं I Love You न बोल दें!

अनु मैडम: Do you support me in this decision .... as a friend?

मैं: I do mam! ... As a friend I do!

अनु मैडम: Thank you! In case I need to crash a day or two, I'll let you know!

ये कहते हुए मैडम हँसने लगीं और मैं भी झूठी हँसी हँसने लगा| मन ख़राब था पर मैं अपने चेहरे पर नकली हँसी बनाये हुए था, मैं नहीं चाहता था की मैडम का घर टूटे! हम अभी बाइके पर बैठ ही थे की किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मैंने पलट के देखा तो ये मोहिनी थी!

"कहाँ घूम रहे हो?" उसने हँस कर पूछा| पर मेरे कुछ बोलने से पहले ही वो बोल पड़ी; "अच्छा जी! गर्लफ्रेंड घुमा रहे हो!!!!" उसकी बात सुन कर मैडम हँस पड़ीं और मैंने उसे प्यार भरे गुस्से से डांटते हुए कहा; "पागल! Office Mam हैं मेरी!"

"ओह..सॉरी...सॉरी..सॉरी..!!!" मोहिनी ने कान पकड़ते हुए कहा| "Its ok dear !!!" मैडम ने भी हँसते हुए कहा|

"तो यहाँ क्या कबाब खाने आये थे आप लोग?" मोहिनी ने पूछा|

"हाँ जी! GST ऑफिस से काम निपटा कर सोचा की चलो कबाब ही खा लें|" मैडम ने जवाब दिया|

"आप यहाँ क्या कर रही हो? बॉयफ्रेंड का इन्तेजार??" मैंने मोहिनी को छेड़ते हुए कहा|

"अरे कहाँ बॉयफ्रेंड! सारे अच्छे लड़के तो आपकी तरह ब्रह्मचारी हो गए हैं!" मोहिनी ने पलट कर मुझे ही छेड़ दिया|

"किसने कहा मैं ब्रह्मचारी हूँ? इतने साल टूशन पढ़ने के टाइम तो कभी मुझे कुछ कहा नहीं? बल्कि तब तो मेरे मजे लेती थी?!" मैंने कहा और मेरी बात सुन कर मैडम हैरानी से मुझे देखने लगी|

"अरे तब माँ होती थी ना! पर अब आपके पास टाइम ही नहीं है!" मोहिनी ने कहा|

हमारी इस हँसी-ठिठोली के मजे मैडम ने बहुत लिए और वो जी भर के हँस रही थी| फिर मुझे याद आया की कहीं मोहिनीं ऋतू के बारे में कहीं न बक दे, इसलिए मैंने उससे विदा ली|

मैडम और मैं बस हलकी-फुलकी बातें करते हुए ऑफिस पहुँचे, मैंने अपना बैग उठा कर सर को; "मैं जा रहा हूँ|" बोल कर निकल गया| सीधा अपनी जानेमन से मिलने उसके कॉलेज वाली लाल बत्ती पर उसका इन्तेजार करने लगा| ऋतू हमेशा की तरह मुस्कुराती हुई आई और पीछे बैठ गई| हम एक कैफ़े में पहुँचे और फिर मैंने उसे आज की सारी घटना बता दी| मेरी बात सुन कर उसे जरा भी हैरानी नहीं हुई और वो भी पूरे जोश में मैडम का सपोर्ट करते हुए बोली; "Mam ने जो भी कहा वो सही कहा! खुश रहें का हक़ सब को है, अब अगर बॉस उन्हें खुश नहीं रख पाते तो वो अपना जीवन क्यों बर्बाद करें? और इस सब में आपकी बिलकुल भी गलती नहीं है, आप नहीं होते तो मैडम सुसाइड कर लेतीं! भगवान् ने आपको उनकी जिंदगी में भेजा ही इसलिए था की आप उन्हें एक अच्छे दोस्त की तरह संभाल सकें!" मैं आगे कुछ बोल न सका, ऋतू का भरोसा खुल कर मेरे सामने आ रहा था| "अच्छा एक जरूरी बात! परसों काम्या का जन्मदिन है और उसने हम दोनों को रात की पार्टी में इन्वाइट किया है| इसलिए आपको अच्छे से तैयार हो कर आना है|" ऋतू ने जोश में आते हुए कहा|

"आजकल पार्टी कुछ ज्यादा नहीं हो रही? मेरी बर्थडे पार्टी, फिर राखी की शादी और अब ये काम्या का बर्थडे?! थोड़ा पढ़ाई में भी ध्यान दो! वैसे आंटी जी को क्या बोलोगी?" मैंने ऋतू को थोड़ा डाँटते हुए कहा|

"उन्हें मैंने पहले ही बता दिया है की घर पर पूजा है इसलिए आप और मैं 3 दिन के लिए जा रहे हैं|" ऋतू ने बड़ी सरलता से कहा|

"पागल हो क्या? तीन दिन? कहाँ है ये पार्टी?" मैंने हैरानी से पूछा|

"जयपुर!!!" ऋतू ने उत्साह से भरते हुए कहा| मैं अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से ऋतू को घूरने लगा की ये लड़की पागल तो नहीं हो गई|

"ऋतू तुझे हो गया है? तेरे कुछ ज्यादा पर निकल आये हैं? कहाँ तो गाँव में चुप-चाप रहने वाली लड़की आज शहर की फूलझड़ी बन गई है!" मैंने ऋतू को थोड़ा डाँटते हुए कहा| ये सुन कर ऋतू का सारा उत्साह फुर्र हो गया और उसकी गर्दन झुक गई|

"गाँव में मैं 'जी' कहाँ रही थी? वहाँ जो भी खुशियां मिली वो सिर्फ आपने दी, वो खुशियाँ बस तरीकों के साथ आती थी| एक लिमिटेड टाइम के लिए, कुछ भी करने से पहले दस बार सोचना की कहीं घर वाले नाराज न हो जाएँ और मेरी शादी न कर दें! पर यहाँ आ कर मुझे पता चला की लाइफ को जिया कैसे जाता है! आप अगर मुझे यहाँ ना लाते तो मैं वही गाँव की गंवार बन के रह जाती| मानती हूँ की कई बार मैं अपनी सारी हदें पार कर देती हूँ, शायद इसलिए की ये खुशियाँ मेरे लिए due थीं और बड़ी लेट मिलीं|" ऋतू ने सर झुकाये हुए ही दबी आवाज में कहा| मैं ऋतू का दर्द समझ सकता था पर ये जो Wild हरकतें वो कर रही थी वो हमारे प्लान पर पानी फेर देतीं| "ऋतू देख मैं समझ सकता हूँ पर तू जिस स्पीड पर भाग रही है वो हमारे आने वाले जीवन के लिए खतरनाक है! अगर घर में बात जारा सी भी लीक हो गई तो बवाल खड़ा हो जायेगा|" मैंने ऋतू को समझाया| ऋतू ने बस सर झुकाये हुए ही हाँ में गर्दन हिलाई और मैं उठ कर उसके बगल में बैठ गया और उसे अपने सीने से लगा लिया| 5 बजने वाले थे तो मैं उसे ले कर निकल पड़ा और उसे हॉस्टल छोड़ा और फिर अपने घर आ गया|

रात के करीब दस बजे होंगे और मैं अंडे की भुर्जी बना रहा था की मेरे दरवाजे पर दस्तक हुई| मैंने दरवाजा खोला तो सामने काम्या खड़ी थी, मुझे देखते ही वो "Hi!!!" बोली| मैं उसे यहाँ देख कर भौंचक्कारह गया और हकलाते हुए "H ...H ...Hi!!!" निकला| "Can I come in?" काम्या ने पूछा तो मैंने दरवाजे पर से हाथ हटाया और उसे अंदर आने दिया और खुद दरवाजे पर ही खड़ा रहा| वो अंदर आ कर मेरे घर को देखने लगी और तब उसका ध्यान अंडा भुर्जी पर गया और उसने फटाफट किचन सिंक में हाथ धोये और खुद ही एक प्लेट में अपने लिए भुर्जी निकाल ली और ब्रेड का पैकेट खोलने वाली थी तो मैंने उसे बताया की टिफ़िन में परांठा है| उसने फ़ौरन वो निकाला और बिना कुछ आगे बोले खाने लगी| मैं चौखट से अपनी पीठ टिका कर खड़ा हो गया और उसे खाते हुए देखने लगा| आधा परांठा खाने के बाद उसे याद आया की वो किस काम के लिए आई थी; "मानु जी! प्लीज चलो ना मेरे बर्थडे पार्टी पर जयपुर? आप नहीं जाओगे तो रितिका भी नहीं जायेगी!"

"सॉरी जी! पर ऑफिस से छुट्टी नहीं मिलेगी|" मैंने कहा पर वो आज पूरा मन बना कर आई थी|

काम्या: ओह come on! ये बस एक couple get together है! आप दोनों के बिना हमें कैसे मजा आएगा?

मैं: No offence, but I don't even know you! I mean except that you're her friend?

काम्या: That's the best part, you and me. I mean. we can get to know each other!

मुझे काम्या की बात बहुत अजीब लगी!

मैं: I'm sorry, बॉस छुट्टी नहीं देगा|

काम्या: अरे ऐसे कैसे? इतनी मेहनती आदमी को छुट्टी नहीं मिलेगी तो कैसे चलेगा? मैं बात करती हूँ आपके बॉस से!" काम्या ने भुर्जी खाते हुए कहा|

मैं: Oh please! Don't be a kid!

काम्या: ओह! समझी.... आप जानबूझ कर जाना नहीं चाहते! ठीक है मैं यहाँ से तब तक नहीं हिलूँगी जब तक आप हाँ नहीं कहते|

मैं: As you wish!

मैंने सोचा की ये कर भी क्या लेगी, कुछ देर बाद तो इसे जाना ही होगा वरना अपने घर में क्या बोलेगी? मैंने इधर ऋतू को फ़ोन मिलाया पर उसने उठाया नहीं, शायद वो सो चुकी थी| आधे घंटे तक मैं चौखट से अपनी पीठ टिकाये खड़ा रहा और काम्या मेरे पलंग पर आलथी-पालथी मारे बैठी रही|

काम्या: मानु जी! मुझे घर भी जाना है! प्लीज मान जाओ, मेरे लिए न सही पर ऋतू के लिए| उस बेचारी ने कभी जयपुर नहीं देखा वो थोड़ा घूम लेगी तो आपका क्या जायेगा? मैं उसे साथ ले जाती पर वो सिर्फ आपके साथ जाना जाती है|

अब मैं सोच में पड़ गया की ये खतरा कैसे उठाऊँ? घर पर ये बात खुलती तो काण्ड होना तय था! तभी ऋतू का फ़ोन आया और उसने मुझे फ़ोन स्पीकर पर करने को कहा; " काम्या? तेरी हिम्मत कैसे हुई उनको तंग करने की? मैंने तुझे बोला था न की हम नहीं जा रहे तू चली जा? फिर तू इतनी रात गए वहाँ क्या कर रही है?" ऋतू काम्या पर बरस पड़ी|

"ऋतू बस! .... शांत हो जा! हम दोनों जा रहे हैं|" मेरी बात सुन कर काम्या खुश हो गई तो ऋतू खामोश हो गई| मैंने फ़ोन स्पीकर मोड से हटाया और अपने कान से लगाया| "अपनी जानेमन की ख़ुशी के लिए कुछ भी!" ऋतू को अब भी यक़ीन नहीं हो रहा था; "उस इडियट ने तो आपको तंग नहीं किया ना? मैंने उसे आपके पास जाने को नहीं बोला, मुझे तो पता भी नहीं था की वो आपके घर पर आई हुई है| अभी उसका मैसेज पढ़ा की वो आपके घर पर आपको मानाने आई है और आप मान नहीं रहे| इसलिए मैंने अभी कॉल किया!"

"जान! मैं किसी दबाव में नहीं कह रहा, बस इस पागल लड़की की बात से एहसास हुआ की मैं तुम्हारे साथ कितनी ज्यादती कर रहा था|" मैंने कहा और मेरे काम्या को पागल लड़की कहने पर वो हँस दी!

"पर घर का क्या?" ऋतू ने चिंता जताई|

"क्यों तुमने तो पहले ही बहाना ढूँढ रखा है?!" मैंने थोड़ा प्यार भरा टोंट मारा| "थैंक यू जानू! I love you!!!" ऋतू की ख़ुशी लौट आई और मुझे नहीं लगता की वो उस रात सोइ भी होगी! इधर रात के पोन ग्यारह हो रहे थे और अभी इस पागल लड़की को घर भी जाना था| "चलो आपको घर छोड़ दूँ|" मैंने ऋतू का फ़ोन काटते ही काम्या से कहा| "Thank you. Thank you. Thank you. Thank you. Thank you" कहते हुए वो मेरे नजदीक आ गई और मेरे गले लग गई पर मैंने उसे छुआ भी नहीं| "अच्छा बस मैडम! चलिए!" इतना कह कर मैंने खुद को उससे छुड़वाया और उसे घर छोड़ने निकला| मेरे घर से उसका घर करीब 20 मिनट दूर था, अब रात में कहीं कुत्ते पीछे न पड़ जाएँ इसलिए मैंने बाइके निकाली और उसे उसके घर के सामने छोड़ा| वो मुझे बाय बोल कर उछलती-कूदती हुई चली गई| मैं भी घर लौट आया और ब्रेड और ठंडी भुर्जी खा कर सो गया|
 
update 35

अगले दिन मैं उठ कर, नाहा धो कर ऑफिस पहुँचा और बॉस के सामने अपनी छुट्टी की अर्जी रख दी| "सर मुझे 4 दिन की छुट्टी चाहिए, घर पर पूजा-पाठ है! मैं मंडे ज्वाइन कर लूँगा|" सर ने मुझे देखे बिना ही ठीक है कह दिया, मैं भी वापस बाहर आ कर डेस्क पर पहले से ही रखी फाइल्स निपटाने लगा| लंच टाइम मैं उठ कर बाहर जा रहा था की अनु मैडम आ गईं और मुझसे बोलीं; "मानु जी! आपके सर ने बताया की आप कल गाँव जा रहे हो? कोई इमरजेंसी तो नहीं?"

"नहीं mam, वो घर में पूजा है इसलिए जा रहा हूँ| And sorry इस संडे प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर पाउँगा, मैं संडे शाम तक लौटूँगा| आज मैं PPTs फाइनल कर दूँगा और वो आपने उन्हें पिछले पाँच साल के फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स मँगवा लिए?" पर मैडम का तो जैसे मेरी बातों पर ध्यान ही नहीं था, उनकी आँखें मुझ पर टिकी थीं पर ध्यान कहीं और था! मैं ने हवा में मैडम के चेहरे के सामने हाथ हिला कर मैडम की तन्द्रा भंग करते हुए पूछा; "क्या हुआ mam?" उन्होंने बस कुछ नहीं कहा और वो अपने केबिन की तरफ चली गईं मैं भी कुछ सोचते हुए नीचे आ गया और चाय पी रहा था| मैंने जेब से फ़ोन निकाला और घर फ़ोन किया ये जानने के लिए की वहाँ सब कुछ कैसा है? कहीं पता चले की वहाँ से कोई शहर आ टपके और काण्ड हो जाए! पिताजी ने फ़ोन उठाया तो वो मुझ पर ही बरस पड़े; "तुम दोनों के पास इतना भी समय नहीं की घर आ जाओ? पढ़ाई और काम-धंधे में इतने व्यस्त हो की घर की कोई चिंता ही नहीं? पहले तो हफ्ते में दो दिन के लिए तुम्हारी शक्ल दिख जाती थी अब तो महीने होंको आये तुम्हें देखे हुए? तुम लोगों की सूरत तो छोडो आवाज सुनने को कान तरस गए और तुम लोग हो की बस अपनी मस्ती में मस्त हो! इसीलिए तुम दोनों को शहर भेजा था?" पिताजी की बात जायज थी पर यहाँ ऋतू और मेरे काम के कारन हम गाँव नहीं जा आ रहे थे|

"पिताजी आपसे हाथ जोड़ कर माफ़ी माँगता हूँ! मैं या ऋतू आप सब की दी हुई आजादी का गलत फायदा नहीं उठा रहे, दरअसल मेरे ऑफिस में आज कल एक नया प्रोजेक्ट चल रहा है और इसलिए मैं सैटरडे-संडे ओवरटाइम कर रहा हूँ| कुछ महीनों में वो खत्म हो जायेगा तो मैं फिर से सैटरडे-संडे आ जाऊँगा| बल्कि मैं इस संडे ऑफिस के कुछ काम से आ रहा हूँ और ऋतू को घर छोड़ जाऊँगा, उसके कॉलेज की छुट्टियाँ हैं| मैं ताऊ जी से भी माफ़ी मांग लूँगा, पर अफ्ले आप तो माफ़ कर दीजिये|" मेरी सेंटीमेंटल बातें सुन कर पिताजी को तसल्ली हुई और उनका गुस्सा शांत हो गया| अभी मैंने कॉल रखा ही था की ऋतू का फ़ोन आ गया|

"जानू! मुझे बहुत डर लग रहा है! अगर हमारे पीछे से घर से कोई यहाँ आ गया तो?" ऋतू ने डरते हुए कहा|

"ये सब पहले नहीं सोचा था?" मैंने ऋतू को ताना मरते हुए कहा| "मैं तो साफ़ कह दूँगा की ये लड़की (ऋतू) मुझे बरगला कर ले गई थी!" मेरी बात सुनते ही ऋतू के मुंह से "Hwwwwwwwwwwww!!! " निकला और में जोर से हँस दिया| मिनट भर तक पेट पकड़ के हँसने के बाद मैं बोला; "तू चिंता मत कर, मैंने अभी घर कॉल किया था और घरवाले अभूत गुस्सा हो रहे थे| बड़ी मुश्किल से मैंने पिताजी को समझाया है और वादा किया है की इस संडे तुझे घर छोड़ दूँगा कुछ दिनों के लिए, क्योंकि तेरे कॉलेज की छुट्टी है|" ये सुनते ही ऋतू बोली; "ये अच्छा है! मुझे ही फंसा दो आप?! मैं वहाँ अकेली इतने दिन आपके बिना क्या करुँगी?!"

"जयपुर का प्लान किसने बनाया था?" मैंने पूछा और ऋतू समझ गई की ये उसकी गलती की सज़ा है| "अगली बार अगर इस तरह का पन्गा खड़ा किया न तो देख ले फिर?!" मैंने ऋतू को सचेत करते हुए कहा|

"I promise अगलीबार कुछ भी करने से पहले आप से पूछूँगी| वैसे आज कितने बजे मिल रहे हैं?"

"आज मुश्किल है, प्रोजेक्ट की PPTs पूरी करनी है वरना मैडम अकेले कैसे करेंगी और हाँ.... याद से मैडम को कल फ़ोन कर के बता देना की तुम इस संडे नहीं आने वाली और प्लीज ये मत कहना की घर पर पूजा है! वो बहाना मैंने मारा है|" मेरी बात खत्म हुई और ऋतू वापस कॉलेज लेक्चर अटेंड करने चली गई| मैं भी चाय पी कर वापस आ गया और डेस्कटॉप पर काम करने लगा| उस दिन मैडम से मेरी बात सिर्फ मेल पर ही हो रही थी क्योंकि मैडम लंच के बाद निकल गईं थी| अगले दिन सुबह जब मैं ऑफिस पहुँचा तो बॉस और मैडम को लगा की मेरा जाना कैंसिल हो गया; "जी शाम की बस है और वो PPT वाला काम फाइनल करना था इसलिए आ गया|" इतना कह कर मैं कल वाली PPTs में मैडम के बातये हुए करेक्शन कर रहा था| लंच के बाद मैं सर को बोल कर निकल गया, मैडम पहले ही जा चुकी थीं| मैं घर पहुँच कर तैयार हो कर एक बैग में अपने कुछ कपडे ले कर निकला और ऋतू के हॉस्टल पहुँचा| आंटी जी चूँकि वहीँ थीं तो उन्होंने जबरदस्ती रोक लिया और चाय पिलाई और पूछने लगी; "क्या घर में सत्य नारायण की पूजा है?" अब मैं बड़ा ही धार्मिक आदमी हूँ इसलिए मैं जान बुझ कर चुप रहा और ऋतू की तरफ देखते हुए मैंने चाय का कप अपने होठों से लगा लिया; "जी आंटी जी!" ऋतू बोली| चाय पी कर हम निकले और एक ऑटो में बैठ गए| "भगवान् के नाम से झूठ बोला है तूने, इस पाप की भागीदार तू ही है|" मैंने ऋतू को छेड़ते हुए कहा| "कोई नहीं जी! आपके प्यार के लिए ये पाप भी सर आँखों पर|" ऋतू ने जवाब दिया|

हम दोनों ही बस स्टॉप पहुँच गए पर काम्या और उसका बंदा अभी तक नहीं आये थे| बस आने में अभी करीब आधा घंटा था और मैं और ऋतू आराम से बैठे बातें कर रहे थे| इतने में मैडम का फ़ोन आया और मैं उनका कॉल लेने के लिए बाहर आ गया और हमारी बातें कुछ मेल वगैरह की हो रही थीं| तभी काम्या और उसका बंदा आ गए और सीधा ऋतू के पास बैठ गए| मेरी नजर अभी उन पर नहीं पड़ी थी, इतने में मेरी तरफ एक लड़का चलता हुआ आया| आँखों पर काला चस्म, लेदर जैकेट और मुँह में च्युइंग गम खाते हुए वो मेरे पास रूक गया| मैंने मैडम से एक मिनट होल्ड करने को कहा, उनका कॉल होल्ड पर डालते हुए उसकी तरफ देखते हुए सवालियां नजरों से देखने लगा और तभी वो खुद बोल पड़ा; "Hi! I'm Rohit!" उसने हाथ मिलाने को आगे बढ़ाया पर मैं अब भी सोच में था की ये कौन है? मेरी उलझन समझ कर वो खुद बोला; "I'm Kamya's boyfriend!" ये सुन कर मैं उसे ऊपर से नीचे फिर से देखने लगा और उसे कहा; "Just a sec! Mam I'll call you back." और मैंने मैडम का कॉल काटा और उस अजीब से चूतिये को देख कर मेरी हँसी बाहर आने को बेचैन हो गई| ठण्ड अभी शुरू नहीं हुई थी ये चुटिया लेदर जैकेट पहन के आया था| "You must be Manu?! Ritika's boyfriend." उसने बड़े अमेरिकन एक्सेंट के साथ कहा और मेरी हँसी मेरे चेहरे पर झलकने लगी पर मैंने वो फिर भी जैसे-तैसे दबाई और हाँ में सर हिलाया| इतने में काम्या आगई और उसके कंधे पर हाथ रख कर खड़ी हो गई और बड़ी अकड़ से मेरी तरफ देखने लगी; "How did you like him?" मैं जानता था की मैंने कुछ कहने के लिए मुँह खोला तो मेरे मुँह से हँसी निकल जायेगी इसलिए मैंने बस थम्ब्स अप का निशाँ दिखाया और जाने लगा| तभी रोहित मुझे रोकते हुए बोला; "I'm going to get some mineral water, would you like some?" मैंने बस ना में सर हिलाया और ऋतू के पास आ कर बैठ गया| ऋतू ने मेरी तरफ देखा और पूछा; "कैसा लगा रोहित?"

"नजाने क्या मजबूरी रही होगी काम्या की!" मेरे मुँह से बस इतना निकला की ऋतू और मैं दहाड़े मार के हँसने लगे| वहाँ बैठे सारे लोग हमें देख रहे थे और तभी काम्या भी आ गई| उसे देख हमें और भी हँसी आ रही थी और वो बेचारी अनजान हमसे हँसी का कारन पूछ रही थी| ऋतू ने बात घुमा दी और ये बोल दिया की ऑफिस की बात थी! थोड़ी देर में रोहित पानी की बोतल ले आया और हमारे सामने बैठ गया| तभी उसकी नजर ऋतू की रिंग पर गई और उसने पूछ ही लिया, अपनी अमेरिकन एक्सेंट में; "That's a nice ring, who gave you?" ऋतू के जवाब देने से पहले ही काम्या ने उसकी पीठ पर थपकी दी और बोली; "Duffer मानु जी ने दी और किस की हिम्मत है जो रितिका को रिंग देगा?" इतना कहते हुए काम्या ने कॉलेज के पहले दिन वाला काण्ड दोहरा दिया जिसे सुन कर रोहित चुप हो गया| बेचारा complex फील करने लगा तो मैंने सोचा की कोई और टॉपिक छेड़ा जाए; "So guys what's the plan? Where are we staying and what are we doing?"

"Chill bro! I got it!" रोहित ने कूल बनते हुए कहा|

"Oh really? But can you share it with us?" मैंने कहा तो रोहित बड़े ऐटिटूड में बोला; "Once we reach Jaipur we're gonna check into a hotel, rest and head out for party at night!"

"Okay! But what's the name of the hotel we're checking into? And what're we doing for 3 days?" मैंने रोहित की गलती निकालते हुए पूछा|

"Sex .Sex..Sex" उसने बड़े casually जवाब दिया, पर ये सुन कर रितिका और काम्या गुस्से में उसे देखने लगीं|

"What? I thought we're going for sex?" ये सुनते ही काम्या ने अपना पर्स उठाया और उस के मुँह पर मारा| "भोसड़ी के मेरा बर्थडे मानाने जा रहा है या हनीमून?" काम्या के मुँह से गाली सुनते ही मेरी तगड़ी वाली हँसी छूट गई और ऋतू आँख फाड़े मुझे देखने लगी|

"Yaar I was joking!" रोहित ने हँसते हुए कहा पर काम्या का गुस्सा खत्म नहीं हुआ; "साले तुझे बोला था न रितिका के सामने जुबान संभाल के बात करिओ, पर नहीं तूने तो अपनी गांड मरवानी है! सारे बनाये हुए इम्प्रैशन की माँ चोद दी तूने बहनचोद!" "तू कभी नहीं सुधरेगी!" ऋतू ने काम्या को गुस्से से देखते हुए अपने दाँत पीसते हुए कहा| मेरा हँसनाबंद हो चूका था, अब मुझे सब समझ आने लगा था| कॉलेज ज्वाइन करने से पहले मैंने ऋतू को समझाया था की अपने दोस्त सोच समझ कर बनाना| नशेड़ी,गंजेड़ियों, लौंडियाबाजों से दूर रहना और अगर लड़की से दोस्ती की तो कम से कम वो गाली न देती हो! काम्या गाली देती थी और ऋतू मुझसे ये बात छुपाना चाहती थी| मैंने ऋतू की तरफ देखा और दबी हुई आवाज में कहा; "Seriously??!" ऋतू ने कान पकडे और मुझे सॉरी कहा पर अब कुछ हो भी क्या सकता था|

"Jokes apart, होटल कौन सा बुक हुआ है?" मैंने पूछा|

"वहाँ पहुँच कर देखते हैं!" रोहित अब भी बड़ा निश्चिन्त था| माने आगे कुछ नहीं कहा और चुप-चाप अपना फ़ोन निकाला और Oyo पर दो रूम बुक किये| फिर फ़ोन दोनों की तरफ घुमाया और उन्हें दिखाते हुए बोला; "Rooms बुक हो गये हैं|"

"देख साले और सीख मानु जी से!" काम्या ने रोहित को घुसा मारते हुए कहा| बस के आने कस टाइम हो चूका था और गनीमत है की उसकी टिकट्स काम्या ने बुक करा दी थी| Volvo Super Deluxe आ कर खड़ी हुई और हम चारों अपनी-अपनी सीट्स पर बैठ गए| काम्या और रोहित ठीक हमारे सामने वाली सीट्स पर थे|खिड़की पर ऋतू बैठी थी, मैं aisle सीट में और उधर रोहित खिड़की पर और काम्या aisle सीट पर| 10 मिनट बाद ही बस चल पड़ी और रोहित ने मुझे देखते हुए अपना हाथ काम्या के कन्धों पर रख दिया| पर मुझे कोई दिखावा करने की जर्रूरत नहीं थी, ऋतू खुद ही मेरे कंधे पर सर रख चुकी थी और अपने दोनों हाथों से उसने मेरे दाएँ हाथ को पकड़ लिया| "Did you plan all this?" मैंने ऋतू से बड़े प्यार से पूछा| पर वो मेरी बात समझ नहीं पाई और बोली; "मैं कुछ समझी नहीं?"

"काम्या को मेरे घर मुझे मानाने के लिए भेजना?"

"बिलकुल नहीं!" ऋतू ने चौंकते हुए कहा|

"तो फिर वो मेरे घर कैसे आई? किसने एड्रेस दिया उसे मेरा?"

"उसने बाजार में आपको कई बार देखा था और एक आध-बार वो आपके घर के पास से गुजरी तब उसने आपको घर में घुसते-निकलते हुए देखा था| जब मैंने उसे आपसे इंट्रोडस करवाया था तब बाद में उसने बताया की वो तो आपको जानती है, मेरा मतलब की आप कहाँ रहते हो ये जानती है!"

"अच्छा जी?!" मैंने ऋतू को चिढ़ाते हुए कहा और ऋतू फिर से मेरे सीने पर सर रख कर बैठ गई|
 
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