• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Hindi Sex Kahani - तीन सगी बेटियां

निशा ड्रेसिंग टेबल से सामने बैठ गयी और अपने दोनों पैर ड्रेसिंग टेबल के इर्द-गिरद रख दिया।

और उसके ऑंखों के सामने उसकी चूदी हुई चूत मिरर में एक खिले हुए फूल की तरह नज़र आयी।

एक नयी नवेली दुलहन की तरह वह अपने चूत को घुरे जा रही थी।

चूत, जो पहले, छोटी हुआ करती थी, अब फुलकर खुल गई थी। और अंदर का लाल भाग भी साफ़ दिखाई दे रहा था। पहेली चुदाई के कारण चूत के होठ सुजे हुए थे और लाल हो गए थे।

निशा ने अपना एक हाथ जब चूत पर हाथ रखा तो दर्द महसूस हुआ। पर वह धीरे धीरे अपने चूत को सहलाने लगी। धीरे धीरे दर्द मीठा होता गया और शरीर में मस्ती की लहर आने लगी।

निशा के ऑखों के सामने उसके खून से लथपथ पापा का मोटा लंड का लाल सुपाडा चमकने लगा।

उसने अपने ड्रेसिंग टेबल के ड्रावर में से वेसलिन का डिब्बा उठाया और वेसिलीन लेकर अपने चूत के होटों पर मल दिया।

फिर निशा ने अपने नंगापन को टॉवल से ढक लिया।

निशा (मन में): मुझे आशा और सशा के आने से पहले पापा के रूम से चद्दर हटाना होगा। नहीं तो चादर पर खून दिखाई देगा। अब 2 बजे बजे है।4 बजे तक वो आने वाले थे। उन्हें इस बात की भनक भी नहीं पडना चाहिए।

और वह रूम के दरवाज़े के तरफ चल दी।

निशा(मन में): क्या मेरे इस तरह टॉवल में जाना ठीक होगा.।पापा के सामने.।।पर अब उनसे क्या छुपाना.।

और आज़ाद निशा जगदीश राय के रूम के तरफ चल देती है.।
 
अन्दर अपने कमरे में निशा के आसू भरी आँखों ने जगदीश राय के सीने को चीरकर रख दिया था।

उसे अपने आप पर शर्म आ रहा था।

वह वही नंगा पड़े बेड पर लगे निशा की चूत से निकली खून के धब्बो को घूरे जा रहा था।

जगदीश राय (मन में): यह मैंने क्या कर दिया. और क्यों किया. निशा तो बच्ची है.।सब मज़ाक़ समझ रही थी.उसने सपने में नहीं सोचा होगा की उसके पापा उसके साथ. है भगवन.।अब मैं निशा को किस मुह से फेस कर पाउँगा.।

तभी अचानक से रूम का दरवाज़ा खुला जो उसके सोच को काट दिया।

जगदीश राय अपने ऊपर धोती चढाने को हाथ बढाया पर धोती बेड के दुसरे कोने में पड़ी थी। उसने सोचा नहीं था की कोई उसके कमरे में आएगा अब।

तब उनकी नज़र निशा पर पड़ी , जो धीरे से कॅमरे में प्रवेश किया।

जगदीश राय तुरंत अपने दोनों हाथो से अपने लंड को छुपाये और बेड पर बेठा रहा।

निशा टॉवल में लिपटी हुई थी और जगदीश राय को घूर रही थी।

और जगदीश राय निशा की निरंतर घूरति निगाहों का अब सहन नहीं हो रहा था। अपराध बोध से वह सर झुकाये बैठा था।

निशा (कठोर रूप से): मुझे बेडशीट चेंज करनी है.।आशा-सशा के आने से पहले.

जगदीश राय (सर झुकाए): हाँ.ठीक है. मैं कर दूंग।।

निशा: नहीं.। मुझे करना है।

जगदीश राय: ठीक है. मैं धोती पहन लू.।

निशा (कठोर आवाज़ से): नहीं.रुकिए.।आपकी मालिश कहाँ पूरी हुई है.मालिश के बाद मैं चेंज कर दूंग़ी।

जगदीश राय , मालिश का नाम सुने चौक गया और कई सवालों के साथ निशा के चेहरे की तरफ देखा।

निशा (मुँह फेरती हुए): चलिए.लेट जाईये.

जगदीश राय: नहीं बेटी.नहीं. मुझे इस तरह शरमिंदा मत करो. मैं तुम्हारा कुसवार हु.मेरी नियत में खोट थी।।।मैंने तुम्हारे साथ वह किया जो एक बेटी बाप को कभी माफ़ नहीं कर सकती. इसलिये मैं माफ़ी मांगने के भी लायक नहीं हूँ.।प्लीज.।चलि जाओ.और मुझे आज से पापा बुलाने की ज़रुरत भी नहीं.

निशा: मैंने कब कहा की आपकी नियत ठीक नहीं थी.बस तरीका सही नहीं था.

जगदीश राय निशा की यह बात सुनकर बौखला गया और गुमराह बच्चे की तरह निशा के चेहरे को घूरता गया।

जगदीश राय: तो क्या.तुम्हे.।यह सब.।

निशा: जी नहीं.मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगा. इससे हैवानियत कहते है.।फॉर योर काइंड इन्फोर्मटिशन

निशा(सर झुकाए): मैं तो समझी थी की आप मेरे दोस्त है. और जो करेंगे प्यार से करेंगे.।

निशा: पर आपने ।। वह किया. जो।।

जगदीश राय थोड़ी देर यह सुनकर चुप रहा ।

जगदीश राय: मैं तुम्हारा दोस्त हु. और इस दोस्त को तुम जो सजा देना चाहो मुझे मंज़ूर है।।

निशा (मुस्कुराते हुए) : सजा तो मैं दूंगी, पर वक़्त आने पर।

और निशा टॉवल पहनी जगदीश राय के बेड पर बैठ गयी।

जगदीश राय अब तक पूरा नंगा अपने हाथों से लंड और टट्टो को छुपाये बैठा था।

निशा: चलिये. लेट जाईये.।
 
जगदीश राय ने , बड़ी कोशिश करके थोड़ा सा मुस्कुराये और लेट गया।

निशा: और आप क्या यह हाथ पकडे लेटे है.ऐसा क्या खज़ाना छुपा रहे है जो मुझे पता ही नहीं. चलिये हाथ दोनों सर के पीछे.समझे.।हाँ ऐसे.।

जगदीश राय अब तक पूरा नंगा अपने हाथो से लंड और टट्टो को छुपाये बैठा था।

निशा: चलिये. लेट जाईये.।

जगदीश राय , बड़ी कोशिश करके थोड़ा सा मुस्कुराये और लेट गया।

निशा: और आप क्या यह हाथ पकड़े लेटे है.ऐसा क्या खज़ाना छुपा रहे है जो मुझे पता ही नहीं. चलिये हाथ दोनों सर के पीछे.समझे.।हाँ ऐसे.।

जगदीश राय निशा की ऑंखों को घूरते , हाथ पीछे ले गया। और अर्ध-खड़ा लंड निशा की ऑंखों के सामने खुला पड़ा था।
निशा ने मुस्कुराते हुए लंड को देखा।

लंड पर अभी खून लगा हुआ था। और लंड जगदीश राइ के पेट पर गिरने से खून पेट पर भी लग गया।

निशा: ओह ओह आप ने अभी तक साफ़ नहीं किया.यह देखो.सभी जगह लाली फैला रहे हो.रुको साफ़ करती हूँ।।।

और निशा ने लंड और पेट को साफ़ करने के लिए ढूँढ़ते हुए इर्द-गिर्द नज़र घुमाया।

निशा: यहाँ तो तौलिया नहीं है.

जगदीश राय : बेटा .मैं बाथरूम जाकर साफ़ करता हु.रुको

जगदीश राय उठने लगा।

निशा: कोई ज़रुरत नहीं.मेरे पास जो है तौलिया.।

और यह कहते हुए निशा ने अपने हाथ को अपने छाती पर ले जाकर , चूचो के ऊपर लगी टॉवल की गाठ को खोल दिया।

जगदीश राय आखे फाडे देखता रहा। और टॉवल के खुलते ही निशा के दो बड़े गोलदार चूचे आज़ाद हो गये।
 
निशा ने बड़े नज़ाक़त से सेक्सी स्टाइल में टॉवल को खीच लिया और गांड उठा कर टॉवल को अपने शरीर से अलग किया।

अब निशा अपने पापा के सामने पूरी नंगी , बेड के किनारे पर बेठी थी। और उसके पापा पुरे नंगे अपने फड़फडाते लंड के साथ उसके सामने लेटे हुये थे।

जगदीश राय निशा की चूचियों को बारीक़ी से निहार रहा था। गोरी भरी हुई चूचो के बीचो-बीच पर गुलाबी निप्पल।

निशा ने अपने चूत को जांघो से ढक रखा था।

निशा: हाँ.अब इसे साफ़ कर देती हु.क्या घूर रहे हो पापा.खा जाओगे क्या।।हे ह

जगदीश राय: नहीं.बेटी. मैं तोह.।।।

निशा: हाँ.खा भी सकते हो.भेड़िये का रूप तो आपने दिखा ही दिया.

जगदीश राय : बेटी .मैं तो बस तुम्हारी सुंदरता निहार रहा था।।

निशा को यह सुनकर अच्छा लगा।

निशा: अच्छा.क्या सुन्दर लगा.बताईये.

जगदीश राय : बस यह ही सब.

निशा: खुलकर बताइए.

और साथ ही निशा ने टॉवल जगदीश राय के लंड पर डाल दिया और लंड को टॉवल से दबोच लिया।

जगदीश राय के मुह से आह निकल गयी।

जगदीश राय : आह.ओह.तुम्हारी चूचे बेटी.मस्त है।।।

निशा :अच्छा.क्या मस्त लगा इसमें.सभी के ऐसे ही होते है.

कब निशा ने टॉवल हटा दिया। जगदीश राय का लंड अब पुरे आकार में आ रहा था।

निशा ने झटके से अपनी दायी हाथ से लंड को हाथो में दबौच लिया।

जगदीश राय निशा के हाथ के स्पर्श से पूरा गरम हो चूका था।

निशा ने अपने मुठी के अंदर लंड को बढते हुए महसूस कर रही थी।

निशा ने पूरी ताकत से लंड के चमडी को पूरा निचे तक सरका दिया।

जगदीश राय ज़ोर के इस झटके से उछल पडा।

निशा (बेदर्दी से हस्ते हुए): बताइये.क्या मस्त लगा.

जगदीश राय : आह.आहह.।।तुम्हरी निप्प्प्पल.।कितने गुलाबी.तुम्हारी.।चुचे का आकार.सभी.

निशा: हम्म्म.अच्छा.तो ...इसलिये यह हज़रत फने खान बने हुए है.और देखो कितना खून लगा हुआ.है

और यह कहते हुए निशा ने खुरदरे टॉवल से लंड के कोमल टोपे पर रगड़ना शुरू किया।

जगदीश राय: अरे रुक जाओ बेटी.ऐसे नहीं. करते.।रुक जाओ.
 
निशा (हँसते हुए): यही आपकी सजा है.।हाथ पीछे ले जाकर लेटे रहो.जब तक साफ़ नहीं कर देती आपको सहना पड़ेगा.

और निशा लंड के कोमल टोपे पर टॉवल रगड़ती रही।

जगदीश राय मछली की तरह उछल रहा था। और निशा 9 इंच का लंड अपने मुलायम हाथ से जकड़ रखी थी।

वह बड़े प्यार से गुनगुनाती हुई लंड को 3 मिनट तक साफ़ किया।

निशा: लो।।हो गया आपका हथियार साफ़.

जगदीश राय ने लंड के तरफ देखा। लुंड के टोपा पूरा लाल हो चूका था। जगदीश राय तेज़ी से सास ले रहा था।।

निशा: क्यों.कैसी लगी सजा.यह सिर्फ पार्ट 1 था.

जगदीश राय : आहह.तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी.बेटी

निशा: चलिए.अब मालिश शुरू.

निशा ने तेल लिया और जगदीश राय के पेट और हाथो में मलने लगी। नंगी निशा लगभग अपने पापा के ऊपर चढ़कर मसाज कर रही थी।

जगदीश राय का शरीर का तेल निशा की चूचियों और जाँघो में लग रहा था। जगदीश राय मदहोश होकर सब सह रहा था।

निशा: अब फिर से पैरो की बारी.।

और निशा ने वह किया जो जगदीश राय को जन्नत का सैर करवा दिया।

निशा: पापा.आपके पैर इतने बड़े है मैं उनतक यहाँ से पहुच नहीं पाती। क्या मैं आपके ऊपर बैठ सकती हु?

जगदीश राय : ऊपर.मतलब।।?

निशा: मतलब.ऐसे.।

निशा ने उल्टी होकर अपने पापा के पेट की इर्द-गिर्द घुटनो के बल बैठ गयी। और फिर धीरे से पापा के तेल से लथपथ पेट पर अपनी गरम चूत को चिपका दिया।

जगदीश राय की 20 साल की बेटी अब नंगी होकर उनके ऊपर बैठी थी। मुलायम चूत और पेट के मिलन से जगदीश राय का लंड फडफडाने लगा।

निशा: ठीक है.पापा. कहीं मैं बहुत हैवी तो नहीं हु न.

जगदीश राय : नहीं बेटी.।बिल्कुल नहीं.।बहुत अछा लग रहा है.

और जगदीश राय ने पीछे से निशा के ऑवर-गिलास शेप को निहारते हुये, पीठ से हाथ सरकाकर कमर तक ले गया।

और दोनों हाथो से कमर को दबोच लिया।

निशा अब तेल लेकर पैरो का मसाज करने लगी।

जब भी निशा जगदीश राय के घुटनो तक हाथ चलाती, अपनी गांड उठाति। और अपने पापा को अपनी गांड के छेद की झलक दिखाती।

जगदीश राय अब निशा की दोनों गांड के गालो पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया था।

निशा जानती थी की उसके पापा को बहुत खूबसूरत नज़ारा पेश हुआ है। और वह उसकी चूत भी क़रीब से देखना चाहते है। और वे अपने लंड का मालिश भी करना चाहते है।
पर वह यह जान बुझकर टाल रही थी.अपने पापा के साथ खेल रही थी।

निशा: पापा.मज़ा आ रहा है.कही सो तो नहीं गए.हे हे।

जगदीश राय : नही.।बेटी.ऐसे ही करते रहो.चाहो तो थोड़ा ऊपर भी मसाज कर सकती हो.

निशा: पहले नीचे तो कर लू.बस हो ही गया।।थोड़ा सबर तो कीजिये पापा.

निशा: वैसे।।लगता है आप भी मेरा मसाज कर रहे है.।

जगदीश राय : क्या करू बेटी.तुम इतनी सुन्दर हो की।।रहा नहीं जा रहा. अगर तुम थोड़ा ऊपर कर दो तो मजा आ जाए।।।

निशा: अच्छा.कहाँ.यहाँ.?

और यह कहते निशा ने हाथो से दोनों टट्टो को हाथ से दबोच लिया।

जगदीश राय : आआअह.।हाँ.वही।

निशा: ठीक है.।पर इसके लिए मुझे थोड़ा पीछे बैठना होगा.

और यह कहते हुए निशा अपने बड़ी गांड जगदीश राय के छाती में समा देति है और आगे के तरफ झूक जाती है।।

निशा: यह ठीक है पापा.आप कम्फर्टेबल तो है न।।।

जगदीश राय ने कुछ जवाब नहीं दिया। उसके चेहरे के 3 इंच के दूरि पर अपनी बेटी निशा की सुन्दर गुलाबी चूत पूरी फ़ैली हुई थी।
 
निशा अपने क्लाइटोरिस पर हुए इस हमले से उछल पडी। वह अपने पापा के चंगूल से निकलना चाहती थी पर पापा के पकड़ से छुड़ा नहीं पायी।
और कुछ ही क्षणो में उसका पूरा शरीर अकड गया। और वह कांपते हुए तेज़ी से झड गयी

जगदीश राय ने जान-बुझ-कर चूत के होठ ऊँगली से खुले रखे थे। क्लाइटोरिस चूसते हुए उसके आखों के सामने चूत के होठ और क्लाइटोरिस फ़ैल गया और चूत के अंदर से तेज़ी के पानी बहने लगा।

जगदीश राय ने तुरंत क्लाइटोरिस को छोडते हुए चूत के द्वार पर अपना मुह चिपका दिया और पानी चाटने लगा।

निशा कुछ एक मिनट तक अपने पापा के ऊपर उलटी लेटे झडती रही। और वही ढेर हो गयी।

निशा के झडने के बाद भी जगदीश राय ने चूत चाटना बंद नहीं किया। वह निशा की चूत के रस को खोना नहीं चाहता था।

कुछ देर बाद जगदीश राय ने निशा की गांड को उठाया और निशा को देखा।

निशा वही जगदीश राय के पेट के ऊपर तेज़ सासे लिए सो रही थी। दाए हाथ में लंड था और बाए हाथ टट्टो में समाया हुआ था। लंड निशा के गालो पर सटा हुआ था।

अपने पापा का लंड गालो पर लिए सोये हुए निशा का सुन्दर चेहरा देखकर, जगदीश राय को अपनी बेटी पर बहुत प्यार आया।

जगदीश राय: निशा.निशा बेटी.तुम ठीक.हो.निशा।।

निशा ने धीरे से अपनी ऑंखें खोली और लंड के पीछे से उसके होठ मुस्कराए।

जगदीश राय: आ जाओ बेटी .आ जाओ ।।अपने पापा की बाहो मैं.

निशा धीरे से उठी और जगदीश राय ने अपनी बेटी की नंगी कापते शरीर को अपने विशाल बाहों मैं लेकर सम्भाला।

कोई 5 मिनट तक निशा इसी तरह अपने पापा की बाहों में नंगी पड़ी रही।

फिर निशा धीरे से उठी और अपने पापा के ऑंखों में देखा।

दोनो एक दूसरे को घूरते रहे।

और निशा ने पापा के कठोर लंड को अपने हाथों में लेकर हिलाना शुरू किया।

निशा लंड के हिलने से जगदीश राय के चेहरे का हाव भाव पढ रही थी।

जगदीश राय से अब रहा नहीं जा रहा था। पर वह पहली बार वाली गलती दोहरना नहीं चाहता था।

जगदीश राय: निशा बेटी।।अब मुझसे रहा नहीं जा रहा.तुम निचे लेट जाओ.मैं।।

निशा: नहीं.आप लेटे रहिये.।

और निशा जगदीश राय के ऊपर लेट गयी। लंड चूत के द्वार को दस्तक दे रहा था। पर निशा लंड अंदर नहीं सरका रही थी।

जगदीश राय मचल रहा था। निशा पुरे कण्ट्रोल में थी।

फिर निशा ने अपना बाया हाथ निचे ले जाकर लंड के जड़ (बेस) को पकड़ा और धीरे धीरे चूत को लंड पर उतारने लगी।

निशा: आआअह.आह।

जगदीश राय: ओह्ह्ह्हह्ह्ह्।

हर एक मोड़ पर निशा की चूत दर्द से कांप उठती। पर वह यह दर्द सहना चाहती थी। अपने पापा के लिये। अपने लिये।

जगदीश राय समझ गया की निशा की चूत पहली चुदाई से सूजी हुई है और दर्द दे रही है।
 
जगदीश राय: रहने दे. बेटी.।इतना काफी है. और लेने की ज़रुरत नहीं.

लेकिन निशा ने न में सर हिलाया और फिर ख़ुद को लंड पर ढकेलने लगी।

करीब 5 इंच चूत में समा जाने के बाद, निशा रुक गयी। जगदीश राय समझ गया की उसका लंड जड़(बेस) पर ज्यादा मोटा है।

निशा धीरे धीरे लंड पर ऊपर निचे होकर खुद को चुदवाने लगी। जगदीश राय अपने बेटी के चूचो और चेहरे को निहारता उसका साथ दे रहा था।

जगदीश राय जानता था की निशा लंड पूरा लेना चाहती है पर घबरा रही है।

पर यह रास्ता निशा को खुद पूरा करना था।

जगदीश राय: कोशिश करो बेटी.

निशा: आह.।हम्म्म्म.।आआआह आआह आआह.ओह्ह्ह्हह.।

फिर निशा धीरे धीरे अपने पापा का पूरा लंड चूत में समां लिया। चूत 4 इंच के लंड की चौडाई से फैल गई थी।

निशा अपना दायाँ हाथ चूत पर ले गयी एंड जाना की लंड पूरा घूस चूका है।

फिर निशा मुस्करायी। जगदीश राय भी मुस्कराया।

कुछ समय बाद निशा दर्द भूल कर जोर जोर से लंड पर उछलने कूदने लगी। उसके बड़े मम्में उछल रहे थे।

उसने यह सब पैतरे इंटरनेट पर ब्लू-फिल्म्स में देख रखी थी।

जगदीश राय झाडने के कगार पर था। निशा जान गई।

निशा: पापा.अंदर ही छोड दीजिये.

निशा अपने आप को पूरा अपने पापा पर समर्पण करना चाहती थी।

निशा जोर जोर से उचलने लगी। पर जगदीश राय ने अंत वक़्त पर लंड बाहर खीच लिया।

लंड तेज़ी से फवारा छोड़ना शुरू किया। और निशा को अपनी चूत और गांड के छेद पर गरम वीर्य का अनुभव हुआ।

निशा ने सवालिए नज़रो से पापा के तरफ देखा।

जगदीश राय (हफ्ते हुए): नहीं बेटी.।

निशा अपने पापा के ऊपर लेट गयी। लंड अभी भी उगल-उगलकर झड रहा था।

जगदीश राय ने निशा को बॉहो मैं कैद कर लिया।

जगदीश राय उससे बीच बीच में , कभी गालो तो कभी माथे पर किस देता रहा। हाथो से उसकी मुलायम गांड और चूचो को दबाता रहा। और निशा बीच में हाथ से लंड और टट्टो को अपने हाथो से मसाज कर देती।

अब दोनों बाप-बेटी नहीं रहे। दो प्रेमी बन चुके थे।
 
कम से काम आधा घण्टा दोनों ऐसे ही बिस्तर पर एक दूसरे से लीपटे पड़े रहे। दोनों खामोश थे। कमरे में एक अजीब सी ख़ामोशी थी।

जदगीश राय के मन में एक अजीब सा उत्साह थी। और निशा के मन में सुकून।

थोड़ी देर बाद निशा उठी। उठते वक़्त निशा के बाल उसके पापा के जांघो के निचे फस गया था।

निशा हँस पडी।

निशा: हे।।हे .उठिये पापा.आशा-सशा के आने से पहले.

जगदीश राय: और कुछ देर लेटी रहो बेटी.।ऐसे ही.

और जगदीश राय , किसी जवान प्रेमी की तरह , निशा को अपने बांहो में लेना चाहा। और इस कोशिश में निशा के भारी चुचो को छुकर मसल दिया।

निशा: न जी न.मैं तो चली.चलिए.आप भी.

निशा किसी नयी नवेली दुल्हन के जैसे बोल पडी।

जगदीश राय: अच्छा बाबा.।पर एक बात पुछु बेटी.।कैसा लग रहा है तुम्हे.।

निशा: हल्का.बहुत हल्का.वैरी लाइट.जैसे मन से कोई बोझ निकल गया हो.

जगदीश राय:अच्छा.?

निशा (अपनी बाहें फैलाये):.और मैं इस हलके पन में तैरते रहना चाहती हु.सदा आप की बाहों में।।

यह कहते जगदीश राय हँस पड़ा और निशा भी हँस पडी।

और दोनों एक दूसरे के बाँहों में समां गये।

फिर निशा उठी और कमरे में पड़े कपडे और टॉवल उठानी लगी। वह नंगी थी।
और जगदीश राय उसके मोटी गांड और भारी चूचो को देख रहा था।

और निशा बीच-बीच में ताक़ते पापा को देखकर मुस्कुरा रही थी।

अचानक से बेल बजी। दोनों चौक गये। निशा तुरंत कपड़े और बिस्तर पर खून-लगी-बेडशीट लेकर रूम के तरफ चल दी।
 
जगदीश राय ने लूँगी पहनकर दरवाज़ा खोला। सामने आशा को देखकर मन ही मन उदास हो गया।

आशा: अरे पापा. यह क्या.कहीं रेसलिंग करने चले हो क्या. इतना तेल लगा हुआ है.

जगदीश राय: अरे.यह.यह.तो बस.मैं.यु ही.नहाने जा रहा था.

तभी निशा सीडियों से उतार आयी।

निशा (मैक्सी पहने): पापा को डॉक्टर ने कहाँ है तेल लगाकर नहाने के लिए इसलिए.

आशा: अच्छा.तो क्या डॉक्टर ने पेशेंट के बेटी को भी बोला है साथ में तेल लगाने को?. तुम भी तो दीदी तेल लगायी हुई हो.चेहरे पे.हाथ पे.

निशा (झेंपते हुए): वह.तो।।मैं.

जगदीश राय:वह तो मुझे देख्कर।।मेरे साथ.इसने भी लगा दिया।।मेडिकल आयल है न.इसलिये।।

आशा: अच्छा।।स्ट्रँग।।दोनो मिलकर तेल मलो शाम के 4 बजे .मैं तो चली अपनी रूम.

निशा (मन में): साली का दिमाग.कुछ ज्यादा ही फास्ट चलता है.इससे छुपकर रहना एक चैलेंज होगा.

फिर थोड़े देर में सशा भी आ गयी। निशा अपने किचन के कामो में लग गायी।

जगदीश राय जब जब मौका मिलता किचन के सामने से गुज़रता। और निशा को नज़र मारता।

निशा जान-बुझकर कोई रिस्पांस नहीं देती। उसे पता था की पापा उसके लिए बैचैन है।

खाने के टेबल पर भी निशा और जगदीश राय एक दूसरे को देखते और मुस्कराते।

जगदीश राय कभी कभी उसके हाथो और जाँघो को हल्के से छु देता , पर निशा उससे दूर रहती।

रात को सोने से पहले , निशा पापा को दूध देने आयी।

जगदीश राय: बेटी.आशा-साशा 11 बजे तक सो ही जाते है.तुम चुपके से कमरे में आ जाना।।ठीक है.

निशा (हँसती हुई): नहीं पापा.मैं नहीं आऊँगी.आप आराम कीजिये.
 
जगदीश राय: पर.क्यों.बेटी.कुछ नहीं होगा.डरो मत.।

निशा (फिर हँस्ते हुए): अब आप एक बच्चे की तरह सो जाईये.चलिये।।

जगदीश राय: पर.

निशा(दरवाज़ा बंद करते हुए): गुड नाईट.स्वीट ड्रीम्स।।हे हे.

जगदीश राय रात भर करवटें बदलता रहा।

दिन में हुई घटनाओ, निशा की गिली चूत, उसपर लगी लाल बड़ी क्लिटोरिस, चूचे, गुलाबी निप्पल , मुलायम चमड़ी उसे सोने नहीं दे रहे थे।

वह खुद निशा के रूम में जाना चाहता था। कोई 4 बजे उसकी आँख लगी।

सूबह 8 बजे जगदीश राय की नींद बर्तनो की आवाज़ से खुली।

जगदीश राय मुह हाथ धोकर हॉल में पहूंच गया। निशा एक लूज मैक्सि, जो पैरो तक ढकी हुई थी, पहनी नास्ता बना रही थी।

निशा ने अपने गीले बाल एक सफ़ेद टॉवल में बांध रखे थे। और पानी की कुछ बूँदे बालों से गिरकर निशा के गर्दन पर फिसल रहा था।

जगदीश राय निशा का यह रूप देखकर बहुत उत्तेजित हो गया था।

निशा: अरे पापा।।आ गए.रुको मैं अभी चाय लेकर आती हूँ।

जगदीश राय: ओह्ह्ह्हह

जगदीश राय , रूठे हुए अंदाज़ में निशा की तरफ देखा।

निशा (मुस्कुराते हुए): क्या हुआ पापा.नाराज़ हो.मुझपर.

जगदीश राय: और नहीं तो क्या.।कल सारी रात मुझे नींद नहीं आई।

निशा (मुस्कुराते हुए): क्यूँउउ?

जगदीश राय: अब बनो मत.तुम जानती हो.क्यो?

निशा (मुस्कुराते हुए): अच्छा जी.तो सारी रात किया क्या .हे हे.

जगदीश राय (बच्चे की तरह रूठे हुए): और क्या .तुम्हारा हर अंग मेरे आखौं के सामने झलक रहा था।।नीन्द कैसे आती.

निशा (चिढ़ाते हुए):ओह ओह .सो सैड।।।

जगदीश राय: वह छोडो।।नाशता तैयार है या नहीं.

निशा: आपके लिए तो दो दो नाश्ता तैयार है.
 
Back
Top