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Hindi Sex Stories By raj sharma

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प्रीति ने कुछ कहा नही और अपने गर्दन जीत की ओर घुमा दी, जैसे

कोई अनोखा आकर्षण था जीत की आँखों में कि प्रीति ने झुक कर

अपने गरम होठ जीत की होंठो पर रख दिए. जीत ने भी जोरों से

उसके होंठो को चूस्ते हुए अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे डाल दी और उसकी

ज़ुबान को चूसने लगा.

जीतने एक हाथ से प्रीति के मम्मे दबाते हुए उसे अपनी बाहों में भींच

लिया. प्रीति ने भी अपनी बाहें फेला जीत को आगोश में ले लिया.

प्रीति ने अपने गर्दन घुमा दूसरे सोफे की ओर देखा तो पाया कि

रश्मि राज की गोदी में उसकी ओर मुँह किए बैठी है. राज उसका टॉप

उतार उसके मम्मे चूस रहा था.

जीत ने जैसे ही प्रीति को सोफे पर लिटाया प्रीति फिर जीत को देखने

लगी. जीत मुस्कुराते हुए उसके ब्लाउस के बटन खोलने लगा. जीत ने

उसकी आँखों में झाँकते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. जैसे ही

जीत नेउसके निपल की ओर अपना चेहरा बढ़ाया प्रीति ने उसकी आँखों

में प्यार झलकते पाया.

प्रीति ने अपने शरीर में एक अजीब ही सरसरी महसूस की जैसे ही

जीत उसके पूरे निपल को मुँह में ले चूसने लगा. जीत का एक हाथ

साथ ही साथ उसके मम्मे दबाता जा रहा था. प्रीति ने ज़ोर की सांस ली

और उसे अपनी चूत गीली होती हुई लगी.

उसके दोनो निपल चूसने के बाद जीत खड़ा हो अपनी शर्ट उतारने

लगा. प्रीति को उसकी चौड़ी छाती और भारी कंधे बहोत ही अच्छे लग

रहे थे.

जीत उसके पावं के बीच बैठ अपने दोनो हाथों से उसकी जीन्स के

बटन खोलने लगा जैसे कोई बच्चा अपने जनमदिन का उपहार खोलता

है. प्रीति ने मुस्कुराते हुए अपने कूल्हे थोड़े उठा दिए.

जीत ने उसकी जीन्स के साथ साथ उसकी पॅंटी भी उतार दी. जीत उसकी

जांघों के अन्द्रुनि हिस्से को चूमते हुए उपर की ओर बढ़ा. प्रीति ने

अपनी आँखें बंद कर अपनी टाँगे और फैला दी और जीत की जीब का

आनंद लेने लगी.

जीती उपर की ओर बढ़ा अब उसकी चूत के बाहरी हिस्से पर अपनी ज़ुबान

हिला रहा था. जीत सही में इस मामले में किसी एक्सपर्ट से कम नही

था. वो अपनी ज़ुबान को चूत के चारों और घुमा चूत की पंखुड़ियों

पर अपने जीब मसल देता.

प्रीति आनंद के नशे में खोई हुई थी, कमरे में सिसकारियों की

आवाज़ गूँज रही तो जो टीवी से आ रही थी.

प्रीति ने अपनी चूत थोड़ा सा उपर उठा दी, उसके इशारे को समझ

जीत अब उसकी चूत को चूस रहा था. साथ ही साथ उसने एक हाथ से

उसकी चूत को फैला अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी. अब वो अपनी

उंगली को भी अंदर बाहर कर रहा था और जीब से चूस भी रहा था.

प्रीति के मुँह से वैसी ही सिसकारिया निकल रही थी जैसी टीवी से आ

रही थी, "ऊऊऊऊः जीईईट चूऊवस्ते जाऊ ओह हाआअँ

आईीईसीई और ज़ोर से चूऊऊऊसो ना"

जीत और ज़ोर से उसकी चूत को चूसने लगा. प्रीति का शरीर आकड़ा

और उसकी चूत ने जीत के मुँह में अपना पानी छोड़ दिया. जीत उपर

उठा और प्रीति के होंठो को ज़ोर से चूमता हुए प्रीति की ही चूत का

पानी उसके मुँह मे डाल दिया. प्रीति भी अपनी चूत के पानी का स्वाद

लेने लगी.

"मुझे तुम्हारी चूत का स्वाद अछा लगा." जीत उसके सामने खड़े होते

कहा.

प्रीति ने अपनी नज़र उसके खड़े लंड पर गढ़ा दी जो उसकी जीन्स में

तंबू बनाए हुए था. प्रीति घुटनो के बल बैठ उसकी जीन्स के बटन

खोलने लगी. उसकी जीन्स को नीचे खिसका उसने अंडरवेर भी नीचे कर

दी. जीत का खड़ा लंड एकदम साँप की तरह फूंकर मार रहा था.

प्रीति उसके लंड को अपने हाथों से पकड़ ऊपर से नीचे तक चाटने

लगी. फिर उसने उसके लंड के सूपदे दो चूमते हुए अपने मुँह में

लिया. जीत के पूरे लंड को अपने मुँह में ले चूस्ते हुए आधा लंड

बाहर निकालती और फिर पूरे लंड को अपने मुँह में ले लेती.

उधर राज रश्मि को घोड़ी बना पीछे से उसे चोद रहा था. दोनो के

मुँह से मादक सिसकारिया फुट रही थी.
 


प्रीति अब ज़ोर से अपना मुँह उपर नीचे कर जीत के लंड को चूस रही

थी. प्रीति ने देखा कि सही में जीत गरम हो रहा है और अपने

लंड को ज़ोर से उसके मुँह मे दे रहा था. उसके लंड से चूत रहे पानी

का स्वाद आ रहा था उसे.

प्रीति महसूस कर रही थी जीत का लंड उसके होंठो से लेकर उसके

गले तक जा रहा था. उसने अपने आपको जीत के हवाले कर दिया जो और

तेज़ी से धक्के लगा रहा था. थोड़ी देर बाद जीत ने अपना लंड प्रीति

के मुँह से बाहर निकाल लिया.

"जीत में चाहती हूँ कि अब तुम मेरी कसकर चुदाई करो." प्रीति

बोली.

बिना कुछ कहे जीती प्रीति की टाँगो बीच आ गया और उसकी दोनो

टाँगे उठा अपने कंधे पे रहने दी. जीत अब अपने लंड को उसकी चूत

पर रगड़ गीला करने लगा. जब उसका लंड पूरा गीला हो गया तो उसने

एक ज़ोर का धक्का लगा जड़ तक अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया.

जैसे ही जीत के लंड प्रीति की चूत की जड़ों को छुआ उसके मुँह से एक

मादक सिसकारी निकल पड़ी.

जिस आसान से वो चुदवा रही थी उसमे उसे जीत के लंड का पूरा अनुभव

हो रहा था. जीत का लंड उस अंजान व्यक्ति जितना बड़ा तो नही था

लेकिन फिर भी प्रीति को दर्द और सुख दोनो का आनंद आ रहा था.

जीत पहले तो धीमी रफ़्तार से प्रीति को चोद रहा था फिर उसके

धक्कों ने तेज़ी पकड़ ली.

"हां चूऊड़ो मुझीईई और्र्र्ररर जोर्र्र्र्र्र्ररर से ओह

आआआः तुम्हााआअरा लुंद्द्द्दद्ड किठनाआअ अचह्ा हाईईईईईई."

प्रीति के मुँह से सिसकारिया निकल रही थी.

प्रीति की मादक सिसकारियों ने जीत में और जोश भर दिया. जब

प्रीति उसके धक्के का जवाब आने कूल्हे उछाल देती उसे अपना खून में

उबाल बढ़ता नज़र आता. और जब प्रीति नेज़ोर चिल्ला अपने कूल्हे और

उठा दिए और उसके लंड को अपनी चूत की गिरफ़्त मे ले लिया, तो उसे

अपना पानी चूत ता महसूस हुआ.

जीत को ऐसा लगा कि प्रीति की चूत ने उसके लंड को पूरा अपना

गिरफ़्त में ले लिया है और उसके लंड से एक एक बूँद निचोड़ रही

है. प्रीति की चूत ने भी पानी छोड़ दिया था. प्रीति आनंद के

सागर में खो गयी थी.

"प्रीति ये चुदाई वाकई ग़ज़ब की थी." जीत ने कहा.

"तुम कहीं जाना नही में अभी आता हूँ." कहकर जीत बाथरूम की

ओर चला गया.

प्रीति अपनी टाँगों को फैलाई आँखें बंद कर लेटी हुई थी. उसकी

चूत से अभी जीत का और उसका मिला जुला वीर्य टपक रहा था. वो

अभी चुदाई के आनंद में खोई हुई थी.

 


प्रीति ने अचानक अपने जांघों और चूत पर किसी का स्पर्श अनुभव

किया, उसने महसूस किया कि कोई उसकी चूत को चाट रहा है. उसके

शरीर में फिर गर्मी आने लगी. उसने अपनी आँखें खोल देखा कि

रश्मि उसकी टाँगे बीच झुकी उसकी चूत को चाट रही थी.

हालाँकि प्रीति ने इसके पहले कभी किसी औरत के साथ का अनुभव

नही किया था, पर आज उसे आनंद आ रहा था. वो मान गयी कि रश्मि

की जीब इस कला में महारत हासिल है. जिस ढंग से उसकी जीब उसकी

चूत को चाट रही थी उसे उसके शरीर में उत्तेजना बढ़ती जा रही

थी.

इतने में उसने देखा कि उसका पति राज ने रश्मि के पीछे आ अपना लंड

उसकी चूत में पेल दिया है.

जैसे ही राज रश्मि की चूत में धक्का देता, रश्मि की जीब ज़ोर से

प्रीति की चूत मे घुस जाती. प्रीति आनंद के अनोखे सागर में

डूब चुकी थी, उसके मुख से आनंद की मादक सिसकारियाँ और आवाज़े फुट

रही थी.

"हां रश्मि और ज़ोर से उसकी चूत को चूसो" राज ने अपने धक्कों की

रफ़्तार बढ़ाते हुए कहा.

राज को इतनी कस के रश्मि की चुदाई करते देख प्रीति से अब रोका ना

जा रहा था, रश्मि के मुँह में अपना पानी छोड़ने के अलावा उसके पास

कोई चारा नही था.

राज ने अपना लंड रश्मि की चूत से बाहर निकाला, "रश्मि यहाँ आओ"

रश्मि मूडी और अपनी ज़ुबान बाहर निकाल दी. राज ने अपने लंड को

घस्ते हुए अपना वीर्य रश्मि की बाहर निकली जीब पर छोड़ दिया.

रश्मि राज के सारे वीर्य को पी गयी और प्रीति के बगल में आ

बैठ गयी.

"अपने पति को मुझसे बाँटने के लिए शुक्रिया," कहकर रश्मि ने

प्रीति के होंठो पर अपने होंठ रख दिया. "वो बहोत ही अच्छा प्रेमी

है."

प्रीति ने अपने पति के वीर्य का स्वाद अपने होंठो पे महसूस किया, उसी

समय जीत हॉल में दाखिल हुआ.

"वाह क्या नज़ारा था, इस नज़ारे ने मेरे लंड को फिर खड़ा कर दिया

है और में और चुदाई करना चाहता हूँ." जीत ने अपने खड़े लंड

को हिलाते हुए कहा.

प्रीति ने मुस्कुरा कर जीत की ओर देखा और घोड़ी बन गयी. जीत

उसके पीछे आ अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत मे डाल अंदर बाहर कर

रहा था. वो साथ ही अपने अंगूठे से उसकी चूत को रगड़ रहा था.

राज ये सब देख रहा था पर अपने आधे खड़े लंड को पकड़ उसने दूर

ही रहना उचित संहा कारण उसमे इतनी ताक़त नही थी वो उनका साथ दे

सके.

"मेरी बीवी को मर्दों को खुश करना आता है." उसने मन ही मन सोचा.

जब जीत ने देखा कि प्रीति उसकी उंगलियों के ताल से अपने कूल्हे पीछे

कर उसका साथ दे रही है तो उसने अपने उंगली की जगह अपना लंड उसकी

चूत में पेल दिया.

 


जीत अब प्रीति को चोद रहा था और उसके हर धक्के पर प्रीति के

मुँह से सिसकारी निकल रही थी.

"प्रीति में तुम्हे रश्मि की चूत चाट ते हुए देखना चाहता हूँ?'

जीत ने कहा.

रश्मि प्रीति के मुँह के सामने आ अपनी टाँगे फैला लेट गयी. प्रीति

अपनी ज़ुबान निकाल रश्मि की चूत के बाहरी हिस्से को चाटने लगी.

प्रीति ज़ोर से रश्मि की चूत चाट रही थी और वहीं जीत ज़ोर के

धक्के मार रहा था. प्रीति को अपना पानी छुट ता महसूस हुआ और वो

ज़ोर से रश्मि चूत को चूसने लगी.

रश्मि के मुँह से भी सिसकारिया निकल रही थी, प्रीति का शरीर

आनंद में कांप रहा था उसी समय उसने महसूस किया कि जीत ने ज़ोर

के धक्के मारते हुए अपना वीर्य उसकी चूत में डाल दिया है.

रश्मि ने जब देखा कि उसका पति प्रीति की चूत में अपना पानी छोड़

चुका है तो उसने प्रीति का सर अपनी चूत पे दबा अपना भी पानी

प्रीति के मुँह में छोड़ दिया.

चारो लोग निढाल हो थक कर सोफे पर पसर गये. जीत प्रीति के

मम्मे सहला रहा था और राज रश्मि की जांघों को.

"हमे ये सब एक बार फिर दुहराना चाहिए." जीत ने प्रीति के मम्मे

भींचते हुए कहा.

जीत ने सबको कंबल ओढ़ने के लिए दिए. प्रीति खुद ख्यालो मे

खोई हुई थी कि पता नही भविस्य में और क्या लिखा है. थोड़ी

देर मे चारों गहरी नींद में सो गये

दोस्तो आपको ये कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त

 
हिंदी सेक्सी कहानियाँ

पड़ोसन आंटी और उनकी 18 साल की ननद

बात उस समय की है जब मैं ग्रॅजुयेशन पार्ट-1 मे था. हमारे घर के सामने वाला घर खाली था और उसमे 2 मंत्स पहले ही नये किरायेदार आए थे सिंधी फॅमिली थी. उनके घर मे 4 मेंबर थे हज़्बेंड वाइफ 10 साल का लड़का और अंकल की 1 बहन जो 18 साल की थी.

आंटी के बारे मे आप लोगो को बता दूं वो 30-32 साल की भरे सरीर की और बहुत गोरी थी. उनका साइज़ 38-28-42 , हाइट 5 फीट 5 इंच. उनकी चुचियाँ क्या मस्त थी और चूतड़ , जब वो चलती तो कयामत लगती थी. दिल करता था कि उनकी गांद की दरारो मे लंड को 24 घंटे डाला ही रहू.

और उनकी नंद वो तो सेक्स बॉम्ब थी.. उसका नाम एसा था जो 17 साल की मस्त जवान कुड़ी. जिसको देख कर भगवान का भी लंड खड़ा हो जाए फिर तो मैं आम इंसान हूँ. उसकी साइज़ 34-24-40 थी.

कुछ 1 महीने मे ही हमारे घर के साथ उनका रीलेशन अछा हो गया था काफ़ी आना जाना लगता रहता था आंटी का .तो एक दिन की बात है मम्मी को लेग्स पे दर्द हो रहा था और मे ऑफीस मे था वो बगल वाली आंटी हमारे घर आई तो देखा कि मम्मी को बोहोत पेन हो रहा है तो उन्होने मम्मी को इयोडीक्स से मालिश किया थोड़ा देरी के लिए मम्मी को रिलीफ मिला और आंटी भी वही बैठी हुई थी ……..

मेरा भी उस दिन कोई ज़्यादा काम नही था और मैने भी जल्दी घर चला गया था तो आंटी बोली कि मम्मी को लेग मे पेन हो रही है तो मैने मम्मी को कहा लाओ मे मालिश कर देता हूँ और मैने मालिश कर दी और थोड़ा देरी में मम्मी को रिलीफ मिल गया तो आंटी ने कहा वाह अर्णब क्या मालिश करते हो इतना जल्दी आराम मिल गया.तो मम्मी बोली अर्णब हम लोग के फॅमिली मे फेमस है मालिश के लिए इसका हाथ मे जादू है तब आंटी ने कहा चलो कभी मेरे को पेन हुआ तो आप ही मालिश कर देना तो मैने हां मे हां मिला दिया.

आप लोगो को आंटी के बारे मे बताना तो भूल ही गया हू लेडी क्या लेडी है उनको कोई देखे तो कोई नही बोल सकता कि उनकी एज 32 से उपर है क्या फिगर को मेनटेन कर के रखा है उनका फिगर है 38-28-42 माशा अल्लाह, देखते ही लंड खड़ा हो जाता है. कई बार तो मैने उनकी नाम का मूठ मारता हूँ. फिर कुछ दिन ऐसे ही चल रहा था कि एक दिन घर के सब मेंबर देल्ही गये हुए थे शादी मे तो मम्मी उन्हे ही मेरा ध्यान रखने को कह गयी थी आंड मम्मी लोग 15 दिन के लिए गये थे तो सुबह आंटी ही चाइ लाके देती और रात को मॅग्ज़िमम बार वाहा पे खाना खा लिया करता , एक दिन मैं ऑफीस नही गया मेरी तबीयत थोड़ी खराब थी 11 बजे आंटी और बोली क्या हुआ तुमको आज ऑफीस नही गये तो मैने कहा कि नही अच्छा फील नही हो रहा है तो आंटी ने भी कहा मेरे भी शरीर पेन हो रहा है तो मैने आंटी से कहा आप पेन किल्लर ले लो तो आंटी ने कहा लिया पर रिलीफ नही मिल रही है कल रात से पेन हो रहा है

तभी अचानक से आंटी बोली में तो भूल ही गयी थी कि तू तो इतना अच्छा मालिश करता है मैं बेकार मे पेन मे मर रही हूँ. मैं भी यही चाहता था, फिर मैने कहा ठीक है मैं कर देता हूँ फिर मैने पूछा आंटी पेन कहा हो रहा है तो आंटी बोली पूरी बॉडी मे और आंटी उस टाइम सारी पहन रखी थी तो मैने कहा मेरे घर पे करू या आप के, तभी आंटी ने कहा तुम्हारे घर पे मैने कहा ठीक है आप चेंज कर आओ.

 


फिर आंटी अपने घर गयी और नाइटी पहन के आ गयी में तो बरमूडा मे था और टी-शर्ट पहन रखी थी मैने नीचे चटाई बिछाई और आंटी को कहा लेट जाओ फिर मैने तेल की बॉटल निकाली पाओ से स्टार्ट हो गया उनकी नाइटी को घुटनो तक कर दिया क्या लेग था उनका देखते ही मेरा लंड एक दम टाइट हो गया जैसे पेंट से भर निकल जाए तभी मैने आंटी से कहा आप पेटिकोट खोल दो नही तो तैल लग जाएगा और आंटी ने नाइटी उठा कर पेटिकोट खोल दिया, उनकी गोरी और चिकनी जांघे मेरे सामने थी.

फिर मैं मालिश करते करते उनके जाँघो तक पहुँच गया तब वो सिसकारी भरने लगी तो मैने पूछा क्या हुआ आंटी ने कुछ नही कहा फिर मैने आंटी की नाइटी को ब्रा तक उठा दिया, वो कुछ भी नही बोली. नीचे उन्होने ब्लॅक कर की पॅंटी पहनी हुई थी और उनकी पॅंटी भी गीली हो चुकी थी और मेरा हाल तो बहाल हो गया था जब में पेट की मालिश कर रहा था तब कई बार उनकी पॅंटी के अंदर भी हाथ डाल दिया तब वो और सिसकारी भरने लगी.

मैं तो पागल हो गया था पर मैने ऐसा कुछ नही किया में वेट कर रहा था कि पहले वो कुछ करे मुझे डर भी लग रहा था जब मैं गले तक पहुँचने वाला था तब मैने आंटी को कहा आंटी नाइटी उतार दे तब आंटी ने कहा कि तुम खुद ही उतार दो फिर मैने उतार दिया.

फिर आंटी मेरे सामने खाली ब्लॅक कलर की ब्रा & पॅंटी मे थी और सिसकारी भर रही थी मैने पूछा कुछ रिलीफ मिल रहा है या नही तो आंटी ने कहा हा मिल रहा है मैं फिर शुरू हो गया आंटी के क्लीवेज के बीच मे 20 मिनट मसाज किया और जो बूब्स थे वो तो ऐसा लग रहा था कि मानो ब्रा फाड़ के निकल जाएगा और बोहोत सारा दूध भी मिलेगा पीने को तभी आंटी उल्टी हुई और बोली बेटा क्यो तकलीफ़ कर रहे हो तो ब्रा खोल दो नहीं तो ब्रा मे तैल लग जाएगा और तुम्हे भी परेशानी नहीं होगी मैं भी यही चाहता था जैसे ही मैने ब्रा खोला तो आंटी के बूब्स आज़ाद हो गये और और उनकी निपल्स ऐसी टाइट हो रखी थी कि जैसे कोई 1 साल के बच्चे का लंड खड़ा हो जाता है फिर मैने 20 मिन्स तक आंटी की बड़ी बड़ी और मस्त चुचियो का मसाज किया.

आंटी तो मानो पागल सी हो गयी थी और मेरे लंड का तो बुरा हाल हो चुक्का था , और उनकी नज़र बार बार मेरे लंड की तरफ ही जा रही थी .फिर मैने आंटी से कहा आप उल्टा हो जाओ फिर मैने पीठ की मालिश की तब आंटी ने कहा मेरी गांद की भी मालिश कर दो मैं भी यही चाहता था तब मैने कहा कि आप की पॅंटी उतरनी पड़ेगी तो उन्होने कहा उतार

दो फिर मैने उतार दिया फिर उनकी गंद की मालिश चालू की और बार बार हाथ उनकी चूत मे चला जाता कई बार तो उनकी गंद की छेद मे उंगली डाल दी और कई बार उनकी चूत में वो चीख उठती फिर जब आंटी को सीधा किया तो मैं देखता ही रह गया उनकी चूत तो पूरी गीली हो चुकी थी और पूरी क्लीन सेव चूत थी.

तब में आंटी की चूत के अगल बगल की मालिश कर रहा था तभी अचानक उन्होने मेरे लंड को कोई पकड़ लिया मैं तो घबरा ही गया देखा तो आंटी मेरी चैन खोल के लंड को सहलाने लगी मुझसे भी रहा नही गया और मैने तुरंत अपना पॅंट खोल दिया और टी- शर्ट उतार दिया मैं भी पूरा नंगा हो चुक्का था फिर आंटी मेरी लंड को लेके चूसने लगी लोल्य्पोप की तरह मैं तो पागल हो गया था कयौकी 1स्ट्रीट टाइम कोई मेरे लंड को चूस रहा था फिर हम लोग 69 की पोज़िशन मे आ गये और 15 मिनट ऐसे ही एक दूसरे की चूस रहा थे वो 1 बार झाड़ चुकी थी और मैं भी हम दोनो ने एक दूसरे की कम पी और लेट गये ईक दूसरे की बाहों में.

फिर हमने लिप्स किस चालू कर दिया काफ़ी देर तक लिप्स को चूस्ते रहे और मैने उनके बूब्स को भी बोहोत प्रेस किया फिर मेरा लंड खड़ा हो गया था तब आंटी ने कहा और रहा नही जाता मेरे राजा अब चोद डालो बना दो आज इसे भोसरा और मैं उनकी जाँघो के बीच आके बैठ गया और एक ही झटके मे पूरा का पूरा लंड उनकी चूत मे डाल दिया वो चीख उठी तभी मेने उनको लिप्स किस फिर से स्टार्ट कर दिया और वो कहने लगी निकाल दो अपना लंड बोहोत दर्द हो रहा है वो 1 साल से चुदी नही थी यह बात उसने मेरे को बाद मे बताया.

फिर मैं वैसे ही कुछ देर पड़ा रहा और उनके निप्पल्स को चूस्ता रहा, थोड़ी देर मे आंटी अपने मस्त चुतड़ों को नीचे से बार-बार उठाने लगी मैं समझ गया कि दर्द कम हो गया और इस रंडी को मस्ती आने लगी है.

तो मैने झटके मारना सुरू किया वो अपनी गंद उछाल उछाल के देने लगी..और बहुत मस्ती मे बोलने लगी आआहह..मेरे राजा बहुत दिनो बाद मेरी इतनी मस्त चुद रही है…आआअहह.. चोदो मुझे और चोदो … फाड़ डालो मेरी बूर को…..आआहह… ऐसे ही मुझे रोज़ चोदो मेरे राजा
 


मुझे छ्चोड़ कर मत जाना…आआआहह….ऊऊहह माआअ…कितना मज़ा है तगड़े लंड से चुद का….चोदो जानू चोदो…मैं तुमको अपनी कुँवारी नंद की चूत भी दिल्वाउन्गि..तुम भी देखना सिंधी माल कितना गरम होता हैं…लेकिन उनके पति इतना मस्त चोद ही नही पाते..आआहह मेरे राजा…मेरे जानू…मैं तो तुम्हारी चुड़दकड़ आंटी बनूँगी..आआहह

करीब 35 मिनट के बाद मैं झाड़ गया उसकी बूर मे ही पानी छोड़ दिया उसकी पर्मिशन लेके तब उस दोरान वो 3 बार झाड़ गयी थी, फिर उसकी गंद भी मारी……

दूसरे दिन सुबह 9 बजे मैं नींद मे था तभी मुझे एहसास हुआ कि कोई मेरे लंड को पकड़ कर उपर नीचे कर रहा है..मैने आँख खोली तो देखा वो ऐसी थी जो बहुत प्यार से मेरे लंड को पकड़ कर धीरे धीरे हिला रही है.. मेरा लंड उसके नाज़ुक हाथो का स्पर्श पा कर एकदम टाइट हो गया था.

तभी मैने उसको अपने उपर खींच लिया..वो डर गयी..तब मैने उसकी चुचियो को दबाते हुए पूछा मेरी मस्त चूत ये क्या कर रही थी..तो जो उसने कहा वो सुन कर मैं आश्चर्य मे पड़ गया, उसने बताया कि उसने मेरी और अपनी भाभी की चुदाई कल देख ली थी.

और अब उसको जब बर्दाश्त नही हुआ तो वो मेरे पास आ गयी चुदने के लिए. क्या बताउ दोस्तो उस को चुदासि देख कर मेरा बहुत बुरा हाल हो गया. मैने उसके सारे कपड़े उतार दिए. क्या लग रही थी…छ्होटी छ्होटी चुचियाँ..उस पर हल्के भूरे रंग के निप्पल्स, 2 इंच की चिकनी और सुनहरे रेशमी लेकिन छोटे बालो वाली अनचुदी बूर…मैं तो पागल हो गया.

एक तो 18 साल की माल, और सिंधी..मैने उसकी बूर को 3 बार चोदा…अब तो नंद और भाभी दोनो एक साथ चुदवाति हैं..मेरी तो मौज ही मौज हैं.

समाप्त
 
कामुक-कहानियाँ

चूत मे भी आग लगती है

सब से पहले मैं अपने शरीर के बारे मे बता दूं. मेरा रंग सांवला और मेरी हाइट कम है. मगर मेरे मम्मे बहुत भारी भारी. पतली कमर के नीचे फिर से भारी चूतड़.

इस तरह मेरा बदन तो सब को सेक्सी लगता था मगर कोई मुझ से दोस्ती नहीं करना चाहता था. जब मैं जवान हुई तब तक मेरे माँ बाप मर चुके थे.

मैं अपनी एक दीदी और जीजा जी के साथ रहती थी. मेरी शादी के बारे मे कोई सोचने वाला ही नहीं था. यह सोच सोच के मैं दुखी होती और मेरी चूत गरम होती रहती. मेरी चूत तब कुच्छ ज़्यादा ही गर्मी दिखाने लगी थी. 19 साल की होते होते मैं चुदने के लिए बेताब रहती थी.

यहाँ तक मेरे जीजा जी ने कई बार मेरे मम्मो पर हाथ डाल कर मुझे अपनी ओर घसीटा था. वैसे तो मैं भी सेक्स चाहती थी मगर दीदी का घर बर्बाद नहीं कर सकती थी. इस लिए जीजा जी को झटक देती थी.

सेक्स के लिए मेरे पहले दो प्रयास विफल रहे. मैं ने सब से पहले गली के लड़के को इशारे कर कर के अपने कमरे तक बुलाया. फिर हम नंगे होने लगे. इस लड़के के सामने जैसे ही मेरे भरे भरे मम्मे और गांद आई उसके के लंड ने पानी छ्चोड़ दिया और ठंडा पड़ गया. फिर मेरे तमाम प्रयास के बाद खड़ा नहीं हुआ. आअख़िर मे मुझे उस लड़के की गांद पे लात मारके भगा देना पड़ा.

दूसरा लड़का कॉलेज से पकड़ के लाई. हम दोनो जल्दी मे थे. झट से नंगे हुए और बिस्तर मे कूद पड़े. मुझे लगा आज सब ठीक होगा. हमने झट पट एक दूसरे के कपड़े उतारे और बिस्तर पे लेट गये. मगर जैसे ही उस लड़के के लंड ने मेरी तड़प्ती चूत के होंठ च्छुए उस का भी माल झड़ने लगा. मेरी चूत गरम गरम माल मे नहा तो ली मगर चुद नहीं पाई. अब मैं और ज़्यादा डेस्परेट हो गयी. क्या चुदाई मेरे नसीब मे नहीं थी?

मगर ईश्वर ने मेरे लिए एक मस्त लंड का इंटेज़ाम कर रखा था और वो मुझे जल्दी ही मिल गया वो भी घर बैठे.

'राज शर्मा' मेरे जीजा जी के बड़े भाई का बेटा था. यह लोग गाओं मे रहते थे और 'राज शर्मा' का सेलेक्षन इंजिनियरिंग मे हो गया, उसी शहर मे जिस मे मैं और मेरी दीदी रहते थे. मेरे जीजा जी पोलीस मे थे इस लिए बाहर पोस्टेड थे. शनिवार और इतवार को घर आते थे.

इन दोनो दिन दीदी और जीजा जी कमरे मे बंद रहते और सोमवार की सुबह सारे कमरे मे जगह जगह दीदी के कपड़े बिखरे होते.

'राज' जब शहर आया तो यह डिसाइड किया गया कि वो हमारे साथ ही रहेगा. 'राज' के बारे मे मैं पहले भी थोड़ा थोड़ा सुन चुकी थी. यह सुना था कि वो गाओं मैं अपनी एक विधवा चाची के साथ खूब ऐश कर चुक्का था और चाची को एक दो बार पेट भी गिरवाना पड़ा था.

हमारे घर मे नीचे की मंज़िल मे एक ड्रॉयिंग रूम, एक बेडरूम और एक किचन थी. और ऊपेर दो कमरे और एक बाथरूम. मैं ऊपेर रहती और दीदी नीचे. "राज' के आते ही उस को ऊपेर वाला दूसरा कमरा मिल गया. यह दोनो कमरे बाथरूम के रास्ते से जुड़ सकते थे. हमारे मज़े के लिए पूरी सेट्लिंग थी.

राज के आते ही मैं ने उस को पटाने के हथकंडे स्टार्ट कर दिए.

उस के सामने (जब दीदी ना हो) तो मैं अपने बूब्स पे दुपट्टा नहीं डालती थी और जब वो पीछे से देखे तब अपने चूतदों को ज़्यादा मटका मटका के चलती थी. यह दो दिन चला. तीसरे दिन मैं ने 'राज' को बताया के मुझे स्टॅटिस्टिक्स बिल्कुल समझ नहीं आती (मैं एकनॉमिक्स मे एम ए कर रही थी प्राइवेट्ली). राज बोला के वो मुझे समझा देगा. हमने शाम को ही स्टॅटिस्टिक्स पढ़ने का कार्यक्रम बना डाला. (मेरा कार्यक्रम तो कुछ और ही था…..)
 


शाम से पहले मैं अपने शरीर को "राज' की मस्ती के लिए पूरा तैय्यार किया. अपनी चूत के बाल शेव किए. अंडर आर्म्स को क्लीन किया और अच्छा सा स्प्रे लगाया.

शाम को एक टाइट सी ड्रेस पहन कर मैं "राज' के कमरे मे पहुँच गयी. दीदी पड़ोसन मे गप्पें लगाने गयी हुईं थी.

राज और मैं टेबल पर बैठ गये. मेरे मम्मे ड्रेस फाड़ के बाहर आने वाले थे.

और दिल धधक धधक के छाती से बाहर आने वाला था. जब "राज' पढ़ा रहा था तब मेरा ध्यान कहीं और था. मैं ने अपने पैर से चप्पल उतार के उस के पैर पे दबाया. यह मेरी ज़िंदगी का सब से बड़ा इम्तिहान था. क्या होगा "राज' पर इस का रिक्षन?

राज ने भी मेरी जांघों मे हाथ डाल दिया. हे भगवान तू महान हैं. मुझे मेरा यार मिल गया.

फिर तो मैं ने भी राज को पूरा आगे बढ़ने दिया.

राज ने मुझे अपनी बाँहो मे भर लिया. फिर उस ने मुझे उठा लिया और बिस्तर मे पटक दिया. और मेरे कपड़े बदन से अलग होने लगे. मुझे उन की कोई ज़रूरत नहीं थी. मैं भी राज की पॅंट उतार कर उस के लंड को मलने लगी और उस को चुम्मे की बारिश कर दी.

फिर राज की जीभ मेरे मुँह मे धँस गयी. यह मेरे लिए बड़ा मस्त चुम्मा था. किसी मर्द ने इतना क्लोज़ चुम्मा नहीं दिया था मुझे. मेरी जीभ भी उस के मुँह को टटोलने लगी हम मस्त हो चले थे.

अब तक राज ने मेरी ब्रा तक उतार दी थी और मैं अब सिरफ़ एक पॅंटी मे थी. राज मेरी चूचियो को देख कर पागल हो गया. उन्हे कस के मसलता और फिर चूस्ता और काट भी डाला. मैं ने उस की छाती और कान काट डाले.

अब राज के हाथ मेरी पॅंटी मे घुस गये थे. और उस की उंगलियाँ मेरी चूत के होठ पर मस्ती का जादू दे रही थी.

मैं ने भी उस का लंड बाहर निकाल लिया और उस को चूम चूम के इतना मस्त कर दिया के राज के मुँह से सस्स, ससस्स, सस्सस्स निकलने लगी. जब राज की उंगली मेरे दाने (क्लिट्टी) को परेशान करती तो मेरी भी सिसकारी निकल जाती. मैं उस को रोकने की कोई कोशिश नहीं कर रही थी. थोड़ी देर मैं मेरी चूत का दाना बड़ा और गीला हो गया और उस की उंगली को एंजाय करने लगा.

अब राज मुझे चोदने को अधीर हो चला था. मैं भी बेताब थी. मैं चूत की तरफ उस के लंड को खींचा. राज ने मेरी टांगे अपने कंधे पे रखी और अपने लंड की टिप मेरी चूत से मिला दी.

मैं ने सोचा हे भगवान अब कुच्छ गड़बड़ ना हो. आज मुझे चुद लेने देना. भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली और राज ने अपने लंड पे प्रेशर बढ़ा दिया. मेरी चूत के होंठ इतने खुल चुके थे के उस का सुपरा आसानी से मेरी चूत के होठों मे समा गया.

फिर राज ने फाइनल झटका दिया और दर्द की एक लहर मेरी चूत को पार कर गयी. साथ ही मैं लड़की से औरत बन गयी. दर्द की किस को चिंता थी. मैने राज के लंड को पूरा अंदर लिया और टांगे और फैला कर उस मस्त कर दिया.

 


मेरी शेव्ड चूत मे राज का लंड पूरा समाया हुआ था. फिर राज ने उस को बाहर निकाला. फिर अंदर तक पेल दिया. एक फूच की आव्आआज़ हुई शायद मेरी चूत के अंदर की हवा चूत और लंड के बीच के गॅप से निकली. सच कहती हूँ बड़ा सेक्सी माहौल बन गया उस आव्आआज़ से.

राज ने पहले धीरे धीरे और फिर तेज़ चोदना शुरू किया. मैं मस्त होने लगी. शरीर मे बड़ी अजीब सी सन सनी होने लगी थी. मैं उस के लंड को अपने पेट तक महसूस कर रही थी और फिर भी और अंदर लेना चाहती थी. इस के लिए मैं उस के कंधे पे लटक सी रही थी और जब राज अंदर का धकका मारता तो मैं अपने चूतड़ ऊपेर सटा देती.

उहह अया की आवाज़े निकल रही थी. और फॅक फॅक की वो सेक्सी आवाज़ लगातार हुए जा रही थी.

फिर मेरे शरीर की हलचल बढ़ने लगी. मेरे पेट की मसल्स बिना रुके सिकुड और फेल रही थी. मस्ती मे पागल सी हो रही थी. और राज मेरी चूत को पेले ही जा रहा था. अब वो उस को कभी कभी गोल गोल भी घुमा रहा था. इस से उस के लंड की जड़ मेरी चूत के होठों पे पूरी रगड़ खा रही थी और चूत रस छ्चोड़ छ्चोड़ कर रस से भर गयी थी.

फिर मुझे लगा एक भूचाल आ गया. मैं अपने होश खो बैठी और ज़ोर ज़ोर से ऊऊओ आआ ऊओ ईई करने लगी. जब यह भूचाल थमा उस से पहले राज ने भी अपने लंड से ढेर सारा माल मेरी चूत मे छ्चोड़ दिया था और निढाल होके मेरे मम्मो की बीच सिर रख कर लेट गया.

बड़ा मस्त लवर मिला था मुझे... क्या मेरी चूत को चाट ता और चोद्ता था...आआआआआआआआआअहह!!! हाई रे मेरी कककचूऊऊऊथततत्त...और उसका मस्त लौदाााआआआआ...................

उसी रात हमने एक बार फिर चुदाई करी. हम दोनो को खूब मज़ा आया. सुबह जब पाँच बजे उठने लगी तो राज ने मुझे फिर दबोच लिया. मैं ने राज को कहा अभी मेरी चूत दुख सी रही है. इस को चुदने की आदत पड़ने दो फिर चाहे जितनी बार चोदना. राज मान गया और मुझे जाने दिया.

उस दिन के बाद हमने और राज ने चार साल बे-इंतहा सेक्स का मज़ा लिया. एक दिन मे मॅग्ज़िमम 10 बार और कम से कम दो बार सेक्स चलता रहा. प्रेग्नेन्सी की परेशानी से बचने के लिए मैं ने अपनी चूत मे कॉपर टी डलवा ली.

हमारी सेक्स की थोड़ी थोड़ी खबर दीदी को भी हो ही गयी थी. मगर वो चुप रही क्यूँ के उन्हे शायद पता था कि मैं कितनी चुदैल हूँ. और राज अगर मुझे तृप्त नहीं रखेगा तो मैं गली के लड़कों से इश्क़ करूँगी या फिर उन के पती के चंगुल मे ही आ सकती थी.

राज और मैं अपनी MC के दिनो मे भी सेक्स किए बिना नहीं रह सकते थे. MC के पहले दिन जब मेरी चूत मे से खूब खून निकलता था तब सेक्स करने से कई बार राज और मेरे कपड़े और बिस्तर खराब हो जाते थे. इस से बचने के लिए राज ने मुझे गांद मरवाने की आदत भी डाल दी. अब मैं अपने शारीर के तीनो छेद मे राज का लंड लेती थी.

राज और मेरे सेक्स रिलेशन्स चार साल चले, उस के बाद राज की इंजीनियारिग पूरी हो चली थी फिर मेरी भी शादी हो गयी. शादी से पहले मैं ने राज के साथ कॉपर टी निकाल कर सेक्स किया और उस के प्यार को अपने पेट मे ले के पति के घर गयी.

जब मैं विवाह मंडप पर बैठी उस से आधे घंटे पहले राज और मैं ने चुदाई की और मंडप मे मेरी चूत से राज शर्मा का माल निकल निकल के मेरी पॅंटी गीली कर रहा था.

दोस्तो कैसिलगी ये मस्त कहानी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त...

 
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