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Hindi Sex Stories By raj sharma

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चचेरी और फुफेरी बहन की सील--2

गतान्क से आगे..............

दूसरे दिन सुबह मेरी माता जी को कुछ काम से बाजार जाना था, मेरी बीवी स्कूल चली गई थी, मैं कल वाले समय पर ही चाचा जी के कमरे की तरफ चला गया और मैंने आज पहले ही निश्चय कर लिया था कि आज अपनी प्यारी सेक्सी बहना की कुँवारी चुनमूनियाँ की सील तोड़नी हैं।

इसलिए मैं केवल एक तौलिया बांधे था, मेरा अनुमान सही था, चाचा जी ऑफिस जा चुके थे और ललिता बाथरूम में नहा रही थी।

मैंने फिर से कल वाली पोजिशन ले ली, मैंने देखा कि आज ललिता की चुनमूनियाँ बिल्कुल चिकनी है, शायद उसने अपनी झांटें साफ़ की हैं नहाने से पहले। आज वो अपनी चुनमूनियाँ पर हाथ ज्यादा चला रही थी, उसकी चूचियाँ कड़ी कड़ी लग रहीं थी और आँखें बंद थी।

मेरा लण्ड ललिता की चुनमूनियाँ में घुसने के लिए मचला जा रहा था।

कुछ सोच कर मैं वहाँ से हट कर ललिता के कमरे में चला गया और ऐसी जगह बैठ गया कि वो मुझे कमरे में घुसते ही न देख पाए।

ललिता थोड़ी देर बाद कमरे में आई, वो अपने बदन को केवल एक तौलिये से ढके थी, कमरे में आते ही वो अपने ड्रेसिंग टेबल की तरफ गई और तौलिया हटा दिया।

उफ़ क्या मस्त लग रही थी मेरी बहना ! उसके शरीर पर यहाँ वहाँ पानी की बूंदें मोती की तरह लग रही थी, चुनमूनियाँ एकदम गुलाबी, चूचियाँ बिल्कुल कड़ी, उन्नत गाण्ड देख कर मेरी तो हालत ख़राब हो गई।

उसने कल वाले अंतर्वस्त्र उठा लिए, उनमे से एक को चुना और पैंटी को पहले पहनने लगी।

किन्तु उसको शायद वो कुछ तंग लगी, फिर उसने दूसरी पैंटी ट्राई किया मगर वही रिजल्ट रहा, अब उसने पैंटी छोड़ कर ब्रा उठाई लेकिन ब्रा में भी वही हुआ, उसकी चूचियाँ कुछ बड़ी लग रही थी, ब्रा भी फिट नहीं थी।

अब मुझसे बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था, मैंने अपनी जगह से खड़ा हो गया।

मुझे देख कर उसकी आँखें फट गई, वो इतना घबरा गई कि अपनी चुनमूनियाँ या अपनी चूची छिपाने का भी ख्याल नहीं आ पाया उसको !

बस फटी हुई आँखें और मुँह खुला रहा गया।

मैं धीरे से चल कर उसके पास गया और कहा- कल अगर मेरी बात मान लेती और ट्राई कर लेती तो तुमको आज यह परेशानी नहीं होती।

अब उसको कुछ समझ आया तो जल्दी से तौलिया उठाया और लपेटने के बाद मेरी तरफ पीठ करके पूछा- भैया, आप कब आये?

मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा- मेरी सेक्सी बहना ! मैं तो तब से यहाँ हूँ जब तुम चाचा जी के रेजर से अपनी झांटें साफ़ कर रही थी।

मैंने ऐसे ही तुक्का मारा।

अब तो तौलिया उसके हाथ से छूटते बचा।

वो मेरी तरफ बड़े विस्मय से देखने लगी और मेरे चहरे पर मुस्कराहट थी क्योंकि मेरा तीर निशाने पर लग गया था।

मैंने उसके कंधे को सहलाते हुए कहा- तुमने कुछ गलत थोड़े ही किया है जो डर रही हो? इतनी सुन्दर चीजों की साफ़ सफाई तो बहुत जरूरी होती है। अब तुम्हीं बताओ कि ताजमहल के आसपास अगर झाड़-झंखार होगा तो उसकी शान कम हो जायेगी न मेरी प्यारी बहना?

अब पहली बार वो मुस्कुराई और अपनी चुनमूनियाँ की तारीफ सुन कर उसके गाल लाल हो गए।

अगले पल ही वो बोली- खैर अब आपने ट्रायल तो देख ही लिया, अब आप बाहर जाइए तो मैं कपड़े तो पहन लूँ !

मैंने कहा- प्यारी बहना, अब तो मैंने सब कुछ देख ही लिया है, अब मुझे बाहर क्यूँ भेज रही हो?

वो बोली- भैया, आप भी बहुत शैतान हैं, कृपया आप बाहर जाइए, मुझे बहुत शरम आ रही है।

अचानक मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर पर डाले और हल्का सा झटका दिया तो वो संभल नहीं पाई और उसकी चूचियाँ मेरे नंगे सीने से आकर टकराईं क्योंकि मैंने भी केवल तौलिया ही पहना हुआ था।

मैंने अपने हाथों के घेरे को और कस दिया ताकि वो पीछे न हट सके और तुरंत ही अपने होंठों को उसके गुलाबी गुलाबी होंठों पर रख दिया।

मेरे इस अप्रत्याशित हमले से उसको सँभालने का मौका ही नहीं मिला और मैंने उसको गुलाबी होंठों का रस पीना शुरू कर दिया।

वो मेरी पकड़ से छुटने के लिए छटपटाने लगी मगर मुँह बंद होने के कारण कुछ बोल नहीं पा रही थी।

थोड़ी देर उसके कुवांरे होंठों को चूसते हुए मेरे हाथ भी हरकत में आ गए, मैंने अपना एक हाथ तौलिये के नीचे से उसकी सुडौल गाण्ड पर फेरना शुरू किया और फेरते फेरते तौलिये को खीँच कर अलग कर दिया।

अब एक 18 वर्ष की मस्त और बहुत ही खूबसूरत लौंडिया बिल्कुल नंगी मेरी दोनों बाँहों के घेरे में थी और मैं उसके कुँवारे होंठों को बुरी तरह से चूस रहा था, अब मेरा हाथ उसके गाण्ड के उभार से नीचे की तरफ खिसकने लगा, उसकी छटपटाहट और बढ़ रही थी, मेरा हाथ अब उसकी गाण्ड के छेद पर था, उंगली से मैंने उसकी मस्त गाण्ड के फूल को सहलाया, तो वो एकदम चिहुंक गई।

फिर मेरी उंगलियाँ गाण्ड के छेद से फिसलती हुई उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ तक पहुँच गई। मैं उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ के ऊपर अपनी पूरी हथेली से सहलाने लगा, मेरा तना हुआ सात इंच का लण्ड तौलिये के अन्दर से उसके नाभि में चुभ रहा था क्योंकि उसकी लम्बाई में मुझसे थोड़ी कम थी। उसकी आँखों से गंगा-जमुना की धार निकल पड़ी क्योंकि उसको शायद मेरे इरादे समझ आ गए थे और वो यह भी समझ गई थी कि अब पकड़ से छूटना आसान नहीं, शोर भी नहीं मचा सकती थी क्योंकि उसके होंठ मेरे होंठो में अभी तक कैद थे।

इधर मेरी उंगलियाँ अब उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग अलग करने लगीं थी, मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चुनमूनियाँ के अंदर घुमा कर जायजा लेना चाहा पर उसकी चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि मेरी उंगली उसके अन्दर जा ही नहीं सकी।

खैर मैंने उसको धीरे धीरे सहलाना चालू रखा, जल्दी ही मुझे लगा कि मेरी उंगली में कुछ गीला और चिपचिपा सा लगा और मेरी प्यारी बहना का शरीर कुछ अकड़ने लगा, मैं समझ गया कि इसकी चुनमूनियाँ को पहली बार किसी मर्द की उंगलियों ने छुआ है जिसे यह बर्दाश्त नहीं कर सकी और इसका योनि-रस निकल आया है

मैं तुरंत अपनी उँगलियों को अपने मुँह के पास ले गया, क्या खुशबू थी उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की !

मेरा लण्ड अब बहुत जोर से उछल रहा था तौलिये के अन्दर से, मैंने अपने हाथ से अपने तौलिए को अपने शरीर से अलग कर दिया, जैसे ही तौलिया हटा, ललिता को मेरे लण्ड की गर्मी अपने पेट पर महसूस हुई। शायद उसको कुछ समझ नहीं आया कि यह कौन सी चीज है जो बहुत गर्म है।

खैर अब मेरे और मेरी प्यारी और सेक्सी बहना के बदन के बीच से पर्दा हट चुका था, अब हम दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे का अहसास कर रहे थे। ललिता की साँसें बहुत तेज चल रही थी।
 
अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने ललिता के होंठों को आज़ाद कर दिया, किन्तु उसके कुछ बोलने के पहले ही अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख दिया और कहा- देखो ललिता, आज कुछ मत कहो, मैं बहुत दिन से तुम्हारी जवानी कर रस चूसने को बेताब हूँ। और आज मैं तुमको ऐसे नहीं छोडूंगा, शोर मचाने से कोई फायदा हैं नहीं, घर में हमारे सिवा कोई नहीं है, तो बेहतर होगा कि तुम भी सहयोग करो और मजा लूटो।

वो प्रश्नवाचक निगाहों से मुझे देखती रही, मुँह तो बंद हो था कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थी।

अब मैंने उसके मुँह से हाथ हटा दिया और तुरंत ही उसको गोद में उठा लिया और ले जाकर सीधे बिस्तर पर लिटा दिया।

अगले ही पल फिर से उसके होंठ का रस पान शुरू कर दिया और हाथ उसकी चूचियों को धीरे धीरे मसलने लगे। हम दोनों की साँसें बहुत गर्म और तेज तेज चल रहीं थी, मेरा लण्ड उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की फांकों के ऊपर था।

पहली बार उसके हाथों ने हरकत की और मेरे लण्ड की अपने हाथ से महसूस करने की कोशिश की, शायद वो जानना चाह रही थी कि यह लोहे जैसा गर्म-गर्म क्या उसकी चुनमूनियाँ से रगड़ रहा था। उसने अपनी उंगलियों से पूरा जायजा लिए मेरे लण्ड का !

मैंने कहा- मेरी जान, मुझे बहुत अच्छा लगा जो तुमने मेरा लण्ड अपने हाथों से छुआ !

लण्ड का नाम सुनते ही उसने अपने हाथों को तुरंत वापस खींच लिया।

मैंने अब अपने होंठ उसकी चूची के ऊपर रख दिए, पहली बार उसके मुँह से सिसकारी निकली जो मुझे बहुत ही अच्छी लगी। खैर मैंने उसकी चूची को पीना शुरू कर दिया, चूसते चूसते दाँत भी लगा देता था। उसके बाद दूसरी चूची में होंठ लगा दिए, अब उसकी साँसें और तेज हो गईं थीं।

मैंने महसूस किया कि मेरा लण्ड जो उसकी चुनमूनियाँ की फांकों के ऊपर था, उसमें कुछ चिपचिपा सा गीलापन लग गया है। मैं समझ गया कि अब मेरी बहना की कुँवारी चुनमूनियाँ लण्ड लेने के लिए तैयार हो गई है।

मैंने अपने एक हाथ से अपने लण्ड को ललिता की चुनमूनियाँ पर ठीक से टिकाया और उसको चुनमूनियाँ के अन्दर डालने की कोशिश की पर लण्ड उसकी चुनमूनियाँ से फिसल गया। मैंने फिर कोशिश की पर फिर मेरा लण्ड फिसल गया।

अब मैंने इधर उधर देखा तो मुझे उसके कल ख़रीदे गई श्रृंगार का सामान दिख गया, उसमें एक वैसलीन की एक शीशी थी, मैं उसके ऊपर से हटा और वैसलीन की शीशी उठा कर तुरंत फ़िर से अपनी उसी अवस्था में आ गया।

मैंने लेटे लेटे ही वैसलीन की शीशी खोली और उसकी उसकी चुनमूनियाँ के उपर खूब सारी वैसलीन लगा दी, फिर मैंने अपने लण्ड के सुपारे को खोला और उसमें भी वैसलीन लगाई।

इस सबको मेरी ललिता रानी बड़े गौर से देख रही थी, शायद उसको कुछ समझ में आ रहा था या फिर उसको अन्दर से कुछ मजा तो जरूर मिल रहा होगा क्योंकि अब उसने किसी तरह का विरोध या भागने की कोशिश नहीं की थी।

अब मैंने अपने लण्ड को फिर से उसकी चुनमूनियाँ के फांकों के बीच में रखा और अन्दर धकेलने की कोशिश की किन्तु इस बार शायद चिकनाई ज्यादा होने के कारण लण्ड उसकी चुनमूनियाँ से फिर फिसल गया।

ललिता ने तो अपने होंठ कस कर भींच लिए थे क्योंकि उसको लगा कि अब तो भैया का मोटा और लम्बा लण्ड उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ में घुस ही जाएगा।

दोस्तो, तीन प्रयास हो चुके थे, मेरा लण्ड ऐंठन के मारे दर्द होने लगा था, अबकी मैंने अपने लण्ड को फिर से रखा और अपने दोनों हाथों को ललिता की जांघों के नीचे से निकाल कर उसके कन्धों को पकड़ लिया, इस तरह पकड़ने के कारण अब वो बिल्कुल पैर भी नहीं बंद सकती थी और हिल भी नहीं सकती थी।

अब मैंने एक जोर से धक्का मारा, ललिता के हलक से बड़ी तेज चीख निकल पड़ी, मेरे लण्ड का सुपारा उसकी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग करता हुआ अन्दर घुस गया था।

वो चिल्लाने लगी- हाय, मैं मर गई !

और आँखों से गंगा-जमुना बहने लगी। वो बड़ी तेजी से अपना सर हिला रही थी, अब मैंने अपने होंठ फिर से उसके होंठों पर कस कर चिपका दिए और एक जोर का धक्का फिर मारा, अबकी मेरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ को और फाड़ता हुआ करीब दो इंच घुस गया, उसकी चुनमूनियाँ एकदम गरम भट्टी बनी हुई थी, मैं अपने लण्ड के द्वारा उसकी कुँवारी चुनमूनियाँ की गर्मी महसूस कर रहा था।

2-3 सेकेण्ड के बाद फिर से एक धक्का मारा तो अबकी आधे से ज्यादा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में घुस गया। अब मैं उसी अवस्था में रुक गया और उसके होंठों को कस कर चूसने लगा। उसकी चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि मुझे लगा कि मैं आसानी से अपने लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ में अन्दर-बाहर नहीं कर पाऊँगा और उत्तेजना के कारण जल्दी ही झड़ जाऊँगा, इसलिए मैंने जोर से एक धक्का और मारा, अबकी मेरा पूरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में समां गया, मैंने अपनी जांघ पर कुछ गीला गीला महसूस किया, मुझे समझ आ गया कि इसकी चुनमूनियाँ की झिल्ली फट गई है और खून निकल रहा है।

दोस्तों मेरा ख्वाब था कि मैं किसी की सील तोडूं !

पर मुझे अपनी बीवी के साथ भी यह मौका नहीं मिला था, हालांकि मेरी बीवी ने तब मुझे यही बताया था साईकिल चलाते वक्त उसकी चुनमूनियाँ की झिल्ली फट गई थी, तो आज जब मुझे अपनी बहन ललिता की सील टूटने का अनुभव मिला तो मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और इसी उत्तेजना में मेरा वीर्य निकलने लगा। मेरा गर्म-गर्म वीर्य मेरी बहन ललिता की चुनमूनियाँ के अन्दर निकल रहा था, वो भी मेरे लण्ड से निकलने वाले गर्म वीर्य को महसूस कर रही थी अपनी दोनों आँखों को बंद करके !

ललिता की चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि वीर्य निकलने के दौरान लण्ड अपने आप झटके मरने लगता है, पर मेरे लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ के अन्दर झटके मारने की जगह भी नहीं मिल रही थी।

खैर मेरा लण्ड वीर्य निकलने के बाद कुछ ढीला हुआ, मैं धीरे से उठा, देखा तो ललिता की चुनमूनियाँ से खून का ज्वालामुखी फट गया था, उसकी जांघ, मेरी जांघ और चादर खून से सनी हुई थी, उसकी चुनमूनियाँ से अब गाढ़ा खून (मेरे वीर्य की वजह से) निकल रहा था।

मैंने देखा ललिता बेहोश सी लग रही थी, मैं जल्दी से रसोई में गया और पानी की बोतल लाकर उसके चेहरे पर पानी के छीटें मारे, उसने धीरे से आँखें खोली, मुझे उसकी करराहट साफ़ सुनाई दे रही थी, आँखों से आंसू बंद ही नहीं हो रहे थे।

मैं वहीं पास में ही बैठ गया और उसके बालों को सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद वो कुछ सामान्य हुई, तो मैंने उसे कहा- जान, चलो मैं तुम्हारी चुनमूनियाँ को साफ़ कर दूँ, आज मैंने तुम्हारी चुनमूनियाँ का उद्घाटन कर दिया है।

उसने थोड़ा उचक कर अपनी चुनमूनियाँ को देखा और बोली- भैया यह क्या कर दिया आपने?

मैंने कहा- बेटा परेशान मत हो, पहली बार तो यह होता ही है और अच्छा हुआ कि मैंने कर दिया, अगर कहीं बाहर करवाती तो पता नहीं कितना दर्द होता ! चलो अब उठो भी !

क्रमशः..................
 


चचेरी और फुफेरी बहन की सील--3

गतान्क से आगे..............

मैंने उसको सहारा देकर उठाया और बाथरूम ले गया। वहाँ पर मैंने उसको शावर के नीचे खड़ा कर दिया और फिर उसकी सफाई में जुट गया। इस दौरान मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। चूँकि हम दोनों ही निर्वस्त्र थे तो वो मेरे लण्ड को घूर रही थी।

मैंने उसकी चुनमूनियाँ को तो साफ़ कर दिया, अब खून निकलना भी बंद हो गया था, अब मैंने उसको अच्छे से नहलाना चालू कर दिया। मैं उसकी चूचियों को रगड़ रहा था, अचानक मैं अपने घुटनों पर बैठ गया और उसकी चुनमूनियाँ में अपना मुँह लगा दिया।

वो हिल कर रह गई।

मैंने कहा- ललिता रानी, मुझे यह करने दो, इससे तुम्हारी चुनमूनियाँ का दर्द जल्दी ठीक हो जाएगा।

और मैंने उसे चुनमूनियाँड़ों से पकड़ कर अपने मुँह को फिर से उसकी चुनमूनियाँ में लगा दिया। मेरी गर्म जीभ ने अपना कमाल दिखाना आरम्भ कर दिया था। उसको जरूर मजा आ रहा था क्योंकि अब उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी।

मेरे हाथ उसकी गाण्ड को सहलाते जा रहे थे, मैंने अपनी जीभ और अन्दर घुसेड़ दी, मेरे लण्ड ने कुछ जगह तो बना ही दी थी उसकी चुनमूनियाँ में, अचानक उसका बदन अकड़ने लगा और फिर मुझे अपनी जीभ में कुछ नमकीन सा स्वाद मिला, उसकी चुनमूनियाँ की खुशबू और इस स्वाद ने मुझे इतना उत्तेजित कर दिया कि मैं उसके रज की एक एक बूँद चाट गया।

अब उसने मेरा मुँह हटाने की कोशिश की और बोली- भैया, मुझे पेशाब आ रही है।

मैंने कहा- तू कर ! मैं तो आज तेरी पेशाब भी पियूँगा !

चूंकि उसकी चुनमूनियाँ घायल थी तो वो चाहकर भी पेशाब को रोक नहीं पाई और मेरा मुँह उसके पेशाब से भरने लगा।

मैंने उसके पेशाब की एक एक बूँद पी डाली।

वो मुझसे बोली- भैया, आप बहुत गंदे हैं, एक तो मेरी यह हालत कर दी और मेरा पेशाब भी पी लिया।

मैंने कहा- ललिता, मेरी जान ! तुमको अभी नहीं पता है कि तुमने मेरा कितना बड़ा ख्वाब पूरा किया है, जो चीज मुझे अपनी बीवी से हासिल नहीं हो पाई, वो तुमने मुझे दी है, तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ।

अब मैं खड़ा हो गया था, मेरा लण्ड अभी भी तना हुआ था, मैंने उसका हाथ लेकर अपने लण्ड पर रख दिया, उसने लण्ड को पकड़ लिया, और उसके बाद जो हुआ, मैं भी उस समय हिल गया था, ललिता अचानक अपने घुटनों के बल बैठ गई और मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया।

मुझे तो मानो स्वर्ग की प्राप्ति हो गई !

तब तक तो मैं यही समझ रहा था कि मैंने आज इसकी इच्छा के बिना इसकी सील तोड़ी है, पर अब उसके गुलाबी होंठ मेरे सुपारे को सहला रहे थे।

मैंने भी उसके सर को पीछे से पकड़ कर अपना लण्ड उसके मुँह में और घुसेड़ दिया और उसका सर बाल पकड़ कर आगे पीछे करने लगा। दोस्तो, मैं 2-3 मिनट से ज्यादा नहीं कर पाया और एक लम्बा धक्का देते हुए वीर्य की पिचकारी उसके मुँह के अन्दर मार दी। वो मेरा सारा वीर्य गटक गई, अब वो खड़ी होकर मेरे सीने से चिपक गई और मेरे कान में बोली- भैया, आपने भी तो मेरा ख्वाब पूरा किया है !

और एक गहरी मुस्कुराहट उसके चेहरे पर फैल गई।

मैं उसकी बात से इतना खुश हो गया कि मैंने उसको बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया। अब उसने भी मेरा साथ देना चालू कर दिया, मैंने उसको वहीं बाथरूम में लिटा दिया और उसके माथे, आँखों, नाक को चूमते हुए मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में घुसेड़ दी। वो मेरी जीभ को चूसने लगी, मेरे दोनों हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे, अब बर्दाश्त करना मुश्किल था, मैंने एक हाथ से लण्ड को उसकी चुनमूनियाँ के ऊपर सेट किया और उत्तेजना में जोर से धक्का मार दिया, मेरा आधा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग करता हुआ घुस गया, वो इस बार भी चीख पड़ी और बोली- क्या आज भर में ही मार दोगे मुझे?

मैंने कहा- नहीं मेरी जान, तुमको तो बहुत सम्भाल कर रखूंगा !

फिर मैंने अपने लण्ड को धीरे धीरे डालना शुरू किया, उसको लण्ड के चुनमूनियाँ में जाने का अहसास हो रहा था। जब मेरा पूरा लण्ड उसकी चुनमूनियाँ में चला गया, तो मैंने उसकी चूचियों को पीना शुरू कर दिया। 2-3 मिनट बाद मैंने उसकी चुनमूनियाँ को चोदना शुरू कर दिया। अब उसको भी उत्तेजना हो रही थी क्योंकि उसने अपने हाथों का घेरा मेरी पीठ पर कस कर बाँध दिया था और बीच बीच में उपने चुनमूनियाँड़ भी उठा देती थी।

करीब 7-8 मिनट के बाद उसने अपने हाथों के घेरे को बहुत ज्यादा कस दिया और अपने पैरों को मेरी गाण्ड के ऊपर कस दिया। मैं समझ गया कि इसकी चुनमूनियाँ का पानी निकलने वाला है, मैंने भी अपनी गति बढ़ा दी।

अब उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रहीं थी, अचानक उसका पूरा बदन ऐंठने लगा और उसने मुझे कस कर भींच लिया। इसी बीच मेरे लण्ड से भी गर्म वीर्य का लावा निकल कर उसकी चुनमूनियाँ में भरने लगा, हम दोनों एक साथ झड़ गए, थोड़ी देर हम ऐसे ही लेटे रहे, ऊपर शावर का पानी गिर रहा था। थोड़ी देर बाद हम दोनों एक साथ ही नंगे बदन ही कमरे में आ गए।

मैंने तौलिया उठाया और लपेट लिया। वो अपने कपड़े तलाशने लगी।

हम दोनों बिल्कुल खामोश थे शायद कुछ आत्मग्लानि की वजह से !

मैं वहाँ से जाने को हुआ तो ललिता ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरी आखों में देख कर बोली- यह सब आज के लिए ही था या फिर?

मैंने उसकी आँखों में देखा, मुझे वहाँ प्यार दिखाई दिया, मैंने उसको कस कर चिपटा लिया और बोला- मेरी जान, मैं हमेशा के लिए तुम्हारा गुलाम हो गया हूँ।

उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया, अपने कपड़े पहने।

तभी मैंने देखा कि ललिता एक थाली में मेरे लिए खाना लेकर आई, मैंने देखा कि उसने पिछले दिन खरीदी हुई ड्रेस पहनी हुई थी जो मैंने पसंद की थी और परफ़्यूम लगाया हुआ था। एक बार फिर मैंने उसे गले लगा लिया और चुम्बनों की बारिश कर दी।

उसके बाद तो मेरा सिलसिला चल निकला, अब मैं और ललिता सबके सामने तो भाई बहन की तरह रहते किन्तु अकेले में हम पति पत्नी की तरह रहते हैं और मजे कर रहे हैं।

 
मैं और मेरी चचेरी प्यारी बहन ललिता अब करीब-करीब रोज ही चुदाई करने लगे, जैसा कि मैंने बताया था। मेरी बीवी जो स्कूल-टीचर है, वो सुबह 6 बजे घर से निकल जाती है क्योंकि उसको कन्नौज जाने वाली ट्रेन पकड़नी होती है और शाम को आते-आते भी करीब यही समय हो जाता है।

चाचा जी ऑफिस चले जाते हैं, घर में सिर्फ मैं और ललिता ही रह जाते थे। हम दोनों ने पिछले दो महीने में जितनी भी तरह से हो सकता था, हर आसन और हर जगह पर सेक्स का मज़ा लिया, सिर्फ एक को छोड़ कर और वो था गाण्ड मारना।

मैंने बहुत कोशिश की ललिता की कुंवारी गाण्ड मारने की, लेकिन वो इसके लिए तैयार नहीं हुई।

एक दिन मैं और ललिता चुदाई करने के बाद कमरे में नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे थे, मैं उसकी उसकी चूचियों को पी रहा था, अचानक मैंने उससे पूछा- ललिता, क्या डॉली का कोई बॉय-फ्रेंड है?

मैं पहले आपको बता दूँ कि डॉली मेरी सगी बुआ की लड़की है जो ललिता के बराबर उम्र की ही है और उसी के स्कूल में साथ में पढ़ती है।

डॉली ललिता से भी अधिक खूबसूरत है, रंग एकदम गोरा और उसके चेहरे को देख कर आपको दिव्या भारती की याद आ जाएगी, बाकी फिगर जैसा कि उस उम्र की लड़कियों के जैसा ही है। उसकी चूचियाँ बहुत बड़ी नहीं हैं, कूल्हे भी सामान्य ही हैं।

जैसा कि मैंने बताया, खूबसूरती में वो ललिता से आगे है।

ललिता अपनी आँखें बंद करके अपनी चूचियों की मालिश करवा रही थी, अचानक मेरी आँखों में देखने लगी, थोड़ी देर देखने के बाद बोली- जान (वो अकेले में मुझे इसी नाम से बुलाती है) क्या तुम डॉली की सील तोड़ना चाहते हो?

मुझे कुछ जवाब नहीं सूझा, पर मैंने पता नहीं क्यों उसके होंठों को चूमते हुए कहा- हाँ.. ललिता, मैं डॉली को चोदना चाहता हूँ, क्या उसकी सील अभी नहीं टूटी? क्या उसने अभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया?

तो प्रिय मुस्कराते हुए बोली- नहीं !

मेरी धड़कन बढ़ी हुई थीं, अन्दर डर यह भी था कि कहीं ललिता बुरा न मान जाए, इसलिए मैंने बात टालने के उद्देश्य से ललिता की चूचियों को पीना शुरू किया और अपनी ऊँगली उसकी चुनमूनियाँ में घुमाने लगा।

ललिता शायद एक और चुदाई के लिए तैयार ही थी, वो उछल कर मेरे ऊपर आ गई, उसने अपने हाथ से मेरे तने हुए लण्ड को अपनी चुनमूनियाँ के मुँह में रखा और एक जोरदार धक्के से पूरा लण्ड अपनी चुनमूनियाँ में लील लिया, उसने आँखें बंद करके अपनी कमर को आगे-पीछे करना शुरू किया।

दोस्तों मैंने नोट किया कि आज ललिता कुछ ज्यादा ही जोश में आकर मेरी चुदाई कर रही थी, मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था।

करीब 5 मिनट तक मेरे लण्ड को अपनी चुनमूनियाँ में अन्दर-बाहर करने के बाद ललिता का बदन एक दम ऐंठने लगा, मैं समझ गया कि यह स्खलित होने वाली है।

मैंने भी नीचे से अपनी गाण्ड को और ऊपर उठा लिया जिससे मेरा लण्ड बिल्कुल उसकी चुनमूनियाँ समा गया, तभी ललिता मेरे सीने पर गिर कर हाँफने लगी और हम दोनों एक साथ ही स्खलित हो गए थे।

थोड़ी देर शांत रहने के बाद ललिता ने मेरी ओर देखते हुए पूछा- मजा आया जान?

मैंने उसको चूमते हुए कहा- हाँ.. बहुत !

तो वो अचानक बोली- तुमको ऐसी क्या कमी लगी मुझमें, जो तुम डॉली से पूरी करनी चाहते हो?

तब मुझे उसकी जोश भरी चुदाई का मतलब समझ में आ गया।

मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा- नहीं तुममें कोई कमी नहीं है, मैं तो बस ऐसे ही… पर अगर तुमको अच्छा नहीं लगा, तो कोई बात नहीं !

तभी मुझे बाहर कुछ आहट लगी, मैं समझ गया कि मेरी माता जी मंदिर सी आ गई हैं। हम दोनों तुरंत अलग हुए और अपने-अपने कपड़े पहन कर सामान्य हो गए।

दूसरे दिन मैं अपनी बालकनी में अपनी ललिता रानी के इंतजार में टहल रहा था क्योंकि टीवी देखते-देखते बोर हो गया था।

ललिता अपने स्कूल गई थी और अभी करीब सुबह के 10 बजे थे, घर में मेरे अलावा और कोई नहीं था, मेरी नजर घर की तरफ आती हुई ललिता पर पड़ी, उसके साथ अन्जलि भी थी।

मैंने देखा की ललिता मुझे बहुत ध्यान से देख रही थी।

मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ क्योंकि यह ललिता के स्कूल से आने का समय नहीं था, लेकिन मुझे कल की बात याद आ गई और मुझे लगा कहीं ललिता नाराज न हो जाए सो मैंने उनके सामने से हटना ही उचित समझा।

किन्तु मैं जैसे ही मुड़ा, मुझे लगा कि डॉली कुछ लंगड़ा कर चल रही है। उसके चेहरा भी कुछ उदास लग रहा था, मैंने सोचा पता नहीं क्या बात है? तो मैं जीने से उतर कर सीधे गेट पर ही पहुँच गया।

मुझे देख कर ललिता ने हल्की सी मुस्कान दी और डॉली ने कहा- नमस्ते भैया !

मैंने भी उसको मुस्करा कर जवाब दिया, फिर पूछा- क्या हुआ? तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही हो?

तो ललिता बोली- इसके पैर में चोट लग गई है स्कूल में, खून निकल आया था, तो मैंने ही इससे कहा कि घर चलो, दवा लगा देंगे.. थोड़ा आराम कर लेना और फूफा जी को भी फ़ोन कर देंगे, तो शाम को ऑफिस से लौटते समय तुम उनके साथ चली जाना।

ललिता के स्कूल से हमारा घर पास है और बुआ का थोड़ा दूर है।

मैंने डॉली की ओर देखते हुए कहा- हाँ.. यह अच्छा किया, कहाँ चोट लगी है देखूं !

डॉली ने कुछ असहज भाव से ललिता की ओर देखा, तभी मेरी नजर डॉली की स्कर्ट में लगे खून की तरफ चली गई।

मैंने कहा- अरे खून तो अभी भी निकल रहा है, चलो जल्दी अन्दर… मैं फर्स्ट एड बॉक्स लाता हूँ !

मैं तुरन्त अपने कमरे में गया और फर्स्ट एड बॉक्स लेकर ललिता के कमरे में पहुँच गया। तब तक वह दोनों सोफे में बैठ गई थीं।

मैंने ललिता से कहा- जाओ पानी की बोतल ले आओ.. पहले डॉली को पानी पिलाओ।

मैंने कूलर ऑन कर दिया, पानी पीने के बाद मैंने डॉली से कहा- लाओ चोट दिखाओ.. मैं दवा लगा देता हूँ ! देखूं.. कहाँ चोट लगी है?

डॉली अपनी स्कर्ट को अपनी दोनों टांगों से दबाते हुए बोली- नहीं भैया, सब ठीक हो जाएगा, आप परेशान मत होईये !

मैंने कहा- अरे इसमें परेशान होने वाली क्या बात है, तुम मुझे चोट तो दिखाओ !

मेरे कई बार कहने के बाद भी उसने चोट नहीं दिखाई, तब मैं घूम कर ललिता जो कि शायद अपने कपड़े बदल कर अन्दर कमरे से आ रही थी, की ओर देखा तो उसके चेहरे पर हल्की से शरारती मुस्कान देखी।

क्रमशः..................
 


चचेरी और फुफेरी बहन की सील--4

गतान्क से आगे..............

मेरे दिमाग में घंटी बजी !

तभी डॉली जल्दी से उठ कर बाथरूम के अन्दर चली गई और दरवाजा बंद कर लिया, तो मैंने ललिता से मौका देख कर पूछा तो उसने मुस्कराते हुए बताया कि डॉली को पीरियड आ गया, चूँकि उसको डेट याद नहीं रही, तो पैड वगैरह नहीं थे, इसी लिए हम लोग अपनी क्लास टीचर से जल्दी छुट्टी लेकर घर आ गए।

अब बात मेरे समझ में आई।

मुझे यह बताने के बाद ललिता अन्दर कमरे में गई और अपनी एक ड्रेस और चुनमूनियाँ में पीरियड के समय लगाने वाला पैड (मुझे दिखाते हुए) लेकर बाथरूम के बाहर लेकर दरवाजे पर दस्तक दी। जिसको कि डॉली ने हाथ निकाल कर ले लिया। मैंने तुरंत अपना दिमाग लगाया और ललिता को वापस आते ही अपनी बाँहों में भर लिया और उसके प्यारे चेहरे पर अनगिनत चुम्मी कर डालीं। ललिता ने भी उसी तरह से उत्तर दिया। फिर मैंने उसकी आँखों में देखा और मुस्कराने लगा, शायद उसको मेरी आँखों की भाषा समझ आ गई थी।

वो प्यार से मेरी आँखों में देखती हुई बोली- क्या बहुत मन है.. डॉली की सील तोड़ने का प्रियम !

मैंने उसको बहुत जोर से अपने से चिपका लिया और कहा- हाँ जान.. बहुत ज्यादा !

उसने कहा तो कुछ नहीं, बस वैसे ही चिपके हुए मेरे बाल सहलाती रही, फिर बोली- अभी तुम जाओ, देखती हूँ.. क्या हो सकता है !

शाम को फूफा जी डॉली को लेने आए, लेकिन फिर जो भी बात हुई हो उनकी ललिता और डॉली से, वो अकेले ही वापस लौट गए थे।

दूसरे दिन सुबह ललिता के स्कूल जाने के टाइम मैं बालकनी में गया तो देखा कि ललिता अकेले ही स्कूल जा रही थी, डॉली उसको गेट तक छोड़ने गई।

उसने ऊपर मेरी तरफ देखा और मुस्कराकर मुझे नमस्ते किया। मैंने भी उसको नमस्ते का जवाब दिया, मुझे लगा शायद ललिता ने जानबूझ कर मुझे मौका देने के लिए ऐसा किया है और मुझे इसका फायदा उठाना चाहिए।

लेकिन अभी तो चाचा जी भी घर में थे और मेरी तरफ मेरी माता जी भी घर में ही थीं।

मैं थोड़ी देर बाद अपने चाचा की तरफ गया तो देखा कि चाचा आफिस जाने के लिए तैयार हो रहे थे और डॉली सोफे पर बैठ कर टीवी देख रही थी।

मुझे देख चाचा जी बोले- राज, आज डॉली की तबियत ठीक नहीं है, यह घर पर ही रहेगी, तुम इसका ध्यान रखना !

मैंने कहा- जरूर !

थोड़ी देर बाद चाचा जी चले गए, मैं भी वहीं डॉली के साथ सोफे पर बैठ कर टीवी देखने लगा।

फिर मैंने पूछा- डॉली, अब तबियत कैसी है, डाक्टर के यहाँ तो नहीं चलना?

उसने कहा- नहीं भैया, मैं ठीक हूँ.. बस थोड़ा आराम कर लूँ, सब ठीक हो जाएगा।

खैर… हम लोग टीवी देखते रहे, फिर थोड़ी देर बाद मैं खड़ा हुआ और कहा- डॉली मुझे कुछ काम है, मैं अभी आता हूँ !

मैं वहाँ से निकल आया, लेकिन दोस्तों मैंने अपना मोबाइल फ़ोन जानबूझ कर वहीं छोड़ दिया।

यहाँ मैं बता दूँ कि मैं 2 मोबाइल रखता हूँ, और मेरे दूसरे मोबाइल में बहुत सारी चुदाई की मूवी और फोटो, गंदे-जोक्स वगैरह स्टोर रहते हैं।

मैंने अपना वही फ़ोन डॉली के पास छोड़ा था। मैं जानबूझ कर बहुत देर तक उधर नहीं गया और आज तो वैसे भी मेरी माता जी घर पर ही थीं।

मैं अपने कमरे में लेटा टीवी देख रहा था, लेकिन मेरा दिमाग डॉली की तरफ ही था। पता नहीं उसने मेरा फ़ोन देखा भी होगा या नहीं।

करीब 2 घंटे के बाद मेरे कमरे में हल्की सी आहट हुई मैंने पलट कर देखा तो डॉली थी।

वो तुरंत बोली- भैया आपका फ़ोन, आप शायद भूल आए थे !

मैंने उसके हाथ से फ़ोन ले लिया, उसके चहरे पर हल्की सी मुस्कान थी

मैं समझ गया कि इसने खूब अच्छी तरह से मेरा फ़ोन देखा है।

मैं तो चाहता भी यहीं था, उसके बाद वो मुड़ी और मेरी माँ के कमरे में चली गई।

थोड़ी देर बाद ललिता भी स्कूल से वापस आ गई, मौका मिलते ही ललिता ने मुझसे पूछा- कुछ हुआ?

मैंने कहा- नहीं !

और उसको पूरी बात बता दी, सुनने के बाद वो बोली- जो करना है कल कर लो, क्योंकि कल के बाद डॉली अपने घर चली जाएगी !

अब मैं अभी से कल की प्लानिंग में लग गया क्योंकि कल तो मुझे डॉली की कुंवारी चुनमूनियाँ की सील किसी भी हाल में तोड़नी होगी।

दूसरे दिन सुबह, ललिता फिर अकेले ही स्कूल जा रही थी, मेरी नजर मिलते ही उसने मुझे इशारे से फिर याद दिला दिया कि आज शाम को डॉली अपने घर चली जाएगी।

थोड़ी देर बाद मैं अपनी माँ के कमरे की तरफ गया तो माँ ने बताया कि अभी मेरे मामा जी, जो घर के पास में ही रहते हैं, उनकी तबियत ठीक नहीं हैं और वे उनको देखने जायेंगी।

मैंने कहा- ठीक है और इधर मेरे दिमाग ने योजना बनाना शुरू कर दिया क्योंकि अब चाचा के जाने के बाद पूरे घर में सिर्फ मैं और डॉली ही बचेंगे।

करीब नौ बजे मेरी माँ, मामा के यहाँ गईं, मैं उनको गेट तक भेज कर वापस सीधे चाचा के पोर्शन में गया, चाचा ऑफिस जाने के लिए बिल्कुल तैयार थे।

डॉली शायद बाथरूम में थी। मैंने चाचा से बात करते हुए धीरे से अपना मोबाइल मेज पर जहाँ डॉली की एक किताब रखी थी, उसी के बगल में रख दिया।

चाचा ने डॉली को आवाज दी- मैं ऑफिस जा रहा हूँ !

मैं भी उनके साथ ही बाहर निकल आया, उनके जाने के बाद गेट बंद करके मैं सीधा अपने कमरे में चला गया।

मेरे पास कुछ चुदाई वाली फिल्मों की सीडी थीं, उनमें से एक मैंने सीडी प्लेयर में लगा कर प्ले कर दिया और सिर्फ चड्डी और बनियान पहन कर सोफे पर बैठ कर चुदाई वाली फिल्म का आनन्द उठाने लगा।

मैं देख तो रहा था टीवी, लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ डॉली का बदन ही घूम रहा था।

मैं सोच रहा था कि पता नहीं आज डॉली मेरे मोबाईल को देखेगी या नहीं !

यही सब सोचते हुए करीब एक घंटा गुजर गया। इधर अन्जलि को चोदने के ख्याल से ही मेरा लंड बिल्कुल सीधा खड़ा हो गया था। मैं अपनी चड्डी के अंदर हाथ डाल कर उसको सहला रहा था, तभी मुझे दरवाजे पर कुछ आहट महसूस हुई।

मैं समझ गया कि डॉली ही होगी, लेकिन मैं वैसा ही सोफे में पसरा रहा, टीवी में इस समय भयकंर चुदाई का सीन चल रहा था।

मेरे कमरे में ड्रेसिंग टेबल इस तरह सेट है कि उसमें कमरे के दरवाजे तक का व्यू आता है।

मैंने उसमें देखा कि डॉली की नजर टीवी पर पड़ गई थी और वो दरवाजे पर ही रुक गई, पर उसकी नजरें अभी भी टीवी पर ही थीं। मैंने जानबूझ कर अपनी चड्डी नीचे खिसका दी, अब मेरा नंगा लंड मेरे हाथ में था। मैं उसको सहला रहा था, मेरे हिलने से शायद डॉली का ध्यान मेरी तरफ गया और मुझे लगा कि वो मुड़ कर जाने वाली है।

मैंने अपना सर घुमा कर दरवाजे की ओर देखा और तुरंत उसी पोजीशन में खड़ा हो गया।

डॉली वापस जाने के लिए मुड़ चुकी थी। मैंने तुरंत उसको आवाज दी, वो मुड़ी मेरी तरफ देखा और जब उसने मुझे उसी हाल में (मेरी चड्डी नीचे खिसकी हुई थी और मेरा लंड खड़ा था) पाया तो मैंने देखा उसका चेहरा बिल्कुल लाल हो रहा था।

उसने हल्की सी मुस्कान दी और बिना रुके वापस चाचा जी के पोर्शन की तरफ भागती हुई चली गई।

मैंने एक-दो मिनट सोचा और फिर एक तौलिया लपेट कर उधर गया।

धीरे से अन्दर गया तो देखा कि डॉली ललिता के बेड में उलटी लेटी थी, उसकी पीठ मेरी तरफ थी और वो मेरे मोबाइल में शायद कुछ कर रही थी।

मैंने तुरंत निर्णय लिया, मैंने अपनी तौलिया हटाई और कूद कर डॉली के पास बेड पर पहुँच गया। मेरी नजर सीधे मोबाइल में गई, उसमें एक चुदाई वाली फिल्म चल रही थी।

मेरे इस तरह पहुँचने से डॉली एकदम चौंक गई। इसके पहले कि वो मोबाइल बंद करती, मैंने उसके हाथ से मोबाइल ले लिया। वो सब इतना अप्रत्याशित था कि डॉली एकदम स्तब्ध रह गई।

मैंने उसको गौर से देखा तो उसने अपनी नजरें नीची कर लीं।

आज शायद उसने अपने बालों में शैम्पू किया था क्योंकि उसके बाल खुले थे जो उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे।
 
आज उसने ललिता का गुलाबी स्कर्ट और टॉप पहना था।

शायद वो थोड़ी देर पहले ही नहा कर आई थी, वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।

मैंने सीधे उससे पूछ लिया- कैसी लगी पिक्चर?

वो कुछ नहीं बोली, मैंने थोड़ी हिम्मत कर उसको ठोढ़ी को हाथ से ऊपर उठाया और फिर पूछा- डॉली तुमको यह मोबाइल वाली पिक्चर कैसी लगी?

अबकी वो थोड़ा मुस्कराई और उठ कर भागने की कोशिश करने लगी।

मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ कर बेड में गिरा दिया और ताबड़-तोड़ चुम्बन करना शुरू कर दिया।

इसके पहले कि वो कुछ समझ पाती, मैंने उसके ऊपर छा गया और बहुत सारे चुम्बन कर दिए।

अब वो छटपटाने लगी, पहली बार उसने बुरा सा मुँह बनाते हुए कहा- छोड़िए मुझे !

मैंने कहा- क्यों केवल मोबाइल में चुदाई देखनी है?

कहने के साथ ही मैंने अपना हाथ नीचे स्कर्ट के अन्दर डाल दिया, उसने चड्डी नहीं पहनी थी, इसलिए मेरा हाथ सीधे चुनमूनियाँ पर ही पहुँच गया।

डॉली बहुत जोर से चिहुंक गई, उसने पूरा जोर लगा कर मुझे अपने ऊपर से हटाना चाहा, लेकिन मैंने अपने हाथ से उसकी चुनमूनियाँ को सहलाना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसके हाथों को संभालता रहा।

डॉली की चुनमूनियाँ पर एक भी बाल नहीं था, बहुत ही हल्के-हल्के रोयें थे, ऐसा मुझे अपने हाथ से अहसास हुआ।

खैर.. अब उसने अपने पैरों को क्रॉस करना चाहा, तो मैंने उसके दोनों पैरों के बीच अपना एक पैर डाल दिया और उसका एक पैर दबा भी लिया। अब मेरी उंगलियां उसकी चुनमूनियाँ की कसी हुई फांकों को अलग करने में व्यस्त हो गईं।

मेरी उंगलियाँ उसकी कसी हुई चुनमूनियाँ की फांकों को अलग नहीं कर पाईं, तो मैंने उसकी चुनमूनियाँ की पतली सी दरार में अपनी उंगली से रगड़ना शुरू कर दिया। इस दौरान मैं उसके भग्न को भी रगड़ रहा था।

मेरी आँखें डॉली के चेहरे को देख रही थीं, वो शायद शर्म की वजह से अपनी आँखें बंद किए थी। पर मुझे उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं दिखा तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।

अब मैंने डॉली के होंठों पर अपने होंठ लगा दिए, डॉली ने अपने होंठों को कस कर बंद कर लिए। फिर भी मैं अपनी जीभ उसके होंठों पर घुमाने लगा, इधर मेरी उँगलियाँ उसकी कुंवारी चुनमूनियाँ में हलचल मचा रही थीं शायद इस वजह से वो थोड़ी ढीली पड़ गई थी।

अब मैंने अपने दूसरे हाथ को धीरे से उसके टॉप के अन्दर खिसका दिया। डॉली की चूचियाँ एक मध्यम आकार के अमरुद के बराबर की थीं। मेरी उँगलियों ने जैसे ही डॉली की चूचियों को छुआ, वो फ़िर एकदम से चिहुंक गई, पर मेरी पकड़ बहुत मजबूत थी।

अब मैंने डॉली की चूची को सहलाना शुरू किया।

मैंने देखा कि डॉली के चेहरे के भाव बड़ी जल्दी से बदल रहे थे, शायद उसके बदन को पहली बार किसी मर्द ने इस तरह छुआ था। अब मैंने अपना हाथ दूसरी चूची को सहलाने में लगाया।

उधर एक हाथ अभी भी उसकी चुनमूनियाँ को सहला रहा था।

अचानक डॉली का बदन ऐंठने लगा, उसकी साँसें जोर-जोर से चलने लगीं। तभी मेरा हाथ जो कि डॉली की चुनमूनियाँ में था, कुछ गीला-गीला सा लगा, मैं समझ गया कि डॉली झड़ गई है।

अब उसका बदन बिल्कुल ढीला हो गया था, उसने जरा सा होंठ खोला शायद गहरी सांस लेने के लिए।

मैंने तुरंत अपनी जीभ उसके होंठों के अन्दर घुसेड़ दी, अब उसने आँखें खोल कर मेरी तरफ देखा। वो शायद कुछ कहना चाह रही थी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह से निकाल ली।

वो बोली- भैया.. अब मुझे छोड़ दीजिए, मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है।

मैंने कहा- डॉली, अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं, ऐसे-कैसे छोड़ दूँ?

वो फिर बोली- मैं ठीक से सांस नहीं ले पा रही हूँ !

तो मैंने अपने दोनों पैर उसके पैरों के बीच में कर लिए और अपने घुटनों के बल बैठ गया और दोनों हाथों से उसके टॉप को ऊपर करने के साथ ही मेरा मुँह उसकी चूची पर पहुँच गया।

जैसा कि मैंने बताया, डॉली की चूचियाँ छोटी हैं, तो पूरी चूची मेरे मुँह में समा गई और दूसरी चूची को हाथ से सहलाने लगा।

डॉली को अब शायद मजा आ रहा था क्योंकि उसकी आँखें फिर से बंद हो गईं थीं।

मौका देख कर मैंने एक हाथ से अपनी चड्डी खिसका कर निकाल दी और फिर उसी पोजीशन में अपने लंड को डॉली की चुनमूनियाँ से छुआ दिया।

अब मैंने अपना मुँह डॉली की दूसरी चूची में लगा दिया और पहले वाली को हाथ से सहलाने लगा। मेरा लंड बीच-बीच में डॉली की चुनमूनियाँ को छू लेता था।

तभी डॉली ने अपनी आँखें खोलीं और मुझे देख कर बोली- भैया, प्लीज़ अब मुझे छोड़ दीजिए, आपने बहुत कुछ कर लिया है !

मैंने कहा- देखो डॉली मुझे तुम्हारे साथ वो सब करना है, जो तुमने अभी मेरे मोबाइल की चुदाई वाली पिक्चर में देखा है !

तो वो बोली- नहीं वो सब मैं नहीं कर सकती !

मैंने कहा- क्यों?

तो वो चुप रही, फिर मैंने कहा- देखो डॉली, करना तो मुझे है ही, अब तुम अगर मर्जी से करवा लोगी तो तुमको भी अच्छा लगेगा.. नहीं, तो मैं तो कर ही लूँगा !

वो चुपचाप मेरी आँखों में देखने लगी।

फिर बोली- तो आप मेरे साथ भी वही सब करना चाहते हैं जो आपने ललिता के साथ किया है..?

मैं समझ गया कि ललिता ने इसको हमारी चुदाई के बारे में सब बता दिया होगा।

मैंने कहा- हाँ, मैं तुम्हारी भी सील तोड़ना चाहता हूँ… ललिता की तरह!

यह कह कर मैंने उसके चेहरे पर बहुत सारे चुम्बनों की बौछार कर दी।

अचानक डॉली ने अपने दोनों हाथ मेरे कंधे पर रख दिए और बोली- भैया मुझे छोड़ दीजिए, मुझे बहुत दर्द होगा.. मैं वो सब नहीं कर पाऊँगी, जो आपने ललिता के साथ किया था !

मैंने कहा- क्यों?

तो वो फिर चुप हो गई, अब जब मैंने देखा कि उसका विरोध करीब ख़त्म हो गया है तो मैंने अपने दोनों हाथो से उसके टॉप को उसके दोनों हाथ ऊपर करके हटा दिया।

अब उसके बदन में सिर्फ स्कर्ट आर मेरे बदन में सर्फ बनियान थी।

अब मैं जल्दी से उठा और अपनी बनियान भी निकाल दी। अब मैं अपनी पीठ के बल लेट गया और डॉली को अपने ऊपर खींच लिया। मैं अपने दोनों हाथों से डॉली की स्कर्ट उतारना शुरू किया, उसने रोकने की कोशिश की परन्तु कामयाब नहीं हो सकी।

अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे, मैंने डॉली को अपने बदन से चिपका लिया। उसके खुले हुए बालों से मेरा चेहरा ढक गया। मुझे बहत अच्छा लग रहा था। तभी मैंने अपने हाथों से डॉली की गाण्ड को सहलाना शुरू किया, उसके चुनमूनियाँड़ बिल्कुल गोल थे। काफी मस्त माल था !

मेरी उंगली उसकी गाण्ड के छेद का मुआयना करने लगी, तो अंजली ने तुरंत अपनी गाण्ड हिला कर मुझे ऐसा करने से मना किया।

खैर… अब मेरी उंगली उसकी गाण्ड से होते हुए उसकी चुनमूनियाँ पर पहुँच गई थी।

इधर मेरा लंड उसकी चुनमूनियाँ को छूकर और उत्तेजित हो रहा था। मुझे अहसास हो रहा था कि उसकी चुनमूनियाँ गीली थी।

मैं अचानक बैठ गया और डॉली को अपने हाथों के सहारे धीरे से लिटा दिया। मैंने झुक कर अपना मुँह उसकी चुनमूनियाँ की ओर किया, मैंने पहली बार उसकी कुंवारी चुनमूनियाँ को देखा।

दोस्तों डॉली की चुनमूनियाँ में बहुत ही हल्के से रोंयें थे और उसकी चुनमूनियाँ की दोनों फांकें एकदम जुड़ी हुई थीं। अब मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चुनमूनियाँ की फांकों को अलग किया तो अन्दर का रंग बिल्कुल गुलाबी था।

दोस्तों मैंने अपने होंठों को तुरंत डॉली की चुनमूनियाँ में लगा दिया। अचानक डॉली ने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर से ऊपर की ओर खींचना चाहा और बोली- नहीं भैया… यह मत करो, अभी वहाँ खून हो सकता है !

तब मुझे याद आया कि डॉली का तो पीरियड था और आज तीसरा दिन था।

क्रमशः..................

 


चचेरी और फुफेरी बहन की सील--5

गतान्क से आगे..............

दोस्तों सब कुछ जानते हुए भी अब मेरा रुक पाना मुश्किल था। मेरे दिमाग में सिर्फ डॉली को चोदने की ही बात थी। मैंने अपने आस-पास नजर दौड़ाई। बेड के बगल में ही ललिता की ड्रेसिंग मेज रखी थी, उसके ऊपर मुझे नारियल तेल की शीशी दिख गई।

मैंने हाथ बढ़ा कर उसको उठा लिया और अंजली की दोनों टांगों को और फैला दिया। अब मैंने अपने एक हाथ में खूब सारा तेल लिया और अंजली की चुनमूनियाँ में लगा दिया। कुछ तेल डॉली की चुनमूनियाँ की दरार के अन्दर भी चला गया।

अब मैंने अपने लंड को तेल से बिल्कुल भिगो लिया। शीशी को वहीं पर रख कर मैं फिर अपनी पीठ के बल लेट गया और अंजली को अपने ऊपर बैठाया। मैंने एक हाथ से अपने लंड को अंजली की कुंवारी चुनमूनियाँ के मुँह में अन्दर करना चाहा, पर मेरा लंड फिसल गया। मैंने यह कई बार प्रयास किया, किन्तु लंड हर बार फिसल रहा था।

इधर उत्तेजना से मेरा हाल बुरा हो रहा था, लग रहा था कि मैं ऐसे ही झड़ जाऊँगा और उधर अंजली का भी बुरा हाल था, उसकी भी साँसें बहुत तेज चल रही थीं।

मैंने तुरंत फिर से अंजली को लिटा दिया और मैं उसकी दोनों टांगों के बीच में इस तरह बैठा कि मेरा लंड उसकी चुनमूनियाँ के बिल्कुल करीब था।

अब मैंने अपने दोनों हाथों से डॉली की चुनमूनियाँ की फांकों को अलग-अलग किया और कमर हिला कर अपने लंड को डॉली की चुनमूनियाँ के मुँह में सैट किया, फिर मैंने अपने एक हाथ से अपने लंड को सहारा दिया जिससे कि वो अब बाहर ना निकल पाए।

मैंने डॉली की तरफ देखा तो उसने अपनी आँखें बंद की हुई थीं, होंठ भींचे हुए थे। मैंने अपनी कमर से थोड़ा दबाव बनाया, पर लंड डॉली की कुंवारी चुनमूनियाँ में इस बार भी नहीं जा पाया।

फिर मैंने अपने पैरों से डॉली के दोनों पैरों को और फैलाया और दुबारा अपनी कमर से दबाव बनाया। अब की बार मेरे लंड का थोड़ा सा सुपाड़ा ही अंजली की चुनमूनियाँ में गया होगा, लेकिन उसकी चीख निकल गई, चूँकि घर में इस समय कोई और था नहीं। मैंने उसी पोजीशन में और दबाव बनाया।

अबकी बार मेरे लंड का आधा सुपाड़ा अंजली की कुंवारी चुनमूनियाँ में घुस गया था और इधर डॉली लगातार चिल्ला रही थी।

मैंने उसकी कमर को बहुत ही मजबूती से पकड़ रखा था, मैंने अपनी कमर से एक हल्का धक्का मारा, तो मेरा करीब आधा लंड डॉली की चुनमूनियाँ को फाड़ता उसके अन्दर घुस गया।

मैंने डॉली के चेहरे की तरफ देखा तो मोटी आंसुओं की धार बह रही थी।

वो लगातार मुझसे कह रही थी- अब छोड़ दो, मैं मर जाऊँगी, बहुत दर्द हो रहा है !

अब मैं उसी पोजीशन में उसके ऊपर लेट गया और उसके आंसुओं को अपने होंठों से साफ़ किया, फिर उसके होंठों को चूसने लगा। इससे उसका चिल्लाना भी कम हुआ और कुछ ध्यान बंटा।

अपने दोनों हाथों से मैं डॉली की चूचियों को सहलाने लगा। इसी बीच मैंने एक जोर से धक्का अपनी कमर से मारा, जिससे मेरा करीब पूरा लंड डॉली की चुनमूनियाँ में समां गया, चूंकि डॉली के होंठ मेरे होंठों से दबे थे उसकी चीख तो नहीं निकल पाई, लेकिन वो बहुत तेज कसमसाई।

2-4 सेकंड रुक कर मैंने अपनी कमर को ऊपर-नीचे करने के लिए हिलाना चाहा, पर डॉली की चुनमूनियाँ इतनी कसी हुई थी कि मेरा लंड हिल भी नहीं सकता था।

खैर.. मैंने एक और जोर का धक्का मारा, अब मेरा पूरा लंड डॉली की कुंवारी चुनमूनियाँ में समा गया था। अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊँगा।

डॉली की कुंवारी चुनमूनियाँ एकदम गरम भट्टी की तरह मेरे लंड को जलाए दे रही थी। कंट्रोल कर पाना मुश्किल था, तभी मुझे लगा कि डॉली का बदन अकड़ रहा है, उसने अपने हाथ से मेरी पीठ को इतना कस कर जकड़ा कि उसके नाखून मेरी पीठ में चुभ रहे थे।तभी मुझे अपने लंड के झड़ने का भी अहसास हुआ।

मेरी कमर ने 2-3 हिचकोले खाए और लंड ने पूरा लावा डॉली की कुंवारी चुनमूनियाँ में ही उगल दिया।

हम दोनों उसी अवस्था में थोड़ी देर लेटे, फिर डॉली ने अपने हाथ से मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की, तो मैं हट गया।

उसने उठने की कोशिश की, पर उठ नहीं पाई। मैंने देखा कि उसकी चुनमूनियाँ का बुरा हाल था, दोनों फांकें फूल कर पाव की तरह हो गई थीं और उसकी चुनमूनियाँ से अभी भी खून निकल रहा था जोकि उसकी जाँघों से होकर नीचे जमा हो रहा था।

मैं तुरंत उठा एक अखबार उठा कर बेड की चादर उठा कर उसके नीचे रख दिया, जिससे कि खून गद्दे में ना जाने पाए और एक पुराना कपड़ा लेकर मैंने डॉली की चुनमूनियाँ और जाँघों में लगा खून साफ़ कर दिया, वरना वो घबरा जाती।

उसी कपड़े को मैंने उसके चुनमूनियाँड़ उठा कर बिछा दिया। अब खून कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।

फिर मैंने डॉली को सहारा देकर उठाया, उठते ही उसने अपनी चुनमूनियाँ को झाँक कर देखा, वहाँ ज्यादा खून न देख कर शायद उसको आश्चर्य हुआ और उसने मेरी तरफ देखा।

अब मैंने उसको अपनी गोद में बिठा लिया और उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया, क्योंकि मैं उसको अभी एक बार और चोदना चाहता था।

मेरे दोनों हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसकी चूचियों को सहला रहे थे।

अब मैंने अपनी जीभ को डॉली के मुँह के अन्दर डाल दिया। पहली बार अंजली ने भी चुम्मन क्रिया में मेरा सहयोग किया। मैंने अपना एक हाथ धीरे से डॉली की चुनमूनियाँ पर लगाया, तो उसने अपने पैरों को थोड़ा और खोल दिया। मैंने अपनी ऊँगली से उसकी चुनमूनियाँ की दरार को सहलाया। वो अभी भी वैसी ही टाइट थी, बिल्कुल जरा सा अंतर आया था। अब मेरी उंगली उसकी चुनमूनियाँ की दरार में चल रही थी।

मैं उसके ‘जी-पॉइंट’ को भी सहला देता था। अब डॉली कुछ जोश के साथ मेरे चुम्बन का जवाब दे रही थी, मेरी जीभ को कस कर चूस रही थी।

मेरा लंड तो टाइट था ही, मैंने अपने हाथ को उसकी चूचियों से हटाया और उसके हाथ को लेकर अपने लंड को पकड़ा दिया।

वो बिना देखे ही उसको सहलाने लगी। उसके नरम हाथों के स्पर्श से मेरे लंड में नई जान आ गई। मैंने डॉली को थोड़ा पीछे की ओर झुकाया और अपना मुँह उसकी चूची में लगा दिया।

मैंने खूब जोर लगा कर उसकी चूची को पीना शुरू किया और दूसरी चूची को हाथ से मसलना, कमरे में डॉली की सिसकारियाँ गूंज उठीं। फिर इसी तरह जोर से मैंने उसकी दूसरी चूची को भी पीया, अब मैंने डॉली की आँखों में देखा तो मुझे लगा कि वो भी दुबारा चुदाई के लिए तैयार है।

मैंने उसको फिर से लिटा दिया और उसके पैरों के बीच बैठ गया। इस बार मैंने उसके दोनों पैर उठाए और एक तकिया उसकी गाण्ड के नीचे रखा और उसके पैरों को अपने कंधे पर ले लिया।

डॉली की चुनमूनियाँ और मेरे लंड में तेल तो पहले से ही लगा था। मैंने अपने लंड को डॉली की चुनमूनियाँ के मुँह में सैट किया।

वह मेरी तरफ देख कर बोली- ज़रा धीरे से ! उस बार मेरी जान निकलते बची थी !

मैंने कहा- अब परेशान मत हो, अब उतना दर्द नहीं होगा !

लंड को सैट करके मैंने अपनी कमर का हल्का सा धक्का दिया तो इस बार लंड फिसला नहीं बल्कि चुनमूनियाँ में थोड़ा सा चला गया।

डॉली थोड़ा कसमसाई, पर पकड़ मजबूत थी। मैंने तुरंत दूसरा जो से धक्का मारा, इस बार लंड टाइट चुनमूनियाँ की दीवारों को रगड़ता हुआ आधा घुस गया।

डॉली बोली- भैया, अब बस इससे ज्यादा मत घुसेड़ो… मेरी चुनमूनियाँ में बहुत दर्द हो रहा है !

मैंने कहा- देखो, पहले तो अब भैया कहना बंद करो, क्योंकि अब तुम्हारी चुनमूनियाँ में मेरा लंड घुसा है… और रही दर्द की बात, तो अभी ख़त्म हो जाएगा !

यह कहते हुए मैंने एक जोर का धक्का अपनी कमर से मारा, अबकी मेरा लंड पूरी तरह डॉली की चुनमूनियाँ में घुस गया। वो बड़ी तेज चीखी और अपना सर झटकने लगी, मैं उसी पोजीशन में रुक गया।

मैं अपने हाथों से उसके गालों को सहला रहा था, 2-4 सेकण्ड के बाद मैंने बहुत धीरे से अपनी कमर को हिलाने की कोशिश की, फिर थोड़ा और हिलाया। इस तरह मैंने बहुत ही संभाल कर अपनी कमर को आगे-पीछे करना शुरू किया।

मैंने देखा कि डॉली भी कुछ सामान्य हो रही थी, फिर मैंने थोड़ा सा जोर लगाकर धक्के लगाने शुरू किए। डॉली की टाइट चुनमूनियाँ में मेरा लंड बिल्कुल जकड़ा हुआ चल रहा था।

अब शायद डॉली को कुछ अच्छा लगा क्योंकि अब वो चुप हो गई थी। मैंने उसके बाल सहलाते हुए पूछा- जान.. अब कैसा लग रहा है?

मेरे मुँह से अपने लिए ‘जान’ सुन कर पहले तो उसने मेरी आँखों में देखा, फिर उसने अपने हाथ मेरी पीठ पर कस दिए और अपनी आँखें बंद कर लीं।

अब मैंने अपने धक्कों की स्पीड थोड़ा बढ़ा दी, मुझे ऐसा लगा जैसे डॉली भी अपनी कमर को थोड़ा बहुत हिलाने की कोशिश कर रही है।

मैं और जोश में आ गया और इस बार मैंने करीब अपना आधा लंड बाहर करके स्पीड के साथ डॉली की चुनमूनियाँ में घुसेड़ दिया।

डॉली एकदम चिहुंक गई, आँखें खोल कर मेरी तरफ देखा और बोली- क्या जान की जान ही ले लोगे आज?

मैंने उसको चूमते हुए कहा- नहीं मेरी जान!

फिर आराम से धक्के पर धक्के लगते रहे, अब कमरे में डॉली की चीखों की जगह उसकी सिसकारियाँ और मेरी तेज-तेज साँसें सुनाई दे रही थीं।

अचानक मुझे लगा कि डॉली की पकड़ मेरी पीठ पर टाइट होती जा रही है। उसके नाखून मेरी पीठ में धंसने लगे, मैं समझ गया कि यह अब झड़ने वाली है। मैंने भी अपने धक्कों की स्पीड को बढ़ा दिया, अचानक हम दोनों के बदन थरथराये, हम एक साथ ही झड़ने लगे।

मेरे लंड से गरम-गरम लावा निकल कर डॉली की चुनमूनियाँ में भरने लगा। हम दोनों ने एक-दूसरे को बहुत ही जोर से जकड़ लिया।

दोस्तो, हम दोनों उसी अवस्था में करीब आधे घंटे तक बिल्कुल नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे रहे।

फिर मैं उठा, बाथरूम में जाकर अपनी जांघों वगैरह में लगे खून को साफ किया, फिर डॉली को गोद में उठा कर बाथरूम में ले जा कर उसकी सफाई की। उसको बेड पर लिटाने के बाद, मैंने रसोई में से एक गिलास दूध गुनगुना करके डॉली के पास आया।

उसको अपनी गोद में बिठा कर दूध पिलाया, थोड़ा सा मैंने भी पिया।

फिर मैंने उससे कहा- जान अब धीरे से उठो और कपड़े पहनो !

क्योंकि बेड भी सही करना था।

खैर… डॉली धीरे से उठी, अपने कपड़े पहने, मैंने भी पहन लिए, फिर उसने बेड से चादर हटाई, पेपर हटाए और दूसरी चादर बिछा कर बेड सही कर दिया।

अब मैंने उसको गले से चिपका कर पूछा- जान कैसा लगा तुमको !

तो वो भी मेरे सीने से चिपक गई और बोली- जैसा ललिता ने बताया था, उससे बहुत अच्छा !

मैंने उसके चहरे पर बहुत सी चुम्मी ले डालीं। उसने भी मुझे उसी तरह जवाब दिया।

मैंने घड़ी देखी, ललिता के स्कूल से आने का समय हो गया था।

मैंने डॉली को कहा- मैं अभी जा रहा हूँ ! और यह कह कर मैं अपने पोर्शन में आ गया।

यह थी मेरी फुफेरी बहन डॉली की सील तोड़ने की सच्ची कहानी

समाप्त

 
सिखने के बाद चुदाई – १

यह तब की हैं जब में 12 क्लास में था | मैं अंग्रेजी में काफी कमजोर था |

हमारी अंग्रेजी टीचर का नाम स्नेह था | वो करीब 40 की थी | वो हलकी सी

मोटी थी खास कर उनका कमर काफी मोटा था | उनके चुचे भी काफी बड़े और भरी

थे | जब में 11 में था, तब मुझे अंग्रेजी में काफी

कम नंबर आये थे, इसीलिए मेने 12 में सोच लिया था की इस बार अंग्रेजी में

ध्यान लगाऊंगा और खूब पडूंगा | गर्मियो की छुट्टी से एक दिन पहले मेने

स्नेह मैडम के पास गया |

गुड आफ्टरनून मैडम

गुड आफ्टरनून समीर

मैडम, मुझे आपकी सयहता चाहिए थी |

हाँ बोलो

मैडम, जेसा की आपको पता हे की मेरा अंग्रेजी में काफी कम नंबर आये थे |

हाँ, मुझे पता हे, इसीलिए तो तुम्हे बोलती हू की अच्छे से पढाई किया करो |

जी मैडम, में इस बार बोर्ड के परीक्षा में कम नहीं लाना चाहता |

अच्छा, आखिर में तुम्हारी आँखे खुल ही गयी |

जी मैडम, मुझे पता हे की मुझे काफी मेहनत करनी होगी, और में इसके लिए

तैयार हू | मगर मैडम मुझे यही नहीं पता की शुरू कहा से करना हे | मेरा

मतलब हे की मेरा अंग्रेजी का जड ही कमजोर हे | सो मैडम क्या आप मेरी मदद

करोगी यह बताने में की कहा से शुरू करना हैं |

जरुर समीर, में तुम्हारी टीचर हू, और यह मेरा काम हे | में तुम्हारी मदद

करुँगी | एक काम करो तुम मेरा घर का पता और मेरा फोन नॉ. ले लो और मुझे

एक हफ्ते बाद फोन करना |

ठीक हे मैडम |

मेने फिर उनका नॉ. और पता ले लिया | और फिर एक हफ्ते बाद मेने उनको फोन किया |

हेल्लो, क्या में स्नेह मैडम से बात कर सकता हू ?

बोल रहीं हू |

मैडम, मैं समीर बोल रहा हू | मैडम आपने कहा था की एक हफ्ते बाद फोन करना…………….

हाँ याद हैं, फोन पर तो तुम्हारी पढाई नहीं हो सकती तुम एक काम करो, कल

शाम ५ बजे मेरे घर आ जाओ, तभी तुम्हारी प्रोब्लम देख लेते हैं | ठीक हैं

?

ओके मैडम,

फिर अगले दिन मैं शाम को ५ बजे मैडम के घर पहुच गया | मेने घंटी बजाई और

फिर मैडम ने दरवाज़ा खोला

हेल्लो मैडम,

हेल्लो समीर,………अंदर आओ………बैठो घर धुदने में तकलीफ तो नहीं हुई ना ?

थोडा सा हुआ, क्युकी में इस इलाके में कभी नहीं आया |

चलो कोई बात नहीं……… अब बताओ क्या लोगे चाय कोफ्फी कोल्ड्रिंक

कुछ नहीं मैडम………..कुछ नहीं……

शरमाओ मत तुम्हे कुछ ना कुछ तो लेना ही पड़ेगा

ठीक हैं मैडम कोफ्फी चलेगा |

बस अभी लती हू,

फिर मैडम कोफ्फी ले आई |

ह्म्म्म लो सुमित कोफ्फी लो, बिस्किट भी तो लो

नहीं मैडम इसकी क्या ज़रूरत थी ?

समीर तुम बहुत शर्मीले हो……….खेर ये बताओ हमे क्या बात करनी थी |

मैडम आपको तो पता ही हैं की मेरे अंग्रेजी में कैसे नॉ. आते हैं ?

हम्म्म्म मेरे ख्याल से तुम्हे पिछले साल ५० से जादा नहीं आये थे |

हाँ मैडम, और सबसे जादा हमारी क्लास में ९५ आये थे | मैडम में भी चाहता

हू की मुझे भी उतने आये |

बिलकुल आ सकते हैं, लेकिन उसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी तुम्हे………क्या

तुम करोगे ?

जी मैडम, मई मेहनत जरुर करूँगा, बस आप मुझे कोचिंग दीजिए |

ठीक हैं, एक काम करो तुम कल सुबह से १० बजे आ जाया करो |

ठीक हैं मैडम,

कोफ्फी तो पियो………..ठंडी हो रही हे

जी मैडम, ……………… मैडम आपकी फॅमिली में कोन कोन हैं ?

मैं, मेरे पति और दो बच्चे हैं |

मैडम कहा हे सब कोई दिखाई नहीं दे रहा ?

मेरे पति काम से दो हफ्तों के लिए बहार गए हैं और मेरे बच्चे अपनी नानी

के घर पे है |

वो कब आयेंगे आपके बच्चे ?

वो भी दो हफ्तों बाद ही आयेंगे, वेसे मैं भी वही थी कल ही आई हू | अब यही

तो दिक्कत हैं, अब मुझे बाजार से सब कुछ लाना हो तो नहीं ला सकती |

क्यों ?

बाजार यहाँ से काफी दूर हे ना, और रिक्शा से जाने मैं बहुत टाइम लगता है

और स्कूटर और कार चलाना मुझे नहीं आती |

मैडम इस मैं क्या तकलीफ हे, आपको जो चाहिए होगा मुझे बता दीजिए, मैं ले आऊंगा |

नहीं नहीं ऐसी बात नहीं हे, समीर तुम्हे कार चलानी आती हैं क्या ?

हाँ मैडम आती हैं |

तुम मुझे कार चलाना सिखा सकते हो……..वो क्या हे की मेरे पति तो पुरे दिन

बिजी रहते हैं और आज कल तो हमारी कार खली पड़ी है…………..और पति तो ऑफिस की

कार ले गए हैं |

जी मैडम, मैं आपको कार चला सिखा दूँगा |

कितना समये लगेगा कार सिखने मैं ?

करीब एक हफ्ता तो लगेगा ही |

तो ठीक हैं तुम मुझे कार सिखाना शुरू कर दो |

ओके मैडम मगर किस समाये पे ?

तुम १० बजे पड़ने आओगे ही…..तुम्हे पडने के बाद मैं तुमसे कार सीख लिया

करुँगी ……………पर समीर कोई बड़ा खली जगह हे क्या ? वो क्या हे की कोई मुझे

देखेगा सीखते हुए तो मुझे शर्म सी आएगी | कोई ऐसी जगह बताओ जो एक दम खली

हो और जादा लोग भी ना आया जाया

करे |

जी मैडम, शहर से बहार निकलने के बाद एक खली मैदान है, जो हर वक्त खली ही रहता हैं |

ठीक हैं, तो वही चलेंगे कल दोपहर मैं |

पर मैडम दोपहर में तो काफी गर्मी होगी ना ?

दोपहर में इसीलिए क्युकी उस वक्त लोग बहार नहीं निकलते और हमारी कार में

तो ऐसी हैं. | मैं क्या करूँ लोग मुझे कार चलते हुए देखेंगे तो मुझे शर्म

आएगी ना इसीलिए | वेसे तुम्हे कोई प्रोब्लम तो नहीं हे ना ?

बिलकुल नहीं मैडम, तो मैं कल आता हू १० बजे |

ओके समीर बाई |

मैं अगले दिन १० बजे मैडम के घर पहुच गया | मैडम ने उस दिन हरे रंग की

सूट पहनी हुई थी | हलाकि मैडम थोड़ी मोटी और सावली थी, पर मुझे तो मैडम

सेक्सी लग रही थी | मैडम ने मुझे १० से १ बजे तक पढाया | उसके बाद हम कार

सिखने शहर से बहार एक खली मैदान में

चले गए | आस पास कोई नहीं था क्युकी उस वक्त काफी धुप थी |

मैदान में पहुच कर मेने मैडम को कार सिखानी शुरू कर दी |

मैं कुछ देर तक मैडम को गियर, एक्सेलेटर, क्लच, ब्रेक के बारे में बताने लगा |

चलिए मैडम आब आप चलाइए |

मुझे डर लग रहा हैं |

आगे की कहानी आगे भाग मैं ……………………….

 
सिखने के बाद चुदाई – २

चलिए मैडम आब आप चलाइए |

मुझे डर लग रहा हैं |

कैसा दर ?

कही मुझे कंट्रोल नहीं हुआ तो ?

उसके लिए मैं हू ना मैडम |

फिर मैडम ड्राइवर सिट पे बैठ गयी और मैं बाजु वाले सिट पे आ गया | फिर

मैडम ने कार चलानी शुर की लेकिन मन ने एक दम से एक्सेलेटर पे पैर रख दिया

और कार एक दम से तेज चलने लग गयी | मैडम घबरा गयी |

मैंने मैडम को कहा की मैडम एक्सेलेरेटर से पैर हटाइये

मैडम ने फिर पैर हटा लिया तो फिर मेने स्टीरिंग पकड़ कर कार को संभल लिया

मेने कहा था ना की मुझसे नहीं होगा

कोई बात नहीं हैं, पहली बार ऐसा होता हैं |

नहीं मैं कार सीख ही नहीं सकती, मुझसे नहीं चलेगी

चलेगी मैडम, चलिए अब गाड़ी को स्टार्ट कीजिए और फिरसे ट्री कीजिए, पर इस

बार एक्सेलेरेटर आराम से छोडना

नहीं मुझसे नहीं होगा

मैडम शुरू शुरू मैं गलतियाँ होती हैं, कोई बात नहीं

नहीं मुझे दर लगता हैं

अच्छा, एक काम करते हे मैं भी आपके सिट पर आ जाता हूँ, फिर आपको दर नहीं लगेगा

लेकिन एक सिट पर हम दोनों कैसे आ सकते हैं

आप मेरी गोद मैं बैठ जाना, मैं स्टीरिंग संभालूँगा और आप गार संभालना

लेकिन कोई हमे देखेगा तोह कैसा लगेगा ?

मैडम इस वक्त यहाँ कोई नहीं आएगा और वेसे भी आपके कार के शीशों से अंदर

का कुछ भी नहीं दिखेगा |

चलो ठीक हे फिर

फिर में जा क ड्राईवर वाले सिट पे बैठ गया और मैडम मेरी गोद मैं | जैसे

ही मैडम मेरी गोद में बैठी मेरे बदन में करंट सी दोड़ गयी | हम दोनों ने

पहले बार एक दूसरे को ऐसे छुआ था | मेने फिर कार स्टार्ट कर दी और मैडम

से पूछा की मैडम आप तैयार हो ?

हाँ, मुझे सिर्फ गिअर संभालना है ना ?

जी मैडम, आज के दिन आप सिर्फ गिअर ही सीखो |

कार चलने लगी, क्युकी मेरा हाथ स्टीरिंग पर था और मैडम मेरी गोद में,

इसीलिए मेरी बांहे मैडम के चुचो को बार बार छु रहा था, और मैडम के चुचे

थे भी काफी बड़े | मैडम को थोडा अजीब सा लगा इसीलिए वो मेरी जांघों पे ना

बैठ कर मेरे घुटनों के पास खिसक गयी | जेसी ही मई

कार को मोड़ता, तभी मैडम की पूरी चूची मेरे बांहों को छु जाता | मैडम

वेसे गिअर सही बदल रही थी |

क्यों समीर, मैं ठीक कर रही हू ना ?

एक दम सही हे मैडम, मैडम आप अभी थोडा स्टीरिंग भी संभालो |

ठीक हे

क्युकी मैडम मेरी गोद में काफी आगे होकर बैठी थी इसी लिए स्टीरिंग

सँभालने में उन्हें तकलीफ हो रही थी | मैडम आप थोडा पीछे खिसक जाइए तभी

आपसे स्टीरिंग सही चलेगा |

आब मैडम मेरी जांघों पे बैठ गयी | मैडम थोडा और पीछे हो जाईये |

और कितना पीछे होना पड़ेगा

जितना हो सके उतना हो जाइये

ठीक हैं

अब मैडम पूरी तरह से मेरे लंड के उपर बैठी हुई थी |

मेने अपने हाथ मैडम के हाथो पर रख दिया और स्टीरिंग संभालना सिखाने लगा |

जब भी कार मुडती तो मैडम की गांड मेरे लंड में धस जाती | मैडम के चुचे

इतने बड़े थे की वो मेरे हाथों को छु रहे थे | मैं जान बुझ के उनके चुचो

को चूता रहा |

मैडम अब एक्सेलेरेटर भी आप संभालिए

कहीं कार फिर से कंट्रोल के बहार हो गयी तो ?

मैडम अब तो मैं बैठा हू ना ?

मैडम ने फिरसे पूरा एक्सेलेरेटर दबा दिया तो कार ने फिरसे एक दम से

रफ़्तार पकड़ ली |

इस पर मेने एक दम से ब्रेक लगा दी तो कार भी उसी वक्त रुक गयी | मैडम को

झटका लगा तो वो स्टीरिंग में घुसने लगी | इस पर मेने मैडम के चुचो को

अपने हाथो से पकड़ कर मैडम को स्टीरिंग में घुसने से बचा लिया | कार रुक

गयी थी और मैडम के चुचे मेरे हाथो में थे | मैडम

बोली -

मेने कहा था ना की में फिर कुछ गलती करुँगी ( अब भी मैडम के चुचे मेरे

हाथो में थे )

कोई बात नहीं, कम से कम गिअर तो बदलना सीख लिया ( अब भी मैडम के चुचे

मेरे हाथो में थे )

शायद मुझे स्टीरिंग संभालना कभी नहीं आएगा ( अब भी मैडम के चुचे मेरे हाथो में थे )

एक और बार ट्राई कर लेते हैं ( अब भी मैडम के चुचे मेरे हाथो में थे )

ठीक हैं ( अब भी मैडम के चुचे मेरे हाथो में थे )

मैडम ने मुझसे एहसास दिलाने के लिए की मेरा हाथ उनके चुचो पे हे, मैडम ने

अपने चुचो को हल्का सा झटका दिया तो मेने अपने हाथ वहा से हटा लिया |

मेने कार फिरसे स्टार्ट की | मैडम ने अपने हाथ स्टीरिंग पे रख लिया और

मेने अपने हाथ उनके हाथो पे रख दिया |

मैडम एक्सेलेरेटर मई ही संभालूँगा, आप सिर्फ स्टीरिंग संभालिए

यही में कहने वाली थी

कुछ देर तक मैडम को स्टीरिंग मैं मदद करने के बाद में बोला

मैडम अब में स्टीरिंग से हाथ उठा रहा हू, आप अकेले ही संभालिए

ठीक हे, अब मुझे थोडा अपने उपर भरोसा है, लेकिन तुम अपने हाथ तैयार रखना

कहीं फिर से वेसा ना हो जाये |

मैडम मेरे हाथ हमेशा तैयार रहते हैं

मेने फिर अपने हाथ स्टीरिंग से हटा के मैडम के छाती पे रख दिया, मैडम को

पकड़ने के बहाने से, मुझे एक पाल के लिए लगा की मेने हाथ रखा वो भी सीधे

मैडम के छाती पे, आज मुझे मैडम से गलिया सुनने को मिलेगा, मगर ऐसा कुछ भी

ना हुआ |

समीर मुझे कास के पकड़ना, कहीं ब्रेक मारने पर में फिर से स्टीरिंग में

ना घुस जाऊ |

हा मैडम, कास के पकड़ता हूँ | मेने फिर मैडम के छाती को कास के पकड़ने के

बहाने दबा दिया, और उसी के कारण मैडम के मुह से अह्ह्ह निकल गया |

समीर मेरे ख्याल से आज के लिए इतना सीखना काफी हे |

ठीक हे मैडम

मैडम फिर मेरी गोद से उठ कर बाजु वाली सिट पर बैठ गयी, और हम फिर मैडम के

घर चल दिए |

ठीक हे मैडम, मई अब चलता हू |

रोटी खा के जाना

नहीं मैडम, मेने मम्मी को बोल को कहा हे की में खाने के वक्त आ जाऊंगा

ठीक है, तोह कल दस बजे आओगे ना ?

पक्का मैडम,

मई अगले दिन दस बजे पहुच गया | पड़ने के बाद हम फिर से कार सिखने उसी जगह

में आ गए |

तोह समीर आज कहाँ से शुरू करेंगे ?

मैडम मेरे ख्याल से से आप पहले स्टीरिंग में ठीक हो जाइये, उसके बाद कुछ करेंगे |

ठीक है, कल जेसे ही बैठने हे क्या ?

हा मैडम,

आज मैडम ने सिल्क की सलवार कमीज़ पहनी हुई थी | मैडम आज सीधे आकार मेरे

लौडे पर बैठ गयी | आज मैडम की सलवार थोड़ी टाईट थी और मैडम की गांड से

चिपकी हुई थी |

हमने कार चलानी शुर कर दी | मैडम ने अपने हाथ स्टीरिंग पर रख लिया, और

मेने भी अपने हाथ मैडम के हाथो पर रख दिया | आज मैडम की गांड मेरे लोडे

पर बार बार हिल रही थी | कुछ देर के बाद मेने कहा मैडम अब मैं अपने हाथ

स्टीरिंग से हटा रहा हू |

हाँ, अपने हाथ स्टीरिंग से हटा लो |

आगे की कहानी आगे भाग मैं ……

 
सिखने के बाद चुदाई – ३

हाँ, अपने हाथ स्टीरिंग से हटा लो |

मेने हाथ स्टीरिंग से उठा कर सीधे मेने मैडम के चुचो पे रख दिया………..वह

मज़ा आ गया आज मैडम ने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, इसीलिए आज मैडम के चुचे

काफी नरम थे | मेने फिर मैडम के चुचो को धीरे धीरे दबाना शुरू कर दिया |

मैडम की सिल्क की सलवार में उनके चुचे को

दबाने में मज़ा आ रहा था | मैडम ने अचानक अपनी टाँगे खोल दी और उसी के

कारण उनकी चुत मेरे लंड पर आ गया | मेने फिर जोश में आके मैडम के कमीज़

में हाथ डाल दिया और उनके चुचो को दबाने लगा |

मैडम, मज़ा आ रहा है क्या ?

अह्ह्ह किसमे ?

कार चलने मैं |

हाँ, कार चलने में मज़ा आ रहा है |

मैडम, अब आपको स्टीरिंग संभालना आ गया |

ह्म्म्म

अब मेने अपना दूसरा हाथ भी मैडम के कमीज़ में डाल दिया और दूसरे चुचे को

दबाने लगा |

अह्हह्ह समीर तुम आह्ह्ह येह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो ?

मैडम आपको कार चलाना सिखा रहा हूँ |

समीर तुम्हारे हाथ कार के स्टीरिंग पे होना चाहिए था |

पर मैडम, आपका स्टीरिंग सँभालने में जादा मज़ा आता हैं |

तुम्हे मेरे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए……….और वेसे भी में एक काली और मोटी

औरत हू, तुम्हे मुझे क्या अच्छा लगेगा ?

मैडम आपकी एक एक चीज़ अच्छी हैं |

समीर में थोड़ी ठाक गयीं हूँ, पहले तुम कर रोक लो, वो देखो आगे थोड़ी

झाडिया हैं कार वहा ले चलो |

जी मैडम,

मैंने कार झाडियो में जा कर रोक ली |

बस थोड़ी देर आराम कर लेते हैं, हाँ तो समीर तुम्हे इस मोटी और काली औरत

में क्या अच्छा लगा ?

मैडम ,एक बात बोलूं ?

हाँ बोलो

मैडम, आपके संतरे बहुत अच्छे हैं

क्या, संतरे मई क्या कोई पेड हू जो मुज्मे संतरे लगे हैं ?

मैडम यह वाले संतरे ( मैडम के चुचो को दबाते हुए )

आह्ह्ह ह्ह्ह्हाआअ

मैडम आपके खरबूजे भी बहुत अच्छे हैं |

क्या खर्बुझे, मुझमे खरबूजे कहाँ हैं ?

मैडम, मेरे बोलने का मतलब हे आपकी गांड |

झूट, मेरी गांड तो बहुत चौड़ी और मोटी हैं |

यह कहकर मैडम खड़ी हो गयी और अपने सलवार निचे करदी | मैडम ने पेंटी नहीं

पहनी हुई थी |

देखो ना, कितनी बड़ी हैं मेरी गांड |

मैं तो मैडम की गांड देखते रह गया, मैडम की गांड मेरे मूह के पास थी | मई

मैडम की गांड पे हाथ फेरने लगा |

मैडम, आपके गांड की महक बहुत अच्छी हैं |

यह कह कर में मैडम की गांड पे किस करने लगा | फिर उसके बाद मेने मैडम की

गांड की दरार पे जीभ मरने लगा |

ओह समीर…… येह्ह्ह क्या कर रहे हो |

मैडम मुझे खरबूजे काफी पसंद हैं |

ओह्ह…… और क्या क्या पसंद हे तुम्हे ?

बबल गम !

क्या…..बबल गम वो कोंसी जगह हे ?

जवाब में मेने मैडम की चुत दबाने लगा |

ओह्ह समीर…….बबल गम को दबाते नहीं हे |

मैडम…….इस हल में मैं बबल गम नहीं खा सकता |

समीर पीछे सिट पे आओ, वहा पे आराम से खा सकते हैं |

फिर हम दोनों पिछले सिट पर आ गए, मैडम ने अपनी टाँगे खोल ली और अपनी चुत

पे हाथ रख कर बोली समीर यह रही तुम्हारी बबल गम |

मेने मैडम की चुत चाटने लगा | मैडम सिट पे लेती हुई थी, मेरी जीभ मैडम की

चुत पे और हाथ मैडम की चुचो को दबा रहे थे | मई करीब दस मिनट तक चुत पे

जीभ मरता रहा |

समीर क्या तुम्हारी पेंसिल छिली हुई हे ?

क्या मतलब ?

बुद्धू, मेरे पास शार्पनर है और तुम्हारे पास पेंसिल |

जी मैडम, मेरा पेंसिल को छिल दीजिए |

लेकिन पहले तुम अपनी पेंसिल तो दिखाओ

मेने अपनी जींस उतार दी, मेने अंदर चड्डी नहीं पहनी थी | मेने अपना लंड

लिया और मैडम के मुह के पास ले गया तो मैडम ने उसे अपने मुह में ले लिया,

और फिर जोर जोर से उसे चूसने लगी | कुछ देर तक चूसते रही और फिर बोली

समीर तुम्हारी पेंसिल काफी अच्छी हैं |

मैडम, क्या आपका शार्पनर भी अच्छी कुआलिती की है ?

यह तो पेंसिल छिलने के बाद ही पता चलेगा |

तो मैडम, में अपनी पेंसिल छिल लूँ क्या ?

हाँ समीर, जस्ट डू ईट ………………..फक मी हार्ड………..चोद दे मुझे………..

मेने अपना लोडा मैडम की चुत में डाल दिया और धक्के देने लगा |

ओह्ह्ह्ह समीर……मेरे जान…तुम्हारी पेंसिल एक दम मेरे चुत के लिए हैं…………

आआह्ह्ह्ह्ह्ह एक दम सही ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह और करो और और

करो……ह्म्म्म्म्म्म समीर मेरे संतरो को भी दबाव……इन्हें तुम्हारी काफी

जरुरत हैं |

मैडम, आपकी चुत मरने में काफी मज़ा आ रहा हैं |

आया.ह्ह्ह्ह…….समीर मेरे बच्चे अपनी मैडम के संतरो से जूस तो पीओ……..

फिर मेने धक्के देने के साथ साथ मैडम के निप्पल को मुह में लेकर चुस्त

रहा…………..कुछ देर बाद मैडम के चुचो में से दूध निकलने लगा और में उसे

पिता रहा |

आईए समीर.और तेज और तेज और और और धक्का लगाओ और लगाओ आज अच्छी तरह ले लो

मेरी….मेरे दूध को भी अच्छी तरह से पि लो …….और तेज करो |

मेने तेज तेज धक्के देना शुरू कर दिया | करीब १५ मिनट बाद

आ ऊह्ह्ह्ह्ह समीईर तेज और तेज में आने वाली हू ह्म्म्म्म्म्म्म ओह्ह्ह ऐईईईईइ

मई और मैडम फिर एक साथ ही झड गए |

आ आ अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अह्हह्ह आई लव यु समीर….मज़ा आ गया |

जी मैडम, आपका शार्पनर गज़ब का हैं |

तुम्हारी पेंसिल भी कमाल की हैं |

मैडम मई आपके पीछे वाले शार्पनर को भी इस्तेमाल करना चाहता हू |

पीछे वाला शार्पनर………… मेने कभी नहीं इस्तेमाल करवाया हैं |

लेकिन मुझे तोह करने दोगी ना ?

पक्का, लेकिन बाकि का काम घर चल कर | और फिर अभी तोह मुझे कार सिखने में

कुछ दिन और लगेगा |

तबसे मई और मैडम हर मोके पर चुदाई करते और मैडम से पड़ते वक्त हम दोनों

बिकुल नंगे होते थे |

 
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