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Hindi Sex Stories By raj sharma

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मेरी मौसी सास



मेरी उम्र छब्बीस वर्ष है, मेरी शादी को दो साल हो गये हैं,मेरी बीबी बहुत सुन्दर और मुझे बहुत प्यार करने वाली है, अब से लगभग छः महीने पहले मेरी बीबी मुझे अपनी एक मौसी के पास लेकर गई थी, उसकी मौसी दिल्ली में रहती है, तथा उनका काफी अच्छा घर परिवार है,कहने को तो वो मेरी बीबी की मौसी है लेकिन देखने में वो मेरी बीबी की बहन जैसी ही लगती है, उन्हें देख कर कोई नहीं कह सकता की वो शादी शुदा होंगी, वैसे भी वो मेरी बीबी से दो साल ही बड़ी है,

उनके अभी कोई बच्चा नहीं था शायद फेमिली प्लानिंग अपना रखी थी, उनके पति एक सरकारी फर्म में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर काम करते हैं, उनके पति हालांकि उम्र में मौसी से सीनियर हैं मगर बहुत ही आकर्षक और स्वस्थ ब्यक्ति हैं,

हमलोग फुर्सत निकाल कर मौसी के यहाँ गये थे, आराम से एक महिना गुजार कर आना था, मौसी हमें देख कर बहुत खुश हुवी, खास कर मेरी तो उन्होंने बहुत आव भगत की, हम पति पत्नी को उन्होंने उपर का बेडरूम दे रखा था,

उस दिन मैं सबरे उठा, तब मेरी बीबी गहरी नींद में सोई हुवी थी, मैनें काफी रात तक जो उसकी जम कर चुदाई की थी, अभी सूरज तो नहीं निकला था लेकिन उजाला चारों और फैल चुका था, मैनें ठंडी हवा लेने की गरज से खिड़की के पास जा कर पर्दा खिंच दिया, सुबह की धुंध चारों तरफ छाई थी, सीर निचा करके निचे देखा तो दिमाग को एक झटका सा लगा, नीचे लोन में मौसी केवल एक टाइट सी बिकनी पहने दौड़ कर चक्कर लगा रही थी,

उनके गोरे शरीर पर काली बिकनी ऐसे लग रही थी जैसे पूनम के चाँद पर काले रंग का बादल छा कर चाँद को और भी सुन्दर बना रहा हो,

बालों को उन्होंने पीछे कर के हेयर बेंड से बाँधा हुवा था, इसलिए उनका चौड़ा चमकीला माथा बहुत ही अच्छा दिख रहा था, बिकनी के बाहर उनकी चिकनी गोरी जांघें ऊपर कुल्हों तक दिख रही थी, भागने के कारण धीरे धीरे उछलती हुवी उनकी चूचियाँ तथा गोरी मखमली बाँहें और सुनहरी बगलें बहुत सुन्दर छटा बिखेर रही थीं, उन्हें देख कर मेरी नसों का खून उबाल खा गया, तभी वे मेरी खिड़की के निचे रुकी और झुकते और उठते हुवे कसरत करने लगी, वे जैसे ही झुक कर खड़ी होती उपर होने के कारण मुझे उनकी चूचियाँ काफी गहराई तक दिख जाती,

तभी जाने कैसे उन्होंने उपर नजर डाली और मुझे खिड़की पर खड़ा देख लिया, मैं हडबडा कर वहाँ से हटना चाहा, परन्तु उनके चेहरे पर मोहक मुस्कान देख कर मैं रुक गया, उन्हें मुस्कुराते देख कर मैं भी धीरे से मुस्कुरा दिया, तभी मैं चौंका वो मुझे इशारे से निचे बुला रही थी,

मेरा दिल जोर से धड़क गया, मैनें एक नजर अपनी सोती बीबी पर डाली, वो अभी भी बेखबर सो रही थी, फिर मैं निचे आ गया, मौसी जी लोन में ही जोगिंग कर रही थी,

"लोन में ही जोगिंग कर रही हैं मौसी जी " मैंने उनके पास जाकर कहा तो वे भी मुस्कुरा कर बोली,

" जो भी जगह जोगिंग के लिये उपयुक्त लगे वहीँ जोगिंग कर लो, तुम भी किया करो सेहत के लिये अच्छी होती है,"

" ठीक कह रही हैं आप " मैंने कहा,

वो फीर दौड़ पड़ी और मुझसे बोली " तो आओ मेरे साथ, कम ऑन "

मैं भी उनके साथ दौड़ने लगा, वे मुझसे जरा भी नहीं हिचक रही थी, मैं दौड़ते हुवे बहुत करीब से उनके महकते अंगों को देख रहा था,

" मौसा जी कहाँ हैं?" मैनें उनकी जाँघों पर नजर टीका कर पूछा,

" वे आज हैदराबाद गये हैं, कंपनी के काम से, सुबह जल्दी की फ्लाईट थी, शायद पांच छः दिन बाद लौटेंगे," उन्होंने जवाब दिया

ना जाने कयों मुझे तसल्ली के साथ साथ ख़ुशी भी हुई,

" आपका फिगर तो बहुत सुन्दर है मौसी जी " बहुत देर से दिमाग में घूमता ये सवाल आखिर मेरे मुंह से निकल ही गया,

मेरी आशा के विपरीत वे एकाएक रुक गई, मैं भी रुक गया, ये सोच कर की कहीं बुरा तो नहीं मान गई मेरा दिल धड़का, जबकि वे धीरे से मुस्कुरा कर मेरी आँखों में झाँक कर बोली,

" तुम्हारे शब्द लुभावनें हैं लेकिन अंदाज गलत है,"

" क्या मतलब," मैं चौंका,

" यदि मैं या मेरी हमउम्र लड़की तुमसे ये कहे की अंकल तुम्हारी पर्सनेल्टी बहुत अच्छी है तो तुम्हे कैसा लगेगा," मौसी जी ने मुझसे कहा,

" ओह...! " मेरे होंठ सिकुड़ गये, मैं उनकी बात का मतलब समझ गया था, क्योंकि वो मुझसे तो उम्र में छोटी थी, इसलिए उन्हें मेरा उनको मौसी जी कहना अच्छा नहीं लगा था, वैसे तो मुझे भी उनको मौसी जी कहना जरा अजीब सा लगता था लेकिन बीबी के रिश्ते के कारण मौसी नहीं तो और क्या कहता, यही बात उस वक्त मैनें उनसे कह दी,

" मैं भी आपको मौसी कहाँ कहना चाहता हूँ, मगर और क्या कहूँ,"

जवाब में वो शोखी से मुस्कुराई और मेरे बहुत करीब आकर मेरे सिने को अपने हांथों से थपथपा कर बोली

" वैसे तो मेरा नाम सुजाता है, मगर जो लोग मुझे पसन्द करते हैं वे सभी मुझे सूजी कहते हैं,"

" और जिन्हें आप पसन्द करती हैं उनसे आप खुद को सुजाता कहलवाना पसन्द करती हैं या सूजी," मैनें उनसे पूछा

वे मेरी बटन से छेड़छाड़ करती हुई मेरी आँखों में झाँक कर बोली " सूजी "

" यदि मैं आपको सूजी कहूँ तो?"

" नो प्रोब्लम, बल्कि मुझे ख़ुशी होगी " कह कर उन्होंने वापस दौड़ लगा दी,

मेरा दिल बुरी तरह धड़कने लगा, मौसी यानी सूजी मुझे अपने दिल की बात इशारों में समझा गई थी,उस समय मैनें खुद को किसी शहंशाह से कम नहीं समझा, सूजी थी ही इतनी सुन्दर की उसकी समीपता पाकर कोई भी अपने को शहंशाह समझ सकता था,

मैं मन में बड़ी अजीब सी अनुभूति लिये बेडरूम में आया, मेरी बीबी अभी अभी जागी थी,

वो बेड से उठ कर बड़े अचरज से मुझे देख कर बोली,

"कहाँ गये थे इतनी सुबह सुबह,"

" जोगिंग करने " मेरे मुंह से निकल गया

" जोगिंग " मेरी बीबी ने अचरज से अपनी आँखें फाड़ी,

" व ...वो मेरा मतलब है, मैं सुबह जल्दी उठ गया था ना इसलिये सोचा चलो जोगिंग की प्रेक्टिस की जाये, मगर सफल ना हो सका तो वापस चला आया," मैनें जल्दी से बात बनाई, मेरी बात सुन कर बीबी हंसी और बाथरूम में घुस गई,

फिर दो दिन निकल गये, मैं अपनी बीबी के सामने मौसी को मौसी जी कहता और अकेले में सूजी, इस बिच सूजी के ब्यवहार में आश्चर्य जनक परिवर्तन हुवा था, वो मेरे ज्यादा से ज्यादा करीब होने की कोशीश करती, बहुत गंभीर और परेशान सी दिखाई देती जैसे की मुझसे चुदवाने को तड़प रही हो, उसे चोदने के लिये तड़प तो मैं भी रहा था, मगर अपनी बीबी के कारण मैं उसे छिप कर बाहों में भर कर चूमने के सिवा कुछ ना कर सका, और आखिर परेशान होकर सूजी नें खुद ही एक दिन मौका निकाल लिया,

क्योंकि उनके पति को लौटनें में अब दो ही दिन रह गये थे, उनके पति के आने के बाद तो मौका निकालना लगभग नामुमकिन हो जाता, सूजी ने उस रात मेरी बीबी की कोफी में नींद की कुछ गोलियां मिला कर उसे पिला दी, थोडी देर में जब मेरी बीबी गहरी नींद में सो गई तो मैं फटाफट सूजी के बेडरूम में पहुँच गया,

वो तो मुझे मेरा इन्तजार करते हुवे मिली, मैनें झट उसे बांहों में भर कर भींच लिया और उसके चेहरे और शुर्ख होंठों पर ढेर सारे चुम्बन जड़ दिये, जवाब में उसने भी चुम्बनों का आदान प्रदान गर्मजोशी से दिया,

वो इस वक्त झीनी सी सफेद रंग की नाइटी में थी, जिसमें से उसका सारा शरीर नजर आ रहा था, मेरा खून कनपटीयों पर जमने लगा था, मैनें खिंच कर नाइटी को प्याज के छिलके की तरह उतार फेंका, पेंटी और ब्रा में कसे उसके दुधिया कटाव गजब ढा रहे थे, मैनें पहले ब्रा के उपर से ही उसकी कठोर चुचियों को पकड़ कर दबाया और काफी सख्ती दिखा दी,

" उफ ...सी...ई ...क्या कर रहे हो? सूजी के मुंह से निकला " ये नाजुक खिलौनें हैं इनके साथ प्यार से खेलो,"
 
मैनें हंस कर उन्हें छोड़ने के बाद पीछे हाँथ ले जा कर पेंटी में हाँथ घुसा दिया और उसके मोटे मुलायम चुतड के उभारों को मुट्ठी में भर लिया, इसी बिच सूजी ने मेरे पेंट के फूले हुवे स्थान पर हाँथ रख कर मेरे लंड को पकड़ा और जोर से भींच दिया,

" आह..." मैनें कराह कर अपना हाँथ उसकी पेंटी में से बाहर खिंच लिया, तब मुस्कुरा कर सूजी ने मेरा लंड छोड़ते हुवे कहा,

" क्यों जब तुम्हारे लंड पर सख्ती पड़ी तो मुंह से आह निकल गई और मेरे नाजुक अंगों पर सख्ती दिखा रहे थे,"

मैं भी उसकी बात सुन कर हंसने लगा, उसके बाद मैनें सूजी को और सूजी ने मुझे सारे कपड़े उतार कर नंगा कर दिया, और मैं उसके शरीर को दीवानगी से चूमने लगा,वो भी मेरे लंड को हाँथ में पकड़े आगे पीछे कर रही थी,

" वाह, काफी तगड़ा लंड है तुम्हारा तो,"

मैं उसकी एक चूची को मुंह में भर कर चूसने लगा तथा एक हाँथ से उसकी जांघ को सहलाते हुवे उसकी चिकनी चूत पर हाँथ फेरा, एकदम साफ़ चिकनी और फुली हुई चूत थी उसकी, एकदम डबलरोटी की तरह, उसके एक एक अंग का कटाव ऐसा था की फरिस्तों का ईमान भी डिगा देता, शायद नियमित जोगिंग के कारण ही उसका शरीर इतना सुन्दर था,

मैनें उसे बेड पर बिठा कर उसकी जांघें फैलाने के बाद उसकी खुबसूरत चूत को चूम लिया, और फीर जीभ निकाल कर चूत की दरार में फिराई तो उसने सिसकी भर कर अपनी जाँघों से मेरे सीर को अपनी चूत पर दबा दिया, मैनें उसकी चूत के छेद में जो की एकदम सिंदूर की तरह दहक कर लाल हो रहा था उसमें अपनी लम्बी नाक घुसा दी, उसकी दहकती चूत में से भीनी भीनी सुगन्ध आ रही थी

तभी सूजी ने मुझे उठाया, उत्तेजना के कारण उसका चेहरा बुरी तरह तमतमा रहा था

उसने मुझे उठाने के बाद कहा,

" अब मैं तुम्हारा लंड खाऊँगी,"

"खा लो,"

मैनें हंस कर कहा तो सचमुच जमीन पर घुटनों के बल बैठ गई और अपना मुंह फाड़ कर मेरा लंड अपने मुंह में भर कर चूसने लगी, मेरी बीबी ने भी कभी इस तरह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर नहीं चूसा था, क्योंकि उसे तो घिन आती थी, इसी कारण जब आज सूजी नें मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसा तो एक अजीब से सुख के कारण मेरा शरीर अकड़ रहा था,

वो मेरे चूतडों को हांथों से जकडे हुवे अपना मुंह आगे पीछे करते हुवे मेरा लंड चूस रही थी, उसके सुर्ख होंठों के बिच फंसा मेरा लंड सटासट उसके मुंह में अन्दर बाहर हो रहा था, सूजी मुस्कुराती आँखों से मुझे ही देख रही थी, फिर एकाएक वो अपनी गर्दन जोर जोर से आगे पीछे चलाने लगी तो मुझे लगा की मैं उसके मुंह में ही झड़ जाउंगा, इसलिए मैनें उसका सीर पकड़ कर लंड को मुंह से निकालने की कोशिश की और बोला,

" छ ...छोड़ दो सूजी डार्लिंग नहीं तो मैं तुम्हारे मुंह में ही पिचकारी छोड़ दूंगा,"

परन्तु इतना सुनने के बाद भी उसने मेरा लंड अपने मुंह से बाहर नहीं निकाला बल्कि ना के इशारे में सीर हिला दिया, तो मैं समझ गया की वो मुझे अपने मुंह में ही झडवा कर मानेगी, उसने मेरे चूतडों को और जोर से जकड़ लिया और तेज तेज गर्दन हिलाने लगी, तो मैं चाह कर भी अपना लंड उसके मुंह से बाहर नहीं निकाल सका,

आखिर मैं उसके मुंह में झड़ गया और उसके उपर लद गया, मेरे वीर्य की पिचकारी उसके मुंह में छुट गई तो उसने गर्दन उपर निचे करना रोक दिया और मेरे लंड के सुपाड़े को किसी बच्चे की तरह निप्पल के जैसे चूसने लगी, सारा वीर्य अच्छी तरह चाट कर ही वो उठी और चटकारा लेकर मुझ से बोली,

" मजा आ गया जानेमन, बड़ा स्वादिष्ट रस है तुम्हारा,"

परन्तु अब तो मैं बेकार हो चूका था, मेरा लंड सिकुड़ कर आठ इंच से दो इंच का हो गया था,

मैनें उसे देख कर शिकायती लहजे में कहा,

" ये बात अच्छी नहीं है सूजी, तुमने मेरे साथ धोखा किया है,"

" अरे नहीं डार्लिंग धोखा कैसा, मैं अभी तुम्हारे लंड को दोबारा जगाती हूँ,"

कहने के बाद सूजी मेरा सिकुड़ा हुवा लंड हांथों में पकड़ कर उठाने की कोशिश करने लगी, भला वो अब इतनी जल्दी कहाँ उठने वाला था, मगर सूजी तो पूरी उस्ताद निकली,

उसने मुझे धकेल कर फर्श पर चित लिटाया और मेरी जाँघों पर चढ़ कर बैठ गई, तथा मेरे सिकुड़े हुवे लंड को पकड़ कर अपनी दहकती हुई चूत के छेद पर रगड़ने लगी, मैं भी उसकी चुचियों को दबाने लगा, उसकी चूचियां बड़ी सुन्दर और कठोर थी, जल्दी ही मेरे लंड में थोड़ा कड़ापन आ गया,

उसी समय सूजी ने मेरे थोड़ा कठोर हो चुके लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रखा और अंगूठे की सहायता से जबरदस्ती अपनी चूत में ठूंस लिया, चूत के अन्दर की गर्मी पाकर तो मेरा लंड एकदम से खडा होने लगा और चूत में पड़े पड़े ही सीर उठाने लगा,

सूजी ने लंड को बाहर नहीं निकाला बल्कि वो संभल कर लंड के उपर ही बैठ गई, मेरा लंड जितना तनता जा रहा था उतना सूजी की चूत की दीवारों को फैलाता हुवा अन्दर घुसता जा रहा था, एक समय ऐसा आया की सूजी को अपने घुटनों की सहायता से उपर उठाना पड़ा, क्योंकि मेरा लंड अब तो पहले से भी ज्यादा लम्बा और कड़ा होकर करीब आधा तक उसकी चूत की गहराई में पहुँच कर चूत के छेद को चौड़ा करके कस चूका था, लंड अभी भी धीरे धीरे उठ रहा था, उसे इस तरह बढ़ता देख कर सूजी सिसिया कर उठ गई और लंड का सुपाड़ा सट से बाहर आ गया, वो बोली,

" बा....बाप रे....ये तो बढ़ता ही जा रहा है,"

" इस पर बैठो ना सूजी," मैनें उसे दोबारा लंड पर बैठने के लिये कहा, मगर वो नकली हैरानी दिखाते हुवे बोली,

" ना....ना बाबा ना, इतने लम्बे और मोटे लंड को मेरी कोमल चूत कैसे सहन कर पाएगी, इसे तुम्हारा ये बम्बू जैसा लंड फाड़ देगा,"

अब मैं उठा और सूजी से बोला,

" लो कम ऑन सूजी, तुम कोई बच्ची नहीं हो जो मेरे लंड से इतना डर दिखा रही हो,"

सूजी तो फालतु में नाटक कर रही थी, मैं तो एक बार झड़ चूका था, इसलिए मुझे कोई जल्दीबाजी नहीं थी, मगर सूजी की चूत में आग तब से अब तक उसी तरह लगी हुई थी, वो चुदवाने के लिये बुरी तरह उतावली हो रही थी, ये उसके चेहरे से ही झलक रहा था,

सो इस बार वो कोई भी नखरा किये बिना चुपचाप अपने घुटनें और हथेलियाँ फर्श पर टिका कर जानवरों वाली कंडीसन में हो गई, यानि वो जानवरों वाली पोजीसन में वो पीछे से लंड चूत में डलवा कर चुदवाना चाहती थी,
 


मुझे भला क्या ऐतराज होता, मैं उसके पीछे आ गया, लेकिन उसके कुल्हे मेरे धड़ से बहुत निचे थे, इसलिये मैनें उसे पंजो पर खडा करके उसकी पोजीसन को ठीक किया, अब उसके कूल्हों का सेंटर ठीक मेरे लंड से मेल खा रहा था, मैनें उसकी टांगों को आगे बढ़ा कर उसके पेट से सटा दिया,

अब उसकी चूत काफी हद तक उभर कर पीछे की ओर निकल आई थी, सब कुछ जांच परख कर मैनें उसकी चूत के छेद पर अपने लंड का सुपाड़ा टिकाया और उसके कुल्हे पकड़ कर मैं लंड अभी ठेलना ही चाहता था की उधर सूजी नें लंड अन्दर लेने के लिये अपने कूल्हों को पीछे की ओर ठेला और इधर मैनें धक्का मारा, दोनों तरफ के धक्कों के कारण लंड थोड़ा सा कसता हुवा सरसरा कर करीब आधा चूत के अन्दर चला गया,

सूजी के मुंह से सी...सी...ई...की आवाज निकली, उसने दोहरी होकर बदन ऐंठ दिया, मैं रुका नहीं और अपना पूरा लंड अन्दर ठेलता ही चला गया, हालांकि सूजी की चूत काफी कसी हुई थी और मैं जानता था की इस तरह सूजी को मेरे मोटे और लम्बे लंड से थोडी बहुत परेशानी हो रही होगी, मगर उतनी नहीं जितना की सूजी दिखा रही थी,

वो " ऊं ....आ ...आह.. करते हुवे अपना धड़ आगे बढाने लगी, जबकि मैंने उसकी कोई परवाह नहीं की और बहुत जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये, मुझे इम्प्रेस ना होते देख कर सूजी ने भी कराहना बंद कर दिया और मेरे लंड का स्वाद अपनी चूत से लेने में मगन हो गई,

मेरे लगभग हर धक्के पर सूजी जरा सा आगे सरक जाती, मेरा आठ नौ इंची लम्बा लंड जरूर उसकी अंतड़ियों में जाकर अड़ जाता होगा, मैं लंड को सट से बाहर खींचता और सड़ाक से अन्दर घुसेड़ देता, मेरे जोर के धक्कों के कारण ही सूजी अपनी जगह से तीन चार फीट आगे सरक गई थी, साथ में मैं भी आगे बढ़ता चला गया,

अब वो मस्ती में सिसकियाँ भर रही थी और मैं उसके कुल्हे पकड़ कर धका धक लंड से पेलम पेल मचाये हुवे था, सूजी मेरे तेज धक्कों के कारण खुद को रोक ना सकी और जल्दी ही उसकी चूत नें पानी छोड़ दिया, मस्ती में वो अपने कुल्हे मटकाते हुवे मेरे लंड पर अपनी चूत से निकले रस की फुहार फेंकने लगी,

पूरी तरह मस्ती से निबट कर उसके मुंह से " ब.....बस...बस करो," की आवाज निकली, मगर मैं अभी कहाँ बस करने वाला था, मैं तो एक बार उसके मुंह में पहले ही अपना पानी गिरा चुका था, इसलिये अब दोबारा झड़ने में मुझे काफी देर लगनी थी, अभी तो मेरे झड़ने का आसार दुर दुर तक नहीं था,

यूँ भी मैं एक बार झड़ने के बाद दोबारा जब भी चुदाई करता तो मेरी बीबी भी मुझसे पनाह मांगती थी, इसीलिए वो मुझसे दोबारा चुदवाने के लिये कभी जल्दी से हाँ नहीं भरती थी, यदि चुदवाती भी तो पहले अपने हाँथ के जरिये या बाहर ही बाहर मेरे लंड को अपनी चूत पर काफी देर तक रगड़ती, जब तक मैं और मेरा लंड चोदने के लिये पूरी तरह तैयार ना हो जाते, इतनी देर के बाद चुदाई करने पर भी मैं अपनी बीबी से हाँथ जुड़वा कर ही दम लेता,

पर यहाँ तो मामला ही उल्टा था, सूजी ने तो मेरा लंड दोबारा खड़ा करके तुंरत ही अपनी चूत में डलवा लिया था, इसलिये अभी तो मैं जल्दी से झड़ने वाला नहीं था, सो मुस्कुरा कर उसी ताकत से उसके कूल्हों पर चोट करते हुवे बोला,

" मेरी जान, मुझे अपने मुंह में पहले झडवा कर के गलती तुमने की है, अब भुगतो मैं क्या करूँ?"

वो बुरी तरह कराह कर बोली, " हा....हाँ...गलती हो गई...मगर फिलहाल मुझे छोड़ दो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है,"

" मैं अब नहीं छोड़ने वाला " मैं धड़ा धड़ धक्के लगाता हुवा बोला,

" प्लीज थोडी देर के लिये अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लो," वो लगभग गिडगिडा कर बोली, " बस थोडी देर के लिये शान्त हो जाओ प्लीज "

मुझे उसपर दया आ गई, मैनें धक्के लगाने तो बंद कर दिये मगर लंड बाहर नहीं निकाला, उसके कूल्हों से सट कर हांफता हुवा बोला, " बस तुम औरतों में यही बात गलत है पहले तो मनमानी कर लेती हो फिर खुशामद करने लगती हो, तुम्हारा काम तो हो गया, अब मैं क्या करूँ?"

जवाब में वो कुछ देर सोचने के बाद बोली " अच्छा एक काम करो, मेरी गांड मार लो, अपना मुसल मेरी गांड में डाल लो "

" क्या...." मैं बुरी तरह चौंका, " क्या पागल हो गई हो, तुम्हारी गांड में लंड डालने से तो तुम्हें चूत से भी भयंकर दर्द होगा,"

" इसकी फ़िक्र तुम मत करो, अपने इस शैतान के बाप को मेरी चूत से निकाल कर मेरी गांड में डाल दो,"

वो खुद गांड मरवाने राजी थी तो मुझे भला क्या ऐतराज होता, मुझे तो मतलब मेरा काम पूरा होने से था, अब वो चाहे चूत हो गांड हो या मुंह, मुझे उससे क्या मतलब, तब मैनें सटाक से अपना लंड चूत से बाहर खिंचा, मेरा लंड चूत के पानी से भीगा हुवा था और चूत में पड़े रहने के कारण बहुत ही भयंकर नजर आ रहा था,

मैनें चूत के छेद से एक इंच उपर यानी गांड के गोल छेद पर अपने लंड का सुपाड़ा टिकाया और सूजी के कुल्हे पकड़ कर जोर लगाया, चूत के रस से चिकना सुपाड़ा गांड के छेद को फैला कर थोड़ा सा अन्दर घुस गया, मैं मन में सोच रहा था की सूजी के मुंह से चीख निकल जायेगी, परन्तु ऐसा नहीं हुवा, उसने सिर्फ सिसकी भर कर अपना सीर ताना, तब मैनें अपना पुरा लंड उसकी गांड में सरका दिया,

इस पर भी जब सूजी ने तकलीफ जाहिर नहीं की तो मैं समझ गया सूजी गांड मरवाने की आदि है, उसने सिर्फ कस कर अपने होंठ भींचे हुवे थे, फिर भी मैनें पूछा,

" तकलीफ तो नहीं हो रही है ना सूजी,"

" नहीं तुम धीरे धीरे चोदते रहो," उसने कहा तो मैं उसके गोल मटोल कुल्हे थपथपा कर धीरे से झुका और दोनों हाँथ निचे लाकर दोनों चुचियों को पकड़ कर उसकी गांड मारने लगा, थोडी देर बाद मैनें धक्के तेज कर दिये, मुझे तो उसकी चूत से अधिक उसकी गांड में अपना लंड कसा होने के कारण ज्यादा मजा आ रहा था, और जब मेरे धक्कों ने प्रचंड रूप धारण कर लिया तो सूजी एकदम से बोली,

" ...बस...अब अपना लंड मेरी गांड में से निकाल कर मेरी चूत में डाल दो,"

" क्यों " मैनें रुक कर पूछा,

" क्योंकि मैं तुम्हारा वीर्य अपनी चूत में गिरवाना चाहती हूँ,"
 


सुन कर मैं मुस्कुराया और अपना लंड गांड में से खिंच कर वापस उसकी चूत में घुसेड़ दिया, मैनें फीर जोर जोर से धक्के लगाने शुरु कर दिये थे, मगर इस बार सूजी को कोई परेशानी या दर्द नहीं हुवा था, बल्कि अब तो वो दुबारा मस्ती में भर कर अपने कुल्हे आगे पीछे ठेल कर मेरा पुरा साथ देने लगी थी, इतनी देर बाद भी मैं सूजी को मंजिल पर पहुंचा देने के बाद ही मैं झडा, सूजी भी कह उठी,

" मर्द हो तो तुम जैसा, एकदम कड़ियल जवान,"

" और औरत हो तो तुम जैसी एकदम कसी हुई," जवाब में मैनें भी कहा, फिर हम दोनों एक दुसरे की बाहों में समां गये,

मौसा जी को जहां दो दिन बाद आना था, दो दिन तो दूर की बात वो पुरे पांच दिन बाद आये,और उन पांच रातों का मैनें और सूजी नें भरपूर लाभ उठाया, सूजी हर रोज मेरी बीबी को नींद की गोलियां देकर सुला देती और हम दोनों अपनी रात रंगीन करते, मौसा जी के आने के बाद ही हमारा ये चुदाई का खेल रुका, इस बिच मौसी यानि सूजी बहुत उतावली रहती थी, वो मेरे एकांत में होने का जरा जरा सा बहाना ढुंढती थी,

मैं इस बात को उस वक्त ठीक से नहीं समझ सका की सूजी मेरी इतनी दीवानी क्यों है, क्या मौसा जी में कोई कमी है या वे इसे ठीक से चोद नहीं पाते? जबकि देखने भालने में वे ठीक ठाक थे,

सूजी मेरी इतनी दीवानी क्यों है? इसका जवाब मेरे दिमाग ने एक ही दिया की या तो वो मेरे लंड की ताकत से दीवानी हुई है या फिर मौसा जी उसे ढंग से चोद नहीं पाते होंगे, हम महिना भर वहाँ रहे, इस बिच हमने यदा कदा मौका देख कर चुदाई के कई राउंड मारे,

जब हम वहाँ से आने लगे तो सूजी ने मुझे अकेले में ले जाकर कहा,

" जल्दी जल्दी राउंड मारते रहना मुझे और मेरी चूत को तुम्हारे लंड का बेसब्री से इंतजार रहेगा,

मैनें इतनी चाहत का कारण पूछा तो उसने यही बताया की " वे " यानी की उसके पति उसे ठीक से चोद नहीं पाते, मेरा शक सही निकला, मौसा जी की कमी के कारन ही वो मेरी तरफ झुकी,

मेरा दिल भी उसे छोड़ कर जाने का नहीं कर रहा था, मगर मज़बूरी वश मुझे वापस आना पड़ा, आने के एक हफ्ता बाद ही मैं बीबी को बिना बत्ताये दुबारा सूजी के यहाँ पहुँच गया, वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई,

मैं इस बार चार दिन वहाँ रहा और चारों दिन सूजी को खूब चोदा, क्योंकि मौसा जी के ऑफिस जाने के बाद मैं और सूजी ही घर में रह जाते और खूब रंगरेलियां मनाते, अब तो मेरी बीबी का भी खतरा नहीं था, मौसा जी को भी हम पर कोई शक होने वाला नहीं था, क्योंकि रिश्ते के हिसाब से मैं सूजी का दामाद हूँ, मौसा जी भी मुझे दामाद जैसी इज्जत देते,

इसी का फायदा उठा कर मैं हर महीने सूजी के यहाँ जाकर पूरी मौज मस्ती करके आता था, हमारा ये क्रम पांच महिने तक चला, उसके बाद जब एक महिने पहले सूजी के यहाँ पहुंचा तो उसका ब्यवहार देख कर मैं बुरी तरह चौंका, वो मुझे देख कर जरा भी खुश नहीं हुई और ना ही मुझसे एकांत में मिलने की कोई कोशिश की, और जब मुझे बहुत ज्यादा परेशान देख कर मुझसे मिली तो उसके चेहरे पर सदाबहार मुस्कान की जगह रूखापन था, मैनें इसका कारण पूछा, और उसने जो कुछ मुझे बताया उसे सुन कर तो मेरे पैरों के निचे से जमीन ही निकल गई, उसने बताया की...

उसने मेरे से इस लिये नहीं चुदवाया की मौसा जी उसे ठीक से नहीं चोद पाते थे, सूजी मौसा जी से चुदवा कर पूरी खुश थी और वो मौसा जी से बहुत प्यार करती थी, उसने मुझसे सिर्फ इसलिए चुदवाया था की वो समझ गई थी की मौसा जी बच्चा पैदा करने में असमर्थ थे, उनके वीर्य में शुक्राणु या तो हैं नहीं या हैं तो बहुत कमजोर हैं, ये बात उसने अपना चेकअप करा कर जानी, क्योंकि जब उसमें कोई कमी नहीं थी तो जाहिर था की कमी मौसा जी में ही हो सकती थी, जबकि उसे और मौसा जी को बच्चे की बहुत चाहत थी, इससे पहले की मौसा जी ये बात जानें, गर्भवती होने के लिये मुझसे संबंध बना लिये, ताकि मौसा जी अपने बारे में जान कर हीन भावना से ग्रस्त ना हो जाएँ, अब वो गर्भवती हो चुकी है इसलिए वो उसके पास ना आया करे, अंत में उसने कहा मुझे तुमसे कोई लगाव नहीं है, अब इधर दुबारा फटकना भी मत,

मुझे दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया,
 
मिनी और राज

मेरा नाम मिनी है. मैं भोपाल की रहने वाली हूँ. मेरा रंग गोरा, बदन स्लिम, बॉल एक दम काले और बहुत लंबे और आँखे भूरी हैं. मेरी शादी 6 महीने पहले 17 साल की उमर में दीपक के साथ हुई है. दीपक भी 19 साल का है. दीपक एक दम दुबला पतला और बहुत ही कमज़ोर है. दीपक का एक भाई, राज है जो उनसे उमर में 3 साल छ्होटा है. वो एक दम हटता कटता है और उसका बदन एक दम गातीला है. वो दिखाने में हॅंडसम है. शादी के बाद मैं ससुराल पहुचि. मैने दीपक के साथ सुहग्रत मनाया. सुहग्रात के दिन ही मेरे सारे ख्वाब टूट गये. मैं बहुत ही सेक्सी हूँ लेकिन दीपक सेक्स में भी बहुत कमज़ोर था. उनका लंड भी छ्होटा था और वो 2 मीं में ही झाड़ जाता था. मुझे उसके साथ सेक्स में पहली पहली बार ही मज़ा आया क्यों की मैं अभी तक कुँवारी थी. उसके बाद मुझे बिल्कुल भी मज़ा नही आता था.

शादी के 15 दीनो बाद दीपक बीमार पद गये. डॉक्टर ने उन्हे सेक्स के लिए बिल्कुल माना कर दिया. 10 दीनो बाद ही दीपक को 2 मंत के लिए हॉस्पिटल में भारती करना पड़ा. हॉस्पिटल में घरवालो को मरीज़ से केवल सुबह और शाम 1 घंटे के लिए ही मिलने की इज़ाज़त थी. वहाँ पर मरीज़ की देखभाल वहाँ के स्टाफ करते थे. दीपक को हॉस्पिटल में भारती हुए अभी 8-10 दिन ही हुए थे की मैं सेक्स की प्यास से एक दम पागल सी होने लगी. मेरे समझ में कुच्छ नही आ रहा था और मैं परेशन रहने लगी. घर पर में और मेरा ड्यूवर राज ही थे. वो अभी 11 क्लास में पढ़ता था.

एक दिन मेरे मान में ख़याल आया की क्यों ना मैं अपनी प्यास राज से मिटा लून. लेकिन मैने सोचा की राज तो अभी 16 साल का ही है. अभी तक वो मेच्यूर नही हुआ होगा. मैने ये ख़याल अपने दिमाग़ से निकल दिया. एक दिन सुबह के वक़्त मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब लगा तो मैं जल्दी जल्दी बातरूम गयी. मैने झटके से बातरूम का दरवाज़ा खोला तो अंदर राज पेशाब कर रहा था. वो चौक कर मेरी तरफ पलटा और मुझे देखकर शर्मा गया. मैने उसको सॉरी कहा. मेरी निगाह उसके लंड पर पड़ी तो मैं चौक गयी. मैने कभी सपने में भी नही सोचा था की 16 साल के लड़के का लंड ऐसा भी हो सकता है. उसका लंड 7" लंबा और बहुत ही ज़्यादा मोटा था. मैं वापस बाहर आ गयी और उसके बाहर निकालने का इंतेज़ार करने लगी. थोड़ी देर बाद वो बाहर आया तो मैं बातरूम चली गयी. बातरूम से वापस आने के बाद मेरे मान में फिर से ख़याल आया की राज से मेरी प्यास बुझ सकती है. मुझे राज को किसी तरह पटना पड़ेगा.

घर का सारा कम निपटने के बाद मैं नहाने के लिए गयी तो मैने बातरूम से ही राज को पुकारा. मैने बातरूम का डोर लॉक नही किया था. राज बाहर आया और उसने पुचछा, क्या बात है. मैने कहा, ज़रा मेरी पीठ पर साबुन लगा दो. वो शरमाते हुए अंदर आया. मैने केवल पेट्त्यकोआट पहन रखा था उसी से अपने बूब्स को धक रखा था. राज ने मेरी पीठ पर साबुन लगाना शुरू कर दिया. राज से साबुन लगवाते वक़्त मैने जानबूझ कर अपना पेट्त्यकोआट हाथ से छ्चोड़ दिया तो मेरा पेट्त्यकोआट नीचे हो गया. मेरे बूब्स एक दम नंगे हो गये. वो मेरे बूब्स को ध्यान से देखते हुए चुप-छाप साबुन लगाने लगा. थोड़ी देर बाद वो बोला, मैने साबुन लगा दिया है, अब मैं जाऊं. मैने कहा, हन जाओ. वो चला गया.

मैं नहाने के बाद बातरूम से बाहर आई और बेडरूम में जा कर कपड़े पहन ने लगी. जब मैने ब्रा पहन ना शर किया तो मैने फिर राज को बुलाया. वो मेरे पास आया और बोला, अब क्या है. मैने कहा, ज़रा इसका हुक बंद कर दो. मेरा हाथ नही पहुच रहा है. वो मेरी पीठ को ध्यान से देखते हुए हुक बंद करने लगा. जब उसने हुक बंद कर दिया तो बोला, और कुच्छ करना है. मैने कहा, नही. उसकी आवाज़ इस बार कुच्छ बदली बदली सी लग रही थी.

कपड़े पहन लेने के बाद मैने नाश्ता बनाया. नाश्ता बनाने के बाद मैने राज को नाश्ता दिया और खुद भी नाश्ता करने लगी. वो मुझे तिरच्चि नज़रों से देखता हुआ नाश्ता कर रहा था. उसकी आँखों में भी मैने सेक्स की भूख देखी. मैं समझ गयी की अब मेरा काम आसानी से हो जाएगा.

दोपहर को मैं एक चादर ओढ़ कर लेती थी. मैने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और केवल ब्रा और पेट्त्यकोआट ही पहना हुआ था. वो मेरे पास आया और बोला, खाना नही बनाओगी. भूख लगी है. मैने कहा, मेरी कमर में बहुत तेज़ दर्द हो रहा है. थोड़ा सा बल्म लगा कर मालिश कर दोगे. वो बोला, घर पर मैं ही अकेला हूँ. अगर मई नही लगौँगा तो और कौन लगाने आएगा. उसने बल्म की शीशी उठाई और मेरे पास आ कर बैठ गया. मैं पेट के बाल लेट गयी और मैने अपने उपर से चादर हटा दिया. उसने मेरी कमर पर बल्म लगाना शुरू कर दिया. मैने उस से कहा, थोड़ा नीचे भी दर्द है. वहाँ पर भी लगा दो. इतना कह कर मैने अपना पेट्त्यकोआट थोड़ा और नीचे कर दिया जिस से मेरा छूतड़ उसे कुच्छ कुच्छ दिखने लगे. उसने और नीचे तक बल्म लगाना शुरू कर दिया. वो मेरे छूतड़ को ध्यान से देखता हुआ बल्म लगा रहा था. उसे भी जोश आने लगा था और उसका लंड खड़ा हो गया था. उसका लंड मेरे बदन से सता हुआ था. मैं उसके लंड को महसूस कर रही थी और मुझे भी जोश आ रहा था. मेरे सारे बदन में एक आग सी लगने लगी. बल्म लगते हुए वो मेरे छूतड़ को सहला भी रहा था.

धीरे धीरे उसका हाथ नीचे की तरफ बढ़ने लगा. मैने उसे माना नही किया. उसने अपनी उंगली मेरी गांद के च्छेद पर भी लगानी शुरू कर दी. मेरे बदन की आग और तेज़ होने लगी. मैने कभी गांद नही मरवाई थी, इस लिए मैने सोचा की क्यों ना पहले मैं राज से गांद ही मरवा लून. राज बड़े पायर से मेरी कमर और छूतड़ के पास बल्म लगते हुए मेरी गांद के च्छेद पर अपनी उंगली लगा रहा था. वो अपना लंड भी मेरे बदन पर लगा रहा था. मैने अपना हाथ उसके लंड पर रख दिया और कहा, ये क्या है, बहुत चुभ रहा है. उसने शरमाते हुए कहा की, जो सब के पास होता है. मैने कहा, नही, मुझे कुच्छ दूसरा लग रहा है. ये तो बहुत बड़ा है. वो बोला, नही वही है जो सबके पास होता है. मैने कहा, मैं नही मान सकती. मैं देखूँगी. वो बोला, मुझे शरम आती है. मैने कहा, इस में शरमाने की क्या बात है. यहाँ और कोई दूसरा थोड़े ही है. मुझे दिकाहो. उसने कहा, भैया से तो नही कहोगी. मैने कहा, बिल्कुल नही. वो बोला, ठीक है, दिखा देता हूँ.

वो बहुत जोश में था. उसने अपने पंत की ज़िप खोली और अपना लंड बाहर निकल कर मुझे दिखाते हुए बोला, देख लो, वही है जो सबके पास होता है. मैने उसका लंड अपने हाथ में ले लिया और बोली, सबके पास ये कहाँ होता है. ये तो बहुत बड़ा है. ऐसा तो किसी किसी के पास होता. उसने फिर से मेरे कमर पर बल्म लगाना शुरू कर दिया और मेरे छूतड़ को सहलाता हुआ मेरी गांद के च्छेद पर उंगली लगाने लगा.

मेरे हाथ लगाने से उसका लंड और भी ज़्यादा टाइट हो गया. उसने धीरे से कहा, मैं आपके पेट्त्यकोआट को थोड़ा और नीचे कर डून. मैने कहा, कर दो. उसने मेरा पेट्त्यकोआट और ज़्यादा नीचे कर दी. अब मेरी गांद एक दम नंगी हो गयी. वो अभी भी मेरी गांद को देखते हुए च्छेद पर अपनी उंगली लगा रहा था. वो बोला, आपकी गांद बहुत ही सुंदर है. मैने कहा, मैं गोरी हूँ ना, इसी लिए. मैने उसके लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा, तुम्हारा लंड भी बहुत सुंदर है. मैं तुम्हारा लंड अपने मूह में ले लून. वो बोला, ले लो. मैने उसका हाथ पकड़ कर उसकी उंगली अपनी गांद च्छेद पर रख दी और कहा, तुम अपनी उंगली मेरी गांद के च्छेद में दाल दो और अंदर बाहर करो.

वो बहुत जोश में था. उसने अपनी उंगली एक झटके से मेरी गांद में दाल दी. मेरे मूह से एक सिसकारी सी निकली तो वो बोला, क्या हुआ. मैने कहा, थोड़ा सा दर्द हुआ. ऐसा पहली पहली बार होता है. वो मेरी गांद में अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगा. मैने उसका लंड मूह में ले लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर बाद वो बोला, मुझे कुच्छ हो रहा है. लग रहा है मेरे लंड से कुच्छ निकालने वाला है. मैने पहली बार उसके मूह से लंड सुना. मैने कहा, मेरे मूह में ही निकालने दो. मैं इसे पी जौंगी. तभी उसने मेरा सिर अपने हाथ से पकड़ अपने लंड की तरफ खीच लिया और उसके लंड का गरम गरम जूस मेरे मूह में निकालने लगा. मैने वो सारा जूस पी लिया. उसके लंड का सारा जूस पी जाने के बाद भी मैने उसके लंड को चूसना जारी रखा. वो मेरी गांद में बहुत तेज़ी के साथ अपनी उंगली अंदर बाहर कर रहा था.

अब तक मेरी गांद कुच्छ ढीली हो गयी थी और मुझे मज़ा आने लगा था. मैने राज से कहा, अब तुम अपनी 2 उंगली दाल कर अंदर बाहर करो. उसने अपनी 2 उंगली मेरी गांद में दाल दी तो मुझे इस बार ज़्यादा दर्द हुआ. मेरे मूह से एक हल्की सी चीख निकल गयी. वो बोला, मैं रुक जाऊं क्या. मैने कहा, नही. तुम रूको मत. तेज़ी से अपनी उंगली मेरी गांद के अंदर बाहर करो. उसने बहुत ही तेज़ी के साथ मेरी गांद में अपनी उंगली अंदर बाहर करनी शुरू कर दी. वो बोला, गांद में उंगली करवाने से क्या होता है. मैने कहा, मैं तुम्हारा लंड अपने मूह में ले कर चूस रही हूँ. कैसा लग रहा है. वो बोला, बहुत मज़ा आ रहा है. मैने कहा, इसी तरह गांद में उंगली करवाने से मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है. अभी थोड़ी देर बाद जब मैं तुम्हारा ये लंड अपनी गांद के अंदर लूँगी, तब तुम्हे और मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आएगा.

10 मीं में ही उसका लंड फिर से खड़ा हो गया तो मैने राज से कहा, ड्रेसिंग तबले से कराएँ ले आओ. वो जा कर कराएँ ले आया. मैने कहा, थोड़ी सी क्रीम मेरी गांद के च्छेद पर लगा दो. उसने थोड़ी सी क्रीम मेरी गांद के च्छेद पर लगा दी. फिर मैने उसके लंड पर ढेर सारी कराएँ लगा दी और उस से कहा, अब अपना लंड मेरी गांद के च्छेद में धीरे धीरे घुसाओ. मेरा ये पहली बार आयी, इस लिए मुझे ज़्यादा दर्द होगा लेकिन तुम चिंता मत करना. अपना पूरा का पूरा लंड धीरे धीरे मेरी गांद में घुसा देना.

उसने अपना लंड मेरी गांद के च्छेद पर रखा और अंदर दबाने लगा. जैसे ही उसने थोड़ा सा दबाया तो मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ और मेरे मूह से हल्की सी चीख निकल पड़ी. अभी तक केवल उसके लंड का टोपा ही मेरी गांद में घुसा था. वो बोला, रुक जाऊं. मैने कहा, मैने तुम्हे रुकने से माना किया था ना. अभी तो मुझे और ज़्यादा दर्द होगा. जब तक मैं ना कहूँ तब तक तुम रुकना मत, अपना लंड मेरी गांद में घसटे रहना. वो बहुत ही जोश में आ गया था और बोला, मेरा पानी फिर से निकालने वाला है. मैने कहा, निकालने दो. उसने जोश में आ कर 2-3 धक्के लगा दिए. मुझे इस बार बहुत तेज़ दर्द हुआ. 2-3 धक्को के बाद ही उसके लंड से पानी निकालने लगा. मैं जानती थी की वो अभी तक कुँवारा है, इस लिए वो ज़्यादा देर नही टिक सकता. मैने उस से पूचछा, तुम्हारा लंड कितना अंदर घुसा था. वो बोला, केवल 2". जब उसके लंड का पूरा पानी निकल गया तो उसने अपना लंड मेरी गांद से बाहर निकल लिया.

उसके बाद वो मेरी बगल में लेट गया. मैं उसका लंड सहलाने लगी. उसने मेरे बूब्स की तरफ इशारा करते हुए कहा, मैं इसे देखना चाहता हूँ. मैने कहा, मेरी ब्रा का हुक खोल कर इसे उतार दो, फिर देखो. उसने मेरी ब्रा का हुक खोल कर मेरी ब्रा को उतार दिया और मेरे बूब्स को देखने लगा. वो बोला, मुझे ये बहुत अच्च्छा लग रहा है. मैने कहा, इसे अपने हाथ में ले कर ज़ोर ज़ोर से मस्लो. उसने मेरे दोनो बूब्स अपने हाथो मे ले लिए और ज़ोर ज़ोर से मसालने लगा. वो बोला, इसे मसालने में भी बहुत मज़ा आ रहा है. मैने कहा, ठीक है. मसालते रहो और खूब मज़ा लो. राज ने अभी तक मेरी चूत को नही देखा था. वो मेरे बूब्स को मसल रहा था और मैं उसका लंड सहला रही थी.

10 मीं में ही उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. मैने कहा, चलो अब अपना लंड मेरी गांद में डालो. मैं पीठ के बाल लेट गयी और वो मेरे उपर आ गया. उसने अपना लंड मेरी गांद के च्छेद पर रखा और अंदर दबाने लगा. उसका लंड जब 2" तक मेरी गांद में घुस गया तो मुझे हल्का सा दर्द हुआ. उसने अपना लंड दबाना ज़ारी रखा. दर्द के मारे मैं चिल्लती रही थी लेकिन मैने उसे रोका नही. वो बोला, ये तो आपकी गांद में घुसता चला जा रहा है. मैने कहा, कितना घुसा है अब तक. वो बोला, अब तक 3" घुस चुका है. मैने कहा, ठीक है, तुम घुसते रहो. जैसे ही उसने थोड़ा और दबाया तो मेरा दर्द बर्दस्त से बाहर हो गया. मैने कहा, अब रुक जाओ और अंदर बाहर करना शुरू कर दो. और ज़्यादा अंदर मत घुसना. उसने धक्के लगाने शुरू कर दिए और थोड़ी देर बाद बोला, इस बार तो बहुत मज़ा आ रहा है. मैने कहा, तुम मज़ा लेते रहो और तेज़ी से अनद्र बाहर करते रहो. मुझे भी अब कुच्छ कुच्छ मज़ा आ रहा है. अभी थोड़ी देर मैं जब मेरा दर्द कम हो जाएगा तो मुझे और ज़्यादा मज़ा आएगा.

वो धक्के लगता रहा. अभी मैं उसका पूरा लंड अपनी गांद के अंदर नही ले पाई थी की वो बोला, मेरे लंड से फिर से पानी निकालने वाला है. मैने कहा, निकालने दो. वो बहुत ज़्यादा जोश में आ गया था और उसने बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए थे. थोड़ी देर बाद राज मेरी गांद में ही झाड़ गया. मैने पूचछा, इस बार कितना घुस था. वो बोला, 4" तक घुसा था. मैने कहा, ठीक है, अगली बार पूरा घुस जाएगा. पूरी तरह से झाड़ जाने के बाद उसने अपना लंड मेरी गांद से बाहर निकाला और बोला मैं और मज़ा लेना चाहता हूँ. मैने कहा, ज़रूर मज़ा लो. मैं थोड़े ही कहीं जा रही हूँ. अभी जब तुम्हारा लंड जब फिर से खड़ा हो जाएगा तब तुम फिर से मज़ा ले लेना. वो बोला, ठीक है.

वो मेरे बगल में लेट गया और मेरे बूब्स को मसालने लगा. मैं उसका लंड सहलाती रही. 10-15 मीं में ही उसका लंड फिर से खड़ा हो कर लोहे जैसा हो गया. वो बोला, मैं फिर से मज़ा ले लून. मैने कहा, हन, ले लो. लेकिन इस बार अपना लंड पूरी तरह से मेरी गांद में दाल देना. अगर इस बार तुम पूरा लंड अंदर नहीं दाल पाए तो मैं तुम्हे फिर से मौका नहीं दूँगी. वो बोला, ठीक है. इस बार मैं पूरा दाल दूँगा. मैं फिर से पेट के बाल लेट गयी. मेरी गांद एक दम गीली थी. उसने अपना लंड मेरी गांद के च्छेद पर रखा और अंदर दबाने लगा. इस बार उसका लंड मेरी गांद में 4" तक आराम से घुस गया.

उसने अपना लंड मेरी गांद के अंदर और ज़्यादा दबाना शुरू किया. मैने कहा, ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा कर इसे पूरा अंदर दाल दो. मेरे चिल्लाने की चिंता मत करना. वो ताकतवर था ही. मेरा इशारा पाते ही उसने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. मुझे दर्द होने लगा और मैं चिल्लाने लगी. उसने और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाए तो मैं तड़प उठी. मेरा चेहरे पर पसीना आ गया. मेरी टाँगें तर तर काँपने लगी. वो बोला, अब मेरा लंड पूरा अंदर घुस चुका है. अब तो तुम मुझे ये मज़ा लेने का फिर से मौका डोगी. मैने कहा, तुम बहुत अच्च्चे हो. अब तुम जब चाहो मज़ा ले लेना. मैं तुम्हे कभी नही रोकूंगी. अब तुम तब तक ज़ोर ज़ोर से धक्के लगते रहो जब तक तुमहरे लंड का पानी फिर से नही निकल जाता. वो बोला, ठीक है. अब मैं नहीं रुकुंगा, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है.

उसने मेरे सीने के नीचे अपना हाथ दाल कर मेरे बूब्स को पकड़ लिया. फिर मेरे बूब्स को मसालते हुए बहुत ही ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा. मेरा दर्द कुच्छ ही देर बाद कम हो गया और मुझे भी मज़ा आने लगा. वो बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के लगते हुए मेरी गांद मार रहा था.

इस बार उसने लगभग 15 मीं तक मेरी गांद मारी और फिर झाड़ गया. झड़ने के बाद वो फिर से मेरे बगल में लेट गया. मैने कहा, तुम लेतो मत. इस बार मैं तुम्हे दूसरा मज़ा दूँगी. वो बोला, अब कौन सा मज़ा. मैने अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए कहा, अब तुम इसे जीभ से चतो. इस बार मैं तुम्हारा लंड इस च्छेद के अंदर लूँगी. वो मेरी टाँगों के बीच आ गया और मेरी चूत को बड़े ध्यान से देखने लगा. फिर उसने मेरी चूत चटनी शुरू कर दी. मैने उसका लंड अपने मूह में ले लिया और चूसने लगी.

उसकी जीभ अपनी चूत पर महसूस करते ही मैं और ज़्यादा जोश में आने लगी. थोड़ी देर बाद मेरी चूत से पानी निकालने लगा तो वो रुक गया. मैने कहा, रुक क्यों गये. वो बोला, तुम पेशाब कर रही हो. मैने कहा, पगले, ये पेशाब नही है. जैसे तुम्हारे लंड से पानी निकलता है वैसे ही जब औरत ज़्यादा जोश में आ जाती है ती उसकी चूत से भी पानी निकलता है. तुम इस पानी को छत लो. उसने अपनी जीभ से मेरी चूत का सारा पानी छत लिया.

इधर उसका लंड फ्िए से खड़ा हो चुका था. जब वो मेरी चूत का पानी छत चुका तो मैने कहा, अब अपना पूरा लंड मेरी चूत में दाल कर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगते हुए अंदर बाहर करो. उसने अपने लंड का टोपा मेरी चूत के बीच रखा तो मैने अपना पैर उसके कंधे पर रख लिया. मैने कहा, इस बार जैसे तुमने मेरी गांद के अंदर पूरा लंड घुसा दिया था वैसे ही अब मेरी चूत में भी पूरा लंड घुसा देना. उसने एक जोरदार धक्का मारा तो मेरे मूह से चीख निकल गयी. वो बोला, इस मे तो आसानी से अंदर जा रहा है. मैने कहा, इस लिए आसानी से अंदर जा रहा है क्यों की टुमरे भैया भी इसके अंदर अपना लंड डालते हैं. उसने कहा, तब तो पूरा लंड आसानी से अंदर चला जाना चाहिए लेकिन फिर भी ये अब और ज़्यादा अंदर नही जा रहा है. मैने कहा, तुम्हारे भैया का लंड छ्होटा है और तुम्हारा बहुत बड़ा. इसी लिए ये आसानी से अंदर नहीं जा रहा है. तुम पूरी ताक़त के साथ धक्के लगाओ.

उसने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. उसका लंड लंबा होने के साथ साथ बहुत मोटा भी था. मैं दर्द से तड़पने लगी. वो धक्के लगता रहा. कुच्छ ही देर में उसका पूरा का पूरा लंड मेरी चूत के अंदर घुस गया और मैं उसके लंड का टोपा अपने बच्चेड़नी के मूह पर महसूस करने लगी. वो बोला, मैने पूरा लंड अंदर दाल दिया है. इस च्छेद में तो और ज़्यादा मज़ा आ रहा है. मैने कहा, अब खूब तेज़ी से मेरी चूत में अंदर बाहर करो.

उसने बहुत ही ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. आज मेरी मुराद पूरी हो रही थी. 5 मीं में ही मैं झाड़ गयी. वो बोला, तुमहरि चूत से तो फिर से पानी निकल रहा है. मैने कहा, जब तक तुम्हारे लंड का पानी निकलेगा तब तक मेरी चूत से काई बार पानी निकलेगा. मेरी चूत गीली हो चुकी थी. वो धक्के लगता रहा. रूम में छाप-छाप की आवाज़ हो रही थी. उसकी स्पीड अब बहुत तेज़ हो गयी थी. मुझे भी आज पहली बार चुड़वाने में बहुत मज़ा आ रहा था. अभी 10 मीं भी नही बीते थे की मैं फिर से झाड़ गयी. मैं छूतड़ उठा उठा कर उसका साथ देने लगी. वो पूरी मस्ती के साथ मेरी चुदाई कर रहा था.

लगभग 10 मीं तक और छोड़ने के बाद वो झाड़ गया. उसके साथ ही साथ मैं भी झाड़ गयी. जब उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला तो मैने इस बार उसका लंड अपने मूह में ले लिया और चूसने लगी. जब मैने उसका लंड छत छत कर सॉफ कर दिया तो वो हट गया. वो मेरे बगल में लेट गया और बोला, मुझे इस च्छेद में ज़्यादा मज़ा आया.

थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं खाना बनाने चली गयी. मैं अभी खाना बना ही रही थी की वो किचन में आया और बोला, मुझे मज़ा लेना है. मैने कहा, मैं खाना बना लून तब तुम मज़ा ले लेना. वो बोला, मुझे अभी मज़ा चाहिए. देखो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया है. मैं तो खुद ही प्यासी थी. मैं किचन में ही डॉगी स्टाइल में हो गयी. मैने उस से कहा, अब तुम मेरे पिच्चे आ जाओ, और मज़ा लो. मैं देखना चाहती थी की उसे मेरी चूत चाहिए या गांद. वो मेरे पिच्चे आया और अपना लंड मेरी चूत में डालने लगा. मैं समझ गयी की उसे चूत को छोड़ने में ही ज़्यादा मज़ा आया था.

उसने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगते हुए अपना लंड मेरी चूत में डालना शुरू कर दिया. मेरी चूत अभी तक उसके लंड के साइज़ की नहीं हुई थी. मुझे दर्द होने लगा और मैं चिल्लाने लगी. लेकिन वो रुका नहीं, अपना लंड मेरी चूत में घुसता रहा. पूरा लंड घुसा देने के बाद उसने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. मुझे इस बार ज़्यादा मज़ा आ रहा था.

5 मीं की चुदाई के बाद मैं झाड़ गयी. वो मेरी कमर को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगता रहा. मैं भी आगे पिच्चे होते हुए उसका साथ देने लगी. 10 मीं और चुड़वाने के बाद मैं फिर से झाड़ गयी. उसकी स्पीड और तेज़ हो चुकी थी. मेरी चूत छाप छाप कर रही थी. मेरी चूत ने उसके लंड को ज़ोर से जाकड़ रखा था. 10 मीं और बीते थे की मैं फिर से झाड़ गयी. लेकिन उसने अभी भी मेरी चुदाई जारी रखी थी. वो मुझे एक दम आँधी की तरह चोद रहा था. 5 मीं और बीते तो उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और मेरी गांद में घुसने लगा. मुझे तो पहले थोड़ा सा दर्द हुआ लेकिन फिर बहुत मज़ा आने लगा. वो बहुत तेज़ी से मेरी गांद मार रहा था.

लगभग 10 मीं मेरी गांद मरने के बाद उसने अपना लंड फिर से मेरी चूत में दाल दिया और इस बार बहुत ही ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाने लगा. मैने ऐसा मज़ा कभी नही पाया था. इस मज़े के लिए ही मैं तड़प रही थी. आज मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी. मैं जानती थी की मुझे अब ये मज़ा बहुत दीनो तक मिलने वाला है. उसे अब तक मुझे छोड़ते हुए 10 मीं और बीट चुके थे. मैं फिर से झाड़ गयी. वो बोला, तुम्हारी चूत से काई बार पानी निकल चुका है, अभी और कितनी बार निकलेगा. मैने कहा, जब तक तुम मुझे छोड़ते रहोगे तब तक काई बार निकलेगा. वो बोला, अभी तो मुझे नही लग रहा है की मेरा पानी निकालने वाला है. मैने कहा, जब तक तुम्हारा पानी नही निकलता तब तक तुम छोड़ते रहो.

अब तक मुझे चुड़वते हुए लगभग 50 मीं हो चुके थे. वो था की छोड़ता जा रहा था. मेरी चूत भी इतना लंबा और मोटा लंड अंदर लेते लेते कुच्छ सूज चुकी थी. मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा था. 10 मीं और बीते तो वो बोला, अब लगता है की मेरा पानी निकालने वॉल है. इतना कह कर वो और ज़्यादा ताक़त के साथ धक्के लगाने लगा. उसके इस धक्के से मेरे बदन के सारे जोड़ हिलने लगे थे. 5 मीं बाद वो झाड़ गया और मैं भी फिर से उसके साथ ही साथ झाड़ गयी. इस बार उसके लंड से ढेर सारा पानी निकला. उसने जब अपना लंड बाहर निकाला तो मैने उसका लंड छत छत कर सॉफ कर दिया. वो बोला, इस बार मुझे जो मज़ा आया ऐसा मज़ा मुझे पिच्छली बार नहीं मिला.

मैने दीपक के हॉस्पिटल से वापस आने तक उस से जी भर कर चुडवाया. उसने मुझे खूब मज़ा दिया और उसे भी खूब मज़ा मिला. अब तक वो चोदने में एक्सपर्ट हो चुका था. उसने मुझे तरह तरह के स्टाइल में पुर घर में हर जगह छोड़ा. मेरी चूत की प्यास एक हद तक शांत हो चुकी थी.

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राज और मिनी की चुदाई

मैं मिनी अल्लहाबाद की रहने वाली हूँ. मेरी उमर 22 साल, रंग गोरा, काले लंबे बॉल और बदन एक दम स्लिम है. मैं अपनी आप बीती बताने जा रही हूँ जो की मेरे साथ 4 साल पहले हुई. मैने अभी अभी इंटर पास किया था. मेरी दीदी को बच्चा होने वाला था इसलिए मैं अपने दीदी के यहाँ गयी थी. मेरे जीजा मोहन का छ्होटा भाई राज जिसकी उमर 24 साल, दिखने में एक दम स्मार्ट और बदन गातीला था. वो मुझे हमेशा घूरता रहता था. मैने अपनी दीदी से कहा तो वो बोली की चिंता की कोई बात नहीं है, आख़िर वो भी तो तुम्हारा जीजा है. दीदी के समझने के बाद भी मुझे उस पर पूरा विश्वास नहीं था. मुझे आज तक किसी आदमी ने हाथ नहीं लगाया था और मैं अभी तक कुँवारी थी.

10-12 दीनो के बाद दीदी को डेलिवरी के लिए रात के 10 बजे नर्सिंग होमे ले जा कर अड्मिट करना पड़ा. मेरे जीजा और उनका भाई राज उन्हे ले कर चले गये. मेरे सिर में दर्द था इसलिए मैं नहीं गयी. जब वो सब मेरी दीदी को लेकर चले गये तो मैं सोने चली गयी. मैने अपनी दीदी की निघट्य पहन रखी थी. रूम में एक दम अंधेरा था. रात में अचानक मुझे महसूस हुआ की कोई मेरी बूब्स पर हाथ फिरा रहा है. मैं दर गयी. मैं अंधेरे में कुच्छ नहीं देख पा रही थी. उसने मेरे बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया. मुझे अच्च्छा लगने लगा और मेरी धड़कने तेज़ होने लगी. मैने हाथ से टटोला तो मुझे उसकी कलाई पर एक चैन महसूस हुआ. उस तरह का चैन मैने राज के हाथ में देखा था. मैं समझ गयी की वो राज है. मुझे उसका हाथ फिरना बहुत अच्च्छा लग रहा था इस लिए मैने उसे रोका नहीं. उसके हाथ अभी भी मेरे बूब्स को सहला रहे थे. फिर वो मेरी बगल में लेट गया.

10 मीं बाद उसने मेरे दोनो बूब्स को हाथों में पकड़ लिया और धीरे धीरे मसालने लगा. मैं उसके गरम गरम साँसों को अपने हाथ पर महसूस कर रही थी. आज पहली बार कोई आदमी मेरे बदन पर हाथ लगा रहा था इस लिए मुझे बहुत ही अच्च्छा लग रहा था. थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ हटा लिया और अपना मूह मेरे बूब्स पर लगा दिया. उसकी साँसें एक दम गरम गरम थी और बहुत तेज़ चल रही थी. उसने मेरे बूब को अपने मूह में ले लिया और चूसने लगा. 10 मीं बाद वो मेरे गालो को चूमने लगा. फिर उसने मेरी गर्दन और उसके बाद मेरे होठों को चूमने लगा. फिर उसने मेरे निचले होत को अपने मूह में दबा लिया और चूसने लगा. मैं एक दम कंट्रोल से बाहर होने लगी तो मैने उसे धकेल दिया. अब मेरी पीठ उसकी तरफ थी और वो मेरी पीठ को सहलाने लगा. फिर उसने अपने हाथ से मेरी बूब्स के निपल को पकड़ लिया और दबाने लगा. मेरे सारे बदन में बिजली सी दौड़ गयी.

10 मीं में ही मेरी चूत गीली हो गयी. जोश के मारे मूह से आहह..... ओफफ्फ़..... ससस्स..... की आवाज़ निकालने लगी. वो मेरी पीठ को सहलाता रहा और मेरे निपल्स को मसलता रहा.

उसके बाद उसने मेरी निघट्य उपर कर दी तो मैं नीचे से एक दम नंगी हो गयी. जोश से मेरी क्लाइटॉरिस एक दम टाइट हो चुकी थी. मेरी चूत भी एक दम गीली हो चुकी थी तभी उसने मेरा मूह अपनी तरफ कर लिया. उसने अपनी उंगली मेरी क्लाइटॉरिस पर लगा दी और गोल गोल घूमने लगा. में एक दम बेकाबू होने लगी. मैने उसे अपनी बहो में जाकड़ लिया. वो अपनी उंगली घूमता रहा और मेरे सारे बदन में आग सी लगती जा रही थी. मैं उसका नंगा बदन महसूस कर रही थी. वो एक हाथ से मेरे निपल्स को दबा रहा था और दूसरे हाथ की उंगली मेरी क्लाइटॉरिस पर रग़ाद रहा था. 2 मीं में ही मैं जोश से के दम बेकाबू हो गयी और झाड़ गयी. मेरे मूह से ज़ोर ज़ोर से ऊहह....... उफ़फ्फ़..... सस्सस्स...... की आवाज़ निकालने लगी. अब मेरा जोश कुच्छ ठंडा होने लगा था.

मैं उसे माना करना चाहती थी लेकिन जोश के मारे मैं ऐसा नहीं कर पाई. वो मेरे होतो को चूमता रहा और मेरी क्लाइटॉरिस को रगड़ता रहा. मैं फिर से जोश में आने लगी. वो उठा तो मैं अंधेरे में कुच्छ देख नहीं पाई की वो अब क्या करने वाला है. तभी मैने उसके लंड को अपने मूह के पास महसूस किया और उसकी जीभ को अपनी चूत पर. उसके जीभ लगते ही मेरे सारे बदन में बिजली का करेंट सा लगने लगा. उसने मेरी चूत कर क्लाइटॉरिस को चाटना शुरू कर दिया. मैने ना चाहते हुए भी जोश के मेरे उसका लंड मूह में लिया और चूसने लगी. उसके मूह से एक आहह..... सी निकली. वो अपनी जीभ से मेरी चूत और खास कर मेरी क्लाइटॉरिस को चूस्टा रहा. मैं इस समय इतना जोश में थी की मैं बयान नहीं कर सकती. मैं और ज़्यादा जोश में डूब जाना चाहती थी. अब मैं उसका लंड अपनी चूत के अंदर लेना चाहती थी.

उसका लंड अपने हाथ से पकड़ कर चूस्टे समय मेने महसूस किया की उसका लंड लगभग 9" का और बहुत ही मोटा था. मैं पुर जोश से उसके लंड को अपने मूह में अंदर बाहर करने लगी.

राज बहुत ही अच्च्छा खिलाड़ी था. उसने मेरी आग को भड़काने के लिए वो सब किया जो की एक आदमी को करना चाहिए. वो मेरे उपर से उठा तो मैं सोचने लगी की अब वो क्या करने वाला है. तभी वो मेरी टॅंगो को फैला कर बीच में आ गया. उसने अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया. मैं समझ गयी की अब मुझे ज़िंदगी का वो मज़ा मिलने वाला है जिसका हर औरत को हमेशा इंतेज़ार रहता है. मैं उसके लंड का सूपड़ा अपनी चूत मार महसूस कर रही थी. उसने अपना सूपड़ा मेरी क्लाइटॉरिस पर रगड़ना शुरू कर दिया तो मैं एक दम पागल सी होने लगी.

उसके बाद वो अपना लंड धीरे धीरे मेरी चूत के अंदर दबाने लगा. शुरू शुरू में मुझे बहुत दर्द हुआ लेकिन जब उसने अपना पूरा लंड आराम से धीरे धीरे मेरी चूत में घुसा दिया तो मेरा दर्द कुच्छ कम हो गया. उसके बाद उसने मेरे बूब्स को मसालते हुए और मेरे होतो को चूमते हुए धीरे धीरे अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. मैं बहुत ज़्यादा जोश में आ गयी और 2 मीं में ही मेरी चूत से पानी निकालने लगा. पानी निकालने से जब मेरी चूत गीली हो गयी तो उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी के साथ मुझे छोड़ने लगा. अब मेरा दर्द एक दम ख़तम हो चुका था और मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आ रहा था. मैने ना चाहते हुए भी अपना छूतड़ उठा उठा कर उसका साथ देना शुरू कर दिया था. 10 मीं बाद मैं फिर से झाड़ गयी तो उसने अपनी स्पीड बहुत तेज कर दी. अब वो इतने तेज धक्के लगा रहा था की मैं उसका धक्का बर्दस्त नहीं कर पा रही थी. मेरे मूह से जोश के मारे ऊहह........ आहह...... उउफफफफ्फ़.... की ज़ोर ज़ोर से आवाज़ निकालने लगी. लगभग 10 मीं और छोड़ने के बाद राज मेरी चूत में झाड़ गया और उसके साथ ही साथ मैं भी एक बार फिर से झाड़ गयी. वो मेरे उपर लेट गया. मैं उसकी गरम गरम साँसें अपने चेहरे पर महसूस कर रही थी. उसकी साँसें बहुत तेज़ चल रही थी. उसका चेहरा पसीने से भीग चुका था.

फिर वो मेरे बगल में लेट गया और मुझे चूमने लगा. मैं भी उसे चूमती रही. लगभग 30 मीं बाद उसका लंड फिर से खड़ा होने लगा तो वो मेरे उपर 69 की पोज़िशन में हो गया. उसने मेरी चूत को फिर से चाटना शुरू कर दिया और मैं उसका लंड अपने मूह में ले कर चूसने लगी. थोड़ी देर बाद उसने मुझे डॉगी स्टाइल में कर दिया और मुझे छोड़ने लगा. इस बार मुझे ज़्यादा दर्द नहीं हुआ और राज भी इस बार मुझे बहुत ही तेज़ी के साथ चोद रहा था. इतने तेज़ी के साथ उसने मुझे पिच्छली बार नहीं छोड़ा था. इस बार मुझे चुड़वाने में बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था. उसने मुझे इस बार लगभग 45 मीं तक छोड़ा और फिर मेरी चूत में ही झाड़ गया. इस बार की चुदाई के दौरान मैं भी 3 बार झाड़ चुकी थी. लंड का पूरा जूस मेरी चूत में निकल देने के बाद इस बार उसने अपना लंड मेरे मूह में दे दिया और मैं उसका लंड चाटने लगी.

मुझे राज से चुड़वा कर मुझे बहुत मज़ा आया जो आज तक मैं नही भुला सकी
 
उमड़ती जवानी की प्यास



इसके पहले की मई ये कहानी सुरू करू मई अपने परिवार के बारे मे कुच्छ बताडू. मेरे परिवार मे मई, दामिनी और पापा बस तीन लोग है. पापा अक्षर अपने कम के चलते बाहर ही रहते है. जिसके चलते घर पर मेरे और दामिनी के अलावा और कोई भी नही रहता. मेरे पापा एक प्राइवेट कंपनी मे फर्स्ट क्लास ग्रैड के एंप्लायी है. मेरी दामिनी जिनकी उमर पचीस साल की है एक गोरी और बेहद ही सुंदर पहले लड़की अब औरत है जिनके बारे मे मई इतना कह सकता हू की उनकी सुंदरता को लिखना मुस्किल है. उनकी लंबाई 5 फिट 7 इंच की है. उनका गतिला बदन देखके अच्छे अच्चो की नियत खराब हो जाती है. दूसरे तरफ मई जिसके बारे मे मई इस कहानी मे बताने जेया रहा हू एक बेहद ही खूबसूरत और स्मार्ट पर्सनाल्टी के और काफ़ी मिलनसार आदमी है. उनकी लंबाई मेरे दामिनी के लंबाई से थोड़ी सी ज़्यादा है.

अब मई आज आपके लिए जो कहानी लिखने जेया रहा हू वो कहानी लिखने जेया रहा हू वो सिर्फ़ कहानी नही बल्कि बिल्कुल ही हक़ीकत है. ये आज से बहुत दिन पहले की है जो मेरे दामिनी और मेरे साथ हुई थी. जोकि मुझे वैसे ही याद है जैसे की ये कल की बात है.

उस दिन मई और दामिनी एक अफीशियल कम से उत्तरांचल गये हुए थे. अपने काम को ख़तम करने के बाद जब हम होटल मे वापस आने लगे तो दामिनी ने मार्केट चलाने के लिए कहा जोकि हमारे जगह से करीब दस किलोमीटर दूर था क्योकि उनको कुच्छ शॉपिंग करनी थिंअर्केत मे जाने के बाद जब हम शॉपिंग करने लगे तो दामिनी ने बेउती पार्लर मे जाके अपना फेशियल कराया तो देखके मुझे कुच्छ अजीब सा लगा. लेकिन उनके उस कम का मतलब मुझे रात मे चला. रात को मार्केट से आने के बाद हमलोग तक गये थेऽब हम अपने जगह पर वापस आने लगे तो रास्ते मे एक पहाड़ी के पास एक गाड़ी दुर्घटना ग्रस्त

हो गयी थी जिसके चलते उस रात हम पहाड़ी के उस पार नही जेया सकते थे. काफ़ी पुच्छ टच्छ करने के बाद पता चला की पास मे एक होटल है जहा रुकने की ब्यावस्था है. दामिनी ने बोला की हम पैदल ही होटल मे चलते है. हम जब रास्ते मे कुच्छ दूर आ गये थे तभी जोरदार बारिस हुए जिसमे हम दोनो लोग भींग गये. होटल पर पहुचने के बाद हमारे पास पहनने के लिए कोई भी कपड़ा नही था और हमारे कपड़े इतने भींग गये थे की हम उसे पहन के नही रह सकते थे. सो मैने गेस्ट रूम मे जाके अपने कपड़े को खोल के फैला दिया और उस चादर को लपेट लिया जो हमे रात मे ओढ़ने के लिए मिला था. दामिनी ने बातरूम मे जाके अपने भींगे कपड़े खोले और दूसरी चादर को लपेट लिया.

अब दमणी और मेरे बीच कुच्छ इधर उधर की बाते होने लगी. हमारे कमरे मे अंगीठी की ब्यावस्था थी. हम अंगीठी के पास बैठ के बाते करते रहे. इसी बीच मई उसके साथ कुच्छ मज़ाक भी करने लगा. मज़ाक के दौरान जब दामिनी भागने लाई तो उसके चादर मे आग लग गयी. मैने जब उसके चादर मे आग देखा तो उसके चादर को अंगीठी मे फेक दिया और दामिनी को अपने बहो मे भर लिया. अब दामिनी को अपने बहो मे लिया तो उसके नंगे बदन जैसे ही मेरे नंगे बदन से टकराए तो ऐसा लगा की जैसे मेरे बदन मे आग सी लगी हो. मई थोड़ा सा आगे बढ़े और दामिनी के पास सात के खड़े हो गये और दामिनी के बॉल को हटते हुए एक हाथ को दामिनी के कमर पर और दूसरे हाथ को दामिनी

के बूब्स के उपर रखते हुए दामिनी को अपने तरफ खिच लिया. अब मई दामिनी के बूब्स को दबाने लगे तो दामिनी पहले कुच्छ देर तक तो बीरोध करती रही लेकिन थोड़े समय के बाद मैने देखा की दामिनी उम्म्म्मममममम. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आहह उम्म्म्ममम की मस्ती भारी एक अजीब से आवाज़ निकले ळगि.दमिनि हाला की उस वक्त भी ये दिखाने की पूरी कोसिस कर रही थी की वो वैसा नही चाहती थी. लेकिन उसमे उनकी हामी साफ दिख रही थी. कुच्छ देर के बाद जब मई ने दामिनी के चुड को एक हाथ से सहलाने लगे तो दामिनी ने मई के लूँगी मे अपना एक हाथ दाल दिया और उनके लंड को अपने हथेली से लूँगी के बाहर निकलते हुए सहलाने लगी. अब दामिनी ने मई से पुचछा "क्या लंबाई है

इसकी?".

मैने मुस्कुराते हुए पुचछा "किसकी?"दामिनी बोली "इसीकि" तो मैने फिर चुटकी

लेते हुए पुचछा "किसकी?" अब दामिनी ने बोला "आपके लंड की" तो मैने बोला "आठ इंच की है". दामिनी बोली "बाप रे इतना मोटा और बड़ा तो मैने कभी नही देखा है". इतना सुन के मई ने दामिनी के साया के नडे को खोल दिया. साया सरक के ज़मीन पर जा गिरा. अब मई दामिनी के दाहिने चुचि को धीरे धीरे दबाने लगेंऐ के इस तरस से करते हुए देख के दामिनी बोली "ये क्या कर रहे हे आप? प्लीज़ ऐसे मत कीजिए." तो मई बोले "जब से मैने आपके भींगे हुए बदन को देखा है मेरा मान मे आग सी लगी है. मान बेचैन हो गया है. आज मई आपकी हर कामना को पूरा करना चाहता हू." इस तरह से कहते हुए मई दामिनी के चुचीॉ को थोड़े ज़ोर से दबाने लगे. पाँच च्छे बार दबाने के बाद जब मैने देखा की दामिनी भी उम्म्म्मममममम.

सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आहह उम्म्म्ममम नहियीईईईईईईईईईई आआअहह की आवाज़ निकालने लगी तो उन्होने दामिनी के कंधे के पास से बॉल को हटते हुए अपने होतो को दामिनी के कंधे और गर्दन के बीच धीरे धीरे रगड़ने लगे और दामिनी के चुचि को धीरे धीरे दबाने के साथ ही दूसरे हाथ से दामिनी के चुड को सहलाते रहे. जैसे ही मई ने दामिनी के चुड को सहलाना कुच्छ देर तक जारी रखा तो दामिनी अपने आपको रोक नही पाई अब अपने हाथ से मेरे लंड को छ्चोड़ दिया और मेरे लंड को अपने दोनो जाँघो के बीच मे घुसा के अपने कमर को हिलने लगी और इस तरह से दामिनी भी अब मेरा हेल्प करने लगी. अब मैने दामिनी के गंद को सहलाने लगा और अब मई दामिनी के एक चुचि को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे और अपने कमर को हिलने लगे और अपने कमर को भी हिला रहे थे. दामिनी उनके हर एक झटके के साथ एक अजीब सी आवाज़ निकल रही थी.

कुच्छ देर के बाद मई बोले "दर्द हो रहा है क्या?" तो दामिनी बोली हाआआआआआ आआआआआआआहह.

मई बोले इतना सख़्त ये है तो आगे का क्या हाल होगा. चलिए हम आज सुहाग रात मनाएँगे और ये कहते हुए ऐसा लगा की अब उनके लिए बर्दस्त करना मुस्किल हो गया. उन्होने दामिनी को अपने बहो मे उठा लिया और ले जाके दामिनी को बेड पर लिटा दिया. इसके बाद मई ने रूम के दरवाजे को धीरे से बंद कर दिया. दरवाजा बंद करने के बाद जब मई दामिनी के पास आए तो साथ मे उन्होने तेल के एक डिबे को भी ले लिया और उसे पास के तबले पर रख दिया. इसके बाद मई दामिनी के चुड को देखने के लिए दामिनी के पैर को थोड़ा सा फैला दिया क्योकि उस वक़्त तक दामिनी के दोनो पैर सटे हुए थे. कुच्छ देर तक मई दामिनी के चुड को पूरे ध्यान से देखते रहे. इसके बाद मई ने डिबे से थोड़ा सा तेल निकल के दामिनी के चुड पर दाल दिया. अब मई दामिनी के उपर चढ़ने लगे और दामिनी के जाँघो पर अपने हाथ को रगड़ना सुरू किया तो दामिनी उम्म्म्मममममम. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आहह उम्म्म्ममम उम्म्म्मममममम

सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आहह उम्म्म्ममम की आवाज़ के साथ ज़ोर ज़ोर से ससे खिचने

लगी. मैने देखा की दामिनी के ससे खिचते देख के मई का डंडा और भी लूंबा हो गया. मई दामिनी के जाँघ को थोड़ा सा फैलाया क्योकि उस वक़्त तक दामिनी के दोनो जाँघ बिल्कुल ही सता लिया था.

अब दामिनी की चुड पूरी तरह से दिख रही थी. मई जब दामिनी के चुड को सहलाने लगे तो दामिनी ने मई के लंड को उनके लूँगी से निकल दिया जो की आठ इंच लंबा था. उसे लेके दामिनी भी सहलाने लगी. अब मैने देखा की दामिनी और मई लगभग एक मिनूट तक यू ही अपने काम को अंजाम देते रहे. इसके बाद मई दामिनी के जाँघ पर बैठ गये और दामिनी के चुड पर अपने लंड को जैसे ही सताया तो दामिनी ने अपने दोनो हंतो से चुड को फैला दिया. मई ने दामिनी के चूड़ मे अपने लंड को ले जाने के लिए अपने कमर को धीरे धीरे सरकाना सुरू किया तो दामिनी ने उम्म्म्ममममममस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्साहह उम्म्मममुंम्म्ममममम सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्साहह उम्म्म्ममम के आवाज़ के साथ अपने ससे खिचनी सुरू कर दिया. मैने देखा की मई दामिनी के चुड मे अपने लंड के टॉप को दाल दिया. अब मई दामिनी के उपर लेट गये और अपने कमर को हिलना सुरू कर दियऽब दामिनी के मूह से आआअहह आआआअहह आआआअहह ऊऊओह आआआहह उूुुुुुुुउउम्म्म्ममममम उूुुुुुउउंम्म की आवाज़ निकालने लगी. कभी कभी मई ज़ोर ज़ोर के झटके लगते तो दामिनी पूरी तरह से हिल जाती थी. दामिनी ने अब अपने हाथो को मई के पीठ पर रख लिया था और मई के पीठ को सहला रही थिऽब मई दामिनी के गालो को चूमने लगे और अपने दोनो हाथो से दामिनी के दोनो चुचीॉ को दबाने लगे तो दामिनी भी मस्ती मे आआअहह आआआअहह आआआअहह ऊऊओह आआआहह उूुुुुुुुउउम्म्म्ममममम उूुुुुुउउंम्म आआअहह आआआअहह आआआअहह ऊऊओह आआआहह उूुुुुुुुउउम्म्म्ममममम उूुुुुुउउंम्म की अजीब ही आवाज़ निकल रही थी. कुच्छ देर मे मई ने अपने आधे लंड को दामिनी के चुड मे दाल दिया था.

अब मई ने दामिनी के पैरो को फोल्ड कर लिया और दामिनी के जाँघो को फैलते हुए अपने आपको दामिनी के दोनो पैरो के बीच मे अडजेस्ट किया. दामिनी ने ऐसा करने मे उनकी हेल्प किया. अब मई ने मुँमू को फिर से झटका देने सुरू काया तो दामिनी अपने गर्दन को उठा उठा के आहे भरना सुरू करे दिया. अब उक्ले ने झटका मरते हुए दामिनी से पुचछा "दर्द कर रहा है क्या?" तो दामिनी से एक

अजीब आवाज़ मे कहरते हुए जबाब दिया " नहियीईईईईईईईईईईईई आआअहह ओह आआअहह आआआअहह आआआअहह ऊऊओह आआआहह उूुुुुुुुउउम्म्म्ममममम उूुुुुुउउंम्म आआअहह आआआअहह आआआअहह ऊऊओह आआआहह उूुुुुुुुउउम्म्म्ममममम उूुुुुुउउंम्म ". अब मई ने एक तरफ अपने कमर को ज़ोर से झटका मारा और दूसेरे तरफ उन्होने दामिनी के ब्रा को फाड़ दिया. मैने दामिनी के मूह से ज़ोर की चीख के साथ दामिनी के पैर को पटकते हुए देखके समझ गया की मई ने ना सिर्फ़ दामिनी के ब्रा को फादा है बल्कि उन्होने दामिनी के बर को भी फाड़ दिया था. अब मई अपने कमर के स्पीड को बढ़ा दिया और कुच्छ ही देर मे उनका पूरा लंड दामिनी के चुड मे चला गया था. क्योकि दामिनी के चुड से छाप छाप की आवाज़ आ रही थी. कुच्छ देर तक उही च्चटपटाने के बाद मूमी ने अब मई का पूरा साथ देना सुरू कर दिया.

कुच्छ देर के बाद मई दामिनी के होतो को अपने होतो मे दबा लिया और अपने लॅंड को दामिनी के चुड मे ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर अंदर बाहर करने लगे. ये सिलसिला मैने पूरे आधे घंटे तक देख.तब जाके दोनो संत पड़े रहे और ही सो गये. मई वही खड़ा रात भर दामिनी को देखता रहा मुझे पता नही कब नींद लग गयी और मई बेड पर आके सो गया. भोर मे जब मेरी नींद खुली तो मैने डेक्खा की वो दोनो वैसे ही सोए हुए थे. अचानक दामिनी की नींद खुली तो वो अपने आपको उसके बहो मे नंगी अवस्था मे देखा तो समझ गयी. मई भी जाग गया थे. अब मई ने दामिनी के गाल पर एक चूमा लिया. अब वो दामिनी के गंद को अपने तरफ करने कहा तो दामिनी ने बिना कुच्छ कहे अपने पीठ को उसके

तरफ कर दिया. मई ने उनको पेट के बाल लेटने के लिए कहा तो दामिनी पेट के बाल लेट गयी. अब वो उठ के दामिनी के जाँघ पर बैठ गये. अब मई दामिनी के गंद मे अपने लंड को डालने के लिए सबसे पहले दामिनी के गंद पर अपने लंड को रगड़ा तो मैने देखा की दामिनी के गंद पर उनके लंड का पानी च्छुत गया. अब उन्होने दामिनी के गंद को गीला कर दिया. अब दामिनी ने अपने गांद को अपने हाथो से फैला दिया. मई ने अपने लंड को दामिनी के गंद मे डालने के बाद मई ने दामिनी के कमर को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से तीन झटके मारा तो दामिनी उम्म्म्मममममम. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आहह उम्म्म्ममम उम्म्म्मममममम.

सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आहह उम्म्म्ममम के आवाज़ के साथ पूरी तरह से छटपटा उठी.

अब दामिनी ने अपने कमर को खिचने लगी तो वो दामिनी के उपर चढ़ गया. और दामिनी के गंद मे अपने लंड से पंपिंग करने लगंऐ के हर झटके के साथ दामिनी पूरी तरह से च्चटपटा रही थी. मैने देखा की मई जब जब भी ज़ोर ज़ोर से अपने कमर को हिलाते तो दामिनी पूरी तरह से कप जाती थी. एक दो बार तो अमम्मा ने अपने हाथ को अपने गंद तक भी ले गयी लेकिन मई ने दामिनी के हाथ को खिच के हटा दिया. मई का लंड जब आधा से ज़्यादा दामिनी के गंद मे चला गया तो मई ने दामिनी के मूह पर अपना हाथ रख के एक ज़ोर के झटका के साथ अपने कमर को हिलाया तो दामिनी दर्द के मारे इस तरह से तड़प उठी जैसे एक छ्होटी सी बची हो. मई उठ के बैठ गये. दामिनी की गंद फॅट चुकी थी. उनके गंद से खून गिर रहा था. लेकिन मई ने अपने कमर को हिलना जारी रख.कुछ देर के बाद दामिनी संत पद गयी. जब मई ने देखा की दामिनी संत पड़ने लगी तो मई दामिनी के उपर चढ़ के दामिनी को बीस मिनूट तक पेलते रहे और दामिनी को भी तब मज़ा आने लगा थ.इस्के बाद दोनो लोग संत पद गये. कुच्छ देर वैसे ही पड़े रहने के बाद वो दामिनी के उपर से हट गये. अब दामिनी को सीधा करने के बाद दामिनी के पैर को हल्का सा फैलाया तो दामिनी ने बोला की पेशाब लगी है. वो दामिनी को लेके बाथरूम मे गये वाहा से जब वापस आए तो मैने देखा की दामिनी ने अब उसके लंड को अपने मुति मे पकड़ रखा था. अब दामिनी बेड पर लेट गयी. अब मई ने एक डिबे को लेके आए और दामिनी के कमर के पास रखा . अब दामिनी के चुड मे तेल लगाने लगे तो दामिनी ने भी अपने हाथो मे तेल ले के उसके लंड मे तेल लगाने लगी. तेल लगाने के बाद वो दामिनी के जाँघ पर बैठ गये अब दामिनी ने अपने चुड को फैला दिया.

मई ने अपने लंड को दामिनी के चुड पर सता के ज़ोर से झटका मारा तो दामिनी के मूह से चीख को सुन के समझ गया की दामिनी के चुड मे मई का लंड चला गया अब मई ने दामिनी के चुचीॉ मे तेल लगाने के बाद चुचीॉ को मसालने के साथ ही दामिनी के चुड मे अपने लंड को अंदर और अंदर ले जाने के लिए ज़ोर ज़ोर से झटके मरने लगा. दामिनी अपने प्यास को बुझा रही थी. मई कुच्छ देर तक यू ही दामिनी के उपर लेते रहे इसके बाद उठ के जब उन्होने दामिनी के चुड से अपने लंड को निकाला तो दामिनी ने आखे खोली और मुस्कुराते हुए अपने चेहरे को धक लिया तो मई ने हेस्ट हुए बोला " अब चेहरा क्या ढकना है."

और दामिनी के हाथो को उनके चेहरे से हटते हुए पुचछा " मज़ा आया क्या ? "

तो दामिनी ने सर हिलाते हुए जबाब दिया "हा मज़ा आया." अब मई दामिनी के उपर से हट गये. मई ने अपने लूँगी को पहन लिया और बेड से उतरते हुए रूम के दरवाजे को खोल के अपने कमरे मे चले गये. अपने कमरे मे जाके उन्होने अपने रूम मे दरवाजे को बंद कर लिया. दामिनी कुच्छ देर तक यू ही लेती रही तब उठ के अपने सारे कपड़े को पहन लिया.

और बेड पर जाके सो गयी. मई पूरी रात ये जानने के लिए जागता रहा की क्या मई फिर से दामिनी के रूम मे जाते है या नही. लेकिन मई ने ऐसा नही किया. सुबह जब मैने अपने दरवाजा खोला और रूम से बाहर आया तो मई को अपने जाने के लिए तैयार होते हुए देखा. दामिनी भी अपने कमरे से निकल के किचें मे गयी और चाय बनाया. मई ने चाय पिया और फिर अपने कम से चले गये. दामिनी ये जान के खुस थी की मैने कुच्छ भी नही देखा है. मई भी यही चाहता था. यारो ये पहला मौका था जब मैने अपने दामिनी को चूड़ते

हुए देखा था. जो काफ़ी ही अच्छा लगा था. इसी लिए मैने इसे लिखा है.

 
सरीना मेरे साथ ज़ियादा फ्री थी.

यह आज से 1 साल पहले की बात हे जब में Bऑओम फाइनल एअर में पढ़ता था. हमारे कॉलेज में बोहट लड़कियाँ पढ़ती थी और हमारे क्लास मे भी काफ़ी लड़कियाँ थी. लेकिन उन्न में दो 2 लड़कियाँ ऐसी थी क जिन को देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था और में सिर्फ़ उनकी तरफ देखता रहता था. ऐक का नाम सरीना था और दूसरी आनी.

सरीना मेरे साथ ज़ियादा फ्री थी जब क आनी इतनी न्ही थी. में हमेशा उनको छोड़ने का सोचा करता था लेकिन कभी भी मोक़ा न्ही मिल सका था. ऐक हमारी क्लासस ख़तम हुए तो हम सब स्टूडेंट्स नीचे आ गाए. कुछ देर बाद में ने देखा क सरीना और आनी ऊपेर जा रही हाइन में ने उन्न्का पीछा काइया. वो दोनो क्लास में चली गई और दरवाज़ा बंद केरलिया. में दरवाज़े क साथ लग कर खड़ा हो गया और सोचा क जेसे ही वो निकलेंगी तो में क्लास मे अंडर जाने क बहाने किसी ऐक क ब्रेस्ट्स को हाथ लगा लूँगा.

लेकिन काफ़ी देर गुज़र जाने क बाद जब हू बाहर न्ही आई तो में ने दरवाज़े से कान लगा लिया अंडर से कुछ सेक्शी वाय्सस आ रही थी लीके आआहह ओह ह्म्‍म्म्ममममम. में समझ गया क कुछ तो हो रहा हे में इधेर उधेर देखने लगा क कहीं से कोई ऐसी जगा नज़र आए जहाँ से में उनको देख सकूँ. अचानक मुझे खिड़की (विंडो) मे ऐक होल नज़र आया और मे वहाँ से उनको देखने लगा वो दोनो बिल्कुल नंगी थी उन क कपड़े साइड वाली चेर पेर रखे हुवे थे और वो लेज़्बीयन एंजाय कर रही थी सरीना वाज़ लिकिंग आनी'स पुसी. और आनी दर्द और सेक्स क मारे वाय्सस कर रही थी जब मे ने उनको ऐसा करते देखा तो मेरा डिक भी खड़ा हो गया और ऐसा लग रहा था क अभी अंडरवेर फाड़ कर बाहर आज़ाएगा. आनी चीख रही थी कम ओं सरीना फास्ट मोरे फास्ट फक मे फक मे. कोई 10 मिनिट बाद मे ने देखा क अन्य की टाइट ब्लॅक पुसी से पूरे वाइट जूस बहेर निकला जो सीधा सरीना क फेस और मौत पेर गिरा और सरीना उसे मज़े से पीने लगी और आनी से कहा क तुम भी छातो. आनी बिल्कुल मदहोश हो गई थी इश्स क बाद सरीना चेर पेर बेती & आनी से कहा क अब तुम मेरी पुसी को लीक करो आनी ने जब उसस्की लेग्स को ओपन काइया तो यह देख कर में बिल्कुल हेरान हो गया क सरीना की पुसी ओपन थी बिल्कुल लीके ब्लू प्रिंट मूवीस.

मुझे बोहट हैरत हुए आनी ने सरीना से कहा क तुम्हारी पुसी इतनी ओपन क्यूँ हे तो सरीना ने कहा क आनी जान तुम ने आज यह पहली बार काइया हे जब तुम रोज़ करोगी तो अपनी फिंगर इन आउट करोगी तो तुम्हारी भी ऐसी हो जाएगी और में तो रोज़ फक भी करवाती हूँ अगर तुम हमारे घर आओ तो मे तुम्हे भी चुड़वऊंगई अपने पड़ोसी से बोहट मज़ा आता हे और मेरी ऐक विश हे क मेरी पुसी इतनी ओपन हो जाए क में अपना पूरा हाथ इश्स मे अंडर ले सकूँ. कोई 8-10 मिनिट बाद सरीना भी रिलॅक्स हो गई और वो दोनो अपने कपड़े पहेनिने लगी क अचानक मेरे मूह से आवाज़ निकली और में भी रिलॅक्स हो गया. उन्हो ने वो आवाज़ सुननली तो आनी ने कहा क शायद कोई हमें देख रहा था तो सरीना बोल्ली कोई बात न्ही मे देखती हूँ सरीना ने दरवाज़ा थोड़ा सा खोला बिकॉज़ शी वाज़ स्टिल अनड्रेस्ड और बोल्ली कों हे? मे ने हिम्मत कर क कहा क मे सागर तो वो बोल्ली क क्यूँ आए हो? मे ने कहा क अपनी पेन भूल गया था हू लेने आया हूँ. यूयेसेस ने कहा ठीक हे अंडर आजओ मे जेसे ही अंडर गया तो देखा क वो दोनो अभी तक अनड्रेस्ड थी आनी ने ब्रा और अंडरवेर पहना था जब क सरीना बिल्कुल नंगी खड़ी थी यूयेसेस ने मुझसे कहा क मुझे पता था क तुम ज़रूर आओगे क्यूँ क में तुम्हे रोज़ क्लास मे देखती थी क तुम सिर्फ़ हमारी आस और ब्रेस्ट को देखते हो लेकिन तुम कुछ कर न्ही सकते थे मुझसे ज़ियादा तुम इश्स ब्लॅक ब्यूटी आनी मे इंट्रेस्टेड थे जब वो चलती थी तो तुम्हारी नज़र उसकी बॉडी को घूरती थी में भी तुमको देखती थी लेकिन कुछ कह न्ही सकती थी आज तुम आए हो तो तुम मेरी और में तुम्हारी पियास बुझाऊंगी यह कह कर यूयेसेस ने मुझे किस करना शुरू कार्डिया और मे भी उसे रेस्पॉन्स देने लगा आनी हम दोनो को देख रही थी वो बोहट डारी हुए लग रही थी.

मे ने उस्स्को हाथ से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और सरीना से कहा क प्ल्ज़ तुम मेरा लंड अपने मूह मे लेलो सरीना ने मेरे डिक को चूसना शुरू किया और में आनी को किस करने लगा में ने उसस्का ब्रा खोल दिया और यूयेसेस क अनटच्ड ब्लॅक मुम्मे चूसने लगा हू बेक़रार हो रही थी तो में ने कहा क तुम भी मेरा लंड चूस कर मज़ा लो तो यूयेसेस ने कहा क न्ही यह बोहट गंदा हे तो में ने उस्स्को कहा क देखो सरीना केसे मज़ा ले रही हे तुम भी लेलो लेकिन वो न्ही मानी तो सरीना और में ने ज़बरदस्ती यूयेसेस क मूह में अपना लंड डाल दिया तो उस ने धीरे धीरे चूसना शुरू काइया उससे मज़ा आने लगा और वो चूस्टी रही 15 मिनिट्स क बाद में ने उसस्का मूह अपनी क्रीम से भर दिया तो सरीना जो आनी की पुसी को लीक कर रही थी अचानक ऊपेर उठी और क्रीम यूयेसेस क मूह से अपने मूह में लेने लगी.

अब मे उन्न दोनो को छोड़ना चाहता था तो में ने सरीना से कहा क में आनी को छोड़ना चाहता हूँ पहले तो यूयेसेस ने कहा क शी इस टोटली वर्जिन बोहट मुश्किल हे यहाँ लेकिन में ने कहा क प्ल्ज़ तो यूयेसेस ने कहा ठीक हे लेकिन आनी क मूह पेर कोई कपड़ा बांधो तो में ने उसका ब्रा उस क मूह पेर बाँध दिया और अपना 7.5" इंच का डिक उसस्की पुसी पेर रख दिया और आहिस्ता आहिस्ता ढके मारने लगा उसे बोहट मज़ा आ रहा था फिर आहिस्ता आहिस्ता में ने ज़ोर लगाना शुरू कर दिया आहिस्ता आहिस्ता मेरा लंड उसकी पुसी को चीरता हुवा अंडर जा रा था और हू अपने हाथो से मेरा लंड हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन में ने यूयेसेस क हाथ पकड़ कर ऐक ज़ोरदार धक्का लगाया और अब मेरा पूरा लंड उसस्की पुसी में था हू ऐक दम ऊपेर उठी और नीचे गिर गई वो बेहोश हो गई थी उसस्की पुसी से ब्लीडिंग हो रही थी अब हम दोनो भी परेशन हो गाए क इस्सको होश में केसे लाएं वहाँ पेर पानी भी न्ही था में ने सरीना से कहा क अब काइया करें तो सरीना ने कहा क तुम मेरे मूह में पेशाब करो और में तुम्हारे पेशाब से आनी पेर स्प्रे करती हूँ में ने अपना लंड आनी की छूट से निकाल कर सरीना क मूह मे डाल दिया और पेशाब कार्डिया अभी सरीना ने थोड़ा ही स्प्रे काइया तो आनी होश मे आ गई तो सरीना ने बाक़ी पेशाब पी लिया और बोल्ली वॉववव काइया टेस्ट था तुम्हारे पेशाब मे आनी ने और फक्किंग से माना काइया और कहा क आज बोहट दर्द हो रहा हे लेकिन सरीना ने उसे समझाया क पहले दर्द होगा फिर मज़ा आएगा बड़ी मुश्किल से हू मानी तो मे ने अपना लंड फिर उसस्की पुसी मे डाल दिया और ढके मारने लगा अब उसे मज़ा आ रहा था कुछ देर बाद में ने महसूस किया क आनी की छूट से क्रीम बहेर निकल रही हे तो मे ने और ज़ोर से ढके मारने शुरू कर दिए और 25 मिनिट बाद मेरी क्रीम आनी क मूह मे थी. मे भी 3 बार कम होने क बाद काफ़ी कमज़ोरी फील कर रहा था इश्स लाइ सरीना से कहा क तुम्हें कल करूँगा तो हू बोली न्ही ऐक बार आज करो मेरा लंड बिल्कुल ढीला हो गया था और यूयेसेस ने चूस कर दोबारा उस्स्को त्यार किया तो में ने सरीना को भी छोड़ा और जब उसे चोद रहा था तो आनी बोली प्ल्ज़ दोबारा मुझे करो तो मे ने उस्स्को भी दूसरी चेर पेर बिता कर उसकी लेग्स ऊपेर केरली अब थोड़ी देर आनी को थोड़ी देर सरीना को चोद रहा था और को 35 मिनिट्स क बाद मे ने अपने क्रीम सरीना की पुसी मे ही निकाल दी.

 
पेरेंट्स गॉन आउट

मैं अभी भी कॉलेज में पढ़ता हूँ. मैं अपने कॉलेज की

कयी लड़कियों को चोद चुका हूं. मेरे घर के पड़ोस में एक परिवार रहता था. उनके घर

मेरा आना जाना था. उनकी एक लड़की थी. उसका नाम मिनी था. उसकी उमर

लगभग 18 साल की थी. उनके घर पर एक कंप्यूटर भी था. मिनी बहुत

ही सेक्सी थी. मैं उसे चोदना चाहता था लेकिन कोई मौका नहीं मिल

पा रहा था.

ये उस समय की बात है जब मिनी के पेरेंट्स 1 मंथ के लिए यूके चले

गये थे. घर पर केवल मिनी ही अकेली थी. एक दिन मिनी ने मुझे घर

बुलाया. उसका कंप्यूटर खराब हो गया था. मैं कॉलेज जा रहा था

इसलिए मैने शाम को आने के लिए कह कर कॉलेज चला गया.

कॉलेज से वापस आने के बाद मैं मिनी के घर 5 बजे शाम को

पहुच गया. मैने कॉल बेल बजाई तो मिनी ने दरवाज़ा खोला. उसने

लाल रंग की स्कर्ट और ब्लॅक रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी. उसने

अंदर कुच्छ भी नहीं पहन रखा था. उसकी चूचियों के दोनो

निपल्स बाहर से ही महसूस हो रहे थे.

मैं घर के अंदर गया. वो मुझे कंप्यूटर के पास ले गयी. मैने

कंप्यूटर को ओं किया और चेक करने लगा. मिनी चाय बनाने चली

गयी. मैने एक फोल्डर को खोला जो मिनी ने हाइड की हुई थी. उस में

बहुत सारी अडल्ट पिक्चर्स की फाइल्स थी. मैं उन पिक्चर्स को देखने

लगा. थोड़ी देर बाद मिनी चाय ले कर आ गयी. उस समय कंप्यूटर

स्क्रीन पर जो फोटो थी उस में एक आदमी एक लड़की को डॉगी स्टाइल में

चोद रहा था. वो मेरे बगल में बैठ गयी और बोली, "प्लीज़ ये

फाइल्स बंद कर दो. इसे मत देखो." मैने कहा, "बहुत अच्च्ची पिक्चर

है." मिनी का चेहरा शरम से लाल हो गया. उसने माउस पकड़ कर उस

पिक्चर को बंद करना चाहा तो मैने कहा, "बहुत अच्छी पिक्चर

है. प्ल्ज़. मुझे देखने दो. तुमने इसे किस साइट से डाउनलोड किया है."

वो बोली, "प्ल्ज़. राज बंद कर दो इसे."

मैने कहा, "मैं कोई ग़लत काम थोड़े ही कर रहा हूँ. आख़िर तुम

भी तो ये पिक्चर देखती होगी. तुम भी जावन् हो और मैं भी. तुमने

कभी ट्राइ किया है." वो चुप रही तो मैने फिर पूछा. वो

बोली, "मैं अभी तक कुँवारी हूँ. मैने कभी किसी से नहीं करवाया

है." मैने उस से झूठ बोला और कहा, "मैने भी आज तक किसी लड़की

के साथ कुच्छ नहीं किया है. घर पर भी कोई नहीं है. चलो,

आज हम दोनो इसे ट्राइ करते हैं." उसने इनकार कर दिया तो मैने

पूचछा, "क्यों?" इस बार वो कुच्छ नहीं बोली और उसने अपना सर दूसरी

तरफ घुमा लिया. मैने उसके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया

तो उसने मेरा हाथ झटक दिया. मैने फिर पूचछा, "हम दोनो ही

कुंवारे हैं और आज अच्च्छा मौका है. तुम भी जवान हो और मैं

भी. घर पर भी कोई नहीं है. हूमें ट्राइ करना चाहिए."

वो एक दम चुप रही. मैने उसकी जांघों पर हाथ फिरना शुरू कर

दिया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. उसने अपनी दोनो जांघों को एक

दूसरे पर रख कर ज़ोर से दबा लिया. मैने उसकी जांघों को सहलाते

हुए अपना हाथ उसकी जांघों के बीच घुसा दिया. मेरा हाथ सीधा

उसकी चूत पर लगा. उसने नीचे भी कुच्छ नहीं पहन रखा था. उसकी

चूत एक मुलायम और चिकनी थी. उसने इस बार मेरा हाथ नहीं हटाया.

मैं समझ गया की मेरा काम बन जाएगा. मैने उसकी चूत को सहलाना

शुरू कर दिया तो उसकी साँसें बहुत तेज़ चलने लगी और उसका चेहरा

एक दम लाल हो गया. वो कुच्छ नहीं बोली.

थोड़ी देर तक उसकी चूत सहलाने के बाद मैं उठा. मैने उसे गोद में

उठा लिया और बेडरूम में ले जाने लगा तो उसने अपना चेहरा मेरे

सीने में च्छूपा लिया. बेडरूम में ले जा कर मैने उसे बेड पर लिटा

दिया. मैने उसकी टी-शर्ट और स्कर्ट उतार दी. उसके कपड़े उतरने के बाद

मैने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए. मुझे नंगा होते देख उसने अपनी

आँखें बंद ली लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी. उसका

संगमरमर सा गोरा बदन एक दम नंगा मेरे सामने था. मुझे जोश आने

लगा. मैं उसके होठों को चूमना शुरू कर दिया. थोड़ी देर तक

होठों को चूमने के बाद मैने धीरे धीरे उसके चुचियों को, पेट

को, जांघों को और फिर उसकी चूत को चूमने लगा.

वो एक दम गरम हो गयी और सिसकारियाँ भरने लगी. मेरा लंड भी

खड़ा हो कर जोश से एक दम लोहे जैसा हो गया था और झड़ने वाला

था. मैने अपना लंड उसके मूह के पास कर दिया और चूसने को कहा.

वो कुच्छ नहीं बोली. मैने उसके मूह में अपना लंड घुसने की कोशिश

की तो उसने अपना मूह इधर उधर करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर ना

नुकुर करने के बाद आख़िर में उसने अपना मूह खोल दिया. मैने अपना

लंड उसके मूह में डाल दिया और वो उसे चूसने लगी. मैं उसके उपर

लेट गया और मैने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी. 2 मिनिट बाद ही

मैं उसके मूह में झाड़ गया और उसने मेरे लंड का सारा पानी निगल

लिया. लंड का सारा पानी निगल जाने के बाद भी उसने मेरा लंड

चूसना ज़ारी रखा. वो भी अब तक बहुत जोश में आ गयी थी और

उसकी चूत से भी पानी निकालने लगा. मैने भी उसकी चूत का सारा

पानी चाट लिया. वो एक दम नमकीन और कुच्छ कुच्छ खट्टा था.

5 मिनिट में ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं भी अभी तक

उसकी चूत को चाट रहा था और वो भी अपना चूतड़ उठा उठा कर मज़ा

ले रही थी. हम दोनो बहुत जोश में आ गये थे. मैं उसके उपर से

हट गया और उसे डॉगी स्टाइल में होने को कहा. वो कुच्छ नहीं बोली

और चुप-छाप उठ कर डॉगी स्टाइल में हो गयी. उसने अपना सर तकिये

पर टीका दिया. मैं समझ गया की वो चुड़वाने के लिए एक दम बेकाबू

हो रही है. मैं उसके पीच्चे आ गया. मैने उसकी चूत को फेला कर

अपने लंड का सूपड़ा उसकी चूत के बीच रख दिया. वो कुच्छ नहीं

बोली. मैने अपना लंड थोड़ा सा अंदर दबाया. उसकी चूत बहुत टाइट

थी और केवल मेरे लंड का सूपड़ा ही उसकी चूत के अंदर घुस पाया.

मैने थोड़ा और दबाया तो वो पहली बार बोली, "प्ल्ज़. ज़रा धीरे."

मैं समझ गया की वो एक दम जोश में आ गयी है. मैने अपना लंड

थोड़ा और अंदर दबाया तो वो सिसकारियाँ भरने लगी. मेरा लंड उसकी

चूत में अब तक 2" घुस चुका था. मैने अपना लंड उसकी चूत में

धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. उसने भी अपना चूतड़

पीच्चे की तरफ दबाया और सिसकारियाँ भरने लगी, उफ़फ्फ़... विकी...

धीरे... प्ल्ज़. दर्द हो रहााआ है..... उईए.... म्माआआआ......

आआआहह... रुक्कककककक..... जाओ....... मैं रुक गया. वो

बोली, "राज, मैं पहली बार करवा रही हून. ज़रा आराम से धीरे

धीरे करो. बहुत दर्द हो रहा है." मैने कहा, "तुम घबराओ मत.

मैं धीरे धीरे और आराम से ही करूँगा. मैं जनता हून की तुम

अभी तक कुँवारी हो और तुम्हारी चूत एक दम टाइट है." मैने धीरे

धीरे अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

2-3 मिनिट तक छोड़ने के बाद उसे भी और ज़्यादा मज़ा आने लगा. वो

बोली, "राज, तुम अपना लंड तोड़ा सा और अंदर डाल दो. मैं तय्यार

हून." मैने तोड़ा सा और दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में 3" तक

घुस गया. वो फिर बोली, "बस, रुक जाओ प्ल्ज़. दर्द हो रहा है. अभी

इतना ही अंदर डाल कर चोदो मुझे." उसका सील टूट चुकी थी और वो

अब मेरा लंड अपनी चूत में आराम से अंदर ले रही थी. मैने उसे

धीरे धीरे चोदना शुरू कर दिया. 2-3 मिनिट में ही उसका दर्द जब

कुच्छ कम हुआ तो उसे मज़ा आने लगा. वो बोली, "राज, तोड़ा और अंदर

डाल कर और तेज़ी.... से चोदो... मुझे." मैने थोडा और अंदर दबाया

तो मेरा लंड उसकी चूत में 4" तक घुस गया. मैने अपनी स्पीड को

बढ़ते हुए उसे चोदने लगा. वो अपना चूतड़ आगे पीछे करते हुए

मेरा साथ दे रही थी.

5 मिनिट तक चोदने के बाद वो बहुत ज़यादा जोश में आ गयी और

बोली, "राज, और अंदर डालो अपना लंड मेरी चूत में. खूब तेज़

चोदो मुझे. अब रुकना नहीं, पूरा लंड अंदर घुसा देना. मैं एक दम

बेकाबू हो रही हून और मुझे बर्दस्त नहीं हो रहा है." मैने अपना

लंड थोड़ा और अंदर दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में 5" तक घुस

गया. मैने उसे धीरे धीरे चॉड्ना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर तक चोदने के बाद मैने एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया. मेरा

लंड उसकी चूत में 6" तक घुस गया. वो चिल्ला उठी लेकिन उसने मुझे

रुकने के लिए नहीं कहा. मैने एक फाइनल शॉट लगा दिया तो वो बहुत

तेज़ चिल्लाने लगी. मेरा 7" का पूरा लंड उसकी चूत में एक दम ज़द

तक घुस चुका था. वो बोली, "राज, तुमने आख़िर मुझे आज एक लड़की

से औरत बना ही दिया. मैने अपनी चूत में तुम्हारा पूरा लंड अंदर

ले ही लिया. बहुत दर्द हो रहा है. थोड़ा रुक जाओ, तब चोदना" मैं

रुक गया.

थोड़ी देर बाद जब वो शांत हुई तो उसने मुझसे चोदने के लिए कहा.

मैने मिनी की चुदाई शुरू कर दी. पहले बहुत धीरे धीरे उसके

बाद मैने बहुत तेज़ी के साथ चोदना शुसरू कर दिया. 5 मिनिट तक

उसे चुदवाने में थोड़ा दर्द हुआ लेकिन उसके बाद वो एक दम शांत हो

गयी और उसे मज़ा आने लगा. उसने अपना छूतड़ आगे पीच्चे करते

हुए मेरा साथ देना शुरू कर दिया. 2 मिनिट बाद ही वो बोली, "और

तेज़ छोड़ो, राज. ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाओ." मैने अपनी स्पीड बढ़ा दी

और बहुत तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा. वो अब अपनी चूत में मेरा पूरा

लंड आराम के साथ अंदर ले रही थी. 2 मिनिट भी नहीं बीते की वो

फिर बोली, "राज, मुझे कुच्छ हो रहा है. लगता है मेरी चूत से

पानी निकालने वाला है. खूब ज़ोर ज़ोर से धक्का लगाओ." मैं समझ

गया की वो झड़ने वाली है. मैने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी

चुदाई शुरू कर दी.

वो बोली, "आआआ... राज...... मैं.... आआआ... रही.... हून....

और तेज़ .... और तेज़..... ." उसकी चूत से पानी निकालने लगा और मेरा

सारा लंड भीग गया. मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता

रहा. लगभग 20 मिनिट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही

झाड़ गया. इस दौरान वो भी 3 बार झाड़ चुकी थी.

लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया.

हम दोनो तक गये थे. कुच्छ देर आराम करने लगे.

15 मिनिट बाद वो बोली, "राज, प्ल्ज़. एक बार और करो ना. मुझे बहुत

अच्च्ची लग रही थी यह चुदाई." उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर

दिया. 10 मिनिट में ही मेरा लंड एक दम तय्यार हो गया. मैने उसे

बेड पर लिटा दिया और उसके चूतड़ के नीचे 2 तकिये रख दिए. उसकी

छूट एक दम उपर उठ गयी. मैने उसकी चूत के बीच जैसे ही अपना

लंड रखा तो वो बोली, "राज, मुझे बहुत मज़ा आया था. इस बार तुम

अपना लंड एक ही धक्के में पूरा अंदर दल दो." मैने अपनी सासें रोक

कर अपने को थोड़ा तय्यार किया और पूरा ज़ोर लगते हुए एक करारा

धक्का मारा. मेरा पूरा लंड सनसंता हुए उसकी चूत में घुस गया.

वो बहुत तेज़ चीख पड़ी.

मैने बिना रुके उसकी चुदाई शुरू कर दी. 2 मिनिट में ही वो अपना

चूतड़ उठा उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी. मैने अपनी

स्पीड और बढ़ा दी. 5 मिनिट की चुदाई के बाद वो झाड़ गयी. उसकी

चूत एक दम गीली हो चुकी थी और मेरा लंड भी उसकी चूत के पानी

से एक दम गीला हो चुका था. मैं रुका नहीं उसको चोदता रहा. रूम

में फ़च-फ़च की आवाज़ गूँज रही थी. इस बार मैने उसे बिना रुके

लगभग 35 तक चोदा और उसकी चूत में ही झाड़ गया. लंड का पूरा

पानी उसकी चूत में निकल देने के बाद मैं हट गया और उसके बगल

में ही लेट गया. इस बार की चुदाई में वो 4 बार झाड़ चुकी थी.

वो भी तक कर चूर हो गयी थी और एक दम निढाल हो गयी थी. वो

बेड पर ही पड़ी रही.

मैने उसे 1 मंत तक कभी अपने रूम पर और कभी उसके रूम पर

खूब चोदा. उसके और मेरे घर का कोई कोना नहीं बचा था जहाँ

मैने उसकी चुदाई ना की हो. वो खूब मस्त हो कर चुड़वाती थी. आज

भी मौका मिलते ही वो किसी ना किसी बहाने मेरे रूम पर आ कर मुझसे

चुड़वा जाती है

 
चुदाई और चूत

मैं मानस मैं 46 साल का हू और मेरी सेक्सी बीवी शेला(नामे चेंज)40 साल की है हमरी शादी को 20 साल हो गये और अब शेला को मिंडरा के साथ चुदाई के बाद बड़े लंड की आदत हो गयी थी और मुझे भी उशे चुड़ते हुए देखना का मॅन हो गया था और मज़ा भी आने लगा थ.वैसे शेला बहुत सेक्सी औरत है और कितनी बार भी छुड़ाने से नही डरती वो सेक्स मे एक्सपर्ट थी और सब कुछ उशे सेक्स मे करना पसंद था वो सेक्स करते वक़्त मू मे लेती,गांद मे लेती,69 मे चूड़ती और चूत मे तो यूटा यूटा कर लंड लेती थी,और चूड़ते वक़्त उसकी वो दर्द भारी आवाज़े ज़ोर ज़ोर से छीलना अहाहे भरना गरम गरम सासे छोड़ना जिब से लंड को सहलाना और कातिल निगाह और मू से चूसने का अंदाज़ और पूरा शीक मू मे लगाना बहुत मज़ा आता था पर अब कुछ दीनो से वा बड़े लंड की तलाश मे थी और मुझे उशे फिर से गरम करना थ.वैसे शेला की बड़े बड़े बॉल और मोटी गांद की सब दीवाने थे.

हम एक दिन फिल्म देखने हॉल मे गये हॉल खाली थी और कुछ ही लोग बाइटे हुए थे हम पेचए के रो मे बैट गये जो की पूरा खाली था फिल्म शुरू हुई और लाइट भी दीं हो गया और हम फिल्म देख रहे थे फिल्म थोड़ी सेक्सी थी सो मई शेला के सारी के अंदर से उसके चूत मे उंगली दाल रहा था और वो भी मज़ा ले रही थी अब मैने उसकी ब्लाउस उपर की और बॉल चूस रहा था की इतने मे टिकेट चेकरर ने टॉर्च मारी और उसने ह्यूम पकड़ लिया वो मेरे पास आया और मुझे छीलाने लगा की क्या कर रहे हो हॉल मे मैं कंप्लेंट करता हू मैं उशे सीट पे बिताकर संजने लगा की मैने देखा की वो शेला की बड़े बूब्स को घूर रहा था वो भी हटा कटा आदमी था उसका नाम मधु था और मैने सोचा की क्यूँ ना इशे ही शेला की प्यसस भुजने बोल डू और मैने खा की कंप्लेंट मत करो माँगता है तो तुम भी मेरे साथ मज़े कर सकते हो ये सुनकर उसके चेहरे पर हसी आई और वो मॅन गया.

अब वो शेला के बगल मे बैट गया और शेला की बूब्स को छत रहा था और काट रहा था और मैं शेला की चूत मे उंगली दाल रहा था शेला को बहुत मज़ा अरहा था और वो अब हम दोनो के लंड को पंत के उपर से सहला रही थी अब मधु से रहा नही गया और उसने पंत को घुटने तक निकल दिया और उसका बड़ा 9 इंच का लंड हवा मे हिल रहा था बड़े लंड को देख शेला ने अब उसके लंड को हाथ से पकड़ लिया और उशे हिलने लगी मधु को बहुत मज़ा अरहा था और उसने खा की शेला मू मे ले लो और अब शेला ने उसके लंड को जिब से चाटना शुरू किया.

मधु:अहाहााआआ शेला लो मू मे मेरा लंड को आचे से लो छत उशे आचे से अहहहहहः शीईलाआाआ लूऊऊऊऊऊऊऊ.

शेला उसके लंड को जिब से छत रही थी उपर से नीचे तक और हाथ से हिला रही थी और उसके अंडवे को भी मू मे घुसा रही थी मधु मस्त हो रा था ऐसे चूसा से और वो शेला के मू को देख रहा था.

मधु:ओूहोहोूहोूहो शीलाआअ मेर्र्रिई रांदड़डी क्या लेती होहोूह अहहहहाहोहोहोूऊहू मज़ाआ आययाययायायययया.

मैं सब देख रहा था और मैने भी ज़िप खोल कर अपना लंड बाहर निकल दिया और शेला अब एक हाथ से मेरे लंड को भी हिला रही थी.

अब मधु उल्टा हो गया और शेला को उसकी गांद चाटने को खा और शेला अब अपनी जिब उसकी गांद के खड़े मे घुसा रही थी वो जिब अंदर अंदर घुसके उसकी गांद की बाज़ ले रही थी .

मधु:हूहोहोूहोो शहहेललल्ला क्या मस्त रॅंड है तू और जिब से छत साली ओहोहोहोहो अहहहहाः हूहोोहो चात्सली शेला ओहोहोूह.

और अब फिर मधु सीधे हो गया और अब उसका लंड एकद्ूम खड़ा हो चुका था और शेला अब उसके लंड को मू मे घुसा रही थी.

शेला:हूहोोहोहो अहहहहहहा क्या बड़ा लंड है तेरा ओफफफफफफफ्फ़ अहहहाः पूरा मू मे लूँगी अहहहहहहाहोहोूहोूहो उुपुपुपुप्पुपुप्पुपुप्पुप.

और वो मू मे अंदर बाहर कर के छत रही थी और मधु का पूरा लंड उसने गीला कर लिया था और उसका लंड शेला के मू मे मस्त जराहा था और वो बाइटे हुए शेला के मू मे लंड घुसता देख मज़े ले रहा था.

मधु:अहहहहः शेला तू तो मस्त रंडी है रे क्या चुस्ती है तू लंड हो अहहहः मेरी रॅंड शेला साली छीनाल लेलएलएलएल हाहहहूहूऊ.

और उसकी गली सुनकर शेला को और मज़े अरहा था और वो ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी उसके लंड को मूओ मे और गीला कर र्है थी उसका लंड.

शेला:हा मई रंडी हू तेरी वाआहह क्या लंड है तेरा ओूहो अहाहहा मस्त मोटा लंड चोद दे मेरे मू को इस बड़े लंड से अहहहहहू मस्त लंड है उपूप्पुपुप्पुपुप्पुपुप्पुहाहहहहहहहहहहहहहह.

अब शेला ने मेरा लंड चोद दिया और मई अपने हाथ से हिला रहा था लंड को दोनो को देख और मज़ा भी अरहा था अब मधु का शीक निकालने वाला था वो खड़ा हो गया और शेला के बॉल पकड़ कर मू मे लंड के दाखे देना चालू कर दिया.

मदु:ले अब ऐसे तेरा मू को छोड़ूँगा की याद करेसी मेरी रॅंड शेला लीईई अहहहाहूहोूहहहहहा.

और वो शेला के मू मे लंड घुस कर छोड़ने लगा शेला के मू मे लंड जा रहा था उसके पूरे गले तक और उशे थोड़ा दर्द हो रहा था मू मे.

शेला:अहहहाहजूहोहोूहोूहोहोहू उूफुफुफुउफुफूफूफुफु मूओ फॅट गया अहहहहहहहहूहोहोहू उफुफुउफुफुफुउफ़ु कर रही थी.

पर मधु जोशमे था और ज़ोर ज़ोर का फाटका मू मे दे रहा था और अब उसने लंड बाहर निकाला और शेला को मू खोलने को खा और जैसे ही शेला ने मू खोला मधु मे अपना पूरा चीस शेला के मू मे चोद दिया.

मधु:ले शेला अहहहहाहोहोूहोो रंडी ले पूरा पानी मेरा पी इशे अहहहहोूहोूहह लेलेलेलेल्लेलेल्लेलेलेल्लेलेल्लेल.षेल:द्डोड़ूदोडोडूदमुऊमुमूमूम्मूऊमुमूमुमुहाहहहहहहहहहोूहोूह ले ली मैने तेरा पानी उमूँमुमूमूँमुमूमूमूँमुआहहहहहहहहहाहहहा.

कर कर के शेला ने उसके पूरा शीक अपने मू के अंदर ले लिया और मधु अब सीट मे बैट गया और अब मेरा भी पानी आने वाला था सो शेला को मैने फिर मू खोलने को खा और अब उसके मू मे लंड जाते ही मेरा पानी पूरा उसके मू के अंदर चला गया और वो मज़े से मेरा भी पूरा पानी पी ली.

 
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