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नीलम ने दरवाजे बन्द किए और अपने कपड़े बदलने लगी। गरमी के वजह से नीलम अक्सर रात को एक पतला सा पेटीकोट और ब्लाउज पहन कर सोती थी और वो अक्सर रघु के सामने अपने कपड़े बदल लेती थी।
क्योंकि रघु की उम्र उस समय बहुत ज्यादा नहीं थी, उस रात भी नीलम ने अपने कमरे में आने के बाद दरवाजे बन्द किए और अपने कपड़े बदलने लगी, रघु एक तरफ खड़ा होकर दूध पी रहा था…
नीलम ने सबसे पहले अपनी साड़ी को उतार कर टांगा और उसके बाद अपने ब्लाउज को खोल कर दूसरा ब्लाउज पहन लिया और फिर उसने अपना पेटीकोट को उतारा और टाँगने लगी.. इस दौरान रघु अपना दूध पीकर गिलास नीचे रख चुका था।
रघु ने गिलास नीचे रखा और बिस्तर पर जाकर बैठ गया।
उसने देखा कि नीलम काकी नीचे से पूरी नंगी हैं, उसके मोटी माँस से भारी पिछाड़ी देख कर रघु के लण्ड में पहली बार कुछ हरकत हुई, पर रघु सेक्स से एकदम अंजान था।
वो तो बस पूरा दिन इधर-उधर खेजया रहता था, पर आज मनुष्य की सहज प्रवत्ति के कारण उसके नजरें नीलम के मोटे-मोटे चूतड़ों पर जम गई।
नीलम ने अपना पेटीकोट उठाया, जो वो रात को सोने के समय पहनती थी और बिस्तर की तरफ बढ़ी। अब उसका मुँह रघु की तरफ था.. इस बात से अंजान थी कि रघु उसकी झाँटों भरी चूत को देख रहा है।
जैसे ही नीलम बिस्तर के पास पहुँची.. तो रघु के पैरों के नीचे से एक मोटा सा चूहा दौड़ता हुआ निकल गया। रघु एकदम से डर गया।
आख़िर उसकी उम्र ही क्या थी.. चूहे से डरते ही रघु एकदम से उछल पड़ा और पास खड़ी नीलम की कमर में अपनी बाहें डालते हुए उससे एकदम से चिपक गया।
अब नज़ारा यह था कि रघु बिस्तर पर बैठा हुआ था और नीलम उसके सामने खड़ी थी।
नीचे से एकदम नंगी और रघु उसके कमर में बाहें डाले डर के मारे उससे चिपका हुआ था।
रघु अपने चेहरे को डर के मारे नीलम की जाँघों के बीच में छुपाए हुए था।
नीलम का बदन एक पल के लिए अकड़ गया, जैसे उसके बदन में जान ही ना हो.. रघु की गरम साँसें उसे अपनी चूत पर साफ़ महसूस हो रही थी।
आज तकरबीन एक साल बाद नीलम की सोई हुई वासना एक बार फिर से अंगड़ाई लेने लगी.. नीलम ने काँपती हुई आवाज़ में रघु से पूछा- क्या हुआ बेटा..
रघु जो एकदम से घबरा गया था.. अपने चेहरे को उसकी जाँघों के बीच में छुपाए हुए बोला- काकी वो चूहा.. बहुत मोटा था।
जैसे ही रघु ने बोलने के लिए मुँह खोला तो उसके हिलते हुए गाल नीलम की चूत की फांकों पर रगड़ खा गए। नीलम एकदम से सिहर गई, उसके पूरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई।
उसने रघु के बालों में प्यार से हाथ फेरा और उसके सर को पीछे हटाना चाहा..पर रघु बहुत ज्यादा डर गया था। वो अपना सर वहाँ से हटाना नहीं चाहता था।
‘बेटा वो चूहा चला गया है.. ओह्ह बेटा हट न..’ ये कहते हुए.. नीलम की चूत की फाँकें कुलबुलाने लगीं और उसकी चूत का कामरस चूत को नम करने लगा।
किसी तरह नीलम ने उससे अपने से अलग किया और इस बात की परवाह किए बिना कि उसने पेटीकोट नहीं पहना है… रघु को बिस्तर पर लेटने दिया और खुद पेटीकोट पहन कर रघु के बगल में लेट गई।
अब तक पति के मौत के बाद नीलम ने किसी पराए मर्द की तरफ देखा तक नहीं था.. भले ही गाँव के कुछ मनचले लड़के उसे आते-जाते खूब छेड़ते थे, पर वो अपने घर की इज़्ज़त को बचा कर रखना चाहती थी और आज भी नीलम के मन में ऐसा कोई भाव नहीं था।
नीलम- क्या रघु एक चूहे से डर गया.. अरे तू तो मेरा शेर है.. ऐसे थोड़ा डरते हैं।
‘काकी.. पर वो चूहा बहुत मोटा था।’ रघु ने भोलेपन से कहा।
ये देख कर नीलम के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई।
इससे पहले कि नीलम कुछ बोलती.. रघु नीलम से एकदम सट गया और एक बाजू को नीलम की कमर पर कस दिया।
क्योंकि रघु की उम्र उस समय बहुत ज्यादा नहीं थी, उस रात भी नीलम ने अपने कमरे में आने के बाद दरवाजे बन्द किए और अपने कपड़े बदलने लगी, रघु एक तरफ खड़ा होकर दूध पी रहा था…
नीलम ने सबसे पहले अपनी साड़ी को उतार कर टांगा और उसके बाद अपने ब्लाउज को खोल कर दूसरा ब्लाउज पहन लिया और फिर उसने अपना पेटीकोट को उतारा और टाँगने लगी.. इस दौरान रघु अपना दूध पीकर गिलास नीचे रख चुका था।
रघु ने गिलास नीचे रखा और बिस्तर पर जाकर बैठ गया।
उसने देखा कि नीलम काकी नीचे से पूरी नंगी हैं, उसके मोटी माँस से भारी पिछाड़ी देख कर रघु के लण्ड में पहली बार कुछ हरकत हुई, पर रघु सेक्स से एकदम अंजान था।
वो तो बस पूरा दिन इधर-उधर खेजया रहता था, पर आज मनुष्य की सहज प्रवत्ति के कारण उसके नजरें नीलम के मोटे-मोटे चूतड़ों पर जम गई।
नीलम ने अपना पेटीकोट उठाया, जो वो रात को सोने के समय पहनती थी और बिस्तर की तरफ बढ़ी। अब उसका मुँह रघु की तरफ था.. इस बात से अंजान थी कि रघु उसकी झाँटों भरी चूत को देख रहा है।
जैसे ही नीलम बिस्तर के पास पहुँची.. तो रघु के पैरों के नीचे से एक मोटा सा चूहा दौड़ता हुआ निकल गया। रघु एकदम से डर गया।
आख़िर उसकी उम्र ही क्या थी.. चूहे से डरते ही रघु एकदम से उछल पड़ा और पास खड़ी नीलम की कमर में अपनी बाहें डालते हुए उससे एकदम से चिपक गया।
अब नज़ारा यह था कि रघु बिस्तर पर बैठा हुआ था और नीलम उसके सामने खड़ी थी।
नीचे से एकदम नंगी और रघु उसके कमर में बाहें डाले डर के मारे उससे चिपका हुआ था।
रघु अपने चेहरे को डर के मारे नीलम की जाँघों के बीच में छुपाए हुए था।
नीलम का बदन एक पल के लिए अकड़ गया, जैसे उसके बदन में जान ही ना हो.. रघु की गरम साँसें उसे अपनी चूत पर साफ़ महसूस हो रही थी।
आज तकरबीन एक साल बाद नीलम की सोई हुई वासना एक बार फिर से अंगड़ाई लेने लगी.. नीलम ने काँपती हुई आवाज़ में रघु से पूछा- क्या हुआ बेटा..
रघु जो एकदम से घबरा गया था.. अपने चेहरे को उसकी जाँघों के बीच में छुपाए हुए बोला- काकी वो चूहा.. बहुत मोटा था।
जैसे ही रघु ने बोलने के लिए मुँह खोला तो उसके हिलते हुए गाल नीलम की चूत की फांकों पर रगड़ खा गए। नीलम एकदम से सिहर गई, उसके पूरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई।
उसने रघु के बालों में प्यार से हाथ फेरा और उसके सर को पीछे हटाना चाहा..पर रघु बहुत ज्यादा डर गया था। वो अपना सर वहाँ से हटाना नहीं चाहता था।
‘बेटा वो चूहा चला गया है.. ओह्ह बेटा हट न..’ ये कहते हुए.. नीलम की चूत की फाँकें कुलबुलाने लगीं और उसकी चूत का कामरस चूत को नम करने लगा।
किसी तरह नीलम ने उससे अपने से अलग किया और इस बात की परवाह किए बिना कि उसने पेटीकोट नहीं पहना है… रघु को बिस्तर पर लेटने दिया और खुद पेटीकोट पहन कर रघु के बगल में लेट गई।
अब तक पति के मौत के बाद नीलम ने किसी पराए मर्द की तरफ देखा तक नहीं था.. भले ही गाँव के कुछ मनचले लड़के उसे आते-जाते खूब छेड़ते थे, पर वो अपने घर की इज़्ज़त को बचा कर रखना चाहती थी और आज भी नीलम के मन में ऐसा कोई भाव नहीं था।
नीलम- क्या रघु एक चूहे से डर गया.. अरे तू तो मेरा शेर है.. ऐसे थोड़ा डरते हैं।
‘काकी.. पर वो चूहा बहुत मोटा था।’ रघु ने भोलेपन से कहा।
ये देख कर नीलम के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई।
इससे पहले कि नीलम कुछ बोलती.. रघु नीलम से एकदम सट गया और एक बाजू को नीलम की कमर पर कस दिया।