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नीलम के बदन में मानो करंट कौंध गया। आँखें ऐसे खुल गईं..जैसे कभी बंद ही ना हुई हों।
उसने एक बार अपने आप को संभालते हुए.. रघु को पीछे किया। नीलम अब भी वैसी ही हालत में थी।
उसके ब्लाउज के सारे हुक्स खुले हुए थे और नीचे से वो मादरजात नंगी थी।
नीलम ने अपने आपको संभालते हुए लड़खड़ाती हुई आवाज़ में कहा।
‘चल.. अब अब लेट जा.. बहुत रात हो गई है..’
रघु ने नीलम का हाथ पकड़ लिया।
‘काकी आप भी साथ में लेट जाओ ना…’ रघु ने मासूमियत भरे हुए चेहरे से कहा, मन्त्र-मुग्ध हो चुकी नीलम भी बिना कुछ बोले उसी हालत में लेट गई।
दोनों एक-दूसरे की तरफ करवट लिए हुए लेटे थे।
नीलम असमंजस में थी कि उससे क्या हो रहा है।
क्या रघु ये सब जानबूझ कर तो नहीं कर रहा, या फिर ये सब उससे नादानी में हो गया।
नीलम जैसे ही करवट के बल लेटी, उसके ब्लाउज का पल्लू जो खुला था.. नीचे से ढलक गया।
उसकी 38 साइज़ की चूचियां बड़े-बड़े गहरे भूरे रँग के चूचुक रघु की आँखों के सामने थे। रघु से रहा नहीं गया और उसने एक ओर नादानी कर दी.. जो शायद नीलम की जिंदगी को बदल कर रख देने वाली थी।
रघु ने नीलम के बड़े-बड़े भूरे रंग के चूचकों की ओर देखते हुए कहा- काकी क्या मुन्ना अभी भी यहाँ से दूध पीता है?
नीलम ने बड़े प्यार से रघु के बालों को सहलाते हुए कहा- नहीं क्यों.. अब वो दूध नहीं पीता।
रघु- तो क्या इसमें अभी भी दूध आता है?
नीलम रघु की बातों से हैरान थी कि रघु ने कभी पहले ऐसे सवाल नहीं किए थे।
‘मुझे नहीं पता.. पर तू क्यों पूछ रहा है?’
रघु- वैसे ही पूछ रहा था.. मैं पीकर देखूं?
नीलम ने हंसते हुए उसके माथे को चूमते हुए कहा- तू दूध पिएगा…. नहीं.. जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो वो ये दूध नहीं पीते।
रघु- नहीं.. मुझे पीना है।
यह कहते हुए रघु ने नीलम का बाएं चूचुक को मुँह में भर लिया। इससे पहले कि नीलम कुछ बोल पाती या करती।
रघु की गरम जीभ को अपने मोटे भूरे रंग के चूचुक पर महसूस करते ही उसके बदन में मस्ती की तेज लहर दौड़ गई।
उसने रघु हटाना चाहा.. पर उसके बदन में मानो जैसे जान ही ना बची हो।
‘आह्ह.. रघु हट जाअ.. ना… कर.. नहीं तो तुझे डांट दूंगी.. ओह्ह से..इईईई रघु बेटा क्या कर रहा है… ओह रुक जा छोरे, नहीं तो तेरी काकी से आज पाप हो जाएगा…आहह।’
पर रघु तो जैसे उसकी बात सुन ही नहीं रहा था, वो इतना उत्तेजित हो गया था कि उसने जितना हो सकता था.. अपना मुँह खोल कर उसकी चूची को मुँह में भर कर चूसना चालू कर दिया।
रघु कोई बच्चा नहीं था.. नीलम की चूचियों को आज तक उसके बच्चों के सिवाए किसी नहीं चूसा था, यहाँ तक कि उसके पति ने भी नहीं।
नीलम की हालत खराब होती जा रही थी, अब वो बदहवासी में बड़बड़ाते हुए रघु को अपने से अलग करने के नाकामयाब कोशिश कर रही थी।
रघु पूरे ज़ोर से उसकी चूची के चूचुक को चूस रहा था, बरसों से दबा कामवासना का ज्वालामुखी फिर से दहकने लगा था।
अपने आप को इस पाप से बचाने के लिए नीलम ने आख़िर कोशिश की.. उसने रघु को कंधों से पकड़ कर पीछे हटाना चाहा.. पर रघु पीछे हटता।
उसके उलट वो खुद पीछे के ओर होते हुए एकदम सीधी हो गई।
पर रघु तो उससे ऐसे चिपका हुआ था.. मानो उसे अपनी काकी से कोई अलग ना कर सकता हो।
नतीजा यह हुआ कि अब नीलम पीठ के बल सीधी लेटी हुई थी और रघु उसके ऊपर झुका हुआ उसकी चूची को चूस रहा था..
उसका धड़ का नीचे वाला हिस्सा बिस्तर पर था।
रघु ने नीलम की चूची चूसते हुए नीचे की तरफ देखा.. उसकी कमर रह-रह कर झटके खा रही थी।
नीचे घुंघराले बालों से भरी हुई चूत का नज़ारा कुछ और ही था।
रघु को याद आया कि वो लड़का कैसे गुंजन के ऊपर चढ़ कर उससे चोद रहा था.. ये सोचते ही रघु नीलम के ऊपर आ गया।
बदहवास हो चुकी नीलम को समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर हो क्या रहा है, इससे पहले के नीलम कुछ और कर पाती.. रघु नीलम के ऊपर आ चुका था।
उसका लण्ड उसकी चड्डी में एकदम तना हुआ था, जिससे वो ठीक नीलम काकी की चूत की फांकों के बीच आ टिका।
नीलम- आह.. रघु.. हट जाअ.. ओह ओह्ह तुम एई… सब्बब्ब सब्बब्ब क्यों ओह्ह..
नीलम इससे आगे नहीं बोल पाई, उसकी आँखें मस्ती में बंद हो गईं.. हाथ अपने भतीजे की पीठ पर आ गए और कामातुर होकर वो अपने भतीजे की पीठ को सहलाने लगी।
रघु समझ गया कि अब उसकी काकी को भी मजा आने लगा है।
अपनी चूत के मुहाने पर रघु के सख्त लण्ड को महसूस करके नीलम एकदम मदहोश हो गई।
उधर रघु अपनी जाँघों को नीलम की जाँघों के बीच में करने की कोशिश कर रहा था.. क्योंकि गुंजन ने भी चुदते वक़्त अपनी जाँघों को फैला कर उस लड़के की कमर पर लिपटाए रखा था और जब रघु का लण्ड झटका ख़ाता।
तो नीलम की चूत में सरसराहट दौड़ जाती और उसकी चूत लण्ड लेने के लिए मचलने लग जाती।
ऊपर तो रघु ने नीलम की चूची के चूचुक का चूस कर एकदम लाल कर दिया था।
नीलम के चूचक एकदम कड़क हो गए थे और नीचे रघु अपनी जाँघों को नीलम की जाँघों के बीच में सैट करने की कोशिश कर रहा था।
इसी धींगा-मस्ती में रघु का लण्ड चड्डी के ऊपर से नीलम की चूत की फांकों को फैला कर चूत के छेद पर जा लगा।
‘ओह्ह रघु..’ नीलम ने सिसयाते हुए अपनी जाँघों को ढीला छोड़ दिया।
रघु की जाँघें अब नीलम काकी की जाँघों के बीच में आ गईं।
रघु ने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपने चड्डी को नीचे सरकाना शुरू किया।
जब नीलम को इस बात का अहसास हुआ तो नीलम एकदम से हैरान रह गई और मन ही मन सोचने लगी- हे भगवान ये छोरा क्या करने जा रहा है। कहाँ से सीखा इसने ये सब.. मुझे इससे यहीं रोक देना चाहिए।
नीलम ने अपनी नशीली आँखों को बड़ी मुश्किल से खोला और रघु की तरफ देखा.. जो उसकी अब दूसरी चूची को चूसने में लगा हुआ था और फिर कहा- ये क्या कर रहा है… रघु ये.. ठीक नहीं है बेटा ओह्ह..’
रघु ने अपने दाँतों को हल्का सा नीलम के चूचुक पर गड़ा दिया.. नीलम के आँखें फिर से मस्ती और दर्द के कारण बंद हो गईं।
पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.. रघु ने अपनी चड्डी को अपनी जाँघों तक सरका दिया था और अपने लण्ड को उसकी चूत की फांकों पर रख कर पागलों की तरह धक्के लगाने लगा।
नादान रघु को चूत का छेद नहीं मिला.. पर अपने लण्ड के सुपारे को नीलम की चूत की फांकों और इधर-उधर रगड़ते हुए रघु पागल हुआ जा रहा था।
वो लगातार अपने लण्ड को उसकी चूत की फांकों पर रगड़ने लगा।
उसने एक बार अपने आप को संभालते हुए.. रघु को पीछे किया। नीलम अब भी वैसी ही हालत में थी।
उसके ब्लाउज के सारे हुक्स खुले हुए थे और नीचे से वो मादरजात नंगी थी।
नीलम ने अपने आपको संभालते हुए लड़खड़ाती हुई आवाज़ में कहा।
‘चल.. अब अब लेट जा.. बहुत रात हो गई है..’
रघु ने नीलम का हाथ पकड़ लिया।
‘काकी आप भी साथ में लेट जाओ ना…’ रघु ने मासूमियत भरे हुए चेहरे से कहा, मन्त्र-मुग्ध हो चुकी नीलम भी बिना कुछ बोले उसी हालत में लेट गई।
दोनों एक-दूसरे की तरफ करवट लिए हुए लेटे थे।
नीलम असमंजस में थी कि उससे क्या हो रहा है।
क्या रघु ये सब जानबूझ कर तो नहीं कर रहा, या फिर ये सब उससे नादानी में हो गया।
नीलम जैसे ही करवट के बल लेटी, उसके ब्लाउज का पल्लू जो खुला था.. नीचे से ढलक गया।
उसकी 38 साइज़ की चूचियां बड़े-बड़े गहरे भूरे रँग के चूचुक रघु की आँखों के सामने थे। रघु से रहा नहीं गया और उसने एक ओर नादानी कर दी.. जो शायद नीलम की जिंदगी को बदल कर रख देने वाली थी।
रघु ने नीलम के बड़े-बड़े भूरे रंग के चूचकों की ओर देखते हुए कहा- काकी क्या मुन्ना अभी भी यहाँ से दूध पीता है?
नीलम ने बड़े प्यार से रघु के बालों को सहलाते हुए कहा- नहीं क्यों.. अब वो दूध नहीं पीता।
रघु- तो क्या इसमें अभी भी दूध आता है?
नीलम रघु की बातों से हैरान थी कि रघु ने कभी पहले ऐसे सवाल नहीं किए थे।
‘मुझे नहीं पता.. पर तू क्यों पूछ रहा है?’
रघु- वैसे ही पूछ रहा था.. मैं पीकर देखूं?
नीलम ने हंसते हुए उसके माथे को चूमते हुए कहा- तू दूध पिएगा…. नहीं.. जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो वो ये दूध नहीं पीते।
रघु- नहीं.. मुझे पीना है।
यह कहते हुए रघु ने नीलम का बाएं चूचुक को मुँह में भर लिया। इससे पहले कि नीलम कुछ बोल पाती या करती।
रघु की गरम जीभ को अपने मोटे भूरे रंग के चूचुक पर महसूस करते ही उसके बदन में मस्ती की तेज लहर दौड़ गई।
उसने रघु हटाना चाहा.. पर उसके बदन में मानो जैसे जान ही ना बची हो।
‘आह्ह.. रघु हट जाअ.. ना… कर.. नहीं तो तुझे डांट दूंगी.. ओह्ह से..इईईई रघु बेटा क्या कर रहा है… ओह रुक जा छोरे, नहीं तो तेरी काकी से आज पाप हो जाएगा…आहह।’
पर रघु तो जैसे उसकी बात सुन ही नहीं रहा था, वो इतना उत्तेजित हो गया था कि उसने जितना हो सकता था.. अपना मुँह खोल कर उसकी चूची को मुँह में भर कर चूसना चालू कर दिया।
रघु कोई बच्चा नहीं था.. नीलम की चूचियों को आज तक उसके बच्चों के सिवाए किसी नहीं चूसा था, यहाँ तक कि उसके पति ने भी नहीं।
नीलम की हालत खराब होती जा रही थी, अब वो बदहवासी में बड़बड़ाते हुए रघु को अपने से अलग करने के नाकामयाब कोशिश कर रही थी।
रघु पूरे ज़ोर से उसकी चूची के चूचुक को चूस रहा था, बरसों से दबा कामवासना का ज्वालामुखी फिर से दहकने लगा था।
अपने आप को इस पाप से बचाने के लिए नीलम ने आख़िर कोशिश की.. उसने रघु को कंधों से पकड़ कर पीछे हटाना चाहा.. पर रघु पीछे हटता।
उसके उलट वो खुद पीछे के ओर होते हुए एकदम सीधी हो गई।
पर रघु तो उससे ऐसे चिपका हुआ था.. मानो उसे अपनी काकी से कोई अलग ना कर सकता हो।
नतीजा यह हुआ कि अब नीलम पीठ के बल सीधी लेटी हुई थी और रघु उसके ऊपर झुका हुआ उसकी चूची को चूस रहा था..
उसका धड़ का नीचे वाला हिस्सा बिस्तर पर था।
रघु ने नीलम की चूची चूसते हुए नीचे की तरफ देखा.. उसकी कमर रह-रह कर झटके खा रही थी।
नीचे घुंघराले बालों से भरी हुई चूत का नज़ारा कुछ और ही था।
रघु को याद आया कि वो लड़का कैसे गुंजन के ऊपर चढ़ कर उससे चोद रहा था.. ये सोचते ही रघु नीलम के ऊपर आ गया।
बदहवास हो चुकी नीलम को समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर हो क्या रहा है, इससे पहले के नीलम कुछ और कर पाती.. रघु नीलम के ऊपर आ चुका था।
उसका लण्ड उसकी चड्डी में एकदम तना हुआ था, जिससे वो ठीक नीलम काकी की चूत की फांकों के बीच आ टिका।
नीलम- आह.. रघु.. हट जाअ.. ओह ओह्ह तुम एई… सब्बब्ब सब्बब्ब क्यों ओह्ह..
नीलम इससे आगे नहीं बोल पाई, उसकी आँखें मस्ती में बंद हो गईं.. हाथ अपने भतीजे की पीठ पर आ गए और कामातुर होकर वो अपने भतीजे की पीठ को सहलाने लगी।
रघु समझ गया कि अब उसकी काकी को भी मजा आने लगा है।
अपनी चूत के मुहाने पर रघु के सख्त लण्ड को महसूस करके नीलम एकदम मदहोश हो गई।
उधर रघु अपनी जाँघों को नीलम की जाँघों के बीच में करने की कोशिश कर रहा था.. क्योंकि गुंजन ने भी चुदते वक़्त अपनी जाँघों को फैला कर उस लड़के की कमर पर लिपटाए रखा था और जब रघु का लण्ड झटका ख़ाता।
तो नीलम की चूत में सरसराहट दौड़ जाती और उसकी चूत लण्ड लेने के लिए मचलने लग जाती।
ऊपर तो रघु ने नीलम की चूची के चूचुक का चूस कर एकदम लाल कर दिया था।
नीलम के चूचक एकदम कड़क हो गए थे और नीचे रघु अपनी जाँघों को नीलम की जाँघों के बीच में सैट करने की कोशिश कर रहा था।
इसी धींगा-मस्ती में रघु का लण्ड चड्डी के ऊपर से नीलम की चूत की फांकों को फैला कर चूत के छेद पर जा लगा।
‘ओह्ह रघु..’ नीलम ने सिसयाते हुए अपनी जाँघों को ढीला छोड़ दिया।
रघु की जाँघें अब नीलम काकी की जाँघों के बीच में आ गईं।
रघु ने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपने चड्डी को नीचे सरकाना शुरू किया।
जब नीलम को इस बात का अहसास हुआ तो नीलम एकदम से हैरान रह गई और मन ही मन सोचने लगी- हे भगवान ये छोरा क्या करने जा रहा है। कहाँ से सीखा इसने ये सब.. मुझे इससे यहीं रोक देना चाहिए।
नीलम ने अपनी नशीली आँखों को बड़ी मुश्किल से खोला और रघु की तरफ देखा.. जो उसकी अब दूसरी चूची को चूसने में लगा हुआ था और फिर कहा- ये क्या कर रहा है… रघु ये.. ठीक नहीं है बेटा ओह्ह..’
रघु ने अपने दाँतों को हल्का सा नीलम के चूचुक पर गड़ा दिया.. नीलम के आँखें फिर से मस्ती और दर्द के कारण बंद हो गईं।
पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.. रघु ने अपनी चड्डी को अपनी जाँघों तक सरका दिया था और अपने लण्ड को उसकी चूत की फांकों पर रख कर पागलों की तरह धक्के लगाने लगा।
नादान रघु को चूत का छेद नहीं मिला.. पर अपने लण्ड के सुपारे को नीलम की चूत की फांकों और इधर-उधर रगड़ते हुए रघु पागल हुआ जा रहा था।
वो लगातार अपने लण्ड को उसकी चूत की फांकों पर रगड़ने लगा।