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सोनू के लण्ड का अहसास दीपा को अपनी चूत के अन्दर स्वर्ग का अहसास करा रहा था.. उसकी गाण्ड अपने आप ही ऊपर-नीचे होने लगी। जैसे सोनू को इस बात कर अहसास हुआ.. उसने धीरे-धीरे अपने आधे से ज्यादा लण्ड को दीपा की चूत से बाहर निकाल लिया। सोनू के लण्ड का सुपारा दीपा की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ बाहर आने लगा।
सोनू के लण्ड के सुपारे की रगड़ को अपनी चूत की दीवारों पर महसूस करके, दीपा के पूरे बदन में मानो जैसे बिजली कौंध गई हो, उसने अपनी बाँहों को सोनू की पीठ पर कस लिया और अपनी गाण्ड को ऊपर की ओर उठा कर सोनू के लण्ड को एक बार फिर से अपनी चूत में लेने के लिए मचल उठी।
सोनू दीपा के इस उतावले पर को देख कर मन ही मन बहुत खुश हो रहा था.. उसने भी दीपा को अपनी बाँहों में भर कर एक बार फिर से अपने लण्ड को धीरे-धीरे चूत के अन्दर सरकाना शुरू कर दिया।
सोनू के लण्ड के सुपारे की रगड़ को एक बार फिर से महसूस करके.. दीपा मस्ती में सिसक उठी।
“आह्ह.. सोनू बहुत अच्छा लग रहा है.. करो.. ना..”
दीपा पागलों की तरह सिसयाते हुए.. अपने होंठों को सोनू के कंधों और छाती पर रगड़ने लगी। जिससे सोनू भी और जोश में आ गया और अपने लण्ड को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा।
सोनू के हर धक्के के साथ दीपा के पूरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ जाती और वो मस्त हो कर अपनी दोनों जाँघों को फैला कर अपनी गाण्ड को ऊपर की ओर उठा कर सोनू के लण्ड को अपनी चूत की गहराईयों में लेने के लिए तड़फ उठती।
सोनू ने दीपा की चूत में अपना लण्ड अन्दर-बाहर करते हुए कहा- आह दीपा जी.. आपकी चूत बहुत कसी हुई है.. क्या गरम फुद्दी है आपकी.. आह्ह.. ।
दीपा सोनू की ऐसी गंदी बातें सुन कर बुरी तरह झेंप गई.. उसके दिल की धड़कनें और तेज चलने लगीं। सोनू ने दीपा के होंठों को एक बार फिर से अपने होंठों में भर लिया और उसके होंठों को ज़ोर-ज़ोर से चूसते हुए.. दीपा की चूत में अपने लण्ड को अन्दर-बाहर करते हुए धक्के लगाने लगा।
सोनू के हर धक्के के साथ दीपा और मस्त और गरम होती जा रही थी। उसकी कमर अपने आप ही लगातार हिल रही थी, जैसे सोनू के लण्ड को अपनी चूत की गहराईयों में समा लेना चाहती हो, दीपा के हाथ सोनू के पीठ को सहला रहे थे। जिससे सोनू का जोश हर पल बढ़ता जा रहा था और वो और तेज़ी से अपने लण्ड को चूत की अन्दर-बाहर करने लगा। दीपा की चूत पूरी तरह से पनिया गई थी और सोनू का लण्ड दीपा की चूत से निकल रहे काम-रस से भीग कर आसानी से चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था और जब सोनू के लण्ड का सुपारा दीपा की चूत गहराईयों में उतार कर उसकी बच्चेदानी पर लगता.. तो दीपा एकदम से मचल उठती और उसके पीठ पर अपने नाख़ून को गड़ा देती।
दीपा ने सोनू के होंठों से अपने होंठों को अलग करते हुए कहा- अह सोनू.. छोड़ो मुझे.. आह्ह.. मुझे कुछ हो रहा है.. उईइ आह्ह.. आह्ह.. स उम्मह बहुत मजाअ आ रहा हैईइ ओह.. धीरेए आह्ह.. आ ओह्ह सोनू मैं तुममस्ीई बहुत प्यार करती हूँ..
सोनू- आहाहाँ.. मेरी..ए.. रानी तुम्हें तो अब्ब्ब मैं दिन रात चोदूँगा आह.. आह्ह.. आईसे..इई चूतततत मज़ा आ गयाआ..।
दीपा अब झड़ने के बिल्कुल करीब पहुँच चुकी थी, अब वो भी पागलों की तरह सोनू के यहाँ-वहाँ अपने होंठों को रगड़ रही थी और सोनू लण्ड अब पूरी रफ़्तार से दीपा की चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था। एकाएक दीपा का पूरा बदन अकड़ने लगा.. उसने अपनी टाँगों को सोनू की कमर पर कस लिया।
“आह्ह.. सोनूऊऊ धीरे.. ओह.. मुझे मेरा पेशाब निकलने वाला है..अईइ.. ओह्ह.. मैं पागल हो जाऊँगीइइ सोनू ओह..।”
जैसे ही सोनू को पता चला कि दीपा अब झड़ने वाली है.. उसने अपने धक्कों की रफ़्तार को और बढ़ा दिया और दीपा की चूत से लावे की नदी बह निकली। उसका पूरा बदन ज़ोर-ज़ोर से काँपने लगा और कमर तेज़ी से झटके खाने लगी.. दीपा बुरी तरह झड़ी थी। अपने पूरे जीवन उसे ऐसे सुख की अनुभूति नहीं हुई थी।
उसने सोनू के सर को अपने बाँहों में कस लिया और पागलों की तरह सोनू के होंठों को चूसते हुए.. झड़ने लगी।
सोनू ने अपने धक्कों को जारी रखा और कुछ पलों बाद उसके लण्ड ने भी दीपा की चूत को अपने वीर्य से भर दिया। सोनू के गरम वीर्य की बौछार को दीपा अपनी चूत की दीवारों पर महसूस करके.. एकदम मस्त हो गई। उसे अपना पूरा बदन एकदम हल्का महसूस हो रहा था। झड़ने के बाद सोनू दीपा के ऊपर ही लुढ़क गया।
सोनू के लण्ड के सुपारे की रगड़ को अपनी चूत की दीवारों पर महसूस करके, दीपा के पूरे बदन में मानो जैसे बिजली कौंध गई हो, उसने अपनी बाँहों को सोनू की पीठ पर कस लिया और अपनी गाण्ड को ऊपर की ओर उठा कर सोनू के लण्ड को एक बार फिर से अपनी चूत में लेने के लिए मचल उठी।
सोनू दीपा के इस उतावले पर को देख कर मन ही मन बहुत खुश हो रहा था.. उसने भी दीपा को अपनी बाँहों में भर कर एक बार फिर से अपने लण्ड को धीरे-धीरे चूत के अन्दर सरकाना शुरू कर दिया।
सोनू के लण्ड के सुपारे की रगड़ को एक बार फिर से महसूस करके.. दीपा मस्ती में सिसक उठी।
“आह्ह.. सोनू बहुत अच्छा लग रहा है.. करो.. ना..”
दीपा पागलों की तरह सिसयाते हुए.. अपने होंठों को सोनू के कंधों और छाती पर रगड़ने लगी। जिससे सोनू भी और जोश में आ गया और अपने लण्ड को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा।
सोनू के हर धक्के के साथ दीपा के पूरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ जाती और वो मस्त हो कर अपनी दोनों जाँघों को फैला कर अपनी गाण्ड को ऊपर की ओर उठा कर सोनू के लण्ड को अपनी चूत की गहराईयों में लेने के लिए तड़फ उठती।
सोनू ने दीपा की चूत में अपना लण्ड अन्दर-बाहर करते हुए कहा- आह दीपा जी.. आपकी चूत बहुत कसी हुई है.. क्या गरम फुद्दी है आपकी.. आह्ह.. ।
दीपा सोनू की ऐसी गंदी बातें सुन कर बुरी तरह झेंप गई.. उसके दिल की धड़कनें और तेज चलने लगीं। सोनू ने दीपा के होंठों को एक बार फिर से अपने होंठों में भर लिया और उसके होंठों को ज़ोर-ज़ोर से चूसते हुए.. दीपा की चूत में अपने लण्ड को अन्दर-बाहर करते हुए धक्के लगाने लगा।
सोनू के हर धक्के के साथ दीपा और मस्त और गरम होती जा रही थी। उसकी कमर अपने आप ही लगातार हिल रही थी, जैसे सोनू के लण्ड को अपनी चूत की गहराईयों में समा लेना चाहती हो, दीपा के हाथ सोनू के पीठ को सहला रहे थे। जिससे सोनू का जोश हर पल बढ़ता जा रहा था और वो और तेज़ी से अपने लण्ड को चूत की अन्दर-बाहर करने लगा। दीपा की चूत पूरी तरह से पनिया गई थी और सोनू का लण्ड दीपा की चूत से निकल रहे काम-रस से भीग कर आसानी से चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था और जब सोनू के लण्ड का सुपारा दीपा की चूत गहराईयों में उतार कर उसकी बच्चेदानी पर लगता.. तो दीपा एकदम से मचल उठती और उसके पीठ पर अपने नाख़ून को गड़ा देती।
दीपा ने सोनू के होंठों से अपने होंठों को अलग करते हुए कहा- अह सोनू.. छोड़ो मुझे.. आह्ह.. मुझे कुछ हो रहा है.. उईइ आह्ह.. आह्ह.. स उम्मह बहुत मजाअ आ रहा हैईइ ओह.. धीरेए आह्ह.. आ ओह्ह सोनू मैं तुममस्ीई बहुत प्यार करती हूँ..
सोनू- आहाहाँ.. मेरी..ए.. रानी तुम्हें तो अब्ब्ब मैं दिन रात चोदूँगा आह.. आह्ह.. आईसे..इई चूतततत मज़ा आ गयाआ..।
दीपा अब झड़ने के बिल्कुल करीब पहुँच चुकी थी, अब वो भी पागलों की तरह सोनू के यहाँ-वहाँ अपने होंठों को रगड़ रही थी और सोनू लण्ड अब पूरी रफ़्तार से दीपा की चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था। एकाएक दीपा का पूरा बदन अकड़ने लगा.. उसने अपनी टाँगों को सोनू की कमर पर कस लिया।
“आह्ह.. सोनूऊऊ धीरे.. ओह.. मुझे मेरा पेशाब निकलने वाला है..अईइ.. ओह्ह.. मैं पागल हो जाऊँगीइइ सोनू ओह..।”
जैसे ही सोनू को पता चला कि दीपा अब झड़ने वाली है.. उसने अपने धक्कों की रफ़्तार को और बढ़ा दिया और दीपा की चूत से लावे की नदी बह निकली। उसका पूरा बदन ज़ोर-ज़ोर से काँपने लगा और कमर तेज़ी से झटके खाने लगी.. दीपा बुरी तरह झड़ी थी। अपने पूरे जीवन उसे ऐसे सुख की अनुभूति नहीं हुई थी।
उसने सोनू के सर को अपने बाँहों में कस लिया और पागलों की तरह सोनू के होंठों को चूसते हुए.. झड़ने लगी।
सोनू ने अपने धक्कों को जारी रखा और कुछ पलों बाद उसके लण्ड ने भी दीपा की चूत को अपने वीर्य से भर दिया। सोनू के गरम वीर्य की बौछार को दीपा अपनी चूत की दीवारों पर महसूस करके.. एकदम मस्त हो गई। उसे अपना पूरा बदन एकदम हल्का महसूस हो रहा था। झड़ने के बाद सोनू दीपा के ऊपर ही लुढ़क गया।