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Horrar भूतों का न्याय

लालो देवी की समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें। जग्गू और टेंपो ड्राइवर का खून एक बहुत बड़ी पहेली थी, जिसका हल उसकी समझ में नहीं आ रहा था। क्या रूपा ने उन दोनों की हत्या कर दी..? मगर यह कैसे हो सकता है..? और क्या उस लड़की डॉली ने उनकी हत्या की..? मगर यह भी नामुमकिन सा है। उन क्रूर माफियाओं को ये नाजुक लड़कियां कैसे मार सकती है..? और डॉली का रूपा से ये कहना, कि जो भी तुम्हारे साथ गलत करेगा उसको ईश्वर मौत की सजा देगा, क्या उसकी बातों में वाकई कोई रहस्य है..? टेंपो ड्राइवर और जग्गू की नीयत खराब थी, वह दोनों रूपा की इज्जत लूट कर उसे मार देना चाहते थे, लेकिन उन दोनों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, और रूपा का बाल भी बांका न हुआ और वो सही सलामत वापस आ गई, यह इतना रहस्यमय क्यों लग रहा है मुझे..?

मैं भी रूपा को मारना चाहती हूं, और अब तो रामाशंकर का भी आदेश है कि मैं उसे खत्म कर दूं, या उसे आत्महत्या करने पर विवश कर दूँ.. तो कहीं मेरा

भी वही हश्र ना हो, जो जग्गू और टेंपो ड्राइवर का हुआ..! इस बात का ख्याल आते ही उसके पूरे बदन में कंपकंपी आ गई। लेकिन अगर वो ऐसा नहीं करती, तो रामाशंकर उसे मरवा देगा..!

उफ्फ..! किस मुसीबत में फंस गई है वो..! इधर कुआं और उधर खाई ..! क्या करूं कुछ समझ में नहीं आ रहा है..!

फिर कुछ सोचकर उसने घंटी बजाई। एक बार फिर वही औरत आई, जिसने उसके कहने से रूपा को अंधेरी कोठरी में बंद कर दिया था।

"यस मैम..!" उस औरत ने कहा।

लालो देवी-"रूपा को अंधेरी कोठरी से निकालकर मेरे रूम में पहुंचाओ। और उसके लिए वीआईपी खान पान की व्यवस्था करो। और मैं अभी आधे घंटे में आती हूं..!"

और लालू देवी के आदेश से थोड़ी देर बाद ही रुपा उसके अपने कमरे में थी, जहां सुख सुविधा की सारी व्यवस्था थी और खानपान का विशेष इंतजाम था।

आधे घंटे बाद लालो देवी अपने रूम में पहुंची। उसने देखा कि रूपा जमीन पर किसी नौकरानी की भांति

पड़ी हुई थी। उसके समझ में नहीं आया, कि जब उसके कमरे में बेहतरीन बिस्तर बिछा है.. खाने पीने की बेहतरीन व्यवस्था है.. फिर वो किसी नौकरानी की भांति जमीन पर क्यों पड़ी है..? क्या यह लड़की जग्गू की और टेंपो ड्राइवर की हत्या कर सकती है..? नामुमकिन..! क्योंकि अगर इसने जग्गू और टेंपो ड्राइवर की हत्या की होती, तो इस समय शान से मेरे बिस्तर पर पड़ी होती..! और शायद एसी भी चला लिया होता है इसने..! लेकिन इस तरह जमीन पर तो बिल्कुल ना होती।

फिलहाल कमरे के अंदर घुसते ही सबसे पहले उसने रूपा को जमीन से उठाया और सोफे पर बैठा दिया। फिर पूछा-"जरा सोच कर मेरे को बता,, कि तू यहां से भागी क्यों और जब तू भागी तो तेरे साथ क्या हुआ..? और तू यहां वापस क्यों आई और कैसे आई..?

रूपा- मुझे वो लड़की वापस ले आई। मैं अपने होश में नहीं थी। शायद मैं आसमान में तैर रही थी। तभी इस लड़की ने मुझे पकड़ लिया और मेरे कहने पर यहां ले आई मुझे..!

लालो देवी-" लेकिन यह कैसे हो सकता है, क्योंकि तू आसमान पर नहीं बल्कि जमीन पर ही थी। यहां से भागने के बाद शायद वो जग्गू और वो टेंपो ड्राइवर तेरे साथ कुछ गलत कर रहे थे..? सोच के बता तू, क्या

उन दोनों में से किसी ने तेरे कपड़े उतारे थे..?"

रूपा-" मुझे नहीं याद है। क्योंकि मैं बहुत सुरूर में थी। और मैं हवा में तैर रही थी। बहुत रंगीन और मस्त दुनिया थी..! मैं बहुत मजे में थी। फिर अचानक सब कुछ जैसे उड़ गया। फिर मैंने अपने सामने एक लड़की को अपने सामने देखा। और उस लड़की ने ही मुझे यहां तक पहुंचाया। और मुझे कुछ भी याद नहीं है। लेकिन मैं अब यहां से कहीं नहीं जाऊंगी।

लालो देवी ने उसकी बातों को सुनकर अपना माथा पीट लिया। उसने बहुत कोशिश की, कि रूपा से कोई राज उगलवा ले, लेकिन वो कामयाब न हो पाई। और तब अचानक उसे बहुत तेज गुस्सा आया। उसने रूपा के बाल पकड़ लिये, और उन्हें खींचते हुए बोली-" मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगी। मार दूंगी मैं तुझे..! कुछ समझा तूने..!"

रूपा-" तू मुझे नहीं मार पाएगी, क्योंकि फिर तुझको भी मरना होगा। जग्गू की तरह। हा हा हा हा. ! हा हा हा हा..!!"

रूपा को पागलों की तरह यूं हंसते हुए देख लालो देवी के पसीने छूट गए और उसने उसको छोड़ते हुए कहा-" मैं इतनी आसानी से मरने वाली नहीं हूँ। मैं तेरी बोटियों को काट कर कुत्तों को खिला दूंगी..! तेरा

नाम-ओ-निशान मिटा दूंगी मैं..!"

रूपा-" हिम्मत हो तो काट दे मुझे, और खिला दे मेरी बोटियाँ अपने कुत्तों को..! लेकिन फिर तू भी काटी जाएगी। औऱ तेरी बोटियों को भी कुत्ते नोचेंगे..!"

लालो देवी उसकी धमकी सुनकर सन्न रह गई। उसने उसके जिस्म से उसकी धोती अलग कर दिया और बोली-" क्या कर लेगी तू..? उस दिन तू यहां से भाग गई थी। लेकिन आज नहीं भाग पाएगी, क्योंकि मैं यहां से हटने वाली नहीं है। और मैं तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी। बल्कि अभी फोन कर दो गुंडों को बुलवाती हूं। और अपने सामने तेरी बोटी बोटी नोचवाती हूं..!" यह कहकर उसने किसी को फोन लगाया और बोली- "निराश्रित महिला सेवा सदन से लालो देवी..!"

"हाँ बोल..!" उधर से आवाज आई।

" आजा। हुस्न की परी तुम दोनों का इंतजार कर रही है। और यहां पूरी आजादी है। पुलिस कानून किसी का डर नहीं है। निर्भय होकर अपनी प्यास बुझा। लोग अपनी रातें रंगीन बनाते हैं..! तू भी अपनी रात रंगीन बना ले। दारू पी और मीट मुर्गा खा..! और जिंदा जिस्म का गोश्त भी खा..!! और बाद में लाश को कुछ इस तरह ठिकाने लगाना है, कि फरिश्तों को भी उसका

पता ना लगे, कि उसे जमीन खा गई या आसमान..!"

" ठीक है..! तू इंतजार कर..!!" उधर से आवाज आई और फोन कट गया..!"

फोन रखने के बाद लालो देवी बोली-" अब देखती हूँ, कि कौन तेरे को कौन बचाता है..?" ये कहकर लालो देवी ने जोर का अट्टहास लगाया।

रोमू और सोमू शहर के नामी गुंडे थे। पुलिस की हिट लिस्ट में उनका नाम था। खून कत्ल और रेप यही उनका काम था। पुलिस इन पर हाथ डालने से डरती थी। क्योंकि गुंडा होने के बावजूद पुलिस उन पर गोली नहीं चला सकती थी, और न इनका एनकाउंटर कर सकती थी। क्योंकि फिर पुलिस पर ही जांच कमेटी बैठ जाती। और ऐसा इसलिए होता, क्योंकि कुछ बड़े नेताओं का पीठ पीछे उस पर हाथ था।

लेकिन आज इन दोनों को एक अच्छी दावत का ऑफर मिला था। और दावत देने वाली थी लालो देवी..! आमतौर पर शिकार करने के लिए इन्हें मोटी रकम मिलती थी। लेकिन जिस तरह कोई शेर गुपचुप अपने शिकार पर झपट्टा मार कर खा जाता है, उसी प्रकार इन्हें इंसानों पर झपट्टा मारकर उन्हें दबोचना होता था, पर फिर शिकार के साथ वही करना होता था, जो उन्हें अपने आकाओं का आदेश होता था। लेकिन आज का

शिकार बहुत मस्त था, क्योंकि यह शिकार पहले से ही पिंजरे में बंद था। और इस शिकार के साथ मनमानी करने की छूट भी उन्हें मिल चुकी थी। और यह छूट दी थी उन्हें लालो देवी ने..!

प्रिया खाना पीना खाकर सोने जा रही थी, कि अचानक भूतभाई ने उसे दर्शन दिए।

डॉली-क्या हुआ भूत भाई। इतनी रात में कैसे ..?

भूत भाई-तेरी मम्मी सो गई है। तू जल्दी से अपनी स्कूटी निकाल और मेरे साथ चल। दो गुंडों को खत्म करना है। बहुत भयानक है ये । क्योंकि देश समाज के दुश्मन है ये। और पुलिस के लिए भी सिरदर्द हैं। क्योंकि कुछ नेताओं के ये दाएं और बाएं हाथ है..! इस समय दोनों रास्ते में है, और रूपा के साथ कुछ गलत करने के इरादे से निराश्रित महिला सेवा सदन को जा रहे हैं। सिर्फ आधे घंटे में उनका काम तमाम कर वापस आ जाना और चुपचाप अपने बेड पर सो जाना। किसी को कुछ खबर नहीं लगेगी ।

डॉली-"ओके भूत भाई..!"

डॉली ने फौरन अपनी स्कूटी निकाली। भूत भाई डॉली के अंदर प्रवेश कर गया और उसे रास्ता बताने लगा । और 10 मिनट में ही उसका सामना रोमू और सोमू से

हो गया।

भूत भाई-"सुन, इनसे कोई बहस बाजी मत कर। रात का सन्नाटा है। दूर-दूर तक कोई नहीं है यहां। दोनों के पैर खींच कर गिरा दे इन्हें। फिर इनके जबड़े प्रहार कर जिससे ये दोनों यहीं खत्म हो जाए। और अपने घर वापस चल।

डॉली ने यही किया। गाड़ी रोकी और जब तक ये दोनों कुछ समझते, डॉली ने पीछे से इनकी दोनों टांगे खींच दी। दोनों मुंह के बल गिरे, और जब तक वो सम्हलते, डॉली ने उन दोनों का थोबड़ा तोड़ दिया। और दोनों की छुट्टी कर दी। फिर वापस अपने घर आ कर चुपचाप अपने बेड पर लेट गई। भूत भाई भी उसके जिस्म से निकलकर अंतरिक्ष में विलीन हो गए। मम्मी सोती रही और किसी को कुछ खबर ना लगी..! उधर काफी देर तक लालो देवी उन गुंडों के आने का इंतजार करती रही..! तभी उसको खबर मिली, उन दोनों नामी गुंडों को किसी ने बड़ी बेरहमी से मार दिया। इस खबर को सुनते ही उसके होश उड़ गए, और वो किसी सूखे पत्ते की भांति कांपने लगी..!

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रोमू और सोमू के मारे जाने की खबर सुनकर लालो देवी को चक्कर आ गया था। उसको समझ में नहीं आ रहा था कि ये सब कैसे हो गया और किसने रोमू और सोमू को मार दिया..!

इसके पहले रूपा की इज्जत पर जग्गू और दीनू ने हाथ डाला, और वो दोनों भी मारे गए..! लेकिन क्या रूपा यह सब कुछ कर रही है..? लेकिन ये कैसे हो सकता है.? रूपा के पास तो इस समय कोई फोन भी नहीं है.! वो लगातार मेरे सामने है..! उसे रोमू और सोमू के बारे में क्या पता..? फिर भी रोमू और सोमू मारे गए.!

जब रूपा टार्चर रूम से भागी थी, तब भी उसके पास कुछ नहीं था। और जग्गू के बारे में भी इसके पास कोई जानकारी न थी। क्योंकि अगर इसे मालूम होता कि टॉर्चर रूम से बाहर निकलते ही जग्गू इसे किडनैप कर लेगा और इसके साथ रेप कर इसकी जान ले लेगा, तो ये कभी न भागती..!

लेकिन अचानक किसने इसकी मदद की..? क्या उस लड़की ने जो इसे अपनी स्कूटी पर बैठा कर इसे यहां लायी..? क्या उस मासूम सी लड़की ने उन दोनों बदमाशों को मार कर इस लड़की को बचाया और इसे यहां तक ले आई..? अगर इस असंभव बात को मान भी लिया जाए, तो प्रश्न ये उठता है कि आज रोमू और सोमू को किसने मारा..?

लगता है जरूर कोई तीसरी शक्ति रूपा की मदद कर रही है..! और अगर यह सच है, तब तो मुझ पर भी खतरा है..! क्योंकि मैंने भी तो रूपा के साथ बहुत ही दुर्व्यवहार किया है..! अगर वो तीसरी शक्ति मेरे पीछे पड़ गई तब क्या होगा..? जिसने उन बड़े-बड़े गुंडों को मार दिया, उसके आगे मैं क्या कर सकती हूं..! और मैं कैसे उस शक्ति से मुकाबला करूंगी..? और अगर रूपा को मैंने जिंदा छोड़ दिया, तो रामाशंकर मेरेको मार डालेगा..! इधर भी मौत और उधर भी मौत..! क्या करूं कुछ समझ में नहीं आ रहा..!

किसी भी निष्कर्ष पर लालो देवी नहीं पहुंच पा रही थी, कि तभी उसके फोन की घंटी बज उठी..!

लालो देवी-"हेलो सर..!"

रमाशंकर-" हेलो लालो..! रूपा ने सुसाइड किया या

नहीं..?"

लालो देवी-" सर अभी तो नहीं.."

रमाशंकर-" तो सीधे-सीधे मार दे उसे। क्योंकि मुझे कल सुबह तक हर हाल में उसकी मौत की खबर मिलनी चाहिए..!"

लालो देवी-"जी सर.."

और फोन कट गया।

लालो देवी और भी परेशान हो गई..! क्या करें और क्या ना करें..! अब तक न जाने कितनी लड़कियों को वो टॉर्चर कर चुकी थी। उन्हें बिगड़ैल रईसजादों, बड़े बड़े अधिकारियों और नेताओं की सुपुर्दगी में दे चुकी थी..उन्हें सुसाइड करने पर विवश कर चुकी थी..! लेकिन इस औरत को अब छूने भी उसे डर लगने लगा था। उसने एक बार रूपा को गौर से देखा। बिना साड़ी के बेहद खूबसूरत लग रही थी वो..! और इस वक्त कोई भी उसके खूबसूरत बदन को देख कर अपना होशोहवाश खो सकता था। लेकिन लालो उसे इस स्थिति में देखकर काफी डरी हुई थी..! क्योंकि उसके बदन से साड़ी उसी ने उतारा था .. जबरदस्ती..!

फिर उसने जल्दी से उसके बदन पर एक चद्दर डाल दिया। और पूरी रात नींद में भयानक भयानक सपने

देखती रही..!

* * * * *

सुबह-सुबह डॉली ने जब रोमू और सोमू की हत्या की खबर अखबार में पढ़ी, तो खिलखिला कर हंस पड़ी। अखबार में लिखा था-"बेरहमी से शहर के नामी गुंडे रोमू और सोमू को किसी ने मार डाला। हत्यारे का कोई सुराग नहीं..! बड़े बड़े उद्योगपति, नेता और माफिया दहशत में..! क्योंकि इधर जिनकी भी हत्याएं हुई है, वह सभी गुंडे बदमाश या रेपिस्ट रहे हैं..! अपराधी को पकड़ने का पुलिस पर भारी दबाव। लेकिन गुप्त सूत्रों से मालूम हुआ है, कि जिन माफियाओं अपराधियों और गुंडों को पुलिस भी नहीं पकड़ सकी, और कानून अब तक सजा नहीं दे सका, उन्ही गुंडों, माफियाओं और दबंगो को कोई मौत की सजा दे रहा है..! और इस बात से अंदर ही अंदर पुलिस महकमा भी खुश है..!

क्योंकि एक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये खूंखार हत्यारा अप्रत्यक्ष रूप से पुलिस और समाज का हितैषी है। क्योंकि जब से इन हत्याओं का सिलसिला शुरू हुआ है, तब से शहर में रेप, लूटपाट और मर्डर की घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से कमी आई है..! भोले भाले लोगों की हत्या करने का ग्राफ नीचे गिरा है, और दबंगों और माफियाओं में दहशत का माहौल है।

अभी डॉली अखबार की खबर पढ़ ही रही थी, कि भूत

भाई के दर्शन हो गए। भूत भाई ने डॉली से कहा-"इधर कई दिनों से तू मॉर्निंग वॉक पर नहीं गई। इसलिए चल, आज मार्निंग वाक पर चलते हैं..! लेकिन आज मॉर्निंग वाक स्कूटी से होनी चाहिए..! अपनी मम्मी से बोल दे और मेरे साथ चल।"

डॉली-" लेकिन आज कहां चलना है..?" डॉली ने कहा।

भूत भाई-"" रूपा की जान खतरे में है उसको बचाने।"

डॉली-"मतलब निराश्रित महिला सेवा सदन चलना है..?"

भूत भाई-"हाँ, वहीं चलना है..!"

डॉली-"ओके।"

डॉली ने मां से इजाजत ली! और स्कूटी निकालकर निराश्रित महिला सेवा सदन को चल पड़ी।

उधर लालो देवी कि जब नींद खुली, तो सुबह हो चुकी थी। तभी उसे याद आया कि रात में रमाशंकर ने उससे फोन पर कहा था कि सुबह तक रूपा की मौत की खबर उसे मिल जानी चाहिए..! मगर सुबह तो हो चुकी है..!

अब क्या करे और कैसे इस मुसीबत से छुटकारा पाए, यही सोच रही थी वो, कि तभी उसके ऑफिस की घंटी बजने लगी।

उसने सोचा, इतनी सुबह सुबह कौन आ गया..? कहीं रमाशंकर न हो..?

वह भागती हुई ऑफिस आई। तो देखा, डॉली उसके सामने थी।

डॉली-" नमस्ते मैडम। आज सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकली थी, औऱ इधर से ही गुजर रही थी, तो सोचा आप से मिलती चलूँ और रूपा का भी हालचाल ले लूँ..! वैसे अब कैसी तबीयत है उसकी..?"

लालो देवी-"वो..वो..ठीक है..!"

डॉली-" क्या आप बुलाएंगी उसे..? उससे बोलिए, कि डॉली आई है उससे मिलने..!"

लालो देवी-"मगर.. वो..तो अभी.. सो.. रही.. है..! और.. उसे.. देर ..से उठने.. की ..आदत ..है।"

डॉली-" मगर आप इतनी डरी डरी से क्यों लग रही है..? और आपकी आवाज को क्या हुआ..? ये इस तरह हकला हकला कर क्यों बोल रही है..? कोई प्रॉब्लम हो तो मुझे बताइए। हो सकता है मैं आपकी परेशानी दूर

कर सकूं..!"

लालोदेवी-" दरअसल उसकी जान को खतरा है। उसका पति सभासद रमाशंकर उसको मार देना चाहता है। पहले भी उसको मारने की कोशिश की थी उसने। इसीलिए परेशान हूं..!"

डॉली-" रामाशंकर बाहुबली नेता है। और वो जो ठान लेता हैं उसे पूरा ज़रूर करता है। लेकिन यह मसला तो वाकई बहुत गम्भीर है।"

लालोदेवी-"हाँ, और यही कारण है मेरी परेशानी का।"

डॉली- "आप एक काम करिए मैडम। आप रूपा को कहीं छुपा दीजिए, और नींद में ही उसकी एक ऐसी फोटो भेज दीजिए रमाशंकर को , जिसे देखकर उसे ऐसा लगे जैसे आपने उसको मार दिया। और पुलिस के पास रूपा के भाग की एक रिपोर्ट दिखा दीजिए। वैसे भी एक दिन पहले रूपा आपके यहाँ से भाग गई थी..! और वह तो इत्तफाक से मैंने उसे देख लिया और फिर उसके कहने पर उसे आपके यहां पहुंचा दिया, वरना न जाने कहां होती इस समय वो..?"

लालोदेवी-"लेकिन यहां से उसके भाग जाने की रिपोर्ट तो मैंने परसों लिखा भी दी थी..!"

डॉली-" तो क्या आप ने पुलिस को बताया कि डॉली मिल गई है..?"

लालो देवी-"सॉरी। अभी नहीं बताया..!"

डॉली-" अच्छा हुआ जो आपने नहीं बताया। और अब बताइएगा भी नहीं। और अगर मेरी सलाह मानिए, तो फिलहाल कुछ दिन के लिए आप उसको अपने यहां छुपा दीजिए। अब मेरे को जो समझ में आया, वो तो मैंने आपको बता दिया। क्योंकि अगर आपने ऐसा किया तो फिलहाल रामाशंकर की तरफ से खतरा टल जाएगा।

और अगर कभी भूले बिसरे ये राज खुल भी जाता है, तो आप पुलिस को बता सकती हैं कि आपने रामाशंकर से रूपा की जान बचाने के लिए ऐसा किया था, क्योंकि उसने रूपा को मार देने की धमकी दी थी। और रूपा ने पुलिस को दिए गए अपने बयान में भी यह बात सही है कि रमाशंकर उसकी जान लेना चाहता है। आप इत्मीनान से मेरी बात पर विचार कीजिएगा। और मैं अब चलती हूं। और हां, रूपा का पूरा ध्यान रखिएगा। क्योंकि मैंने पहले भी आपसे कहा था, उसके बारे में जो भी बुरा सोचेगा, वो इस दुनिया में जिंदा नहीं रहेगा, क्योंकि मजबूर औरतों की ईश्वर हमेशा सहायता करता है।"

लालो देवी-" बात तो तेरी सही है। मैं इस पर विचार करूंगी।"

"ओके मैम।" डॉली ने कहा और वापस अपने घर आ गई।

घर आने पर भूत भाई ने उससे कहा-"अब तू चिंता ना कर। लालो देवी रूपा को नहीं मारेगी। और उसे सताएगी भी नहीं, क्योंकि इस समय वो काफी डरी हुई है। और आगे जो होगा, देखा जाएगा। फिलहाल मैं भी चलता हूं। बॉय।"

डॉली ने भी बाय कहा और स्कूल जाने की तैयारी में लग गई..!

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रूपा अभी भी नींद में थी। लालो देवी ने नींद में ही उसे कुछ सुंघाया और उसके पेट में चाकू घोंप दिया। उसकी कमर से खून का फव्वारा निकला, जो कमरे के फर्श तक बिखर गया। फिर लालो ने उसकी एक फोटो खींची । और रमाशंकर को व्हाट्सएप कर दी। और उसे एक गुप्त नंबर पर फोन किया, जो रामाशंकर के नाम पर नहीं था।

मैंने रूपा को मार दिया है। फोटो भेज रही हूं। लेकिन ये नहीं समझ में आ रहा है कि उसकी लाश को कैसे ठिकाने लगाऊं..! यह काम प्लीज़ तू कर दे..!

रमाशंकर- बहुत बढ़िया काम किया। जहां तू रहती है वहां पीछे जमीन की कोई कमी नहीं है। वही गड्ढा खोदकर लाश को दफन कर दे। किसी को तुझ पर शक भी नहीं होगा। और इस काम को अंजाम देने के लिए तुझे ₹100000 और मिल जाएंगे।

लालो देवी-"थैंक्स सर।"

इस खबर को सुनते ही रमाशंकर ने मोनिका को अपनी बहू पास में ले लिया और बोला-" हमारे रास्ते का कांटा हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो गया। अब तू मुझसे शादी कर सकती है।

मोनिका-" मगर कैसे ..? क्या रूपा मर गई..?"

रमाशंकर-"हाँ, यह देखो उसकी लाश की फ़ोटो। और अब तक तो शायद उसको दफन भी कर दिया गया होगा..!"

रूपा की लाश की फोटो को देखते ही मोनिका का दिमाग खराब हो गया। उसने डॉली को पहले ही फोन कर दिया था, कि लालोदेवी से उसकी जान को खतरा है ..। फिर भी लालो देवी ने उसे मार दिया। और डॉली कुछ न कर सकी।

लेकिन अपने इस मनोभावों को छुपा कर उसने रमाशंकर से कहा-" फिर कब कर रहा है शादी..?"

रमाशंकर-" जब तक रूपा की लाश नही मिल जाती, तब तक कानून इसे मौत नहीं मानेगी। इसलिये कोर्ट में तो शादी हम अभी नहीं कर सकते, लेकिन मंदिर मे तो शादी कर सकते हैं..!"

मोनिका-" ठीक है हम मंदिर में ही शादी कर लेते हैं। "

और उसी दिन मोनिका ने रमाशंकर से गुपचुप शादी कर ली और शादी की वीडियो फिल्म भी बना ली।

लेकिन रूपा की मौत से मोनिका इतने गुस्से में थी, कि उसने डॉली को अपनी शादी में में नहीं बुलाया।

लेकिन शादी हो जाने के बाद उसने सोचा, कि क्या आज की रात इस खूनी रामाशंकर के साथ वो अपनी सुहागरात मना पाएगी..? नहीं.. बिल्कुल नहीं..। उसे तो आज की रात रमाशंकर को ख़त्म करना है..! लेकिन क्या वो रामाशंकर का खून कर पाएगी..? और अगर उसने रामाशंकर को मार भी दिया, तब आगे क्या होगा. ! क्या वो खुद को पुलिस से बचा पाएगी..? जमीन जायदाद मिलने की बात तो बहुत दूर की है, उसे खुद कीजान बचाना भी मुश्किल हो जाएगा ..! फिर उसे डॉली की याद आ गई। लेकिन इस डॉली ने तो रूपा की जान बचाने की बात की थी। लेकिन नहीं बचा पाई..! तो क्या रमाशंकर जैसे दबंग नेता को ये मार पाएगी..?

लेकिन ताकत तो उसके अंदर बहुत है। और उसकी ताकत को वो देख भी चुकी है। लेकिन सवाल यह है, कि रूपा को वो क्यों नहीं बचा पाई.?

लेकिन मेरे ख्याल से इस बात के लिए डॉली से नाराज होना ठीक नहीं है। हो सकता है उसने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की हो, और किसीकारणवश उसकी जान ना बचा पाई हो..! लगता है उसने डॉली को अपनी शादी में न बुला कर बहुत बड़ी गलती कर दी। लेकिन जो हो गया सो हो गया। अब से भी अपनी शादी की खबर उसे दे देनी चाहिए और उसे याद दिलाना चाहिए उस प्रॉमिस की, जो उसने उससे किया था। अगर वो अपना प्रॉमिस नहीं भी निभाती है, तब भी कहने में नुकसान क्या है..?

फिर काफी सोच विचार करने के बाद उसने डॉली को फोन किया।

मोनिका-" हेलो डॉली..? कैसी हो..?"

डॉली- "मैं तो फर्स्ट क्लास हूं तू कैसी है..?"

मोनिका-" कुछ खास अच्छी नहीं हूं क्योंकि आज ही मुझे पता लगा है कि रूपा को लालो देवी ने मार दिया है।"

डॉली-"मगर यह कैसे हो सकता है..? यह नामुमकिन है..?"

मोनिका-" जिसे तू नामुमकिन कह रही है, वो हो चुका है। और सच यही है, कि रूपा अब इस दुनिया में नहीं

है। और इसीलिए आज रात मैंने रमाशंकर शादी भी कर ली है। "

डॉली-"कांग्रेचुलेशन..! लेकिन इस बात के लिए, कि अब तुझे रमाशंकर की सारी जायदाद मिल जाएगी।"

मोनिका-"हां , मगर यह जायदाद तो तब मिलेगी, जब रमाशंकर मरेगा..!

डॉली-"अरे तो इसमें क्या मुश्किल है..! तू बोल तो अभी उसे मार दूं..??

मोनिका-"अगर मार सकती है, तो मार दे।"

डॉली- "ठीक है मैं अभी आती हूं।"

मोनिका-" ओके मैं इंतजार कर रही हूं।"

डॉली ने फोन रख कर भूत भाई को याद किया, और भूत भाई तुरंत उसके सामने हाजिर हो गए।

भूत भाई-" बोल कैसे याद किया इस समय..?"

डॉली-" आज सभासद रमाशंकर का काम तमाम करना है, क्योंकि उसे खत्म करने का मैंने मोनिका से वादा किया था। इस समय रात के 12:00 बजे हैं। मम्मी सो

चुकी है। इसलिए तुरंत चल। हम फटाफट अपना काम निपटा कर वापस आ जाएंगे।"

भूत भाई-"ओके। तू फटाफट तैयार हो जा और अपनी गाड़ी निकाल।"

डॉली ने फटाफट तैयार होकर अपनी गाड़ी निकाली। भूत भाई ने उसके जिस्म ने प्रवेश किया और गाड़ी चल पड़ी। और अपनी पूरी रफ्तार से आधे घंटे में वो रामाशंकर के निवास स्थान पर पहुंच गई।

रामाशंकर ने अपने सुहाग की सेज को बहुत ही खूबसूरत तरीके से सजाया था।

डॉली जैसे ही वहां पहुंची, उसने मोनिका से कहा-" तू थोड़ी देर के लिए बाथरूम में चली जा। और तब तक मैं इसका काम तमाम करती हूँ। और सुन, तूने जिस मोबाइलसे मेरे को फोन किया था, अगर वह मोबाइल तेरे पास हो तो मेरे को दे दे। वरना उस मोबाइल के जरिए तू भी फंस सकती है और मैं भी..!"

तब मोनिका ने अपना मोबाइल डॉली को दे दिया।

डॉली ने कहा,"थैंक्स। अब तू मुझसे मिलने की कोशिश ना करना। लेकिन अगर कहीं तू फंसेगी तो मैं खुद तुझ से आकर मिल लूंगी, लेकिन मेरे बारे में किसी से कोई बात नहीं करना। क्योंकि रमाशंकर की हत्या से सबसे ज्यादा फायदा तुझको ही होने वाला है। और इसीलिए

पुलिस सबसे ज्यादा तुझ पर ही शक करेगी। इसलिए तूने अपनी जबान हमेशा बंद रखनी है, और सिर्फ एक ही बात ही बार बार कहनी है, कि वह तुझसे वो प्यार करता था और इसलिए तूने उससे शादी की। बाकी इस हत्या के बारे में तुझको कोई जानकारी नहीं है। और मैं चुकी मैं अभी बाहर से तेरे बाथरूमका दरवाजा लॉक कर दूंगी, इसलिए इस हत्या में तेरे फ़ंसने का कोई सवाल ही नहीं उठता।"

और फिर मोनिका के बाथरूम में जाते ही डॉली ने बाथरूम को बाहर से लॉक कर दिया, और रामाशंकर के पास आ गई।

रमाशंकर ने अचानक अपने सामने एक खूबसूरत लड़की को देखा तो आश्चर्य से पूछा-" तू कौन है..? और यहां कैसे आ गई ..? और किसका काम तमाम करने के बात बोल रही है..?"

डॉली-" डॉली है मेरा नाम। और अपने पैर से यहां तक आई हूं और तेरा काम तमाम करने के बात बोल रही हूँ. !"

रमाशंकर-" हा हा हा हा हा हा हा हा..! सत्रह साल की एक खूबसूरत नाबालिक छोरी मेरा काम तमाम करेगी..! हा हा हा हा हा हा हा हा..!

आजा..! और कर दे मेरा काम तमाम..! हा हा हा हा हा हा हा हा..! लगता है आज डबल सुहागरात मनाने को मिलेगी. ! हा हा हा हा हा हा हा हा..!"

डॉली-" हंस ले हंस ले। अपनी मौत पर हंस ले। हो सकता है तेरी हंसती हुई मौत पर यमराज को थोड़ी दया आ जाए और तुझे स्वर्ग का कोई कोना मिल जाए..!" यह कहते हुए डॉली ने एक झटके में रस्सी का फंदा उसके गले में फंसा दिया और उसे खींचने लगी..!

रमाशंकर जो अभी तक डॉली को देख कर बेतहाशा हंस रहा था, अचानक तड़पने लगा और बोला-"ये क्या कर रही है..? और क्यों मार रही है तू मुझे..?"

डॉली-" इसलिए कि तू गुनहगार है..पापी है.. हत्यारा है.. और इस समाज में रहने वालों को तुझ जैसे मक्कार और पापी इंसान से कोई वास्ता नहीं है..!"

और इससे पहले कि वो अपने आप को डॉली के इस भयानक फंदे से खुद को बचा पाता, फंदा इतना टाइट हो गया, कि उसके गर्दन की हड्डी टूट गई, और उसकी सांसें थम गई..!
 
रमाशंकर का काम तमाम कर अपने घर आते समय रास्ते में पड़ने वाले एक पुल से मोनिका और रमाशंकर के मोबाइल को उसने नदी में फेंक दिया, और आराम

से अपने घर आ गई। फिर उसने भूत भाई का शुक्रिया अदा किया। और शांति से अपने नरम नरम बिस्तर पर सो गई। उस दिन उसे नींद बहुत ही अच्छी आई, क्योंकि आज उसने एक ऐसे दबंग नेता की छुट्टी की थी, जो पुलिस और कानून को अपनी जेब में रखता था, और जनता को अपना गुलाम समझता था..!

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नेक्स्ट डे अखबार की सुर्खी थी-"दबंग नेता सभासद रमाशंकर की हत्या..!"

एक बार फिर पुलिस को हत्यारे का कोई सुराग नहीं मिला। सबसे विचित्र बात यह है, कि दबंग नेता सभासद रमाशंकर ने आज ही मोनिका नाम की एक लड़की से गुपचुप शादी कर ली थी। क्योंकि इस शादी को वो राज रखना चाहता था, इसलिए इस अवसर पर उसके बंगले पर कोई नहीं था और उसने अपने सभी नौकरों को छुट्टी दे दी थी। छानबीन में मोनिका ने पुलिस को बताया उसने रमाशंकर से इसलिए शादी की, क्योंकि वह मुझे प्यार करता था और उसने मुझसे कहा था कि उसकी रूपा से शादी फर्जी थी क्योंकि शादी के दिन उसने उसकी मांग में सिंदूर नहीं बल्कि लाल रंग भरा था।

रमाशंकर की इस हत्या से उसकी करोड़ों की संपत्ति का लाभ मोनिका को मिल सकता है, इसलिए इस हत्या के पीछे सिर्फ मोनिका पर शक जाता है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि जिस वक्त रमाशंकर को मारा गया, उस समय मोनिका बाथरूम में बन्द थी, और

बाथरूम का दरवाजा बाहर से लॉक था।

और जब पुलिस वहां पहुंची तो उसने ही मोनिका को बाथरूम से मुक्त किया। और दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस को खबर भी मोनिका ने ही की।

पुलिस का अनुमान है, कि हत्यारा शायद पहले से ही रामाशंकर के बारे में सब कुछ जानता था। क्योंकि मोनिका जब बाथरूम में गई, उस वक्त रमाशंकर और मोनिका के अलावा वहां और कोई ना था। और मोनिका ने ही अपने मोबाइल से पुलिस को इनफॉर्म किया, जो इत्तफाक से बाथरूम में भी उसके पास था। और जब पुलिस वहां पहुंची तो रामाशंकर का खून हो चुका था, और मोनिका उस समय भी बाथरूम में बंद थी।

हत्यारा कब आया कैसे आया, इसका कोई सुराग नहीं मिला, और जासूसी कुत्ता बेड के इर्द-गिर्द ही उछल उछल कर कूद रहा है, जिसका अर्थ एक्सपर्ट भी नहीं समझ पा रहे हैं..!

रामाशंकर के गले में रस्सी का फंदा कस कर उसकी जान ली गई है।

उसके बेड पर तकिए के नीचे एक कागज भी मिला है, जिस पर लिखा है-

बास्टर्ड, यू शुड डाइ.! क्योंकि तेरे मरने से बहुत से लोगों को एक नया जीवन मिलेगा..! कुछ बड़े लोगों को,

दबंगो को और माफियाओं को दुख भी होगा, लेकिन इसके विपरीत बहुत से गरीबों के घर में एक बार फिर से दीपक ज़लेंगे और उनके चेहरों पर खुशियां होंगी..!

अखबार में छपी इस खबर को पढ़कर डॉली को बहुत खुशी मिली। क्योंकि उसे पूरी उम्मीद थी, कि अब क्राइम का ग्राफ और भी नीचे आएगा, और जितने भी दबंग और माफिया है, इस खबर को सुनकर सब अपने बिलों में घुस जाएंगे..!

* * * * *

लालू देवी ने जब सुबह सुबह सभासद रमाशंकर के मौत की खबर सुनी, तो वह भी दंग रह गई। लेकिन उसकी सबसे बड़ी परेशानी यह थी, कि रमाशंकर ने एक दिन पहले ही रूपा की जान लेने की बात की थी, और मुझसे कहा था कि अगर मैंने उसको नहीं मारा तो वह मेरे को मार देगा। लेकिन उसको भी किसी ने मार दिया..!

मतलब अब तक रूपा की जिसने भी जान लेने की कोशिश की, वो सभी मारे गए. !

जग्गू..दीपू.. मोनू..सोनू..और अब सभासद रमाशंकर भी..!0 समझ में नहीं आ रहा है, कि आखिर ये हो क्या रहा है..?

और अब सबसे ज्यादा डर इस बात का है, रूपा की जान के दुश्मनों की विशिष्ट लिस्ट में सिर्फ मेरा नाम बचा है..!

इसलिए अब आगे क्या होगा, कुछ समझ में नहीं आ रहा है क्योंकि अब तो सभासद रमाशंकर भी नहीं रहा, जिसका काफी सपोर्ट था उसे..!

और सबसे बड़ी पहेली यह है कि बार-बार होने वाली इन हत्याओं से रूपा का लिंक कैसे है, इस लिंक का स्त्रोत क्या है, जबकि यहां उसके पास कोई मोबाइल नहीं है।

लेकिन एक बात अच्छी हुई। जब रमाशंकर मर गया है, तो अब मुझे रूपा को छुपाने की क्या जरूरत है..? अगर मैं उसे जिंदा ही रहने दूं तो क्या हर्ज है..!

यह बात दिमाग में आते ही उसने अपने ऑफिस की घंटी बजाई और सेविका को आदेश दिया, कि रूपा को लेकर अभी और इसी वक्त यहां आए।

और थोड़ी देर बाद सेविका रूपा को लेकर जब ऑफिस में आई, तो आज पहली बार लालो देवी ने रूपा को कुर्सी पर बैठने को कहा, और उससे पूछा-" क्या तुझे मालूम है कि रामाशंकर का किसी ने कत्ल कर दिया. !"

" मुझे नहीं मालूम लेकिन अगर ये सच है, तो बहुत ही अच्छा हुआ । क्योंकि मैंने तो पहले ही पुलिस में उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। लेकिन पुलिस ने रामाशंकर के खिलाफ तो कुछ किया नही, उल्टे मेरे को आप के हवाले कर दिया। ..! लेकिन ये बहुत ही अच्छा हुआ, जो वो मर गया। अब मैं खुलकर जी सकूंगी और अपनी मर्जी से कहीं भी रह सकूंगी। और अब मेरी जान को भी कोई खतरा नहीं है, क्योंकि रमाशंकर ही मुझ को मारना चाहता था, जिसकी मैंने एफ आई आर दर्ज कराई। लेकिन अगर वो मारा जा चुका है, तो अब मैं भी खुली हवा में जी सकुंगी, और इस आश्रम से भी मुक्ति भी पा सकुंगी, क्योंकि यहां भी मेरा दम घुटता है..!

लालो देवी ने कहा-" मैं आज ही ऊपर के अधिकारियों से बात करती हूं, तेरी मुक्ति के लिए। क्योंकि मैं भी अब तुझको यहां नहीं रखना चाहती, और मैं चाहती हूं कि तू खुली हवा में जिये, अपनी तरह से. आजादी के साथ.. और पूरे सम्मान और इज्जत के साथ. !"

रूपा बोली-" आपकी मेहरबानी होगी..!"

लालोदेवी ने सेविका से कहा-" इसे मेरे कमरे में ले जाओ। और इसके लिए नए कपड़ों और खाने पीने का उचित प्रबंध करो।"

जी मैम। सेविका ने कहा और रूपा के साथ लालो देवी के रूम में गई, और उसे इज्जत से बैठा कर उसके लिए खाने-पीने और नये कपडों का प्रबंध करने मे जुट गई।

लालो देवी के अंदर आए अचानक इस परिवर्तन का यह अर्थ बिल्कुल नहीं था, कि वो सुधर गई थी, बल्कि सच यह था, कि इस समय रूपा से वो बहुत भयभीत थी, क्योंकि उसको प्रताड़ित करने वाले हर शख्स की अब तक मौत हो चुकी थी और आगे ना जाने क्या होने वाला था..!

और इसलिए इस समय वो जो कुछ भी कर रही थी, सिर्फ अपनी सुरक्षा के लिए कर रही थी। और रूपा को जल्दी से जल्दी आजाद कर उससे मुक्ति पाना चाहती थी। क्योंकि जब से वो आई थी, कुछ ना कुछ अनहोनी घटनाएं लगातार हो रही थी, और ये सभी घटनाएं कहीं ना कहीं किसी न किसी रूप में रूपा से जुड़ी थी..!

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विधायक रमाशंकर के मर्डर के बाद से लालो देवी बहुत ज्यादा डरी हुई थी। रूपा को मुक्त करना अब बहुत ही ज़रूरी था। मगर कैसे..? इस बात से वह बहुत परेशान थी।

पुलिस कमिश्नर ने रूपा को उसकी सुरक्षा के लिए उसके आश्रम में भेजा था। लेकिन उसके आश्रम में रूपा के जैसी निराश्रित लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा का सिर्फ नाटक होता था। क्योकि सच्चाई यह थी, कि इस संस्था की आड़ में वो मासूम लड़कियों औरतों से धंधा करवाती थी और अपने बैंक बैलेंस में इजाफा करती थी।

और रूपा को भी वो अपना मोहरा बनाना चाहती थी, लेकिन रूपा के मामले में हर बार उसे शिकस्त मिली थी। और अब स्थिति यह थी कि उसकी अपनी जान के लाले पड़े थे और उसे चारों तरफ अपनी मौत नजर आने लगी थी।

रूपा को कहां भेजे, इसी उधेड़बुन में वह लगी थी, कि

तभी उसके फोन की घंटी बजी..!

"हेलो..! आप कौन..?"

"मैं डॉली बोल रही हूं। आपने आज का पेपर पढ़ा ना..?"

" हां पढ़ा है क्या कोई खास खबर है..?"

"कमाल करती है मैडम आप भी..? इतनी बड़ी खबर है और आप पूछ रही है कि क्या कोई खास खबर है..?"

"हां, ऐसी क्या खास खबर है आज के अखबार में..? मुझे तो कुछ खास नज़र नहीं आया..?" लालो देवी जानबूझकर अनजान बनते हुए बोली।

"सभासद रामाशंकर का खून हो गया। इससे बड़ी खबर और भला क्या हो सकती है..?"

" मगर ये खून खराबा.. चोरी ..हत्या.. बलात्कार.. आदि की खबरें तो रोज ही छपती रहती हैं..! इसमें नया क्या है..?"

" अपने क्षेत्र के सभासद का मारा जाना यह कोई छोटी खबर नहीं, बल्कि बहुत बड़ी खबर है..!"

" जो गलत काम करते हैं उनकी मौत ऐसे ही होती है..!" लालो देवी ने कहा।

" हां यह तो सही कहा आपने। क्योकि कुछ दिन पहले यही बात मैंने भी आपसे कही थी, कि गलत करने वालों को तो मरना ही है। और विशेष रूप से रूपा के मामले में..! क्योंकि आप खुद देखिए कि रूपा के साथ जिसने जिसने भी गलत किया वो जिंदा नहीं बचा..! दीनू.. जग्गू.. सोनू,..मोनू..और अब सभासद रमाशंकर...!"

" मगर कौन हो सकता है यह..? क्योंकि यह एक ऐसी पहेली है जिसका हल पुलिस भी अब तक नहीं निकाल पाई है..!" लालो देवी ने कहा।

" मालूम नहीं कौन है..! पर जो कोई भी है, बहुत अच्छा काम कर रहा है! क्योंकि गलत लोगों को मौत की सजा तो मिलनी ही चाहिए..!"

" लेकिन इस तरह कानून को कोई अपने हाथ में कैसे ले सकता है..?" लालो घबरा कर बोली..!

" लालो देवी। भगवान भी तो लोगों को ऐसे ही सजा देता है। लेकिन क्या किसी ने यह कहा है उसे कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए..?"

" भगवान तो सबसे बड़ा न्याय अधिकारी है..! उसे कोई क्यों कहेगा..?"

"तो आप यही मान लीजिए, कि यह सब भगवान ही कर रहा है, किसी को माध्यम बना कर..! क्योंकि इधर जितनी भी हत्या हुई है यह सब गलत लोगों को हुई है।"

"हाँ, यह बात सही है।" लालो देवी ने कहा और फोन काट दिया।

डॉली ने खुद से कहा-" जानबूझकर फोन काट दिया। क्योंकि सच्चाई से डर गई है और अब उसे अपनी भो मौत दिखने लगी है..!" फिर उसने सोचा कि इस समय सबसे पहला काम रूपा को सुरक्षा देना है। उसकी हिफाजत करनी है। और उसे लालो देवी के शिकंजे से मुक्त करना है। लेकिन लालो देवी के शिकंजे से मुक्त करने का तो सिर्फ एक ही रास्ता है, और वो रास्ता है लालो देवी की मौत..!

क्योंकि उसके मरने से सिर्फ रूपा को ही नई जिंदगी नहीं मिलेगी, बल्कि रूपा जैसी और भी बहुत सी लड़कियों को नई जिंदगी मिलेगी और उनके जीवन में भी खुशियों की कलियां खिल सकेंगी..! और यह सोच कर डॉली ने दोबारा लालो देवी को फोन लगाया।

"हेलो..!"

" फोन अचानक कट गया था। इसलिए दोबारा फोन किया । वैसे क्या कर रही है इस समय आप..? सुबह सुबह का समय है। चाय वगैरह कुछ पीया या नहीं और भगवान का नाम अब तक लिया या नहीं..?"

"मतलब मैं समझी नहीं..?"

"लालो देवी। दरअसल ये समय इतना बुरा आ गया है, कि हर इंसान को सुबह-सुबह भगवान का नाम जरूर लेना चाहिए, क्योंकि क्या पता कब उसकी मौत आ जाए।

और अगर उसकी मौत आ जाए, तो यमराज के दरबार में उस दिन के खाते में सुबह की शुरुआत में ही भगवान का नाम लिखा मिल जाने से उसे अपने गुनाहों की माफी भी मिल सकती है।"

"तेरी यह बातें मेरी समझ से परे हैं..! और मुझे बिल्कुल समझ में नहीं आ रहा है कि तू कहना क्या चाहती है..?"

"मैं अभी रूपा से मिलने आ रही हूं। फिर आमना सामना ज़ब होगा, तब सारी बातें ठीक से समझा

दूंगी, कि एक्चुअली मैं क्या कहना चाहती हूँ..!" यह कह कर डॉली ने फोन काट दिया और भूत भाई को याद किया।

भूत भाई तुरंत उसके सामने उपस्थित हो गए।

डॉली ने भूत भाई से कहा-" मैं सोच रही हूं कि लालो देवी बहुत दिनों तक जीवित रह ली..! अब और उसका और जिंदा रहना ठीक नहीं है। क्योंकि निराश्रित महिलाओं के नाम पर मजबूर और निस्सहाय महिलाओं का शोषण करना.. उन्हें प्रताड़ित करना.. उनसे धंधा करवाना.. उनके जिस्म को पर पुरुषों की बाहों में सौंपना.. और अपना बैंक बैलेंस बढ़ाना.. यह बहुत ही घिनौना अपराध है..! इसलिए इस अपराध का अंत होना बहुत जरूरी है..!"

"ओके। तो क्या आज सुबह की मॉर्निंग वॉक में लालो देवी के आश्रम तक चलना है..?"

"हाँ दोस्त। इरादा तो यही है।"

" तो ठीक है मैं तुझ में समा जाता हूं। और तू अपनी स्कूटी निकाल। क्योंकि अब तो मेरे को भी तेरी स्कूटी पर बैठकर मॉर्निंग वाक करने में बहुत मजा आने लगा है।"

"मॉर्निंग वाक सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है। और

सेहत अगर अच्छी हो तो मजा तो आना ही है..!"

" मगर मैं तो भूत हूं..! हवा हूं..! परछाई हूँ..! मेरी सेहत पर क्या असर होगा..?"

" यह मत पूछ कि तेरी सेहत पर क्या असर होगा..? क्योंकि इस प्रदूषण का कोई भरोसा नहीं कि एक दिन तुम भूतों की जिंदगी को भी नरक बना दे और किसी की मदद करने से पहले तुम लोगों का भी दम घुटने लगे..!"

"हां यह बात तो तेरी सही है। तो चल जल्दी से मॉर्निंग वॉक पर निकल लूँ, क्योंकि तेरी इस बात को सुनकर तो अब मेरे को भी थोड़ा थोड़ा डर सा लगने लगा है..!"

"हाहाहाहा..! मगर तुझे डरने की कोई जरूरत नहीं है। बिकॉज़ आई जस्ट जोकिंग..!!

"

"हाहाहाहा..!" और भूत भाई भी हंसने लगे।

और मॉर्निंग वाक की इस हंसी ठिठोली में ही डॉली निराश्रित महिला सेवा सदन की बिल्डिंग पहुंच गई। और वहां ऑफिस में रूपा पहले से ही मौजूद थी..!

डॉली ने रूपा से पूछा-" कैसी है डियर..? और अब तबीयत कैसी है..?"

" पहले से काफी अच्छी है। क्योंकि सुना है कि रमाशंकर को किसी ने मार दिया। उस रमाशंकर को जो मेरी जान का प्यासा था। और जिसने मुझ पर बहुत अन्याय किए हैं..!"

"दीदी, तुम्हारे साथ जिसने भी अन्याय किया, वो जिंदा नहीं बचा। उन सभी को ईश्वर ने मार दिया..! इसलिए अब तू डर मत, क्योंकि ईश्वर की शक्ति तेरे साथ है। इसलिए अपने ऊपर किये गए अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना तेरा कर्तव्य है। और एक अन्यायी चाहे कितना भी शक्तिशाली हो, किंतु एक औरत के संकल्प और हिम्मत के आगे उस को परास्त होना पड़ता है। इसलिए अन्याय के विरुद्ध संघर्ष कर। जीत हमेशा तेरी ही होगी..!"

"ज़ुल्म तो मुझ पर इस औरत ने भी बहुत किया है..!" रूपा ने लालो देवी को हाथ के इशारे से बताते हुए कहा।

"क्या कह रही है तू। मैंने तो अब तेरे को यहां से रिहा करने की भी बात की है..!"

जवाब डॉली ने दिया-" मगर लालो देवी, जब कमिश्नर साहब ने रूपा को यहां आपकी सुरक्षा में भेजा है, तो आप इसे यहां से भेजता क्यों चाहती है..? और कहां

भेजेंगी..?"

" म..म.. मैं चाहती हूं कि रूपा कहीं और अच्छी जगह रहे..! क्योंकि यहां इसका मन नहीं लग रहा है..?"

"मगर यहां पर क्यों नहीं मन लग रहा है उसका..? क्योंकि इतना बड़ा आश्रम ..फूल फुलवारी.. पेड़ पौधे.. हडॉलीली ..शुद्ध वायु ..बेहतरीन पर्यावरण..सब कुछ तो है यहां..! इससे बेहतर जगह और कहां हो सकती है..?"

"हां यह बहुत सुंदर जगह है। मगर रूपा का मन नहीं लग रहा है यहां। इसलिए मैं रूपा को कहीं और भेजना चाहती हूँ..!"

"लालो देवी..! मैं इस सच्चाई को जानती हूं, कि रूपा का मन यहां सिर्फ इसलिए नहीं लग रहा है, क्योंकि आपने उसको बहुत प्रताड़ित किया है। और मेरा ख्याल है, कि रूपा जैसी और भी बहुत सी लड़कियों पर आप ने बहुत ज़ुल्म ढाया है..! इसलिए अब आप को भी इस दुनिया से उठना होगा..!"

"क.. क.. क्या बक रही है तू..?"

"बक नहीं रही हूँ। बल्कि फैसला सुना रही हूं।" और इतना कहते ही डॉली ने उसके गाल पर एक थप्पड़ मारा

और बोली-" बहुत जुल्म किया है तूने रूपा पर..! लेकिन अब रूपा कही नहीं जाएगी और वो इसी आश्रम में खुशी खुशी रहेगी, क्योंकि यहां तेरी इस कुर्सी पर अब किसी और ने आना है, जो यहां की मजबूर महिलाओं पर जुल्म नहीं करेगा..! उनसे धंधा नहीं करवाएगा..! उन्हें किसी बेगैरत का हमबिस्तर होने पर मजबूर नहीं करेगा..!" यह कहते हुए डॉली ने एक कपड़े से उसके नाक मुँह को तब तक दबाए रखा, जब तक कि उसकी सांसें उखड़ न गईं। और थोड़ी देर में अपनी कुर्सी पर बैठे बैठे उसका दम घुट गया और इसके साथ ही निराश्रित लड़कियों और महिलाओं पर ढाए जाने वाले उसके जुल्मों का अंत हो गया और उसका नापाक बैंक बैलेंस का अकाउंट भी डेड हो गया..!

डॉली ने तब रूपा से कहा-"तू घबरा मत। मैं अभी बाथरूम में तुझको बंद कर बाहर से कुंडा लगा देती हूं। और जब कोई यहां आएगा, तो तुझ पर इस हत्या का इल्जाम नहीं लगा सकेगा। तू बोल देना कि तू बाथरूम में गई थी, और तभी किसी ने बाथरूम का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। बाकी इस औरत को किसने मारा तुझे कुछ नहीं पता..!

और यह तो कुछ जानती ही है , कि इस जैसी दुष्ट औरत को मारना कितना जरूरी था। क्योंकि ये औरतें कानून को अपनी जेब में रखती हैं। और पैसे और

रुतबे के दम पर निर्बल और असहाय औरतों पर ज़ुल्म करती है..!"

और यह कह कर डॉली ने ऑफिस से अटैच बाथरूम में रूपा को बंद कर बाहर से कुंडा लगा दिया और लालो देवी का मोबाइल लेकर इत्मीनान से अपनी स्कूटी पर मॉर्निंग वॉक करते हुए वापस अपने घर आ गई, और उसके मोबाइल को नदी में फेंक दिया..!

उधर बाथरूम में बंद रूपा ने जोर-जोर से कुंडा खटखटाना शुरू किया। और लगातार देर तक कुंडा खटखटाने की आवाज को सुनकर जब अंदर से दो चार लोग ऑफिस में आए, तो लालो देवी की लाश को देखकर सन्न रह गए..!

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कल सभासद रमाशंकर मार दिया गया और आज लालो देवी को.. ! इंस्पेक्टर रोनाल्डो के ऑफिस में अब तक कई फोन आ चुके थे। कुछ बड़े नेताओं के.. कुछ आईएएस अफसरों के...कुछ माफियाओं के.. और कुछ पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों के फोन भी इसमें शामिल थे..।

हर फोन में एक ही बात होती थी, कि यह कौन है, जो अब तक इतने लोगों की हत्या कर चुका है, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है। कितनी बेदर्दी से इनको मार दिया जाता है। और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

सभासद रमाशंकर की हत्या..लालो देवी की हत्या..! रोमू सोमू की हत्या..! दीनू जग्गू की हत्या..! आखिर इन सारी हत्याओं के पीछे किसका हाथ है..??

इंस्पेक्टर रोनाल्डो इन फोन की घंटियों से परेशान था। मगर अंदर से बहुत खुश था। और खुशी का कारण यही

था, कि इधर जितने लोग भी मारे गए थे, उन सभी का कोई न कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड पुलिस में पहले से ही मौजूद था । ये माफिया थे ..दबंग थे ..या बड़े बड़े नेताओं मंत्रियों के चाटुकार थे..!

और यह एक विचित्र सच था, इन विभत्स हत्याओं में एक भी सामान्य नागरिक नहीं था।

हाँ, एक दो हत्याएं आपसी रंजिश में भी जरूर हुई, और ये हत्यारे पकड़े भी गए। लेकिन अपराधिक रिकॉर्ड के मुताबिक गुंडों और बदमाशों द्वारा आम लोगी की हत्या, अपहरण और रेप के कांड में अप्रत्याशित रूप से कमी आ चुकी थी..!

और पब्लिक मंच पर तो जनता का यह हाल था, कि रोज सुबह सुबह लोग पेपर जरूर पढ़ते थे और एक दूसरे से यही चर्चा करते थे, कि आज तो इस दबंग नेता की हत्या हुई है..! अब कल किस दबंग नेता की मृत्यु का द्वार खुलने वाला है..? आम जनता को लूटने वाला और अपनी दादागिरी से लोगों पर जुल्म करने वाला कल कौन सा नेता या गुंडा मारा जाएगा..? या किस रेपिस्ट को मौत की सज़ा मिलने वाली है..! इस तरह की खबरें अब जनता में आम हो गई थी।

मतलब एक तरफ जहां इन हत्याओं से आम जनता सकून का अनुभव कर रही थी, वहीं दूसरी ओर दबंग

नेताओं, माफियाओंऔर रेपिस्टों की हालत खस्ता थी, और वो अत्यंत डरे हुए थे, कि ये पागल हत्यारा कहीं उनकी गर्दन को भी न नाप दे..!

इंस्पेक्टर रोनाल्डो इन्हीं सब बातों पर गहन विचार कर रहा था, और अंदर ही अंदर उस हत्यारे को नमन भी कर रहा था कि अचानक एक अननोन नंबर से उसके पास फोन कॉल आई। यह फोन डॉली का था।

डॉली-"हेलो इंस्पेक्टर रोनाल्डो। आप कैसे हैं..?"

इंस्पेक्टर रोनाल्डो-" मैं ठीक हूं मगर आप कौन हैं और आपको क्या परेशानी है..?"

डॉली-" मुझे कोई परेशानी नहीं है इंस्पेक्टर रोनाल्डो, लेकिन मुझे लगता है कि आप बहुत अच्छे अधिकारी हैं। ईमानदार है। और आप जनता का भला चाहते हैं। और शायद इसीलिए इधर हाल में जितने लोगों की भी हत्याएं हुई है, उनकी तहकीकात करने में आपने कोई ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई..!"

इंस्पेक्टर-" मुझे नहीं समझ में आ रहा है कि आप कौन हैं और यह क्या कह रही है..? क्योंकि मैं अपने कर्तव्य पालन में कभी कोताही नहीं बरतता।"

डॉली-" हा हा हा हा..! इसीलिए अब तक आप हत्यारे

को नहीं पकड़ पाए..!"

इंस्पेक्टर-"इसमें हंसने की क्या बात है..! मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूं हत्यारे को पकड़ने की..!"

डॉली-"नहीं इंस्पेक्टर, आप अपनी तरफ से पूरी कोशिश नहीं कर रहे हैं..! वरना इस हाई-फाई टेक्नोलॉजी के युग में अब तक आप हत्यारे तक पहुंच चुके होते..!"

इंस्पेक्टर-" मुझ पर इस तरह का इल्जाम लगाना गलत है ..! मैं आप पर केस कर सकता हूं..?"

डॉली-" ऐसा भूल कर भी ना कीजिएगा, क्योंकि मैं आपकी शुभचिंतक हूं और आपकी प्रशंसक भी हूं। मतलब मैं आपकी फैन हूं..?"

इंस्पेक्टर रोनाल्डो-"मगर आप हैं कौन..? और आपकी बातें बड़ी अजीब है..?"

डॉली-"मैंने आपसे कहा न, कि मैं आपकी फैन हूं। और शायद मैं पहली एक ऐसी लड़की हो जो एक पुलिस वाले की फैन हूं, और जो इन हत्याओं के तहकीकात में आपकी सुस्त कार्यवाही से अत्यंत प्रभावित हूँ..! और मैं चाहती हूं कि इन सभी हत्याओं के जांच के सिलसिले में आप ज्यादा परेशान ना हुआ करें और

आपको अपनी जान को जोखिम में डालने की भी जरूरत नहीं है..! मेरी तो राय है कि इन गुंडे माफियाओं और रेपिस्टों की हत्या होने पर आप अपनी आंख पूरी तरह से मूंद लिया करें. ! और इंस्पेक्टर साहब मेरे ख्याल से अपने फैन की इस छोटी सी बात को मानने में आपको कोई तकलीफ नहीं होगी चाहिये..!"

इंस्पेक्टर रोनाल्डो-" आप कमाल की हैं। और आपकी हर बात एक पहैली जैसी है..?"

डॉली-" यह सही कहा आपने। वैसे मुझको आपके द्वारा दिया गया मेरा मेरा यह नाम "पहेली" काफी पसंद आया..!"

इंस्पेक्टर रोनाल्डो-" प्लीजअब मुझे पहेली ना बुझाइए और सीधे सीधे अपना मकसद बताइए फोन करने का..!"

डॉली-" मेरा मकसद सिर्फ यह है इंस्पेक्टर साहब, कि जिन लोगों ने भी फोन कर करके आपकी नाक में दम कर रखा है, उनके फोन की सारी लिस्ट मेरे को आप भेज दीजिये। अगर मैंने भी इन सब के नाक में दम ना कर दिया न, तब बताइएगा मेरे को..!"

इंस्पेक्टर रोनाल्डो-"व्हाट.? यह किस तरह की बात

कह रही है तू..? और तेरा इरादा क्या है.?सही सही बता..??"

डॉली-"इरादा तो नेक ही है इंस्पेक्टर साहब..! और चूंकि मैं आपकी ज़बरदस्त फैन हूं, इसलिए आपसे मिलने के लिए बेताब भी हूं..! और सर, मैं सुबह मॉर्निंग वॉक पर अक्सर निकलती हूं। और मैं चाहती हूं कि आप भी सुबह मॉर्निंग वॉक पर जरूर निकला करें, क्योंकि सेहत के लिए यह बहुत ही अच्छी एक्सरसाइज है। और हाँ, अगर कल आप मॉर्निंग वॉक पर निकलेंगे तो लाल पुल पर हमारी आपसे मुलाकात हो जाएगी। फिर किसी होटल में चलकर एक एक चाय पी लेंगे। और वही आप से ढेर सारी बातें होंगी। कुछ आपके मतलब की बातें.. और कुछ हमारे मतलब की..! मगर एक बात याद रखियेगा इंस्पेक्टर साहब, कि कोई भी वीआईपी अपने किसी फैन को निराश कभी नहीं करता..!"

इंस्पेक्टर रोनाल्डो-" ठीक है! मैं सुबह तुझसे मिलूंगा लालपुल पर। मॉर्निंग वॉक के समय..! सुबह 6:00 बजे।"

डॉली-" थैंक्स इंस्पेक्टर साहब..! बॉय..!"

"बॉय..!" इंस्पेक्टर ने कहा और फोन रख दिया। लेकिन फोन रखने के बाद भी इस विचित्र लड़की के

बारे में बहुत देर तक वह सोचता रहा, कि यह लड़की आखिर है कौन..? और मुझसे क्यों मिलना चाहती है..?

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एक इंस्पेक्टर को मॉर्निंग वॉक का समय कहां मिलता है..! उसकी ड्यूटी इतनी सख्त होती है, कि किसी जरूरी काम से कहीं जाने को भी मुश्किल से समय निकल पाता है। और आज इंस्पेक्टर रोनाल्डो जब मॉर्निंग वॉक पर निकले, तो उन्हें अपना बचपन याद आ गया जब रोज मॉर्निंग वॉक पर वो जाते थे.. एक किलोमीटर की दौड़ लगाते थे.. और फिर वापस अपने घर आकर भीगा हुआ चना चबाते थे..!

अपने बचपन को याद करते हुए और मॉर्निंग वॉक करते हुए इंस्पेक्टर रोनाल्डो जब लाल पुल पर पहुंचे, तो सामने से सफेद कपड़ों में मॉर्निंग वॉक करती हुई एक लड़की को देख कर चौंक गए..? उन्होंने सोचा, क्या यह लड़की मुझसे मिलना चाहती है..? इतनी मासूम.. इतनी खूबसूरत ..और इतनी स्वच्छंद..!

अभी वो उसके बारे में सोच ही रहे थे, कि वो लड़की बिल्कुल उनके पास आ गई और बोली--"मेरे ख्याल में आप ही इंस्पेक्टर रोनाल्डो है..?"

"यस मैं ही इंस्पेक्टर रोनाल्डो हूं। मगर आप तो किसी स्कूल के स्टूडेंट मालूम देती हैं..!"

"जी हाँ। मैं दिल्ली स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ती हूँ। और जैसा कि मैंने आपको फोन पर बताया था, मैं आपकी फैन हूं..!"

"आप एक छात्र हैं और मैं एक पुलिस इंस्पेक्टर हूँ। मुझ में ऐसा क्या है, कि आप मेरी फैन हो गई..?"

"सर, सच तो ये है, कि पुलिस वाले भी गुंडे, बदमाश और लुटेरे होते हैं। आप बुरा माने, लेकिन आम पब्लिक में पुलिस वालों के प्रति कुछ ऐसी ही धारणा है। एक गरीब आदमी रात-बिरात पुलिस वाले को देख कर डर जाता है। वो डरता है, कि कहीं पुलिस वाला उससे पैसा रूपया न छीन ले। जबकि पुलिस वाले डकैत नहीं होते, बल्कि जनता के सेवक होते है। फिर भी यह हकीकत है..! क्योंकि मैं भी अगर रात में कहीं जाने के लिए निकलूं, तो मुझे भी सबसे ज़्यादा पुलिस वालों से ही डर लगता है। हालांकि मैं इसका कारण आपको नहीं बना सकता सकती..! और अगर कोई लड़का लड़की रात के समय अचानक पुलिस वालों को दिख जाए, फिर तो उनकी शामत आना तय है। उन्हें गाली देकर बात करेगी और फिर पुलिस थाने ले जाकर न जाने कैसे कैसे सवाल पूछेंगी.! लेकिन मुझे लगता है

कि आप ऐसे पुलिस वाले नहीं है। आप वास्तव में आम जनता के सेवक हैं। आप आम जनता के साथ कुछ गलत काम कर ही नहीं सकते। न मालूम क्यों आपके प्रति मेरे अंदर यह विश्वास है। और इसीलिए मैं आपकी फैन हूं।"

फिर थोड़ा रुक कर आगे उसने कहा-" मेरी नजर में पुलिस में.. मिलिट्री में ..स्कूलों में ..और डॉक्टरी में सिर्फ उनको ही आना चाहिए, जो समाज की सेवा करना चाहते हैं.. अपना नुकसान सहकर भी ..अपना सब कुछ खो कर भी ...क्योंकि सेवा का कोई विकल्प नहीं होता..। इन लोगों को अपनी मांग मनवाने के लिए हड़ताल करने पर प्रतिबंध होना चाहिए..! क्योंकि यह नौकरी नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह सेवा कर रहे हैं..! और सेवा तो मुफ्त होती है। इसलिए इन्हें जो भी पैसा मिल रहा है, उसी में संतोष करना चाहिए। और अगर इनको समझ में आता है, कि सरकार इनको कम वेतन दे रही है.. इनके साथ अन्याय कर रही है.. तो सरकार के विरुद्ध हड़ताल करने की बजाय उन्हें अपनी नौकरी छोड़कर कोई और काम करना चाहिए, जहां वह समझते हैं, कि उनको ज्यादा पैसा मिलेगा.. उनको ज्यादा मान मिलेगा... उनको ज्यादा सुविधाएं मिलेगी..!"

"बहुत हद तक आपकी बात सही है। लेकिन आप ने पुलिस वालों की इतनी शिकायत कर दी, कि उन्हें

डकैतों से भी बदतर बना दिया..! पर क्या आपने इस बात को सोचा, किइस तरह के कमेंट सुनने पर एक पुलिस वाले पर क्या बीतती है..? विशेष रूप से तब, अगर वह इमानदार हो..!"

"दरअसल पुलिस के प्रति आप लोगों की यह घटिया सोच ही पुलिस वालों को बुरा बनाने का सबसे बड़ा कारण है। आप किसी अच्छे इंसान को भी अगर बार बार बुरा कहेंगी..उसका अनादर करेंगी.. तोहीन करेंगी.. उससे नफरत करेंगी..तो वह बुरा ज़रूर बन जाएगा..!"

" डॉली जी..! किसी को इज्जत देने से ही इज्जत मिलती है..! लेकिन अगर किसी को आप गालियां दे, और उससे अच्छे की उम्मीद करें तो यह सम्भव नहीं है..!!"

डॉली ने कहा-"हाँ, यह बात तो आपने बिल्कुल सही कही..! एंड आई एम रियली वेरी वेरी सॉरी फ़ॉर व्हाट आई सेड टू यू जस्ट नाउ.! और मैं इसके लिए अपना कान पकड़ती हूं और अपने कहे शब्दों को वापस लेती हूं..!"

"उम्मीद नहीं थी कि, इतनी आसानी से आप मेरी बात को समझ जाएंगी..! सो ईट्स ओके..! आइए नीचे होटल पर चलकर चाय पीते हैं और वही बात करते हैं..!" इंस्पेक्टर ने कहा।

"जी, शुक्रिया..!" डॉली बोली।

इस्पेक्टर रोनाल्डो डॉली के साथ पुल के नीचे एक होटल पर बाहर लगी बेंच पर बैठ गए। और दो स्पेशल चाय और थोड़ी नमकीन लाने को कहा।

और थोड़ी देर में ही एक लड़का उनके आगे दो चाय और एक प्लेट में थोड़ी नमकीन लाकर रख दिया।

चाय पीते हुए इंस्पेक्टर ने कहा-" हां अब मुख्य बात पर आओ, ये बताओ, कि तुम चाहती क्या हो..? और तुमने फोन पर उन लोगों के फोन नंबर देने की बात क्यों की थी, जो हाल में हुई हत्याओं के कारण कुछ ज्यादा परेशान है और पुलिस की नाक में दम किए हुए हैं, कि हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए..!"

डॉली ने कहा-"" दुनिया की छोड़िए इंस्पेक्टर साहब, लेकिन मेरा यह पक्का अनुमान है, कि आप भी अंदर से यही चाहते होंगे कि यह हत्यारा कभी पकड़ में ना आए, क्योंकि किसी न किसी रूप में वो उस समाज की बुराइयों को खत्म करने का काम कर रहा हैं। और यह हत्याएं सिर्फ उन्हीं की हो रही है, जो गुंडे.. बदमाश.. माफिया.. दबंग और आम जनता को सताने वाले हैं..!"

"हां यह बात तुम्हारी बिल्कुल सही है, कि मैं दिल से यही चाहता हूं, कि हत्यारा कभी ना पकड़ा जाए, क्योंकि अप्रत्यक्ष रूप में इस हत्यारे ने समाज के साथ साथ पुलिस की भी बहुत बड़ी मदद की है। क्राइम का ग्राफ बहुत नीचे हुआ है। और दबंगों के हौसले पस्त हो गए हैं। और यही कारण है कि सिर्फ उन्हीं नेताओं और लोगों के फोन पुलिस विभाग में ज्यादा आ रहे हैं , जो गलत है, और जिनको अपनी जान का खतरा है, लेकिन सीधे तौर पर नहीं बोल सकते..! लेकिन उन लोगों का फोन नंबर जानकर तुम क्या करोगी..? मुझे यह बात अभी तक समझ में नहीं आई..!"

" सर अगर आप सीआईडी में होते, तो अब तक सब कुछ समझ गए होते..! लेकिन मुझे न जाने क्यों आप पर बहुत ज्यादा भरोसा है। और इसीलिए आपको सच्चाई बता रही हूँ। और सच्चाई ये है सर, कि इन सभी हत्याओं के पीछे मेरा हाथ है है..! और मुझे आपसे दोस्ती भी इसीलिए करनी है, क्योंकि मुझे आपका सपोर्ट चाहिए।"

"और सर, मैं ये जो कुछ भी कर रही हूं निस्वार्थ भाव से कर रही हूं। इसमें मेरा कोई भी निजी स्वार्थ या लालच नहीं है। मैं अपने इस कार्य से सिर्फ आम जनता की मदद कर रही हूं..! उस आम जनता की, जो लाचार है.. विवश है.. मजबूर है.. और इन माफियाओं..और दबंग नेताओं के जुल्मों से त्रस्त है..!"

"ओह नो..! आई कान्ट बिलीव..! तुम इतने बड़े बड़े दबंग नेताओं, माफियाओं और गुंडों की हत्या कैसे कर सकती हो..? ईट्स इम्पॉसिबल..!"

"आप मेरी इस बात पर यकीन नहीं कर सकते, इस बात के लिए आपको थैंक्स..! क्यूंकि मैं भी यही चाहती हूं, कि इस समाज में कोई भी इस बात पर बिलीव ना करें कि, इन हत्याओं के पीछे मेरा हाथ हो सकता है..! बट ईट्स ट्रू सर..!"

डॉली ने आगे कहा-"लेकिन इन हत्याओं के पीछे एक और सच भी है। एक्चुअली मैंने ये सारी हत्याएं की भी हैं और नही भी की है..! वो इस तरह, कि जब मुझे अंदर से आदेश होता है, कि मुझे इस इंसान को मारना है तब मैं उसको मारती हूं। और इसके लिए उन आत्माओं से ताकत मिलती है मुझे, जो मर चुकी हैं। और यह तो आप जानते ही हैं, कि आप के कानून में बहुत सारे झोल है, पर ऊपर वाले के कानून में कोई झोल नहीं है। वहां सिर्फ फैसला होता है, क्योंकि ऊपर वाले को किसी केस को निपटाने के लिए कोई गवाह की जरूरत नहीं पड़ती..! और उसके आगे किसी की कोई चालाकी भी नहीं चलती, चाहे वह कितना ही बड़ा दबंग नेता हो.. माफिया हो..गुंडा हो ..या कोई भी हो..! क्योंकि उसके आगे हर इंसान के कर्मों का लेखा जोखा बिल्कुल सही सही होता है..! और इसीलिए वहां कोई

गवाही नहीं होती बल्कि गुनहगारों को सीधे सजा दी जाती है..! नो जिरह, नो वकील एंड नो दलील..!"

"तुम्हारी बातें बहुत अजीब है..! मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि तुम क्या कह रही हो..! और इन सारी हत्याओं के पीछे तुम्हारा हाथ है, यह तो नामुमकिन है। ईट्स टोटली अंबिलिवीएबल..! कितने मासूम और कोमल हाथ हैं तुम्हारे..! यह कैसे मुमकिन है..!"

डॉली ने कहा-"" सर मैं आपको सबूत दे सकती हूं। लेकिन आप मुझसे वादा कीजिए कि आप मेरा साथ देंगे और आप इन हत्याओं के तहकीकात में सिर्फ दिखावा करेंगे..नाटक करेंगे.. लेकिन कोई भी ठोस कार्यवाही नहीं करेंगे..! एक्चुअली सर, बिगाड़ तो आप मेरा भी कुछ नहीं पाएंगे..! लेकिन कोर्ट और कानून के चक्कर में पड़कर मेरा बहुत नुकसान होगा और मेरे घर वाले भी परेशान हो जाएंगे..! और इसीलिए मैं आपसे दोस्ती करना चाहती हूं, कि आप मेरे इस अच्छे काम में हमारा साथ दें। क्योंकि जिन लोगों को गले में फंदा डालने से पुलिस भी डरती है, हमारा लक्ष्य उन्हीं गुंडों को समाप्त करना है.. इस देश की जनता को निर्भय बनाना है.. और मासूम लड़कियों को रेपिस्टों से बचाना है..!"

"हाँ, ये बात तो सही है, कि इधर बहुत से ऐसे गुंडे बदमाशों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है, जो यह समझते थे, कि उनको कोई भी मार नहीं सकता..! और इसीलिए इन गुंडों में दहशत है आज...! और बेहद डरे हुए हैं यह..! लेकिन मैं तुम्हारी बात का यकीन कैसे करूं कि तुम जो कह रही हो, वो सच है..! और अगर तुम्हारा कहना सच है, तो मैं अप्रत्यक्ष रूप में तुम्हारा साथ ज़रूर दूंगा, यह मेरा वादा है। और इस वादे को मैं अपनी जान देकर भी निभाउंगा..!"

"ठीक है इंस्पेक्टर साहब..!" यह कह कर डॉली ने अपनी आंखें बंद कर ली और भूत भाई को याद किया और भूत भाई तुरंत हाजिर हो गए, और उसके अंदर प्रवेश कर गये।

डॉली ने अपनी आंखें खोली और इंस्पेक्टर रोनाल्डो से कहा-" अब आपको मुझसे पंजा लड़ाना होगा और जीत कर दिखाना होगा..!"

इंस्पेक्टर ने कहा-"ओके..!

और फिर डॉली ने अपने हाथ को इंस्पेक्टर के हाथ में फंसा दिया। और जैसे ही उसने 12-3-स्टार्ट कहा, इंस्पेक्टर ने अपना पूरा जोर लगा दिया, लेकिन डॉली के हाथ को झुका नहीं सका. ! और जब इंस्पेक्टर थक गया, तब डॉली ने एक ही झटके में उसके हाथ को

जमीन से टच कर दिया..! इंस्पेक्टर डॉली के अंदर आई इस ताकत को देखकर हैरान हो गया..! और उसे विश्वास हो गया, कि डॉली के अंदर कोई ऐसी शक्ति ज़रूर है, जिससे जीत पाना नामुमकिन है..!

उसने डॉली से कहा-"ईट्स अमेजिंग। और ये रियली सच है कि तुम्हारे अंदर ईश्वरीय ताकत है।"

डॉली ने कहा-"इस्पेक्टर साहब। सर, मेरे पास अपनी कोई ताकत नहीं है। और ये ईश्वरीय ताकत मुझे तब मिलती है, जब मुझे कोई अच्छा काम करना होता है। और इसीलिए इतने लोगों को मारने के बाद भी मेरे को कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि मैं इस बात को अच्छी तरह से जानती हूं, कि जिन अपराधियों के आगे आपका पुलिस विभाग में फेल है और जो अपने आप को कानून से भी ऊपर समझते हैं, मैं सिर्फ उन्हीं को सजा दे रही हूं, अपनी इस भूतिया ताकत से..!

और सर, इस राज को सिर्फ आप जानते हैं और मोनिका जानती है, जो सभासद रमाशंकर की वर्तमान पत्नी है..! इसके अतिरिक्त यह राज अभी तक किसी को मालूम नहीं है..! और मेरी आपसे विनती है, कि इस राज को आप भी अपने तक ही सीमित रखिएगा।

"ठीक है..! तुम्हारा यह राज सिर्फ मेरे तक ही सीमित रहेगा।

"थैंक्स सर. ! और अब तो आप यह भी समझ गए होंगे, कि मैंने क्यों उन लोगों का फोन नंबर मांगा है, जो इन हत्याओं के कारण ज्यादा परेशान हैं। क्योंकि यह लोग भी माफिया गैंग से जुड़े होंगे, किसी अपराध में लिप्त होंगे, कोई बाहुबली नेता होंगे, या फिर कोई करप्ट अधिकारी होंगे। और अगर इनकी डिटेल मेरे पास होगी, तो आगे से इनका फोन आपके पास आना बंद हो जाएगा, क्योंकि इन गुंडों और माफियाओं का समर्थन करने वाले अपराधियों को भी ऊपर पहुंचाना बहुत जरूरी है..! और यही सच्चा न्याय है. ! ईश्वरीय न्याय..! "

"ओके फ्रेंड।" इंस्पेक्टर ने कहा और अपनी जेब से निकालकर कुछ ऐसे फोन नंबर उसे दिए, जिनसे वो बेहद परेशान था और जो वास्तव में इस देश को अंदर ही अंदर खोखला करने के जिम्मेदार थे।"

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डॉली को इंस्पेक्टर रोनाल्डो को इस बात का एहसास दिलाना था, कि वास्तव में उसके अंदर वह ताकत है , जिसके दम पर किसी भी गुंडे बदमाश और माफिया को वह अच्छे से सबक सिखा सकती है। प्रमाण स्वरूप उसने भूत भाई को याद किया और जब भूत भाई उसके उसके अंदर समा गए, तब डॉली ने अपने हाथ को इंस्पेक्टर के हाथ में फंसा दिया। उसने इंस्पेक्टर को चैलेंज दिया था कि उसको हरा नहीं सकता । और इस बात को प्रूफ करने के लिए अपने हाथ का पंजा उसके हाथ के पंजे में फंसाने के बाद जैसे ही उसने 12-3-स्टार्ट कहा, इंस्पेक्टर ने अपना पूरा जोर लगा दिया, लेकिन डॉली के हाथ को झुका नहीं सका. ! और जब इंस्पेक्टर थक गया, तब डॉली ने एक ही झटके में उसके हाथ को जमीन से टच कर दिया..! इंस्पेक्टर डॉली के अंदर आई इस ताकत को देखकर हैरान था..! क्योंकि जिन हाथों से उसने बड़े-बड़े माफियाओं को सबक सिखाया था और जिनके चेहरों अपने हाथ के पंजे का निशान बना देता था वो, आज वही हाथ डॉली

के आगे बेबस और शक्तिहीन हो चुके थे। क्योंकि अपनी पूरी ताकत झोंक देने के बावजूद उसके हाथ को झुका नहीं सका, जबकि डॉली ने एक ही झटके में उसके हाथ को जमीन से छुआ दिया। अब मुझे इस बात का पक्का विश्वास हो गया, कि डॉली के अंदर ज़रूर कोई विशेष शक्ति है, जिसका मुकाबलावो नहीं कर सकता।

उसने डॉली से कहा-"ईट्स अमेजिंग। और इस सच को मानना पड़ेगा कि तुम्हारे अंदर इतनी ताकत है, कि कोई भी गुंडा बदमाश या माफिया तुमसे जीत नहीं सकता।

"नहीं इस्पेक्टर साहब। मेरे में अपनी कोई ताकत नहीं है। और जो दैवीय ताकत मुझमें है, वो ताकत मुझे सिर्फ अच्छे काम करने के लिए मिली है। और इसीलिए इतने लोगों को मारने के बाद भी मेरे अंदर कोई पछतावा नहीं है। क्योंकि सर, मैंने सिर्फ उन्हीं लोगों को मारा है, जिन्हें मैं जानती हूं कि आपका पुलिस विभाग उनके विरुद्ध कुछ नहीं कर सकता..! और अगर उन्हें पकड़ भी लेता है, तब भी उनके विरूद्ध कोई कानूनी कार्यवाही नहीं कर पाता और वह छूट जाते हैं। और मैं इस बात को अच्छी तरह से जानती हूं कि इन माफियाओं के विरुद्ध आप चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते। और कानून भी उनके बाहुबल उनकी ताकत और उनकी पहुंचे के आगे लाचार हैं क्योंकि उनके तमाम क्रिमिनल रिकॉर्ड को जानते हुए भी उन्हें सजा नहीं दे पाता, इसीलिए मैं

इनको एक एक कर सजा दे रही हूं अपनी इस भूतही ताकत से..! और सर, इस राज को अब तक सिर्फ आप जानते हैं और मोनिका जानती है, जो सभासद रमाशंकर की वर्तमान पत्नी है..! इसके अलावा यह राज अभी तक किसी को नहीं मालूम..! और मेरी आपसे विनती है कि इस राज को आप अपने तक ही सीमित रखिएगा।"

"ठीक है..! तुम्हारा यह राज सिर्फ मेरे तक ही सीमित रहेगा।"

"थैंक्स सर. ! और अब तो आप समझ ही गए होंगे, कि मैंने क्यों उन लोगों का फोन नंबर मांगा है, जो इन हत्याओं के कारण ज्यादा परेशान हैं। क्योंकि यह लोग भी माफिया गैंग से जुड़े होंगे, किसी अपराध में लिप्त होंगे, कोई बाहुबली नेता होंगे, या फिर कोई करप्ट अधिकारी होंगे। और अगर इनकी डिटेल मेरे पास होगी, तो आगे से इनका फोन आपके पास आना बंद हो जाएगा, क्योंकि गुंडों और माफियाओं का समर्थन करने वाले इन अपराधियों को भी ऊपर पहुंचाना जरूरी है..! और यही सच्चा न्याय है. ! ईश्वरीय न्याय है..! "

"ओके फ्रेंड।" इंस्पेक्टर ने कहा और कुछ ऐसे फोन नंबर उसे दिए जिनसे वो बेहद परेशान था और जो इस देश को अंदर ही अंदर खोखला करने के जिम्मेदार थे।"

डॉली ने इंस्पेक्टर रोनाल्डो से कहा-" आपका बहुत-बहुत धन्यवाद इंस्पेक्टर। क्योंकि अपने मिशन को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए आपका सहयोग बहुत जरूरी और बहुत महत्वपूर्ण है मेरे लिए।

वैसे सर, इन सभी हत्याकांड के पीछे शक की सुई मुझ पर नहीं आती, क्योंकि मैं कक्षा 12 में पढ़ने वाली एक सीधी सादी लड़की हूं। तो इतने बड़े-बड़े माफियाओं की हत्या में भला कैसे कर सकती हूं..?

और सर, हर हत्या के पीछे कोई न कोई मकसद ज़रूर होता है। जमीन जायदाद का झगड़ा होता है कोई जातीय दुश्मनी होती है, या कोई प्रेम प्रसंग होता है। और भी बहुत से कारण है, जो किसी ने किसी निजी स्वार्थ से जुड़े होते हैं। लेकिन इन हत्याओं के पीछे मेरा अपना कोई निजी स्वार्थ नहीं है, बल्कि इसके पीछे जनता का भला है जनता की खुशहाली है और जनता का निर्भय होना है।

और हत्या के मकसद की अगर बात करें, तो इनमें से कोई भी कारण मुझ पर लागू नहीं होता। इसलिए भी पुलिस का मुझ पर शक करने का कोई अर्थ नहीं है।

तीसरी बात यह है इंस्पेक्टर रोनाल्डो, कि मैं अपनी भूतही ताकत से इन हत्याओं को अंजाम देती हूं । और

भूतही शक्ति पर ना कानून भरोसा करता है और न सरकार।

और चौथी बात यह है इंस्पेक्टर साहब कि मेरे अंदर का भूत इन हत्याओं को अंजाम देता है, इसलिए उस समय मेरे हाथ के पंजे का निशान पुलिस की तफ्तीश में नहीं मिल सकता। और भूत के पंजे का निशान अपने आप लुप्त हो जाता है। और ये एक ठोस कारण है, कि पुलिस मुझ पर शक नहीं कर सकती और मुझे खूनी प्रमाणित नहीं कर सकती।

लेकिन इंस्पेक्टर साहब, मैं इस बात को पहले ही आपसे कह चुकी हूं, कि अक्चुवली मैं पुलिस कानून के फंदे में फंसना नहीं चाहती, और इसीलिए आपका सहयोग चाहिए मुझे, जिससे मैं निर्बाध रूप से इन गुंडों और माफियाओं को उनके अंजाम तक पहुंचाती रहूं, और अपनी पढ़ाई भी निर्बाध रूप से करती रहूं।"

इंस्पेक्टर रोनाल्डो ने कहा-" तुम अप्रत्यक्ष रूप से हमारी मदद कर रही हो, कानून की मदद कर रही हो और आम जनता की भी मदद कर रही हो, इसलिए अगर इमानदारी से देखा जाए तो तुम्हारे विरुद्ध कोई केस नहीं बनता। इसलिए अगर भूले बिसरे किसी केस में तुम फँसोगी भी, तो मैं तुम को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दूंगा, लेकिन तुम को पुलिस थाने कोर्ट कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ने दूंगा, मैं तुमसे यह वादा

करता हूं। क्योंकि मैं भी इस बात को कभी नहीं चाहूंगा कि पुलिस के क्रिमिनल रिकॉर्ड में कभी तुम्हारा नाम आए..!

क्योंकि पुलिस के क्रिमिनल रिकॉर्ड में नाम आते ही इंसान पर हजार तरह की आफते आ जाती हैं और किसी भी वक्त पुलिस उन्हें अरेस्ट कर सकती है। लेकिन मेरी नज़र में तुम बेदाग हो और हमेशा बेदाग ही रहोगी।"

"थैंक्स इंस्पेक्टर साहब।" डॉली ने कहा। अब मुझे इजाज़त दे क्योंकि मम्मी मेरा इंतजार कर रही होंगी। और अभी मुझे स्कूल भी जाना है।

और हां, हम जब भी मिलेंगे मॉर्निंग वॉक के टाइम ही मिलेंगे और इसी होटल पर साथ-साथ चाय पिएंगे। क्योंकि यह बहुत ही खूबसूरत जगह है और इस समय यहां शांति भी रहती है। और हम फोन पर भी कोई बात नहीं करेंगे। क्योंकि आज के जमाने में ये फोन सबसे बड़ी आफत की ज़ड़ है, क्योंकि आजकल यह फोन ही सबसे बड़ा है माध्यम है अपराधियों को पकड़ने का..!

और सर, इस फोन बाजी के चक्कर में मुझपर कोई आफत भले न आए , लेकिन आप पर आफत जरूर आ सकती है। और अगर आपका यहां से ट्रांसफर भी हो जाता है, तब भी यह मेरे लिए बहुत ही दुखदाई और

कष्टप्रद होगा। क्योंकि आप की जगह अगर कोई करप्ट इंस्पेक्टर आ गया, तो वह भी मेरे लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

जैसे आपके पहले जो इंस्पेक्टर था वह बहुत ही करप्ट था, जिसके कारण मुझे उस इंस्पेक्टर की जान लेनी पड़ी थी..!

" मैंने तुम्हारी हर बात को अच्छे से समझ लिया है और तुम मुझ पर पूरी तरह से भरोसा कर सकती हो। और आज मैं भी तुम्हारा फैन हूँ। और फैन इसलिए हूं क्योंकि कोई फैन अपने गॉडफादर को कभी धोखा नहीं देता..!

मगर मैं किसी की गॉडफादर कैसे बन सकती हूं..? क्योंकि मैं तो वैसे भी लड़की हूं..!"

लेकिन जो तुम काम कर रही हो वो काम कोई गॉडफादर ही कर सकता है। इसलिए तुम लड़की ज़रूर हो, फिर भी मेरे लिए तो तुम गॉडफादर ही हो..!"

" ओके सर। आप जो भी समझे। वैसे जो आपने लिस्ट दी है , इस लिस्ट में सबसे पहले निशाना किस को बनाना है..?"

" जिसका नाम टॉप-वन पर है-डीआईजी भूषण..!

पुलिस विभाग में होकर भी इस शख्स ने अच्छे-अच्छे पुलिस वालों को परेशान कर रखा है। इमानदार पुलिस वालों का ट्रांसफर करवा देता है। और अपनी जान को जोखिम में डालकर जब कोई इंस्पेक्टर किसी क्रिमिनल को पकड़ता है, तो यह शख्स उसे छोड़ने पर मजबूर कर देता है, क्योंकि कई बड़े माफियाओं और नेताओं से इसका मिलना जुलना है। लेकिन ऊंची पोस्ट पर होने के कारण कोई इसका कुछ बिगाड़ नहीं पाता।"

" ओके सर। अब आप निश्चिंत रहिए। क्योंकि मेरा अगला निशाना डीआईजी भूषण ही होगा..!" डॉली ने कहा और जिस तरह मॉर्निंग वॉक करते हुए इंस्पेक्टर रोनाल्डो से मिलने आई थी, उसी तरह मॉर्निंग वॉक करते हुए अपने घर वापस आ गई।भूतों का न्याय भाग 22

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डीआईजी भूषण अपने ऑफिस में बहुत परेशान दिख रहे थे। उनके कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह कौन है जो बेखोफ इन माफियाओं गुंडों की हत्या कर रहा है और अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला। ये इंस्पेक्टर रोनाल्डो भी पता नहीं क्या कर रहा है, कि अब तक अपराधियों का कोई सूत्र भी उसके हाथ पर लगा। सिर्फ हवा में तीर चला रहा है और जब भी फोन करो, यही बताता है, कि वह पूरी मुस्तैदी से अपने काम में लगा हुआ है और बहुत शीघ्र अपराधी उसकी गिरफ्त में होगा। लेकिन उसके इस नाटकीय पुलिसिया अंदाज से मैं अच्छी तरह वाकिफ हूं..! वो कुछ नहीं कर रहा है, और इनके केसेस को सुलझाने का सिर्फ नाटक कर रहा है..! कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि इन हत्याओं का सिलसिला कब रुकेगा..!

" लेकिन सर आप इतना परेशान क्यों है..?" कांस्टेबल जीशान ने कहा। क्योंकि ये हत्याएँ सिर्फ बदमाश लोगों और माफिया नेताओं की हो रही है। इसलिए हमें ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है।"

" यहीं तो मुश्किल है जीशान, की हत्या सिर्फ

माफियाओं और दबंग लोगों की हो रही है, और इसीलिए इंस्पेक्टर रोनाल्डो हाथ पर हाथ धरे बैठा है और जानबूझकर अपराधी को पकड़ने में टालमटोल कर रहा है..! वरना यह संभव ही नहीं है कि कोई इतने सारे नामी-गिरामी लोगों को मार दे.. माफियाओं को मार दे.. और और पुलिस विभाग को उसके खिलाफ एक भी सबूत ना मिल सके..!"

"मगर ऐसा करने से इस्पेक्टर रोनाल्डो को क्या लाभ है..?" जीशान ने कहा

" उसको बहुत बड़ा लाभ है। क्योंकि आम आदमी पर किए जाने वाले अत्याचार में भारी संख्या में कमी आई है। रेप की घटनाएँ गायब हो गई है। हर अपराधी डरा हुआ है कि अगर वह कुछ गलत करेगा तो अचानक हुई रस्सी उसके गले में भी ना फंस जाए और उसके जीवन का अंत हो जाए। और इस तरह की घटनाओं में कमी से उसके थाने की वाहवाही हो रही है।" डीआईजी ने गुस्से से कहा।

" लेकिन सर, अगर आम आदमी खुश है, तो इन माफियाओं को मरने से हमारा क्या नुकसान है ..? यह तो एक तरह से अच्छा ही है जो इन गुंडों को कोई मार रहा है। क्योंकि यह वो गुंडे हैं जिन पर पुलिस भी अपना हाथ डालने में डरती है। क्योंकि इन्हें अगर हम

पकड़ भी ले तो कोई न कोई उनको छुड़ाने आ जाता है..!" कांस्टेबल जीशान ने कहा।

" तू नहीं समझेगा कि इस अपराधी का पकड़ा जाना कितना जरूरी है और क्यों जरूरी है..! तू जा और मेरे लिए पहले एक अच्छी सी काफी बना कर ला..!" डीआईजी भूषण ने परेशान होकर कहा।

"ओके साहब।" जीशान ने कहा और ऑफिस से ही अटैच किचन में जाकर काफी बनाने लगा।

डीआईजी भूषण ने सोचा-" इस जीशान को यह क्या पता, कि उसकी मोटी तनखा में कहां से देता हूं..? त्यौहार आदि के मौके पर उसको महंगी महंगी गिफ्ट कहां से देता हूं मैं..? यह सारे पैसे इन बदमाशों से ही तो आते हैं, जो एक-एक कर मारे जा रहे हैं..! कितने दिन हो गए, घर मे न कोई मिठाई का डब्बा आया और ना कोई नजराना..! और शैंपेन की पार्टी भी महीनों से बंद है। सारी हसीनाएं भी अपने बिल में घुसी है। शायद वह भी डरी हुई है, कि कोई उनका गला भी न रेत दे. ! और सबसे बड़ा डर तो खुद उसकी जान को भी है। क्योंकि अगर उसकी घूसखोरी झूठे एनकाउंटर का कच्चा चिट्ठा उस विचित्र अपराधी तक पहुंच गया तब क्या होगा..? तब तो उसकी खुद की जान भी खतरे में पड़ सकती है..! एक बार पर इंस्पेक्टर रोनाल्डो को फोन लगाता हूं पर पता करता हूं, कि कोई सुराग अब तक मिला या नहीं..?"

और उन्होंने रोनाल्डो को फोन लगा दिया।

रोनाल्डो-" हेलो सर। सुबह-सुबह कैसे याद किया..?"

डीआईजी भूषण-" तुझे अच्छी तरह मालूम है कि मैंने क्यों तुझको याद किया..? पहले मुझको रिपोर्ट दें कि विधायक रमाशंकर, और लालो देवी की हत्या से संबंधित केस का कोई सुराग मिला या नहीं..? और अब तक कार्य की क्या प्रगति है..?"

" सर हम इन सभी केसेज पर बहुत ही बारीकी से अपनी नजर रखे हुए हैं। और हमें पूरी उम्मीद है कि बहुत शीघ्र हम अपने क्षेत्र में उत्पात मचाने वाले सभी माफियाओं को पकड़ लेंगे । पर फिर कहीं कोई वारदात नहीं होगी..!"

" बात को घुमा मत और सीधे सीधे बोल के अब तक कितने लोगों को हिरासत में लिया है और उनमें से असली गुनाहगार का पता लगा या नहीं.?"

" आप चिंता ना करें सर। हम आपकी प्रॉब्लम को समझ रहे हैं। और हमें उम्मीद है कि बहुत शीघ्र आपको इन सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी। हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं, और आपको आश्वासन देते हैं कि असली अपराधी बहुत शीघ्र पकड़ा जाएगा या बेमौत मारा जायेगा..!"

" ठीक है मेरे कहने का मतलब यह है कि इस मामले में बिल्कुल लापरवाही नहीं होनी चाहिए। क्योंकि ऊपर वालों ने भी नाक में दम कर रखा है मेरे..! और जब ऊपर से प्रेसर होता है तो कोई न कोई जवाब देना पड़ता है और अपने विभाग की बदनामी होती है।"

" आपने सही कहा सर कि असली अपराधी के पकड़

में न आने के कारण विभाग की बदनामी होती है। लेकिन मैंने अपने आदमियों को काम पर लगा दिया है और वह किसी भी कीमत पर असली अपराधी को छोड़ेंगे नहीं। या तो वह पुलिस की कस्टडी में होंगे या उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।"

"ओके। मुस्तैदी से अपना काम करो क्योंकि अब हवा में तीर चलाने से काम नहीं चलेगा मुझको रिजल्ट चाहिए।" यह कह कर डीआईजी भूषण ने फोन रख दिया।

तभी जीशान कॉफी बना कर ले आया। लेकिन डीआईजी भूषण ने उससे कहा-" मेरा मूड बदल गया है इस काफी को तू पी ले। और मेरे लिए शैंपेन की बोतल ले आ।"

"जी साहब..!"

और डीआईजी भूषण शैंपेन की बोतल पीकर टुन्न हो गए।

और ठीक उसी समय डॉली का आगमन हुआ। और डॉली किचन को लॉक कर सीधे भूषण के समीप आ गई ।

डीआईजी भूषण एक सत्रह अट्ठारह साल की खूबसूरत लड़की को अपने सामने देखकर हतप्रभ रह गए। उसने लड़की से पूछा-"कौन हो तुम और किस काम से आई हो..?"

"सर, आई तो दरवाजे से ही हूं, लेकिन चौकीदार ने ₹100 लेकर मुझे आने दिया। उसने कहा कि आप बहुत बिजी हैं, और इस समय मैं आपसे नहीं मिल

सकती। मगर यहां तो कोई नहीं है और आप अकेले हैं..!"

" अगर ऐसा न करूं, तो ऐरे गैरे नत्थू सब लोग यहां आ जाएंगे। जबकि छोटे स्तर से किसी का काम ना हो तब उसे मेरे पास आना चाहिए।

वैसे आप जैसी खूबसूरत लड़की को भी उसने अंदर जाने से रोका, ये ठीक नहीं किया। आप चिंता न करें। आपके सौ रुपए मैं आपको वापस दिलवा दूंगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करूंगा..! अब बताइए आपकी परेशानी क्या है..?"

" मैं साबा गांव की रहने वाली हूं। मेरी जमीन जायदाद पर दबंगों ने कब्जा कर लिया और मेरे मां-बाप का खून कर दिया। मेरे साथ उन्होंने गलत हरकतें की और मुझे धमकी दी है कि अगर मैंने किसी से भी उनके खिलाफ कोई शिकायत की तो मेरी जान ले लेंगे।

उन्होंने मेरे को बांधकर रखा था। फिर बड़ी मुश्किल से मैं उनकी गिरफ्त से छूट कर थाने पर पहुंची, मगर थानेदार में कोई रिपोर्ट नहीं लिखी और उसने भी मेरे साथ गलत हरकत करने की कोशिश की और मुझसे गंदे गंदे सवाल पूछे। और तब मजबूर होकर मुझे यहां आना पड़ा।"

"मतलब इस समय तुम्हारे पास रहने को घर मकान भी नहीं है। मैं अभी तुम्हारी रिपोर्ट लिखता हूं और उन

दबंगों के विरुद्ध कार्रवाई करता हूं।" ये कह कर उन्होंने एक सादा कागज डॉली को दिया और कहा इस पर दस्तक कर दो।"

डॉली ने कहा-"सादे काग़ज़ पर दस्तक क्यों..? आप रिपोर्ट तो लिखिए..?"

"वो मैं अपने हिसाब से लिख लूंगा। तुम बस दस्तख़त कर दो नीचे।"

डॉली ने कागज पर दस्तखत कर दिए।

डीआईजी भूषण-"अब तुम बेफिक्र हो जाओ। क्योंकि तुम्हारे रहने और खाने पीने की व्यवस्था भी मैं यही कर दूंगा। यहां कुछ छोटे-मोटे काम करने के लिए मुझको एक असिस्टेंट की सख्त जरूरत है। कांस्टेबल जीशान चाय वगैरह बना तो देता है, लेकिन यह काम उसकी ड्यूटी में नहीं आता। और तुम ठीक से काम करोगी तो तुम्हारी यही नौकरी लगवा दूंगा। और और फिर तुम्हें गांव जाने की कोई जरूरत नहीं है।"

डॉली-" मगर साहब, मैं इस समय नौकरी के लिए नहीं आई हूं। मैं चाहती हूं कि पहले उन हत्यारों को पकड़ा जाए और उनको कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। और हमारा घर मकान खेत हमको वापस दिया जाए।"

डीआईजी भूषण-" देखो यह गांव का मामला है। और दबंग लोग इतनी आसानी से काबू में नहीं आते। हम

उनको गिरफ्तार तो कर लेंगे, लेकिन बिना सबूत के जेल में भी नहीं रख सकते। और जब जेल से वह छूटेंगे तब तुम्हारे साथ और भी बुरा हो सकता है।

जब उन्होंने तुम्हारे निरपराध मां-बाप को मार दिया और तुम्हारे साथ गलत काम किया, तो जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद वो किस तरह तुम्हारे से पेश आएंगे , इस बात को तुम खुद सोच सकती हो।

इसलिए जो हो चुका उसे भूल जाओ गांव को छोड़कर यही शहर में रहो। क्योंकि उस गांव में हमेशा तुम्हारे ऊपर खतरा मंडराता रहेगा।

डॉली-"मगर इस तरह तो अपराधियों का हौसला और भी बढ़ जाएगा और वह किसी भी लड़की के साथ गलत काम कर सकते हैं उनके मां बाप को मार सकते हैं..!"

डीआईजी भूषण-" हां, वो ऐसा कर सकते हैं। लेकिन हकीकत यही है कि हम इन्हें रोक नहीं सकते। और हम तुम्हारे भले के लिए ये बात कर रहे हैं, जिससे कि तुम आगे की जिंदगी खुशहाल तरीके से जी सको।

गांव में रहकर हर पल डर डर कर जीने का कोई अर्थ नहीं है। और यही सत्य है। और ये लो थोड़ा सा शेंम्पेन पी ले। बहुत महंगी शराब है ये । इसे पियेगी तो अच्छा

लगेगा। और यह कह कर भूषण ने उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया।"

डॉली-" आप क्या कर रहे हैं..? मैं आपकी बेटी की तरह हूं..?"

डीआईजी भूषण-" बेटी की तरह होने और बेटी होने में बहुत फर्क होता है। और मेरी बात समझ.... क्योंकि ये गांव नहीं बल्कि शहर है। गांव में उन बदमाशों ने तुम्हारे साथ गलत काम किया और तुम्हें कैद में रखा तुम्हारा घर मकान भी छीन लिया और तुम्हारे मां बाप को भी मार दिया।

लेकिन शहर में ऐसा नहीं है। यहां पर लड़कियों को ऐश करने पर सजा नहीं मिलती बल्कि पुरस्कृत किया जाता है। और ये तुम्हारी अच्छी किस्मत है कि तुम बिल्कुल सही जगह आई हो और सही समय पर आई हो।

क्योंकि इधर कुछ दिनों से मैं अकेला हूं और जो लड़की रोज यहां आती थी, आज कल वो भी नहीं आ रही है। शायद किसी बात से डरी हुई है।"

डॉली-"कौन..?"

डीआईजी भूषण-"काम करने वाली..! मेरी

असिस्टेंट...!"

डॉली-""लेकिन आप जो सोच रहे हैं वैसा कुछ नहीं है। और मैं यहां सिर्फ न्याय के लिए आई हूं..! और मुझे न्याय चाहिए ..और अपना पुराना घर मकान खेती चाहिए... और उन बदमाशों की गिरफ्तारी चाहिए...। मुझे यह शहरी सुख... ये ऐशो आराम.... और मजे की जिंदगी नहीं चाहिए।"

डीआईजी भूषण-" यहाँ नाटक करने से कोई फायदा नहीं है। क्योंकि तेरे दिल में क्या है, मैं तभी जान गया था जब कांस्टेबल जीशान के किचन में जाते ही बाहर से तूने कुंडा बंद कर दिया।

और कोई जवान लड़की इस तरह की हरकत कब करती है, यह बात किसी पुलिस वाले को बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि एक पुलिस ऑफिसर तुम जैसी लड़कियों की नस नस से वाकिफ होता है..!"

डॉली-" आप बहुत बेवकूफ अफसर हैं डीआईजी भूषण..! क्योंकि शायद आप भूल गए कि जब रमाशंकर मारा गया तो मोनिका कमरे में बंद थी। जब लालो देवी मारी गई, तब रूपा भी बाथरूम में बंद थी और इस समय आपका कॉन्स्टेबल जीशान भी किचन में बंद है..!

अगर आप एक सिंसियर अधिकारी होते तो फौरन इस बात की तस्दीक करते कि मैंने कांस्टेबल को क्यों बंद किया।

अभी थोड़ी देर पहले आपने इंस्पेक्टर रोनाल्डो को कहा कि वो अपराधी को क्यों नही पकड़ पा रहा है लेकिन वह तो सिर्फ एक इंस्पेक्टर है सर..!

लेकिन आप तो इतनी ऊंची पोस्ट पर हैं..! फिर भी आप अपराधी को पहचान नहीं सके..! क्यों..? सही कहा न..?

डीआईजी भूषण-" क्या मतलब है तेरा..? और क्या बक रही है तू..? और कौन अपराधी है..?"

डॉली-"हाहाहाहा..! अरे तू कैसा डीआईजी है रे..! इतना खुलकर बोल दिया फिर भी तू पहचान नहीं पाया मुझे..!"

डीआईजी भूषण-" क्या क्या मतलब है तेरा और क्या कहना चाहती है तू..?"

डॉली-" यही कहना चाहती हूं कि अपराधियों को संरक्षण देने का अंजाम क्या होता है यह तुझको आज

पता लगेगा..! डीआईजी भूषण..! तू रोनाल्डो को बार-बार फोन इसीलिए करता था, कि जल्दी से जल्दी अपराधी पकड़ा जाए, क्योंकि तुझे डर था कि उस दुर्दांत अपराधी का अगला शिकार कहीं तू ना हो।

और इस समय तू भी डरा हुआ है. !

क्योंकि पुलिस के भेष में तू एक खतरनाक भेड़िया है... गुंडे बदमाश और माफियाओं को संरक्षण देने वाला राक्षस है।

और इस बात को तू अच्छी तरह जानता है, कि इस समय सिर्फ तुझ जैसे कमीने लोग ही मारे जा रहे हैं, जो अपनी वर्दी के नाम पर कलंक है जो इस देश के नाम पर कलंक है, और जिनके आतंक के कारण यहां की जनता डरी हुई है।"

और डॉली जब तक डीआईजी भूषण को उसकी करतूतों के बारे में बताती रही, इतनी देर में डीआईजी ने धीरे से अपनी बंदूक निकाल ली, लेकिन बंदूक चलाने से पहले ही डॉली ने उसके हाथ को मजबूती से पकड़ लिया, और इतनी कसकर दबाया कि उसके हाथ से बंदूक छूट कर नीचे गिर गई।
 
डॉली ने फौरन बंदूक को रुमाल से उठाकर इस एंगल से गोली चलाई जिससे पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ जाहिर

हो जाए कि उसने खुद आत्महत्या की है।

और जीशाम को उसने पहले ही किचन में बंद कर दिया था, जिससे उस पर हत्या का इल्जाम ना आए..!

और डीआईजी भूषण की हत्या करने के बाद वापस जाते समय जिस सिपाही को उससे ₹100 दिए थे अंदर जाने के लिए उससे बोली-" ₹100 इस बात के तुझको इस बात के लिए दिए हैं कि किसी से बताना नहीं कि यहां आई थी, वरना घूस खाने के आरोप में तेरी नौकरी खा जाऊंगी मैं।

फिर भी एक प्रसाद तो तुझको देना ही होगा अपनी इस गुस्ताखी के लिए, जिससे भविष्य में किसी मजबूर गरीब से तू घूस न खाए..!"

इतना कहकर डॉली ने उसके हाथ को टेढ़ा कर दिया..!भूतों का न्याय पार्ट-23

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इंस्पेक्टर रोनाल्डो जब डीआईजी घोष के केबिन में पहुंचा, तो देखते ही समझ गया कि यह मर्डर डॉली ने ही किया है। लेकिन चूंकि यह एक डीआईजी के मर्डर का केस था, इसलिए छानबीन बड़े पैमाने पर होनी थी।

इस केस की जांच में एक बार फिर से सीआईडी कुत्ते की मदद ली गई । फॉरेंसिक टीम ने कई एंगल से फोटो लिए, लेकिन ऊपरी तौर से देखने से हत्या का कोई भी सबूत नहीं मिला। कांस्टेबल जीशान किचन में बंद था। इसलिए उसके द्वारा डीआईजी की हत्या करने का कोई प्रश्न नहीं था।

बाहर सिक्युरिटी कांस्टेबल से पूछा गया कि क्या अंदर कोई आया था। लेकिन वह क्या जवाब देता। अगर इस बात को वह बता देता कि एक लड़की अंदर आई थी, तो एक बहुत बड़ा प्रश्न था उसके सामने की एक लड़की ने उसके हाथ कैसे तोड़े..!

और अगर एक लड़की ने इस बुरी तरह से उसके हाथ

मरोड़ दिए तो क्या ऐसी स्थिति में वह पुलिस की नौकरी करने लायक है..? यह एक ऐसा प्रश्न था कि वह चाह कर भी लड़की का नाम नहीं बता सकता था..! और लड़की की धमकी से वह डरा हुआ भी था।

लेकिन कांस्टेबल की आंखों में डर उसे शक के दायरे में ला रही थी,,कि कहीं कुछ तो गड़बड़ ज़रूर है..! लेकिन पुलिस शक तो किसी पर भी कर सकती है जबकि किसी को अरेस्ट करने के लिए उसे सबूत चाहिए होता है और वह भी पक्का सबूत..!

और जीशान ने पूछताछ करने पर इंस्पेक्टर से सिर्फ इतना ही कहा कि साहब ने ही उसे अंदर चाय बनाने को भेजा था, और फिर ना जाने क्यों उन्होंने बाहर से सिटकिनी बंद कर दी।

और क्योंकि उनका केबिन साउंड प्रूफ है, इसलिए अंदर किचन में कोई आवाज भी नहीं आई।

औऱ मैंने सोचा, कि साहब शायद कोई जरूरी काम में व्यस्त होंगे या कोई ऐसा व्यक्ति आया होगा, जिससे शायद वो कोई गुप्त वार्तालाप कर रहे होगे , इसीलिए उन्होंने अंदर से कुंडा लगा दिया होगा.. ! इसलिए मैंने उन्हें डिस्टर्ब करना उचित ना समझा।

इंस्पेक्टर रोनाल्डो ने सारी औपचारिकताएं पूरी करके

लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

इस हत्या के पीछे सबसे विचित्र बात यही थी कि रमाशंकर की जब मौत हुई, तब मोनिका बाथरूम में बंद थी।

जब लालो देवी की मौत हुई, तब वहां भी सेविका बाथरूम में बन्द थी।

और यहां जब डीआईजी घोष की मौत हुई, तब उसका असिस्टेंट जीशान किचन में लॉक था।

यह तीनों स्थितियां इस बात को और इंगित कर रही,थी कि यह सुसाइड का नहीं बल्कि हत्या का केस है। लेकिन कोई पुख्ता सबूत ना होने के कारण डीआईजी घोष का केस पूरी तरह संदिग्ध था, कि वास्तव में यह केस सुसाइड का है या हत्या का. !

खोजी कुत्ता का व्यवहार यहां भी विचित्र था। क्योंकि यहां भी खोजी कुत्ता बार-बार उछल रहा था। जैसे यह बताने की कोशिश कर रहा हूं की हत्या ऊपर से की गई है। आजू बाजू किसी ने उसे नहीं मारा। और जासूसी कुत्ते कीये हरकत बड़ी अजीबो-गरीब थी। क्योंकि वह उछल उछल कर गो..गो.. की कुछ ऐसी आवाज कर रहा था, मानो वह भी बहुत डरा हुआ हो..!

लेकिनअंत में ले दे के सारा मामला पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बंदूक पर निशान किसके थे, इसकी रिपोर्ट पर निर्भर कर रहा था।

और दो दिन बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साबित हो गया, कि जिस एंगल से बंदूक चलाई गई है उस एंगल से मामला सुसाइड का ही बनता है। और रिपोर्ट में भी यही बताया गया कि बंदूक पर उंगलियों के निशान डीआईजी घोष की उंगलियों के ही थे । और इस प्रकार इस केस को भी सुसाइड का ही केस मान लिया गया, और पुलिस ने फाइल बंद कर दी।

फिर दो दिन बाद जब डीआईजी घोष के केस का मामला ठंडा पड़ गया, तब तीसरे दिन मॉर्निंग वॉक के समय डॉली से रोनाल्डो की मुलाकात हुई। औपचारिक रूप से एक दूसरे को नमस्ते करने के बाद उसी होटल में चाय पीते हुए डॉली ने कहा-" आपके यहां फोन का घनघनाना कुछ कम हुआ या नहीं..!"

रोनाल्डो ने कहा-"फोन का घनघनाना कम होने की बजाय और बढ़ गया..! क्योंकि डीआईजी घोष के मरने के बाद, ये माफिया और भी डर गए हैं और बार-बार उनके फोन कार्यालय में आने लगे हैं।

और मैं जब फोन पर उनसे कहता हूं, कि डीआईजी घोष का मर्डर नहीं हुआ बल्कि उन्होंने सुसाइड किया है, तो इस बात को यह माफिया मानने को तैयार ही

नहीं है। उनका कहना है कि पुलिस कुछ भी कहे..सरकार कुछ भी कहे.. जनता कुछ भी कहे ...पर उनके दिमाग में जो बात है..वो पक्की है। और वो पक्की बात यह है कि डीआईजी घोष की भी हत्या की गई है..!"

डॉली-"मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा कि बदमाश लोग इतने डरे हुए हैं, कि बार-बार उनका फोन आपके पास आ रहा है। लेकिन जो सबसे ज्यादा डरा हुआ हो उसको मारने में सबसे ज्यादा मजा भी है और उसे मारना सबसे आसान भी है..! क्या आप बताएंगे कि अब किसकी मौत होने वाली है..?" डॉली ने कहा

इंस्पेक्टर रोनाल्डो-""मेरे ख्याल में तो अब उसका नंबर लगना चाहिए जो मेरा ट्रांसफर कराने वाला है। क्योंकि डीआईजी घोष की मौत को यह माफिया सरगना सुसाइड मानने को तैयार नहीं है। और इसीलिए वह चाहते हैं कि मेरा ट्रांसफर हो जाए।" इंस्पेक्टर रोनाल्डो ने कहा।

डॉली-"मगर इस समय आप की छवि आम जनता में इतनी अच्छी है कि आपका ट्रांसफर करना किसी के लिए भी इतना आसान नहीं होगा।

हो सकता है कि पब्लिक खुद ही स्ट्राइक कर दे क्योंकि जब तक आप हैं इस क्षेत्र में हैं, यहां की आम जनता

पूरी तरह सुरक्षित है। क्योंकि इधर कोई भी केस किसी की हत्या का नहीं आया है।" डॉली ने कहा।

स्पेक्टर रोनाल्डो-"हां पब्लिक में छवि तो मेरी अच्छी है। और यहां के लोग पुलिस कानून पर भरोसा भी करने लगे हैं। मगर इस बार मेरे ट्रांसफर का आदेश अगर आएगा तो सीधे ऊपर से आएगा। मतलब मिनिस्ट्री लेवल से। क्योंकि कुछ बड़े माफियाओं का संबंध सीधे मिनिस्ट्री से है..!"

डॉली-"अगर कोई ऐसा फोन नंबर हो तो मुझे आप बताएं, जिससे अगर आपके ट्रांसफर का आदेश आये भी, तो उसे कैंसिल कराया जा सके..!"डॉली ने कहा।

रोनाल्डो-"यह आदेश तो सिर्फ मुख्यमंत्री के पास है। मतलब मुख्यमंत्री ही मेरे ट्रांसफर के आदेश को रोक सकते हैं।" इंस्पेक्टर रोनाल्डो ने बताया।

"अगर मुख्यमंत्री आपके ट्रांसफर के आदेश को रोक सकते है, तो इसका अर्थ यह है कि मुख्यमंत्री नहीं बल्कि उनके पीए से संपर्क करना होगा।" डॉली ने अपनी राय व्यक्त की।

"क्योंकि मुख्यमंत्री तो वही करता है जो उसका पीए बोलता है...! और वैसे भी मुख्यमंत्री के पीए में इतनी ताकत होती है , कि वो कोई भी फैसले को

उलट-पुलट कर सकता है और मुख्यमंत्री से भी अपनी बात को मनवा सकता है।" डॉली ने कहा।

"हां, यह बात तो सही है तुम्हारी..!" इंस्पेक्टर रोनाल्डो ने कहा।

डॉली-"तो फिर ठीक है। नेक्स्ट 2 दिनों में मुझे रिपोर्ट दीजिएगा , कि अब सबसे ज्यादा डरे लोगों में कौन सबसे ऊपर है..?मतलब इस हत्या से जुड़ी हुई सबसे ज्यादा पूछताछ आपसे किसने किया और किसने सबसे ज्यादा आपको परेशान किया और आपके साथ दुर्व्यवहार किया..! क्योंकि नेक्स्ट नम्बर उसी का होगा..!

और साथ में उस मुख्यमंत्री के पीए का नंबर भी मुझे दे दें, जिससे अगर आपके ट्रांसफर का आर्डर आये, तो उस आर्डर को मैं कैंसिल करवा सकूं।

"ओके" इंस्पेक्टर ने कहा और यह मॉर्निंग मीटिंग समाप्त हुई, इस वादे के साथ कि 2 दिन बाद यहीं पर फिर मुलाकात होगी..!भूतों का न्याय 24

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दो दिन की खामोशी के बाद तीसरे दिन इंस्पेक्टर रोनाल्डो के फोन की घंटी बज उठी। इंस्पेक्टर रोनाल्डो ने फोन उठाकर पूछा-" हेलो आप कौन..?"

"तू यह मत पूछ कि मैं कौन हूं, बल्कि यह पूछ कि मैं क्या कर सकता हूं..! मैं वह शख्स हूं कि तुझ जैसे इंस्पेक्टर को अपनी जेब में रखता हूं। अपनी उंगलियों पर नचाता हूं.. उन्हें खरीद सकता हूँ.. उन्हें बेच सकता हूं.. उनका ट्रांसफर करवा देता हूं.. उनको मरवा सकता हूं ..और उनका जीना हराम कर सकता हूं..!"

" बहुत बड़ी-बड़ी बातें बोलता है। लेकिन शायद तुझे ये नहीं मालूम, कि जो बादल गरजते हैं वह बरसते नहीं..! और जो काले बादल होते हैं वह सिर्फ डराते हैं, लेकिन उन से डरने वाले बेवकूफ होते हैं। और मैं इंस्पेक्टर रोनाल्डो हूं। और मैं तुझ जैसे भोकने वाले कुत्तों से बिल्कुल नही डरता ..!"

तू बहुत बड़ी गलतफहमी में है। क्योंकि भौंकने वाले

कुत्ते सिर्फ भोंकते नहीं है, काट भी लेते हैं। और कुत्तों से उलझने वालों को इसका अहसास तब होता है, जब वह उनके काटने से वो पागल हो जाते हैं, और बहुत दर्दनाक मौत मरते हैं ..!"

"हा हा हा हा..! मतलब अप्रत्यक्ष रूप से तूने इस बात को मान लिया कि तू भी एक कुत्ता है..! और कुत्ता चाहे जितना भी कटहा हो, वो हमारे दिमाग की बराबरी नहीं कर सकता..! क्योंकि हम उसको अपना फालतू बना एक एक बोटी के लिए उसको तरसा देते है..! और वह हमारे ही रहमों करम पर जिंदा रहता है और हमारे आगे पीछे अपनी दुम हिलाता फिरता है..!"

" मतलब तू मानने वालों में नहीं है इंस्पेक्टर..! तो सुन ले, मैं भी सिर्फ धमकी देने वालों में नहीं हूं। और अब तू देखना, कि मैं तेरे साथ क्या करता हूं। सोचा तो था कि तेरा ट्रांसफर करवा कर अपना रास्ता साफ कर लूँ, लेकिन नहीं..! तुझ जैसे खतरनाक जीव को तो मार कर ही मेरे को चैन होगा..! इसलिए अब आज और अभी से अपने जीवन की उल्टी गिनती शुरू कर दे तू..!"

"अपने जीवन की उल्टी गिनती गिनना शुरू कर दूं..! हा हा हा हा..! ले, शुरू कर दिया उल्टी गिनती..!"

और यह कह कर इंस्पेक्टर ने 100 से उल्टी गिनती

सुनना शुरू कर दिया 100, 99, 98, 97,96......3, 2, 1....! और 1 तक आने के बाद बोला-" गजब मैं तो 100 से उल्टी गिनती गिन कर 1 तक वापिस भी आ गया, लेकिन कुछ भी तो नहीं हुआ..? और मैं भला चंगा हूं..? हा हा हा हा..!"

"ये जो मस्ती कर रहा है ना अभी, थोड़ी देर में ही सब कुछ भूल जाएगा, जब मौत तेरे सामने होगी.. और तू पिंजरे में बंद शेर की भांति सिर्फ दहाड़ेगा.. पर कर कुछ न सकेगा..!"

"मुझे तो तू कोई पागल लगता है ..! चल रख फोन..नाटक बाज कहीं का..! इस्पेक्टर रोनाल्डो के आगे तुझ जैसे बदमाश न जाने कितने आए और गए..! " और यह कहकर इंस्पेक्टर ने फोन काट दिया।

दरअसल इंस्पेक्टर डोनाल्डो काफी बेफिक्र था, जब से डॉली का उसको साथ मिला था। कारण उसके क्षेत्र में वारदातों की बिल्कुल कमी हो गई थी। और अगर किसी थाने के सीमा क्षेत्र में वारदात ना हो, तो वहां के इंस्पेक्टर को पब्लिक का सपोर्ट सबसे ज्यादा मिलता है और उसको उस थाने से हटाना आसान नहीं होता। इसी वजह से उस अजनबी आगंतुक की धमकी से इंस्पेक्टर डरा नहीं। और बेखौफ उससे बात करता रहा। तभी एक सिपाही राणा ने इंस्पेक्टर से कहा-" सर किसका फोन था..?"

इंस्पेक्टर ने कहा-" शायद किसी माफिया कुत्ते का था, जो मुझको, मतलब इंस्पेक्टर रोनाल्डो को धमकाने की कोशिश कर रहा था..! मगर उसको यह नहीं पता कि इंस्पेक्टर रोनाल्डो किस बला का नाम है। अगर मुझ से टक्कर लेने की उसने हिम्मत की, तो उसका भी वही हाल होगा जो विधायक रमाशंकर लालो और डीआईजी घोष का हुआ..! डीआईजी घोष हमारे विभाग में ज़रूर थे, लेकिन उनकी गतिविधियां शुरू से ही संदिग्ध थी।"

" तो क्या इन सब के सुसाइड करने या इनकी हत्या के पीछे आपका हाथ हैं..?" राधा ने आश्चर्य से कहा।

" ओह नो। यह सब सिर्फ मेरे दुश्मन नहीं, बल्कि पुलिस के साथ साथ जनता के भी दुश्मन थे..और आजकल ऐसे लोग ही चुन चुन कर मारे जा रहे हैं..या सुसाइड कर रहे हैं। इसी को देखते ही मेरा कहना है कि अगर किसी ने भी पुलिस को धमकाने की कोशिश की और अगर वो जनता का भी दुश्मन हुआ तो उसकी मौत पक्की है..!" इंस्पेक्टर ने तुरंत अपनी गलती को सुधारते हुए कहा

"यस सर , आपका कहना बिल्कुल सही है । वैसे फोन पर आपकी बातें सुनकर मुझे ऐसा लगा, जैसे यह फोन माफिया डॉन राजा का है। लेकिन राजा तो मुंबई में रहता है। और उसके काम करने का इलाका भी मुंबई

ही है।" राणा ने कहा

"लेकिन यह माफिया डॉन राजा के बारे में तुम्हें कैसे इतनी जानकारी है..?" स्पेक्टर रोनाल्डो ने उससे पूछा

"सर मैं मुंबई का ही रहने वाला हूं। इसलिए उसके बारे में काफी कुछ जानता हूं। अक्सर वो अपने दुश्मनों से उल्टी गिनती गिनवाता है। आप भी उल्टी गिनती गिन रहे थे, इसी से मुझ को शक हुआ कि कहीं राजा ने ही आपको फोन ना किया हो।" राणा ने कहा

"अगर ऐसा है, इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है! क्योंकि यह डॉन मुंबई में हो या विदेश में, इनके आदमी पूरी दुनियां में होते हैं। इसलिए अगर इस राजा ने मुझको धमकी दी भी है, तो इसका मतलब है कि उसका कोई आदमी हमारे इलाके में भी है। और उसी के दम पर वो धमकी दे रहा है। बाकी कौन है वो, इसका पता करना होगा..! बल्कि यूं समझो कि उसका इंतजार करना होगा। क्योंकि वह जो भी हो, अपने डॉन राजा के आदेश पर अब तक एक्टिव हो गया होगा। लेकिन फिलहाल किसी से डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन सजग रहने की जरूरत ज़रूर है। और अगर हम सजग रहे ..अलर्ट रहे.. तो बहुत शीघ्र उसका आदमी भी हमारे फंदे में फंसेगा और एक दिन वो राजा खुद भी हमारे फंदे में होगा, चाहे वह मुंबई में हो या किसी और कंट्री में..!"

"यस सर।" सिपाही ने हामी भरी। फिर थोड़ा रुक कर बोला-" वैसे एक बात है सर..।"

" हां बोलो.."

" अगर राजा का कोई आदमी भी हमारी गिरफ्त में आ जाता है या हम उसे मारने में कामयाब हो जाते हैं तो यह हमारी बहुत बड़ी सफलता होगी और हमारा नाम पूरे हिंदुस्तान में छा जाएगा और तब हमारी तरक्की भी पक्की है..!"

" राणा। तरक्की तो तुमको ही मुबारक। क्योंकि सरकार तरक्की करने के बाद अक्सर ट्रांसफर कर देती है। लेकिन मैं फिलहाल यहां से कहीं नहीं जाना चाहता। क्योंकि यह शहर मुझे रास आ गया है और यहां काम करने में मजा भी आने लगा है। क्योंकि जब भी कोई माफिया या गुंडा यहां मरता है, तो एक अजीब सी खुशी मिलती है दिल को।"

" हां, यह बात तो सही है सर। क्योंकि इधर अधिकतर गुंडों माफियाओं का ही सफाया हो रहा है। कौन कर रहा है..? यह तो मालूम नहीं, लेकिन वो जो कोई भी है, इन माफियाओं गुंडों का जितना बड़ा दुश्मन है, उतना ही बड़ा हमारा मित्र है..जनता का मित्र है..!"

"हाँ। यही तो मेरा भी कहना है, कि वो वास्तव में हमारा सबसे बड़ा मित्र हैं। और इस दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग हैं, जो गुमनाम होकर इस समाज का भला करते हैं.. निस्वार्थ भाव से.. देशहित में..! और ऐसी सभी महान आत्माओं को मेरा दिल से नमन है..!"

"और मेरा भी..!" राणा ने कहा।

" राणा। मेरी अनुपस्थिति में अगर कभी भी और कोई फोन आए और शहर में होने वाली इन मौतों के के बारे में पूछे, तो उनकी एक अलग फाइल मेंटेन कर उनके बारे में जितनी भी डिटेल मिले, उसे नोट कर लेना। क्योंकि इस समाज को गंदा करने में सबसे ज्यादा इन्हीं का हाथ है। और इनमें से अधिकांश लोग सफेदपोश अपराधी हैं। मतलब जनता की नजरों में तो यह सम्माननीय है, लेकिन हकीकत में ये चोर बदमाश और किराए के गुंडों और हत्यारों से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है..!

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