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लालो देवी की समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें। जग्गू और टेंपो ड्राइवर का खून एक बहुत बड़ी पहेली थी, जिसका हल उसकी समझ में नहीं आ रहा था। क्या रूपा ने उन दोनों की हत्या कर दी..? मगर यह कैसे हो सकता है..? और क्या उस लड़की डॉली ने उनकी हत्या की..? मगर यह भी नामुमकिन सा है। उन क्रूर माफियाओं को ये नाजुक लड़कियां कैसे मार सकती है..? और डॉली का रूपा से ये कहना, कि जो भी तुम्हारे साथ गलत करेगा उसको ईश्वर मौत की सजा देगा, क्या उसकी बातों में वाकई कोई रहस्य है..? टेंपो ड्राइवर और जग्गू की नीयत खराब थी, वह दोनों रूपा की इज्जत लूट कर उसे मार देना चाहते थे, लेकिन उन दोनों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, और रूपा का बाल भी बांका न हुआ और वो सही सलामत वापस आ गई, यह इतना रहस्यमय क्यों लग रहा है मुझे..?
मैं भी रूपा को मारना चाहती हूं, और अब तो रामाशंकर का भी आदेश है कि मैं उसे खत्म कर दूं, या उसे आत्महत्या करने पर विवश कर दूँ.. तो कहीं मेरा
भी वही हश्र ना हो, जो जग्गू और टेंपो ड्राइवर का हुआ..! इस बात का ख्याल आते ही उसके पूरे बदन में कंपकंपी आ गई। लेकिन अगर वो ऐसा नहीं करती, तो रामाशंकर उसे मरवा देगा..!
उफ्फ..! किस मुसीबत में फंस गई है वो..! इधर कुआं और उधर खाई ..! क्या करूं कुछ समझ में नहीं आ रहा है..!
फिर कुछ सोचकर उसने घंटी बजाई। एक बार फिर वही औरत आई, जिसने उसके कहने से रूपा को अंधेरी कोठरी में बंद कर दिया था।
"यस मैम..!" उस औरत ने कहा।
लालो देवी-"रूपा को अंधेरी कोठरी से निकालकर मेरे रूम में पहुंचाओ। और उसके लिए वीआईपी खान पान की व्यवस्था करो। और मैं अभी आधे घंटे में आती हूं..!"
और लालू देवी के आदेश से थोड़ी देर बाद ही रुपा उसके अपने कमरे में थी, जहां सुख सुविधा की सारी व्यवस्था थी और खानपान का विशेष इंतजाम था।
आधे घंटे बाद लालो देवी अपने रूम में पहुंची। उसने देखा कि रूपा जमीन पर किसी नौकरानी की भांति
पड़ी हुई थी। उसके समझ में नहीं आया, कि जब उसके कमरे में बेहतरीन बिस्तर बिछा है.. खाने पीने की बेहतरीन व्यवस्था है.. फिर वो किसी नौकरानी की भांति जमीन पर क्यों पड़ी है..? क्या यह लड़की जग्गू की और टेंपो ड्राइवर की हत्या कर सकती है..? नामुमकिन..! क्योंकि अगर इसने जग्गू और टेंपो ड्राइवर की हत्या की होती, तो इस समय शान से मेरे बिस्तर पर पड़ी होती..! और शायद एसी भी चला लिया होता है इसने..! लेकिन इस तरह जमीन पर तो बिल्कुल ना होती।
फिलहाल कमरे के अंदर घुसते ही सबसे पहले उसने रूपा को जमीन से उठाया और सोफे पर बैठा दिया। फिर पूछा-"जरा सोच कर मेरे को बता,, कि तू यहां से भागी क्यों और जब तू भागी तो तेरे साथ क्या हुआ..? और तू यहां वापस क्यों आई और कैसे आई..?
रूपा- मुझे वो लड़की वापस ले आई। मैं अपने होश में नहीं थी। शायद मैं आसमान में तैर रही थी। तभी इस लड़की ने मुझे पकड़ लिया और मेरे कहने पर यहां ले आई मुझे..!
लालो देवी-" लेकिन यह कैसे हो सकता है, क्योंकि तू आसमान पर नहीं बल्कि जमीन पर ही थी। यहां से भागने के बाद शायद वो जग्गू और वो टेंपो ड्राइवर तेरे साथ कुछ गलत कर रहे थे..? सोच के बता तू, क्या
उन दोनों में से किसी ने तेरे कपड़े उतारे थे..?"
रूपा-" मुझे नहीं याद है। क्योंकि मैं बहुत सुरूर में थी। और मैं हवा में तैर रही थी। बहुत रंगीन और मस्त दुनिया थी..! मैं बहुत मजे में थी। फिर अचानक सब कुछ जैसे उड़ गया। फिर मैंने अपने सामने एक लड़की को अपने सामने देखा। और उस लड़की ने ही मुझे यहां तक पहुंचाया। और मुझे कुछ भी याद नहीं है। लेकिन मैं अब यहां से कहीं नहीं जाऊंगी।
लालो देवी ने उसकी बातों को सुनकर अपना माथा पीट लिया। उसने बहुत कोशिश की, कि रूपा से कोई राज उगलवा ले, लेकिन वो कामयाब न हो पाई। और तब अचानक उसे बहुत तेज गुस्सा आया। उसने रूपा के बाल पकड़ लिये, और उन्हें खींचते हुए बोली-" मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगी। मार दूंगी मैं तुझे..! कुछ समझा तूने..!"
रूपा-" तू मुझे नहीं मार पाएगी, क्योंकि फिर तुझको भी मरना होगा। जग्गू की तरह। हा हा हा हा. ! हा हा हा हा..!!"
रूपा को पागलों की तरह यूं हंसते हुए देख लालो देवी के पसीने छूट गए और उसने उसको छोड़ते हुए कहा-" मैं इतनी आसानी से मरने वाली नहीं हूँ। मैं तेरी बोटियों को काट कर कुत्तों को खिला दूंगी..! तेरा
नाम-ओ-निशान मिटा दूंगी मैं..!"
रूपा-" हिम्मत हो तो काट दे मुझे, और खिला दे मेरी बोटियाँ अपने कुत्तों को..! लेकिन फिर तू भी काटी जाएगी। औऱ तेरी बोटियों को भी कुत्ते नोचेंगे..!"
लालो देवी उसकी धमकी सुनकर सन्न रह गई। उसने उसके जिस्म से उसकी धोती अलग कर दिया और बोली-" क्या कर लेगी तू..? उस दिन तू यहां से भाग गई थी। लेकिन आज नहीं भाग पाएगी, क्योंकि मैं यहां से हटने वाली नहीं है। और मैं तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी। बल्कि अभी फोन कर दो गुंडों को बुलवाती हूं। और अपने सामने तेरी बोटी बोटी नोचवाती हूं..!" यह कहकर उसने किसी को फोन लगाया और बोली- "निराश्रित महिला सेवा सदन से लालो देवी..!"
"हाँ बोल..!" उधर से आवाज आई।
" आजा। हुस्न की परी तुम दोनों का इंतजार कर रही है। और यहां पूरी आजादी है। पुलिस कानून किसी का डर नहीं है। निर्भय होकर अपनी प्यास बुझा। लोग अपनी रातें रंगीन बनाते हैं..! तू भी अपनी रात रंगीन बना ले। दारू पी और मीट मुर्गा खा..! और जिंदा जिस्म का गोश्त भी खा..!! और बाद में लाश को कुछ इस तरह ठिकाने लगाना है, कि फरिश्तों को भी उसका
पता ना लगे, कि उसे जमीन खा गई या आसमान..!"
" ठीक है..! तू इंतजार कर..!!" उधर से आवाज आई और फोन कट गया..!"
फोन रखने के बाद लालो देवी बोली-" अब देखती हूँ, कि कौन तेरे को कौन बचाता है..?" ये कहकर लालो देवी ने जोर का अट्टहास लगाया।
रोमू और सोमू शहर के नामी गुंडे थे। पुलिस की हिट लिस्ट में उनका नाम था। खून कत्ल और रेप यही उनका काम था। पुलिस इन पर हाथ डालने से डरती थी। क्योंकि गुंडा होने के बावजूद पुलिस उन पर गोली नहीं चला सकती थी, और न इनका एनकाउंटर कर सकती थी। क्योंकि फिर पुलिस पर ही जांच कमेटी बैठ जाती। और ऐसा इसलिए होता, क्योंकि कुछ बड़े नेताओं का पीठ पीछे उस पर हाथ था।
लेकिन आज इन दोनों को एक अच्छी दावत का ऑफर मिला था। और दावत देने वाली थी लालो देवी..! आमतौर पर शिकार करने के लिए इन्हें मोटी रकम मिलती थी। लेकिन जिस तरह कोई शेर गुपचुप अपने शिकार पर झपट्टा मार कर खा जाता है, उसी प्रकार इन्हें इंसानों पर झपट्टा मारकर उन्हें दबोचना होता था, पर फिर शिकार के साथ वही करना होता था, जो उन्हें अपने आकाओं का आदेश होता था। लेकिन आज का
शिकार बहुत मस्त था, क्योंकि यह शिकार पहले से ही पिंजरे में बंद था। और इस शिकार के साथ मनमानी करने की छूट भी उन्हें मिल चुकी थी। और यह छूट दी थी उन्हें लालो देवी ने..!
प्रिया खाना पीना खाकर सोने जा रही थी, कि अचानक भूतभाई ने उसे दर्शन दिए।
डॉली-क्या हुआ भूत भाई। इतनी रात में कैसे ..?
भूत भाई-तेरी मम्मी सो गई है। तू जल्दी से अपनी स्कूटी निकाल और मेरे साथ चल। दो गुंडों को खत्म करना है। बहुत भयानक है ये । क्योंकि देश समाज के दुश्मन है ये। और पुलिस के लिए भी सिरदर्द हैं। क्योंकि कुछ नेताओं के ये दाएं और बाएं हाथ है..! इस समय दोनों रास्ते में है, और रूपा के साथ कुछ गलत करने के इरादे से निराश्रित महिला सेवा सदन को जा रहे हैं। सिर्फ आधे घंटे में उनका काम तमाम कर वापस आ जाना और चुपचाप अपने बेड पर सो जाना। किसी को कुछ खबर नहीं लगेगी ।
डॉली-"ओके भूत भाई..!"
डॉली ने फौरन अपनी स्कूटी निकाली। भूत भाई डॉली के अंदर प्रवेश कर गया और उसे रास्ता बताने लगा । और 10 मिनट में ही उसका सामना रोमू और सोमू से
हो गया।
भूत भाई-"सुन, इनसे कोई बहस बाजी मत कर। रात का सन्नाटा है। दूर-दूर तक कोई नहीं है यहां। दोनों के पैर खींच कर गिरा दे इन्हें। फिर इनके जबड़े प्रहार कर जिससे ये दोनों यहीं खत्म हो जाए। और अपने घर वापस चल।
डॉली ने यही किया। गाड़ी रोकी और जब तक ये दोनों कुछ समझते, डॉली ने पीछे से इनकी दोनों टांगे खींच दी। दोनों मुंह के बल गिरे, और जब तक वो सम्हलते, डॉली ने उन दोनों का थोबड़ा तोड़ दिया। और दोनों की छुट्टी कर दी। फिर वापस अपने घर आ कर चुपचाप अपने बेड पर लेट गई। भूत भाई भी उसके जिस्म से निकलकर अंतरिक्ष में विलीन हो गए। मम्मी सोती रही और किसी को कुछ खबर ना लगी..! उधर काफी देर तक लालो देवी उन गुंडों के आने का इंतजार करती रही..! तभी उसको खबर मिली, उन दोनों नामी गुंडों को किसी ने बड़ी बेरहमी से मार दिया। इस खबर को सुनते ही उसके होश उड़ गए, और वो किसी सूखे पत्ते की भांति कांपने लगी..!
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मैं भी रूपा को मारना चाहती हूं, और अब तो रामाशंकर का भी आदेश है कि मैं उसे खत्म कर दूं, या उसे आत्महत्या करने पर विवश कर दूँ.. तो कहीं मेरा
भी वही हश्र ना हो, जो जग्गू और टेंपो ड्राइवर का हुआ..! इस बात का ख्याल आते ही उसके पूरे बदन में कंपकंपी आ गई। लेकिन अगर वो ऐसा नहीं करती, तो रामाशंकर उसे मरवा देगा..!
उफ्फ..! किस मुसीबत में फंस गई है वो..! इधर कुआं और उधर खाई ..! क्या करूं कुछ समझ में नहीं आ रहा है..!
फिर कुछ सोचकर उसने घंटी बजाई। एक बार फिर वही औरत आई, जिसने उसके कहने से रूपा को अंधेरी कोठरी में बंद कर दिया था।
"यस मैम..!" उस औरत ने कहा।
लालो देवी-"रूपा को अंधेरी कोठरी से निकालकर मेरे रूम में पहुंचाओ। और उसके लिए वीआईपी खान पान की व्यवस्था करो। और मैं अभी आधे घंटे में आती हूं..!"
और लालू देवी के आदेश से थोड़ी देर बाद ही रुपा उसके अपने कमरे में थी, जहां सुख सुविधा की सारी व्यवस्था थी और खानपान का विशेष इंतजाम था।
आधे घंटे बाद लालो देवी अपने रूम में पहुंची। उसने देखा कि रूपा जमीन पर किसी नौकरानी की भांति
पड़ी हुई थी। उसके समझ में नहीं आया, कि जब उसके कमरे में बेहतरीन बिस्तर बिछा है.. खाने पीने की बेहतरीन व्यवस्था है.. फिर वो किसी नौकरानी की भांति जमीन पर क्यों पड़ी है..? क्या यह लड़की जग्गू की और टेंपो ड्राइवर की हत्या कर सकती है..? नामुमकिन..! क्योंकि अगर इसने जग्गू और टेंपो ड्राइवर की हत्या की होती, तो इस समय शान से मेरे बिस्तर पर पड़ी होती..! और शायद एसी भी चला लिया होता है इसने..! लेकिन इस तरह जमीन पर तो बिल्कुल ना होती।
फिलहाल कमरे के अंदर घुसते ही सबसे पहले उसने रूपा को जमीन से उठाया और सोफे पर बैठा दिया। फिर पूछा-"जरा सोच कर मेरे को बता,, कि तू यहां से भागी क्यों और जब तू भागी तो तेरे साथ क्या हुआ..? और तू यहां वापस क्यों आई और कैसे आई..?
रूपा- मुझे वो लड़की वापस ले आई। मैं अपने होश में नहीं थी। शायद मैं आसमान में तैर रही थी। तभी इस लड़की ने मुझे पकड़ लिया और मेरे कहने पर यहां ले आई मुझे..!
लालो देवी-" लेकिन यह कैसे हो सकता है, क्योंकि तू आसमान पर नहीं बल्कि जमीन पर ही थी। यहां से भागने के बाद शायद वो जग्गू और वो टेंपो ड्राइवर तेरे साथ कुछ गलत कर रहे थे..? सोच के बता तू, क्या
उन दोनों में से किसी ने तेरे कपड़े उतारे थे..?"
रूपा-" मुझे नहीं याद है। क्योंकि मैं बहुत सुरूर में थी। और मैं हवा में तैर रही थी। बहुत रंगीन और मस्त दुनिया थी..! मैं बहुत मजे में थी। फिर अचानक सब कुछ जैसे उड़ गया। फिर मैंने अपने सामने एक लड़की को अपने सामने देखा। और उस लड़की ने ही मुझे यहां तक पहुंचाया। और मुझे कुछ भी याद नहीं है। लेकिन मैं अब यहां से कहीं नहीं जाऊंगी।
लालो देवी ने उसकी बातों को सुनकर अपना माथा पीट लिया। उसने बहुत कोशिश की, कि रूपा से कोई राज उगलवा ले, लेकिन वो कामयाब न हो पाई। और तब अचानक उसे बहुत तेज गुस्सा आया। उसने रूपा के बाल पकड़ लिये, और उन्हें खींचते हुए बोली-" मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगी। मार दूंगी मैं तुझे..! कुछ समझा तूने..!"
रूपा-" तू मुझे नहीं मार पाएगी, क्योंकि फिर तुझको भी मरना होगा। जग्गू की तरह। हा हा हा हा. ! हा हा हा हा..!!"
रूपा को पागलों की तरह यूं हंसते हुए देख लालो देवी के पसीने छूट गए और उसने उसको छोड़ते हुए कहा-" मैं इतनी आसानी से मरने वाली नहीं हूँ। मैं तेरी बोटियों को काट कर कुत्तों को खिला दूंगी..! तेरा
नाम-ओ-निशान मिटा दूंगी मैं..!"
रूपा-" हिम्मत हो तो काट दे मुझे, और खिला दे मेरी बोटियाँ अपने कुत्तों को..! लेकिन फिर तू भी काटी जाएगी। औऱ तेरी बोटियों को भी कुत्ते नोचेंगे..!"
लालो देवी उसकी धमकी सुनकर सन्न रह गई। उसने उसके जिस्म से उसकी धोती अलग कर दिया और बोली-" क्या कर लेगी तू..? उस दिन तू यहां से भाग गई थी। लेकिन आज नहीं भाग पाएगी, क्योंकि मैं यहां से हटने वाली नहीं है। और मैं तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी। बल्कि अभी फोन कर दो गुंडों को बुलवाती हूं। और अपने सामने तेरी बोटी बोटी नोचवाती हूं..!" यह कहकर उसने किसी को फोन लगाया और बोली- "निराश्रित महिला सेवा सदन से लालो देवी..!"
"हाँ बोल..!" उधर से आवाज आई।
" आजा। हुस्न की परी तुम दोनों का इंतजार कर रही है। और यहां पूरी आजादी है। पुलिस कानून किसी का डर नहीं है। निर्भय होकर अपनी प्यास बुझा। लोग अपनी रातें रंगीन बनाते हैं..! तू भी अपनी रात रंगीन बना ले। दारू पी और मीट मुर्गा खा..! और जिंदा जिस्म का गोश्त भी खा..!! और बाद में लाश को कुछ इस तरह ठिकाने लगाना है, कि फरिश्तों को भी उसका
पता ना लगे, कि उसे जमीन खा गई या आसमान..!"
" ठीक है..! तू इंतजार कर..!!" उधर से आवाज आई और फोन कट गया..!"
फोन रखने के बाद लालो देवी बोली-" अब देखती हूँ, कि कौन तेरे को कौन बचाता है..?" ये कहकर लालो देवी ने जोर का अट्टहास लगाया।
रोमू और सोमू शहर के नामी गुंडे थे। पुलिस की हिट लिस्ट में उनका नाम था। खून कत्ल और रेप यही उनका काम था। पुलिस इन पर हाथ डालने से डरती थी। क्योंकि गुंडा होने के बावजूद पुलिस उन पर गोली नहीं चला सकती थी, और न इनका एनकाउंटर कर सकती थी। क्योंकि फिर पुलिस पर ही जांच कमेटी बैठ जाती। और ऐसा इसलिए होता, क्योंकि कुछ बड़े नेताओं का पीठ पीछे उस पर हाथ था।
लेकिन आज इन दोनों को एक अच्छी दावत का ऑफर मिला था। और दावत देने वाली थी लालो देवी..! आमतौर पर शिकार करने के लिए इन्हें मोटी रकम मिलती थी। लेकिन जिस तरह कोई शेर गुपचुप अपने शिकार पर झपट्टा मार कर खा जाता है, उसी प्रकार इन्हें इंसानों पर झपट्टा मारकर उन्हें दबोचना होता था, पर फिर शिकार के साथ वही करना होता था, जो उन्हें अपने आकाओं का आदेश होता था। लेकिन आज का
शिकार बहुत मस्त था, क्योंकि यह शिकार पहले से ही पिंजरे में बंद था। और इस शिकार के साथ मनमानी करने की छूट भी उन्हें मिल चुकी थी। और यह छूट दी थी उन्हें लालो देवी ने..!
प्रिया खाना पीना खाकर सोने जा रही थी, कि अचानक भूतभाई ने उसे दर्शन दिए।
डॉली-क्या हुआ भूत भाई। इतनी रात में कैसे ..?
भूत भाई-तेरी मम्मी सो गई है। तू जल्दी से अपनी स्कूटी निकाल और मेरे साथ चल। दो गुंडों को खत्म करना है। बहुत भयानक है ये । क्योंकि देश समाज के दुश्मन है ये। और पुलिस के लिए भी सिरदर्द हैं। क्योंकि कुछ नेताओं के ये दाएं और बाएं हाथ है..! इस समय दोनों रास्ते में है, और रूपा के साथ कुछ गलत करने के इरादे से निराश्रित महिला सेवा सदन को जा रहे हैं। सिर्फ आधे घंटे में उनका काम तमाम कर वापस आ जाना और चुपचाप अपने बेड पर सो जाना। किसी को कुछ खबर नहीं लगेगी ।
डॉली-"ओके भूत भाई..!"
डॉली ने फौरन अपनी स्कूटी निकाली। भूत भाई डॉली के अंदर प्रवेश कर गया और उसे रास्ता बताने लगा । और 10 मिनट में ही उसका सामना रोमू और सोमू से
हो गया।
भूत भाई-"सुन, इनसे कोई बहस बाजी मत कर। रात का सन्नाटा है। दूर-दूर तक कोई नहीं है यहां। दोनों के पैर खींच कर गिरा दे इन्हें। फिर इनके जबड़े प्रहार कर जिससे ये दोनों यहीं खत्म हो जाए। और अपने घर वापस चल।
डॉली ने यही किया। गाड़ी रोकी और जब तक ये दोनों कुछ समझते, डॉली ने पीछे से इनकी दोनों टांगे खींच दी। दोनों मुंह के बल गिरे, और जब तक वो सम्हलते, डॉली ने उन दोनों का थोबड़ा तोड़ दिया। और दोनों की छुट्टी कर दी। फिर वापस अपने घर आ कर चुपचाप अपने बेड पर लेट गई। भूत भाई भी उसके जिस्म से निकलकर अंतरिक्ष में विलीन हो गए। मम्मी सोती रही और किसी को कुछ खबर ना लगी..! उधर काफी देर तक लालो देवी उन गुंडों के आने का इंतजार करती रही..! तभी उसको खबर मिली, उन दोनों नामी गुंडों को किसी ने बड़ी बेरहमी से मार दिया। इस खबर को सुनते ही उसके होश उड़ गए, और वो किसी सूखे पत्ते की भांति कांपने लगी..!
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