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मैंने गौर किया कि वो अभी भी ’विभा का अंग’ बोल रहे थे, ’विभा की चूत’ नहीं तो मैंने कहा, "आप ठीक अंदाजा लगाए हैं, वो सिर्फ़ पाँच साल की लडकी का बूर ही ढँक सकती है। विभा जैसी लडकी की चूत तो अब इतना फ़ूली हुई होगी कि वो दोँ ईंच में सिर्फ़ उसकी चूत की फ़ाँक को ढँकी होगी। अगर अभी विभा का पैन्ट खोल कर देखा जाए तो उसका फ़ूला हुआ चूत और सारा झाँट साफ़ दिखेगा, बशर्ते की वो अपना झाँट साफ़ न की हो"।
मैने अपनी बहन के बारे में जैसे बोला, सलीम चाचा सब मुँह बाए सब सुन रहे थे। मैंने अब उनको जाँचते हुए आगे कहा, "मेरे ख्याल से वब त्रिकोणी पैन्टी ज्यादा से ज्यादा नूर की चूत ढँक सकती है, वो अभी बच्ची जैसी ही है और दुबली भी बहुत है। अभी जो उम्र है उसकी उसमें झाँट भी ज्यादा फ़ैली नहीं होगी उसकी चूत पर, ज्यादा बाल चूत के ऊपर की तरफ़ ही होगा अभी। आपको तो पता ही होगा कि १८ के आस-पास से लडकी की झाँट साईड की तफ़ फ़ैलने लगती है और पीछे गाँड़ की छेद के चारों तरफ़ हो जाती है। विभा और सायरा दोनों २० पार हैं तो उनका झाँट अपना पूरा आकार ले लिया होगा पर नूर का अभी भी फ़ैलना बाकी होगा।"
अब सलीम चाचा भी मेरे साथ खुलने लगे और नूर के बारे में बताया, "नूर तो जैसा मैंने बताया था न ... बिल्कुल ही अल्हड है अभी। फ़्रौक या स्कर्ट पहनेगी और उठते-बैठते उसको इसका ख्याल ही नहीं रहेगा। जब तब उसकी जाँघ या पैन्टी दिखते कह्ते रहेगी। जुल्का कितना डाँटती है कि घर पर बाप और भाई भी तो हैं मर्द... उनसे तो पर्दा रखो... पर कुछ फ़ायदा नहीं। अभी तक वो यहाँ रहती तो तुम देखते उसकी हरकत..."।
मैंने कहा, "अभी नासमझ है... धीरे-धीरे सब जान जाएगी। कुछ लड़कियाँ जल्दी जवान हो जाती है और कुछ को टाईम लगता है।" हमें आए करीब दो घन्टा हो गया था सो मैंने अब विभा को आवाज लगाई, "विभा, चलो बाबू अब... बहुत समय हो गया।"
विभा की जगह नूर की आवाज आई, "बस दो मिनट भैया... दीदी बाथरूम में है"।
थोड़ी देर में विभा सलीम चाचा के दोनों बेटियों और उनके भतीजे के साथ कमरे में आई। जमील भी २४-२५ का जवान लडका था और वो जब हम बातें कर रहे थे तब आया था और फ़िर भीतर जाने के बाद विभा के आकर्षण से बँध कर वहीं फ़ँस गया था। अच्छा ही हुआ... अगर वो हमारे साथ बैठ जाता तो शायद हम दोनों में वैसी बातें नहीं होतीं जो सिर्फ़ मेरे और सलीम चाचा के रहते हुई। सब लडकियाँ चहक रही थीं और हँस रही थीं। सलीम चाचा की नजर फ़िर से विभा की छाती पर टिक गई जहाँ से उसके टाईट टी-शर्ट पर किशमिश के दाने की तरह उसके निप्पल उभरे हुए थे। लो-वेस्ट कैप्री की वजह से विभा के हिलने-डुलने से उसके कसे हुए पेट की गोरी चमडी झलक जाती थी।
सलीम चाचा बोले, "अरे बच्चियों... थोडा हमारे साथ भी बैठो न। इतने बुढे हम थोडे ना हो गए है कि हमें अपनी सर्किल से ही बाहर कर दो"।
सब हँसते हुए पास की कुर्सियों पर बैठ गए। नूर और सायरा दोनों बहनें सलीम चाचा के अगल-बगल में ही बैठी मेरे बिल्कुल सामने सोफ़े पर। विभा मेरे बगल में बैठ गई जिससे सलीम चाचा के चेहरे पर चमक आ गई। जमील मेरे दूसरी तरफ़ बैठ गया था।
विभा जब मेरे बगल में बैठ रही थी तो मैंने गौर किया कि उसकी पैन्टी गायब थी। मुझे माजरा समझ में नहीं आया। एक बार तो लगा कि क्या विभा अंदर जमील से चुदा ली है। पर मुझे पता था कि विभा को जब चोदो, उसका चेहरा लाल भभूका हो जाता है और करीब आधा-घन्टा लगता है फ़िर चेहरा सामान्य होने में। तो यह सोच कर मैंने विभा की चुदाई वाली बात को दिमाग से हटाया, पर मैं किसी तरह से समझ नहीं पाया कि आखिर उसकी पैन्टी गायब कैसे हो गई। वो बिल्कुल सामन्य तरीके से चाचा से बात कर रही थी।
अब मैं भी सामने बैठी सायरा से बात करने लगा। सायरा बहुत ही संयत तरीके से मेरे सवाल का जवाब दे रही थी और हमारे बात-चीत में जमील भी कभी-कभार कुछ बोल देता था। मेरी नजर नूर पर भी थी और मैं उम्मीद कर रहा था कि वो कुछ ऐसा करेगी जिससे मुझे उसके क्रौक के भीतर झाँकने का मौका मिले पर मुझे तब निराशा ही हाथ लगी।
करीब आधे-घंटे बाद हम घर वापस आ गए। चाय के बाद चले गप्प और फ़िर पकौड़ों के दौर ने हमारा पेट भर दिया था और अब हमें कुछ खाने की जरुरत महसूस नहीं हो रही थी।
घर में घुसते हीं मैंने विभा को अपनी गोदी में उठा कर चुमते हुए कहा, "आज तो बहुत जान-मारूँ टाईप का माल दिख रही हो मेरी जान...। घायल ही की हो या कत्ल भी कर आई...?"
वो थोड़ा मुस्कुराते हुए बोली, "जैसा सोच कर गई थी, वैसा ही रहा सब...। आपके लिए रास्ता बना रही हूँ, अभी तो सायरा पर जमील का ही जादू चढा हुआ है, पर जमील लगता है मेरे से फ़ँस जाएगा। फ़िर मैं भैया आपके लिए सायरा को तैयार होने के लिए जमील से दबाब देने को कहुँगी।"
मैंने भी उसको बिस्तर पर लिटाते हुए सब बताया कि कैसे सलीम चाचा उस पर फ़िदा हैं... और वो तो अब उस पैन्टी को तुम्हारी चूत पर डाईरेक्ट देखना चाहते हैं। वो तो अगर अपने घर में नहीं हमारे घर होते तो शायद तुम्हें इसके लिए बोल भी देते। पर अपने घर में बीवी-बेटी के रहते हिम्मत नहीं कर सके।" फ़िर मुझे उसके पैन्टी की याद आई तो मैंने पूछा, "अच्छा विभा, तुम्हारी पैन्टी कहाँ गायब हो गई...?"
मैने अपनी बहन के बारे में जैसे बोला, सलीम चाचा सब मुँह बाए सब सुन रहे थे। मैंने अब उनको जाँचते हुए आगे कहा, "मेरे ख्याल से वब त्रिकोणी पैन्टी ज्यादा से ज्यादा नूर की चूत ढँक सकती है, वो अभी बच्ची जैसी ही है और दुबली भी बहुत है। अभी जो उम्र है उसकी उसमें झाँट भी ज्यादा फ़ैली नहीं होगी उसकी चूत पर, ज्यादा बाल चूत के ऊपर की तरफ़ ही होगा अभी। आपको तो पता ही होगा कि १८ के आस-पास से लडकी की झाँट साईड की तफ़ फ़ैलने लगती है और पीछे गाँड़ की छेद के चारों तरफ़ हो जाती है। विभा और सायरा दोनों २० पार हैं तो उनका झाँट अपना पूरा आकार ले लिया होगा पर नूर का अभी भी फ़ैलना बाकी होगा।"
अब सलीम चाचा भी मेरे साथ खुलने लगे और नूर के बारे में बताया, "नूर तो जैसा मैंने बताया था न ... बिल्कुल ही अल्हड है अभी। फ़्रौक या स्कर्ट पहनेगी और उठते-बैठते उसको इसका ख्याल ही नहीं रहेगा। जब तब उसकी जाँघ या पैन्टी दिखते कह्ते रहेगी। जुल्का कितना डाँटती है कि घर पर बाप और भाई भी तो हैं मर्द... उनसे तो पर्दा रखो... पर कुछ फ़ायदा नहीं। अभी तक वो यहाँ रहती तो तुम देखते उसकी हरकत..."।
मैंने कहा, "अभी नासमझ है... धीरे-धीरे सब जान जाएगी। कुछ लड़कियाँ जल्दी जवान हो जाती है और कुछ को टाईम लगता है।" हमें आए करीब दो घन्टा हो गया था सो मैंने अब विभा को आवाज लगाई, "विभा, चलो बाबू अब... बहुत समय हो गया।"
विभा की जगह नूर की आवाज आई, "बस दो मिनट भैया... दीदी बाथरूम में है"।
थोड़ी देर में विभा सलीम चाचा के दोनों बेटियों और उनके भतीजे के साथ कमरे में आई। जमील भी २४-२५ का जवान लडका था और वो जब हम बातें कर रहे थे तब आया था और फ़िर भीतर जाने के बाद विभा के आकर्षण से बँध कर वहीं फ़ँस गया था। अच्छा ही हुआ... अगर वो हमारे साथ बैठ जाता तो शायद हम दोनों में वैसी बातें नहीं होतीं जो सिर्फ़ मेरे और सलीम चाचा के रहते हुई। सब लडकियाँ चहक रही थीं और हँस रही थीं। सलीम चाचा की नजर फ़िर से विभा की छाती पर टिक गई जहाँ से उसके टाईट टी-शर्ट पर किशमिश के दाने की तरह उसके निप्पल उभरे हुए थे। लो-वेस्ट कैप्री की वजह से विभा के हिलने-डुलने से उसके कसे हुए पेट की गोरी चमडी झलक जाती थी।
सलीम चाचा बोले, "अरे बच्चियों... थोडा हमारे साथ भी बैठो न। इतने बुढे हम थोडे ना हो गए है कि हमें अपनी सर्किल से ही बाहर कर दो"।
सब हँसते हुए पास की कुर्सियों पर बैठ गए। नूर और सायरा दोनों बहनें सलीम चाचा के अगल-बगल में ही बैठी मेरे बिल्कुल सामने सोफ़े पर। विभा मेरे बगल में बैठ गई जिससे सलीम चाचा के चेहरे पर चमक आ गई। जमील मेरे दूसरी तरफ़ बैठ गया था।
विभा जब मेरे बगल में बैठ रही थी तो मैंने गौर किया कि उसकी पैन्टी गायब थी। मुझे माजरा समझ में नहीं आया। एक बार तो लगा कि क्या विभा अंदर जमील से चुदा ली है। पर मुझे पता था कि विभा को जब चोदो, उसका चेहरा लाल भभूका हो जाता है और करीब आधा-घन्टा लगता है फ़िर चेहरा सामान्य होने में। तो यह सोच कर मैंने विभा की चुदाई वाली बात को दिमाग से हटाया, पर मैं किसी तरह से समझ नहीं पाया कि आखिर उसकी पैन्टी गायब कैसे हो गई। वो बिल्कुल सामन्य तरीके से चाचा से बात कर रही थी।
अब मैं भी सामने बैठी सायरा से बात करने लगा। सायरा बहुत ही संयत तरीके से मेरे सवाल का जवाब दे रही थी और हमारे बात-चीत में जमील भी कभी-कभार कुछ बोल देता था। मेरी नजर नूर पर भी थी और मैं उम्मीद कर रहा था कि वो कुछ ऐसा करेगी जिससे मुझे उसके क्रौक के भीतर झाँकने का मौका मिले पर मुझे तब निराशा ही हाथ लगी।
करीब आधे-घंटे बाद हम घर वापस आ गए। चाय के बाद चले गप्प और फ़िर पकौड़ों के दौर ने हमारा पेट भर दिया था और अब हमें कुछ खाने की जरुरत महसूस नहीं हो रही थी।
घर में घुसते हीं मैंने विभा को अपनी गोदी में उठा कर चुमते हुए कहा, "आज तो बहुत जान-मारूँ टाईप का माल दिख रही हो मेरी जान...। घायल ही की हो या कत्ल भी कर आई...?"
वो थोड़ा मुस्कुराते हुए बोली, "जैसा सोच कर गई थी, वैसा ही रहा सब...। आपके लिए रास्ता बना रही हूँ, अभी तो सायरा पर जमील का ही जादू चढा हुआ है, पर जमील लगता है मेरे से फ़ँस जाएगा। फ़िर मैं भैया आपके लिए सायरा को तैयार होने के लिए जमील से दबाब देने को कहुँगी।"
मैंने भी उसको बिस्तर पर लिटाते हुए सब बताया कि कैसे सलीम चाचा उस पर फ़िदा हैं... और वो तो अब उस पैन्टी को तुम्हारी चूत पर डाईरेक्ट देखना चाहते हैं। वो तो अगर अपने घर में नहीं हमारे घर होते तो शायद तुम्हें इसके लिए बोल भी देते। पर अपने घर में बीवी-बेटी के रहते हिम्मत नहीं कर सके।" फ़िर मुझे उसके पैन्टी की याद आई तो मैंने पूछा, "अच्छा विभा, तुम्हारी पैन्टी कहाँ गायब हो गई...?"