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Incest एक बार ऊपर आ जाईए न भैया

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मैंने भी खुश हो कर कहा, "हाँ... यह मेरे लिए चौथा मौका होगा जब एकदम नई लडकी को चोदने का मौका मिलेगा। तुम मेरे लिए तीसरी थी, और तुम्हारे बाद दो और लड़की को चोदा तो हूँ, पर दोनों पहले भी चुदी हुई थी। यह आज मुझे कुँवारी मिली है, तुम अगर अब हम दोनों को फ़्री करो तो एक बार मैं उसकी चूत का मजा ले लूँ।" विभा हँसते हुए बोली, "हाँ, इस काम की बेचैनी आपके चेहरे पर दिख रही है...."।

चाय पीने के बाद विभा खाली कप ले कर किचेन में चली गई तो मैंने नाज से कहा, "चलो नाज अब जरा कपडा उतारो अपना, देखें तो जरा कि तुम असल में दिखती कैसी हो?"

वो अब असल में घबढ़ाई, समझ गई कि अब आगे क्या होगा। उसको विभा को देख कर थोडा हौसला हुआ था पर अब अकेले में मेरी बात सुन कर वो सकपका गई। उसको उम्मीद थी कि यह सब में शायद सोते समय करुँगा, इसलिए वो बोली, "लेकिन सर... अभी तो यहाँ पर दीदी जी भी हैं, तो क्या...?"

मैंने अब आराम से मुस्कुराते हुए कहा, "इसीलिए तो... तुम नंगी हो जाओ, जिससे विभा भी जरा तुम्हारे जिस्म से अगर खेलना चाहे तो खेल ले, फ़िर जब वो खाना बनाने लगेगी तब तुम्हारी सील तोड़ दुँगा... उसके बाद तो सिर्फ़ मजा ही मजा है - मेरे लिए भी और तुम्हारे लिए भी।"

उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी तो मैंने उसका दुपट्टा अपने हाथ से खींच कर हटा दिया और फ़िर उसके पास जा कर उसकी चूचियों को कुर्ती के ऊपर से ही अपने दोनों हथेलियों से मसलने लगा। वो मेरे द्वारा जरा जोर से चूचियों को मसलने से दर्द से कराह उठी और तभी विभा भी कमरे में आ गई। वो समझ गई कि मैं लड़की की चूचियों को ज्यादा जोर से मसल रहा होँ तो बोली, ’भैया उसको दर्द होता होगा, आप जिस तरह से उसको मसल रहे हैं"।

मैंने अब नाज से दूर हटते हुए कहा, "ठीक है तो फ़िर तुम ही मसल लो और इसको थोड़ा तैयार कर दो, तुमको भी तो कच्ची कली से खेलना था ना..."। मैं अब सामने की कुर्सी पर बैठ गया और विभा मुस्कुराते हुए नाज की तरफ़ जाते हुए अपने बदन से दुपट्टा हटा कर साईड की किर्सी पर रख दिया।

नाज अब एकदम चुप थी और विभा बोली, "घबड़ाओ नहीं... सब ठीक हो जाएगा। आज तुम्हारा पहली बार है सो थोड़ा तो घबडाहट रहेगा, पर एक बार अगर यह मजा मिल गया तो फ़िर इसके आगे सब मजा बेकार लगेगा। यह सब कहते हुए विभा अपना कुर्ती और सलवार भी खोल दी। मेरी बहन विभा अब मेरे और नाज के सामने सिर्फ़ एक लाल ब्रा और काली पैन्टी में खड़ी हो कर मुस्कुरा रही थी।

वो अब नाज के पास जा कर उसके हाथ को अपने चूचियों पर रख लिया और फ़िर उसको चुमने लगी।

नाज समझ गई कि विभा उसको अपना चूची दबाने को बोल रही है और वो अब विभा की चूचियों को एकदम एक अनाड़ी की तरह दबाने लगी। विभा अब अपने हाथ से उसकी कुर्ती को उतार दी और फ़िर मुझे दिखा कि नाज की चूच्ची इतनी छोटी थी कि उसको ब्रा की जरूरत भी नहीं थी और वो अभी ब्रा पहने भी नहीं थी। मैं देख रहा था कि नाज की काँख में खुब-खुब घुंघराले काले बाल थे जो उसकी पतली बाहों के कारण बने गढे में एक काला बालों का गुच्छा की तरह दिख रहा था।

विभा ने चट से अब उसकी पूरानी सी सफ़ेद समीज भी उतार दी और नाज कमर के उपर पूरी तरह से नंगी दिखने लगी। उसका बदन किसी आम १४-१५ साल की लड़की की तरह का अब दिख रहा था, बस उसकी काँख का बाल ही यह बता रहा था कि उसकी उम्र १४-१५ नहीं है। मैं अब उसकी चूत देखने के लिए बेताब हो रहा था।

विभा अब उसकी चूची को अपने मूँह में ले कर चुसने लगी। उसकी चूची तो कुछ खास नहीं थी, पर उसकी गुलाबी निप्पल बहुत ही ज्यादा बडी थी। मैंने अब विभा को कहा, "अरे विभा... अब जरा उसकी सलवार तो उतारो, फ़िर खेलते रहना उसकी चूच्ची से..."।

विभा मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुराई और फ़िर नाज से दूर हट कर उसकी सलवार का डोरी पकड़ कर खींच दिया। यह देख कर अब नाज थोड़ा झिझकी और फ़िर अपना सलवार को नीचे गिरने से बचाने के लिए पकड़ लिया तब मैं बोला, "नाज अब खोल दो न, आखिर तुम यहाँ शहर में आई ही हो चुदाने के लिए। अगर नंगी नहीं होगी किसी मर्द के सामने, तो चुदोगी कैसे? और मेरे सामने ऐसे नाटक करने से कुछ नहीं होगा। तुम देख रही हो कि मेरी अपनी बहन कैसे दो मिनट में मेरे सामने अधनंगी हो गई। समझ सकती हो कि जो मर्द लोग तुमको चोदने के लिए पैसा देगा वो कोई साधु नहीं होगा और सब अगर साधु हो गए तो तुम पैसा नहीं कमा सकोगी। मैंने भी तो तुमको चोदने के लिए पैसा दिया है तो अब तुम सलवार पकड़ कर बच तो जाओगी नहीं.... मेरे घर से तो चुदाने के बाद ही जाना हो सकेगा तो अब जरा मेरी बहन के साथ खेल लो फ़िर मुझसे चुदा लेना।"
 
विभा मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुराई और फ़िर नाज से दूर हट कर उसकी सलवार का डोरी पकड़ कर खींच दिया। यह देख कर अब नाज थोड़ा झिझकी और फ़िर अपना सलवार को नीचे गिरने से बचाने के लिए पकड़ लिया तब मैं बोला, "नाज अब खोल दो न, आखिर तुम यहाँ शहर में आई ही हो चुदाने के लिए। अगर नंगी नहीं होगी किसी मर्द के सामने, तो चुदोगी कैसे? और मेरे सामने ऐसे नाटक करने से कुछ नहीं होगा। तुम देख रही हो कि मेरी अपनी बहन कैसे दो मिनट में मेरे सामने अधनंगी हो गई। समझ सकती हो कि जो मर्द लोग तुमको चोदने के लिए पैसा देगा वो कोई साधु नहीं होगा और सब अगर साधु हो गए तो तुम पैसा नहीं कमा सकोगी। मैंने भी तो तुमको चोदने के लिए पैसा दिया है तो अब तुम सलवार पकड़ कर बच तो जाओगी नहीं.... मेरे घर से तो चुदाने के बाद ही जाना हो सकेगा तो अब जरा मेरी बहन के साथ खेल लो फ़िर मुझसे चुदा लेना।"

विभा अब उसका हाथ हटा कर उसका सलवार निकाल दी और नाज मेरे सामने एक पूरानी नीले रंग के पैन्टी में थी। उसकी सफ़ेद गोरी जाँघ कुछ ज्यादा ही चमक रही थी। मुझे उसके हाथ-पैरों पर उगे बाल दिख रहे थे... गाँव की लड़की अभी बाल साफ़ करना नहीं सीखी थी।

विभा अब उसके पीछे चली गई और फ़िर पीछे से उसकी पैन्टी पकड़ कर नीचे सरका दी। नाज की चूत तो दिखी ही नहीं, वहाँ तो झाँटों का एक बड़ा सा जंगल दिखा। विभा पीछे से ही पूछी, "दिख रही है भैया नाज की चूत...?"

मैंने कहा, "नहीं रे, साली की चूत तो झाँटों के जंगल से छुपी हुई है, जरा हटाओ तो..."।

विभा अब सामने आई और फ़िर उसकी चूत की तरफ़ देखते हुए बोली, "नाज... तुम सामने सोफ़ा पर बैठ कर अपना पैर उपर उठाओ, तब जा कर भैया को तुम्हारी चूत दिखेगी"।

नाज अब चुप-चाप जो विभा ने कहा वो कर दी।

तब विभा सोफ़े के पीछे चली गई ताकि मैं सामने से सब कुछ पूरा साफ़-साफ़ देख सकूँ। विभा अब अपने हाथों से नाज के झाँटों को एक तरफ़ करके चूत को खोली और तब मुझे उसकी गुलाबी कुँवारी चूत की झलक साफ़-साफ़ मिलने लगी।

मैं बोल उठा, "वाह... क्या सुन्दर खिली हुई चूत है और भीतर शानदार लाल भभूका झिल्ली भी है... थोड़ा और खोलो जाँघ को"।

नाज भी कोशिश की, पर विभा अब जरा जोर लगा कर उसकी चूत को फ़ैला दी तो वो दर्द से चीखी और मैं उसके कुँवारेपन की झल्ली देख कर मस्त हो गया। मुझे अब अपने ही किस्मत से जलन हो रही थी कि कैसे मेरी छोटी बहन मेरे सामने अधनंगी हो कर एक दूसरी कुँवारी लड़की की चूत अपने हाथ से खोल कर मुझे उस लड़की की सील तोड़ने का निमंत्रण दे रही थी। यह संयोग सब के साथ थोड़े ना होता है।

विभा मुझे ऐसे एक टक देखते हुए देख कर बोली, "भैया... अब जरा मैं भी देख लूँ कि जवान कुँवारी लडकी की चूत कैसी होती है। अपनी तो कभी दिखी नहीं साफ़-साफ़... और आप भी कभी दिखाए नहीं किसी की।" वो अब नाज के सामने आ गई और उसकी चूत फ़िर से उसके झाँटों से आधा के ज्यादा छुप गई थी।

मैंने नाज से कहा, "नाज रंडी..., जरा फ़िर से अपना चूत खोल कर मेरी बहन को अपना झिल्ली दिखाओ..."।

वो मेरी बात मान तो ली पर बोली, "सर ऐसे मत बोलिए लगता है कि आप गाली दे रहे हैं..."।

मैं बोला, "अरे तो इसमें गलत क्या है... रंडी ही तो बनी हो तुम पैसा ले कर चुदाने आई हो, तो रंडी बोलने में गलत क्या है?"

विभा उसकी चूत को घुरते हुए बोली, "अरे ये तो अपनी बहन को रंडी बोलते हैं और तुम तो आई ही हो पैसा ले कर चुदाने"।

नाज को अब कुछ बोलते नहीं बना।

विभा अब बोली, "भैया... इसकी तो सच्ची झिल्ली दिख रही है, इसी को आपलोग तोड़ते हैं अब समझ में आया"।

मैंने अब नाज की चूत कें अपनी ऊँगली घुसा कर उसकी झिल्ली के छोटे से छेद को दबा दिया और कहा, "हाँ विभा, तुम्हारे चूत में भी यह झिल्ली थी कभी... अब तो तुम रंडी बन गई तो तुम्हारी बूर भी चूत बन गई है, जैसे इसकी कुछ देर में बन जाएगी"।

विभा यह सब देख कर ही पनिया गई थी, बोली - "भैया, एक बार प्लीज मुझे चोद दीजिए न, बहुत मन कर रहा है। फ़िर मैं खाना बनाने चली जाऊँगी और तब आप इसके साथ खेल लीजिएगा"।

मैं समझ गया कि विभा को मर्द ही पसन्द हैं, उसको लेस्बियन सेक्स में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैंने उसको कहा, "ठीक है विभा, खोल अपना यह फ़ुद्दू कपड़ा, पहले तुमको ही चोद देते हैं... फ़िर नाज की जवानी लुटूँगा आराम से रात भर..."।

नाज अब भौंचक हो गई और सिर्फ़ "पर..." बोल कर चुप हो गई और फ़िर विभा को अपने हाथ से नंगे होते देखने लगी। विभा की नंगी चूत जो पतली सी झाँट की एक रेखा से सजी हुई थी अब चमक उठी और मैं अब खड़ा हो कर अपने कपड़े उतारने लगा।

मेरा लंड तो कब से खड़ा हुआ इसी इंतजार में था कि कब मौका मिले कि वो किसी छेद में घुस जाए।

विभा मेरे लंड को बिल्कुल तैयार देख कर चहक उठी, "वाह भैया, घुसने के लिए तो बिल्कुल तैयार है... अब चढ जाइए मेरे ऊपर", कहते हुए वो बिल्कुल एक अनुभवी रंडी की तरफ़ सोफ़े पर अधलेटी हो गई।

नाज की नजर कभी मेरे तने हुए लन्ड पर होती तो कभी विभा की चमक रही फ़ुली हुई चूत पर। मैंने थोडा सा थुक अपने लन्ड पर लगाया और फ़िर उसको अपनी बहन की चूत की फ़ाँक पर लगा कर भीतर पेल दिया। हल्की सी सीसकी की आवाज विभा की मुँह से निकली और फ़िर वो मजे से आँख बन्द करके मेरे लन्ड के चुदाने लगी।

मैं अब अपनी बहन की चूत को मजे लेकर चोदते हुए पास बैठी नाज को देखा। वो तो जैसे भौंचक हो कर सिर्फ़ चूत में बाहर-भीतर हो रहे मेरे लंड को देख रही थी। उसको ऐसे देखते हुए देख मेरा मजा दोगुणा हो गया। वो जब मुझे ऐसे देखते देखी तो नजर झुका ली और मैं उसके साथ बेशर्मी से बात करने लगा, "देख रही हो नाज, कैसे मैं अपनी बहन को चोद रहा हूँ। ऐसे ही तुम्हारी चूत के भीतर भी लंड चला कर तुमको चोदुँगा। लड़की को चोदने का यह सबसे अच्छा तरीका है। ऐसे ही तुम्हारी चूत को भी अब रोज चोदा जाएगा। देख लो विभा को कितना मजा आ रहा है, वो ऐसे सिसक-सिसक कर चुदवा रही है, वो भी अपने सगे भाई से"।

विभा अब आँख खोल कर मुझे देखी और मुस्कुरा दी, "आह.... सच्ची बहुत मजा आता है, पूरे देह में अजीब सी सिहरन होती है जब ठीक से धक्का लगता है। भैया, एक बार पूरा बाहर निकाल कर फ़िर से घुसाइए न... प्लीज"।

मैं उसकी बात सुन कर बोला, "अभी लो बहना... तुम जैसे कहोगी वैसे चोदुँगा मेरी जान...." और मैंने अपना लन्ड पूरा बाहर निकाल लिया, ’पक की आवाज हुई जब मेरा लन्ड मेरी बहन की चूत से नाहर निकला। उसकी चूत खुली हुई थी, भीतर से लाल भभुका दिख रही थी और फ़िर मैंने उसकी चूत को प्रेम से चाट लिया, जो अब नमकीन पानी से पूरा गीला हो गया था और फ़िर अपना पूरा ८" लन्ड एक झटके से फ़िर अपनी बहन की चूत में पेल दिया। इसके बाद विभा को खुश करने के लिए ६-७ बार ऐसे ही लन्ड पूरा बाहर खींच कर फ़िर से झटके के साथ भीतर पेला। हर बार लंड के घुसते समय वो मजे से चीखी। फ़िर वो मुझे धक्के लगाने के लिए बोली और मैं अब उसके ऊपर झुक कर उसकी चुदाई करने लगा।
 
नाज देख रही थी और मैं बोला, "गाँव में तुम देखी हो कभी किसी को चुदाते हुए?"

वो नहीं में सिर हिलाई और बोली, "आप सच में इनके भाई हैं?"

मैं हँसते हुए कहा, "हाँ... मेरी तीन बहन है, और तीनो मुझसे चुदाती है। क्यों???"

वो बोली, "मेरे गाँव में तो अगर कोई किसी की बहन को कुछ बोल दे तो लडाई हो जाता है।"

मैं बोला, "बेवकूफ़ भाई सब यही करेगा हीं, इसीलिए सब की बहन छुप कर खेत में जा कर चुदाती है गाँव में और सब समझते हैं कि उनकी बहन सती-सावित्री हैं... बहन को भी आजादी दो और अपने भी मजा करो। जब तक जवानी है तभी तक न कोई लड़की चुदा सकती है। तो यही सोच कर मैं अपनी बहन को आजादी देता हूँ, वो जब चाहे, जिससे चाहे चुदाए। देखी न कैसे मेरी बहन खुद मुझसे बोली कि उसको चोद दूँ। एक बार तुम ही जब मजा ले लोगी तो फ़िर तुम भी मन हो जाने पर रोक नहीं सकोगी अपने को।"

विभा अब बोली, "उसको ज्यादा परेशानी थोड़ा न है वो तो रोज अलग-अलग टाईप के लन्ड से चुदा कर सब किस्म का स्वाद लेगी, असल समस्या तो मेरे जैसी घर में रहने वाली लडकी को है। रोज एक ही टाईप का लन्ड ले कर बोर हो जाती हूँ"।

मैं हँसते हुए बोला, "अरे तो तुम भी नाज की तरह रंडी बन जाओ, रोज नया-नया लन्ड मिलेगा तुमको भी"।

वो मुझे चिढ़ाते हुए बोली, "अपनी बहन को रंडी बनाओगे, बहनचोद... चल अब पीछे से चोद मुझे"।

मैं भी बोला, "बन साली कुतिया अभी पीछे से हरामजादी, मेरी प्यारी बहना" और मैं उसके ऊपर से हट गया तब विभा पलट गई और मैं अब पीछे से उसकी चुदाई करने लगा। और फ़िर अपना रफ़तार बढ़ा कर उसकी चूत में ही झड़ गया।

मेरे हटने के बाद विभा सीधा खड़ा होते हुए बोली, "रोज मेरी चूत में निकाल देते हो, कहीं बच्चा तो पैदा करने का इरादा नहीं है मेरी कोख से भैया"।

मैंने हँसते हुए कहा, "मेरी इच्छा तो है कि तुम्हारी कोख से अपनी बेटी पैदा करके उसको चोदूँ तुम्हारे साथ एक ही बिस्तर पर..."।

इस बार विभा की जगह नाज की आवाज सुनाई दी, "छी:... आप तो मेरे से भी नीच और गंदे हैं"।

मैंने हँसते हुए कहा, "अभी जब तुम्हारी चूत फ़ाड़ूँगा तब तुमको पता चलेगा कि मैं कैसा नीच और कमीना हूँ साली कुतिया। मुझे गंदा बोल रही है ति अब सजा तुम्हारी यही है कि तुम मेरे घर पर अब जब तक रहेगी बिल्कुल नंगी रहेगी और मैं सब को तुम्हें दिखा कर चोदुँगा, तुम देखना साली कैसी चुदाई तुम्हारी करता हूँ हरामजादी।"

मेरे ऐसे तेवर देख कर वो डर गई और फ़िर चुप हो गई।

विभा अपना चूत का पानी पोछने लगी और मैं अब अपना कपड़ा पहनने लगा। नाज भी अपने कपडे की तरफ़ बढी तो मैंने उसको मना कर दिया और कहा कि वो अब नंगी ही रहेगी लगातार दो दिन। फ़िर मैंने विभा को कहा, "मैं जरा बाजार से आता हूँ, कुछ अगर मँगवाना हो तो बता दो, फ़िर जब तक यह रंडी घर पर है, सिर्फ़ इसके साथ पैसा वसूल करना है। कुछ टेबलेट्स और क्रीम लाने जा रहा हूँ ताकि इस बाजारू लौंडिया के बदन को खुब अच्छे से भोग सकूँ"।

विभा कुछ सब्जी लाने को बोली और फ़िर नाज को बोली, "चलो तुम भी किचेन में कुछ बात-चीत करते हुए काम निपटा लेंगे"।

दोनों नंगी ही किचेन की तरफ़ बढ़ गई और मैं बाहर निकल लगा, पीछे दरवाजा बन्द कर दिया, आखिर मेरे घर में दो जवान लड़कियाँ थी, वो भी दोनों नंगी। मैं बाजार में कुछ सब्जी खरीदने के बाद एक केमिस्ट की दुकान से एक स्ट्रीप (दस गोली) वियाग्रा का देसी संस्करण (कवेट्रा), एक बेसलीन क्रीम का बडा डब्बा और एक मूड्स कंडोम का दस वाला पैक खरीद कर बाहर निकल ही रहा था कि सलीम चाचा दुकान में आते दिखे। वो अपनी बीपी की दवा खरीदे और फ़िर हम दोनों साथ ही टहलते हुए घर लौटने लगे।

रास्ते में मैंने उनको नाज के बारे में बताया, "चाचा, आज एक लौंडिया लाये हैं घर पर, दो दिन के लिए। आपको उसका स्वाद चखना है?"

सलीम चाचा आश्चर्य से पूचे, "अरे... कैसे? घर पर तो विभा भी है न?"

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ है... तो क्या, उसको मेरी तरफ़ से कोई रोक-टोक तो है नहीं, वो भी जानती है। सो आज पहली बार ले आया घर कि वो भी समझ ले कि मेरे बदन की भी कुछ जरुरत है। अगर इस बार वो सब झेल गई तो फ़िर मेरे लिए तो रास्ता साफ़ हो जाएगा। आप कुछ हिम्मत दिखाते नहीं है, जबकि आपके अपने घर में आपकी बेटियाँ हिम्मत जुटा कर मस्ती कर रही हैं। मैंने तो आपको सायरा की चूत की गंध वाली वो पैन्टी दी थी । कभी हिम्मत करके अब सीधे उसकी चूत सुँघिए और कभी मुझे भी सुँघाइए"।

वो बेचारे मेरी बात सुन कर सिर्फ़ थुक निगल कर रह गए।

मैंने उनको कहा, "अच्छा कल रविवार है, कल सुबह मेरे घर आइएगा ही, तो नाज को चोद लीजिएगा"।

वो अब बोले, "विभा क्या सोचेगी"?

मैंने उनको हिम्मत दी, "अरे आप विभा की फ़िक्र छोडिए, उसको मैं कह कर आया हूँ कि नाज एक कौल-गर्ल है और उसको मैं दो दिन के लिए घर पर लाया हूँ। अभी करीब एक घन्टे में बाजार से लौटुँगा, वो तब तक नाज के साथ बात-चीत करे। वो समझ गई होगी ही कि मेरा क्या इरादा है"।
 


मैंने उनको हिम्मत दी, "अरे आप विभा की फ़िक्र छोडिए, उसको मैं कह कर आया हूँ कि नाज एक कौल-गर्ल है और उसको मैं दो दिन के लिए घर पर लाया हूँ। अभी करीब एक घन्टे में बाजार से लौटुँगा, वो तब तक नाज के साथ बात-चीत करे। वो समझ गई होगी ही कि मेरा क्या इरादा है"।

मैंने आगे कहा, "कल जब आइएगा तो विभा की वो वाली पैन्टी लेते आइएगा, वो एक दिन खोज रही थी कि सायरा तो उसको लौटा दी थी, फ़िर वो कहाँ चली गई। वो तो सीधे मुझसे ही पूछी कि कहीं मैं तो सायरा की गंध लेने के चक्कर में उस पैन्टी को तो नहीं छुपा रखा है"।

सलीम चाचा अब बिल्कुल ही हकल कर बोले, "फ़िर... अब तो विभा सब जान गई होगी"?

मैंने कहा, "हाँ, मैंने कह दिया कि सलीम चाचा उस दिन तुम्हारी वो पैन्टी देख कर मुझे बोले कि एक बार वो मैं दिखा दूँ, तो मैंने उनको दे दिया है... वो अभी तक वापस नहीं लाए हैं"।

चाचा की तो अब बोलती बन्द.... सिर्फ़ मुझे खड़े हो कर घुरने लने तो मैंने कहा, "अरे ऐसे चकराइए मत... आप का मन तो है न विभा को चोदने का, तो इसी बहाने रास्ता साफ़ हो गया है, अब आप विभा पर लाईन मारिए और मुझे अपनी बेटियों पर लाईन मारने दीजिए"।

उनके मुँह से बस यही निकला, "वो मेरे बारे में क्या सोचेगी"?

मैंने कहा, "क्या सोचेगी...? यही कि उस पर अब एक बुढ्ढे का दिल आ गया है, क्या पता कहीं उसका भी मन आपके साथ सोने का हो जाए फ़िर तो आपको मस्ती है..., कल सुबह आप पैन्टी उसको ही दीजिएगा। मैंने आपका रास्ता खोल दिया है, अब बाकी का काम आपको करना है... बस थोडा हिम्मत कीजिए और चोद लीजिए।

अभी तो मेरे घर पर ही दो जवान लडकियाँ हैं"। सलीम चाचा बेचारे चुप-चाप सोचते रह गए। हमारा घर आ गया था तो अब हम अपने-अपने घर की तरफ़ बढ़ गए। मैंने अपने घर का दरवाजा अपनी चाभी से खोला और भीतर गया तो दोनों लड़कियाँ आराम से नंगे ही साथ बैठ कर बाते करते हुए सब्जी काट रही थी। मुझे देख कर विभा बोली, "बेचारी बहुत गरीब है भैया। घर पर दो और छोटा भाई है और माँ-बाप हैं नहीं। मौसा-मौसी के साथ सब रहते हैं। इसकी एक और बड़ी बहन थी जिसका मौसा-मौसी एक साल पहले शादी कर दिये पर अब इसको पता चला है कि बीस हजार ले कर वो लोग उसको बेच दिये हरियाणा में कहीं। वो लोग इसका भी सौदा कर लिये थे पैंतीस हजार में, पर वो बोली, "वो घर पर हर महीने पंद्रह हजार भेजेगी, और तब वो लोग उसके भाई को रखने को तैयार हुए हैं। कह रही थी कि आप जो पैसा दिये हैं उसमें से आधा ही इसको मिलेगा। कह रही है कि अगर ऐसे ही सिर्फ़ सप्ताह में एक बार किसी के साथ जा कर काम चल गया तो वो प्राईवेट से इंटर पास करना चाहेगी।"

मैंने अब एक बार गौर से नाज को देखा और बोला, "क्या करना है इंटर करके, अगर पैसा कमाना है तो रोज ग्राहक खोजो और खुब पैसा जमा करके अपने भाई को पढ़ा लो, तुम तो चुदवा कर पैसा कमा लोगी अगले १०-२० साल तक, पर तुम्हारे भाई सब को तो चोरी-चकारी ही करना होगा पेट पालने के लिए। पहले आराम से कमा लो दो-तीन साल फ़िर आगे की सोचना। और जब घर ले लो तो भाई को भी पास बुला लेना और फ़िर जो पैसा मौसा-मौसी को देती हो वो भी बच जाएगा।"

वो सिर्फ़ एक छोटा सा "जी" बोली

तो मैंने कहा, "चलो भीतर कमरे में अब तुम्हारी सील तोड़ देता हूँ, फ़िर रात में आराम से सेक्स करुँगा। मुझे विभा की चूत में झड़े हुए भी अब घन्टा भर से ऊपर हो गया है तो लंड भी खुब मस्त टनटना जाएगा तो सील तोडने में मजा आएगा।"

फ़िर मैंने विभा को कहा कि वो नाज को एक गोली कालपोल की खिला दे जिससे उसको दर्द कम महसूस हो और बाद में बुखार जैसी कोई परेशानी भी न हो। विभा से वो गोली ले कर नाज बिना कुछ पूछे खा ली और फ़िर विभा को देखने लगी। दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई थी पिछले एक घन्टे में जो वो आपस में गप-शप कीं ।

विभा बोली, "कुछ नहीं होगा... भैया खुब प्यार से करते हैं। मैं भी पहली बार उनके साथ ही की थी। वो कम से कम दर्द में तुम्हारी सील तोड़ देंगे।" वो यह बात नाज की नंगी पीठ सहलाते हुए कह रही थी

मैं अब अपने कमरे में जा कर अपने कपड़े उतार कर नंगा हो कर उसका इंतजार करने लगा। समय लगते देख मैंने पुकारा, "नाज, आ जाओ अब..., लडकी से औरत बना दूँ तुमको"।

तभी विभा के साथ नाज कमरे में आई। मैंने आगे बढ़कर नाज को पकड़ कर बिस्तर पर खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया और उसको चुमने लगा। वो भौंचक हो सब झेल रही थी। मैंने अब खुब आराम से उसके होठों के रस को पीना शुरु कर दिया। कभी चुमता, कभी चुसता तो कभी उसके होठ को अपने होठों से पकड़ कर खींचता। मेरा लन्ड अब कडा हो गया था। नाज की लम्बाई कम थी तो उसकी जाँघ मेरे लन्ड के पास थी और मेरा लन्ड उसकी जाँघों पर ही ठोकर मार रहा था। मैंने अब उसको अपने बदन से नीचे बिस्तर पर लिटा दिया और फ़िर इसकी चूत को सहलाया। उसके चेहरे पर घबडाहट साफ़ दिख रही थी। मैंने उसकी चूत से खेलते हुए अपने हाथ उसकी चूची पर कर के अपने मुँह को उसकी चूत से लगा दिया। झाँटों की वजह से परेशानी हो रही थी पर कुँवारी चूत की खुश्बू लाजवाब थी।

मैं अब जोर-जोर से उसकी चूत को चूसने लगा तो वो बोली, "ओह... ऐसे मत कीजिए, प्लीज"।

मैं समझ गया कि अब उस पल चुदास चढ़ने लगा लगा है, तो मैं उसके बदन से और मस्त हो कर खेलने लगा और वो भी अब बेकाबू हो कर अपने बदन से सब तरह से सिग्नल देने लगी, जैसे वो अब अपना जाँघ भींच रही थी, तो कभी अपने होठों को दाँतों से दबाती तो कभी-कभी आह्ह्ह्ह निकाल देती। उसका पूरा बदन लाल हो गया था और कुछ गर्म भी हो गया था।

तब मैंने उसको अपना लन्ड सहलाने को कहा, वो कुछ खास तो नहीं की पर मुझे उसकी फ़िक्र नहीं थी। मैंने उसको सीधा लिटा दिया और फ़िर उसके ऊपर चढ़ गया। जब मेरा लन्ड उसकी चूत से सामने आया तो उसका चेहरा मेरे सीने में दब गया। दुबली-पतली नाज का पेट तो बिल्कुल सपाट था या कहा जाए तो थोडा भीतर की तरफ़ हीं दबा हुआ था। मैंने अब उसके हाथों को उसके सर के ऊपर कर दिया और फ़िर उसकी काँख को चाटा। काँख के बालों ने उसके बदन की गंध को खुब पकड़ कर रखा था। उसको उम्मीद नहीं थी इस बात की तो उसको गुद्गुदी से हँसी निकल गयी और उसके ऐसे जोर से हिलने से मेरा लन्ड अब खिसक गया।

मैंने फ़िर से उस रंडी को पकड़ कर अपने नीचे सही तरीके से लिटा लिया और फ़िर अपने उपर के बदन से उसके कंधे और चेहरे को थोडा दबोच लिया। इसके बाद अपने एक हाथ से अपना लन्ड उसकी चूत की मुँह पर लगा कर हल्के-हल्के से रगडते हुए भीतर दबाने लगा। जब करीब २" लन्ड भीतर गया तो वो दर्द से थोड़ा छटपटाई तो मैंने अपना दवाब कम कर दिया।

वो जब फ़िर से शान्त हो गई तो फ़िर से हल्के-हल्के दबाना शुरु किया। वो फ़िर से छटपटाई तो मैं फ़िर रुक गया। चार-पाँच बार ऐसे ही खेलने के बाद, मैंने उसको कहा की वो मेरे सीने को चुमे और जब वो चुमने लगी तो मैंने अपने ऊपर के बदन से उसके चेहरे को दबा दिया और फ़िर एक जोरदार झटका अपनी कमर को दिया जिससे मेरा लन्ड करीब पाँच इंच भीतर घुस गया। दर्द से वो बिलबिला गई और जोर से चीखी, पर मैंने अपने सीने से उसके चेहरे को ऐसा दबा दिया था कि उसकी आवाज भी न निकल सकी और न ही वो सही से साँस ले पा रही थी। विभा मुझे ऐसे बेदर्दी की तरह से उसमें घुसते देख कर बोली, "बेचारी.... भैया प्लीज उसको थोडा धीरे कीजिए न।" विभा की आँख में उस लड़की का दर्द देख कर आँसू आ गए थे।

मैंने अपना सीना अब थोडा उपर कर लिया तो वो एक गहरा साँस खींची और सिसक-सिसक कर रोने लगी। मैंने अब उसके चेहरे को देखा और फ़िर अपने लन्ड को उसकी चूत से बाहर खींचने लगा तो उसको दर्द भी थोड़ा कम होने लगा और वो अब चेहरा घुमा कर विभा की तरफ़ देखी। मेरा लन्ड जब करीब दो इंच भीतर बचा तो मैंने एक बार फ़िर पहले वाले से भी जोर का झतका अपनी कमर को दिया और अपना करीब-करीब पूरा लन्ड उस लौंडिया की चूत में घुसा दिया।

वो अब खुब जोर से चीखी, "ओह... माँआआअ.... मर गई रे, बाप"। मैं अब अपने घुटनो पर बैठ कर उसके चेहरे को देख रहा था जिस पर सिर्फ़ और सिर्फ़ दर्द दिख रहा था। वो थी करीब ४ फ़ीट १० इंच की और मैं करीब ६ फ़ीट का, तो मेरा लन्ड उसके गर्भाशय को पूरा दबा के रखे हुए था और वो बेचारी सही से साँस भी नहीं ले पा रही थी। दर्द से छटपटा रही थी, पर मैंने घुटने पर बैठते हुए उसकी पतली कमर को पकड़ कर उसको इस तर्ह से दबोच लिया था को वो अपनी चूत को जरा भी नहीं हिला पा रही थी, वैसे भी मेरा लन्ड उसकी चूत में बहुत गहरे तक घुसा हुआ था।

मैंने अब उसको समझाते हुए कहा, "देखो नाज, अब जो दर्द होना था हो गया है, अब दर्द नहीं होगा तुमको। वैसे भी जब बाजार में पैसा ले कर चुदाने आई हो तो लोग तो तुम्हारे चूत से ही पैसा वसूल करेंगे न। अब इस सब की आदत डाल लो। अब आराम से लेट कर मजा लो और मुझे तुम्हारी चूत को चोद कर सही से रास्ता बनाने दो।" यह कह कर के मैंने अपने को फ़िर से थोडा आगे झुकाया और फ़िर अपने लन्ड को भीतर-बाहर चलाते हुए चोदने लगा।

वो रोती रही पर एक रंडी की आँख के आँसू की क्या कीमत। बेचारी रोती रही और मैं उसकी चूत को चोदता रहा। अब मैं उसकी चूचियों को मसलते हुए उसको चोद रहा था और वो जब जोर से मैं उसकी चूची दबाता तो चीख पडती।

विभा मुझे थोड़ा दया दिखाने का इशारा कर रही थी पर आज बहुत दिन बाद मुझे मौका मिला था कि लडकी के बदन को अच्छी तरह से मसलने का, सो मौका मैं खोना नहीं चाहता था। पिछले कुछ समय से तो सिर्फ़ बहनों को ही चोद रहा था तो उनके साथ तो मैं ऐसा कुछ कर नहीं पाता था। लड़की की चीख सुन कर मुझे एक अलग ही मजा आ रहा था। पर इस मजा के चक्कर में कब मेरा लन्ड उसकी चूत में हीं झड गया और मुझे पता नहीं चला।

वो ही अब रोते हुए बोली, "हाय माँ... अब मेरा बच्चा हो जाएगा तो मैं कहाँ जाऊँगी...।" यह सुन कर मुझे होश आया कि वो अब मेरे लन्ड के रस को अपने भीतर से बाहर नहा रही है। तब मैं भी अपना लन्ड बाहर खींच लिया और उसकी चूत से जब मेरा लन्ड निकला तो एक जोर की "पक" की आवाज आई।

मैंने अब उसकी चूत में अपनी दो उँगली घुसा दी और जोर-जोर से हिलाते हुए उसकी चूत से सब रस बाहर खींच कर बिस्तर पर गिरा दिया। चादर पर अब एक बडा सा लाल, भूरा गीला धब्बा बन गया था।

मैंने विभा को कहा, "चलो विभा अब तुम भी चलो और इसको रोने दो आराम से"। मैंने विभा का हाथ पकड़ कर कमरे से बाहर ला कर उसको कहा कि वो चाय बना कर उसको दे आए।

विभा बोली, "पहले कपडा पहनने दीजिए, फ़िर चाय बना देती हूँ... आप भी चाय पीजिएगा?"

मैंने हाँ कहा और फ़िर तौलिया ले कर नहाने चला गया।

 
अब विभा थोड़ा अजीब नजर से मुझे देख रही थी फ़िर बोली, "आपको जो फ़िल्म पसन्द है एक लगा लीजिए।"

मैंने लोहा गर्म देख कर चोट किया, "एक क्लीप परिवार वाली.... आज तुम साथ हो तो उसी को चला देता हूँ। एक माँ अपने बेटे के साथ सेक्स करेगी और उसकी बेटी फ़िर अपने भाई से चुदेगी।"

फ़िल्म शुरु हुई तो विभा बोली, "सब ऐक्टिंग कर रहा होगा कि तीनों एक परिवार का है।"

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मैंने कहा कि देखते रहो अंत में सब का सर्टिफ़िकेट दिखा कर सब साफ़ कर देगा कि ये तीनों माँ-बेटा-बेटी हैं। माँ अपने बेटे का लन्ड चुस रही थी और बेटी अपनी मम्मी का चूत चाट रही थी। मैं चाह रहा था कि बात-चीत चलती रहे सो मैंने विभा से कहा, "अभी सब तैयार हो रहा है।"

जल्दी ही जब सब रेडी हो गए तो बेटी ने मम्मी को सहारा दे कर घुमा दिया और मम्मी अपने बेटे से खड़े लन्ड के सामने अपने हाथों और घुटनों के बल झुकी थी। उसके बेटे ने अपने ठनकते हुए लन्ड को पीछे से अपनी मम्मी की खुली चूत में घुसा दिया और धक्के देने लगा।

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जल्दी ही सेक्सी आवाजे स्पीकर से निकल कर मेरे रुम में भर गई।

मैं बोला, "इस पोज को डौगी-पोज कहते हैं, किसी कुतिया की तरह लड़की को झुका कर पीछे से चोदा जाता है इस पोज में"।

विभा चुप-चाप सब देख रही थी, मैं जब कुछ बोलता तो वो एक बार मेरी तरफ़ सर करके मेरे से नजर मिला लेती।

मैंने कहा, "अब जल्द हीं क्लोज-अप शौट आएगा इस माँ-बेटे का", और वो शौट आ गया। माँ की चिकनी चूत में गच्च-गच्च करके बेटे का लन्ड घुस निकल रहा था। करीब ५ मिनट बाद मैं कहा, "विभा, तुमको मन नहीं करता हस्तमैथुन करने का... मेरा तो बहुत तन गया है"।

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विभा बोली, "आपको मन है तो आप कर लीजिए"। इतना सुनने के बाद अब रुकने का सवाल ही नहीं था। विभा के कमरे में रहते मैंने अपना बरमुडा अपने कमर से नीचे सरका कर कर पैरों से अलग कर दिया और अपने फ़नफ़नाए हुए लन्ड को सहलाने लगा।

कुछ सेकेन्ड बीता होगा की विभा मेरी तरफ़ सर घुमाई मेरे कड़े लन्ड को देखा और बोली, "कैसा काला है आपका... गन्दा सा...", और मुस्कुराई।

मैंने हँस कर कहा, "अभी तक गोरा लन्ड सब हीं दिखाए हैं इसीलिए मेरा काला लग रहा है तुमको"। मैंने अपने लन्ड से सुपाड़े को चमड़ी पीछे करके बाहर निकाला। मैं अब आराम से मुठियाने लगा था।

तभी फ़िल्म में एक पार्ट खत्म हो गया और जब बेटे का निकलने को हुआ तो वो अपनी बहन को आगे बुलाया और उसकी मुँह में गिराया जिसको वो बहुत आराम से निगल गई।

मैंने अब कहा, "अब इस बहन की बारी है अपने भाई से चुदाने का।"

विभा अब बहुत हल्के से बोली, "कैसे कोई अपने घर-परिवार वालों के साथ यह सब कर सकता है..."।

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मैंने जवाब दिया, "सेक्स में बहुत आकर्षण होता है विभा, मैं कहा था न कि अगर एक बार यह मजा मिल जाए तो फ़िर काबू मुश्किल है..."।

विभा अब अचानक पूछी, "आप करते हैं यह सब?" मैंने हाँ में सर हिलाया

तो बोली, "किसके साथ?"

मैंने कहा, "कोई भी जो मिल जाए.... जब तक शादी नहीं हुई तब तक तो कोई हो क्या फ़र्क पड़ता है... और शादी के बाद भी कौन जानता है क्या हो। शादी के बाद कोई ताला तो कहीं लगता नहीं है।"

वो बोली, "सही बात कह रहे हैं आप... वैसे अभी सबसे हाल में किसके साथ किए यह सब।"

मैंने थोड़ा सोचा फ़िर कहा, "कसम खाओ कि किसी को कहोगी नहीं तब बताउँगा"।

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मेरे इस गजब के सीक्रेट में विभा की दिलचस्पी बढ़ी और उसने प्रोमिश किया तो मैं बिना किसी हिचक के कहा, "स्वीटी के साथ"।

उसका चेहरा अब देखने वाला था.... "अपनी स्वीटी... ओह भगवान... यह कैसे..."।

मैंने साफ़-साफ़ कह दिया कि ट्रेन में कैसे एक ही बर्थ पर सोते हुए मैंने स्वीटी को चोदा।

विभा आँखें गोल-गोल करके बोली, "आप दोनों को लाज नहीं आया यह सब करते... वो भी ट्रेन में... बाप रे बाप। उतने दिन आप लोग होटल में थे... फ़िर तो... हे भगवान... कहीं बेचारी को बच्चा हो गया तो..?"

मैंने अब उसको शान्त किया, "कुछ नहीं होगा... हम दोनों इतने बेवकुफ़ थोड़े हैं... बच्चा हो जाएगा... बेवकुफ़, अब कहीं किसी से कह मत देना कि हम दोनों भाई-बहन आपस में सेक्स करते हैं, लोग तुमको पागल समझेंगे।"
 
फ़िर विभा बोली, "आप हमको ऊल्लू बना रहे हैं। झुठ बात सब.... भैया आप ऐसा सब अपनी बहन के लिए कैसे बोल सकते हैं?"

मैंने अब सोचा कि अभी नहीं तो फ़िर कभी नहीं सो मैंने कहा, "हमारी क्लीप देखोगी? कोचीन के होटल रुम में बनाए थे।" कहते हुए मैंने अपने अलमारी से वो मेमोरी कार्ड निकाला जिसमें हमारी फ़िल्म थी। इसके बाद अब हमारी असल फ़िल्म औन हो गई। करीब एक घन्टे की क्लीप थी जिसमें मेरा, स्वीटी और गुड्डी का सेक्स का फ़िल्म था। विभा का अब बुरा हाल हो रहा था। कोई भी २० साल की जवान लड़की आखिर कब तक अपने पर काबू रख सकती है। लड़कियों में वैसे भी "काम" मर्दों से आठ-गुणा ज्यादा होता है (कामसुत्र में लिखा है)। मैंने अपना लन्ड झाड़ने के बाद विभा से कहा, "अब तुम भी ऊँगली कर लो नहीं तो नींद नहीं आएगी जितना चुदाई देख ली हो।"

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वो बोली कि वो कभी यह सब की नहीं है सो डर लग रहा है...

तब मैंने कहा कि मैं उसकी मदद कर देता हूँ। ओ घबड़ा गई... नहींईईईई... कहीं बच्चा हो गया तो"। सोच कर हीं उसका मुँह सूख गया।

मैंने उसको समझाया कि मैं चुदाई की बात नहीं कर रहा बल्कि हस्तमैथुन की बात कर रहा हूँ। वो सोच में डुबी हुई थी और मैंने मौका सही समझा।

मैंने उसको कन्धे से पकड़ कर कुर्सी से उठा लिया और उसको अपने बाँहों में भर कर उसके होठ चुमने लगा। उसका बदन तप रहा था। बिना बरमुडा के मैं तो पहले से हीं नंगा था। मेरा ठनका हुआ लन्ड उसकी जाँघों पर ठोकर मार रहा था।

मैंने उसको कहा, "अब बिस्तर पर चलो तो चुम-चाट कर तुम्हारा बदन ठन्डा कर दें फ़िर सो जाना"।

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विभा अब गिड़गिड़ाते हुए बोली, "भैया डर लग रहा है... प्लीज।"

मैंने समझाया, "चल पगली... बेकार डर रही है। सिर्फ़ चुम्मा-चाटी करेंगे आज तुम्हारे बदन से... बिना तुम्हारे मर्जी के तुमको थोड़े ना चोदेंगे। मेरी बहन हो.... तुमको मेरे से क्यों डर लग रहा है। शादी के पहले प्रभा भी चुम्मा-चाटी करके मजा लेती थी। अब देख ली कि स्वीटी तो खुल कर सब के सामने मेरे से चुदा रही है। असल में अपने यहाँ भैया किसी भी लड़की के लिए सबसे सुरक्षित लड़का है। न वो किसी को कहेगा और न हीं कभी लड़की बदनाम होगी। घर की बात घर में रहेगी।"

विभा अब बोली, "क्या दीदी भी आपके साथ....?"

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मैंने प्रभा के बारे में झुठ बोला था पर अब सच बताने का मौका तो था नहीं सो मैंने हाँ में सर हिला दिया और बोला, "मेरे से चुदवाती नहीं थी पर चुम्मा-चाटी करके अपनी गर्मी जरुर शान्त कराती थी। आज तुमको भी बिना चोदे हीं ठन्डा कर देंगे, तुम बिल्कुल भी डरो मत। जब भी तुमको चुदाने का मन कर जाए, बता देना... खुब प्यार से तुमको चोद देंगे"। और मैंने उसके होठ फ़िर से चुमने शुरु कर दिए। वो अब शान्त हो कर आने वाले समय के लिए खुद को तैयार कर रही थी। मैं अब उसको बिस्तर पर लिटा चुका था और अब बगल में बैठ कर उसकी चुचियाँ दबाने लगा था। विभा की आँख बन्द थी और उसके चेहरे के भाव बदलने लगे थे। मैंने अब उसकी कुर्ती के ऊपर से अपने हाथ भीतर घुसा दिए और उसकी बाँई चुच्ची को मसलने लगा। वो बहुत मेहनत से अपनी आवाज रोके हुए थी। मैंने उसको पेट के बल पलट दिया और फ़िर उसकी कुर्ती की चेन खोल दी और हल्के से उसके बदन से कुर्ती हटा दिया। सफ़ेद ब्रा में उसका गोरा बदन चमकने लगा।

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कमरे में दो ट्युबलाईट जली हुई थी और मैंने उसको पीठ के बल कर दिया था। गोरे सपाट पेट और उस पर गहरी नाभी को देख मेरा लण्ड अब एक ठुनकी मार दिया। मेरे हाथ उसकी छाती से होते हुए पेट तक घुमने लगे थे। मैं उसके बगल में बैठ कर अब उसके होठ को जोरदार तरीके से चुमने लगा था। प्राकृतिक स्वभाव ने उसको भी चुम्मी का जवाब देना सीखा दिया था और अब मेरी बहन विभा भी बड़े मजे से मेरी चुम्मी का जवाब अपनी चुम्मी से दे रही थी।

पेट से फ़ुसलते हुए मेरे हाथ उसकी सलवार में घुसने लगे तो उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मेरी नजरों से नजर मिलाकर कहा, "नहीं भैया, प्लीज..."।

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मैंने उसकी गाल पर चुम्मी ली और कहा, "कुछ नहीं होगा... सिर्फ़ तुमको मजा देंगे। अभी तक देखी न कैसे बदन मचलने लगता है जब किसी मर्द का हाथ छुता है किसी लड़की को" और मैंने उसको आश्वस्त करते हुए अपने बाएँ हाथ से उसकी सलवार की डोरी खींच कर खोल दी। फ़िर उसको प्यार से देखते हुए कहा, "थोड़ा कमर ऊपर करो ना तो सलवार को नीचे खींच दें"।

विभा ने फ़िर सकुचाते हुए पूछा, "बहुत डर लग रहा है भैया, कुछ होगा तो नहीं न?"

मैंने उसको प्यार से समझाया, "पगली... डर काहे का। देखी न स्वीटी इतना मजा से आराम से लन्ड से चुदवा ली... कुछ हुआ। तुम इतना डर रही हो.... स्वीटी से तो बड़ी ही हो। वैसे भी तुम्हारे बदन से मैं अपना लण्ड सटाऊँगा भी नहीं, देख लो कैसा ठनका हुआ है मेरा पर अभी भी तुम्हारे बदन से दो इंच दूर है। सिर्फ़ तुमको नंगा करके अपने हाथ और मुँह से तुमको मजा देंगे। खुला-खुला बदन आज पहली बार ऐसे देख कर कितना अच्छा लग रहा है। तुमको भी अच्छा लग रहा है न...?"

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मैं अब फ़िर से उसके होठों पर जोर-जोर से चुम्बन लेने लगा था। हल्के से ईशारा किया उसकी कमर को पकड़ कर उठाते हुए और विभा भी अब सहयोग की और अपना कमर ऊपर उठाई तो मैंने सलवार उसकी कमर से नीचे सरार कर उसकी चुतड़ के भी नीचे कर दिया। मैंने अब अपना चेहरा ऊपर उठाया और खुद थोड़ा नीचे खिसक कर सलवार उसके पैरों से निकाल दी। अब मेरे बिस्तर पर विभा का अधनंगा बदन सिर्फ़ एक सफ़ेद ब्रा और भूरी पैन्टी में फ़ैला हुआ था।

मैं झुका और उसकी नाभी पर एक गहरा चुम्बन लिया तो पहली बार उसका बदन थड़थड़ाया, फ़िर पैन्टी के ऊपर से ही उसकी फ़ूली हुई बूर को चुमा तो उसने अपना बदन सिकोड़ा। मैं अब अपना चेहरा उसके पेट से सटा लिया और अपने हाथ उसकी टांगों और जांघों पर घुमाने लगा। भीतरी जांघों पर जब मेरे हाथ गए तो वो जोर से अपनी जाँघ सिकोड़ी। मुझे पता था कि जाँघ का वह इलाका किसी भी लड़की के बदन में सुरसुरी ला देता है। मैं अब प्यार से उसके बदन को चुम रहा था और उसकी कमर सहला रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने उसको फ़िर से पलट कर पीठ के बल लिटा दिया। विभा भी अब सहयोग कर रही थी। मैंने उसकी फ़ुली हुई चुतड़ों को हल्का दबा कर सहलाया और फ़िर जोर से भींच दिया।

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वो चिहुंकी... तो मैंने उसकी चुतड़ पर चुम्बन लेने शुरु कर दिए। उसकी बूर पक्का पनिया गई थी, मुझे उसके बूर की मादा गन्ध अब मिलने लगी थी। मैंने उसकी पैन्टी को ऊपर से मोड़ते हुए नीचे करना शुरु किया। आधा चुतड़ उघाड़ करके मैंने उसकी पैन्टी नीचे खिसका दी उसकी नंगी चुतड़ को हल्के से दांत से काटा और फ़िर उन गोरी गोलाईओं को फ़ैला कर उसकी गुलाबी गाँड़ के दर्शन किए। गाँड़ की छेद के बिल्कुल पास एक काला तिल दिखा।

मैंने विभा से कहा, "पता है विभा... तुम्हारी गाँड़ को भगवान का आशीर्वाद मिला है।"

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विभा तो जैसे कहीं और खोई थी। मेरी बात सुन कर उसको होश आया कि मैं उसकी गाँड़ की बात कर रहा हूँ, हड़बड़ा कर वो अपना पैन्टी ऊपर खींची तो मेरी हँसी छुट गई। वो अब चट से सीधी हो कर बिस्तर पर बैठ गई और नजरें नीचे किए वो भोली लड़की मुझे पागल कर रही थी।

मैंने उसको अपने बाँहों में लपेटा और एक बार फ़िर से उसकी चुम्मी लेनी शुरु कर दी। विभा भी मेरी बाहों में सिमट कर मुझे सहयोग करने लगी। उसकी चुम्मी लेते हुए मैंने उसकी ब्रा की हुक खोल दी पर उसको ऐसे जोर अपने सीने से चिपकाए हुए था कि उसको पता भी नहीं चला। उसे मालूम हुआ तब जब मैंने उसको अपने बदन से अलग करते हुए उसके कंधों पर से ब्रा की स्ट्रैप मैंने नीचे उतारी। जब तक वो संभलती मैं फ़ुर्ती से उसकी ब्रा खींच कर उसके बदन से अलग कर चुका था। वो अब घबड़ा कर अपने हाथों से अपने चुचियों को ढ़कने सी कोशिश की। मैंने मुस्कुराते हुए उसकी ठोढ़ी को हल्के से ऊपर उठाया और उसके होठ पर एक गहरा चुम्बन लिया।

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मैं अब उसको अपनी गन्दी बातों से गरम करने की सोचा, उससे हट कर गहरी नजर से उसको देखते हुए कहा, "पता है विभा... मर्दों को किसी लड़की की यही अंग बताता है कि लड़की जवान हो गई है। भगवान इसको ऐसा ही बनाए हुए हैं कि जहाँ लड़की पर जवानी चढ़ना शुरु होती है यह पूरे दुनिया को उसका खबर देना शुरु कर देता है। १३-१४ साल की उम्र से लगातार यह मर्दों को बताता रहता है कि लड़की अब कितना जवान हुई है और इसीलिए तभी से सब लड़के उस पर लाईन मारना शुरु कर देते है। जितनी कम उम्र हो और चुची जितनी बेहतर... लड़की उतना ही बढ़िया "माल" मानी जाती है मर्दों की दुनिया में। तुम्हारी चुच्ची तो जबर्दस्त है। पता नहीं कितनों ने तुम्हारे नाम की मूठ मारी होगी, और तुमको कुछ पता भी नहीं है।"

विभा चुप-चाप मुझे देखते हुए सब सुन रही थी।

मैंने आगे कहा, "१५ साल की उम्र में जब पहली बार तुम ब्रा खरीदी थी तब से लगातार हर दो-तीन दिन पर तो मैं हीं तुम्हारे नाम की मूठ मारता रहा हूँ, आज भी जब तुम ब्लू-फ़िल्म देख रही थी और मैं मुठ मार रहा था तब भी मेरे दिमाग में तुम्हारा हीं बदन था। अब एक बार अपना हाथ हटा कर अपने चुचियों का दीदार करा दो न प्लीज..."।

विभा का चेहरा लाल-भभूका हो गया था और वो मुझे अजीब नजर से देख रही थी। तब मैंने एक बार फ़िर ईशारा किया कि वो अपने हाथ हटाए तो उसने इस बार मेरी बात मानते हुए अपने हाथ अपने कंधों से हटाए जिससे मुझे उसकी ३६ साईज की गोल-गोल गोरी चिट्टी चुचियों के दर्शन हो गए। जिस तरीके से उसने मुझे अपनी चुचियों के दीदार कराए थे, मुझे उसकी रजामन्दी समझ में आ गई।

मैंने फ़िर आगे कहा, "विभा... मेरी बहना... अब प्लीज एक बार खड़ी हो जाओ न मेरे सामने।" वो मेरी बात मान ली और बिस्तर से नीचे उतर कर मेरे सामने सिर्फ़ एक पैन्टी पहने खड़ी हो गई। विभा तीनों बहनों में सबसे कम लम्बी थी, सिर्फ़ ४’-१०"। उसको शायद इस बात की कुंठा भी थी थोड़ा-बहुत। पर अभी उसके इस छोटे बदन पर ३६" की टाईट छाती गजब लग रही थी।

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मैंने अपने होठ सिकोड़ कर सीटी बजाई और फ़िर कहा, "विभा प्लीज... अब खुद से अपनी पैन्टी उतारो न प्लीज...। कितना अच्छा लग रहा है यह सब। तुम बताओ.. न तुमको मजा आ रहा है कि नहीं।"

विभा अब बोली, "बहुत अजीब लग रहा है.. लगता है कि कैसे यह सब हो रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसे कैसे आपके सामने मैं .... वो छीः भैया..." और वो अपना चेहरा अपने हथेलियों से ढ़क ली।

अब मैं भी उसके सामने खड़ा हो गया और पहली बार उसके बदन से अपना लण्ड सटाया और फ़िर हल्के हाथ से उसकी चुच्ची सहलाते हुए उसको समझाने लगा, "क्यों बेकार बात सब सोचती हो... मैं बताया न ... सालों से मैं तुम्हारे नाम की मूठ मारता रहा हूँ, मुझे तो तुम सिर्फ़ एक जवान लड़की लगी... तुम क्यों मुझमें अपना भाई अभी देख रही हो। समझो कि तुम एक मर्द को अपना बदन दिखा कर उसको पटा रही हो। मेरा हाल सोचो... मेरा लण्ड कैसा बेचैन है (मैंने अपना खड़ा लण्ड उसकी पेट में जोर से दबाया) और मुझे पता है कि आज जो लड़की मेरे साथ है वो आज नहीं चुदेगी फ़िर भी मैं जितना तुम मुझे दोगी उसी से खुश हूँ कि नहीं। चलो अब मान लो कि मैं तुम्हारा लवर हूँ और तुम अपना बदन आज पहली बार अपने लवर को दिखा रही हो। मैं भी तुमको आज सिर्फ़ अपनी गर्लफ़्रेन्ड मान कर तुम्हारे बदन से खेल कर तुमको मजा दुँगा।"

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वो अब फ़िर से शान्त और संयत लगी तो मैं अब उससे हट कर बेड पर बैठ गया और कहा, "डार्लिंग... अब एक बार प्लीज अपनी पैन्टी उतार कर अपना सबसे प्यारा और सुन्दर चीज दिखाओ न मेरी रानी..." और मैंने उसको आँख मारी।

मेरी इस अदा पर उसकी हँसी निकल गई और फ़िर .... लड़की हँसी तो फ़ँसी...। विभा बोली, "छी... भैया मुझ बहुत शर्म आ रही है यह सब करते।"

मैंने भी तुरंत कहा, "शर्म काहे की अब... और तुम्हारी छोटी बहन को तो भरे ट्रेन में चुदाते हुए शर्म नहीं आई और तुम यहाँ बन्द कमरे में... जब चुदना भी नहीं है इतना ड्रामा कर रही हो।"

फ़िर मैंने कहा, "अब दिखाओ न प्लीज विभा... अब अगर नहीं दिखाई और मुझे तुम्हारी पैन्टी उतारनी पड़ी तो आज जबर्दस्ती तुमको चोद देंगे... समझ लो... तुमको पता हीं है कि मैं वैसे भी बहनचोद हूँ।"

विभा अब हँसती हुई बोली, "छी... कैसा गन्दा बोलते है आप... पता नहीं स्वीटी को क्या समझ में आया। वहाँ कौलेज में तो इतना लड़का होगा फ़िर क्यों आपसे..."।

मैंने बीच में ही कहा, "क्योंकि भगवान मुझे बहनचोद और मेरी बहन को रंडी बनाने का सोचे हुए थे... अब दिमाग मत लगाओ और जल्दी से अपना बूर दिखाओ... मेरा मन पागल हुआ जा रहा है। प्लीज विभा.. प्लीज... मेरी प्यारी बहना... प्लीज दिखाओ न अपना बूर..."। एक छोटे बच्चे की तरह मचलते हुए से थोड़ा बच्चों की तोतली आवाज की नकल करते हुए अब यही रट लगाने लगा था, "दिखाओ ना विभा अपना बूर... दिखाओ ना बहना अपना बूर... दिखाओ ना दीदी अपना बूल(बूल)... मुझे देखना है दीदी तुम्हारा प्यारा-प्यारा बूल(बूर)... मेली(मेरी) प्याली दीदी, मेली(मेरी) छोनी(सोनी) दीदी... एक बाल(बार) दिखाओ ना दीदी अपना खजाना.. प्लीज दीदी... प्लीज... प्लीज... प्लीज..."।

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मुझे ऐसा करते देख कर उसकी तो हँसी छुट गई और आँखों में डबडबाए हुई आँसू गायब हो गए। विभा अब खिलखिला कर हँस दी। मैं अब और ज्यादा बच्चों की ऐक्टिंग करते हुए बोला, "मुझे तुम्हाला (तुम्हारा) दुद्दू (दुद्धू) पीना है... मम्मी अपना दुद्दू(दुद्धू) मेले(मेले) मुँह में दो ना... मुझे निप्पल चुस के दुद्दू (दुद्धू) पीना है... मुझे भूख लगी है... ऊंऊंऊं..ऊंऊंऊं..."। मैंने रोने की ऐक्टिंग की तो विभा की हँसी और जोर हो गई।

सिर्फ़ दो मिनट में उसका मूड पूरा से बदल गया था। अपनी हँसी को काबू में करते हुए वो अब बोली, "वोहो मेले(मेरे) प्याले(प्यारे) बेते(बेटे)... भुख्खु-भुख्खु.... आ जाओ दुद्दू(दुद्धू) देती हूँ और उसने सच में अपना दायाँ चुच्ची अपनी हथेली से पकड़ करके मेरी तरह आगे बढ़ा दिया और मैंने बिना समय गवाँए उसकी गुलाबी निप्पल अपने होठों में जकड़ के सही में चुभलाने लगा था। वो उम्मीद कर रही थी कि मैं एक बच्चे की तरह चुसुँगा पर मैं तो एक प्रेमी की तरह उसके चुचियों से खेलने लगा था और वो भी अब सिसकी लगाने लगी थी। जवानी की आग में उसका बदन तपने लगा था पर वो थी की पिघल हीं नहीं रही थी।

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कुछ समय बाद मैं फ़िर से अलग हो कर अपनी पुरानी बात पे आ गया, "मम्मी.. अब अपना बूल(बूर) दिखाओ ना प्लीज"।

विभा को अब ऐक्टिंग में मजा आने लगा था तो भी बोली, "गन्दी बात... मम्मी की वो सब नहीं देखते... गन्दी बात होती है।"

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मैं बोला, "पल(पर) पापा को तो तुम दुद्दू(दुद्धू) भी पिलाती हो और अपना बूल(बूर) भी चातने(चाटने) देती हो... मुझे तो सिर्फ़ देखना है एक बाल(बार)।"

विभा बोली, "वो तुम्हारे पापा हैं बेटा, उनका हक है... वो तुम्को पैदा किए हैं..."।

मैंने आगे कहा, "मुझे सब पत्ता है... वो तुमको चोदे हैं तब मैं पैदा हुआ हूँ..."।

मेरा मन अब ज्यादा रुकने का नहीं था सो मैंने अब सीधे-सीधे कहा, "दिखाओ ना विभा... क्या ड्रामा कर रही हो... इतने से कम रीक्वेस्ट में तो विनीत अपनी कमसीन बेटी को मेरे सामने नंगा करके खड़ा कर देता।

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विभा भी अब अपने हाथ कमर पर ले जाकर अपनी पैन्टी में ऊँगली फ़ँसा कर बोली, "छी भैया... कैसे हैं आप, विनीत भैया की बेटी तो अभी बिल्कुल बच्ची है"।

मैं विभा की नंगी हो रही बूर पर नजरें टिकाए हुए बोला, "ऐसी बच्ची भी नहीं है अब, नींबू जितनी हो गई है उसकी छाती... विनीत का कहना है कि एक साल लगेगा नींबू को संतरा बनने में... और मैं कह रहा हूँ कि तीन महीने में दीपा की छाती संतरे जितनी हो जाएगी... १००० रु० की शर्त लगी है हम दोनों में।"

विभा अब अपना नंगापन भुल गई और बोली, "कितना गन्दा सोचते हैं आपलोग... बेचारी को पता भी नहीं होगा और आप दोनों दोस्त अभी से..."।

मैंने अब विभा से कहा, "छोड़े दीपा को... अभी उसको तैयार होने में समय लगेगा... तुम तो तैयार माल हो मेरी रानी"। मैं उसकी झाँटों से भरी बूर पर नजर टिकाए हुए था।

वो अभी भी हमारे शर्त के बारे में सोचते हुए बोली, "बेचारी दीपा... अभी गोद में खेलने की उम्र है उसकी और आप दोनों उसकी जवानी पर शर्त लगाए बैठे हैं"।

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मैंने कहा, "18 पार है... टीनएजर है अब एक साल से... और गोदी में तो लड़कियों को मर्द-लोग उम्र भर खिलाते हैं... आओ मेरी गोदी में मैं तुम्हें बीस की उम्र में भी गोदी में खिलाऊँगा... और जब तीस-चालीस की हो जाओगी तब भी... एक बार टीनएज में लड़की आई कि वो माल हो गई मर्दों के लिए"। मैंने हाथ पकड़ कर विभा को अपनी तरफ़ खींचा और फ़िर हल्के से घुमा कर उसको अपनी गोद में बिठा लिया। मैं बिस्तर के किनारे पैर नीचे लटका कर बैठा था और विभा मेरी गोद में ऐसे बैठी जैसे कुर्सी पर बैठी हो। उसका पीठ मेरे सीने से सटा था और मेरा लन्ड उसकी चुतड़ की फ़ाँक से दबा हुआ था। मैं अपने बाएँ हाथ से उसकी चुच्चियों को संभाले हुए था और दाहिने हाथ से उसकी झाँटों को सहला रहा था। कम-से-कम तीन इंच जरुर था झाँट सब, और वो खुब फ़ैला हुआ नहीं था। सब-का-सब बूर की फ़ाँक के इर्द-गिर्द हीं जमा हुआ था और फ़ाँक का कुछ अंदाजा नहीं चला, वो शायद अपना जाँघ भींच कर रखे हुए थी।

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मैंने उसको हल्के से अपने गोदी से उतारा और फ़िर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके कमर के पास पालथी मार कर बैठ गया।

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विभा का छोटा सा ४’-१०" का गोरा-चिट्टा नंगा बदन मेरे सामने बिस्तर पर फ़ैला हुआ था और मैं टकटकी लगाए उसकी फ़ूली हुई बूर के ऊपर उगे ३-४" के काले-काले घुंघराले झाँटों पे नजर जमाए हुए था। मेरे मुँह से निकला, "क्या माल है यार... बहुत सुन्दर हो विभा... मेरी प्यारी बहना..."।

विभा मेरे मुँह से अपनी बड़ाई सुन कर फ़ुली ना समाई और कहा, "मेरी लम्बाई ही तो कम है...५ फ़ीट भी नहीं है"।

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मैंने कहा, "ऐसी कम भी लम्बाई नहीं है तुम्हारी.... और फ़िर लड़की की जवानी लम्बाई में नहीं, उसके चुच्ची और बूर में बसती है। प्रभा और स्वीटी का तो देखी हो ना कैसा छोटा है चुच्ची उन दोनों का। मैंने बताया था न कि हर मर्द लड़की के बदन पर नजर डाल कर सबसे पहले उसकी चूच्ची हीं नापता है अपने दिमाग में और तुम्हारी तो जबर्दस्त है ३०"/९०से०मी०... एकदम सही है किसी माल के लिए। अब जाँघ खोलो अपना तो बूर देखें"।

उसने अपनी जाँघ फ़ैला दी। मैंने अपनी दाँई हथेली से उसकी बूर को टटोला और बोला, "माय गौड... कितना गर्म है रे तुम्हारा... इस्स्स्स... हाथ जल जाएगा"। मैंने हाथ जल्दी से हटाया,

तो वो मेरी इस स्टाईल पर हँसी और बोली, "क्या सच में..."।

मैं भी उसी तरह बोला, "सच नहीं तो क्या मैं मुच बोलुँगा..." और मैंने अब अपना चेहरा नीचे झुका कर उसकी झाँट से आ रही कसैले गंध को खुब प्यार से महसूस किया।

उसे लगा की मैं वहाँ चाटुँगा, सो वो हड़बड़ा कर बोली, "चाटिए नहीं भैया... पेशाब वगैरह लगा रहता है उसमें गन्दा है अभी"।

मैंने उसको समझाया, "पगली.... चाटेंगे तभी तो सुरसुरी होगा तुम्हारे बदन में और मजा मिलेगा... और एक बात सेक्स में कुछ गन्दा नहीं होता है। वैसे भी जिसको प्यार किया जाए वो गन्दा कैसा... यह छेद तो हर मर्द को सिर्फ़ मजा देता है। मर्द चाहे कोई हो पति हो, ब्वायफ़्रेन्ड या भाई या कोई और..." कहते हुए मैं उसके जाँघ को और खोल कर अपना एक ऊँगली उसकी फ़ाँक पर चला कर उसके बूर के गीलेपन से गीला हुए ऊँगली को मैंने उसको दिखाते हुए चाटा... कसैला-खट्टा सा स्वाद मिला हल्का सा मुझे और मेरा लन्ड एक ठुनकी मारा और झड़ गया।

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लण्ड से निकला पिचकारी विभा की जाँघ पर फ़ैल गया। विभा इस पर कुछ खास ध्यान नहीं दी या शायद उसके खुद के सनसनाते हुए बदन में उसको इस्का पता हीं नहीं चला कि क्या हुआ है।

मैं गौर कर रहा था कि विभा के पूरे बदन से बाल साफ़ थे, शायद उसने हाल में हीं हेयर-रिमुवर लगाया था... बस सिर्फ़ झाँट हीं इतनी बड़ी-बड़ी थी कि क्या बताऊँ। मैंने जब यही बात विभा को बताई तो वो बोली, "वहाँ का बाल कभी साफ़ हीं नहीं की हूँ। शुरु-शुरु में मम्मी से बोली थी तो वो कही कि अभी से बाल साफ़ करोगी तो सब बाल कड़ा हो जाएगा। प्रभा दीदी तो शुरु से बाल साफ़ करती थी पापा के रेजर से, मैं मम्मी की बात मान लेती पर वो चुरा-छुपा के बाल साफ़ कर लेती थी। वो कहती थी, कि उसको बाल अच्छा नहीं लगता है... पर मुझे तो कभी कुछ खास परेशानी नहीं हुई सो क्यों साफ़ करती। अब तो आदत हो गया है"।

मैं यह सब सुनते हुए उसकी पेट और नाभी से खेल रहा था और बीच-बीच में कोई चूची मसल देता तो वो बोलते-बोलते रुकती और एक हल्की सी कराह उसके मुँह से निकल जाती। मैंन अब उसकी गहरी नाभी में अपनी जीभ घुमा रहा था और उसको गुदगुदी लग रही थी तो वो कसमसाने लगी।

तभी मैंने उसके जाँघ खोल कर अपना एक हाथ उसकी बूर की फ़ाँक पर चलाने लगा। उसकी बूर पूरी तरह से पनियानी हुई थी। मैंने उसके बूर के पानी से हीं अपना ऊँगली गीला करके उसकी फ़ाँक के ऊपरवाले हिस्से, जहाँ टीट होती है हल्के-हलके मसलने लगा। जल्दी ही उसको समझ में आने लगा कि यह कुछ नया हो रहा है। वो अब जोर-जोर से साँस लेने लगी थी। बीच-बीच में एक मीठी कराह उसके मुँह से निकल जाती। मैंने अपने ऊँगलियों से उसकी फ़ाँक खोली और फ़िर उसकी फ़ूली हुई मटर जितनी साईज के टीट को जोड़ से रगड़ा और वो जोर से चीख पड़ी। उसकी आँखें अब मस्ती से ऊपर की तरह पलटने लगी थी। वो अपने-आप को मेरे गिरफ़्त से छूड़ाना चाहती थी, पर मैं उसके कमर को कुछ ऐसे दबाए हुए था कि बेचारी छुट न सकी।

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वो अब गिड़गिड़ाई, "भैया अब नहीं.... ओअओह.... अब छोड़ दीजिए"।

मैंने मसलना धीमा किया तो वो थोड़ा शान्त हुई। फ़िर मैंने कहा, "विभा, यह तो ट्रेलर था मस्ती का, अब देखना जब मैं जीभ से रगड़ुँगा तब असल मजा आएगा"। फ़िर मैंने उसकी कमर के नीचे एक तकिया लगाया और फ़िर उसकी खुली हुई दोनों जांघों के बीच में बैठ कर उसके बूर पर अपना मुँह लगा दिया और जीभ को चौड़ा करके उसके बूर की फ़ाँक को पूरा नीचे से ऊपर तक चाटा। बूर का पानी अब मेरे मुँह में घुल रहा था और मैं मस्ती से उसकी कुँवारी, अनचुदी बूर का स्वाद लेने लगा था। अनचुदी बूर का स्वाद लाजवाब होता है... और अगर वो अपनी छोटी बहन की हो तो फ़िर क्या कहने। विभा की सिसकियाँ पूरे कमरे में फ़ैल कर माहौल को शानदार बना रही थी। करीब १० मिनट तक मैं अलग-अलग तरीके से मैं बूर चुसा तब जा कर वो झड़ गई और मेरे मुँह में कसैले-खट्टे स्वाद पानी सब ओर लिपस गया। झड़ने के बाद वो शान्त हो गई थी और लम्बे-लम्बे साँस ले रही थी।

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मैं अब उसकी बूर पर से उठा और उसके चेहरे पर नजर डाली। आँख बन्द करके वो निढ़ाल सा बिस्तर पर फ़ैली हुई थी। मैंने विभा की बूर के पानी से लिथड़े हुए अपने होठ विभा के होठ से सटा कर उसको चुमना शुरु किया।

मैं बोला, "चाटो न मेरा होठ विभा..."।

आँख बन्द किए हुए हीं वो होठ चाटी तो उसको भी अपने बूर के स्वाद का पता चला शायद... बुरा सा मुँह बनाते हुए वो अपना आँख खोली और कहा, "उः... कैसा स्वाद है... पेशाब जैसा लग रहा है... छीः"।

मैंने हँस कर कहा, "तुम्हारे बूर का स्वाद है...तुमको खराब लग रहा है"।
 
विभा बोली, "छीः... कैसे आप उसको इतना देर से चाट रहे थे। बहुत गन्दे हैं आप भैया"।

मैं बोला, "ज्यादा बोली तो मुँह में लौंड़ा पेल देंगे, समझी जानूं...." और एक जोर का चुम्मा उसके होठ पर जड़ कर मैंने पूछा, "चुद्वाएगी क्या मेरी प्यारी बहना...?" मैं अपना लन्ड सहला रहा था।

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वो बोली, "धत्त...." और ऊठ कर बैठ गई और अपने कपड़े पहनने लगी। मैं समझ गया कि अभी ज्यादा तेजी बेकार है सो मैं भी अब जिद छोड़ दिया। मुझे यकीन था कि जल्द हीं विभा अपना सील मुझसे हीं तुड़वाएगी। अपने घर का माल थी सो हड़बड़ी में काम बिगड़ भी सकता था तो मैं भी अब अपना बरमुडा उठा लिया। विभा ब्रा-पैन्टी पहनकर अपना सलवार-कुर्ती ले कर अपने कमरे की तरफ़ चल दी।

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मैंने कहा भी कि मेरे साथ ही सो जाए, तो वो बोली कि नहीं सुबह रीना (मेरे घर की कामवाली बाई) आएगी। साढ़े बारह के करीब हो चला था तो मैं भी सोने की तैयारी में लग गया।

……………………………..

अगली सुबह मैं वाक से आया तो विभा नहा धो कर पूजा कर रही थी और कामवाली झाड़ु-बुहारू में लगी हुई थी। मैं भी नहा धो कर आया विभा नास्ता के टेबुल पर मेरा इंतजार कर रही थी, काम वाली तुरन्त गई थी और घर पर सिर्फ़ हमदोंनो ही थे।

मैंने कल वाली बात दुहराई, "कल सोने में अच्छा लगा, उस सब के बाद?"

"हाँ भैया, बहुत गहरी नींद आई। बदन के रोम-रोम का दर्द जैसे निकल गया था। एकदम हल्का लग रहा था बदन सोते समय", विभा बोली।

नास्ता करते हुए मैंने कहा, "यह तो कुछ भी नहीं है, जब सही चुदाई कराओगी फ़िर पता चलेगा"।

विभा बोली, "सही कह रहे हैं भैया आप...., अब तो लगता है कराना पड़ेगा।"

मैं चहका, "चलो फ़िर बिस्तर पर... कि यही चुदाओगी..."।

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वो मुझे झिड़की, "हत्त.... अभी सुबह-सुबह आप भी क्ता बात ले कर बैठ गए। शाम में फ़िर जैसे कल किए थे वैसे हीं करेंगे"।

मैंने मुँह बनाते हुए कहा, "ठीक है...अगर उतने से ही संतुष्ट हो, पर मेरे लन्ड का क्या? कल तो बेचारा खुब हीं बेहाल हुआ और फ़िर निढ़ाल हुआ"।

"क्यों... जैसे पहले ब्लू-फ़िल्म देख कर हस्तमैथुन करते थे कर लीजिएगा", वो मुस्कुराते हुए बोली और फ़िर नास्ता का सब प्लेट वगैरह ले कर चली गई।

मैं भी जिद नहीं कर रहा था। मेरी सबसे छुईमुई बहन, विभा, आज एक दिन के बाद खुद अपने मुँह से मुझसे मुख-मैथुन के लिए तैयार थी और यह मेरी बड़ी उपलब्धि थी। मुझे पता था कि आज न काल वो मेरे से हीं सील तुड़वाएगी।

आज दिन भर मुझे काम में मन न लगा और बार-बार विभा का अनछुआ बदन मेरे दिमाग में आ रहा था। शाम को करीब ६ बजे हीं मैं घर के चल दिया। सात बजे के करीब घर आया। विभा मुझे देख कर हैरान रह गई और खुश भी हुई। मेरे हाथों में चाय देते हुए बोली, "मेरे बदन के लिए आप आज जल्दी घर आ गए"।

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मैंने थोड़ा झेंपते हुए कहा, "ऐसी बात नहीं है पर जब आ गए हैं तो फ़िर आज हमलोग जल्दी शुरु कर देंगे। इससे आराम से देर तक एक-दुसरे के बदन से खेलने का मौका मिलेगा।"

विभा बोली, "ठीक है... मैं जल्दी से खाना बना लेती हूँ" फ़िर हमलोग खेलेंगे"।

करीब आठ बजे तक विभा किचेन से फ़्री हुई और पसीने से लथपथ मुझसे बोली, "नहा के खाना लगा देती हूँ... ठीक है"।

मैंने कहा, "खाना हम लोग बाद में खाएँगे, पेट भारी होने से मजा कम मिलेगा। आओ पहले हमलोग अपना बदन ढ़ीला कर ले फ़िर खाना-वाना आराम से खाएँगे"।

विभा बोली, "ठीक है... मैं दो मिनट में नहा के आई..."।

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मैंने उसकी कलाई पकड़ी और अपने पास खींचते हुए कहा, "क्या विभा डार्लिंग, पसीने की गन्ध तो प्यार करने वालों के एक टौनिक है... जब सही से चुदोगी तब इसी पसीने के बहने में असल मजा मिलेगा। आ जाओ डार्लिंग जैसे हो...मन बेचैन हो रहा है"।

विभा मुस्कुराते हुए मेरी गोद में बैठते हुए बोली, "वाह रे, एक दिन में डार्लिंग बना लिए... अब आज के बाद गर्लफ़्रेन्ड बना लीजिएगा क्या?"

मैंने उसकी दोनों चुचियों को कपड़े के ऊपर से मसलते हुए कहा, "तुम जो कहोगी मैं वही बना लुँगा तुमको। अब तो मैं तुम्हारे बदन का गुलाम हूँ"।

वो खुब प्यार से पूछी, "आपको क्या मन है... आप मुझे क्या बनाना चाहते हैं"।

मैंने उसके होठ से अपने होठ मिलाए और फ़िर कहा, "बताऊँ, मुझे क्या मन है... तुम बूरा मान जाओगी"।

विभा ने कहा, "नहीं बूरा मनुँगी, अब बताईए न आपको क्या मन है"?

मैंने भूमिका बाँधते हुए कहा, "वैसे यह होगा नहीं पर मेरा बस चले तो मैं तुम्हें इंटरनेशनल पोर्न-स्टार बनाऊँ। खुब सारी ब्लू-फ़िल्म में तुम काम करो। पूरी दुनिया तुम्हें पहचाने और फ़िर तुम्हारे नाम की मूठ मारे"।

विभा बोली, "छी... कोई अपनी बहन के लिए ऐसे बोलता है। बहुत गन्दे हैं आप"।

मैंने उसके पेट सहलाते हुए कहा, "क्यों, आखिर ब्लू-फ़िल्म की हीरोईन सब भी तो किसी की बेटी और बहन होती है। लड़की अपने बाप-भाई से चुदा सकती है और ब्लू-फ़िल्म में काम नहीं कर सकती, ये क्या बात हुई..."।

विभा अब सोचते हुए बोली, "हाँ बात तो सही है, अच्छा भैया... आज आप कोई बहुत गन्दी फ़िल्म दिखाईए ना मुझे।"

मैंने कहा, "ठीक है पर मेरा ईनाम..."।

मेरी बहन बात समझते हुए बोली, "मिलेगा.... आज न कल पर मिलेगा यह तय है। ...कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर..."। उसने मुझे भरोसा दिलाया।
 
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