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दृश्य ६: मिशेल:
मिशेल अपने तलघर के तरणताल में बैठी अंदर देख रही थी जहाँ ईव की भयंकर चुदाई चल रही थी. पार्थ और नितिन ने ईव को दोनों ओर से सैंडविच बनाया हुआ था. पार्थ नीचे लेटे हुए ईव की चूत चोद रहा था तो नितिन उसकी गांड मार रहा था. मिशेल स्वयं इस समय अकेली बैठी हुई बियर के घूँट ले रही थी. इन दोनों युवकों से वो कुछ देर ही पहले इसी प्रकार से चुदी थी, बस लंड और छेद भिन्न थे. पार्थ के लंड ने उसकी गांड में बहुत तहलका मचाया था.
एक मुस्कान के साथ वो उस समय को स्मरण करने लगी जब वो नए वर्ष के समारोह में मंत्रीजी के रिसोर्ट में गई थी. और उनके कौटुम्बिक व्यभिचार का रहस्य पार्थ पर खुल गया था.
मिशेल का परिवार इवान के निमंत्रण पर मंत्रीजी के रिसोर्ट पर गया था.
तीस दिसंबर को रिसोर्ट पहुँचा था. नए वर्ष का समारोह कल था, परन्तु उसमे मुख्य आकर्षण क्या था, इस पर रोमांच था. शाम को सब रेस्त्रां में ही एकत्रित हुए थे. यही रिसोर्ट का मिलन बिंदु था. रेस्त्रां के ही साथ में एक विशाल हॉल (बैंक्वेट) था और वहाँ भी बैठने का प्रबंध था. देखकर लगता था कि उस स्थान का उपयोग मंत्रणा इत्यादि के लिए किया जाता था. मिशेल का परिवार वहाँ उचित समय पर पहुंच गया था. रेस्त्रां में कुल ५० लोग थे. २४ पुरुष और अन्य स्त्रियां. पुरुषों में ८ लड़के थे और १० लड़कियां थीं.
मंत्रीजी के साथ कई स्त्रियों ने आकर उन्हें लुभाने का प्रयास किया परन्तु उनकी आज की रात तो केके के साथ निर्धारित थी. मंत्रीजी के लंड के आकार को देखकर उन स्त्रियों का दुखी होना उचित ही लगता था. नगर के प्रसिद्ध व्यवसाई पारस जी मंत्रीजी की ही टेबल पर बैठे थे. उनकी पत्नी सुधा उनके साथ थी. उनके पुत्र, बहू, पुत्री और दामाद अन्य स्थान पर बैठे हुए थे जहाँ उनकी आयु के चार अन्य लोग भी थे.
मिशेल और उनका परिवार इस पूरे वातावरण को अचरज से देख रहा था. इवान उनके पास आकर उन्हें अन्य अतिथियों से मिलवाने ले जाता था और कुछ अतिथि स्वयं भी उनके पास आते थे. उनका अफ़्रीकी रंग रूप भी एक आकर्षण था. पुरुषों के लौड़े देखकर महिलाएं उनसे संसर्ग के लिए उद्यत थीं तो पुरुष इन स्त्रियों को भोगने को आतुर.
सब कुछ शांति के वातावरण में चल रहा था और सब अपने प्रिय पेय पीते हुए एक दूसरे से बातें कर रहे थे. कहीं कहीं बीच में कुछ चुंबनों का आदान प्रदान हो जाता था. परन्तु अधिकांश मेजों पर नग्नता के पश्चात भी कोई फूहड़ता इत्यादि का प्रदर्शन नहीं हो रहा था.
इस वातावरण में अशांति का प्रवेश हुआ. और ये कोई अल्पायु का बालक या बालिका नहीं थी. ये एक आदेश आयु की स्त्री थी जिन्हें लेकर क्लब के ही दो सहायक आये थे. वो आकर सबसे पहले सुधा के पास गयीं और उन्हें अपनी चूत से बहता हुआ रस दिखाया. फिर एक ऊँगली निकालकर सुधा के होंठों पर मल दिया. सुधा ने निःसंकोच उसे चाट लिया.
“कैसा है?” महिला ने पूछा.
“मस्त है माँ जी. जहाँ से निकला है उसका भी अमृत मिला हुआ है.” सुधा ने चाटुकारिता से उत्तर दिया.
उस महिला ने मुस्कुराते हुए पारस जी से कहा, “मैं कहती हूँ न, मैंने बहू लाखों में एक ढूँढी है तेरे लिए.”
अब डिसूज़ा परिवार को समझ आया कि ये स्त्री पारसजी की माँ हैं.
“अब तुम कहती हो तो मान लेता हूँ.” पारसजी ने हँसते हुए उत्तर दिया.
“वैसे गांड में भी है माल अगर चखना है तो.” उस महिला ने सुधा से पूछा.
“नहीं माँ जी, अभी नहीं.”
“आंटीजी प्रणाम!” मंत्रीजी की ध्वनि ने उनका ध्यान खींचा.
“अरे ये देखो कौन बैठा है, बॉबी तुझे तो मैंने देखा ही नहीं और शिखा! हाय कितनी सुंदर लग रही है.”
मंत्रीजी बोले, “अरे अपनी बहू से ध्यान हटे तो कोई दिखे. कैसी हो आंटीजी?” वो खड़े हो गए.
वो महिला मंत्रीजी के सीने से लग गई.
“अच्छी हूँ. बस तू क्यों नहीं याद करता अब? बूढ़ी हो गयी इसीलिए न?”
“नहीं नहीं. आप तो जानती हो. कितनी व्यस्तता रहती है. आप मेरे लिए कभी बूढ़ी नहीं हो सकतीं. आप तो मेरा पहला प्रेम हो.”
“चल दुष्ट, मक्खन लगा रहा है. अच्छा सुन अब मिल ही गया है तो.” उन्होंने मंत्रीजी के मोटे भारी लौड़े को हाथ में लेकर बोला, “अब आज की रात मैं तेरे ही साथ रहूंगी.”
मंत्रीजी दुविधा में पड़ गए. कहाँ आज उनका शयन और चुदाई केके के साथ थी और कहाँ आंटीजी ने अपना अधिकार जता दिया. उन्होंने शिखा की ओर देखा तो वो समझ गयी. उसने बात संभाली.
“आंटीजी, ठीक है. पर एक ही स्थिति में आज रात ऐसा हो सकता है.”
“कैसी?”
“आप कल शाम के कार्यक्रम के पहले हमारे बंगले से बाहर नहीं आ सकतीं. आप हमारे साथ ही आ पाएंगी.”
“और मैं पूरे दिन करुँगी क्या मेमसाब?”
“जो मन हो. चुदाई या विश्राम.”
“बॉबी से?”
“इसका मैं विश्वास नहीं दिला सकती, पर आपको लौडों की कमी नहीं होगी.” ये कहते हुए शिखा ने अपने पति मंत्रीजी को देखा. मंत्रीजी अपनी पत्नी के खेल को समझ गए.
“मैं तो रहूँगा ही आंटीजी.”
“फिर ठीक है. कब चलना है?”
“जब सब जाने लगेंगे तब.”
आंटीजी समझ गयीं कि इससे अधिक इस विषय में बात करने से कुछ न मिलेगा. वो शांति से सुधा के पास जा बैठीं और अपने लिए पेग मंगा लिया.
अपने स्तनों पर किसी के हाथों के स्पर्श के आभास से मिशेल की तंद्रा टूटी. देखा तो डेविड था जो उसे जगा रहा था.
“व्हाट हप्पेनेड मॉम, स्लेप्ट? (क्या हुआ माँ, सो गयी थीं?)”
“ओह नो. मैं न्यू ईयर वाले रिसोर्ट के बारे में सोच रही थी. वी हैड सो मच फन.”
“याह, इट वास ग्रेट. मामी इस गेटिंग फक्ड वेल नाउ.” डेविड ने कहा तो मिशेल ने अंदर झाँका जहाँ ईव की चुदाई में कोई कमी नहीं आई थी.”
“जाओ तुम भी चले जाओ. उसका मुंह अभी खाली है.”
“यू आर राइट. ओके. आता हूँ.” ये कहते हुए डेविड ने कपड़े उतार फेंके, “पर मॉम, आप अधिक देर तक अकेले नहीं रहने वाली. मार्क और डैड भी आ चुके हैं पर अभी ऊपर हैं. मामा भी आने ही वाले होने इसीलिए रुके हैं.”
“ओह! गुड. आई वांट टू गेट फक्ड अगेन!” ये कहते हुए मिशेल ने बियर का एक घूँट लिया और डेविड को जाते हुए देखने लगी. और कुछ ही पलों में ईव के सामने जा खड़ा हुआ. ईव ने अपने सामने एक और लौड़ा देखा और बिना आपत्ति के मुंह में ले लिया.
क्रमशः
मिशेल अपने तलघर के तरणताल में बैठी अंदर देख रही थी जहाँ ईव की भयंकर चुदाई चल रही थी. पार्थ और नितिन ने ईव को दोनों ओर से सैंडविच बनाया हुआ था. पार्थ नीचे लेटे हुए ईव की चूत चोद रहा था तो नितिन उसकी गांड मार रहा था. मिशेल स्वयं इस समय अकेली बैठी हुई बियर के घूँट ले रही थी. इन दोनों युवकों से वो कुछ देर ही पहले इसी प्रकार से चुदी थी, बस लंड और छेद भिन्न थे. पार्थ के लंड ने उसकी गांड में बहुत तहलका मचाया था.
एक मुस्कान के साथ वो उस समय को स्मरण करने लगी जब वो नए वर्ष के समारोह में मंत्रीजी के रिसोर्ट में गई थी. और उनके कौटुम्बिक व्यभिचार का रहस्य पार्थ पर खुल गया था.
मिशेल का परिवार इवान के निमंत्रण पर मंत्रीजी के रिसोर्ट पर गया था.
तीस दिसंबर को रिसोर्ट पहुँचा था. नए वर्ष का समारोह कल था, परन्तु उसमे मुख्य आकर्षण क्या था, इस पर रोमांच था. शाम को सब रेस्त्रां में ही एकत्रित हुए थे. यही रिसोर्ट का मिलन बिंदु था. रेस्त्रां के ही साथ में एक विशाल हॉल (बैंक्वेट) था और वहाँ भी बैठने का प्रबंध था. देखकर लगता था कि उस स्थान का उपयोग मंत्रणा इत्यादि के लिए किया जाता था. मिशेल का परिवार वहाँ उचित समय पर पहुंच गया था. रेस्त्रां में कुल ५० लोग थे. २४ पुरुष और अन्य स्त्रियां. पुरुषों में ८ लड़के थे और १० लड़कियां थीं.
मंत्रीजी के साथ कई स्त्रियों ने आकर उन्हें लुभाने का प्रयास किया परन्तु उनकी आज की रात तो केके के साथ निर्धारित थी. मंत्रीजी के लंड के आकार को देखकर उन स्त्रियों का दुखी होना उचित ही लगता था. नगर के प्रसिद्ध व्यवसाई पारस जी मंत्रीजी की ही टेबल पर बैठे थे. उनकी पत्नी सुधा उनके साथ थी. उनके पुत्र, बहू, पुत्री और दामाद अन्य स्थान पर बैठे हुए थे जहाँ उनकी आयु के चार अन्य लोग भी थे.
मिशेल और उनका परिवार इस पूरे वातावरण को अचरज से देख रहा था. इवान उनके पास आकर उन्हें अन्य अतिथियों से मिलवाने ले जाता था और कुछ अतिथि स्वयं भी उनके पास आते थे. उनका अफ़्रीकी रंग रूप भी एक आकर्षण था. पुरुषों के लौड़े देखकर महिलाएं उनसे संसर्ग के लिए उद्यत थीं तो पुरुष इन स्त्रियों को भोगने को आतुर.
सब कुछ शांति के वातावरण में चल रहा था और सब अपने प्रिय पेय पीते हुए एक दूसरे से बातें कर रहे थे. कहीं कहीं बीच में कुछ चुंबनों का आदान प्रदान हो जाता था. परन्तु अधिकांश मेजों पर नग्नता के पश्चात भी कोई फूहड़ता इत्यादि का प्रदर्शन नहीं हो रहा था.
इस वातावरण में अशांति का प्रवेश हुआ. और ये कोई अल्पायु का बालक या बालिका नहीं थी. ये एक आदेश आयु की स्त्री थी जिन्हें लेकर क्लब के ही दो सहायक आये थे. वो आकर सबसे पहले सुधा के पास गयीं और उन्हें अपनी चूत से बहता हुआ रस दिखाया. फिर एक ऊँगली निकालकर सुधा के होंठों पर मल दिया. सुधा ने निःसंकोच उसे चाट लिया.
“कैसा है?” महिला ने पूछा.
“मस्त है माँ जी. जहाँ से निकला है उसका भी अमृत मिला हुआ है.” सुधा ने चाटुकारिता से उत्तर दिया.
उस महिला ने मुस्कुराते हुए पारस जी से कहा, “मैं कहती हूँ न, मैंने बहू लाखों में एक ढूँढी है तेरे लिए.”
अब डिसूज़ा परिवार को समझ आया कि ये स्त्री पारसजी की माँ हैं.
“अब तुम कहती हो तो मान लेता हूँ.” पारसजी ने हँसते हुए उत्तर दिया.
“वैसे गांड में भी है माल अगर चखना है तो.” उस महिला ने सुधा से पूछा.
“नहीं माँ जी, अभी नहीं.”
“आंटीजी प्रणाम!” मंत्रीजी की ध्वनि ने उनका ध्यान खींचा.
“अरे ये देखो कौन बैठा है, बॉबी तुझे तो मैंने देखा ही नहीं और शिखा! हाय कितनी सुंदर लग रही है.”
मंत्रीजी बोले, “अरे अपनी बहू से ध्यान हटे तो कोई दिखे. कैसी हो आंटीजी?” वो खड़े हो गए.
वो महिला मंत्रीजी के सीने से लग गई.
“अच्छी हूँ. बस तू क्यों नहीं याद करता अब? बूढ़ी हो गयी इसीलिए न?”
“नहीं नहीं. आप तो जानती हो. कितनी व्यस्तता रहती है. आप मेरे लिए कभी बूढ़ी नहीं हो सकतीं. आप तो मेरा पहला प्रेम हो.”
“चल दुष्ट, मक्खन लगा रहा है. अच्छा सुन अब मिल ही गया है तो.” उन्होंने मंत्रीजी के मोटे भारी लौड़े को हाथ में लेकर बोला, “अब आज की रात मैं तेरे ही साथ रहूंगी.”
मंत्रीजी दुविधा में पड़ गए. कहाँ आज उनका शयन और चुदाई केके के साथ थी और कहाँ आंटीजी ने अपना अधिकार जता दिया. उन्होंने शिखा की ओर देखा तो वो समझ गयी. उसने बात संभाली.
“आंटीजी, ठीक है. पर एक ही स्थिति में आज रात ऐसा हो सकता है.”
“कैसी?”
“आप कल शाम के कार्यक्रम के पहले हमारे बंगले से बाहर नहीं आ सकतीं. आप हमारे साथ ही आ पाएंगी.”
“और मैं पूरे दिन करुँगी क्या मेमसाब?”
“जो मन हो. चुदाई या विश्राम.”
“बॉबी से?”
“इसका मैं विश्वास नहीं दिला सकती, पर आपको लौडों की कमी नहीं होगी.” ये कहते हुए शिखा ने अपने पति मंत्रीजी को देखा. मंत्रीजी अपनी पत्नी के खेल को समझ गए.
“मैं तो रहूँगा ही आंटीजी.”
“फिर ठीक है. कब चलना है?”
“जब सब जाने लगेंगे तब.”
आंटीजी समझ गयीं कि इससे अधिक इस विषय में बात करने से कुछ न मिलेगा. वो शांति से सुधा के पास जा बैठीं और अपने लिए पेग मंगा लिया.
अपने स्तनों पर किसी के हाथों के स्पर्श के आभास से मिशेल की तंद्रा टूटी. देखा तो डेविड था जो उसे जगा रहा था.
“व्हाट हप्पेनेड मॉम, स्लेप्ट? (क्या हुआ माँ, सो गयी थीं?)”
“ओह नो. मैं न्यू ईयर वाले रिसोर्ट के बारे में सोच रही थी. वी हैड सो मच फन.”
“याह, इट वास ग्रेट. मामी इस गेटिंग फक्ड वेल नाउ.” डेविड ने कहा तो मिशेल ने अंदर झाँका जहाँ ईव की चुदाई में कोई कमी नहीं आई थी.”
“जाओ तुम भी चले जाओ. उसका मुंह अभी खाली है.”
“यू आर राइट. ओके. आता हूँ.” ये कहते हुए डेविड ने कपड़े उतार फेंके, “पर मॉम, आप अधिक देर तक अकेले नहीं रहने वाली. मार्क और डैड भी आ चुके हैं पर अभी ऊपर हैं. मामा भी आने ही वाले होने इसीलिए रुके हैं.”
“ओह! गुड. आई वांट टू गेट फक्ड अगेन!” ये कहते हुए मिशेल ने बियर का एक घूँट लिया और डेविड को जाते हुए देखने लगी. और कुछ ही पलों में ईव के सामने जा खड़ा हुआ. ईव ने अपने सामने एक और लौड़ा देखा और बिना आपत्ति के मुंह में ले लिया.
क्रमशः