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Incest कैसे कैसे परिवार

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कैसे कैसे परिवार

पात्र परिचय

पहला घर: अदिति और अजीत बजाज.

अजीत बजाज: व्यवसायी. अच्छी कद काठी है, लंड काफी भारी भरकम, मोटा और लम्बा. बहुत रंगीन स्वभाव है.

अदिति बजाज: ग्रहणी, अजीत की पत्नी। अलोक और अनन्या की माँ। बेहद सुन्दर और कामुक स्त्री.

गौतम बजाज: घर का बेटा, चतुर और सबको प्रेम करने वाला. शारीरिक रूप से अपने पिता पर गया है. चुदाई का नया नया खिलाडी है.

अनन्या बजाज: घर की सबसे छोटी सदस्य. अल्हड़ और चंचल. माँ से उसे खूबसूरती मिली है. जानने वाले इसे देखकर अदिति की जवानी की याद करते हैं. गौतम से १.५ वर्ष छोटी है.

शालिनी देवी बजाज: अजीत की माँ. ३ वर्ष पहले पति का देहांत हो गया. एक वर्ष से यहाँ अपने बच्चों के साथ रहती हैं. जब तक पति जीवित थे, इनका सेक्स जीवन भरपूर था. आज भी इन्हें देखकर हर उम्र का आदमी एक बार तो चोदने की इच्छा करता ही है.

गोकुल: रसोइया और राधा: नौकरानी, जो पीछे के सर्वेंट क्वाटर में रहते हैं.

दूसरा घर: सुनीति और आशीष राणा

आशीष राणा: घर के मुखिया। हरियाणा के जाट और कसरत प्रेमी. शरीर एकदम गठा हुआ. चुदाई में मानो स्नातकोत्तर हैं.

सुनीति राणा: आशीष की पत्नी और उसके बचपन की साथी. दोनों बचपन से एक ही मोहल्ले में पले बढ़े. दोनों के परिवारों में घनिष्ट मित्रता थी. दोनों का विवाह कालेज से निकलते ही हो गया था. अब २४ वर्ष बाद भी दोनों का प्यार कम नहीं हुआ है. इसकी प्यास बुझाना बिरलों के ही बस में है. असीम सुंदरता और अनंत वासना का संगम.

अग्रिमा राणा: पहली संतान. माँ बाप की आँखों का तारा. क्या नहीं जो सुनीति और आशीष इसके लिये न कर दें. माँ की सुंदरता विरासत में मिली है तो सेक्स की भूख भी.

असीम राणा: पहला बेटा, अपने पिता की तरह मजबूत और कसरती. इसे थोड़ा कठोर सेक्स पसंद है. फिर भी लड़कियाँ और महिलाएं इसका साथ पाने को तड़पती हैं. अग्रिमा से १ साल छोटा.

कुमार राणा: दूसरा बेटा। असीम से लगभग २ साल छोटा है. दोनों भाई उम्र के सिवाय लगभग एक जैसे हैं. रुचियाँ भी लगभग एक हैं. असीम के साथ लगा रहता और इसका भरपूर लाभ भी उठाता है. जब अपने किसी कॉलेज के साथी की माँ लाइन पर आती है, तो तीन चार बार के बाद अधिकतर दोनों भाई उसको जुगलबंदी में बजाते हैं.

जीवन राणा: आशीष का पिता. पत्नी का देहांत होने के कुछ महीनों बाद यहाँ रहने आ गए हैं. परन्तु अपने गाँव के चक्कर लगाते रहते हैं, जहाँ इनके मित्र इनके आने की राह देखते हैं. देखकर ही पता लगता ही की आशीष का बीज कितना प्रबल था.

सलोनी: घर की सहायक. सांवला गठा शरीर. सुनीति के बचपन से उसके साथ है. इसकी पढ़ाई और विवाह का सारा खर्चा सुनीति के पिता ने ही किया था. सुनीति के साथ ही वो भी आ गई थी. घर की सदस्य ही मानी जाती है. तीनों राणा संतानें इसे मौसी पुकारती हैं. जब बंगला बना था तो उसके परिवार को भी एक सटा हुआ दो बैडरूम का आउट हाउस बनवाया था.

बिरजू: सलोनी का पति. शुरू में इसे यहाँ आना रास नहीं आया था. पर राणा परिवार के व्यव्हार ने इसे जीत लिया.

भाग्या: सलोनी और शंकर की बेटी. साल भर पहले विवाह हुआ है. अभी गर्भवती है. पास ही के गांव में विवाह हुआ है, फिर आशीष ने पति की नौकरी इसी नगर में लगा दी. अब जब मन हो चली आती है. पहले सास बहुत परेशान करती थी, फिर एक दिन अदिति ने बुला कर उसे समझाया और कुछ पैसे दिए. ये बता दिया की ये तब तक मिलते रहेंगे जब तक भाग्या सुख से रहेगी। ये भी चेताया कि अगर कुछ ऊँच नीच हुई तो सूद समेत वापिस लेंगी और सूद इतना भरी पड़ेगा कि जीवन भर कष्ट रहेगा. तब से सास उसे सर पर बैठाती है. सप्ताह में एक दो दिन तो यहीं रहती है. पति भी कुछ नहीं कहता क्योंकि वो उसे बहुत चाहता है.

सूरज: भाग्या का पति.

बलवंत मान: जीवन के बचपन का मित्र. सुनीति के पिता. अभी गांव में ही रहते हैं और अपनी और जीवन के खेती की देखभाल करते हैं.

गीता मान: बलवंत की पत्नी और सुनीति की माँ.

तीसरा घर: शीला और समर्थ सिंह

समर्थ सिंह: एक बड़ी सिक्यूरिटी कंपनी के मालिक हैं. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से वे बहुत बड़े बड़े व्यवसायों में हर तरह की सुरक्षा का इंतजाम करते हैं. हालाँकि अब अर्ध रिटायरमेंट में हैं. संभ्रांत नगर की सुरक्षा का भी यही ध्यान रखते हैं. उम्र अब ६५ पार कर चुकी होगी.

शीला सिंह: समर्थ की पत्नी. जिस प्रकार से अपने आप को बनाये रखना चाहिए, ये कोई इनसे सीखे। दोनों की शादी को लगभग ४० साल हो चुके हैं. आज भी बेहद चुस्त और सक्रिय। इनका एक शौक है जिसे हम आगे जान पाएंगे.

सुप्रिया: समर्थ और शीला की बड़ी बेटी. शादी के पांच साल बाद तलाक हो गया. कारण हम आगे जान पाएंगे. अपने दोनों बेटों को पलने और बड़ा करने में उसने अपना जीवन लगा दिया. समर्थ की कंपनी में MD के पद पर है, और संभवतः समर्थ के पूर्ण रिटायरमेंट के बाद चेयरमैन भी बनेगी. ये शहर में अपने घर में रहता है, पर अक्सर सप्ताहांत अपने माता पिता के घर ही बिताती है.

सुरेखा : दूसरी बेटी. अपने पति से अब बहुत दुखी है. एक बेटा और एक बेटी है. समर्थ की कंपनी में डायरेक्टर है. दोनों बहनों में कोई द्वेष नहीं है कंपनी में अपने पद को लेकर. ऑफिस कम ही जाती है. सुप्रिया के निकट ही अपने घर में रहती है.

निखिल: सुप्रिया का बड़ा बेटा। बिलकुल हीरो जैसा लम्बा चौड़ा. इसका हथियार भी इसके शरीर से मेल खाता है. तेज तर्रार और आक्रामक.

नितिन: सुप्रिया का दूसरा बेटा। निखिल की कार्बन कॉपी. हालाँकि स्वाभाव में दोनों बहुत अलग हैं. तीव्र बुद्धि और सौम्य स्वभाव। पर इसका औजार निखिल से भी भारी है.

सजल: सुरेखा का बड़ा बेटा. इसके बारे में बाद में जानेंगे।

संजना: सुरेखा की बेटी. इसके बारे में बाद में जानेंगे।

नागेश: सुरेखा का पति. इसका कोई खास रोल नहीं है.

चौथा घर: मिशेल और रिचर्ड डिसूज़ा

रिचर्ड डिसूज़ा: इनका इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक्स का बिज़नेस है. काफी साल साउथ अफ्रीका भी रहे है. वैसे केरल से हैं, पर अफ्रीका से लौटकर इसी शहर में बस गए. समर्थ के अच्छे दोस्त हैं और उनके कहने पर ही साथ में यहाँ घर लिया था.

मिशेल डिसूज़ा: रिचर्ड की पत्नी. ये भारतीय नस्ल की अफ्रीकन महिला हैं. रंग थोड़ा हल्का है, पर नैन नक्श और जिस्म बिलकुल कटावदार. रिचर्ड से शादी के ७ साल बाद वो भारत आ गए थे. पहले इन्हें बड़ी मुश्किल हुई, पर अंततः अच्छा लगने लगा. इनके लगभग सारे रिश्तेदार अफ्रिका में ही है.

शैली डिसूज़ा: बड़ी बेटी, ये शादी के एक साल बाद पैदा हुई थी. रंग रूप और सुंदरता में एकदम माँ पर गई है. अब कॉलेज के लास्ट ईयर में है. संभवतः आगे की पढाई के लिए विदेश जाये.

डेविड डिसूज़ा: बेटा , शैली से दो साल छोटा. फूटबाल का खिलाडी और शानदार शरीर का मालिक. कसरत और तैराकी का शौक़ीन. अपनी क्लास की लड़कियों और उनकी मम्मियों का चहेता।

जैसन वार्ड: मिशेल का बड़ा भाई. अफ्रीका में अपना बिज़नेस है. रिचर्ड और जैसन ट्रेडिंग पार्टनर्स हैं. दोनों में अब अच्छी घनिष्ठता है. हालाँकि आरम्भ में जैसन उसे पसंद नहीं करता था, पर जानने के बाद ठीक हो गया.

ईव वार्ड: जैसन की पत्नी. मिशेल की अंतरंग मित्र.

ऐलिस वार्ड: जैसन और ईव की बेटी. ये मॉडलिंग करती है. और बहुत प्रख्यात है अफ्रीका के देशों में.

मार्क वार्ड: जैसन और ईव का बेटा।

बोरिस, रिकी, मार्टिन और डॉन: ये जैसन के बिज़नेस पार्टनर्स है.
 
पाँचवाँ घर: शोनाली और जॉय चटर्जी

जॉय चटर्जी: ये एक प्राइवेट कंपनी में ऊंचे ओहदे पर काम करते है. बहुत आकर्षक व्यक्तित्व और मृदुभाषी. अपनी पत्नी शोनाली पर जान छिड़कते हैं. नयी और कमसिन लड़कियों के शौकीन, जो इन्हें इनकी पोजीशन के कारण पूरा करने में कोई समस्या नहीं होती.

शोनाली चटर्जी: बेहद हसीन, थोड़ी गुदाज और मांसल हैं, पर इनके व्यक्तित्व पर खूब फबता है. गांड ऐसी चौड़ी की ट्रैफिक लाइट की जरूरत नहीं, बस इन्हे खड़ा कर दो, ट्रैफिक अपने आप रुक जाये. पर इनकी शरीर की भूख इतनी है की आसानी से नहीं मिटती। जवान लड़कों की शौक़ीन.

सागरिका चटर्जी: बड़ी बेटी. बिलकुल रोशोगुल्ला. अपने पिता की चहेती। पर बहुत कुछ माँ पर गई है.

पारुल चटर्जी: छोटी बेटी. एकदम रसमलाई की मिठास और रास से भरपूर. सागरिका की पिछलग्गू. माँ की सुंदरता पाई है.

सुमति बोस: जॉय की विधवा बहन. अब साथ ही रहती है.

पार्थ बोस: सुमति का बेटा। अपने पिता की अकाल मृत्यु से इस पर काफी बोझ पड़ गया था. अंततः यहाँ आने के बाद अब बहुत आराम से है. पढाई बीच में छूटी तो दोबारा नहीं की. दिंची क्लब का मालिक और सदस्य चयन समिति का मुखिया. चयन समिति में शोनाली भी हैं.

छठा घर: दिया और आकाश पटेल

आकाश पटेल: ये एक गुजराती व्यवसाई हैं. इनका ट्रेडिंग का काम है और बहुत सफल है. इनकी शादी इनके पिता के व्यवसाई दोस्त की बेटी से हुई थी. दोनों एक दूसरे को बचपन से जानते थे और ये तय था कि इनका विवाह होना ही है. अपने काम को बढ़ने के उद्देश्य से ये करीब १६ साल पहले इस शहर में आये थे. व्यवसाई वर्ग में इनकी अच्छी पहचान और प्रतिष्ठा है.

दिया पटेल: आकाश की पत्नी. इनका समय अक्सर किट्टी पार्टी और महिलाओं से मिलने जुलने में ही जाता है. घरेलू महिला हैं पर अपना बहुत ध्यान रखती हैं. एकदम कटीले नैन नक्श. बनने संवरने का शौक जैसा की किसी भी संपन्न स्त्री का स्वभाव होता है.

दर्शन (आलोक) पटेल: दिया और आकाश का इकलौता बेटा। अपने पिता के बिज़नेस को अब अपने एम बी ए के बाद साथ में संभाल रहा है. बेहद आकर्षक लड़कियों के लिए चुंबक सामान व्यक्तित्व. मौका देख कर चौका लगाने में निपुण. ये बिना उम्र के लिहाज के खेलता है.

(आलोक का नाम बदल कर दर्शन कर दिया है, तीनों नामों की समानता से दुविधा हो रही थी.)

आकार पटेल: ये आकाश का छोटा भाई है. ७ साल पहले जब बिज़नेस में बहुत उतर चढ़ाव थे तब आकाश ने इसे अपने ही पास बुला लिया था. संयुक्त परिवार के समर्थक आकाश ने इसे अपने ही घर साथ रखा है. हालाँकि व्यावसायिक कारणों से उससे एक किराया लिया जाता है, जो लेशमात्र ही है. परन्तु घर के कुछ खर्चे केवल आकार के ही कहते में आते हैं. ऐसे समझौते का एक कारण और भी है, और वो है नीलम. ये अब अपना अलग एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट का काम करते हैं और दोनों भाइयों के बिज़नेस पृथक हैं.

नीलम पटेल: आकार की पत्नी. ये जरा चतुर और तेज तर्रार है. हालाँकि घरेलू ये भी है, पर इसकी ऑंखें चारों ओर रहती हैं. इसी कारण दिया ने किराये पर आने का सुझाव दिया था, क्योंकि वो नहीं चाहती थी की कोई अनबन हो. इस निर्णय से दोनों परिवारों में एक सहजता आ गई है. नीलम और आकार ने अपना एक घर भी बना लिया है कुछ २ किमी दूर, पर वो रहते यहीं हैं. अभी सप्ताहांत में या किसी पार्टी के लिए प्रयोग में लाया जाता है.

कनिका पटेल: आकार और नीलम की इकलौती बेटी. अभी बी कॉम फाइनल ईयर में है और CA की इच्छुक है. पढ़ने में तेज है और स्वभाव में भी. ज्यादा किसी को भाव नहीं देती, पर घर में बहुत सरल और सलीके से रहती है.

हितेश पटेल: दिया की बहन सिया का बेटा है जो पढाई के लिए यहाँ पर है. इसका अभी १० महीना बाकि है कोर्स का, फिर ये वापिस घर जाकर अपने पिता के काम में जुड़ जायेगा.

सातवां घर: वर्षा और समीर नायक

समीर नायक: ये एक पुराने जमींदार परिवार से हैं और अब इनका बहुत बड़ा खेती बाड़ी का काम है. इनके पास जितना पैसा है वो शायद सात पुश्तों तक भी नहीं संभले। इन्होने अपनी बेटी के लिए इसीलिए एक घर दामाद को चुना था जिससे वो इनसे दूर न रहे. अब इनका काम दामाद और बेटा ही सँभालते हैं.

वर्षा नायक: समीर की पत्नी. ये खुद भी एक धनाढ्य परिवार से हैं और उसी तरह के इनके शौक भी हैं.

अंजलि शिर्के: ये समीर और वर्षा की बेटी है. बचपन से लाड़ प्यार में बड़ी हुई. इसके भाव ही अलग हैं. ये किसी भी लड़के को दोबारा देखती भी नहीं थी. हाँ अनगिनत बॉय फ्रेंड बनाया और शायद एक बार से ज्यादा किसी से नहीं चुदी। पर एक माध्यम वर्ग के लड़के राहुल ने इसका दिल जीत लिया. या यूँ कहिये कि उसके लंड ने इसका दिल जीत लिया.

राहुल शिर्के: अंजलि का पति. एक बहुत ही तेज और होनहार आदमी है. अंजलि इसके पास ट्यूशन के लिए आयी थी. उधर अंजलि अपनी पढाई में पास हुई और इधर राहुल अंजलि के मापदंड पर. हालाँकि समीर ने ये स्पष्ट कर दिया था की उसे घर जमाई ही चाहिए. आखिर जब समीर ने माना की राहुल का परिवार भी साथ रहेगा तब ये रिश्ता पक्का हो पाया था. इसके लिए राहुल को अपनी सासू माँ के कठोर मापदंडों पर भी खरा उतरना पड़ा था. पर एक रात में ही वो अपनी विशेष योग्यता से उत्तीर्ण हो गया था.

जयंत नायक: समीर और वर्षा का बेटा। ये अब राहुल के साथ खेती संभालता है. अक्सर ये महीने में एक हफ्ते साथ जाते है, और बाकी में एक हफ्ते के लिए एक जाता है. इसकी अभी शादी नहीं हुई है. पर इसको चूत की कभी कमी नहीं हुई. पैसे और बलिष्ठ शरीर के आकर्षण से न जाने कितने फूलों का रस चूसा है. इसे औरत की उम्र नहीं उसके जिस्म में दिलचस्पी रहती है.

सुलभा शिर्के: राहुल की माँ. आज ये जितना सुख भोग रही हैं उतना उन्हें जीवन में कभी नहीं मिला. एक मध्यम वर्ग के रोज के संघर्ष से ये उम्र से पहले बूढी लगने लगी थीं. पर अब इनकी मानो जवानी लौट आयी थी. और इसका ये भरपूर लाभ उठा रही हैं और दूसरों को भी उठाने दे रही हैं.

पवन शिर्के: राहुल के पिता. सुलभा की तरह जीवन का भरपूर आनंद ले रहे हैं. वो उन कुछ भाग्यशाली लोगों में से हैं जिनके बेटे उनके जीवन के सारे दुःख दूर कर देते हैं.

कुसुम: ये घर की नौकरानी है, हालाँकि घर की सदस्य की तरह ही रहती है. घर वाले भी उसे उतना ही आदर देते है. इसकी उम्र अब ४० से ४२ के बीच है.

संतोष: कुसुम का पति. ये खेतों पर ही रहता है. उसे एक दो कमरे का मकान दिया है, जिसमे वो आराम से रहता है. जब खेती का काम बंद रहता है, वो यहीं आ जाता है. बाकी समय में कुसुम महीने में दो बार २-३ दिन के लिए चली जाती है समय देखकर.

काम्या: संतोष और कुसुम की बेटी. ये अभी कर्णाटक के एक कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढाई कर रही है. अभी फाइनल ईयर में है.

कमलेश: काम्या का जुड़वाँ भाई. ये भी उसी कॉलेज में मेकैनिकल इंजीनियरिंग पढ़ रहा है और फाइनल ईयर में है. पहले दो साल हॉस्टल में रहने के बाद दोनों भाई बहन अब एक किराये के फ़्लैट में रहते हैं.
 
आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी

विक्रम शेट्टी: ये एक ट्रेवल एजेंसी के मालिक है. इनका नेटवर्क पूरे देश में और कुछ अन्य देशों में भी है. घूमने और पार्टियों के शौक़ीन। इनके संपर्कों के कारण अधिकतर इनके मित्र पार्टियों के लिए इनकी ही सहायता लेते है. पार्टी में जो चाहिए उसका प्रबंध कर सकते हैं और वो भी २-४ घंटों में ही.

स्मिता शेट्टी: विक्रम की पत्नी। इनका वैसे तो अपना ब्यूटी सलून का काम है, जिसकी चार शाखाएं इनके ही शहर में हैं. पर इन्होंने स्वयं जाना छोड़ दिया है. और अपना समय एक विशिष्ट समुदाय के प्रबंधन में लगाती हैं. और घर से ही ज्यादा काम करती हैं. देखने में टीवी सीरियल की किसी सुन्दर माँ की तरह है.

मोहन शेट्टी: स्मिता और विक्रम का बड़ा बेटा। ये अब अपने पिता बिज़नस के लिए एक कार कंपनी चलाता है. भारत के हर बड़े नगर में इनकी कारें उपलब्ध है. महीने में १० दिन बाहर रहता है काम के सिलसिले में.

श्रेया शेट्टी: मोहन की पत्नी। इनकी शादी को लगभग ३ साल हुए हैं. समुदाय के आदेशानुसार मोहन के साथ शादी थोड़ी जल्दी ही हो गयी थी. पर ससुराल में आकर उसने अपनी पढाई पूरी की. अभी एम बी ए की तैयारी कर रही है. हालाँकि आगे करेगी या नहीं कुछ पक्का नहीं है. पति और ससुर दोनों उसे अपने बिज़नेस में सहयोग देने के लिए कह रहे हैं. पर उसका कहना है की जब तक उनकी पहली संतान (जब भी होगी) ५ वर्ष की न हो जाये, वो कुछ नहीं ज्वाइन करेगी. परिवार वाले भी सहमत हैं. ससुराल के अथाह प्यार ने उसे अपने घर की कमी अनुभव नहीं करने दी.

महक शेट्टी: स्मिता और विक्रम की बेटी, ये मोहन से छोटी है और घर की सबसे लाड़ली. अभी इसने अपनी मास्टर की पढाई समाप्त की है. पिता के बिज़नेस की देखभाल करना शुरू किया है, बिलकुल जूनियर स्तर से. समुदाय में शादी के लिए बहुत दबाव है और रिश्ते भी आये हुए हैं. संभवतः अगले साल के अंत तक विवाह हो ही जायेगा.

मेहुल शेट्टी: स्मिता और विक्रम का दूसरा बेटा। ये बहुत शर्मीला और शांत स्वभाव का है. पढ़ने में प्रखर और जटिल समस्याओं का सरल समाधान निकलने में निपुण. घर में सब इसे बहुत प्यार और दुलार से रखते हैं. अगले महीने इसका २०वां जन्मदिन है. अभी कॉलेज में ही है.

स्नेहा गौड़ा: श्रेया की छोटी बहन. श्रेया की बहन की उम्र मेहुल से कोई ६ महीने बड़ी है. मेहुल इसे बहुत पसंद करता है, जो स्नेहा को पता है. उसे मेहुल भी अच्छा लगता है, पर उसके इतने नम्र और सरल स्वभाव से वो थोड़ी असंतुष्ट है. श्रेया के घर बहुत आना जाना रहता है.

सुजाता गौड़ा: श्रेया की माँ. श्रेया की सुंदरता का श्रोत. बहुत अधिक सुन्दर. त्वचा ऐसी की छूने से मैली होने का आभास होता है. इनके बारे में आगे और बताया जायेगा.

अविरल गौड़ा: श्रेया के पिता। इनका भी अपना दवाईयों का काम है. शहर के बाहर ३ फैक्टरियां हैं. बहुत आकर्षक व्यक्तित्व. इनकी जोड़ी किसी भी जगह जाती है तो लोग कुछ देर के लिए बस इन दोनों को ही देखते रह जाते है.

विवेक गौड़ा: श्रेया का भाई. ये श्रेया से छोटा है. इसके बारे में आगे बताया जायेगा.

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अध्याय ८: आठवाँ घर - स्मिता और विक्रम शेट्टी १

मेहुल कॉलेज से घर पहुंचा तो उसने घर में स्नेहा की गाड़ी खड़ी देखी। उसका मन प्रसन्न हो गया. वो अंदर गया तो स्मिता बैठक में टीवी देख रही थी.

"माँ, स्नेहा आयी है क्या?"

"हाँ, जब गाड़ी देख चुका है तो पूछ क्यों रहा है."

"कहाँ है, भाभी के साथ?"

"हाँ दोनों बहनें श्रेया के ही कमरे में हैं. अरे तू कहाँ चल पड़ा? अरे रुक तो!" स्मिता ने उसे रोकने का प्रयास किया.

"मिल कर आता हूँ." मेहुल ने उत्सुकता से उत्तर दिया और सीढ़ी से ऊपर मोहन और श्रेया के कमरे की ओर चल पड़ा.

जब वो कमरे के बाहर पहुंचा तो उसे कुछ आवाजें आती सुनाई दीं. उसका माथा ठनका क्योंकि ये निःसंदेह चुदाई की आवाजें लग रही थीं. पर ये कैसे हो सकता है? उसकी उत्सुकता बढ़ गई. नीचे से उसकी माँ उसे पुकार कर बार बार नीचे आने को कह रही थी. तो क्या माँ को पता था की यहाँ कुछ खेल चल रहा है? उसने हलके से दरवाजे को धकेला तो वो खुल गया. उस दरार से उसने जब अंदर झाँका तो उसके होश उड़ गए.

बिस्तर पर उसकी भाभी श्रेया नंगी पड़ी थी. उसकी जांघों के बीच में एक लड़की का सिर छुपा हुआ था. वो लड़की भी नंगी ही थी. अवश्य ही स्नेहा थी क्योंकि वो उसे अच्छे से पहचानता था. बहनों के बीच ऐसे सम्बन्ध बनना संभव था, उसने कई जगह यह पढ़ा था. इसीलिए उसे इस बात पर इतना झटका नहीं लगा. जिस दृश्य ने उसके होश गुम कर दिए वो था वो पुरुष जो स्नेहा के पीछे था और उसे चोद रहा था.

वो कोई और नहीं बल्कि विक्रम शेट्टी था, उसके पिता!

मेहुल सकते में था और वो दरवाजे का सहारा लेकर ठगा सा देख रहा था. तभी उसे पीछे से आहट सुनाई दी और उसकी माँ ने आकर दरवाजा वापिस बंद कर दिया और उसका हाथ पकड़कर उसे अपने साथ लगभग घसीटते हुए नीचे ले गई. मेहुल कुछ भी न बोल पाया. नीचे स्मिता ने उसे सोफे पर बिठाया और पानी लेने किचन में चली गई.

पानी पीकर मेहुल ने अपने शब्द संजोये, "माँ हमारे घर में ये क्या चल रहा है?"

"तुम पहले जाकर कपड़े बदल लो. फिर मैं तुम्हे बताती हूँ."

**********
 
उस कमरे में बाहर क्या हुआ था इससे अनिभिज्ञ विक्रम स्नेहा को बड़े प्यार से चोद रहा था. वहीँ स्नेहा अपनी दीदी की चूत चाट रही थी.

"दीदी, जीजू कब तक आएंगे" स्नेहा ने पूछा.

श्रेया ने घड़ी की ओर देखा तो अभी ४ बजे थे. "अभी समय है, ६ के पहले नहीं आते कभी. तुझे क्या काम है उनसे?"

"मुझे उनकी कंपनी में ट्रेनिंग लेनी है, उसी के लिए बात करनी थी."

"अरे तुझे थोड़े ही मना करेंगे मोहन, तू तो उनकी सबसे प्यारी साली है."

"इकलौती साली हूँ." स्नेहा ने श्रेया की चूत पर जीभ फिरते हुए कहा.

"थोड़ा अच्छे से और अंदर तक चाट न. कुछ पता नहीं लग रहा."

ये सुनकर स्नेहा ने अपनी गतिविधि तेज कर दी और एक उंगली भी श्रेया की चूत में डालकर उसके भगनासे को चूसने लगी. श्रेया उछल गई पर स्नेहा ने अपना चेहरा नहीं हटाया. उसके पीछे विक्रम अब अपनी चुदाई को गतिशील कर रहा था. कसी चूत में उसका लंड बहुत घर्षण के साथ जा रहा था.और उसने भी स्नेहा की नक़ल करते हुए, स्नेहा के भग्नासे को दो उँगलियों में लेकर हलके से मसल दिया और रगड़ने लगा. अब बारी स्नेहा के उछलने की थी.

"अंकल मेरा होने वाला है."

"जा अपनी दीदी के मुंह पर बैठ, उसे पिलाना अपना शरबत."

स्नेहा तुरंत उठी और अपनी चूत को श्रेया के मुंह पर लगा दिया. विक्रम घूमकर उसके पीछे गया और अपना लंड फिर उसकी चूत में ठोककर चोदने लगा. स्नेहा कांपने लगी और थरथराते हुए उसने पानी छोड़ दिया। विक्रम ने अपना लंड बाहर निकला और स्नेहा का रस श्रेया के मुंह में जाने लगा. श्रेया ने निसंकोच उस रस को पी लिया और अपनी जीभ अपने होठों पर फिराई. विक्रम भी अब निकट था, उसने अपना लंड वापिस स्नेहा को चूत में पेला और तेज धक्के लगाने लगा. कुछ ही समय में उसका भी पानी छूटने को हुआ तो उसने अपने लंड को श्रेया के मुंह पर रखा.

"ले श्रेया, तेरी आज की औषधि."

श्रेया ने अपना मुंह खोलकर लंड को गपक लिया और चूसने लगी. विक्रम ने बिना देरी किये अपना रस उसके मुंह में छोड़ दिया. और फिर अपना लंड बाहर खींच लिया और एक ओर हट के खड़ा हो गया. अगला दृश्य उसका सबसे प्रिय दृश्य था. श्रेया बैठ गई, उसका मुंह फूला हुआ था. उसने वीर्य पिया नहीं था. फिर उसने अपने मुंह को स्नेहा के मुंह से लगाया और कुछ अंश स्नेहा के मुंह में छोड़ दिया.

फिर दोनों बहनों ने अपने हिस्से का टॉनिक पी लिया और एक दूसरे को फिर से चूमा.

"चलो नीचे माँजी प्रतीक्षा कर रही होंगी."

सबने अपने कपडे पहने और नीचे के और चल पड़े.

**********

जब मेहुल कपडे बदलने के लिए गया तो स्मिता ने अपना फ़ोन से एक नंबर लगाया.

"हैलो, मनोज, हाँ सुनो तुम तुरंत घर आ जाओ. मेहुल आज जल्दी आ गया और उसने श्रेया, स्नेहा और तुम्हारे पापा को देख लिया. अब समय आ गया है की उसे सब बता दिया जाये."

दूसरी ओर की बात सुनकर उसने फ़ोन काटा और एक दूसरा नंबर लगाया.

"सुनिए, आप अभी नीचे मत आना. मैंने मनोज को भी बुला लिया है. मेहुल ने आप तीनों को देख लिया है. यस, आई थिंक इट इस टाइम टू टेल हिम द ट्रुथ। आप लोग वहीँ रुको जब तक मैं न बुलाऊँ."

फोन रखकर वो सोचने लगी कि मेहुल को कैसे बताएगी. पर उन्हें पता था कि ये दिन दूर आना है, इसीलिए वो तैयार तो थे पर इस आकस्मक घटना से उनका समय चक्र अब बदल गया था.

मेहुल नीचे आ गया, उसे देखकर स्पष्ट था कि वो इस समय एक भ्रम की स्थिति में है.

"तुम्हारी गर्लफ्रेंड शीबा कैसी है?"

"ठीक है. आप कुछ बताने वाली थीं."

"हाँ. हम तुम्हे तुम्हारे २०वें जन्मदिन पर अगले महीने बताने वाले ही थे. पर अब उस वार्तालाप को आज ही करना होगा. मनोज भी कुछ ही देर में आने वाला है. महक भी अपने समय से आने ही वाली होगी."

"ये क्या है, क्या इसमें सब सम्मलित हैं?"

"हम सब ये बात एक साथ करेंगे। प्लीज, थोड़ा धीरज रखो. मेरे लिए."

मेहुल मन मार कर बैठ गया.

**********
 
लगभग २० मिनट में मोहन घर पहुँच गया. उसने देखा कि मेहुल बहुत उत्तेजित अवस्था में था. उसने एक गहरी श्वास ली और स्वयं को संयत किया. ये दिन तो आना ही था, पर उन्होंने इसे किसी और समय और प्रकार में इसकी योजना की थी, जो अब व्यर्थ हो चुकी थी. उसकी ऑंखें स्मिता से मिलीं तो स्मिता ने अपना फोन निकला और विक्रम को एक मिस कॉल दे दिया. ये संकेत था नीचे आने का. विक्रम, श्रेया और स्नेहा नीचे आये, विक्रम ने स्नेहा को चले जाने के लिए पहले ही कह दिया था. इसीलिए स्नेहा सीधे बाहर जाने लगी. पर उसे अपने ऊपर मेहुल की ऑंखें गढ़ती हुई लग रही थीं.

"मेहुल, बेटा हम तुम्हारे २०वें जन्मदिन की प्रतीक्षा कर रहे थे कुछ बताने के लिए. पर शायद वो समय आज ही आ गया है." विक्रम ने कहा.

"पापा, ऐसा क्या है जिसे आप मुझे पहले नहीं बता सकते थे. और जो अभी आप लोग कर रहे थे, ये कैसे संभव है? और मोहन दादा भी ऐसा नहीं लगता कि इससे विचलित है."

"नहीं. हम ये पहले नहीं बता सकते थे. हमारा परिवार और हमारी जैसे सोच वाले परिवार एक विशिष्ट समुदाय के सदस्य हैं. और उसमे प्रवेश के लिए २० साल का होना अनिवार्य है." विक्रम ने उत्तर दिया.

"कैसा समुदाय? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा."

"हम सब एक ऐसे समुदाय के सदस्य हैं जिसमे अपने परिवार वालों के साथ हम अपार प्रेम करते हैं. और यह हर रूप में होता है, मानसिक, सामाजिक और शारीरिक." मोहन ने बताया.

मेहुल का सिर घूम गया. "मैं कुछ समझा नहीं."

"इसका मतलब ये है की हम सब एक दूसरे के साथ सम्भोग करते हैं."

"यानि आप मम्मी....."

"हाँ और महक भी. श्रेया का परिवार भी उसका हिस्सा है और हमारी शादी भी उनकी सम्मति से हुई है. और अगले महीने जब तुम २० वर्ष के होंगे तो तुम भी उसमे सम्मिलित हो सकोगे. "

"क्या मतलब, फिर मैं मम्मी के साथ."

"हाँ, मम्मी, महक, श्रेया, स्नेहा और उनकी माँ सबके साथ तुम सम्भोग कर सकते हो."

मेहुल अब सकते में था. वो हमेशा अपनी माँ को केवल माँ नहीं बल्कि एक स्त्री के रूप में भी देखता था. और स्नेहा पर तो वो लट्टू था. अगर वो इस प्रस्ताव को मान लेगा तो न सिर्फ ये दोनों बल्कि उसकी भाभी, बहन और श्रेया की माँ भी उसके बिस्तर में होंगी. उसका मन प्रफुल्लित हो गया.

"तो क्या मुझे इस सब के लिए अगले महीने की प्रतीक्षा करनी होगी?"

"नहीं मेहुल, अपने घर और मोहन की ससुराल में तो तुम चाहो तो आज से ही सम्मिलित हो सकते हो. पर शेष सदस्यों से भेंट के लिए रुकना होगा." ये महक थी जो आ चुकी थी और सारी बातें सुन चुकी थी. "मेरे विचार से इस एक महीने के लिए हम चारों ही तुम्हारे लिए पर्याप्त होंगे."

"मुझे पहले मम्मी चाहिए।"

सबने एक चैन की सांस ली और हंस दिए. जितना कठिन उन्होंने सोचा था उससे कहीं सहज रहा था.

"आपने सुना. आज मैं मेहुल के साथ सोऊंगी. आप अकेले ही रहेंगे."

"ओह, यू डोंट वरी डियर. मुझे विश्वास है कि महक आज अपने पापा को अपने प्यार से ओतप्रोत कर देगी."

"पूर्ण रूप से" महक ने हँस के कहा.

"तो चलो इस बात पर एक पार्टी हो जाये. श्रेया व्हिस्की की बोतल और सब सामान ले आओ." विक्रम ने श्रेया को आदेश दिया.

"ओके, पापा."

और एक पार्टी आरम्भ हुई.

*********
 
स्मिता का शयनकक्ष: स्मिता और मेहुल

स्मिता ने मेहुल का हाथ पकड़ा और उसे अपने कमरे में ले गई. कमरे में जाकर उसने मेहुल को बिस्तर पर बैठा दिया.

"क्या तुम्हें कोई असहजता लग रही है?" स्मिता ने प्यार से पूछा.

मेहुल ने सिर हिलाया.

"चिंता न करो, मोहन की भी यही स्थिति थी, पर एक बार जब उसने चढ़ाई की मेरे ऊपर, तो रात भर रौंदा था मुझे. सारे छेद भर दिए थे." स्मिता ने अर्थपूर्ण ढंग से समझाया.

मेहुल के दिमाग की बत्ती जल उठी जब उसने सारे छेद सुना. क्या मम्मी का मतलब..?

"सारे छेद, यानि?"

"यानि मेरा मुंह, चूत और गांड. आज तुम्हें ये तीनों को अपने रस से भरना होगा."

"आ आ आप गांड भी मरवाती हो?"

"बिलकुल. और तुम्हारे जैसे जवान लड़कों को तो मैं बिना गांड मारे हुए छोड़ती ही नहीं." स्मिता ने हँसते हुए बताया.

"क्या तुमने कभी किसी को चोदा है."

धीरे धीरे अब मेहुल को अपना आत्मविश्वास को लौटता हुआ अनुभव कर रहा था. उसे ये समझ आ गया था कि उसका परिवार कोई आम परिवार नहीं है और इसमें हर संभव सेक्स क्रीड़ा होती है.

"हाँ, कईयों को."

"गर्लफ्रेंड्स?"

"नहीं, टीचर्स और फ्रेंड्स की मम्मियों को."

"अपने उम्र की कोई लड़की?"

"कुछ, क्योंकि एक बार में वो शादी की बात शुरू कर देती हैं."

"स्मार्ट, वैरी स्मार्ट. अभी खेलने के दिन हैं, बंधने के नहीं."

"वही."

"कितनी औरतों को चोद चुके हो?"

"बारह औरतें और तीन लड़कियाँ."

अब आश्चर्यचकित होने की बारी स्मिता की थी. "बारह औरतें?"

"हाँ, और आज का मिलकर तेरह हो जाएँगी." मेहुल ने बताया, "वैसे वो बारह की बारह आज भी मुझसे चुदवाती हैं. मैं इसलिए कालेज से ३ बजे घर नहीं आ पाता क्योंकि उनमें से किसी एक के बिस्तर में उसे रगड़ रहा होता हूँ."

"तो फिर आज क्यों जल्दी आये?"

"भाग्य. आज उन सबसे ज्यादा आकर्षक और प्यारी महिला को मेरी झोली में गिरना था."

मेहुल का ये विश्वास देखकर स्मिता विस्मित थी. ऐसा क्या था मेहुल में जो उसे अधिक आयु की महिलाएं पसंद करती हैं. मेहुल भी अब अपने उस रूप में आ रहा था जिसके लिए महिलाएं उस पर लट्टू थीं. उसका ४ घंटे पहले का आश्चर्य अब एक अवसर में बदल चुका था. उसे ये जानकर बहुत प्रसन्नता थी की न केवल अपनी माँ, बल्कि उनके चुदाई समूह की और औरतें भी उसके बिस्तर की शोभा बढ़ाएंगी. इसीलिए वो अब पूरे फ़्लर्ट की शैली में आ चुका था. वो आज अपनी माँ को ये दिखाना चाहता था कि वो उसे ही नहीं बल्कि औरों को भी पूरी संतुष्टि दे सकता है.

"कैसे?" स्मिता अभी भी अचरज में थी, "मुझे बताओ सब."

"क्या?"

"यही कि तुम इतनी जल्दी एक शर्मीले और शांत लड़के से इतने अनुभवी चुड़क्कड़ कैसे बन गए कि इतनी औरतें तुम्हें चाहती हैं."

"एक आयु के बाद स्त्रियाँ ऐसे भोले भाले लड़कों को सेक्स में दीक्षित करना चाहती है जिससे उनका मनोबल और अपने ऊपर विश्वास बढ़ता है कि वो अभी भी आकर्षक हैं." मेहुल एक कुटिल मुस्कान के साथ बोला।

"पर उन्हें ये नहीं पता होता की इस भोले चेहरे के पीछे सेक्स में निपुण एक आदमी छुपा है." स्मिता ने बात समझते हुआ कहा.

"हाँ और ३-४ मिलन के बाद उन्हें ये लगता है की मैं उनके द्वारा सिखाये हुए पाठ पर ही अनुशरण कर रहा हूँ."

"बेचारी भोली औरतें." स्मिता ने हैरत में सिर हिलाया. "तुमने किस आयु की औरतों को चोदा है?

"लड़कियों को छोड़ दें तो करीब ३० साल से ६५ साल तक की."

"६५? वो कैसे? कौन?"

"हमारी प्रिंसिपल की माँ."

"तुमने अपने प्रिंसिपल की माँ तक को चोद दिया!" स्मिता ने आश्चर्य से कहा.

"क्या करता, जब मैं उनके घर में अपनी प्रिंसिपल की गांड मार रहा था तो वो पता नहीं कैसे अंदर आ गयी कमरे में. और जाने का नाम ही नहीं ली. आखिर में मुझे उसके तीनों छेद पैक करने पड़े. पर अब सप्ताह में एक बार दोनों बुलाती है और साथ में चुदवाती है."

"तुम कौन हो? मेरा सीधा सादा बेटा कहाँ गया."

मेहुल ने एकदम से अपना भाव बदला और वही घबराया और परेशान लड़का दिखने लगा जिसे सब जानते थे.

"पर मम्मी हम ये सब बातें करने तो यहाँ आये नहीं है. आप तो मुझे सेक्स का ज्ञान देने के लिए आमंत्रित की थीं न?"

"जो इतनी औरतों को चोद चुका हो उसे ज्ञान देने की नहीं उससे सुख लेने की आवश्यकता है."

मेहुल ने अपनी माँ का हाथ पकड़कर उसे खड़ा किया और उसके रसीले होंठ चूमने लगा. स्मिता का शरीर वासना से थरथरा उठा और वो भी इस चुम्बन में पूरा साथ देने लगी. मेहुल ने पीछे करते हुए स्मिता के ब्लाउज और ब्रा के हुक खोल दिए. फिर उसने होंठों को छोड़कर गर्दन को चूमते और चाटते हुए स्मिता के पीछे गया और उसके कानों को चूमते हुए उसका ब्लाउज और ब्रा अलग कर दी. अपने हाथ आगे करते हुए स्मिता के दोनों मम्मों की घुंडिया अपनी उँगलियों में लेकर हल्के से मसलने लगा. उसके चुंबन बिना रुके स्मिता के कान, गर्दन और पीठ को तर कर रहे थे. स्मिता ये जान गई की आज उसका सामना सेक्स में निपुण एक ऐसे खिलाडी से है जो उसके रोम रोम को पुलकित कर देगा. मेहुल अब अपने हाथों से उसके दोनों मम्मों को दबा रहा था, या यूँ समझो की मसल रहा था, और उसकी उंगलिया घुंडियों को मसल रही थीं.

"कैसा लग रहा है, मम्मी। "

"ब ब ब बहुत अच्छा"

मेहुल यूँ ही स्मिता को चूमते हुए अपने हाथ को हटाता है और उसकी साड़ी को एक हाथ से उसके शरीर से उतारने लगता है और कुछ ही पलों में साड़ी कालीन पर गिर जाती है. पर मेहुल का हाथ ठहरता नहीं और वो पेटीकोट का नाड़ा खोल देता है और पेटीकोट भी लहरा कर स्मिता का शरीर छोड़ देता है. स्मिता ने पैंटी नहीं पहनी थी और वो पेटीकोट के गिरते ही नंगी हो गई. दो पल के लिए मेहुल अपने दोनों हाथ मुक्त करता है और अपनी टी-शर्ट, शॉर्ट्स उतार फेंकता है. वो और अंडरवियर में अपने शरीर को स्मिता के शरीर के पीछे पूरा मिला देता है. स्मिता को अपनी गांड में कुछ चुभता हुआ प्रतीत होता है तो वो समझ जाती है कि मेहुल ने अपने कपडे उतार दिए हैं. वो उसके देखने के लिए लालायित हो जाती है और घूम जाती है.

**********
 
श्रेया का शयनकक्ष: श्रेया और विक्रम

"पापा जी, मुझे मेहुल भैया के लिए बहुत डर लग रहा है. वो इतने सीधे हैं कि कहीं कुछ उल्टा सीधा न कर बैठें."

"चिंता तो मुझे भी है, श्रेया, पर मोहन भी शीशे में उतर गया था. मुझे स्मिता पर विश्वास है कि वो सब अच्छे से संभाल लेगी. दूसरा तुम ने ही देखा की मेहुल ने उसका ही नाम लिया था."

"आप बाथरूम से आईये तब तक मैं स्नेहा और मम्मी से बात कर लेती हूँ." कहते हुए वो अपनी माँ को कॉल लगाती है.

"हेलो मम्मी, स्नेहा पहुँच गयी न?"

“------”

"आज मेहुल को हमने अपना खेल दिखा दिया. अभी मम्मी जी उसे अपने कमरे में समझाने के लिए ले गई हैं."

“------”

"आप तो मम्मी जी को जानती हो, उनका तीर कभी नहीं चूकता।"

“------”

"अरे आपका भी नंबर आएगा, शीघ्र. पहले हम तो निपट लें. पर वो स्नेहा को जरूर चोदेगा, बहुत आगे पीछे घूमता है उसके."

“------”

"जी. आज तो मैं पापाजी के साथ हूँ. महक है, मोहन के साथ. और आप?"

“------”

"चलो आप भी इन्जॉय करो, गुड नाईट."

इतने में विक्रम बाथरूम से बाहर आ गया, एकदम नंगे और श्रेया अंदर घुस गयी और नहाकर कुछ ही मिनटों में नंगी ही बाहर आ गई. विक्रम बिस्तर पर लेटा था और उसका लंड सीधे पंखे को देख रहा था. श्रेया ने अपनी चूत को विक्रम के मुंह पर रखा और झुककर उसका लंड चूसने लगी.

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मोहन का शयनकक्ष: महक और मोहन

"कल पता लगेगा कि मेहुल माना कि नहीं. हालाँकि वो इतना दब्बू है कि मम्मी के कहने पर मानेगा अवश्य." महक ने अपने विचार रखे.

"तुम ये क्यों सोचती हो कि वो दब्बू है. मेरी समझ से वो बहुत संयम में रहता है. वो कभी कॉलेज बंद होने पर सीधे घर नहीं आता। २ -३ घंटे कहाँ रहता है, पता नहीं. दब्बू या डरपोक लोग ऐसा नहीं कर सकते. मुझे तो लगता है की वो हम सबसे कुछ छुपा रहा है. मैंने इसीलिए नहीं पूछा ताकि उसे झूठ न बोलना पड़े मुझसे."

"चलो, ये भी कल पता चल जायेगा. मम्मी राज उगलवाने की विशेषज्ञ है. उन्हें तो किसी खुफ़िआ जाँच एजेंसी में होना चाहिए था."

महक अपने कपडे उतार कर बिस्तर पर लेट गई और अपने दोनों पाँव फैला दिए.

"आइये, आपकी स्वीट डिश (मिठाई) परोसी हुई है. सीधे चाट लीजिये."

मोहन ने भी देर न की और कपडे उतार कर महक की चूत में अपने मुंह से पिल गया.

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गौड़ा परिवार के घर:

"श्रेया का फोन था. स्मिता मेहुल का आज उद्घाटन कर रही है. इतना सीधा लड़का है, पता नहीं उसे आघात न पहुंचे."

"उसे घर किसने भेजा था जल्दी, वैसे तो वो ६ बजे के पहले नहीं जाता है?"

"स्नेहा ने, उसे बोली थी कि वो उधर जा रही है. बाकी उसने भाग्य के हाथ में छोड़ दिया था."

"वही तरीका जो मोहन और मेरे लिए काम आया था. पर हम दोनों फिर भी थोड़े तेज हैं. मेहुल सच में बहुत सीधा है."

"अब कल ही पता चलेगा कि क्या हुआ. मुझे नहीं लगता मेहुल कल कॉलेज जाने की स्थिति में होगा."

इस समय सब लोग बैठक में बातें कर रहे थे. स्नेहा अविरल की गोद में थी, और विवेक का सिर अपनी माँ की गोद में.

"चलो सोते हैं, कल शायद श्रेया के घर जाना होगा. सब कुछ ठीक ठाक रहे और मेहुल कहीं कुछ उल्टा न कर बैठे."

ये कहकर सब अपने कमरों में चले गए.

**********

स्मिता का शयनकक्ष: स्मिता और मेहुल

जब परिवार के सब लोग इस चिंता में डूबे थे कि मेहुल पर कोई विपरीत असर न हो, बाकी लोगों की धारणा के विपरीत, यहाँ मेहुल ही इस अभियान को नियंत्रित कर रहा था.

स्मिता जब मेहुल की ओर मुड़ी तो उसे विश्वास था कि मेहुल भी उसकी ही तरह निर्वस्त्र होगा. पर उसे ये देखकर अचरज हुआ कि अभी भी मेहुल अंडरवियर पहने हुए था. वो अपना हाथ नीचे बढ़ाती इससे पहले ही मेहुल ने उसके हाथ अपने कन्धों पर रखे और एक गहरा चुम्बन लेने लगा. स्मिता फिर से लहरा उठी. चूमते हुए ही मेहुल ने स्मिता को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी आँखों से आरम्भ करते हुए, एक एक इंच शरीर को चूमते और चाटते हुए नीचे की ओर अग्रसर हुआ. स्मिता ने ऐसा उत्तेजक और मादक प्रेम कभी भी अनुभव नहीं किया था. अंततः मेहुल उसकी जांघों के जोड़ पर पहुंच गया जहाँ एक अमूल्य निधि उसको देख रही थी. उसने अपनी जीभ से उस गुफा के चारों और चाटकर उसे चमका दिया.

स्मिता अब वासना से तड़प रही थी और उसकी चूत से पानी की धार बह रही थी. मेहुल बहुत प्रेम और संयम से हर एक बूँद को चाट रहा था. तभी उसने स्मिता के भगनासे को दो उँगलियों के बीच में लेकर दबाया और अंगूठे से उसके ऊपर के पतले हल्के छेद को रगड़ने लगा. स्मिता को जैसे ४४० वोल्ट का करेंट लगा. उसका पूरा शरीर बिस्तर से एक फुट ऊपर उछल गया और उसकी चूत से एक फुहार निकली जिसने मेहुल के पूरे चेहरे को सरोबार कर दिया.

"हम्म्म्म, मॉमा लव्स इट. क्यों माँ तुम्हें मज़ा आया? कभी छोड़ी है ऐसी धार पहले." मेहुल ने अपने चेहरे पर लगे स्मिता के रस को हाथों से पोंछते हुए पूछा.

"न न न नहीं. ऐसा कभी नहीं हुआ, तू तो जादूगर है रे."

"लो अपने पानी का स्वाद लो", कहते हुए मेहुल ने अपनी कामरस से सनी उँगलियाँ स्मिता के मुंह में डाल दीं। स्मिता ने उसकी ओर कामुक आँखों से देखते हुए उँगलियाँ चूस कर साफ कर दीं. फिर मेहुल स्मिता के बगल में लेट गया और अपने एक हाथ से उसकी चूत को सहलाते हुए उसके होंठों का रस पीने में जुट गया. फिर उसने अपना बायाँ हाथ स्मिता की गर्दन के नीचे से निकालकर उसके बाएँ स्तन को भींचने लगा. दायाँ हाथ चूत में व्यस्त था.

स्मिता ने अपना मुंह मोड़कर मेहुल के होंठ चूम लिए. कामातुर माँ अब अपने बेटे के हाथों में एक खिलौना थी, एक ऐसा बेटा जो बाहर से जो दिखता था अंदर से बिल्कुल अलग था.

"सब ये सोच रहे होंगे कि आज मैं तेरा उद्घाटन करूंगी क्योंकि तू सेक्स से अनिभिज्ञ होगा. उन्हें बहुत आश्चर्य होगा ये जानकर कि तू इतना बड़ा खिलाड़ी है. तूने मुझे बिना अपने लंड को छुए बिना ही इतना आनंद दिया है कि मैं वर्णन नहीं कर सकती. पर तू अभी तक अंडरवियर क्यों पहने है."

"वो भी उतार दूंगा मेरी प्यारी मम्मी. मैं तुम्हे वो सुख देना चाहता हूँ जो आपने स्वप्न में भी नहीं अनुभव किया होगा. पर मेरी एक विनती है आपसे. हमारे बीच जो भी होगा, पर आप अभी किसी को बताना मत. मैं चाहता हूँ कि सब यही सोचते रहें कि मैं अनाड़ी हूँ. जब तक मैं परिवार की सभी महिलाओं को नहीं चोद लेता, जैसा कि मुझसे अपेक्षित है, आप कुछ नहीं कहोगी."

स्मिता इस समय हर शर्त पर सहमत थी. मेहुल की तीन उँगलियाँ उसकी चूत में अंदर बाहर हो रही थीं, और उसे अपनी चूत की आग बुझानी थी. पर मेहुल था कि इतना धीरे चल रहा था की उसे रुकना भारी लग रहा था.

"मेहुल, क्या अब तुम मुझे चोदोगे। मैं जली जा रही हूँ. मेरी आग को शांत कर दो बेटा। "

"हम्म्म्म, मम्मी तुमने तो कहा था कि दीक्षा में तुम मुझे अपने तीनों छेद समर्पित करोगी."

"हाँ, अवश्य. हमारा यही नियम है. इससे न सिर्फ दीक्षार्थी को सेक्स का पूरा अनुभव होता है, बल्कि ये भी पता लगता है कि उसकी ठहरने की क्षमता कितनी है और वो कितनी बार लड़ाई में खेल सकता है. क्योंकि उसे हमारे समुदाय की अन्य स्त्रियों को भी संतुष्ट करना होता है. और हम मानक से नीचे के खिलाड़ी को अतिरिक्त परीक्षण देते हैं.

"और आप लोग तीन बार को एक मानक मानते हो." मेहुल ने मुस्कराते हुए पूछा.

"हाँ, क्यों तू कितने बार चोद लेता है."

"ज्यादा नहीं, बस यूँ समझो की तीन स्त्रियों को तो पूरा अनुभव दे ही सकता हूँ."

"क्या!" स्मिता की ऑंखें फटी की फटी रह गयीं.

"अरे छोड़ो ये सब मम्मी, अब आपके पहले छेद का समय है. और मैं चाहूंगा कि आप मुंह से मेरे लंड को शांत करो."

स्मिता की आँखों में चमक आ गई. उसने मेहुल से अंडरवियर उतारने को कहा. मेहुल जानता था कि ये उसके लिए एक सरप्राइस होना चाहिए.

"नहीं मम्मी, ये शुभ कार्य तो आपको अपने ही हाथों से संपन्न करना होगा. आखिर मैं आपका शिष्य जो हूँ."

ये कहकर मेहुल बिस्तर के उस ओर खड़ा हो गया जहाँ स्मिता लेटी थी. स्मिता बैठ गई और उसने मेहुल का अंडरवियर उतार दिया.

"ओ गॉड! ये क्या है?" उसके चेहरे पर अविश्वास के भाव थे. "क्या है ये?"

**********
 
श्रेया का शयनकक्ष: श्रेया और विक्रम

विक्रम और श्रेया ने एक बार मौखिक सम्भोग का आनंद लिया और दोनों एक दूसरे के मुंह में अपना पानी छोड़ चुके थे. पर दोनों का मन अभी भरा नहीं था. दोनों का पूरा ध्यान इस बात पर ही लगा था की स्मिता मेहुल को कैसे अपने वश में कर रही होगी और मेहुल की क्या प्रतिक्रिया हो रही होगी. दोनों के कान किसी भी ऐसी ध्वनि के लिए संवेदनशील थे जिससे ये पता लगे कि कहीं मेहुल कमरा छोड़कर बाहर तो नहीं जा रहा. ऐसी किसी भी विषम परिस्थिति में उसे रोकना आवश्यक था.

"पापाजी, आज आप मुझे घोड़ी के आसान में ही चोदिये, कहीं दौड़ना पड़ा मेहुल के पीछे तो देर नहीं होगी." ये कहकर श्रेया ने आसन धारण किया और सिर और कमर को झुककर अपनी गांड को ऊँचा उठा दिया.

विक्रम के मन में पहले श्रेया की गांड मारने का विचार आया पर अपने लंड को चूत पर रखकर अंदर पेल दिया. चाहे श्रेया कम आयु की थी पर उसने चुदाई ५ साल पहले ही शुरू कर दी थी. वो इस तगड़े धक्के को भी बड़ी सरलता से झेल गई. विक्रम उसे तेज गति से चोदने लगा. श्रेया भी उसका पूरा साथ दे रही थी और दोनों जल्दी ही अपनी भूख (या प्यास) मिटाकर विश्राम करना चाहते थे.

जल्द ही दोनों एक बार फिर से झड़ गए और एक दूसरे को चूमकर कपडे पहनकर बैठक में चले गए. आज पहरे की रात थी, जब तक स्मिता का सन्देश नहीं आता कि स्थिति काबू में है, उन्हें इसी प्रकार जागते रहना था.

श्रेया ने दोनों के लिए एक छोटा पेग बनाया, टीवी को सायलेंट में डालकर देखते हुए चुस्की लेने लगे. दोनों के दिल इस समय धड़क रहे थे. ४० मिनट से अधिक हो गया था और स्मिता ने कोई भी सूचना नहीं दी थी.

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मोहन का शयनकक्ष: महक और मोहन

मोहन अपनी जीभ महक की चूत में डालकर झाड़ू के समान घुमाने लगा. अपनी एक ऊँगली महक की चूत में डालकर उसे कुछ समय के किये ऊँगली से चोदा और अपने होंठों से उसके भगनासे को दबाकर रखा. इस आक्रमण के सामने महक ने हाथ डाल दिए और उसकी चूत भरभरा कर पानी छोड़ने लगी. अब चूँकि भगनासा मोहन के होंठों के बीच ही था तो सारी धार मोहन के मुंह में ही सीधी चली गई. मोहन ने अपने तेजी से अपना मुंह हटाया और अपनी दायीं हथेली में थोड़ा पानी इकठ्ठा किया। फिर महक के दोनों पांव अपने बाएं हाथ से इस तरह ऊपर उठाये कि उसके घुटने पेट से जा लगे. अब महक की चूत और गांड के दोनों छेद मोहन के सामने थे. उसने अपने हाथ में एकत्रित महक का कामरस उसकी गांड की छेद पर मल दिया.

महक समझ गयी कि मोहन आज उसकी गांड का आनंद लेगा, वो भी इस खेल के लिए अपने आपको मनाने लगी. अब महक की गांड पहली बार तो मारी जा नहीं रही थी. समुदाय में गांड मारने के लिए पुरुष लालायित रहते थे. वैसे महिलाएं भी इसमें पीछे नहीं थीं पर महक चाहती थी कि मोहन एक बार उसकी चूत की खुजली मिटा देता तो अच्छा होता. पर आज की विशेषता को देखकर उसने कोई आपत्ति नहीं की.

"थोड़ी वेसलीन लगा लो. ऐसे दर्द होगा." उसने मोहन से कहा.

मोहन जल्दी से ड्रेसिंग टेबल से वेसलीन की शीशी उठा लाया. तब तक महक घोड़ी की तरह अपनी गांड ऊपर करके लेट गई. मोहन ये देखकर मुस्कुरा दिया. वो पिछले आसन में ही उसकी गांड मारना चाहता था क्यूंकि उसमे गांड का रास्ता और तंग हो जाता था और आनंद अधिक आता था. पर इसमें महक को परेशानी होती थी. तो महक ने उसका ध्यान दूसरी ओर करके अपनी अनुसार मुद्रा ले ली थी. मोहन महक की गांड पर अच्छे से वेसलीन की मालिश की और उतने ही ध्यान से अपने लंड को भी चिकना कर लिया. महक की गांड का छेद इस समय आक्रमण की उत्सुकता से लपलपा रहा था. मोहन ने अपना लंड रखा और हल्के हल्के अंदर उतार दिया.

"आअह, वाह, क्या गजब की गांड है तेरी महक."

"लंड आपका भी कोई कम नहीं. चाहे जितनी बार भी खाऊं हमेशा नया और बड़ा ही लगता है. मेरी गांड को बिल्कुल सही लेवल तक भरता है. मेरी ही गांड का साइज देखकर ये लंड बना है."

"तू मुझसे छोटी है, तेरी गांड इसके साइज की बनी है."

"चलो ठीक है अब चोदो भी, बातें बाद में कर लेंगे. नीचे भी जाना है."

ये सुनकर मोहन को आज के दिन का महत्त्व याद आ गया. उसे अपना वो समय याद आ गया जब वो अपनी माँ के कमरे में था और उसके पिता बैठक में उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे. उसने मन ही मन मेहुल को शुभकामना दीं और इच्छा की कि मेहुल भी उसकी तरह इस पूरे पारिवारिक समारोह में सम्मिलित हो जाये.

ये सोचते हुए उसने महक की गांड में अच्छे लम्बे शॉट आरम्भ किया , पर इन धक्कों में तीव्रता तेजी नहीं थी, अपितु शीघ्रता अवश्य थी. वो कभी भी महक की कठोर चुदाई नहीं करता था, उसकी छोटी बहन जो ठहरी. महक को भी उसके बड़े भाई का प्यार ही भाता था. उसे चोदने वाले और भी थे, कुछ तो ऐसे जो हड्डियां हिला देते थे. उसे कभी कभार वो भी अच्छा लगता था. पर जो प्यार मोहन देता था उसकी कोई तुलना नहीं थी.

कुछ ही मिनटों की चुदाई के बाद मोहन महक की गांड में ही झड़ गया. लगभग साथ में महक भी झड़ चुकी थी. दोनों बाथरूम में जाकर निर्मल हुए और कपड़े पहन कर बैठक पहुंचे जहाँ विक्रम और श्रेया टीवी देख रहे थे. उन्हें देखकर मोहन ने भी दो हल्के ड्रिंक्स बनाये और सब चुपचाप चुस्कियां लेते हुए टीवी देखने लगे.

मोहन ने विक्रम से पूछा "मम्मी का कोई मेसेज।"

"नहीं"

"आशा करनी चाहिए कि सब ठीक रहे. मेहुल अब शायद लड़कियों से न घबराये."

**********
 
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