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Incest खाला जमीला

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कड़ी_46

मैं और खाला रूम से बाहर आ गये और मैं सहन में बैठ गया टीवी देखने लगा। खाला किचेन में जस बनाने लगी मरे लिए। कुछ देर बाद लुबना भी आ गई। जूस पीतं हमें उससे गप-शप भी हुई। वो अपनी स्टडी को लेकर बहुत सीरियस हो रही थी। लुबना उठकर अंदर चली गई।

खाला सब्जी लेकर मेरे पास आ गईं। वहां चारपाई पे बैठी सब्जी काटने लगी। मैं चेयर पे बैठा था अब मैंने अपनी टांगें उठाकर चारपाई पे रख दी खाला के पास।

खाला ने दुपट्टा नहीं लिया हुवा था। मम्मे उनके आगे को निकले हमें थे। गला खुला था, जहां से आधे मम्मे नजर आ रहे थे। मैंने पैर खाला की जांघ की बगल से टच किया तो, खाला ने मेरी तरफ देखा।

मैंने धीरे आवाज में कहा- "खाला तुम्हारे मम्मे बड़े सेक्सी लग रहे हैं। देखो ज़ारा ऊपर से तुम्हारे मम्मों की लकीर नजर आ रही है।

खाला ने सेक्सी नजरों से मेरी तरफ देखा और मुश्कुरा दी। फिर बातों के दौरान मैं जांघ पे मालिश करने के अंदाज में पैरा का फेर रहा था। अभी हम बातें कर रहे थे तो मोहल्ली की एक औरत आकर खाला के पास बैठ गई और मैं घर आ गया।

घर आया तो अम्मी लेटी हुई थी। मैंने उनकी तबीयत का पूछा। उनके पास बैठ गया बेड पै और उनका बाजू दबाने लगा।

अम्मी ने कहा "हाँ बेटा अब कुछ बेहतर है पहले से, बस जरा कमजोरी हो गई है."

मैंने अम्मी को एक ग्लास गरम दध का पिलाया।

अम्मी ने कहा, "बड़ी खिदमत कर रहे हो मेरी। पहले तो कभी नहीं इतना खयाल किया मेरा..."

मैंने कहा- "अम्मी पहले मुझे एहसास नहीं था। अब मुझे एहसास हुआ है.." अब मैं अम्मी को कैसे बताता की मुझे एहसास किस वजह से हुवा है? .

अम्मी मुश्कुराई और बाह फैलाई। में इशारा था आओ मेरे गले लग जाओ। अम्मी लेटी हुई थी। मैं अम्मी के ऊपर झुक गया तो अम्मी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और सीने से लगा लिया। अम्मी ने मुझे गाल में किस की और कहा- "मेरा बेटा तो बहुत अच्छा है। मेरा खयाल भी रखता है.."

मुझे अम्मी के मम्मे अच्छी तरह महसूस हो रहे थे। मैंने भी अम्मी को उनके नरम गालों पे किस की और फिर जुबान फेर दी।

अम्मी मुश्कुराई और कहा- "बाज नहीं आओगे?"

मैंने कहा- "अपने कहा था कर लिया करो। मुझे अच्छा लगता है इसलिए ऐसा कर लेता हूँ."

मैं जानबूझ के अम्मी के ऊपर झुका रहा। अम्मी ने मेरा सिर ऊपर किया और मुझे देखने लगी। मैं भी अम्मी को देखने लगा। अम्मी ने अपने होठ किस करने के स्टाइल में इकट्ठे किए। ये किस करने का स्टाइल था उनका। मैंने भी उनकी नकल उत्तरते हय सेम उनकी तरह किया।

अम्मी मुश्कुराई और कहा- "बड़े तेज हो तुम हो..." और एक चपत लगाई मुझे।

अम्मी का चेहरा कुछ-कुछ गरम था। मेरे हाथ उनके गालों से छू रहे थे, और मेरे बाजू अम्मी के मम्मों के ऊपर से छू रहे थे। में अपनी उंगलियां अम्मी के गालों में फेरने लगा। मेरा लण्ड इस बात सेक्सी मस्टीतियों की वजह से पूरा हाई हो गया था। जिसको मैंने अपनी टांगों में दबा लिया हुआ था।

अम्मी ने कहा, "बेटा आज खाजा बाहर से लें आजा। कल फिर में पका लंगी...

मैंने हाँ में सिर हिलाया, और वहां से उठ गया। शाम का अंधेरा फैल रहा था। मैं छत पे बैठा स्टडी कर रहा था। तो साथ वाली छत पे नरेन आ गईं। वो कपड़े उतार रही थी। हमारी नजरें आपस में मिली। काफी दिनों बाद उससे टकराब हुवा था।

नरेन ने मुश्कुरा के मुझे देखा, फिर दीवार के पास आई- "अली कहां गुम रहते हो? नजर ही नहीं आते...

मैंने कहा- "तुम नहीं नजर आती। मैं तो दो-तीन बार आया तुम्हारे घर."

नरेन पहले से निखरी हुई लग रही थी। मेरी नजर उसके मम्मों 4 पड़ी तो नरेन का पता चल गया। उसने मुझे शरारती स्माइल से देखा और में भी मुश्कुरा दिया।

नरेन ने कहा- "किया बात है तुम्हारी नजरें बहुत आवारा हो रही है?'

मैंने भी मुश्कुराते हुये कहा "सामने जब चीज ही ऐसी नजर आ जाये तो नजर का क्या कसूर है?"

नरेन ने कहा- "कभी चक्कर लगाओ घर में। अब मैं घर पे ही होती हैं..."

मैंने कहा- ठीक है।
 
कुछ देर बाद मैं उठकर नीचे आ गया। अंधेरा होने लगा था अभी। नीचे आया तो अम्मी ने कहा- "जाओं कुछ लें आओं खाने के लिये.." फिर मैंने अम्मी से पैसे लिए और बाजार चला गया। बाइक पे जा रहा था। अभी गली में ही था एक औरत ने मुझे हाथ देकर रोका।

पास जाकर रोका तो देखा वो मेरे दोस्त की अम्मी थी। 45 साल के करीब उम्र थी इनकी। नाम इसका सरिया था। मैं इनका आँटी कहकर बुलाता था। और सरिया आँटी भी मुझे अपने बेटे की तरह प्यार करती थी।

मैंने कहा- "जी आँटी किया बात है?"

आँटी ने कहा- "कहां जा रहे हो?"

मैंने कहा- "बाजार जा रहा हैं खाना लेने..

आँटी ने कहा- "मुझे भी ले चलो। मुझे भी वहां बाजार में एक काम है.."

मैंने कहा- जी आँटी।

बाजार में एक दुकान पे आँटी ने रोकने का कहा। आँटी ने कहा- "तुम खाना ले आओ मैं तब तक यहां हैं."

में करीब के एक होटेल से खाना पैक करवा के जब उस दुकान पे गया, तो एंटर होते हय मैंने देखा औंटी एक ब्लैक बा को उलट-पलट के देख रही थी। औंटी ने मुझे देखा तो जल्दी से दुकान वाले को कुछ कहा। ब्रा दुकानदार को पकड़ा दिया था। आँटी शायद मुझे देखकर घबरा गई थी। दुकानदार बा पैक करके आँटी को पकड़ा दिया था।

में और ऑटी वापस आए। उनके घर के आगे बाइक रोक दी। ऑटो ने उतरते हो मेरा शुक्रिया अदा किया और अंदर चली गई।

गत का खाना खाकर फ्री हुआ तो अम्मी मेडिसिन खाकर लेट गई बैंड पे, और मुझे भी कहा "लेट जाना तुम भी यहां... मैंने हाँ में सिर हिलाया और बाहर आ गया।

घर से बाहर निकला तो दोस्त खड़े थे। उनसे गपशप की। टाइम का पता भी नहीं चला। देखा तो 10:00 बजने बाले थे। मुझं अम्मी का खयाल आया तो फटाफट घर आ गया। अम्मी के गम में गया तो रूम में जीरा वाट का बल ब रोशन था। अम्मी की आँखें बंद थी। में उनके बराबर में लेट गया तो अम्मी ने आँखें खोली।

मैंने कहा- "अम्मी दबा दूं आपको, अगर जिस्म दर्द कर रहा है तो?"

अम्मी ने कहा "नहीं बेटा मैं ठीक है..."

में अम्मी के बाज़ पे हाथ फेरने लगा। अम्मी का जिस्म मुझे गरम-गरम महसूस हुआ। मैंने पूछा- "आपका जिश्म गरम लग रहा है..."

अम्मी ने कहा "बुखार नहीं है। कंबल में लेटी हुई हूँ कब से तो जिश्म गरम हो गया है.."

मैंने कहा- "मुझे तो बुखार लग रहा है.."

अम्मी ने कहा "लो तुम भी आ जाओं कंबल में। तुमको फिर पता चल जायेगा.."

मुझे और क्या चाहिए था? मैं अम्मी के कंबल में घुस गया। अम्मी सीधा लेटी हुई थी। मैं करवट लेकर अम्मी की तरफ मुँह करके लेट गया, और एक बाजू उनके पेट में रख दिया।

कुछ देर बाद अम्मी ने कहा- "हाँ अब बताओ.."

मैंने कहा- "जी अम्मी वाकई ऐसा ही है." मैं अब हाथ को अम्मी के पेंट पे फेरने लगा था। पेट नरम और गरम महसूस हो रहा था।

अम्मी ने कहा "ना करो बैटा, गुदगुदी होती है...” कहकर अम्मी ने मेरा बाजू पकड़कर गर्दन के ऊपर कर लिया।

मेरा बाज अब अम्मी के नंगे सीने पे छू रहा था। यहां की नरम स्किन मुझे बहुत मजा देने लगी। ऐसे ही करते हमे कब नींद आई पता ही नहीं चला। ऐसे ही दिन गुजरते रहे। कुछ खास नहीं हुआ। एग्जाम पास आ गये थे। मैंने भी अब स्टडी में फोकस कर लिया था।

फिर वो दिन भी आया मैं एग्जाम से फारिग हो गया। अब मैं रिलेक्स महसूस कर रहा था। अब स्कूल से 10 15 दिन की छुटियां थी। लास्ट पेपर देकर मैं घर आया तो मैंने अम्मी से कहा "अब बाजी जोया और साजिद भाई को कहा आ जयें यहां दाक्त पं."

अम्मी ने कहा- "अच्छा रात को फोन करती हैं उनको... फिर अम्मी ने पूछा- "पेपर ठीक हयं तुम्हारे?"

मैं- "जी अम्मी ठीक हुये हैं."

दोपहर का खाना खाकर मैं खाला की तरफ गया। क्योंकी सुबह वा कहकर गई थी कुछ सामान लाकर देना था उनको बाजार से। खाला के घर गया तो खाला ने गले लगाकर मुझे प्यार किया और कहा "आ गया मेरा शोना। पेपर्स ठीक हुये?"

मैंने कहा- "जी खाला अच्छे हो गये..."

लुबना भी मुझे नजर आ गई। वो भी अब फी थी। फिर खाला और मैं बाजार चले गये सामान लाने। वहां काफी टाइम लगा। शाम होने वाली थी जब खाला के घर पहुंचे।
 
दोपहर का खाना खाकर मैं खाला की तरफ गया। क्योंकी सुबह वा कहकर गई थी कुछ सामान लाकर देना था उनको बाजार से। खाला के घर गया तो खाला ने गले लगाकर मुझे प्यार किया और कहा "आ गया मेरा शोना। पेपर्स ठीक हुये?"

मैंने कहा- "जी खाला अच्छे हो गये..."

लुबना भी मुझे नजर आ गई। वो भी अब फी थी। फिर खाला और मैं बाजार चले गये सामान लाने। वहां काफी टाइम लगा। शाम होने वाली थी जब खाला के घर पहुंचे।

लुबना ने खाला को बताया- "कल बाजी जोया और साजिद भाई अपनी वाइफ फरजाना के साथ आएंगे.."

मैंने पूछा- "तुमहें किसने बताया?"

उसने कहा- "तुम्हारी अम्मी में पता चला। मैं गई थी तुम्हारे घर..."

में बड़ा खुश हुआ की चलो अब बाजी जोया को दोबारा चोदने का मौका मिलेगा।

खाला किचेन में जा चुकी थी। मैं और लुबना सहन में बैठे हये थे। मैंने लुबना की जांघ पे हाथ फेरा और पूछा "क्रिया प्रोग्राम है अभी?"

लबजा ने कहा- "किस चीज का प्रोग्राम?"

मैंने कहा- "सेक्स करने का प्रोग्राम। मेग़ बहुत दिल कर रहा है जान.."

लुबना मुश्कुराई और कहा- "अभी नहीं। जब मेरा मूड होगा तुमको बता दूंगी."

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मैंने कहा- "बहुत तेज हो गई तुम और नखड़े भी दिखा रही हो..."

लुबना के चेहरा पे शरारती मुश्कान थी। कहा- "जो मज़ी समझ लो में तो अपनी मर्जी से करंगी.."

कुछ देर बाद में घर आ गया। देखा तो अम्मी कपड़े प्रेस कर रही थी जो सुबह पहनने थे। रूम में काई जहीं था मैंने जाते ही अम्मी को पीछे से झप्पी लगा ली। अम्मी के नरम और मोटे चूतड़ मुझे अपने सामने पे महसूस । हये। उफफ्फ... इतना मजा आया अम्मी की नरम गाण्ड का महसूस करके क्या बताऊँ। हाथ मैंने अम्मी के पेट में बांध लिए।

अम्मी मुश्कुराई और कहा- "किया बात है बेटा, क्यों इतना लाड़ कर रहे हा मुझे?"
 
मैंने अम्मी को और अपने साथ लगाते हुये कहा- "अम्मी मुझे आपस प्यार हो गया है, इसलिए आपको छोड़ने का दिल नहीं करता.." बातों के साथ-साथ मैंने अपना काम भी जारी रखा हुआ था। ऊपर से अम्मी के मम्मों की लाइन साफ नजर आ रही थी और नीचे पहना हुवा बा भी महसूस हो रहा था।

अम्मी ने कहा "बेटा अभी सफाई भी करनी है। तुमने मेरी हेल्प करनी है। कल मेहमान आ जाने हैं."

मैंने कहा- "ठीक है अम्मी जान... और मैं अम्मी को गर्दन पे किस करने लगा, और नरम गोस्त को मुँह में भर लेता था।

अम्मी ने कहा "बस काटना नहीं, वरना निशान पड़द जायेंगा.."

मैंने कहा- "अम्मी आप इस उम्र में भी बड़ा स्मार्ट हो, एक लड़की की तरह। मुझे बहुत पसन्द है आपका जिशम..." मैंने जानबूझ के जिशम शब्द काहीस्तेमाल किया।

अम्मी मुश्कुराई और कहा- "ओहो किया बात है, बड़ा गौर करते हो मुझ पे"

मैंने कहा- "आप मेरी अम्मी हो और ऊपर से मैं आपको प्यार भी करता हैं, तो फिर आप पे गौर ता करंगा ही ना?"

अम्मी मुश्कुराई और कहा- "मेरा बेटा भी बहुत प्यारा है.." इसके साथ ही अम्मी ने अपना चेहरा पीछे करके मुझे चमा।

इससे ये हुआ की अम्मी के चूतड़ मेरे लण्ड से अच्छी तरह रगड़ खा गये। ऐसा होने से लण्ड ने एक झटका लिया जो सीधा अम्मी के चूतड़ा पे लगा। अम्मी दोबारा सीधा होकर कपड़े प्रेस करने लगी।

मैंने अम्मी के पेंट पे हाथ फेर के कहा- "देखो अम्मी आपका पेंट कितना मुलायम है। दिल करता है पकड़कर मसल दू.." और मेने पेट को हाथों से दबाकर और हाथ में पकड़कर मसला भी।

अम्मी ने कहा "लगता है, मेरे बेटे को मेरा पूरा जिस्म ही पसन्द है?"

मैंने कहा- "जी अम्मी... सिर से पैर तक आप मुझे पसन्द हो। मेरा दिल करता है की आपके पूरा जिस्म में

आपको चूम लूं..."

अम्मी- "अच्छा बेटा जी ये बात है? अगर मैं कह की तुम चूम सकते हो मेरा पूरा जिश्म तो फिर?"

मैं पहले तो हैरान हुवा फिर कहा- "तो मैं चूम लूंगा अपनी पसन्द का जिस्म..."

अम्मी- "चलो जब मोका मिला तो फिर चम लेना.."

मैं- "मैं अभी चूम लेता हैं। मेरा अभी बहुत दिल कर रहा है आपका चूमने का.." सेक्स और मजे से इस वक़्त मेगा बुरा हाल था, ऊपर से सेक्सी बातें। मैंने इरते-डरते अपने कांपते हाथ अम्मी जांघों पे रख दिए और कहा- "ये देखो अम्मी, यहां से आपका जिश्म कितना हेल्दी है। लेकिन बहुत अच्छा लगता है ये.."

अम्मी- "हाँ बेटा, यहां से वाकई में हेल्दी है और देखो पीछे से भी मेरा जिश्म कितना भारी है। है ना?"
 
मैंने हाथ जांघों से उठाए और अम्मी के चूतड़ों में रख दिए। दोनों चूतड़ मेरे हाथों में थे। मैंने चूतड़ों पे हाथ फेर के और एक बार दबाकर कहा- "हाँ अम्मी, यहां से आपका जिशम अच्छा खासा भारी है। लेकिन ये आपके स्मार्ट जिश्म के साथ सूट करता है." इस दौरान मैं अम्मी के मोटे चूतड़ों पे हाथ फेरता रहा।

अम्मी- "बस बेटा, यहां से मुझे लगता है में ज्यादा मोटी हैं.."

मैं- "नहीं अम्मी, मुझे तो बहुत अच्छी लगती हो आप यहां से भी... और इसके साथ ही अम्मी के गरम चूतड़ दबा दिए मैंने।

अम्मी- "बड़ा अच्छा दबा रहे हो बेटा यहां से तुम। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.."

मैं तो मैं दबा देता हैं आपको और यहां से।

अम्मी- हाँ चला जब तक यहां खड़ी हैं दबा दा। थकावट उतर जायेगा।

मैं अब बिना डर खौफ के अम्मी के चूतड़ों को दबाने लगा। मैंने सोचा भी नहीं था अम्मी के चूतड़ दबाऊँगा। मैंने अब ये किया की अपनी उंगलियां चूतड़ों के अंदराजी तरफ घुसा दिया, जिससे उंगली गाण्ड की लाइन में ऊपर नीचे होने लगी। क्योंकी में दबा जो रहा था।

कुछ देर बाद अम्मी फारिग हुई तो मैंने अम्मी को छोड़ दिया।

अम्मी- बेटा अब सफाई वगैरा कर लें।

में "जी ठीक है अम्मी.." फिर हम सफाई करने लगे और इस दौरान कुछ खास नहीं हुआ।
 
सुबह नाश्ता करके फारिग हुबा तो अब्बू आज बाइक मुझे दे गये। क्योंकी सामान वगैरा लाना था खाने पीने का। अम्मी छोटे भाई को खाला की तरफ छोड़कर आईं और फिर मैं और अम्मी बाइक में बाजार की तरफ चले गये। अम्मी ने मुझे पेट पे हाथ रखकर पकड़ा हुआ था, जिससे उनके मोटे और गुदाज मम्मे मेरी पीठ पे महसूस हो रहे थे।

बाजार से खरीदारी करके हम घर वापस आ गये। अम्मी किचेन में बिजी ह गई। खाला और लुबना भी इधर आ गई अम्मी की हेल्प करवाने के लिये। खाला कोई चीज लाने रूम में आई तो मैंने खाला को देखा। खाला में ब्लैक सूट पहना हुवा था और पाजामा तंग था, जिससे खाला की जांघ और चूतड़ बड़ा सेक्सी नजारा दे रहे थे।

मैं खड़ा हुआ और खाला के पास आ गया और खाला को झप्पी डाल ली। कई दिनों से पानी नहीं निकला था इसलिए मुझे खाला से झप्पी डालकर बड़ा मजा आया। उनका गुराज जिश्म मुझे महसूस होने लगा।

खाला- "बैटा छोड़ दो कोई आ ना जाए और वहां काम भी है किचन में..."

अली- "खाला बहुत दिल कर रहा है सेक्स करने को। बहुत दिन हो गये मैंने पानी नहीं निकाला। देखो कितना टाइट हो रहा है मेरा लण्ड... और खाला का हाथ पकड़कर मैंने लण्ड पे रख दिया।

फिर खाला ने लण्ड को दबाया और मुझे किस की। खाला के हाथ से लण्ड दबवा कर मुझे बहुत मजा आ रहा था। लण्ड बार-बार झटके मार रहा था।

खाला- "बेटा जैसे है मोका मिला हम करेंगे संक्स और तुमको पूरा मजा भी दूंगी। बस सबर करो अभी। मेरा अपना भी बहुत दिल कर रहा है तुमसे सेक्स करने को.." खाला ने अपना हाथ मेरी सलवार में डाल दिया और मेरे टट्टे पकड़कर उनसे मसाज करने लगी। जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मैं- "खाला जादू है तुम्हारे हाथों में। उफफ्फ... ऐसे ही करती रहो तुम.."

खाला बहुत तेजी से लण्ड और टट्टों में हाथ फेर रही थी। उधर में खाला के गदाज चूतड़ अपने हाथों में भर-भर के दबा रहा था। फिर मैंने खाला की सलवार में हाथ डालकर खाला के नंगे और गरम चूतड़ हाथों में भर लिए। खाला की सिसकियां भी निकल रही थी बार-बार। मैं पूरा नशे में खाला के चूतड़ दबा रहा था।

मैं- "खाला बहुत मोटें और नरम हैं तुम्हारे चूतड़। दिल करता है इनको कहा जाऊँ.." और इसके साथ ही मैंने खाला के चूतड़ों की लाइन में उंगली घुसाकर गाण्ड के सुराख पे उंगली को फेरने लगा।

खाला का सुराख मजे से खुल बंद होने लगा। खाला मजे से पागल होतें हमें लण्ड को जोर से पकड़कर मसलने लगी। मैं अब जानबूझ के मजा लेने के लिये सेक्सी गुफ्तगू करने लगा था खाला से। क्योंकी खाला भी पूरा जवाब देती थी।
 
खाला सिसकियां लेती हई- "हाँ बेटा, मुझे पता है की तुमका मेरे चूतड़ बड़े पसन्द है। हर वक़्त इनके पीछे पड़े रहते हो। मुझे पता है मेरी फुदद्दी के साथ तुम मेरी गाण्ड मारने का भी शौक रखते हो। है ना?"

में- "ही खाला तुम्हारे मोटे और बड़े चूतड़ मेरी कमजोरी हैं। दिल करता है अभी इन में लण्ड डाल दू अपना.

खाला- "ता डाल लो बेटा। लेकिन अंदर नहीं करना, बस ऊपर ऊपर से कर ला..."

मैं तो पागल ही हो गया खाला की बात सुनकर। फिर खाला ने अपने चूतड़ मेरी तरफ किए। सलवार पहले ही नीचे थी। मैंने अपनी भी सलवार नीचे की और लण्ड पे थूक मल के खाला के बाहर को निकले हमें चूतड़ों में लण्ड फैंसा दिया।

खाला- "बेटा मेरे चूतड़ों में भी थूक लगा लो, फिर ज्यादा मजा आएगा.. खाला की बात सुनकर मेरे अंदर एक मजे की लहर दौड़ गई।

मैं- "खाला मेरा मुँह सूखा हो गया है। तुम अपना थूक मेरे हाथ पै डालो..."

खाला में ऐसा ही किया। मैंने लण्ड बाहर निकाला और हाथ को चूतड़ों में घुसाकर अच्छी तरह उंगलियों से गाण्ड के अंदर तक थूक मल दिया। जिससे खाला के चूतड़ अंदरूनी बगल पे चिकने हो गये। मैंने लण्ड को दुबारा पकड़ा और चूतड़ों में घुसा दिया और लण्ड को आगे-पीछे करने लगा। ऊपर से खाला के मम्मे पकड़ लिए। खाला थोड़ा सा झुक गई थी, जिससे लण्ड अच्छी तरह सेंट हो गया उनके चूतड़ों में।

गुदाज चूतड़ों में लण्ड ऐसे अंदर-बाहर हो रहा था, जैसे मैं एक फुददी मार रहा हूँ। मुझे इतना ही मजा आ रहा था। खाला के चूतड़ों में गर्मी भी एक फुद्दी जितनी महसूस हो रही थी। मजे से मेरा बुरा हाल हो रहा था। मेरी और खाला की साँस तेज हो रही थी।

खाला- बेटा जल्दी कर लो, काई आ ना जाए। वरना सारा मजा खराब हो जायेगा।

अभी ये अल्फ़ाज खाला के मुँह में ही थे की किचेन से अम्मी की आवाज आई। खाला को बुला रही थी। खाला ने फटाफट मुझे छोड़ा और सलवार ऊपर कर लो। मैं भी डर गया था की शुकर है अम्मी अंदर नहीं आ गई। लेकिन

मजा खराब होने का दुख भी था। डर की वजह से लण्ड ऐसे सिकुड़ गया था जैसे अभी कुछ किया हो ना हो। मैंने भी कपड़े सेट किए और बाहर आ गया।

अम्मी ने एक-दो काम कहे, वो भी कर दिया।

दोपहर 3:00 बजे होंगे जब मेहमान आ गये। साजिद भाई, भाभी फरजाना और बाजी जोया और उनका बैंबी ये 4 लोग आए थे। सब बहुत खुशी से मिले।

बाजी जोया ने मुझे गले लगाया और मेरे कान में फुसफुसाई- "मैं आ गई अली तुम्हारी जान..."

मजे भी उनका वेलकम कहा। भाभी से हाथ मिलाया। वो भी मुश्कुराई मुझे देखकर।
 
मैंने भी मुश्कुराते हुये कहा- "भाभी तुम पहले से खूबसूरत हो गई हो... और ये सच भी था। भाभी का जिश्म पहले से भर गया था। मम्मे और चूतड़ों का फैलाओं बढ़ गया था।

भाभी मुश्कुराते हये- "ओहो तो ये बात है? देवर को अपनी भाभी पसन्द आ गई है..

मैं हँसते हुये- "जी भाभी तुम हो ही ऐसी, पसन्द तो आना ही था। वैसे मुझे हैरानी और खुशी हुई भाभी मुझसे पहले से फेंक होकर मिली। शायद मैं छोटा है इसलिए..' बहरहाल मिलकर हाल पूछ के सब अंदर आ गये।

अम्मी और लुबना पास बैठ गये मेहमानों के। खाला किचन में चली गई इनके लिये मशरुब लेने।

मैं भी किचन में चला गया, और खाला के पास होकर उनको धीरे आबाज में कहा- "खाला आज तो सारा मजा खराब हो गया। कसम से बहुत मजा आ रहा था आज.."

खाला मुश्कुराते हुय- "तुमको मजे की पड़ी हुई है। मुझे अभी भी डर लग रहा है अगर बाजी को पता चल जाता तो? मतलब तेरी अम्मी को?"

खाला पानी लेकर मेहमानों को सर्व करने लगी। मैं भी वहां बैठ गया और गप-शप में हिस्सा लेने लगा।

में- "बाजी, तुम लोगों ने ज्यादा दिन रहना है एक-दो दिन बाद कोई नहीं जाने देना.."

भाई साजिद- "पार, मैं तो कल वापस चला जाऊँगा मुझे काम है। हाँ तुम्हारी भाभी और बाजी यही रहेंगी। जब तक इनका मूड हुआ रुक जायें..."

मैं मजाक में- "चलो ठीक है भाई आपकी खैर है, बाकी तो रुक जायें ना। क्यों भाभी क्या खयाल है?"

भाभी- ही क्यों नहीं। हम कुछ दिन रुकेंगे तुम्हारा शहर देखेंगे। घुमाना हमको।
 
बातों-बातों में रात हो गई, पता भी नहीं चला। एक अच्छा सा डिनर करते हुये भी खुशगवार माहौल रहा। अब्बू भी आ गये थे। रात सोने का टाइम आया तो डिसाइड हुआ की मैं और साजिद एक रूम में। अम्मी अब्बू ऑफकोर्स अपने रूम में और एक रूम में भाभी और बाजी जोया।

मुझे मौका नहीं मिल रहा था की किसी तरह बाजी को इशारा करंग आधी रात को मिलने का। अफसोस करते हमें मैं रूम में आ गया और कब आँख लगी पता नहीं चला। देर रात अचानक मेरी आँख खुली, मुझे पेशाब की हाजत हो रही थी। देखा तो साजिद भाई नहीं थे अपनी जगह पे। खैर मैंने ज्यादा गौर नहीं किया और उठकर वाशरूम की तरफ चला गया।

में वाशरूम में पेशाब कर रहा था तो मुझे सीटियों से धीरे-धीरे आवाजें आजे लगी। क्योंकी वाशरूम सादियों के पास ही बना हुआ था। मैं वाशरूम से बाहर निकला। हर तरफ घुप्प अंधेरा था। मैं किसी खयाल से एक तरफ रूक गया तो देखा सीदियों से नीचे आ रहे थे अम्मी और साजिद भाई। दोनों हँस-हँस के बातें कर रहे थे, और उनके लिए भी कुछ ठीक नहीं थे। साजिद ने अम्मी को कमर में हाथ डालकर अपने साथ लगाया हुवा था।

में हैरान परेशान उनको देख रहा था। ये क्या दृश्य है बास? मुझे जब होश आई तो देखा अब वा दोनों सीढ़ियां उत्तर के खड़े हो गये थे। भाई साजिद ने अम्मी को बाहों में लिया और एक किस की।

अम्मी की आवाज आई- "मुझे अब छोड़ भी दो साजिद... क्या कर रहे हो? पहले ही कितनी देर हो गई है और रिस्क लेकर तुमसे मिली हूँ.."

मैं आराम से वहां से खिसका और रूम में आ गया। मैं आँखें बंद करके सोता बन गया। मैं अपनी ही सोचों में गुम हो गया। साजिद भाई भी आकर लेंट चुके थे।

अम्मी का ये रूप देखकर मुझे हैरानगी और गुस्मा आने लगा। लेकिन मुझे चुप रहना था इस मामले में। बोलता तो अपनी ही बदनामी थी।

अब मैं सोचने में लग गया। मतलब भाई साजिद की शादी के वाकिये मुझे याद आने लगे की एक रात जब में मामी जूबिया से मिलने उनकी चारपाई पे गया था। लेकिन सुबह उठा तो मामी से पता चला वहां चारपाई पे अम्मी लेटी हई थी। उस रात चारपाईयां बदल गई और ... और ओह माई गोड... इसका तो मुझे खयाल ही नहीं आया, ना मामी ने हुआ लगने दी मुझे।

मतलब उस रात साजिद भाई अम्मी का समझ के मामी जूबिया को चोदकर चले गये, और मैं मामी का समझ के तब अम्मी की फुद्दी मार बैठा था अंजाने में। लेकिन मामी ने क्यों मुझसे छुपाया? शायद कोई मसला हो इस में भी।

अब मुझे एहसास हो रहा था की साजिद और अम्मी को नहीं पता वो किसी और से सेक्स कर चुके हैं। लोकन मुझे और मामी जूबिया को पता था की क्या हो चुका है। इसका मतलब मामी जूबिया को पता चल चुका था। अब ये तो उनसे मिलने से ही पता चल सकता है। मेरा तो सोच-सोच के दिमाग दुखने लगा था। इतना बड़ा काम हो गया और मुझे अब जाकर हुआ लगी।

लेकिन मैं भी क्या करता। मैं अभी छोटा था। मैं सोच है सकता था, कुछ कर नहीं सकता था। ऐसे ही सोचों में गुम कब नीद आई पता नहीं चला। सुबह दिन चढ़े मेरी आँख खुली।

दस बजे होंगे की साजिद भाई जाने के लिये तैयार हो गये। मैं उनको बाइक पे बस स्टाप छोड़कर आ गया। घर

आया तो खाला और लुबना आई हई थी। सब बैठे गपशप कर रहे थे। मैं भी वहां बैठ गया। मेरे सामने भाभी फरजाना बैठी हुई थी। भाभी का चेहरा चमक रहा था। मैं बार-बार उसका चेहरा देख रहा था।
 
दस बजे होंगे की साजिद भाई जाने के लिये तैयार हो गये। मैं उनको बाइक पे बस स्टाप छोड़कर आ गया। घर

आया तो खाला और लुबना आई हई थी। सब बैठे गपशप कर रहे थे। मैं भी वहां बैठ गया। मेरे सामने भाभी फरजाना बैठी हुई थी। भाभी का चेहरा चमक रहा था। मैं बार-बार उसका चेहरा देख रहा था।

ऐसे ही एक बार जब मैं उनको देख रहा था, तो उन्होंने भी मेरी तरफ देखा। हमारी नजरें मिली तो भाभी मुश्कुराई और भौहों के इशारे से पूछा- "क्या है?"

मैंने कंधे उचका के कहा- "कुछ नहीं..."

दो मिनट बाद फिर हमारी आँखें मिली तो भाभी ऐसे मुँह हिलाने लगी जैसे उनको कुछ पता चल गया हो। मैं भी उनकी नकल करते हये वैसे ही मुह हिलाया। सब बातों में बिजी थे इसलिए हमारी तरफ किसी का ध्यान नहीं था। भाभी ने फिर नजर फेर ली। में अब भाभी के मोटे-मोटे मम्में देखने लगा। जिनका बाद में मुझे भाभी से पता चला 36" इच के हैं।

कुछ देर बाद भाभी ने मेरी तरफ देखा तो मुझे अपने मम्मों को ताइते देख लिया। भाभी ने नकली गुस्से में मुझे आँखें दिखाई की बाज आ जाओ। इसी तरह मस्ती करते और बातें करते हुये दो घंटे गुजर गये।

खाला ने कहा- "आज रात को डिनर हमारी तरफ तुम लोगों का। तुम दोनों अभी मेरे साथ चलो बहा और रात वहीं रहना आज..."

सब उठकर बाहर निकाल गये मैं और भाभी रूम में रह गये तो मैं भी उठने लगा। तब भाभी ने आवाज देकर मुझे रोक लिया। मैं भाभी के पास गया तो भाभी ने मेरा कान पकड़कर मरोड़ दिया और कहा- "अब बताओ क्या देख रहे थे तुम मुझे घूर-चूर के हो?"

मैंने तकलीफ होने का ज्यादा नाटक किया तो भाभी ने कान छोड़ दिया। मैंने कहा- "भाभी, अब तुम हो ही इतनी खूबसूरत तो मेरी नजर तुमसे हट ही नहीं रही थी। देखो ना लाल सूट में तुम गुलाब का फूल लग रही हो। मेरा दिल कर रहा है इस फूल की खुश्व संघ ल... ऐसा कहते हय मैंने मुँह आगे किया भाभी के सीने के पास और संघने की आक्टिंग करने लगा।

भाभी मुश्कुराई और कहा- "अली तुम बड़े तेज हो। मैं देख रही हूँ की हो छोटे लेकिन चालक बहुत हो..."

मेरा चेहरा अब भी उनके सीने के पास था और मैंने देखा की लाल कमीज के नीचे ब्रा भी लाल है, मुझे नजर आ रहा था। जिसमें भाभी के सफेद मम्मे कसे हमें थे। फिर हम भी बाहर आ गये। मैं भी भाभी बाजी खाला बगैरा के साथ ही उनके घर चल पड़ा।

जबकी अम्मी ने कहा- "मैं थोड़ी देर बाद आऊँगी.."

खाला के घर जाकर सबने मशरुब पिया। फारिग हये तो मैंने बाजी और भाभी को कहा- "आओं ऊपर मैं आप लोगों को छत दिखाऊँ..."

भाभी ने कहा- "मैं थकी हुई है। मुझे नहीं जाना रात को जाऊँगी.."
 
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