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Incest खूनी रिश्तों में प्यार

मा जो उसी समय से मेरी हरकत देख रही थी.. क्या हुआ मेरे पतिदेव तो कुच्छ ज़्यादा ही खुश लग रहे है..

मेने मा के पेट को सहलाते हुए उनके तौलियो को निकालकर फेंक दिया .. में भी एकदम नगा होकर उनके पीछे से चिपक गया...................

मेरा 8 इंच का लंड जो एकदम लोहे के रोड माफिक हो गया था उनके चुतड़ों के दरारों में घुस गया चूत के लबो को चूमने लगा.

में मा को अपने से सटा ते हुए एक हाथ से उनके पेट को अपनी ओर दबाते हुए दूसरी हाथ से उनके उभारों को सहलाने लगा. .

राज:-मा तुम जानती हो की में इंटरव्यूस में पास् हो गया हू. कल ही में 6 महीने के ट्रैनिंग के लिए जा रहा हू..

इतना सुनते ही मा उदास हो गयी.

राज:-अरे उदास क्यो होती हो जान जिंदगी भर के लिए थोड़े जा रहा हू..बस 6 महीने की तो बात है.. ये बात क्यो भूल रही हो महरानी ट्रैनिंग से आते ही आप जिंदगी भर के लिए मेरी हो जाओगी ..

माँ- तुम तो ऐसे कह रहे हो की 6महीना ना होकर 6दिन हो...

राज अपनी माँ के सर हाथ रखकर:- में तुम्हारे सर की कसम खा के कहता हू की ट्रैनिंग से आते ही सबसे पहले तुमको अपनी दुल्हन बनाउन्गा..उसके लिए में दुनिया किसी से भी लड़ जाऊँगा लेकिन उसी दिन तुमको अपनी दुल्हन बनाउन्गा ये मेरा वादा है.....

मा ख़ुसी के मारे मेरे होंठो को बेतहाशा चूमने लगी.. में भी मा के होंठो को अपने होंठो में भरकर चूसने लगा.. एक हाथ से उनके उभारों को चूसने लगा दूसरे हाथ को पेट से नीचे सरकते हुए उनके डबलरोटी की भाँति फूली हुई चूत को अपने मुट्ठी भर लिया बिचली उंगली को कच से अंदर करके अंदर बाहर करने लगा.. मा मेरे होंठो को छोड़ ज़ोर से सिसकारी भरने लगी आआआ..................सस्स्स्स्स्स्सस्स .......म्म्म्ममममम......न्न्न्वववववव......एयाया

में मा से एकदम अलग हो गया.. बेड पर दोनो पैर नीचे लटका बैठ गया. मा मेरे मूह को तकने लगी जैसे किसी ने उनका मनपसंद खिलौना छीन लिया हो... मुझसे अब सहन नही हुआ. मेने अपने दो बाहें फैला दी मा मेरे इशारा समझ गयी मेने मा को बाहों में समा लिया वो तो मेरे होंठो को ऐसे चूसने लगी जैसे उनसे बरसो बाद मिला हू.

मेने अपने दोनो हाथों से मा को ऊपर उठा लिया..अपने लंड पे बैठाने लगा. एक हाथ से लंड को चूत मे सेट किया मा की पतली कमर पकड़ कर नीचे छोड़ दिया.. लंड सरसराता हुआ चूत के अंदर जाने लगा. मा भी धडाम से नीचे बैठ गयी लंड पूरा अंदर

मा मेरे गर्दन को अपने होंठो से चूस्ते हुए ज़ोर ज़ोर से उछलने लगी ..में भी उनके शहद भरे उभारों का रस पीते हुए नीचे से सहयोग करने लगा..

..................... कुछ देर में माँ का शरीर अकड़ने लगा और उनके मुँह से आआअ आआआ................... सस्स्स्स्स्स्सस्स

....म्म्म्मम......सस्स्स्स्स्स्स्सस्स

राज बेटा मेरे लाल मेरे पति में झड़नेवाली हू.. मेरा भी शरीर अकड़ने लगा..

मेने लंड को बाहर निकाला मा को जल्दी से पीठ के बल सुलाया ओर लंड को चूत में एक ही बार में अंदर कर दिया. मा ने अपने दोनो पैरो का घेरा मेरा चुतड़ों के ऊपर कस लिया मैने मा को बाहों में कस लिया .... अचानक मा का शरीर ऐंठने लगा वो झड़ने लगी मा के झड़ते ही में सहन नही कर पाया उनके साथ ही झड़ गया. हम दोनों को एक साथ एक जबरदस्त ओर्गसम फील हुआ..मा वीर्य की गर्मी सहन ना कर पाई..मेरे कंधो पेर दाँत गाड़ते हुए दोबारा झड़ गयी ..

में मा के ऊपर चूत में लंड ही कब सो गया पता ही नही चला..... रात 10 बजे मेरी नींद खुली .. मा अभी भी सो रही थी मेरा लंड उनके चूत में फिर से खड़ा हो गया था....

मा का चेहरा गुलाब की तरह खिला हुआ था...

मेने मा के गाल को थोड़ा सा काट लिया.. मा चिहुक गयी आआआ................... मे मा के गुलाबी निप्पलो को चूसने लगा दूसरे को मसलने लगा..मा की साँसे धीरे-2 तेज़ होने लगी .. मेरा लंड अपनी मा के चूत में हलचल मचाने लगा.. इतना ही मेरे लिए काफ़ी था. मेने अपने दोनो हाथ नीचे ले जाते हुए उनके चुतड़ों को हाथ में भरते हुए थोड़ा ऊपर उठाया दोनो चुतड़ों को दबोचते हुए धक्का लगाने लगा.लंड बिना किसी रुकावट के अंदर बाहर हो रहा था.. क्योकि मेरा पानी एकबार उनके चूत में निकल गया था चूत मेरे ओर मा के पानी से लबालब भरी हुई थी..

में पिस्टन की तरह धक्का लगाए जा रहा था .... मा के मूह से सिसकारी पे सिसकारी फुट रही थी..

आआआ................... सस्सस्स.....आआमम्म्मम..... आअस्स........ म्म्म्मम...... हह म्म्म्मम........ सस्स

चुदाई जोरो पे थी.. फॅक..फ़च्छ..फॅक.फॅक..फ़च्छ..फॅक की आवाजो से पूरा कमरा गूँज रहा था....

मा का शरीर अकड़ने लगा वो जोरदार सिसकारी भरते हुए आसाआस..... सस्सस्स............हमम्म्मम....सस्स

झड़ गयी मेरे लंड पे उनके गरम गरम पानी महसूस हुआ..

मा बुरी तरह हाँफ रही थी....

वो बिल्कुल निढाल सी हो गयी थी

अबकीबार वो तीसरी बार झड़ी थी. मा मेरे होंठो को बुरी तरह चूसने लगी.. में अभी नही झड़ा था....

मा जब नॉर्मल हो गयी तो में उनके दोनो पैरो को अपने दोनो कंधे पे रखा ओर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा..

10 मिनटस की घनघोर चुदाई में हम दोनो एक साथ झड़ गये.. अबकीबार ऐसा लग रहा था की मा के शरीर में जान ही नही बची हो उनका पूरा जिस्म कांप रहा था.. मेने मा को पुकारा लेकिन वो नही बोली मेरी तो गंद फॅट गयी.. में रूम में देखा एक गिलास रखा हुआ था.... में नंगा ही जल्दी से नीचे उतरा

ग्लास में थोड़ा सा पानी रखा हुआ था.. उसे थोड़ा सा पानी मा के मूह पे मारा लेकिन कुच्छ नही हुआ.. में बेड पे बैठ गया मा के सर को अपनी गोदी में रखकर उनके गालो को सहलाने लगा.. मा का शरीर बुरी तरह से कांप रहा था..में डर के मारे रोने लगा.मेरे आँखो से आँसू बहकर मा के चेहरे पर गिर रहे थे..

तभी मा ने अपनी आँखे खोली. मा के आँखे खोलते ही मा के पूरे चेहरे को दीवानो को तरह चूमने ..लगा.. में तो बस पगला गया था गर्दन होंठ नाक कान मूह सभी चेहरे को चूमे जा रहा था....

माँ- क्या हुआ बेटा अपनी मा को बड़ा प्यार कर रहा है ..

राज- मा तुम अभी बेहोश हो गयी थी में तो एकदम बेचैन ओर प्रानहींन हो गया था.. तुम्हें कुच्छ हो जाता तो में जीतेजी मर जाता..

माँ-इतना प्यार करते हो मुझे.

राज :- उससे भी ज़्यादा एक बताओ तुम बेहोश क्यो हो गयी थी....

मा मेरी बात सुनकर ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी.. ..

राज :- जाओ में तुमसे नही बोलूँगा. तुम मेरी बात का मज़ाक़ उड़ा रही हो..

मा :- थोड़ा सा चुप हो गयी

अरे मेरे पतीजी में बेहोश नही हुई थी... में ओर्गसम फील कर रही थी मुझे तो लग रहा था की में जन्नत में पहूच गयी हू..

राज:- वो ये बात है मेरे जान मज़े के झटके ले रही थी ..
 
तभी राज को एक जॉक याद आया वो अपनी मा से बोला..मा एक जोक सुनाऊ

मा:- हा सुनाओ शुभ काम मे देर कैसा .

राज तो सुनो:-...................

टीचर :- पप्पू तुम्हारे पिता जी का क्या नाम है

पप्पू- ब्यूटिफुल रेड अंडरवेर

टीचर :- ये क्या बकवास है

पप्पू- जी सुंदर लाल चड्ढा..

मा को जब जोक समझ आया तो वो ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी ..

में भी हँसने लगा..

हँसते हँसते जब सांस नॉर्मल हो गयी तो हमने हँसना बंद किया..

मा जल्दी से खाना बनाओ बहुत ज़ोर से भूख लगी है

माँ- हा चलो खाना बनवाने में थोड़ा सा सहयता करो..

हमने मिलके खाना बनाया

..

खाना खाते समय मेने मा से पूछा ' मा सब लोग कहाँ गये है.....

माँ- मा के भाई यानी मेरे मामा आज डेत कर गये इसलिए सब कोई वहाँ गये है.....

फिर इधर-उधर की बाते की ओर सारे कम निपटा कर सो गये.........

……………………………

सुबह राज जल्दी उठ गया क्योकि ट्रैनिंग पे जाना था..

जल्दी से नहा धोकर तैयार हो गया. और अपने सारे कपड़े पॅक करने लगा.

तबतक उसकी मम्मी ने नाश्ता बना दिया.

राज ने नाश्ता किया ओर वो ओर उसकी मम्मी पैदल ही चौराहे की ओर निकल पड़े.

(क्योकि उनके गाँव में बस मिल जाती थी)

राज ने अपनी माँ से विदा लिया ओर बस में बैठ गया.

बस आगे चल पड़ी.

(राज) में खिड़की से सर टिकाए हुए बीते हुए पॅलो के बारे में सोच रहा था( कैसे में ओर मा इन थोड़े दिनों में एक गहरे प्यार के बंधन में बध गये थे.. की एक दूसरे के बिना 6 महीना कैसे कटेगा..फिर डॉली का ख़याल आया वो भी तो मुझसे अपने जान से ज़्यादा प्यार करती है .. वो कैसे रहेगी..में शहर से ट्रेन पकड़ा दानापुर ट्रैनिंग सेंटर पे चला गया..

दिन कैसे भी करके कट जाता था लेकिन रात काटने को दौड़ती.. डॉली को बाहों में लपेट कर सोना.

मा के साथ गुज़रे हुए पल ..

मन करता की आज ही भाग जाउ लेकिन क्या करता मजबूरी थी..

इस तरह समय अपने गति से चलता रहा क्योकि समय थोड़े ही किसीकि प्रतीक्षा करता है जो मेरा करेगा..

मुझे तो ये 6माह 6साल के बराबर लग रहा था..

आज बहुत ही ख़ुसी का दिन था क्योकि में घर जा रहा था मेरा जाय्निंग मेरे गाँव की नज़दीक शहर में हो गया.. में जब ट्रेन से उतरा तो बस पकड़ लिया बस अभी थोड़ा दूर ही गया था की कुच्छ गुंडे हथियार से लैस बस में चढ़ गये जो केवल पाँच थे.उनके के हाथों में पिस्टल थे.. में तो अभी ट्रैनिंग से आरहा था इसलिए वर्दी नही पहना था..

गुंडे बस में चढ़ते ही 'हॅंड्ज़ अप सब कोई अपने अपने हाथ ऊपर करो नही तो सबको ठोक दूँगा' कोई होशियारी नही दूँगा सब कोई अपने-अपने रुपया , जेवर , हमारे हवाले कर दो..

मेने भी अपने हाथ ऊपर करके हाथ ऊपर करके सोचा इन सालो को यहा पर कुच्छ किया तो पब्लिक को कुच्छ कर देंगे

तभी उसमे से एक मेरे पास आया ' लड़के ये क्या है ..

राज:- चमड़े का बॅग

गुंडा - ये चल पतला हो जा

राज:- पतला तो नही हो सकता लेकिन मोटा ज़रूर हो जाऊँगा..

गुंडा:- बे पंगा करेगा क्या...

राज :- पंगा करने के लिए यहा पर जगह बहुत ही कम है कृपया बाहर चलेंगे..

डा:- बे वो भाइयो सुनो ये साला हमसे पंगा करेगा..

पाँचो गुंडे हँसते हुए नीचे उतरने लगे जैसे ही वो सभी नीचे उतरे तो मेने बस का गेट बंद करके बस आगे बढ़वा दिया..

वो सभी साले नीचे से चिल्लाते रह गये..

सभी लोग मेरे को शाबाशी देने लगे.

थोड़े ही देर में बस स्टॅंड में उतर गया..

क्योकि यहा से मेरे गाँव का बस मिलता था..

में बस से नीचे उतरा ओर घर की ओर दूसरी बस पकड़ कर निकल गया..

मुझको परसो थानेदार का पद संभालना था..

में जैसे ही घर पहुँचा तो (शाम के 5 बज गये थे.. )
 
मुझको परसो थानेदार का पद संभालना था..

में जैसे ही घर पहुँचा तो (शाम के 5 बज गये थे.. )

तभी मेरी नज़र मा पर पड़ी.. मा को देखते ही मेरे पैरो तले ज़मीन खिसक गयी..

मेरे हाथों से बॅग छूट कर नीचे गिर गया..

में दौड़ते हुए मा को अपने से चिपका लिया मा भी मेरे को अपनी बाहों में भर ली में मा के पूरे चेहरे को पागलो की तरह चूमे जा रहा था..मा भी मेरे को चूमे जा रही थी..

मेने मा को अपने से दूर किया ओर उनके आँखे लाल-लाल थी जैसे उन्होने मेरे जाने के बाद बहुत रोई हो.उनके आँखो में आँसू थे.

मेने मा के आँसुओ को पोच्छा ओर उन्हे खींचकर फिर से चिपका लिया मा मेरे सीने में मूह छिपा ली.

तभी मुझको किसी ने पीछे से अपनी बाहों में भर लिया..जब में पीछे देखा तो वो डॉली थी..

में मा को अपने से अलग किया डॉली को बाहों में भर के प्यार करने लगा.

मेने डॉली को बाहों में उठाते हुए अपने रूम में घुस गया..

राज:- मा थोड़ा पानी लाओ

डॉली तो बस मुझे चूमे जा रही थी..

अचानक में डॉली के रसीले होंटो को अपने होंठो में भरते हुए चूसने लगा..

तभी मा पानी लेकर आ गयी..

में पानी पिया..

अपने सारे कपड़े निकाले ओर नाइट सूट पहन लिया..

हमलोग .टी वी वाले रूम में रूम में आ गए..

तभी नाना-नानी ओर मेरी छोटी बहन पूजा आ गयी..

में नानाजी के पैर च्छुआ नानाजी ने मुझे ऊपर किए ओर अपने गले से लगा लिए..

फिर नानीजी के पैर च्छुआ..

नानीजी मुझे गले से लगा ली..

पूजा ने जैसे ही मेरे पैर छूने आई तो में उसके माथे को चूमते हुए सोफे पर बैठ गया पूजा मेरे गोदी में सर रखकर लेट गयी..

डॉली जान मेरे कंधे पे सिर टिकाए लेटी हुई..

डॉली के पास मा बैठी हुई थी..

नानाजी-हा तो कहो बेटा कैसा रहा तुम्हारा ट्रैनिंग

राज:- बहुत ही बढ़िया नानाजी थानेदार का पद संभालना है परसो से ड्यूटी शुरू..

नानाजी- कल तो सारे गाँववालो को मिठाई खिलाऊंगा..

राज:- नानाजी मुझे कुच्छ रुपीज़ चाहिए

नानाजी:- बोल बेटा कितना चाहिए

नानाजी ने राज को रूपीयो का गड्डी थमा दिया. राज ने नानाजी को थॅंक्स बोला फिल्म देखने लगा.. नानाजी ओर नानीजी अपने रूम में चले गये.. थोड़ी देर में डॉली खाना बनाने चली गयी.. मेने पूजा को भी किचन में ही भेज दिया.

अब केवल में ओर मा ही रह गये थे.

(दोस्तो मेरे मा का नाम अनिता है..)

अनिता मा :- राज जान अब कब मुझे अपनी बीवी बनाओगे..

राज:- आज भर बर्दास्त कर लो

कल शाम को हमारी सुहाग रात होगी.कल तो में तुझको उस दुनिया में ले जाऊँगा की तुम इस दुनिया में आने के लिए सोचोगी भी नहीं ...............

मा शर्मा के मेरे गले से लग गयी. मेने मा के माथे पे थोड़ा सा किस किया.. जैसे में मा के होंठो पे किस करना चाहा तो मा ने अपना मूह फेर लिया.

अनिता मा:- शादी से पहले अब आपको बर्दास्त करना पड़ेगा..\

राज:- ठीक है जैसे तुम्हारी इक्षा मेरी अनिता जान.

फिर में मा के कानो एक प्लान बताया जिसे सुनकर मा खुस हो गयी..

उस दिन ज़्यादा कुच्छ नही हुआ हमने मिलकर खाना कर सो गये ..
 
में ओर डॉली बचपन से ही एक दूसरे के बाहों मे बाहें डाले सोते थे.. डॉली मुझसे बिल्कुल चिपक कर सोई हुई थी..सुबह जल्दी से नाश्ता किया ओर में ओर मेरी मा अनिता जान शहर की तरफ निकल गये.. क्योकि कल ड्यूटी जाय्न करना था.

इसलिए आज रूम लेने के लिए शहर निकल पड़े मेने अपनी बाइक लिया हुआ था.. मा एक ही ओर अपने दोनो पैर करके बैठी हुई थी..

मेने एक फ्लॅट वाला रूम किराया पे लिया.. फिर हमने सारे समान सेट कर दिए..

रूम मलिक को अड्वान्स किराया दिया ओर बता दिया की में इस शहर का नया इनस्प. बन कर आया हू..

समान सेट करते-करते दोपहर हो गया..में ओर मेरी मा अनिता जान ने एक अच्छे होटल में खाना खाया.. फिर में ओर मा घर की ओर निकल गये.. रास्ते में मेरा बॅलेन्स बिगड़ गया मेरी बाइक पेड़ से टकड़ा गयी.. में दूर फेका गया हलकी सी चोट आई लेकिन मा एक पत्थर से टकरा गयी उनके मूह से एक जोरदार चीख निकल गयी..

राज अपनी चोट की बिना परवाह किए मा के पास गया. वो बेहोश हो गयी. मा के सर से खून बह रहा था वो मूह के बल गिरी हुई थी. मेने उनको जैसे ही पलटा मारा कलेज़ा फॅट गया मेरे आँखो से आँसुओ की नदी बहने लगी.उनका चेहरा पूरी तरह खून से रंगा हुआ था.. मेने अपनी हिम्मत नही हारी. मेने अपनी रुमाल से उनके सर को बाँध दिया. उनको गोदी उठा कर हाइवे पे आ गया. में बहुत गाडियो से लिफ्ट माँग रहा था.

लेकिन कोई गाड़ी नही रोक रहा था.तभी मेरी नज़र एक ठेला गाड़ी पे पड़ी जो साइड मे लगाया हुआ था. मेने देर करना उचित नही समझा ओर मा को उसी पे लिटा कर दौड़ते हुए हॉस्पिटल की ओर जाने लगा. वहाँ से हॉस्पिटल दूर नही था फिर भी मुझे हॉस्पिटल जाते हुए 30 मिनट लग गया. में हॉस्पिटल में जैसे ही पहुँचा नर्स मा को ऑपरेशन्स थियेटर में लेकर चली गयी.

डॉक्टर ने पेपर पे साइन करवाया ओर ऑपरेशन्स थियेटर में चला गया..

में बहुत ही बैचेनी से डॉक्टर के आने का इंतज़्ज़र कर रहा था.. थोड़ी देर में डॉक्टर . ऑपरेशन थियेटर से बाहर

निकले..

राज:- में घबराते हुए क्या हुआ डॉक्टर ..

डॉक्टर .:- सॉरी सर हम आपके वाइफ को नही बचा सके..

में तो धडाम से नीचे गिर गया गया. आज मेरा संसार उजड़ गया था.. मेरी जान मेरी धड़कन मेरी रूह मुझे छोड़ कर जा चुकी थी.. मेरी आँखो से आँसुओ धाराए बहती जा रही थी.. में किसी तरह अपने आपको संभाला मा के लास को लेकर घर की ओर चला गया.

घर पे में जैसे ही पहुँचा सब कोई एकदम पागलो की तरह रोने लगे..

पूजा, डॉली, नानीजी मा के लास के पास बैठे रो रहे थे..

(आपको एक बात बता दूँ मा का चेहरा पहचान में नही आरहा था...)

में तो मानो बेहोश हो चुका था.. मेरे आँखो से आँसू बहते जा रहे थे.

तभी मुझे लगा की कोई मेरे कंधे पे सर रख कर रो रहा है.. में जैसे ही देखा डॉली थी.

तभी मेरी नज़र पूजा पे पड़ी मानो पगला गयी थी वो मा के सॉ के पास रोए जा रही थी..

में वहाँ से उठा पूजा को अपने सीने से चिपका कर किसी तरह चुप कराया..

खैर किसी तरह मा का उसि दिन दाह संस्कार हो गया..

में अंदर से बिल्कुल टूट गया था.. शायद पूजा का भी यही हाल था.. रात भर में डॉली ओर पूजा को संभाले संभाले सो गया..

दूसरे दिन मुझे ड्यूटी जॉइंट करना था..

इसलिए में दूसरे दिन में तैयार हुआ नानाजी से अनुमति लेकर डॉली को लेकर शहर निकल पड़ा. मा तो अब इस दुनिया में थी नही.

इस मेने डॉली को साथ लेकर निकल पड़ा.

डॉली को में रूम पर छोड़ दिया ओर पोलीस स्टेशन जाकर थानेदार का पद संभाल लिया..

मुझे पोलीस जीप मिल गयी थी.

में जीप चला रहा था ओर मेरे बगल कोई बैठा हुआ था.. मेने जीप को को साइड में लगाया ओर मेरे साथ जो दूसरा कोई बैठा था उसका अपने साथ लिए हुए बेल बज़ाई.. दरवाजा डॉली ने खोला ..

मेने डॉली को गले से लगाकर उसके माथे को चूम लिया. डॉली की नज़र जैसे ही मेरे साथ वाले व्यक्ति पे पड़ी..डॉली ज़ोर से चीख पड़ी ओर बेहोश हो गयी ..
 
डॉली को जब होश आया तो उसने अपनी आँखे खोली तो उसकी नज़र मेरे ऊपर पड़ी वो उठ बैठी जैसे ही डॉली की नज़र उस शख्स के ऊपर पड़ी वो ज़ोर से चीख पड़ी ''' भूत''' एकदम मेरे सीने से लग गयी (हुआ ये की मा मेरे साथ में थी बिल्कुल सही सलामत ) में उसके बालो को सहलाते हुए क्या हुआ ' इतना क्यो डारी हुई हो ''

उंगली से इशारा करते हुए..वो भूत ..

राज:- वो भूत नही है वो तो मा है जिंदा है

डॉली :- क्या... चौक्ते हुए

वो सब क्या था जो कल हुआ ..

ये जब जिंदा है तो कल आक्सिडेंट्स किसका हुआ, दीदी तो मर गयी तो आज जिंदा कैसे हो गयी............................

जल्दी से बताओ मेरा दिल घबरा रहा है.

राज :- अरे बोलने दोगि तब ना बताउंगा तुम तो प्रश्न पर प्रश्नपुच्छे जा रही हो. आक्सिडेंट्स हुआ तो था लेकिन थोड़ा सा सर फटा था.. जो डॉक्टर ने पट्टी बाँध दिया है . रही बात मरने की तो वो एक नाटक था '' दरअसल में मा से दिलो जान से प्यार करता हू मा की तरह नही बिल्कुल हज़्बेंड-वाइफ की तरह..

मा भी मुझको बहुत प्यार करती है.. एक दूसरे के बिना जिंदा नही रह सकते है... लेकिन ये दुनिया हमलोगो के प्यार को स्वीकार नही करती इसलिए मेने कल मा को मरने का नाटक किया.. अब तो मेरी मा मर चुकी है जो तुम्हारे सामने है ये तो मेरी होने वाली बीवी है.. अब मेने सारी सच्चाई तुम्हारे सामने बता दी है बाकी तुम्हारी मर्ज़ी..

लेकिन हा एक बात कह दूं में किसी कीमत पर माँ को नही छोड़ूँगा..

इतना कहकर में खामोश हो गया..

डॉली :- इतना कुच्छ हो गया तुमने मुझे बताने के लिए उचित नही समझा तुम अपने आप क्या समझते हो

.. मुझे क्या करोगे. मेरे क्या होगा तुमने तो मेरा सौतन भी ला दिया एक बात कान खोलकर सुन लो ये दीदी है तो में बर्दास्त कर लेती हू अगर दूसरा कोई के बारे में सोचा भी तो में अपने आप को चाकू मार कर हत्या कर लूँगी..

मेरा तो दिल तो खुस हो गया

मेने डॉली को खींचकर सीने से लगा लिया..मा जो उसी टाइम से मेरा ओर डॉली का बात चीत सुन रही थी. वो भी पीछे से चिपक गयी.......

राज ने दोनो के होंठो पे हल्का सा किस किया..

राज:- चलो आज का खाना रेस्टोरेंट में खाएँगे..

फिर राज अपने होनेवाली दोनो बीवियो को लेकर रेस्टोरेंट गया खाना खाया ओर रूम पे आकर सो गये ..

उस दिन कुच्छ नही हुआ क्योकि राज बचन दे चुका था की अब वो शादी से पहले कुच्छ भी नही करेगा..

............................................
 
दूसरे दिन राज सुबह ही उठ गया.. छत पर कसरत करने लगा..लगभग एक घंटे के बाद डॉली दूध ले आई..राज ने दूध पिया ओर फ्रेश होकर ड्यूटी पे चला गया...

में जैसे ही थाने पहुँचा तो हवलदार हिम्मत सिंग ने सॅलुट किया..

राज:- कैसे हो हिम्मत सिंग बताओ आज क्या खबर है..

हिम्मत सिंग :- सर आज मिट्टिंग है उसमे आपको जाना है ये डी,जी,पी आसिफ़ सर का आदेश है ..

राज:- कितने बज़े है

हवलदार हिम्मत सिंग-

10:30 बज़े

राज:- चलो जल्दी अभी 10:00 रहे है...

फिर में हिम्मत सिंग को लेकर निकल गया..

जब हम उस जगह पे पहूचे तो में अंदर घुस गया.. अभी मिट्टिंग शुरू हुआ था..

मेने आसिफ़ सर को सॅलुट मारा ओर अपने सीट पे बैठ गया..

डी,जी,पी आसिफ़ ख़ान :- हा तो ऑफिसर्स आपलोग जानते है की हमारे शहर में एक शा अपराधी पैदा हो गया है जो सरेआम कत्ल करके घूम रहा है... उसने जीतने भी कत्ल भी किए वो सब एक ही तरीके से किए है..कोई भी कत्ल हथियार से नही किया है सारी कत्ल बियर के बॉटल तोड़कर यूज किया अभी तक हमारे कोई भी ऑफीसर ये पता नही लगा सके है की वो अपराधी कौन है... इतना कहकर डी.जी.पी. आसिफ़ सर चुप हो गये...

तभी एक ऑफीसर खड़ा होके ' सर मुझे लगता है ये केश सी. बी आई. को सौप देना चाहिए ..

डी.जी.पी. आसिफ़ सर:- नो ये केश सी. बी आई. को नही सौपा जाएगा..

इनस्प. राज यानी में कुच्छ सोचकर सर ये केश मुझे दिया जाए.

डी.जी.पी. आसिफ़ सर :- ठीक है ये लो केश के फाइल्स

में :- लेकिन सर मेरी कुच्छ शर्तें है में अपने तरीके से काम करूँगा.

डी.जी.पी. आसिफ़ सर :- ठीक मेरे तरफ से तुम्हे फुल ऑर्डर है तुम कुच्छ भी करो लेकिन वो अपराधी जिंदा या

मुर्दा मुझको चाहिए..

बेस्ट ऑफ लक राज ..

मिट्टिंग ख़तम हो गया में हिम्मत सिंग के साथ थाने पे आ गया...
 
राज ने दिन भर ड्यूटी किया और शाम को रूम लौट चला. रास्ते में राज को पता चला की लखनऊ के माशुर डॉक्टर इसी शहर में आज आए है जो प्लास्टिक सर्जरी के द्वारा किसी का चेहरा बदल सकते है .जो कल से इलाज़ शुरू करेंगे.

राज ने सोचा क्यो ना मा का चेहरा बदलवा दिया जाए फिर तो बिना किसी डर के मा को बीवी बनाउन्गा.. यही सोचते हुए गाड़ी चलाते रूम पे लौट आया. बेल बज़ाने पर डॉली ने डोर खोला. राज ने डॉली के होंठो पे किस किया ओर बेडरूम में जाकर बैठ गया

राज:- डॉली जान पानी पिलाओ तो

डॉली :- जी अभी लाई

डॉली पानी लाने चली गयी............................

तभी बाथरूम में से मा अनिता निकली ओर मेरे सामने आकर खड़ी हो गयी राज ने बाहों में लेते हुए अपने अनिता जान के होंटो को चूम लिया..

तभी डॉली पानी लेकर आ गयी . मैने पानी पिया. गिलास को एक तरफ रख दिया. में अभी वर्दी में ही था. मेने टोपी निकाल कर एक तरफ रख दिया..मा मेरे शॉर्ट ओर बनियान निकाल कर एक तरफ रख दी..डॉली भी नीचे बैठी ओर जूते निकालकर मेरे पैरो की मालिश करने लगी. मा मेरे बगल बैठकर सीने पे धीरे-धीरे हाथ घुमाने लगी. मा के इस हरकत से मेरे पूरे शरीर में करेंट दौड़ गयी............................

((में तो किसी राजा की तरह बैठा हुआ था. मेरी दो-दो रानिया मेरी सेवा कर रही थी में इस लम्हे को बयान नही कर सकता.. में अपने आप को बड़ा खुदकिस्मत समझ रहा था.))

मा मेरे सीने में अपनी नाज़ुक उंगलिया घुमा रही थी. मेरी साँसे तेज़ होती जा रही थी. शायद मा का भी हाल था. में किसी तरह बर्दास्त किए हुए थे.. अचानक मा मेरे सीने में अपने होंटो से किस पे किस करने लगी.. मेरे मूह से सिसकारी फुट पड़ी..एयाया.. हह .....म्म्म्मम.. एयाया आ.

में मा के होंठो अपने होंठो को भरते हुए चूसने लगा.. में मा के बिना ब्लाउज निकाले ही उनके उभारों को चूसने लगा. मा एयाया हह एम्म्म एयाया आआअँ एम्म्म

मेरा लंड किसी कोबरा साँप की तरह फुफ्कार रहा था.. में झटपट अपनी पैंट ओर अंडरवेर निकाली मा को बेड पर पीठ के बल लिटा कर उनके सारी को पेटीकोट समेत ऊपर कर दिया मा की चूत रस्स बहा रही थी.. मेने उनके टाँगों के बीच बैठ गया लंड को चूत पे सेट करते हुए एक जबरदस्त धक्का लगाया लंड चूत को चीरता हुआ एक ही बार में अंदर चला गया..

मा के मूह से हल्की सी चीख निकल गयी..क्योकि उनको चुदाई किए हुए कई महीने हो गये थे मा की चीख सुनकर डॉली हमारे पास आ गयी.. डॉली:- घबराते हुए क्या हुआ दीदी क्यो इतना ज़ोर चीखी.

राज:- कुच्छ नही हुआ मा के होंठो को चूस

डॉली थोड़ा सा शर्माते हुए मा के होंठो को चूसने लगी..

में मा के दोनो पैरो को अपने कंधे पे रखा ताबड तोड़ चुदाई शुरू कर दी. मा अया आ कर रही थी में तो फुल स्पीड से चुदाई कर रहा था.

मा की चूत अपना रश बहा रही थी. मेरा लंड फॅक.....फॅक.....फॅक.....फॅक...

की आवाजो के साथ अंदर बाहर हो रहा था.

मेरा लंड चूत रस से भीगा हुआ था. में ने डॉली को अलग किया ओर मा के ब्लाउज के ऊपर से ही उनके एक छाती को होंठो में भरते हुए चूसने लगा..

अब मुझसे बर्दास्त नही हो रहा था.. में मा के दोनो उभारों को चूस्ते

लंड को अंदर बाहर किए जा रहा था

मा जोरदार सिसकारी भर रही थी.. एयाया....हह. .एम्म.हगग ..एयाया

जान ओर ज़ोर से आज पूरी तरह भर दो में बहुत प्यासी हू...एयाया...................... एम्म्म .....एयेए...हह

मेने एक जोरदार धक्का लगाया लंड को बच्चेदानी में पेलते हुए बच्चे दानी में ही झड़ने लगा ऐसा लगा जैसे मेरा शरीर से सारा खून मा के चूत में गिर रहा हो..

मा मेरे वीर्य की गरमी सहन नही कर पाई ओर मुझको अपनी बाहों कसते हुए झड़ गयी..मा इतना मस्ती बर्दास्त ना कर सकी ओर मेरे कंधे पर ज़ोर से दाँत गड़ा दी..

हम तो बिल्कुल एक दूसरे में चिपके हुए थे जैसे हम एक हो... मा मेरे पीठ पर हाथ घुमा रही थी..

थोड़ी देर बाद मा मेरे माथे को चूम ली..

मेने उनके माथे को चूम लिया.

तभी मेरी नज़र डॉली के ऊपर पड़ी जो एकदम नंगी होकेर सोफे पे बैठे हुए अपनी चूत सहलाए जा रही थी. एक हाथ से अपने छाती मसल रही रही थी. मस्ती में उसकी आँखे बंद थी..

में बेड से नीचे उतरा डॉली के दोनो टाँगों के बीच बैठते हुए उसके हाथ को हटा ते हुए अलग कर दिया उसकी चूत के दोनो लब आपस में चिपकी हुई थी.. मेने जैसे ही डॉली के हाथ का हटाया तो उसने धीरे से अपनी आँखे खोली तो उसके आँखो में वासना झलक रही थी. मेने डॉली की चूत के फान्खो को अलग किया ओर डॉली के गुलाब के तरह खिले हुए चूत को अपने होंठो में भर कर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा डॉली मेरे सर को अपनी चूत पे दबाते मेरे मूह में ही झड़ गयी.......................

मेरा मूह डॉली की चूत रस से भर गया..डॉली निढाल हो गयी.
 
मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था. में बेड चड़ा लंड को मा के चूत पे सेट करते हुए एक ही बार में पूरा अंदर कर दिया. लंड सन सनाता हुआ अंदर समा गया.. मा की चूत मेरे ओर उनके प्रेमरस्स से भरी हुई थी..

मा मुझको अपने ऊपर खींचते हुए मेरे सर को अपने उभारों पे दबाने लगी. मेने मा के ब्लाउज को खोलकर निकाल दिया उनके एक छाती को अपने मूह में भर लिया दूसरे को मसलने लगा. मा के नंगे उभारों को जैसे ही अपने होंठो में भरा मेरे सारे शरीर में मस्ती की लहर दौड़ गयी. मेने एक छाती को ज़ोर से काट लिया.. मा मेरे बालो को नोचते हुए ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी ...आसा ......हह...में अपनी जान के उभारों को चूस्ते हुए मसलते हुए ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा..

मा भी अपने गान्ड हिला हिला कर मेरे साथ दे रही थी..

20 मिनटस के घमासान चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये..में मा के उभारों पे सर रखे हुए सो गया..

अचानक मुझे लगा की कोई मेरा होंठ चूस रहा है.. मेने धीरे से अपनी आँखे खोली... वो डॉली थी ' जान जी चलिए खाना खा लीजिए'

राज डॉली को अपने ऊपर खिचाते हुए उसको बाहों में भरकर हल्का सा किस कर दिया..

डॉली :- चलिए बहुत मस्ती हो गया.. फ्रेश हो जाइए खाना खाने चलिए..

में डॉली को छोड़ा ओर खड़ा हो गया. डॉली किचन में चली गयी. बाथरूम में फ्रेश हुआ नाइट सूट पहनकर डाइनिंग टेबल के पास चला गया.. में बीच वाली कुर्सी पे बैठ गया. खाना लग चुका था एक ओर मा अनिता जान बैठे हुई थी.

तभी डॉली भी आई ओर मेरे बगल में बैठ गयी............................

राज;- तुम दोनों से एक बात बताना चाहता हू..

मा ओर डॉली :- क्या बात है

राज:- पहले खाना खा लेते बेडरूम में बात करेंगे..

फिर हमने खाया..

में बेडरूम में जाकर लेट गया थोड़ी देर में डॉली ओर अनिता दोनो आ गयी.. में बीच में अपने पीठ के बल लेटा हुआ था. डॉली ओर मा अनिता दोनो मेरे अगल बगल में मेरे सीने पे अपने सर रखकर मुझसे चिपक ते हुए लेट गयी..

मा अनिता जान- हा तो कहिए जनाब क्या कहना है

राज :- हमारे शहर में लखनऊ के मशहूर डॉक्टर जो प्लास्टिक सर्जरी करने में है आए हुए है..

तो में चाहता हू की अपनी मा अनिता जान का सर्जरी के द्वारा इनका चेहरा बदलवा दूं. क्योकि ये तो दुनिया के नॅज़रो में मर चुकी थी.. अब यदि चेहरा बदलवा दिया जाएगा तो आसानी हम पति-पत्नी बनकर रहेंगे..

अनिता जान:- ये बहुत ही बढ़िया बात है मेरे तरफ से कोई आपत्ति नही है ..

डॉली:- मेरा क्या होगा

राज:- तुम दोनो टेन्षन मत लो तुम दोनों को एक साथ अपनी बीवी बनाउन्गा..

हमारे छोटे छोटे बच्चे होंगे..

पहले ये सर्जरी तो हो जाए..

मा अनिता जान ओर डॉली जान दोनो मेरे से मूह से शादी और बच्चे की बात सुनकर शर्मा गयी मेरे से ओर चिपकते हुए मेरे सीने में मूह छिपा ली..

अरे वा मेरी रानियो बड़ी शर्मा रही हो खैर चलो सो जाओ कल हमें डॉक्टर के पास भी चलना है..

थोड़ी देर बात करते हुए हम उसी तरह सो गये...
 
सुबह हम सब जल्दी ही उठ गये. नाश्ता किए ओर तैयार होके डॉक्टर के पास निकल गये.. साथ में डॉली ओर मा अनिता भी थी..

आज डॉक्टर का पहला दिन था इसलिए ज़्यादा भीड़ नही था..

जल्दी ही मुझे मेरे पर्ची का लाइन मिल गया..

डॉक्टर ने मा को भरती कर लिया कल आने को कहा..

मेने डॉली को घर छोड़ा ओर ड्यूटी पे निकल गया..

खैर इस्दीन कुच्छ नही हुआ दूसरे दिन में ओर डॉली डॉक्टर के पास चले गये..

डॉक्टर ने बताया की सारे टेस्ट का रिपोर्ट आ गया है आज सर्जरी होगा.

राज:- सर क्या चेहरे के साथ इनके पूरे शरीर को भी बदल सकते है..

डॉक्टर:- हा ये होसकता है लेकिन में तो इनको 20 साल की कुवारि युवती बना दूँगा..

बस आज इनका 2 अवर के बाद ऑपरेशन होगा..

में डॉली को हॉस्पिटल में ही मा के पास छोड़ कर थाने में चला आया..

थाने में हवलदार हिम्मत सिंग को कह दिया की में शाम को आउन्गा तबतक कोई आए तो कॉल करना..

उसके बाद हॉस्पिटल में चला गया. मा बहुत घबरा रही थी.

मा अनिता:- मुझे बहुत डर लग लग रहा है कुच्छ हो गया तो.

राज:- कुच्छ नही होगा में हू ना.. इतना कहकर मा को बाहों में भर लिया.. मा मेरे से डर के मारे एकदम चिपक गयी..

तभी डॉक्टर अपने टीम के साथ अंदर आ गयी. में मा के माथे पर किस किया डॉली को लेकर बाहर निकल गया..

में भी डरा हुआ था मेरे दिल की धड़कन बढ़ गयी थी. में इधर उधर ऑपरेशन थियेटर के गेट के पर टहल रहा था..

डॉली चुपचाप बैठी हुई थी.. उसके चेहरे से लग रहा था की वो भी बहुत घबराई हुई थी. लगभग 4 घंटे के बाद डॉक्टर बाहर निकले वो पसीने से तरबतर थे..

डॉक्टर:- कॉनग्रॅजुलेटेड मिस्टर. राज ऑपरेशन थियेटर सक्सेज फुल्ल रहा. अब आज के सातवे दिन आपके बीवी का पट्टी खोला जाएगा. अब आप जा सकते है

राज :- क्या में अपनी बीवी से नही मिल सकता हू..

डॉक्टर:- नही

फिर में डॉली को लेकर रूम पे छोड़कर थाने पे चला गया. वहाँ दिनभर कुच्छ नही हुआ. शाम को में ड्यूटी से रूम पे चला आया..

इसी तरह 4 दिन बीत गया में एक दिन शाम को में थाने में बैठा हुआ था की तभी एक होटल से फोन आया की कुच्छ गुंडे बवाल मचा रहे है.

मेने कुच्छ सिपाहियो ओर हवलदार हिम्मत सिंग को लेकर जल्द ही उस होटल में पहूच गया..............

मुझको गेट के पास ही होटल के मालिक मिल गया.......................

मेने ही आपको फोन करके बुलाया है..

राज:- चलिए बताइए तो वो कौन है..

फिर होटल मालिक के साथ में अंदर चला गया.. अंदर एक काला मोटा टाइप का आदमी जो शक्ल से ही गुंडा लग रहा था साला अपने आदमियो सहित एक आदमी को बुरी तरह पीट रहे थे..

मेने अपना पिस्टल निकाला ओर आगे बढ़ गया उनकी नज़र मुझ पर पड़ गयी लेकिन वो मुझे ऐसे नज़रअंदाज़ कर रहे थे की उनकी नज़र मुझ पर पड़ी ना हो..

तभी उस उस गुंडा सा आदमी ने एक बोतल फोड़ कर उस आदमी के पेट मारा तभी मेने उसके हाथ में गोली मार दिया..

अभी उसके आदमी कुच्छ कर पाते.

तभी में ….

मेरे बहादुर सिपाहियो पकड़ लो इन्हे...

वो तो साला मोटा गुंडा कह रहा था..

उसके दोनो आदमी जैसे ही मुझे मारने दौड़े तभी मेरे सिपाहियो ने पकड़ लिया..

राज :- मोटे को पकड़ते हुए चल बेटा आज तेरी सारी गुंडागर्दी तेरी गान्ड में से निकाल ना दिया... तो मेरा नाम इनस्पेक्टर राज नही..

मेने उसको जीप में बैठाया थाने की ओर निकल गया.

राज उस गुंडे को जीप बैठाया थाने की ओर निकल गया ओर उसके दोनो साथियो को छोड़ दिया.. रास्ते में ही उस गुंडे का गोली निकल वा दिया ..

जब थाने पहुँचा तो हवलदार ने बताया की इसका नाम मंगल सिंग ये यहा के मंत्री जी है उनका छोटा भाई. राज ने मंगल सिंग को लॉकवॉप में बंद कर दिया.. जाकर अपने केबिन में बैठ गया तभी राज के दिमाग़ में एक बात बहुत तेज़ी से घूम गया...........

आज से कुच्छ दिन पहले डी.जी.पी. ने एक केश राज को सौपा था जो की बोतल तोड़कर लोगो को कत्ल कर रहा था हो ना हो वो अपराधी यही साला हो.. ये बात दिमाग़ में आते ही राज अचानक खड़ा हुआ ओर लोकॉप की ओर बढ़ गया................
 
राज जैसे ही लॉकअप में घुसा तो मंगल सिंग खड़ा हो गया राज के हाथों में एक चाकू था. राज भी मंगल सिंग के सामने खड़ा होकर '' में जो पुच्छू अगर सही नही बताया तो मज़ाक़-मज़ाक़ में बहुत मारता हूँ .. इसलिए जो भी पुच्छू सही सही बताना नही तो कल से तुम बैठना ओर टाय्लेट करना भूल जाओगे..

मंगल सिंग कुच्छ नही बोला बुल्कुल खामोश था.

राज:- हा तो इस शहर में जीतने बोतल तोड़कर खून कत्ल हुआ है ये सब तुमने ही किया है..

मंगल सिंग:- नही मेने कुच्छ नही किया आप झूट मुट का आरोप लगा रहे है...........

राज:- ठीक है बेटा जब तुमको नही बताना है तो मत बता लेकिन होटल में यदि में नही रोकता तुम तो

उस लड़के का बोतल तोड़कर खून कर देते

- हिम्मत सिंग ज़रा इधर आओ तो

हिम्मत सिंग :- एस सर आया

हिम्मत सिंग के साथ मेरे पाँचो सिपाही भी लॉकअप में आ गये.

इनस्प.राज हवलदार ओर सिपाहियो से --तुम लोग इसको इतना मारो की ये कल से टाय्लेट ना कर पाए ओर बैठ ना पाए तबतक में अपने केबिन में हू तुमलोग इसके गान्ड पे मारना दूसरे जगह नही हा जबतक ये अपना जुरम कबुल नही कर लेता ठीक है

जबतक में अपने केबिन में हू.. इतना बोलकर राज लॉकअप से बाहर निकल गया............................

मेरे बाहर निकलते ही मंगल सिंग की पिटाई शुरू हो गयी धडाम.... धडाम ... धडाम ... में आराम से कुर्सी पे बैठ गया. लगभग 10मिनिट्स के बाद हवलदार बाहर आया ''सर मंगल सिंग ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है.. वो सुबकुच्छ बताने को तैयार हो गया है.''

राज:- ठीक है तुम चलो में आता हू.. में जैसे ही लॉकअप में गया.. मंगल सिंग कराह रहा था....

मेने जब मंगल सिंग से बयान ले लिया उसने कबूल किया की वो ही इस शहर में बोतल से कत्ल किया है......

मेने डी.जी.पी.सर को खबर कर दिया की जो बोतल तोड़कर कत्ल कर रहा है वो पकड़ा गया है..

डी.जी.पी. :-कॉनग्रॅजुलेटेड राज आज तुमने उस शातिर मुज़रिम को पकड़ कर बहुत बड़ा बोझ हटा दिया ..तुम उसको किसी कीमत पर मत छोड़ना. में अभी दूसरे जगह हू कल आऊंगा......

राज:- एस सर जय हिंद सर..

अभी में कुच्छ सोच ही रहा था की हमारे शहर के विधायक जी दनदनाते हुए आ गये मेरे पास ..................

कौन साला इनस्प.मेरे भाई को बंद किया

में अपने केबिन में बैठा हुआ था की विधायक मेरे पास आए..................

मेरे सामने एक कुर्सी रखा हुआ था उसी पे विधायक जी बैठ गये.

विधायक:- इनस्पेक्टर तूने मेरे भाई को पकड़ कर अच्छा नही किया है... अगर मेरे भाई को कुच्छ हुआ ना तो अच्छा नही होगा

राज:- क्या कर लेंगे आप आपका भाई मर्डर केस में पकड़ा गया है इसलिए अब तो इसे फाँसी होने से कोई नही बचा सकता. क्योकि मेरे पास सबूत भी है...

विधायक जी इतना सुनकर भड़क गये अचानक खड़े होकर मेरे कोल्लर पकड़ लिए..................

राज खड़ा होकर :- विधायक जी चुपचाप ए हाथ हटा लीजिए नही तो आपका ई हाथवा उखाड़ कर आपके पिच्छावाड़ा में घुसेड दूँगा. विधायक जी ने अपना हाथ हटते हुए '' ठीक है इनस्प में तुझको देख लूँगा''

उसके बाद विधायक जी अपने भाई से मिलकर निकल गये..

शाम को जब घर लौटा तो सोचा की क्यो ना मा को देखता चलू..............................

हॉस्पिटल में दाखिल हुआ नर्स से कहा की मुझे डॉक्टर से मिलना है ओर में सॉफे पर बैठ गया थोड़ीदेर बाद नर्स आकर बोली ' जाइए आपको डॉक्टर साहब बुला रहे है ' राज डॉक्टर के पास चला

गया............................

डॉक्टर .:- हा तो मिस्टर. राज कहिए कैसे आना हुआ

राज :- डॉक्टर मुझे अपनी बीवी के सिलसिले थोड़ा बात करना है आपने मेरी बीवी के चेहरे का सर्जरी करके चेहरा बदल दिया है लेकिन में चाहता हू की वो बिल्कुल नव युवती की तरह हो जाए

डॉक्टर .:- आप चिंता मत कीजिए मिस्टर.राज मेने ऐसा ओपरेशन किया है की आपकी बीवी तो कुवारि लड़की बन जाएँगी. लेकिन आप उनको ये सब क्यो करवा रहे है आपकी बीवी का चेहरा तो अच्छा ही था.

राज:- वो क्या है ना डॉक्टर मेरा लव मेरेज़ हुआ है तो मेरे माता-पिता मेरे बीवी को छोड़ने को बोल रहे है क्योकि में दुनिया के किसी भी लड़की से शादी कर सकता हू इसलिए अपनी पत्नी का चेहरा बदलवाना पड़ा..

डॉक्टर:- ठीक है मिस्टर.राज आप जासकते है परसो आपकी बीवी का पट्टी हटाया दिया जाएगा.. आप बिल्कुल चिंता मत किज़िये आपकी बीवी का बहुत बढ़िया से देख भाल हो रहा.

राज:- ठीक है में चलता हू

उसके बाद में हॉस्पिटल से बाहर निकला गाड़ी स्टार्ट किया ओर घर की ओर चल दिया..
 
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