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Incest घर की मुर्गियाँ

"भइया कब तक

मगर नेहा की नींद उड़ने वाली थी समीर के बिना। नेहा ऊपर समीर के रूम वापस आओगे?"

समीर- अब तो मुझसे भी तेरे बिना नहीं रहा जाता। देख मैंने फ्लाइट का टिकेट बुक कराया है। परस में तो यहीं मिलूंगा।

अंजली, किरण और विजय टैक्सी से निकल गये। और समीर भी मुंबई के लिए निकल पड़ा।

आज रात टीना और नेहा के साथ अजय अकेला है। अजय आज होटल से खाना पैक कराकर लाया, और तीनों ने मिलकर खाया। नेहा किचेन में पहुँचती है।

अजय- टीना बेटा, आज का क्या प्रोग्राम है?

टीना- मस्ती करनी है। नेहा के सोने के बाद आपके रूम में।

अजय के चेहरे पर मुश्कुराहट दौड़ गई- “बेटा सो मत जाना, कहीं मैं इंतजार ही करता रहूँ?

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टीना- ठीक है अंकल।

फिर तीनों मिलकर टीवी पर सास-बह का सीरियल देखते हैं। रात के 10:00 बज चुके थे। सीरियल खतम हो गया। अजय थोड़ी देर बाद अपने रूम में सोने चला जाता है।

टीना- चल यार क्या ये सास-बह का प्रोग्राम देखती है इस टाइम। ये टाइम तो सन्नी लीयोन वाला प्रोग्राम का होता है। चल आज तुझे सन्नी लीयोन की मूवी दिखाती हूँ।

नेहा- सन्नी लीयोन की कौन सी मूवी है तेरे पास?

टीना- पोर्न वाली।

नेहा- क्या? पोर्न अब ये क्या बला है?

टीना- मेरी भोली नेहा तू कौन सी दुनियां में रहती है? क्या तुझे सन्नी लीयोन का भी नहीं मालूम?

नेहा- मालूम है ना बिलीवुड आक्ट्रेस है। जिश्म। लीला मूवी की हेरोइन है।

टीना- "मेरी जान वो पोर्न आक्टर भी है। मेरे पास है उसकी वीडियो। चल तुझे दिखाती हूँ उसका कमाल.." और नेहा का हाथ पकड़कर रूम में पहुँच गई। दोनों बेड पर लेट चुके थे। टीना ने अपने मोबाइल की वीडियो फाइल खोलके सन्नी लीयोन का फोल्डर खोला और फिर भा सन्नी लीयोन का मस्त डांस।

नेहा बड़े गौर से मोबाइल पर सन्नी लीयोन का डांस देख रही थी, कहा- "अच्छा डान्स कर लेती है..."

टीना- "देखती रह आगे-आगे कैसा प्रोग्राम दिखाती है?" थोड़ी देर बाद सन्नी लीयोन अपनी चूचियां दबाने लगी।

नेहा- आहह... तो तू ये दिखाना चाहती थी?

टीना- बस तू देखती रह आगे-आगे क्या होता है?

फिर सन्नी लीयोन अपनी नाइटी थोड़ा सा ऊपर से नीचे खिसकाती है। जिससे एक चूची का निप्पल नजर आ जाता है, और अपने हाथों से निप्पल को अपने मुँह की तरफ करने लगती है।

नेहा- बाप रे... ये क्या कर रही है?

टीना- “तू यार अब बोल मत, चुपचाप देख.." और टीना अपना एक हाथ नेहा की जाँघ पर फेरने लगती है।

इधर रात के 11:00 बजे चुके थे। अजय अपने बेड पर लेटा टीना का इंतजार करता है- “लगता है सो गई? क्या करूं मेसेज कर दूं? नहीं नहीं, अगर नेहा ने देख लिया तो नेहा क्या सोचेगी? थोड़ा और इंतजार कर लूँ, क्या पता अभी नेहा जाग रही हो?"
 
इधर अब तक सन्नी लीयोन अपने सारे कपड़े उतार चुकी थी और एक उंगली से चूत को सहला रही थी। रूम में बड़ा हाट नजारा चल रहा था। टीना का हाथ अब नेहा की पैंटी में घुस चुका था। नेहा पानी छोड़ने लगी थी। पैंटी की एलास्टिक में हाथ ठीक से मूव नहीं कर पा रहा था।

नेहा- यार क्या कर रही है? इसे तो उतार ही दे।

टीना ने नेहा की पैंटी उतार दी।

सन्नी लीयोन ने अब एक लंबा सा डिल्डो लिया और उसको चाटने लगी।

रात के 11:15 बज चुके थे। अजय से अब और इंतजार नहीं हो रहा था। वो अपने बेड से उठकर नेहा के रूम की तरफ चल दिया। अजय नेहा के रूम में पहुँचता है। मगर दरवाजा अंदर से बंद था।

अजय- “ये टीना भी उल्लू बनाती है। इसकी तो सुबह रेल बनाऊँगा.." और बेचारा अजय मन मसोसकर वापस अपने रूम में आ गया।

मगर टीना और नेहा के कपड़े उतार चुके थे। दोनों का लेज़्बियन खेल चलने लगा। टीना और नेहा 69 पोजीशन में चूत चाट रही थीं दोनों का ये खेल रात एक बजे तक चला। तब जाकर दोनों चैन की नींद सोए।

यूँ ही दिन गुजर रहे थे। समीर के साथ पूजा, यानी टीना की बुआ भी आ चुकी थी। मगर अभी तक अंजली और किरण नहीं आए थे। शादी में सिर्फ 3 दिन बाकी थे।

अजय अंजली को काल करता है- “हेलो अंजली कहां हो? शादी में सिर्फ 3 दिन बचे हैं..."

अंजली- मम्मी आने ही नहीं दे रही थी।

CO

अजय- विजय कहां है?

अंजली- वो भी यही हैं, लो बात करो।

अजय- हेलो विजय, इतने दिन लगा दिए?

विजय- यार कई सालों में आया हूँ कोई छोड़ता ही नहीं।

अजय- किसने पकड़ रखा है तुझे?

विजय- “वहीं आकर बताता हूँ." और फोन डिसकनेक्ट हो गया।

अंजली सभी से शादी में आने की रिक्वेस्ट करती है। और फिर सब नोयेडा वापिस आ गये

और जिस दिन का सबको इंतजार था वो दिन भी आ गया।

आज संजना का फार्महाउस दुल्हन की तरह सजा हुआ था। समीर दूल्हा बना घोड़ी पे सवार बारात लेकर फार्महाउस पहुँचता है, और नेहा भी दुल्हन बनी पालकी में सवार थी। आज बड़ी धूम धाम से दोनों की शादी की रश्में, हँसी मजाक, डी.जे. डिस्को डांस, और साथ फेरे भी दोनों ने साथ लिए।

संजना अजय से- “कितनी प्यारी जोड़ी है दोनों की... किसी की नजर ना लगे...”

अजय- मेरी एक बेटी घर से विदा हो रही है, और एक बेटी मेरे घर आ रही है।

संजना- बस अंकल दिव्या को बेटी बनाकर रखना।

अजय- आप चिंता ना करो।

थोड़ी देर बाद धीरे-धीरे सभी मेहमान जाने लगे।

समीर को अकेला देखकर कार है- "हाय जीजू क्या हाल है? मैंने आपकी सुहाग-सेज सजा दी है। मगर आज हमारी दिव्या को ज्यादा परेशान मत करना...”

समीर भी मस्ती के मूड में था- "सुहागरात पर तो परेशान नहीं किया जाता, रुलाया जाता है मिस काजल..."

काजल इस बात का मतलब समझते हए मुश्कुराती हुई चली गई।



बड़ी धूम धाम से दोनों की शादी निपट गई। रात के दो बज चुके थे। नेहा की विदाई के वक्त सभी की आँखों से झर-झर आँसू बह रहे थे। राहुल की गाड़ी में नेहा बैठ गई, और राहुल जयपुर के लिए निकल गया। आज रात राहुल तो सुहागरात बना नहीं पायेगा।

मगर समीर की तो आज सुहागरात है। दिव्या सजी-धजी दुल्हन बनी सुहाग-सेज पर बैठी समीर का इंतजार कर रही थी। थोड़ी देर बाद दरवाजे पर समीर के आने की आहट होती है। दिव्या की धड़कन बढ़ जाती है। दिव्या बेड पर बैठी अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश करती है। मगर आज सांसें फुल स्पीड पर चल रही थीं।
 
बड़ी धूम धाम से दोनों की शादी निपट गई। रात के दो बज चुके थे। नेहा की विदाई के वक्त सभी की आँखों से झर-झर आँसू बह रहे थे। राहुल की गाड़ी में नेहा बैठ गई, और राहुल जयपुर के लिए निकल गया। आज रात राहुल तो सुहागरात बना नहीं पायेगा।

मगर समीर की तो आज सुहागरात है। दिव्या सजी-धजी दुल्हन बनी सुहाग-सेज पर बैठी समीर का इंतजार कर रही थी। थोड़ी देर बाद दरवाजे पर समीर के आने की आहट होती है। दिव्या की धड़कन बढ़ जाती है। दिव्या बेड पर बैठी अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश करती है। मगर आज सांसें फुल स्पीड पर चल रही थीं।

समीर रूम में एंटर होता है और दरवाजा बंद करके दिव्या की तरफ बढ़ता है। दिव्या नजरें झुकाये बेड पर बैठी थी। समीर बेड पर ठीक दिव्या के सामने बैठ गया।

समीर- वाउ... आज तो एकदम परी लग रही हो। जरा अपना चेहरा तो दिखाइए।

मगर दिव्या शर्माई सी बिना कुछ कहे बैठी रहती है।

समीर- “क्या हआ दिव्या, अपना चेहरा तो दिखाओ..." और समीर अपने हाथों से दिव्या का घूघट हटाता है। उफफ्फ... आज तो दिव्या एकदम दूध सी सफेद दुल्हन बनी कोई राजकुमारी लग रही थी, और हाथों पर मेहन्दी का क्या खूब रंग चढ़ा था। समीर तो एकटक देखता रह गया।

समीर बार-बार अपनी किश्मत पर फरव्र कर रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई खवाब देख रहा हो। समीर ऐसे ही दिव्या को देखे जा रहा था। काफी देर यूँ ही देखने के बाद दिव्या ही बोलती है।

दिव्या- ऐसे क्या देख रहे हो? मुझे शर्म आती है।

समीर- मुझे तो यकीन नहीं हो रहा की तुम मेरी दुल्हन बन गई हो।

दिव्या- अच्छा जी आपको यकीन नहीं हो रहा?

थोड़ी देर बाद दोनों अपने-अपने घरवालों के बारे में बातें करते हैं। फिर समीर दिव्या को मुँह दिखाई गिफ्ट हीरों का सेट पहनाता है।

समीर- ये मेरी तरफ से मुँह दिखाई का छोटा सा गिफ्ट।

दिव्या- बड़ा प्यारा गिफ्ट है। थॅंक यू।

समीर सिरहाने से दूध का ग्लास उठता है, और कहता है- “दूध पी लीजिए.."

दिव्या- ये आपके लिए है।

समीर- नहीं जी ये आप पीजिए।

दिव्या दो यूंट पीकर समीर को ग्लास पकड़ा देती है।

समीर- बस इतना सा और पी लीजिए।

दिव्या- ये बाकी आप।

समीर बाकी दूध पी जाता है। अब समीर दिव्या की अंदर की खूबसूरती देखना चाहता था, इसलिये समीर दिव्या की ज्यूयेलरी उतारने लगता है।

दिव्या- “रुकिये, मैं उतारती हूँ.." और दिव्या सारी ज्यूयेलरी उतार देती है।

समीर दिव्या को बाँहो में भर लेता है- “तुम कितनी प्यारी हो दिव्या.. जी करता है बस बाहों में लिए रहो.."

दिव्या- ऐसा मुझमें क्या है, जो आपको इतना प्यार आ रहा है?

समीर- “ये आपका चाँद सा चेहरा, बड़ी-बड़ी काली-काली आँखें, गुलाबी-गुलाबी गाल और दो गुलाब की पंखुड़ी से होंठ... जी करता है इन्हें चूम लूँ... और भी कुछ है, जो अभी देखना बाकी है..."

दिव्या कुछ समझ नहीं पाई।
 
समीर दिव्या के होंठों पर उंगली फेरने लगता है। दिव्या एकदम सिहर गई। आज पहली बार किसी ने दिव्या को ऐसे छुआ था। समीर कोई जल्दबाजी के मूड में नहीं था, बस धीरे-धीरे अपनी उंगली दिव्या के होंठों पर फेरता रहा।

समीर- दिव्या तुमको कैसा लग रहा है शादी के बाद?

दिव्या- अच्छा लग रहा है।

समीर अपने होंठों को दिव्या के करीब ले आता है। इतना करीब की दिव्या कीसांसें समीर में समाने लगी, और किसी चुंबक की तरह समीर के होंठ दिव्या से चिपक गये। आह्ह... कितने साफ्ट मुलायम होंठ हैं दिव्या के।

समीर तो बस मस्ती में चूसता रहा। दिव्या को अजीब सा मजा आने लगा। समीर के हाथ धीरे-धीरे दिव्या की कमर सहलाने लगे। अब समीर दिव्या के अंदर की देखना चाहता था, और समीर दिव्या का लहँगा उतारने लगता है।

दिव्या ना-नुकर करने लगी।

समीर- "इन्हें कब तक पहनोगी?" और समीर लहँगा उतारने लगता है। समीर दिव्या को सिर्फ ब्रा पैंटी में छोड़ता

है।

दिव्या का शर्म से बुरा हाल हो चुका था। दिव्या बेड पर रखी चादर उठा लेती है, और अपने ऊपर डालने लगी।

समीर- तुम्हारी शर्म तब तक नहीं उतरेगी जब तक मेरे भी कपड़े नहीं उतरते, और समीर अपनी पैंट शर्ट उतारकर सिर्फ अंडरवेर में रह गया।

दिव्या समीर पर एक नजर डालती है और अपने चेहरे को दोनों हाथों से छपाने लगती है।

स समीर - “क्या यार, आज के दौर में कोई इतना भी शर्माता है?" और समीर दिव्या के ऊपर से चादर पकड़कर खींच लेता है।

दिव्या- ये आप क्या कर रहे हो?

समीर- प्यार।

दिव्या- ऐसे होता है प्यार?

समीर- और नहीं तो क्या? तुम्हें प्यार नहीं आता।

दिव्या- नहीं तो।

समीर- चलो आज तुम्हें प्यार करना सिखाता हूँ।

दिव्या- जी।

समीर- जैसा मैं कहूँ तुम वैसा करना, और करने से बिल्कुल नहीं डरना। ओके?

दिव्या- ओके।

समीर- अपनी आँखें बंद करो और जब तक मैं ना कहूँ खोलनी नहीं है।

दिव्या- ऐसा क्या करना है आँखें बंद करा कर?

समीर- मुझ पर भरोसा है?

दिव्या- अपने से भी ज्यादा।

समीर- बस तो फिर जैसा मैं कहता हूँ वेसा करो।।
 
दिव्या आँखें बंद कर लेती है। समीर पीछे जाकर ब्रा की स्ट्रैप खोल देता है। उफफ्फ... गोल-गोल गुब्बारे समान

चूचियां पर किशमिस के दाने जैसे दो निप्पल देखकर समीर की राल टपकने लगी। समीर से रुकना अब असंभव था और वो आगे बढ़कर एक निप्पल अपने होंठों से लगा लेता है।

दिव्या आँखें बंद किए बोलती है- “ये कैसे प्यार कर रहे हो जी?" और हल्की-हल्की सिसकियां निकलनी शुरू हो

गई।

समीर बिन कुछ कहे धीरे-धीरे निप्पल चूसता रहा।

दिव्या आँखें बंद किये सिसकियां ले रही थी- “इसस्स्स आईई.."

समीर दिव्या के जिश्म को अपने होंठों से तरसाने लग गया। निप्पल से नीचे जाकर नाभि पर होंठ टिका देता है,

और एक हाथ से बाकी बची पैंटी भी खिसका दी। दिव्या में भी अंजा सा शुरूर भर चुका था। ये प्यार का खेल दिव्या को मस्त किए जा रहा था। सिसकियां हर पल के साथ बढ़ती जा रही थी। समीर भी एक-एक कदम बढ़ता

जा रहा था। अब तक समीर की उंगली ने भी मंजिल पा ली थी।

बड़े ही प्यार से उंगली ने दिव्या के दरवाजे पर दस्तक दी। दिव्या ने भी उंगली का स्वागत गीली हो चुकी चूत में बड़े ही प्यार से किया। समीर की उंगली अपना कमाल दिखाने लगी। दोनों हाथों की उंगली चूत के होंठ पकड़कर फैलाती है। समीर की नजरें चूत की झिल्ली तक पहुँच जाती हैं।

दिव्या एकदम कच्ची कली थी। समीर को आज बड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। दिल में बड़ी खुशी भी थी दिव्या की कली देखकर। आज दिव्या कली से फूल बनने जा रही थी। समीर चूत की फांकों में उंगली धीरे-धीरे मसाज करने लगी। दिव्या की सिसकियां अब आss आss में बदल चुकी थीं।

दिव्या- “आहह... हाँ आआआ आहह... अहह... क्या कर रहे हो... अहह... सस्सीई... उईई..”

अब समीर ने दिव्या को लिटा दिया और नीचे सरकता हुआ अपने होंठ, चूत पर टच करा दिए। दिव्या में जैसे जलजला सा आ गया, ऐसे काँपने लगी। समीर को दिव्या पर बड़ा ही प्यार आ रहा था, अपने होंठों से दिव्या की चूत के होंठ पकड़ लेता है। दिव्या के हाथ अपने आप समीर के बालों को सहलाने लगते हैं। समीर चूत की फांकों को चाटने लगा, और दिव्या समीर के सिर को अपनी चूत पर दबाने लगी।

दिव्या को अजीब सा नशा चढ़ रहा था। बेड पर लेटी मछली की तरह फड़फड़ा रही थी। समीर अपनी जीभ थोड़ा

अंदर डालने लगा।

दिव्या- “आहह... आऽऽ आऽs उईईई... आहह... उम्म्म..." और दिव्या में अकड़हाड़ सी होने लगी- "हाईई मुझे क्या हो रहा है?"

दिव्या का जिश्म अकड़ने लगा। अपनी चूत को समीर के मुँह की तरफ किए जाने लगी और एक हाथ से बेड की चादर पकड़ ली। ऐसा लग रहा था जैसे कोई ज्वालामुखी फूटने वाला है, और वो पल भी आ गया जब दिव्या का झरना बह गया। दिव्या को जैसे बड़ा सकन मिला हो, और एकदम निढाल सी बेड पर लढ़क गई।

समीर- कैसा लगा मेरा प्यार?

दिव्या- ऐसे होता है प्यार?

समीर- हाँ जी ऐसे ही होता है... और भी तरह से किया जाता है। अभी आपको

सीखना बाकी है।

दिव्या- आप सिखा दीजिए।

समीर- “अब तुमको भी वही करना होगा जो मैंने किया.." और समीर अपना अंडरवेर भी उतार देता है। लण्ड एक स्टील की रोड की तरह दिव्या के सामने लहरा गया।

दिव्या आँखें फाड़े लण्ड को देखती रह गई।

समीर- ऐसे क्या देख रही हो?

दिव्या- हाय दैय्या ये क्या है?

समीर- तुम्हारा प्यारा खिलोना है, हाथ में लेकर खेलो इससे।

दिव्या- नहीं जी, डर लगता है मुझे।

समीर- "भला क्यों? एक बार छूकर तो देखो.." और समीर दिव्या का हाथ पकड़कर लण्ड पर रख देता है।
 
दिव्या के हाथ में झनझनाहट सी दौड़ गई, बड़ा ही हार्ड था। दिव्या यूँ ही हाथ में पकड़े रही। समीर ने दिव्या के हाथों में लण्ड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया। अब दिव्या को भी अच्छा लगाने लगा। और थोड़ी देर बाद समीर दिव्या के सिर को लण्ड की तरफ दबाने लगा।

दिव्या भी समझ चुकी थी समीर क्या चाहता है?

समीर- किस माई काक

दिव्या समीर की बात नहीं टाल सकी और दिव्या के होंठ समीर की टोपी को छने लगे। समीर की आहह... निकाल गई। समीर इससे भी ज्यादा चाहता था, और अपने लण्ड का दब पर डलने लगा, जिससे दिव्या का मुँह खुलता चला गया। अब तक आधा लण्ड दिव्या के मुँह में समा चुका था। पहली बार दिव्या ये सब कर रही थी। मगर अब दिव्या को भी ये सब में मजा आने लगा। प्यार का खेल बड़े ही मजे से खेलने लगी। लण्ड को मुँह में अंदर-बाहर करके चूसने से समीर अपनी सिसकियां नहीं रोक पाता

समीर- “अहह... इसस्स्स... उहह... हाई दिव्या मजा आ रहा है..."

दिव्या बड़े ही मजे से लण्ड चूसने लगी। समीर दिव्या को पाकर धन्य हो गया। क्या गजब का ब्लो-जोब करती है। समीर से अब कंट्रोल करना मुश्किल था, और जल्दी से अपना लण्ड दिव्या के मुँह से बाहर खींच लेता है,

और दिव्या को बेड पर लिटाकर दोनों पैर फैला देता है। दिव्या को अभी ये मालूम नहीं था की समीर क्या कर रहा है? और जब समीर ने अपना लण्ड चूत से टच किया तो दिव्या सहम गई।

दिव्या- ये आप क्या कर रहे हो?

समीर- मेरी जान... यही तो प्यार की मंजिल है।

दिव्या- क्या आप इसे अंदर करोगे?

समीर- और नहीं तो क्या?

दिव्या- नहीं जी, ये तो बहुत बड़ा है। भला ये यहां कैसे जा सकता है?

समीर- मेरी जान, बस थोड़ा सा मुश्किल है, मगर एक बार चला गया तो फिर बड़ा मजा आता है।

दिव्या- मुझे तो डर लग रहा है।

समीर- "मुझे पर भरोसा रखो कुछ नहीं होगा...” कहकर समीर नारियल तेल की शीशी उठा लेता है, और ढेर सारा तेल अपने लण्ड और दिव्या की चूत के छेद पर लगाता है। दिव्या अंजानी अनहोनी से आँखें बंद कर लेती है,

और समीर अपने लण्ड की टोपी चूत के अंदर सरकाने लगता है।

दिव्या दर्द से बिलबिला गई, और उसकी एक दर्द भरी चीख निकल गई। समीर ने जल्दी से दिव्या के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। जिससे दिव्या की आवाज समीर की गले में दब गई। दिव्या का दर्द से बुरा हाल हो चुका था। बेचारी समीर की कैद से छूटना चाहती थी।

समीर यही पर रुक कर दिव्या की चूचियां मसलने लगता है, और धीरे से अपने होंठ दिव्या के होंठों से आजाद किए। दिव्या की आँखों से आँसू बह रहे थे।

दिव्या- "प्लीज़्ज़... बाहर निकाल लो आअहह... मर गई मैं..."

समीर- "बस हो गया अब और दर्द नहीं होगा..." और समीर दिव्या के निप्पल चूसने लगता है।

जिससे थोड़ी देर में दिव्या को राहत सी मिलती है।

समीर- कैसा लग रहा है दिव्या?

दिव्या- हाँ, अब ठीक है।

समीर- थोड़ा-थोड़ा अंदर-बाहर करूँगा बर्दाश्त करना।

दिव्या- मुझसे नहीं होगा।

समीर- "बस और अंदर नहीं करूँगा इतना ही अंदर-बाहर करूँगा। बस थोड़ा सा दर्द होगा..." और समीर लण्ड को हल्का सा बाहर खींचता है।
 
दिव्या- “उईईई... आह्ह... सस्स्स्सी ..” दिव्या को फिर से दर्द होने लगा। मगर दिव्या होंठ भींचे बर्दाश्त करती रही।

समीर धीरे-धीरे लण्ड को अंदर-बाहर किए जा रहा था। दिव्या की चूत पुरी गीली हो चकी थी। लण्ड का अंदर बाहर होना दिव्या को अच्छा लग रहा था। मगर अभी तक लण्ड सिर्फ आधा ही घुसा था और समीर एक और धक्का मारना चाहता था। इस बार समीर ने दिव्या के होंठों को पहले ही अपने होंठों में जकड़ लिया और एक जोरदार धक्का लग दिया। लण्ड झिल्ली फड़ता हआ चूत की गहराई में जड़ तक समा गया।

दिव्या जैसे बेहोश हो गई और एकदम निढाल सी पड़ गई।

समीर घबरा गया और यूँ ही रुक कर दिव्या को सहलाने लगा। थोड़ा सा बेड पर रखी पानी की बोतल से पानी की छीटें मुँह पर डाली, तो दिव्या को जैसे होश आया।

दिव्या- तुम तो मेरी जान लेना चाहते हो।

समीर- “सारी जान, मगर पहली बार में थोड़ी तकलीफ तो होती ही है। देखो अब पूरा घुस चुका है। जितना दर्द होना था हो गया, अब सिर्फ मजा आयेगा.." और समीर दिव्या को सहलाने चूमने लगा।

जिससे दिव्या का ध्यान बँट गया, और समीर लण्ड को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। 5 मिनट ऐसे ही करने

से दिव्या भी समीर का साथ देने लगी।

समीर- अब कैसा लग रहा है दिव्या?

दिव्या- “जी अच्छा लग रहा है..” दिव्या झड़ने के करीब पहुँच चुकी थी। दिव्या की अहह की सिसकी निकाल रही थी- “आह्ह... इह्ह.. उईईई.. सस्स्सी ... उम्म्म्म... उईईई." और दिव्या एकदम से समीर को जकड़ लेती है। इतनी जोर से की समीर की कमर पर नाखून के निशान गड़ गये, और समीर भी दिव्या पर गिर पड़ा। दोनों तृप्त हो चुके थे। एक दूसरे पर लिपटे यूँ ही लेटे रहे।

उधर नेहा दुल्हन बनी राहुल के साथ कार में बैठी सुसराल जा रही थी। नेहा बीच में बैठी थी। राहुल खिड़की के दाहिने तरफ था। दूसरी तरफ काजल बैठी थी। रात के अंधेरे में राहुल का हाथ नेहा के हार्थों को सहला रहा था। नेहा एकदम चुपचाप बैठी थी। कार में हल्का म्यूजिक चल रहा था।

काजल का ध्यान भी सिर्फ म्यूजिक पर था।

मगर राहुल की हरकतें बढ़ती जा रही थीं। नेहा कब तक कंट्रोल करती, मुँह से एक हल्की सो सिसकी निकल गई। बस ये सिसकी काजल का ध्यान भंग कर गई, और काजल का सारा ध्यान अब नेहा और राहुल पर पहुँच गया। काजल से राहुल सिर्फ 4 साल बड़ा था। मगर आज तक दोनों भाई बहन आपस में ज्यादा फ्री नहीं थे। अब काजल को म्यूजिक में कोई इंटेरस्ट नहीं था।

राहल का हाथ नेहा की जांघे सहला रहा था। नेहा कार में अनकंफर्टेबल महसूस कर रही थी, और राहुल के हाथ को अपने हाथ से हटाने का प्रयास भी किया मगर बेकार। राहुल कहां मानने वाला था। काजल को भी ये सब देखने में बड़ा मजा आ रहा था।

सुबह करीब 5:00 बजे राहुल की कार जयपुर पहुंची।

नेहा का बड़ा ही शानदार स्वागत हुवा। नेहा इतना प्यार पाकर बड़ी खुश हुई।

काजल नेहा से बोलती है- "भाभी आप मम्मी के रूम में बैठिए, तब तक मैं आपका रूम सजा दूं..." और नेहा काजल को प्यारी सी स्माइल देकर चली गई।

काजल इस वक्त राहुल के रूम में थी, और अपने भाई की सुहाग-सेज को फूलों से सजा रही थी। जाने क्यों आज काजल की चूत में भी खुजली सी मच रही थी। बार-बार चूत वाली जगह खारिश हो जाती। बेचारी हल्के हाथ से चूत को खुजला देती। मगर ये खारिश खुजाने से कम नहीं हो रही थी।

काजल- "आज इसे क्या होने लगा..."

काजल ने थोड़ी देर में ही बेड को फूलों से सजा दि गुलाबी की पत्तियों को बेड पर ऐसे बिछाया, जैसे कोई चादर बिछी हो। एक बार तो काजल का भी की बेड पर लेट जाऊँ। मगर फिर ये सोचकर की नहीं ये तो नेहा के लिए है। काजल रूम से बाहर जाने लगती है। मगर काजल का दिल नहीं माना और पलटकर धम्म से बेड पर लेट गई, और बेड पर लेटते ही काजल की चूत गीली हो गई। अनायास ही एक हाथ चूत को सहलाने लगा। काजल को डर भी था की कोई आ ना जाय। इस खयाल से उसका हाथ चूत से हट गया और एक प्लान ने दिमाग में जन्म ले लिया।

काजल- “आज भाभी का शो देखूगी। मगर ये सब कैसे होगा?"

काजल का रूम नीचे था, और राहुल का ऊपर। काजल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे? और यूँ ही राहुल के रूम से बाहर आ गई। तभी उसकी नजर रूम के बराबर स्टोर पर गई।
 
काजल- “शायद यहां से काम बन जाय..."

काजल स्टोर खोलती है। उफफ्फ... कितना सामान भरा था स्टोर में। पैर रखना की भी जगह नहीं थी। काजल को जाने क्या धन सवार थी? स्टोर का सामान जो फर्शस पर बिखरा पड़ा था, उसको सलीके से लगाया तो इतनी जगह बन गई की एक बेड का गद्दा भी बिछच जाय। स्टोर में एक रोशनदान था, जो राहुल के रूम में खुलता था। काजल ने एक स्टूल ठीक रोशनदन के साथ लगाया और स्टूल पर बैठकर जो रोशनदान से झाँका, तो काजल की खुशी का ठिकाना ना रहा।

रोशनदान के ठीक नीचे राह के बेड का पूरा नजारा दिखाई रहा था, और काजल ने स्टोर बंद करके ताला की चाबी अपनी ब्रा में कैद कर ली, और नीचे आ गई।

गाँव की औरतें नेहा को देखने आ रही थीं। नेहा का पूरा दिन यूँ ही जुजर गया।

रात 10:00 बजे काजल नेहा को लेकर राहल के रूम में छोड़ने जाती है, और नेहा को सुहाग-सेज पर बिठाकर काजल ने कहा- “अच्छा भाभी बेस्ट आफ लक... अच्छे से खुद भी एंजाय करना और भइया को भी कराना। मैं भइया को भेजती हूँ...” और मुश्कुराती हुई रूम से बाहर चली गई।

नेहा सोचने लगी- “ये काजल तो बिल्कुल टीना की तरह है.." और नेहा दुल्हन बनी बेड पर राहुल का इंतेजार करने लगी।

काजल रूम से निकलकर नीचे पहुँचती है। उसकी नजर किचेन में राहुल पर पहुँची। राहुल किचेन में फ्रिज़ से कुछ निकाल रहा था। काजल भी किचेन में पहुँच गई, और कहा- "अरे... भइया क्या चाहिए मैं कुछ हेल्प करूं?"

राहुल एकदम हड़बड़ा जाता है- “नहीं, मैं ले लूँगा। तू जा..."

काजल सोचती है- “भैया ऐसा क्या ले रहे हैं नेहा के लिए, जो मुझसे भी छुपा रहे हैं." काजल मुश्कुराते हुए मन में- “छुपा लो भइया, मगर आज आप मुझसे कुछ भी छुपा नहीं पाओगे..."

राहुल हाथ में कोई पैकेट लिए अपने रूम की तरफ ऊपर चल पड़ा। रात के 11:00 बज चुके थे। थोड़ी देर में घर के सभी लोग सो गये।

काजल को नींद कहां आने वाली थी। थोड़ी देर बाद धीरे से अपने रूम से निकलकर ऊपर स्टोर में पहुंच गई। स्टोर में काफी अंधेरा था। काजल ने रोशनदान के ठीक नीचे टेबल रख दी थी। काजल बड़े ही सावधानी से टेबल पर चढ़ गई, और काजल की आँखों के ठीक सामने राहल का बेड नजर आ गया। कमरे में काफी उजला था। नेहा और राहुल दोनों बातें कर रहे थे।

राहुल- नेहा, मैं सबसे ज्यादा अपनी माँ से प्यार करता हूँ।

नेहा- जी... आप फिकर ना कीजिए, मैं भी माँ जी की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दूंगी।

राहुल- "ओहह... नेहा मुझे तुमसे यही उम्मीद थी..." और राहल नेहा को गले से लगा लेता है। फ़र कहता है- "कुछ अपने बारे में भी बताओ..



नेहा- बस एक दोस्त है टीना, उसी के साथ वक्त गुजरता था। आप सुनाइए कुछ?

राहल- बस अभी तक तो कालेज दोस्तों के संग ही मस्ती की है।

नेहा थोड़ा मुश्कुराते हुए- “गर्लफ्रेंड संग?"

राहल- क्या? नहीं जी, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। मुझे तो लड़कियों से बातें करते हुए बड़ी झिझक होती है। गर्लफ्रेंड तो छोड़ो, मैं तो अपनी बहन दिव्या से भी बातें करते हुए झिझकता हूँ..”

नेहा- क्या मुझसे भी झिझकोगे?

राहुल- “भला तुम कोई झिझकने की चीज हो?” और राहुल अपना चेहरा नेहा के बहुत करीब ले जाता है।

दोनों की सांसें आपस में घुलने लगीं। काजल ये सब बड़े ही ध्यान से देख रही थी। राहुल के होंठ अभी तक नेहा के होंठों से चिपके नहीं थे। काजल का दिल धड़कने लग चुका था।
 
दोनों की सांसें आपस में घुलने लगीं। काजल ये सब बड़े ही ध्यान से देख रही थी। राहुल के होंठ अभी तक नेहा के होंठों से चिपके नहीं थे। काजल का दिल धड़कने लग चुका था।

फिर राहुल ने अपने होंठों को नेहा के होंठों से जोड़ दिया। नेहा के होंठ राहुल को बड़े ही साफ्ट महसूस हो रहे

थे। राहल बड़े ही प्यार से होंठों को किस कर रहा था।

नेहा को टीना की बात याद आती है। टीना ने कहा था- “सेक्स में बिल्कुल मत शर्माना, खुल के एंजाय करने वाली लड़कियां ही लड़कों को पसंद आती हैं." और नेहा ये सोचकर किसिंग में राहुल का साथ देने लगी। नेहा ने राहल के होंठों को अपने होंठों में दबाकर चूसना शुरू कर दिया।

उधर नेहा का इस तरह किस करना, काजल के जिश्म में कंपन पैदा कर गया।

राहुल और नेहा थोड़ी देर किस करते रहे। फिर राहुल ने नेहा से कपड़ों की दीवार हटाने को कहा। नेहा जैसे ये ही सुनने को रुकी थी और झट से अपनी चूड़ियां ज्वेलरी पाजेब लहँगा चुनरी उतार दी, और सिर्फ ब्लाउज़ और लेगी पहने रह गई।

काजल आँखें फाड़े नेहा को देख रही थी, और सोचने पर मजबूर भी हो गई। हमारी भाभी तो बड़ी बिंदास है, खूब पटेगी संग हमारे।

राहल ने भी पैंट शर्ट उतार दी, सिर्फ अंडरवेर बनियान में रह गया, और फिर नेहा को बेड से नीचे उतारकर अपनी बाँहो में भर लिया, और कहा- “बहुत खूबसूरत हो नेहा तुम.."

नेहा- कहां से?

राहुल- आपका चेहरा।

नेहा- बस?

राहुल- आपकी आँखें।

नेहा- और?

राहल- आपके होंठ।

नेहा- और?

राहुल- और अभी देखना बाकी है।

नेहा- माना किसने किया देखने को?

राहुल ये सुनकर मुश्कुराये बिना ना रह सका, और नेहा का ब्लाउज़ खोलने लगा। राहुल नेहा की चूचियां देखकर “वाओ... नाइस कितने प्यारे हैं"

नेहा मस्ती के मूड में आ चुकी थी- “क्याsss?

राहुल- “ये आपकी चूचियां और... ..."

नेहा ये सुनते ही थोड़ी देर के लिए खामोश हो जाती है।

राहुल अपना हाथ चूचियों पर हल्का-हल्का फेरने लगता है, कहा- “और बस इन्हें चूमने को दिल कर रहा है..."

काजल अब तक गरम होनी शुरू हो गई थी। उसका एक हाथ अपने आप चूचियों पर पहुँच गया था।

राहल हल्का-हल्का अपना हाथ चूचियों पर फेरता जा रहा था। नेहा के निप्पल तनकर खड़े हो गये। बस फिर क्या था? राहुल ने झुक कर अपने होंठ निप्पल से लगा दिए।

नेहा सिहर सी गई- “आहह... इसस्स्स्श
 
उधर काजल का भी बुरा हाल था। ऊपर से टी-शर्टत उतार चुकी थी, और खुद भी अपनी चूचियां सहलाने लगीथी। अंदर का नजारा धीरे-धीरे हाट होता जा रहा था।

नेहा के निप्पल बड़ी ही मस्ती में पी रहा था, जैसे कोई बच्चा दूध पीता है। नेहा की सिसकियां काजल को और भड़का रही थीं

नेहा- “आअहह... सस्स्सी ... आअहह... आईई.. ओहहह... स्स्स्सी ... उम्म्म्म

...” कर रही थी।

राहुल नेहा को बेड पर लिटाकर लेगी उतार देता है, नेहा सिर्फ पैंटी पहने रह जाती है। राहुल नेहा की जांघे सहलाने लगता है और नेहा की जांघों को किस करने लगता है। फिर एक हाथ पैंटी में फँसाकर उसे भी उतार देता है। अब नेहा बिल्कुल नंगी हो चुकी थी। बिन कपड़ों के बेड पर लेटी नेहा को राहुल निहारता रहा।

नेहा- ऐसे क्या देख रहे हो?

राहुल- “अंदर की खूबसूरती... ऊपर से लेकर नीचे तक नंबर वन हो तुम..." और राहुल झुक कर अपने हाथ नेहा की नाभि पर फेरने लगता है।

नेहा भी अब गीली हो चुकी थी। नेहा का दिल कर रहा था काश... राहुल चूत को किस कर दे।

अब राहुल के हाथ चूत से टच हो चुके थे, और वो धीरे-धीरे चूत पर हाथ को फेरने लगा। नेहा का बुरा हाल हो चुका था, चूत पानी छोड़े जा रही थी। राहुल की उंगली भी पानी में भीग गई।

नेहा- "आअहह... आss आअहह... सस्स्स्सी ...” करने लगी।

राहुल ने एक उंगली चूत के छेद पर रखकर अंदर करनी चाही। चूत पहले से गीली थी। उंगली चूत में सरकती चली गई, राहुल धीरे-धीरे उंगली को अंदर-बाहर किए जा रहा था। नेहा की तड़प अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी

थी।

उधर काजल भी ये सीन देखकर पूरी गीली हो चुकी थी। अब काजल ने भी अपनी सलवार उतार फेंकी, और अपने हाथ से चूत को रगड़ने लगी। काजल को बड़ा सुकून मिला। काजल के मुँह से हल्की-हल्की सिसकियां निकलँ लगी- “आहह... सस्स्स्सी सस्स्सी ... अहह... सस्सीईए..."

काजल भी अपनी उंगली चूत के छेद पर रखकर अंदर करने की कोशिश करने लगी। मगर काजल की उंगली अंदर नहीं घुस रही थी। काजल हल्का सा जोर लगाती है तो हल्की सी उंगली अंदर घुसने लगी। एकदम काजल को दर्द का अहसास हआ। काजल- “उईईई... मान...” की और अपनी उंगली बाहर निकाल लेती है।

काजल ने अंदर झाँका की अब तक दो उंगलियां अंदर-बाहर होने लगी थीं। ऐसा लग रहा था जैसे नेहा को भी बड़ा मजा आ रहा है। नेहा की सिसकियां भी ऐसे ही लग रही थी- “अहह... अहह... आहह... अहह... उम्म्म्म ..."

काजल सोचने पर विवश हो गई।

नेहा को जरा भी दर्द नहीं हो रहा था। फिर राहल ने झुक कर अपने होंठ नेहा की चूत के होंठों से मिला दिए। नेहा की हालत खराब हो गई, बिन मछली सी तड़पने लगी। नेहा का पानी तगातार बहे जा रहा था, जिसे राहल बड़े मजे में स्वाद लेकर पी रहा था।

काजल को ये सब बड़ा अजीब लग रहा था।
 
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