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Incest घर की मुर्गियाँ

नेहा गाण्ड उठाकर चूत को राहुल के मुँह पर धकेलने लगी, और अपने हाथों को राहुल के बालों में फेरने लगी, जैसे कह रही हो- “कुछ करो राहुल.." नेहा अब मंजिल पर पहुँचने वाली थी।

नेहा- “आss ओईई सस्स्स... अहह... हाय कम ओन्न.." और एकदम नेहा का झरना बह निकाला। जिसे राहल बड़े प्यार से गटक गया। नेहा अब थोड़ी शांत पड़ गई थी। राहुल उठकर अपने बाकी के कपड़े उतारने लगा।

काजल बड़े गौर से को देख रही थी। उसे भी किसी चीज को देखने की ललक जागने लगी, और जब काजल की नजरें अपने भाई के पाइप पर गई तो हैरत से काजल की आँखें फटी रह गईं, बोल पड़ी- “ओ बाप रे.... ये क्या है? इतना बड़ा..."

राहुल भी पूरी तरह नंगा हो चुका था। नेहा भी तिरछी नजरों से राहुल के लण्ड को देख रही थी, और राहुल थोड़ा सा नेहा की तरफ को मुड़ता है, तो लण्ड नेहा के चेहरे से टच हो जाता है।

नेहा समझ जाती है राहुल क्या चाहता है?

राहुल- किस मी।

नेहा हल्का सा मुँह खोल देती है। राहुल फौरन लण्ड को मुँह में डालने लग जाता है। नेहा भी मुँह खोलती चली गई। राहुल का मोटा लंबा लण्ड नेहा के मुँह में आधा घुस चुका था।

काजल को बड़ी हैरत हो रही थी। काजल सोचने लगी लगता है- "हमारी भाभी, इस खेल की पुरानी खिलाड़ी है..."

और काजल भी ये सीन देखकर तड़पने लगी। फिर काजल ने अपनी उंगली फिर से चूत पर रगड़नी शुरू कर दी। इस बार चूत बहुत गीली हो चुकी थी। उंगली चूत की फांकों में घुसने लगी।

अंदर राहुल के धक्के बराबर स्पीड से चल रहे थे। तभी राहुल नेहा के मुँह से लण्ड खींच लेता है। लण्ड नेहा के मुखरस से पूरी तरह भीगा हुआ था और राहुल बेड पर ठीक नेहा की टांगों के बीच बैठ जाता है। लण्ड सीधा चूत के छेद पर टच हो जाता है।

काजल ये सीन बड़े ही गौर से देखने लगी- "कैसे घुसेगा इतना बड़ा इस छोटी सी जगह में?"

राहल लण्ड से चूत को सहलाने लगता है। उफफ्फ... नेहा की हालत बिन पानी मछली जैसी होने लगी। राहल यूँ ही चूत की फांकों पर लण्ड को फेरता रहा। नेहा के सब्र का बाँध टूटता जा रहा था।

नेहा- "ये क्या कर हो जी? मुझे कुछ-कुछ हो रहा है प्लीज़्ज़... कुछ करो...”

राहल अपने लण्ड को नेहा की चूत पर दबाने लगा।

नेहा थोड़ा राहुल को दिखाने के लिए बोली- “अहह... कुछ लगा लीजिए बहुत बड़ा है आपका..."

राहल उठकर तेल की शीशी ले आता है। तोड़ा तेल अपने लण्ड पर और थोड़ा नेहा की चूत पर लगाकर फिर से लण्ड को छूता है। भला अब लण्ड कहां रुकने वाला था। एक ही धक्के में आधे से ज्यादा घुस गया। नेहा को ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ, फिर भी राहुल को दिखना चाहती थी।

नेहा- “अहह... उईईई.. म्मर गईई.. बहुत दर्द हो रहा है, रुक जाओ प्लीज़्ज...”

राहुल- "बस हो गया..' और राहुल नेहा के होंठों को चूमने लगा और एक हाथ से चूचियां सहला रहा था, थोड़ी देर बाद राहुल बोला- “अब कैसा लग रहा है नेहा?"

नेहा- हाँ अब ठीक है मगर धीरे-धीरे करना।

राहुल धीरे-धीरे लण्ड को बाहर खींचता है, फिर अंदर घुसा देता है। नेहा का दिल कर रहा था की राहुल अपनी स्पीड तेज करे। मगर नेहा कह नहीं सकती थी।

नेहा की सिसकियां मजे वाली निकलने लगीं- आह्ह... आह्ह... आहह... आअहह... आहह... आहह... अहह..."

राहुल का लण्ड अब पूरा जड़ तक अंदर-बाहर हो रहा था। नेहा भी नीचे से हल्का-हल्का धक्का लगाने लगी। राहल के भी धक्के तेज होना शुरू हो गये। राहल को भी बड़ा मजा आ रहा था। रूम से अब फच-फच की आवाज आनी शुरू हो गई थी। राहल मंजिल की तरफ तेजी से बढ़ रहा था।

नेहा भी राहल को जकड़ने लगती है। नेहा अपनी गाण्ड राहल के लण्ड पर धकेलने लगी। अब दोनों एक साथ फारिग हो चुके थे।

उधर काजल भी वीर्य छोड़ चुकी थी। काजल को ये लाइव शो बड़ा ही मजेदार लगा। अभी काजल अपने रूम में जाने के सोची है थी की तभी राहुल फिर से नेहा की चूचियां चूसने लगता है। काजल को लगने लगा भइया ये खेल फिर से खेलेंगे।

राहुल का लण्ड दुबारा हाई हो जाता है। नेहा और राहुल ने 3 बार चुदाई का खेल खेला। रात के 3:00 बजे जाकर दोनों को नींद आई।
 
काजल ने भी पूरा खेल देखा, और काजल भी इस दौरान 4 बार झड़ चुकी थी। दूसरे दिन भी काजल से रुका नहीं गया। फिर रात को स्टोर में जा पहुँची। इस बार राहुल नेहा को डोगी स्टाइल में चोद रहा था।

नेहा- “आहह... आss सस्सीई... आह्ह... मजा आ रहा है... जोर से करो..." और ये सिलसिला कई दिन तक चलता रहा।

आज सनडे का दिन था। सुबह-सुबह नेहा के पास अजय का फोन आता है।

अजय- हेलो नेहा बेटी, कैसी हो?

नेहा- जी पापा ठीक है। वहां पर सब कैसे हैं?

अजय- बेटा यहां सब अच्छे हैं। सब तुझे ही याद करते हैं। आज समीर दिव्या को लेकर जयपुर आ रहा है। वापसी में तू उसके साथ आ जाना..."

नेहा- “जी पापा। आप इनसे बोल दीजिए.." और नेहा राहल को फोन पकड़ा देती है..."

राहुल- हेलो पापा गुड मार्निंग।

अजय- गुड मार्निंग बेटा। आज समीर दिव्या को लेकर जयपुर आ रहा है, 8-10 दिन के लिए नेहा को भेज देना।

राहुल- “जी पापा.." और फोन डिसकनेक्ट हो गया।

राहुल नेहा से- “आपके पापा 8-10 दिन के लिए बुला रहे हैं। मेरा तो तुम्हारे बिना दिल नहीं लगेगा।

नेहा- तो आप भी चलिए हमारे साथ।

राहुल- “तुम चलो, मैं आपके पीछे-पीछे आ जाऊँगा..."

राहुल और नेहा मुश्कुराने लगते हैं। राहुल नेहा के होंठों को चूम लेता है।

राहुल- आई लव यू मेरी जान।

नेहा- आई लव यू टू।

राहुल रूम से निकलकर अपने मम्मी पापा से समीर का नेहा को ले जाना का बोलता है।

तभी काजल बोलती है- "मम्मी, भाभी के साथ मैं भी जाऊँगी..."

मम्मी- अच्छा बेटी चली जाना। तुम्हारा दिल लग जायेगा वहां।

समीर दोपहर तक दिव्या को लेने सुसराल पहँचता है, तो समीर का बड़ा जोरदार स्वागत होता है। दोपहर का भोजन सुसराल में करके समीर नेहा की सुसराल पहुँचता है। और फिर रात 8:00 बजे तक समीर नेहा और काजल को लेकर नोयेडा के लिए निकल जाता है।

*****

*****
 
समीर होंडा सिटी कार रात के अंधेरे में 80 किलोमीटर की रफ़्तार से दौड़ाता जा रहा था। नेहा और काजल पिछली सीट पर बैठे थे।

रास्ते में काजल- जीजू गाड़ी किसी होटल पर रोकना, मुझे पानी चाहिए।

थोड़ी देर बाद एक होटल आता है। काजल गाड़ी से उतरती है- “जीज, मैं ले आती हँ.." और काजल पानी लेने पहुँचती है।

समीर- और मेरी प्यारी बहना, कैसी है तेरी सस

नेहा मुश्कुराते हुए- “बहुत अच्छी.."

समीर- और राहुल प्यार तो ठीक से करता है?

नेहा- "जी भइया, बहुत प्यार करते हैं। वो तो भेजने को मना कर रहे थे की 8-10 दिन कैसे रहूँगा? और बोल रहे थे की लो, मैं पीछे-पीछे लेने आ जाऊँगा..."

समीर- लगता है हमारी नेहा ने राहुल पर जादू कर दिया है।

नेहा- अच्छा जी... आपको दिव्या कैसी लगी?

समीर- बड़ी ही मस्त है, मजा आ गया।

नेहा- भइया टीना कैसी है? मेरे जाने के बाद आपसे मिली क्या?

समीर- वो तो तेरे जाने के बाद एक भी दिन घर नहीं आई।

नेहा- क्या? मुझे तो टीना से बात करने का टाइम ही नहीं मिला।

तभी काजल पानी लेकर आ जाती है, और आगे समीर के साथ वाली सीट पर बैठ जाती है। एक हाथ में चिप्स

का पैकेट लिए हुए थी।

समीर फिर से गाड़ी दौड़ाने लगता है। थोड़ी देर बाद नेहा को नींद की झपकी आने लगती है। थोड़ी देर बाद नेहा सीट पर ही सो जाती है।

काजल पीछे मुड़ कर देखती है, तो नेहा सो चुकी थी।

काजल- जीजू चिप्स खाओगे?

समीर- मैं तो ड्राइव कर रहा हूँ, तुम खाओ।

काजल अपने हाथ से समीर के मुँह की तरफ चिप्स का टुकड़ा करती है और समीर मुँह खोल देता है, और जैसे ही काजल समीर को चिप्स खिलाती है समीर अपने होंठों में काजल की उंगली दबा लेता है।

काजल मुश्कुराते हुए- “क्या बात है, मुझे भी खाने का इरादा है?"

समीर- अगर तुम्हें कोई इतराज ना हो तो?

काजल- "मुझे खाकर क्या मेरी जान लोगे?" और काजल फिर से एक और टुकड़ा समीर के मुँह में डालने लगती है। इस बार फिर समीर काजल की उंगली होंठों में पकड़ लेटा है। मगर इस बार काजल का उंगली छुड़ाने का कोई इरादा नहीं था।

समीर बड़े प्यार से काजल की उंगली चूसने लगा, और कहा- "बड़ी टेस्टी है..."

काजल- क्या?

समीर- चिप्स।

काजल मुश्कुराने लगी।

समीर- तुम क्या समझ रही हो?

काजल- और चाहिए चिप्स?

काजल थोड़ा समीर की साइड खिसक जाती है। समीर को लगता है काजल मस्ती के मूड में है, तो थोड़ा आगे बढ़ने में कोई हर्ज नहीं। इसलिये समीर गाड़ी के गियर बदलते हुए काजल की जांघों छू लेता है, और किश्मत तो देखो समीर की मस्ती-मस्ती में कब नोयेडा आ गया, पता ही नहीं चला। नेहा गाड़ी में अभी तक सो रात के 11:30 बज चुके थे।

काजल ने नेहा को उठाया- “भाभी चलिए, घर आ गया आपका..."

नेहा गाड़ी से बाहर निकली। समीर ने गाड़ी से उतर डोरबेल बजाई। अजय ने दरवाजा खोला, और समीर गाड़ी से सामान निकालकर गाड़ी पार्क करता है। फिर नेहा और समीर थोड़ी देर अजय और अंजली से बातें करके अपने रूम

काजल नेहा के साथ रूम में सोती है, और समीर अपने रूम में जाकर सो जाता है। आज सफर की थकान से समीर लेटते ही सो गया, और नेहा काजल भी।
 
सुबह सभी साथ में नाश्ता करते हैं

अजय- काजल बेटा तुमने तो कुछ लिया नहीं।

अंजली- काजल को आलू का परांठा दो।

काजल- नहीं अंकल, बस मैंने ले लिया।

अंजली- बेटा थोड़ा सा हलवा तो खा लो।

अजय नाश्ता करने के बाद दुकान चला जाता है, और समीर भी कंपनी जाने लगता है।

काजल- जीजू मैं भी आपके साथ चलती हूँ, संजना दीदी से मिल लूँगी।

फिर समीर काजल को लेकर कंपनी निकाल जाता है।

इधर नेहा टीना को फोन करती है- “हाय टीना कैसी है?"

टीना- हाय नेहा... मैं तो ठीक हूँ तू बता। तू तो सुसराल जाकर हमें भूल गई।

नेहा- नहीं यार रात 12:00 बजे आई हूँ।

टीना- अच्छा। चल यहीं आ जा। मम्मी भी नहीं हैं।

नेहा- चल पहुँचती हूँ। आँटी कहां गई हैं?

टीना-नानी की तबीयत ज्यादा खराब है, वही गई

नेहा टीना के पास चली गई।

इधर समीर और काजल कंपनी जा रहे थे। काजल बोली- "जीजू आइसक्रीम खिलाओगे?"

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समीर- "क्यों नहीं चलो...” और समीर एक माल में काजल को ले जाता है, और मकडोनल्ड में पहुँचता है। यहां पहले ही कई जोड़े

काजल और समीर भी एक कार्नर वाली टेबल पर बैठ जाते हैं।

समीर- बोलो काजल, आइसक्रीम के साथ और क्या चलेगा?

काजल- जीजू एक बर्गर।

समीर- “ओके.." और समीर आइसक्रीम और बर्गर ले आता है।

काजल और समीर आमने सामने बैठे आइसक्रीम खाते है। तभी काजल समीर की तरफ देखती है। मगर समीर की नजरें कहीं और थी। काजल नजरों का पीछा करती हुई बराबर वाली टेबल पर जाती है। एक लड़की ने बड़ी ही शार्ट स्कर्ट पहनी हई थी, आधे से ज्यादा बदन दिख रहा था और वो लड़की अपने हाथ से अपने बायफ्रेंड को आइसक्रीम खिला रही थी।

काजल- क्या देख रहे हो जीजू? तुम्हारे सामने खूबसूरत साली बैठी है और तुम देख भी नहीं रहे।

समीर- अरे... नहीं साली जी। मैं देख रहा हूँ की कैसे प्यार से दोनों आइसक्रीम खा रहे हैं?

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काजल- आपको भी ऐसे खानी है?

समीर- मन तो कुछ ऐसा ही कर रहा है।

काजल- “चलो तो आज तुम्हारे मन की करते हैं..." और काजल समीर की तरफ अपनी जूठी साफ्टी कर देती है।

समीर मुँह खोल देता है, समीर का चेहरा आइसक्रीम से सन जाता है। काजल मुश्कुराने लगती है।

समीर- काजल चलो फार्महाउस चलते हैं, वहीं पर आइसक्रीम खायेंगे।

काजल- ठीक है जीजू चलिये।

समीर एक आइसक्रीम ब्रिक ले लेता है, और दोनों फार्महाउस पहुँच जाते हैं। समीर काजल को लेकर बेडरूम में पहुँचता है, और दिव्या के कपड़ों की अलमारी खोलता है। दिव्या की कई नाइटी रखी थी। समीर काजल को देखता है।

काजल समझ जाती है समीर क्या चाहता है? काजल बोली- “जीजू मुझे इन कपड़ों को पहनाकर आइसक्रीम खिलानी है?"

समीर- हाँ साली जी।

काजल- फिर आपको भी साथ देना होगा।

समीर- “क्यों नहीं। मैं भी बस दो मिनट में चेंज करता हूँ..." और समीर हाफ लवर और बनियान लेकर बाथरूम में घुस जाता है, और अपने कपड़े उतारने लगता है। तभी समीर को लगता है कि रूम में काजल भी अपने कपड़े चेंज कर रही है, और समीर फौरन बाथरूम के दरवाजे से रूम में झंकता है।

ओह माई गोड.. काजल अपनी कमीज ऊपर खींचकर उतार रही थी। काजल का रंग एकदम दूध जैसा सफेद था, और फिर दिव्या की शार्ट नाइटी पहन लेती है, और जाने क्या सोचने लगती है। फिर नीचे से सलवार भी उतार देती है।

समीर को काजल की पैटी की झलक दिख जाती है। समीर के लण्ड में झटके आने शुरू हो जाते है। अनायास ही समीर लण्ड को मरोड़ने लगता है। काजल की जाँघ तक दिखने लगी थी। समीर हाफ लवर और बनियान पहनकर बाहर आ जाता है। दोनों की नजरें टकराती हैं।

समीर- वाउ... ब्यूटिफुल काजल?

उधर टीना और नेहा घर पर बातें कर रहे थे।

टीना- कैसी रही तेरी ससुराल?

नेहा- बढ़िया है, सब खूब प्यार करते हैं

AJ

टीना- क्या? सब कौन-कौन प्यार करता है तुझे?

नेहा- तू ना बिल्कुल पागल है। वो वाला प्यार तो सिर्फ राहुल ही करता है।

टीना- मैं तो कुछ और ही समझने लगी थी। वैसे कैसी रही तेरी सुहागरात? सील तो तेरी पहले ही टूट चुकी थी। शक तो नहीं हुआ राहुल को?

नेहा- नहीं यार ऐसा कुछ नहीं हुआ। मैंने थोड़ा बहुत दर्द का ड्रामा किया था। वैसे राहुल पूरे हफ्ते मुझे रात भर सोने नहीं देता था। मैं भी पूरा मजा लेकर करती थी।

टीना- वाह... नेहा तेरी तो ऐश हो गई।

नेहा- तू बता तेरी रातें कैसे कटी? सुना है जब से मैं गइ, तू मेरे घर भी नहीं गई।

टीना- बस मन नहीं किया राहुल और दिव्या के बीच में हड्डी बनने का। बस तेरे रबड़ के लण्ड का सहारा था

मेरे पास।

नेहा- क्या यार, जो मजा असली में है वो रबड़ के लण्ड में क्या होगा?

टीना- हाँ यार, वो तो है। रोज असली मिले मेरी ऐसी किश्मत कहां?

नेहा- रात भी डाला था चूत में रबड़ का लण्ड?

टीना- अभी तेरे आने से पहले बाथरूम में फारिग हो चुकी हूँ।

नेहा- चल यार तू आज मेरे पास रुक जाना। शायद तुझे असली लण्ड मिल जाय।

टीना- “देखू तेरी चूत की कैसी हालत कर दी है राहुल ने?” फिर टीना और नेहा में लेज़्बियन सेक्स शुरू होता है।
 
समीर फौरन आँखें बंद कर लेता है। काजल लरजते होंठों से समीर के गाल पर लगी आइसक्रीम को चाटने लग जाती है। समीर का तो लौड़ा खड़ा हो गया, और वो फौरन अपनी आँखें खोल लेता है काजल के होंठों में कंपन

सी हो रही थी। समीर की नजरें काजल से टकराती हैं, तो काजल एकदम झेंप जाती है।

काजल- जीजू देखो चेहरा साफ करवाना है तो आँखें बंद करो।

समीर- “अच्छा बाबा... और फिर से समीर आँखें बंद कर लेता है।

काजल अपने होंठों से समीर का चेहरा चाटकर साफ कर देती है- “लीजिए जीजू आपका चेहरा साफ हो गया... अब चलिए संजना दीदी के पास, देर हो रही है..."

समीर- साली जी, आपने ठीक से साफ नहीं किया। अभी तो यहां भी आइसक्रीम लगी है।

काजल- कहां?

समीर- “यहां.” और आगे बढ़कर काजल के होंठों को बंद कर देता है।

काजल बेचारी गूं-गूं करती झटपटाती रह गई और समीर काजल के होंठों का रस पीता रहा। लगभग 5 मिनट की चसाई ने काजल में भी जोश भर दिया। समीर ने इस बात को नोट किया की काजल अब विरोध नहीं कर रही थी। और इस मोके का फायदा उठना समीर जानता था।

समीर ने अपने हाथों का जादू काजल पर चलाना शुरू कर दिया। समीर का हाथ इस वक्त काजल को अपनी गिरफ्त में ले चुका था। काजल जैसे किसी और दुनियां में पहँच चुकी थी, आँखें बंद किए काजल अंजाने प्यार

को महसूस करने लगी। समीर के हाथ धीरे-धीरे काजल की गाण्ड को सहलाने लगते हैं।

समीर थोड़ी देर बाद अपने हाथों को कमर से होते हुए नीचे काजल के कूल्हे पर रख देता है। उफफ्फ... क्या गद्देदार साफ्ट मुलायम समीर को जाने क्या मिल गया की लण्ड एकदम कुतुब मीनार बन गया, और काजल

की अनछुई गुफा तक पहुँच गया।

काजल को भी जब ये अहसास हुआ तो एक हल्की सी सिसकी निकाल गई- “आईईई.. इसस्स्स..." शायद गुफा से पानी रिसना शुरू हो चुका था।

काजल भी अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी। अब काजल होंठों को चूसने में समीर का साथ देना चाहती थी। काजल ने जैसे ही अपने होंठों को खोलते हुए समीर के होंठों को चूसना चाहा, समीर ने एकदम से काजल को छोड़ दिया काजल समीर को ऐसे देखने लगी जैसे किसी ने उसके मुँह से निवाला छीना हो।

समीर जानता था की काजल पूरी तरह बस में आ चुकी है। चाहे तो आज ही काजल की सील तोड़ सकता है। मगर समीर ये काम जल्दबाजी में करना नहीं चाहता था। अभी तो काजल पूरा हफ़्ता यहीं रहेगी। समीर काजल को इतना तड़पाना चाहता था की काजल खुद ही कहे- "जीजू डाल दो लण्ड मेरी चूत में.."

काजल समीर को ऐसे देख रही थी जैसे कह रही हो- “क्यों तड़पा रहे हो जीज, भर लो बाँहो में..."

काजल- "चलिये..." और दोनों ने अपने कपड़े चेंज किए और समीर काजल को लेकर कंपनी

यूँ ही पूरा दिन गुजर जाता है। नेहा टीना को लेकर घर पहुँच गई।
 
शाम को विजय घर पहुँचता है तो देखा की घर पर ताला लटका हुआ है। विजय टीना को काल करता है- “हेलो टीना बेटी कहां हो?

टीना- हेलो पापा मैं नेहा के साथ हूँ।

विजय- बेटा घर की चाबी कहां है?

टीना- पापा बराबर में स्वाती आँटी के पास है। वहां से ले लो।

विजय- “ओके बेटा..." कहरर विजय फोन काट देता है और पड़ोस में स्वाती

के घर की बेल बजाता है। ट्रिंग-ट्रिंग। दरवाजा खुलता है। स्वाती ही दरवाजा खोलती है।

विजय- हेलो भाभीजी टीना घर की चाबी आपको देकर गई है?

स्वाती- जी भाई साहब। अभी लाती हूँ। भाभी नहीं आई?

विजय- नहीं उसकी माँ की हालत बहुत खराब है।

स्वाती अंदर से घर की चाबी लाकर विजय को देती है- "भाई साहब कुछ चाय ठंडा ले लो..."

विजय- नहीं बस थैक्स।

स्वाती- टीना बिटिया भी नहीं है खाना के लिए कैसे करोगे?

विजय- कोई बात नहीं भाभीजी, होटल से खा लूँगा।

स्वाती- अरे... भाई साहब आप हमारे होते हए होटल से खाओगे? मैं आपके लिए खाना भिजवा दूंगी। पड़ोसी होने

का इतना तो फर्ज बनता है।

विजय चाबी लेकर मुश्कुराता हुआ अपने दरवाजे की तरफ मुड़ जाता है। विजय सफर से पूरी तरह थक चुका था घर में घुसते ही अपने कपड़े उतारने लगा शर्ट पैंट बनियान और सिर्फ अंडरवेर पहने हुए बाथरूम में घुस जाता है। और जैसे ही नहाने के लिए शावर खोलता है, तो नाल में पानी ही नहीं था।

विजय- "ये टीना भी बहुत लापरवाह है, इसने पानी की टंकी भी नहीं भरी आज.." और विजय झुंजलाते हुए बाहर निकल जाता है। फिर सोचता है- “शायद टीना के अटैच बाथरूम में पानी हो? और विजय टीना के रूम में

पहुँचता है। देखा एक टब में पानी भरा हुआ था। विजय ने जल्दी-जल्दी अपने जिश्म पे पानी डाला। नहाने के बाद विजय अपने आपको बड़ा हल्का महसूस कर रहा था।

विजय बदन पोछने के लिए तौलिया देखने लगा। तभी विजय की नजर बाथरूम की सेल्फ पर रखे रबड़ के लण्ड पर चली गई। विजय आश्चर्य से देखने लगा। ये क्या है? और आगे बढ़कर उस रबड़ के लण्ड को अपने हाथों में ले लेता है

विजय- ओह माई गोड... ए क्या है? टीना ये सब्ब...”

विजय को बड़ा तगड़ा झटका लग चुका था। विजय का दिल मानने को तैयार नहीं था। नहीं नहीं, ये सब टीना नहीं कर सकती। टीना तो अभी बच्ची है। मगर फिर विजय के जेहन में सवाल उठता है- “ये बाथरूम तो सिर्फ टीना ही इश्तेमाल करती है। मगर ये आया कहां से टीना के पास?” सोच-सोचकर विजय का दिमाग खराब होने लगा
 
विजय- "मुझे इसका पता लगाना है..” विजय बाथरूम से निकलकर कपड़े पहनकर बाहर ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठ जाता है। विजय के मन में फिर से ढेर सारे सवाल आने लगते हैं। क्या मेरी बच्ची अब जवान हो गई है?

क्या टीना ने इसको अपने अंदर डाला होगा? क्या मुझे टीना से इस बारे में बात करनी चाहिए? विजय को जेहन में जाने कैसे-कैसे सवाल उमड़ रहे थे तभी दरवाजे पर दस्तक होती है विजय उठकर दरवाजा खोलता है।

गेट पर स्वाती खाने की थाली लिए खड़ी थी।

विजय- अरे... भाभी आपने क्यों कष्ट किया?

स्वाती- भाई साहब ये तो पड़ोसी होने के नाते हमारा फर्ज़ है।

विजय खाने की थाली ले लेता है।

स्वाती- आप खाना खा लीजिए, बर्तन बाद में ले जाऊँगी।

विजय- ठीक है भाभीजी।

विजय थाली लेकर सोफे पर बैठकर खाना खाने लगता है। खाना खाकर विजय अपने बेड पर लेट जाता है। मगर फिर से टीना का ध्यान आने लगता है। विजय के मन से टीना का ध्यान हट ही नहीं रहा था। विजय ने रूम

की लाइटें भी बंद कर ली, और जाने कब विजय को नींद आई होगी।

*****

*****
 
उधर काजल को संजना ने अपने पास रोक लिया था, और समीर के बिस्तर पर रात को टीन

थी।

टीना- भइया, बीवी आ गई तो बहन को भूल गये।

समीर- "ओ मेरी नटखट बहना, तुझे कैसे भूल सकता हूँ?” और फिर टीना ने अपने और समीर के कपड़े उतार फेंके।

टीना- भइया आज हफ्ते भर की कसर एक ही रात में निकाल दो।

समीर ने टीना का चलेंज कबूल किया, और टीना पर चढ़ गया। पहले थोड़ी चूत लण्ड की चुसाई। फिर टीना की टाँगें पकड़कर लण्ड को चूत के छेद पर रखकर बड़ा जोरदार धक्का मारा, तो लण्ड चूत की गहराई में समाता चला गया।

टीना चीखी- "आईईई... मर गईईई..."

समीर दे दनादन लण्ड अंदर-बाहर करता रहा। 15-20 धक्कों के बाद समीर ने टीना को डोगी स्टाइल बनाया

और फिर से लण्ड को चूत में घुसा दिया। आज समीर टीना को दिखना चाहता था चुदाई किसे कहते हैं।

टीना- “आहह... अहह... उम्म्म्म

... आईईई... बस्स-बस्स...”

फिर समीर ने टीना को अपनी गोद में लेकर लण्ड पर बिठा लिया, और लगा फिर से धक्के मारने। अब टीना बुरी तरह हाँफने लगी थी और झड़ भी चुकी थी। मगर समीर तो रुकने का नाम नहीं ले रहा था। समीर ने टीना

की रेल बना दी।

टीना- आह्ह... आब बस करो भइया। आज जान लोगे मेरी अहह... अहह..."

समीर- क्यों मजा नहीं आया?

टीना- “हाँ भइया, बहुत मजा आया बस अब और नहीं..." और समीर और टीना एक दूजे की बाहों में लिपटे सो जाते हैं।

सुबह 6:00 बजे नेहा समीर के रूम में आकर देखती है तो समीर और टीना एकदम नंगे एक दूजे से लिपटे सो रहे थे। नेहा टीना को उठाती है और अपने रूम में ले आती है। सुबह 8 बजे तक टीना नहा धोकर फ्रेश होती है।

टीना- “अच्छा नेहा, अब मैं चलती हूँ। घर पर पापा के लिए नाश्ता भी बनाना है." और टीना अपने घर के लिए निकल पड़ती है। थोड़ी देर बाद टीना घर पहुँचती है और डोरबेल बजाती है। विजय दरवाजा खोलता है तो सामने टीना खड़ी थी। विजय टीना को ऐसे देखता है जैसे आज पहली बार देख रहा हो।

विजय को ऐसे घर ना पहली बार देख रही थी। टीना पापा की नजरें अपनी छाती पर महसूस कर रही

थी। टीना- “क्या हुआ पापा ऐसे क्या देख रहे हो”
 
विजय को एकदम होश आता है- “ओहह... कुछ नहीं बेटी आ गई तू.."

टीना- “जी पापा...” और टीना अंदर आ जाती है।

विजय को आज तक टीना का पहनावा सेक्सी नहीं लगता था। वो तो टीना को बच्ची समझता था। आज विजय

की नजरें बार-बार टीना के उभारों पर जा रही थीं। टीना को बड़ा अजीब लग रहा था।

टीना- पापा चाय पीओगे क्या?

विजय- हाँ:

टीना किचेन में चली जाती है। चाय बनाते हुए सोचती है- “आज पापा को क्या हो गया? मुझे ऐसे क्यों देख रहे

सोफे पर बैठे हुए विजय भी सोचने लगा- “ये मुझे क्या हो रहा है? मैं टीना को किस नजर से देखने लगा? मुझे तो अपनी बच्ची को इस दलदल से निकालना है, और मैं खुद भी इसी नजर से देखने लगा.." विजय अपने आपको नार्मल करने की कोशिश करता है- “टीना से इस बारे में कैसे बात करूं?” विजय ये सोच रहा था तभी टीना चाय बनाकर लाती है।

टीना- लीजिए पापा चाय पीजिए।

विजय चाय पीने लगता है। टीना सामने बैठ जाती है।

टीना- पापा, मम्मी कब तक आयेंगी?

विजय- बेटा, अभी कुछ नहीं मालूम कितने दिन लग जायें? तेरी नानी की तबीयत ज्यादा खराब है।

टीना- डाक्टर क्या कहते हैं"

विजय- फेफड़ो में इन्फेक्सन हो गया है। और हाँ अब तू बड़ी हो गई है, घर की जिम्मेदारी संभाल। कल को तेरी

शादी भी होगी। रोज-रोज नेहा के पास मत रुका कर।

टीना- जी पापा।

विजय चाय पीने लगता है;

टीना को आज अपने पापा में बड़ा चेंज लग रहा था- "पापा आपका लंच तैयार कर दूं?”

विजय- नहीं, आज नहीं जाऊँगा। मेरी तबीयत ठीक नहीं है।

टीना- क्या हुआ पापा।

विजय- बेटा कमर में दर्द हो रहा है।

टीना- तो पापा आप डाक्टर से दवा ले लीजिए।

विजय- बेटा मेरी अलमारी में पेनकिलर टैबलेट रखी है, ले आओ।

टीना- “जी पापा." कहकर टीना विजय के रूम में चली गई, और अलमारी खोलकर देखती है। अलमारी में कई डीवीडी भी रखी थी और एक टैबलेट का पत्ता भी रखा था। टीना टैबलेट उठा लेती है, और किचेन से एक ग्लास पानी लेकर पापा को टैबलेट देती है।

विजय टैबलेट खा लेता है।

टीना- पापा आप बेड पर लेटे जाओ, मैं आपकी कमर पर मूव देगा देती हैं।

विजय सोफे से उठकर रूम में जाकर बेड पर उल्टा लेट जाता है। टीना अपने रूम से मूव लेकर आ गई। विजय अभी तक नाइट ड्रेस में ही था, लवर और टी-शर्ट। टीना आकर बेड के किनारे पर विजय की टांगों के पास बैठ गई, और पापा की टी-शर्ट को ऊपर करके मूव को कमर पर लगाकर अपने हाथों से मलने लगी।

विजय को टीना के हाथों का स्पर्श फिर से बहकाने लगता है। टीना धीरे-धीरे मूव की मालिश कर रही थी और विजय में उत्तेजना बढ़ रही थी।

विजय- बेटा थोड़ा और ऊपर भी लगा दो।

टीना टी-शर्ट और ऊपर सरकाती है और थोड़ी मव कमर से ऊपर लगाकर मलने लगती है। अब विजय की पूरी कमर नंगी हो चुकी थी और टीना ऊपर तक मूव की मालिश कर रही थी।
 
विजय की उत्तेजना से बुरा हाल था। उल्टे लेटे हुए लण्ड को जगह ही नहीं मिल रही थी। विजय अपने आपको बड़ा अनकंफर्टेबल महसूस करने लगा। ये तो शुकर था विजय उल्टा लेटा हुआ था, नहीं तो बिना अंडरवेर के लण्ड लवर में बिल्कुल तंबू बना देता।

विजय- बस बेटा अब रहने दो।

टीना- “जी पापा, आपके लिए नाश्ते में क्या बनाऊँ?"

विजय- सैंडविच और एक ग्लास दूध ले आ।

टीना- "जी पापा अभी लाई..." और टीना बेड से उठकर किचेन में चली गई।

विजय जल्दी से सीधा लेट जाता है। आह माई गोड... विजय का लण्ड एकदम लवर में खंबे के सामान खड़ा था। विजय अपने हाथ से लण्ड को बैठाने की कोशिश करने लगा। मगर लण्ड तो आज बैठने का नाम ही नहीं ले रहा

था। विजय चाहकर भी टीना का ख्याल दिल से नहीं निकाल पा रहा था। विजय की समझ में नहीं आ रहा था की टीना से किस तरह ये बात छेड़े?

तभी टीना नाश्ता लेकर आ गई।

विजय टीना के खयालों में इतना खो गया था की उसे अपनी हालत का भी होश ना रहा।

टीना ट्रे को जैसे ही बेड पर रखी की उसकी सीधी नजर पापा के तंबू से जा टकराई। टीना ने जब तंबू की हालत देखी तो टीना का तो दिल धड़कना ही भूल गया। एकदम जैसे टीना को झटका लगा हो, और टीना नाश्ते की ट्रे रखकर रूम से बाहर जाने लगी।

तभी विजय ने टीना को आवाज लगाई- "रुको बे

कुछ जरूरी बात करनी है..."

टीना को पलटने में बड़ी झिझक हो रही थी। टीना नजरें नीचे किए हुए- “जी पापा..."

विजय सैंडविच खाते हए टीना की तरफ ही देख रहा था। विजय अपने लण्ड की हालत भी भूल चुका था। टीना के लिए बेड पर थोड़ी जगह देता है- “यहां बैठो मेरे सामने.."

टीना पापा के बिल्कुल सामने बैठ जाती है, और सोचने लगती है- “पापा को मुझसे ऐसी क्या बात करनी है?"

विजय उठकर नाश्ते की ट्रे को टेबल पर रखता है और फिर टीना के सामने बैठ गया। फिर विजय टीना से बातों

का सिलसिला शुरू करता है।
 
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