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Incest घर की मुर्गियाँ

टीना- देख तो सही ट्राई करके।

नेहा ने नाइटी लेकर ट्रायल रूम में चेंज की। क्या मस्त लग रही थी नेहा भी।

टीना- नेहा, आज तो जरूर बिजली गिरा दोगी।

शिवांगनी- “एस मेम यू अरे वेरी हाट। इस रूप में आपको देखकर आपके बायफ्रेंड का क्या हाल होगा?" और दोनों सेक्सी ठहाका लगाने लगे।

टीना- मेम इसे भी पैक कर दो।

शिवांगनी- “और कुछ देखना चाहेंगी? बड़ी सेक्सी ब्रा पैंटी के सेट आये हुए हैं.."

टीना- अब हमसे ट्राई नहीं होगा।

शिवांगनी- आप घर जाकर ट्राई कर लेना। अगर फिटिंग ना आए तो चेंज भी कर सकती हो।

टीना- नेहा तू जाकर अपने पापा से पैसे ले आ, तब तक मैं और पसंद करती हैं।

नेहा अजय से पैसे ले आई, और दोनों ने खूब सारी शापिंग कर ली। दोनों दुकान से बाहर निकलते हैं।

नेहा- टीना शुकर है आज तेरे पापा दुकान पर नहीं थे।

टीना- चल आज रात समीर पर बिजली गिरायेंगे।

नेहा- ना बाबा ना... तू ही गिराना समीर पर बिजली। मुझे तो डर लगता है।

टीना- क्या हुआ, कैसा डर?

नेहा- मैंने भइया का वो देख लिया था। बाप रे बाप... मेरी तो सोचकर ही रो काँपती है। कैसा काला नाग की तरह लहरा रहा था।

टीना- “तू तो एकदम ढक्कन है। तुझे कुछ पता भी है? जितना बड़ा केला होता है, उतना ज्यादा टेस्टी होता है। तू एक काम कर, आज रात मैं तेरे यहां रुक जाती हैं, और रात को समीर का केला टेस्ट करूँगी। तू दरवाजे से देखना लाइव की कैसे खाया जाता है केला?"

नेहा- तू तो ऐसे बोल रही है जैसे तूने बहुत केले खाए हैं।

टीना- ऐसा ही समझ ले। अब ये मत पूछना किसका केला खाया है?

नेहा- अच्छा मेरी माँ नहीं पूछती।

टीना- यार कुलफी तो खिला दे सुबह से कुछ नहीं खाया।

नेहा सामने ठेले पर पहुँचकर दो कुलफी लेकर आई। टीना सेक्सी स्टाइल में चूस-चूसकर कुलफी खाने लगी। कुलफी वाला भी टीना को देखता रह गया। उससे भी ऐसा लग रहा था, जैसे टीना लण्ड चूस रही हो। तभी टीना की नजर ठेले वाले की पैंट पर चली गई, जहां एक बड़ा सा तंबू बन चुका था।

टीना ने इशारे से नेहा को दिखाया। नेहा टीना को घुरती हुई हाथ पकड़कर घर ले आई।

नेहा- तेरा बस चले तो उस ठेले वाले का भी केला चूस ले।

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naik wrote: ↑ 30 Mar 2020 23:25

fantastic update brother keep posting

waiting your next update
 
विजय की दुकान पर कुछ देर बाद विजय पहुँचता है।

शिवांगनी- अरे... सर आप थोड़ा पहले आ जाते तो?

विजय- क्यों क्या हुआ?

शिवांगनी- सर, अभी-अभी क्या कस्टमर आए थे? आपकी तो लाटरी लग जाती देखकर। क्या मस्त पटाका थी।

विजय- ऐसा क्या देख लिया तूने उनमें?

शिवांगनी- सर, उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे की आक्ट्रेस हों, और ऐसे हाट इनेरवेर ले गई हैं। जो

भी उन्हें उस रूप में देख लेगा बिना टच करे खल्लास हो जायेगा।

विजय- यार तेरी बातों ने तो मेरा राकेट खड़ा कर दिया।

शिवांगनी- अरें... सर क्यों फिकर करते हो? मैं तो आपके लिए हर वक्त उपलब्ध हूँ। मगर आपको तो कच्चे आम

खाने हैं।

विजय- अभी तो इस राकेट तू ही शांत कर दे, कच्चे आम फिर कभी खा लेंगे।

शिवांगनी- "चलिये सर, ट्रायल रूम में आपके राकेट की चिंगारी शांत कर दं.." और विजय ट्रायल रूम में गया तो शिवांगनी घटनों के बल बैठ गई। जींस की बेल्ट खोलकर राकेट बाहर निकाल लिया और जल्दी से मुंह खोलकर

गप्प।

विजय- “आहह... शिवांगनीईई..."

शिवांगनी लण्ड चूसने में माहिर खिलाड़ी बन चुकी थी। विजय का जब भी राकेट तैयार होता, शिवांगनी उसमें सफर करने पहुँच जाती। अभी भी पूरा राकेट शिवांगनी को सैर करा रहा था अंदर-बाहर अंदर-बाहर।

कैसी ठंडक मिली विजय का राकेट को चाँद पर पहुँचकर। शिवांगनी भी पूरा लावा गटक गई।

*****

*****
 
समीर आफिस में बैठा फाइलें देख रहा था। मगर आज समीर का मन काम में बिल्कुल नहीं था। वो आज छुट्टी लेना चाहता था। अभी सिर्फ दिन के 12:00 ही बजे थे। समीर कुछ सोचता हुआ संजना के रूम की तरफ चल पड़ा।

समीर- मे आई कमिन में?

संजना- आओ आओ समीर।

समीर अंदर आया तो दिव्या भी वहीं बैठी थी। उफफ्फ... समीर तो बस दिव्या को देखता रह गया।

संजना- क्या बात है?

समीर- जी मेम आज काम में मन नहीं लग रहा है। छुट्टी कर लूँ?

संजना- तबीयत तो ठीक है तुम्हारी?

समीर- जी मेम।

संजना- एक काम करोगे?

समीर- जी मेम।

संजना- गाड़ी चलानी आती है तुम्हें?

समीर- हाँ जी।

संजना- फिर तुम ऐसा करो दिव्या को जयपुर छोड़ आओ।

समीर- जयपुर?

संजना- हाँ हमारा खानदानी घर वहीं है। वहां पर मेरी माँ और पिताजी, चाचा की फेमिली रहती है। दिव्या तू समीर के साथ चली जा। माँ से बोल देना की मैं कुछ दिन बाद वक्त निकालकर मिलने आऊँगी।

दिव्या- "ओके दीदी। चले मिसटर समीर..."

समीर- "मेम, मैं घर पर बोल दूं। हो सकता है वापसी में रात हो जाय..” कहकर समीर ने घर फोन मिलाया।

नेहा ने फोन रिसीव किया।

समीर- नेहा, माँ से बोल देना मैं कंपनी के कम से जयपुर जा रहा हूँ। हो सकता है वापसी में देर हो जाय।

नेहा- भइया जल्दी आने की कोशिश करना।

टीना भी साथ में थी। टीना बोली- “बेड़ा गर्क आज के प्लान का."

समीर होंडा सिटी कार में दिव्या को लेकर निकल चला। दिव्या पिछली सीट पर बैठी शीशे से बाहर झाँक रही थी। समीर शीशे से दिव्या को बार-बार देखता। यूँ ही कार में खामोशी थी। तभी समीर को राजा हिन्दुस्तानी का वो सीन याद आया, और समीर ने भी अपनी आवाज में गाना गुनगुनाया।

समीर- "आई हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनके, मेरे साथ यूँ ही रहना तुम प्यार प्यार बनके...” और फिर चुप।
 
समीर होंडा सिटी कार में दिव्या को लेकर निकल चला। दिव्या पिछली सीट पर बैठी शीशे से बाहर झाँक रही थी। समीर शीशे से दिव्या को बार-बार देखता। यूँ ही कार में खामोशी थी। तभी समीर को राजा हिन्दुस्तानी का वो सीन याद आया, और समीर ने भी अपनी आवाज में गाना गुनगुनाया।

समीर- "आई हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनके, मेरे साथ यूँ ही रहना तुम प्यार प्यार बनके...” और फिर चुप।

दिव्या- बहुत अच्छा गाते हो, और सुनाओ कुछ।

समीर- क्या सुनाऊँ?

दिव्या- जो भी तुम्हें अच्छा लगे।

समीर- आपको भी साथ देना होगा।

दिव्या- कोशिश करूँगी। तुम सूनाओ पहले।

समीर- मैंने सोच लिया कुछ भी हो यार, मैं तो करूँगा तुमसे ही प्यार। अब कुछ आप भी सुनाओ?

दिव्या- ओके। यूँ ही काट जायेगा सफर साथ चलने से, की मंजिल आयेगी नजर साथ चलने से।

समीर- मेरा दिल भी कितना पागल है ये... प्यार तो तुमसे करता है, पर सामने जब तुम आते हो कुछ भी कहने से डरता है।

दिव्या- “हो गया है तुझको तो प्यार सजना, लाख कर ले तू इनकार सजना, है ये प्यार सजना.." और कहा समीर रोको गाड़ी मझे फ्रंट सीट पर बैठना है। समीर का जादू चल गया था शायद। दिव्या आगे समीर से चिपक कर बैठ गई।

दिव्या- बहुत मजा आ रहा है समीर। अब तुम्हारी बारी है सुनाओ।

समीर- "भीगे होठ तेरे प्यासा दिल मेरा, कभी मेरे साथ कोई रात गुजार, तुझे सुबह तक मैं करूं प्यार.." और दिव्या पर समीर का नशा चढ़ने लगा।

दिव्या- “हमको सिर्फ तुमसे प्यार है, हमको सिर्फ तुमसे प्यार है। कह रही है दिल की बेखुदी बस तुम्हारा इंतजार

समीर- छू लेने दो नाजुक होंठों को कुछ और नहीं जाम है ये, कुदरत ने जो बख्शा है सबसे हँसी इनाम है ये।

दिव्या- धक-धक करने लगा, जियरा डरने लगा। सैंयां बनियान छोड़ ना कच्ची कलियां तोड़ ना।
 
समीर- "दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी हया?" और समीर ने हिम्मत करके दिव्या के हाथों में अपने हाथ रख दिए- “दुल्हन तू दूल्हा मैं बन जाऊँगा, मेरा इंतजार करना बारात लेकर आऊँगा...'

दिव्या भी प्यार का इजहार करना चाहती थी, बोली- "काटे नहीं कटते दिन ये रात कहानी थी। तुमसे जो दिल

की बात लो आज कहती हूँ- आई लव यू आई लव यू..” और दिव्या समीर पर झुकती चली गई, सिर समीर के कंधे से टिका लिया

और यूँ ही दोनों में प्यार ने जन्म ले ही लिया। एक दूसरे का फोन नंबर लिया, और समीर दिव्या से विदा लेकर अपने घर के लिए निकल पड़ा। 100 किलोमीटर का रास्ता दिव्या की याद में कब काट गया पता ही नहीं चला।

समीर ने डोरबेल बजाई। नेहा और टीना दोनों रूम में मस्ती कर रही थीं।

टीना- देख तेरा भाई आ गया शायद, जा खोलकर आ।

नेहा- इस हालत में जाऊँ?

टीना- मैं जाऊँ?

नेहा- हाँ तू ही जा।

टीना ने नेहा को आँख मारकर सेक्सी स्माइल दी और दरवाजा खोलने

समीर- टीना तुम?

टीना- जी भइया, नेहा ने रोक लिया था।

समीर अपनी जीन्स का उभार सहलाता

"नेहा कहां है?"

टीना- वो तो कब की सो चुकी है। खाना लगाऊँ भइया?

समीर- "नहीं रहने दे। मैंने रास्ते में होटल से खा लिया था..." फिर समीर टीना की चूचियां घूरता हआ- "मम्मी पापा भी सो गये?"

टीना- जी भइया।

समीर- तुझे भी नींद आ रही है क्या?

टीना- नहीं तो, क्यों?

समीर- बस ऐसे ही मेरे रूम में चल थोड़ा बातें करेंगे।

टीना- "ओके भइया चलिए..." और दोनों समीर के रूम में पहुँच गये।

समीर- टीना आज तो बड़ी हाट लग रही हो।

टीना- थॅंक यू भइया, आप भी तो एकदम हाट हो।

समीर- मैं तुझे कहां से हाट लग रहा हूँ?
 
समीर- टीना आज तो बड़ी हाट लग रही हो।

टीना- थॅंक यू भइया, आप भी तो एकदम हाट हो।

समीर- मैं तुझे कहां से हाट लग रहा हूँ?

टीना समीर को ऊपर से नीचे तक तिरछी निगाहो से देखती है और अपनी नजर कुछ पल के लिए जीन्स के उभार पर रोकती है, और कहती है- “भइया, आप तो ऊपर से नीचे तक हाट हो... और मैं तुम्हें कहां से हाट लग रही हूँ?"

समीर भी मस्ती के मूड में था, कहा- "मुझे तुम बताओ, कहां से हाट लगती हो?"

टीना- बताइए ना।

समीर- "ऐसे नहीं..” और समीर ने टीना का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया, और अपना हाथ टीना के चेहरे पर फेरते हुये- “तुम्हारी ये आँखें और ये गुलाबी-गुलाबी गाल, और ये गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठ, और ये शुराहीदार गर्दन और... और... और ये दो पहाड़ की तरह तनी हुई दो चोटियां... और ये पतली कमर और... और ये थरथर..ती नाभि और... और... ..."

टीना समीर का हाथ पकड़ लेती है- “बस बस.."

समीर- इस गुफा की गहराई कितनी हाट होगी?

टीना इतनी बोल्ड होने के बावजूद शर्मा गई- “भइया तुम तो बड़ी पहुँची चीज हो... मैं तो तुम्हें ठक्कन समझती थी...”

समीर- ये ठक्कन क्या होता है?

टीना- अनाड़ी।

समीर- "अभी दिखाता हूँ तुझे अपना ठक्कन..." और समीर ने टीना को अपनी तरफ खींचकर किस कर लिया।

टीना भी शायद यही चाहती थी, और ये सब दरवाजे से कोई और भी देख रहा था। जिसका टीना को भी पता

था। टीना भी समीर से पूरी तरह लिपट गई।

समीर- बड़ी मस्त चीज हो तुम।

टीना- आप ही नहीं देखते हो, हम तो कब से तड़प रहे हैं आपके लिए।

समीर- इस बारे में नेहा को कुछ पता नहीं चलना चाहिए।

टीना- ओके भइया।

समीर ने टीना की टी-शर्ट ऊपर सरका दी, बिना ब्रा की चूचियां आजाद हो गई- “उफफ्फ... टीना कितनी हाट है तेरी..."

टीना- तो ठंडा कर दो ना?

समीर अपने हाथों से टीना के छोटे-छोटे निप्पल मसलने लगा।

टीना सिसकारी लेने लगी- "हाय भइया उफफ्फ.. इसस्स्स्स

... उम्म्म्म

... आआआ...

समीर से रहा नहीं गया तो अपने होंठ चूचियों के निप्पल से लगा लिए और चूसने लगा। एक हाथ पैंटी के अंदर पहुँच गया।

टीना तो तड़प गई।

उधर नेहा को ये सीन देखकर पैंटी में गीलापन महसूस होने लगा, और नेहा से खड़ा नहीं हुआ गया उसने वहीं नीचे बैठकर अपनी पैंटी में हाथ डाल दिया। उफफ्फ।

टीना के चेहरे पर सेक्सी स्माइल दौड़ गई, और उसने समीर का लण्ड दबोच लिया- भइया अपने केले को बाहर निकालो, मुझे टेस्ट करना है.." और टीना नीचे बैठ गई।

जब केला बाहर निकाला तो टीना की आवाज निकली- “उफफ्फ... इतना बड़ा केला... बाप रे बाप... ये तो जान ही ले लेगा..."

समीर- चूस ले अब चूसने से थोड़े तेरी जान चली जायेगी?

टीना ने मुँह में भरना चाहा। मगर सिर्फ टोपी टोपी ही अंदर ले पाई टीना, और टीना बड़े ही प्यार से ब्लो-जोब करने लगी। समीर की आँखें बंद हो चुकी थीं। वो बंद आँखों से दूसरी दुनियां की सैर कर रहा था।

नेहा की उंगली ये सब देखकर चूत में आधी घुस चुकी थी। नेहा का भी दिल करने लगा काश मैं भी केला टेस्ट कर लेती... और नेहा ने ढेर सारा पानी उड़ेल दिया। फिर एकदम शांत होकर नेहा जमीर पर गिर गई।

टीना जितना मुँह खोल सकती थी, खोलकर मुँह में भर लिया और समीर ने भी अब टीना के बाल पकड़ लिए

थे। समीर भी चाहता था अब जल्दी से फारिग होना, इसलिये समीर ने टीना के मुँह की चुदाई शुरू कर दी, 4-5 धक्कों में पिचकारी निकल गई।

टीना तो इस स्वाद को पहले भी गटक चुकी थी, आज समीर का गटक गई।

समीर- शांत हो चुका था।

टीना की आग अभी शांत नहीं हुई थी। इसलिये बोली- “भइया यहां भी आग लगी है कुछ करो प्लीज़्ज़..."

समीर- “इससे डाल दूं..." अपना लण्ड लहराते हुए कहा।

टीना- कुछ भी डाल दो भइया, बस ये आग बुझा दो।

समीर टीना की चूत पर झुकता चला गया। अपने होंठों को चूत की दरार से लगा दिए। चूत कितनी गीली हो चुकी थी। समीर रस चूसने लगा।

टीना को ऐसा मजा कभी नेहा से नहीं मिला था। समीर की जीभ दो इंच तक अंदर घुस रही थी। क्या सीन देख रही थी नेहा? कभी पार्न मूवी नहीं देखी थी, आज पूरी लाइव टेलीकास्ट देख लिया। टीना ने भी पानी का पंप चला दिया। नेहा वहां से उठकर चली गई।
 
दोनों एक दूसरे पर गिर गये। थोड़ी देर में टीना भी नेहा के रूम में चली गई।

टीना- कैसा लगा शो?

नेहा- मस्त मजा आ गया।

टीना- मेरी जान देखने से कुछ नहीं होता। एक बार तू भी चूसकर देख।

नेहा- नहीं, मैं भइया के साथ नहीं कर सकती।

टीना- फिर किसका केला चूसेगी तू? रोहित को बुला ले किसी दिन। मैं तो आज तेरे भाई का केला इस सुरंग में डालने की सोच रही थी।

नेहा- “क्या, तू पागल तो नहीं हो गई? देख तो सही भइया का साइज और अपना साइज... क्या कहीं चूहे के बिल में भी हाथी चला जाता है?"

टीना- मेरी जान, किसी दिन उस हाथी को अपने बिल में ना लिया तो मेरा नाम टीना नहीं।

नेहा- चल सो जा इस बारे में फिर कभी बात करेंगे।

*****

*****
 
सुबह 6:00 बजे अजय जल्दी उठकर छत पर टहलने लगा, और बार-बार टीना को देख रहा था। उससे लग रहा था टीना उसकी वजह से ही रुकती है। मगर आज टीना की आँख नहीं खुली। अजय से रहा नहीं गया और अजय नेहा के रूम पा। शुकर था दरवाजा बंद नहीं था। अंदर का नजारा देखकर अजय के लण्ड में और तनाव आ गया। दोनों बेड पर अधनंगी हालत में लेटी थी।

अजय ने धीरे से टीना को हिलाया। टीना की आँख ख ई और अजय पर नजर चली गई। अजय ने उंगली से बाहर आने का इशारा किया, और टीना धीरे से उठकर बाहर आ गई।

टीना- जी अंकल?

अजय- केला चूसोगी?

टीना- अंकल चोरी-चोरी मजा नहीं आता। केला खिलाना है तो आज घर आ जाना। मैं मम्मी को शापिंग के लिए भेज दूंगी।

अजय- ओहह... मेरी जान फिर तो मजा ही आ जायेगा। तू केला खाना, और मुझे आम चुसवाना।

टीना- "अरे... अंकल आप आइए तो आज मैं तुम्हें हंडिया वाला मक्खन भी चटाऊँगी.."

अजय ने टीना को किस कर लिया। टीना भी साथ देने लगी।

अजय- बड़ी ही मस्त चीज है तू।

टीना- अंकल यहां आँटी आ सकती हैं।

अजय- चल फिर छत पर चलते हैं।

टीना की नींद अभी पूरी नहीं हुई थी इसलिए कहा- “यहां नहीं, आज तो दिन में मेरे घर आना वहीं."

फिर सबने मिलकर नाश्ता किया। अजय और समीर घर से निकाल चुके थे।

टीना- अच्छा नेहा, अब मैं भी चलती हूँ।

नेहा- “यार मैं भी चलती हूँ। अकेले में मैं भी बोर हो जाती हूँ..” फ़ि मम्मी से कहा- “मम्मी, मैं टीना के साथ जा रही हूँ.."

अंजली- कभी घर के काम भी कर लिया कर। पता नहीं तुम दोनों सुसराल में कैसे करोगी?

नेहा- अरे... माँ क्यों टेन्शन लेती हो? सब हो जायेगा।

अंजली- तुम दोनों यहीं रुक जाओ। मुझे और किरण को बाबा का कीर्तन सुनने जाना है।

नेहा- ठीक है मम्मी।

टीना- मगर नेहा मुझे तो एक जरूरी काम है।।

नेहा- ऐसा क्या जरूरी काम है तुझे? .

टीना कुछ बोल ना सकी, और अंजली ने किरण को फोन कर दिया। दोनों बाबा का भजन सुनने चली गई।

टीना- यार यहां पड़े-पड़े क्या करें?

नेहा- कोई गेम खेलते हैं।

टीना- नहीं यार, आज तो कुछ अलग करने की सोच रही थी।

नेहा- क्या मुझे भी बता?

टीना- समीर को बुला लूँ?

नेहा- देख ट्राई करके।

टीना ने समीर को काल किया- “हेलो समीर भइया..."

समीर- हाँ बोल टीना क्या बात है?

टीना- “मेरी जान... आज तो दिल नहीं लग रहा। रात ऐसी चिंगारी सुलगाई तुमने की तुम्हारे बिना एक आग सी भड़क चुकी है। आकर बुझा दो..."
 
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