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Guest
फिर टीना के बारे में सोचने लगी। जब दिन में टीना के पास फोन आया था, वो पापा की काल थी। पापा ने टीना को फोन क्यों किया? और फिर टीना ने हड़बड़ा कर डिसकनेक्ट भी कर दिया था? कही पापा और टीना में तो कुछ? नहीं नहीं, ये मैं क्या सोचने लगी। ये नहीं हो सकता। मगर नेहा का दिल बोल रहा था टीना ऐसा भी कर सकती है। कहीं आज टीना ने पापा से तो मुँह काला तो नहीं कर लिया? तभी इसलिए लड़खड़ा कर चल रही थी? टीना कुछ सोचकर बेड से उतरी, और रूम की सारी लाइटें जला दी, और अपने रूम का अच्छी तरह मुआइना करने लगी। शायद कोई क्लू मिल जाय टीना का?
मगर ऐसा कुछ नेहा को नजर नहीं आया। बेड की चादर वगेरह भी सलीके से बिछी हुई थी। टीना कुछ सोचकर अपने रूम से बाहर आई। अजय छत पर टहल रहे थे और अंजली किचेन में थी। नेहा अजय के बेडरूम में पहुँच गई। अजय के रूम की हालत ज्यादा अच्छी नहीं थी। नेहा शायद कुछ ढूँढना चाहती थी। तभी नेहा को चादर पर एक गीला सा धब्बा नजर आ गया। नेहा का दिल धड़क उठा।
नेहा मन में- “कुतिया है पूरी टीना... इसने तो मेरे बाप को भी नहीं छोड़ा..." और नेहा बेड के चादर का मुआइना सा कर रही थी। तभी एक छोटा सा खून का धब्बा भी नजर आ गया। अब नेहा को पूरा कन्फर्म हो चुका था की पापा ने आज टीना की सील्ल तोड़ दी है, और नेहा अपने रूम में आकर टीना को काल करती है।
नेहा- हेलो टीना कैसी है? क्या हुआ तुझे?
टीना- कुछ नहीं यार, पैर में मोच आ गई है।
नेहा- कोई और बात तो नहीं?
टीना- नहीं नहीं और कोई बात नहीं है।
नेहा- तू मुझसे कुछ छुपा तो नहीं रही?
टीना- भला में क्या छुपाऊँगी तुझसे?
नेहा- चल रखती हूँ बाइ।
नेहा मन ही मन- “अरे कुतिया है टीना ऐसे कुछ नहीं बातायेगी। हरामजादी ने पापा के लण्ड से सील तुड़वा ली.."
मगर नेहा परेशान थी। आज नेहा के अंदर एक ज्वाला भड़क रही थी टीना के लिए। नेहा ने फैसला किया अभी टीना के घर जाने का। नेहा ने मम्मी से बोला- "मम्मी, मैं टीना को देखने जा रही हैं। रात को वहीं रुकुंगी..."
मगर ऐसा कुछ नेहा को नजर नहीं आया। बेड की चादर वगेरह भी सलीके से बिछी हुई थी। टीना कुछ सोचकर अपने रूम से बाहर आई। अजय छत पर टहल रहे थे और अंजली किचेन में थी। नेहा अजय के बेडरूम में पहुँच गई। अजय के रूम की हालत ज्यादा अच्छी नहीं थी। नेहा शायद कुछ ढूँढना चाहती थी। तभी नेहा को चादर पर एक गीला सा धब्बा नजर आ गया। नेहा का दिल धड़क उठा।
नेहा मन में- “कुतिया है पूरी टीना... इसने तो मेरे बाप को भी नहीं छोड़ा..." और नेहा बेड के चादर का मुआइना सा कर रही थी। तभी एक छोटा सा खून का धब्बा भी नजर आ गया। अब नेहा को पूरा कन्फर्म हो चुका था की पापा ने आज टीना की सील्ल तोड़ दी है, और नेहा अपने रूम में आकर टीना को काल करती है।
नेहा- हेलो टीना कैसी है? क्या हुआ तुझे?
टीना- कुछ नहीं यार, पैर में मोच आ गई है।
नेहा- कोई और बात तो नहीं?
टीना- नहीं नहीं और कोई बात नहीं है।
नेहा- तू मुझसे कुछ छुपा तो नहीं रही?
टीना- भला में क्या छुपाऊँगी तुझसे?
नेहा- चल रखती हूँ बाइ।
नेहा मन ही मन- “अरे कुतिया है टीना ऐसे कुछ नहीं बातायेगी। हरामजादी ने पापा के लण्ड से सील तुड़वा ली.."
मगर नेहा परेशान थी। आज नेहा के अंदर एक ज्वाला भड़क रही थी टीना के लिए। नेहा ने फैसला किया अभी टीना के घर जाने का। नेहा ने मम्मी से बोला- "मम्मी, मैं टीना को देखने जा रही हैं। रात को वहीं रुकुंगी..."