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Incest घर की मुर्गियाँ

फिर टीना के बारे में सोचने लगी। जब दिन में टीना के पास फोन आया था, वो पापा की काल थी। पापा ने टीना को फोन क्यों किया? और फिर टीना ने हड़बड़ा कर डिसकनेक्ट भी कर दिया था? कही पापा और टीना में तो कुछ? नहीं नहीं, ये मैं क्या सोचने लगी। ये नहीं हो सकता। मगर नेहा का दिल बोल रहा था टीना ऐसा भी कर सकती है। कहीं आज टीना ने पापा से तो मुँह काला तो नहीं कर लिया? तभी इसलिए लड़खड़ा कर चल रही थी? टीना कुछ सोचकर बेड से उतरी, और रूम की सारी लाइटें जला दी, और अपने रूम का अच्छी तरह मुआइना करने लगी। शायद कोई क्लू मिल जाय टीना का?

मगर ऐसा कुछ नेहा को नजर नहीं आया। बेड की चादर वगेरह भी सलीके से बिछी हुई थी। टीना कुछ सोचकर अपने रूम से बाहर आई। अजय छत पर टहल रहे थे और अंजली किचेन में थी। नेहा अजय के बेडरूम में पहुँच गई। अजय के रूम की हालत ज्यादा अच्छी नहीं थी। नेहा शायद कुछ ढूँढना चाहती थी। तभी नेहा को चादर पर एक गीला सा धब्बा नजर आ गया। नेहा का दिल धड़क उठा।

नेहा मन में- “कुतिया है पूरी टीना... इसने तो मेरे बाप को भी नहीं छोड़ा..." और नेहा बेड के चादर का मुआइना सा कर रही थी। तभी एक छोटा सा खून का धब्बा भी नजर आ गया। अब नेहा को पूरा कन्फर्म हो चुका था की पापा ने आज टीना की सील्ल तोड़ दी है, और नेहा अपने रूम में आकर टीना को काल करती है।

नेहा- हेलो टीना कैसी है? क्या हुआ तुझे?

टीना- कुछ नहीं यार, पैर में मोच आ गई है।

नेहा- कोई और बात तो नहीं?

टीना- नहीं नहीं और कोई बात नहीं है।

नेहा- तू मुझसे कुछ छुपा तो नहीं रही?

टीना- भला में क्या छुपाऊँगी तुझसे?

नेहा- चल रखती हूँ बाइ।

नेहा मन ही मन- “अरे कुतिया है टीना ऐसे कुछ नहीं बातायेगी। हरामजादी ने पापा के लण्ड से सील तुड़वा ली.."

मगर नेहा परेशान थी। आज नेहा के अंदर एक ज्वाला भड़क रही थी टीना के लिए। नेहा ने फैसला किया अभी टीना के घर जाने का। नेहा ने मम्मी से बोला- "मम्मी, मैं टीना को देखने जा रही हैं। रात को वहीं रुकुंगी..."
 
नेहा ने एक नजर अपने पापा पर डाली। इस वक्त अजय टीवी देख रहे थे। मगर अजय ने नेहा की तरफ नजर तक नहीं उठाई, कहीं नेहा चेहरा ना पढ़ ले। नेहा टीना से मिलने चली गई।

इधर अपने रूम में समीर टीना के लिए ही सोच रहा था, और समीर ने टीना को काल किया।

समीर- हाय टीना, क्या हो गया तुम्हें?

टीना- सारी समीर, आज मैं तुम्हारे घर नहीं रुक पाई। मेरे पैर फिसल हो गया था। पैर में मोच आ गई आयोडेक्स लगा ली है। अब आराम है।

समीर- कोई बात नहीं टीना। तुम कल मेरे घर जरूर रुकना। तब तुम्हें अपना केला खिलाऊँगा, और हाँ कल कोई बहाना मत करना।

टीना- अरे... समीर भइया तुम्हें लगता है मैंने आज बहाना किया है?

समीर- क्या करूं आज तो मेरा मुन्ना नया घर मिलने की खुशी में सुबह से खड़ा-खड़ा छलांगे मार रहा था।

टीना- ओहह... कल मैं अपने मुन्ना की सारी शिकायत्त दूर कर दूंगी। तब तक तुम मेरे मुन्ना को अपने प्यारे हाथों से सहला लो। ओहह.." एक सेक्सी हँसी के साथ फोन डिसकनेक्ट हो जाता है।

समीर से अब रुका नहीं गया और अपना लोवर उतार फेंका और लगा झटके पे झटके मारने।

समीर- “हाय मेरी जान टीना... ये लण्ड जब तेरी कुँवारी चूत में जायेगा तो कितना मजा आयेगा तुझे... इस्स्स..

ओहह... उम्म्म्म ... टीना क्या चूत है तेरी... आह... इसस्स्स्स ... लण्ड पर हाथों की स्पीड लगातार बढ़ रही थी उफफ्फ... टीन्ना ऐसे ही तुझे भी चोदूंगा..” और लण्ड ने पिचकारियां छोड़ दी। समीर को टीना का अनुभव हुआ

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उधर

“किरण आँटी, टीना कहां है?"

किरण- अरे... बेटा तू इस वक्त... देख अपने रूम में होगी।

टीना अपने रूम में बेड पर लेटी आँखें बंद किए हुए थी

नेहा- टीना की बच्ची मिल गई तुझे ठंडक?

टीना ने आँखें खोली तो देखा नेहा उसके बेड पर बैठी है- "तू.. और ये क्या बोल रही है तू?"

नेहा- हाँ, मैं जो बोल रही हूँ तू सब समझती है। तेरी चूत की आग ठंडी हो गई? तुझे शर्म नहीं आई पापा के सामने छीः छीः कैसी कुतिया है तू की मेरे पापा से भी.."

टीना भी अब तक समझ चुकी थी की जरूर कोई तगड़ा सबूत लग गया है नेहा के हाथ। अब छुपाने से कुछ नहीं होगा। टीना बोली- “मुझे क्यों लेक्चर दे रही है? अपने बाप से बोल कैसे मुझे अपनी बाहों में जकड़कर मेरा रेप किया है। वो तो मैंने तेरी घर की इज्जत की खातिर अपने मम्मी पापा को नहीं बोला, वरना देख क्या हश्र होता तेरे बाप का?"

अब झटका नेहा को लगा टीना की बात सुनकर। नेहा की बोलती बंद।

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समीर को हैंडजाब से थोड़ा सकून मिल चुका था। तभी दिव्या का मेसेज आता है।

दिव्या- तुझे याद ना मेरी आई किसी से अब क्या कहना?

समीर- तुम्हारी नजर क्यों खफा हो गई। खता बाक्स दो गर खता हो गई हमारा इरादा तो कुछ भी ना था।

दिव्या- दूरी ना रहे कोई आज इतने करीब आओ... मैं तुममें समा जाऊँ तुम मुझमें समा जाओ।

समीर- कैसे संभलेगा उनसे मेरा दिल है नादान ये क्या माँग बैठे।

दिव्या- छोटी सी उमर में ही लग गया रोग, कहते है लोग मैं मर जाऊँगी... अरे... मरने से पहले कुछ कर

जाऊँगी।

समीर- धीरे-धीरे प्यार को बढ़ाना है, हद से गुजर जाना है।

दिव्या- मुझे बस तुझसे दिल लगाना है, हद से गुजर जाना है।

समीर- दे दे प्यार दे प्यार रे हमें प्यार... दुनियां वाले कुछ भी समझें, हम है प्रेम दीवाने।

दिव्या- ये कली जब तलाक फूल बन के खिले, इंतजार करो।

समीर- इंतजार वो भला क्या करे, तुम जिसे बेकरार करो।

दिव्या- "तो आ जाओ बारात लेकर.." और दिव्या आफ लाइन हो गई।

समीर के चेहरे पर मुश्कान दौड़ गई। दिव्या पे समीर का जादू चल गया। अब संजना से हाथ माँग सकता हूँ,

और समीर की आँखों में दिव्या के सपने आने लगे,

सुबह नेहा टीना के घर से सुबह-सुबह आ गई।
 
अजय ने दरवाजे खोला, और पूछा- “अब कैसी है नेहा?"

नेहा- “हाँ अब ठीक है.." और मन में- “पूछ तो ऐसे रहे हैं, जैसे तुमने कुछ किया ना हो...

अजय छत पर चला गया, नेहा अपने रूम में जाने लगी। तभी समीर के रूम में नजर गई। सोचा चलो समीर को उठाते है। नेहा समीर के रूम में घुस चुकी थी, और जैसे ही समीर की चादर हटाई। उफफ्फ... समीर सिर्फ

अंडरवेर में लेटा था। मगर समीर गहरी नींद में था।

तभी नेहा की नजर समीर के मोबाइल पर जाती है, और उठाकर देखने लगती है। तभी मेसेज बाक्स देखा तो दिव्या की मेसेज खुल गई।

नेहा मन ही मन- "अब ये दिव्या... ये दिव्या कौन है?"

नेहा- “भइया उठिए कब तक सोओगे?"

मगर समीर को भी सुबह-सुबह टीना का सपना आया हुआ था। तभी समीर माइंड में बड़बड़ाता है- “हाय टीना, आज तो तेरी चूत जी भरकर चोदूंगा.." नेहा की कानों तक समीर के बुदबुदाने की आवाज पहुँच जाती है।

नेहा मन ही मॅ- “ओह माई गोड... क्या भइया भी टीना की सील तोड़ना चाहते थे?"

नेहा- "ओ भइया उठो...” कहकर नेहा ने समीर को हिलाया।

समीर आँखें मलता हुवा- “अरें.. नेहा तू कब आई?"

नेहा- अभी आप नींद में टीना से सेक्स... ..." और नेहा हँसने लगी।

समीर- तूने क्या सुना?

नेहा- कुछ नहीं और भइया ये दिव्या कौन है? आप तो बहुत पहुँचे हुए हो। बस मुझे समझाते रहते हो ऐसा मत कर... वैसा मत कर... कभी कहते हो टीना अच्छी लड़की नहीं है, उसके साथ छोड़ दे और आज आप उसके साथ... शायद इस लाइन में दिव्या भी हो सकती है, या और भी है कोई?"

समीर चुपचाप सुनता रहा।
 
समीर चुपचाप सुनता रहा।

नेहा- भइया कभी हम पर भी अहसान कर दो, गैरों पे करम अपनों पे शतम... ऐसा हम पे जुल्म ना करो।

समीर- “देख नेहा, जैसा तू सोच रही है ऐसा कुछ भी नहीं है। इस बारे में फिर कभी बात करेंगे। अभी घर में मम्मी पापा हैं। चल मुझे फ्रेश होने दे...” और समीर बेड से उतर जाता है।

नेहा- “एक बार इसको छूकर देख लूँ?” और नेहा ने समीर के अंडरवेर में हाथ डाल दिया।

समीर- पागल मत बन, मम्मी ने देख लिया तो मुसीबत बन जायेगी। जा अपने रूम में।

नेहा- नहीं पहले वादा करो की अपने पास सुलाओगे आज रात?

समीर- "अच्छा मेरी माँ अब जा यहां से..."

फिरर नेहा अपने रूम में चली गई।

सबने नाश्ता किया। अजय दुकान पर चला गया, समीर कंपनी, और अंजली किचेन का काम निपटाकर नेहा के रूम में पहुँचती है।

अंजली- नेहा मुझे थोड़ी शापिंग करनी है, मेरे साथ मार्केट चल।

नेहा- चलिए मम्मी।

दोनों मार्केट पहुँच गये। अंजली और नेहा विजय की दुकान पर पहुंच गई।

शिवांगनी- आइए मेडम क्या लेंगी आप?

अंजली- हमें काटन के शूट दिखाइए।

तभी विजय की नजर अंजली पर पड़ती है, तो विजय- "अरे... भाभी आप... क्या बात है आज हमारी दकान पे?"

अंजली- भाई साहब काटन के शूट लेने थे।

विजय- हाँ हाँ देखिए जो मर्जी। शिवांगनी भाभी को सारी वेरायटी दिखाओ। और बेटा नेहा तू कैसी है? तु नहीं चाहिए क्या?

नेहा- ठीक हूँ अंकल। बस आज तो मम्मी की शापिंग करने आई हूँ।

विजय- ओके। जब तक भाभी अपने लिए शूट पसंद करें तब तक तू मेरे इस बिल का टोटल कर दे।

नेहा- "लाइए अंकल.." और नेहा बिल टोटल करने लगी।

विजय अंजली को एक शार्ट गाउन दिखाता है- "भाभी आप ये देखिए... इस ड्रेस में आप कितनी हाट लगोगी।

अजय भाई देखते रह जायेंगे आपको..."

अंजली- और आप?

विजय- हमारे ऐसे नशीब कहां जो हम आपको इन कपड़ों में देखें?

अंजली- क्यों क्या खराबी है इन कपड़ों में? ट्राई कर सकती हूँ?

विजय- हाँ हाँ क्यों नहीं? जाइए अंदर ट्रायल रूम है।
 
अंजली गाउन लेकर ट्रायल रूम में चेंज करती है, और विजय को अंदर ही बुलाती है- “कैसी लग रही हूँ भाई साहब?"

विजय- भाभी कसम से कयामत लग रही हो। मेरा भी मन डोलने लगा आपको देखकर।

अंजली- बस रहने दो... कभी नजर उठाकर देखते भी नहीं और कहते हो मन डोलने लगा।

विजय- आपने कभी इशारा ही नहीं दिया।

अंजली- कैसा देते हैं इशारा, आप ही बता दो?

विजय- अब तो मेरा मन ही चोरी हो गया।

अंजली- किसने चुरा लिया आपका मन?

विजय- कभी तलाश करवाने आ जाना।

अंजली- “हम आपके किसी काम आ सकें, ये हमारी खुशकिस्मती होगी..." और अंजली ने गाउन भी पैक करा लिए और शार्ट भी लेकर निकल गई।

शिवांगनी- सर, ये जो लड़की थी नेहा, यही तो आई थी उस दिन।

विजय- क्या बात कर रही है?

शिवांगनी- और इसके साथ एक लड़की और थी। बड़ी ही गजब की माल थी वो तो।

विजय सोचता हुआ- “कहीं वो टीना तो नहीं?" होचकर विजय अपने कंप्यूटर पर सी.सी.टी.वी. कैमरे की रेकार्डिंग

चेक करता है कंप्यूटर स्क्रीन पर। और विजय को झटका लगता है। टीना और नेहा ने हाट नाइटी पहनी हुई थी। विजय ने कभी टीना और नेहा को इस नजर से नहीं देखा था, मगर आज।

शिवांगनी- क्या हुआ सर, क्या सोचने लगे?

विजय- "कुछ नहीं। चल ट्रायल रूम में चलते हैं..." और शिवांगनी का हाथ पकड़कर अपनी बाँहो में भर लिया।

शिवांगनी- क्या इरादा है सर?

विजय- मेरे मुन्ना को प्यास लगी है।

शिवांगनी- सर, कहो तो आज इसको कुँवें में डुबकी लगवा दें?

विजय- "नेकी और पूछ पूछ? मैं शटर डाल दूं पहले.." और विजय शटर डालकर शिवांगनी से लिपट गया। दोनों

ने जल्दी-जल्दी कपड़े उतार फेंके।

शिवांगनी- “लाओ मेरे मुन्ना को इसकी प्यास कैसे बुझानी है आज?” और लण्ड को लोलीपोप की तरह चाटने

लगी।

विजय- "हे शिवांगनी, तू मेरा कितना खयाल रखती है? आह्ह... मेरी जान मजा आ गया..."

शिवांगनी थोड़ी देर यूँ ही किस करती रहती है।

विजय- "चल अब इसे डुबकी भी लगवा दे..." और विजय ने शिवांगनी को लिटाकर दोनों जांघे अपने हाथों में पकड़ी और अपनी लण्ड को चूत से टिकाकर ऐसा झटका मारा की आधे से ज्यादा लण्ड एक बार में घुस चुका

था।

शिवांगनी- “आहह... मजा आ गया सर.."

विजय अपने हिसाब से धक्के लगाने लगा। मजा दोनों तरफ था।

*

आज समीर कंपनी में बैठा नेहा और टीना के बारे में सोच रहा था। उधर संजना के पास दिव्या का फोन आता है।

दिव्या- हेलो दीदी, कैसी हैं आप?

संजना- मैं ठीक हूँ, तू बता? और कुछ सोचा तूने समीर के बारे में?"
 
दिव्या- दीदी भला मैंने आज तक आपकी किसी बात को मना किया है? आपका फेसला मुझे मंजूर है।

संजना समीर के आफिस मे है- “हेलो समीर कैसे हो?"

समीर- जी मेम अच्छा हूँ।

संजना- आज चेन्नई वाले माल की डेलिवरी भेजनी है। कपूर शहाब का कई बार फोन आ चुका है।

समीर- जी मेडम माल तैयार है, बस पैकिंग करके ट्रांसपोर्ट पर भेज दूंगा।

संजना- और हाँ जब तुम फ्री हो जाओ तो मुझे बता देना। आज मुझे तुम्हारे घर पर चाय पीनी है।

समीर- जी मेडम, क्यों नहीं जरूर... ये तो हमारे लिए बड़ी खुशी की बात है।

समीर लंच टाइम तक फ्री हो जाता है, और अपने पापा को काल करता है- “पापा मेरी मेडम अभी घर पर आ रही हैं। आप जल्दी से घर पहुँचकर नाश्ते का इंतजाम करवा दीजिए."

अजय- ठीक है बेटा, मैं बस पहुँचता हूँ।

समीर संजना के केबिन में पहुँचता है- "मेम, मैंने माल ट्रांसपोर्ट पर डलवा दिया है..."

संजना- वेरी गुड। तो चलें हम?

समीर-चलिए मेम।

संजना- “ड्राइवर से बोलो गाड़ी निकाले..." और दोनों समीर के घर पहुँच गये।

अजय, अंजली, नेहा ने मिलकर संजना का स्वागत किया। संजना को सोफे पर बिठाया और सब भी साथ में बैठ गये।

संजना अजय से- “आपका बेटा बड़ा ही काबिल होनहार है। जब से हमारी कंपनी जान की है, कंपनी के सारे आर्डर तैयार रहते हैं..."

अजय- संजना जी सब आपकी मेहरबरबानी है।

संजना- अरें... नहीं नहीं, ये तो समीर की काबिलियत है। हमें तो समीर इतना पसंद आ चुका है। इसीलिए आपके पास आई हूँ। अगर आपकी इजाजत हो तो मेरी छोटी बहन दिव्या का रिश्ता समीर से हो जाय।

अजय- "ये तो हमारे लिए बड़े फन की बात है की इतने बड़े घर का रिश्ता समीर के लिए आया है। भला हम कैसे मना कर सकते हैं? बस एक बार समीर से पूछ लूं?"

संजना- समीर, तुम्हें ये रिश्ता मंजूर है?

समीर हाँ बोल देता है।

संजना भी खुशी में समीर के मुँह में बरफी का टुकड़ा दे देती है।

संजना अजय से- "हमारा घ में है। वही आप लोग दिव्या को भी देख लेना और मम्मी-पापा से भी मिल लेना। कल सनडे भी है। सुबह 6:00 बजे निकल जायेंगे..."

अजय- ठीक है जैसा आप चाहें।

संजना- नेहा बेटा, तुम्हें भी चलना है। नेहा स्माइल के साथ- “जी ठीक है.."

फिर संजना वहां से निकल गई।
 
अंजली समीर से- “अच्छा तो ये बात थी की तूने पहले से ही दिव्या को पसंद किया हुआ था?"

समीर- नहीं मम्मी, ऐसी कोई बात नहीं।

अंजली- “मैं तेरी माँ हूँ मुझे मत चला..” और सबको हँसी आ जाती है।

अंजली- विजय भाई साहब से भी बता दो।

अजय- अभी काल करता हूँ।

अजय- हेलो विजय?

विजय- हेलो।

अजय- हमने समीर का रिश्ता तय कर दिया है। सुबह लड़की देखने जयपुर जाना है। तैयार रहना सबको चलना

विजय- यार मैं तो नहीं जा पाऊँगा। ऐसा कर अपनी भाभी और टीना को ले जाना।

अजय- ठीक है उनसे बोल देना सुबह 6:00 बजे निकलना है।

विजय- ओके बोल दूंगा।

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रात के 10:00 बज थे। अंजली और अजय अपने रूम में सो चके थे। नेहा को नींद नहीं आ रही थी। नेहा ने अपने सारे कपड़े उतार फेंके, और एक छोटी से पारदर्शी नाइटी पहनकर समीर के रूम की तरफ चल दी। नेहा बहुत धीरे-धीरे समीर के रूम में पहुँची, मगर दरवाजा अंदर से बंद था। नेहा ने दरवाजा धीरे से खटखटाया।

समीर- कौन है?

नेहा- भइया मैं हूँ, दरवाजा खोलो।।

समीर ने दरवाजा खोला- “क्या बात है नेहा, और ये सब क्या है?"

नेहा- पहले अंदर तो आने दो भइया?

समीर- “देख आज तू अपने ही रूम में सो जा हमें सुबह जयपुर भी निकलना है। तू फिर किसी दिन सो जाना मेरे पास.."

मुझे नींद भी नहीं आ रही.." और

नेहा- “अच्छा जी सो जाऊँगी... मगर थोड़ी देर आपसे बातें तो कर । नेहा अंदर आकर समीर के बेड पर बैठ गई।

समीर- क्या बात करनी है मेरी बहना को?

नेहा- भइया, आपको दिव्या से कब और कैसे प्यार हुआ? आपकी लोव स्टोरी सुननी है मुझे।

समीर- बस मुझे तो पहली नजर में ही उससे प्यार हो गया था। मेरे दिल से ये आवाज आई की ये ही वो लड़की है, जो मेरी हमसफर बनेगी।

नेहा- वाउ भइया इंटरेस्टिंग... आगे बताओ, फिर क्या हुआ?
 
समीर- फिर एक दिन संजना मेडम ने मुझे दिव्या को जयपुर छोड़ने को बोला, जैसे ऊपर वाला भी यही चाहता था, और रास्ते में हमने गाने के खेल के सहारे प्यार का इजहार कर दिया।

नेहा- वाह भइया वाह... क्या बात है आपकी स्टोरी तो वाकई कमाल है। बिल्कुल फिल्मी स्टाइल वाला प्यार किया

आपने।

समीर- अच्छा देख अब तू भी अपने रूम में चली जा।

नेहा- भइया एक बार गले लगना है आपके।

समीर- तू नहीं मानेगी, चल आ जा।

नेहा की खुशी का ठिकाना ना रहा और बेड से कूद कर समीर की गोद में जा पहुँची। अपने दोनों हाथ समीर की गर्दन में लपेटे और अपने होंठों को समीर के होंठों से जोड़ लिए।

समीर को नेहा से ऐसी उम्मीद नहीं थी। मगर नेहा की किस ने समीर में भी जोश भर दिया और दोनों तरफ से चपर-चपर चूसने की आवाज आने लगी। 5 मिनट ऐसे ही चूसते रहे, समीर ने नेहा को नीचे उतरा।

समीर- नेहा अब बस कर, अब तुम अपने रूम में जाओ।

नेहा- क्या भइया तुम्हारा प्यार बस टीना और दिव्या के लिए ही है। मेरा तुमपे कोई हक नहीं?

समीर- अपना हक तू फिर किसी दिन ले लेना।

नेहा- "अच्छा जी..." और नेहा ने समीर की पैंट के उभार को हाथों में पकड़ लिया।

समीर की हाय निकल गई।

नेहा- "इसपर पर भी मेरा पूरा हक है। ये हक भी लेना है.." और नेहा अपने रूम में चली गई।

*****

*****
 
सुबह 6:00 बजे सब संजना के साथ जयपुर के लिए निकल गये। टीना और किरण भी साथ जा रही थी।

अजय संजना से- “आपकी परिवार में कौन-कौन है?"

संजना- “मेरे पापा राजेश, मेरी मम्मी सुमित्रा देवी, और अंकल की परिवार भी साथ रहती है। अंकल सुरेश, आँटी बबिता, और उनके दोनों बच्चे। बेटा राहुल, लड़की काजल। यही छोटा सा परिवार है हमारा.."

और यूँ ही बातें करते हुए सब लोग जयपुर पहुँच गये। घर पर अजय और समीर का फूलों से स्वागत किया गया। अजय बहुत खुश हुआ।

बड़ा आलीशान मकान था संजना का। अजय तो खुशी से फूला नहीं समा रहा था। क्या किश्मत पाई है समीर ने जो ऐसी ससुराल मिली उसको।

समीर संजना से कहता है- "मेम, मुझे टायलेट जाना है...”

संजना- “लाहुल, अपने जीजू को ऊपर बाथरूम दिखा आओ...”

समीर राहुल के साथ सेकेंड फ्लोर पर पहुँच गया।

राहल- "ये रहा बाथरूम, आप फ्रेश हो जाओ

समीर बाथरूम में T, मगर उफफ्फ... क्या देख लिया समीर ने? शायद ये काजल थी। समीर के पैर वहीं जम गये। क्या हम न की परी समान जिश्म था काजल का। काजल की नजर समीर पर गई तो जल्दी से अपने हाथों से अपने आपको छुपाने की नाकाम कोशिश करती है।

काजल- “ऐ मिस्टर, कौन हो तुम? बाहर निकलो, शर्म नहीं आती?"

समीर को जैसे होश आया। हकलाता हुआ बोलता है- “जी... जी मैं समीररर हुउ, टायलेट करने आया था.."

काजल- “ओहह... अच्छा तो आप समीर जीजू हो? मैं दिव्या नहीं काजल हूँ, जो ऐसे घुरे जा रहे हो मुझे? आप बाहर निकलो, मैं बस कपड़े पहनकर निकलती हूँ..."

समीर चेयर पर काजल के निकलने का इंतेजार करता है।

काजल ने जल्दी-जल्दी कपड़े पहने और बाहर निकली- “जीजू ज्यादा इंतेजार तो नहीं करना पड़ा?"

समीर- “नहीं..." और समीर बाथरूम में चला गया, फ्रेश होकर नीचे आया।

दिव्या थोड़ी देर बाद ब्लू शूट में सबको नमस्ते करके सामने सोफे पर आकर बेठ जाथ है।
 
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