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Incest घर की मुर्गियाँ

उधर काजल की चूत में भी खारिश बढ़ती जा रही थी। काजल को लण्ड की तलब जागने लगी। अब समीर तो आ नहीं सकता था। फिर ये प्यास कैसे बुझे? काजल अपने बेड पर लेटी यही सोच रही थी। काजल का एक हाथ इस वक्त सलवार के अंदर अपनी चूत को सहला रहा था, जो चुदाई की आग में पानी छोड़ रही थी।

काजल अपनी उंगली चूत के अंदर तक घुसा रही थी। मगर काजल की प्यास अब उंगली से शांत नहीं हो सकती थी। और काजल को लण्ड मिलना इतना आसान नहीं था। काजल को बार-बार राहल के लण्ड का भी खयाल आ जाता। मगर ये सब इतना आसान नहीं था।

फिर भी काजल को नहीं लग रहा था की ये सब कभी फिर से उसके साथ हो सकता है। यही सब सोच-सोचकर काजल की उंगली चूत की गहराई में पूरी उतर चुकी थी। चूत पूरी तरह फूच-फूच कर रही थी। काजल की आवाज भी इस वक्त कुछ ऐसी निकाल रही थी।

काजल- "अहह... भईय्या आहह... लो आह्ह... उईईई... उईईई भबाई आईईई... उम्म्म्म

... आअहह.."

काजल का चूतरस निकलने को तैयार था। काजल की तड़प बढ़ती जा रही थी, और काजल अपनी उंगली की रफ़्तार थोड़ी तेज कर देती है। काजल की आँखें बंद हो चुकी थी और मुँह से सिसकारी भरी आवाजें निकल रही थी।- “आअहह... भाईया..." और एकदम से काजल का पानी छूट जाता है।

काजल बेजान सी बिस्तर पर लुढ़क जाती है। करीब आधे घंटे बाद अपने रूम से निकलकर नीचे पहुँचती है। घर में सिर्फ नेहा भाभी थी, जो किचेन में खाना बना रही थी। शाम के 7:00 बजने वाले थे। 7:0 राहुल के आने का टाइम था। काजल के माइंड में जाने क्या प्लान आया और ऊपर वाले बाथरूम

काजल ने बाथरूम की चटकनी नहीं लगाई, और दरवाजे के पास साबन का पानी फैला देती है, और फटाफट अपने सारे कपड़े उतारकर शवर खोलकर अपने जिश्म को ठंडे-ठंडे पानी से नहाने लगी। काजल की गाण्ड दरवाजे की तरफ थी, और काजल अपनी चूचियों को मल-मलकर नहा रही थी।

राहुल घर आ चुका था और राहुल फ्रेश होने के लिए ऊपर बाथरूम में पहुँचता है। तभी काजल को अहसास हुआ दरवाजे पर कोई है। और जैसे ही राहुल ने बाथरूम का दरवाजा खोलकर एक कदम अंदर रखा, और सामने का नजारा देखा तो राहुल के मुँह से निकला- “आहह... शिट्ट.." और जल्दी से राहुल वापस पलटता है। मगर राहुल का पैर साबुन के पानी पर रखा था, और धड़ाम से राहुल फर्श पर गिर जाता है।

काजल एकदम पलटकर देखती है। इस वक्त काजल की चूचियां राहुल की नजरों के सामने थी। काजल जल्दी से तौलिया लपेटकर राहुल को सहारा देती है।

राहुल- काजल चटकनी तो लगा लेती?

काजल- सारी भइया, वो जल्दी में ध्यान नहीं रहा।

काजल जैसे ही राहुल को सहारा देती है, तौलिया फिर से फर्श पर गिर जाता है। काजल एकदम नंगी थी। राहुल की नजर सीधे काजल की चूचियों पर थी।

राहुल- काजल, जाओ पहले कपड़े पहनो।।

काजल- “जी भइया.." और काजल उठकर जल्दी से टी-शर्ट पहन लेती है। और फिर राहुल को सहारा देकर बेड पर लिटा देती है- "भइया ज्यादा तो नहीं लगी?"

राहुल- नहीं, मैं ठीक हूँ। तू जा, और नेहा को भेज दे।

काजल- “जी भइया..” और काजल मुश्कुराते हुए रूम से बाहर निकाल गई, और नीचे नेहा के पास पहुँचकर कहा “भाभी आपको राहुल भइया बुला रहे हैं.."

नेहा- “अच्छा..." और नेहा ऊपर चली गई- “क्या हुआ जी?” .

राहुल- मूव लगा दो। बाथरूम में पैर स्लिप हो गया।

*****

*****
 
इधर टीना आज घर में अकेली थी। विजय और किरण टीना के लिए लड़का देखने अलीगढ़ गये थे। विजय ने अजय से रिश्ते का जिकर कर दिया था। अजय जो मालूम था विजय रात को देर से घर आयेगा, और घर पर टीना अकेली होगी। अजय दुकान से जल्दी निकलकर टीना के पास आया

टीना- अरे... अंकल आप।

अजय- हाँ बेटा, अब तूने तो घर आना बहुत कम कर दिया। कहीं हमसे नाराज है?

टीना- नहीं अंकल, ऐसी बात नहीं है। पापा ने बोला है अब तू बड़ी हो गई है। घर की जिम्मेदारी संभाल।

अजय- आहह... तो टीना अब बड़ी हो गई। आज तो तेरे लिए लड़का देखने गये हैं।

टीना- जी अंकल।

अजय- इस खुशी में कुछ मीठा हो जाये।

टीना- क्यों नहीं? बैठो लाती हूँ।

अजय- “वो नहीं, मुझे तो तुम्हारे होंठों की मिठास चाहिए..." और अजय आगे बढ़कर टीना के होंठों पर अपने होंठ रख देता है। टीना भी अजय का पूरा साथ दे रही थी, और टीना अपने हाथ अजय के लण्ड पर ले जाती है।

टीना- “अंकल मुझे केला नहीं खिलाओगे?"

अजय- तुम्हारे लिए ही तो लाया हूँ, जैसे मर्जी खा लो।

टीना नीचे बैठकर अजय की जिप खोलकर केला बाहर निकाल लेती है- “वाउ अंकल, आज तो आपका केला डबल लग रहा है..."

अजय- हाँ बेटा, काफी दिन से संभाल कर रखा है।

टीना लण्ड का सुपाड़ा मुँह में भर लेती है।

अजय- “अहह... टीना तू तो बड़ा गजब का चूसती है। अहह.."

टीना अपना मुँह पूरा खोलकर लण्ड को जड़ तक ले लेती है, और फिर बाहर की तरफ खींचती है। अजय का लण्ड टीना के मुख रस में सराबोर हो चुका था। अजय लण्ड को मुँह से निकाल लेता है और टीना को गोद में उठाकर बेड पर लिटाता है। फिर टीना की सलवार का नाड़ा खोलकर चूत के दर्शन करता है, और अपने लण्ड को हाथ में पकड़कर चूत के छेद पर टिका देता है। टीना की चूत काफी गीली हो चुकी थी। लण्ड हल्के से दबाव से ही चूत में घुसता चला गया। अजय को क्या मस्त मजा आ रहा था।

टीना- अंकल आप लेट जाओ मैं ऊपर आती है

अजय बेड पर लेट जाता है, और टीना अजय के खड़े लण्ड पर बैठती चली गई।

अजय- “आहह... टीना तू तो वाकई बहुत बड़ी हो गई..” और टीना अजय के लण्ड पर उठक-बैठक लगाने लगी। अजय तो टीना के धक्का से मस्त हो गया।

टीना- “आअहह... अंकल मजा आ रहा है आप्प भी नीचे से धक्के लगाओ..."

अजय भी दे दनादन शाट मारने लगा, और थोड़ी देर में दोनों शांत पड़ गये।

**
 
समीर सुबह कंपनी जाने में लेट हो चुका था। आज दिव्या ने समीर के लिए पूरी हलवा बनाया था। समीर हलवा पैक कराकर कंपनी समीर चकित हो जाता है। क्या बात है आज सूरज कैसे पश्चिम से निकलने लगा।

समीर- हुमा ठीक से पकड़कर बैठो इस तरह बैठने से गिर सकती हो।

हुमा- “जी सर...” और हुमा थोड़ा आगे खिसक जाती है, और एक हाथ से समीर को पकड़ लेती है।

समीर- हाँ अब ठीक है। चलें?

हुमा- जी सर।

समीर बाइक दौड़ा देता है। इस बार हुमा समीर से सटकर बैठी थी। हुमा की छातियां अब समीर को महसूस हो रही थी। समीर हुमा की मस्त चूचियों का अहसास लेते हुए चला जा रहा था। तभी हुमा का स्कूल आ जाता है। हुमा उतारकर अपने बैग से लंच बाक्स निकालती है, और खीर वाला टिफिन समीर को पकड़ते हुए कहती है।

हुमा - सर, आज मैंने आपके लिए खीर बनाई थी।

समीर- “अरें... वाह... खीर तो मुझे बेहद पसंद है..” और समीर टिफिन लेकर कंपनी आ जाता है।

थोड़ी देर बाद हिना समीर के केबिन में आती है।

हिना- हेलो सर।

तभी समीर देखता है की हिना ग्रीन टाप पहने चेहरे पर प्यारी सी मश्कराहट लिए हाथ में टिफिन लिए खड़ी थी "हेलो हिना कैसी हो?"

हिना- ठीक हूँ सर। आपके लिए खीर लेकर आई हूँ।

समीर- वाउ क्या बात है? तुमने बनाई है।

हिना- जी सर।

समीर के चेहरे पर मुश्कान आ जाती है, और समीर हिना के सामने ही टिफिन से खीर खाने लगता है- “वाउ.. कितनी सवादिष्ट है। मजा आ गया..."

हिना मुश्कुराने लगती है।

समीर- हिना तुम मुश्कुराते हुए बड़ी प्यारी लगती हो। बस यूँ ही मुश्कुराती रहा करो।

हिना- “ओके सर.” और हिना मुश्कुराते हुए समीर के केबिन से बाहर चली जाती है।
 
समीर हुमा का टिफिन भी खोलकर देखता है, तो वही खीर उस टिफिन में भी थी। समीर के चेहरे पर मुश्कुराहट दौड़ जाती है। थोड़ी देर बाद समीर अपने काम में लग जाता है।

तभी संजना समीर के केबिन में आती है- “क्या हो रहा है समीर?"

समीर- वो मेम एक्सपोर्ट वाला आर्डर तो कंप्लीट हो चुका है।

संजना- “वेरी गुड.. समीर एक काम करो, खन्ना साहब का फोन आया था। उनके पास चाइना से कोई सैम्पल आया है। ये रहा उनका अड्रेस। तुम जाकर ले आना.."

समीर कार्ड देखता है। अड्रेस फिरोजबाद का था- “जी मेडम, कब जाना है?"

संजना- ऐसा करो सुबह मेरी गाड़ी लेकर चले जाना।

समीर- जी मेम।

उधर नेहा भी हास्पिटल से घर आ चुकी थी, और नेहा की सास ये खुशखबरी अंजली को फोन पर देती है। अंजली ये सुनकर बड़ी खुश होती है, और शाम को डिनर टेबल पर अंजली अजय से कहती है।

अंजली- सुनो जी आप नाना बनने वाले हो। आज नेहा की सास का फोन आया था। कल नेहा को हास्पिटल में ड्रिप भी लगी थी।

सबके चेहरा खुशी से खिल उठता है

अंजली- कल नेहा से मिल आते हैं।

अजय- हाँ हाँ क्यों नहीं?

तभी दिव्या अंजली से कहती है- "मम्मी जी मैं भी चलूं आपके साथ?"

अंजली- बेटा, समीर से पूछ लो। हो सकता है हमें रात को रुकना पड़े।

समीर- अरें... मम्मी चली जायेगी एक दिन की तो बात है। आपके साथ ही आ जायेगी। खाना तो होटल से खा

लूँगा....

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फिर दिव्या का भी साथ जाने का प्रोग्राम बन जाता है। दिव्या बड़ी खुश होती है। समीर ने एकदम जाने की इजाजत दे दी। दिव्या को समीर पर बड़ा प्यार सा आ जाता है। रात के करीब 10:00 बज चके थे। अजय और अंजली अपने रूम में सो चुके थे।

दिव्या किचेन का काम निपटाकर, सीधा बाथरूम में नहाने पहुँच गई, और नहाकर एक पारदर्शी नाइटी पहनकर बेडरूम में पहुँचती है। समीर बेड पर लेटा मोबाइल में गेम खेल रहा था। दिव्या की नाइटी से आधी चूचियां चमक रही थी, और जैसे ही समीर की नजर नीचे पहँचती है। उफफ्फ... समीर के लण्ड में 440 वोल्ट का करेंट दौड़ जाता है। नीचे दिव्या ने कुछ नहीं पहना था। चूत एकदम क्लीन समीर के नजरों के सामने थी।

दिव्या यूँ ही समीर के ऊपर चढ़ जाती है, और झक कर अपने रसीले होंठ समीर के होंठों पर रख देती है। समीर भी अपने होंठों को खोल देता है, और दोनों के होंठों की चुसाई शुरू हो जाती है। थोड़ी देर तक दोनों यूँ ही होंठों को चूसते रहते हैं।

दिव्या- आई लव यू मेरी जान।

समीर- “आई लव यू टू डार्लिंग.." और समीर दिव्या का इतना हाट रूप देख मस्त हो जाता है। फिर समीर का हाथ दिव्या की गोलाई तक पहुँच गया, और दिव्या की चूचियों को मसलने लगा।

दिव्या- “आऽऽ जीजीजी... आअहह... इसस्स्स..."

समीर का जोश पूरे शबाब पर चढ़ चुका था। दिव्या की हल्की सी नाइटी भी समीर ने उतार फेंकी, और समीर के होंठ अब दिव्या की चूचियों के निप्पल को पकड़े हुए थे। दिव्या भी कहां पीछे रहने वाली थी। वो समीर के कपड़े निकालने में लग गई। शर्ट के बटन खोलकर शर्ट उतार फेंकी, और अब जीन्स की बेल्ट खोलकर समीर के लण्ड को बाहर निकालने लगी। उफफ्फ... लण्ड पूरे खतरनाक मूड में लग रहा था।

दिव्या- आज तो कुछ ज्यादा बड़ा लग रहा है जी।

समीर- तुम्हारा ये रूप देखकर खुशी में फूल गया।

दिव्या- "अच्छा ये बात है? फिर तो मैं अपने राजा के लिए रोज इस रूप में आ जाऊँगी..." और दिव्या लण्ड को

अपने हाथ से पकड़कर मुँह में भर लेती है।

समीर- अहह... अहह... उम्म्म्म... इस्स्स..'

-

दिव्या लण्ड को बड़ी ही मस्ती में चूसने लगी। समीर के लण्ड को पूरा हद तक अंदर लेति और थोड़ा सा बाहर निकालती। समीर को ऐसा मजा आ रहा था की बस समीर की बड़ी मस्त सिसकियां निकाल रही थी।

समीर- "ऊहह... आआआ ओहह... उम्म्म्म ..."

तभी दिव्या लण्ड को बाहर निकाल देती है। लण्ड एकदम खंबे जैसा खड़ा हो जाता है। दिव्या उठकर एक हाथ से लण्ड पकड़कर अपनी चूत के छेद पर सेट करके बैठती चली गई। उफफ्फ... इस पोज में दिव्या को हल्का-हल्का दर्द भी हो रहा था। मगर समीर का मजा कई गुना बढ़ गया था। दिव्या की उठक बैठक शुरू हो गई, और मुँह से सिसकियां भी- “आअहह... आअहह... उहह... उम्म्म्म ... सस्स्स्सी ... आss आअहह..."

अब समीर का जोश इतना बढ़ चुका था की लण्ड शाट मारना चाहता था, और थोड़ी देर बाद समीर दिव्या को अपने नीचे कर लेता है, और ताबड़तोड़ धक्के लगा देता है।

समीर का एकदम से फौवारा दिव्या की चूत में भर जाता है। दिव्या की चूत भी अपना पानी छोड़ देती है, और समीर निढाल दिव्या के ऊपर गिर जाता है। दोनों तृप्त हो चुके थे, और फिर नींद की आगोश में चले गये।

*****

*****
 
सुबह 7:00 बजे अजय अंजली और दिव्या टैक्सी से जयपुर के लिए निकाल चुके थे।

समीर को भी फिरोजबाद जाना था। समीर सोचता है अकेला जाऊँगा, इससे तो अच्छा हिना को साथ ले जाऊँ। मगर फिर सोचता है अगर हिना को ले गया तो संजना में को मालूम पड़ जायेगा। जाने क्या सोचेंगी? अगर हुमा को साथ लूँ तो कैसा रहेगा? मगर हो सकता है रात को देर हो जाय। कुछ सोचकर समीर हुमा को काल करता है।

समीर- हाय हुमा, कहां पर हो?

हुमा- सर बस स्टाप पर हूँ। आप कहां पर हैं?

समीर- बस तुम वहीं रुको, मैं 5 मिनट में पहुँचता हूँ।

हुमा- ओके सर।

समीर फटाफट बाइक से बस स्टाप पहुँचता है। हुमा समीर की बाइक पर बैठ जाती है।

समीर- हुमा मेरे साथ चलोगी?

हुमा - कहां पर?

समीर- फिरोजबाद।

हुमा- सर, मम्मी से पूछना पड़ेगा।

समीर- क्या कहोगी मम्मी से?

हुमा- आप बताइए सर, कैसे कहूँ?

समीर- एक काम करते हैं। पहले तुमको स्कूल लेकर चलता हूँ। वहां पहुँचकर तुम मम्मी को काल करना की स्कूल से आगरा टूर जा रहा है, और मैं भी जा रही हूँ।

हुमा- गुड आईडिया सर।

समीर- मैं भी अपने दोस्त से बोल दूँगा कोई बात हो तो संभाल लेगा।

समीर हुमा को स्कूल छोड़कर संजना की कार लेने चला जाता है, और थोड़ी देर बाद कार लेकर हुमा के स्कूल वापस आ जाता है। हुमा बाहर ही खड़ी थी।

समीर- क्या हुआ मम्मी से बात हो गई?

हुमा - जी सर, इजाजत भी मिल गई। और मम्मी बोल रही थी अपना ध्यान रखना।

समीर हुमा को लेकर फिरोजबाद के लिए निकाल पड़ा। हुमा फ्रंट सीट पर समीर के बराबर में बैठी थी। समीर बार-बार गाड़ी चलाते हुए हुमा के चेहरे को देख रहा था। जब भी समीर की आँखें हुमा को देखते हुए पाती। हुमा के चेहरे पर प्यारी सी मुश्कुराहट आ जाती।

हुमा - सर, ऐसे क्या देख रहे हैं?

समीर- तुम्हारी आँखें बहुत प्यारी हैं। जी करता है बस इन्हें देखता रहूँ?

हुमा- अच्छा जी... तो आप हमें इसलिए लेकर आये हैं?

समीर- यूँ ही समझ लो।

हुमा का चेहरा खुशी से खिल उठता है।

समीर- हुमा एक बात पूछू?

हुमा- पूछिए सर।

समीर- तुम्हारा कोई बायफ्रेंड है?

हुमा- नहीं तो।

समीर के चेहरे पर मुश्कान आ जाती है। थोड़ी देर दोनों खामोश हो जाते हैं।

हुमा - सर क्या बात है? आपने ये किसलिए पूछा?

समीर- “क्योंकी हम आपको अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहते हैं। क्या तुम हमसे दोस्ती करोगी?” कहकर समीर एक हाथ हुमा की तरफ बढ़ाता है।

हुमा समीर का हाथ थाम लेती है। समीर के चेहरा खुशी से खिल जाता है। यूँ ही समीर हुमा से मस्ती भरी बातें करता हुआ गाड़ी चला रहा था। थोड़ी देर बाद समीर गाड़ी रोकता है।

हुमा- क्या हुआ सर?

समीर- “थोड़ा रेस्ट करते हैं, और कुछ खाते पीते हैं..." और समीर गाड़ी से उतरकर हुमा का हाथ थाम लेता है। हुमा भी समीर से चिपकती हुई पिज़्ज़ा रेस्टोरेंट में पहुँचती है।
 
समीर कोल्ड-ड्रिंक पिज़्ज़ा वगैरह लेकर सामने बने पार्क में पहुँच जाता है। पार्क में बहुत चहल पहल थी। समीर और हुमा नीचे घास पर बैठ जाते हैं, और समीर हुमा को अपने हाथ से पिज़्ज़ा का एक टुकड़ा पकड़ाता है। हुमा पिज़्ज़ा खाने लगती है। चारों तरफ पार्क में लड़के लड़कियां एक दूजे से चिपके बैठे थे।

तभी एक फोटोग्राफर आता है- “सर फोटो खिंचवायेंगे?"

समीर- नहीं भाई।

फोटोग्राफर थोड़ी रिक्वेस्ट करने लगता है।

बोलती है- “सर, एक फोटो साथ में खिंचवा लेते हैं..."

समीर- अरे... मगर हमारे पास इतना टाइम नहीं की हम फोटो कापी के लिए रुकेंगे।

फोटोग्राफर चला जाता है।

समीर को फोटो खिंचवाना अच्छा लगता है?

-

हुमा - जी सर। मुझे तो फोटो खिंचवाने का बहुक शौक है।

समीर- अरें... वाह... मुझे भी फोटोग्राफी करने का बड़ा शौक है।

हुमा- सर, फिर तो आप मेरी फोटो खिचिये।

समीर अपना मोबाइल निकालता है, और हुमा के गाल से गाल छूकर एक सेल्फी लेता है। समीर हुमा के साफ्ट साफ्ट गाल अपने गाल पर महसूस करता है, और फिर हुमा सेल्फी देखते हुए।

हुमा- वाउ सर, कितनी प्यारी फोटो आई है।

समीर- ये तो कुछ भी नहीं। जब कैमरे से फोटो खींचूंगा तब देखना।

हुमा - तो सर खींचिये ना।

समीर- ऐसे थोड़ी खींची जाती है।

हुमा- फिर?

समीर- तुम्हारी माडेलिंग टाइप फोटो खींचूंगा अगर तुम खिंचवाओगी तो?

हुमा - क्यों नहीं सर? मैं जरूर खिबचवाऊँगी।

फिर थोड़ी देर बाद दोनों वहां से निकल जाते हैं, और बातें करते हुए कब फिरोजबाद आ गया। हुमा के साथ समीर का 4:00 घंटे का सफर यूँ लग रहा था जैसे बस अभी 5 मिनट हुए हों। समीर हुमा को गाड़ी में ही बैठाकर अंदर कंपनी में चला जाता है।

हुमा गाड़ी में बैठी म्यूजिक सुनती रहती है। करीब आधे घंटे बाद समीर सैम्पल लेकर आता है।

"

समीर- बोर तो नहीं हुई?

हुमा- नहीं सर, म्यूजिक सुन रही थी।

समीर- चलें?

हुमा- जी।

समीर- ताजमहल देखोगी?

हुमा मुश्कुराते हुए- “जी..."
 
समीर गाड़ी ताजमहल की तरफ दौड़ा देता है। एक घंटे बाद दोनों ताज का दीदार करते हैं।

हुमा- वाउ सर कितना खूबसूरत है।

समीर- पता है ये एक प्यार करने वाले ने अपनी बेगम की याद में बनवाया है।

हुमा - जी सर। प्यार की निशानी है।

यहां भी काफी सारे कपल एक दूजे की बाँहो में बाँहे डाले फोटो खींचवा रहे थे। तभी समीर सामने बैठी लड़की के पास जाता है, और अपना मोबाइल उसे दे देता है। हुमा ये सब देख रही थी। तभी समीर हुमा के करीब बैठ जाता है, और वो लड़की दोनों के फोटो खींचने लगती है। समीर कभी हुमा का हाथ पकड़कर खिंचवाता, कभी अपना हाथ हुमा की कमर में डालकर खिंचवाता।

तभी समीर को जाने क्या हुआ की समीर ने एकदम से हुमा को बाँहो में भर लिया, और उस लड़की के चेहरे पर भी स्माइल आ गई, और एकदम से फोटो क्लिक कर दिया।

लड़की समीर को मोबाइल देते हुए- “बहुत प्यारी जोड़ी है आप दोनों की.."

हुमा थोड़ा झेंप सी जाती है। मगर समीर के चेहरे पर स्माइल दौड़ जाती है, और थोड़ी देर बाद दोनों वहां से निकाल जाते हैं। शाम के 4:00 बज चुके थे।

समीर- हुमा बोलो कहां चलें? कहो तो आज किसी होटल में रुक जायें वरना अभी 4:00 बजे हैं, और हम नोयेडा 7:00 बजे तक पहुँच जायेंगे।

हुमा- घर ही चलते हैं।

समीर- ओके। मगर तुमको आज रात मेरे घर पर रुकना पड़ेगा।

हुमा- मगर सर... आपके घर पर आपके मम्मी पापा क्या कहेंगे?

समीर- आज घर पर कोई नहीं है।

हुमा- ओके

समीर कार नोयेडा की तरफ दौड़ा देता है। समीर ने आज ऐसी फास्ट गाड़ी चलाई की 7:00 बजे से पहले समीर हुमा को लेकर अपने घर आ चुका था। दोनों फ्रेश होकर खाना खाते हैं। समीर सामने बैठा हुमा को देखता रहता है।

समीर- हुमा आज का सफर कैसा लगा?

हुमा- सर आज तो बहुत मजा आया।

समीर थोड़ा सा आगे को खिसक जाता है, और अपना हाथ हुमा के हाथ के ऊपर रख देता है, और हल्का-हल्का सहलाने लगता है। समीर अपने हाथों को हुमा की कमर में भर लेता है और हुमा को अपने करीब खींच लेता है। हुमा का चेहरा समीर के इतने करीब आ जाता है की बस होंठों का फासला मुश्किल से एक-दो इंच का रह जाता है। हुमा की नजरें नीचे की तरफ झुक जाती हैं, जैसे समीर को ये सब करने की इजाजत दे रही हो।

समीर भी ऐसा मोका कहां छोड़ने वाला था, और समीर अपने होंठों को हुमा के होंठों पर रख देता है। इस वक्त हुमा की आँखें बंद हो चुकी थी, और समीर के होंठ हुमा के साफ्ट साफ्ट गुलाब की पंखुड़ियों समान होंठों को किस कर रहे थे। हुमा आँखें बंद किए किसी दूसरी दुनियां में पहुँच चुकी थी। करीब 10 मिनट समीर हुमा के होंठों को किस करता रहा। फिर समीर हुमा के होंठों को आजाद कर देता है, और ऊपर अपने कमरे में चला जाता है।

हुमा खामोश सोफे पर बैठी थी। हुमा की सांसें बहुत तेजी से चल रही थीं। उसकी लाइफ का ये पहला किस था। तभी समीर एक कैमरा लेकर नीचे आता है।

समीर- चलो तुम्हारे फोटो खींचते हैं, तैयार हो?

हुमा- जी।

समीर रूम की सारी लाइटें ओन कर देता है। हुमा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है, और समीर एकदम से हुमा की फोटो खींच लेता है।
 
समीर रूम की सारी लाइटें ओन कर देता है। हुमा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है, और समीर एकदम से हुमा की फोटो खींच लेता है।

समीर- “वाउ अमेजिंग पिक..” और समीर हुमा पिक दिखाता है।

हुमा - सर आप तो बहुत अच्छी फोटो खींचते हो, आपको तो फोटोग्राफर होना चाहिए था।

समीर- "मुझे बचपन से ही फोटोग्राफेरी का शौक है। मगर आज तक कोई ऐसी माडल नहीं मिली, जिसके मैं फोटो शूट कर सकूँ..” समीर ये बात थोड़ी मायूसी से कहता है।

हुमा- अरे... सर इसमें क्या है? मैं हूँ ना... आप मेरे फोटो शूट कीजिए।

समीर- मगर ये काम थोड़ा मुश्किल है, तुम कर सकोगी?

हुमा - कोशिश करूँगी।

समीर- "ठीक है तो तुम यहीं बैठो, मैं अभी आया...” कहकर समीर ऊपर जाकर दिव्या के अंडरगर्मेस ले आता है,

और कहता है- “हुमा, तुमको ड्रेस चेंज करनी होगी.."

हुमा- “ओके..." और हुमा एक नाइटी उठाकर दूसरे रूम में जाने लगती है।

समीर- हुमा, यही चेंज कर लो मैं पलट जाता हूँ।

हुमा - जी ठीक है।

समीर पलट जाता है, और हुमा अपनी शर्ट के बटन खोलने लगती है। तभी समीर पलट जाता है। हुमा ने नीचे ब्रा भी नहीं पहनी थी। हुमा की आधी चूचियां समीर की नजरों के सामने थीं।

समीर- वाउ... बस यूँ ही रुक जाओ, एक फोटो इसी पोज में।

हुमा एकदम से अपनी चूचियां ढक लेती है।

समीर- "मैंने तो पहले ही कहा था की ये सब तुमसे नहीं होगा.." और समीर हुमा से ये सब बड़ी मायूसी से कहता है।

हुमा को समीर का यूँ मायूस होना अच्छा नहीं लगा। हुमा नजरें झुकाए समीर से बोलती है- "सर, अगर ये फोटो किसी ने देख लिए तो क्या होगा?"

समीर- क्या तुम्हें मुझपर भरोसा नहीं है? मैं ये सारी पिक बाद में डेलिट कर दूंगा।

अभी समीर ये सब कह रहा था की हुमा एकदम शर्ट से अपना हाथ छोड़ देती है। समीर को फिर से हुमा की आधी चूचियां दिखने लगती है। समीर की हल्की सी उफफ्फ... निकल जाती है, और समीर कैमरा तैयार करके हुमा की फोटो खींचता है।

समीर- हुमा अपने दोनों हाथ सिर के पास ले जाओ।

हुमा अपने हाथों को सिर के पास ले जाती है, और कहती है- "ऐसे?"

हुमा की चूचियां और क्लियर दिखने लगती हैं। ये नजारा देखकर समीर के लण्ड में झुरझुरी सी दौड़ने लगती है। मगर समीर अभी जल्दबाजी करने के मूड में नहीं था। समीर इस पोज में 3-4 फोटो खींचता है।

अब हुमा की शर्म भी धीरे-धीरे कम होने लगी थी, और इसका फायदा समीर उठना जानता था। अब तक हुमा पूरी तरह टापलेश हो चुकी थी। समीर के लण्ड में पूरा जोश आ चुका था, और समीर अब हुमा को पूरी तरह नंगी देखने चाह रहा था।

समीर- हुमा जीन्स की बेल्ट खोल दो।

हुमा थोड़ा झिझकते हए अपने हाथ से जीन्स की बेल्ट खोलने लगी। समीर के चेहरे पर विजय मुश्कान दौड़ जाती है। एक-दो फोटो इस पोजीशन में खींचकर समीर हुमा की पूरी जीन्स उतरवा देता है। हुमा का ये रूप देखकर समीर अपने होश खोने लगा था। क्या हुश्न पाया था हुमा ने?

हुमा चेयर के ऊपर बैठ जाती है। समीर की नजर जब चूत की गुलाबी दरार पर पड़ती है, बस समीर का कंट्रोल

जवाब दे देता है, और समीर कैमरे को सोफे पर रखकर हुमा को इस हालत में अपनी बाँहो में भर लेता है।

हुमा - सर... ययययई आप क्या कर रहे हैं?"

समीर- हुमा तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हें प्यार करने को मन कर रहा है।

हुमा- नहीं सर, हमें बहुत डर लग रहा है।

समीर के हाथ अब तक हुमा की चूचियों को सहलाने लगे थे। हुमा की हालत किसी बिना पानी की मछली जैसी हो गई थी। समीर के हाथ जैसे ही हुमा की चूचियों पर पहुँचे, हुमा खुद में सिमटने की कोशिश करने लगी। और समीर के हाथों को अपनी चूचियों से हटाने लगी।

मगर समीर धीरे-धीरे हुमा की चूचियां सहलाता रहा। इतनी साफ्ट मुलायम चूचियां थी हुमा की कि बस समीर तो दीवाना सा हो गया।
 
मगर समीर धीरे-धीरे हुमा की चूचियां सहलाता रहा। इतनी साफ्ट मुलायम चूचियां थी हुमा की कि बस समीर तो दीवाना सा हो गया।

हुमा की कंपन लगातार बढ़ती जा रही थी। अनछुई गुलाब की कली आज समीर की बाँहो में थी। समीर ने हुमा को गोद में उठा लिया और अपने बेडरूम की तरफ चल दिया। समीर ने हुमा को इस तरह उठाया हुआ था की हुमा के होंठ समीर के होंठों से टकरा रहे थे।

समीर- हुमा तुम बहुत खूबसूरत हो। तुम जैसी खूबसूरत लड़की मैंने आज तक नहीं देखी।

हुमा के चेहरे पर अपनी इतनी तारीफ सुनकर एक हल्की सी मुश्कान आ जाती है।

समीर- "उफफ्फ... कितनी प्यारी मुश्कान है तुम्हारी..." और मुश्कुराते हए- “ये दोनों होंठ किसी गुलाब की पत्तियों जैसे लग रहे हैं जी करता है बस इन होंठों को.......” कहते-कहते समीर ने हुमा के होंठों को अपने होंठों में भींच लिया, और यूँ ही अपने बेड पर लिटाकर हुमा के होंठों को चूसता रहा, और हाथों से धीरे-धीरे चूचियों को सहलाता जा रहा था।

हुमा को भी अब कुछ-कुछ होने लगा था, और हुमा की सिसकियां निकलनी शुरू हो गईं- “आss इसस्स्स... सस्स्सी ... उईईई... आहह..” हुमा एकदम खामोश बेड पर लेटी थी, और समीर आगे बढ़ता जा रहा था।

समीर के होंठ सरकते हुए नीचे आने लगे। गर्दन से होते हुए हुमा की चूचियों तक पहुँच गये। हुमा की चूचियों के निप्पल टाइट हो चुके थे और समीर अपने होंठों से निप्पल पकड़ने की कोशिश कर रहा था। समीर निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा।

हुमा - “आहह... सस्स्स्स्सी ... सर बस्स अब रहने दीजिए."

मगर समीर निप्पल को चाटने लग जाता है, और हुमा को अपनी चूचियों में बेचैनी सी होने लग जाती है।

हुमा- “आअहह... समीर उहह... इम्म्म्म... सस्स्सी ..." और जाने कैसी-कैसी आवाजें हुमा निकालने लगी।

समीर के हाथ खिसकते हए अब और नीचे बिल्कुल चूत के छेद पर पहुँच गये। समीर अपनी एक उंगली से चूत का छेद देखने लगा। मगर चूत की फांकें एक दूसरे से चिपकी हुई थी। चूत में अभी तक गीलापन नहीं आया था। शायद हुमा को अभी सेक्स वाली फीलिंग नहीं आई थी। समीर अपनी उंगली हटाकर अपने मुँह में ले लेता है, और उंगली को थूक में गीला करके फिर से चूत का छेद टटोलता है। समीर के ऐसा करने से हुमा की चूत में

गीलापन आने लगता है।

समीर को भी अपनी उंगली का पोर छेद में घुसता महसूस हो जाता है। मगर जैसे ही समीर की थोड़ी सी उंगली चूत के छेद में घुसती है, हुमा की दर्द भरी सिसकी निकाल जाती है।

हुमा- “आहह... प्लीज़्ज़ सर... न्नहीं करो..."

मगर समीर अब कहां रुक सकता था। ऐसी मस्त चूत देखकर समीर का लण्ड तो जोश में बाहर निकलकर चूत के छेद में घुसने को तैयार था। मगर समीर ये काम जल्दबाजी में नहीं करना चाहता था। समीर अपने होंठों को हुमा की चूत पर लगा देता है। उफफ्फ... हुमा की बेचैनी ऐसी हो चुकी थी की अब हुमा का चुपचाप लेटना मुश्किल था। और अब चूत में भी रस बहने लगा। जो समीर अपने होंठों से चूस रहा था।

हुमा के हाथ अपने आप समीर के बालों में पहुँच चुके थे। हुमा को इस खेल में अब मजा सा आने लग चुका था,

और हुमा समीर के सिर को अपनी चूत पर दबाये जा रही थी। समीर की जीभ भी छेद के अंदर तक घुसने लगी। जिससे हुमा को सेक्स की फीलिंग जागने लगी, और हुमा की चूत और अंदर तक कुछ लेना चाहने लगी।

हुमा- “सर... कुछ कीजिए आहह... ओहह..” और हुमा का जिश्म अकड़ने लगा और हुमा अपने जिश्म को समीर के मुँह की तरफ धकेलने लगी।

समीर बड़ी लगन से चूत की चुसाई किए जा रहा था। हुमा के जिश्म से कोई ज्वालामुखी निकलने को बेताब हो रहा था। अभी तक हुमा को ये सब नहीं मालूम था। हुमा की सिसकियां शरूर में बदल चुकी थी।

हुमा- “उहह... सस्स्सी ... मुझे कुछ हो रहा है.."

उधर समीर अपनी उंगली भी चूत में डालने लगा। हुमा की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। समीर की ऐसी चुसाई से हुमा की चूत का ज्वालामुखी 5 मिनट में फूट पड़ा, और हुमा ने आज पहली बार इस सुख का भोग चखा। हुमा आँखें बंद किए बेड पर लुढ़क चुकी थी।

समीर अपनी पैंट उतारकर एकदम नंगा हो जाता है। लण्ड किसी खंबे जैसा खड़ा था। समीर सोचता है हुमा इसे लेने के लिए राजी कैसे होगी? वो हुमा के चेहरे के करीब पहुंचता है।

समीर- मेरी जान मजा आया?

हुमा- हूँ।

समीर हुमा को बाँहो में भर लेता है। समीर का लण्ड हुमा को चुभने लगता है। अभी तक हुमा ने कोई लण्ड देखा नहीं था। समीर हुमा का हाथ पकड़ अपने लण्ड पर रख देता है। हुमा का हाथ जैसे ही लण्ड से टच होता है, हुमा को लगता है जैसे कोई गरम स्टील की रोड हाथ में आ गई हो, और हुमा एकदम से लण्ड से हाथ हटा लेती है। मगर समीर फिर से हुमा का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख देता है, और हुमा के हाथों को अपने हाथों में पकड़े-पकड़े लण्ड को पूरी तरह महसूस कराता है।
 
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