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समीर हुमा को बाँहो में भर लेता है। समीर का लण्ड हुमा को चुभने लगता है। अभी तक हुमा ने कोई लण्ड देखा नहीं था। समीर हुमा का हाथ पकड़ अपने लण्ड पर रख देता है। हुमा का हाथ जैसे ही लण्ड से टच होता है, हुमा को लगता है जैसे कोई गरम स्टील की रोड हाथ में आ गई हो, और हुमा एकदम से लण्ड से हाथ हटा लेती है। मगर समीर फिर से हुमा का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख देता है, और हुमा के हाथों को अपने हाथों में पकड़े-पकड़े लण्ड को पूरी तरह महसूस कराता है।
समीर अपने लण्ड के हाथों में आगे-पीछे करने लगता है। समीर का दिल चाह रहा था की बस लण्ड चूत में घुस जाय। मगर ये काम इतना आसान नहीं था। समीर थोड़ी देर यूँ ही हुमा से अपना लण्ड सहलवाता रहा। समीर का मा के हाथ में था, और समीर का दिल अब और आगे बढ़ने को करने लगा। समीर सोच रहा था क्या हुमा मेरा लण्ड ब्लो-जोब कर सकती है?
समीर- हुमा।
हुमा- जी।
समीर- तुम्हें मेरा यूँ प्यार करना बुरा तो नहीं लग रहा?
हुमा- नहीं तो।
समीर- अच्छा लग रहा है?
हुमा- हाँ जी।
समीर- तुमसे कुछ करवाना है, कर सकती हो?
हुमा - क्या?
समीर अपना लण्ड हुमा के हाथ से छुड़ाकर हुमा के चेहरे के पास ले जाता है- “इसको किस कर दो.."
हुमा की नजर पहली बार लण्ड पर पड़ती है, उफफ्फ... इतना लंबा मोटा लण्ड देखकर हुमा सहम जाती है और
आँखें बंद करते हुए बोलती है- "नहीं सर, ये मुझसे नहीं होगा.."
समीर- प्लीज़्ज़... हुमा एक बार ट्राई तो करो, तुम्हें भी अच्छा लगेगा।
हुमा- सर कुछ हो गया तो?
समीर- हुमा कुछ नहीं होगा, मुझ पर भरोशा रखो।
हुमा समीर की खातिर आँखें खोल देती है और लण्ड के सुपाड़े पर अपने रसीले होंठों से हल्का सा किस कर देती है। समीर तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया। समीर ये अहसास जी भरकर लेना चाहता था।
समीर- हुमा मुँह खोलो ना।
हुमा मुँह खोल देती है और समीर अपने लण्ड को हुमा के मुँह की तरफ करते हुए- “इसको अंदर ले लो.."
हुमा अपने हाथ से लण्ड पकड़कर लण्ड का
भर लेती है। समीर की आह निकाल जाती है।
समीर- "अहह... इस्स्स्स ... हुमा बस ऐसे ही करो आईई इस्स्स्स ."
समीर के लण्ड पर हुमा के रसीले होंठ चिपक चुके थे। समीर की भी मस्ती में आँखें बंद हो चुकी थीं, और समीर हुमा के रसीले होंठों का अहसास समीर को मस्त किए जा रहा था। हुमा पहली बार ये सब कर रही थी। हुमा सिर्फ लण्ड के सुपाड़े को ही अपने मुँह में लिए हुए थी। समीर हुमा के सिर को पकड़कर हल्के-हल्के अपने लण्ड पर दबाने लगा। हुमा समझ गई समीर सर लण्ड को और अंदर करना चाहते हैं।
हुमा भी अपने होंठ खोल देती है, और समीर लण्ड को मुँह में धकेल देता है। आधा लण्ड अब हुमा के मुँह में घुस जाता है। हुमा को थोड़ी परेशानी सी होने लगी। मगर समीर की खातिर हुमा लण्ड को मुँह में अंदर-बाहर करती रही। समीर भी हुमा के सिर को पकड़कर लण्ड को अंदर-बाहर किए जा रहा था।
थोड़ी देर बाद समीर का लण्ड फौवारा छोड़ने की हालत में पहुँच चुका था। समीर हुमा के मुँह में पिचकारी नहीं छोड़ना चाहता था। पता नहीं हुमा को इसका स्वाद पसंद ना आये? जल्दी से समीर हुमा के मुँह से लण्ड बाहर निकाल लेता है और अपना अंडरवेर उठाकर लण्ड की पिचकारी छोड़ देता है। लण्ड झटके मार-मारकर पिचकारी छोड़ रहा था। समीर तृप्त हो चुका था।
हुमा भी बेड पर नंगी लेटी अपने जिश्म को छपाने की कोशिश कर रही थी, और बेड की चादर से अपने जिश्म को ठक लेती है। थोड़ी देर बाद समीर भी बेड पर हुमा की बाँहो में लेट जाता है।
समीर- हुमा, मेरा प्यार करना तुमको कैसा लगा?
हुमा कुछ नहीं बोली।
समीर- क्या बात है हुमा इतनी खामोश क्यों हो?
हुमा- सर हमें शर्म आ रही है।
समीर- अच्छा ये तो बता दो तुमको मेरा यूँ प्यार करना कैसा लगा?
हुमा- अच्छा लगा।
समीर ये सुनकर खुशी में हुमा के होंठ चूम लेता है, और लण्ड में भी फिर से तनाव आ जाता है। और लण्ड हुमा की गाण्ड की दरार में घुसने लगता है।
समीर हुमा मेरे लिए थोड़ा दर्द सह सकती हो?
हुमा - सर, आपके लिए तो हम अपनी जान भी दे सकते हैं। बताए क्या करना है?
समीर हुमा के इतना कहते ही खुशी के मारे उछल पड़ा- "प्यार करना है.." और समीर बेड से उठकर अलमारी से नारियल तेल की शीशी उठा लेता है।
समीर अपने लण्ड के हाथों में आगे-पीछे करने लगता है। समीर का दिल चाह रहा था की बस लण्ड चूत में घुस जाय। मगर ये काम इतना आसान नहीं था। समीर थोड़ी देर यूँ ही हुमा से अपना लण्ड सहलवाता रहा। समीर का मा के हाथ में था, और समीर का दिल अब और आगे बढ़ने को करने लगा। समीर सोच रहा था क्या हुमा मेरा लण्ड ब्लो-जोब कर सकती है?
समीर- हुमा।
हुमा- जी।
समीर- तुम्हें मेरा यूँ प्यार करना बुरा तो नहीं लग रहा?
हुमा- नहीं तो।
समीर- अच्छा लग रहा है?
हुमा- हाँ जी।
समीर- तुमसे कुछ करवाना है, कर सकती हो?
हुमा - क्या?
समीर अपना लण्ड हुमा के हाथ से छुड़ाकर हुमा के चेहरे के पास ले जाता है- “इसको किस कर दो.."
हुमा की नजर पहली बार लण्ड पर पड़ती है, उफफ्फ... इतना लंबा मोटा लण्ड देखकर हुमा सहम जाती है और
आँखें बंद करते हुए बोलती है- "नहीं सर, ये मुझसे नहीं होगा.."
समीर- प्लीज़्ज़... हुमा एक बार ट्राई तो करो, तुम्हें भी अच्छा लगेगा।
हुमा- सर कुछ हो गया तो?
समीर- हुमा कुछ नहीं होगा, मुझ पर भरोशा रखो।
हुमा समीर की खातिर आँखें खोल देती है और लण्ड के सुपाड़े पर अपने रसीले होंठों से हल्का सा किस कर देती है। समीर तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया। समीर ये अहसास जी भरकर लेना चाहता था।
समीर- हुमा मुँह खोलो ना।
हुमा मुँह खोल देती है और समीर अपने लण्ड को हुमा के मुँह की तरफ करते हुए- “इसको अंदर ले लो.."
हुमा अपने हाथ से लण्ड पकड़कर लण्ड का
भर लेती है। समीर की आह निकाल जाती है।
समीर- "अहह... इस्स्स्स ... हुमा बस ऐसे ही करो आईई इस्स्स्स ."
समीर के लण्ड पर हुमा के रसीले होंठ चिपक चुके थे। समीर की भी मस्ती में आँखें बंद हो चुकी थीं, और समीर हुमा के रसीले होंठों का अहसास समीर को मस्त किए जा रहा था। हुमा पहली बार ये सब कर रही थी। हुमा सिर्फ लण्ड के सुपाड़े को ही अपने मुँह में लिए हुए थी। समीर हुमा के सिर को पकड़कर हल्के-हल्के अपने लण्ड पर दबाने लगा। हुमा समझ गई समीर सर लण्ड को और अंदर करना चाहते हैं।
हुमा भी अपने होंठ खोल देती है, और समीर लण्ड को मुँह में धकेल देता है। आधा लण्ड अब हुमा के मुँह में घुस जाता है। हुमा को थोड़ी परेशानी सी होने लगी। मगर समीर की खातिर हुमा लण्ड को मुँह में अंदर-बाहर करती रही। समीर भी हुमा के सिर को पकड़कर लण्ड को अंदर-बाहर किए जा रहा था।
थोड़ी देर बाद समीर का लण्ड फौवारा छोड़ने की हालत में पहुँच चुका था। समीर हुमा के मुँह में पिचकारी नहीं छोड़ना चाहता था। पता नहीं हुमा को इसका स्वाद पसंद ना आये? जल्दी से समीर हुमा के मुँह से लण्ड बाहर निकाल लेता है और अपना अंडरवेर उठाकर लण्ड की पिचकारी छोड़ देता है। लण्ड झटके मार-मारकर पिचकारी छोड़ रहा था। समीर तृप्त हो चुका था।
हुमा भी बेड पर नंगी लेटी अपने जिश्म को छपाने की कोशिश कर रही थी, और बेड की चादर से अपने जिश्म को ठक लेती है। थोड़ी देर बाद समीर भी बेड पर हुमा की बाँहो में लेट जाता है।
समीर- हुमा, मेरा प्यार करना तुमको कैसा लगा?
हुमा कुछ नहीं बोली।
समीर- क्या बात है हुमा इतनी खामोश क्यों हो?
हुमा- सर हमें शर्म आ रही है।
समीर- अच्छा ये तो बता दो तुमको मेरा यूँ प्यार करना कैसा लगा?
हुमा- अच्छा लगा।
समीर ये सुनकर खुशी में हुमा के होंठ चूम लेता है, और लण्ड में भी फिर से तनाव आ जाता है। और लण्ड हुमा की गाण्ड की दरार में घुसने लगता है।
समीर हुमा मेरे लिए थोड़ा दर्द सह सकती हो?
हुमा - सर, आपके लिए तो हम अपनी जान भी दे सकते हैं। बताए क्या करना है?
समीर हुमा के इतना कहते ही खुशी के मारे उछल पड़ा- "प्यार करना है.." और समीर बेड से उठकर अलमारी से नारियल तेल की शीशी उठा लेता है।