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Incest जिंदगी के रंग अपनों के संग

जॅक-ठीक है जब तक तुम मेरी बातें मानते रहोगे तब तक ली अजय बन के तुम्हारी फॅमिली को ख़ुसी और सेफ्टी दोनों देगा पर जिस दिन भी तुम मुझे..,

में-में समझ गया कब से स्टार्ट करना है ये बताओ .

जॅक-हम कल सुबह निकलेगे यहाँ से अभी तुम जाओ यहाँ से ली तुम्हारी फॅमिली के साथ आने वाला है तुम अपने कमरे में जाओ बाकी की बाते वो तुमे वहाँ आ के बता देगा.

और में किसी जिंदा लाश की तरह वहाँ से उठ के अपने कमरे में चला आया.मुझे नही पता कि जॅक मुझसे क्या चाहता है पर मुझे ये पता है कि वो जो बोल रहा है वो कर सकता है और में किसी भी तरह अपने परिवार को खोना नही चाहता था.वक़्त भी क्या चीज़ है हर पल अपना

रंग ऐसे बदलता है हर इंसान इसका बस एक गुलाम बन के रह जाता है जैसे कि आज में कल तक में अपने आपको एस दुनिया का सब

से ख़ुसनसीब इंसान समझ रहा था और आज मुझे अपने होने पे ही अफ़सोस था.

वहाँ जॅक भी अपने ख़यालो में खोया हुआ था.मुझे माफ़ करना अजय पर ये ज़रूरी था तुम्हारे और हमारे लिए जब तक तुम यहाँ से दूर नही जाओगे तुम अपने आपको समझ नही पाओगे.ये तुम्हारी अपनी जिंदगी नही है ये उन लोगो के विश्वास के जिंदगी है जो तुम पे विश्वास करते है ये उन लोगो की जिंदगी है जिन्होने सिर्फ़ तुम्हारे लिए अपनी जिंदगी की कुर्बानी डी है.और रही बात तुम्हारी इस फॅमिली की तो इसे तो में

वैसे भी कुछ नही कर सकता क्यूँ कि जिसे तुम प्रोटेक्ट करो उसे तो हम वैसे भी कुछ नही कर सकते मुझे उम्मीद है कि तुम अपनी आने वाली लाइफ के लिए तैयार होगे.

इधर में अपने ख़यालो में ही खोया हुआ था कि मेरा फोन बजने लगा मेरा मन नही था इस वक़्त किसी से भी बात करने का इसलिए मैने फोन की तरफ ध्यान नही दिया और बजने दिया.एक बार मेरा ध्यान फिर फोन की बेल ने तोड़ा इस बार मैने गुस्से में फोन को उठा के दीवार पे मारना चाहा पर जैसे की मेरी नज़र फोन की स्क्रीन पे पड़ी मेरे हाथ अपने आप ही रुक गये .........

फोन नैना दी का था दिल ना करते हुए भी मुझे फोन उठाना ही था इसलिए मैने जा के पहले वॉशरूम में अपना हूलिया ठीक किया क्यूँ कि दी की वीडियो कॉलिंग थी और में नही चाहता था कि वो मुझे ऐसे देखे और वापस आ के मैने उन्हे कॉल बॅक किया.

नैना दी-अजय वहाँ सब ठीक है ना में कब से कॉल कर रही हूँ तू खा था.मेरी तो जान ही निकल गयी थी मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा में अब

तेरे पास आ रही हूँ आज ही तू मुझे रिसिव करने एरपोर्ट आ जा.

में-क्या दी आप भी ना अब में कोई छोटा बच्चा नही हूँ और में वॉशरूम में था जैसे ही आया तुरंत आपको कॉल बॅक किया हैआप भी ना बस ज़रा ज़रा सी बात पे घबरा जाती हो.और आपको अभी आने की कोई ज़रूरत नही है आप अकेले नही हो वहाँ मॉम (मामी)और डॅड(मामा) भी है अगर आप भी यहाँ आ गयी तो वो तो बिल्कुल ही टूट जाएगे.

नैना दी-तू मुझे एमोशनल ब्लॅक मेल नही कर सकता समझा.

में-क्या दी आप जैसे इंटेलिजेंट को भी कोई एमोशनल या बेबकूफ़ बना सकता है क्या आप भी ना.प्ल्ज़ समझा करो अगर आप भी यहाँ आ

गयी तो वहाँ सब अकेले पड़ जाएगे प्ल्ज़.

नैना दी-चल चल ज़्यादा मस्का लगाने की ज़रूरत नही है ठीक है और सुना क्या हो रहा है वहाँ कोई गर्लफ्रेंड मिली या अभी तक ऐसा ही है.

में-क्या दी आप भी ना बस ज़रा सा मोका मिलना चाहिए बस फिर तो मेरी खीचाई होना तय है.वैसे हम लोग कल एक ट्रिप पे जा रहे है.

नैना दी-सच में बहुत अच्छा लगा ये जान के कि तू वहाँ पे अपने आपको अकेला महसूस नही कर रहा.चल में अब फोन रखती हूँ ट्रिप से आ के मुझे पूरी रिपोर्ट चाहिए समझा.

में-ये भी कोई बोलने की बात है.

फिर दी ने फोन रख दिया और मैने भी फोन को एक साइड में फेख दिया.अब मेने उपर से एक बहुत बड़ा भोझ कम होता हुआ महसूस हुआ और वही बेड पे लेट गया और अपने आने वाली जिंदगी के बारे में सोचने लगा.अभी में अपने आने वाली जिंदगी के बारे में सोच ही रहा था कि

मुझे किसी की आवाज़ सुनाई दी मैने उठ के देखा तो वो ली था.
 
में-ये भी कोई बोलने की बात है.

फिर दी ने फोन रख दिया और मैने भी फोन को एक साइड में फेख दिया.अब मेने उपर से एक बहुत बड़ा भोझ कम होता हुआ महसूस हुआ और वही बेड पे लेट गया और अपने आने वाली जिंदगी के बारे में सोचने लगा.अभी में अपने आने वाली जिंदगी के बारे में सोच ही रहा था कि

मुझे किसी की आवाज़ सुनाई दी मैने उठ के देखा तो वो ली था.

में-तो कैसा रही शॉपिंग .

ली-बकवास बस पूरे टाइम इधर से उधर ही घूमता रहा और कुछ नही.तुम सुनाओ तुम्हारा टाइम कैसा गुजरा.

में-तुम्हें क्या लगता है कैसा गुज़ारा होगा मेरा टाइम.

ली-जॅक सर के साथ हमेंशा कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है बस बाकी तो वो कमाल के फाइटर है बस में इतना ही जानता हूँ.

में-हाँ शायद तुम सही हो .पर मेरे लिए आज से जॅक को ग़लत साबित करना ही मेरे लाइफ का उद्देश् है .

ली-तब तो गुड लक क्यूँ कि तुम्हें उस की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है.

में-थॅंक्स फॉर ब्लशसिंग अब मुझे ये बताओ कि तुम मुझे क्या बताने आए हो जॅक ने कहा था कि तुम मुझे मेरे पहले स्टेप के बारे में बताओगे .

ली-हूँ तो बात ये है कि में तुम्हारा रूप तो ले सकता हूँ पर तुम्हारे विचार और तुम्हारी सोच को अभी तक कॉपी नही कर पाया हूँ उसके लिए

मुझे तुम्हारी हेल्प चाहिए.

में-में क्या कर सकता हूँ .

ली-कुछ खास नही बस कुछ देर के लिए तुम शांत रहो में तुम्हारे दिमाग़ में घुस के सब कॉपी कर लूँगा बस तुम किसी भी काम में मुझे रोकना मत .

में-ओके .

फिर ली खड़ा हो गया और मेरे पीछे आ के उस ने अपने दोनों हाथों को कुछ अजीब सी पोज़िशन में किया और अपने दोनों हाथों को जोड़ते

हुए अपने हाथों से एक हल्की सी वाइट रोशनी निकालने लगा.

ली-डरो मत ये तुम्हारी सेफ्टी के लिए है .

में-किस चीज़ से सेफ्टी.

ली-तुम समझ जाओगे अब बिल्कुल शांत रहो टेन्षन ना लो मुझे पे भरोसा रखो.
 
मैने ली की बातों को मानते हुए अपने आपको ढीला छोड़ दिया और कुछ ही देर में मुझे अपने कंधे पे किसी के हाथ महसूस हुए में समझ गया कि ये ली ही है पर फिर मुझे कुछ अजीब लगा जैसे कि कोई मेरे अंदर आने की कोशिश कर रहा है और कोई चीज़ उसे ऐसा करने से रोक रही है.

ली-शांत रहो अजय अगर तुम ऐसे ही डरते रहोगे तो हम दोनों के लिए ही ख़तरनाक है इस टाइम हम दो नही एक है अगर तुम मुझे ऐसे ही

रोकते रहोगे तो हम से किसी एक को हार माननी पड़ेगी और ये किसी के लिए भी अच्छा नही होगा सो प्ल्ज़ रेलेक्स..

फिर मेने एक लंबी सास ली और अपने आपको रेलेक्स फील करने लगा और कुछ देर के बाद मुझे महसूस हुआ कि अब जो चीज़ उसे अंदर आने से रोक रही थी वो अब शांत थी.

तभी मुझे मेरे अंदर से ली की आवाज़ सुनाए दी.बहुत बढ़िया अजय तुम ने तो अपने दिमाग़ पे बहुत जल्द ही अपनी पकड़ बना ले मुझे ये काम

करने में पूरे दो महीने लग गये थे तुम सच में स्पेशल हो बस मेरा काम भी हो गया.और ली ने अपने हाथ मेरे कंधे से हटा लिए.

ली-तो कैसा फील हो रहा है.

में-ये क्या मज़ाक है तुम ने क्या किया मेरे साथ .

ली-क्यूँ क्या हुआ मैने क्या किया.

में-तुम तो कुछ बोल भी नही रहे और मुझे तुम्हारी आवाज़ बिल्कुल ही सॉफ साफ सुनाई दे रही है ये कैसे हुआ.

ली-ओह ये मैने तुम्हारे अंदर अपने दिमाग़ का एक छोटा सा हिस्सा बिठा दिया है जहाँ तुम जा रहे हो वहाँ तुम को इसकी बहुत ज़रूरत पड़ेगी क्यूँ कि वो तुम्हारे लिए ही नयी दुनिया होगी और तुम वहाँ के बारे में कुछ नही जानते वो दुनिया यहाँ जैसी बिल्कुल नही है वो पूरी तरह

से छलावो से भरी पड़ी है अगर वहाँ तुम बिना किसी तैयारी के गये तो एक दिन भी जिंदा रह सकते समझे और फिर अगर मुझे यहाँ तुम्हारी कभी ज़रूरत पड़ी तो में तुम से कॉंटॅक्ट में रहुगा इससे .

में-थॅंक्स अब क्या तुम मेरी एक लास्ट मदद कर सकते हो.

ली-मुझे पता है आज कि रात तुम अपनी फॅमिली के साथ रह सकते हो जॅक सर को में समझा लूँगा .

में-थॅंक्स यार में तुम्हारा ये अहसान कभी नही भूलुगा.

और मैने उठ के ली को गले लगा लिया .ली कोई नही यार में समझ सकता हूँ और मुझे पूरी उम्मीद है कि जब तुम्हें सच का पता चलेगा तो तुम भी इस बात को समझ जाओगे कि ये सब कितना ज़रूरी है.

ली-चलो अब जाओ नीचे तुम्हारी गुड़िया तुम्हारा इंतज़ार कर रही है.

में-अगर लाइफ में कभी कुछ बनपाया या कभी तुम्हें कभी मेरी मदद की ज़रूरत पड़े तो में अपनी जान देने से भी पीछे नही हटूँगा.

ली- में जानता हू .वैसे मानना पड़ेगा तुम दोनों भाई बेहन के रिस्ते को किसी को मुझ पे शक नही था पर गुड़िया को कभी भी मुझ पे यकीन नही हुआ की में असली अजय हूँ सच में मुझे ऐसा प्यार देख के बहुत अच्छा लगा चलो में जाता हूँ कल मॉर्निंग में आ जाउन्गा ओके गुड नाइट

अगर नीद आए तो.

और ली वहाँ से चला गया गुड़िया के बारे में सुन के मुझे बहुत अच्छा लगा और दुख भी हुआ कि कही कल मेरे जाने के बाद उस का क्या होगा.फिर में वॉशरूम में चला गया और एक बार और फ्रेश हो के नीचे चला गया और फ्रेश हो के नीचे जाने लगा……
 
में नीचे हॉल में आया तो यहाँ का महॉल काफ़ी ख़ुसनूमा था सभी खुस लग रहे थे सिर्फ़ एक को छोड़ कर और थी मेरी गुड़िया .गुड़िया वहाँ बैठी ज़रूर थी पर उस का सारा ध्यान तो मेरे कमरे पे था जैसे कि वो बस मेरा ही इंतज़ार कर रही हो और मुझे देखते ही उस का चेहरा एकदम ख़ुसी से खिल गया जैसे कि उस को दुनिया की सब से कीमती चीज़ मिल गयी हो.और भाग के मेरे गले लग लगी उस को ऐसा करते देख एक बार फिर मेरे दिल में उस से जुदा हो के जीने के अहसास ने हिला के रख दिया मुझे नही पता कि मैने अपने जिंदगी के 15साल

इसके बिना कैसे काटे पर अब मेरी सोच ये थी कि काश में अपनी प्रिन्सस(गुड़िया ) से ना मिला होता.समझदार और बहादुर लोग किसी के साथ बिताए हुए कुछ ख़ुसी के पॅलो में ही अपनी पूरी जिंदगी बिता देते है पर शायद में ना तो समझदार था और ना ही बहादुर नही तो में ऐसे

नही टूट रहा होता.पर किसी ने सही कहा है कि डर इनसेन को सब सहने की ताक़त और हिम्मत देता है और मेरे साथ भी ऐसा ही था.

हम लोग करीब 5मीं.तक ऐसे ही खड़े रहे ना मुझे में गुड़िया को अलग करने की हिम्मत थी और ना वो ही मुझसे अलग होना चाह रही थी हमारे लिए तो जैसे वक़्त थम ही गया था और अब वो वक़्त दूर नही था जब मेरे आँसू निकल जाए पर किसी ने सही कहा है की बुजदिल इंसान कभी कुछ नही कर सकता ये ही हाल इस वक़्त मेरा था में गुड़िया को खुद से अलग तो करना चाह रहा था पर ये दिल इसके लिए राज़ी बिल्कुल नही था और दिमाग़ बोल रहा था की अगर अभी तूने इसे अपने से अलग नही किया तो आगे होने वाली प्रॉब्लम के लिए तू खुद ही

ज़िम्मेदार होगा में एक ऐसी कशमश में फसा हुआ था कि में खुद ही नही जानता था कि क्या करूँ.

जिया दी-सब ठीक है ना अजय.

में-अपने ख़यालो से बाहर आते हुए.जी दी मुझे क्या होना है में तो बिल्कुल ठीक हूँ.

मॉम-तुम दोनों भाई बेहन अपना ये प्यार ख़तम करो आओ यहाँ बैठो मुझे तुम से कुछ बात करनी है.

गुड़िया -मॉम आप ने आज तो बोल दिया दोबारा कभी ऐसा बोला ना तो मुझसे बुरा कोई नही होगा.जिस दिन हमारा प्यार ख़तम हुआ ना वो मेरी जिंदगी की आख़िर दिन होगा आप देख लेना.

मॉम-चुप कर कोई ऐसा भी बोलता है क्या अगर दोबारा ऐसा बोला ना तो देख में क्या करती हूँ.

में-गुड़िया ये सब क्या है अभी के अभी मॉम से माफी माँगो और आज के बाद तुम ने अगर कभी ऐसा कुछ कहा या किया ना तो फिर तो फिर मुझे नही पता की में क्या करूगा.

गुड़िया -सॉरी मॉम पर आप ने भी तो****

में-गुड़िया ***

गुड़िया -ओके सॉरी मॉम आगे से ऐसा कभी नही होगा गॉड प्रोमिस अब आप प्ल्ज़ अपने मूड को ठीक कीजिए प्ल्ज़ नही तो भाई का भी मूड ठीक नही होगा प्लज़्ज़्ज़.

मॉम(हन्सते हुए)तो तुझे अब भी अपने भाई की पड़ी है और मेरी नही भाई की चमची रुक तुझे अभी बताती हूँ.

और मॉम ने उसके कान पकड़ लिए और गुड़िया ना ना में अपना सिर हिलाने लगी और मुझसे ये देखा नही गया और मैं अपने कान पकड़ते हुए मॉम के सामने आ गया.

में-मॉम इसमें इसकी कोई ग़लती नही है इसमें सारी ग़लती मेरी है मैने ही इसे सिर पे चढ़ा रखा है प्ल्ज़ इसे छोड़ दे प्ल्ज़ चाहे तो मुझे सज़ा दे दो.

मॉम(हँसते हुए मुझे गले लगाते हुए) सज़ा किस लिए में तो बस ये देखना चाह रही थी कि तू कैसे रेएक्ट करता है.तेरी गुड़िया सच में बहुत खुसकिस्मत है जो तू उसके साथ है.(और मेरे माथे पे किस करते हुए) चल आ जा बाकी के सब भी तेरा ही वेट कर रहे है किसीने भी अभी

टी तक नही पी सब तेरा ही वेट कर रहे है.

अमृता-किसी को अगर अपनी गुड़िया के अलावा कोई दिखे तभी तो.

पर तभी पता नही रवि को क्या हुआ वो भी आ के मेरे गले लग गया और रोने लगा मेरे तो समझ में नही आ रहा था कि ये हो क्या रहा है.
 
में-क्या हुआ यार तुझे तू तो हम सब से बहादुर है फिर ये आँसू तुझे पे बिल्कुल भी अच्छे नही लगते चल चुप हो जा और बता कि बात क्या है.

रवि-कुछ नही बस किसी की याद आ गयी थी.

में-हे ये तो कोई बात नही है तूने जिया दी से प्रोमिस किया था कि तू उस हादसे को भूल जाएगा.दी आप ही इसे समझाओ ना प्ल्ज़.

जिया दी-रवि इधर आ.तूने ये क्यूँ कि सोच लिया कि तू अकेला है में हूँ ना तेरे साथ जो हुआ उसे अब भूल जा चल अपने आँसू सॉफ कर नही तो निशा क्या सोचेगी तेरे बारे में(हाँ दोस्तो बिल्कुल सही सोचा आप ने मैने जिया दी को ये बता दिया था कि रवि निशा पे ट्राइ कर रहा है में

अपनी नैना दी या जिया दी से कुछ नही छिपाता जब तक वो ज़रूरी ना हो)

गुड़िया -गुड़िया भी उन के हग में शामिल होते हुए.में भी तो आप की लिट्ल सिस्टर हूँ में भी आप से बहुत प्यार करती हूँ .हाँ अजय भाई से

थोड़ा सा कम .

और हमारे बार्बी डॉल के इस जबाब से सभी के चहरे पे मुस्कान आ गयी.

अमृता-हाँ क्यूँ नही 5.1इंच की लिट्ल लिट्ल सिस्टर मुबारक हो रवि अब तक ये अजय की जान खाती थी आज से तू भी तैयार हो जा.

निशा-ऐसा नही है ये तो बहुत ही प्यारी और समझदार है.

मॉम-तुम लोगो का मेल मिलाप ख़तम हो गया हो तो अब डिन्नर लगा दूं.

अमृता-अभी कहाँ आंटी अभी तो मेरा नो पेंडिंग में है ये गुड़िया की बच्ची छोड़े तब तो में भी मेल मिलाप करू.

गुड़िया -तो आपको रोका किस ने है पर में यहाँ से नही हटने वाली चाहे जो हो जाए.

अमृता-अच्छा निशा चल तू इसके पैर पकड़ में इसके हाथ और टाँग के इसको इसके कमरे में बंद कर देते है फिर देखते है क्या करती है.

गुड़िया चिल्लाते हुए नही और मेरे पीछे छिप गयी.

जिया दी-क्या हुआ शेरनी अब क्यूँ बिल्ली बनी फिर रही है चल सामने आ .

गुड़िया -क्या दी में तो मज़ाक कर रही थी आप भी ना .

अमृता-अच्छा तो में भी मज़ाक ही कर रही थी .

गुड़िया -मुझे पता था आप थोड़े ना ऐसा करती आप तो कितनी समझदार और खूबसूरत है.

जिया दी-मस्का लगाने की ज़रूरत नही है.

मॉम-चलो डिन्नर लग गया है सब चल के कर लो.
 
हम सब डिन्नर टेबल पे बैठने लगे तो यहाँ भी एक महाभारत सी छिड़ गयी की मेरे पास कौन बैठेगा.और 15मीं के महाभारत के बाद ये डिसाइड हुआ कि मेरे लेफ्ट में निशा और राइट में गुड़िया बैठेगी ऐसा नही है की किसी को मेरे पास बैठने में इंटेरेस्ट था वो तो सब गुड़िया

की टाँग खिच रहे थे.

फिर डिन्नर सुरू हुआ सब ने स्टार्ट किया पर गुड़िया ने अपने दोनों हाथ को कोहनियो के बल टेबल पे रख के अपना सिर उसके सहारे रख के इधर उधर देखने लगी .......

फिर डिन्नर शुरू हुआ सब ने स्टार्ट किया पर गुड़िया अपने दोनों हाथ को कोहनियो के बल टेबल पे रख के अपना सिर उसके सहारे रख के इधर उधर देखने लगी .......

अमृता-अब तुझे क्या हुआ तू डिन्नर क्यूँ नही कर रही.

मॉम-बेटा तू उस को छोड़ उस की तो आदत खराब कर दी है अजय ने जब तक वो अपने हाथों से नही खिलाएगा वो नही खाने वाली.

जिया दी-इंटरेस्टिंग तूने कभी मुझे या नैना को तो नही खिलाया अपने हाथों से इसका क्या मतलब निकाले हम.

रवि-मतलब क्या निकालना है सीधी सी बात है आप लोगो से वो कम प्यार करता है और क्या .

में-तू अपना मुँह बस खाने के लिए ही खोल नही तो किसी काम का नही छोड़ूँगा समझा.जब भी मुँह खोलेगा बकवास ही बाहर आएगी.और दी ये क्या है वो छोटी है मुझसे जैसे में आप सब से तो फिर मेरा हक बनता है खाना का खिलाने का नही.

जिया दी-हँसते हुए अच्छा ठीक है चल आज में तुझे खिलाती हूँ अपने हाथों से.

गुड़िया -नही दी में खिला दूँगी आप परेशान ना हो आप आप खाना ख़तम करे में खिला देती हूँ भाई.को

अमृता-ऐसे कैसे खिला देती हूँ हमारे होते हुए तुझे कोई परेशानी हो ये ठीक नही तू आराम से बैठ के अपने भाई से अपना खाना खा अजय को हम खिला देंगे.

मॉम-हाँ अमृता ने बिल्कुल सही कहा.जो लड़की अपना खुद का खाना नही खा सकती वो दूसरे को क्या खिलाएगी.अजय तुझे में खिलाती हूँ

वैसे भी कभी तूने मेरे हाथो से नही खाया.

गुड़िया -मैने बोल दिया ना बस कि में खिलाउन्गि तो में ही खिलाउन्गि.

अमृता-मेरी झासी की रानी वापस बैठ जा नही तो हाथ पैर पकड़ के कमरे में बंद करने वाली बात याद है ना या भूल गयी ...

गुड़िया -मुझे नही खाना आप सब के साथ मॉम आप मेरा और भाई का डिन्नर मेरे रूम में भेजवा दे प्ल्ज़.(और मुझे उठाते हुए) भाई चलो मेरे रूम में डिन्नर करेंगे.
 
अमृता-ऐसे कैसे चलो तुझे जाना है तो जा अजय को तो छोड़ जा.

गुड़िया -हाहाहा शायद आप भूल रही है कि मॉम ने क्या कहा था कि में अपने हाथ से नही खाती वैसे ही भाई भी अपने आप नही ख़ाता.आप चलो ना नही तो ये लोग मुझे आपको डिन्नर नही करने देंगे.

में-तू नही मानने वाली.

गुड़िया -(अपना सिर ना में ही लाते हुए) बिल्कुल नही ये सब मेरे दुश्मन है ये सब जलते है मुझसे की मेरे पास वर्ल्ड का सबसे कीमती चीज़

आप का प्यार है और इन के पास नही है.

जिया दी-वो नौटंकी अब बंद कर अपना बोल वचन नही तो अगर अभी दिमाग़ खराब हुआ ना तो तेरी कीमती चीज़ को में अपने घर ले जाउन्गी समझी.

शायद दी की धमकी कुछ ज़्यादा ही काम कर गयी और जहाँ गुड़िया अभी तक सब से मुक़ाबले के मूड में थी अब वो बिल्कुल शांत हो गयी थी.पर उस का चेहरा बिल्कुल उतर गया था और उस की ऐसे हालत देख के सब के चेहरे से भी अब मुस्कान गायब थी.मैने जिया दी की

तरफ देखा वो भी अपने कान पकड़ के माफी माँग रही थी.

में अपनी शीट से खड़ा हो गया और गुड़िया को अपने साथ ले के उसके कमरे में जाने लगा .मॉम प्ल्ज़ मेरा और गुड़िया का डिन्नर गुड़िया के रूम में भेज दे .

मॉम-ठीक है तुम जाओ में तुम दोनों का खाना में किसी के हाथ से भेजवाती हूँ.

में-दी मज़ाक कर रही थी और तू है कि बस .

गुड़िया -तो क्या हाँ सब बस मुझे आप से अलग करने पे तुले हुए है.अगर मुझसे कोई ग़लती हो तो मुझे कोई भी सज़ा दो मुझे कोई परेशानी नही है ना ही में कभी कोई शिकायत करूँगी पर अगर आप से किसी ने मुझे दोबारा दूर करने के बात कही तो फिर मुझे नही पता कि में क्या करूँगी.

मुझे नही पता था कि गुड़िया मुझसे इतना प्यार करती है उस की बातें सुन के मेरे दिल को एक बहुत बड़ा झटका लगा और ना चाहते हुए भी

आँखे नम हो गयी चाह के भी में उस से कुछ ना बोल पाया.मैने उस को कस के अपने गले लगा लिया .
 
में-तुझे किस ने कहा कि में तुझे कभी छोड़ के जाउन्गा.

गुड़िया -मुझे पता है पर बाकी सन***

में-आगे से कोई तेरे से ऐसे बातें नही करेगा माइ प्रोमिस ओके.पर तुझे मुझसे एक वादा करना होगा .

गुड़िया -नही में आप से कोई वादा नही करने वाली मुझे पता है आप कुछ ऐसा ही कहेगे जो मुझे पसंद नही.

में-तुझे ऐसा क्यूँ लगा .

गुड़िया -क्यूँ कि अगर ऐसे बात नही होती तो आप मुझसे वादा नही लेते.

में-तू तो बहुत ही समझदार हो गयी है.और अगर में कहूँ कि वो वादा मेरे लिए मेरी जान से ज़्यादा ज़रूरी है तो.

गुड़िया -पर आप की जान तो में हूँ ना .

में-हाँ बिल्कुल इसलिए तो तुझे से वादा चाहिए.

गुड़िया -पर*****ठीक है पर उसके बदले मुझे भी कुछ चाहिए.

में-रिश्वत शायद तुझे पता नही है कि करेप्शन और भृष्टाचार के खिलाफ हेल्प लाइन शुरू हो गयी है और तू एक ईमानदार और सच्चे देश

भक्त से रिश्वत की डिमॅंड कर रही है

और मेरा तीर चल गया और मेरी प्रिन्सेस के चेहरे पे मुस्कान एक बार फिर लौट आई और एस मुस्कान के लिए तो में कुछ भी कर सकता था.

गुड़िया -आपको जो भी समझना है समझे.

तभी जिया दी हमारा खाना ले के आ गयी.और अपने कान पकड़ते हुए सॉरी यार मुझे नही पता था क़ि तू मेरे मज़ाक को दिल से ले लेगी.

गुड़िया -ओके दी और मुझे भी माफ़ कर दे मुझे भी इतना ओवर्रिक्ट नही करना चाहिए था पर क्या करू जब भी कोई मुझे अजय भाईया से दूर करने के बात करता है तो मुझे पता नही क्या हो जाता है.

जिया दी-में समझ सकती हूँ इसलिए माफी माँग रही हूँ और तूने कुछ ग़लत नही किया शायद तेरी जगह में और अजय के जगह रवि होता तो

शायद में भी ऐसा ही करती या इससे ज़्यादा पता नही.और तुझे माफी माँगने की कोई ज़रूरत नही है और आज से हम फ्रेंड्स ओके.

गुड़िया -ओके दी .

में-मुझे बहुत जोरो की भूक लगी है तो प्ल्ज़ कोई मुझे पे तरस खाओ.

गुड़िया -हाँ दी चलो खाना खाते है.
 
जिया दी-अगर तुझे बुरा ना लगे तो में बकीओ को भी बुला लूँ किसी ने भी तेरे आने के बाद ठीक से खाना नही खाया.

गुड़िया -सॉरी दी में भी ना सिर्फ़ अपने बारे में ही सोचती हूँ कितनी सेलफिश हो गयी थी में .आप रूको में सब से माफी माँग के सब को बुला के लाती हू.

में-देखा दी ये है मेरी गुड़िया .मुझे नाज़ है खुद पे.

जिया दी-हाँ क्यूँ नही हमें भी नाज़ है तेरे गुड़िया पे.

फिर गुड़िया सब को बुलाने चली गयी और कोई 10 मिनट के बाद सब को साथ ले के वापस आ गयी.और हम सब खाने की तैयारी करने लगे पर तभी मेरे सिर में अचानक दर्द होने लगा और मुझे चक्कर आने लगे में बेड का एक कोना पकड़ के एक साइड में बैठ गया और अपनी

आँखे बंद कर लीं कि तभी ली का चेहरा सामने आने लगा.

में-ये क्या है ली.(ये बातें मैने उसे मन में बोली जो उस तक पहुँच गयी कैसे अभी मुझे पता नही पर जैसे ही पास्ट चलेगा सबसे पहले आप

लोगो को ही बताउन्गा)

ली-हूँ तुम्हारा फर्स्ट टाइम है ना इसलिए ऐसा कह रहे हो.पर फर्स्ट टाइम के हिसाब से बुरा नही है नही तो 90%तो बेहोश ही हो जाते है और

वो सब तुम से फ़िजिकल फिटनेस में काफ़ी आगे होते है यार तुम कमाल की चीज़ हो.

में-क्या यही बक्कवास करने के लिए आए हो.

ली-नही दोस्त में ये बताने आया हूँ कि तुम्हारे लिए दो ख़बरे है एक अच्छी और दूसरी बुरी.बताओ कि कौन सी खबर तुम पहले सुनना चाहोगे.

में-अब इससे बुरा क्या हो सकता है ठीक है पहले बुरी खबर ही सुना दो.

ली-हमारे वर्ल्ड में हर पाँच सालो में एक अजीब सा खेल खेला जाता है जिस में हमें अपनी ताक़त और रुतबे को दिखाना पड़ता है जिस में हम

लोग आनोखी प्रतियोगताएँ करते है और जिस में अजीब और खतेरनाक काम किए जाते है.

में-तो उस से मेरा क्या लेना देना है.

ली-लेना देना है क्यूँ कि एन प्रतियोगताओ में आप जितनी ही अनोखी या रॅयर (जो चीज़े आसानी से ना मिले या मिलती ही नही हो फॉर एग्ज़ॅंपल कलेक्टेड आइटम्स)चीज़ो को कलेक्ट करना और सब के सामने उस चीज़ की ख़ासियत को पेश करना होता है इसमें कुछ भी हो

सकता है जानवर'पत्थर'पानी'हथियार'या कोई खास इंसान .

में-एक मिनट क्या कहा तुम ने इंसान .क्या बकवास है ये .

ली-पर ये सच है अगर वो इंसान हमारे वर्ल्ड से बाहर हो तो हम उस का जैसे चाहे यूज़ कर सकते है ये ही नियम है.

में-पर ये तो ग़लत है.और इससे फ़ायदा क्या है.

ली-जिस का आइटम जितना कीमती और ताकतवर होगा उस को उतनी ही पवर दी जाएगी चाहे वो खुद ले या किसी और के ज़रिए.

में-ये पागलपंति है.

ली-नही तुम इसे हमारे नज़रिए से देखो तो ताक़त पाने और दीखाने का एक परफ़ेक्ट प्लॅटफॉर्म है ये.

में-तो इससे मेरा क्या लेना देना है.
 
ली-इस बार के खास आइटम तुम और तुम्हारे परिवार के सदस्य है जिंदा या मुर्दा कोई फ़र्क नही पड़ता.

में-में ऐसा कुछ नही होने दूँगा.

ली-तुम कर भी क्या सकते हो तुम्हें तो हमारे यहाँ के वो बच्चे भी हरा देंगे जिन्होने अभी अभी फाइटिंग की ट्रैनिंग स्टार्ट की है.और जो फाइटर आ रहे है वो सारे कम से कम आ+ लेवेल के होंगे.

में-मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता वो किसी भी लेवेल के हो या कितने भी ताकतवर हो और अगर में इन से कमजोर हूँ तो तुम मुझे ट्रेन करो जॅक

ट्रेन करे मुझे फ़र्क नही पड़ता बस मुझे इतना ताकतवर बना दो कि में उन से अपनी फॅमिली को सेफ कर सकूँ प्ल्ज़ ली.

ली-सोच लो उसके लिए बहुत मुस्किलो का सामना करना पड़ेगा शायद इतना कि जितना तुम ने कभी सोचा भी ना हो.

में-मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता बस तुम मुझे बताओ कि क्या करना है .

ली-ठीक है डिन्नर के बाद

बाद गार्डेन में आ के मिलो मुझसे.

में-और गुड न्यूज़ तो बता दो.

ली-कुछ बाद के लिए भी छोड़ दो वहाँ सब तुम्हें ऐसे देख के परेशान हो रहे है तुम पहले आराम से डिन्नर कर लो पता नही आज के बाद फिर

कभी कर भी पाओ कि नही.

में-तुम्हारे कहने का मतलब क्या है और तुम्हें कैसे पता कि में क्या कर रहा हूँ.

पर कोई फ़ायदा नही ली जा चुका था मुझे ढेर सारे सवालो के साथ छोड़ के मैने अपनी आँखे खोली तो सच में सब मुझे घूर रहे थे.......

दोस्तो ये उस में कुछ छूट गया था ये वो है....

में-तुम सब मुझे ऐसे क्यूँ घूर रहे हो बस कुछ सोच रहा था.

जिया दी-सच में मुझे तो लगा कि तू किसी से बात कर रहा है.

में-हाँ वो क्या है ना कि मैने यहाँ कुछ भूत दोस्त बनाए है उन्ही से हाल चाल पता कर रहा था उन का.क्या दी आप भी में वो रवि के बारे में

सोच रहा था आज उसे इतने दिनो के बाद फिर सोनिया की याद आ गयी और वो भी मेरी वजह से मुझे सच में बहुत बुरा लग रहा है.

गुड़िया -ये सोनिया कौन है.

जिया दी-ये हमारी सबसे छोटी सिस्टर थी जो एक हादसे का शिकार हो गयी और रवि आज भी उसके लिए खुद को ज़िम्मेदार मानता है.

में-सच में मुझे रवि का सोच के बहुत बुरा लग रहा है.

जिया दी-हाँ पता है वो बहुत प्यार करता था उस को बस उसे कभी दिखाता नही था हमेंशा उस से लड़ता रहता था कहता था कि मेरी सोनिया गुस्से में ज़्यादा अच्छी लगती है.

में-हाँ पर आप शायद आप भूल रही है कि वो उस की ख़ुसी के लिए कुछ भी कर सकता था.

जिया दी-मुझे सब पता है.अब तुझे ही उसे इससे बाहर लाना होगा.

में-दी आप बिल्कुल भी टेन्षन ना ले वो मेरा भी भाई है में उसे ज़्यादा देर तक ऐसे अकेले नही रहने दूँगा.

गुड़िया -सच में बहुत बुरा हुआ .में भी माफी माँग लूँगी रवि भाई से.

जिया दी-ऐसा कभी मत करना नही तो उसे बहुत बुरा लगेगा जब तू उस से माफी माँगेगी .और जो हो गया उसे छोड़ के हमें आगे के बारे में सोचना चाहिए चल सबसे पहले अपने इस भाई को खाना खिला इसको भूक लगी होगी.

फिर हम सब ने एक दूसरे के हाथ से खाना खाया खाना खाने के बाद में रवि को ढूँढने के लिए चल पड़ा और बाकी सब यही बैठ के बातें करने लगे.

रवि मुझे उपर छत (रूफ) पे मिला वो एक साइड खड़ा हो के आसमान को देख रहा था.में भी उसके पास जा के खड़ा हो गया.

में-आज सच में आसमान कितना खूबसूरत है ना.

रवि-हर चीज़ की अपनी खूबसूरती है बस देखने का नज़रिया चाहिए.

में-में तू बिल्कुल सही कहता है आज तक कभी मैने ध्यान ही नही दिया और जब आज देख रहा हूँ तो सच में कितना विशाल और कितना खूबसूरत है ये .

रवि-हूँ.

में-तुझे पता है इसकी ख़ासियत क्या है .

रवि-क्या ?

में-यहाँ पे ये आसमान इतना शांत और खूबसूरत है जैसे कि दुनिया की सारी खूबसूरती इसे में समाई हो पर यहाँ से कुछ दूरी पे शायद ये

इतना डरावना और अशांत हो कि देख के किसी की भी रूह कांप जाए.

रवि-तू कहना क्या चाहता है.

में-बस यही कि इसके दोनों रूप ज़रूरी है हमारे लिए पर हमें वो दोनों सही समय पे चाहिए .जैसे की ये अपने दोनों रूप को अपने अंदर बखूबी संभाल के रखा है तुझे भी अपने उस दर्द को ऐसे ही संभाल के रखना चाहिए क्यूँ कि वो तुझे ताक़त और हिम्मत देगा लाइफ में आगे

बढ़ने के लिए.जैसे ये आसमान हमें ये नही पता चलने दे रहा कि ये अशांत और ख़तरनाक हो सकता है तुझे भी अपने आपको ऐसे ही संभालना होगा.

रवि-पर ये इतना आसान नही.

में-मुझे पता है एक अकेले के लिए ये कितना मुस्किल है अगर तू अकेले इसे सॉल्व करने की कोशिश करेगा तो बहुत मुस्किल है पर अगर वो

ही तू अपनी फॅमिली के साथ तो सबसे आसान काम कड़वी यादो को कुछ मीठी यादो से ही बदला जा सकता है.

रवि-तू सच में एक यूनीक है कितने अच्छे से तूने मुझे ये बता दिया कि में क्या भूल रहा था.

में-हूँ.

रवि मेरे गले लगते हुए शायद निशा तुझ से सच में बहुत प्यार करने लगी है मैने कोशिश की पर नाकाम रहा यार मुझे माफ़ कर दे.

में-कोई नही में समझ सकता हूँ ग़लती मेरी ही है मुझे उस से पहले ही ये बात क्लियर कर देनी चाहिए थी कि में किसी और से प्यार करता

हूँ.

रवि-मुझे लगता है कि अभी भी समय है भूल जा प्रिया को.निशा सच में तुझे से बहुत प्यार करती है मैने देखा है उसके आँखों में.

में-दिल से बोल रहा है.

रवि ने इस बात का कोई जबाब नही दिया और नीचे जाने लगा कुछ दूर जा के पीछे मुड़ते हुए.में उसे उपर तेरे पास भेज रहा हूँ तू आज ही

उस से सब क्लियर कर दे में नही चाहता कि जिस प्यार के लिए तू अब तक तड़प रहा है वो भी तडपे तो उसे आज सब सच सच बता दे.

में-ठीक है.

फिर रवि नीचे चला गया और में निशा का इंतज़ार करने लगा सच में आज का दिन मेरे लिए किसी एक जनम के बराबर था सिर्फ़ आज के दिन में ही मेरे साथ वो अब हो गया जो किसी नॉर्मल इंसान के साथ शायद दो से तीन जन्मो में भी ना हो.कोई 15मीं के बाद मुझे मेरे पीछे

कुछ आहट से महसूस हुई मैने पीछे मूड के देखा तो निशा खड़ी थी .
 
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