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Guest
कोई 15मीं के बाद मुझे मेरे पीछेकुछ आहट से महसूस हुई मैने पीछे मूड के देखा तो निशा खड़ी थी .
में-सॉरी निशा तुम्हें इस टाइम परेशान किया पर क्या करता में भी मजबूर हूँ आज शायद मेरी लाइफ का वो काला दिन है जिस दिन सिर्फ़ मेरे
अपनो को मुझ से सियाए दुख के कुछ नही मिलेगा .
निशा-ऐसा क्यूँ कह रहे हो.ये तुम्हारी ग़लत सोच है तुम चाह के भी किसी को दुख नही दे सकते .
में-निशा मुझे नही पता कि में क्या दे सकता हूँ और क्या नही .पर मुझे ये पता है कि में तुम्हें वो नही दे सकता जो तुम मुझसे चाहती हो.
निशा-मुझे पता है रवि ने मुझे सब बताया है तुम्हारी बीती लाइफ के बारे में.प्रिया के बारे में.
में-पर कैसे रवि मेरे साथ ऐसा नही कर सकता ये मेरा राज है मेरी जिंदगी.ये कोई मुझसे नही ले सकता.
निशा-जानती हूँ पर मेरा विश्वास करो इसमें रवि की कोई ग़लती नही थी.जैसे रामायण में लक्ष्मण की कोई ग़लती ना होते हुए भी श्री राम ने लक्ष्मण को ग़लत समझा था उसी तरह तुम भी रवि को ग़लत समझ रहे हो.
में-मुझे नही पता ये उस ने क्यूँ किया पर ये उस ने ठीक नही किया.तुम्हें अब अपने लिए कोई और ढूँढना चाहिए वैसे भी मैने देखा है कि अच्छे अच्छे लड़के तुम्हारे आगे पीछे घूमते है.
निशा-हाँ पर उन में से अजय कोई नही है ना .और तुम किस को प्यार करो ये तुम्हारी मर्ज़ी है और मुझे किस से प्यार करना है ये मेरी मर्ज़ी है तुम ये डिसाइड नही कर सकते.मुझे पर यकीन रखो में तुम्हारी जिंदगी में कभी कोई इंटर्फियरेन्स नही करूँगी.
में-निशा तुम समझ नही रही हो ये इतना भी आसान नही है.
निशा-तुम्हारे एक छोटे से साथ ने मुझे भी बहुत कुछ सीखा दिया है यकीन मानो ऐसा कुछ नही होगा जैसा तुम सोच रहे हो.
में-तुम से बात करना ही बेकार है.
निशा-अब मुझे नीसे चलना चाहिए काफ़ी टाइम हो गया उपर आए हुए.
में-हूँ ठीक है गुड़िया क्या कर रही है.
निशा-जिया दी ने बड़ी मुस्किल से उसे सुलाया है नही तो वो तुम जानते हो किस चीज़ की ज़िद कर के बैठी थी.
में-ठीक है.मुझे कुछ ज़रूरी काम है तो तुम सब को बोल देना कि में अपने कमरे में सो रहा हूँ.
निशा-झूठ वो भी फ्री में में नही बोलती.
में-अब तुम्हें क्या चाहिए.
निशा -अपना कान इधर लाओ बताती हूँ.
में-नही ऐसे ही बता दो.
निशा-तो ठीक है रहने दो में नीचे जा रही हूँ और गुड़िया को उठा के तुम्हारे पास भेज देती हूँ.
में-कहाँ फस गया यार.ठीक है लो बोलो.
और मैने अपने कान उसकी तरफ कर दिए और वो मेरे पास आ के धीरे से मेरे कान में******
में-सॉरी निशा तुम्हें इस टाइम परेशान किया पर क्या करता में भी मजबूर हूँ आज शायद मेरी लाइफ का वो काला दिन है जिस दिन सिर्फ़ मेरे
अपनो को मुझ से सियाए दुख के कुछ नही मिलेगा .
निशा-ऐसा क्यूँ कह रहे हो.ये तुम्हारी ग़लत सोच है तुम चाह के भी किसी को दुख नही दे सकते .
में-निशा मुझे नही पता कि में क्या दे सकता हूँ और क्या नही .पर मुझे ये पता है कि में तुम्हें वो नही दे सकता जो तुम मुझसे चाहती हो.
निशा-मुझे पता है रवि ने मुझे सब बताया है तुम्हारी बीती लाइफ के बारे में.प्रिया के बारे में.
में-पर कैसे रवि मेरे साथ ऐसा नही कर सकता ये मेरा राज है मेरी जिंदगी.ये कोई मुझसे नही ले सकता.
निशा-जानती हूँ पर मेरा विश्वास करो इसमें रवि की कोई ग़लती नही थी.जैसे रामायण में लक्ष्मण की कोई ग़लती ना होते हुए भी श्री राम ने लक्ष्मण को ग़लत समझा था उसी तरह तुम भी रवि को ग़लत समझ रहे हो.
में-मुझे नही पता ये उस ने क्यूँ किया पर ये उस ने ठीक नही किया.तुम्हें अब अपने लिए कोई और ढूँढना चाहिए वैसे भी मैने देखा है कि अच्छे अच्छे लड़के तुम्हारे आगे पीछे घूमते है.
निशा-हाँ पर उन में से अजय कोई नही है ना .और तुम किस को प्यार करो ये तुम्हारी मर्ज़ी है और मुझे किस से प्यार करना है ये मेरी मर्ज़ी है तुम ये डिसाइड नही कर सकते.मुझे पर यकीन रखो में तुम्हारी जिंदगी में कभी कोई इंटर्फियरेन्स नही करूँगी.
में-निशा तुम समझ नही रही हो ये इतना भी आसान नही है.
निशा-तुम्हारे एक छोटे से साथ ने मुझे भी बहुत कुछ सीखा दिया है यकीन मानो ऐसा कुछ नही होगा जैसा तुम सोच रहे हो.
में-तुम से बात करना ही बेकार है.
निशा-अब मुझे नीसे चलना चाहिए काफ़ी टाइम हो गया उपर आए हुए.
में-हूँ ठीक है गुड़िया क्या कर रही है.
निशा-जिया दी ने बड़ी मुस्किल से उसे सुलाया है नही तो वो तुम जानते हो किस चीज़ की ज़िद कर के बैठी थी.
में-ठीक है.मुझे कुछ ज़रूरी काम है तो तुम सब को बोल देना कि में अपने कमरे में सो रहा हूँ.
निशा-झूठ वो भी फ्री में में नही बोलती.
में-अब तुम्हें क्या चाहिए.
निशा -अपना कान इधर लाओ बताती हूँ.
में-नही ऐसे ही बता दो.
निशा-तो ठीक है रहने दो में नीचे जा रही हूँ और गुड़िया को उठा के तुम्हारे पास भेज देती हूँ.
में-कहाँ फस गया यार.ठीक है लो बोलो.
और मैने अपने कान उसकी तरफ कर दिए और वो मेरे पास आ के धीरे से मेरे कान में******