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Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

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दोस्तो माफ करना कुछ दिनों से मैं काम मे बिजी था इसलिए अपडेट नही दे पाया पर कोशिस जरूर करूँगा की जल्दी जल्दी अपडेट दे पाऊं

धन्यवाद

............ सलिल
 
अपडेट 19

लेकिन अगले दिन में दीदी से पहले उठ गया, पता नहीं कैसे क्यूँकि हमेशा दीदी ही पहले उठ जाती थी. मैं बाथरूम में गया और फ्रेश हो कर बाहर आया और कॉलेज जाने के लिए रेडी हो गया, ऑफ़ कोर्स जाने का मन नहीं था पर जाना भी जरूरी था लेकिन में किचन में जा कर फ़टाफ़ट चाय और ब्रेड सैंडविच बना डाली, बस दीदी को हसींन सरप्राइज देने के लिये, और फिर बेड रूम में गया, दीदी अब भी सोयी रही थी, फिर मैं दीदी के पास गया, दीदी सीधी लेटी हुई थी, में उनके शोल्डर के पास बैठा और दीदी का क्लीवेज देखने लगा, हर सांस के साथ बॉब्स ऊपर निचे हो रहे थे, फिर मैंने एक आईडिया सोचा और मैंने दीदी के ब्लाउज पर हाथ रक्खा और दीदी के ब्लाउज के ऊपर के दो हूक्स आराम से खोल दिए और कॉलेज चला गया. रस्ते में यही सोच रहा था की हालाँकि दीदी को ब्लाउज वाले इंसिडेंट पर गुस्सा नहीं आना चाहिए पर बय चांस अगर आ भी जाता हे तो चाय नाश्ता डाइनिंग टेबल पर देखकर शायद उतर जाएगा. मैं कॉलेज में पहुंचा पर कॉलेज में मन नहीं लग रहा था उधर घर पे दीदी क्या कर रही होगी, उसीमे मेरा सारा वक़्त बितने लगा, लेकिन अब दोपहर के तीन बज रहे थे और बस दो ही घंटे बाकि थे पर मेरे से सहे नहीं जा रहे थे, इसीलिए में क्लास बंक करके भागा और सीधा घर पहुंचा. मैंने घर जा कर डोरबेल बजाई, लेकिन दरवाजा नहीं खुला.. १० मिनट बाद दीदी ने पीछे से कहा.हट..चाबी मेरे पास हे.. दीदी ने मुझे हटाते हुए, दरवाजा खोला. दीदी कुछ अपसेट लग रही थी, कहीं ब्लाउज वाले इंसिडेंट से तो नही, में पूछ्ने से डर रहा था पर मैंने दीदी से पूछ लिया.क्या बात हे..? दीदी कुछ अपसेट लग रही हो.? मैंने थोड़ा डरते डरते पूछ..कुछ नही... दीदी ने मेरे से ख़फ़ा होने की एक्टिंग कर रही थी, एक्टिंग ही तो थी क्यूँकि मुझे उतना तो पता था की अगर दीदी ख़फ़ा होती तो बात नहीं करति. इसिलिये में जोश में आ गया और अपने साइड वाले सोफ़े पर जहाँ दीदी बैठी थी वहा पर कुद कर बैठ गया और अपना लेफ्ट हैंड दीदी के कंधे के पास से ले जा कर दूसरी तरफ घुमा लिया और उस तरफ से प्रेशर दे कर दीदी को अपनी और खिंचा और दीदी के कान में पूछा, क्या हुआ दीदी. तो वो खुल कर बोली .रेशु,,तुं आज कॉलेज नहीं जाता तो नहीं चलता क्या..एक तो मुझे यहाँ रोक लिया और खुद कॉलेज चले जाते हो. मैं कितना बोर हो रही थी, वो तो अभी अभी में सामनेवाली आंटी के वहा बातें करने के लिए बैठी की तुम आ गये. .अच्छा तो ठीक हे, में अभी फ्रेश हो जाता हूँ और हम अभी घुमने चलेंगे.. मैंने सेंटेंस ख़त्म किया और दीदी खुश हो गयी और मेरे चिक पर एक मस्त पप्पी दी और मैंने फ़ौरन अपना दूसरा गाल भी दे दिया, तो उन्होंने मेरे दुसरे गाल को भी चुमा. बाद में वो तुरंत खड़ी हो गयी, क्यूँकि वो जानती थी की में अब उन्हें मेरे लिप्स ऑफर करने वाला था इसीलिए मेरे इंटेंशन्स को समझते हुए वो जल्दी से खड़ी हो गयी और में भी उठकर मेरे रूम में चला गया. तभी दीदी ने कहा की पहले खाना खा लो बाद में तैयार होना. तो में किचन में आया और दीदी के पास खड़ा रहा और दीदी को देख रहा था दीदी समझ गयी थी की में क्या देख रहा था इसीलिए मेरी खिंचाई करने के लिए उन्होंने पूँछा.रेशु क्या देख रहे हो..? . मै तो हडबडा गया लेकिन मैंने भी दीदी को अपने जाल में फ़ासते हुए कह.कुछ नहीं दीदी..म्म्म्म.मम,,,,मै तो यह पसिना .ऊऊओफ़्फ़ आपको कितना पसिना आ रहा हे. लाओ में यह पसिना पोछ देता हू.. अब मुझे मेरे शतिर दिमाग पे अभिमान हुआ और मैंने अपना रूमाल निकला और दीदी की बैक पे ब्लाउज के ऊपर से पसिना पोंछने लगा और बड़े आराम से दीदी की पीठ सहलाने लगा. फिर में धीरे धीरे अपना हाथ ऊपर लेजाते हुए दीदी के शोल्डर पर रूमाल घुमाया और फिर दीदी की गर्दन को भी पोछा और फिर मैंने दीदी के दोनों आम की और अपना रूमाल घुमाय और धीरे धीरे निचे उतार रहा था की दीदी ने मेरी और देखा और मेरा हाथ रूक गया. रूमल नहीं छोट गया और मेरा हाथ स्लीप हो कर दीदी के ब्लाउज से हट गया. फिर दीदी ने अपने ब्लाउज में फसे मेरे रूमाल को देखा और मेरी और भी देखा और फिर कहा की रेशु..देख क्या रहे हो? इसे निकलो यहाँ से.. और में अपने रूमाल को हाथ में ले कर खींचने लगा पर जैसे भगवान को भी इस सीन में मज़ा आ रहा हो वैसे मेरा रुमाल दीदी के हुक में फ़ांस गया और दीदी मेरी और फिर से थोड़े से ग़ुस्से में देखने लगी और मैंने कहा की दीदी अब यह नहीं निकल रह, एक हुक खोलना पडेगा. वो मेरी और हैरत भरी नज़र से देख रही थी और में उन्हें स्माइल दे रहा था वो सोचने लगी और फिर अपने आँखें बंद कर ली और मुझसे कहा...”रेशु..जो चाहे वो करो पर इसे निकालो”.. दीदी ने कहा. मैने भी सोचा की रेशु यही टाइम हे तो मैंने भी फुल आराम से रूमाल निकालने की सोचा. मैं निचे अपने घूटनों के बल बैठ गया. यह प्लानिंग में नहीं था पर गॉडने जैसे मेरे पर मेहरबानी की हो, मैं निचे बैठा अब दीदी मेरे सामने थी और मैंने दीदी के कंधे से उनका पल्लू हटाया और दीदी के पल्लू निचे गिरा दिया, और दीदी के ब्लाउज में कैद ३६ के बॉब्स मेरे सामने थे,मन तो बहुत किया की यही पर निचोड लू लेकिन कर नहीं पाया, और शायद किया होता और दीदी को गुस्सा आता तो दीदी को मना भी लेता पर ऐसा मैंने किया नही. मैंने रूमाल का एक सिरा जो खुला था वो हाथ में लिया और उसे दीदी को अपने मुँह में दबाने को कहा, लेकिन मैंने ही दीदी के होठो में अपनी ऊँगली दे कर उसे दबा दिया. फिर मैंने दीदी के ब्लाउज पे अपने दोनों हाथ रक्खे और हुक खोलने की मशक़्क़त में कई बार बॉब्स मेरे हाथ में आ गये. लेकिन मेरी किस्मत इतनी भी अच्छी नहीं थी और हुक एक ही मिनट में खुल गया और सारे सीन का नाश हो गया. फिर दीदी ने बनावटी गुस्सा दिखाया और कहा की अब पसिना पसिना मत कर और जा के बैठ और खाना खा ले. दीदी ने मेरे लिए खाना लगाया और कहा की वो रेडी हो कर आती हे, इन सब बातों में चार बज चुके थे और मैंने खाना निपटाया और बाथरूम में गया और फ्रेश हो गया, बाद में अपने रूम में गया और अपने एक एक कपडे निकाल दीए, बस में अब उंडरवेयर में था और अपने कपबर्ड में से कपडे ढूंढ रहा था और अचानक दीदी मेरे रूम में आई और कहने लगी की

रेशु रेडी हो गया क्या...? दीदी मेरे कमरे में आ चुकी थी. मैं रेडी नहीं था और ऊपर से सिर्फ अंडरवेअर में था और वो भी कटाई वी शेप में था मैंने फ़टाक से कपबोर्ड का दरवाजा बंद किया और बाहर आया की दीदी की आँखें मुझे देखकर फट सी गयी. वो मुझे नहीं मेरे अंडरवेअर को ही देख रही थी और में इस बात से खुश था की वो अंडरवेअर में क्या ढूंढ रही थी. लेकिन उन्हें दो मिनट में ही होश आया की वो क्या देख रही हे, लेकिन बाद में वो शरमाने के बजाय, मुझसे पूछ्ने लगी की क्या हुआ. तो मैंने कहा की दीदी ढंग के कपडे नहीं मिल रहे तो दीदी ने कहा की लाओ में ढूंढ देती हू, और वो मेरे पास आ कर कपडे कप बोर्ड में ढूंढने लगी. वो अब मेरे सामने थी और में उनके पिछे, दीदी को देखते ही मेरा लंड पता नहीं क्यों उठ जाता हे. मैं दीदी के पीछे खड़ा रह कर कपडे चूस करने के बजाय दीदी के बारे में फ़न्तासीस कर रहा था मैं अपने ख़यालों में था की दीदी ने कहा कि, रेशु पास आओ और इस कॉम्बिनेशन को देखो तो. और मेरा ध्यान टूटा और में आगे गया और जानबूझ कर दीदी की गांड को छू रहा था मेरा लंड दीदी की गांड को बड़े प्यार से टच कर रहा था और मैंने देखा और कहा की दीदी यह पसंद नहीं और दीदी दूसरे कपडे देखने लगी, फिर मैंने दीदी के गांड पर जोर दिया और अब जा के उन्हें एहसास हुआ की उनकी गांड पर मेरा लंड था और दीदी मेरी और पलटि और निचे अपनी गांड की और देखा और निचे मेरे अंडरवेअर में बने टेंट को देखने लगी और फिर मेरी और देखा और हंसी.
 
अपडेट 20

मैंने दीदी के गांड पर जोर दिया और अब जा के उन्हें एहसास हुआ की उनकी गांड पर मेरा लंड था और दीदी मेरी और पलटि और निचे अपनी गांड की और देखा और निचे मेरे अंडरवेअर में बने टेंट को देखने लगी और फिर मेरी और देखा और हंसी.

लेकिन इग्नोर कर के फिर से मेरे कपडे ढूंढ ने लगी और में फिर से अपना लंड दीदी की गांड पर हल्का हल्का प्रेशर दे कर घुमने लगा, लेकिन मेरी दीदी तो दीदी ही हे, उन्होंने मेरे कपडे खुद ही पसंद किये और पीछे मूड कर मेरे हाथ में थमाते हुए कहा की लो यह पेहन ले और जल्दी रेडी हो जा. मैने अपने कपडे हाथ में लिये और जानबूझ कर पहले शर्ट पहनने लगा और दीदी कह रही थी की रेशु तुम भी ना..अपनी चीज़ ठीक से रखते नहीं और बाद में परेशान होते हो. और वो मेरा कप बोर्ड ठीक करने लगि, एक एक करके मेरे कपडे ठीक से मोड़ कर के अच्छे से रखने लगी और बाद में मेरे बुक्स भी अच्छे से अरेंज किये और बाद में मेरे कपबर्ड का निचे का शेल्फ अच्छे से ठीक करने के लिए निचे बैठी तो मेरे दिमाग की बत्ती जली की दीदी को रोक देना चाहिए पर बाद में तुरंत ख्याल आया की जाने दो, देखने दो, दीदी को पटाने का एक और टॉपिक मिल जाएगा. दीदी ने निचे के शेल्फ में मेरे कॉलेज का सामान जैसे ही बाहर निकाला की उसमे से पोर्न डीवीडी. बाहर निकल आई और में जैसे मानो पकड़ा न गया हो ऐसे दीदी के पीछे मूड कर अपने शर्ट के बटन बंद कर रहा था और लकीली सामने शीशे में दीदी का हाल दिखाई दे रहा था उन्होंने अपने हाथ में वो डीवीडी. ली और सब के ऊपर के नंगी लड़कियों के पोस्टर देखे और बाद में मेरी और देखा और उनकी नज़र मेरे शर्ट के अंदर मेरी गांड पर थी. फिर उन्होंने अपने दाँत से अपने होठ को पींसा और लिप्स को अंदर बाहर करने लगी. फिर मैंने भी अपने पैंट को उठाया लेकिन आईडिया आया और मैंने अपने अंडरवेअर में हाथ डाला और अपने उठे हुए लंड को ठीक करने के बहाने से मैंने अपने अंडरवेअर को हल्का सा निचे किया और दीदी को दिखाई दे इस तरह से मैंने अपने लंड को पकड़ा और उसे एडजस्ट करने लगा, लेकिन इस तरह दीदी को एक झलक लंड की दिखने में ग़लती हो गयी और मेरा अंडरवेअर मेरे थाय में से पता नहीं कैसे निचे गिर गया और दीदी ने मेरा पूरा लंड देख लिया और मैंने फ़टाक से निचे झुक के अपना अंडरवेअर उठाया और उसे पहन लिया और फिर सामने शीशे में देखा तो दीदी की आँखें फट सी गयी थी और वो अब भी मेरे लंड की और देख रही थी, और मैंने फिर आराम से दीदी की और देखा तो उन्होंने भी मुझे चिड़ाने के लिए अपनी आँखों पर अपने दोनों हाथ रख लिए और मुझे अपनी और देखता पा कर मुझसे चिड़ाने के सूर में कहा.”रेशु.दीदी ने कुछ नहीं देखा..हा”. दीदी मुस्कुरा पड़ी और मैंने भी नहले पर दहला मारते हुए, मौके को ठीक समझते हुए दीदी के सामने घूम गया और दीदी के सामने अपना अंडरवेअर झटके में उतार दिया और अपना उठा हुआ लंड दीदी के सामने खुला कर दिया और कहा .देख भी लिया तो क्या उखाड लिया...? दीदी ने शायद इस तरह की कुछ कल्पना भी नहीं की थी और मेरे इस तरह अंडरवेअर उतारने से उनकी समझ में नहीं आया की वो क्या करे इसीलिए वो उठ कर बाहर ड्राइंग रूम में भाग गयी और में भी जैसे बड़ा शेर मारा हो ऐसे दीदी के ख़यालों में अपने कपडे पहनने लगा और फिर बाथरूम में गया और एक बार मूठ मारी और फिर से अपने कपडे एडजस्ट कर रहा था की इतने में दीदी ने कार का हॉर्न बजाना शुरू कर दिया और में फ़टाफ़ट सारे कपडे पहन के बाहर आया और डोर लॉक कर के बाहर जा कर दीदी के पास बैठ गया और कहा दीदी.लेट में ड्राइव. मैंने दीदी से कहा...चुप चाप बैठो..में ड्राइव करूंग़ी, तुम बहुत तेज़ चलाते हो और फिर किसी से तकरा के गालियां बकते हो..दीदी ने फिर से ताना मारा.ओह..माय गॉड, मुझे तो ऐसा लगता हे, जैसे मैंने इतना बड़ा गुणाह किया हो, की मुझे इस तरह बहाने ढूंढ ढूंढ कर के ताने मारे जाते हे.. मैंने ताने का जवाब दिया.दीदी भी हंस पड़ी और में भी , इतने में दीदी ने कार ड्राइव की और हम कंकरिआ पहुंचे, तब तक ५ बज चुके थे उस दिन कोई रेगुलर डे था इसीलिए बहुत कम फॅमिली वाले लोग आये थे, कुछ कॉलेज कपल्स और कुछ नेवली मैरिड कपल्स आये थे. दीदी ने कहा की उन्हें एम्यूजमेंट पार्क में जाना हे तो हम उस और चले और उधर हमने बहुत एन्जॉय किया और खूब धमाल मस्ती की. दीदी अब जा के सच में खुश लग रही थी. फिर मैंने एक राइड की टिकट्स ली जो थोड़ी डरावनी थी, और उस राइड के दौरान में जान बूझ कर ऐसे बैठा की राइड के दौरन दीदी मुझ पर आ गिरे, और जैसे ही वो तूफ़ानी राइड शुरू हुई और दीदी मेरी और खिसकने लगी तो मैंने दीदी से कहा..”दीदी.बीहेवे योरसेल्फ, प्लीज.ऐसे पब्लिक प्लेस में क्या कर रही हो”.. दीदी तो सन्न हो गयी और वो जितना मुझसे दूर जाने की कोशिश करति, वो मेरे पास ही आ जाती थी, लेकिन मुझसे दूर बैठने के चक्कर में उन्हें रॉन्ग साइड पे बैठने से चक्कर जैसा लगने लगा. इसिलिये वो जैसे ही राइड ख़त्म हुई की वो ठीक से उतर भी न पाई और एक वॉचमन ने उन्हें गिरने से बचा लिया, फिर मैंने दीदी को दोनों हाथों से सहारा दिया और एक साइड बेंच पर बिठा दिया. और फिर उन्हें बिठा के पूँछा.”दीदी..दीदी आप ठीक तो हे..चक्कार जैसा लग रहा हे..क्य...? में बहुत ही घबरा गया था और टेंशन में मेरी हार्टबीट भी बढ गयी थी. दीदी ने भी कहा की हाँ उन्हें चक्कर आ रहे हे तो मैंने कहा की आप यही बैठीये में अभी कहीं से नीम्बू पाणी ले कर आता हू, और में उठकर बाहर की और गेट की तरफ भागा और इतने में दीदी ने कहा की .रेशुउऊउउउ.रुको.
 
अपडेट 21

में दीदी के चिल्लाने से रुक गया और भी टेंशन में आ गया की कहीं दीदी को कुछ और तो नहीं हो रहा, पर मैंने देखा तो वो हंस रही थी और उनकी हँसी रूक नहीं रही थी, में एक दम से शॉक हो गया, मेरा रंग ही उड़ गया, और में दीदी के पास गया तो दीदी ने हँसते हँसते हुए कहा की अपना चेहरा तो देख, कितना रंग उड़ गया है, कैसे पीला पड़ गया हे कुछ नहीं हुआ हे मुझे. अब मेरी जान में जान आई और में दीदी के सताने पर हलके से मारने लगा और फिर अपने पर ही हंस पड़ा और दीदी के पास में ही बैठ गया, अभी भी दीदी की हँसी रूक नहीं रही थी और फिर हँसते हुए कहा की .क्यूँ बेटे, तुम अपना अंडरवेअर उतार के नहले पर दहला मार सकते हो तो हम भी आपके नहले पर देहला मार करके आपका रंग उड़ा सकते हे.. और वो फिर से हंसने लगि, तो मैंने फिर से उन्हें मस्ती में मारना शुरू किया, लेकिन इतने में पार्क का वॉचमन कहीं से आया और बोला.है..क्या कर रहे हो आप लोग? शर्म नहीं आति, चलो हटो यहाँ से, . और तब जा के दीदी सीरियस हुई और हम बाहर निकल गये.बाहर निकलते ही सामने झु था तो दीदी ने कहा चलो न रेशु, हम झु में चलते हे, मैंने मना किया तो उसने कहा की चलो ना.. मुझे साँप देखना हे. तो मैंने उसी टाइम डबल मीनिंग लाइन कह दी की .दीदी साँप देखना हे तो वो तो मेरे पास भी हे.. और बोलने के बाद मुझे पता चला की में क्या कह गया. दीदी ने सही सुना, मेरी और पलट के देखा और वो भी समझ गयी की मैंने क्या कहा पर कुछ बोली नहीं और हम दोनों झु में गये, वहा कुछ देखने को था नहीं में तो बार हो गया, पर दीदी डिस्कवरी की फैन होने से मज़ा ले रही थी, में तो बस दीदी को ही देख रहा था मुझे अफ्रीकन लायंस और ऑस्ट्रलियन कबूतरों में कोई इंटरेस्ट नहीं था लेकिन दीदी सबके बारे में मानो सब जानती हो ऐसे सबके बारे में कुछ न कुछ क्वालिटी बताने लगी, में पक रहा था पर में सुन रहा था और ऐसे जाता रहा था की मुझे भी मज़ा आ रहा हे, तब जा के मुझे लगा की इन औरतों के साथ रहना कितना मुश्क़िल हो जाता हे, फिर मैंने अचानक एक साइड में एक कोने पर देखा की एक कच्छ का फेमस जंगली गधा (घोड़े और गधे के बीच की जाती) वो अपनी साथी गधी के साथ सेक्स कर रहा हे, अब झु के बंद होने का टाइम हो रहा था और मानसून का सीजन था इस्लिये अँधेरा भी हो रहा था तो झु में काफी काम लोग थे और दीदी एक और रींछ को देख रही थी तो में आटोमेटिक उस गधे के पींजरे की और जा कर खड़ा हो गया और उनकी चुदाई देखने लगा, वो गधे का पास कितना बड़ा लंड था और अमूमन फीमेल अनिमलस, चुदवाने पर आवाज़ नहीं करते, पर उस गढ़ी के मुँह में से दर्द की हलकी हलकी सी आवाज़ें आ रही थी. गधा तो मानो जंगलीपन पे उतार आया था और उसकी चुदाई एक दम तेज़ होते जा रही थी, में दीदी को भूल गया था और इतने में मेरे पास एक कौवा आ कर बैठा और वो भी गधे गाढ़ी की चुदाई देखने लगा, उसके आ के बैठने से मैंने अपने राईट साइड पर आँखें फेर कर के कौवे को देखा तो मुझे आँखों के किनारे से दीदी भी दिखाई दी और वो एक दम अदब से मेरी और देख रही थी की में उन्हें भूल गया हू. दीदी को देख कर में अंनदेखा नहीं कर सकता था चाहे वो कुछ भी हो तो मैंने दीदी की और देखा और उनकी और मुडा, और उनकी और चल पडा, दीदी भी बाहर की और चल पडी,, सब झु से बाहर ही जा रहे थे. हम दोनों में से कोई बात नहीं कर रहा था झु बहुत बड़ा था इसिलिये, हमें अभी १५ मिनट तक ऐसे चुप चाप चलना था और यकीन मानिये दोस्तोँ ऐसे चलना सच में मुश्क़िल हो जाता हे, जब आपके साथ कोई अपना हो और कोई उससे बात न हो रही हो, तो मैंने चलते चलते दीदी से कहा की .दीदी सॉरी... दीदी ने तुरंत कहा, की ऐसे काम ही क्यों करते हो की तुम्हे सॉरी हर बार कहना पडता हे.

दीदी का गुस्सा थोड़ी ही देर का था यह पता था पर उन्हें मनाने में मज़ा आ रहा था थोड़ी देर सॉरी बोलने के बाद वो मान गयी और फिर से नार्मल हो गयी. अब तक ७ बज चुके थे और अब हम वहा से निकल करके कार में बैठे और मैंने दीदी से कहा की अब हम कहाँ जा रहे हे तो उन्होंने कहा की बस तुम सिट बेल्ट बांध लो, गाड़ी अब उड़ने वाली हे और उन्होंने सट से झटके दे कर एक्सेलरेटर दिया और एक दम रफ़ कार चलाने लगी, में पहले झटके में जान ही नहीं पया की हो क्या रहा हे, पर दीदी मानो कार उड़ा रही हो वैसे तेज़ चला रही थी. दूसरी कार्स मानो उसके सामने कुछ नहीं थी. दाएं बाएं कर के वो तो बस कार चलाये जा रही थी, फिर दीदी ने नम्बर ८ पकड़ा और उधर तो मेरी मा चुद गयी, वो हैवी लोडेड ट्रक्स के बीचमे से क्या कार निकाल रही थी, में डर भी रहा था और बहुत हैरान भी, लेकिन दीदी को मेरी और देखने का टाइम नहीं था और केवल उन्होंने मुझे १५ मिनट में वहाँ से सिटी का एक छोर से दूसरे छोर पर पहुच गए जहाँ पर हमारा घर था फिर दीदी ने एक दम से रोड के साइड में ब्रीक्स लगायी और कार को स्लीप कराइ और एक पेड़ के पास रोक दि, जैसे ही कार रुकि दीदी के हाथ में स्टेयरिंग था और उन्होंने मेरी और देखा और कार रुकते ही मैंने दीदी की और देखा. दीदी मेरी और देख कर मुस्कुरायी और में भी. मैं- बस अब कुछ मत बोलना, में मान गया की तुम भी तेज़ कार चलाती हो. फिर उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रक्खा और कहा, जो तुम कर सकते हो, उसे तुम्हारी दीदी तुमसे बेटर कर सकती हे.
 
अपडेट 22

और फिर वो आराम से कार चलाने लगि, और हम एक घर के नजदीक ही एक मॉल में गए और वहाँ दीदी ने घर के लिए कुछ सामान लिया और फिर हम बाहर खाना खाने गये, और बाहर एक होटल में डिनर निपटा के घर पहुंचे तो उस वक़्त ९.३० हो रहे थे. हम दोनों घर में आते ही दोनों एक एक सोफ़े पर लेट गए और मैंने फैन ऑन कर दिया, फिर मैंने दीदी से कहा.दीदी....ह्म्मम्....सुबह तो बिगडी आप की पर शाम को मज़ा आया की नही... .ओह माय गॉड, रेशु, बहुत मज़ा आया, सच में इतना में कभी थाकि नही,लेकिन मज़्ज़ा बहुत आया. एक तो घुमने का मज़्ज़ा और ऊपर से तुम्हारे नाटक, दोनों ने सच में आज का दिन बना दिया.. दीदी की आवाज़ में एक किस्म की शान्ति थी. .नाटक.? मेरे कौन से नाटक.. नाटक तो आपने किया था बिमार पड़ने का.. बाय गॉड में कितना डर गया था. मैंने बात कंटिन्यू की.अच्छा किया, तुम इसी लायक हो. तुम जैसे लोग, वो बिचारा गधा, अपनी गधी के साथ कुछ कर रहा था तो तुमसे देखा नहीं गया और उसे देखने लगे.? शर्म नहीं आती. . हमारी कमैंट्स का दौर जारी रहा. अब मेरे पास कोई जवाब नहीं था में सोफ़े पर से खड़ा हुआ, एक अंगडाई ली और दीदी से कहा, दीदी में नहाने जा रहा हू. आज बहुत मज़ा करने में भागा-दौड़ी भी बहुत हुई हे. .हाँ रेशु वैसे भी तुम बहुत बद्बू मारते हो.. दीदी एक भी मौका नहीं चुक रही थी मुझे परेशान करने का.. पर मैंने भी कहा.अच्छा...तो तुम ही नहला दो.. में भी तो देखु अच्छे से कैसे नहाया जाता हे... अब दीदी की बारी थी, एक झटका खाने की, पर उन्होंने मना कर दिया.नही..नही अपने आप ही नहाऊ.. अपने बहन से ऐसे कहते शर्म नहीं आती. दीदी ने मना किया. .क्यूं बड़ी अब शर्म आ रही हे, तेज़ गाड़ियां दौड़ाते हुए, लड़की होने का पता नहीं चलता. मैंने भी और एक तीर जैसे लाइन कहि, अब दीदी की बारी थी चुप होने की, वो कुछ बोली नही, पर उठि और मेरे जैसे अंगडाई लेने लगी तभी मैंने दीदी से कहा.दीदी याद हे.. हम छोटी चाची के गाँव में कुए में नहाने जाते थे. और एक बार तो साँप भी देखा था.. मैंने पास्ट में से एक बात निकाली..हा, और तुम उस टाइम अंडरवेअर में भागे थे, घर के लिये.. .हाँ तुम भी तो टॉवल में भागि थी.. फिर से हमारे बीच नोक झोक होने लगी..हा..पर तब हम छोटे थे.. दीदी ने कहा और किचन में जाने लगि, तो मैंने दीदी को पीछे से पकड़ लिया और दीदी के कान में कहा..छोटे थे तो मज़ा आता था तो अब तो और भी मज़्ज़ा आएगा.. और दीदी को बाथरूम के लिए ढ़केलने लगा. दीदी ने थोड़ी सी कोशिश जरूर की चुतने की पर चुत नहीं पायी, इतने में तो में उन्हें बाथरूम तक ले आया और इससे पहले की दीदी कुछ कहे, में दीदी को लेकर बाथरूम में घुस गया.मै बाथरूम में तो गया पर हा, अंदर जाने के बाद पता नहीं पर में थोड़ा सा शर्मा गया या कुछ सोच रहा था यह भी याद नही, पर फिर दीदी ने कहा.रेशु..क्या तुम सही में चाहते हो कि मैं तुम्हे नहलाऊं”?.या फिर कुछ और सोच रहे हो.? दीदी एक दम नार्मल लग रही थी और मैंने भी कह दिया.ऑफ़ कोर्स दीदी.. “आई ऍम शुअर”

तो फिर कपडे पहन के नहाना चाहते हो क्य...? और वो अपने मुँह पर हाथ रख के मुस्कुरा पडी. मैने भी अब अपने कपडे उतारना शुरू किया और एक के बाद एक अपने शर्ट के सारे बटन खोल डाले और शर्ट उतार के साइड में रख दिया. तब दीदी ने भी बड़े सिडक्टिव अंदाज़ में मेरे सीने पर हाथ रक्खा और कहा

.ओहः.. रेशु, अब समझि तुमने आज वेस्ट नहीं पहनी थी, इसीलिए कब से पसीने से बद्बू मार रहे थे. दीदी ने मुझे चिड़ाने के लिए कहा और यह सुनकर मैंने भी वो किया जो वो चाहती थी, मैंने भी उन्हें खिंच कर अपनी बाँहों में भर लिया और उनसे सट के लिपट गया, और अपने दोनों हाथों में जैसे वो टूट रही हो वैसे जम चुकी थी, मैंने फिर दीद से कहा

.क्यों दीदी पसिना कैसे लग रहा हे..? “आई होप की मज़ा आ रहा होगा”.. मैंने भी फिर से नहले पे दहला मारते हुए कहा.फिर दीदी भी मेरे सिने से अपने फेस को उठाय और मेरी और देखा और कहा,

.”सच कहूं..रेशु मज़ा आ रहा हे”... और फिर से वो हंस पड़ी और में भी थोड़ा सा शॉक हो गया. और वो मेरे पकड़ से आज़ाद हो गयी, फिर उन्होंने कहा की चलो मेरा टाइम वेस्ट मत करो और अपना पैंट भी उतारो, तो मैंने दीदी से कहा की ठीक हे और में घूम कर दीवार की और मुँह कर के अपने पैंट का हुक खोलने लगा, तो दीदी ने पूछ ही लिया जो में चाहता था .अरे पीछे क्यों घूम गया...? तो मैंने कहा की “दीदी तुम्हे तो कोई शर्म नहीं पर मुझे तो शर्म आयेगी ना”..
 
अपडेट 23

तो फिर कपडे पहन के नहाना चाहते हो क्य...? और वो अपने मुँह पर हाथ रख के मुस्कुरा पडी. मैने भी अब अपने कपडे उतारना शुरू किया और एक के बाद एक अपने शर्ट के सारे बटन खोल डाले और शर्ट उतार के साइड में रख दिया. तब दीदी ने भी बड़े सिडक्टिव अंदाज़ में मेरे सीने पर हाथ रक्खा और कहा

.ओहः.. रेशु, अब समझि तुमने आज वेस्ट नहीं पहनी थी, इसीलिए कब से पसीने से बद्बू मार रहे थे. दीदी ने मुझे चिड़ाने के लिए कहा और यह सुनकर मैंने भी वो किया जो वो चाहती थी, मैंने भी उन्हें खिंच कर अपनी बाँहों में भर लिया और उनसे सट के लिपट गया, और अपने दोनों हाथों में जैसे वो टूट रही हो वैसे जम चुकी थी, मैंने फिर दीद से कहा

.क्यों दीदी पसिना कैसे लग रहा हे..? “आई होप की मज़ा आ रहा होगा”.. मैंने भी फिर से नहले पे दहला मारते हुए कहा.फिर दीदी भी मेरे सिने से अपने फेस को उठाय और मेरी और देखा और कहा,

.”सच कहूं..रेशु मज़ा आ रहा हे”... और फिर से वो हंस पड़ी और में भी थोड़ा सा शॉक हो गया. और वो मेरे पकड़ से आज़ाद हो गयी, फिर उन्होंने कहा की चलो मेरा टाइम वेस्ट मत करो और अपना पैंट भी उतारो, तो मैंने दीदी से कहा की ठीक हे और में घूम कर दीवार की और मुँह कर के अपने पैंट का हुक खोलने लगा, तो दीदी ने पूछ ही लिया जो में चाहता था .अरे पीछे क्यों घूम गया...? तो मैंने कहा की “दीदी तुम्हे तो कोई शर्म नहीं पर मुझे तो शर्म आयेगी ना”..

.अच्छा इतना शर्माना था तो नहाने के लिए उतावला क्यों हो रहा थे..? “और वैसे भी इतना शरमायेगा तो पता नहीं आगे क्या करेगा”.? दीदी ने भी अपने साडी का पीछे रहने वाला खुला सिरा घुमा कर अपने नैवेल के पास साडी में फसा दिया और मैंने पैंट उतरना शुरू किया और जानबूझ कर पैंट को कमर से निचे उतार ते वक़्त एक साइड से अपना अंडरवेअर भी निचे कर दिया और अपने गांड चिक की एक झलक दीदी को दे दी और फिर से अंडरवेअर को अच्छे से पहन लिया, फिर मैंने पैंट को निचे ही रहने दिया ओर दीवार की तरफ मुँह कर के शावर ऑन कर दिया और खुद को भिगो लिया. फिर दीद से कहा की अब सोप लगाओ दीदी.

फ्रेंड्स, में इतना शर्मा तो नहीं रहा था पर एक बात थी की जब तक दीदी अपने मुँह से नहीं कहती तब तक उनके साथ सेक्स तो नहीं करुँगा और तब तक सिड्यूस करना हे जब तक वो अपने आप कहने पर टूट जाए, फिर दीदी ने कहा की

.अरे उधर मुँह कर के क्यों खड़ा हे.? इधर मेरी और घुम्.. दीद ऑफ़ कोर्स मेरे तने हुए लंड की और देखने चाहती थी.

.नही.. दीद पहले आप मेरी बैक पर साबून लगा दो.. मैंने भी दीदी को अपनी बैक थमा दी. वो भी ठीक हे बोल कर मेरी और साबून ले कर आई और मैंने शावर बंद कर दिया ता की वो भीग न जाये और वो आ कर पहले मेरे पीठ पर साबून लगया और जोर जोर स घिसा भी फिर मेरी नैक के पीछे और मेरी नैक पे भी साबून लगया और फिर खुद ही अपने आप मेरे पास आ कर मेरे पीछे से ही मेरे सीने पर सोप मसलने लगी और एक दो बार तो मेरे नीप्लेस पर जोर भी दि, फिर वो मेरे सीने से निचे उतर के मेरे पेट् पे साबून लगाई और पीछे कमर पे भी अपने हाथ रगड़ने लगी और फिरसे अपने हाथ आगे ले कर मेरे नैवल के साथ भी कुछ देर खेला और बाद में अपने हाथ मेरे नैवल से निचे लाने लागी, मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था मैंने अपनी आँखें बंद कर ली पर दीदी ने अपने हाथ फिर से कमर पर ले लिए और कहा

.अच्छा रेशु अब इसे भी खोल दो, साबून लगाना हे.. ऑफ़ कोर्स दीदी का इशारा मेरी अंडरवेअर की और था लेकिन मैंने कहा की दीदी वहा रहने दो में खुद लगा लूँगा आप बस पैर पर साबून लगा दो, फिर दो सेकंड तक उन्होंने कुछ बोला नहीं और मेरे पाँव पर साबून लगाने लगी, मुझे फिर अपने पर गुस्सा आया की में तो सोच रहा था की दीदी खुद ही मज़ाक़ में मेरा अंडरवेअर उतार देगी पर में गलत निकला और दीद मेरी जाँघ पे साबून लगाने के बाद निचे तक साबून लगा दिया और फिर अचानक से मेरा अंडरवेअर निचे खिंच लिया और में कुछ सोच भी नहीं पाया फिर मैंने दीदी की और देखा, कुछ कहा नहीं कहता भी क्य, कुछ कहने को अब था नही. फिर वो भी मेरी और देखने लगी और मेरी गांड पर उन्होंने अपना हाथ रक्खा और साबून लगाने लगी और बहुत ध्यान से देख भी रही थी, फिर दीदी के हाथ धीरे धीरे मेरे गांड क्रैक में घूसने लगे और उन्होंने एक दो बार मेरे गांड क्रैक को खोलने की कोशिश भी की पर ज्यादा हिम्मत नहीं कर पाई तो मैंने अपने आप ही अपने दोनों पाँव फैला दिए और दीदी के अक्शन का इंतज़ार करने लगा,

फिर दीदी ने भी अपने हाथ मेरे गांड होल से चिपका कर वहॉ खूब मसाज किया और बाद में मेरे दोनों लटकते बॉल्स को अपने हाथ में पकड़ लिया. अब मेरे से रहा नहीं गया, दीदी ने बहुत सिड्यूस कर लिया अब मेरी बरी थी. मैंने ऊपर एक मॉनिंग साउंड करते हुए दीदी से कहा

.आआ..हहह... दीदी प्लीज यहाँ कुछ मत करो... में दीदी की और नहीं देख रहा था कयूं..क्या हुआ रेशु? . दीदी ने मेरे मन की सिचुएशन जानते हुए भी मुझसे पूछा.

.ओह्हः.. कुछ हो रहा हे, स्ट्रेंज सा, पता नहीं क्या हो रहा हे.. पर अच्छा लग रहा हे.. दीदी के हाथ मेरी बातें सुनते वक़्त रुक गए पर फिर से उसे सेहलाने लगे और ऑफ़ कोर्स मेरा लंड अब खड़ा हो चुक्का था

.अच्छा लग रहा हे तो फिर रोकता क्यों हे...? और दीदी मस्ती में मेरे बॉल्स को सहलाने लगी, वो भी बहुत चाहती थी की उसे मुँह में लेकर चूसे पर शर्म नाम की भी कोई चीज़ होती हे, फिर दीदी ने आगे बढ़ते हुए मेरे लंड पर अपनी ऊंगलियां फेरी और फिर कहा

.रेशु.अब आगे घूम जाओ चलो.. दीदी अपनी नीज के बल पर बैठी थी और मेरे तने हुए लंड को देखने के लिए बेक़रार हो रही थी. पर मैंने कहा की दीदी नहीं शर्म आ रही हे, तो दीदी ने कह्, अरे अब तक तू शर्म की पूँछ पकड़ के बैठा हे और दीदी ने मुझे मेरे गांड को पकड़ते हुए घुमा दिया और मेरी गांड को नजदीक से देखने के चक्कर में वो मेरे नजदीक बैठी थी तो मेरा ताना हुआ लंड दीदी के सामने तो आ गया पर दीदी के ठीक राईट गाल को प्यार से टच भी किया और अब दीदी सब भूल गयी और मेरे लंड को ही देखने लगी, और में भी दीदी को डिस्टर्ब किये बिना उन्हें देख रहा था फिर कुछ देर बाद दीदी को होश आया और वो होश में आते हुए मेरी और देखि और में तो उन्हें ही देख रहा था जैसे ही दीदी ने मेरी और देखा तो मैंने दीदी को नॉटी सी स्माइल दी और दीदी भी अपने आप हँसते हुए फिर से मेरे लंड को देखने लगी और साबून ले कर उसे भी अपने हाथ में ले लिया और में फिर से मोअन कर पडा इस बार दीदी से आँख चुराने का सवाल नहीं था और दीदी ने मेरी और देखा पर मैंने नज़रें फेर ली और दीदी अब मेरे लंड को साबून लगाने के चक्कर में आगेपीछे करने लगी और में भी यही चाहता था फिर दीदी जब रुक गयी तो मैंने दीदी से कहा, प्लीज दीदी थोड़ा टाइम और करो ना.. और दीदी भी मेरे कहने के इंतज़ार में ही थी और में भी अपने वीर्य के झटकने का इंतज़ार करने लगा और दीदी भी जोश में ही हैंडजॉब कर रही थी. फिर दीदी ने और जोर लगा के आगे पीछे करना शुरू किया और में भी फकिंग के फंतासी में था फिर दीदी ने स्ट्रेंज सा किया, हलाकि स्ट्रेंज नहीं था बस वो अपने आप को रोक नहीं पाई होगी, उन्होंने मेरे लंड के आगे वाले टिप के पार्ट को एक किस दी और में झड पडा, मेरे लंड से वीर्य की धार निकलने लगी और शुक्रा की बात यह थी की सब धार दीदी के लिप्स, चिन और दीदी के क्लीवेज पर पड़ रही थी, दीदी यह सब देख रही थी पर कुछ बोली नही, और मैंने भी आखरी बूँदे जानबूझ कर दीदी के ब्लाउज पर ही गिरा दि, और जब झड़ना बंद हो गया तो दीदी ने बनावटी गुस्सा बनाते हुए मुझसे कहा

.उफ्फ्फ्.. रेशु, यह क्या किया तुमने.. शर्म नहीं आती? अपनी बहिन के साथ ऐसा करते हो.?
 
अपडेट 24

और वो खड़ी हो गयी, और फिर से कहा

.ऊफ. अब यह साफ़ भी नहीं होगा... दीदी के असली ग़ुस्से और नकली में बिलकुल पता चल रहा था मैंने भी दीदी के लेफ्ट हैंड को पकड़ा और दीदी को टोटली टर्न करते हुए अपनी बाँहों में भर लिया, अब दीदी मेरे आगे और में दीदी के पीछे था मेरे हाथ दीदी के पेट् पर थे, मैंने दीदी को पेट् से पकड़ा था इसिलिये. फिर दीदी ने पूछा,

.”रेशु.. अब तुम क्या कर रहे हो? छोडो मुझे”...

मैंने भी दीदी के काण में फुसफुसा कर कहा .बस.. दीदि, में अभी इसे साफ़ कर देता हू, प्लीज . और ऐसा कह कर मैंने दीदी का राईट हैंड अपने राईट हैंड से पकड़ा और दीदी के राईट हैंड को पेट से उठाते हुए मैंने दीदी के लिप्स पर रक्खा और फिर समझ कर दीदी की मिडिल फिंगर से दीदी के लिप्स पर गिरे अपने वीर्य ड्रॉप्स को साफ़ करने लगा और फिर फोरस्फुल्ली दीदी की मिडिल फिंगर को दीदी के मुँह में दाल दिया और दीदी के मुँह के अंदर बाहर करने लगा, दीदी भी बाय गॉड फुल सपोर्ट में थी, वो भी आँखें बंद कर के अपने ही मुँह में अपनी ऊँगली लेने का मज़ा ले रही थी, मेरा मानना था की शायद यह पहली बार कर रही थी वो या शायद उन्हें पहली बार इतना मज़ा आ रहा था इसीलिए वो अपनी ऊँगली को मुँह से बाहर नहीं निकालना चाहती थी, फिर मैंने दीदी के न चाहने के बावजूद दीदी के मुँह से ऊँगली निकाली और दीदी के फिर से राईट हैंड को पकड़ के दीदी के चिन से ड्रॉप्स साफ़ की और इस बार दीदी ने फोरस्फुल्ली अपने पूरे हाथ को उठाया और अपने मुँह में भी दाल दिया, अब वो पूरी तरह मेरे कण्ट्रोल में थी, मैंने फिर दीदी के हाथ को उनके मुँह से बाहर निकाला और अपने हाथ से उनके हाथ को पकड़ के दीदी के सीने पर रक्खा और अपने हाथ से उनका हाथ घुमाने लगा, फिर मैंने दीदी का पल्लो अपने लेफ्ट हैंड से जो की नैवल के पास बढ़ा था उसे छोड़ दिया और दीदी के काण में कहा,

.दीदी..यह पल्लू,बीच में आ रहा हे, हटा दू क्य...? जवाब पता था पर पूछ्ना जरूरी था,

.हटा दो. दीदी ने कह दिया, और मैंने लेफ्ट हैंड से दीद का पल्लू हटाया और राईट हैंड से दीदी के पूरे सीने पर दीदी का हाथ घुमाने लगा, या मनो दीदी के पूरे सीने पर में अपना वीर्य फैला रहा था फिर मैंने दीदी का हाथ दीदी के ब्लाउज के अंदर दाल दिया और साथ में अपना हाथ भी और फिर मैंने अपने हाथ को दीदी के हाथ पर रक्खा और स्लोवली और स्लोवली दबाने लगा, आह आह फ्रेंड्स कितना मज़ा आ रहा था आप भी शायद इमेजिन कर पाएंग़े.मैन कुछ देर दीदी के बॉब्स दबाने का मज़ा उठाने लगा और दीदी भी, अब वो पूरी तरह ढीली हो चुकी थी, दीदी का सारा बदन मुझ पर पड़ रहा था फिर मैंने दीदी के निप्पल को पकड़ा और उसे दबाया और दीदी के मुँह से मॉनिंग की स्लो आवाज़ें आने लगी फिर मैंने पीछे से स्लोवली कॉक ऑन कर के शावर चालू कर दिया था की दीदी तेज़ फव्वारे से खड़ी न हो जाये और अब हम दोनों भीगने लगे, में तो भीगा था ही पर में दीदी को भीगाना चाहता था दीदी को पता चला की वो भीग रही हे, पर मैंने दीदी को उठने नहीं दिया और दीदी के बॉब्स पर जोर दे कर फिर से अपने सीने से चिपका दिया और इससे पहले की दीद कुछ कहे, मैंने कहा की

.दीदी..कुछ नही, बस शावर ऑन हे, दाग धोने के लिये, आई होप यु डोंट माइंड. और दीदी ने भी कहै

.आई एम ओके, रेशु चाहो तो शावर बढा दो.. दीदी के ऐसा कहने का ही मानो इंतज़ार था और मैंने शावर बढा दिया और दीदी के बॉब्स से फिर खेल्ने लगा और मैंने फिर लेफ्ट हैंड से साड़ी जो नैवेल के पास लगयी होती ने वाहन हाथ दाल कर उसे धीरे धीरे खिंच कर बाहर निकाल दिया और अब दीदी की पूरी साडी खुल गयी, ऊपर से पल्लू तो पहले ही हटा दिया था और फिर इससे पूरी साडी निचे गिर गयी. अब मैंने दीदी के ब्लाउज के बटन पे अपना हाथ डाला और दोनों हाथो से पहला बटन खोलने लगा, मैंने अपना हाथ दीदी के ब्लाउज से बाहर निकाला पर अभी तक दीदी ने अपना हाथ अंदर ही रक्खा और खुद ही अपने बॉब्स को दबाये जा रही थी, मैंने धीरे से दीदी के सारे हुक खोल दिए और अब मैंने दीदी को आराम से हटाया और घुमा के अपने सीने से दीदी को चिपका दिया और फिर पीछे से दीदी के ब्लाउज को खींच लिया, अब दीदी मेरे सामने ब्रा और पेन्टी में ही थी. फिर आराम से मैंने दीदी की ब्रा का भी हुक खोला और दीदी से कहा

.दीदी प्लीज ब्रा भी उतार दिजिये ना...

.नहीं रेशु..तुम पागल तो नहीं हो रहे... दीदी के मुँह से यह जवाब सुनकर में हैरान रेह गया क्यों की मुझे लग रहा था की दीदी उस सिचुएशन में थी की वो मेरी हर बात मान जाती पर दीदी ने मना कर दीया.

.शीट.थिस इस नोट फैअर, आप मुझे न्यूड कर सकती हे और अपने आप होने से क्यों हिचकिचा रही हे.? और ऐसा कहते ही मैंने दीदी के कंधे से ब्रा के स्ट्राप खिंच डाले और दीदी के बॉब्स मेरे सामने नंगे हो गयी. मैं हल्का सा घबराया कीकहीं इस हलकी सी जबरदस्ती से दीदी गुस्सा नहीं हो जाये पर और कुछ न सोचते हुए मैंने दीदी को फिर से अपने पास खींच लिया और बाँहों में भर के दीदी को किस करने लगा, शोल्डर पर, चिकस्, काण पर पूरे मुँह पर किस कर दिए और इस तरह चूमने के बाद मैंने दीदी को अपने से अलग किया, अब वो शायद भूल चुकी थी की मैंने उनकी इजाज़त के बगैर उनकी ब्रा उतार दी हे, फिर मैंने दीदी को अलग करके कहा

.क्यों दीदि, इस नहले का कोई जवाब हैं क्या.? और नॉटी सा मुस्कराया. और दीदी भी मुस्कुराते हुए मेरे पास आई और मुझे कस के जोर से पकड़ा और अपनी बाँहों में भर लिया और फिर वो मेरे लिप्स तक नहीं पहुँचि तो वो मेरे ऊपर चढ़ गयी और अपने पाँव मेरे गांड के पास लप्पेट के मेरे ठीक सामने आ गयी और अपने हाथ मेरे नैक के पास ले लिये, फिर मैंने भी इस मौके को न छोड़ते हुए मैंने दीदी की बैक को पकड़ा और फिर दीदी ने रिलैक्स होते हुए मेरे गालो पे अपने हाथ रक्खे और मेरे लिप्स को अपने लिप्स से जकड लिया और चूसने लगी, यह मेरे लिए कोई शॉक नहीं था यह एक्सपेक्टेड था पर कभी कभी जो एक्सपेक्ट किया होता हे वो भी इतना हसीन होता हे की मज़्ज़ा आ जाए, अब तो कोई रुकना ही नहीं था मैंने भी दीदी के सर को पीछे से पकड़ा और अपने लिप्स से चिपका के रक्खा और मस्त चूसने लगा, फिर मैंने अपना सलीवा दीदी के मुँह में छोड़ दिया और दीदी ने आँखें खोल के मेरी और देखा, अब उन्हें पता था की हम दोनों के बीच में क्या हो रहा हे, इसीलिए उन्होंने अपने लिप्स को अलग किया और मुझे देखकर सोचने लगी, शायद यही सोच रही थी की जो भी हो रहा हे , सही हे या नही, इधर मेरा लंड फिर से खड़ा हो रहा था और दीदी की चुत को टच कर रहा था लेकिन दीदी ने मुझे छोड़ दिया और बाहर जाने लगी, तो में भी उनके पीछे दौड़ा और बाहर निकलते ही दीदी का रूम था मैंने दीदी के हाथ को पकड़ा और फिर से अपनी और घुमा के अपने से सटा लिया और फिर से किस करने लगा, दीदी ने भी रेस्पॉन्स किया पर अभी भी वो उल्झन में थी, फिर में उनके रूम में ही दाखिल हो गया और दीदी को बेड पर गिरा दिया और फिर से उन्हें किस करने लगा, और दोनों हाथों से उनके बॉब्स दबाने लगा, उनके निप्पल्स कड़क हो चुके द, लेकिन वो अभी भी मेरी जीभ को अपने मुँह में नहीं ले रही थी, मतलब अभी थोड़ी सी हिचकिचाहट बाकि थी, तो मैंने भी दीदी को छोड़ा और दीदी की और देख कर बड़े प्यार से प्लीज कहा
 
अपडेट 25

दीदी ..प्लीज्. और वो फिर से सोच रही थी. मैं भी सोच में पड़ गया पर दीदी ने इस बार मुझे पकड़ा और अपने से लगा लिया और मुझे पलटा के मेरे ऊपर आ गयी और मेरे कान में कहा

.जस्ट किडिंग.. कितने परेशान हो रहे हो..? कोई बात नहीं लेट्स स्टार्ट अगेन. और मुझे अब वो प्यासी औरत की तरह किस करने लगी और में भी खुश होते हुए रेस्पोंड करने लगा. और अब मैंने भी दीदी को पलटा दिया और बॉब्स दबाने लगा. फिर मैंने दीदी के बॉब्स चूसे और मस्त दबाने लगा, ओह क्या मस्त मस्त बॉब्स थे, पिंकिस कड़क निप्पल और क्रीमी बूब्स, बाय गॉड मेरा लंड अब और भी तन रहा था फिर दीदी ने अपना एक हाथ मेरे निचे ले जाते हुए मेरे लंड को पकड़ लिया और में समझ गया की उनसे अब रहा नहीं जाता तो में भी उठ गया और दीदी के पास बैठ गया और दीदी मेरे लंड को सहलाने लागी, थोड़ी देर तक सहलाने के बाद मैंने उनके मुँह में ही लंड दाल दिया और वो भी इसी बात का इंतज़ार में थी उन्होंने भी मस्त इसे चूसना शुरु कर दिया और में भी फिर से इस नशे में खो रहा था मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था कभी इन्सेस्ट रिलेशन्स न मान ने वाला, आज अपनी ही चाची और बहन के साथ सेक्स कर रहा था पर एक बात तो सही हे, की आप किसी को पटा के उसके साथ सेक्स करें और अपने रिलेटिव जो आपको नजदीक से जानते हे, उसके साथ सेक्स करे उसमे बड़ा फर्क हे

दीदी अब कुछ सोचने के सिचुएशन में नहीं थी, और में अब कुछ सोचना नहीं चाहता था दीदी अब मस्ती से मेरे लंड को चूसे जा रही थी, और उन्हें मेरे दोनों लटकते बॉल्स को चूसने को भी बड़ा मज़ा आ रहा था में अपनी नीज पर बैठा था और दीदी के बालों को सहला रहा था फिर मैंने दीदी के मुँह पर प्रेशर देना शुरू किया और दीदी के मुँह को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे चोदने लगा, और धीरे धीरे अपना लंड उनके गले के अंदर बाहर करने लगा, वाह्ह्, कितना मज़ा आ रहा था दीदी की हालत से भी यह लग रहा था की वो पहली बार माउथ फूकिंग कर रही हे, और मैंने भी पहली बार में शांति से काम लेना चाहा. मस्ती से आराम से में दीदी के थ्रोट में अपना लंड जाने देता था और बाहर ला रहा था वाओ येल्लो रौशनी में दीदी का क्रीमी बदन और रेड लिप्स, क्या कॉम्बिनेशन था बाय गॉड. फिर मैंने धीरे धीरे अपनी स्पीड बधाई और दीदी के मुँह को स्पीड में चोदने लगा, दीदी के मुँह में से आवाज़ें आ तो रही थी, पर वो प्लेसर की लग रही थी, दर्द की नही, फिर मैंने दीदी के मुँह में अपना लंड फसा ही दिया, और दीदी के सर को पकड़ के अपना लंड दीदी के गले में फसा दिया, और सर को ठीक अपने बॉल्स तक चिपका दि, अब जा के दीदी को तकलीफ होने लगी और वो अपने हाथ से दर्द बयान कर रही थी. दोस्तों आप को लग रहा होग, की इसमें क्या पर एक बार ९ इंच गले में चिपक जाये तो सांस भी नहीं ले पोओगे, वैसा ही हाल दीदी का था फिर मैंने दीदी को ज्यादा परेशान न करते हुए, दीदी के सर को आज़ाद किया लेकिन लंड पूरा बाहर निकाल दिया. दीदी जो की अब तक डॉगी स्टाइल में मेरा लंड चूस रही थी, वो अब सीधी बेड पर गिर पड़ी और मेरी और देखने लगी, और कहा

.”ओह माय गॉड रेशु”. तुम तो मेरी जान ही ले लेते, पता हे, में सांस नहीं ले पा रही थी.. फिर उन्होंने अपने सीने पर हाथ रक्खा और तीन चक्कर गहरी साँसे ली और फिर मेरी और मुस्कुरा के कहा

.”लेकिन रेशु..एक बात हे, मज़ा बड़ा आया”.. और वो मुस्कुरा पडी और उनकी मुस्कराहट से उनकी अंदरूनी ख़ुशी और सटिस्फैक्शन साफ़ झलक रहा था

फिर में भी उन्हें स्माइल दे कर बेड से निचे अपनी नीज पर बैठ गया और दीदी की दोनों टांगे पकड़ के दीदी को अपने पास खिंच लिया और फिर मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी की कमर पकड़ी और दीदी को और भी अपने पास खिंचा और दीदी की पेन्टी में हाथ दाल कर दीदी की पेन्टी को उतार दिया और दीदी की चुत को देखने लगा. देखने के बाद मैंने अपने लिप्स उसके पास ले जा का उसे एक प्यार से किस दिया और फिर अपने हाथ से उसे सहलाने लगा, अपना हाथ चुत के ऊपर निचे फेरने लगा, और फिर से एक किस दि, क्या मस्त चुत थी, अभी भी गुलाबी थी, और टाइट भी. मैं बार बार उसे पहले तो किस करने लगा, और दीदी भी सीडक्शन फील कर रही थी. फिर मैंने अपनी जीभ से दीदी की चुत को निचे से ऊपर चाटा और अपनी जीभ फिरायी, और फिर फिर अपनी दो उँगलियों से दीदी की चुत को फ़ैलाया और खुलने के बाद मैंने अपनी जीभ से दीदी की चुत को चूसने लगा और अभी तो उनके चुत से हट्ने का मन नहीं हो रहा था क्या मज़ा आ रहा था क्या खुशबू थी बॉस, मज़ा आ गया. अब दीदी के चुत से फ्लूइड बहना शुरू हो गया था वो भी अब मदहोश हो रही थी और मेरे सर को अपनी चुत में और घूसा रही थी,
 
अपडेट 28

फिर मैंने अपना मुँह चुत से निकाला, मेरा लंड तो कब का टाइट कर दिया था, दीदी ने और फिर मैंने अपनी दीदी के चुत पे अपना लंड घिसा और दीदी के चुत के निचे हिस्से पर अपना सुपाडा वाला पार्ट रक्खा और उसे ऊपर करने लगा, वहा तक जहाँ तक मेरे दोनों बॉल्स भी दीदी की चुत को महसूस हो, दीदी अब मेरा लंड अंदर लेने के लिया तड़प उठी थी, मेरा ऐसे तीन चार बार तडपाने से वो बोल उठी

”रेशु..प्लीज् ऐसे मत करो, प्लीज अंदर डालो ना, बहुत सही कर रहे हो”... दीदी की आवाज़ में तड़प थी.

मैने भी दीदी से कहा की दीदी आपके ऐसा बोलने का ही इंतज़ार था और मैंने अपना सूपाडा दीदी के चुत के ऊपर रक्खा और,

लेफ्ट हैंड से दीदी की चुत को फैला के चुत में लंड दाल दिया, पहले तो चुत में पूरा लंड गया नहीं और फिर मैंने दूसरी बार जोर लगा के पूरा लंड अंदर दाल दिया तो दीदी मेरा पूरा लंड अंदर पा के मचल उठी की बेड पे कमर मोड़ के उठने लगी और तडपने लगी,

बाद में मैंने दीदी को पकड़ लिया और दीदी को बेड पर ठीक से लिटा दिया और मैंने दीदी के लिप्स को फिर से अपने लिप्स में कैद कर लिया और चुस्सने लगा,

और निचे आराम से लंड अंदर बाहर करने लगा, अभी ऑफ़ कोर्स दीदी को मज़ा आने वाला था उन्हें दर्द नहीं हो रहा था में भी आराम से लिप् किस कर रहा था और आराम से दीदी को चोद रहा था

दीदी भी मज़े ले रही थी, फिर मैंने दीदी के लिप्स को आज़ाद करते हुए उनके बॉब्स को चूसने लगा और दबाने लगा,

क्या मस्त बॉब्स थे और मैंने फिर चोदने की स्पीड थोड़ी बधाई और बॉब्स को चूसने की स्पीड भी,

फिर मैंने दीदी अपने राईट साइड से एक तकिए उठाय और उसे दीदी के कामर के निचे रख दिया और दीदी फिर से अपनी वही पोजीशन में आ गई और दीदी के दोनों पाँव फैला लिये, अब दीदी समझ गयी थी की अब रियल पिक्चर स्टार्ट होने वाली हे,

और मैंने दीदी को चोदने की स्पीड और भी तेज़ कर दी और दीदी के मुँह में से अब “आह, ओह, यस, यस, “फ़क मि हार्डर”...याह की आवाज़ें भी तेज़ हो गयी,

और में उन्हें बिना रुके चोदता रह, फिर मैंने दीदी के लेफ्ट पाँव को अपने हाथ में उठा लिया और अपने कंधे पर रक्खा और चुदाई तो ज़री ही थी,

दीदी के आँखों में अब दर्द साफ़ हो रहा था और वो कह रही थी,

ओह.रेशु.प्लीज धीरे धीरे और उनसे अब बोला नहीं जा रहा था और लब्ज़ अब उनके लिप्स में टूटने लगे थे,

फिर मैंने दीदी को ऊपर थोड़ा सरका दिया और में भी उनके साइड में हो के चोदने लगा उस पोज में मुझे मज़ा नहीं आया तो मैंने दीदी को डॉगी स्टाइल बिठा दिया और दीदी को झटके मारने लगा,

बड़ा अच्छा लग रहा था और मेरे हर झटके पे दीदी आगे जाती और चिल्लाती थी,

फिर मैंने दीदी को फिर से मिशनरी पोजीशन में ले दिया और फिर अपने दोनों हाथ दीदी के कंधे पर रक्खे और दीदी को चोदना शुरू किया,

तक़रीबन एक घंटे से में चोद रहा था और दीदी भी इतनी लम्बी चुदाई से थोड़ी सी हैरान थी,

उनके सारे बाल भीग चुके थे, और उनके सारे बदन पर बिखर चुके थे,

इतनी लम्बी चुदाई उन्होंने शायद कभी सही नहीं थी,

और अब तो उनका चिल्लने में से आवाज़ भी कम हो चुकी थी,

फिर मैंने एक बार सट से झटका दिया की दीदी झड गयी और मुझसे उठ कर लिपट गयी,

दीदी पूरी पसीने से भीग चुकी थी, हम जब बाथरूम से आये थे,

तभी वो पाणी से भीगी हुई थी और थकावट से, मैंने भी उन्हें अपने बाहों में भर लिया,

पर अभी मेरा झड़ना बाकि था इसीलिए मैंने तो चुदाई जारी रक्खी और फिर से उन्हें लिटा दिया और अपनी स्पीड और भी बढा दि,

अब तो मेरी और दीदी की जांघे तकरने से जो आवाज़ होती थी वो अब एक आवाज़ हुई नहीं की दूसरी बार में दीदी को झटके से तकरा जाता था अब दीदी थक के बेहाल थी और वो अब रियेक्ट करना छोड़ चुकी थी,

फ्रेंड्स जब औरत स्याटिसफ़ाय हो जाती हे तो वो अपना शरीर एक दम ढीला छोड़ देती हे और वैसे ही दीदी का शरीर अब ढीला हो चुक्का था उनका हाथ अब रिस्पांस नहीं दे रहा था न ही अब आवाज़ आ रही थी, बस मुँह पर दर्द के एक्सप्रेशंस आ रहे थे.

अब फ्रेंड्स में भी अब थक गया था और एक्ससिटेमेंट से लगा की अब में भी झड़ने वाला हूँ तो मैंने और स्पीड बड़ाई और दीदी से कहा

”दीदी लगता हे अब में भी फिनिश करने वाला हू”...

.”अंदर ही कर दो.. रेशु, बहुत अच्छा लग रहा हे”.. दीदी ने थकन के मारे आँखें बंद से ही जवाब दिया.

पर दीदी प्रेगनेंसी..?

.सोचो मत. चिंता मत करो.. ओर मैंने दीदी के अंदर ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया और दीदी के ऊपर गिर पडा बॉस में भी बहुत थक गया था मैं. भी पसीने से तरबतर था और दीदी भी.

हम दोनों में से कोई भी अब कुछ बात करने के सिचुएशन में नहीं थे और मुझे बाद में पता ही नहीं की कब आँखें बंद हो गयी और कब सुबह के १० बज गये.
 
अपडेट 29

सूबह उठा और बीति हसीं रात के बारे में सोचने लगा,

अब दीदी क्या महसूस कर रही होगी,

कहीं वो भी अपनी माँ की तरह मुझ पर गुस्सा तो नहीं करेंगी.

सब सोच रहा था और सोचते सोचते में फ्रेश भी हो गया

और रूम से बाहर आया और दीदी को ढूँढ़ने लगा पर दीदी घर में कहीं मिली नही,

एक पल के लिए बुरा ख्याल आया,

पर इतने में मैंने दीदी को बाहर से अंदर आते देखा.

हम दोनों एक दूसरे के सामने खड़े थे पर कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या बात करू?

कल रात को इतने नजदीक थे और अभी पता नहीं इतनी दूरी क्यों लग रही थी.

दीदी भी शायद इसी सिचुएशन में थी, इसीलिए वो भी कुछ नहीं बोलि,

और चुपचाप किचन में चलि गयी.

मैं भी वहीँ ड्राइंग रूम में बैठकर टीवी देखने लगा.

बस १० मिनट में दीदी चाय बनाकर बाहर आई और मेरे पास आ कर मुझे एक कप दिया और मेरे सामने बैठकर चाय पीने लगी,

अभी भी हमारे बीच एकदम साइलेंस था ऐसा तो पहले कभी सोचा नहीं था

मै चाय अपने हाथ में पकड़ के कल रात की सोच में खो गया था

तभी मुझे पता नहीं चला कब दीदी सामने से उठकर मेरे पास में आ कर बैठ गयी

और मेरे कंधे पर अपने हाथ रक्खा और कहा

“क्या सोच रहे हो रेशु...?

दीदी ने कहा तब जा के मानो में नींद से जगा और दीदी को सामने देखा,

वो मेरे सामने देख रही थी और समझ भी रही थी.

मैंने दीदी की और से ध्यान हटा कर अपने कप की और देखा और कहा

”दीदी.शायद आप समझ रही हे,

में क्या सोच रहा हु..

मैंने कहा, उस वक़्त में बहुत टेंस लग रहा था और में भी नहीं जानता,

में उस वक़्त नाटक कर रहा था की सही मायनो में में टेंस था पर दीदी ने मेरे गाल पर किस किया और कहा .

समझ भी रही हूँ और उसके बारे में कुछ कहना भी नहीं चाहती.

तुम भी मत सोचो और एक काम करो,

उसके बारे में मत सोचो,

और हाँ अगर तुम मेरे बारे में सोच रहे हो तो एक बात सुनो

में कल रात के बारे में किसी से कोई जिक्र नहीं करूंग़ी,

और हाँ तुमसे भी यह उम्मीद रहेगी की तुम भी किसी से कुछ नहीं कहोगे..

दीदी ऐसा बोल के किचन में चलि गयी और लंच प्रेपर करने लागी.

मै अब भी पता नहीं इतना क्यों सोच रहा था

कल जिसके इतना करीब था की उसकी साँसे में महसूस कर रहा था उससे इतना क्यों अलग लग रहा था

लेकिन में फिर वहॉ से अपनी चाय ख़त्म कर के उठा और चाय का कप रखने किचन में गया और दीदी की बैक को देख.

दीदी ने मस्त ऑरेंज कलर की साडी पहनी थी और मैचिंग ब्लाउज था और वो भी बर्तन ही साफ़ कर रही थी.

मेरे अंदर आने की आहट उन्हें हो गयी थी और वो यह भी जान रही थी की में कल के बारे में सोच कर अपसेट सा हू.

वो मेरी और मूड़ी और मेरी और देखा,

बाय गॉड वो किसी milf हसीना से कम नहीं लग रही थी.

दीदी ने अपने बाल अपनी बैक से आगे की साइड किये और मेरी और देखा,

में अभी भी किचन के दरवाजे पर खड़ा रेहकर उन्हें ही देख रहा था

उन्होंने मुझे देखा और कहा

“रेशु. वहा क्या देख रहे हो..? इधर आओ..

दीदी के कहते ही मेरे कदम उनकी और उठने लगे, और में दीदी के पास आ कर खड़ा हो गया

और ठीक दीदी के पीछे खड़ा था में दीदी की बस खूबसूरती को देख रहा था

दीदी जानती थी पर वो भी बस अपने बर्तन ढ़ोने में लगी थी

और में उन्हें देख रहा था फिर एक आईडिया आया और मैंने अपना कप साइड में रक्खा

और दीदी को पीछे से गले लगा लिया और अपनी और खींच लिया और अपने से सटा लिया.

मेरे हाथियार में हरकत तो होने लगी थी पर में उसके बारे में सोच नहीं रहा था में बस दीदी के बारे में सोच रहा था

दीदी भी पूरी मुझ से एक दम चिपक गयी थी और वो कुछ कहे,

इससे पहले मैंने ही दीदी को कहना शुरू कर दिया.

.थैंक यु.. दीदि, में यही सोच रहा था की कहीं आप मुझसे कल रात के बारे में नाराज़ तो नहीं हे,

पर आपने कह कर मेरा सारा डर निकाल दिया..

और ऐसा कहते हुए मैंने दीदी के कान के निचे गाल के करीब एक मीठा किस किया

और दीदी के रिएक्शन का इंतजार करने लगा.

“रेशु. मुझे पता था की तुम इसी बात से परेशान थे इसीलिए मैंने तुम्हे पहले से ही कह दिया,

अब तो तुम ठीक हो ना”... दीदी ने पूछ,

और मैंने फिर से दीदी के गाल पर किस की और कहा,

में बिलकुल ठीक हूँ दीदी. और अपने एक हाथ से दीदी के पेट् पे प्रेशर दिया

और में बात यही ख़त्म नहीं करना चाहता था

इसीलिए मैंने दीदी से कहा

“दीदि, एक बात पुछु...?

“यह कोई पुछने वाली बात है”,

जो पूछना हे वो पुछौ”.. दीदी को इतना शांत और नार्मल देख कर मैंने भी पुछ लिया.

“दीदी.. कल रात की एक एक बात अभी भी मेरे जहन में हे और सच कहूं,

तो मुझे कल रात आपके साथ बड़ा मज़ा आया और .. में बोलते बोलते रुक गया.
 
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