S
StoryPublisher
Guest
अपडेट 38
हाय रेशु तेरा लंड बहुत मोटा है….गांड छोड़ कर चुत मारले…मैंने तुझे गांड चाटने दिया….गांड का पूरा मजा लेलिया अब रहने दे….” मैं दीदी की मिन्नत करने लगा.
“हाय दीदी प्लीज़….बस एक बार…किताब में लिखा है कितना भी मोटा…..हो चला जाता है…हाय प्लीज़ बस एक बार…बहुत मजा…आता है…मैंने सुना है….प्लीज़….”
अब दीदी को क्या मालूम कि मैं उसकी माँ की भी गांड मार चुका हूं पर कभी कभी मासूम बनने में भी मजा आता है मैं दीदी के पैर को चूम रहा था, गांड को चूम रहा था,
कभी हाथ को चूम रहा था.
दीदी से मैं भीख मांगने के अंदाज में मिन्नते करने लगा.
कुछ देर तक सोचने के बाद दीदी बोली
”ठीक है रेशु तू करले….मगर मेरी एक शर्त है….पहले अपने थूक से मेरी गांड को पूरा चिकना कर दे….या फिर थोड़ा सा मख्खन का टुकड़ा ले आ मेरी गांड में डालकर एकदम चिकना करदे फिर….अपना लण्ड डालना…डालने के पहले…. लण्ड को भी चिकना कर लेना….हाँ एक और बात तेरा पानी मैं अपनी चुत में ही लुंगी खबरदार जो…. तुने अपना पानी कही और गिराया….गांड मारने के बाद चुतके अन्दर डालकर गिराना….नहीं तो फिर कभी तुझे चुत नहीं दूंगी… और याद रख मैं इस काम में तेरी कोई मदद नहीं करने वाली मैं कुर्सी पकडकर खड़ी हो जाउंगी…..बस….”
मैं राजी हो गया और तुंरत भागता हुआ रसोई से फ्रीज खोल मख्खन के दो तीन टुकड़े ले कर आ गया.
दीदी तब तक सोफे वाली चेयर के ऊपर दो तकिया रख कर अपने आधे धड को उस पर टिका कर गांड को हवा में लहरा रही थी.
मैं जल्दी से उनके पीछे पहुँच कर उनके चुतडो को फैला कर मख्खन के टुकड़ो को एक-एक कर उसकी गांड में ठेलने लगा.
गांड की गर्मी पा कर मख्खन पिघलता जा रहा था और उसकी गांड में घुस कर घुलता जा रहा था.
मैंने धीरे धीरे कर के सारे टुकड़े डाल दिए फिर निचे झुक कर गांड को बाहर से चाटने लगा.
पूरी गांड को थूक से लथपथ कर देने के बाद मैंने अपने लण्ड पर भी ढेर सारा थूक लगाया और फिर दोनों गांड को दोनों हाथ से फैला कर लण्ड को गांड की छेद पर लगा कर कमर से हल्का सा जोर लगाया.
गांड इतनी चिकनी हो चुकी थी और छेद इतनी टाइट थी की लण्ड फिसल कर गांड पर लग गया.
मैंने दो तीन बार और कोशिश की मगर हर बार ऐसा ही हुआ.
दीदी इस पर बोली
“देखा रेशु मैं कहती थी न की एकदम टाइट है….ल….मेरी बात नहीं मान रहा था…किताब में लिखी हर बात…..सच नहीं….हाय तू तो….बेकार में….उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ कुछ होने वाला नहीं….दर्द भी होगा…..हाय…..चुत में डाल ले….ऐसा मत कर….”
मगर मैं कुछ नहीं बोला और कोशिश करता रहा.
थोड़ी देर में दीदी ने खुद से दया करते हुए अपने दोनों हाथो से अपने गांड को पकड़ कर खींचते हुए गांड के छेद को अंगूठा लगा कर फैला दियाऔर बोली
“ले अपने मन की आरजू पूरी करले…. हाथ धो के पीछे पड़ा है….ले अब घुसा….
लण्ड का सुपाड़ा ठीक से छेद पर लगाकर उसके बाद….धक्का मार…धीरे धीरे मारना…….…..
” मैंने दीदी के फैले हुए गांड के छेद पर लण्ड के सुपाड़े को रखा और गांड तक का जोर लगा कर धक्का मारा.
इस बार पक से मेरे लण्ड का सुपाड़ा जा कर दीदी की गांड में घुस गया. गांड की छेद फ़ैल गई.
सुपाड़ा जब घुस गया तो फिर बाकी काम आसान था क्योंकि सबसे मोटा तो सुपाड़ा ही था.
पर सुपाड़ा घुसते ही दीदी की गांड फड़फड़ाने लगी.
वो एक दम से चिल्ला उठी और गांड खींचने लगी.
मैंने दीदी की कमर को जोर से पकड़ लिया और थोड़ा और जोर लगा कर एक और धक्का मार दिया.
लण्ड आधा के करीब घुस गया क्योंकि गांड तो एक दम चिकनी हो चुकी थी.
पर दीदी को शायद दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ चिल्लाते हुए बोली “हरामी….कुत्ते…कहती थी….मतकर… मादरचोद….पीछे पड़ा हुआ था…..साले….हरामी….छोड़….. हाय…मेरी गांड फट गई…उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़….सीईईईई….अब और मत डालना….हरामी….तेरी माँ को चोदु…..मतडाल….. हाय निकल ले…निकल ले रेशु….गांड मतमार….हाय चुत मारले….हाय दीदी की गांड फाड़कर क्या मिलेगा….सीईईईईइ…आईईईईईइ……..मररररर….गईइइइ …..”
दीदी के ऐसे चिल्लाने पर मेरी गांड भी फट गई और मैं डर रुक गया और दीदी की पीठ और गर्दन को चूमने लगा और हाथ आगे बढा कर उसकी दोनों लटकती हुई बॉब्स को दबाने लगा.
मुझे पता था कि अभी निकल लिया तो फिर शायद कभी नहीं डालने देगी इसलिए चुप-चाप आधा लण्ड डाले हुए कमर को हलके हलके हिलाने लगा. कुछ देर तक ऐसे करने और बॉब्स दबाने से शायद दीदी को आराम मिल गया और आह उह करते हुए अपनी कमर हिलाने लगी.
मेरे लिए ये अच्छा अवसर था और मैं भी धीरे धीरे कर के एक एक इंच लण्ड अन्दर घुसाता जा रहा था.
हम दोनों पसीने पसीने हो चुके थे.
थोड़ी देर में ही मेरी मेहनत रंग लाइ और मेरा लण्ड लगभग पूरा दीदी की गांड में घुस गया.
हाय रेशु तेरा लंड बहुत मोटा है….गांड छोड़ कर चुत मारले…मैंने तुझे गांड चाटने दिया….गांड का पूरा मजा लेलिया अब रहने दे….” मैं दीदी की मिन्नत करने लगा.
“हाय दीदी प्लीज़….बस एक बार…किताब में लिखा है कितना भी मोटा…..हो चला जाता है…हाय प्लीज़ बस एक बार…बहुत मजा…आता है…मैंने सुना है….प्लीज़….”
अब दीदी को क्या मालूम कि मैं उसकी माँ की भी गांड मार चुका हूं पर कभी कभी मासूम बनने में भी मजा आता है मैं दीदी के पैर को चूम रहा था, गांड को चूम रहा था,
कभी हाथ को चूम रहा था.
दीदी से मैं भीख मांगने के अंदाज में मिन्नते करने लगा.
कुछ देर तक सोचने के बाद दीदी बोली
”ठीक है रेशु तू करले….मगर मेरी एक शर्त है….पहले अपने थूक से मेरी गांड को पूरा चिकना कर दे….या फिर थोड़ा सा मख्खन का टुकड़ा ले आ मेरी गांड में डालकर एकदम चिकना करदे फिर….अपना लण्ड डालना…डालने के पहले…. लण्ड को भी चिकना कर लेना….हाँ एक और बात तेरा पानी मैं अपनी चुत में ही लुंगी खबरदार जो…. तुने अपना पानी कही और गिराया….गांड मारने के बाद चुतके अन्दर डालकर गिराना….नहीं तो फिर कभी तुझे चुत नहीं दूंगी… और याद रख मैं इस काम में तेरी कोई मदद नहीं करने वाली मैं कुर्सी पकडकर खड़ी हो जाउंगी…..बस….”
मैं राजी हो गया और तुंरत भागता हुआ रसोई से फ्रीज खोल मख्खन के दो तीन टुकड़े ले कर आ गया.
दीदी तब तक सोफे वाली चेयर के ऊपर दो तकिया रख कर अपने आधे धड को उस पर टिका कर गांड को हवा में लहरा रही थी.
मैं जल्दी से उनके पीछे पहुँच कर उनके चुतडो को फैला कर मख्खन के टुकड़ो को एक-एक कर उसकी गांड में ठेलने लगा.
गांड की गर्मी पा कर मख्खन पिघलता जा रहा था और उसकी गांड में घुस कर घुलता जा रहा था.
मैंने धीरे धीरे कर के सारे टुकड़े डाल दिए फिर निचे झुक कर गांड को बाहर से चाटने लगा.
पूरी गांड को थूक से लथपथ कर देने के बाद मैंने अपने लण्ड पर भी ढेर सारा थूक लगाया और फिर दोनों गांड को दोनों हाथ से फैला कर लण्ड को गांड की छेद पर लगा कर कमर से हल्का सा जोर लगाया.
गांड इतनी चिकनी हो चुकी थी और छेद इतनी टाइट थी की लण्ड फिसल कर गांड पर लग गया.
मैंने दो तीन बार और कोशिश की मगर हर बार ऐसा ही हुआ.
दीदी इस पर बोली
“देखा रेशु मैं कहती थी न की एकदम टाइट है….ल….मेरी बात नहीं मान रहा था…किताब में लिखी हर बात…..सच नहीं….हाय तू तो….बेकार में….उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ कुछ होने वाला नहीं….दर्द भी होगा…..हाय…..चुत में डाल ले….ऐसा मत कर….”
मगर मैं कुछ नहीं बोला और कोशिश करता रहा.
थोड़ी देर में दीदी ने खुद से दया करते हुए अपने दोनों हाथो से अपने गांड को पकड़ कर खींचते हुए गांड के छेद को अंगूठा लगा कर फैला दियाऔर बोली
“ले अपने मन की आरजू पूरी करले…. हाथ धो के पीछे पड़ा है….ले अब घुसा….
लण्ड का सुपाड़ा ठीक से छेद पर लगाकर उसके बाद….धक्का मार…धीरे धीरे मारना…….…..
” मैंने दीदी के फैले हुए गांड के छेद पर लण्ड के सुपाड़े को रखा और गांड तक का जोर लगा कर धक्का मारा.
इस बार पक से मेरे लण्ड का सुपाड़ा जा कर दीदी की गांड में घुस गया. गांड की छेद फ़ैल गई.
सुपाड़ा जब घुस गया तो फिर बाकी काम आसान था क्योंकि सबसे मोटा तो सुपाड़ा ही था.
पर सुपाड़ा घुसते ही दीदी की गांड फड़फड़ाने लगी.
वो एक दम से चिल्ला उठी और गांड खींचने लगी.
मैंने दीदी की कमर को जोर से पकड़ लिया और थोड़ा और जोर लगा कर एक और धक्का मार दिया.
लण्ड आधा के करीब घुस गया क्योंकि गांड तो एक दम चिकनी हो चुकी थी.
पर दीदी को शायद दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ चिल्लाते हुए बोली “हरामी….कुत्ते…कहती थी….मतकर… मादरचोद….पीछे पड़ा हुआ था…..साले….हरामी….छोड़….. हाय…मेरी गांड फट गई…उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़….सीईईईई….अब और मत डालना….हरामी….तेरी माँ को चोदु…..मतडाल….. हाय निकल ले…निकल ले रेशु….गांड मतमार….हाय चुत मारले….हाय दीदी की गांड फाड़कर क्या मिलेगा….सीईईईईइ…आईईईईईइ……..मररररर….गईइइइ …..”
दीदी के ऐसे चिल्लाने पर मेरी गांड भी फट गई और मैं डर रुक गया और दीदी की पीठ और गर्दन को चूमने लगा और हाथ आगे बढा कर उसकी दोनों लटकती हुई बॉब्स को दबाने लगा.
मुझे पता था कि अभी निकल लिया तो फिर शायद कभी नहीं डालने देगी इसलिए चुप-चाप आधा लण्ड डाले हुए कमर को हलके हलके हिलाने लगा. कुछ देर तक ऐसे करने और बॉब्स दबाने से शायद दीदी को आराम मिल गया और आह उह करते हुए अपनी कमर हिलाने लगी.
मेरे लिए ये अच्छा अवसर था और मैं भी धीरे धीरे कर के एक एक इंच लण्ड अन्दर घुसाता जा रहा था.
हम दोनों पसीने पसीने हो चुके थे.
थोड़ी देर में ही मेरी मेहनत रंग लाइ और मेरा लण्ड लगभग पूरा दीदी की गांड में घुस गया.