• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
अपडेट 46

मै वहि पास के पत्थर पे बैठा था गीता को अपने पास बुलाया और उसे अपनी गोद में बैठा लिया उसका चेहरा मेरी तरफ था और उसकी टाँगे मेरे पिछे,ओर उसके चुत के निचे मेरा लंड अब धीरे-धीरे उसके चुत को फाड़ने के लिए तैयार हो रहा था…मैंने उसके गालो को सहलाया और उसके होंठो को अपने मुह में ले के चुस्ने लगा और और अपने हाथों से उसके शरीर के हर अंग अंग को सहला और दबा रहा थ, थोडी देर तक उसके होंठ चुस्ने के बाद मैंने उसे पीछे झुकाया और उसके छोटे-छोटे एप्पल के आकर के बॉब्स को मुह में भर के चुस्ने लगा और दूसरे बॉब्स को अपने हांथों से दबाने लगा,,अब वो भी गरम होने लगी थी और सिसकिया लेने लगी थी थोडी देर तक मैंने उसके बॉब्स को चूसा और मसला जिससे उसके बॉब्स एकदम लाल हो गये थे…मैं उठा और अपना लंड उसके मुह के पास ले जा के उसे चुस्ने को कहा तो उसने मेरे लंड को हाथ से पकडा और अपने मुह में डाल लिया उसके छूते ही मेरा लंड टाइट हो गया,

ओ मजे से मेरे लंड के सुपाडे को चूस रही थी और मैं उसके सर को पीछे से पकड के अपने लंड को उसके मुह में अंदर बाहर करने लगा,एक बार तो जोश में आ के मैंने अपना ५ इंच तक लंड उसके मुह के अंदर घूसा दिया जिससे उसकी आँख से आँसु निकल आये थे और वो तडप उठि थी मेरा लंड उसके गले तक पहुच गया था…५ मिनट तक लंड चुसवाने के बाद अब मैं उसके चुत को चोदने क लिए तैयार था मैंने उसे पास के ही एक खडे पत्थर पे उसे लिटा दिया वो पत्थर बच्चों के “फिसलपट्टी”की तरह था थोडा झुका हुआ..उसको लिटाने के बाद मैं ने उसके चुत को सहलाया,उसकी चुत बहुत छोटी और एकदम छिपि हुए सी थि,मैने उसके चुत को अपने हाथों से मसला तो वह सिसक उठि,उसकी चुत एकदम चिकनी थी,फीर मैंने उसकी टांगो को फैला दिया और दोनों हांथो से उसकी चुत के फांकों को अलग किया अंदर का नजारा और भी रोमाँचित कर रहा था मुझे चुत के अंदर का हिस्सा एकदम लाल खून की तरह था बिच में मटर के आकर का दाना और निचे हलकी सी सुराख,बरीश के पाणी से उसकी चुत और भी मजेदार लग रहा थी मैंने झट से अपना मुह उसके चुत पे चिपका दिया और उसके चुत के दाने को चुसने लगा और अपनी जिब को उसके छेद में घुसाने लगा,

ऐसा करने से उसे बहुत मजा आ रहा था और वो बहुत जोर-जोर से सिसक रही थी और कांप भी रही थि,,३-४ मिनट में ही वो झर गई उसकी चुत अब बिलकुल गिली हो चुकी थी मैं उठा और अपने लंड पे थूक लगया और उसके चुत के छेद पे टीका दिया अच्छे से पोजीशन बनि,उसकी चुत बिलकुल मेरे लंड पर तब वह जरा सी भी अपनी पकड़ पत्थर पे ढीली करती तो वो मेरे लंड पे आ जा रही थि,,मैने उसके हाथ को पत्थर पे जमाया और अपने लंड को उसके चुत में प्रेस किया तो वो चीख उठि और थोडा हिली जिससे मेरा लंड फ़िसल के उसके चुत से हट गया मैंने दुबारा से उसके छेद पे लंड टिकाया और इसबार जोर से झटका मारा एक हलकी सी फट की आवाज आई और मेरा लंड ६ इंच अंदर घुस गया,

जैसे ही मैंने झटका मारा था उसकी पकड़ पत्थर पे कमजोर हुयी और उसकी चुत मेरे लंड पे आ गिरी और मैंने भी साथ में झटका मारा था ईस से एक ही झटके में मेरा ६ इंच लंड अंदर घुस गया था और उसकी चीख निकल गई थी वो जोर से रोने लगी और उसे छोड देणे के लिए बोलने लगी मैंने उसका हाथ पकड लिया था और वो जितना छटपटाती मेरा लंड और अंदर घुसता जाता मैने उसकी एक न सुनि और अपने लंड पे झटके मारता रहा,साथ ही उसके होंठो को भी चूमता और उसके गालो पे भी अपने दात चुभा देता,मेरा लगभग पूरा लंड उसकी चुत में घुस चुक्का था और वो बुरी तरह तडप रही थी पर मैंने उसकी तडप पे धयान नहीं दिया,चुदवाने से पहले इतने नख़रे जो कर रही थी इस वजह से भी मैं थोडा गुस्सा था ऐसे१५ मिनट लगातार अपने लंड को उसके चुत में पेलता रहा और वो तडपति रही छटपटाति रही लेकिन मेरी पकड़ से निकल नहीं पा रही थि,

थोड़ी देर बाद मैंने अपनी स्पीड को रोका क्यों की उस पोजीशन में मैं थक गया था मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो देखा उसके चुत से जबरदस्त खून निकल रहा है और मेरा लंड भी खुन से सना हुआ था उसके चुत के निचे का पत्थर भी उसके खून से लाल हो गया था और बारिश के पाणी से वो नदी की तरह उसके खून को चुत से पत्थर पे और पत्थर से जमीन पे बहा ले जा रही थी…मैंने उसे पत्थर से निचे उतारा तो वो फिर से बोलने लगी की अब और नहीं चुदवायेगी बस हो गया,,,मुझे गुस्सा आया मैंने उसका हाथ पकड़ के अपनी तरफ खीचा और बोला ज्यादा नख़रे मत कर जितना दर्द होना था जो फ़टना था वह फट चुक्का है और उसे जबरदस्ती मैंने पास क एक पत्थर पर झुका दिया और उसे घोड़ी बना दिया और उस के स्टाइल में मैं उसकी चुत को चोदने लगा १० मिनट तक जम के चोदा उसकी गांड एकदम लाल हो गयी थी मेरे धक्के मारने से.

 
अपडेट 47

अब मैं उसकी गांड को भी फाड़ना चाहता था मैने थूक निकाली और उसके गांड के छेद पे लगाई उंगली अंदर ड़ालने की कोशीश की तो उसने अपने गांड के छेद को सिकोड लिया जिससे उंगली भी घुसाने में मुस्किल हो रही थि,मैने उसको कहा गांड मत सिकोड लेकिन वो नहीं मान रही थी मैं भी ग़ुस्से में बोला की ठीक है अब मेरा लंड ही इसमे रास्ता बनायेगा मैंने अपने लंड में ढेर सारा थूक लगाया और उसके गांड के छेड़ पे भी.फिर मैंने उसके गांड के छेद के सामने अपना लंड रखा और एक हाथ से उसकी कमर पकड़े हुये था और दूसरे हाथ से अपने लंड को उसके गांड के छेद के सामने बनाये रखा था और उसके गांड से ५ इंच दूर से ही मैंने अपन लंड को जोरदार झटके के साथ उसके गांड के छेड़ में घूसा दिया निशाना एकदम सही जगह पे लगा था लंड उसकी गांड के दिवार को फाड़ता हुआ उसके अंदर ७ इंच तक घुस गया था वो जोर से चिल्लाइ उसका हाथ फ़िसला लेकिन मैंने उसे गिरने नहीं दिया उसके कमर को जोर से पकडे हुए था और वह चिल्लाये जा रही थी मुझे छोड़ दो मैं मर जाउंगी बहुत दर्द हो रहा है,गांड फट गयी है.

लेकिन मैंने उसकी एक न सुनि और दुबारा से पुरे लंड को बाहर नीकाल के फिर से जबरदस्त झटका मारा तो इस बार मेरा पूरा लंड उसकी गांड में घुस चुक्का था मेरा लंड अंदर उसके गांड के दिवार से तकराया,फिर मैं १० मिनट तक लगातार उसकी गांड चोदता रहा और वह रोती-कराहती रहि, १० मिनट बाद मैंने फिर से उसकी चुत को चोदना शुरु किया अब मैं उसकी गांड और चुत को बारी बारी से चोद रहा था ,तभी मेरी नजर रानी पे गई वो हम दोनों को बडे ध्यान से देख रही थी और एक हाथ से अपनी चुत को सहला रही थी मैंने उसे अपने पास बुलाया और उसे कहा आ मैं तेरी चुत को अपने लंड से मज़ा देता हूँ उसको भी मैंने वहि घोड़ी बनाया और चोदने लगा,

फिर उसके गांड को भी चोदा १० मिनट के चुदाई के बाद रानी झड गई और कांपते हुये वो पत्थर पे लेट गई मैं दुबारा से गीता को घोडी बनाया और उसकी चुदाई करने लगा,बहुत देर से मैं गीता की चुदाई कर रहा था लेकिन मेरा लंड झडने का नाम ही नहीं ले रहा था थोडी देर पहले ही जो झडा था जब रानी की चुदाई हुयी थी…लेकिन मैं अब थकने लगा था लेकिन जब तक लंड झड नहीं जाता मन को तसल्ली ही होति,,,मैं लगातार उसकी गांड और चुत को घोड़ी स्टाइल में चोदता रहा २० मिनट तक और चोदा उसके गांड पे थपकिया भी लगा रहा था उसके बॉब्स को भी मसल रहा था और उसकी चुत को भी मसल रहा था ..थोड़ी देर बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकाला और उसके मुह में घूसा दिया और उसके मुह की चुदाई भी करने लगा और उसे चुसने के लिये बोला की जोर-जोर से चूस मेरे लंड को और जो भी लंड से निकले गा पी लेना इससे तुझे ताकत मिलेगी और तेरा सारा दर्द ख़तम हो जायेगा,

३-४ मिनट बाद मैं झड गया और अपना सारा गरम पाणी उसके गले में डाल दिया उसका पूरा मुह मेरे पाणी से भर गया था थोडा बाहर भी आ रहा था लेकिन वो जितना मुह में था उसको वह पी गई फिर मेरा लंड रानी के मुह में डाला उसने उसे पूरा चाट के साफ कर दी…और मुझे भी अब जा के शांति मिली उधर गीता ज़मीन पे जा के लेट गई .मैं भी दो मिनट तक पत्थर पे लेटा रहा फिर मैं गीता के पास गया और उसकी हालत का जायजा लेने लगा,उसकी चुत जो पहले एकदम से चिपकी हुयी थी अब एकदम सूज़ गई थि,लंड के झटके और रगड़ की वजह से एकदम लाल हो गई थी उसके चुत की हालत तो रानी के चुत से भी बुरी थी लग रहा था की उसकी पूरी चुत छिल गयी है उसके चुत की दोनों पंखुडीया लगरहा था की मुह खोले हाफ़ रही हो उसकी चुत का छेद अब भी साफ दिख रहा था और उसमे से अब भी हल्का खुन रिस रहा था मुझे अब उसपे दया आ रही थी मुझे इतनी बुरी तरह से उसे नहीं चोदना चाहिए था

१० मिनट बाद मैंने उसे उठाया और उसे कपड़े पहनने को कहा उससे अब भी ठीक से खडा नहीं हो पा रहा था फिर किसी तरह उसने अपने कपड़े पहने मैंने उसे पास के पत्थर पे बैठने को कहा तो वो बैठने लगी पर जैसे ही उसकी गांड पत्थर को टच किया वह तेजी से उठ खडी हुयी मैंने पूछा क्या हुआ तो उसने कहा गांड दुःख रही है बैठा नहीं जारहा है मैंने अपना बैग उसे दिया और कहा इसपे बैठ जावो वो बैग पे बैठ गई मेरे पास डेरी मिल्क चोकलेट था मैंने दोनों को दिया और खुद भी खाई फिर पाणी पिया अब तक 2:३० बज चुके थे मैंने कहा उनका स्कूल कब छूटता है तो उन्होंने कहा ४ बजै.

मै वहा और एक घंटा रुका,अब दोनों की हालत थोडी अच्छी लग रही थी उन दोनों को मैंने थोड़ी चॉकलेट और भी दि और 1000 रुपये भी दिये की कल स्कूल आने के बाद जो जी करे खा लेना मेरे पास एक पैन किलर भी था मुझे याद आया तो मैंने दोनों को एक-एक टैबलट दि दोनों ने खाई फिर कुछ देर बाद दोनों का दर्द खतम हुआ मैंने दोनो को और एक एक पेन किलर दी और कहा इसे रात को खा लेना और एक ट्यूब का नाम लिखकर दिया

कि वह अपनी चुत और गांड में लगा देना जिससे उन्हें जल्दी आराम मिलेगा दोनों अब मेरी तरफ हस के देख रही थी क्यों कि अब पेन किलर की वजह से उनका दर्द खतम हो चुका था रानी बोली मुझे पहले बहुत दर्द हुआ पर बादमे मजा भी आया क्या एक बार फिरसे करेंगे मैं चौक गया मैंने कहा नही आज नही फिर करेंगे वह बोली मैं इंतजार करूंगी मेरे स्कूल के पास आजाना मैंने गीता की तरफ देखा वह भी कुछ कहना चाहती थी मैंने कहा तुम कुछ कहना चाहती हो गीता नीची नजर करके धीरे से बोली मैं भी इंतजार करूंगी फिर मैंने दोनो को बाहो में लिया और बहुत देर तक दोनों से किसिंग करता रहा फिर दोनों को उनके घर से थोड़ी दूर छोड़कर मैं मैं चाची की क्लीनिक की और चल पड़ा मैं कम उम्र की लड़कियों को जबरदस्ती चोद कर आया था मगर आखिर में उनको भी उसमे मजा आया था पर थी तो जबरदस्ती सेक्स का नशा उतरने के बाद मुझे अपने ऊपर बहोत गुस्सा आरहा था कि क्या मैं वासना का पुजारी हो गया हूं जो अब रेप करने लगा हु पर जो हुआ वह उस हालात की वजह से हो गया था मैंने कसम खाई की अब किसी के साथ जबरदस्ती नही करूँगा जो राजी ख़ुशी तैयार हो ऊसके साथ ही करूँगा वैसे भी मुझे सेक्स परिवार में ही मिल रहा है तो बाहर रिस्क लेने से क्या मतलब और जो मजा घर की औरतें चोदने में है वह बाहर की चोदने में कहा यही सोचते मैं क्लिनिक के नजदीक पहुंच गया

चाची का क्लिनिक गाँव के किनारे हाईवे पर होने से वहा पहुंचते पहुंचते तो में पूरा भीग गया और बदल के आ जाने से अंधेरा भी होने लगा. मैं पीछे के रस्ते से क्लिनिक की और जा रहा था और जैसे ही में पीछे की खिड़की से पास हो रहा था की मुझे एक दर्द की आह सुनाइ दि, एक ही सेकंड में पता चल गया की यह दर्द नहीं सिसकियों की मॉनिंग हे, एक दम से में संन्न रह गया, और सोचा की क्या करू..?

 
अपडेट 48

बहोत सारे ख्याल आने लगे की कहीं चाची का किसी के साथ चक्कर तो नही..पर फिर सोचा नहीं ऐसा तो चाची नहीं कर सकती.

फिर मैंने खिड़की से अंदर झाँका तो देखा की अंदर कोई नहीं हे,

चाची अपनी डॉक्टर वाली ख़ुरची पर बैठी हे और सामने लैपटॉप पड़ा था जिसमे, ब्लू फिल्म चल रही थी, चाची की पीठ मेरी और थी,

में चाची के चेहरे को तो नहीं देख पाया पर मैंने देखा की चाची की साडी अपनी नीज से ऊपर थी और चाची ने अपने पाँव फोल्ड कर के टेबल पर रक्खे थे.

अब मुझे समझने में देर नहीं लगी की चाची फिंगरिंग कर रही थी.

शायद पहले बरसात के मौसम का नशा उन पर भी चड़ा था

अब मेरे ख़यालात अपने आप अपनी चाची के लिए बदल रहे थे,

मैंने अब सोचा की क्यों न चाची के रंग में भंग किया जाए, मेरा लंड भी अभी गर्म हो चुका था और मैंने उसे अपने हाथ से हिलाया और वो खड़ा हो गया, फिर मैंने सटाक के चाची के केबिन पर आवाज़ दी और चाची के दरवाजा खोलने का इंतज़ार करने लगा.

फिर चाची ने दरवाजा खोला और सच में चाची को देर लगी दरवाजा खोलने में, उनके फेस से थकन झलक रही थी,

मतलब की वो अब फिंगरिंग कर के भी सैटिस्फाइ नहीं हो पा रही थी, और वो मुझे देख कर चौंक गयी और कहा,

रेशु..तुम यहाँ क्या कर रहे हो...? चाची ने मुझे भीगे हाल में देखते हुए कहा.

वो चाची.मैं.

.वो सब छोडो..अभी यहाँ खड़े क्या हो.. अंदर आओ.. चाची ने मेरी बात सुने बिना ही मुझे अंदर आने को कहा.

.अरे.पूरे भीग गए हो..ऊफ यह बारिश भी ना.. फिर वो मेरे बाल पर हाथ फ़िरने लगी पर कुछ मतलब नहीं था फिर वो एक साइड में कप बोर्ड से एक तौलिया ले आई और कहा

.लो रेशु..इसे पेहन लो और कपडे सूखा दो.. इतने में चाची का ध्यान मेरे तने हुए लंड पर गया, जो की में कब से चाहता था की चाची देखे पर वो तो कहीं और ही मस्त थी, अब जा के चाची ने देखा,,ओर जैसे मुझे लगा की चाची ने देखा, तो मेरे दिल को चैन आया की आखिर..जो में चाहता था वो हो गया. लेकिन चाची ने अपने आप को बहुत जल्दी सम्हाला और कहा

कम ऑन रेशु.हर्री उप..

.लेकिन चाची, में चेंज कहा करू...? मैंने चाची से पूछा तो पता चला की चेंज करने की कोई जगह थी ही नही. फिर चाची ने कहा की “सामने वो बेड हे, वहा जाओ और वो पर्दा लगा लो, और चेंज कर लो. जाओ जल्दी”. फिर मैं भी ज्यादा न शरमाते हुए में वहा गया और पहले पर्दा लगा दिया, पर्दा वाइट था और शाम का टाइम था लाइट्स ऑन थी, मेरे लिए तो जैसे भगवन ही सब सिचुयशन जमाता था मैंने पहले अपनी टी-शर्ट उतरि और फिर अपनी वेस्ट, में बिलकुल चाची के सामने था चाची भी १००% चेयर में बैठ कर देख रही होगी. मेरे और चाची के बीच में बस एक पर्दा ही था मैंने फिर धीरे से अपने पैंट का बटन खोला और फिर चेन को भी धीरे से खोला और सर उठकर चाची की और देख, चाची को समझने के लिए की में उन्ही की और देख रहा हू, फिर मैंने पैंट निकाल दिया.

“वैसे रेशु तुम यहाँ कर क्या रहे हो..? तुम्हे पता नहीं चलता की इस टाइम पे ऐसे नहीं निकलते”.. चाची ने अचानक पूछ लिया

“वो क्या है न चाची की में तो बस गाँव में घुमने निकला था पर बारिश में भीग गया और तालाब से क्लिनिक नजदीक था इसीलिए यहाँ चला आया”.. मैंने एक्सप्लनेशन दिया और बातें घुमने में तो मुझे मानो वरदान मिला हे.

“अच्छा..बाबा पर तुम अभी घर जाओगे कैसे, कपडे तुम्हारे भीग चुके हे और मेरा तो अब क्लिनिक बंद करने का टाइम..आए..... चाची बोलते बोलते रुक गयी, क्यूँकि मैंने बाकि बचा अंडरवेअर भी निकाल दिया और अब चाची को मेरा लंड दिख रहा था अब में शुअर था की चाची मुझे ही देख रही थी. मतलब की चाची भी सेक्स के लिए प्यासी हे यह फिर से साबित हो गया था चाची के रुकते ही मैंने चाची से कहा

“क्या.चाचि अभी आप जा रही हे..?

“नहीं नहीं अभी टाइम हे, देखते हे तुम्हारे कपडे सूखते हे की नही” ईतने में फिर से किसी ने दरवाजा खटखटाया और चाची ने

“धीरे से कहा “रेशु लगता हे अभी कोई पेशेंट हे, तुम आवाज़ मत करना की तूम यहाँ हो अगर किसी ने देख लिया तो गलत समझेगा, तुम परदे के पीछे ही रहना और बाहर मत निकलना.. चाची ने सारे इंस्ट्रक्शन दे दिये.

“ओके चाची... फर चाची ने अपनी चेयर पर बैठते कहा

“कम इन... फिर दरवाजा ख़ुलते ही मैंने देखा की चाची की उमर की एक औरत आई थी और उसके अंदर आते ही चाची ने कहा

“आओ, राधा..क्या बात हे, क्या हुआ, बड़े दिनों बाद”.? मै तो चाची को मान गया, एक तो वो सडक्शन में थी, फिर मेरा लंड देखकर और भी सेक्सुअल हो गयी होंगीं और फिर अचानक एक दम नोर्मल.

मैं बस उनकी बातें सुन रहा था मैं बेड पर लेट गया था चाची ऑफ़ कोर्स मुझे देख सकती थी पर वो औरत नही. फिर उस औरत ने कहा.

“दीदि, यहाँ कम आना पड़े तो ही अच्छा हे..

और दोनों मुस्कुरा पडी

“कहो, क्या हुआ, बड़े दिनों बाद आने का हुआ हे”.. चाची ने कैजुअल पूछा.

“वो दीदी..और फिर वो आसपास देखने लगी तो चाची ने सामने से कहा, बताओ भी क्या बात हे यहाँ कोई नहीं हे”

“दीदि, क्या हे न की की...वो हे न.. अब बताओ भी राधा मुझसे क्या शर्मा रही हो.

“वो दीदी क्या हे ना, की जब वो हमारे पर चढ़ते हे ना, तो”

“हा..तो क्या दर्द होता हे...?

“नही, दीदी अब है ना कोई असर ही नहीं होता.. फाइनली राधा ने प्रॉब्लम बता दिया की वो अब सेटिस्फाई नहीं होती और उसे अब मज़ा नहीं आता. मैं तो इस सिचुएशन में चाची के बारे में सोचकर बड़ा खुश हो रहा था

ओह तो यह प्रॉब्लम हे, फिर उन्होंने कहा की

“देखो मर्द जो होता हे वो सेक्स में बहुत जल्दी हार मान लेता हे, जब की औरत को उसकी इच्छा सालों तक रहती हे, मरद कभी काम के बोझ या परिवार की चिंता में भी सेक्स में से रूठ ने लगता हे, इसीलिए तुम एक काम करो, वह किस चीज़ के लिए परेशान हे वो पता करो और उसे दूर करने के बाद वो अच्छे से करेंगा”.

"लेकिन दीदी आप तो जानती हे की उन्हें ऐसी कोई तकलीफ हे ही नही... फिर क्या हे राधा, की तुम्हारे पति के अंदर का जो माल था वो अब शायद ख़त्म हो गया होगा, इसे इम्पोटेंट कहते हे, मतलब की एक ऐसा आदमी जो औरत को अब संतोष नहीं दे सकता”

“दीदि, इसका इलाज...?

“ओफ कोर्स इसका इलाज”

चाची बताना नहीं चाहती थी की क्यूँकि में सब सुन रहा था, और चाची को शर्म भी आ रही थी पर क्या करें पेशेंट आया हे तो इलाज तो बताना डॉ के फ़र्ज़ में आता हे.

“देखो राधा, इसके इलाज में तो क्या हे की तुम अपने आप ही अपने आप के साथ सेक्स करो”.

“मतलब...?

मतलब की तुम्हे लगे तो तुम नीचे, अपनी ऊँगली दाल के अपने आप को संतोष पहुंचाओ”.

“नही, दीदी ऐसा करना गुणाह हे, यह तो हम नहीं कर सकते”...

“तो राधा, इस मर्ज़ का कोई और इलाज नहीं हे, तुम्हे खुद ही यह सब करना पडेगा, और तुम इसे गुणाह की नज़र से मत देखो, यह तुम्हारे जिस्म की जरूरत हे, तो यह कोई गुणाह तो हरगीज़ नहीं हे.. और फिर वो बहुत मनाने के बाद मानी और चाची को उसने अपनी बातों से गर्म भी कर दिया और मुझे भी .

 
अपडेट 49

उसके जाने के बाद चाची को पता नहीं क्या हुआ, उन्होंने मुझसे कहा की रेशु तुम अपने गीले कपडे ही पेहन लो अब हम घर चलते हे.

फिर में भी समझ गया की चाची अब सैटिस्फाइड न होने से फ्रस्टेड और एक्साइट दोनों हो चुकी हे, तो मैंने भी फ़टाफ़ट से कपडे पेहन लिए और बिना चाची की और देखे में सीधा क्लिनिक से बाहर निकल गया और चाची के आने की वेट करने लगा.

थोड़ी ही देर में चाची बाहर आई और लॉक करके जैसे वो दो स्टेअर निचे उतरि की एक बार फिर से बारिश होने लगी,

काफी देरी हो रही थी, लेकिन फिर से वो ऊपर चड़ने लगी तो मैंने कहा की

"चाची बारिश तो आती रहेंगी और वैसे भी बड़ा लेट हो चुक्का हे तो चलो अब घर चलते हे".

चाची को भी यह मुनसिब लगा और वो भी मेरे साथ आ कर बारिश में भिगने लगी.

हम दोनों अब घर आ रहे थे, काफी अँधेरा हो चुक्का था और रास्ते पर कोई भी नहीं दिख रहा था रस्ते भर चाची ने मेरे से बात नहीं की और वो काफी जल्दी में भी लगी,

पूरे रस्ते वो मुझसे आगे आगे चल रही थी, में अब पढ़ नहीं पा रहा था की चाची को आखिर डिस्टर्ब किसने किया मेरे लंड ने या फिर मेरे सामने उस औरत की बातों ने.

लेकिन एक बात क्रिस्टल क्लियर थी की चाची को मैंने एप्रोच किया तो चाची को चोदा जा सकता हे,

शायद थोड़ा सा नाटक या थोड़ी जबरदस्ती करनी पडे,

लेकिन चाची १०० % पटेगी. फिर हम घर पहुंचे और मैंने रस्ते में चाची को परेशान नहीं किया, या फिर यूँ कहिये चाची ने मुझे यह मौका ही नहीं दिया की में कोई बात छेडू, क्यूँकि वो खुद काफी परेशान थी.

शायद उनके लिए यह फर्स्ट टाइम था की वो किसी एम्ब्रासमेन्ट वाली सिचुएशन में थी, लेकिन मेरे लिए नहीं था इसीलिए मुझे ये पता था की थोड़ा टाइम वो खुद को देगी तो सच में ठीक हो जायेगी और ऐसा ही हुआ,

हम घर पहुंचे और फ्रेश हो गये, और में जब बाथरूम में से बाहर आया तो चाची अब शायद ठीक लग रही थी, पर इतने में चाची को एक कॉल आया, वो चाचा का था और उन्होंने कहा की वो शायद एक घंटा लेट हो जाएंगे, बारिश की वजह से उनकी कार बिगड गयी हे, तो चाची ने कहा की चलो रेशु खाना निपटा लेते हे, तुम्हारे चाचा को आने में वक़्त लगेगा, में भी रेडी हो गया और हम खाना खाने बैठे.

हम खाना खा रहे थे और में चाची के ख़यालों में ही खोया हुआ था पता नहीं क्यों पर दोपहर को जो मैंने मन बनाया था उसी पे से मैंने मन बदल लिया और में अब चाची के साथ सेक्स के बारे में सोचने लगा.

मैं चाची के बॉब्स को ही स्टेर कर रहा था और मस्त मस्त रेड लिप्स को बॉस चाची ने मुझे दो तीन बार पक़डा, पर कुछ बोली नहीं वो बस अपना डिनर करती रही, में भी खाना खा रहा था पर अचानक मैंने देखा तो चाची का पल्लू सरक गया था और अब तो और भी क्लीवेज दिख रहा था बॉस मेरे तो हाथ ही रुक गये, डिनर करते करते, दो सेकंड के लिए तो में देखता ही रहा और फिर चाची ने मेरी और देखा और मैंने सट से अपना फेस थाली में लगा दिया, लेकिन चाची मुझे दो तीन बार पकड़ चुकी थी, अब चाची ने अपना पल्लू ठीक किया और में खाना खाने लगा, लेकिन अब में यह सोच रहा था की आखिर चाची का पल्लू अपने आप सरका कैसे..

कहिं चाची मुझे तो सिड्यूस नहीं करना चाहती..? फिर हमने जैसे तइसे खाना निपटाये और अपने रूम में सोने के लिए जाने लगे,

पर चाची अब तक शाम के इंसिडेंट के बारे में कुछ बोल नहीं रही थी, तो मैंने सोचा की चलो में ही बात शुरू करू, शायद चाची भी मेरी ही पहल चाहती हो.

फिर हम अपने अपने रूम में जाने लगे और मैंने डिसाइड किया की अगर अभी नहीं बात की तो मौका चला जायेगा और फिर उतनी इम्पैक्ट नहीं रहेगि, तो में जैसे अपने रूम में गया था की चाची के पीछे पीछे उनके रूम में गया, चाची अपने बाल सवार रही थी और उन्होंने मुझे अपने रूम में देखते ही कहा

“कहो रेशु..कुछ काम हे...?

“अम्म..चाचि आपसे एक बात करनी थी”.. मैंने चाची के सामने नहीं देखा यह कहते वक़्त.

“हा..बोलो न क्या कहना हे”.

“वो ..चाचि आई ऍम सॉरी.सॉरी चाची”

“सॉरी...सॉरी किसके लिए.?

“वो चाची शाम वाले इंसिडेंट के लिये, मेरी वजह से आप उस औरत के सामने खुल के बात नहीं कर पा रही थी..

अब शरमाने की बारी छोटी चाची की थी, वो थोड़ा सा अनकंफर्टबले फील कर रही थी पर शायद अब वो शाम के मुक़बले ठीक थी.

उन्होंने कहा

“रेशु इसमें तुम्हे सॉरी कहने की कोई जरूरत नहीं हे, इसमें तुम्हारा कोई क़सूर नहीं हे,

वैसे भी वो अपनी ही गाँव की हे तो में उसे बाद में समझा दूंग़ी और रही तुम्हारी बात तो तुम्हे थोड़ी पता था उसके आने के बारे में, इसीलिए आराम से सो जाओ अब..

चाची ने सारा ब्यौरा दे दिया. लेकिन कहीं सेक्स के बारे में कोई जिक्र नहीं किया.

“चाची और एक बात पुछू..?

“एक काम करो आराम से बेड पर बैठ जाओ और पुछौ”. चाची को ऑफकोर्स मेरी कंसर्न थी.

“चाची.. क्या वो औरत सही कह रही थी..? क्या थोड़ीउमर के बाद वाकई मर्द लोग वो नहीं कर पाते?

मैं चाची के ठीक सामने बैठा था और चाची मेरी और देख रही थी और में पता नहीं निचे देखकर क्यों बात कर रहा था

“रेशु तुम्हे इन सब बातों के बारे में अभी जानने की कोई जरूरत नहीं हे,

तुम अभी जाओ और अभी बस अपनी पढाई के बारे में सोचो.. इतने में चाचा की कार का हॉर्न सुनाइ दिया और चाची एक दम से खड़ी हो गयी और मुझसे कहा,

“रेशु अभी तुम जाओ, हम बाद में बात करेंगे”.

मै उठकर अपने रूम में आ गया और चाची चाचा को खाना खिलने लगी, में अपने रूम में यह सोच रहा था की साला यह तो मुश्किल हो गया,

साला जिस चाची को में पटाना आसान समझ रहा था वो तो बड़ी मुश्क़िल टेढ़ी चीज़ लग रही थी अभि, और जिस दीदी के बारे में में हार्ड समझ रहा था वो दो ही दिन में पट गयी.

फिर अपने आप से कहा, बॉस चाची को पटाना मुश्क़िल तो पड़ेगा, पर फिर अपने आप से ही एक चैलेंज भी हो गयी, की अब तो चाची को पटाना ही पडेगा.

 
अपडेट 50

दूसरे दिन में सुबह थोड़ा सा लेट उठा और लगा की चाचा जा चुके थे और घर में चाची ही थी.

थोड़ी ही देर में लगा की चाची मेरे रूम की और आ रही हे तो मैंने अपना मोबाइल उठाया और उसे स्विच ऑफ कर दिया और कान से लगा के बात करने लगा,

की चाची सुन सके.

मैंने फ़ोन पर बात करना शुरू किया कि,

"अरे....नही चाची, यहाँ कुछ ठीक नहीं लग रहा हे, बहुत बोरिंग सा फील हो रहा हे".

कोई काम ही नहीं करने को.

फिर थोड़ी देर सुन्ने के बाद, "हाँ हाँ चाची, छोटी चाची तो बड़ी अच्छी हे पर उनसे हर किसम की बात तो नहीं कर सकता ना, हा..हा में अभी यही पर हू.

ओके ठीक हे”,

कह कर मैंने फ़ोन रख दिया और मैंने बाद में देखा की अब दरवाजे की और कोई नहीं था मुझे अब यकीन हो गया की रेशु, अब तेरा काम बन रहा हे.

मुझे १०० % यकीन था की चाची मेरी बातें सुन रही थी, इसीलिए मैंने इस बात को पक्का करने के लिए में पहले उनके रूम में गया पर वो वहा नहीं थी,

बाद में मैंने किचन में झाँका तो चाची वहीँ पर थी, और मेरी बात सुन कर उनकी हालत तो पतली हो गयी थी, वो फ़्रीज का डोर ओपन कर के कुछ सोच रही थी.

मैं फिर अपना काम बनते देख फिर से अपने रूम में आ गया और चाची के आने का इंतज़ार करने लगा,

में अपने रूम में बैठ कर कोई बुक तो नहीं पढ़ रहा था लेकिन चाची से आगे की प्लानिंग कर रहा था फिर तक़रीबन आधे घंटे के बाद चाची मेरे रूम में आयी,

वो भी हाथ में झाड़ू ले कर और झाड़ू निकालने लगी,वह ना ही मुझसे बात कर रही थी, ना ही में उनसे, चाची मेरे रूम में आई और फिर अपनी साडी के पल्लू का खुला सिरा अपनी नैवेल के पास लगाया और इसी बहाने से मैंने चाची की नैवेल भी देखि, फिर वो मेरे रूम में झाड़ू लगाने लगी,

रूम मतलब कोई वो रूम नहीं था बस एक कोना था जिसे आप रूम की तरह कह सकते हो, चाची बैठ के एक कोने में से कचरा निकाल रही थी और उनकी गांड बड़ी मस्त लग रही थी, चाची ने डार्क रेड कलर की साडी पहनी थी और फिर वो डॉगी स्टाइल में में जिस बेड पे बुक पढ़ रहा था उसके निचे से कचरा निकाल ने लगी तो बॉस चाची का क्लीवेज देखने को मिला, मस्त क्रीमी बॉब्स थे चाची के, चाची ने भी यह देख लिया की में उनके बॉब्स की और देख रहा हू, लेकिन फिर वो उठ के दूसरी और झाड़ू लगाने लगी और फिर चलि गयी.

लेकिन मेरा मतलब सही से बैठ रहा था में जानता था की चाची जरूर आएगी और देखेंगी की कल शाम के बाद से मेरे बीहेवियर में कोई चेंज आया हे की नहीं और मैंने भी चाची के बॉब्स को गौर से देख के चाची को इस बात की हिंट दे दी.

फिर आधे घंटे तक कुछ नहीं हुआ,

और फिर चाची ने मुझे आवाज़ दी तो में गया,

तो वहा पर चाची ने कहा की "चलो रेशु, तुम्हे आज अपने साथ मंदिर ले के चलति हू"

मैंने कहा “नहीं चाची, मुझे मंदिर जाना अच्छा नहीं लगता”,

तो चाची ने ताना मरा कि,

“अरे रेशु तुम चलो तो सहि, अगर चलोगे नहीं तो फिर कम्प्लेन करोगे की तुम्हे यहाँ अच्छा नहीं लगता”,

में ये समझ गया और कन्फर्म भी हो गया की मेरे बात करते वक़्त चाची सुन रही थी और वो झाड़ू लगाते वक़्त क्लीवेज भी बस मुझे थोड़ा सा एंटरटेन करने के लिए कर रही थी.

मैं भी तो बस ऐसे ही एंटरटेन होना चाहता था मैं न चाहते हुए रेडी हुआ पर मैंने चाची से कहा की

“आज तो पूर्णिमा हे तो मंदिर में भीड़ होगी”,

तो चाची ने ओपन हो के कहा की

“तभी तो कह रही हूँ की तुम्हे वहा मज़ा आएगा”.

बॉस ये डबल मीनिंग सुन के तो में एक दम फ्लैट हो गया, लगता हे की चाची को मुझे अब सेक्सी एंटरटेन करने में मज़ा आने लगा हे.

फिर हम मंदिर पहुंचे तो मैंने देखा की बड़ी तादात में वहा लड़कियां और औरतें आई थी, मर्द भी थे पर कम थे.

लड़कियां भी बड़ी अच्छी अच्छी थी,

एक दो बार तो चाची ने मुझे पकड़ा भी घुरते हुए, लेकिन फिर चाची ने मुझे फ़ोर्सली दर्शन करने के लिए लाइन में खड़ा कर दिया और में चाची के पहले और चाची मेरे बाद में खड़ी हो गयी,

लाइन सच में बड़ी लम्बी थी, मेरे आगे एक तक़रीबन ३० साल की एक मैरिड औरत थी, उसका फिगर बढ़िया था और उसके ब्लाउज में से ब्रा का स्ट्राप बाहर आ गया था में उसे ही देख रहा था की इतने में भीड़ में एक जर्क आया और में उस औरत से जा के तकराया,

तो उस औरत ने पलट के मेरी और बड़े ग़ुस्से में देखा और कुछ बड़बड़ायी, मुझे पता नहीं चला, लेकिन चाची समझ गयी और उसने मुझे पीछे करते हुए वो मेरे आगे आ के कड़ी हो गयी.

फिर मेरी और देखा और स्माइल के साथ सब ठीक होने का इशारा किया. वो आगे वाली औरत अब भी पीछे मूड कर देख रही थी की कहीं में तो उसके पीछे कहीं में तो नहीं खडा,

पर फिर उसने चाची को देखा और बाद में मेरी और भी ग़ुस्से में देखा, मैंने अब की बार उसे अनदेखा कर दिया.

फिर में अपनी चाची को देखने लगा,
 
अपडेट 51

चाची ने डार्क रेड कलर की डिज़ाइनर साडी और ब्लाउज पहना था और मस्त लग रही थी. थोड़ा सा गर्मी की वजह से चाची के क्रीमी गोरे बदन पर हल्का सा पसिना सा होने लगा था फिर मैंने देखा की चाची के आर्मपिट के पास भी पसिना हो रहा था और इसके वजह से वो गीला भी हो गया था और अभी तो हम आधे रस्ते पर भी नहीं थे, मैंने चाची को गोर से देखा, बॉस मस्त सेक्सी थी ओ. मेरा लंड अब खड़ा हो रहा था मैंने हलके से चाची के साथ अपने आप को सटा दिया और चाची के कंधे से अपना हाथ सटा दिया और चाची का रिस्पांस देखने लगा, पर चाची ने कुछ नहीं कहा और न ही मेरी और मूड कर देखा, इतने में मेरा लक काम कर गया और एक और भीड़ का जर्क आ गया और में चाची से थोड़ा जोर से तकरा गया और चाची भी थोड़ा सा आगे हो ली, लेकिन चाची ने अब भी कुछ नहीं कहा, तो इस बार मैंने थोड़ा आगे झुकते हुए चाची से कहा

“चाची”

“हमं”

चलो चाची, यहाँ से चलते हे, बहुत भीड़ हे, यहाँ पर.. मैं हकीकत में नहीं जाना चाहता पर मैंने चाची से बात खोलने के लिए कहा.

.नही..रेशु, तुम भी ना, अभी आधे पौने घंटे की तो बात हे, बाद में चलते हे, और मुझे कोई प्रॉब्लम नही.. बॉस चाची ने यह सब कहने के लिये, अपना सर पीछे की और हल्का सा स्लाइड किया और में पहले से आगे की और था तो चाची के होट बिलकुल मेरे लिप्स के पास थे और में तो उसे देखने में ही जैसे खो गया. चाची ने भी ये देखा पर फिर से आगे हो ली. तो मैंने भी फिर से और आगे होते हुए चाची से कहा

“लेकिन चाची..यहाँ भीड़ हे और आपके इतने नजदीक होने से शर्म आ रही हे, और वैसे भी आपको भी तो गर्मी लग रही हे”.. इस बार मैंने चाची को दोनों बातें कह दी की चाची आपको इतने पास सटने से शर्म भी आ रही हे और फिर बात को दूसरा मोड़ भी दे दिया गर्मी के बारे में, फिर चाची ने मेरी पहली बात सुनि और थोड़ा सा वो भी शर्मा गयी पर फिर कुछ भी नहीं कहा और आगि की और देखने लगी, में साला सोच में पड़ गया की इसे चाची का कुछ करने का इशारा समझू या नही, पर मैंने फिर डेरिंग करते हुए चाची के गांड क्रैक के पास अपने तने हुए लंड से छू लिया, और बस ऐसे ही रख के खड़ा रहा, और जैसे ही मेरा लंड चाची को छुआ, चाची को सच में झटका लगा और वो बिना मूड़े ही समझ गयी की उनकी गांड को क्या छू रहा हे, पर वो मूड़ी नहीं और में भी नहीं हटा और दुसरे जर्क के आने का इंतज़ार करने लगा, की काश कुछ हो जाये पर ऐसा इस बार नहीं हुआ. मैं थोड़ी देर ऐसे ही खड़ा रहा फिर मैंने थोड़ा सा डेरिंग करते हुए चाची के गांड के पास अपने लंड को हल्का सा हिलाया और उसे चाची के दोनों चिक्स पे बरी बरी हल्का हल्का टच करने लगा.

लेकिन इस बार चाची से रहा नहीं गया. चाची ने कुछ कहा नहीं पर चाची ने पीछे मूड कर मेरी और देखा, निचे मेरे लंड को नहीं देखा पर मेरी आँखों में देख कर मानो ऐसा कहा की मत करो, यह पब्लिक प्लेस हे, पर मुझे ऐसा लगा की शायद चाची यह कहना चाहती थी की और करो, मुझे मज़ा आ रहा हे.

मै भी बिलकुल नहीं हिला, लेकिन अब मेरा लंड रूकने वाला नहीं था मेरे पैंट में अब बड़ा तम्बू बन गया था वो तो ठीक था की एक साइड पे दीवार थी और मैंने अपना दूसरा हाथ अपने इरेक्शन को छूपाने के लिए अपने लंड के पास ले लिया, लेकिन ऐसा करने से मेरा हाथ चाची की गांड को छूने लगा, चाची ने इस बार भी मूडकर देखा पर इस बार भी कुछ नहीं बोली और इस बार भी मैंने पीछे न हटते हुए अपने हाथ को भी चाची के गांड पर रख दिया, अब मेरा लेफ्ट हैंड चाची के लेफ्ट गांड को और मेरा लंड चाची के गांड क्रैक को छू रहा था नो डाउट चाची को भी मज़ा आ रहा था पर वो खुल के सपोर्ट भी नहीं कर सकती थी. इतने में हम मंदिर के पहले द्वार में दाखिल हुए, अब यहाँ से दस मिनट तो वेटिंग थी और मेरे दोनों साइड अब वाल थी, और थोड़ा सा अँधेरा भी था क्यूँकि दोनों साइड वाल थी और रास्ता थोड़ा लम्बा था मुझे तो यह थोड़ा सा एडवांटेज लगा, और मैंने थोड़ा सा डेरिंग मूव करने का सोचा.

अब मैंने चाची के गांड पर और प्रेशर दिया और अपना लेफ्ट हैंड चाची के गांड पर भी हल्का सा घुमाया, अब शायद चाची समझ रही थी की में रुक्ने वाला नही, तो चाची मुझसे छूटने के चक्कर में थोड़ा सा आगे बढ्ने लगी, पर मैंने चाची को पकडने के चक्कर में ग़लती से चाची के गांड को ही अपने हाथ से पकड़ लिया, और वो भी मस्त पकड़, और जैसे ही मैंने चाची को पकड़ा वो भी आगे जाना भूल गयी और शॉक के मारे पीछे देखा और जैसे हे चाची ने पीछे देखा में भी ग़लती के डर से चाची की गांड को छोड़ दिया और अपने दोनों हाथ ऊपर कर लिये, इस बार चाची ने पीछे देखा और मेरे तने हुए लंड को भी देखा, वो थोड़ा शॉक थोड़ा गुस्सा और थोड़ी सी परेशानी में लग रही थी.

 
अपडेट 52

मैन भी चाची को ग़ुस्से में जान के अपने दोनों हाथ सरेंडर करने की स्टाइल में ऊपर कर लिए और हलके से इनोसेंट बन के चाची से सॉरी कहा ,

और चाची भी बिना कुछ कहे आगे देखने लगी,

पर अपने हाथ से पीछे सहलाने लगी,

क्यूँकि मैंने थोड़ा जोर से दबा दिया था तो मैंने मौका देखते हुए चाची से कहा

“सॉरी..चाचि आप कहे तो में सहला दून क्या...?

“यह भी कोई कहने की बात हे क्या.जल्दी करो,

में करूंगी तो अजीब लगेगा, तुम ही करो”..

ओर में तो अपनी लॉटरी लग गयी हो वैसे चाची के दोनों गांड पर अपने दोनों हाथ रख के आराम से सहलाने लगा

और हल्का सा प्रेस कर के मसलने भी लगा,

लेकिन थोड़ा ही टाइम हुआ होगा की मंदिर के में एंट्रेंस में हम आ गए और दर्शन कर के हम बाहर निकले.

बाहर निकलते ही उन्हें उनकी सहेली मिल गयी और हमारे बीच में कोई बात नहीं हो पायी.

फिर दोपहर को लेट हम घर पहुंचे और थोड़ा सा थक भी गए थे घर पे आने के बाद चाची ने खाना बनाया और मैंने हर वक़्त चाची को परेशान करना ठीक नहीं समझा,

और में टीवी देख रहा था और एक बार यह आईडिया भी आया की लगता हे चाची खुद ब खुद ही लगता हे सिड्यूस हो रही हे

या फिर वो मुझे सिड्यूस करना चाहती हे, बस ऐसे ख़यालों में था और चाची ने खाना खाने के लिए बुलाया,

गाँव में अभी भी डाइनिंग टेबल नहीं था इसीलिए हम निचे जमीन पर ही खाते थे, आज हम खाना खाने बैठे,

लेकिन मैंने देखा की चाची ने अपनी साड़ी कुछ ऊपर की हे, तक़रीबन घूटनों तक लेकिन मैंने उसे देख के भी अनदेखा कर दिया,

शायद बात करने को कोई टॉपिक नहीं था इसीलिए हम दोनों में कोई बात नहीं हो रही थी,

मैंने खाना निपटाया और अपने हाथ धो रहा था इस बार फिर मैंने देखा की चाची अपने क्लीवेज को कुछ ज्यादा ही ओपन कर के बैठी हे,

पर मैंने इसे भी देख के अनदेखा कर दिया और मेरी ऐसी हरकत से चाची से रहा नहीं गया और बात करने को जो टॉपिक नहीं था वो खुल गया,

और जैसे में उठ कर जा रहा था की चाची ने कहा

“रेशु एक मिनट जरा बाहर बैठ कुछ बात करनी हे”

मैन बाहर ड्राइंग रूम में जा कर बैठा और चाची के आने का इंतज़ार करने लगा और अपने आप को भी प्रिपेयर कर लिया की चाची शायद मंदिर वाले इंसिडेंट के बारे में पूछे तो क्या कहना हे

सब कुछ.इतनी देर में चाची आई और मेरे पास में आ के बैठ गयी, वो मेरे बहुत नजदीक थी,

एक दम सट के नहीं थी पर फिर भी में उनकी स्मेल महसूस कर सकता था उन्होंने अपना राईट हैंड से मेरे बालों को सहलाना शुरू किया और कह्

“रेशु...

“हाण..चाचि..?

“रेशु तुम यहाँ बोर तो नहीं हो रहे हो ना”

“मुझे लगता हे की शायद तुम कुछ उदास से लग रहे हो, शायद कोई तुम्हारी उमर का कोई नहीं हे इसिलिये”...

चाची ने बात रोक दी और में शुअर हो गया की चाची ने मेरे और बड़ी चाची की बातें सुन ली हे इसीलिए पूछ रही हे. मैंने अब जान बूझ के अपना सर चाची के शोल्डर पे रख दिया और चाची की और न देखते हुए निचे ही चाची के क्लीवेज को देखने लगा, पर चाची का साडी का सीरा थोड़ा सा परेशान कर रहा था

“नहीं चाची ऐसी कोई बात नहीं हे”

“लगता तो नहीं की तुम सच बोल रहे हो” चाची ने मेरे बालों को सहलाना कंटिन्यू रक्खा था अब मैंने सरेंडर करने का सोच लिया और कहा

“चाची आप सच में बहुत इंटेलीजेंट हे,

आप से बचना इम्पॉसिबल सा लगता हे, कसम से आप हे ना..मन की सारी बातें जान लेती हे.. मैं बड़े होशियारी से चाची की हा में हाँ भर दी और यह भी जता दिया की आप जो मेरे मन में सेक्स के बारे में सोच रहे हो वो सही हे, में भी आपके साथ सेक्स करना चाहता हू. मगर उनको यह नहीं पता की में जान बूझ कर उनके मन में यह दाल रहा हू. और वैसे भी यह बोलते टाइम मैंने चाची के शोल्डर से अपना सर चाची के गर्दन के बहुत पास ले लिया और चाची से और भी चिपक गया.

चाची अब कुछ नहीं बोली पर मैंने ही बात कंटिन्यू करने के लिए कहा

“वैसे चाची सच कहुँ तो, मुझे कल सच में बहुत बोरिंग सा फील हो रहा था और में थोड़ा सा सैड भी था पर आज आपके साथ होने से मुझे अच्छा लग रहा हे”..

मैंने चाची के मन में अपने लिए एक और बार ईरादा दाल लिया की चाची आप बस मुझे सिड्यूस करो और में सिड्यूस होते जाऊंगा.

अब हमारे बीच में एक साइलेंस सा होने लगा,

तक़रीबन २ मिनट तक हम में से कोई नहीं बोला,

में भी पता नहीं क्यों चुप था जब की में जानता था की अगर ऐसी सिचुएशन में में चुप रहा तो फिर चाची शायद खुद ही उठ जायेगी या कोई डिस्टर्बेंस आ जाएगा.

लेकिन मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था वो २ मिनट सच में बहुत बड़े लग रहे थे.

लेकिन पता नहीं शायद चाची पर भी सेक्स का नशा चढ़ रहा होगा की चाची ने बात छेडी

“रेशु वईसे तुम कल रात मुझसे कुछ पूछना चाहते थे..?

“क्या बात थी.?

बॉस मज़ा ही आ गया, पर ये बात में नहीं छेड़ सकता था क्यूँकि कल रात चाची इस बात पे भड़क गयी थी और आज वो सामने से पूछ रही थी,

किसीने सच कहा हे वक़्त बदलते देर नहीं लगती कल चाची थोड़े ग़ुस्से में थी और आज मज़े में, लेकिन मैंने भी थोड़ा सा चाची को परेशान करने का सोचा इसीलिए में जानबूझ कर कहा

“हा..चाचि पर कहीं आप गुस्सा तो नहीं होगी ना... शायद चाची को भी समझ में आ रहा था की में उन्हें परेशान कर रहा हूँ तो उन्होंने भी मेरी नादानी पर मुस्कुराते हुए कहा की

“नहीं बिलकुल नही”, और इस बार अपने हाथ से मेरे सर को सहलाने के साथ साथ मेरे सर को हल्का सा अपने सीने से दबाया भी..बोस अभी लग रहा था की चाची के बॉब्स को दबोच लू

और शायद इस पल चाची शायद रेसिस्ट भी न करे पर जबरदस्ती करने से थोड़ी शर्म भी मुझे आ रही थी और ऐसा भी था

की ये जो सडक्शन में मज़ा आ रहा हे वो जबरदस्ती में नहीं आएगा.....

आप लोग इस बारे में क्या सोचते हे जरा रिप्लाई करियेगा.

 
अपडेट 54

अब बोलो भी... चाची का टेम्पटेशन बढ़ता जा रहा था मैंने भी चाची को और परेशान करने का चोदा और कहा

“चाची..आप उस शाम उस आंटी से कह रही थी की ..

मर्द जो होते हे उनकी कैपेसिटी जल्दी ख़त्म हो जाती हे..

क्या ऐसा सच में होता हे”?

साला पूछते हुए भी मेरे को शर्म आ रही थी, पर बिना सेक्स का इस्तेमाल किये मैंने जैसे तैसे बोल ही दिया.

लेकिन साला चाची के हाथ में टॉपिक दे दिया और अब ह्रास करने की बारी चाची की आ गयी.

“कौनसी कपसिटि..रेशु..?

ये सवाल सुन के पता तो चल रहा था की चाची अब मेरी तांग खींच रही हे पर ये पता नहीं चल रहा था की जवाब दुं..

और मेरे पास इसका सच में कोई जवाब नहीं था और ओपनली बोलने में पता नहीं क्या आड़े आ रहा था की में बोल नहीं पा रहा था लेकिन चाची इस बार भी मेरे मन की हालत समझ गयी और कहा

“अच्छा..ठीक हे, शायद में समझ रही हूँ की तुम शायद सेक्स के बारे में बात कर रहे हो,?

चाची ने मेरे न चाहते हुए भी क्लैरिफाई किया.

लेकिन में साला इतना शर्मा रहा था की मैंने अपना सर हाँ में हिलाया और कुछ भी बोला नही.

“देखो रेशु..तुम एक डॉक्टर हो और इतना क्यों शर्मा रहे हो,

कल को तुम्हारे क्लिनिक पे कोई पेशेंट आएगा और सेक्स के बारे में सवाल पूछेगा तो तुम क्या वहा पर शरमाओगे?.

चाची अब चाहती थी की में थोड़ा सा ओपन हो जाऊं तो मैंने भी थोड़े सी उंची आवाज़ में खुल के कहा

“नही..चाचि, लेकिन पता नहीं आपसे इस बात पे बात करने में क्यों शर्म आ रही हे.?

“रेशु..तुम्हे मुझसे शरमाने की कोई जरूरत नहीं हे और तुम एक डॉक्टर हो और डॉक्टर को कभी शर्माना नहीं चहिये..

और यह क्या लगा रक्खा हे, इस बारे में उस बारे में, टेल डायरेक्ट के सेक्स के बारे मे, तुम सेक्स बोलने में इतना हिचकिचाते हो तो फिर आगे जाकर इस.....

और फिर रुक गयी पर में समझ गया की वो ये कहना चाहती थी की आगे चल के सेक्स कैसे करोगे?

पर चाची को पता नहीं की में उनकी चुत अब फाड देणे वाला हू.

लेकिन चाची ने रुक के बात मोड़ ली और कहा

“अच्छा बताओ..कीस कैपेसिटी के बारे में बात कर रहे थे.?

चाची ने बात मोड़ के फिर से पूछ.

“चाची वो सेक्स के बारे मे...

“ह्म्मम्..ऐसे खुल के बोलो, रेशु उस दिन मैंने जो बताया वो उस औरत के प्रॉब्लम के बारे में था उस औरत का हस्बैंड उससे अब उम्र होने की वजह से सेक्स नहीं कर पाता था इसिलिये मैंने जो कहा वो उस एक मर्द के बारे में था, सब के लिए नहीं था, इसिलिये तुम्हे इस बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं हे, कभी कभी इसका उल्टा भी हो जाता हे, लेकिन वो उम्र होने की बात हे.

हाँ लेकिन मोस्टली मर्दों को थोड़ा जल्दी होता हे..”

“वो क्यों चाची..?

“बताना थोड़ा मुश्क़िल हे पर ऐसा हे न की मर्द जो होते हे ना,

उनके दिमाग में हर वक़्त सेक्स ही चलता रहता हे,

इसीलिए वो हर टाइम हर लड़की के बारे में सेक्स के ही बारे में सोचते रहते हे, और यह एक वजह हो सकती हे..दुसरी भी वजह हो सकती हे जैसे कोई टेन्शन, कोई लम्बी बीमारी.

जैसे हार्ट अटैक, डाइबिटीज, ब्रेन प्रॉब्लेम्स या फिर अस्थमा..

चाची ने जैसे ही अस्थमा का नाम लिया तो मेरे दिमाग में एक दम से स्पार्क हुआ की मेरे डैड भी अस्थमा के पेशेंट हे और वो भी तक़रीबन १२ साल से, और फिर मेरी माँ के बारे में मेरे दिमाग में आईडिया आया,

पर फिर मैंने अभी चाची पर सोचना मुनसिब माना इसीलिए मैंने चाची के बारे में सोच्ने लगा. सच में अब बोरिंग होने का कोई ख्याल भी मन में नहीं आ रहा था और अब तो चाची भी खुल के बात कर रही थी,

और शायद मुझे सिड्यूस भी कर रही थी, पर में चाहता था की चाची खुद सामने से कहे..

“और चाची अगर मर्द औरत को कर नहीं सकता टो..तो औरत क्या करती हे?

“मैंने अब चाची की शायद दुःखति रग पे हाथ रख दिया, वैसे तो में चाची की चुत पे हाथ रखना चाहता था लेकिन चाची ने जवाब देणे के बजाए कुछ सोचा और कहा

“धत्त.कैसे कैसे सवाल पूछ रहा हे.

चल अब मुझे जाने दे, क्लिनिक पे जाना हे..

चाची ने मुझे अपने सीने से अलग किया और उठकर अपने कामरे में चलि गयी.

मुझे अपनी हरकत पे गुस्सा नहीं आया क्यूँकि एट लीस्ट वो मुझसे इस बारे में बात इसीलिए नहीं करना चाहती थी क्यूँकि वो शायद वेट हो चुकी थी और ये टॉपिक इसीलिए भी नहीं खोलना चाहती थी क्यूँकि शायद अगर इस टॉपिक के दौरन अगर वो अपने पे काबू नहीं रख सकी तो...

शयद ये सोच के वो चलि गयी.

 
दिवाली की आप सब को और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं दोस्तो अगला अपडेट दिवाली के बाद में ....सलील
 
Back
Top