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अपडेट 115
मैंने कहा- अभी तो खेल चालू हुआ है जान.. अभी पूरी फ़िल्म बाकी है.. मेरी जान देखती जाओ..
फिर जस्सी बोली- यार.. भूख लग रही है..
मैंने भी कहा- हाँ.. कुछ खिलाओ..
जस्सी ने ऑमलेट बनाया और ऑमलेट खाने के बाद फिर से जस्सी को चोदा.
उस रात मैंने जस्सी को 3 बार चोदा, अब तो हमारी उठने की भी हालत नहीं रह गई थी.
फिर भी जैसे-तैसे करके करीब 6 बजे मैं अपने कमरे में आकर सो गया.
करीब 8 बजे मौसी ने दरवाजे की घंटी बजाई.. तो मैं उठा और बोला- मौसी मुझे अभी और सोना है.
तो मौसी बोलीं- कोई बात नहीं.. सो जा.
और मैं फिर से सो गया.
उस दिन 12 बजे तक जस्सी आई और बोली- अभी तक सो रहे हो मेरे रेशु बेबी.
मैंने कहा- हाँ तुम भी आ जाओ..
और मैंने उसको अपने बिस्तर पर खींच लिया और चुम्बन करने लगा.
बस 5 मिनट चुम्बन करने के बाद जस्सी बोली- चलो जल्दी से नहा लो.. आज मैंने तुम्हारे लिए ख़ास खाना बनाया है.
अब आगे..
मैंने जस्सी से बोला- मेरे साथ नहा लो न बेबी.
जस्सी बोली- नहीं.. अभी तो नहाई हूँ.. तुम ही नहा लो.
फिर मैं बिस्तर से उठा और जस्सी को बोला- उधर देखो..
जैसे ही जस्सी पीछे देखने लगी.. मैंने जस्सी को पीछे से पकड़ लिया और मेरा लंड अब जस्सी की गाण्ड से कपड़ों के ऊपर से ही उसकी चूत में जाने को बेताब होने लगा था.
इतने में जस्सी बोली- बेबी तुम न बहुत शरारती हो.. प्लीज़ छोड़ो न..
अब मैं उसको गोद में उठा कर उसके कमरे में ही ले गया. मैं उसे सीधा बाथरूम में ले गया और जोर-जोर से उसकी गर्दन और कान को चुम्बन करने लगा.
मैंने जस्सी की होंठों पर चुम्बन किया.. वो अब एकदम से मस्त हो गई थी, जस्सी बोली- बेबी जो करना है.. जल्दी करो.. मुझे दूसरे घर पर जाना है.
मैंने उसके सारे कपड़े और ब्रा-पैंटी दोनों ही उतार दिए और शावर चालू किया और आगे से ही उसकी चूत को सहलाने लगा.. जस्सी भी मस्त होने लगी.
अब मैंने देर न करते हुए जस्सी को नीचे बिठा कर अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और मुँह को जोर-जोर से चोदने लगा. करीब 5 मिनट ऐसे ही करता रहा, मेरा लंड बहुत ज्यादा कड़क हो गया था, मैंने जस्सी को घोड़ी बना दिया.
जैसे ही जस्सी घोड़ी बनी.. मैंने जस्सी की चूत पर लंड को रख कर एक जोरदार झटका मार दिया.
जस्सी- आआह्ह्ह्ह्ह्.. रेशु.. आराम से करो न..
मैंने फिर से हल्का सा लंड बाहर निकाला और फिर से उसकी चूत में जोर के धक्के के साथ अपना आधा लंड डाल दिया.
जस्सी- ऊह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्ह.. रेशु जान लोगे क्या.. बोला न आराम से करो..
मैंने कहा- ठीक है..
अब आधे से ज्यादा लंड जस्सी की चूत में था. अब मैं धीरे-धीरे उसकी चूत में लंड को अन्दर-बाहर करने लगा और जस्सी भी मस्ती के मारे सिसकारियाँ लेने लगी थी ‘ओओह्ह्ह आजह्ह्ह्ह.. उह्ह्ह्म्मम.. ह्ह्हू.. ऊओक्क्..’
मैंने अपनी स्पीड थोड़ी और तेज कर दी और जोर-जोर से जस्सी की चूत की चुदाई करना जारी रखा. करीब 5 मिनट बाद मैंने अपनी स्पीड फुल कर दी और अब तो जस्सी की चीखें भी निकलने लगीं ‘ऊऊओहह्ह्.. अह्हह्.. म्म्ह्ह्ह्हआस.. म्मम्म.. ह्ह्ह्ह्ह्.. स्सस्स ओह्ह रेशु!’
मैंने उसकी चीखों को अनसुना करते हुए अपनी स्पीड तेज ही रखी और जस्सी की जोरदार चुदाई करे ही जा रहा था.
मैंने जस्सी के चूचों को चूसना शुरू क़र दिया.. जिससे जस्सी और भी मस्त होने लगी और सिसकारियाँ भरने लगी.
थोड़ी देर जस्सी के चूचों को चूसने के बाद मैंने जस्सी को दीवार की तरफ उसकी पीठ कर दी और मुँह अपनी तरफ कर लिया. अब मैंने अपना लंड आगे से ही उसकी चूत में डाल दिया.
जस्सी की चूत ज्यादा गीली थी.. तो अब लंड आराम से अन्दर-बाहर करने में कोई परेशानी नहीं हो रही थी.
अब मैं और जस्सी दोनों एक-दूसरे को चुम्बन कर रहे थे. साथ ही मैं एक हाथ उसकी पूरी बॉडी पर फेर रहा था.
मैंने धीरे-धीरे जस्सी की चुदाई करना चालू कर दी और जस्सी भी मेरा साथ दे रही थी.
कुछ देर बाद मैंने जस्सी को दुबारा घोड़ी बना कर जोर-जोर से उसकी चूत को चोदना स्टार्ट कर दिया, अब जस्सी भी मजे ले रही थी. फिर 5 मिनट बाद मैं जस्सी को और जोर-जोर से चोदने लगा था.. तो जस्सी भी बोली- हाँ.. जल्दी करो न बेबी..
मैंने फुल स्पीड में कोई 30 धक्के मारे ही होंगे कि जस्सी बोली- आह्ह.. मेरा तो हो गया.
मैंने जस्सी को नीचे बिठा दिया और लंड को उसके मुँह में डाल दिया.. तो जस्सी जोर-जोर से चूसने लगी.
मुझे लंड को चुसवाने में बहुत ही अच्छा लग रहा था..
कोई 5 मिनट में मुझे लगा कि मेरा पानी भी निकलने वाला है.. तो मैंने जस्सी का सर दोनों हाथों से पकड़ा और जोर-जोर से जस्सी के मुँह को चोदने लगा.
करीबन 30 से 40 धक्के मारने पर सारा माल जस्सी के मुँह में डाल दिया.
अब हम दोनों साथ में नहाए और फिर जस्सी ने अपने कपड़े पहने और मुझे खाना दिया. इसके बाद जैसे ही उसने दरवाजा खोला.. तो सामने देखा कि बारिश का मौसम हो गया था.
मैंने जस्सी से कहा- क्या छत पर जा सकते हैं?
तो जस्सी बोली- हाँ.. पर कोई जाता ही नहीं.
फिर मैंने कहा- कभी बारिश में सेक्स किया है?
तो जस्सी बोली- नहीं.
मैंने कहा- करोगी?
जस्सी बोली- ओके..
ठीक है और ये ऊपर जो ताला लगा हुआ है.. उसे खोल देना ओके!’
जस्सी- ओके.. तो मैं जाऊँ?
मैंने कहा- जाने देने का मन तो नहीं कर रहा.. वापस कब तक आओगी.
जस्सी बोली- शाम को 7 बजे तक..
मैंने कहा- ठीक है.. ये ऊपर का ताला खोल कर जाना और कुण्डी भी खोल देना..
अब उसने एक होंठों पर चुम्बन किया और जस्सी चली गई.
मैंने कहा- अभी तो खेल चालू हुआ है जान.. अभी पूरी फ़िल्म बाकी है.. मेरी जान देखती जाओ..
फिर जस्सी बोली- यार.. भूख लग रही है..
मैंने भी कहा- हाँ.. कुछ खिलाओ..
जस्सी ने ऑमलेट बनाया और ऑमलेट खाने के बाद फिर से जस्सी को चोदा.
उस रात मैंने जस्सी को 3 बार चोदा, अब तो हमारी उठने की भी हालत नहीं रह गई थी.
फिर भी जैसे-तैसे करके करीब 6 बजे मैं अपने कमरे में आकर सो गया.
करीब 8 बजे मौसी ने दरवाजे की घंटी बजाई.. तो मैं उठा और बोला- मौसी मुझे अभी और सोना है.
तो मौसी बोलीं- कोई बात नहीं.. सो जा.
और मैं फिर से सो गया.
उस दिन 12 बजे तक जस्सी आई और बोली- अभी तक सो रहे हो मेरे रेशु बेबी.
मैंने कहा- हाँ तुम भी आ जाओ..
और मैंने उसको अपने बिस्तर पर खींच लिया और चुम्बन करने लगा.
बस 5 मिनट चुम्बन करने के बाद जस्सी बोली- चलो जल्दी से नहा लो.. आज मैंने तुम्हारे लिए ख़ास खाना बनाया है.
अब आगे..
मैंने जस्सी से बोला- मेरे साथ नहा लो न बेबी.
जस्सी बोली- नहीं.. अभी तो नहाई हूँ.. तुम ही नहा लो.
फिर मैं बिस्तर से उठा और जस्सी को बोला- उधर देखो..
जैसे ही जस्सी पीछे देखने लगी.. मैंने जस्सी को पीछे से पकड़ लिया और मेरा लंड अब जस्सी की गाण्ड से कपड़ों के ऊपर से ही उसकी चूत में जाने को बेताब होने लगा था.
इतने में जस्सी बोली- बेबी तुम न बहुत शरारती हो.. प्लीज़ छोड़ो न..
अब मैं उसको गोद में उठा कर उसके कमरे में ही ले गया. मैं उसे सीधा बाथरूम में ले गया और जोर-जोर से उसकी गर्दन और कान को चुम्बन करने लगा.
मैंने जस्सी की होंठों पर चुम्बन किया.. वो अब एकदम से मस्त हो गई थी, जस्सी बोली- बेबी जो करना है.. जल्दी करो.. मुझे दूसरे घर पर जाना है.
मैंने उसके सारे कपड़े और ब्रा-पैंटी दोनों ही उतार दिए और शावर चालू किया और आगे से ही उसकी चूत को सहलाने लगा.. जस्सी भी मस्त होने लगी.
अब मैंने देर न करते हुए जस्सी को नीचे बिठा कर अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और मुँह को जोर-जोर से चोदने लगा. करीब 5 मिनट ऐसे ही करता रहा, मेरा लंड बहुत ज्यादा कड़क हो गया था, मैंने जस्सी को घोड़ी बना दिया.
जैसे ही जस्सी घोड़ी बनी.. मैंने जस्सी की चूत पर लंड को रख कर एक जोरदार झटका मार दिया.
जस्सी- आआह्ह्ह्ह्ह्.. रेशु.. आराम से करो न..
मैंने फिर से हल्का सा लंड बाहर निकाला और फिर से उसकी चूत में जोर के धक्के के साथ अपना आधा लंड डाल दिया.
जस्सी- ऊह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्ह.. रेशु जान लोगे क्या.. बोला न आराम से करो..
मैंने कहा- ठीक है..
अब आधे से ज्यादा लंड जस्सी की चूत में था. अब मैं धीरे-धीरे उसकी चूत में लंड को अन्दर-बाहर करने लगा और जस्सी भी मस्ती के मारे सिसकारियाँ लेने लगी थी ‘ओओह्ह्ह आजह्ह्ह्ह.. उह्ह्ह्म्मम.. ह्ह्हू.. ऊओक्क्..’
मैंने अपनी स्पीड थोड़ी और तेज कर दी और जोर-जोर से जस्सी की चूत की चुदाई करना जारी रखा. करीब 5 मिनट बाद मैंने अपनी स्पीड फुल कर दी और अब तो जस्सी की चीखें भी निकलने लगीं ‘ऊऊओहह्ह्.. अह्हह्.. म्म्ह्ह्ह्हआस.. म्मम्म.. ह्ह्ह्ह्ह्.. स्सस्स ओह्ह रेशु!’
मैंने उसकी चीखों को अनसुना करते हुए अपनी स्पीड तेज ही रखी और जस्सी की जोरदार चुदाई करे ही जा रहा था.
मैंने जस्सी के चूचों को चूसना शुरू क़र दिया.. जिससे जस्सी और भी मस्त होने लगी और सिसकारियाँ भरने लगी.
थोड़ी देर जस्सी के चूचों को चूसने के बाद मैंने जस्सी को दीवार की तरफ उसकी पीठ कर दी और मुँह अपनी तरफ कर लिया. अब मैंने अपना लंड आगे से ही उसकी चूत में डाल दिया.
जस्सी की चूत ज्यादा गीली थी.. तो अब लंड आराम से अन्दर-बाहर करने में कोई परेशानी नहीं हो रही थी.
अब मैं और जस्सी दोनों एक-दूसरे को चुम्बन कर रहे थे. साथ ही मैं एक हाथ उसकी पूरी बॉडी पर फेर रहा था.
मैंने धीरे-धीरे जस्सी की चुदाई करना चालू कर दी और जस्सी भी मेरा साथ दे रही थी.
कुछ देर बाद मैंने जस्सी को दुबारा घोड़ी बना कर जोर-जोर से उसकी चूत को चोदना स्टार्ट कर दिया, अब जस्सी भी मजे ले रही थी. फिर 5 मिनट बाद मैं जस्सी को और जोर-जोर से चोदने लगा था.. तो जस्सी भी बोली- हाँ.. जल्दी करो न बेबी..
मैंने फुल स्पीड में कोई 30 धक्के मारे ही होंगे कि जस्सी बोली- आह्ह.. मेरा तो हो गया.
मैंने जस्सी को नीचे बिठा दिया और लंड को उसके मुँह में डाल दिया.. तो जस्सी जोर-जोर से चूसने लगी.
मुझे लंड को चुसवाने में बहुत ही अच्छा लग रहा था..
कोई 5 मिनट में मुझे लगा कि मेरा पानी भी निकलने वाला है.. तो मैंने जस्सी का सर दोनों हाथों से पकड़ा और जोर-जोर से जस्सी के मुँह को चोदने लगा.
करीबन 30 से 40 धक्के मारने पर सारा माल जस्सी के मुँह में डाल दिया.
अब हम दोनों साथ में नहाए और फिर जस्सी ने अपने कपड़े पहने और मुझे खाना दिया. इसके बाद जैसे ही उसने दरवाजा खोला.. तो सामने देखा कि बारिश का मौसम हो गया था.
मैंने जस्सी से कहा- क्या छत पर जा सकते हैं?
तो जस्सी बोली- हाँ.. पर कोई जाता ही नहीं.
फिर मैंने कहा- कभी बारिश में सेक्स किया है?
तो जस्सी बोली- नहीं.
मैंने कहा- करोगी?
जस्सी बोली- ओके..
ठीक है और ये ऊपर जो ताला लगा हुआ है.. उसे खोल देना ओके!’
जस्सी- ओके.. तो मैं जाऊँ?
मैंने कहा- जाने देने का मन तो नहीं कर रहा.. वापस कब तक आओगी.
जस्सी बोली- शाम को 7 बजे तक..
मैंने कहा- ठीक है.. ये ऊपर का ताला खोल कर जाना और कुण्डी भी खोल देना..
अब उसने एक होंठों पर चुम्बन किया और जस्सी चली गई.