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Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

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चलो एक काम तो अच्छा बना की इतने दिनों के बाद मैंने अपनी पहली इम्प्रैशन उस आंटी के मन से निकल तो दी. अब वो मुझे अच्छा लड़का मानती हे, तो इसका मतलब मुझे अब थोड़ा ध्यान रखना पडेगा. मैंने फिर दो दिन तक आंटी की डेली रूटीन एक्टिविटी के बारे में पता लगाया. वो सुबह सात बाजे दूध लेने जाती हे, फिर १० बजे बालकनी में कपडे सूखाने आती हे, फिर १० से १२ सब घरेलु काम, और फिर १२ से ३ का पता नहीं चला, क्यूँकि वो घर में ही रहती हे, पर कुछ ध्यान में आये ऐसा नहीं करती, शायद सो जाती होगी. फिर ३ से ५ या ६ बजे तक किटी पार्टी या फिर अपनी सहेलियों से मिलने या फिर शॉपिंग प्लान करती हे, मतलब घर के बाहर ही रहती हे. फिर डिनर प्रिपरेशन और फिर नाईट ड्यूटी हस्बैंड के साथ. आम तौर पे सब के घर में शायद यही रूटीन होता हे सब का, साला किस टाइम पे क्या करना हे, जिससे वो सिड्यूस भी हो जाये, और अब तो उसे बुरा भी नहीं लगना चाहिये. मेजर प्रॉब्लम था की में थोड़ा सा रिज़र्व टाइप का हू, बड़ी चाची कोमल दीदि, छोटी चाची या फिर माँ इन सब को में बचपन से जानता हू, पर ये आंटी अन्जान हे, और किस टाइम पे क्या रियेक्ट करेगि, ये कहा नहीं जा सकता था

दो दिन तक मैंने इन सब के बारे में पता लगाया, फिर नेक्स्ट डे में अज यूज्यूअल ८.३० और ९ के करीब उठा और फ्रेश हो के अपने कमरे में बैठा था की आंटी अपनी बालकनी में आई और मैंने उन्हें देखा, तो में एक चेयर ले के आंटी के सामने बैठ गया और हाथ में किताब भी ले ली. आंटी मस्त लग रही थी, उन्होंने ग्रीन कलर की साड़ी और मैचिंग ब्लाउज पहना था आंटी की साड़ी घरेलु थी पर आंटी मस्त लग रही थी, आंटी ने पहले एक बाल्टी जिसमे कपडे सूखने को थे, उसे निचे रक्खा और फिर अपने पल्लू को कंधे से मोड़ के निचे ले के आई और अपनी बेल्ली के पास नैवेल के करीब उसे ठूँस दिया. आंटी और मेरे बालकनी के करीब कुछ ज्यादा नहीं बस १० फीट की ही दूरी होगी, पर सुबह में जब सूरज उगता हे तो सीधे उसकी किरणे मेरे कमरे में आती हे, तो वो ध्यान से देखे तभी उन्हें में नज़र आ सकता था मुझे आंटी साफ़ मस्त दिखाई दे रही थी, आंटी ने फिर एक एक करके कपडे निकाले और फिर उन्हें झटक के रस्सी पे लगाने लगी, रस्सी उन्होंने बालकनी के परेल्लल बांधी थी, तो उन्हें झुकना पडता था तो उनका थोड़ा सा क्लीवेज भी देखा जा सकता था बाल उनके साँवरे नहीं थे,

पर फिर भी मस्त लग रहे थे, चेहरे पे कोई मेक अप नहीं पर फिर भी थकन से भरा चेहरा भी अदाओ वाला था कपडे झटकते टाइम उनके फेस के बिगडते एक्सप्रेस्सिओन, पाणी की हलकी हलकी सी बूँदे, और उन बूंदो से भीगता उनका चेहरा, आंटी ने दो तीन कपडे ठीक से रससि पे डाले, और इतने में मेरे फ़ोन की घंटी बजी और ज्यादा दूरी न होने से उन्होंने भी सुना और मेरी विंडो में देखा तो उन्होंने मुझे देख लिया, अब इतना भी में दूरी पे नहीं था की वो देख न सके, बस उनके ध्यान से देखने की जरूरत थी और उन्होंने मुझे पकड़ लिया. फिर संभल कर उन्होंने मेरी और देखा, फिर अपनी और देखा और अपने पल्लू जो की ठीक था उसे फिर से ठीक किया, और अपने कपडे सूखाने लगी, पर हर एक कपडा उठाते टाइम मेरी और देख लेती की कहीं में उन्हें झुकते टाइम देख तो नहीं रहा, और में भी बिन्दास बन के उन्हें देख रहा था इसमें तो कुछ गलत नहीं था आंटी ने दो तीन कपडे सूखाये होंगे की मेरा नसीब जोर कर गया और उनका पल्लो नैवल के वहा से निकल गया, लेकिन अब एक दो ही कपडे बाकि थे तो उन्होंने फिर उसे नैवल के पास नहीं लगाया और कपडे ले ने के लिए झुकि की उन्हें खाली बाल्टी में कपडा लेने के लिए और झुकना पड़ा और उसमे उनका पल्लू खिसक गया और उठते टाइम पल्लू उनके हाथ में आ गया, और मुझे मस्त क्लीवेज दिखाई दिया. मैं तो खुश हो गया की बॉस आज तो मस्त शुरुआत हुई हे, दो दिन के बाद. लेकिन इस बार आंटी ने मेरी और नहीं देखा, अपना पल्लू ठीक किया और कपडा सूखा के चल दी. मज़ा आ गया था जाते टाइम भी क्या गांड झटक रही थी. एक बार मिल जाये तो मारने का मज़ा आ जाये.

पूरे दिन में कॉलेज में में आंटी के बारे में सोचता रहा, शाम को में घर आया, अपने रूम में गया और बालकनी में देखा, आंटी की बालकनी जो थी वो उनका यूजलेस रूम था तो वो वहॉ बस सुबह ही आती थी, बाकि कोई भी उधर आता जाता नहीं था कभी कभी आंटी कुछ स्टोर रूम में रक्खा हो तो लेने के लिए आती थी, और उसी में उन्होंने मुझे पहले मूठ मारते देख लिया था.
 
साला समझ में नहीं आ रहा था की आगे क्या करून? क्यूंकि उतनी बॉन्डिंग नहीं थी की उनके घर पे जा के बातें भी की जा सके. खैर में डिनर निपटा के अपने रूम में फिर से आया, तो माय सरप्राइज उनके रूम की लाइट ऑन थी और मैंने देखा की वहा पर आंटी खड़ी थी और वो अल्मारी में कुछ ढूंढ रही थी, तो मैंने सोचा की क्यों न कुछ डिफरेंट ट्राय किया जाए, तो मैंने अपने मोबाइल की रिंगटोन खुद ही बजायी, और फिर जैसे में कॉल कत रहा हूँ ऐसे मोबाइल साइड कर दिया, ता की आंटी का ध्यान मेरी और आ जाये, आंटी ने मेरी और देखा और मैंने अपनी टी-शर्ट निकल दि, और अपनी पैंट भी खोलने लगा, मैंने अपने पैंट का हुक खोला, और चैन भी निचे कर दी और फिर पैंट उतारने की बजाए, आंटी की और घूम गया, आंटी ने शर्म के मारे चेहरा घूमा लिया, पर मैंने जैसे उन्हें देखा ही न हो, ऐसे विंडो की खूब नजदीक आ गया और वहा से अपना ट्रैक पैंट उठाया, और फिर पूरा उल्टा न घूमते हुये, मैंने आंटी एक साइड से मेरे लंड को देख सके, ऐसे खड़ा रेह के, धीरे धीरे अपने जीन्स को निकाला, और फिर अपने ट्रैक पैंट को पहना, पर सिर्फ नीज तक ऊपर किया, और फिर अपने अंडरवेअर को एडजस्ट करने के बहाने से मैंने उसमे हाथ डाला और कमर पे अंडरवेअर का इलास्टिक एडजस्ट कर के एक बार हाथ लंड पे भी घुमाया और फिर पैंट को ठीक से पहन लिया. और फिर आंटी की और देखे बिना ही में खिड़की से हट गया. आंटी के बारे में ही सोच रहा था पर फिर पांच मिनट के बाद देखा तो लाइट ऑफ थी, मतलब वो बस मुझे चेंज करते देखने के लिए ही रुकि थी.

चलो अब तक तो सारे पासे सही हो रहे थे, आंटी को भी मैंने अपने बारे में सोचने के लिए मजबूर कर दिया था. हाल इधर तो माँ का भी बुरा था माँ भी मेरे बार बार इन्सेस्ट इरोटिक स्टोरीज भेजे जाने की वजह से परेशान थी, और वो सोच रही थी की आखिर कौन उन्हें भेज रहा था और दो तीन इंसीडेंस के बाद भी मैंने उनकी और ठीक से रिप्लाई नहीं किया, और बस ऐसे ही रिप्लाई करता रहा, तो आखिर उनसे भी नहीं रहा गया, और मैंने लैपटॉप में देखा तो उनका मेल आया हुआ था इस बार सच में बड़ा डेस्क्रिप्टिवे मेल भेजा था उन्होंने..

“हु आर यू? एंड व्हाई आरे यु सेंडिंग मि सच ऑन ईमेल. इट इस रियली रिडिक्युलॉस एंड फॉर थिस मच टाइम आई ऍम बेअरिंग यु, नाउ ईट इस ओवर. प्लीज डोंट सेंड मि सच इमेल्स ऑदरवाइस वुई हैव टू टेक लीगल एक्शन अगेंस्ट यु, एंड फॉर फरदर ट्रबल्स यु विल बे रेस्पोंसिबल”.

माँ का ये रिप्लाई सच में बड़ा ही डेंजरस था और अब आगे क्या करना हे, रिप्लाई करू या नही, ये सोचने में में लगा हुआ था माँ को अगर ये पता चल गया की ये सब में कर रहा हू, तो फिर सोसाइटी में बड़ी बदनामी होगी, और इन सब बातों से थोड़ा डर तो लगता हे, में कुछ सोच नहीं पा रहा था तो मैंने उस टाइम रिप्लाई नहीं किया, यहाँ तक की सॉरी का भी नही. इतना तो शुअर था की अब आगे परेशान नहीं करुँगा तो अब माँ अपने आप ऐसे ही नहीं रिएक्ट करेगी मुझे, अब अगर मैंने उन्हें परेशान किया तो वो मुझे सच में लीगल एक्शन लेगी.

फिर नेक्स्ट डे, में १० बजने की राह में ऐसे ही बैठ गया, और ठीक १० बजे वो आंटी आई और आज आते ही उन्होंने मेरी खिड़की की और देखा और मुझे वेटिंग करते देख कर मुस्कुरा पडी.

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आज उन्होंने डार्क रेड कलर की साड़ी पहनी थी, में सोच रहा था की कल उन्हें मज़ा आया होगा तो वो आज कोई वाइट कलर की ट्रांसपेरंट साड़ी पहनी थी, पर ये साड़ी ट्रांसपेरंट नहीं थी. लेकिन उन्होंने आज साड़ी का पल्लू बड़ा ही सिकुड के बांधा था और उनके दोनों शोल्डर देखाई दे रहे थे, जैसे की पल्लू बस नाम का ही था उनके दोनों बॉब्स के बीच पल्लू था और दोनों बॉब्स को अलग कर रहा था मस्त तो लग रहा था पर आज आंटी ने कुछ अलग नहीं किया और बस कपडे सूखा के अंदर चलि गयी, जाते जाते भी नहीं देखा, में सोचता ही रह गया की आखिर क्या करू की आंटी का फुल अटेंशन पा सकूँ. ३-४ दिन ऐसे ही बीत गए और कुछ नया नहीं हुआ, माँ से सीन भी बंद हो गया, समझ में नहीं आ रहा था की क्या करू. पर इतना तो समझ में आ गया था की दोनों को पटाना इतना आसान नहीं होगा, दोनों मेरे लिए समझ से बाहर थी. पर मैंने भी तय कर लिया की चाहे कुछ भी हो जाये, साला दोनों को पटाना तो हे ही, और जैसे ही मौका मिलेगा, साला इतना चोदूंगा, तो उनको भी लगे की साला मज़ा आ गया.
 
एक हफ्ता हो गया था आंटी से बस इशारों से बात होती थी, बात भी नही, बस ऐसे ही एक दूसरे को हम देख रहे थे. संडे की इवनिंग थी, और में अपने फ्रेंड्स के साथ क्रिकेट खेल रहा था मेरी बारी आज भी लास्ट थी, और मैंने इस बार सोचा की क्यों न कुछ तो किया जाए, तो में जान बूझ के आंटी के घर की तरफ शॉट्स लगाने लगा, सब फ्रेंड्स बोल रहे थे की घरों की और मत खेल, मैदान में शॉट्स लगा, पर में सोच समझ के उसी और खेल रहा था और ४-५ बार ट्राय करने के बाद, आखिर मेरा एक शॉट, आंटी के घर में पहले फ्लोर पे चला गया, सब समझ गए की अब बॉल वापस नहीं आयेगी, और सब चले गये, पर में अपने घर आते आते, आंटी के घर की और चला गया, और आंटी के डोर पे नॉक किया. थोड़ी देर बाद आंटी ने डरवाजा खोला, वो अपने हाथ पोछ रही थी, शायद डिनर की प्रिपरेशन कर रही होगी. उन्होंने जैसे ही मुझे देखा की उनके हाथ रुक गये, और उनके फेस के एक्सप्रेशन मिक्स थे, खुश भी लग रही थी और कन्फ्यूज्ड भी. थोड़ी सी हेरान थी, पर बाद में सम्हलते हुए उन्होंने मुझे कुछ कहा नही, बस अपने सर के इशारे से पुछा क्या है. तो मैंने कहा

“आंटी..वो मेरी गेन्द आपके घर में आ गयी है.. मैंने गेन्द का इशारा हाथ गोल घुमा के किया, पर अन्जाने में ही मेरा हाथ जो की मैंने गोल घुमाय वो ठीक आंटी के बॉल के सामने था आंटी ने मेरे इस अन्जान बिहेवियर को डबल मीनिंग मान लिया, और मेरे हाथ को देख के उन्होंने अपने बूब की और देखा, और फिर मेरी और नजरें न मिलाते हुये, डरवाजे से बाहर झांका, मैदान में कोई नहीं था आंटी कुछ ज्यादा ही समझ रही थी मेरे बारे मे. उन्होंने देखा की मैदान में कोई नहीं हे, तो इससे पहले की उनके मन में कोई सवाल उठे मैंने अपने आप ही कह दिया..

“आंटी ओ..हम खेल रहे थे, तो मेरे से आपके घर में गेन्द आ गयी, तो सब अपने अपने घर चले गये, सब कह रहे थे की अब गेन्द नहीं आयेगी.. मैंने सारा एक्सप्लनेशन सच सच कह दिया. आंटी ने फिर सोचा और कहा

“आओ अंदर आओ”

और में अंदर आ गया, में आंटी के पीछे पीछे चल रहा था आंटी सीढिया चढ़ रही थी, मस्त गांड मटक रही थी. फिर आंटी ने ऊपर के कामरे में जा के देखा, तो मेरे बारह बज गये, मेरी गेन्द की वजह से आंटी का एक ग्लास का एक फ्लास्क टूट गया था. आंटी ने उसे देखा, उन्हें गुस्सा तो आ गया था. और ग़ुस्से में मेरी और पलट के देखा भी, पर कुछ कहा नही, और निचे बैठ के कांच के टूकड़े उठाने लगी. मैं भी उनकी मदद करने लगा. कांच के टूकड़े उठा के आंटी ने उसे डस्ट बीन में डाले, और फिर मेरी गेन्द मुझे देते हुए कहा,

“आइंदा, ये बॉल यहाँ नहीं आणि चहिये”...

“आई एम सॉरी आंटी,..आगे से में ध्यान रखूंगा...

“अगर ध्यान रखना हे तो ही कहना, क्यूँकि पता नहीं ऐसे तुम मुझे कितनी बार परेशान करोगे..दो बार जोर से मार चुके हो, अब ये नुक्सान”

आंटी ने फिर मुझे चलने का इशारा किया और में निकल गया. फिर २-३ डेज कुछ हुआ नही, फिर में एक शाम को अपने कॉलेज से वापस आरहा था की मैंने देखा की वो आंटी बस स्टैंड के पास खड़ी है, तो मैंने आंटी के पास गया और कहा.

“आंटी आप घर जा रही हे...? आंटी ने मुझे देखा और फिर सोचा की बैठूं की नही, लेकिन फिर बैठ गयी, आज बाइक चलाने का मज़ा आने वाला था. आंटी भी दूसरी फीमेल की तरह एक साइड से बैठी थी, में आराम से बाइक चला रहा था वैसे तो आंटी से इतनी बात नहीं होती थी, पर आज आंटी कुछ अलग ही मूड में लग रही थी..

“तुम इसी कॉलेज में पढते हो ना...

आंटी को पता था की में इसी कॉलेज में पढता हू, पर फिर भी बात शुरू करने के लिए उन्होंने पुछा और उन्होंने शुरूआती कदम लिया तो मुझे अच्छा लगा.

“हाँ...

थोडी ही देर में हम घर पहुँच रहे थे की मुझे मेरे बाइक पे हमारी सोसाइटी में एंटर करते हे एक एमरजेंसी ब्रेक लगानी पडी, इससे आंटी मेरे पास सरक गयी, मानो की मुझ पे गिर पडी हो ऐसे,

“आंटी सोर्री...

“अरे इसमें सॉरी कहने की क्या जरूरत हे, ठीक हे हो जाता हे”

फिर से में अच्छे से बाइक चलाने लगा, लेकिन आंटी हल्का सा भी पीछे नहीं हुई, ऊपर से बात करने लगी.

“अरे तुम तो बड़े डिसिप्लिन वाले लड़के हो.., ऐसी बात में सॉरी कहते हो...

मैने अपने घर के पास बाइक को रोकते हुये थैंक्स कहा..

तो आंटीने भी बाइक पे से उतरते हुए कहा..

“हाँ लेकिन जिस बात के लिए सॉरी कहना चहिये, उस पे नहीं कहता...

और फिर मुस्कुराके अंदर चलि गयी..जाते जाते मेरी और मुस्कुराके देखा भी.. शीट..यार, में कहाँ से इस सेक्स के चक्कर में फंस गया, रात को मेरे दिमाग में ये सब विचार चल रहे थे, आंटी को पटाने में इतनी मेहनत करनी पडेगी, मैंने सोचा नहीं था एक तो वो बात नहीं करति, बात करती हे तो वो ताना मारती हे, और एक नजर भी पड़ जाये तो गुस्सा तो हरदम नाक पे रहता हे. इससे अच्छा तो उनको पटने के बारे में छोड़ देना चाहिए था मैंने फिर यही डिसाइड किया और अपनी पढाई पे कसरते करने का सोचा, मैंने फिर दूसरे दिन से आंटी के खिड़की में देखना ही बंद कर दिया, अब तो में सुबह आराम से ९ बजे जाता और ५-६ बाजे वापस आ जाता, अब आंटी को इससे कुछ फरक पडता हे या नहीं इससे कोई लेना देना नहीं था वैसे भी कभी कभी मेरी चाची से चुदाई का तो प्रोग्राम बन ही जाता था तो मैंने आंटी के साथ सेक्स पे फुलस्टॉप लगा दिया.

ऐसे ही तक़रीबन १ महिना गुजर गया, आंटी ने शुरू शुरू में मेरे घर पे आ के मेरे बारे में चाची से एक दो बार पूछा भी सहि, पर चाची ने भी कुछ खास तवज्जो नहीं दि, और फिर तो आंटी ने भी आना बंद कर दिया, कभी रस्ते में मिल जाये तो वो हंस के स्माइल देती थी, तो में भी स्माइल रीटर्न करता था इतने में मेरे रिश्तेदार में एक शादी आ रही थी, तो घर में सब जमा होनेवाले थे. छोटी चाची को जैसे ही पता चला की उन्हें अहमदाबाद आना है, तो उन्होंने मुझे झट से कॉल किया और वो सच में मुझसे मिलने को डेस्पेरेट थी, और कोमल दीदी तो जैसे ही पता चला तो आना चाहती थी, पर वो तो एक ही सिटी में थी, तो आ नहीं सकती थी. लेकिन छोटी चाची शादी से २ दिन पहले ही आ गयी, जब्कि माँ और दिदी शादी की एक रात पहले आनेवाले थे. छोटी चाची सब से पहले आ गयी, और वो आई तब घर में में अकेला था उन्होंने मुझे आने से पहले कॉल कर लिया था और में भी उनके आने से पहले घर आ गया.
 
छोटी चाची घर में आयी, और घर में आ के सोफ़े पे बैठी और अब उन्हें शर्म आ रही थी, बात करने में, क्यूँकि जब में वहा से निकला तो वो गुस्सा थी, लेकिन अब तो गुस्सा पिघल चुका था पर अब वो चाहती थी की में उन्हें मनाने जाऊ. पर अब में थोड़ा सा रिजर्व हो चुका था में अब कोई आगे से हरकत नहीं करेवाला था. अब अगर वो शुरुआत करें तभी में कुछ करुँगा और वो भी अपनी मरजी से, अरे यार हाद हे..एक तो इन्हे मनावो, फिर सेक्स के लिए राज़ि करो, और फिर सेक्स करने के बाद वो ऊपर से गुस्सा भी करें.कब तक सहन करूंगा..

ये सोच के मैंने चाची का वेलकाम किया, फ़ोन पे तो बड़े आराम से बात कर रही थी, पर अभी कुछ बोल नहीं रही थी. कोई भी बात नहीं की, उन्होंने और फिर रात को डिनर निपटा के छोटी चाची ने बड़ी चाची से कुछ बात की और बड़ी चाची ने मुझसे कहा, की रेशु छोटी चाची तेरे साथ सोयेंगी, और मैंने उनका सामान अपने साथ ले लीया. रात में में अपने कामरे में था और चाची काम निपटा के मेरे रूम में आयी.

“रेशु..केसी चल रही हे पढ़ाई...?

“ठीक हे चाची...”

उन्होंने कैजुअल पुछा तो मैंने भी ऐसे ही जवाब दे दिया.

फिर उनसे रहा नहीं गया, में जानता था की अब उनके बर्दाश्त करने की लिमिट आ गयी हे, तो उन्होंने भी बेशर्म बन के पूछ ही लिया, लेकिन वो भी इनडायरेक्ट..

“नाराज़ हो...? मैंने उनकी और देखा, और सोचा की क्या कहूं, सच सच कह दू या फिर बात को घुमा दुं, पर में भी साफ़ साफ़ कह दिया,

“पहले आप बतओ..आप नराज़ हो.? मैंने भी उनके सवाल का जवाब सवाल से दिया.

“में..में क्यों भला नराज़ होने लगी...? उन्होंने साफ़ कर दिया की वो मेरी हरकत से नाराज़ नहीं हे, तो मैंने भी उनसे कहा

“तो में भी नराज़ नहीं हू... बातों की इस हेरा फेरी को अब चाची से सहा नहीं जा रहा था तो उन्होंने और भी सीधे सीधे पूछा.

“रेशु, में जिस के बारे में पूछ रही हू, तुम वहीँ बता रहे हो ना...

“हाँ चाची आप जो पूछ रही हे, में समझ रहा हूँ और में भी सीधे सीधे कह रहा हू..पर जब तक आप कुछ नहीं कहेंगी या करेंगी, में आपके ही स्टाइल में आपको फॉलो करूंगा..”

अब चाची को पता चल गया की में नराज़ तो नहीं हू, पर हाँ शुरुआत में नहीं करूंगा.

तो चाची ने मेरे हाथ से किताब ले ली और उठ के साइड में टेबल पे रख दि, और फिर रूम के दरवाजे और खिड़कियाँ बंद कर दि, और फिर से मेरे साथ मेरे बेड पे आ गयी, और मेरे पास बैठ के मेरे कान में कहा.

“रेशु..प्लीज बेगिन मि,आई वांट यु...”

फिर वो मेरी और और भी आ गयी और मेरे लिप्स को अपने लिप्स से भर दिया..

“आहह… अब उनके साथ सेक्स में और भी मज़ा आ रहा था उनके किस करने से पता चल रहा था की वो कितनी पैशनेट थी,या फिर यूँ कहो की मेरे साथ सेक्स करने के लिए.फिर मैंने चाची को अपने ऊपर से हटा के अपने निचे ले लिया और में भी मस्ती से उन्हें किस करने लगा.दोस्तों अब ऐसा सोच ही लिया था की सामने से बस एक दो बार ट्राय करने का..फर गरज़ होगी तो सामने से भी रिस्पांस करेगि..वरना हसीनो की कमी नहीं हे, हिन्दोस्तान मे.. हम दोनों के लिप्स मानो एक दूसरे में गुम ही हो गए थे, जुबान भी एक दूसरे से मस्त लिपट रही थी, मैंने अपने हाथ से आंटी के बाल भी खोल दिये, और मेरे हाथ चाची के फोरहेड से सरकते सरकते चाची के बॉब्स की और जाने लगे, मैंने अपना राईट हैंड चाची के बॉब्स पे रक्खा, चाची की आँखें बंद थी, और जैसे ही मैंने अपना हाथ चाची के बॉब्स पे रख के हल्का सा दबाया की चाची की आँख खुल गयी, अभी भी उनके मन में एक इंडियन औरत की तरह गैर मर्दो से सेक्स न करने का रेजिस्टेंस तो था हि, क्या करें सब कॉन्ससियस मे भी कुछ तो कण्ट्रोल करता हे अपने पर..लकिन फिर उन्हें एहसास हो गया की ये में ही हूँ तो उनका मेरे हाथ को रोक्ने के लिए उठा हाथ रुक गया और उन्होंने मेरे हाथ को रोक्ने के बजाय अपने हाथ को मेरे बैक पे ले लिया और मेरे बैक को सेहलाने लागी, में भी इस बात से खुश हो गया.

फिर मैंने चाची से लिप्स अलग किये और चाची की और देखा.. चाची तो अभी भी चूसना चाहती थी पर मैंने लिप्स अलग किये,, और चाची को निहारने लगा, चाची की आँखें बंद थी, उनको मस्त नशा होने लगा था बिलकुल वैसे जैसे राजा हिन्दोस्तानी में करिश्मा कपूर किस करने के बाद भी आँखें बंद कर के उत्तेजाना फील करती हे..वाईसे उनकी आँखें बंद थी.. लेकिन उनके हाथ मेरे बैक पे वो सहला रही थी, पर आँखें बंद थी और ऐसे ही उन्होंने कहा

“रेशु.. प्लीज कोई जल्दी मत करना आज,जो करना हे वो करो, पर मज़ा आ जाये ऐसे करो...

 
चाची ने बंद आँख से इसीलिए कहा की शायद कुछ शर्म उनमे बचि थी, पर मन में जो था वो उन्होंने कह दिया..

ओर मैंने जैसे ही चाची ने सेंटेंस ख़त्म किया की चाची के लिप्स को फिर से पकड़ लिया और मस्त चूसने लगा. फिर मैंने अपने पाँव से चाची के दोनों पाँव को अलग किया और चाची के बीच में आ गया और उनके चुत के पास अपने लंड को सहलाने लगा. चाची भी मज़ा ले के अपने दोनों पाँव मेरे गांड के पास लपेट के मज़ा लेने लागी. मैं अपना लंड आराम से चाची की चुत के पास सहलाने लगा. फिर मैंने धीरे धीरे अपने दोनों हाथ चाची के दोनों कन्धो पे रख डीए, और चाची के फुल फेस पे किस करने लगा, चाची भी मस्त हो रही थी, फिर मैंने चाची के दोनों बॉब्स को पकड़ा और धीरे धीरे दबाने लगा, ऐसे ही दोनों बॉब्स पकड़ के मैंने दोनों बॉब्स को बारी बारी चूसा, और इतना मस्त चूसा की कपडा भी गीला हो गया, चाची भी मेरे ऐसे बॉब्स दबाने से और चूसने से बेचैन होने लगी, धीरे धीरे उनके मुँह से मममहहममम..आवाज़ें शुरू होने लगी थी, मैंने फिर अपनी टी-शर्ट निकल दी और पैंट भी खोल दिया.. और अब में सिर्फ अंडरवेअर में था चाची ने भी अपने ब्लाउज को खोल दिया..मैने सोचा की अभी कह रही थी की जल्दी मत करो और अभी खुद ही उतावली हो रही हे. ओह गॉड इन औरतों को समझना सच में मुश्क़िल हे. फिर मैंने भी चाची के बैक पे हाथ दाल के ब्रा भी खोल दी और चाची के बॉब्स ओपन कर दिये.

“चाची सच मे..ये बड़े मस्त हे...

“पता हे बहुत लोग इन्हे देखते रहते हे..

और कहते कहते चाची ने मेरे हाथो को अपने हाथ से पकड़ के अपने बॉब्स पे रख दिया. और मेरे हाथ को अपने बॉब्स पे प्रेस करने लगी, फिर मैंने भी चाची के गोरे गोरे बॉब्स को अपने हाथ में ले लिया और दोनों बॉब्स को पकड़ के रक्खा और बारी बारी दोनों के निप्पल्स अपने मुँह में ले के दोनों को चूसा और चाची तो मानो बेक़रार सी हो उठी, मैंने चाची के बॉब्स को जैसे दबाना और चूसना चालू किया की उनसे रहा नहीं गया और वो अंगड़ाइयाँ लेने लगी, हालाँकि मुझे हलकी सी परेशानी हो रही थी पर चाची अपने आप को कण्ट्रोल नहीं कर पा रही थी. तो मैंने फिर से चाची के दोनों पाँव को फैला लिया, जिससे वो और न घूम पाये. चाची के दोनों बॉब्स सच में मस्त थे, दबाने में तो मज़ा ही आ गया.. फिर में धीरे धीरे सहलाते सहलाते चाची के नैवेल तक आ गया, और नैवेल में अपनी जीभ दाल दी और फिर उसे चूसने लगा, चाची भी मेरे सर को पकड़ के मेरे मुँह को अंदर लेने का ट्राय कर रही थी. चाची मस्त प्लेजर के मारे मॉनिंग कर रही थी..मेरी भी साँसो में तेज़ी आ गयी थी. फिर मैंने चाची की नैवेल के निचे अपने हाथ से धीरे से चाची की साड़ी निकलनी शुरू की और धीरे धीरे चाची की साड़ी मैंने नैवेल से खोल दी और साड़ी को साइड में फेंक दिया और चाची के पट्टिकोट को भी खिंच लिया..अब चाची मस्त सिल्क की पेन्टी में थी और में अंडरवेअर मे..में फिर से चाची के ऊपर आ गया और चाची ने बड़े प्यार से मेरे बाल को सेहलाने लगी और मेरे फेस पे किस करने लगी..

“अच्छा लग रहा हे ना चाची...?

“बहोत अच्छा...

चाची ने शर्म के मारे फिर से बोलते टाइम आँखें बंद कर दि, तो जैसे ही चाची ने आँखें बंद कर दी तो मैंने अपना हाथ चाची की पेन्टी पे रख दिया और चाची की चुत को अपने हाथ से सहलाने लगा. बस ऐसे ही ऊपर निचे हाथ कर रहा था अभी एक दो बार ही मैंने हाथ सहलाया था की चाची ने अपने बाँहों में मुझे पकड़ लिया, जैसे की उन्हें कोई शॉक सा लगा हो. तो में भी ऐसे ही पेन्टी के ऊपर ऊपर से ही चाची की चुत को और भी जोर से सहलाने लगा, और अपने हाथ को रगड़ने भी लगा.चाची के मुँह से अब उउउउम्म्ह.ुउउम्म शुरू हो गया था में उनकी साँसे अपने बदन पे फील कर रहा था फिर में धीरे धीरे चाची को ऊपर से चूमते चूमते हुए चाची की पेन्टी तक आ गया, और बेड से निचे हो के चाची के दोनों पाँव को पकड़ के अपनी और खिंच लिया और चाची की चुत को अपने मुँह के पास ले दिया और चाची की चुत पे अपना मुँह रख दिया.. और जैसे शेर अपने शिकार के बदन से अपना खाना खाने के लिए मुँह मारता हे, ऐसे चाची के चुत पे अपने मुँह को में हिलाने लगा.. चाची अब और भी जोर से अंगड़ियाँ ले रही थी, चाची की चुत की मस्त खूशबू आ रही थी, और जैसे ही मैंने अपना मुँह चाची की पेन्टी पे कुछ और बार रगडा की चाची की चुत से रस झरने लगा..

 
मेरे तो लंड का हाल ही मत पूछौ. चाची ने भी नयी पेन्टी पहनी थी शायद..ऐसे मुँह से चाची की चुत को सहलाना मज़ा आ रहा था.रेशमि कपडे में से चुत को फील करने में मज़ा आ रहा था फिर मैंने चाची के नैवेल के पास पेन्टी का हिस्सा होता हे, वहाँ पे अपनी दो ऊंगलियां डाली और पेन्टी को ऊपर खिंच के छोड़ दिया.. और फ..टाक सी आवाज़ आयी.. और चाची हस् पडी, उन्हें भी मेरी ऐसी हरकतो से मज़ा आ रहा था. फिर मेरे से अब रहा नहीं जा रहा था तो मैंने चाची की पेन्टी को दोनों हाथों से पकड़ा और चाची की और देखा..चाचि ने मुझसे नजरें मिलाते ही आँखें बंद कर दी पर अपने होठ को दान्त से काटा और मुझे आगे बढ्ने का इशारा दिया. मैंने फिर आराम से चाची की पेन्टी को निचे उतारा और फिर अपने अंडरवेअर को भी उतार दिया..चाचि को लगा था की में उन्हें अपना लंड चूसने को दूंगा..मगर पता नहीं में किस मूड में था लगता हे बहुत सारा गुस्सा जमा हो गया था मन में, सामने वाली आंटी का, बहुत दिनों से बड़ी चाची को भी नहीं चोद पाया उसका, मम्मी से पिछडने का. तो मैंने सोच लिया की छोटी चाची खुद कहे तो ही चूसने दूंगा, वर्ना मेरा तो लंड मस्त तन चुक्का था चुत पेल्ने के लिये..

लेकिन जैसा मेरा मानना था चाची की हिम्मत नहीं बनी.. और मैंने अपना लंड अपने हाथ में एक दो बार मसलते हुए, चाची की चुत पे मस्त ऐसे ही एक दो बार रगड़ा.. और फिर सटाक से अपना लंड चाची की चुत में दाल दिया.. चाची एकदम से सकपका गयी, उन्होंने शायद सोचा था की में पहले चुत चुसूंगा, फिर चोदूँगा, पर मैंने सटाक से चुत में लंड डाला और चाची के ऊपर आ गया. चाची कहने जा रही थी की

“रेशु.आराममम.. इससे पहले की चाची कुछ कहे..मैने उनके लिप्स से अपने लिप्स फिर से लगा दिये.. इस बार चाची ने मेरी आँखों में देखा, और उन्हें पता चल गया की इसे रोक्ने का कोई फायदा नही, इसे जो करना हे वो करने दो. फिर चाची ने खुद ही अपने पाँव को और चौड़ा किया और मेरे गांड के आसपास जमा लिये, और मेरी नाक, मेरी पीठ को अपने मस्त नाजूक हाथों से सहलाने लागी, मैंने अभी तक स्ट्रोक्स देना स्टार्ट नहीं किया था बस ऐसे ही मैंने अंदर लंड डाला और फिर मुझे लगा की चाची स्ट्रोक्स के लिए तड़प रही हे तो मैंने चाची को पलटा लिया और अपने ऊपर ले के उन्हें बिठा दिया. अब वो मेरे लंड पे बैठी थी, और वो समझ गयी, की उन्हें क्या करना हे, उन्होंने खुद ही अपने आप धीरे धीरे से ऊपर निचे होना शुरू कर दिया, में बस चाची को देख रहा था और मैंने उनकी कामर हाथ से पकड़ रक्खी थी.

चाची के बिखरे बाल उनके चेहरे पे बार बार आ रहे थे, चाची अब अपने आप ही जोर लगा के ऊपर निचे हो रही थी, इससे उनकी साँसे भी तेज़ होने लगी थी, ऐसे ऊपर निचे होने से वो मस्त एन्जॉय कर रही थी,बीच बीच में अपने बॉब्स को खुद ही दबा देती थी, फिर मैंने चाची की कमर से पकड़ के चाची को अपनी और थोड़ा सा झुकाया और उनके बॉब्स को अपने मुँह के पास ले के चूसने लगा, अब चाची को में चोदने लगा, क्यूँकि वो अब ऊपरनीचे हो नहीं सकती थी, वैसे भी वो १० मिनट में थक गयी थी. फिर मैंने चाची को चोदना शुरू किया और चाची के बॉब्स को भी चूसने लगा, चाची की साँसे तेज़ हो गयी थी, ऐसे ऊपर निचे होने से. फिर मैंने चाची को समझाते हुये मैंने चाची को डॉगी स्टाइल में एडजस्ट किया और फिर में चाची को और तेज़ी से चोदने लगा, मेरे स्ट्रोक्स सच में बड़े धारदार हो रहे थे, जैसे ही में अंदर लंड डालता की चाची के मुँह में से “ओहउम्मम्मा” या “ओफ्फफ्फ” की आवाज़ आति, वो भी ज्यादा आवाज़ नहीं कर रही थी, शायद किसी को पता चल जाये, लेकिन उनके बार बार अपनी चुत को सहलाने से पता चल रहा था की वो दर्द से तड़प रही हे, में भी पसीने पसीने हो गया था पर अभी तो चुदाई बाकि थी, चाची को मैंने फिर कमर से छोड़ के कन्धो से पकड़ा और थोड़ा सा ऊपर उठा के चोदने लगा, जिससे चाची मेरे जांघ पे बैठ गयी और मैंने फिर से उनके बॉब्स पकड़ के उन्हें चोदने लगा..इस बार गहरी चुदाई के साथ चाची के बॉब्स पे भी जोर आ गया तो चाची दर्द के मारे चीख़ ही पडी

“उह…ररररेशु,प्लीज धीरे..धीरे….

फिर मैंने देखा की चाची झड चुकी थी, अब वो रिलैक्स हो चुकी थी, धीरे धीरे शांत होने लगी थी, लेकिन मैंने उन्हें लेटने नहीं दिया और अपने जांघ पे ही बिठा के रक्खा और न ही अपने लंड को बाहर निकाला, बल्कि चाची के लिप्स को चूसने लगा और चाची की निप्पल्स को पकड़ के चाची को फिर से इरेक्शन देणे लगा, और थोड़ी ही देर में चाची की निप्पल्स फिर से हार्ड होने लगी और अपने आप उनके हाथ मेरे सर पे घुमने लगा, अपने आप ही उन्होंने मेरे हाथों को पकड़ के अपने बॉब्स को दबाने लागी. फिर मैंने चाची को एक साइड से लीटा दिया और एक पाँव को उठा के चोदने लगा, मस्त ऐसे १-०-१५ मिनट चोदने के बाद मुझे लगा की में अब झड़ने वाला हूँ. तो मैंने पोजीशन चेंज की और अपने आप पे कण्ट्रोल किया. और चाची को मिशनरी स्टाइल में लीटा दिया और फिर से लंड से चाची को चोदने लगा, मैंने इस बार बड़ी जोर से चाची को चोदना स्टार्ट किया और सररररर सरररर अपने लंड से चुत को पेल्ने लगा, अब तो मेरे हर स्ट्रोक पे चाची के मुँह से ‘आआआह’ ही निकल जाती थी. फिर मैंने उनके दोनों पैर को पकड़ा और दम लगा के चोदने लगा, चाची भी मेरे स्टैमिना को दाद दे रही हो ऐसे दर्द के मारे देख रही थी, फिर मैंने धीरे से एक हाथ चाची के जी-स्पॉट पे रक्खा और उसे हल्का सा प्रेशर दे के मसलने लगा तो चाची ने एक जोर से अंगडाई ली और फिर से झड गयी और में तो चोदता ही रहा, चाची का रस चुत में से बाहर नहीं आ पा रहा था मेरा लंड गीला हो गया था और चाची के चुत में छूटती पिचकारियां मेरे लंड को लग रही थी, फिर मैंने भी आँखें बंद की और मुझे लगा की में झड़ने वाला हु तो मैंने भी चाची के रस के साथ ही रस छोड़ दिया और फिर मेरे मुँह से रिलीफ की सांस निकली. चाची को भी अब चैन आ गया था. में उनके पास में लेटा की उन्होंने मुझे अपने पास खिंच लिया और अपनी बाँहों में भर लिया, मैंने भी अपना एक पाँव चाची की गांड पे रख दिया और चाची के क्लोज हो गया, चाची की साँसे अभी भी तेज़ थी, बॉब्स भी बड़ी तेज़ी से ऊपर निचे हो रहे थे, लेकिन धीरे धीरे वो नार्मल हो रही थी, उस रात मैंने चाची को और दो बार चोदा हमारा कार्यक्रम सबेरे पांच बजे तक चला चाची की हालत पतली हो गयी थी.पर उनको मजा भी बहुत आया. फिर नींद आ गयी. दूसरे दिन में लेट उठा छोटी चाची बाहर थी, में समझ गया की वो फ्रेश हो चुकी हे, में भी फ्रेश हो के बाहर आया, देखा तो शॉक्ड…..

 
मम्मी आ चुकी थी, वो दोनों चाचियों से बात कर रही थी.. मैंने उनसे पुछा तो उन्होंने कहा की पापा नहीं आ रहे, उन्हें कुछ काम हे. आज माँ बार बार मेरी और शर्म से देख रही थी, ऐसे पहले कभी मैंने नहीं देखा माँ को. सच में मुझे लगा की माँ ने घर जा के मेरे बारे में सोचा है..थोड़ी सी ख़ुशी हुई, पर लगा की माँ सामने से इशारा करे तभी कुछ करूंगा, वरना बेवजह के लफड़ो में नहीं पडना. फंक्शन कल था माँ कार ले के कल भी आ सकती थी, पर आज आ के वो भी जल्दी में तो सरप्राइज ही हो गया, फिर थोड़ी देर बात कर के सब ने लंच किया और फिर तीनो शॉपिंग करने के लिए चल दी..

इधर में डोर बंद कर के अपने रूम में आया ही था की फिर से डोर पे नॉक सुनाई दि, मुझे लगा की बड़ी चाची ही होगी, क्यूँकि वो अक्सर कुछ न कुछ भूल जाती हे. लेकिन मैंने डोर ओपन किया तो सामनेवाली आंटी थी और वो परेशान लग रही थी. दोपहर के टाइम पे तो वो कभी चाची से मिलने नहीं आती थी..

सॉरी आंटी..चाचि तो अभी अभी निकल गयी... मैंने शॉक से सँभलते हुये..ये बताया की घर में कोई नहीं हे..

हाँ मैंने देखा उनको जाते हुये, इसीलिए आई हूं..मुझे तुम्हसे काम हे...

“हाँ आइये ना..प्लीज अंदर आइये. मैंने उन्हें वेलकाम करना चाहा..पर उन्होंने कहा की अंदर आने का टाइम नहीं तुम मेरे साथ मेरे घर चलो.

मै शॉक हो गया, पहले में उनके घर जाने को बेताब था तब कभी कुछ नहीं कहा, और आज एक ड़ेढ़ महीने के बाद वो अचानक चाची की ग़ैरमौजूदगी में मिलने आती हे और कहती हे, की मुझसे पर्सनल काम हे, तो में तो सोचते सोचते पागल हो गया की आखिर क्या काम होगा. मैं उनके पीछे पीछे उनके घर पहुंचा, में उनके घर के गेट के अंदर आया की वो फिर से बाहर देखने गयी की कोई देख रहा हे की नही, फिर स्याटिसफाय होने के बाद वो वापस आई, में उनका डोर के पास वेट कर रहा था फिर उन्होंने अपना मेन डोर खोला और मुझे अंदर जाने को कहा, में अंदर गया..लकिन वो वहीँ पे रुक गयी तो मैंने पलट के उनकी और देखा..सवालिया नजर से.

“प्लीज ये टीवी ठीक कर दो... और मैंने अपने लेफ्ट साइड में टीवी की और देखा तो ओह बॉस रियली शॉकिंग था टीवी पे एक फकिंग सन पॉज हो गया था एक दो सेकंड के लिए तो मुझे विश्वास नहीं हुआ, लेकिन फिर मैंने होश में आते हुये, आंटी की और देखा तो वो अपने साड़ी के पल्लू को अपने दोनों हाथों से घुमाती हुई, निचे देख रही थी और फिर कहा

“ये डीवीडी अटक गयी हे, प्लीज कुछ करो ना”. मैंने आंटी को मस्त ऊपर से निचे देखा, वो शर्म से पाणी पाणी हो रही थी, फिर भी मस्त लग रही थी..बडे बॉब्स ब्लाउज में कैद थे पर साइड लुक से मस्त नज़र आ रहे थे, उनकी बेल्ली भी मस्त थी, फिर उन्होंने एक झलक उठा के मेरी और देखा और पाया की में उनका चक्षु-चोदन कर रहा हू, तो उन्होंने डिस्कम्फर्ट फील करते हुए, साइड में देखा, पर मैंने उन्हें देखना कंटिन्यू रक्खा और फिर वो बड़ी परेशान सी लगने लगी. और रहा नहीं गया तो फिर से मेरी और देखा तो मैंने फिर उन्हें स्माइल दिया और उनके डीवीडी प्लेयर की और गया और हल्का सा तीन चार बार जोर से ठोका और फिर रिमोट से ओपन किया तो डीवीडी ओपन हो गयी. जैसे ही डीवीडी बाहर आई, मैंने उसे निकाला और फिर आंटी को दिया, अब तक आंटी सोफ़े पे आ के बैठ चुकी थी, हाँ अभी भी मुझसे शर्मा रही थी. मैं उनके पास जा के बैठा और उनके पास डीवीडी रक्खी और कहा

“आंटी अगर, टीवी ऑफ कर के मुझे बुलाया होता, और कहा होता की डीवीडी प्लेयर में एक डीवीडी फंस गयी हे, तो शायद आप को इतनी शर्म नहीं होती.. जैसे ही आंटी ने मेरी बात सुनि और समझी, तो अपने हाथ को अपने सर पे दे मारी और में हंसने लगा, फिर आंटी भी हंस पडी.

“अरे.मैं इतना डर गयी थी, कुछ देर में तीन-चार सहेलियां आने वाली हे, तो में डर गयी थी, कहीं उन्होंने मूवी देखने की जिद्द की तो में तो मर ही जाऊंगी, फिर में तुम्हे बुलाने के लिए आयी और ऐसा टीवी ऑफ करने का ख्याल ही नहीं आया. .

फिर में उठ गया और मैंने मूड के एक बार उनकी और देखा तो वो मेरी ही और देख रही थी, और जैसे ही मैंने उन्हें देखा तो वो मुझे देख के मुस्कुरायी और फिर मैं भी मुस्कुराया मैंने कहा “आंटी अकेले देखने मे वह मजा नही आता जो किसीके साथ देखने मैं आता हैं,क्या हम साथ देखे” इतना कह के मैं आंटी की आंखों में देखता रहा.पहले तो आंटी चौक गयी हैरानी से मुझे देखती रही मैं भी अपनी हिम्मत पे दंग था पर अब जब बोल दिया तो जो होगा देखा जायेगा कुछ देर आंटी मुझे देखती रही फिर उनके चेहरे पर स्माइल आ गयी फिर शर्मा के उन्होंने अपना सर झुकाया और बोली “अभी नही मेरी सहेलियां आती होगी फिर कभी” अब चौक ने की मेरी बारी थी. मुझे अपने कानों पे यकीन नही हो रहा था. मैंने कहा “आप सच कह रही है आप मेरे साथ ब्लु फिल्म देखेगी? आंटी ने हा में गर्दन हिलाई और शर्मा कर पलट गई वॉव पीछे से आंटी क्या लग रही थी अब मेरे से रहा नही गया मैं आंटी को पीछे से लिपट गया आंटी के मुंह से सिसकी निकल गयी पर आंटी ने अपने आपको छुड़ाया नही फिर मैंने आंटी को अपनी तरफ पलटा दिया आंटी की आंखे बंद थी पर होठो पे मुस्कान थी उन्हें बुरा नही लगा था.मैंने आंटी को कसके गले लगाया था वॉव क्या मस्त अहसास था उनके बड़े बड़े बॉब्स मेरे सीने में धंस रहे थे आगे मैं कुछ करता उससे पहले आंटी ने मुझे पीछे धकेल कर दूर किया और कहा “अब जाओ मेरी सहेलियां आती होगी” फिर मैं भी वापस घर चला आया. मैंने सोचा अगर उनको मेरी जरूरत होगी तो खुद आयेगी.मछली चारा निगल गयी थी.अब जल्द ही मेरी बांहों में होगी मुझे यकीन था.पर कब?
 
फिर शाम को जब माँ और दोनों चाचियां लौटी तब में घर में पढाई कर रहा था और वो तीनो मेरा मज़ाक़ उडाने लगी..

“पढाकु…. पढ़ाकू”

कह के चिड़ाने लगी, तब फिर माँ मेरे पास आ के बैठ गयी और मेरे सर पे हाथ घुमा के मेरा पैक्स लेने लगी और दोनों चाचियों को डाँटने लगी. फिर बड़ी चाची अपने रूम में चलि गयी और माँ और छोटी चाची भी मेरे रूम में अपने अपने बैग्स उठा के चलि गयी. मैं समझ गया की अब ये लोग जा के अपने अपने रूम में चेंज करेंगे और नये कपडे ट्राय करेंगे तो में भी बस कुछ देर बाद अन्जान बन के अपने रूम में बिना नॉक किये आ गया, तब माँ बाथरूम में थी और चाची अपनी साड़ी खोल रही थी. चाची ने मेरी और देखा और मैंने चाची की और, चाची ने कोई ओब्जेक्शन नहीं किया, और में अपने कमरे में कुछ करने के बहाने चाची को देखने लगा..चाचि ने अपने ब्लाउज का एक बटन खोला, उनकी बैक मेरे सामने थी, बटन खोलते टाइम चाची के करव्ही बदन के मस्त कर्व्स दिख रहे थे..में अपने कपबोर्ड में कपडे अरेंज कर रहा था चाची फिर मेरी और घूम गयी और फिर एक एक कर के अपने ब्लाउज के सारे बटन खोलने लगी, और वो सारे हुक मेरे और देख के खोल रही थी. और मैंने चाची की इस अदा पे मरते हुए एक मस्त फ्लाइंग किस दी और चाची ने अपने लबोँ को दान्त से काटा और मेरे तो लंड में एक मस्त सा करंट दौड गया.

पर इतने में मेरी माँ बाथरूम से बाहर आ गयी और चाची निचे मुँह कर के ब्लाउज खोलने लगी, माँ को मुझे अल्मारी में कुछ ढूँढ़ते हुए देख कर, कुछ झिझक हुई उस, और वो थोड़ा सा चौंक भी गयी. वो फिर अपने आप को सम्हालते हुए मेरी चाची के पास गयी और मेरी चाची से कण में कह्

.अरे क्या कर रही हो चोटि..? रेशु के सामने ऐसे चेंज तो मत करो... माँ चाची को संझा रही थी.

.अरे दीदि, उसमे क्या हे? रेशु भी अब सब समझता हे, दीदी..क्या आप भी ना... और उन्होंने अपने दोनों हाथों से ब्लाउज को ऐसा कहते कहते उतार दिया..में तिरछी नजऱों से चाची को देख रहा ठ..ऐसे तो चाची को पूरा नुदे देखा हे, पर ऐसे देखने का मौका छोड़ू ऐसे में छोड़ू नहीं हू. माँ ने भी देखा की में चाची को सेक्स भरी नजऱों से तिरछी नजऱों से देख रहा हू. चाची को भी पता था

.छोटी तू समझ नहीं रही, वो ऐसे तुझे देख रहा हे.. माँ ने फिर एक बार कह.. तो चाची ने आराम से माँ के कन्धो पे अपने दोनों हाथ रक्खे और फिर माँ की आँखों में आँखें दाल के कहा.

"दीदि, रेशु बड़ा अच्छा लड़का हे, आप उसकी चिंता न करे, वो आपको शर्म आये ऐसा कोई काम नहीं करेंगा. बड़ा अच्छा बच्चा हे, और इसमें उसका दोष नही..उसकी उमर ही ऐसी हे..तो लड़का ऐसे छोटी छोटी हरक़तें करेगा ही.. .

और माँ के कन्धो पे रिलैक्स के मूड में मस्त थपथपाया..और फिर माँ आगे कुछ बोल नहीं पायी. वाह चाची मेरे लिए माँ की सेटिंग कर रही थी. फिर चाची माँ के साइड से होकर के मेरी और आयी, उनका कपड़ों का बैग मेरी अल्मारी के पास था तो वो मेरे पास आ के बैठ गयी और अपने बैग में शायद ब्लाउज ढूंढ रही थी. फिर उन्होंने एक ऑरेंज कलर का ब्लाउज निकाला और वहीँ पे खड़े हो के पहनने लगी. मैं तो चाची को ही देख रहा था.

माँ भी मुझे ऑब्सर्वे कर रही थी. बॉस क्या सीन था में अपने लेफ्ट साइड पे चाची को ब्लाउज पहनते हुये देख रहा था और राईट साइड पे माँ मुझे देख रही थी. फिर चाची ने ब्लाउज पहन लिया और मेरी माँ की और देख के कहा.

"दीदी..आपको चेंज नहीं करना...?

माँ को एक तो पहले से ही शर्म आ रही थी और जैसे ही चाची ने कहा तो माँ ने मेरी और देखा और में भी अपने नजऱों को माँ की और घुमाने से नहीं रोक पाया. फिर मुझे शर्म आ गयी और में बाहर निकल गया, पर रूम के बाहर जाते ही में उनकी बातें सुनने लगा. मेरे जाते ही माँ ने खूल के कहा.

"छोटी..प्लीज ऐसे रेशु के सामने चेंज नहीं करते...

चाची को भी पता था की माँ ये सवाल अब खूल के करेगी.

"अरे दीदि, आप इतना तो समझिये, वो बच्चा कितना अच्छा हे, जैसे ही आप को देखा की आप उसके सामने चेंज करने में अनकंफर्टबल हे तो वो खुद ब खुद ही बाहर चला गया ना.. तो प्लीज चिंता मत करिये, वो अब म्याचूर हो चुक्का हे, उसे पता हे क्या करना चाहिये और क्या नहीं..

माँ तो चाची को सुनते ही रह गयी, और मुझे चाची पे बड़ा प्यार आ रहा था. फिर चाची साड़ी पहनने लगी और माँ खड़ी खड़ी सोच रही थी.
 
मै अपना काम अपने आप बनते देख खुश था. फिर बाहर आया तो पता चला की चाचा सब को बाहर ट्रीट पे ले जाने वाले थे, हम फिर रेडी हो के एक होटल में पहुंचे तो दीदी भी वहा पे आई हुई थी, और मुझे देखते ही वो मुझसे सब के सामने गले मिली और फॉर्मल नही, सच में एक दम टाइट हग दिया.बॉस एक दो सेकंड के लिए वो भूल चुकी थी अपने आप को, और एक पल के लिए मैंने भी उसे अपने सीने से कस के समेट लिया..हालाँकि सब जानते थे की हम भाई बहन हे पर ऐसे ओपन में गले मिलना सच में ऑड लगता हे..मोम को भी ऐसे ऑड लगा..और वो कुछ परेशान सी लगी, शायद वो ये सोच रही थी की में कितना बदल गया हू, में बड़ी चाची से क्लोज हू..छोटि चाची से क्लोसनेस्स तो माँ ने ओपनली देखा और अब कोमल दीदी भी मुझसे बड़ा खुल के बीहेव कर रही थी, जो माँ ने कभी नहीं देखा था. तो उन पे असर तो होना ही था.हम होटल में पहुंचे, हमने आर्डर किया और तब तक माँ मेरी और बार बार देख के सोच रही थी..क्या सोच रही थी पता नही..पर मुझे लगा की वो अब काफी परेशान थी की में सब से खुल के बीहेव कर रहा था पर उनसे नहीं..डैम गुड मेरी तकनीक सफल हो रही थी, औरत सच में औरत ही होती हे.कोई भी हो अब वो मेरे बारे में सोच्ने पे मजबूर थी, और अपने आप को कोस रही थी की वो मुझसे इतनी ऊखड़ि उखड़ी क्यों बिहेव कर रही थी और में भी उनके सामने छोटी चाची और कोमल दीदी को छू छू कर, हंस हंस के बात कर रहा था

माँ मेरी सारी हरक़तें नोटिस कर रही थी, और चाचा भी..पर चाचा इसे माइंड नहीं कर रहे थे, पर माँ बड़ी इंटरेस्टेड थी. माँ को चिड़ाने में मज़ा आ रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था की माँ को लग रहा था की अगर वो मुझसे इतनी क्लोज होती तो कितना अच्छा होता.उन्हें ये सब फील हो रहा था खैर डिनर निपटा के हम सब घर पहुंचे..रात के १० बज रहे थे, सब थक चुके थे, तो किसीने ख़ास बात चीत नहीं की, फिर स्लीपिंग अरेंजमेंट , बड़ी चाची ने माँ से गेस्ट रूम में सोने को कहा पर माँ ने ये कहते हुए मना कर दिया की वो अकेली नहीं सोयेंगी, और ऊपर से गेस्ट रूम में बाथरूम भी नहीं है, तो मैंने माँ से कहा की ठीक हे माँ तो आप मेरे रूम में सो जाये, और माँ पे जैसे चमत्कार हो गया हो, वो झट से मान गयी और नाईट ड्रेस चेंज कर के मेरे रूम में आ गयी. पर इस से पहले में बेड पे दीवार के करीब जा के सो गया, और चाची भी झट से मेरे साथ में आ गयी. बेड काफी बड़ा था पर दो लोगो के लिये, तीन भी सो सकते है, पर थोड़ा सा एडजस्ट कर के. माँ रूम में आयी, तो बेड पे चाची मेरे और माँ के बीच में लेट गयी थी. फिर माँ भी साइड में लेट गयी, और में चाची की और खिसक गया..चाचि भी मेरी और मुँह कर के पल्टी और लाइट्स ऑफ कर दी. फिर चाची ने अपने पाँव को मेरे पाँव पे रक्खा और छेड़ने के तरीके से थोड़ा सा रगडा..तो मैंने भी उनके पाँव पे पाँव ही रख दिया, और अपना एक हाथ चाची की चुत पे रख दिया..चाचि ने मेरा हाथ हटा दिया, और सोने का नाटक करने लगी. पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, और न ही माँ को, क्यूँकि माँ पता नही, ये सब देख रही थी की नहीं पर हा, जाग जरूर रही थी. मैं फिर चाची की और थोड़ा सा और खिसक गया, और चाची के बॉब्स के करीब आ गया, चाची के बदन की खुश्बू मानो मुझे न्योता दे रही थी, पर वो आँखें बंद कर के सो रही थी, इधर मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मैंने हिम्मत कर के अपने आप को चाची के और करीब करते हुए चाची के लिप्स पे अपने लिप्स रख दिये..चाचि को पता था की में कोई न कोई हरकत करुँगा तो वो चौंकि नही,पर अपनी आँखें खोल दी और अपने हाथ को मेरे सीने पे रख के धक्का देणे लगी, पर में नहीं हटा, और लिप्स को मस्त सक कर रहा था अब तो चाची भी किस कर रही थी, और इधर मुझे ये भी फील हो रहा था की माँ शायद जाग रही हे, और सब देख रही हे, पर माँ ने उठ के देखा नही, इधर चाची भी मेरे लिप्स को चूस रही थी, तो उनका सर हिल रहा था और ये साफ़ इंडीकेशन था माँ के लिए की कुछ तो चल रहा था हमारे बीच, पर माँ अब भी नहीं उठी, और ऐसे मस्त चूसते चूसते मेरे से गलती हो गयी और मुँह से आवाज़ निकल गयी. ओह माँ. और जैसे ही आवाज़ निकलि की सट से माँ बैठ गयी और हमारी और देखने लगी, इतनी जल्दी मेरा चाची से दूर हटना भी जायज नहीं था तो में वहीँ पर लेटा रहा, फिर माँ ने लाइट्स जलायी, और मुझे और चाची को करीब करीब पाया, में आँखें बंद कर के सोने का नाटक कर रहा था पर मेरे पाँव चाची के पाँव के ऊपर थे, में चाची के तकिये में घूस चुका था ये सब माँ देखने लगी, पर कुछ कहा नही..और थोड़ी देर में वापस सो गयी.
 
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