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Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

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माँ ने पल्लू ठीक किया तब मुझे पता चला की माँ ने मेरी चोर नज़र को पकड़ लिया था फिर में माँ से नज़र नहीं मिला पाया. पर माँ के फेस पे फिर से नॉटी स्माइल आ गयी. पर मैंने फिर हिम्मत और शुरुआत करते हुए माँ के गाल पे अपने दोनों हाथ रक्खे और माँ के फेस को पकड़ के अपने लंड से चिपका दिया. माँ को पता नहीं था की में ऐसा करूंगा, पहले अपने आप ही उनकी और से थोड़ी सी झिझक हुई पर फिर माँ संभल गयी और वो भी मेरे पैंट से चिपक गयी.

मुझे भी पता नहीं कैसे मैंने माँ को अपने से लगा लिया. पर जैसे भी हुआ पर शुरुआत तो हुई. फिर माँ को मैंने छोड़ दिया और उन्हें अपने आप करने दिया. मम्मी भी ऐसे ही ऊपर से मेरे लंड को जगाने की कोशिश कर रही थी. फिर माँ ने मेरे पैंट की ज़िप खोली और दोनों साइड से पकड़ के निचे कर दि, फिर माँ ने ऐसे ही अंडरवेअर पर से मेरे लंड को पकड़ा और उसे ऐसे ही दो चार बार टटोला और उससे खेलने लगी. फिर माँ ने मेरी और देखा और कहा

"अच्छा लग रहा हे...?

"हा..मोम, बड़ा अच्छा लग रहा हे..!

"रेशु..पता नहीं में ये सब क्यों कर रही हू, सच में मेरी समझ में नहीं रहा ..?

माँ ने एक बार फिर से अपना कन्फ्यूजन दिखाई पर मेरे लंड को मसलना नहीं छोडा. मैंने इस बात पे कुछ कहा नहीं और फिर माँ भी निचे देख के अपने में मस्त हो गयी. मैंने माँ के शोल्डर पे हाथ रख दिया और ऐसे रक्खे के दोनों हाथों के अँगूठे माँ के क्लीवेज पे आ जाये और मैंने दबाव भी डाला अब मेरा लंड कड़क होने लगा था इसीलिए माँ ने मेरा अंडरवेअर भी धीरे धीरे उतार दिया और मेरे लंड को आज़ाद कर दिया. मेरा लंड अब माँ के सामने था..मोम ने उसपे मस्त प्यार से हाथ फेरा..और ऐसे एक दो बार हाथ फेर के सहलाया और फिर मेरी और एक बार देखा..फिर मैंने अपने लंड को पकड़ा और माँ के पास ले गया और माँ के होटो के आसपास लंड टच कर के घुमाने लगा..आँखोँ से लेकर, सर पे गालों पे, माँ अपने मुँह में लेने के लिए मेरे लंड का पीछा करती थी पर मैंने माँ को इतनी जल्दी लंड दिया नहीं और माँ ने फिर ट्राय करना बंद कर दिया , मेरा लंड अब ८०% जाग चुक्का था फिर माँ ऐसे बैठ गयी और मैंने फिर अपना लंड माँ के नाक के पास ले के माँ को सुँघाया और माँ ने भी मन भर के सूँघा और फिर धीरे से कब मेरे हाथ से लंड अपने हाथ में ले लिया पता ही नहीं चला..और में देखता ही रह..फिर माँ ने भी मेरी और मुस्कुरा के देखा और लंड को पकड़ के अपने नाक से ले के अपनी चिन और गले के पास भी घुमाय और में सोच रहा था की काश माँ इसे अपने बॉब्स तक जाये, पर माँ ने फिर उसे अपने मुँह में दाल दिया..और मस्त आगे पीछे हो के चूसने लगी, अब माँ मेरी और नहीं देख रही थी, अब वो मस्त थी और चाहती थी की में या कोई भी उन्हें डिस्टर्ब न करे,,धीरे धीरे माँ स्पीड में आगे पीछे हो के चूसने लागी और बीच बीच में अपनी जीभ पूरे लंड पे फेर लेती थी, एक दो बार मेरे बॉल्स को दबाया भी. माँ चूस तो मस्त रही थी पर पूरा मुँह में लंड नहीं ले रही थी. मेरा लंड तो अब कड़क हो के रॉड बन गया था,

कुछ देर ऐसे चूसने के बाद माँ मेरे लंड से वीर्य निकलने के लिए उसे मुँह से निकाल दिया और अपने हाथ से जोर से स्ट्रोक्स देणे लगी, तो मैंने कहा

"माँ एक मीनट...!

और माँ रुक गयी और मैंने फिर से अपने लंड को पकड़ के माँ के मुँह में डाला. माँ तो मुझे बस देख ही रही थी और फिर मैंने माँ के दोनों गालो को मस्त पकड़ा और अपने लंड से माँ के मुँह में धीरे से लंड अंदर बाहर कर रहा था एक दो बार माँ की तरह आधा लंड डाला. माँ मेरी और देख के मुस्कुरा रही थी, उन्हें मस्त लग रहा था फिर मैंने झटके से पूरा लंड माँ के मुँह में डाल दिया और माँ के सर को पकड़ के अपने लंड से चिपका दिया और माँ तो शॉक ही हो गयी, मैंने माँ को छोडा नही. माँ की चिन मेरे दोनों बॉल्स से चिपकी हुई थी. मैंने कुछ देर तक छोड़ा नहीं तो माँ ने जोर से मेरे गांड पे दोनों हाथों से मारा और मैंने माँ को छोड़ दिया. फिर माँ ने ग़ुस्से में मेरी और देखा और इतने में माँ का पल्लू फिर से सरक गया था और पूरा क्लीवेज दिख रहा था पर माँ को ग़ुस्से में ध्यान नहीं था पर मैंने फिर माँ को फिर से पकड़ा और अब इस बार मैंने माँ के मुँह में लंड डाल के चोदने लगा.
 
माँ को अच्छा नहीं लग रहा था पर फिर कुछ देर बाद माँ मॉनिंग करने लगी थी, अब उन्हें भी अच्छा लग रहा था और रेजिस्टेंस बंद हो गया था फिर मैंने माँ को पकड़ के अपनी स्पीड और भी बढा डी..और माँ तो हैरानी के मारे देख रही थी की में अभी झड़ क्यों नहीं रहा. कुछ देर बाद माँ को समझ आया की मेरी कैपेसिटी बहुत ही ज्यादा हे, तो वो भी अब साथ देणे लगी और देखने लगी की में कितनी देर तक चोद सकता हू. और में तो हरा सिग्नल पा के अपने पे कण्ट्रोल कर के माँ के मुँह को चोदने लगा. और अब माँ को नशा होने लगा था धीरे धीरे माँ के दोनों हाथ मेरे जाँघ से होते हुए मेरे गांड तक आ गए और धीरे धीरे मेरी गांड को सहलाने लगी और कुछ देर बाद मेरे गांड को धक्का लगा के माँ मेरे लंड को और भी अपने मुँह में लेने के लिए प्रयास कर रही थी. माँ को अब कुछ ध्यान नहीं था और वो मस्त होये जा रही थी. फिर मुझे लगा की अब में झड़नेवाला हूँ तो मैंने अपने स्ट्रोक्स और बढा दिया और कुछ देर बाद मैंने माँ के सर को पकड़ के फिर से माँ को अपना पूर लंड मुँह में दाल दिया और फिर ऐसे ही झड दिया..एक बार ऐसे झड़ने के बाद भी माँ ने कुछ रेजिस्टेंस नहीं दिखाया, तो में समझ गया की माँ पूरा रस पीना चाहती हे, पर मैंने फिर तुरंत अपने लंड को बाहर निकाला और माँ के मुँह पे रस बिखरने लगा, और फिर आखरी रस मैंने सोच समझ के माँ के ठीक क्लीवेज पे डाला और बॉब्स पे भी अपने रस को गिरा दिया.

मोम की आँखें तो कुछ पल के लिए बंद थी, पर फिर माँ उठी और फिर अपने आप को देखा और फिर मेरी और देखा, में अभी भी उनके सामने खड़ा था फिर माँ अपने आप को देखके कपडा ढूँढ़ने लगी थी, तो मैंने झट से माँ से कहा,

"माँ एक मिनट.. और साइड से नैपकिन उठा लिया..और माँ के चेहरे को साफ़ करने लगा, चेहरे पे कुछ ख़ास नहीं था फिर मैंने माँ के होठो पे कपडा घूमाते घूमाते निचे चिन के बाद मैंने माँ के गले से हो के माँ के सीने तक आ गया और उधर साफ़ करने लगा, पूरा माँ को सिड्यूस करने के लिए आराम से हाथ घुमा रहा था माँ मेरा बिहेवियर देख रही थी, और अभी भी उनकी साँसे तेज़ थी, तो उनके बॉब्स, बॉस मस्त ऊपर निचे हो रहे थे और मैंने फिर माँ से कहा

"माँ साँसे काफी बढ़ गयी नही...

मोम ने शर्मा के कुछ कहा नही..और मैंने इस टाइम पे माँ के क्लीवेज पे कपडा रक्खा और माँ के क्लीवेज में ब्लाउज के अंदर भी हाथ डाल दिया..हालाँकि अंदर तो वीर्य के जाने का सवाल नहीं था फिर मैंने धीरे से हाथ को बाहर निकाला और साइड में बॉब्स के ठीक ऊपर हाथ घुमा के सब साफ़ किया और फिर से एक बार माँ के ब्लाउज में अपनी दो ऊंगलियां डाली और जैसे ही साइड में बॉब्स पे हाथ ले जानेवाला था की माँ ने अपने हाथ से मेरे हाथ को रोक लिया और फिर उठ के बाथरूम में जाने लगी.

"अरे माँ कहीं कुछ रह तो नहीं गया..देखने तो दो...!

और माँ ने बाथरूमका दरवाजा बंद करते हुए कहा की

"में खुद देख लूंग़ी"

फिर वो बाथरूम से बाहर आई और अभी वो नार्मल थी, आ के बेड पे बैठी और मेरे साइड में लेट गयी और मेरी और देखा और फिर प्यार से मेरे सर पे हाथ फेरा और मेरे सर पे किस किया और मुस्कुरा के मेरे साइड में लेट गयी. कुछ भी कहा नही, पर आँखों में प्यार साफ़ दिख रहा था फिर माँ ने नाइटलैम्प ऑफ किया और सो गयी, फर मैंने भी माँ को रात में ज्यादा परेशान नहीं किया और सो गया.
 
कल वापस जाना था और में सच में बिलकुल खुश नहीं था सुबह में उठा तब माँ सो रही थी, में जल्दी उठा था अभी ६.३० बज रहे द. माँ के उठने के का टाइम तो हो गया था में माँ की और खिसका और माँ के गाल पे मस्त किस किया और माँ हल्का सा हीली..शयद वो उठ गयी थी, फिर मैंने दूसरे गाल पे किस किया और फिर माँ को देखते ही वहा पे बैठ गया और फिर माँ के लिप्स पे किस करने का मन किया..मैने दो बार सोचा पर माँ को मस्त सोता देख, और रेड रेड लिप्स को देख, और कुछ सोचा नही. फिर में माँ की और झुका और माँ के लिप्स पे अपने लिप्स से एक हलकी सी चुम्मी ले ली, जैसे क्याजुअली हम गाल पे करते हे ऐसे..और माँ उठ गयी, जैसे की मुझे शक़ था की माँ पहली बार में ही उठ चुकी थी. पर माँ ने कुछ कहा नहीं और ऐसे लेटे लेटे ही मेरे गाल पे हाथ फे फिराया और में माँ के सीने पे सर रख के लेट गया और माँ अपने हाथ से मेरे बाल सहलाने लगी, में माँ के बॉब्स को फील कर रहा था और माँ भी..फिर कुछ देर बाद मैंने माँ की और देखा और माँ के गाल पे फिर से किस किया और थैंक्स कहा और माँ भी बाद में मुस्कुराते हुए, बाथरूम में चलि गयी.

फिर हम नाश्ता करने बैठे और माँ का और मेरा मन खाने में बिलकुल नहीं था माँ को भी पता था की अभी में जानेवाला हूँ और मेरा भी मन माँ से अलग होने का नहीं हो रहा था ऐसे ही हमने बिना बात किये नाश्ता किया..कभी कभी हमारी नजरें मिल भी जाती तो नजरें चुरा लेते थे. फिर में अपने रूम में गया और अपने आप को समझाया की रेशु अभी जाना तो पडेगा. और फिर इतने में माँ भी मेरे रूम में मेरे कपडे ले के आई और अरेंज करने लगी. फिर मैंने नार्मल होते हुए कहा .ही मॉम... और माँ के पास जा के बैठ गया. मम्मी नार्मल नहीं थी, पर फिर मुझे ठीक देखते हुए माँ ने कहा

“रेशु..सच में चले जाओगे..?

“हा...मॉम जाना तो पड़ेगा ना...!

और जैसे ही मैंने कन्फर्म किया तो माँ के फेस पे एक अजीब सी हताशा दीखि और वो निचे मुँह कर के मेरे कपडे अरेंज करने में लग गयी.

“मॉम..कल के बारे में कुछ पुछू.?

मॉम ने मेरी और देखा और फिर शर्मा के अपनी लट को कान की पीछे करते हुए कहा,

“हाँ हा..पुछो? ना...!

“मॉम कल मैंने कुछ ज्यादा तो नहीं कर दिया था ना...?

में माँ के सामने से खिसक कर माँ के ठीक बगल में बैठ गया और माँ के कंधे पे अपना सर रख दिया..ये इसीलिए किया था क्यूँकि जब भी बच्चे ऐसा करते हे तो मम्मी के दिल में प्यार उमड आता हे..और माँ के साथ भी ऐसा ही हुआ..और उन्होंने कहा,

“हम्म..ठोड़ा सा ज्यादा था, पर इट वास् फाइन...!!

माँ ने आराम से अपना हाथ घुमाके मुझे अपने करीब करते हुए अपने बगल में ले लिया और अपना हाथ घुमा के मेरे नाक के करीब रक्खा, तो मैंने भी अपना मुँह माँ के बॉब्स पे रेस्ट करने दिया और हल्का सा प्रेशर भी दिया.

“मॉम आप नाराज़ तो नहीं हे ना...?

“थोड़ी सी हुई थी, पता नहीं तुम्हे कल क्या हो गया था जब तुम मेरे मुँह के साथ सेक्स कर रहे थे..सच में बड़ा गुस्सा आ गया था मुझे..पर....!!

“पर आपको भी अच्छा लग रहा था है ना माँ...?

माँ सेंटेंस नहीं पूरा कर पा रही थी तो मैंने सामने से पुछ लिया.

“हा...!

माँ ने टाइम लिया और फिर हाँ कहा.और वो भी मेरे गाल पे हलके से थप्पड़ लगाते हुए.

“मॉम पापा ऐसे करते हे क्या...?

“रेशु….तुम कुछ ज्यादा ही पुछ रहे हो….!!

माँ अपनी सेक्स लाइफ बारे में बात नहीं करना चाहती थी, क्यूँकि उनकी कोई सेक्स लाइफ थी ही नही. माँ का हाथ मेरे सर पे रुक गया. मैं समझ गया की माँ को परेशानी हो रही हे,ओर शायद गुस्सा भी आ सकता हे. तो मैंने कहा,

“मॉम तो में क्या करूँ..जब आप साथ में होती हो तो बस आपके बारे में ही ख्याल आते हे, कसम से आप है ही इतनी खूबसूरत,की कोई ना चाहते हुए भी आपके बारे में सोचेगा ही….!!!

“रेशु..प्लीज ऐसे मत बातें करो,ठीक नहीं लगता… ऐसे कोई माँ बेटा बात नहीं करता वैसे भी तुमने प्रॉमिस किया था की अब तुम कुछ ऐसा वैसा नहीं करोगे...!!
 
“आई ऍम सॉरी माँ..में..मैंने प्रॉमिस…!!

“ह्म्मम्...!!

“मॉम मुझसे प्रॉमिस टूट गया ...!!

“क्यूं..क्या हुआ….क्या किया तुम्हने...?

“मॉम.व..व.वो आअज सुबह मैंने आपके..लिप्स को छुआ था….!!

“व्हाट..?

माँ ने मुझे अपने सीने से हटाया और में उनके सामने बैठ गया. मैं अब कुछ बोलने की पोजीशन में नहि था माँ बस मेरी और शेरनी की तरह घूरे जा रही थी,उनके फेस पे गुस्सा साफ़ था फिर माँ ने अपने बाल बाँधते हुए, और पल्लू ठीक करते करते पुछा.

“बोलो तुमने ऐसा क्यों किया..?

“रेशु.प्लीज लिमिट क्रॉस मत करो की मुझे कुछ करना पडे….प्लीज तुम अपनी पढाई पे ध्यान दो…..!!

“मॉम आई एम सॉरी......!!

माँ ने मेरी बैग रेडी कर दी थी, और चैन बंद कर रही थी. माँ ने मेरी बात सुन के कुछ रियेक्ट नहीं किया,ओर मेरी समझ में नहीं आ रहा था की आगे क्या कहूँ.मेरे तो होश ही उड़ गये थे, में तो डर के मारे माँ की और देखे जा रहा था फिर माँ ने चैन बंद कर के मेरे सहमे चेहरे को देखा और फिर बैग उठा के बेड के निचे रख दी और फिर मेरी और देख क़र, मुस्कुरा के कहा

“अच्छा बाबा, अब डर मत…..मैं मज़ाक़ कर रही थी...!!

मैंने हेरान हो के माँ की और देखा और माँ ने फिर से कहा..

“अरे में तो नाटक कर रही थी... और माँ हंस पडी और मैंने ऐसे पहली बार माँ को खुल के हँसते देखा.

“तो माँ आप जानती थी..हम्म….!!

“हा...!!

और माँ ने हँसते हँसते हाँ कहा. और वो मेरा मज़ाक़ बना रही थी, और उनकी हँसी नहीं रूक रही थी,मेरा सहमा हुआ चेहरा देख के. और फिर थैंक्स टू माय ईविल माइंड..मेरे दिमाग में एक आईडिया आया और मैंने एक बच्चे की तरह अपना हाथ पछाडते हुए माँ पे गुस्सा करते माँ पे गिरा और माँ को पकड़ के बेड पे लिटा दिया..और माँ के ऊपर लेट के माँ को पकड़ लिया.

ओर माँ को जैसे ये भी पता हो ऐसे वो अब भी मेरी और देख के हंस रही थी, मैंने माँ के दोनों हाथों को पकड़ा और धीरे धीरे उन दोनों हाथों को माँ के सर के पीछे ले गया. माँ छुटने की कोशिश कर रही थी..पर में भी स्ट्रांग था माँ के बारे में तो लिखा ही नही…...माँ ने आज ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी और वो भी रेड एंड ब्लैक मैचिंग ब्लाउज के साथ और बॉस वो क्या लग रही थी…..

“रेशु.. छोडो मुझे.....!!

“नही..माँ, पहले सॉरी कहो….!!

मैंने माँ के चेहरे के ठीक सामने अपना फेस लाते हुए कहा जैसे की में उनका रेप करने वाला हू, माँ अगर इतनी प्यारी ना होती तो शायद में रेप भी कर देता….

माँ फिर हँसी और मेरी और एकदम स्ट्रांग बनते हुए देखा और कहा…

“वैसे कुछ भी खो..तुम हो तो बड़े सीधे, क्यूँकि अपने आप जो क़बूल कर लिया... माँ ने अपनी कमर हिला के खिसक ने की कोशिश की, पर मेरा पेट् माँ के पेट् से सटा हुआ था और मैंने दोनों पाँव से माँ के दोनों पाँव पे कब्ज़ा करके रक्खा था माँ के बॉब्स भी मेरे सीने को फील हो रहे थे.

“मॉम में तो सीधा ही हू, जो मन की बातें तो कह देता हू, पर कुछ लोग अपने मन की मन में ही रखते हे..और चाहते हे की सामनेवाला खुद समझ जाए…..!!

मैंने डबल मीनिंग में माँ से कह दिया की मुझे पता हे माँ आपको सेक्स की जरूरत हे और में आपके सामने ही हू. माँ को समझ तो जाना था की मैंने क्या कहा, और वो समझ भी गयी. जैसे ही मैंने कहा माँ एकदम से सन्न रह गयी और उन्होंने मेरी आँखों में देखा और अब उन्हें शर्म आ गयी, बाकि अब तक एकदम झाँसी की रानी की तरह मेरे सामने लड़ रही थी, पर अब वो शांत हो गयी और छूटने की ट्राय करना भी छोड़ दिया.

“रेशु..प्लीज छोडो मुझे.. आई एम सॉरी….!! अब तो माँ ने सॉरी कह दिया और प्लीज भी. अब तो छोड़ना बनता ही था पर मुझे लगा की माँ को छोडना ठीक नही, तो मैंने कहा.

“मॉम एक बार फिर लिप्स को छुने दो ना..प्लीज….!

“नही..रेशु, तुम प्लीज मुझे छोडो, तुम्हारा दिमाग घूम गया लगता है, मुझे छोडो अब तो मैंने सॉरी भी कह दिया….!!

माँ ने टेंशन में आते कहा. माँ के चेहरे पे हल्का सा पसीना आ गया था तो मैंने मस्त एक ठण्डी सी फ़ूंक मारी माँ के चेहरे पे और फिर कहा..

“मॉम प्लीज तो में भी कह रहा हू, और सॉरी भी बाद में कह दूंगा….!!
 
और माँ मेरी हाजिरजवाबी देख के माँ के चेहरे पे मुस्कराहट आ गयी और मैंने भी माँ को स्माइल दी. फिर में माँ के लिप्स की और झुका और माँ बेचैन सी हो गयी और अपना फेस टर्न कर लिया, तो में समझ गया की माँ रेडी नहीं हे, तो मैं रूक गया.

“मॉम प्लीज..एक बर, बस छू के वापस ले लूंगा...

“नही..रेरर...!!

मैंने माँ को बोलने से पहले ही कहा…

“मॉम प्लीज..आपको भी अच्छा लगेगा....! और माँ ने मेरी और टर्न किया और मेरी और देखने लगी. माँ ने कुछ कहा नही, पर मैंने माँ की आँखों में देखते देखते आगे फिर से झुका और किस करने ही जा रहा था की माँ ने कहा…

“रेशु तुम बस छुओगे, और कुछ करोगे तो नही...?

“नहीं मॉम...!

ओर मैंने फिर माँ के हाथ छोड़ दिए और अपने दोनों हाथों से माँ के गाल को पकड़ा और माँ के लिप्स पे अपने लिप्स रख दिए..और बस ऐसे ही लिप्स रख के लेटा रहा..और माँ की और देखा, माँ की आँखें बंद थी और फिर मैंने माँ के लिप्स को चूसना स्टार्ट किया..मुझे लगा की माँ आँखें बंद कर के मुझे रोकेगी, पर माँ ने ना ही कुछ रियेक्ट किया और न ही अपनी आँखें खोली..और में अपने लिप्स से माँ के लिप्स चूसने लगा. फिर मैंने माँ के लिप्स को चूसते हुए माँ के मुँह में अपनी जीभ देणे की ट्राय करने लगा, तो माँ ने मुँह तो पहले नहीं खोला..लेकिन फिर उनसे रहा नहीं गया तो उन्होंने भी अपना मुँह खोल के मेरी जीभ को अपने मुँह में ले लिया और अब तो वो भी रिस्पॉन्ड करने लगी, और मेरे लबो को चूसने लगी. माँ के हाथ अब मेरे सर पे और मेरे बैक पे घुमने लगे. फिर मैंने माँ के पीछे बैक पे अपना हाथ डाला और फिर माँ को पकड़ के पलटा लिया और फिर में निचे और माँ को अपने ऊपर ले लिया और अपने से माँ को कस के जकड लिया.. और दोनों पाँव को उठा के माँ की गांड के पास कैची लगा के माँ की गांड को मेरे लंड से जाम कर दिया. और अब तो माँ भी मस्ती में आ गयी थी, और ये यूजुअल हे..अगर किसी भी औरत को आप अपने सीने पे रख के उसे एक मौका दोगे तो वो जरूर मस्ती में आ जायेगी..क्यूँकि ज्यादातर मर्द औरत को ये चांस नहीं देते.

माँ की अब शायद सांस टूट रही थी, पर वो फिर भी मेरी जीभ से अपने जीभ को मिला रही थी और मेरे सलीवा को चूस रही थी, मैंने भी माँ की जीभ को पकड़ के मस्त चूसा और माँ भी और मेरे मुँह में अपनी जीभ देणे लगी. फिर माँ ने अचानक ही अपना मुँह उठा के एक गहरी सांस ली और मुँह ऊपर कर के आँख बंद करके सांस लेने लगी. माँ का क्लीवेज दिख रहा था अब मुझे लगा की माँ मस्त किस कर चुकी हे, अभी वो शायद नहीं करेगि..तो जैसे ही माँ ने मस्त गहरी सांस ली, माँ मस्त ऊपर की और हो के आँखें बंद कर के साँस ले रही थी और जैसे ही माँ ने आराम से सांस ली तो मैंने अपना हाथ माँ के गर्दन पे रख के माँ को पकड़ा और माँ को फिर से निचे करते हुए, फिर से माँ के लिप्स को पकड़ लिया और फिर माँ को पलटा के माँ को निचे कर दिया और में ऊपर हो गया. माँ अभी कुछ नहीं कह रही थी, पर मुझे लगा की माँ बाद में कुछ न कुछ तो जरूर कहेंगी, पर मैंने अभी उसके बारे में सोचना छोड़ के माँ को किस करने में लग गया..और अभी मैंने दोनों हाथ माँ के आर्मपिट के पास रक्खे थे..तो दोनों हाथ माँ के बॉब्स को टच कर रहे थे. माँ को भी पता था..और उन्होंने मुझे रोकने के लिये..उन्होंने भी अपने हाथ मेरे हाथ पे रक्खे थे. मैंने मस्त माँ के लिप्स को किस किया..और फिर मैंने माँ को छोड़ा पर माँ के ही सीने पे अपना सर रख के सोया रहा. और माँ भी मेरे सर को सहलाती रही. कुछ पल में और माँ ऐसे ही लेते रहै..में माँ की तेज़ चलति साँसों की वजह से उनके बॉब्स का उभार देख रहा था..और माँ भी शायद कुछ ज्यादा ही अपने बॉब्स को ऊपरनीचे कर रही थी. मेरे हाथ माँ के कमर के दोनों साइड थे. फिर मैंने माँ से कहा और कहते कहते ही मैंने माँ के बॉब्स की और सरक गया.

“थैंक्स..मॉम…..!

“रेशु..तुम ऐसे अपनी माँ से कब तक गलत काम करवाते रहोगे..में जितना तुम्हे रोकने की समझाने की कोशिश करती…… और मैंने माँ की और देखते हुए..उनके लिप्स पे अपनी मिडल फिंगर रख दी और ऊपर फिर से माँ के लिप्स की और खिसका..जिससे मेरा हाथ माँ के बॉब्स पे आ गया. माँ मेरी और देखति ही रही..

“मॉम यु हैव ब्यूटीफुल एंड जूसी लिप्स....मॉम मज़ा आ गया… प्लीज मॉम कुछ और के बारे में मत सोचिये. आप को जो अच्छा लगे वो कीजिये. आप बहुत अच्छी मॉम हो....!!

अब माँ कुछ भी बोल नहीं सकती थी..वो बस मेरी और देखति रही..शयद ये ऐसा पल था की अगर मैंने तब माँ के दोनों बॉब्स को दोनों हाथों में पकड़ के निचोड भी दिया होता तो माँ कुछ न कहती..और वो एन्जॉय भी करती और उन्हें अच्छा भी लगता. पर में ये सोच रहा था की माँ शुरुआत करे..तो में आगे कुछ करूँ, पर माँ तो मानो कुछ सोचने में खो चुकी थी. फिर माँ की नींद उड़ी और उनके चेहरे पे एक सटिस्फैक्शन के साथ एक मस्त मुस्कान आई और उन्होंने अपने दोनों हाथ उठाये और मुझे अपनी बाँहों में ले ही लिया था की इतने में घर की घण्टी बज गयी.

डैम इट साला इस टाइम पे कोन आगया? माँ डर के मारे उठी और अपने आप को ठीक करने लगी और में माँ को देखता रहा. माँ ने मुझे फिर दरवाजा खोलने को कहा, मैंने देखा तो माँ की नेबर सहेली आई थी और अब में समझ गया की माँ अब फ्री नहीं होगी. फिर कुछ देर बाद मैं भी बाई कह के निकल गया….

में जा रहा था और माँ सच में मुझे रोकना चाहती थी, पर पता नहीं वो कह नहीं पायी और में उनके कहने का इंतज़ार कर रहा था.
 
मैं ४ घंटे के बाद में जब अहमदाबाद पहुंचा तो १० बज रहे थे, और चाचा और चाची दोनों मेरा ही वेट कर रहे थे. मैं फ्रेश हो के आया बाद में हम खाना खाने बैठे और मैंने नोटिस किया की चाची मुझसे बात नहीं कर रही, तो मैंने क्याजुअली पूछ लिया.

"क्या बात हे चाची..कुछ टेंशन में हो...?

मैंने ऐसे ही नॉर्मली पुछा.

"टेंशन में नहीं ग़ुस्से मे..."

चाचा ने चाची के मूड के बारे में बताया.

"अरे बाप रे..तब तो कोई मरने वाला है..कोन मरनेवाला हे चाची...?

"तुम्... "

चाचा ने चाची की बजाय फिर से जवाब दिया और मैंने चाची की और देखा तो वो सच में ग़ुस्से में थी. मैं एक ही सेकंड में समझ गया की शायद वो सेक्स के वजह से ही ग़ुस्से में है, तक़रीबन ३ महीने हो गये थे..

"रेशु, तुम भी बड़े अजीब हो, यहाँ होते हो तो बड़ी चाची का पल्लू नहीं छोड़ते, और कहीं बाहर जाते हो तो याद भी नहीं करता ४-४ दिन तक कोई कॉल नही..कोइ रिप्लाई भी नही.. खैर"

फिर चाचा ने बात को हँसी में उड़ा दिया और हमने डिनर निपटाया.

चाचा अपने रूम में चले गये..और चाची किचन में बर्तन धो रही थी. मैं किचन में गया और चाची को पता चल गया की पीछे में आया हू..एक सेकंड के लिए उनके हाथ बर्तन धोते धोते रुक गयी..और हलकी सी आँखें पीछे करके उन्होंने मेरी और देखा, और फिर अपने काम पे कंसन्ट्रेट करने लगी. मैं भी चाची के पास गया और कुछ कहा नही..और चाची जो प्लेट ढो रही थी, उसमे चाची का हाथ बटाने लगा..चाचि के हाथ को मेरा हाथ लगा की चाची का हाथ को मानो करंट लगा हो ऐसे वो फिर से एक बार प्लेट साफ़ करते करते रूक गयी और मेरी और देखा, मैंने भी चाची की और देखा और एक मस्त स्माइल दिया. चाची ने कोई रिप्लाई नहीं किया और नजरें निचे कर के अपना काम करने लागी. मैं भी बिना कुछ कहें उनकी मदद कर रहा था.कम से कम १५ मिनट हमने साथ साथ में बर्तन को साफ़ किया और कई बार चाची के हाथ को मैंने छुआ और कई बार चाची ने अपने बालों को सवारने के बहाने से मेरी और देखा..मैने हर बार मुस्कुराके वेलकम किया और वो नाराज़ होने का नाटक करने में लगी रही. वो १५ मिनट सच में अच्छा लगा. चाची को था की में उन्हें कोई सेक्सुअली हरकत कर के मनाऊँगा..और शायद मेरे ऐसा करने से वो मान भी जाती..पर में कुछ अलग करना चाहता था और चाची के बिहेवियर से लग रहा था की उन्हें भी ऐसे रूठने में मज़ा आ रहा था फिर बर्तन ख़त्म कर के में अपने कमरे में चला गया, और जाते जाते चाची की और देखा तो चाची मेरी ही और देख रही थी, और फिर मेरे देखते ही आँखें चुरा के अपना काम करने लगी, और में भी चाची के बचपने पे हँसते हुए अपने कमरे में चला गया..अभी में अपने कमरे में पहुंचा ही था की चाची ५ मिनट में मेरे रूम में आई और मेरे रूम में पाणी रख के चुपचाप चलि गयी. फिर नेक्स्ट डे में चाचा के जाने के बाद रूम से बाहर आया और किचन में देखा तो चाची लंच के लिए प्रेपर कर रही थी, में कुछ देर ऐसे ही चाची को देखता रहा फिर चाची किचन से बाहर आ रही थी की में चांस देख के किचन में इंटर हुआ और जानबूझ के जोर से चाची से टकरा गया. चाची सच में शॉक हो गयी और उनका चेहरा देखने वाला था और मैंने चाची को संभाल लिया, जैसे की वो गिरनेवाली हो..हालाँकि वो इम्बैलेंस बिल्कुल नहीं हुई थी, वो बस शॉक हो गयी थी, पर मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़ा और अपने बाँहों में ले लिया. और चाची ने भी बिल्कुल छूटने का ट्राय नहीं किया. चाची ने भी मुझे पकड़ रक्खा था मैंने चाची की और देखा और कहा

"सॉरी..चाचि...?

"सॉरी किस के लिए बोल रहे हो..."

चाची ने सोच के मस्त अंदाज़ में पूछ, वो ये कहना चाह रही थी की अभी टकराने के लिए में सॉरी बोल रहा हूँ की उन्हें नाराज़ करने की वजह से में सॉरी बोल रहा हू, मैं चाची को समझने की कोशिश कर रहा था की चाची मेरी नासमझ पे मुस्कुरा पडी. मैंने चाची की बात समझने के बाद कहा..
 
"तीन महीनो के इंतज़ार के लिये... !

चाची ने भी मेरे पॉइंट को समझ लिया की मैंने उनके नहले पे दहला मारा है. चाची ने फिर ठीक होते हुये मेरे हाथ से छूट के रूम से बाहर अपने रूम में जाने लगी.

"चाची....!

मैंने चाची को पुकारा और चाची मेरे पुकरते ही समझ गयी की में उनसे बात खींचना चाहता हूँ तो उन्होंने सामने से कहा

"रेशु..प्लीज, मुझे अभी एक फंक्शन में जाना हे... !

और बिना कुछ कहें वो अपने रूम में चलि गयी रेडी होने के लिए और रूम को लॉक भी कर दिया. मैं चाची का वेट करते बाहर बैठा और २०-२५ मिनट में चाची आई और मानो की जल्दी में हो ऐसे चाची बाहर आई और जाते जाते जल्दी जल्दी में कहा

"रेशु..प्लीज अब पढाई पे कंसन्ट्रेटे करो, और बेटा अब आगे से दूसरी चीजो के बारे में सोचना बंद कर के करियर पे ध्यान दो, ठीक हे, कोई हेल्प चाहिए तो में हू..ठिक है बाय..."

चाची बहुत फॉर्मल हो रही थी, और इंनडायरेक्टली मेसेज भी दे रही थी की में अब उनसे सेक्स के बारे में आगे मत सोचू, और में बस ध्यान से एक ही पोज़ में चाची को सुनता रह..और वो चली गयी.

मै चाची के जाने के बाद उनके बिहेवियर के बारे में सोच रहा था और मुझे लगा की वो कुछ ज्यादा कर रही थी, ठीक है तीन महीने हो गए पर मैंने जानबूझ के तो नहीं वेट करवाया था फिर मैंने चाची के आने का वेट किया और मुझे लगा की चाची चाहती हे की में उनसे सॉरी के साथ रिक्वेस्ट भी करू..तो मैंने वो भी ठीक समझा और उसके अकोर्डिंग प्लान किया. ३ बजे चाची की कार आई और में उनके रूम में चला गया और चाची अपने रूम में आई और वो थोड़ी सी थक गयी थी तो एक्सहोस्ट हो गयी हो ऐसे बेड पे आते ही लेट गयी, दोनों हाथ खुले थे..मस्त लग रही थी, बॉस चाची ने साड़ी में ब्लैक ग्रीनिश साड़ी पहनी थी, और ग्रीन ब्लाउज था फिर में अल्मारी के पीछे से बाहर निकला और सीधा चाची के ऊपर जम्प कर के चाची पे चढ गया. चाची एक दम से चौंक पडी और फिर मुझे देखते ही फिर से ग़ुस्से में आ गयी और उन्होंने सँभालने में वक़्त लगाया, पर फिर कुछ देर बाद चाची ठीक हुई और चाची ने मेरी और देखा और में तो बस बिना कुछ कहें चाची को देख ही रहा था मैंने अपने लेफ्ट हैंड से चाची के चेहरे पर से बाल हटाये और चाची की आँखों में आँखें डाल के कहा

"चाची प्लीज ऐसे तो मत नाराज़ होइये की मुझे आपको सॉरी कहना पडे.आप मुझे समझती हे, में आपको. तो क्या फिर मुझे आपको सॉरी कहने की जरूरत है...? बस यही कहना था और चाची से अब रहा नहीं गया और उन्होंने अपने दोनों हाथों से मुझे अपनी बाँहों में थाम लिया और मुझे ले के पलट के मेरे ऊपर आ गयी और

"सॉरी रेशु..एक्चुअली रेशु, रूठने के नाटक में पता नहीं कैसे में बहुत ज्यादा कर गयी, आई आल्सो डोंट नो.. !

ओर फिर मैंने चाची के लिप्स को अपने लिप्स में मस्ती से कैद कर दिया. और चाची भी मस्ती में आ के मेरे लिप्स को चूसने लगी..इस बार चाची ने पहल की और अपनी जीभ मेरे मुँह में देणे लगी, मैंने चाची की और देखा और अपनी जीभ से चाची की जीभ को मिला के दोनों को एक कर दिया..और क्या मज़ा आ रहा था,चूसने मे,

सच में बोसस, गॉड का अगर बेस्ट क्रिएशन है तो वो है सेक्स,इस दुनिया में सिवाय सेक्स के ऐसी कोई चीज़ नही, जिसमे इंसान अपना माइंड कंसन्ट्रेट कर सके, बस एक सेक्स ही है, की जिस टाइम वो सेक्स करता है तो वो रियल में सेक्स ही करता हे..बाकि ऐसा और कोई काम नहीं जिसके टाइम उसे और कुछ याद ना आये,खैर चलो ये फलसफा स्टोरी नही..आगे लिखता हू,

फिर कुछ देर बाद चाची की सांस थमने लगी, फिरभी वो किस का मज़ा नहीं छोड़ रही थी तो मैंने किस ब्रेक किया और चाची के चेहरे को चूमने लगा..और फिर अचानक मेरे दिमाग में एक आईडिया आया तो मैंने चाची के कान के पास किस करते करते चाची के कान को मस्त चूमने लगा..और चाची को अजीब सीडक्शन होने लगा तो वो अपने आप को रोक नहीं पायी और लेफ्ट साइड में हो गयी और कहा ..और करो मज़ा आ रहा हे..और फिर मैंने ऐसे ही थोड़ी देर चूमने के बाद मैंने अपना हाथ चाची के पेट् से हटा के चाची के दोनों बॉब्स के बीच में रख दिया और चाची के हुक को पकड़ लिया. इधर जैसे ही मैंने चाची के हुक को पकड़ा तो चाची ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मेरे हाथ को हटा के उठ गयी, और अपने गिरे पल्लू को उठा कर ठीक से कंधे पे लाते हुये कहा..

"रेशु..अब मुझे ये सब नहीं करना...!
 
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मैंने अपना हाथ चाची के पेट् से हटा के चाची के दोनों बॉब्स के बीच में रख दिया और चाची के हुक को पकड़ लिया. इधर जैसे ही मैंने चाची के हुक को पकड़ा तो चाची ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मेरे हाथ को हटा के उठ गयी, और अपने गिरे पल्लू को उठा कर ठीक से कंधे पे लाते हुये कहा..

"रेशु..अब मुझे ये सब नहीं करना...!

और फिर एक नॉटी स्माइल दि, पहले तो में समझा नही, पर फिर जब स्माइल दी तब समझा की चाची चाहती है की सेक्स हो पर उनकी मरजी के साथ नही..में समझ गया, अब में झट से उठा और चाची रूम से बाहर जा ही रही थी की मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और वो छूटने का ट्राय कर रही थी, पर मैंने उन्हें पकड़ के दीवार से चिपका दिया और खुद भी उनसे चिपक गया और चाची के दोनों हाथो को भी पकड़ लिया और ऐसे ही पीछे से चाची को पकड़ के दबा के रखा. फिर में रफली चाची को गर्दन के पास, कंधे पे किस करने लगा, और फिर चाची के हाथों को छोड़ के मैंने चाची की गांड पे अपने दोनों हाथ टीका दिए और जोर से चाची की गांड को दोनों हाथों से पकड़ के दबा दिया..चाचि के मुँह से सच में जोर से आह निकली..मैने अपने दोनों हाथों से उनके दोनों गांड चिक्स को फैला के रक्खा था फिर मैंने उन्हें छोड़ा और चाची के नैवेल के पास से उनकी साड़ी को निकाला और चाची के कंधे पर से भी हटा के साड़ी को निकाल फ़ेंका..और फिर चाची के दोनों बॉब्स को अपने हाथ में ले लिया और उसे दबाने लगा..

"रेशु,प्लीज डोंट डु धीस..मुझे अच्छा नहीं लग रहा...!

पर फिर भी मैंने उनके बॉब्स को नहीं छोडा, में समझ गया था की चाची बस बोलने के लिए बोल रही है, क्यूँकि मैंने उनके हाथ तो कब के छोड़ रक्खे थे, पर उन्होंने छूटने का ट्राय नहीं किया था तो मैंने चाची के बॉब्स को दबाना और जोर जोर से ग्रोपिंग चालू रक्खा और बीच बीच में में चाची को चूम भी लेता और चाची के गांड से अपना लंड टीका के खड़ा था फिर मैंने चाची के निप्पल्स को पकड़ा और दोनों हाथों में पकड़ के उसे हल्का सा प्रेशर दिया और दोनों निप्पल्स को टटोलने लगा..हाय निप्पल्स पे ऊंगलियां घुमाने में सच में अच्छा लग रहा था और फिर बस दो तीन बार ऐसा करने से तो उनमे सख्ति आ गयी थी. वो अब सख्त बन रहे थे, और चाची के फेस के एक्सप्रेशंस भी बदल रहे थे, मैंने फिर चाची के निप्पल्स को छोड़ा और ब्लाउज के हुक को पकड़ के खोलने लगा और इस बार चाची ने कोई ओब्जेक्शन नहीं किया..एक एक करके मैंने चाची के ब्लाउज के सारे हुक ओपन कर दिये और चाची का ब्लाउज उतार दिया और फिर चाची के पेटीकोट को भी उतार दिया और अब चाची मेरे सामने ब्रा और पेन्टी में थी.

फिर मैंने चाची का हाथ पकड़ा और चाची के हाथ को पकड़ के उनके हाथ से मेरे पैंट की चैन खोली और चाची का हाथ मेरे पैंट में डाल दिया और चाची के हाथ से मेरे लंड को सहलाने लगा, मेरा लंड सॉलिड तो हो चुक्का था पर चाची को ऐसे मज़ा आ रहा था फिर कुछ देर ऐसे खेलने के बाद मैंने अपनी पैंट खोल दि और उतार दिया..अपनी टी-शर्ट भी निकल दि, अब चाची मेरी और घूमि और निचे बैठ गयी..जब कोई नाटक नहीं कर रही थी और वो निचे बैठी और मेरे लंड से खेलने लगी, मेरा लंड इतना सॉलिड हो चुका था की उसका टिप बाहर आ गया था,फिर चाची ने मेरा अंडरवेअर बड़े प्यार से निचे किया और तुरंत उसे पकड़ लिया, वो सच में बड़ी प्यासी थी, उन्होंने मेरे अंडरवेअर को पूरा निकालने की भी फुर्सत नहीं दिखाई और सीधे ही मेरे लंड पे टूट पडी.

एक हाथ से मेरे लंड को ऊपर निचे करने लगी और दुसरे हाथ से मेरे दोनों बॉल्स से खेलने लगी और थोड़ा टाइम ऐसे खेलने के बाद उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और मस्त चूसने लगी, आह कितना हसीन लग रहा था चाची मेरे निचे बैठी मेरे लंड को इतना डीस्परेटली चूस रही होगी, सच में मैंने कभी ऐसे सोचा नहीं था और किसी ने सही कहा हे..
 
लाइफ का हर ब्यूटीफुल पल आप प्लान नहीं कर सकते, और ये सब बिलकुल मैंने प्लान नहीं किया था, दो साल पहले में बस चाची को फेंटेसी करता था और उनके बारे में सोच सोच के मूठ मारता था और आज ये हाल हे की शायद ३ महीने से चाची मेरे नाम से मूठ मारती होगी, शायद नहीं मुझे पक्का यकीन है, मेरे दिमाग में ये सब चल रहा था और चाची लंड चूसने में मस्त थी, मेरे बिना कुछ जोर करे पूरा लंड अपने मुँह में ले लेती थी और बाहर लाती थी, मैं आराम से खड़ा था मुझे भी नशा चढ रहा था तो मैंने फिर चाची को कन्धो से पकड़ा और खड़ा किया और पकड़ के बेड पे उलटा गिरा दिया और ब्रा खोल दी..और साथ साथ में मैंने चाची की पेन्टी भी उतार दि, और अब चाची फुल नुड थी. मैं उनपे लेट गया और चाची से कहा .अब जितना उछलना हे उछलो.. और चाची कुछ नहीं बोलि, बस लेटी रही और में ऐसे ही आराम से चाची के ऊपर लेटे लेटे स्टोक करने लगा..अच्छा लग रहा था मैंने ऐसे लेटे लेटे पहले किसीको नहीं चोदा था पर अभी अच्छा लग रहा था और चाची को भी दर्द कम हो रहा था पर मज़ा आ रहा था उनके मुँह से मॉनिंग स्टार्ट हो गयी थी, कभी दायें तो कभी बाएं अपना सर घुमाति थी..में उनकी बैक को चूम रहा था फिर मैंने अपने हाथो से चाची के बॉब्स को पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगा..चाचि के बॉब्स को बॉल की तरह दबा रहा था.फिर मैंने चाची की निप्पल को पकड़ा और उसे पिंच करने लगा और चाची की मॉनिंग और बढ गयी.....

"ऊऊओह्ह.आमममहह..ररररेशु,प्लीज,कक्ककुछकरो"

फिर भी मैंने चाची की निप्पल को नहीं छोड़ा और चाची की निप्पल को और भी दबा दिया.अब चाची से रहा नहीं गया तो वो ऊपर निचे हो ने लगी, फिर मैंने चाची को पकड़ा और ऊपर उठा के मैंने चाची के लिप्स को पकड़ लिया और उन्हें चूसने लगा..ईधर बॉब्स दबाने में मेरी स्पीड कम हो गयी थी तो मैंने अपनी चोदने की स्पीड भी अचानक बढा दी, अब तो चाची की किस में भी मॉनिंग होने लगी थी. और जोर से स्ट्रोक लेने पे किस कभी कभी ब्रोके हो जाया करती थी, पर चाची ने अपने आप को निचे नहीं किया..वो किस का मज़ा लेती रही..फर ऐसे कुछ देर मस्त जोर शोर से चोदने के बाद मेरे समझ में आ गया की चाची अब कुछ भी अपोज करने की सिचुएशन में नहीं हे..तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और चाची को पलटने को कहा..और चाची एकदम आज्ञाकारी स्टूडेंट की तरह सीधी हो गयी और मैंने फिर चाची को अपनी बाँहों में भरते हुए चाची को किस किया..और फिर से कुछ देर लिप्स से खेल्ने के बाद मैंने चाची के बॉब्स को मस्त पकड़ा और चाची के बॉब्स को चूसने लगा..बहोत दिनों के बाद चाची के बॉब्स को चूस रहा था.आ है दबा के मुँह में लेना और फिर मुँह में ही जीभ से चाची की निप्पल्स से खेलना..चाचि भी मदहोश हो रही थी, मेरे सर के बालों को सहला रही थी..और कभी कभी मेरे बालों को छोड़ के अपने दोनों हाथ ऊपर कर के मचल रही थी. चाची के दोनों बॉब्स से मैंने बारी बारी खेला..और चाची के बॉब्स से मैंने खेल्ने के बाद मैंने चाची के बॉब्स को फिर से हाथों में पकड़ा और छोड़ने के बाद मैंने चाची की चुत में अपना मुँह डाल दिया और चाची के दोनों पाँव फैला के चाची की चुत की खुशबू लेने लगा. चाची के चुत की खुशबू में मेरे लंड की खुश्बू..मस्त दीवना बना रही थी. मैंने बस एक बार चाची की चुत पे अपना मुँह रक्खा और मस्त सूंघा..और एक दो बार फिर से किया..पर चाची ने अपने हाथसे मेरे मुँह को अपने चुत से सटा दिया और में भी फिर चाची की चुत को चाटने लगा..चाचि की गीली चुत और मेरे मुँह की सलीवा का मिलना सच में अच्छा लग रहा था..और मेरा लंड अब बेक़रार हो रहा था मैंने फिर चाची की चुत से मुँह बाहर निकला और चाची का हाथ पकड़ा और चाची की मिडिल फिंगर को पकड़ा और अपने मुँह में दाल के गीला किया और मेरे मुँह की सलीवा उस पे ले के मैंने अपने हाथ से चाची की मिडिल फिंगर को चाची की चुत में दाल दिया.
 
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