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Incest परिवार की लाड़ली complete

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ऐसा कहते हुए उसने फट से अपना टॉप निकाल दिया जिससे उसकी विशाल चूचियां लगभग नंगी नुमाया हो गयी. मयूरी की चूचियां इतनी बड़ी थी कि वो ब्रा में बस जैसे-तैसे ही कैद रहती थी. अगर टॉप ना पहना हुआ हो तो आधी से भी ज्यादा दिखाई देती थी.

और टॉप उतरते ही विक्रम की नजर उसकी गोल-गोल भारी-भारी चूचियों पर पड़ गयी.

मयूरी ने देखा कि कैसे उसका भाई ललचायी नजर से उसकी चूचियों को देख रहा है पर वो अनजान बनने का नाटक करती रही और जाले साफ करने में फिर से लग गयी.

पर अब विक्रम का ध्यान अपनी बहन की चूचियों से हट ही नहीं रहा था. एक तो वे बड़ी-बड़ी थी और ऊपर से मयूरी उछल-उछल कर उनको हिला-हिला कर विक्रम का ध्यान आकर्षित कर रही थी. विक्रम की जगह अगर कोई मुर्दा भी होता न, तो वो भी इस दृश्य को देख कर जाग जाता! और विक्रम तो फिर भी इंसान था, वो भूल गया ये गोल-गोल चूचियां उसकी अपनी सगी छोटी बहन की है. और भी एकटक उनको देखता रहा.

थोड़ी देर बाद मयूरी ऐसे नाटक करती है जैसे उसको अभी-अभी पता चला हो कि विक्रम उसकी चूचियों को ताड़ रहा है. विक्रम इस समय अपने बिस्तर पर बैठा हुआ था. मयूरी उसके एकदम पास उसके बिस्तर पर खड़ी हो गयी, जिससे उसकी चूचियां ठीक विक्रम के चेहरे पर हों.

उसने अपने भाई से थोड़ा नखरे-भरे अंदाज में पूछा- देख लिया?

विक्रम का जैसे मोह भंग होता है, तन्द्रा टूटती है और वो हकलाते हुए बोला- ह.. हाँ… म.. मेरा मतलब है क्या…?

पर इसके वावजूद भी वो अपनी नजरें मयूरी की चूचियों पर से हटा नहीं पाया.

मयूरी- वही जो देख रहे हो?

अब वो बहुत ही शर्मिंदा-सा महसूस करने लगा और इधर-उधर देखते हुए बोला- म…मैं कुछ नहीं देख रहा था?

पर मयूरी इस मौके को जाने नहीं देना चाहती थी, उसने कहा- झूठ मत बोलो भैया… मैंने अपनी आँखों से तुम्हें इनको घूरते हुए देखा है!

विक्रम जैसे चोरी करते पकड़ा गया और अपनी गलती कबूल करते हुए बोला- सॉरी मयूरी… वो गलती से नज़र पड़ गयी और मैं अपनी नज़र हटा नहीं पाया.

मयूरी- अरे सॉरी मत बोलो भैया… कोई बात नहीं.. तुम्हारी कोई गलती है इसमें…

विक्रम आश्चर्य से- मतलब?

मयूरी- अरे देखो भैया … मुझे पता है ये बड़ी हैं और आकर्षक हैं … तो नजर चली भी गयी तो क्या हो गया? और वैसे भी तुम मेरे भाई हो … मुझे बचपन से देखते आ रहे हो … इसमें मैं क्यूँ बुरा मानूँ अगर तुमने आज फिर से देख लिया?

विक्रम को जैसे राहत मिली हो. वो बोला- थैंक्स बहना.. मुझे लगा तुम बुरा मान गयी होगी.

मयूरी ने माहौल को थोड़ा लाइट किया, उसके सामने बैठ गयी और बोली- कोई बात नहीं भैया… आप मेरे भाई हो और मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ. अगर आपकी ऐसी छोटी-छोटी बात का बुरा मानने लग गयी तो कैसे चलेगा?

और फिर वो धीरे से हंस दी… पंखा अभी भी बंद है और गर्मी अभी भी लग रही है. फिर वो अपना अगला कदम रखते हुए बोली- वैसे… कैसी लगी तुम्हें ये?

विक्रम ने इतने सीधे सवाल की उम्मीद नहीं की थी, वो फिर घबरा गया और हकलाते हुए बोला- क.. क.. क्या??

मयूरी- अरे यही जो तुम देख रहे थे?

और अपनी मनमोहक चूचियों की तरफ देखा.
 
विक्रम थोड़ा हड़बड़ाता हुआ सा बोला- ये कैसा सवाल है?

मयूरी- अरे तुम इतनी देर से इनको देख रहे थे तो मैं पूछ रही हूँ कि ये कैसे लगती हैं?

फिर मयूरी उसको थोड़ा समझाते हुए बोली- देखो, मैं एक लड़की हूँ और मेरा मन करता है कि मैं भी अच्छी लगूँ. अब मेरा कोई लड़का दोस्त तो है नहीं, और ना ही कोई बॉयफ्रेंड है. तुम मेरे भाई हो पर तुम एक लड़के भी तो हो. तो मैं तुमसे अपने बारे में तुम्हारा नजरिया जानना चाहती हूँ बस… कि ये तुमको कैसी लगीं?

यह बोलते हुए मयूरी ने अपनी चूचियों के नीचे अपने दोनों हाथ रकः कर उन्हें ऊपर को उठा दिया था.

विक्रम जैसे उसकी बातों को समझते हुए- अच्छी हैं.

मयूरी- अच्छी हैं मतलब?

विक्रम- मतलब अच्छी हैं.

मयूरी- अरे मतलब क्या अच्छा लगा?

विक्रम- क्या बताऊँ मैं… बता तो रहा हूँ कि अच्छी हैं.

मयूरी- मेरा मतलब है कि जैसे तुमको इनकी शेप अच्छी लगी या साइज? या दोनों? और ये बीच का क्लीवेज अच्छी बनती है या नहीं?

विक्रम- देखो… ये वाकयी कमाल की हैं. इनकी शेप भी अच्छी है और साइज भी. एकदम गोल-गोल हैं और बड़ी बड़ी भी… और क्लीवेज तो बहुत ही ज्यादा अट्रैक्टिव है.

मयूरी- मैं अगर तुम्हारी गर्लफ्रेंड या बीवी होती तो क्या तुमको मैं पसंद आती?

विक्रम- तुम इतनी खूबसूरत हो कि अगर तुम मेरी बीवी या गर्लफ्रेंड होती तो मैं इस दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान होता…

इस बातचीत के बीच दोनों भाई-बहन एक दूसरे के बिल्कुल आमने-सामने बैठे थे, मयूरी ने ऊपर में सिर्फ ब्रा पहन रखी थी जिसमें से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां दिखाई दे रही थी और उसने नीचे सिर्फ एक शॉर्ट्स पहना हुआ है जिनसे उसकी गोरी टांगें और जांघें बिल्कुल साफ़ दिखाई दे रही थी.

माहौल में अब थोड़ी-थोड़ी खुमारी छा रही थी.

मयूरी थोड़ी भावुक होते हुए बोली- मैं तुमको इतनी अच्छी लगती हूँ भैया?

विक्रम थोड़ा प्यार जताते हुए उसके गालों को सहलाते हुए बोला- हाँ मेरी बहना… तू मुझे इतनी प्यारी लगती है.

मयूरी- तो और क्या अच्छा लगता है तुम्हें मुझ में?

विक्रम- बताया ना, तू मुझे पूरी की पूरी अच्छी लगती है, और बहुत ही ज्यादा अच्छी लगती है. बल्कि ये कहूंगा कि तू दुनिया के किसी भी मर्द को बहुत अच्छी लगेगी. बहुत खुशनसीब होगा वो इंसान जिसे तू मिलेगी.

 
मयूरी- भाई, थोड़ा डिटेल में बताओ कि क्या-क्या अच्छा लगता है तुम्हें मुझे में?

और यह कहते हुए मयूरी खड़ी होकर गोल-गोल घूम गयी और पोज़ मारने लगी, जैसे अपना प्रदर्शन कर रही हो.

विक्रम- देख, तेरा चेहरा बहुत प्यारा है… तेरे होंठ बहुत खूबसूरत है… तेरी ये (चूचियों की तरफ इशारा करते हुए) भी बहुत प्यारी हैं, तेरी कमर भी पतली और आकर्षक है.

मयूरी (जिज्ञासा भरे लहजे में)- और-और?

विक्रम- और क्या बताऊँ?

मयूरी (थोड़ा मायूस होते हुए)- बस इतनी ही अच्छी लगती हूँ मैं तुमको?

विक्रम- अरे नहीं… नहीं… तू तो बिल्कुल परी-जैसी लगती है मेरी बहना!

मयूरी- तुम ना अभी मुझे बहन मत बुलाओ तो शायद और विस्तार से बता पाओगे!

विक्रम- ऐसी बात नहीं है…

मयूरी- तो और बताओ ना कि क्या-क्या अच्छा लगता है तुम्हें मेरे बारे में?

विक्रम- तुम्हारे ये पैर भी बहुत ही प्यारे हैं और ये गोरी-गोरी जांघें भी… तुम्हारी कमर के नीचे ये पीछे का पार्ट भी बहुत आकर्षक है.

मयूरी- भैया इसको बट्ट बोलते हैं या फिर गांड भी बोलते हैं.

विक्रम थोड़ा गुस्सा सा दिखाते हुए- मुझे पता है कि इसको गांड बोलते हैं.

मयूरी इठलाते हुए- अच्छा? और इसको क्या बोलते हैं?

यह बोलते हुए मयूरी ने अपनी चूचियों की तरफ इशारा करते हुए शरारती मुस्कान डाली और फिर से विक्रम के सामने बैठ गयी. पर इस बार वो अपने पैर फैला कर बैठी जिससे विक्रम उसकी चुत के आस पास की जांघ को अच्छे से देख सके.

साथ ही साथ मयूरी ने नोटिस किया कि अब विक्रम के मन में सिस्टर सेक्स के विचार घर कर चुके थे और उसका लंड खड़ा होकर उसके शॉर्ट्स के अंदर तम्बू बना चुका है.

विक्रम- इनको चूचियां बोलते है, समझी? सब पता है मुझे…

मयूरी- अच्छा…? बहुत पता है तुम्हें? कभी किसी की चूचियाँ देखी हैं?

विक्रम शरारती मुस्कान के साथ- देख तो रहा हूँ… तुम्हारी!

मयूरी- अरे ये तो बंद हैं ब्रा में… पूरी खुली देखी हैं कभी?

विक्रम- हाँ… सपना की… पर उसकी छोटी थी… इतनी बड़ी नहीं थी जितनी तुम्हारी हैं.

मयूरी- और क्या क्या देखा था उसका?

विक्रम- और कुछ नहीं देख पाया था… बात आगे बढ़ ही रही थी धीरे-धीरे कि छोटे से उसके सम्बन्ध के बारे में पता चला मुझे!

सपना वही लड़की थी जिसकी वजह से मयूरी के दोनों भाइयों के बीच बातचीत नहीं होती थी.

मयूरी- तो तुमने सिर्फ देखा था या और भी कुछ किया था?

विक्रम- तू क्या जानना चाहती है?

मयूरी- यही की बात आगे बढ़ी?

विक्रम- ज्यादा नहीं… मैंने उसकी चूचियां दबायी थी, चूसे भी थे एक बार उसकी पैंटी में हाथ भी डाला था बस!
 
मयूरी- ओह… तब तो बहुत बुरा लगता होगा कि हसरत पूरी नहीं हो पायी?

विक्रम- हो जाती, पर छोटे ने सब काम ख़राब कर दिया.

मयूरी- या फिर बात तो यह भी हो सकती है कि तुमने उसका काम ख़राब कर दिया?

विक्रम- तुम उसका साइड लेना बंद करोगी?

मयूरी- अच्छा सॉरी…

विक्रम- कोई बात नहीं… अब अगर तुम्हारे जाले साफ हो गए हों तो पंखा चला दोगी? गर्मी में हालत ख़राब हो रही है.

मयूरी उठती हुई- ये गर्मी कही मेरी वजह से तो नहीं?

मयूरी जब उठ रही थी तो उसने अपनी चूचियों को जान बूझकर उसके चेहरे में सटा दिया और ऐसे नाटक करने लगी जैसे गलती से हुआ हो… विक्रम को मयूरी की चूचियों की वो मुलायम सी छुअन बेचैन कर गयी और जाते वक्त मयूरी ने अपनी गांड को भी उसके चेहरे पर सटा दिया।

विक्रम मयूरी के इन आघातों से पूरी तरह घायल हुआ जा रहा था. अब उससे खुद पर नियंत्रण रखना नामुमकिन हो रहा था.

खैर मयूरी ने पंखा तो चला दिया पर अपना टॉप नहीं पहना. वो कमरे में अब भी सिर्फ ब्रा और शॉर्ट्स में थी. अब दोनों भाई बहन के बीच थोड़ा खुलापन आ गया था. विक्रम को भी उसका चूचियों का प्रदर्शन अब अजीब नहीं लग रहा था, बल्कि वो इसका आनन्द ले रहा था.

मयूरी थोड़ा इठलाती हुई- अगर इतनी ही अच्छी लग रही है तो नजदीक से एक बार अच्छे से देख लो.

और ये कहते हुए वो अपनी चूचियों को विक्रम के एकदम चेहरे के भाई एक इंच की दूरी पर ले गयी. विक्रम इस वार से संभल नहीं पाया और हड़बड़ाहट में उसने मयूरी की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ लिया… फिर उसको अपनी गलती का एहसास हुआ और अपना हाथ जल्दी से पीछे हटाते हुए बोला- सॉरी… सॉरी… वो तुम अचानक से आ गयी तो गलती से मैंने जल्दी-जल्दी में पकड़ ली!

मयूरी- कोई बात नहीं भाई!

विक्रम हकलाते हुए)- ह.. हाँ.. ओके…

मयूरी- पर अगर तुम इनको पकड़ना चाहते हो तो पकड़ सकते हो.

विक्रम आश्चर्य से- सच्ची?

फिर उसको अपनी गलती का एहसास हुआ और बोला- म… मेरा मतलब है… नहीं…

मयूरी- अरे कोई बात नहीं… सच्ची…

और ऐसा बोलते हुए मयूरी ने खुद ही विक्रम का हाथ पकड़ कर अपने चूचियों पर रखवा लिया.

विक्रम को जैसे विश्वास नहीं हुआ, वो ख़ुशी और उत्साह के मारे उसकी गोल-गोल बड़ी चूचियों को पकड़कर हल्के-हल्के से दबाने लगा.
 
मयूरी के लिए यह अनुभव एकदम नया था, वो इस पल के एक-एक लम्हे का आनंद लेने लगी, उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगी- आह… भैया… बहुत मजा आ रहा ह… है… और दबाओ… ना इनको!

विक्रम मयूरी की ऐसी कामुक बातों से और उत्साहित हो गया और जोर-जोर से मयूरी की अनछुई चूचियों को दबा-दबा कर आनंद लेने लगा. तभी मयूरी ने अपना एक हाथ विक्रम के शॉर्ट्स में डालकर उसके लंड को जोर से पकड़ लिया.

मयूरी के लिए यह पहली बार था जब वो किसी का लंड अपने हाथ में ले रही थी. उसने विक्रम के लंड के कड़ापन को महसूस किया… वो बहुत ही ज्यादा सख्त था… काफी लम्बा भी था. मयूरी उसके लंड को जोर-जोर से दबाने लगी और इधर विक्रम उसकी चूचियों को उमेठ-उमेठ कर मजे ले रहा था.

दोनों भाई बहन अपनी जवानी की बहार का आपस में मजा ले रहे थे. अब तक मयूरी की सारी योजना एकदम सही चल रही थी. दोनों ही भाई-बहन एक दूसरे को अपनी जवानी का पूरा मजा देना चाहते थे. वो इस समय पूरी तरह एक-दूसरे के हो जाना चाहते थे.

मयूरी और विक्रम ने लगभग इसी अवस्था में 10-15 मिनट आनंद लिया. फिर मयूरी ने धीरे से कहा- भैया…

विक्रम- ह… हाँ… बहना…

मयूरी- क्या मैं तुम्हारा ये हथियार देख सकती हूँ? मैंने आज तक किसी का देखा नहीं है ये वाला!

विक्रम मुस्कुराते हुए- इसको लंड कहते है मेरी बहना…

मयूरी इठलाती हुई- मुझे पता है कि इसको लंड कहते हैं.

अब दोनों भाई-बहन में कुछ शर्म-लाज नहीं बची थी. दोनों बस एक दूसरे को वो जिस्मानी सुख देना चाहते थे वो हर औरत मर्द एक-दूसरे को देना चाहता है. उन्हें इस बात से अब कोई फर्क नहीं पड़ता था कि वो दोनों सगे भाई-बहन हैं.

मयूरी जिद करते हुए- भैया, दिखा दो ना प्लीज…

विक्रम- हाँ मेरी जान… तू बिल्कुल देख ले और जो करना है वो कर इसके साथ… अब ये पूरी तरह से तुम्हारा है.

मयूरी- सच भैया… आई लव यू…

और यह कहते हुए मयूरी ने विक्रम के होटों पर अपने रसीले गुलाबी और मुलायम होंठ रख कर एक गाढ़ा-सा चुम्बन दिया. विक्रम इस मामले में थोड़ा अनुभवी था. उसने मयूरी के निचले होठों को चूसना शुरू किया और फिर अपनी जीभ को उसके मुँह में डाल दिया. मयूरी के लिए यह बिल्कुल नया था पर उसको ये एकदम से बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा और वो इसका आनंद लेने में लग गयी. उसने विक्रम की जबान को चूसना शुरू किया और दोनों एक-दूसरे को करीब पांच मिनट तक चूसते रहे.

 
फिर मयूरी को अचानक कुछ याद आया और विक्रम के होंठों से अलग होते हुए बोली- भैया… तुम्हारा लंड… मुझे वो देखना है.

विक्रम खड़ा हो गया, उसने अपने शॉर्ट्स निकाल दिया और उसका टनटनाता हुआ लंड बाहर खड़ा था. अब विक्रम का लंड मयूरी के चेहरे के ठीक सामने था. उसने बड़े प्यार से उसको देखा फिर अपने दोनों हाथों से उसको छू कर एहसास करने लगी. फिर उसने उसके लंड पर अपने होंठों से एक चुम्बन किया और फिर पूरा का पूरा लंड अपने मुँह में गपक से अंदर ले लिया और वो विक्रम के लंड को अपने मुँह में अंदर-बाहर करने लगी.

उसको विक्रम के लंड का स्वाद शुरू में थोड़ा नमकीन लगा पर वो उसको ये स्वाद इतना अच्छा लग रहा था कि जैसे उसको नशा-सा हो गया हो.

उसने विक्रम के लंड को अपने मुँह में आगे-पीछे करना जारी रखा.

इधर विक्रम भी पहली बार किसी लड़की के मुँह में अपना लंड दे रहा था और वो भी अपनी छोटी बहन के… वो इस समय बहुत एक्साइटेड था और अपने लंड को अपनी बहन के मुँह में महसूस कर रहा था. वो इस क्रिया में मयूरी का पूरा साथ दे रहा था और एन्जॉय कर रहा था.

दोनों भाई-बहन वासना में पूरी तरह से लिप्त हो चुके थे. उन्हें इस समय कुछ भी याद नहीं था कि वे घर में हैं, वे सगे भाई-बहिन हैं, उनके बीच खून का रिश्ता है.

कुछ भी नहीं… दोनों को इस वक्त कुछ भी याद नहीं था; दोनों बस एक दूसरे के हो जाना चाहते थे.

फिर करीब आठ दस मिनट तक अपना लंड अपनी प्यारी-सी सेक्सी-सी अधनंगी बहिन के मुँह में चुसाने के बाद विक्रम मयूरी के मुँह में ही झड़ गया. इधर उत्साह के मारे मयूरी ने अपने बड़े भाई के लंड से निकले एक-एक बून्द वीर्य को चाट लिया और गले के नीचे गटक कर गयी, वो अपने बड़े भाई के इस प्यार को बिल्कुल भी जाया नहीं करना चाहती थी.
 
अब विक्रम की बारी थी. उसने मयूरी से आग्रह करते हुए पूछा- मयूरी, क्या मैं तुम्हारी चुत देख सकता हूँ… प्लीज?

मयूरी- हाँ मेरी जान… अब ये पूरी तरह से तुम्हारी है… क्यूँ ना इसका दीदार करने के लिए मेरे कपड़े तुम खुद निकालो?

मयूरी अब खड़ी हो गयी थी ताकि उसका अपना बड़ा भाई उसको नंगा कर सके. मयूरी ने अब भी ब्रा, शॉर्ट्स और उसके नीचे एक पैंटी पहनी हुई थी. विक्रम ने जरा भी देर ना करते हुए वो बैठा और सीधा उसकी शॉर्ट्स और फिर पैंटी को एक साथ ही लगभग खींचता हुआ-सा निकलने लगा. मयूरी ने अपनी टांगें उठा कर ऐसा करने में उसकी पूरी मदद की.

अब मयूरी नीचे से पूरी तरह नंगी थी. उसके शरीर पर सिर्फ उसकी ब्रा पड़ी हुई थी. उसके भाई विक्रम ने अपने जीवन काल में पहली बार नंगी चूत देखी थी, और वो भी अपनी खुद की बहन की… वो बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो रहा था. उसने झट से पहले अपनी उंगलियाँ मयूरी की चुत पर रखी और फिर उसने बिना समय गंवाए अपनी जबान उसमें डाल दी. ऐसा करने में मयूरी ने उसकी पूरी मदद की और अपनी एक टांग उठा कर उसने विक्रम के कंधे पर रख दिया.

अब विक्रम के लिए मयूरी का चुत चाटना बेहद ही सुविधाजनक हो गया था. वो लगभग टूट पड़ा… मयूरी इस पल का पूरा आनंद ले रही थी. विक्रम भी इस सुख का पूरा अनुभव ले रहा था. मयूरी के मुँह से सिसकारियां निकल रही थी- आ… आह… भ… भैया… और जोर से चाटो… मेरी चुत को… घुस जाओ इस में… अब ये बिल्कुल तुम्हारी है…

मयूरी सुख और आनंद के मारे कुछ-भी बड़बड़ा रही थी.

करीब 15 मिनट मयूरी के चुत की गहराइयों को अपनी जबान से नापने के बाद विक्रम उसकी चुत से अलग हुआ. इतनी देर में मयूरी 5-6 बार झड़ चुकी थी और विक्रम ने उसके चुत से निकला हुआ पूरा का पूरा माल अपने मुँह से चूस-चूस कर गटक लिया था.

दोनों काफी थक गए थे और आगे बढ़ने ही वाले थे कि घर के घंटी बजी. शायद रजत मूवी देख कर घर आ गया था.

और इसी घंटी से इन दोनों भाई बहन की तन्द्रा भी टूटी. अब दोनों अपनी पुरानी दुनिया में फिर से वापिस आये. जल्दी-जल्दी कपड़े पहने और फटाफट से माहौल को सामान्य करते हुए अपने अपने बिस्तर पर बैठ गए.

पर सच पूछो तो अब कुछ भी सामान्य नहीं बचा था. दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और दोनों ने एक-दूसरे को गहरी मुस्कान दी.

करीब आधे घंटे बाद रजत खाना-वाना खाकर कमरे में आया. वो सीधे अपने बिस्तर पर गया और लेट गया. मयूरी ने पूछा कि फिल्म कैसी थी तो उसने जवाब दिया की अच्छी थी और फिर थोड़ी देर के बाद सब सो गए. रात को एहतियात के तौर पर उस कमरे में मयूरी और विक्रम के बीच कुछ नहीं हुआ क्यूँकि रजत वहीं पर सो रहा था.

 
कहानी जारी रहेगी।कमेंट के लिए सभी को बहुत बहुत थैंक्स।
 
सुबह विक्रम उठा और अपने कोचिंग चला गया जहाँ वो कम्पटीशन की तैयारी करता था. रजत सुबह देर से जगता था. तो वो करीब 7:30 के आस-पास जगा. पापा ऑफिस जा चुके थे और मम्मा पड़ोस में गयी थी कुछ काम से. इस वक्त घर में मयूरी और रजत अकेले थे.

मयूरी ने इस समय का फायदा उठाने की सोची. वो बाथरूम नहाने गयी और जानबूझकर नहाने के बाद पहनने वाले कपड़े लेकर नहीं गयी. फिर वो नहाकर बाथरूम से बाहर आयी. इस समय उसने अपने नशीले बदन पर सिर्फ एक तौलिया लपेटा हुआ था. इस तौलिये में उसके शरीर का कोई भी भाग छुप नहीं पा रहा था. उसकी विशाल चूचियां एकदम तनी हुई थी और गांड बिल्कुल बाहर निकली हुई थी. उसकी गोरी जांघें बिल्कुल साफ नज़र आ रही थी जो देखने में एकदम चिकनी लग रही थी.

उसके शरीर पर पानी की बूंदें अब भी झलक रही थी और उसके शरीर को और मादक बना रही थी. गीले बालों में वो इस समय एकदम अप्सरा लग रही थी. मतलब इस रूप में देख कर कोई ऋषि-मुनि भी अपना तप छोड़ कर मयूरी के इस खूबसूरत और क़यामत शरीर में खो जाता।

खैर, अपना कपड़ा लेने के बहाने वो अपने कमरे में गयी जहाँ उसका छोटा भाई रजत अब भी अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था. मयूरी की इस मनमोहक काया को देखर रजत अपनी नजरें मयूरी के इस कातिल बदन से हटा नहीं पा रहा था. वो एकदम खुले मुँह से उसको एकटक देखता ही जा रहा था.

मयूरी ने ये नोटिस किया और उसने अपने कदम कमरे की अलमारी की तरफ बढ़ा दिया. उसने ऐसे व्यक्त किया जैसे उसको इस बारे में कुछ पता ही नहीं हो.

पर मयूरी जान चुकी थी कि अगले कुछ मिनटों में इस कमरे में फिर से एक तूफ़ान आने वाला था. और वो तूफान वो खुद ले कर आने वाली थी. वो मुस्कुराती हुई अलमारी से अपने कपड़े निकालने लगी और उनको अपने बिस्तर पर रखने लगी.

फिर उसको एक विचार आया, उसने एक पिन जो अलमारी में रखी थी, को निकलकर नीचे फेंक दिया और उस पर अपना पैर रख दिया. पर उसने इस बात का ख्याल रखा कि वो उसको गड़े नहीं. और अचानक से चिल्लाने लगी- उईईई… माँ… आह्ह…

रजत- क्या हुआ दीदी?

मयूरी- अरे मेरे पांव में कुछ गड़ गया… बहुत दर्द हो रहा है… आ… आ…

रजत हड़बड़ा कर उठा और मयूरी के पास आकर खड़ा हो गया और उसके पांव में देखने लगा. लेकिन उसकी नजर मयूरी के पांव से ज्यादा उसकी जांघों को घूर रही थी.

वो बोला- कहाँ दीदी?

मयूरी- नीचे… प्… पांव में… देखेगा प्लीज?

रजत- मैं देखता हूँ!

और रजत को तो जैसे मौका मिल गया हो अपनी इस कमसिन बहन को नजदीक से देखने और छूने का. वो फट से बैठ गया और मयूरी के पांव पकड़ कर ऊपर उठाया और अपने एक पैर के घुटने पर रख दिया. उसके ऐसा करने से अब तौलिया जो मयूरी ने पहन रखा था, नीचे से थोड़ा चौड़ा हो गया और जांघों के साथ-साथ उसके चुत भी थोड़ी थोड़ी दिखने लगी. पर रजत ने अभी तक अपनी नजर ऊपर की नहीं थी तो उसको मयूरी के कुंवारी चुत के दर्शन अभी तक हुए नहीं थे. और वो अब उसके पांव के तलवे को नीचे से सहला कर देखने की कोशिश करने लगा कि पिन कहां गड़ा है?
 
पर कोई पिन गड़ा हो तब तो कुछ समझ आये?

थोड़ी देर निरीक्षण करने के बाद उसको कुछ समझ नहीं आया तो उसने अपने चेहरा ऊपर किया और बोला- ये पिन गड़ गया है शायद, पर मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा कि कहाँ गड़ा है?

पर यह कहते हुए रजत की नजर मयूरी की चुत पर सीधी पड़ी क्योंकि मयूरी का एक पैर ऊपर था तो तौलिया थोड़ा खुल सा गया था और चूत साफ़ दिखाई दे रही थी. रजत की आँखों और मयूरी की चुत के बीच मुश्किल से 5-6 इंच का फैसला होगा.

भाई अपनी बहन मयूरी की नंगी चिकनी जांघें और खुली चुत के दर्शन होते ही अवाक्-सा रह गया. उसने देखा कि उसके बड़ी-बहन की चुत एकदम गुलाबी है. वहां पर भी बाल नहीं है क्योंकि मयूरी ने नहाते वक्त थोड़ी-देर पहले ही अपनी चुत के बाल साफ किये थे.

उसका मुँह खुला का खुला ही रह गया.

मयूरी ने नोटिस किया पर कुछ बोला नहीं इस बारे में. वो अपने दर्द पर ध्यान देते हुए कहने लगी- तो देखो ना कि कहाँ गड़ा है?

रजत का गला सूख रहा था. वो थोड़ा हकलाते हुए बोला- कैसे देखूँ? शायद नीचे पाँव में गड़ा है वह मेरी नजर नहीं पहुंच रही!

मयूरी- तुम नीचे लेट जाओ और देखो, कहीं खून तो नहीं निकल रहा? मुझे आअह्ह्ह… दर्द हो रहा है बहुत…

रजत- ठीक है… तुम अपना पाँव बिस्तर पर रखो!

मयूरी- ओके!

मयूरी ने अपना एक पाँव, जिसमें वो पिन गड़ने का नाटक कर रही थी, वो नजदीक के बिस्तर के किनारे पर पर रख दिया. फिर रजत जमीन कर लेट गया और पांव के तलवे को देखने लगा. पर वो अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाया क्योंकि नीचे से अब मयूरी की प्यारी नंगी खुली चुत साफ़ नजर आ रही थी. उसका ध्यान बार-बार अपनी बहन की चुत पर ही चला जा रहा था.

फिर थोड़ा सा पाँव और बहुत ज्यादा मयूरी की चुत का निरीक्षण करने के बाद वो खड़ा होने की कोशिश करने लगा यह बोलते हुए कि कुछ नजर नहीं आ रहा.

पर गलती से उसका सर मयूरी के तौलिये से टकराया जिसकी गांठ पहले से ही मयूरी ने कमजोर कर रखी थी और वो लगभग खुलने ही वाली थी. रजत के ऐसे में तौलिये से टकराने से तौलिया पूरी तरह खुल गया और वो जमीन पर गिर गया.
 
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