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Incest परिवार की लाड़ली complete

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यह कहते हुए काजल एक अच्छे बच्चे की तरह अपने पापा के आदेश का पालन किया. वो उठी और उनकी तरफ चल दी. फिर मोहन लाल के मन में कुछ ख्याल आया, वो मुस्कुराया और उसने काजल को रोका- पर रुको.. मैं ही वहां आता हूँ. चलो बहू.. सोफे के पास चलते हैं.

मयूरी- जी बाबू जी..

मयूरी ने मोहन लाल के कमर में हाथ डाला जैसे दोनों प्रेमी प्रेमिका हों और दोनों सोफे के तरफ बढ़े. रमेश और सुरेश ने अपने पापा के लिए वहां जगह बनाई और मोहन लाल बीच में बैठ गया. फिर मोहन लाल का आदेश जारी हुआ- बहू और काजल.. अब तुम दोनों मिलकर एक साथ मेरा लंड चूसो.. मैं अपनी बहू और बेटी दोनों को एक साथ अपना लंड चूसते हुए देखना चाहता हूँ.

काजल और मयूरी मोहन लाल के आदेश का पालन किया और उसके लंड को एक साथ चूसने लगीं. उनके होंठ कभी कभी आपस में टकरा रहे थे, पर दोनों जैसे प्रतिस्पर्धा कर रही थीं कि कौन ज्यादा से ज्यादा इस लंड को चूस सकती है.

मोहन लाल ने दोनों को चूसते हुए देखकर उनके सर पे हाथ रखते हुए कहा- सदा खुश रहो मेरे बच्चों.. आज तुम दोनों ने मुझे जीते जी स्वर्ग का एहसास करा दिया है.

फिर मोहन लाल ने रमेश और सुरेश को देखते हुए कहा- तुम्हें पता है? तुम्हारी माँ को मैं और तुम्हारे नाना एक साथ चोदा करते थे. और तुम्हारी माँ को हम दोनों से एक साथ चुदवाना बहुत अच्छा लगता था. आज अगर वो जिन्दा होती, तो ये सब देख कर बहुत खुश होती. वो तुम दोनों से भी चुदवाने की इच्छा रखती थी, पर ये बात वो कभी तुम्हें बता नहीं पाई और वक़्त से पहले ही गुजर गई.

सुरेश- पापा.. ये क्या कह रहे हैं आप? आप और नाना एक साथ माँ को चोदते थे?

रमेश- और माँ हमसे भी चुदना चाहती थी? तो ये बात उसने कभी बताया क्यों नहीं.. हम तो ख़ुशी-खुशी उसको चोद देते पापा..!

मोहन लाल- घर में एक बेटी भी थी और हम तुम लोगों के सामने कभी सेक्स को लेकर इतना सहज नहीं हो पाए बेटा. आज उसकी आत्मा को जरूर शांति मिल जाएगी.

इधर मयूरी सोच रही है कि ‘उसके अपने पापा और भाइयों से चुदना..’ और ‘उसके दोनों भाइयों का अपनी माँ को चोदना..’ कोई बड़ी बात नहीं थी. ये तो शायद हर घर में होता है, बस कोई किसी को बताता नहीं है. इतनी देर में उसको ये तो समझ आ गया था कि हर बाप अपनी जवान बेटी को चोदने की इच्छा रखता है, हर भाई अपनी बहन को चोदना चाहता है, हर बेटी और बहन अपने बाप और भाई से चुदवाना चाहती है. बस कोई शुरुआत नहीं कर पाता.
 
मोहन लाल ने आगे बोला- तुम्हारे नाना और मैं तुम्हारी माँ को इतना चोदते थे कि हमें आज तक नहीं पता कि तुम दोनों मेरे बेटे हो कि अपने नाना के हो. हाँ पर मुझे ये पता है कि काजल मेरी बेटी है क्योंकि इसके जन्म के 2 साल पहले ही तुम्हारे नाना गुजर गए थे.

रमेश और सुरेश को ये सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ. फिर कुछ सोचते हुए रमेश ने कहा- मतलब कि आप रिश्ते में हमारे पापा भी हो सकते है और जीजा भी. क्योंकि अगर हम नाना के वीर्य से पैदा हुए हैं तो हमारी माँ तो हमारी बहन भी हुई ना.. और इस हिसाब से आप हमारे जीजा जी हुए.

मोहन लाल- हाँ.. कह सकते हो.

सुरेश- तो जीजाजी साब.. आज बेटीचोद बनकर कैसा लग रहा है?

मोहन लाल ने थोड़ा असहज होते हुए कहा- क्या..??

सुरेश- देखो पापा, अगर आप हमारे जीजा हुए तो मैं आपको कभी कभी जीजा तो बुला ही सकता हूँ.. और आप मेरी माँ के पति हैं तो आप मेरे पिता भी हुए. फिर आप मेरे सामने ही अपनी बेटी की चुदाई कर रहे हैं तो आप बेटीचोद तो हुए ही..?

मोहन लाल- हाँ बेटा.. वैसे बात तो सही है.

रमेश ने मजाक में कहा- तो जीजा मोहन लाल जी.. कैसा लग रहा है बेटी को चोदते हुए??

सब हंसने लग लगे.. काजल और मयूरी भी लंड चूसना छोड़कर कर इस ठहाके में इनका साथ देने लगीं.

खैर, काजल और मयूरी फिर से मोहन लाल का लंड चूसने में लग गईं. मोहन लाल का लंड सुरेश के लंड के ही साइज का था. वो दोनों कभी उसका सुपारा चूसतीं, कभी लंड चचोरतीं.

काजल और मयूरी को अपने बाप का लंड चूसते हुए देख कर फिर से रमेश और सुरेश के लंड खड़े हो गए. उनके लंड फिर से एक बार चुदाई की मांग कर रहे थे.

रमेश काजल और मयूरी से बोला- काजल, मयूरी.. तुम दोनों प्लीज घोड़ी बन जाओ और उसी पोज़ में पापा का लंड चूसो.

दोनों ख़ुशी ख़ुशी घोड़ी बन गईं और अपनी अपनी गांड मटका मटका कर लंड चुसाई के मजे लगीं. रमेश ने अपनी बहन काजल की चूत में पीछे से लंड डाल दिया और सुरेश ने अपनी भाभी मयूरी की चूत में लंड पेल दिया.

अब दृश्य बड़ा ही मनमोहक हो गया था.

सबसे आगे बाप मोहन लाल सोफे पर बैठा था और उसकी बहू और बेटी घोड़ी बनके उसका लंड चूस रही थीं. दोनों की गोल-गोल चूचियां लटक रही थीं और और हिल रही थीं. उसके पीछे उसके दोनों बेटों में से एक अपनी बहन की चूत चोद रहा था और दूसरा अपनी भाभी की चूत मार रहा था. घोड़ी के स्टाइल में होने की वजह से दोनों की चूत थोड़ी और टाइट हो गई थी और उनको चोदने वाले लंड जल्दी ही लगभग 7-8 मिनट की चुदाई में ही झड़ गए.
 
अब चोदने की बारी मोहन लाल की थी. पर वो पहले अपनी बहू मयूरी को चोदना चाहता था, उसने मयूरी को कहा- बहू.. मेरी जान.. अब तुम्हारी चुदाई मैं करूँगा.

मयूरी- जी बाबूजी.. मैं बड़ी ही खुशनसीब हूँ, जो आपसे मुझे अपने पापा जैसा प्यार मिल रहा है.

मोहन लाल- मतलब तुम भी अपने बाप से चुदती थीं?

मयूरी- जी पापा… और अपने भाइयों से भी.

मोहन लाल- अच्छी बात है.. अब अपने ससुर से बिल्कुल अपने बाप जैसे प्यार लो. आओ और मेरा लंड अपनी चूत में ले लो.

मयूरी- बिल्कुल पापा.

मोहन लाल- काजल, जा अपने भाइयों से चुदाई करवा ले, जब तक मैं बहू की चूत की कुटाई कर रहा हूँ.

काजल- जी पापा.

मयूरी सोफे पर लेट गई और मोहन लाल ने अपना लंड उसकी चूत पर सैट करके एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया. यहाँ से ससुर और बहू की घनघोर चुदाई शुरू हो गई.

मयूरी- बाबूजी.. आह.. चोदो.. और जोर से चोदो बाबूजी..

मोहन लाल- ले मेरी जान.. मेरे सपनों की परी.. आज मेरा लंड सच में ले ले. अपने सपने में मैंने तुमको बहुत चोदा है. आज वास्तव में तुझे चोदने का मौका मिला है. आज तो तेरी चूत की चटनी बना दूंगा.

इधर काजल ने रमेश और सुरेश को अपनी सेवा का फिर से मौका दे दिया. इस बार उसकी चूत में रमेश का लंड था और मुँह में सुरेश का लंड था.

दोनों भाई मिल कर अपनी बहन को चोदने लगे.

करीब 20 मिनट की लगातार चुदाई के बाद झड़ कर फिर से सब लोग आराम करने लगे.. पर आज आराम वाला दिन ही नहीं था. इस शाम को तो जैसे बस चुदाई ही होनी थी. थोड़ी देर में फिर से सब गरम हो गए.

अब मोहन लाल ने काजल को अपने पास बुलाया और कहा- बेटी, अपने बाप का लंड अपने चूत में लेगी न?

काजल- पापा, आज आप पूरी तरह से बेटीचोद बन जाओ.. और मैं इस घर की रंडी बन जाना चाहती हूँ. मैं चाहती हूँ कि जिसको जब भी मन करे, मुझे आके चोद दे. आओ पापा.. कूट दो मेरी इस चूत को अपने इस मूसल जैसे लंड से..

अब काजल को नीचे लिटा कर मोहन लाल अपनी बेटी को चोदने लगा. इधर रमेश और सुरेश मिलकर मयूरी की चोदने वाले थे.. पर रमेश ने अचानक से कहा- मयूरी.. अब मैं तेरी गांड और सुरेश तेरी चूत मारेगा.

मयूरी- आओ मेरे राजा.. मैं तो कई दिनों से ऐसे नहीं चुद पाई हूँ.. अपने मायके में मैं अपने दोनों भाइयों से ऐसे ही चुदती थी. आज तुमने मेरे भाइयों की याद दिला दी.

फिर रमेश ने मयूरी को खड़ा करके उसकी एक टांग सोफे पर रखा और खड़े-खड़े ही उसकी गांड में अपना लंड घुसा दिया. आगे से सुरेश ने भी अपनी भाभी की चूत में अपना लंड प्रवेश करा दिया. मयूरी अब दोनों तरफ से चुदाई करवा रही थी.
 
घर में फिर से सब लोग चुदाई में लगे हुए थे. ये किस्मत का खेल ही था, जो एक सामान्य घर के सामान्य से रिश्तों को कुछ ही घंटों में इतना विशेष बना दिया. इस घर में पिछले 2-3 घंटों में बहुत सारे रिश्ते बदल गए. सब लोगों के मन से एक-दूसरे को लेकर शर्म-हया जैसी कोई चीज़ खत्म हो गई थी, पर प्यार और गहरा हो गया था. साथ ही साथ कई सारे रहस्यों से पर्दा भी उठ चुका था.

घर के सरे सदस्यों के बीच का सामान्य सम्बन्ध एकदम परिवर्तित ही हो गया था. अब परिवार में भाई-बहन, पति-पत्नी, पिता-पुत्र, पिता-पुत्री, बहु-ससुर सबके बीच का सम्बन्ध बिल्कुल बदल चुका था. अब सब एक दूसरे को चोद और एक-दूसरे से चुदवा रहे थे, वो ख़ुशी-ख़ुशी. कोई विरोध नहीं, और सबको एक दूसरे की सहमति थी.

इस के साथ-साथ घर के कुछ लोगों के जीवन के कुछ बहुत ही पुराने राज़ भी खुल गए थे और सब एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे हो चुके थे, पर आश्चर्य की बात यह थी कि कोई भी लाज-हया नहीं दिखाई दे रही थी इतने बड़े बड़े रहस्यों के खुलने के बाद भी … सब उत्साहित होकर एक-दूसरे को अपनी कहानियाँ बता रहे थे.

मयूरी ने वादा किया था कि वो सबको अपने घर में हुए दोनों भाइयों और पिता के साथ चुदाई की कहानी बताएगी.

तो उस हसीं शाम की घनघोर चुदाई के बाद भी रात को चुदाई का सिलसिला चलता रहा. पार्टनर बदल-बदल का चुदाई चली और बहुत ज्यादा चली. फिर अगली सुबह रमेश और सुरेश अपने ऑफिस चले गए और घर में मोहनलाल ने अपनी बहू मयूरी और बेटी काजल को अकेले में फिर से बहुत चोदा. उसका तो जैसे सपना पूरा हो रहा था. दो-दो जवान लड़कियां वो भी अपने घर की. एक अपनी सगी बेटी तो एक अपने ही घर की बड़ी बहू. उसके आनंद की कोई सीमा नहीं थी और वो इसकी व्याख्या शब्दों में नहीं कर सकता था.
 
शाम को जब रमेश और सुरेश भी घर आ गए तो चुदाई के कई और दौर चले. घर के हर मर्द के लंड ने घर की दोनों चूत की खूब सेवा की और मजे दिए. फिर जब सब लोग थक कर बैठ गए तो कोमल के आग्रह पर मयूरी ने अपने मायके में हुई चुदाई की शुरुआत की कहानी शुरू की.

तो बात आज से करीब 6 साल पहले की है यानि की मयूरी की शादी के लगभग 5 साल पहले. मयूरी अपना स्नातक (ग्रेजुएशन) पूरा करने वाली थी. वो उस समय लगभग 19-20 साल की रही होगी. घर में उसके पिता अशोक (45 साल), माता जिनका नाम शीतल (41 साल), बड़ा भाई विक्रम (21 साल) और छोटा भाई रजत (18 साल) जैसे सदस्य थे. अशोक की सरकारी नौकरी थी, वो देखने में एकदम साधारण व्यक्ति लगता था पर हमेश व्यायाम करता था इसलिए बहुत ही स्वस्थ था.

शीतल थी तो वैसे 41 साल की पर बहुत ही खूबसूरत…! उसको देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता था कि जवानी में इसने कितनों के सपनो में आकर उनकी की नींदें हराम की होंगी. वो बहुत पतली नहीं थी और मोटी भी नहीं थी, देखने में ज्यादा से ज्यादा 35 की लगती थी. माँ बेटी को एक साथ देखकर लगता था की जैसे दोनों बहने हों. अशोक से उसकी शादी उसके सरकारी नौकरी के वजह से ही हुई थी.

मयूरी बिल्कुल अपने माँ पर गयी थी, छरहरा बदन, खूबसूरत होंठ, नशीली कमर, जवानी की उठान, भारी-भारी चूचियां और उतनी ही बड़ी बड़ी गांड। जिस जगह से गुजरे उस तरफ के लोगो का लंड अपने आप ही खड़ा हो जाता था.

मयूरी के भाई विक्रम और रजत भी गठीले शरीर के मालिक थे. दोनों नियमित रूप से जिम जाते थे, देखने में बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक लगते थे. विक्रम किसी कम्पटीशन की तैयारी कर रहा था और रजत अभी सेकंड ईयर में था. विक्रम और रजत में पिछले 4-5 महीनों से बातचीत बंद थी. कारण थी एक लड़की … जिससे दोनों भाई प्यार करते थे और उसने दोनों को बेवकूफ बना कर मजे ले लिए.
 
मयूरी अपने घर की लाड़ली थी. उसको अपने पिता, माँ और दोनों भाइयों से खूब सारा प्यार मिलता था. सब कुछ सामान्य चल रहा था. एक बार ग्रुप स्टडी के लिए मयूरी अपने एक सहेली पूजा के घर गयी. वहाँ उसकी 2 और सखियाँ आयी हुई थी – रुचिका और हीना.

एक-डेढ़ घंटे की लगातार पढ़ाई के बाद सबने एक ब्रेक लेने की सोची और रिलैक्स करने लगी. इधर-उधर की बातचीत करते-करते सेक्स के बारे में बात करने लगे. चारों आपस में पक्की सहेलियाँ थी और कई सालों से एक दूसरे को जानती थी.

बातों-बातों में हीना ने बताया कि वो सेक्स कर चुकी है. बाकी लड़कियों ने पूछा- किसके साथ?

तो वो थोड़ा शर्माने लग गयी और बात को टालने लगी. फिर बहुत जोर देने पर उसने बताया कि उसके अब्बा ने ही उसकी सील तोड़ी और अब घर में रोज़ खूब चुदाई चलती है.

उसने बताया कि यह बात उसकी अम्मी को भी पता है और तीनों लोग साथ में भी सेक्स करते हैं.

पूजा ने कहा- इसमें क्या बड़ी बात है, मैंने भी अपने छोटे भाई को पटा रखा है. हम दोनों करीब 1 साल से रोज़ ही चुदाई करते हैं. घर में किसी और पता नहीं है इसलिए कोई शक भी नहीं करता. हम दोनों एक ही कमरे में सोते हैं तो रोज़ चुदाई का काम बहुत ही आसान हो जाता है.

उसने बताया कि ग्रुप स्टडी के 2 घंटे पहले ही इसी कमरे में वो फिर से चुदी थी अपने भाई से. आज उसने उसको डॉगी स्टाइल में चोदा और उसके पहले दोनों ने 69 भी किया था.

फिर सबने रुचिका से पूछा- क्या तुमने कभी सेक्स किया है?

तो उसने बताया- हाँ, मगर किसी आदमी के साथ नहीं किया है.

हीना ने पूछा- मतलब?

तो उसने बताया कि पिछले पांच छह महीने से उसके और उसकी माँ के बीच में सेक्स सम्बन्ध बन गए हैं. दोनों एक दूसरे के साथ लेस्बियन सेक्स का अनुभव लेती हैं.

आज चारों सहेलियाँ अपना राज़ एक दूसरे के सामने खोल रही थीं. फिर सबने जब मयूरी से पूछा- तुम अपनी चुदाई की कहानी बताओ?

तो वो एक पल को चुप सी रह गयी. फिर एक बड़ी सी आह भरते हुए उसने कहा कि उसकी जमीन अभी भी सूखी है, अभी तक चुदाई का मौका नहीं मिल पाया है. बॉयफ्रेंड कोई है नहीं और घरवालों से ऐसी उम्मीद कभी की नहीं.

हीना ने कहा- यार, कोशिश करनी पड़ती है, फिर सब हो जाता है. देखो अंत में सब होते औरत-मर्द ही है. और माशाल्लाह, तुम तो हूर की परी हो, ऊपर वाले ने इतना बढ़िया हुस्न दिया है कि कोई भी मर-मिटेगा.

मयूरी ने कहा कि उसकी किस्मत में शायद शादी के बाद ही लंड लिखा है.

फिर सबने ठहाकों के बाद पढ़ाई फिर से शुरू की. एक और घंटे की पढ़ाई के बाद सब अपने अपने घर को चल दी.
 
पर आज जब मयूरी अपने घर जा रही थी तो उसके दिमाग में कुछ नयी तरंगों ने कब्ज़ा कर रखा था. वो अपने सहेलियों की चुदाई के बारे सोचे जा रही थी और कितनी भी कोशिश करने पर अपने आप को रोक नहीं पा रही थी. उसने महसूस किया कि सोचने मात्र से ही उसकी चुत में बहुत सारा पानी आ गया है. वो फटाफट घर गयी और बाथरूम जा की अपने उंगलियों को अपनी चुत में डाल कर अंदर-बाहर करने लगी. फिर थोड़ी देर बाद जब उसकी चुत से काफी सारा कामरस निकला तो उसको इतना चैन मिला कि जैसे ऐसा पहले कभी हुआ ही नहीं हो.

इसके बाद उसने फैसला किया कि अब वो किसी ना किसी से चुदाई करवा के ही मानेगी।

उसने बहुत सोचा कि सबसे आसान है कि किसी लड़के को पटाओ और खूब चुदाई करवाओ.

पर उसमें रिस्क बहुत ज्यादा था क्यूँकि अगर यह बात किसी को पता चल गयी तो बहुत बदनामी होगी. और ऐसी बातें किसी ना किसी तरह दोस्तों यारों से सबको पता चल ही जाती हैं.

फिर अब उसने घर में लोगों के बारे में सोचना शुरू किया. उसने सबसे पहले अपने पापा के बारे में सोचा पर वो बहुत ही मुश्किल काम लगा. फिर उसने सोचा कि अपने भाइयों को टारगेट करती हूँ, पर किस भाई को, छोटे को या बड़े को … यह फिर बहुत मुश्किल सवाल था, बहुत सोचने के बाद उसने फैसला किया कि दोनों पर लाइन मारी जाये, जो पट गया उसी का लंड अपनी चुत में डलवा लूंगी, पर चुदाई तो होकर रहेगी.

पर वो कुछ भी जल्दी में नहीं करना चाहती थी. तो उसने बड़े आराम से सब कुछ सुयोजित किया और भाई बहन सेक्स की योजना के मुताबिक सबसे पहले उसने बड़े भाई पर लाइन मारना चालू किया.

वैसे बता दूँ कि तीनों भाई बहन आपस में काफी खुले हुए थे. चुदाई की बातें तो नहीं होती थी पर एडल्ट जोक्स आपस में बहुत किया करते थे.

अगर वाटसऐप्प पर कोई भी एडल्ट जोक आये तो तीनों आपस में फॉरवर्ड करने में देर नहीं लगाते थे. खुले में तो नहीं, पर तीनों को पता था कि पोर्न मूवी लैपटॉप के किस ड्राइव में कहाँ रखी है.

तीनों ही उस फोल्डर में नयी नयी मूवीज डालकर अपडेट भी करते रहते थे. पर इतना सब के बावजूद भी, कभी भी तीनों में से किसी ने एक दूसरे को गन्दी नज़र से नहीं देखा था. मतलब रिश्ते अभी तक बिल्कुल पवित्र थे.

पर मयूरी ने ठान लिया था कि अब ये सब ऐसे नहीं रहने वाला था.

 
सभी पाठकों को शुभ दिपावली की हार्दिक शुभकामनायें।
 
शाम को विक्रम घर जल्दी आ गया लगभग आठ बजे के आस पास. जबकि रजत अपने दोस्त के साथ मूवी देखने गया था तो वो दस बजे तक आने वाला था। यह बात सबको घर में पता थी. सबने 8:30 बजे तक खाना खाया और मयूरी और विक्रम अपने कमरे में आ गए. अशोक टीवी पर समाचार देख रहा था और शीतल किचन में बर्तन वगैरह कर रही थी.

सरकारी क्वार्टर होने की वजह से घर में ज्यादा जगह नहीं थी. एक कमरे में अशोक और शीतल सोते थे और दूसरा कमरा थोड़ा बड़ा होने की वजह से तीनों भाई-बहन को दिया गया था. तीनों का अलग-अलग बेड था और बीच में आने जाने की थोड़ी-थोड़ी जगह थी, इतनी कि जैसे कोई जैसे-तैसे ही आ-जा सकता था.

मयूरी बीच में सोती थी क्योंकि पिछले कुछ महीनों से दोनों भाइयों में बातचीत बंद थी. विक्रम अपने बिस्तर पर गया और किताब खोलकर बैठ गया. वो शायर सामान्य ज्ञान की कोई किताब पढ़ रहा था. विक्रम ने इस समय हाफ पेंट और टी-शर्ट पहना हुआ था जबकि मयूरी ने भी एक छोटा सा शॉर्ट्स और एक झीना सा टॉप डाला हुआ था जिसके अंदर से उसकी ब्रा लगभग नज़र आ रही थी. मयूरी की चूचियां बहुत ही भारी-भारी थी जिससे अगर कोई गलती से भी उधर एक बार देख ले तो बार-बार देखे.

मयूरी ने अपने योजना का पहला कदम रखने का सोचा, यह उसके लिए एकदम सही समय था. उसने दरवाज़ा को अंदर से बंद किया और अपने हल्के नीले रंग के टॉप के गले को थोड़ा बड़ा करते हुए अपने कंधे तक खींचा जिससे विक्रम की नज़र उसकी छातियों पर जाये.

फिर वो उसके पास गयी और बोली- भैया, अपने कमरे में जाले बहुत हो गए हैं. मैं साफ कर दूँ क्या?

विक्रम- हाँ, कर दे.

मयूरी- ठीक है, मैं पंखा थोड़ी देर के लिए बंद करुँगी.

विक्रम- ठीक है.

मयूरी ने पंखा बंद किया और जाले साफ़ करने के लिए झाड़ू ले आयी. फिर वो तीनों के बिस्तर पर चढ़ कर उछल-उछल कर जाले साफ करने लगी. उसके ऐसे उछलने की वजह से उसके बड़ी-बड़ी चूचियां जोर जोर से हिलने लगी. वास्तव में मयूरी की मंशा भी यही थी. वो और उछल-उछल कर नाटकीय अंदाज़ में अपनी विशाल चूचियां हिला-हिला कर विक्रम का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करने लगी.

थोड़ी देर में कमरे में गर्मी बढ़ी और इस कारण विक्रम ने अपना टी-शर्ट निकाल दिया. अब वो सिर्फ बनियान में था और उसकी मांसल शरीर पसीने में तर-बतर हो रहा था.

मयूरी ने देखा कि विक्रम का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में वो असफल हो रही है तो उसने एक दूसरा दांव मारा.

वो बोली- गर्मी कितनी बढ़ गयी है न? मैं भी अपना टॉप निकाल दूँ क्या अगर तुम्हें कोई ऐतराज़ ना हो तो?

विक्रम ने उसको प्रश्न भरी निगाहों से देखा।

मयूरी फिर बोली थोड़ा समझते हुए नाटकीय अंदाज़ में- भैया…? ऐसे क्या देख रहे हो? मैंने अंदर ब्रा पहन रखी है?

विक्रम- ह..हाँ… फिर ठीक है.

मयूरी- फिर ठीक है मतलब? तुम्हें क्या लगता है, ये बिना ब्रा के संभल जायेंगे?

विक्रम- ये…ये कौन?

मयूरी- भैया, तुम भी ना? ब्रा से कौन सम्भलता है ? तुम क्या…? ये…

और उसने अपनी बड़ी-बड़ी गोल-गोल चूचियों की ओर इशारा किया.

विक्रम थोड़ा सकुचा-सा गया. माना कि वो आपस में खुले हुए थे पर अपने प्राइवेट पार्ट्स के बारे में ज्यादा बात नहीं करते थे.

फिर विक्रम झेंपता हुआ सा बोला- हाँ, मुझे पता है!

मयूरी थोड़ा छेड़ते हुए- क्या पता है?

विक्रम- तू अपना काम करेगी? गर्मी लग रही है बहुत? जल्दी से जाले साफ कर और पंखा चला!

मयूरी- अरे सॉरी, गुस्सा मत हो तुम… अभी करती हूँ.
 
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