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Incest परिवार की लाड़ली complete

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मयूरी- माँ… बात को समझो… वो दोनों भी आपको चोदना चाहते हैं… घर की बात घर में रहेगी बस… पापा तो दिन भर बाहर रहते हैं… किसी को कुछ पता नहीं चलेगा कभी… और अगर पापा को पता चल भी गया किसी तरह से तो वो क्या कर सकते हैं… किसी को बाहर बता तो सकते नहीं… वैसे उनको कभी पता ही नहीं चलेगा… कुछ नहीं होगा माँ!

शीतल- नहीं मयूरी… तेरे पापा को अगर पता चल गया तो गज़ब हो जायेगा.

मयूरी- माँ… अगर उनको पता चल गया तो मैं वादा करती हूँ… कि मैं उनको समझा दूंगी.

शीतल- कैसे… तू कैसे उनको समझा पायेगी बेटा कि उनकी पत्नी अपने खुद के दो बेटों से एक साथ चुदती है?

मयूरी मुस्कुराते हुए- माँ… मैं आपको कम लगती हूँ क्या? मैं जवान हूँ और खूबसूरत हूँ… पापा चाहे जो भी हों… हैं तो एक मर्द ही न… अपनी चूचियां जब उनके आँखों के सामने खोल दूंगी ना तो जीभ बाहर निकलकर कुत्ते की तरह मेरी हर बात मानेंगे… अगर अपनी पैंटी खोलकर अपनी जांघें उनकी नाक के करीब रख दूँ ना… तो जो कहूं वो करेंगे… पापा हैं तो क्या… हैं तो एक मर्द ही न…

शीतल मुस्कुराती हुई- मतलब तू अपने पापा को अपनी चूचियों और चूत से मना लेगी?

मयूरी- हाँ… बिल्कुल!

शीतल- तो एक काम कर… तू अपने पापा को पटाने की कोशिश कर और मैं अपने बेटों को…

मयूरी- क्या बात कर रही हो माँ… मतलब आप अपने पति को मेरे हवाले कर रही हो? आपको जलन नहीं हो रही?

शीतल- जलन कैसी… तू कितने दिन तक मेरे पति को चोद पायेगी… दो या तीन साल… फिर तो तेरी शादी हो जाएगी… तू जाएगी अपने पति के घर… और मेरा पति फिर से सिर्फ मेरा… और बदले में मुझे दो-दो नए लंड मिलेंगे… जीवन भर के लिए.

मयूरी- बात तो एकदम पते की है माँ… क्या सोच है आपकी…

और दोनों नंगी माँ-बेटी जोर से खिलखिला कर हंसने लगी.

फिर शीतल ने अपना अगला सवाल किया- अच्छा एक बात बता?

मयूरी- हाँ.. माँ?

शीतल- मुझे अपने बेटों को पटाने के लिए, उनका लंड अपनी चूत में डलवाने के लिए करना क्या होगा?

मयूरी- आपको कुछ नहीं करना माँ… वो दोनों तो पटे-पटाये हुए हैं… वो दोनों तो पहले से ही आपके लिए पागल हैं… आपको बस उनको अपने इस कामुक शरीर से आमंत्रण देना है कि वो आएं और इसका भोग करें.

शीतल- और ये कैसे होगा?

मयूरी- आप ना बस उनको अपनी इन प्यारी-प्यारी चूचियों के दर्शन कराओ, अपनी इस गांड के दर्शन कराओ और अपने शरीर को उनके शरीर से सटाओ और उनको अहसास कराओ कि आप भी अपना ये शरीर उनके हवाले करना चाहती हैं… और आप तो माँ हैं… आपके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं है… माँ का प्यार दिखने के बहाने महबूबा बन जाओ बस…

और दोनों फिर खिलखिलाकर हंस पड़ी.

अगले एक घंटे में दोनों ने फिर से एक दूसरी के साथ कई बार लेस्बियन सेक्स किया और फिर कपड़े पहन कर तैयार हो गयी क्योंकि विक्रम के घर आने का वक्त हो चला था.

 
कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।
 
मयूरी ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि शीतल को अभी पता ना चले कि वो अपने दोनों भाइयों से पहले से ही चुद रही है और दोनों भाइयों को पता ना चले कि उसका अपनी माँ के साथ लेस्बियन सेक्स का रिश्ता स्थापित हो चुका है और वो उनकी माँ को अपने बेटों से चुदवाने के लिए तैयार कर रही है. मयूरी चाहती थी कि शीतल को पूरी तरह से यह लगे कि उसने अपने बेटों के लंड का शिकार खुद किया है और विक्रम और रजत को यह लगे कि वो अपनी माँ की चूत तक खुद अपने बलबूते पर पहुंचे हैं. वो अपने आपको इन सारी बातों से अलग रखना चाहती थी. पर सत्य तो यही था कि वो खुद ही इस पूरी कहानी की रचयिता थी.

खैर, शीतल अब अपने बेटों को रिझाने की तैयारी में लग गयी. वो अच्छे से तैयार हुई, उसने लो-कट ब्लाउज बैकलेस पहना जिसमें आगे से उसकी चूचियां आधी से भी ज्यादा नज़र आ रही थी और पीछे से उसका पीठ पूरा ही नजर आ रहा था.

उसने अच्छे से मेक-अप किया और एक बढ़िया सी गुलाबी रंग की साड़ी पहनी. शीतल पर गुलाबी रंग बहुत ही ज्यादा फबता था.

इन सब चीज़ों में लगभग दोपहर के डेढ़ बज चुका था. थोड़ी देर बाद विक्रम घर आ गया अपनी कोचिंग क्लास कर के … उसने दरवाजे की घंटी बजायी और मयूरी ने शीतल को दरवाजा खोलने को कहा और उसने बताया कि वो अपने कमरे में जा रही है, तो इस वक्त खुल कर अपने बड़े बेटे पर लाइन मार सकती है.

शीतल ने दरवाजा खोला और बड़े ही कामुक अंदाज में मुस्कुराते हुए उसने विक्रम का स्वागत किया।

शीतल- आ गया मेरा लाडला!

विक्रम- हाँ माँ…

और विक्रम हैरानी से अपनी माँ को देखता रह गया.

शीतल विक्रम को मुँह खोल कर उसको ताड़ते हुए देखती तो है पर जताती नहीं है.

शीतल- आओ अंदर आओ मेरे लाल…

विक्रम- जी माँ…

विक्रम खाने की टेबल पर बैठ गया. शीतल विक्रम के एकदम पास गयी, अपना सीना उसके इतने करीब लेकर गयी कि विक्रम को उसकी मखमली चूचियों का आराम से दर्शन हो सकें और वो उसको खाने को पूछने लगी- भूख लगी है मेरे बेटे को? कुछ खायेगा?

विक्रम तो एकटक बस शीतल की चूचियां देखने में व्यस्त था; अपनी नजरें शीतल की चूचियों पर से बिना हटाए वो बोला- ह… हाँ माँ…

शीतल ने अपने होंठों को अपने दांतों से बड़े ही कामुकता भरे अंदाज़ में काटते हुए पूछा- क्या खायेगा मेरा बेटा?

विक्रम कुछ समझ नहीं पाया और वो थोड़ा घबरा गया, हड़बड़ाते हुए बोला- माँ… जो चाहो वो खिला दो…

शीतल- मैं तो तुम्हें अपना सब कुछ खिला दूँ मेरे लाल…

और ऐसा कहते हुए उसने विक्रम की चेहरा अपने सीने से लगा लिया. विक्रम का चेहरा इस समय अपनी माँ की चूचियों के बीच था. वो शीतल की चूचियों का कोमलता का अहसास तो कर पा रहा था पर कुछ प्रतिक्रिया नहीं कर पा रहा था. वो चाह तो रहा था कि इस समय उठे और अपनी माँ की चूचियों को पकड़ कर अपने मुँह में भर ले… उनको जोर से उमेठ दे और अपनी माँ की रसीले लाल-लाल होंठों का सारा रस पी जाये.

पर वो ऐसा कुछ भी करने की हालात में नहीं था. वो अभी भी यही समझ रहा था कि यह उसकी माँ का उसके प्रति स्नेह है, हवस नहीं.
 
खैर, इसी तरह शीतल अगले कुछ देर तक विक्रम को कभी अपनी चूचियां तो कभी अपनी गांड का दर्शन और स्पर्श कराती रही. फिर खाना खाकर विक्रम अपने कमरे में चला गया.

थोड़ी देर बाद रजत घर आया तो उसको भी अपने माँ का उतना ही प्यार मिला जितना विक्रम को मिला था. पर इससे ज्यादा आज कुछ माँ-बेटों में हो नहीं पाया.

शाम को शीतल ने मयूरी से अकेले में सब कुछ बताया और पूछा- मयूरी, सब ठीक से हो तो रहा है न? कुछ गड़बड़ तो नहीं होगी?

मयूरी- नहीं मेरी प्यारी माँ… आप एकदम सही जा रही हो… आज तो दोनों के होश उड़ गए थे… मैंने अपने कमरे से छुप कर देखा था सब कुछ. आज रात में देखना है कि ये क्या बात करते हैं. मैं कल बताउंगी आपको… फिर आगे उस हिसाब से जारी रखेंगे.

शीतल- ठीक कह रही है तू.

मयूरी- चिंता ना करो माँ… तुम्हें अपने दोनों बेटों के लंड जरूर मिलेंगे… वो भी बहुत जल्द…

शीतल मुस्कुराती हुई- और तेरा बता… अपने बाप से चुदवाने का क्या प्रोग्राम है?

मयूरी- हाँ… मैं भी वही करुँगी जो आप कर रही हो… पहले थोड़ा ललचाऊँगी और फिर धीरे-धीरे अपना दीवाना बनाऊँगी… मुझे पहले अपने पापा को पटाना है… तो थोड़ा वक्त लगेगा… पहले उनके मन में अपने लिए हवस उत्पन्न करनी है… फिर मैं उनको चोदूँगी… इसमें थोड़ा टाइम तो लगेगा ही… पर आपको अपने बेटों के लंड जल्दी मिल जायेंगे.

शीतल- एक काम करते हैं… आज रात में मैं तेरे कमरे में जाकर थोड़ी देर तक अपने बेटों की रिझाऊंगी और उसी वक्त तुम मेरे कमरे में जाकर अपने पापा को अपने हुस्न का जादू दिखाओ… क्या कहती हो?

मयूरी- आईडिया बुरा नहीं है.

और दोनों एक साथ जोर से खिलखिला कर हंस पड़ी.

शीतल फिर रात का खाना बनाने में जुट गयी, मयूरी अपने कमरे में जाकर कमरे का तापमान चेक करने लगी. मयूरी एक बात तो समझ चुकी थी कि आज उसको अपने हुस्न का रंग अपने सगे पिता पर चलाना था. इसलिए उसने थोड़े भड़कीले कपड़े पहने. सबसे पहले तो उसने अपना पैंटी और ब्रा उतारी और एक ढीला सा टॉप और स्कर्ट पहन लिया जिसमें उसका जिस्म बहुत ही ज्यादा कामुक दिख रहा था. चलने पर उसकी चूचियां मस्त हिल रही थी और किसी का भी ध्यान आकर्षित करने की क्षमता रखती थी. पैंटी ना पहनने की वजह से जब भी स्कर्ट ऊपर होती, उसकी चूत दिखने लग जाती.
 
फिर उसने अपने दोनों भाइयों को अपने पास बुलाकर बातचीत शुरू की- एक बात पूछूं?

विक्रम और रजत एक साथ- हाँ पूछ…

मयूरी- आज माँ कुछ ज्यादा हॉट नहीं लग रही है?

विक्रम- हाँ यार… और मुझे तो कुछ अलग ही लग रही थी. पर मुझे बड़ा मजा आया एक बात से…

रजत- किस बात से भाई?

विक्रम- माँ ने मुझे अपने सीने से लगा लिया था आज और मैं उनको चूचियों में जैसे खो गया था. मेरा तो मन कर रहा था कि पकड़ के मसल दूँ उनकी चूचियों को…

रजत- क्या बात है भाई… आज तो माँ मुझे भी ऐसे ही कुछ प्यार दिखा रही थी.

मयूरी- तुम लोगों को इस से कुछ समझ आता है क्या?

विक्रम- क्या?

मयूरी- मुझे लगता है कि माँ को नए लंड की तलाश है… और वो बाहर लंड ढूँढना नहीं चाहती… बदनामी की वजह से जैसे मैंने तुम लोगों को अपनी चूत चोदने का मौका दिया… इसी कारण से…

विक्रम- क्या बात कर रही हो… ऐसा थोड़ी ना है?

रजत (खुश होते हुए)- हाँ… पर भाई… अगर ऐसा हुआ तो?

मयूरी- फिर तो मजे आ जायेंगे… तुम दोनों घर में खुलकर कभी अपनी माँ को चोदो और कभी अपनी बहन को…

विक्रम- हाँ… और फिर हम माँ की एक बार चुदाई करने के बाद उनको ये भी बता सकते हैं कि हम तीनों भाई-बहन एक-दूसरे की खूब चुदाई करते हैं.

रजत- बिल्कुल सही… और फिर हम खुले में घर में चुदाई कर सकते हैं.

मयूरी- हाँ… फिर हमें रात को चुपके-चुपके चुदाई करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.

विक्रम थोड़ा उदास होते हुए- पर अगर हम गलत सोच रहे हों तो.. मन लो ऐसा नहीं हुआ तो?

मयूरी कुछ सोचते हुए- वैसे तुम लोगों का मन नहीं करता कि तुम दोनों मम्मी की चूत की चुदाई करो? एक साथ!

रजत- मैं सच्ची बताऊँ, मेरा तो बहुत मन करता है कि मैं माँ का दूध जोर से दबा दूँ और भाई पीछे से मम्मी को पकड़ कर उसकी चूत में उंगली डाल कर मजे ले. फिर दोनों भाई एक साथ अपनी मां की चुदाई करें.

विक्रम- हाँ.. मेरा भी बहुत मन करता है माँ की चुदाई करने का… पर ये पता नहीं संभव होगा या नहीं.

मयूरी- तुम लोग मायूस मत हो… ईश्वर ने चाहा तो शायद माँ तुम दोनों का लंड एक साथ चूसे… और क्या पता मां भी ऐसा ही चाहती हो?

विक्रम- क्या सच में… म… मतलब ऐसा हो सकता है क्या?

मयूरी- हाँ.. क्यूँ नहीं… मतलब जैसे मेरे मन में तुम दोनों से चुदने की इक्षा हो सकती है वैसे उनके मन में भी हो सकती है.

रजत- तो ये पता कैसे चलेगा?

मयूरी- तुम दोनों को कोशिश करनी होगी… लेकिन मैं उसके पहले तुम दोनों को जैसे जैसे बताऊँगी वैसे-वैसे ही करना होगा.
 
रजत- क्या करना होगा?

मयूरी- तुम दोनों ना, थोड़ा माँ के करीब जाओ. उनको यहाँ-वहाँ छूकर अपने मन की बात का अहसास भी कराओ और उनके मन को भी पढ़ने की कोशिश करो. ऐसा करने से तुम्हें यह पता भी चल जायेगा कि वो क्या चाहती हैं. और अगर उचित संकेत मिला तो तुम फिर अपना अगला कदम रखोगे.

विक्रम- कौन सा अगला कदम?

मयूरी- अरे… तुम लोग बहुत भोले हो… माँ एक औरत है… तो वो तुम्हारे सामने अचानक से नंगी होकर तो नहीं आ जाएगी और कहेगी कि मुझे अपने लंड से चोद दो?

विक्रम- हाँ… ये बात तो है… फिर?

मयूरी- तुम पहले अपनी हरकतों से उसको ये बताओ कि तुम भी यही चाहते हो. थोड़ा रिझाओ उनको अपनी मर्दानगी से…

विक्रम- मतलब कैसे?

मयूरी- ओफ्फोह… अरे तुम लोग भी न… अच्छा सुनो… तुम ना किसी तरह उनको अपने खड़े लंड के दर्शन कराओ उनको… जिससे उनकी तुमसे चुदाने की तमन्ना और भड़के…

विक्रम (जैसे समझते हुए)- ओ… हाँ… मैं समझ गया…

मयूरी (दोनों को अपने सीने से लगते हुए)- मेरे प्यारे भाई… जल्दी ही तुम अपनी माँ की चूत का भी स्वाद ले रहे होंगे…

और फिर दोनों भाई थोड़ी देर तक मयूरी की चूचियों और चूत से खेले. फिर मयूरी अपने कमरे से बाहर निकली और रसोई में जाकर अपनी माँ को, जो खाना पकने में व्यस्त है, पीछे से गले लगाया और अपनी भारी चूचियां उसकी पीठ में जोर से दबा दी और उसकी चूचियों को अपने हाथों से मसल दिया.

शीतल- आह… क्या हुआ मेरी जान… क्या इरादा है?

मयूरी- माँ… तुम्हारे दोनों बेटे तुम्हें चोदने के लिए मरे जा रहे हैं… अभी मैं जब बाथरूम में थी तो उनको बात करते हुए सुना… आज दिन में तो आपने दोनों पर खूब कहर ढाया.

शीतल (मुस्कुराते हुए)- क्या वाकयी?

मयूरी- हाँ मेरी प्यारी माँ… हाँ… अब तुम थोड़ी देर में उनके पास जाओ और उनके थोड़ा और नजदीक जाने की कोशिश करो… मैं अपने मिशन पर जा रही हूँ… पापा के पास… अपने हुस्न का जादू चलाने…

शीतल मुस्कुराते हुए- ठीक है… मैं भी थोड़ी देर में उनके पास जाकर थोड़ा अपने अंगो का थोड़ा और प्रदर्शन करती हूँ.

ऐसा कहते हुए शीतल अपने बेटों के कमरे की तरफ चली गयी और उसी क्षण मयूरी अपने पिता के कमरे की तरफ बढ़ गयी.
 
शीतल जब बच्चों के कमरे में गयी तो वो पढ़ाई कर रहे थे. विक्रम और रजत दोनों ने अपनी माँ को ध्यान से देखा. आखिर आज जो अनोखा प्यार शीतल ने अपने बेटों पर बरसाया था, उसका असर तो था ही, साथ ही साथ मयूरी ने भी इनको अपनी माँ की चुदाई के लिए उकसाया हुआ था. दोनों हवस भरी निगाहों से अपनी माँ को देख रहे थे.

शीतल विक्रम के पास गयी और उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए पूछने लगी- पढ़ाई कर रहा है मेरा बेटा?

विक्रम- हाँ माँ…

शीतल- मैं थोड़ी देर तुम दोनों के साथ बैठ सकती हूँ?

विक्रम- हाँ माँ… क्यूँ नहीं?

शीतल- ओके…

और ऐसा कहते हुए शीतल विक्रम के बिस्तर पर बैठ गयी. बैठते हुए उसने अपनी नाइटी को नीचे से उठाकर अपनी जाँघों तक ऊपर कर दिया जिससे उसकी दोनों गोरी-गोरी मांसल टाँगें नंगी हो गयी. उसने नाइटी को पीछे से अपनी गांड तक उठा कर कुछ इस तरह पीछे कर दिया कि अगर कोई चाहे तो नाइटी का कपड़ा अगर पीछे से उठा दे तो उसके बैठे होने के वावजूद उसकी गांड को नंगी किया जा सकता था. आगे से तो उसकी जांघें पूरी तरह दिख ही रही थी.

वो जानबूझकर ही ऐसा किया ताकि अपने जवान बेटों का ध्यान आकर्षित कर पाए.

विक्रम और रजत भी इन सब चीजों के लिए बिल्कुल तैयार थे. उनका अनुमान अब अपनी माँ से सेक्स की इच्छा को लेकर और ज्यादा दृढ़ हो रहा था.

बैठते हुए शीतल ने रजत को अपने पास बुलाया- रजत, इधर आओ बेटा… अपनी माँ के पास बैठो थोड़ी देर…

रजत- हाँ माँ… अभी आया!

और ऐसा कहकर रजत विक्रम के बिस्तर की ओर आकर माँ की बगल में बैठ गया जबकि विक्रम अपनी अगली चाल चलना चाह रहा था.

विक्रम- माँ…

शीतल- हाँ बेटा?

विक्रम- क्या मैं आपकी गोद में अपना सर रखकर थोड़ी देर सो सकता हूँ?

शीतल- क्यूँ नहीं बेटा… जरूर!

और विक्रम ने अब अपनी माँ की नंगी गोद में अपना सर कुछ इस तरह रखा कि उसका चेहरा अपनी माँ की चूत की तरफ हो और शीतल ने उसको बड़े प्यार से ये सब करने भी दिया. साथ ही शीतल अपना एक हाथ उसके सर पर रखकर उसके बालों को सहलाने लगी. रजत अपनी माँ की बगल में बैठा था इसलिए उसने अपना सर अपनी माँ के सीने पर रख लिया.

विक्रम का चेहरा अपनी माँ की चूत से बस दो इंच के फैसले पर था. वो अपनी माँ की चूत की गंध को महसूस कर पा रहा था. थोड़ी देर तक ऐसे ही पड़े रहने के बाद उसने अपना चेहरा थोड़ा और अंदर डालने की कोशिश की और शीतल ने इसमें उसका पूरा साथ देते हुए अपनी टाँगें खोलकर उसकी पूरी सहायता की.

विक्रम के होंठ अब अपने माँ की चूत पर थे. उसने अपने होंठों से बिना अपने चेहरे हो हिलाये डुलाये अपनी माँ की चूत को चूम लिया.

 
शीतल के मुँह से आह निकल गयी पर विक्रम ने इस पर जरा भी ध्यान नहीं दिया, वो अपने काम में लगा रहा अपने होंठ और जबान से अपनी माँ की चूत का रसपान करने में!

शीतल के हाथ विक्रम के सर पर थे, उसने उत्तेजना की वजह से विक्रम के सर को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया.

इधर रजत शीतल के सीने पर पड़े पड़े अपने एक हाथ को शीतल के पीछे ले जाकर उसकी गांड को धीरे-धीरे सहलाने लगा. जब शीतल ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो उसका साहस और बढ़ गया, वो उसकी गांड को जोर जोर से दबाने लगा.

फिर थोड़ी ही देर में उसने अपने एक हाथ से शीतल के एक हाथ को अपने लंड के ऊपर रख दिया. शीतल शॉर्ट्स के ऊपर से ही रजत के लंड को धीरे धीरे सहलाने लगी.

शीतल इस समय अपने दोनों बेटों को प्यार करने के बहाने अपनी हवस मिटाने में लगी हुई थी. विक्रम अब जोर-जोर से अपनी माँ की चूत को चाट रहा था. इस अवस्था में बहुत देर तक तीनोंमाँ-बेटों ने खूब मजा लिया. शीतल की चूत ने इतने देर में 1-2 बार पानी छोड़ दिया था. विक्रम ने जितना हो सका, अपनी माँ की चूत से निकला हुआ पानी चाट लिया और बाकी वहीं बिस्तर पर गिर गया था.

रजत ने इस बीच में अपने एक हाथ से अपनी माँ की चूचियों को भी काफी देर तक दबाया.

फिर एक लम्बी ख़ामोशी के बाद शीतल को लगा कि अब अगर वो थोड़ी देर और रुकी तो या तो उसके बेटे उसको अभी पटक कर चोद देंगे या वो खुद ही उनको पकड़कर उनको चोद देगी.

फिर उसने अपनी भावनाओं पर पता नहीं क्यूँ नियंत्रण किया और अपने बेटों को कहा- विक्रम, रजत…

रजत- हाँ माँ?

विक्रम अभी भी अपनी माँ की चूत चाटने में व्यस्त था और उसकी जबान शीतल के चूत के अंदर था इसलिए वो जवाब भी नहीं दे पाया. वही रजत एक हाथ से शीतल की गांड को और दूसरे हाथ से उसकी एक चूची को दबाने में व्यस्त था. शीतल अपने एक साथ से विक्रम का सर सहला रही थी और दूसरे हाथ से रजत का लंड.

शीतल- तुम लोगों को भूख नहीं लगी क्या? खाना तैयार है.

रजत- हाँ माँ… थोड़ी देर और बैठो न.. फिर खाना खाने चलते हैं… आप बड़े दिनों बाद हमारे साथ बैठी हो… बहुत अच्छा लग रहा है.

शीतल- अरे.. मैं कहीं भागी थोड़ी ना जा रही हूँ… अब रोज़ ऐसे तुम दोनों के साथ बैठूंगी… चलो अब खाना खा लो.
 
विक्रम अपना मुँह शीतल के चूत से अलग करता है और फिर अपना मुँह पौंछते हुए बोला- ठीक है माँ… चलो.

फिर तीनों उठे और शीतल अपने कपड़े ठीक करती हुए कमरे से मुस्कुराती हुई बाहर निकल गयी. तीनों को इस बात की पुष्टि हो चुकी थी कि अब जल्दी ही माँ-बेटों की चुदाई होने वाली है और आपस में पूरी सहमति है.

शीतल को भी यह बात स्पष्ट हो चुकी थी कि उसके दोनों बेटे अपनी मॉम को एक साथ ही चोदने वाले हैं. फिर वो अपने कमरे की तरफ बढ़ गयी यह जानने के लिए कि उसकी बेटी अपने बाप को फंसाने में कहाँ तक कामयाब हुई है.

जब बेटे अपने माँ के बदन से खेलने में लगे थे, ठीक उसी समय मयूरी ने जब अपने पापा अशोक के कमरे में प्रवेश किया तो अशोक अपने बिस्तर पर तकिये को सिरहाने से लगाकर, उस पर आधा लेटने और आधा बैठने की अवस्था में बड़ी ही गहनता के साथ कोई किताब पढ़ रहा था. उस बेचारे को तो यह पता भी नहीं था कि उसके किस्मत में अब क्या आने वाला है, उस पर तो अब साक्षात् कामदेवी की कृपा बरसने वाली थी.

मयूरी ने अंदर कमरे में घुसते हुए अपने पापा को आवाज़ दी- पापा?

पापा- हाँ बेटा?

मयूरी- आप पढ़ाई कर रहे हैं?

पापा- हाँ बेटा… कुछ काम था?

मयूरी- नहीं… मुझे लगा कि आप आजकल मुझ पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं… मुझे प्यार भी नहीं करते पहले की तरह… तो आपसे बात करी जाये!

पापा- ऐसा नहीं है बेटा… पापा आपसे बहुत प्यार करते हैं… पर थोड़ा बिजी होते हैं आजकल… और आप काफी बड़ी हो गयी हैं… तो आपको गोद में उठाकर पहले की तरह प्यार भी नहीं कर सकते.

मयूरी इतना सुनते ही जोर जोर से उछलने और पैर पटकने लगी और बच्चों की तरह जिद करने लगी- नहीं… नहीं… नहीं… मैं बड़ी नहीं हुई हूँ… आप बस मुझे प्यार नहीं करते.

उसके ऐसे उछलने और बच्चों की तरह जिद करने से पापा को पहले तो उस पर बड़ा प्यार आया लेकिन अगले ही पल उनकी नजर और नजरिया दोनों उस सामने जिद से नाच रही लड़की को लेकर बदल गया. थोड़ी देर पहले जो लड़की उसे अपनी बेटी नजर आ रही थी अब उसमें उनको कुछ और नजर आता है. मयूरी जब बच्चों की तरह जिद करते हुए नाच रही थी तो उछलने की वजह से उसकी गोल-गोल भारी चूचियां जोर-जोर से ऊपर-नीचे हो रही थी.

इसके दो प्रमुख कारण थे- एक तो उनका साइज और आकर बहुत बड़ा था और दूसरा कि मयूरी ने सपोर्ट के लिए अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी. साथ-ही-साथ ऊपर नीचे कूदने की वजह से उसकी छोटी सी स्कर्ट जो पहले ही पड़ी मुश्किल से उसकी चूत और जाँघों को ढक पा रही थी, बार-बार हवा में ऊपर ही रह जा रही थी और उससे मयूरी की जांघें और गांड बिल्कुल नंगी सामने से नजर आ रही थी.

अशोक को अपने बेटी की चूत तो नहीं दिख रही थी क्योंकि वो जांघों में नीचे कहीं छुपी हुई थी और वो अपने आँखें फाड़-फाड़ कर अपनी बेटी के सामने ही उसकी चूत में नजर भी नहीं डाल सकता था, पर गांड और उछलती हुई चूचियों पर से वो अपने ध्यान हटा नहीं पा रहा था.

और इस अवस्था में बेटी मयूरी को देखकर अशोक बिल्कुल अवाक् से रह गया. थोड़ी देर तक कुछ समझ नहीं पाया कि क्या करना है. इतनी कामुक लड़की देखकर उसका मन किया कि वो उठे और जाकर बेटी की दोनों चूचियों को जोर से पकड़कर मसल दे और उसका वो टॉप फाड़कर अपनी बेटी को नंगी कर दे… स्कर्ट ऊपर-नीचे होने से उसको यह भी पता चल गया कि मयूरी ने अभी पैंटी नहीं पहनी हुई है. उसका मन किया कि वो उसकी स्कर्ट को तुरंत फाड़कर उसके जिस्म से अलग करके उसको एकदम नंगी करके उसकी चूत और गांड को खूब चूमे और चुदाई करे.

पर थोड़ी देर ऐसे ही ताड़ने के बाद अगले ही पल उसके अंदर का पिता जाग गया और उसको ख्याल आया कि यह लड़की उसकी अपनी बेटी है… उसने अपने मन पर नियंत्रण किया और हँसते हुए उसको शांत करने के लिए बोला- अच्छा… अच्छा… ठीक है… आप शांत हो जाइये… और बताइये आपको क्या चाहिए?

मयूरी इठलाती हुई- पापा… मुझे प्यार करो… पहले की तरह… अपने गोद में बिठाकर!

पापा- अरे… ओहो… ऐसे कैसे मैं तुम्हें अपने गोद में बिठा सकता हूँ… तुम अब!

मयूरी बात को बीच में काटते हुए- मैं बताती हूँ कैसे…

और वो ऊपर बिस्तर पर चढ़ने लगी और बोली- पापा… मैं आपकी गोद में बैठने आ रही हूँ.

ऐसा कहते हुए वो बिस्तर पर चढ़ कर खड़ी हो गाती और पापा के हाथ से किताब छीन कर बगल में पटक दी.

 
इस समय स्थिति कुछ इस तरह है: पापा उसी अवस्था में आधे बैठे और आधे लेटे हुए हैं, मयूरी अपनी दोनों गोरी और लम्बी टाँगों को, जो बिल्कुल नंगी और आकर्षक हैं, अपना पापा के दोनों तरफ किये हुए है, इससे अशोक अब मयूरी की दोनों टांगों के बीच में बैठा हुआ है और मयूरी उसके ठीक सामने खड़ी है. इस अवस्था में खड़े होने की वजह से अशोक का चेहरा मयूरी किए घुटनों के समीप है और मयूरी की स्कर्ट बहुत छोटी होने की वजह से उसकी जांघों और चूत के आस-पास की जगह का अशोक बड़े आराम से दर्शन कर पा रहा था.

मयूरी ने इस वक्त का नियंत्रण पूरी तरह से अपने हाथ में लिया हुआ था, उसको पता था कि अब उसके पापा उसके इस कामुक और आकर्षण शरीर के हवस जाल में पूरी तरह फंस चुके हैं. अगर ऐसा नहीं होता तो वो अब तक मयूरी को जोर से डाँट चुके होते उसकी ऐसी हरकतों के लिए. पर ऐसा कुछ हुआ नहीं है अब तक, मतलब वो अपने पापा को अपने प्रेमजाल में फंसाने में कामयाब रही है. इसी आत्मविश्वास के साथ वो आगे बढ़ी और अपना अगला साहसी कदम रखने लगी.

 
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