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Guest
शीतल अपने कमरे में जहाँ वो अशोक के साथ सोती थी और रोज़ अलग-अलग अंदाज़ में चुदवाती थी, वहाँ का बिस्तर ठीक कर रही थी. मयूरी पीछे से जाकर अपने माँ को गले लगाती है जैसे बच्चे अपनी माँ में लाड़-प्यार से चिपक जाते हैं. पर आज मयूरी के मन में वैसा प्यार नहीं बल्कि हवस और वासना ने जगह ले रखी थी.
शीतल अब भी बिस्तर ठीक कर रही थी, मयूरी शीतल से पीछे से चिपकते हुए उसके गर्दन वाले भाग पर प्यार भरा चुम्बन देते हुए बोली बच्चों की तरह ठुमकते हुए- माँ…
शीतल- हाँ बेटा, उठ गया मेरा बच्चा?
मयूरी- हाँ माँ… पर…
शीतल- हाँ.. बोलो बेटा…
मयूरी- माँ… आज मेरे बदन में बहुत दर्द हो रहा है.
शीतल चिंतित होते हुए- क्या हुआ बेटा… सब ठीक है ना?
मयूरी- हाँ माँ.. बस थोड़ा बदन दुःख रहा है.
शीतल- मालिश कर दूँ तेरे बदन की?
मयूरी- हाँ माँ… प्लीज कर दो… बहुत दुःख रहा है.
शीतल- ठीक है… तुम कपड़े उतारो और लेट जाओ… मैं तेल लेकर आती हूँ.
मयूरी खुशी से- ओके मेरी प्यारी माँ…
और शीतल रसोई की तरफ बढ़ गयी.
इतनी देर में मयूरी ने अपना टॉप और शॉर्ट्स निकाल दिया. फिर उसके मन में कुछ ख्याल आया और उसने अपनी ब्रा और पैंटी भी निकाल दी और पास में पड़ा एक तौलिया लपेट लिया.
उसको पता है कि तौलिये में उसका शरीर और भी मादक और कामुक लगता है. उसकी ये विशाल चूचियां और ये बड़े-बड़े चूतड़ आधे से भी ज्यादा बाहर दिख रहे होते हैं. उसकी गोरी गोरी मांसल जांघें जैसे चमक रही होती हैं और इन सब चीजों पर से इंसान तो क्या फ़रिश्तों की भी नज़र नहीं हट सकती.
इतनी देर में शीतल रसोई से एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर कमरे में दाखिल हुई. शीतल मयूरी को ऐसे देख अवाक्-सी रह गयी. ऐसा नहीं है की उसने मयूरी को पहले कभी नंगी नहीं देखा था पर अभी पता नहीं क्यूँ वो बहुत ही कामुक लग रही थी और शीतल को इतनी हसीं लड़की को देखकर अपने शरीर में एक अलग तरह का गनगनाहट महसूस हुई, उसका मुँह खुला का खुला ही रह गया.
मयूरी, उसकी अपनी बेटी आज उसको कुछ अलग ही तरह की खूबसूरत लग रही थी. वो उसके शरीर में कुछ नयी भावनाओं और तरंगों को जागते हुए महसूस कर पा रही थी.
इतनी देर एकटक देखने के बाद मयूरी ने अपने सवाल से शीतल की तन्द्रा तोड़ी- माँ… मैं लेट जाऊँ?
शीतल जैसे नींद से जागते हुए- ह.. हाँ… तुम लेट जाओ…
मयूरी अपनी माँ के इस व्यव्हार को अच्छे से नोटिस करती है और वो समझ गयी कि उसकी चाल एकदम सही दिशा में है.
पर वो बिना कुछ व्यक्त किये चुपचाप बिस्तर पर सीधा लेट गयी जिससे उसका चेहरा, चूचियां और चूत ऊपर की दिशा में हों और शीतल को दिखाई दें.
शीतल अब भी बिस्तर ठीक कर रही थी, मयूरी शीतल से पीछे से चिपकते हुए उसके गर्दन वाले भाग पर प्यार भरा चुम्बन देते हुए बोली बच्चों की तरह ठुमकते हुए- माँ…
शीतल- हाँ बेटा, उठ गया मेरा बच्चा?
मयूरी- हाँ माँ… पर…
शीतल- हाँ.. बोलो बेटा…
मयूरी- माँ… आज मेरे बदन में बहुत दर्द हो रहा है.
शीतल चिंतित होते हुए- क्या हुआ बेटा… सब ठीक है ना?
मयूरी- हाँ माँ.. बस थोड़ा बदन दुःख रहा है.
शीतल- मालिश कर दूँ तेरे बदन की?
मयूरी- हाँ माँ… प्लीज कर दो… बहुत दुःख रहा है.
शीतल- ठीक है… तुम कपड़े उतारो और लेट जाओ… मैं तेल लेकर आती हूँ.
मयूरी खुशी से- ओके मेरी प्यारी माँ…
और शीतल रसोई की तरफ बढ़ गयी.
इतनी देर में मयूरी ने अपना टॉप और शॉर्ट्स निकाल दिया. फिर उसके मन में कुछ ख्याल आया और उसने अपनी ब्रा और पैंटी भी निकाल दी और पास में पड़ा एक तौलिया लपेट लिया.
उसको पता है कि तौलिये में उसका शरीर और भी मादक और कामुक लगता है. उसकी ये विशाल चूचियां और ये बड़े-बड़े चूतड़ आधे से भी ज्यादा बाहर दिख रहे होते हैं. उसकी गोरी गोरी मांसल जांघें जैसे चमक रही होती हैं और इन सब चीजों पर से इंसान तो क्या फ़रिश्तों की भी नज़र नहीं हट सकती.
इतनी देर में शीतल रसोई से एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर कमरे में दाखिल हुई. शीतल मयूरी को ऐसे देख अवाक्-सी रह गयी. ऐसा नहीं है की उसने मयूरी को पहले कभी नंगी नहीं देखा था पर अभी पता नहीं क्यूँ वो बहुत ही कामुक लग रही थी और शीतल को इतनी हसीं लड़की को देखकर अपने शरीर में एक अलग तरह का गनगनाहट महसूस हुई, उसका मुँह खुला का खुला ही रह गया.
मयूरी, उसकी अपनी बेटी आज उसको कुछ अलग ही तरह की खूबसूरत लग रही थी. वो उसके शरीर में कुछ नयी भावनाओं और तरंगों को जागते हुए महसूस कर पा रही थी.
इतनी देर एकटक देखने के बाद मयूरी ने अपने सवाल से शीतल की तन्द्रा तोड़ी- माँ… मैं लेट जाऊँ?
शीतल जैसे नींद से जागते हुए- ह.. हाँ… तुम लेट जाओ…
मयूरी अपनी माँ के इस व्यव्हार को अच्छे से नोटिस करती है और वो समझ गयी कि उसकी चाल एकदम सही दिशा में है.
पर वो बिना कुछ व्यक्त किये चुपचाप बिस्तर पर सीधा लेट गयी जिससे उसका चेहरा, चूचियां और चूत ऊपर की दिशा में हों और शीतल को दिखाई दें.