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Incest परिवार की लाड़ली complete

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शीतल अपने कमरे में जहाँ वो अशोक के साथ सोती थी और रोज़ अलग-अलग अंदाज़ में चुदवाती थी, वहाँ का बिस्तर ठीक कर रही थी. मयूरी पीछे से जाकर अपने माँ को गले लगाती है जैसे बच्चे अपनी माँ में लाड़-प्यार से चिपक जाते हैं. पर आज मयूरी के मन में वैसा प्यार नहीं बल्कि हवस और वासना ने जगह ले रखी थी.

शीतल अब भी बिस्तर ठीक कर रही थी, मयूरी शीतल से पीछे से चिपकते हुए उसके गर्दन वाले भाग पर प्यार भरा चुम्बन देते हुए बोली बच्चों की तरह ठुमकते हुए- माँ…

शीतल- हाँ बेटा, उठ गया मेरा बच्चा?

मयूरी- हाँ माँ… पर…

शीतल- हाँ.. बोलो बेटा…

मयूरी- माँ… आज मेरे बदन में बहुत दर्द हो रहा है.

शीतल चिंतित होते हुए- क्या हुआ बेटा… सब ठीक है ना?

मयूरी- हाँ माँ.. बस थोड़ा बदन दुःख रहा है.

शीतल- मालिश कर दूँ तेरे बदन की?

मयूरी- हाँ माँ… प्लीज कर दो… बहुत दुःख रहा है.

शीतल- ठीक है… तुम कपड़े उतारो और लेट जाओ… मैं तेल लेकर आती हूँ.

मयूरी खुशी से- ओके मेरी प्यारी माँ…

और शीतल रसोई की तरफ बढ़ गयी.

इतनी देर में मयूरी ने अपना टॉप और शॉर्ट्स निकाल दिया. फिर उसके मन में कुछ ख्याल आया और उसने अपनी ब्रा और पैंटी भी निकाल दी और पास में पड़ा एक तौलिया लपेट लिया.

उसको पता है कि तौलिये में उसका शरीर और भी मादक और कामुक लगता है. उसकी ये विशाल चूचियां और ये बड़े-बड़े चूतड़ आधे से भी ज्यादा बाहर दिख रहे होते हैं. उसकी गोरी गोरी मांसल जांघें जैसे चमक रही होती हैं और इन सब चीजों पर से इंसान तो क्या फ़रिश्तों की भी नज़र नहीं हट सकती.

इतनी देर में शीतल रसोई से एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर कमरे में दाखिल हुई. शीतल मयूरी को ऐसे देख अवाक्-सी रह गयी. ऐसा नहीं है की उसने मयूरी को पहले कभी नंगी नहीं देखा था पर अभी पता नहीं क्यूँ वो बहुत ही कामुक लग रही थी और शीतल को इतनी हसीं लड़की को देखकर अपने शरीर में एक अलग तरह का गनगनाहट महसूस हुई, उसका मुँह खुला का खुला ही रह गया.

मयूरी, उसकी अपनी बेटी आज उसको कुछ अलग ही तरह की खूबसूरत लग रही थी. वो उसके शरीर में कुछ नयी भावनाओं और तरंगों को जागते हुए महसूस कर पा रही थी.

इतनी देर एकटक देखने के बाद मयूरी ने अपने सवाल से शीतल की तन्द्रा तोड़ी- माँ… मैं लेट जाऊँ?

शीतल जैसे नींद से जागते हुए- ह.. हाँ… तुम लेट जाओ…

मयूरी अपनी माँ के इस व्यव्हार को अच्छे से नोटिस करती है और वो समझ गयी कि उसकी चाल एकदम सही दिशा में है.

पर वो बिना कुछ व्यक्त किये चुपचाप बिस्तर पर सीधा लेट गयी जिससे उसका चेहरा, चूचियां और चूत ऊपर की दिशा में हों और शीतल को दिखाई दें.
 
शीतल मयूरी में आज पता नहीं क्यूँ … पर अपनी वो छोटी सी, प्यारी-सी बेटी नहीं देख पा रही थी, बल्कि वो एक खूसबूरत नायब औरत देख रही थी जो उसकी काम-इच्छाओं को जागृत कर रही थी. उसके चेहरे के भाव बदल रहे थे और वो इन भावों को दिखाना नहीं चाहती थी इसलिए उसने मयूरी को कहा- तुम उल्टी लेट जाओ.. पहले तुम्हारे पीठ की मालिश कर दूँ.

मयूरी- ठीक है माँ!

और मयूरी उल्टी होकर लेट गयी.

पर अब बात और भी बिगड़ने वाली थी क्योंकि पीठ की मालिश करने के लिए तौलिये को उतारना जरूरी था. शीतल पता नहीं क्यूँ … पर आज थोड़ा घबरा रही थी मयूरी से ये कहने में कि अपना तौलिया उतार दे.

पर थोड़ी देर सोचने के बाद उसने हकलाते हुए धीरे से कहा- अ… अपना ये… ये… तौलिया… उतार दे.

मयूरी उसके भावों के बदलाव को अच्छे से नोटिस कर रही थी पर कुछ बिना व्यक्त किये हुए उसने अपना तौलिया उतार कर बगल में रख दिया. अब शीतल के सामने मयूरी एकदम आदमजात नंगी लेटी हुई थी. शीतल मयूरी की इस नायब शरीर का निरीक्षण करने में लग गयी कि ईश्वर ने कितनी फुर्सत से बनाया होगा. मयूरी की पीठ का आकार बहुत की प्रभावशाली था और उसकी गांड तो बस… कमाल की थी.

अपने भावनाओं को काबू करने की कोशिश करते हुए शीतल अपने हाथ में थोड़ा से तेल लेकर मयूरी के पीठ पर लगाकर मालिश करना शुरू किया. पर आज इस मालिश में शीतल को एक अलग ही प्रकार का आनन्द आ रहा था. एक तो वो समझ नहीं पा रही थी कि किसी स्त्री के प्रति उसका ये आकषण इतना तेज़ क्यूँ है… और वो भी अपने खुद की बेटी के ऊपर… पर जो भी हो, आज उसको मयूरी के पीठ की मालिश करने में एक अलग ही मजा आ रहा था.

इधर शीतल भी इसका सम्पूर्ण आनन्द ले रही थी.

थोड़ी देर पीठ की मालिश करने के बाद शीतल का हाथ अपने आप ही मयूरी के गांड की गोलाइयों पर चला गया और वो बड़े प्यार से उनका मालिश करने में लग गयी. उसे पता ही नहीं चला कि कब वो पीठ की मालिश करते करते मयूरी के गांड की तरफ मुड़ गयी और वो अपने धुन में उसकी गांड की मखमल जैसी सतह हो बड़े प्यार से मालिश करते-करते उसकी गांड की छेद में भी अपना हाथ डालने लगी. शीतल ने मयूरी के गांड के छेद वाले जगह की गर्मी को महसूस किया और इस से उसकी काम वासना और भी बढ़ रही थी.

इसी बीच उसने मयूरी की जांघों को भी मसलना शुरू कर दिया था. शीतल को एक बात का पूरा फायदा मिल रहा था कि मयूरी अभी उसके चेहरे का भाव नहीं देख पा रही थी और इस वजह से वो एकदम बिंदास होकर ये करने का आनन्द लेने में व्यस्त थी.

एक बार अनायास ही उसके एक उंगली मयूरी के गांड की छेद में डाल दी, इससे मयूरी चिहुंक सी पड़ी और शीतल को जैसे अपने पकड़े जाने का एहसास हुआ. उसने अपने भाव छुपाते हुए बात को बदलने के मन से मयूरी को तुरंत ही पलट जाने को कहा.

मयूरी तुरंत ही पलट गयी और अब शीतल के सामने जो नज़ारा था, वो उसको बहुत ही ज्यादा उत्तेजित कर रहा था. अब वो मयूरी की दो विशाल चूचियों का बिकुल सामने से दर्शन कर पा रही थी, साथ ही साथ वो उसकी चूत और उसके आस-पास के क्षेत्र जैसे गोरी-गोरी जांघों को बिल्कुल सामने से देख पा रही थी. पर अपने स्थिति पर काबू करते हुए उसने अपने हाथ में तेल लेकर मयूरी के पेट पर लगाया और मालिश करने में लग गयी.

पर पेट पर वो कितनी देर तक मालिश करती, थोड़ी ही देर में उसको मयूरी की उन विशाल चूचियों का रुख करना पड़ा. जब शीतल ने मयूरी की चूचियों की मालिश शुरू की तो उसको बहुत ही ज्यादा आनन्द आ रहा था. पर इस बात से मयूरी भी अप्रभावित नहीं रह पायी और उसके मुँह से भी आनन्द के स्वर में आहें निकलने लगी.
 
मयूरी- आह… आह..

शीतल- क्या हुआ…

मयूरी- कुछ नहीं माँ… बहुत मजा आ रहा है.

शीतल चुप रही और मयूरी की चूचियों को मसलती रही. फिर थोड़ी देर में मयूरी ने बातचीत शुरू किया।

मयूरी- माँ…

शीतल- ह.. हाँ… बेटा…

मयूरी- बहुत दिन से एक बात कहना चाह रही थी आपसे!

शीतल- हाँ.. बोलो?

और इसी बीच शीतल से उत्तेजना की वजह से मयूरी की चूचियों पर थोड़ा ज्यादा दबाव पड़ गया और मयूरी को दर्द और आनन्द दोनों का ज्यादा एहसास हुआ, पर उसके मुँह से आहों की रूप में ये एहसास बाहर निकल गया.

मयूरी- आ.. आह… माँ..

शीतल- सॉरी बेटा… ज्यादा जोर से दबा दिया क्या मैंने?

मयूरी- नहीं माँ… बहुत अच्छा लग रहा है… ऐसे ही करो न… आह!

शीतल- ठीक है बेटा… तो तुम क्या कह रही थी?

मयूरी- माँ… आप गुस्सा तो नहीं करोगे ना…

शीतल- नहीं बेटा… आप बिना डरे अपनी बात बताओ?

मयूरी- माँ… कुछ दिनों से मेरे मन में…

शीतल- बोलो बेटा?

मयूरी- वो… मैं …

शीतल- अरे कोई बात नहीं बेटा… आप बताओ… क्या बात है… डरने की कोई जरूरत नहीं है.

मयूरी- वो कुछ दिनों से मुझे सेक्स करने का बहुत ज्यादा मन होता है…

 
कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।
 
शीतल- क्या?

मयूरी- हां माँ.. कभी-कभी तो मन करता है की किसी से भी जाकर सेक्स कर लूँ.

शीतल समझाते हुए- अच्छा…? पर इसमें घबराने या शरमाने की कोई बात नहीं है बेटा… ये सब बिल्कुल सामान्य है… इस उम्र में होता है.

मयूरी- पर मैं ये सब नहीं करना चाहती माँ… क्योंकि इससे मेरी और घर की बदनामी हो सकती है.

शीतल- बिल्कुल सही… एक छोटी से गलती का परिणाम बहुत ज्यादा बुरा हो सकता है.

मयूरी- पर मैं करू क्या माँ… मुझे चुदाई की बहुत तीव्र ईक्षा होती है कभी-कभी!

शीतल अभी भी मयूरी की विशाल और माखन जैसी मुलायम चूचियों की मालिश कर रही है- मैं समझ सकती हूँ… पर तुम्हें अपने मन पर काबू करना होगा… एक बार तुम्हारी पढ़ाई ख़त्म हो जाये फिर तुम्हारी किसी नौजवान लड़के से शादी करा देंगे… फिर जी भर के सेक्स करना… रोज़-रोज़ चुदवाना अपने पति से.

मयूरी- पर माँ… उसमें बहुत वक्त है अभी… मेरे से अब बर्दाश्त नहीं होता.

शीतल कुछ सोचते हुए- अच्छा… अगर तुमसे एकदम बर्दाश्त नहीं हो रहा तो तुम एक काम कर सकती हो!

मयूरी (ख़ुशी से)- क्या माँ?

शीतल- तुम हस्त-मैथुन कर सकती हो…

मयूरी- माँ… मुझे पता है कि हस्त-मैथुन क्या होता है… पर मैंने किया नहीं है कभी… और मुझे थोड़ा अजीब लगता है अपने हाथ से ये सब करने में…

शीतल- अरे… इसमें अजीब क्या है? सब लड़कियाँ करती हैं.

मयूरी- मतलब आप भी करती हो?

शीतल हंसती हुई- नहीं पगली… मेरे लिए तो तेरे पापा है ना… रोज़ खूब चोदते है… तो अब जरूरत ही नहीं पड़ती… लेकिन कभी कभी जब तुम्हारे पापा बाहर जाते है कुछ दिनों के लिए तब मैं अकेले में करती हूँ.

मयूरी- ओ… पर माँ… मुझे तो ये अजीब लगता है बिल्कुल… मतलब अपने हाथ से… कैसे?

शीतल- अरे… आसान है… जब सेक्स का बहुत मन कर रहा हो तो अपनी एक या दो उंगली अपनी चूत में डाल लो… फिर उसको अंदर-बाहर करते रहो… बहुत मजा आता है.

मयूरी- आप मुझे सिखा सकती हो प्लीज?

शीतल- मैं तुम्हें… कैसे??
 
फिर शीतल कुछ सोचते हुए बोली- अच्छा ठीक है… अपनी टाँगे चौड़ी कर के फैलाओ… और मुझे अपनी चूत दिखाओ.

मयूरी- ठीक है!

और मयूरी ने अपनी टाँगें फैला दी, नंगी तो वो पहले से ही थी.

शीतल थोड़ा नीचे सरक गयी जिससे वो मयूरी की चूत को अच्छे से देख पाए. फिर वो अपना एक हाथ उसके गुलाबी सी चूत पर फेरती है. मयूरी के मुँह से सिसकारियां निकलने लगती है.

मयूरी- आ… आह… माँ…

शीतल- क्यूँ … मजा आ रहा है?

मयूरी- हाँ माँ… बहुत अच्छा लग रहा है.

शीतल अपनी जवान बेटी की इस खूबसूरत चूत को देखकर अपने अंदर की चुदास की पनप को और तीव्र होता हुआ महसूस कर रही होती है. उसको समझ नहीं आता कि किसी औरत के जिस्म को देखकर उसको ऐसा क्यूँ महसूस हो रहा है. ऐसी भावना उसके मन में पहली बार जन्म ले रही थी इसलिए उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था.

वो बड़े गौर से मयूरी की चूत का निरीक्षण करती है और अपना हाथ उस पर बड़े प्यार से फेरते हुए बोली- मयूरी…

मयूरी- ह.. हाँ… माँ… आह…

शीतल- तुम्हारी चूत तो बहुत खूबसूरत है… एकदम गुलाबी… टाइट… रसीली…

मयूरी- तुम्हें अच्छी लगी माँ?

शीतल- हाँ बेटा… जी करता है कि इसको चूम लूँ.

मयूरी- आह… माँ… तो आपको रोका किसने है… चूम लो… चाट लो… जो करना है वो करो… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.

शीतल- सच बेटी?

मयूरी- हाँ माँ… आप जो चाहो वो कर सकती हो.

और ऐसा कहते हुए मयूरी ने अपने हाथ अपनी माँ शीतल की गर्दन पर रखे और वो उसके चेहरे को अपनी चूत पर झुका कर दबा दिया. शीतल को तो जैसे इस वक्त यही चाहिए था, वो अपने होंठों से मयूरी की चूत को प्यार करने लगी. पहले तो उसने उसकी चूत की कली को चूमा, फिर अपनी जबान से उसको चाटने लगी. फिर थोड़ी ही देर में वो अपनी जबान मयूरी की चूत के अंदर डालकर कुछ कलाबाजियां दिखाने लगी.

मयूरी के लिए ये नया नहीं था, वो पहले भी कई बार अपनी चूत अपने दोनों भाइयों से चटवा चुकी थी पर एक औरत के होंठों और जबान की बात ही अलग होती है और विशेष रूप से अपनी सगी माँ आपकी चूत चाट रही हो तो उसकी बात ही थोड़ी अलग होती है. उसको अभी कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था अपनी चूत चटवाने में.

 
खैर, मयूरी की सिसकारियों की आवाज़ अब और तेज़ हो गयी और उसकी तेज़ आहों और सिसकारियों की आवाज़ से शीतल को और जोश मिल रहा था उसे अपनी बेटी की चूत चाटने में. यह उसके लिए पहली बार था जब वो किसी औरत का चूत चाट रही थी, लंड तो वो कई बार चूस चुकी थी अपने पति का … पर यह अहसास थोड़ा अलग था और इसी वजह से उसको कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था.

उत्तेजना के कारण मयूरी अपनी माँ का मुँह अपने हाथ से अपनी चूत पर जोर जोर से दबा दे रही थी जिससे शीतल को कभी कभी साँस लेने में थोड़ी दिक्कत भी हो रही थी पर इस समय वो दोनों कुछ भी कर गुजरने को बिल्कुल तैयार थे. थोड़ी देर मयूरी की रसीली चूत को चाटने के बाद, अब तक मयूरी की चूत ने 3-4 बार पानी छोड़ दिया था और उसकी माँ ने उसकी चूत के पानी का एक-एक बून्द अपनी होंठों और जबान से चाट-चाट कर साफ किया.

अब शीतल ने अपनी बीच की उंगली मयूरी के चूत में डाल दी और मयूरी की चूत पहले से ही गीली होने की वजह से वो आराम से सरसराते हुए अंदर चली गयी. हालाँकि शीतल को उसकी चूत के टाइट होने का अहसास तब भी होता है.

मयूरी अचानक से चिहुंक सी गयी और इसी बीच शीतल अपने हाथ को आगे-पीछे करके मयूरी की चूत को चोदने लगी.

शीतल ने जोश में अब अपने हाथ को मयूरी की चूत में अंदर-बाहर करने की रफ़्तार को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया, मयूरी की सिसकारियां अब बहुत ही ज्यादा तेज़ हो गयी- आ… ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह… माँ…

शीतल पूरे जोश में जोर से चिल्ला कर- मजा आ रहा है बेटी?

मयूरी- हाँ… माँ… बहुत मजा आ रहा है… आह… ह… और जोर से… करो माँ… आह… ऐसे ही… आ… बहुत मजा आ रहा है माँ… आ… ह…

शीतल अपनी बेटी को बहुत देर तक अपने हाथों से चोदती रही… फिर जबउसकी चूत से ढेर सारा पानी बाहर निकला, तब उसकी चूत का निकला हुआ पानी वो उसी के मुँह में डाल कर बोली- ले बेटा… अपनी चूत का पानी का स्वाद चख… बहुत मस्त है… मैंने इतनी देर में बहुत सारा पिया है ये स्वादिष्ट पानी!

मयूरी ने भी पूरे जोश में अपनी माँ के आदेश का पालन किया और वो सारा पानी चाट गयी.

अपनी माँ के द्वारा अपनी चूत-चटाई और उंगली से चुदाई के बाद मयूरी को अब अपनी योजना बहुत हद तक तो सफल होते हुए नज़र आ रही थी. पर वो इसके पहले की अपनी माँ के साथ अपने बेटों से चुदवाने की बात करे, वो पूरी तरह आश्वस्त हो जाना चाहती थी. इसलिए उसने इस माँ-बेटी के बीच का अनूठा प्यार को और आगे बढ़ाने की बात सोची.

उसने अपना अगली चल चली- माँ…

शीतल- हाँ बेटा?

मयूरी- अ… वो.. क्या मैं… मैं भी आपकी चूत…

शीतल- हाँ बेटा… बिल्कुल… मुझे बहुत ख़ुशी हुई यह बात जानकर कि तुम मेरा चूत चाटना चाहती हो.

मयूरी- तो आप अपने कपड़े उतार दो ना…

शीतल- जरूर…

और शीतल ने अपनी नाइटी उतार फेंकी और उसके साथ ही साथ उसने अपनी काले रंग की ब्रा और पैंटी भी फटाफट से उतार दी जैसे उसको अपनी बेटी से चूत चटवाने की कुछ ज्यादा ही जल्दी हो.

अब वो अपनी नंगी जवान बेटी के सामने खुद भी बिल्कुल नंगी थी.

 
मयूरी ने अपनी नंगी माँ को बड़े गौर से देखा और उसके शरीर का निरीक्षण करने लगी. शीतल की उम्र के मुताबिक उसका शरीर बहुत ही ज्यादा जवान और हसीं था. चूचियां बिना ब्रा के भी बड़ी और खड़ी थीं, कमर एकदम पतली और गांड मयूरी की तरह ही बड़ी-बड़ी थी. शीतल बहुत गोरी थी और बिना कपड़ों के वो किसी हीरोइन से कम नहीं लगती थी. शायद यही वजह थी कि अशोक आज भी उसके प्यार में पागल था.

मयूरी ने अपनी नंगी माँ को अपनी तरफ जोर से खींचा और अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ दिए. फिर दोनों माँ-बेटी में चुम्बन का एक लम्बा दौर चला… दोनों औरतें जैसे एक-दूसरे को या तो खा जाना चाह रही थीं या एक-दूसरे में जैसे समा जाना चाहती थी.

शीतल ने अपने चुम्बन का अनुभव दिखाया और अपनी जबान मयूरी के मुँह एक अंदर डाल कर कलाबाजियां करने में लग गयी.

दोनों ही औरतें एक दूसरी को चूमने के साथ साथ अपने एक एक हाथ से एक दूसरी की एक एक चूची को मसलने और एक हाथ से एक दूसरे की मुलायम गांड का जायजा लेने में भी उतना ही व्यस्त थी जितना उनके होंठ और जबान चुंबन के उस प्रगाढ़ दौर में व्यस्त थे.

फिर थोड़ी देर और इसी अवस्था में एक दूसरे को प्रेम करने के बाद दोनों औरतों ने 69 की अवस्था अपनायी और एक दूसरे के मुँह से चूत का अभिवादन करने का कार्य शुरू हुआ. दोनों औरतों ने एक साथ एक दूसरी की चूत को चाटना और अपनी-अपनी जबान से एक दूसरी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. ज्यादा उत्तेजना की वजह से दोनों ही कभी कभी बीच बीच में अपना मुँह एक दूसरी की चूत में जोर से दबा रही थी.

कमरे में दोनों औरतों की सिसकारियां और आँहें गूंज रही थी.

दोनों का प्रेमालाप करीब बीस मिनट तक ऐसे ही चलता रहा और इतनी देर में दोनों ही माँ-बेटी कई बार झड़ गयी. इतनी देर में दोनों ने एक दूसरी के शरीर के लगभग हर अंग को चाट और चूम लिया था, दोनों ने एक दूसरी की गांड का भी स्वाद ले लिया था और दोनों माँ बेटी के बीच कायम हुए इस नए रिश्ते से काफी खुश लग रही थी.

परन्तु इतनी देर तक लगातार प्रेमलाप के बाद दोनों पसीने-पसीने हो गयी थी और बहुत ही जोर जोर से हांफ रही थी. दोनों की सांस चढ़ी हुई थी और दोनों ही काफी थक चुकी थी.

अब दोनों माँ बेटी थोड़ा आराम करने के मूड से बिस्तर पर लेट गयी और एक दूसरे को बड़े प्यार से देखने लगी. अभी भी दोनों का एक एक पैर एक दूसरे में गुंथा हुआ था और हाथ एक दूसरी की चूचियों को धीरे-धीरे सहला रहे थे.

थोड़ी देर आराम करने के बाद जब दोनों की सांसें थोड़ी धीमी हुई तो मयूरी ने बातचीत शुरू की- माँ!

शीतल- हाँ?

मयूरी- थैंक्स माँ… मुझे बहुत मजा आया… आपके साथ ये करके!

शीतल- मुझे भी बहुत मजा आया बेटा… किसी लड़की या औरत के साथ मेरा भी ये सेक्स का पहले अनुभव था… पर तुम बहुत कमाल की हो… पता है, तुम जिस भी आदमी को पत्नी के रूप में मिलोगी, तुम्हारा ये शरीर पाकर वो आदमी धन्य हो जायेगा.

मयूरी- थैंक्स माँ… पर पता नहीं वो दिन कब आएगा जब मुझे कोई आदमी अपने लंड से चोदेगा… आप तो बहुत भाग्यशाली हो माँ जो आपको पापा का लंड रोज़ मिलता है… मैंने आप दोनों को चुदाई करते हुए कई बार देखा है.

शीतल (आश्चर्य से)- क्या…? सच में?

मयूरी- हाँ माँ… कई बार तो पापा आपकी गांड भी मारते है… और आप बड़े मजे से अपनी गांड में उनका लंड लेकर उछल-उछल कर चुदवाती हो… सब देखा है मैंने…

शीतल (हँसते हुए)- तो तेरा मन उस समय क्या करने का होता है?

मयूरी- मेरा तो मन करता है कि मैं झट से जाकर पापा का लंड अपने मुँह में लेकर पहले तो जोर-जोर से चूस लूँ… फिर अपनी चूत में डालकर खूब चुदुँ.

शीतल (हैरानी से)- मतलब तुझे अपने बाप से के लंड से चुदने का मन करता है?

मयूरी- मेरा तो मन किसी भी मर्द के लंड से चुदने का करता है माँ… फिर चाहे वो कोई भी हो अपना बाप या कोई और मर्द… और वैसे भी, दुनिया के हर लड़की का पहला प्यार उसका बाप होता है… जैसे दुनिया के हर लड़के का पहला प्यार उसकी माँ होती है.

शीतल- हे भगवन… ये तू क्या कह रही है?

मयूरी- सच तो कह रही हूँ माँ…

शीतल- अच्छा? तुझे कैसे पता?

मयूरी- मैंने आपके दोनों बेटों को आपस में बात करते सुना है.

शीतल (उत्सुकता से)- क्या सुना है?

मयूरी- रहने दो… आप यकीन नहीं करोगी!

शीतल- अरे तुम बोलो तो… मैं पक्का यकीन करुँगी.

मयूरी- दोनों भाई आपको एक साथ चोदना चाहते हैं.

शीतल- क्या?

मयूरी- हाँ… जैसे मैंने आपको पापा से चुदते हुए देखा है वैसे उन दोनों ने भी कई बार देखा है और उन्होंने आपको पापा से गांड मरवाते हुए भी देखा है.

शीतल- अच्छा?
 
मयूरी- हाँ… और इसीलिए दोनों आपको एक साथ चोदना चाहते हैं… एक आपकी गांड में और एक आपकी चूत में लंड डालकर आपको चोदना चाहते हैं.

शीतल- क्या बात कर रही है?

मयूरी- और नहीं तो क्या? और तो और… वो दोनों… खैर छोड़ो.

शीतल- अरे और क्या?

मयूरी- छोड़ो न…

शीतल (उत्सुकता से)- अरे बता ना… और क्या?

मयूरी- दोनों आपकी पैंटी और ब्रा को हाथ में लेकर अक्सर मुठ मारा करते है… वो भी एक साथ!

शीतल- क्या… तू सच कह रही है?

मयूरी- और नहीं तो क्या? आपके दोनों बेटे आपके सब से बड़े आशिक़ हैं.

शीतल- मुझे यकीन नहीं होता… मुझे तो आजतक ऐसा नहीं लगा?

मयूरी- मैंने तो पहले ही कहा था कि आप यकीन नहीं करोगी.

शीतल- अरे वो बात नहीं है… पर उन दोनों ने तेरे सामने मेरे बारे में ऐसी बातें की?

मयूरी- हाँ… जब मैं सो जाती हूँ तो वो ऐसी बातें करते है… पर कई बार मैं सो रही होती हूँ और उनको ग़लतफहमी हो जाती है कि मैं सो चुकी हूँ और वो अपनी सीक्रेट बातें करने लगते हैं… मैं तो बस चुपचाप सुनकर मजे लेती हूँ… इसमें उनकी कोई गलती थोड़ी है… आप हो ही इतनी खूबसूरत… एकदम मॉल जैसी… आप तीन जवान बच्चों की माँ हो पर लगती हो पच्चीस साल की लड़की जैसी.

शीतल- अच्छा…

मयूरी- अच्छा माँ?

शीतल- हाँ?

मयूरी- एक बात पूछूं?

शीतल- हाँ पूछो.

मयूरी- आप बुरा तो नहीं मानोगी?

शीतल- अरे… तेरे साथ नंगी पड़ी हूँ… अभी तेरी चूत चाटी है… किस बात से डर रही है? बता न… कुछ बुरा नहीं मानूंगी.

मयूरी- आप इतने साल से पापा से चुद रही हो? आपका किसी और मर्द के साथ कोई चुदाई वाला रिश्ता रहा है क्या?

शीतल- मतलब?

मयूरी- मतलब क्या अपने किसी और आदमी का लंड अपने चूत में लिया है कभी?

शीतल- नहीं… कभी किसी और मर्द से तो नहीं चुदवाया… पर…

मयूरी- पर क्या माँ?

शीतल- तुम्हें बता देती हूँ… कभी कभी मन करता है कि किसी और लंड का स्वाद लिया जाये… मतलब किसी और को जी भर के चूमूँ, उसे प्यार करूँ, उसका लंड चूसूँ! उससे अपनी चूत चटवा कर खूब मजे लूँ… फिर बहुत देर तक अलग अलग अवस्था में चुदवा कर मजे लूँ… ऐसा नहीं है कि तेरे पापा ठीक से नहीं चोदते… वो अब भी किसी बांके जवान लड़के की तरह मस्त चोदू आदमी हैं. और मुझे हर बार संतुष्ट भी करते हैं. पर एक ही लंड से चुदवाकर थोड़ी बोर हो गई हूँ बस… पर इस उम्र में अगर किसी और मर्द के साथ ऐसा करती हूँ तो बदनामी का बहुत ज्यादा डर रहता है. और साथ साथ में अब परिवार की इज्जत की भी बात होती है.

मयूरी- हुम्म्म… मैं समझ सकती हूँ.

 
फिर थोड़ी देर तक कमरे में बिल्कुल सन्नाटा सा छाया रहा, दोनों औरतें कुछ सोचने लगी कि अचानक मयूरी को जैसे कुछ आईडिया सूझा

मयूरी- माँ… एक आईडिया है…

शीतल- कैसा आईडिया?

मयूरी- आईडिया ऐसा है कि आप अगर चाहो तो आपको नया लंड भी मिलेगा और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा.

शीतल मुस्कुराते हुए- अच्छा? बता चल… क्या आईडिया आया है तेरे दिमाग में?

मयूरी- देखो… आपकी बात सही है… अगर आप घर के बाहर किसी भी मर्द से चक्कर चलाते हो तो बदनामी तो होगी.

शीतल- बिल्कुल सही… यही मैंने भी कहा… तो इसमें आईडिया कहाँ है?

मयूरी- अरे पूरी बात तो सुनो?

शीतल- अच्छा बताओ…

मयूरी- पर अगर आपको घर में लंड मिल जाये तो बहार किसी को क्या पता चलेगा?

शीतल- मतलब?

मयूरी- माँ… आप बहुत भोली हो… देखो… अगर आपको विक्रम भैया और रजत में कोई या दोनों चोदते हैं तो?

शीतल- तू पागल है क्या? वो मेरे अपने बेटे हैं… उनको अपने कोख से पैदा किया है मैंने… अपने इन चूचियों से दूध पिलाकर बड़ा किया है मैंने…

मयूरी- माँ… आप एक बार पूरी बात तो सुनो… मैं मानती हूँ ये सारी बात … पर इन सब चीज़ों से क्या फर्क पड़ता है… ये सब तो दुनिया को दिखाने वाली बात होती है बस… और आपने उन दोनों को इसी चूत से पैदा किया है… अब उन दोनों को इसी चूत को मजे देकर सेवा करने की बारी है… इन चूचियों का दूध पीकर बड़े हुए हैं दोनों… बड़े होकर फिर से अगर इन चूचियों से अगर दूध पिएंगे तो क्या नया हो जायेगा.

शीतल थोड़ा हकलाते हुए- त… तू… तुम…

शीतल के ऐसे हकलाने से मयूरी को अपनी बातों का प्रभाव दिखना शुरू हो गया, उसको यकीन होने लगा कि माँ अब अपने बेटों से चुदने को तैयार हो रही है, बस थोड़ा और जोर देने की जरूरत है. उसने अपनी एक उंगली अपनी माँ के चूत में डाली… जिससे उसकी हवस की आग तो थोड़ी और हवा लगे और वो भड़के.
 
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